महानगरों में वक्त की कमी के कारण मांबाप अपने बच्चों को हरी सब्जियों, फल, दूध, अनाज का भोजन देने के बजाय फास्टफूड की ओर धकेल रहे हैं, जिस के चलते उन के शरीर में न सिर्फ अतिरिक्त चरबी जमा हो रही है, बल्कि वे कई तरह की बीमारियों की चपेट में भी हैं. अपौष्टिक खाना उन के अंदर जहां आलस्य को बढ़ा रहा है, वहीं वे उम्र से पहले ही परिपक्व भी हो रहे हैं. मोटापे या स्थूलता से ग्रस्त बच्चों में पहली समस्या यही है कि वे भावुक और मनोवैज्ञानिक रूप से समस्याग्रस्त हो जाते हैं. उन की सोचनेसमझने की शक्ति क्षीण होती है. वे बहुत ज्यादा कन्फ्यूज्ड रहते हैं.

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