Career Planning: मांबाप चाहे इंसान के हों या पशुपक्षी के, वे अपने बच्चों को हमेशा सुरक्षित देखना चाहते हैं. मगर कुछ समय बाद यही बच्चे अपने घोंसले से बाहर निकल कर पंख फैलाते हुए खुले आसमान में उड़ जाते हैं क्योंकि यही दुनिया का दस्तूर है.
जब एक मां 9 महीने अपने बच्चे को कोख में रखती है, अपने खून से सींच कर उसे बड़ा करती है तो उस बच्चे के लिए हर मां ज्यादा प्रोटैक्टिव हो जाती है. उस की सांसें, उस की धड़कनें बच्चों में समा जाती हैं. उस के बाद बच्चा भले ही कितना भी बड़ा हो जाए वह मांबाप के लिए हमेशा छोटा ही रहता है.
प्यार और सुरक्षा
मगर बच्चों के लिए ज्यादा प्यार और सुरक्षा की भावना उस वक्त चिंता का विषय बन जाती है, जब वही बच्चे अपने मांबाप की सोच से अलग कुछ नया करने की राह पर निकलते हैं जबकि मांबाप अपने बच्चों को बड़े होने के बाद भी ऐसे प्रोफेशन में डालना चाहते हैं जहां उन का भविष्य सुरक्षित हो. जैसे लगभग हर मां अपनी बेटी को टीचर के जौब में या सरकारी नौकरियों में देखना चाहती है क्योंकि उन के हिसाब से यही नौकरियां उन की बेटियों का भविष्य सुरक्षित कर सकती हैं.
