family story in hindi
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टीवी के पौपुलर सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) की जोड़ियां फैंस के बीच छाई रहती हैं. चाहे वह अक्षरा-नैतिक (Hina Khan- Karan Mehra) हो या कार्तिक-नायरा (Mohsin Khan- Shivangi Joshi) और या फिर अभिमन्यू और अक्षरा (Harshad Chopra-Pranali Rathod). हर जोड़ी दर्शकों के दिलों पर राज करती है. वहीं इन दिनों #AbhiRa की शादी का ट्रैक भी फैंस को काफी पसंद आ रहा है. हालांकि मेकर्स इस ट्रैक को शाही बनाने में लाखों बहा रहे हैं. इसी बीच अक्षरा का वेडिंग लुक देखकर फैंस को नायरा यानी शिवांगी जोशी की याद आ गई है. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…
अक्षरा को देख फैंस को आई नायरा की याद
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जल्द ही अक्षरा औऱ अभिमन्यू की शादी होने वाली है. वहीं दुल्हन की मंडर में एंट्री भी हो गई है, जिसके चलते सोशलमीडिया पर फोटोज वायरल हो रही है, जिसमें ब्राइडल लुक में अक्षरा एंट्री करते हुए नजर आ रही है. हालांकि अक्षरा को देखते ही फैंस को नायरा के वेडिंग लुक की याद आ गई है, जिसके चलते फैंस सोशलमीडिया पर दोनों की फोटोज का कोलाज बनाकर वायरल कर रहे हैं.
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डायमंड जड़ा है अक्षरा का लहंगा
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शाही वेडिंग की तरह इस बार मेकर्स ने अक्षरा के वेडिंग लुक पर भी काफी खर्चा किया है. दरअसल, खबरों की मानें तो अक्षरा यानी प्रणाली राठौड़ का सीरियल में ब्राइडल लहंगा हीरों से जड़ा हुआ है. वहीं इसकी कीमत 2 लाख 35 हजार बताई जा रही है. अक्षरा के ये राजपूताना लुक से लेकर जयपुर में शाही वेडिंग पर मेकर्स ने काफी खर्चा किया है.
दुपट्टा है खास
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अक्षरा के लुक के बात करें तो अमेरिकन डायमंड से जड़े लहंगे की चुनरी में #Abhi Ki Akhsu लिखा हुआ फैंस को काफी पसंद आ रहा है. वहीं सोशलमीडिया पर अक्षरा की एंट्री फैंस को काफी पसंद आ रही है, जिसकी वीडियो सोशलमीडिया पर काफी पसंद आ रही है.
बता दें, सीरियल के लेटेस्ट ट्रैक में आरोही, अभिमन्यू की शादी की रस्मों में शामिल होती नजर आ रही है. हालांकि देखना होगा कि क्या बिना किसी मुसीबत के दोनों की शादी हो पाएगी.
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बच्चों के ग्रीष्मावकाश प्रारम्भ हो चुके हैं और 2 वर्ष के कोरोना काल के बाद अब सभी अपने मनपसन्द पर्यटन स्थलों पर घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं. घूमने जाने से पूर्व हमें 2 प्रकार की तैयारियां करनी होती हैं एक तो सफर के लिए दूसरे घर के लिए ताकि जब हम घूमकर आयें तो घर साफ़ सुथरा और व्यवस्थित मिले और आते ही हमें काम में न जुटना पड़े. यदि आप भी घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं तो इन टिप्स आपके लिए बेहद मददगार हो सकते हैं-
1-आजकल अधिकांश पर्यटन स्थलों पर घूमने के लिए सभी बुकिंग्स ऑनलाइन होती है, भीडभाड से बचने और अपने सफर को आनन्ददायक बनाने के लिए आप अपने रुकने और घूमने की सभी बुकिंग्स ऑनलाइन ही करके जायें.
2-जो भी बुकिंग्स आपने ऑनलाइन की हैं उनके या तो प्रिंट निकाल लें अथवा रसीद को स्केन करके अपने मोबाईल में सेव कर लें इसके अतिरिक्त घर से निकलने से पूर्व अपने होटल या रिजोर्ट में फोन काल अवश्य कर लें ताकि आपके पहुंचने पर आपको अपना रूम साफ सुथरा मिले.
3-यदि आपके बच्चे 10 वर्ष से अधिक उम्र के हैं तो परिवार के सभी सदस्यों के बैग्स अलग अलग रखकर उन्हें अपने बैग्स की जिम्मेदारी सौंप दें इससे आप फ्री होकर घूमने का आनन्द ले सकेंगी.
4-परिवार के सभी सदस्यों के आधार कार्ड और वेक्सिनेशन सर्टिफिकेट अपने मोबाईल में सेव करके रखें ताकि आवश्यता पड़ने पर आप उनका उपयोग कर सकें.
5-यदि आपका सफर लम्बा है तो अपने मोबाईल, टैब या लेपटॉप में अपनी मनपसन्द मूवी या गाने डाऊनलोड कर लें ताकि आपको सफर में बोरियत न हो.
6-आजकल फोटो खींचने के लिए मोबाईल का ही उपयोग किया जाता है, सफर पर जाने से पूर्व अपने मोबाईल की गेलरी में से सभी वीडिओ और फोटोज को लेपटॉप में ट्रांसफर कर लें ताकि घूमने के दौरान आप भरपूर फोटोज ले सकें.
7-अपने साथ पावर बैंक, अतिरिक्त मेमोरी कार्ड भी रखें ताकि आपका मोबाईल हर समय अपडेट रहे.
8-सफर की तैयारियों के दौरान अक्सर घर अव्यवस्थित हो जाता है और फिर वापस आकर अस्त व्यस्त घर को देखकर आपका ही मूड ऑफ हो जाता है इससे बचने के लिए आप जाने से पूर्व घर को भली भांति व्यवस्थित करके जायें ताकि वापस आकर आप चैन से आराम फरमा सकें.
9-जहां तक सम्भव हो किचिन के सिंक में जूठे बर्तन न छोड़ें साथ किचिन के प्लेटफोर्म और गैस स्टैंड की अच्छी तरह सफाई करके ही जायें ताकि लौटने पर आपको बदबू और काकरोच आदि का सामना न करना पड़े.
10-फ्रिज में गर्म करके रखा गया दूध 10 से 15 दिन तक खराब नहीं होता, वापस आने पर आपको चाय और बच्चों के लिए दूध आदि के लिए परेशान न होना पड़े इसलिए फ्रिज में ढककर दूध रखकर जायें.
11-टमाटर, पालक, धनिया, पुदीना, कच्ची केरी आदि को मिक्सी में पीस लें और इस प्यूरी को आइस ट्रे में फ्रिज में जमा दें, इनके अतिरिक्त जो भी सब्जियां उन्हें या तो हटा दें अथवा किसी कामगार को दे दें.
12-घर के बेड, सोफा, डायनिंग टेबल आदि पर पुरानी चादर डाल दें वापस आकर केवल चादर हटाकर आप अपना दैनिक कार्य प्रारम्भ कर सकें.
13-यदि आप अपनी गाड़ी से जा रहे हैं तो फ़ास्ट टैग अवश्य लगवाएं अन्यथा आपको दोगुना टोल टैक्स देना पड़ सकता है. फ़ास्ट टैग आर टी ओ आफिस, बैंक या किसी भी नागरिक सुविधा केंद्र से आसानी से प्राप्त किया जा सकता है.
14-अपने साथ हैण्ड सेनेटाइजर, मास्क, उल्टी, दस्त, बुखार, सिरदर्द की आवश्यक दवाइयां तथा ग्लूकोज अवश्य ले जायें साथ ही तरल पदार्थों का भरपूर सेवन करके स्वयं को हाईड्रेट रखें.
15-यदि सम्भव हो तो अपने साथ कुछ खाद्य पदार्थ घर से बनाकर ले जायें क्योंकि कई बार रास्ते में कुछ भी नहीं मिलता और सफर में काम के अभाव में भूख तो लगती ही है.
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अगर ब्रश करने के दौरान आपके मसूड़ों से भी खून आता है तो इस परेशानी को नजरअंदाज मत करें. आमतौर पर हम मसूड़ों की इस प्रॉब्लम को सामान्य समझकर इस पर ध्यान नहीं देते लेकिन इसे अनदेखा करना खतरनाक हो सकता है.
ये पायरिया हो सकता है. कई बार ये समस्या इतनी बढ़ जाती है कि अल्सर का रूप ले लेती है. ऐसे में बेहतर यही होगा कि आप समय रहते ही इसका इलाज शुरू कर दें. अगर ये प्रॉब्लम शुरुआती दौर में है तो आप इन आसान से घरेलू उपायों को अपनाकर इस तकलीफ से राहत पा सकते हैं.
1. लौंग का तेल है अचूक उपाय
लौंग का तेल एक औषधि है. ये दांतों और मसूड़ों के लिए बहुत फायदेमंद है. अगर ब्रश करने के दौरान या फिर कुछ कठोर खाने के दौरान आपके मसूड़ों से खून आता है तो लौंग का तेल आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा. रूई के एक छोटे टुकड़े को लौंग के तेल में डुबोकर मसूड़ों और दांतों पर लगाएं. कुछ देर तक इसे यूं ही लगा रहने दें. इसके बाद हल्के गुनगुने पानी से मुंह साफ कर लें. आप चाहें तो नियमित रूप से एक या दो लौंग भी चबा सकते हैं. इससे मसूड़ों से खून आना बंद हो जाएगा. साथ ही सूजन की प्रॉब्लम भी दूर हो जाएगी. लौंग के इस्तेमाल से मुंह की दुर्गंध भी दूर हो जाती है.
2. सरसों के तेल में नमक मिलाकर मसाज करना
एक चम्मच सरसों के तेल में चुटकी भर नमक मिलाकर दांतों और मसूड़ों की मसाज करें. ऐसा करने से मसूड़ों की सूजन दूर हो जाएगी. ये पायरिया का आजमाया हुआ घरेलू उपाय है. अगर आपके मसूड़ों से खून आ रहा है तो भी ये उपाय आपके लिए फायदेमंद रहेगा.
3. विटामिन सी के सेवन से भी दूर रहेंगी ये परेशानियां
अपनी डाइट में ज्यादा से ज्यादा विटामिन सी का प्रयोग करें. विटामिन सी इंफेक्शन को बढ़ने नहीं देता है और अल्सर होने की आशंका को कम करता है. कच्ची सब्जियां खाने और खट्टे फल खाने से भी दांत मजबूत होते हैं और मसूड़े स्वस्थ बनते हैं.
4. फिटकरी से बेहतर कुछ नहीं
अगर आपके मसूड़ों से खून आता है और दांतों में अक्सर दर्द बना रहता है तो फिटकरी के पानी से कुल्ला करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा. फिटकरी में खून रोकने की क्षमता होती है. इसके अलावा इसका एंटी-बैक्टीरियल गुण भी संक्रमण के खतरे को कम करता है.
5. नमक का पानी भी है फायदेमंद
नमक का पानी भी मसूड़ों को स्वस्थ रखने में मददगार है. दिन में एकबार नमक के पानी से कुल्ला करना फायदेमंद रहेगा. इससे दर्द में तो फायदा होगा ही साथ ही इंफेक्शन का खतरा भी कम रहता है. हालांकि ये सभी घरेलू उपाय हैं और इनका कोई साइड-इफेक्ट नहीं है. लेकिन एकबार डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें.
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आखिर जब तंग आ कर मैं ने देखना छोड़ दिया तो अचानक पौने 9 बजे दरवाजे की घंटी बज उठी. मैं ने दौड़ कर दरवाजा खोला तो सामने सदाबहार मुसकान लिए सौरभ भाई अटैची के साथ खड़े थे. वह तो वैसे ही थे, बस बदन पहले की अपेक्षा कुछ भर गया था और मूंछें भी रख ली थीं.
उन से पहली बार मिलने के कारण बच्चे नमस्ते करने के बाद कुछ सकुचाए से खड़े रहे. सौरभ भाई ने घुटनों के बल बैठते हुए अपनी बांहें पसार कर जब उन्हें करीब बुलाया तो दोनों बच्चे उन के गले लग गए.
मैं भाई को प्रणाम करने के बाद दरवाजा बंद करने ही वाली थी कि वह बोले, ‘‘अरे, क्या अपनी भाभी और भतीजे को अंदर नहीं आने दोगी?’’
मैं हक्कीबक्की सी उन का मुंह ताकने लगी क्योंकि उन्होंने भाभी और भतीजे के बारे में फोन पर कुछ कहा ही नहीं था. तभी भाभी ने अपने 7 वर्षीय बेटे के साथ कमरे में प्रवेश किया.
कुछ पलों तक तो मैं कमर से भी नीचे तक चोटी वाली सुंदर भाभी को देख ठगी सी खड़ी रह गई, फिर खुशी के अतिरेक में उन के गले लग गई.
सभी का एकदूसरे से मिलनेमिलाने का दौर खत्म होने और थोड़ी देर बातें करने के बाद भाभी नहाने चली गईं. फिर नाश्ते के बाद बच्चे खेलने में व्यस्त हो गए और आलोक तथा सौरभ भाई अपने कामकाज के बारे में एकदूसरे को बताने लगे.
थोड़ी देर उन के साथ बैठने के बाद जब मैं दोपहर के भोजन की तैयारी करने रसोई में गई तो मेरे मना करने के बावजूद संगीता भाभी काम में हाथ बंटाने आ गईं. सधे हाथों से सब्जी काटती हुई वह सिंगापुर में बिताए दिनों के बारे में बताती जा रही थीं. उन्होंने साफ शब्दों में स्वीकारा कि अगर सौरभ भाई जैसा पति और मेरी जैसी ननद उन्हें नहीं मिलती तो शायद वह कभी ठीक नहीं हो पातीं. भाभी को इस रूप में देख कर मेरा अपराधबोध स्वत: ही दूर हो गया.
दोपहर के भोजन के बाद भाभी ने कुछ देर लेटना चाहा. आलोक अपने आफिस के कुछ पेंडिंग काम निबटाने चले गए. बच्चे टीवी पर स्पाइडरमैन कार्टून फिल्म देखने में खो गए तो मुझे सौरभ भाई से एकांत में बातें करने का मौका मिल गया.
बहुतेरे सवाल मेरे मानसपटल पर उमड़घुमड़ रहे थे जिन का जवाब सिर्फ सौरभ भाई ही दे सकते थे. आराम से सोफे पर पीठ टिका कर बैठती हुई मैं बोली, ‘‘अब मुझे सब कुछ जल्दी बताइए कि मेरी शादी के बाद क्या हुआ. मैं सब कुछ जानने को बेताब हूं,’’ मैं अपनी उत्सुकता रोक नहीं पा रही थी.
भैया ने लंबी सांस छोड़ते हुए कहना शुरू किया, ‘‘रंजू, तुम्हारी शादी के बाद कुछ भी ऐसा खास नहीं हुआ जो बताया जा सके. जो कुछ भी हुआ था तुम्हारी शादी से पहले हुआ था, परंतु आज तक मैं तुम्हें यह नहीं बता पाया कि पुरी से भुवनेश्वर तबादला मैं ने सिर्फ संगीता के लिए नहीं करवाया था, बल्कि इस की और भी वजह थी.’’
मैं आश्चर्य से उन का मुंह देखने लगी कि अब और किस रहस्य से परदा उठने वाला है. मैं ने पूछा, ‘‘और क्या वजह थी?’’
‘‘मां के बाद कमली किसी तरह सब संभाले हुए थी, परंतु उस के गुजरने के बाद तो मेरे लिए जैसे मुसीबतों के कई द्वार एकसाथ खुल गए. एक दिन संगीता ने मुझे बताया कि सौभिक ने आज जबरन मेरा चुंबन लिया. जब संगीता ने उस से कहा कि वह मुझ से कह देंगी तो माफी मांगते हुए सौभिक ने कहा कि यह बात भैया को नहीं बताना. फिर कभी वह ऐसा नहीं करेगा.
‘‘यह सुन कर मैं सन्न रह गया. मैं तो कभी सोच भी नहीं सकता था कि मेरा अपना भाई भी कभी ऐसी हरकत कर सकता है. बाबा को मैं इस बात की भनक भी नहीं लगने देना चाहता था, इसलिए 2-4 दिन की छुट्टियां ले कर दौड़धूप कर मैं ने हास्टल में सौभिक के रहने का इंतजाम कर दिया. बाबा के पूछने पर मैं ने कह दिया कि हमारे घर का माहौल सौभिक की पढ़ाई के लिए उपयुक्त नहीं है.
‘‘वह कुछ पूछे बिना ही हास्टल चला गया क्योंकि उस के मन में चोर था. रंजू, आगे क्या बताऊं, बात यहीं तक रहती तो गनीमत थी, पर वक्त भी शायद कभीकभी ऐसे मोड़ पर ला खड़ा करता है कि अपना साया भी साथ छोड़ देता नजर आता है.
‘‘मेरी तो कहते हुए जुबान लड़खड़ा रही है पर लोगों को ऐसे काम करते लाज नहीं आती. कामांध मनुष्य रिश्तों की गरिमा तक को ताक पर रख देता है. उस के सामने जायजनाजायज में कोई फर्क नहीं होता.
‘‘एक दिन आफिस से लौटा तो अपने कमरे में घुसते ही क्या देखता हूं कि संगीता घोर निद्रा में पलंग पर सोई पड़ी है क्योंकि तब उस की दवाओं में नींद की गोलियां भी हुआ करती थीं. उस के कपड़े अस्तव्यस्त थे. सलवार के एक पैर का पायंचा घुटने तक सिमट आया था और उस के अनावृत पैर को काका की उंगलियां जिस बेशरमी से सहला रही थीं वह नजारा देखना मेरे लिए असह्य था. मेरे कानों में सीटियां सी बजने लगीं और दिल बेकाबू होने लगा.
‘‘किसी तरह दिल को संयत कर मैं यह सोच कर वापस दरवाजे की ओर मुड़ गया और बाबा को आवाज देता हुआ अंदर आया जिस से हम दोनों ही शर्मिंदा होने से बच जाएं. जब मैं दोबारा अंदर गया तो बाबा संगीता को चादर ओढ़ा रहे थे, मेरी ओर देखते हुए बोले, ‘अभीअभी सोई है.’ फिर वह कमरे से बाहर निकल गए. इन हालात में तुम ही कहो, मैं कैसे वहां रह सकता था? इसीलिए भुवनेश्वर तबादला करा लिया.’’
‘‘यकीन नहीं होता कि काका ने ऐसा किया. काकी के न रहने से शायद परिस्थितियों ने उन का विवेक ही हर लिया था जो पुत्रवधू को उन्होंने गलत नजरों से देखा,’’ कह कर शायद मैं खुद को ही झूठी दिलासा देने लगी.
भाई आगे बोले, ‘‘रिश्तों का पतन मैं अपनी आंखों से देख चुका था. जब रक्षक ही भक्षक बनने पर उतारू हो जाए तो वहां रहने का सवाल ही पैदा नहीं होता. इत्तिफाकन जल्दी ही मुझे सिंगापुर में एक अच्छी नौकरी मिल गई तो मैं संगीता को ले कर हमेशा के लिए उस घर और घर के लोगों को अलविदा कह आया ताकि दुनिया के सामने रिश्तों का झूठा परदा पड़ा रहे.
‘‘जब मुझे यकीन हो गया कि दवा लेते हुए संगीता स्वस्थ और सामान्य जीवन जी सकती है तो डाक्टर की सलाह ले कर हम ने अपना परिवार आगे बढ़ाने का विचार किया. जब मुझे स्वदेश की याद सताने लगी तो इंटरनेट के जरिए मैं ने नौकरी की तलाश जारी कर दी. इत्तिफाक से मुझे मनचाही नौकरी दिल्ली में मिल गई तो मैं चला आया और सब से पहले तुम से मिला. अब और किसी से मिलने की चाह भी नहीं है,’’ कह कर सौरभ भाई चुप हो गए.
वह 2 दिन रह कर लाजपतनगर स्थित अपने नए मकान में चले गए. मैं बहुत खुश थी कि अब फिर से सौरभ भाई से मिलना होता रहेगा. मेरे दिल से
मानो एक बोझ उतर गया था क्योंकि हो न हो मेरी ही वजह से पतझड़ में
तब्दील हो गए मेरे प्रिय और आदरणीय भाई के जीवन में भी आखिर वसंत आ ही गया.
जातेजाते भाभी ने मेरे हाथ में छोटा सा एक पैकेट थमा दिया. बाद में उसे मैं ने खोला तो उस में उन की शादी के वक्त मुझे दी गई चेन और कानों की बालियों के साथ एक जोड़ी जड़ाऊ कंगन थे, जिन्हें प्यार से मैं ने चूम लिया.
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लता ने बी.एससी. बहुत अच्छे अंकों से उत्तीर्ण की. फिर वहीं से एस.एससी. बौटनी कर लिया. पढ़ाई के अलावा वह दूसरी गतिविधियों में भाग लेती थी. भाषण और वादविवाद के लिए जब वह मंच पर जाती थी तो श्रोताओं के दिलोदिमाग पर अपनी छाप छोड़ जाती थी. उस के अभिनय का तो कोई जवाब ही नहीं था, यूनिवर्सिटी में होने वाली नाटकप्रतियोगिताओं में उस ने कई बार प्रथम स्थान प्राप्त किया था. बाद में दिल्ली विश्वविद्यालय से ही लता ने एम.फिल और पीएच.डी. भी कर ली थी.
पीएच.डी. पूरी करने के बाद उस ने मुंबई विश्वविद्यालय में लेक्चरर पद के लिए आवेदन किया था. वह इंतजार कर रही थी कि कब साक्षात्कार के लिए पत्र आए, तभी एक दिन अचानक घटी एक घटना ने उसे आसमान से जमीन पर पटक दिया.
एक रात घर में सभी लोग सोए हुए थे कि अचानक कुछ लोगों ने हमला बोल दिया. उस की आंखों के सामने उन्होंने उस के मातापिता को गोलियों से भून डाला. भाई ने विरोध किया तो उसे भी गोली मार दी गई. वह इतना डर गई कि अपनी जान बचाने के लिए पलंग के नीचे छिप गई.
अपने सामने अपनी दुनिया को बरबाद होते देखती रही, बेबस लाचार सी, पर कुछ भी नहीं बोल पाई थी वह. ये लोग पिता के किसी काम का बदला लेने आए थे. पिता की पुश्तैनी लड़ाई चल रही थी. कितने ही खून हो चुके थे इस बारे में.
6 लोगों के सामने वह कर भी क्या सकती थी. पलंग के नीचे छिपी वह अपने आप को सुरक्षित अनुभव कर रही थी. पिता ने कभीकभार सुनाई भी थीं ये बातें. अत: उसे कुछ आभास सा हो गया था कि ये लोग कौन हो सकते हैं. उस के जेहन में पिता की कही बातें याद आ रही थीं.
डर का उस ने अपने को और सिकोड़ने की कोशिश की तो उन में से एक की नजर उस पर पड़ गई और उस ने पैर पकड़ कर उसे पलंग के नीचे से खींच लिया और चाकू से उस पर वार करने जा रहा था कि उस के एक साथी ने उस का हाथ पकड़ कर मारने से रोक दिया.
‘लड़की, हम क्या कर सकते हैं यह तो तू ने देख ही लिया है. इस घर का सारा कीमती सामान हम ले कर जा रहे हैं. चाहें तो तुझे भी मार सकते हैं पर तेरे बाप से बदला लेने के लिए तुझे जिंदा छोड़ रहे हैं कि तू दरदर घूम कर भीख मांगे और अपने बाप के किए पर आंसू बहाए. हमारे पास समय कम है. हम जा रहे हैं पर कल इस मकान में तेरा चेहरा देखने को न मिले. अगर दिखा तो तुझे भी तेरे बाप के पास भेज देंगे,’ इतना कह कर वे सभी अंधेरे में गुम हो गए.
अब सबकुछ शांत था. कमरे में उस के सामने खून से लथपथ उस के परिवार के लोगों की मृत देह पड़ी थी. वह चाह कर भी रो नहीं सकती थी. घड़ी पर नजर पड़ी तो रात के सवा 3 बजे थे. लता का दिमाग तेजी से चल रहा था. उस के रुकने का मतलब है पुलिस के सवालों का सामना करना. अदालत में जा कर वह अपने परिवार के कातिलों को सजा दिला पाएगी. इस में उसे संदेह था क्योंकि भ्रष्ट पुलिस जब तक कातिलों को पकड़ेगी तब तक तो वे उसे मार ही डालेंगे.
उस ने अपने सारे सर्टिफिकेट और अपनी किताबें, थीसिस, 4 जोड़ी कपड़े थैली में भर कर घर से निकलने का मन बना लिया, पापा और मम्मी ने उसे जेब खर्च के लिए जो रुपए दिए वे उस ने किताबों के बीच में रखे थे. उन पैसों का ध्यान आया तो वह कुछ आस्वस्त हुई.
किसी की हंसतीखेलती दुनिया ऐसे भी उजड़ सकती है, ऐसी तो उस ने कल्पना भी नहीं की थी. फिर भी चलने से पहले पलट कर मांबाप और भाई के बेजान शरीर को देखा तो आंखों से आंसू टपक पड़े. फिर पिता के हत्यारे की कही बातें याद आईं तो वह तेजी से निकल गई. चौराहे तक इतने सारे सामान के साथ वह भागती गई थी. उस में पता नहीं कहां से इतनी ताकत आ गई थी. शायद हत्यारों का डर ही उसे हिम्मत दे रहा था, वहां से दूर भागने की.
लता ने सोचा कि किसी रिश्तेदार के यहां जाने से तो अच्छा है, जहां नौकरी के लिए आवेदन कर रखा है वहीं चली जाती हूं. आखिर छात्र जीवन में की गई एक्ंिटग कब काम आएगी. किसी के यहां नौकरानी बन कर काम चला लूंगी. जब तक नौकरी नहीं मिलेगा, किसी धर्मशाला में रह लूंगी. मुंबई जाते समय उसे याद आया कि उस की रूम मेट सविता की मामी मुंबई में ही रहती हैं.
एक बार सविता से मिलने उस की मामी होस्टल में आई थीं तो उन से लता की भी अच्छी जानपहचान हो गई थी. उस ने योजना बनाई कि धर्मशाला में सामान रख कर पहले वह सविता की मामी के यहां जा कर बात करेगी, क्योंकि उस ने मुंबई विश्वविद्यालय के फार्म पर मुरादाबाद का पता लिखा है और वहां के पते पर इंटरव्यू लेटर जाएगा तो इस की सूचना उसे किस तरह मिलेगी.
टे्रन से उतरने के बाद लता स्टेशन से बाहर आई और कुछ ही दूरी पर एक धर्मशाला में अपने लिए कमरा ले कर थैले में से उस डायरी को निकालने लगी जिस में सविता की मामी का पता उस ने लिख रखा था. फिर उस किताब में से रुपए ढूंढ़े और सविता की मामी के घर पहुंच गई.
मामी के सामने अपनी असलियत कैसे बताती इसलिए उस ने कहा कि उस की मुंबई में नौकरी लग गई है, लेकिन स्थायी पते का चक्कर है इसलिए मैं आप के घर का पता विश्वविद्यालय में लिखा देती हूं.
वहां से लौट कर काम की तलाश करते लता को श्रीमती चतुर्वेदी ने काम पर रख लिया था. वैसे लता मुंबई में किसी प्राइवेट कालिज में कोशिश कर के नौकरी पा सकती थी, पर एक तो प्राइवेट कालिजों में तनख्वाह कम, ऊपर से किराए का मकान ले कर रहना, खाने का जुगाड़, बिजली, पानी का बिल चुकाना, यह सब उस थोड़ी सी तनख्वाह में संभव नहीं था. दूसरे, वह अभी उस घटना से इतनी भयभीत थी कि उस ने 24 घंटे की नौकरानी बन कर रहना ही अच्छा समझा.
इस तरह लता से कमला बनी वह रोज सुबह उठ कर काम में लग जाती. दिन भर काम करती हुई उस ने बीबीजी और सभी घर वालों का मन मोह लिया था. कमला के लिए अच्छी बात यह थी कि वह लोग शाम का खाना 5 बजे ही खा लेते थे, इसलिए सारा काम कर के वह 7 बजे फ्री हो जाती थी.
काम से निबट कर वह अपने छोटे से कमरे में पहुंच जाती और फिर सारी रात बैठ कर इंटरव्यू की तैयारी करती. वैसे छात्र जीवन में वह बहुत मेहनती रही थी, इसलिए पहले से ही काफी अच्छी तैयारी थी. लेकिन फिर भी मुंबई विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के पद पर नियुक्ति पाना और वह भी बिना किसी सिफारिश के बहुत ही मुश्किल था. वह तो केवल अपनी योग्यता के बल पर ही इंटरव्यू में पास होने की तैयारी कर रही थी. आत्मविश्वास तो उस में पहले से ही काफी था. दिल्ली विश्वविद्यालय में भी उस ने कितने ही सेमिनार अटेंड किए थे. अब तो वह बस, सारे कोर्स रिवाइज कर रही थी.
श्रीमती चतुर्वेदी के घर 4 दिन उस के बहुत अच्छे गुजरे. 5वें दिन धड़कते दिल से उस ने पूछा, ‘‘आप ने क्या सोचा बीबीजी, मुझे काम पर रखना है या हटाना है?’’
सीरियल ‘इमली’ ( Imlie ) की कहानी में नए-नए ट्विस्ट लाने के लिए मेकर्स जमकर कोशिश कर रहे हैं. जहां एक के बाद एक सितारा सीरियल छोड़ रहा है तो वहीं इमली और आर्यन का रोमांस फैंस को पसंद आ रहा है. इसी बीच सीरियल में हुई नई एंट्री के चलते नया बवाल होने वाला है. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर( Imlie Serial Update)…
नीला ने चली चाल
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अब तक आपने देखा सुंदर और अर्पिता की शादी हो जाती है, जिसके चलते इमली को आर्यन से प्यार का एहसास होता है. इसी के बीच नीला, इमली से बदला लेने की ठानती है और गुंडों से इमली को किडनैप करने की कोशिश करती है. जहां ज्योति नाम की लड़की उसकी जान बचाती है.
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ज्योति बचाएगी इमली की जान
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अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि अपनी जान बचाने के बाद इमली, आर्यन को ढूंढेगी और जब वह उससे मिलेगा तो दोनों के बीच लड़ाई होगी. वहीं इसी बीच वह अपनी जान बचाने वाली लड़की ज्योति को आर्यन से मिलाएगी, जिसे देखते ही आर्यन, इमली को बताएगा कि वह और ज्योति कॉलेज के दोस्त हैं और वह इमली को अपनी वाइफ के रुप में मिलवाएगा. हालांकि इमली और आर्यन इस बात से अंजान होंगे कि ज्योति अपना प्यार हासिल करने आई है.
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बेहोश होगी इमली
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इसी के साथ आप देखेंगे कि दोस्त होने की बात जानकर इमली और आर्यन, ज्योति को अपने घर ले जाएंगे. जहां ज्योति, आर्यन को एहसास दिलाने की कोशिश करेगी कि इमली नहीं बल्कि वह उसके लिए अच्छी जीवनसाथी है. हालांकि आर्यन अपने प्यार का इजहार करने के लिए इमली का इंतजार करेगा. वहीं जब इमली लौटेगी तो घर में आग लगते हुए देख बेहोश हो जाएगी.
इमली बनेगी मां
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इसके अलावा खबरों की मानें तो इमली और आर्यन एक दूसरे के करीब आएंगे, जिसके बाद वह प्रेग्नेंसी की खबर आर्यन को देगी. हालांकि इमली की प्रैग्नेंसी की खबर सुनते ही आर्यन को शक होगा और वह बच्चे को अपना नाम देने से इनकार कर देगा. हालांकि अभी तक मेकर्स की तरफ से इस खबर पर कोई रिएक्शन सामने नहीं आया है.
ये भी पढ़ें- शादी से पहले ही कपाड़िया फैमिली की हुई Anupama, देखें फोटोज
सीरियल ‘अनुपमा’ (Anupama) में शादी सेलिब्रेशन का आगाज हो गया है. जहां अनुपमा और अनुज की मेहंदी (Anupama-Anuj Mehendi Ceremony)की रस्म सेलिब्रेट होती हुई नजर आ रही है. वहीं इस सेलिब्रेशन में बौलीवुड सिंगर मीका सिंह (Mika Singh) भी शिरकत करते हुए दिखने वाले हैं. इसी बीच सीरियल के सेट से मेहंदी सेलिब्रेशन की फोटोज वायरल हो रही हैं. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…
कपाड़िया फैमिली की हुई अनुपमा
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हाल ही में अनुपमा के रोल में नजर आने वाली एक्ट्रेस रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly) ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कुछ फोटोज शेयर की हैं, जिसमें वह मेहंदी सेलिब्रेशन लुक में जीके, मालविका और होने वाले पति अनुज के साथ पोज देती नजर आ रही हैं. वहीं कैप्शन में इस फोटो को कपाड़िया फैमिली बताती दिख रही हैं, जिसे देखकर फैंस काफी खुश हैं.
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पाखी-,समर ने की सेट पर मस्ती
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मां अनुपमा की मेहंदी सेलिब्रेशन में जहां पूरा शाह परिवार मस्ती करते हुए नजर आया तो वहीं पाखी और समर मौका मिलते ही डांस करते हुए दिखे, जिसकी वीडियो समर का रोल निभाने वाले एक्टर पारस कलनावत (Paras Kalnawat) ने अपने सोशलमीडिया अकाउंट पर शेयर की है.
कपाड़िया फैमिली करेगी डांस
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इसके अलावा सीरियल के अपकमिंग ट्रैक की बात करें तो मेहंदी सेलिब्रेशन में अनुज और अनुपमा के अलावा कपाड़िया फैमिली डांस करती हुई नजर आएगी. दरअसल, मीका सिंह के गाने पर सभी ठुमके लगाते हुए दिखेंगे. वहीं इस मौके पर राखी दवे शाह परिवार की खुशियों में आग लगाती नजर आएगी. दरअसल, बापूजी की रिपोर्ट राखी दवे के हाथ में लग जाएगी और वह पूरे सेलिब्रेशन को बर्बाद करने की ठानेगी. वहीं दूसरी तरफ वनराज, परिवार से दूर अनुज को कई पहाड़ी पर ले जाएगा और अपना गुस्सा जाहिर करेगा.
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बीबीजी और घर के सभी सदस्य उस के काम से खुश तो थे ही, इसलिए मालकिन हंसते हुए बोलीं, ‘‘चल, तू भी क्या याद रखेगी कमला, तेरी नौकरी इस घर में पक्की, लेकिन एक बात पूछनी थी, तू पूरी रात लाइट क्यों जलाती है?’’
‘‘वह क्या है बीबीजी, अंधेरे में मुझे डर लगता है, नींद भी नहीं आती. बस, इसीलिए रातभर बत्ती जलानी पड़ती है,’’ बड़े भोलेपन से उस ने जवाब दिया.
कभीकभी तो लता को अपने कमला बनने पर ही बेहद आश्चर्य होता था कि कोई उसे पहचान नहीं पाया कि वह पढ़ीलिखी भी हो सकती है. एक दिन तो उस की पोल खुल ही जाती, पर जल्दी ही वह संभल गई थी.
हुआ यह कि मालकिन की छोटी बेटी, जो बी.एससी. कर रही थी, अपनी बड़ी बहन से किसी समस्या पर डिस्कस कर रही थी, तभी कमला के मुंह से उस का समाधान निकलने ही वाला था कि उसे अपने कमलाबाई होने का एहसास हो गया.
अब तो मालकिन उस से इतनी खुश थी कि दोपहर को खुद ही उस से कह देती थी कि तू दोपहर में थोड़ी देर आराम कर लिया कर.
कमला को और क्या चाहिए था. वह भी अब दोपहर को 2 घंटे अपनी स्टडी कर लेती थी. इतना ही नहीं उसे कमरे में एक सुविधा और भी हो गई थी कि रोज के पुराने अखबार ?मालकिन ने उसे ही अपने कमरे में रखने को कह दिया था. इस से वह इंटरव्यू की दृष्टि से हर रोज की खास घटनाओं के संपर्क में बनी रहने लगी थी.
श्रीमती चतुर्वेदी के यहां काम करते हुए कमला को अब 2 महीने हो गए. एक दिन बीबीजी की तबीयत अचानक अधिक खराब हो गई, लगभग बिस्तर ही पकड़ लिया था उन्होंने. उस दिन बीमार मालकिन को दिखाने के लिए घर के सभी लोग अस्पताल गए थे, तभी टेलीफोन की घंटी बजी, फोन सविता की मामी का था.
‘‘हैलो लता, तुम्हारा साक्षात्कार लेटर आ गया है, 15 दिन बाद इंटरव्यू है तुम्हारा. कहो तो इंटरव्यू लेटर वहां भिजवा दूं.’’
मामी को उस समय टालते हुए कमला ने कहा, ‘‘नहीं, मामीजी, आप भिजवाने का कष्ट न करें, मैं खुद ही आ कर ले लूंगी.’’
इंटरव्यू से 2 दिन पहले कमला ने मालकिन से बात की, ‘‘बीबीजी, परसों 15 सितंबर को मुझे छुट्टी चाहिए.’’
‘‘क्यों?’’ श्रीमती चतुर्वेदी बोलीं.
‘‘ऐसा है, बीबीजी, मेरी दूर के रिश्ते की बहन यहां रहती है, जब से आई हूं उस से मिल नहीं पाई. 15 सितंबर को उस की लड़की का जन्मदिन है, यहां हूं तो सोचती हूं कि वहां हो आऊं.’’
फिर बच्चे की तरह मचलते हुए बोली, ‘‘बीबीजी उस दिन तो आप को छुट्टी देनी ही पड़ेगी.’’
15 सितंबर के दिन एक थैला ले कर कमला चल दी. वह वहां से निकल कर उसी धर्मशाला में गई और वहां कुछ देर रुक कर कमला से लता बनी.
काटन की साड़ी पहन, जूड़ा बना कर, माथे पर छोटी सी बिंदी लगा कर, हाथ में फाइल और थीसिस ले कर जब उस ने वहां लगे शीशे में अपने को देखा तो जैसे मानो खुद ही बोल उठी, ‘वाह लता, क्या एक्ंिटग की है.’
सविता की मामी के पास से इंटरव्यू लेटर ले कर वह विश्वविद्यालय पहुंच गई. सभी प्रत्याशियों में इंटरव्यू बोर्ड को सब से अधिक लता ने प्रभावित किया था.
लौटते समय लता सविता की मामी से यह कह आई थी कि अगर उस का नियुक्तिपत्र आए तो वह फोन पर उसी को बुला कर यह खबर दें, किसी और से यह बात न कहें.
धर्मशाला में जा कर लता कपड़े बदल कर कमला बन गई और फिर मालकिन के घर जा कर काम में जुट गई थी. मन बड़ा प्रफुल्लित था उस का. अपने इंटरव्यू से वह बहुत अधिक संतुष्ट थी, इस से अच्छा इंटरव्यू हो ही नहीं सकता था उस का.
खुशी मन से जल्दीजल्दी काम करती हुई कमला से श्रीमती चतुर्वेदी ने कहा, ‘‘सच कमला, तेरे बिना अब तो इस घर का काम ही चलने वाला नहीं है. इसलिए अब जब भी तुझे अपनी बहन के यहां जाना हुआ करे तो हमें बता दिया कर, हम मिलवा कर ले आया करेंगे तुझे.’’
‘‘ठीक है, बीबीजी,’’ इतना कह कर वह काम में लग गई थी.
एक दिन सविता की मामी ने फोन पर उसे बुला कर सूचना दी कि उस का चयन हो गया है, अपना नियुक्तिपत्र आ कर उन से ले ले.
अब वह सोचने लगी कि बीमार बीबीजी से इस बारे में क्या और कैसे बात करे, क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि नौकरी ज्वाइन करने से पहले बीबीजी को यह बात बताए. उसे डर था कहीं कोई अडं़गा न आ जाए.
वहां से जा कर ज्वाइन करने का पूरा गणित बिठाने के बाद कमला बीबीजी से बोली, ‘‘बीबीजी, आज जब मैं सब्जी लेने गई थी, तब मेरी उसी बहन की लड़की मिली थी, उस ने बताया कि उस की मां की तबीयत बहुत खराब है, इसलिए बीबीजी मुझे उस की देखभाल के लिए जाना पड़ेगा.’’
‘‘और यहां मैं जो बीमार हूं, मेरा क्या होगा? हमारी देखभाल कौन करेगा? यह सब सोचा है तू ने,’’ बीबीजी नाराज होते बोलीं, ‘‘देख, तनख्वाह तो तू यहां से ले रही है, इसलिए तेरा पहला फर्ज बनता है कि तू पहले हम सब की देखभाल करे.’’
‘‘बीबीजी, आप मेरी तनख्वाह से जितने पैसे चाहे काट लेना, मेरी देखभाल के बिना मेरी बहन मर जाएगी, हां कर दो न बीबीजी,’’ अत्यंत दीनहीन सी हो कर उस ने कहा.
कमला की दीनता को देख कर बीबीजी को तरस आ गया और उन्होंने जाने के लिए हां कर दी.
सारी औपचारिकताएं पूरी करते हुए लता ने मुंबई विश्वविद्यालय में व्याख्याता पद पर कार्यभार ग्रहण कर लिया था. उसे वहीं कैंपस में स्टाफ क्वार्टर भी मिल गया था. आज उस की खुशी का ठिकाना नहीं था. इन 5 दिन में सविता की मामी के पास ही रहने का उस ने मन बना लिया था.
जाते ही उसे एम.एससी. की क्लास पढ़ाने को मिल गई थी. क्लास में भी क्या पढ़ाया था उस ने कि सारे विद्यार्थी उस के फैन हो गए थे.
5 दिनो के बाद 3 दिन की छुट्टियों में डा. लता फिर कमलाबाई बन कर बीबीजी के घर पहुंच गई.
‘‘अरी, कमला, तू इस बीमार को छोड़ कर कहां चली गई थी. तुझे मुझ पर जरा भी तरस नहीं आया. कितना भी कर लो पर नौकर तो नौकर ही होता है, तुझे तो तनख्वाह से मतलब है, कोई अपनी बीबीजी से मोह थोड़े ही है. अगर मोह होता तो 5 दिनों में थोड़ी देर के लिए ही सही खोजखबर लेने नहीं आती क्या? अब मैं कहीं नहीं जाने दूंगी तूझे, मर जाऊंगी मैं तेरे बिना, सच कहे देती हूं मैं,’’ मालकिन बोले ही जा रही थीं.
कमला खामोश हो कर बीबीजी से सबकुछ कहने की हिम्मत जुटा रही थी. तभी शाम के समय चतुर्वेदीजी के एक मित्र घर आए. वह मुंबई विश्वविद्यालय में बौटनी विभाग के हेड थे और उस की ज्वाइनिंग उन्होंने ही ली थी. ड्राइंगरूम से ही बीबीजी ने आवाज लगाते हुए कहा, ‘‘कमला, अच्छी सी 3 कौफी तो बना कर लाना.’’
‘‘अभी लाई, बीबीजी,’’ कह कर कमला कौफी बना कर जैसे ही ड्राइंगरूम में पहुंची, डा. भार्गव को देख कर उस की समझ में नहीं आया कि वह क्या करे. लेकिन फिर भी वह अंजान ही बनी रही.
डा. भार्गव लता को देख कर चौंक कर बोले, ‘‘अरे, डा. लता, आप यहां?’’
‘‘अरे, भाई साहब, आप क्या कह रहे हैं, यह तो हमारी बाई है, कमला. बड़ी अच्छी है, पूरा घर अच्छे से संभाल रखा है इस ने.’’
‘‘नहीं भाभीजी, मेरी आंखें धोखा नहीं खा सकतीं, यह डा. लता ही हैं, जिन्होंने 5 दिन पहले मेरे विभाग में ज्वाइन किया है. डा. लता, आप ही बताइए, क्या मेरी आंखें धोखा खा रही हैं?’’
‘‘नहीं सर, आप कैसे धोखा खा सकते हैं, मैं लता ही हूं.’’
‘‘क्या…’’ घर के सभी सदस्यों के मुंह से अनायास ही एकसाथ निकल पड़ा. सभी लता के मुंह की ओर देख रहे थे.
उन के अभिप्राय को समझ कर लता बोली, ‘‘हां, बीबीजी, सर बिलकुल ठीक कह रहे हैं,’’ यह कहते हुए उस ने अपनी सारी कहानी सुनाते हुए कहा, ‘‘तो बीबीजी, यह थी मेरे जीवन की कहानी.’’
‘‘खबरदार, जो अब मुझे बीबीजी कहा. मैं बीबीजी नहीं तुम्हारी आंटी हूं, समझी.’’
‘‘डा. लता, वैसे आप अभिनय खूब कर लेती हैं, यहां एकदम नौकरानी और वहां यूनिवर्सिटी में पूरी प्रोफेसर. वाह भई वाह, कमाल कर दिया आप ने.’’
‘‘मान गई लता मैं तुम्हें, क्या एक्ंिटग की थी तुम ने, कह रही थी कि मुझे लाइट बिना नींद ही नहीं आती. लेकिन लता, सच में मुझे बहुत खुशी हो रही है…हम सभी को, कितने संघर्ष के बाद तुम इतने ऊंचे पद पर पहुंचीं. सच, तुम्हारे मातापिता धन्य हैं, जिन्होंने तुम जैसी साहसी लड़की को जन्म दिया.’’
‘‘पर बीबीजी…ओह, नहीं आंटीजी, मैं तो आप का एहसान कभी नहीं भूलूंगी, यदि आप ने मुझे शरण नहीं दी होती तो मैं कैसे इंटरव्यू की तैयारी कर पाती? मैं जहां भी रहूंगी, इस परिवार को सदैव याद रखूंगी.’’
‘‘क्या कह रही है…तू कहीं नहीं रहेगी, यहीं रहेगी तू, सुना तू ने, जहां मेरी 2 बेटियां हैं, वहीं एक बेटी और सही. अब तक तू यहां कमला बनी रही, पर अब लता बन कर हमारे साथ हमारे ही बीच रहेगी. अब तो जब तेरी डोली इस घर से उठेगी तभी तू यहां से जाएगी. तू ने जिंदगी के इतने रंग देखे हैं, बेटी उन में एक रंग यह भी सही.’’
खुशी के आंसुओं के बीच लता ने अपनी सहमति दे दी थी.
घूमने का शौक हर किसी को होता है. भारत में अनेक ऐसी जगहें हैं, जो खूबसूरती से भरी होने के साथसाथ वहां पर तरहतरह के ऐडवैंचर स्पोर्ट्स का आयोजन किया जाता है.
आइए, जानते हैं ऐसी जगहों के बारे में:
ऋषिकेश फौर राफ्टिंग लवर्स
अगर आप पानी के साथ अठखेलियां करने को बेचैन हैं, तो आप के लिए बेहतरीन रिवर राफ्टिंग डैस्टिनेशन है ऋषिकेश. यह जगह उत्तराखंड राज्य के गढ़वाल में स्थित है. यहां विदेशों से भारत भ्रमण करने आए लोग भी इस राफ्टिंग का मजा जरूर लेते हैं क्योंकि यह ऐडवैंचर है ही इतना मजेदार क्योंकि रबड़ की नाव में सफेद वाटर में घुमावदार रास्तों से गुजरना किसी रोमांच से कम नहीं होता है.
इस की खासीयत यह है कि अगर आप को तैरना नहीं भी आता तो भी आप गाइड की फुल देखरेख में इस ऐडवैंचर का लुत्फ उठा सकते हैं.
इन 4 जगहों पर होती है राफ्टिंग: ब्रह्मपुरी से ऋषिकेश- 9 किलोमीटर, शिवपुरी से ऋषिकेश- 16 किलोमीटर, मरीन ड्राइव से ऋषिकेश- 25 किलोमीटर, कौड़ीयाला से ऋषिकेश- 35 किलोमीटर.
बैस्ट मौसम: यदि आप राफ्टिंग के लिए ऋषिकेश आने का प्लान कर रहे हैं तो मार्च से मई के मिड तक का समय अच्छा है.
बुकिंग टिप्स: आप राफ्टिंग के लिए बुकिंग ऋषिकेश जा कर ही कराएं क्योंकि वहां जा कर आप रेट्स को कंपेयर कर के अच्छाखासा डिस्काउंट ले सकते हैं. जल्दबाजी कर के बुकिंग न करवाएं वरना यह आप की जेब पर भारी पड़ सकता है. वैसे आप ₹1,000 से ₹1,500 में राफ्टिंग का लुत्फ उठा सकते हैं और अगर आप को ग्रुप राफ्टिंग करनी है तो इस पर भी आप डिस्काउंट ले सकते हैं.
इस बात का ध्यान रखें कि राफ्ट में गाइड वीडियो बनाने के पैसे अलग से चार्ज करता है. ऐसे में अगर इस की जरूरत हो तभी वीडियो बनवाएं वरना राफ्टिंग का लुत्फ ही उठाएं.
पैराग्लाइडिंग इन कुल्लूमनाली
आसमान की ऊंचाइयों को करीब से देखने का जज्बा हर किसी में नहीं होता और जिस में होता है वह खुद को पैराग्लाइडिंग करने से रोक नहीं पाता. तभी तो देश में पैराग्लाइडिंग ऐडवैंचर की कमी नहीं है और इस ऐडवैंचर के शौकीन लोग इसे करने के लिए कहीं भी पहुंच जाते हैं. इस में एक बहुत ही फेमस जगह है मनाली, जो भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य के कुल्लू जिले में स्थित है. वहां की ब्यूटी को देखने के लिए हर साल हजारों लोग आते हैं.
यह जगह अपनी सुंदरता के लिए ही नहीं बल्कि ऐडवैंचर के लिए भी जानी जाती है. इसलिए पैराग्लाइडिंग प्रेमी होने पर वहां जाना न भूलें क्योंकि वहां आप को शौर्ट पैराग्लाइडिंग राइड से ले कर लौंग पैराग्लाइडिंग राइड तक का लुत्फ उठाने का मौका जो मिलेगा.
इन जगहों पर होती है पैराग्लाइडिंग: सोलंग वैली- 15 किलोमीटर फ्रौम मनाली, (पैराग्लाइडिंग डुरेशन- 20 मिनट), फटरु- लोंगर फ्लाइट टाइम, (पैराग्लाइडिंग डुरेशन- 30 से 35 मिनट), बिजली महादेव- लोंगर फ्लाइट टाइम, (पैराग्लाइडिंग डुरेशन- 35 से 40 मिनट), कांगड़ा वैली- (पैराग्लाइडिंग डुरेशन- 15 से 25 मिनट), मरही- यहां पैराग्लाइडिंग 3000 मीटर की ऊंचाई से होती है, जो काफी ऊंची है. (पैराग्लाइडिंग डुरेशन- 30-40 मिनट).
बैस्ट मौसम: मई से अक्तेबर. मौसम खराब होने पर पैराग्लाइडिंग नहीं करवाई जाती है. इस ऐडवैंचर को एक्सपर्ट की देखरेख में कराया जाता है, इसलिए पहली बार करने वालों को भी इस से डरना नहीं चाहिए.
बुकिंग टिप्स: आप पैराग्लाइडिंग के लिए बुकिंग जहां आप ठहरे हुए हैं, वहां आसपास से पूछ कर करें या फिर जिस जगह पर आप को इन ऐडवैंचर को करना है, वहां अच्छी तरह पूछ कर रेट्स को कंपेयर कर के आप अपनी बातों से हैवी डिस्काउंट भी ले सकते हैं. आप शौर्ट व लौंग फ्लाई के हिसाब से ₹1,000-₹2,500 में इस ऐडवैंचर का लुत्फ उठा सकते हैं. इस बात का ध्यान रखें कि तुरंत बुकिंग न कराएं क्योंकि ज्यादा जल्दी आप की पौकेट पर भारी पड़ सकती है.
स्कूबा डाइविंग अंडमान
अंडमान के बीच, नीला पानी, चारों तरफ फैली खूबसूरती हर किसी का मन मोह लेती है, साथ ही यहां के अंडरवाटर ऐडवैंचर्स तो ऐडवैंचर लवर्स की जान बन गए हैं. किसे पसंद नहीं होगा कि समुद्र के अंदर जा कर कोरेल, औक्टोपस व बड़ी मछलियों को नजदीक से देखने का अनुभव करना. तो अगर आप भी हैं स्कूबा डाइविंग के दीवाने तो इस जगह को भूल कर भी मिस न करें. यह वन टाइम ऐक्सपीरियंस जीवनभर आप को याद रहेगा.
इन जगहों पर होती है स्कूबा डाइविंग
हैवलौक आइलैंड: क्लीयर वाटर ऐंड व्यू औफ वाइब्रेंट फिशेज. सेफ ऐंड स्ट्रैस फ्री ऐडवैंचर. 30 मिनट राइड इन ₹2,000 से ₹2,500.
नार्थ बे आइलैंड: ब्लू वाटर विद फुल औफ कोरल्स.
नील आइलैंड: वाटर डैप्थ इज मीडियम, प्राइज इज लिटिल हाई. वंडरफुल प्लेस फौर स्कूबा डाइविंग.
बारेन आइलैंड: यह आइलैंड स्कूबा के लिए बैस्ट है, लेकिन महंगा है.
बैस्ट मौसम: अक्तूबर से मिड मई. मौनसून के मौसम में अंडरवाटर ऐक्टिविटीज बंद कर दी जाती हैं.
बुकिंग टिप्स: आप पीएडीआई सर्टिफाइड डाइवर्स से ही स्कूबा डाइविंग को प्लान करें क्योंकि इस से सेफ्टी के साथसाथ आप इस राइड को अच्छी तरह ऐंजौय कर पाएंगे. आप अपने पैकेज के साथ इसे बुक कर सकते हैं क्योंकि अधिकांश पैकेजस में यह कौंप्लिमेंट्री होता है. कोशिश करें कि इस पर अच्छाखासा डिस्काउंट लें ताकि मजा भी ले सकें और पौकेट पर भी ज्यादा बो झ न पड़े.
स्कीइंग गुलमर्ग
क्या आप की स्कीइंग में रुचि है, लेकिन आप यही सोच रहे हैं कि किस जगह जा कर अपने स्कीइंग के ऐडवैंचर को पूरा करें तो आप को बता दें कि गुलमर्ग कश्मीर से 56 किलोमीटर दूर एक खूबसूरत हिल स्टेशन है. यहां की चोटियां बर्फ से ढकी होने के कारण यह जगह बेहद खूबसूरत दिखती है. यह आप की ख्वाहिश को पूरा कर सकती है.
यहां करें स्कीइंग: गुलमर्ग, बारामुला जिला.
फर्स्ट फेज: स्कीइंग के लिए कोंगडोरी, जो 1476 फुट ढलान है, यह स्कीइंग के शौकीनों को रोमांचकारी अनुभव प्रदान करती है.
सैकंड फेज: अपरवाट पीक, जो 2624 फुट की दूरी पर है, जो अनुभवी स्कीइंग के शौकीनों में अधिक लोकप्रिय है.
बैस्ट मौसम: दिसंबर टू मिड फरवरी. वैसे मार्च से मई महीनों का मौसम भी काफी बेहतरीन रहता है.
बुकिंग टिप्स: आप औनलाइन बुकिंग.कौम से बुक करने के साथसाथ वहां जा कर भी बुक कर सकते हैं. इक्विपमैंट की कौस्ट ₹700 से ₹1,000 के बीच होता है और अगर आप इंस्ट्रक्टर लेते हैं तो वह आप से अलग से दिन के हिसाब से ₹1,200 से ₹2,000 तक लेता है. सब का रेट अलगअलग है, इसलिए अच्छी तरह रिसर्च कर के ही बुकिंग करें.
स्काई डाइविंग मैसूर
भारत के कर्नाटक राज्य के मैसूर जिले में स्थित एक नगर है, जो स्काई डाइविंग के लिए खासा प्रचलित है. तभी यहां स्काई डाइविंग करने के शौकीन खुद को यहां लाए बिना रह नहीं पाते हैं. मैसूर की चामुंडी हिल्स स्काई डाइविंग के लिए काफी फेमस है. लेकिन यहां स्काई डाइविंग का लुत्फ उठाने के लिए आप को पहले एक दिन की ट्रेनिंग लेनी होगी.
यहां आप टेनडेम स्टेटिक व ऐक्ससेलरेटेड फ्रीफाल्स जंप्स में से किसी का भी चुनाव कर सकते हैं. दोनों ही काफी रोमांचकारी होते हैं. टेनडेम स्टेटिक नए लोगों के लिए अच्छी है क्योंकि इस में प्रशिक्षित स्काई डाइवर आप के साथ एक ही रस्सी से बंधा होता है और पूरा कंट्रोल उस के हाथ में ही होता है. लेकिन ऐक्ससेलरेटेड फ्रीफाल्स जंप काफी मुश्किल माना जाता है. इस में आप के साथ इंस्ट्रक्टर नहीं होता. अब यह आप पर निर्भर करता है कि आप किस का चुनाव करें.
बैस्ट मौसम: जब भी मौसम खुला हुआ हो, तो आप इस का लुत्फ उठा सकते हैं. वैसे सुबह 7 से 9 बजे का समय बैस्ट है.
बुकिंग टिप्स: आप इस के लिए मैसूर की स्काई राइडिंग से जुड़ी वैबसाइट्स की मदद ले सकते हैं या फिर वहां पहुंच कर औफलाइन बुकिंग भी अच्छा विकल्प है. आप को स्काई डाइविंग के लिए ₹30 से ₹35 हजार खर्च करने पड़ सकते हैं. इसलिए अगर आप ऐडवैंचर करने के लिए तैयार हैं तो इन जगहों पर जाना न भूलें.