Morning walk : हाल ही में सुबह 5:15 बजे जब अंधेरा अभी पूरी तरह हटा नहीं था, दिल्ली
में द्वारका मोड़ में रहने वाली काजल कुमारी (26) अपनी पड़ोसी नूरजहां परवीन
(28) के साथ मौर्निंग वौक के लिए निकली थीं सडक़ पार करते समय द्वारका मोड़
की तरफ से आई एक तेज रफ्तार कार ने दोनों को जोरदार टक्कर मार दी.
नूरजहां के सिर में गंभीर चोट आई और काजल के पैर और माथे पर भी चोट
लगी. कार से उतरे 2 युवक उन्हें अस्पताल ले गए. पुलिस ने मामला दर्ज कर
लिया और कार जब्त कर ली. सवाल ये है कि गलती किसकी थी? लड़कियों की जो
वौक पर निकलीं या उस ड्राइवर की जो सुबहसुबह रफ्तार से उड़ रहा था?
क्या मौर्निंग वौक भी सुरक्षित नहीं रहा
पहले सुबह 5 बजे का समय सबसे सुरक्षित माना जाता था. ठंडी हवा, खाली
सडक़ और शांति. आज यह समय भी खतरनाक हो गया है. तेज रफ्तार, नशे में
ड्राइविंग, मोबाइल पर बात करते ड्राइवर. लड़कियों को कहा जाना हैं वौक पर जाओ
ताकि सेहतमंद रहो. पर सडक़ पर निकलने के बाद गारंटी नहीं कि वो वापस घर
आएगी भी या नहीं. इन्हें हादसे के बाद मदद करने वाले मिल गए पर हमेशा ऐसा
नहीं होता. आजकल कितने ही केस सुनने में आते हैं जब वौक के लिए गए को
कभी गाड़ी ने टक्कर मार दी तो कभी कुत्ते ने नोच डाला.
जरूरी है कुछ सावधानियां
- समूह में निकलें का नियम : अकेले वौक पर मत जाइए. कम से कम 3-
4 लोग साथ हों. अंधेरे में रिफ्लेक्टर वाली जैकेट या पट्टी जरूर पहनें. - सडक़ नहीं पार्क चुनें : मेन रोड, कालेज के पास, हाईवे वाली सडक़ पर
वौक अवौइड करें. सोसाइटी पार्क, बंद गली या ट्रैक ही सुरक्षित है. सुबह 5:15 नहीं
बल्कि 6: 30 के बाद निकलें जब पूरी रोशनी हो जाए.
3. घर में बता कर जाएं : कहां जा रही हैं, कितनी देर में आएंगी, किस के
साथ हैं – ये लोकेशन शेयर करके जाएं. फोन फुल चार्ज और हाथ में रखें. - मोबाइल जेब में रखें हाथ में नहीं : सडक़ पार करते समय फोन नहीं
आंखें और कान खोलकर चलिए. रास्ते में मोबाइल देखते हुए चलने की आदत छोड़
दीजिए. कुछ लोग गाने और अंधभक्त कान में ईयरबड लगाए भज सुनते रहते हैं.
ये जान लेवा है. - कुत्तों से बचाव : कुत्तों से बचने के लिए हाथों में एक लाठी या कुछ और
छोटी मोटी चीज रखिए.
