Fashion Accessories :   ‘‘वर्षा तूने ऐनिवर्सरी गिफ्ट में क्या मांगा है तुषार से?’’

‘‘मैं ने तो कुछ नहीं मांगा. वैसे तुषार बहुत समझदार है. वह जरूर डायमंड रिंग या ब्रेसलेट लाएगा.’’

‘‘क्या रिंग या ब्रेसलेट?’’

‘‘हां.’’

‘‘यार तुषार तो समझदार है लेकिन तू बहुत नासमझ.’’

‘‘क्या मतलब?’’

‘‘मतलब कि रिंग तो तेरे पास है ही. कुछ लेना था तो बैग लेती. कोई लग्जरी बैग. अपना रुतबा बढ़ा यार.’’

यह बातचीत बहुत आम बातचीत या सुझाव है उच्चवर्गीय लोगों के बीच. जहां आम वर्ग के लोग बहुत अधिक करें तो चांदी, सोना या कोई महंगा इलैक्ट्रौनिक डिवाइस जैसे आईफोन पा कर ही एक बहुत बड़ी उपलब्धि या खर्चा समझते हैं.

रिच सोसाइटी में ब्रैंडेड लग्जरी प्रोडक्ट जैसे हैंडबैग एक बड़ी उपलब्धि या स्टेटस सिंबल माना जाता है. इन ब्रैंडेड बैग्स का आप के पास होना ही आप की अपनी कीमत, आप का रुतबा समाज में और ऊंचा कर देता है. मगर ये ब्रैंड इतने महंगे होते हैं कि एक आम आदमी तो केवल दूर से देख पाता है और कुछ तो देख भी नहीं पाते.

मगर ये ब्रैंड इतने महंगे क्यों होते हैं और क्या इन का इतना महंगा होना जायज भी है और क्या इन महंगे ब्रैंडेड बैग की भविष्य में कोई मांग या कीमत रहती भी है? चलिए, इन सभी सवालों के जवाबों को तलाशते हैं:

लग्जरी ब्रैंडेड बैग की ऊंची कीमत के मुख्य कारक मैटीरियल: ब्रैंडेड लग्जरी बैग में प्रीमियम, दुर्लभ और टिकाऊ मैटीरियल का उपयोग करते है. जिन में कुछ खास नस्ल के जानवरों की खाल इस्तेमाल होती है. जैसे मगरमच्छ, अजगर आदि. इन बैग्स में उच्च श्रेणी के चमड़े, रेशम और कीमती मैटल्स से लेकर डायमंड तक शामिल होते हैं.

कारीगरी: ये बैग्स अकसर हाथ से बनाए जाते हैं या इन में उच्च कुशल कारीगरों की कला देखने को मिलती है, जिन्हें सालों का तजरबा होता है. इन बैग्स को बनाने में काफी समय और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है, जिस से ये बैग टिकाऊ और अद्वितीय बनते हैं.

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स्ट्रौंग ब्रैंडिंग ऐंड मार्केटिंग: विज्ञापन, रैंप शो और सैलिब्रिटी ऐंडोर्समैंट में भरी खर्चा कर ब्रैंड की छवि और मजबूत व आकर्षित बनाई जाती है, जिस से उच्च कीमत को जायज ठहराया जा सकता है.

यूनिक डिजाइन और सीमित सप्लाई: बैग्स की विशेषता और सीमित सप्लाई से इन की मांग ऊंची हो जाती है. जैसाकि हर्मीस बिर्किन बैग्स के साथ होता है. इन की सीमित सप्लाई हमेशा इन की मांग बनाए रखती है. ग्राहक को कई महीनों पहले बुकिंग के द्वारा बैग मिलते हैं और कुछ बैग्स का मिलना तो इतना दुर्लभ होता है कि उसन का पुराना पीस भी वर्तमान में नीलामी द्वारा उस की औरिजिनल कौस्ट से अधिक में बिकता है. जैसे हर्मीस हिमालयन बिर्किन बैग एक विशेष मगरमच्छ ‘निलोटीकस मगरमच्छ’ की सफेद खाल से बनते हैं. इस बैग्स में प्लैटिनम का इस्तेमाल होता है, जिस पर 200 से अधिक डायमंड जड़े होते हैं.

आइकोनिक डिजाइन: आइकोनिक डिजाइन और लंबे समय से चले आ रहे ब्रैंड की पहचान, उस की प्रतिष्ठा बैग की मांग और उस की कीमत कम नहीं होने देती जैसेकि लुई विटन का बैग नेवरफुल.

प्राफिट मार्जिन: मैटीरियल, डिजाइनिंग, क्राफ्ट्स मैनशिप, बुटीक संचालन और लौजिस्टिक्स आदि सारी लागत ले कर भी लग्जरी ब्रैंड का प्रौफिट मार्जिन 35 से 50% तक रहता है.

इनवैस्टमैंट या रसेल वैल्यू: ये ब्रैंडेड बैग्स एक इनवैस्टमैंट के तौर पर भी काम करते हैं. इन की क्वालिटी इतनी मजबूत और टिकाऊ होती है कि दशकों तक इन की एक चेन तक खराब नहीं होती और कुछ बैग तो ऐसे होते हैं, जिन की कीमत समय बीतने के साथ और बढ़ जाती है. उन की रिसेल वैल्यू, उन की असली यानी पहली कौस्ट से अधिक होती है.

ब्रैंडेड बैग का पास होना आप को एक कौन्फिडैंस देता है, पावरफुल फीलिंग देता है. आप खुद को एक आइकोन होने, दुनिया के बीच दूर से पहचाने जाने का, नोटिस होने का रोब महसूस करते हैं, साथ ही यह इस मानसिकता को भी पूरा करता है, जहां एक ग्राहक यह फील करता है कि वह उस ने एक आइकोनिक बैग खरीदा नहीं बल्कि हासिल किया है.

द लोगो द लिगेसी: इमोशनल अटैचमैंट के बाद बात आती है नाम की यानी लोगों की. किसी भी बैग की कीमत उस का लोगो तय करता है. आप को सेम लैदर, सेम कलर और डिजाइन के बैग मिल जाएंगे लेकिन सेम दिखने वाले हर बैग की कीमत, उस बैग पर लगा लोगो तय करता है और लोगो सिर्फ एक नाम ले कर नहीं चलता बल्कि वह अपने साथ एक पूरी लिगेसी, अपना पूरा इतिहास ले कर चलता है. जितना बड़ा इतिहास, उतना बड़ा लोगो और उतनी ही बड़ी कीमत और मांग भी.

Beatiful girl with curly hair carries a white bag with stamping

खरीदी नहीं चयन है: ब्रैंडेड बैग आम बैग की तरह खरीदे नहीं जाते, इन का चयन किया जाता है अर्थात आप गौर करे कि एक आम बैग की शौप और ब्रैंडेड बैग की शौप में कितना फर्क होता है. पहले तो ब्रांडेड बैग की शौप नहीं बुटीक या लग्जरी स्टोर होता है, जिस की बनावट से ले कर कलर, इंटीरियर, सीटिंग, लाइटिंग हर चीज एक आम शौप से अलग होने के साथसाथ यूनीक भी होती है. आम शौप में लोगों की भीड़, भाव का तोलमोल, बैगों का अंबार होता है लेकिन

एक ब्रैंडेड बैग के बुटीक में गिनेचुने ग्राहक होते हैं जो मोलभाव करने नहीं आते बल्कि कलैक्शन देखने और लेने आते हैं. यहां का वातावरण भी शांत और सुंदर होता है. बैग दीवारों पर टंगे या मेज पर रखे नहीं होते बल्कि हर बैग को बहुत सावधानी से सैल्फ पर सजा रखा जाता है जैसे कोई आर्ट पीस हो. यहां ग्राहक कोई बैग नहीं खरीदता बल्कि हैंडमेड डिजाइनर आर्ट पीस सलैक्ट करता है.

अब इन कारकों को अच्छे से समझने के लिए चलिए एक लग्जरी ब्रैंड को थोड़ा नजदीक से जानते हैं:

लुई विटन: ब्रैंडेड बैग की दुनिया लुई विटन सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि एक स्टेटस सिंबल है. वह सिंबल जिसे हरकोई अफोर्ड नहीं कर सकता. हर ब्रैंडेड बैग की तरह लुई विटन भी अपनी गुणवत्ता के लिए जाना जाता है.

लुई विटन अपने बैग बनाने के लिए अधिकतर काफ स्किन यूज करती है, जिस के लिए उन्होंने अपना काफ शैल्टर बनाया है, जहां वे स्वयं काफ पालते हैं और उन से लैदर बनाते हैं. बनाया गया लैदर, एक बहुत बड़े टैनिंग प्रोसैस से गुजरता है. जोलेदर उस टैनिंग प्रोसैस की सारी बारीकियों पर खरा उतरता है, उसे डिजाइन के लिए भेजता है. लैदर से टैनिंग का प्रोसैस इतना मुश्किल होता है कि 50% से ज्यादा लैदर उत्तम लैदर की कसौटी पर फेल हो जाता है और जब कसौटी को पार किया लैदर डिजाइन के लिए पहुंचता है तो चुनौतियां और बढ़ती जाती हैं. लैदर को एक कैनवस यानी लाइनिंग देने के लिए, हर बैग के लिए एक अगल तरह का कैनवस बनाया जाता है. जिसे बनाते समय कपड़े और रुई की मात्रा पर बहुत ध्यान दिया जाता है.

कैनवस पर किया पेंट भी एक पेपर से पतला होना चाहिए ताकि कैनवस की थिकनैस अर्थात मोटाई लैदर का वेट और उस की फ्लैक्सिबिलिटी को खराब न कर दे. हर बैग का ब्लू प्रिंट हाथ से तैयार किया जाता है. उस की कटिंग से ले कर सिलाई तक हाथ से की जाती है. हर सिलाई में धागे से ले कर सूई, सिलाई में एक छेद से दूसरे छेद की दूरी हर चीज का ध्यान रखा जाता है.

बैग में लगने वाली चेन के लिए भी एक अलग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है. बैग के कुछ पार्ट्स को सिलाई करने वाली मशीन से लिया जाता है और यह सिलाई मशीन भी कस्टमाइज मशीन होती है यानी यह मशीन सिर्फ लुई विटन के लिए ही बनाई जाती है जो आप को बाहर दुनिया की किसी मार्केट में नहीं मिलेगी.

बैग में यूज होने वाला मैटल उत्तम क्वालिटी का होता है. जैसे बैग पर लौक. यह लौक सौलिड ब्रास यानी ठोस पीतल का होता है. पूरा बैग तैयार होने के बाद उस के बौटम में मैटल के बटन लगाए जाते हैं ताकि बैग कभी जमीन से टच न करे.

बैग के जौइंट और एज को फायर हीटिंग से बंद किया जाता है, बैग की पौलिशिंग होती है और दोबारा से टैस्टिंग के लिए भेजा जाता है. जहां बैग की चेन, पौलिशिंग, मजबूती, सिलाई यानी सारे पहलुओं को फिर से चैक किया जाता है. यहां जो बैग फाइनल टैस्ट पास नहीं करते तो उन्हें वापस उन की खामियों को ठीक करने को भेजा जाता है.

इतने सारे टैस्ट के बाद बैग को क्लाथ बैग पैक किया जाता है और फिर एक बोक्स में ताकि बैग पर अपने खरीदार तक पहुंचने तक कोई भी फिंगरप्रिंट न आए.

जी हां, यह खास डिजाइनर ब्रैंड, खासकर हर्मीस, शनेल और लुई विटन जैसे प्रतिष्ठित बैग इतनी सारी कसौटियों पर अपने बैग तैयार करती हैं और इन्हीं वजहों से इन की दुर्लभता, सदाबहार डिजाइन और ब्रैंड की मजबूत प्रतिष्ठा इन की मांग और कीमत हमेशा बनाए रखती है या बढ़ा भी देती है जबकि दूसरी ओर ट्रेंडी या कम प्रतिष्ठित बैग अकसर अपने ग्राहक और मार्केट वैल्यू खो बैठते हैं.

कौन खरीदता है ये बैग? जाहिर सी बात है कि इन बैग्स के खरीदार आम आदमी तो होगा नहीं. इन बैग को बहुत अमीर लोग ही अफोर्ड कर पाते हैं.

मगर सिर्फ अमीरी ही इन बैग्स की लोकप्रियता और खरीदी तय नहीं करती. इन्हें खरीदने वाले अमीर से अधिक इन के फैन कहे तो इन के बड़े प्रशंसक होते हैं. जो बैग के रौयलब्रैंड के लिए लौयल कस्टमर की तरह नजर आते हैं. ये बैग की डिजाइन, स्टाइल, लुक्स और ब्रैंड को एक अनोखे आर्ट की तरह सराहते हैं.

कुछ मामलों में यह भी देखा जाता है कि जो व्यक्ति इन बैग्स को आसानी से अफोर्ड नहीं कर सकते वे अपनी पूरी लाइफ सेविंग करते हैं ताकि एक दिन इस बैग को खरीद सकें. यह फिर से एक फैन होने का ही उदाहरण दिखता है.

इस बैग के इतने कीमती होने के पीछे भी एक कहानी है, जो 1980 में इस की बनाई से ही जुड़ी है. दरअसल, 1980 के दशक में लोकप्रिय ऐक्ट्रैस जेन बर्किन एयर फ्रांस के प्लेन में सफर कर रही थी. इस सफर के दौरान उन का बास्केट कैबिनेट से गिर गया और सारा सामान इधरउधर बिखर गया.

जेन ने चिढ़ कर परेशानी जताई और एक बड़े उपयोगी बैग होने की बात कही जो प्लेन में बैठे हर्मीस के सीईओ जीन लुइसडुमास ने सुनी और फिर जेन के साथ बैठ कर उन की पसंद और आवश्यकता को जान कर एक बैग को डिजाइन किया जो हर्मीस के बाकी बैग से अलग था. इस बैग पर जेनबर्किन नाम के शुरुआती अक्षर जेबी अंकित थे और इस की शोल्डर स्ट्रैप हर्मीस के बाकी बैग की स्ट्रैप से अलग थी जो खास जेन के लिए डिजाइन की गई थी. साथ ही पीतल की फिटिंग भी शामिल थी.

तो पहले कही गई बात कि एक ब्रैंडेड बैग के कीमती होने की बड़ी वजह उस के पीछे का इतिहास और साइकोलौजिकल वर्थ है वह यहां बिलकुल सही बैठती है क्योंकि हर्मीस का यह बैग सिर्फ इसलिए नहीं 10 मिलियन डौलर में नीलाम हुआ कि यह एक ब्रैंडेड बैग है बल्कि यह इसलिए इतना कीमती बना क्योंकि इस के साथ एक दशक की लोकप्रिय ऐक्ट्रैस की कहानी, उस के लिए बनाया आर्ट और इतिहास व इमोशन जुड़ा है.

साथ यह बात भी सच दिखती है पुराने होने के बावजूद इन बैग्स की कीमत निम्न या साधारण बैग्स की तरह शून्य नहीं होती.

ऊंची पहचान

कुछ ऐसे विषयों या कारकों पर नजर डालते हैं जो एक लग्जरी ब्रैंड को एक प्रतिष्ठित और ऊंची पहचान बनाते हैं, जिन से इन की मांग और कीमत कभी कम नहीं होती. ब्रैंडेड बैग की मांग और कीमत हमेशा बनाए रखने का एक सब से बड़ा कारण है साइकोलौजिकल वर्थ. यहां साइकोलौजिकल वर्थ का मतलब ग्राहक की अपने आत्मसम्मान या कीमत से है. कई बार आप द्वारा धारण की या इस्तेमाल में लाई वस्तु आप की पहचान, आप के स्टेटस से जुड़ जाती है या समाज में आप की छवि दिखाती है. ब्रैंडेड बैग भी इसी तरह आप की पहचान से जुड़ जाते हैं.

दुनिया का सब से महंगा बैग

डेबी विंघम अपसाइक्ल्ड एग बैग: एक असाधारण लग्जरी फैशन का नमूना है, जिस की कीमत 6.7 मिलियन डौलर है. इस बैग को प्लैटिनम और 24 कैरेट सोने में जड़े लगभग 8 हजार चमकदार हीरों से सजाया गया है और इसे 40 हजार डालर के कार्टियर झुमकों से बांधा जाता है. साथ ही अंडे का हिस्सा असली एमू के अंडे से बना है, जिसे नीले हीरे की धूल से बने इनेमल से मजबूत किया गया है.

दुनिया के कुछ और कीमती बैग जो बीतते समय के साथ भी अपनी ऊंची कीमत बनाए रखे हैं: मौवाड की 1001 नाइट्स डायमंड प्राइज मनी- 3.8 मिलियन डौलर. द्य हर्मीस रोज गोल्ड केली बैग- 2 मिलियन डौलर.

गिंजा तनाका द्वारा डिजाइन किया गया हर्मीस बर्किन बैग- 1.9 मिलियन डौलर. द्य हर्मीस चेन डीएनक्रे बैग- 1.4 मिलियन डौलर.

लाना मार्क्स का चार्लीज थेरान क्लियोपेट्रा क्लच- 4 लाख डौलर.

हर्मीस हिमालय बिर्किन बैग (नीलोटिक्स क्रोकोडायल लैदर में)- 3 लाख 89 हजार डौलर.दुनिया का सब से बहुचर्चित और नीलामी में सबसे महंगा बिका बैग: बर्किन प्रोटोटाइप, जिसे 1980 में ऐक्ट्रैस जेन बर्किन के लिए विशेष रूप से बनाया गया था. यह जुलाई, 2025 की एक नीलामी में 10.1 मिलियन डालर में बिक कर एक रिकौर्ड सैट कर गया.

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