Travel Tips: कोई भी जब पहली बार फ्लाइट में जाता है तो वह बहुत उत्साहित होता है. पहली बार फ्लाइट में बैठने की खुशी अलग ही होती है. सफर मजे से कट जाता है. मगर हर किसी के लिए यह सफर उतना मजेदार नहीं होता. किसीकिसी के लिए तो फ्लाइट का रैग्युलर सफर भी कई मुसीबतें ले कर आता है. लेकिन कुछ टिप्स अपना कर फ्लाइट के सफर को मजेदार बनाया जा सकता है.
जितना कम सामान उतनी मजेदार फ्लाइट
सुरुचि बच्चों के साथ केरल घूमने गई तो एक मैंबर का एक सूटकेस था. बाकी 2 ऐक्स्ट्रा थे. मतलब, 4 मैंबर और 6 लगेज. 2 छोटे सूटकेस फ्लाइट कैबिन में साथ ले कर गए. पूरे सफर में ओवरहैड रखे लगेज में से कुछ सामान निकालना और कुछ डालना चलता रहा. बच्चे कहते रहे कि ‘मम्मी यह निकाल दो, वह निकाल दो’ तो सुरुचि परेशान हो गई. तब उस ने तय किया कि कभी कहीं जाएगी तो सामान बहुत
कम रखेगी. उस ने बच्चों से भी कह दिया कि सामान कम ले जाएंगे, तभी घूमने जाएंगे वरना कहीं नहीं जाएंगे.
वामिका अपनी दोस्तों के साथ घूमने गईं तो वह अपने पर्स के बिना फ्लाइट में कोई सामान नहीं ले कर गईं. उन्होंने हैंडबैग ही बड़ा रख लिया ताकि थोड़ाबहुत खाने का और दूसरा जरूरी सामान उन्हीं के अंदर आ जाए. ऐक्स्ट्रा बैग न रखना पड़े. फ्लाइट में मजे से बातें करते हुए कब उनका सफर बीत गया, उन्हें पता ही नहीं चला.
सामान जितना कम होता है, सफर का मजा उतना ही ज्यादा आता है. फ्लाइट में तो यह और भी ज्यादा माने रखता है क्योंकि सामान जमा कराने में ही कितना टाइम लग जाता है. इसलिए हमेशा कम सामान ले कर जाएं ताकि फ्लाइट परेशानी भरी नहीं, मजेदार हो.
कैसे हों आप के कपड़े
रिशिता जब भी अपनी मौसी से मिलने दिल्ली से मुंबई जाती है तो फ्लाइट में उस का अनुभव खास अच्छा नहीं रहता. 2 घंटे की फ्लाइट उस के लिए किसी सिरदर्द से कम नहीं होती. इस का सब से बड़ा कारण है उस के कपड़े. वह हमेशा जींस पहन कर फ्लाइट में जाती है. उस का टौप भी कुछ ज्यादा ही फिट होता है. इस से उस के शरीर के अंगों को मूव करने के लिए ज्यादा जगह नहीं मिलती. लिहाजा वे अकड़ जाते हैं, जिस की वजह से उसे घुटन महसूस होती है और उस की मसल्स में सूजन आ जाती है.
आप सोच रहे होंगे कि औफिस जाते वक्त भी तो लोग 8-10 घंटे के लिए जींस और फिट टौप पहनते ही हैं तो 2 घंटे की फ्लाइट में इस से क्या परेशानी हो सकती है? लेकिन फ्लाइट ही
2 घंटे की है. उसे एअरपोर्ट तो उस से भी 2 घंटे पहले पहुंचना पड़ता है. घर से एअरपोर्ट भी दूर है, तो करीब 1 घंटा एअरपोर्ट जाने में लग जाता है. फिर मुबंई एयरपोर्ट से मौसी के घर जाने तक भी डेढ़ घंटा लगता है. तो घर से निकलने के बाद कुल मिला कर उसे 7 घंटे से ज्यादा टाइम लगता है मौसी के घर पहुंचने में और वह भी तब अगर फ्लाइट सही टाइम पर हो.
रोजाना औफिस जाना अलग बात है क्योंकि वह उस की रूटीन में शामिल है. वह उस हिसाब से डाइट भी लेती है. घर से अच्छे से ब्रेकफास्ट करके जाती है, फिर पौष्टिक लंच करती है. लेकिन जब मुंबई जाती है तो जाने की जल्दी में खानेपीने पर उतना ध्यान नहीं रहता. इस से शरीर वैसा काम नहीं करता, जितना रोज करता है. ऐनर्जी लो रहती है.
फ्लाइट 2 घंटे की हो या 10 घंटे की कंफर्टेबल कपड़े ही सही रहते हैं. थोड़ा ढीला टौप, जैगिंग या पजामा बेहतर रहता है. आजकल तो ढेरों औप्शन हैं. ऐसे पजामे बाजार में खूब मिलते हैं, जो बाहर भी पहने जा सकते हैं और काफी स्टाइलिश भी लगते हैं.
कई लोगों को लगता है कि ढीलेढाले कपड़े कहीं उन की पर्सनैलिटी न बिगाड़ दें. ऐसा नहीं है बल्कि आरामदायक कपड़े पहनने से आप कूल ही दिखेंगी.
तन्वी तो एअरपोर्ट पर फोटो खिंचवाने के लिए ऐसे कपड़े पहन कर जाती है, जिस में फोटो अच्छे आएं. इस चक्कर में कई बार वह परेशान हो जाती है लेकिन अपने लुक से सम?ाता नहीं करती. लिहाजा, उस का सफर ज्यादा अच्छा नहीं रहता. टाइट और फैशनेबल कपड़ों की वजह से वह परेशान हो जाती है. उस के लिए पूरा सफर घुटनभरा हो जाता है.
फ्लाइट लेट भी हो सकती है इसलिए जितने ज्यादा आरामदायक कपड़े होंगे, सफर उतना ही ज्यादा अच्छा रहेगा. आगे के लिए ऐनर्जी भी बची रहेगी.
पैरों पर ध्यान दें
मंदिरा को हील पहनना बहुत पसंद है. वह औफिस रोजाना हील पहन कर ही जाती है. लेकिन जब किसी मीटिंग के लिए शहर से बाहर जाना होता है तो वह ज्यादातर फ्लाइट में ही जाती है पर वह हील का मोह नहीं त्याग पाती. डैस्टिनेशन तक पहुंचतेपहुंचते पैरों में इतना दर्द हो जाता है कि दिल करता है हील उतार कर कहीं फेंक दे. पर चाह कर भी ऐसा नहीं कर पाती.
अगर मीटिंग में जाते वक्त हील पहनना जरूरी है तो उन्हें पैक कर के ले जाया जा सकता है. फ्लाइट में पहनना जरूरी नहीं है. इस से काफी परेशानी हो सकती है.
अगर कहीं घूमने जा रहे हैं तो हील की जरूरत ही नहीं है.सेफ्टी के लिहाज से भी हील पहनना ठीक नहीं है. अगर कभी कोई परेशानी आ जाए और दूर तक चलना या भागना पड़ जाए तो हील के साथ ऐसा करना मुश्किल होगा.
मगर दिव्या की अलग ही प्रौबल्म है. उसे फ्लैट चप्पल और जूतियां पहनना पसंद हैं. जब वह सिंगापुर गई तो भी फ्लैट पहन कर चली गई. एअरपोर्ट पर बहुत देर खड़ा होना पड़ा. फ्लाइट में बैठने से पहले ही उस के पैरों में दर्द हो गया. फ्लाइट में टांगों में क्रैंप आते रहे. इसलिए सिर्फ हील पहनने से ही पैरों को तकलीफ नहीं होती बल्कि फ्लैट्स भी उतने ही तकलीफदेह होते हैं क्योंकि उन के तलवे सख्त होते हैं, जिस से पैरों पर दबाव पड़ता है. इसलिए आरामदायक जूते पहनना ही सही है.
जूतों का चुनाव
जूतों का चुनाव भी देख कर करना चाहिए वरना विदिशा की तरह परेशान होना पड़ेगा. उस के जूते टाइट थे, उस ने पहले ध्यान नहीं दिया. जब एअरपोर्ट जाने के लिए निकल गई, तब उसे ध्यान आया कि उसे दूसरे जूते पहनने थे, ये तो टाइट हैं. लेकिन अगर वह घर वापस आ कर जूते बदलती तो उस की फ्लाइट मिस हो सकती थी, इसलिए वह वही टाइट जूते पहन कर चली गई. उस ने फ्लाइट में इस डर से जूते नहीं उतारे कि कहीं बाद में नहीं पहन पाई तो क्या होगा. लिहाजा, उस के पैरों में सूजन आ गई.
केवल टाइट जूतों की ही प्रौबल्म नहीं है. सख्त तले वाले जूते पहनने से भी पैरों में दर्द होगा. जूते ऐसे होने चाहिए जो मैमरी या सौफ्ट फोम वाले हों. ऐसे जूते पैरों पर प्रैशर नहीं आने देते, जिस से पैरों में दर्द नहीं होता.
लाउंज ऐक्सैस है तो पेट का खयाल रखें
कई लोगों के पास एअरपोर्ट लाउंज ऐक्सैस होती है. आपने लोगों को कहते सुना होगा कि हम तो एअरपोर्ट पर 2 रुपए में ढेर सारा खाना खाते हैं. यह बात बिलकुल सही है. वहां बस 2 रुपए ही पे करने होते हैं. लाउंज में जाने की परमिशन डैबिट या क्रैडिट कार्ड के जरीए मिलती है.
पेट की बात तो बाद में करेंगे, पहले तो यह ध्यान रखें कि आप फ्लाइट बुक होते ही अपने बैंक से पूछें कि आप के कार्ड पर लाउंज ऐक्सैस है या नहीं. आप खुद भी इंटरनेट पर चैक कर सकते हैं कि आप के कार्ड पर यह सुविधा है या नहीं. बस आप को अपने कार्ड का टाइप और नाम डालना है. उस में पता चल जाएगा कि आप को साल में कितनी लाउंज ऐक्सैस मिलती है. आजकल लगभग हर कार्ड में डोमैस्टिक फ्लाइट के लिए लाउंज ऐक्सैस मिलती है. लेकिन इंटरनैशनल फ्लाइट के लिए यह सुविधा हर कार्ड में नहीं होती.
आप पहले से पता कर लेंगे तो आप को एअरपोर्ट पर लाइन में लग कर टाइम खराब नहीं करना पड़ेगा. कई लोगों के अंदर कौंप्लैक्स भी आता है, जब लाउंज के बाहर लोग उन से कहते हैं कि उन के कार्ड पर यह सुविधा नहीं है. उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती है. हालांकि इस में शर्मिंदगी की कोई बात नहीं है.
अगर लाउंज ऐक्सैस मिलती है तो कुछ बातों का खयाल रखना जरूरी है ताकि फ्लाइट का सफर मजेदार हो. पहली बात तो यह कि वहां बहुत सारी वैरायटी में खाने और पीने की चीजें होती हैं. हर चीज को टेस्ट करना जरूरी नहीं है. हर खाने की तासीर अलग होती है. कई बार एक चीज दूसरी को क्रौस कर देती है. इस से पेट खराब हो सकता है. उल्टियां लग सकती हैं. डायरिया हो सकता है. इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है खासकर पीने वाली चीजों में ज्यादा खयाल रखें क्योंकि कुछ गलत पी लिया तो उस का असर तुरंत होगा और ज्यादा होगा. वैसे भी पार्टी में तो आए नहीं हैं. सफर पर जा रहे हैं तो पेट का खयाल रखना बेहद जरूरी है.
निशि ने एअरपोर्ट लाउंज में गलती से अल्कोहल वाली बियर पी ली जिसे वह अकसर नहीं पीती थी. फ्लाइट में बैठने तक उसे नशा चढ़ चुका था. फ्लाइट में उसे कोई होश ही नहीं था कि वह कहां पर है. जब फ्लाइट लैंड हुई तो उसे थोड़ा होश आया. वह जल्दीजल्दी अपना सामान समेटने लगी. उस के पर्स में से कुछ पैसे और जरूरी सामान गिर गया. वह तो एयरलाइंस के स्टाफ ने फुरती दिखाई और उस का सामान उसे तुरंत मिल गया. इसलिए अल्कोहल वाली चीजों से परहेज रखें. फ्लाइट में नशा कर के जाना सेफ्टी के लिहाज से ठीक नहीं है.
फ्लाइट का खाना बिगाड़ सकता है खेल
सांदली काम के सिलसिले में अकसर फ्लाइट से जाती रहती है. लेकिन हर बार उसे फ्लाइट में काफी परेशानी उठानी पड़ती है. उसे उलटियां लग जाती हैं. पूरा सफर उस के लिए मुसीबत से कम नहीं होता. उस की मम्मी उसे बारबार हिदायतें देती हैं कि फ्लाइट का खाना मत खाना. एक बार मम्मी ने घर से पोहा बना कर भी दे दिया लेकिन उस ने वह खाया ही नहीं. फ्लाइट का खाना खा कर अकसर उस का पेट खराब होता है पर वह इस बात को नहीं मानती.
उसे लगता है कि फ्लाइट उस के लिए सही नहीं है. मतलब वह फ्लाइट को खुद के लिए अनलकी मानती है. जब ज्यादा बार ऐसा होने लगा तो उस ने डाक्टर से पूरा चैकअप करवाया. तब जा कर उसे सम?ा आया कि फ्लाइट का खाना उस के लिए ठीक नहीं है. अब वह फ्लाइट से जाती है तो घर से कुछ न कुछ बना कर ले जाती है जैसे पोहा, नमकीन सेवइयां, कोई पुडिंग वगैरह. अब सफर मजे से कटता है.
फ्लाइट का खाना सब लोगों को हजम नहीं होता. वह खाना फ्लाइट में तो बनता नहीं है. बहुत पहले बना हुआ होता है. पैक हो कर आता है. आप उसे हैल्दी बिलकुल नहीं मान सकते.
बस पेट भरने के लिए ठीक है. डोमैस्टिक फ्लाइट में न भी खाएं तो चलेगा क्योंकि ज्यादातर 1-2 या 3 घंटे की फ्लाइट होती है. घर से खाकर चलें और हलकाफुलका साथ में ले जाएं तो पेट भर जाएगा. हां, इंटरनैशनल फ्लाइट लंबी होती हैं तो ऐसे में खाना पड़ता है.
लेकिन नव्या तब भी फ्लाइट का खाना नहीं खाती. अमेरिका जाते वक्त भी जहां लंबी फ्लाइट होती है. वह घर से मखाने भून कर ले जाती है. थोड़ा और ड्राईफ्रूट भून कर उस में मसाला डाल कर पैक कर लेती है. मट्ठी और लड्डू रख लेती है. पूरे सफर में उसी से पेट भर जाता है. हां, कौफी जरूर पी लेती है क्योंकि उस के साथ लड्डू, मठरी आराम से खाए जाते हैं.
कुछ लोगों को लगता है कि अगर वे घर से खाना बना कर ले जाएंगे तो उन्हें ओल्ड स्कूल या पुरातनपंथी माना जाएगा. एअर होस्टेस, फ्लाइट में बैठे दूसरे लोग, उन को गांव वाला समझ लेंगे. लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है. किसी को कोई मतलब नहीं कि आप क्या खा रहे हैं क्यों खा रहे हैं.
कुछ लोगों को फ्लाइट के खाने का स्वाद चखना होता है. उन को अनुभव लेना होता है कि फ्लाइट का खाना कैसा है, किस तरह से खाया जाता है. ऐसा आमतौर पर पहली बार फ्लाइट में जाने वाले लोगों को महसूस होता है. वह ठीक है. ऐसे अनुभव करने भी चाहिए वरना चीजों का पता नहीं चलता. खाने पर इतना सारा पैसा खर्च किया है, यह सोच कर कुछ लोग अच्छा न लगने पर भी उसे जबरदस्ती खाते हैं. ऐसा करना फ्लाइट का पूरा सफर खराब कर सकता है. इस से बचना चाहिए.
कई लोग केवल दिखावे के लिए फ्लाइट में खाना खाते हैं. उन को लगता है कि अगर उन्होंने खाना नहीं खाया तो उन को कंजूस या गरीब सम?ा जाएगा. ऐसा करने की जरूरत नहीं है. किसी के पास इतना वक्त नहीं कि फ्लाइट में दूसरे लोगों को जज करते फिरें. खाना हजम हो जाए और खाने की जरूरत हो तो खाना लेने में कोई बुराई नहीं है लेकिन अगर सांदली की तरह खाना नहीं पचता है तो फिर इसे एक ट्रैडिशन न बनाएं कि फ्लाइट का खाना लेना ही पड़ेगा.
अल्कोहल लेते हैं तो सावधान रहें. कुछ साल पहले ऐसे कई किस्से हुए थे कि किसी ने फ्लाइट में शराब के नशे में दूसरों पर यूरिन पास कर दिया. किसी ने कोई और गलत हरकत कर दी. फ्लाइट में शराब की परमिशन है लेकिन इस का मतलब यह नहीं कि शराबी ही बन जाएं. लिमिट में लेना सही है. इस से ज्यादा लेंगे और खुद को न संभाल पाए तो जेल जाना पड़ सकता है. इस मामले में सख्त कानून होते हैं. फ्लाइट के अंदर जरा सी भी गलत हरकत लोगों को ‘नो फ्लाइट जोन’ में पहुंचा देती है. मतलब 1 या 2 साल के लिए या लाइफ में कभी फ्लाइट में सफर नहीं कर सकते. ऐसा कई लोगों के साथ हो चुका है.
वाशरूम जाते वक्त रिहाना जब फ्लाइट में गई तो उसे वाशरूम जाना पड़ा. लेकिन उस ने फ्लाइट में ज्यादा सफर नहीं किया था. कितनी देर तक तो उस ने खुद को रोक रखा पर जब सहन नहीं हुआ तो वह धीरेधीरे उठ कर गई. वाशरूम यूज कर के हाथ धोने लगी तो वाशबेसिन में से पानी ड्रेन नहीं हुआ. उसे समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा है. उसे लगा शायद उस से कोई गलती हो गई है. कितनी ही देर तक वह इंतजार करती रही कि पानी ड्रेन हो जाए. उसे काफी देर लगी तो बाहर से एअर होस्टेस की आवाज आई, ‘‘मैडम आप ठीक हैं?’’ तब उसे लगा कि उसे बाहर चले जाना चाहिए. बाहर आई तो एअर होस्टेस ने फिर उस की खैरियत पूछी. तब उस ने बताया कि पानी ड्रेन नहीं हो रहा है. एअर होस्टेस ने कहा कि वह अभी चैक करती है.
कई लोग ऐसे होते हैं जो रिहाना की तरह कौप्लैक्स में रहते हैं. उन को लगता है कि उन से कुछ गलत न हो जाए. डरतेडरते जैसेतैसे कर के फ्लाइट का सफर तय करते हैं. मगर यह ठीक नहीं है. आप ने फ्लाइट टिकट के पैसे दिए हैं. वाशरूम के संबंध में या किसी और चीज के बार में कुछ सम?ा नहीं आ रहा हो तो पूछने में कोई बुराई नहीं है. इस डर से कि हमें तो कुछ पता नहीं है, यूरिन को रोकना ठीक नहीं है. यह हैल्थ के लिहाज से काफी नुकसानदेह हो सकता है या अगर पूछेंगे तो लोग सम?ोंगे कि इसे तो कुछ भी पता नहीं है.
अगर नहीं पता है तो नहीं पता है. इस में शरमाने या घबराने की कोई बात ही नहीं है. सबकुछ किसी को हर कुछ नहीं पता होता. हर किसी के साथ कभी न कभी ऐसा होता है. इसलिए डरने, घबराने या हीनभावना रखने की जरूरत बिलकुल नहीं है. जो समझ न आए, खुल कर उस के बारे में पूछें.
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