Gen Alpha and family stress : बच्चे  के लिए घर पहली दुनिया है. यहीं वे ‘प्यार,’ ‘सुरक्षा,’ ‘मारपीट’ और ‘सुलह’ शब्द सीखता है. जब मांबाप के बीच लगातार गालीगलौज या मारपीट होती है तो बच्चे का दिमाग 3 चीजें रजिस्टर करता है–

पहली: दुनिया असुरक्षित है. 5 साल का बच्चा लौजिक नहीं सम झता. वह सिर्फ देखता है कि घर के 2 सब से मजबूत लोग एकदूसरे को डरा रहे हैं, मारपीट कर रहे हैं. ऐसे में उसे लगता है कि अगर मम्मीपापा ही सेफ नहीं हैं तो मैं कैसे सेफ रहूंगा? उसे यह भी डर लगता है कि मम्मी या पापा को कुछ हो गया तो वह क्या करेगा. यहीं से उस के मन में इनसिक्योरिटी की फीलिंग शुरू होती है.

दूसरी: प्यार का अर्थ है दर्द. एल्फा जैननेशन बच्चे बहुत जल्दी पैटर्न पकड़ते हैं. वे अपने मम्मीपापा को एकदूसरे से प्यार करते भी देखते हैं और फिर वे उन के बीच मारपीट यानी वायलैंस भी देखते हैं. अगर हर  झगड़े के बाद 2 दिन घर में सन्नाटा रहता है और फिर गिफ्ट आता है तो वे सीखते हैं कि  झगड़ा करना नौर्मल है. आगे चल कर वे भी रिश्तों में यही दोहराते हैं.

तीसरी: उसे लगता है कि पेरैंट्स के बीच इस मारपीट की वजह वह ही है. यह सब से खतरनाक फीलिंग है. बच्चा सोचता है कि अगर मैं पैदा नहीं होता तो मम्मीपापा लड़ते नहीं. इसी सोच से कई टीनऐजर्स कहते हैं कि वे मैं शादी ही नहीं करेंगे. बच्चे ही नहीं होंगे तो  झगड़ा नहीं होगा.’’

डाइवोर्स के समय जो तकलीफ देने वाला सवाल बच्चे से पूछा जाता है वह है कि तुम किस के साथ रहोगे? कोर्ट में जब जज बच्चे से पूछता है कि बेटा किस के साथ रहना चाहोगे तो यह सवाल 8-10 साल के बच्चे के लिए मौत से कम नहीं. तब उस के दिमाग में 4 कैलकुलेशन या सोच एकसाथ चलती हैं:

फाइनैंस: ‘‘पापा के पास बड़ी गाड़ी है लेकिन मम्मी के पास टाइम है. वे हमेशा मेरी देखभाल करती हैं. पापा मु झे ज्यादा महंगी चीजें भी ला कर देते हैं मगर वे औफिस में ज्यादा बिजी रहते हैं.’’

गिल्ट: ‘‘अगर मैं ने मम्मी चुनी तो पापा दुखी होंगे और पापा को चुन लिया तो मम्मी रोने लगेंगी.’’

प्यार: ‘‘कौन मु झे ज्यादा डांटता नहीं है? पापा कभीकभी डांटते हैं मगर बहुत जोर से और मम्मी अकसर ही डांटती हैं मगर प्यार से.’’

शर्म: ‘‘स्कूल में दोस्त क्या कहेंगे कि मेरे मम्मीपापा अलगअलग रहते हैं.’’

परिणाम यह होता है कि बच्चा या तो चुप हो जाता है या जो ज्यादा दे रहा है उसे चुन लेता है और अंदर ही अंदर खुद को कोसता रहता है. उसे दोनों चाहिए होते हैं मगर किसी एक को चुनना या किसी एक के साथ रहना उसे बहुत तकलीफ देता है. इसलिए बच्चे से पसंद न पूछें. उस से यह पूछें कि वह दोनों से कैसे मिल सकता है.

एल्फा जैनरेशन पर 5 साइकोलौजिकल असर

यह जैनरेशन गूगल से जवाब ढूंढ़ लेती है पर इमोशन गूगल नहीं कर सकती. वह इमोशनली टूट जाती है और उस के मन और स्वभाव पर बहुत से नैगेटिव असर पड़ते हैं:

ट्रस्ट इशूयू: ऐसे बच्चों को शादी में विश्वास नहीं होता. वे लिवइन को प्रैफर करने लगते हैं. उन्हें लगता है कि कानूनी बंधन नहीं होगा तो छोड़ना आसान होगा. वे कमिटमैंट से डरते हैं.

ऐंगर इशूयू: घर का गुस्सा स्कूल में निकलता है. टीचर की छोटी सी बात पर रिएक्ट करना, दोस्तों से लड़ाई, हर बात पर उलटा बोलना उन का स्वभाव बन जाता है क्योंकि घर में उन्होंने यही सीखा है कि गुस्से का मतलब है ताकत.

पढ़ाई पर बुरा असर: बच्चे की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ता है. जिस का दिमाग रातभर यह सोचने में लगा हो कि आज भी मम्मीपापा लड़ेंगे क्या? तो ऐसे में वह पढ़ाई पर फोकस कैसे करेगा? बच्चे का कंसंट्रेशन टूट जाता है.

रिलेशनशिप पैटर्न: ऐसे बच्चे या तो बहुत क्लिंगी बन जाते हैं और अपने पार्टनर से यही पूछते रहते हैं कि तुम मु झे छोड़ तो नहीं दोगे न’’ या बहुत डिटैच हो जाते हैं और बातबात पर कहते हैं कि मु झे किसी की जरूरत नहीं.

सैल्फ वर्थ: बच्चे सोचने लगते हैं कि अगर उन के पेरैंट्स उन्हें साथ नहीं रख सके तो इस का मतलब वे लायक ही नहीं हैं. यह सोच उन्हें डिप्रैशन तक ले जाती है.

पेरैंट्स क्या करें

बच्चे के सामने लड़ाई न करें: आपसी मतभेद हैं तो कमरे में निबटाएं. बच्चे के सामने एकदूसरे से इज्जत से बात करें. बच्चा 10 साल बाद  झगड़े की लाइन याद नहीं रखेगा पर यह जरूर याद रखेगा कि मम्मीपापा एकदूसरे की रिस्पैक्ट करते थे.

बच्चा मैसेंजर नहीं है: ‘अपने पापा से कहना…’ यह लाइन बच्चे से मत कहिए. बच्चा डाकिया या मैसेंजर नहीं है. वह दोनों का है. आप अकेले उस पर हक जता कर पार्टनर के खिलाफ बातें न कहें और न ही अपनी फ्रस्ट्रेशन का जरीया बच्चे को बनाएं.

रूटीन न तोड़ें: डाइवोर्स के बाद भी बच्चे के स्कूल, ट्यूशन, खेल का टाइम वही रहे. स्टैबिलिटी ही बच्चे की दवा है. उसे यह महसूस न हो कि उस की जिंदगी बदल गई है या मम्मीपापा के सैपरेशन के कारण उसे सफर करना होगा.

चौइस का बो झ न डालें: ‘तुम किस के साथ रहोगे’ की जगह बोलें, ‘हम दोनों तुम से उतना ही प्यार करते हैं. हम अलग रहेंगे पर तुम्हारे पेरैंट्स हमेशा रहेंगे.’

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