आमतौर पर हम हिंदुस्तानी किसी भी मामले में सबसे पहले और सबसे ज्यादा नकारात्मक बातें सुनते हैं. औनलाइन गेम्स, वर्चुअल गेम्स या वीडियो गेम्स के संबंध में भी यही सच है. जिस किसी भी से बात करिए, वह इसके नुकसानों का पिटारा खोल देगा. शायद ही सौ में कोई एक दो ऐसे लोग मिलें, जिनके पास इन खेलों को लेकर कोई सकारात्मक बातें भी हों. जबकि पश्चिमी दुनिया में, जहां इन खेलों की खोज और उनमें तमाम विकास हुए हैं, वहां ऐसा नहीं है. गोकि वहां भी मनोविद और समाजशास्त्री इनकी अति और लत पर इनके नुकसानों पर प्रकाश डालते हैं. लेकिन वे स्पष्ट रूप से बताते हैं कि ये खेल कब नुकसानदायक हो जाते हैं. वरना तो ये साफ कहते हैं कि सजगता से अगर इनके साथ दो चार हुआ जाए तो ये नुकसान की बजाय, हमारे विशेषकर बच्चों के मानसिक विकास में बहुत सकारात्मक भूमिका निभाते हैं. ये तमाम खेल वास्तव में मस्तिष्क को तेज या प्रखर करते हैं. तभी तो इन्हें दिमाग की खुराक भी कहा जाता है.

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