Social media fake life : आजकल जब भी आप सोशल मीडिया खोलते हैं तो क्या देखते हैं? कोई दुबई में छुट्टियां मना रहा है, कोई ब्रैंडेड जूते पहन कर फोटोशूट करा रहा है, किसी ने अपनी शादी में ऐसी रौयल ऐंट्री ली है जैसे कोई फिल्म चल रही हो लेकिन क्या ये सब सच है?
आखिर यह फेक लाइफस्टाइल का ट्रेंड अचानक इतना क्यों बढ़ गया है लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं और इस के पीछे का मनोविज्ञान क्या है?
फेक वेडिंग: शादी या सिर्फ कंटैंट
आजकल कुछ लोग शादी सिर्फ इसलिए कर रहे हैं कि उन की इंस्टाग्राम रील वायरल हो जाए. पूरी प्लानिंग फिल्मी होती है, कपड़े डिजाइनर से लिए जाते हैं, फूलों की ऐंट्री, बौलीवुड गानों पर डांस और भी बहुत कुछ.
जैसमीन और कबीरदोनों कालेज फ्रैंड्स थे. सोशल मीडिया पर थोड़ा नाम बन चुका था. उन्होंने तय किया कि वे एक ‘फेक वैडिंग शूट’ करेंगे जिस में वे शादी की सारी रस्में निभाएंगे लेकिन असल में शादी नहीं करेंगे. पूरा खर्च 2 लाख का था और बस एक दिन का शूट था. लेकिन जब उन्होंने इंस्टाग्राम पर इसे डाला तो लोगों को लगा कि उन्होंने सच में शादी कर ली है. फौलोअर्स बढ़े, ब्रैंड डील मिली और अचानक दोनों ‘कपल इन्फ्लुएंसर’ बन गए.
ब्रैंडेड जूते, महंगे पर्स, घडि़यां आजकल हरकोई इन्हें दिखाने में लगा है, चाहे वे असली हों या नहीं. फर्स्ट कौपी, सुपर फेकया रेप्लिका जैसे शब्द अब आम हो गए हैं.
यह क्यों हो रहा है
क्योंकि सोशल मीडिया पर लाइफस्टाइल को दिखाना एक नया स्टेटस सिंबल बन चुका है. अगर आप के पास आईफोन नहीं है तो आप कूल नहीं हैं. अगर आप ने जारा, नाइक, गुच्ची नहीं पहना तो आप ट्रेंड में नहीं हो. तो लोग क्या करते हैं? उधार ले कर या नकली खरीद कर बस दिखाने के लिए चीजें ले आते हैं.
जैसेकि विक्रम ने किया. विक्रम एक छोटे शहर का लड़का, दिल्ली आ कर पढ़ाई कर रहा था. उस के पास पैसे नहीं थे लेकिन इंस्टाग्राम पर अपने दोस्तों को देख कर उसे भी ब्रैंडेड दिखना था. अत: उस ने 3,500 रुपए में नकली नाइकी के जूते लिए, 500 में लुई विट्टो की बैल्ट और पोज कर के फोटो डाल दी कि ‘वर्क हार्ड, लुक रिच.’ ‘ङ्खशह्म्द्म ॥ड्डह्म्स्र, रुशशद्म क्त्रद्बष्द्ध.’
लोगों ने तारीफ की पर उसे अंदर से पता था कि ये सब एक झूठ है. वह झूठ जो उसे रोज निभाना पड़ता था.
सोशल मीडिया और तुलना
फेक लाइफस्टाइल का सबसे बड़ा कारण है तुलना. जब आप रोजरोज दूसरों की चमकदार जिंदगी देखते हैं तो लगता है ‘मेरी लाइफ कितनी बोरिंग है.’ बस यहीं से शुरू होती है एक दौड़ कि जो दिख रहा है वैसा बनना है और अगर असल में नहीं बन पाए तो नकली सही.
कुछ आम ट्रेंड जो बढ़ा रहे हैं फेकनैस
फेक लोकेशन टैग्स (गोवा में नहीं हो, फिर भी लोकेशन गोवा).
फेक रिलेशनशिप स्टेटस (सिर्फ इंगेजमैंट रिंग के लिए कपल फोटो).
फेक स्माइल्स (अंदर से दुखी हैं लेकिन स्टोरी में लाइफ इज ब्यूटीफुल).
इस फेकनैस का मनोविज्ञान क्या है
अटैंशन की भूख: लोग चाहते हैं कि उन्हें नोटिस किया जाए. अगर असली जिंदगी में ऐसा नहीं हो रहा तो वे दिखावे से यह हासिल करने की कोशिश करते हैं.
फियर औफ मिसिंग आउट (फोमो): अगर आप किसी ट्रेंड में नहीं हैं तो लगता है कि आप पीछे छूट रहे हैं. तो लोग जबरदस्ती उस ट्रेंड को पकड़ते हैं.
वैलिडेशन की आदत
‘तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो,’ ‘भई क्या लग रहे हो,’ जैसे कमैंट्स से लोगों को डोपामिन मिलता है और जब असली जिंदगी में यह नहीं मिलता, तो लोग झूठी दुनिया बना लेते हैं.
इस का असर क्या होता है
आर्थिक दबाव: लोग उधारी में जीने लगते हैं, सिर्फ दिखावे के लिए.
मैंटल हैल्थ पर असर: हर समय कुछ साबित करने की टैंशन बढ़ जाती है.
असली रिश्ते कमजोर हो जाते हैं:
क्योंकि सबकुछ नकली बन जाता है जैसे बातें, इमोशंस, दोस्ती.
दुनिया दिखावे से भरी है लेकिन सुकून सिर्फ सचाई में है. फेक लाइफस्टाइल कुछ वक्त के लिए लाइक्स, फौलोअर्स और तारीफ तो दिला सकता है लेकिन लंबे समय तक यह खुद को खो देने की प्रक्रिया है. सवाल यह नहीं है कि लोग क्या सोचेंगे सवाल यह है कि क्या आप खुद से खुश हैं?
