तलाक के बाद- भाग 1: क्या स्मिता को मिला जीवनसाथी

आखिरकार 11 साल बाद कोर्ट का फैसला आ ही गया. वह जो चाहती थी, वही हुआ था. उसे अपने पति से तलाक मिल गया था. लेकिन 11 साल बाद अब इस तलाक का क्या औचित्य था. जब उस ने तलाक के लिए अदालत में मुकदमा दायर किया था, तब वह 25 वर्ष की यौवन के भार से लदी सुंदर युवती थी. अब वह 36 साल की प्रौढ़ा हो चुकी थी. चेहरे पर उम्र की परतों को दिखाने वाली मोटी चरबी चढ़ गई थी, जिस पर झुर्रियां पड़ने लगी थीं. बाल सफेद होने की यह कोई उम्र तो नहीं थी, लेकिन गमों के सायों ने उस पर सफेदी फेरनी शुरू कर दी थी.

यौवन पता नहीं कब चला गया था. हर सालज़्उसे वसंत का इंतजार रहता कि अब उस के जीवन में भी फूल खिलेंगे. न जाने कितने वसंत उस के जीवन में आए और गुजर गए, लेकिन उस के मन की बगिया में फूल नहीं खिले. हवा में खुशबू नहीं फैली. 36 वसंत देखने के बाद भी उसे लगता कि उस के जीवन में कोई वसंत नहीं आया था. दूरदूर तक, जहां तक नजर जाती थी, पतझड़ ही पतझड़ दिखता था और आंखों में रेगिस्तान था. उस के जीवन के गुजरे साल सूखे पत्तों की तरह हवा में उड़ते हुए उस के दिल में भयावह सन्नाटे का एहसास करा रहे थे.

इतने सालों बाद तलाक का आदेश पा कर वह गुम सी हो गई थी. आज वह यह सोचने पर मजबूर हो गई थी कि पति से तलाक तो मिल गया, लेकिन अब आगे क्या होगा?

वह बिलकुल अकेली है. मां कई साल पहले गुजर गई थीं. पिता उसी की चिंता में घुलते रहे और इसी कारण वे भी जल्दी मौत को गले लगा चले गए. मांबाप की मृत्यु के बाद बड़े भाई ने उस से किनारा कर लिया. भाभी से हमेशा 36 का आंकड़ा रहा. उस को ले कर भैयाभाभी में अकसर तनातनी चलती रहती. वह सब देखती थी, लेकिन कुछ कर नहीं सकती थी. उस का भार, उस के मुकदमे का भार, कौन कब तक उठाता. वह एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थी. उस से केवल उस के मुकदमे का ही खर्चज़्निकल पाता था. अब वह किराए के एक छोटे से कमरे में रहती थी.

बवंडर की तरह विचार उस के मस्तिष्क में उमड़घुमड़ रहे थे. विचारों में खोई वह अदालत की सीढि़यां उतर कर नीचे आई. चारों तरफ  लोगों की भीड़ और चीखपुकार मची थी. आज का शोर उस के कानों में बम के धमाकों की तरह गूंज रहा था. लग रहा था, शोर की अधिकता से उस के कान बहरे हो गए थे. किसी तरह वह कोर्टज़्परिसर से बाहर आई और बेमकसद एक तरफ चल दी.

जनवरी का महीना था और धूप में तीव्रता का एहसास होने लगा था. चलतेचलते वह एक छोटे से पार्कज़्के पास पहुंची, तो उस के अंदर चली गई. कुछ लड़केलड़कियां वहां बैठ कर चुहलबाजी कर रहे थे. उस ने उन की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया और एक पेड़ के नीचे जा कर बैठ गई. वहां वह धूपछांव दोनों का आनंद ले सकती थी, लेकिन उस के जीवन में आनंद कहां था?

जिन प्रश्नों पर वह कई बार विचार कर चुकी थी, वही बारबार उस के दिमाग में आ रहे थे. आज से 11 साल पहलेज़् जब उस की शादी हुई थी, तब वह नहीं जानती थी कि एक दिन वह बिलकुल अकेली होगी, एक तलाकशुदा स्त्री, जिस के जीवन में पतझड़ की वीरानी के सिवा और कुछ नहीं होगा.

शादी से पहलेज़्उस की सहेलियां उस से कहती थीं कि वह घमंडी और अपनी खूबसूरती के मद में चूर लड़की है. वह नहीं जानती थी कि उस के स्वभाव में ये सारे अवगुण कैसे आए थे. ये जन्म से थे या हालात के तहत उस के स्वभाव में समा गए थे. तब वह जवानी और अपनी खूबसूरतीज़्के मद में चूर थी, इसलिए अपने इन अवगुणों की तरफ देखने, सोचने व उन में सुधार लाने की तरफ उस का ध्यान नहीं गया. मांबाप ने भी कभी उसे नहीं टोका कि उस में कोई ऐसा अवगुण है जो उस के जीवन को बरबाद कर देगा. भाई को उस से कोई मतलब नहीं था.

शादी के समय मां ने उसे सीख दी थी, ‘बेटी, अब तुम्हारे जीवन का दूसरा पक्ष शुरू होने जा रहा है. यह बहुत महत्त्वपूर्णज़् है और इस में यदि तुम ने सोचसमझ कर कदम नहीं रखा तो जीवनभर पछताने के अलावा और कुछ तुम्हारे हाथ में नहीं आएगा. पति को काबू में रखना, सासससुर को दबा कर रखना, उन के रिश्तेदारों को भाव न देना वरना सब आएदिन तुम्हारे ऊपर बोझ बन कर खड़े रहेंगे. कोशिश करना कि सासससुर से अलग रह कर अपना स्वतंत्र जीवन बिताओ. इस के लिए हर समय पति को टोकते रहना. एक न एक दिन वह तुम्हारी बात मान कर अलग रहने लगेगा.’

मां की बात उस ने गांठ बांध ली और शादी के एक हफ्ते बाद ही अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए. सब से पहले तो उस ने सास की बातों की तरफ ध्यान देना बंद किया. सास कुछ कहती तो वह न सुनने का बहाना बनाती. सास पास आ कर कहती, तो वह चिड़चिड़ा कर कहती, ‘आप नहीं कर सकतीं क्या इतना छोटा सा काम? जब देखो, तब मेरे सिर पर खड़ी रहती हैं. मैं जब इस घर में नहीं थी तो क्या ये काम आप नहीं करती थीं.’

वह जानबूझ कर कोई न कोई हंगामा खड़ा कर देती. फिर भी सास उस से तकरार न करती. कुछ ही दिनों बाद उस ने खाने को ले कर घर में हंगामा खड़ा कर दिया, ‘मुझे रोजरोज दालचावल अच्छे नहीं लगते. आप को खाने हों तो बनाइए. मैं अपना अलग खाना बना लिया करूंगी, नहीं तो होटल से मंगा लूंगी.’

पति राजीव ने उसे समझाते हुए कहा था, ‘तुम को जो पसंद हो, बना लिया करो. कोई मना करता है क्या?’

वह फास्टफूड की शौकीन थी. चाइनीज और कौंटिनैंटल खाना उसे पसंद था. वह जानती थी, ये चीजें घर में नहीं बनाई जा सकती थीं और अगर कोई बना भी ले, तो किचन की गरमीज़्में फुंकने से अच्छा है होटल से मंगा कर खा ले. इसीलिए उस ने इतना नाटक किया था कि घर में खाना बनाने का झंझट न करना पड़े. फिर भी उस ने साफसाफ कह दिया कि वह खाना नहीं बनाएगी.

वह फोन पर और्डर कर के बाहर से अपने लिए खाना मंगवाने लगी थी. इस सब का एक ही मकसद था कि वह राजीव को अपने मांबाप से अलग कर सके. यही नहीं, हर रविवार जिद कर के वह राजीव को बाहर भी ले जाती और महंगे रैस्तरां में खाना खा कर आती. जब भी दोनों बाहर से खाना खा कर आते, वह देखती कि राजीव का मूड उखड़ाउखड़ा सा रहता. लेकिन वह ध्यान नहीं देती.

एक दिन राजीव ने कह ही दिया, ‘स्मिता, अब ये महंगे शौक छोड़ दो. कुछ जिम्मेदारी भी समझो. मेरी पगार इतनी नहीं है कि मैं तुम्हारे लिए रोजाना बाहर से खाना मंगवा कर खिला सकूं. अपने हाथ से बनाना सीखो.’

‘मैं पूरे घर के लिए खाना नहीं बना सकती. मैं तुम्हारी पत्नी बन कर आई हूं, तुम्हारे साथ रहना चाहती हूं. मांबाप से अलग रहो तो मैं घर में खाना बनाऊंगी वरना बाहर से ही मंगवा कर खिलाओ.’

मां बनीं Kajal Aggarwal, बेटे के नाम का किया खुलासा

बौलीवुड और साउथ की फिल्मों में नाम कमा चुकीं एक्ट्रेस काजल अग्रवाल (Kajal Aggarwal) अपनी प्रैग्नेंसी को लेकर सुर्खियों में रहती हैं. फोटोशूट तो कभी ट्रोलिंग के चलते एक्ट्रेस खबरों में छाई रहती हैं. इसी बीच खबरें हैं कि एक्ट्रेस काजल अग्रवाल और उनके पति गौतम किचलू पेरेंट्स बन गए हैं. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

बेटे की मां बनीं काजल अग्रवाल

 

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खबरों की मानें तो काजल अग्रवाल ने बेटे को जन्म दिया है. हालांकि कपल ने इस खबर की पुष्टि नहीं की थी. लेकिन एक्ट्रेस के मां बनने की खबर पर फैंस और सेलेब्स रिएक्शन देते दिखे थे. इसी बीच एक्ट्रेस के पति गौतम किचलू ने बेटे का नाम शेयर करते हुए एक पोस्ट शेयर किया है. वहीं एक्ट्रेस और उनके पति ने अपने बेटे का नाम नील किचलू बताया है. पोस्ट शेयर करते ही फैंस दोनों को बधाई देते हुए नजर आ रहे हैं.

 

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पति के लिए लिखा था प्यार भरा मैसेज

ट्रोलिंग को लेकर सुर्खियों में रहने वाली एक्ट्रेस काजल अग्रवाल ने हाल ही में अपने पति गौतम किचलू के लिए प्यारा सा मैसेज शेयर किया था. वहीं मैसेज में उन्होंने पति को प्रेग्नेंसी के सफर में साथ देने और प्यार करने के लिए शुक्रिया भी कहा था, जिसे देखकर फैंस काफी खुश और इमोशनल हो गए थे.

वजन को लेकर ट्रोल हो चुकी हैं एक्ट्रेस

बता दें, एक्ट्रेस काजल अग्रवाल और बिजनेसमैन गौतम किचलू ने कोरोना के समय साल 2020 में शादी की थी, जिसके बाद साल 2022 यानी जनवरी में एक्ट्रेस ने अपनी प्रैग्नेंसी का ऐलान किया था, जिसमें बाद वह अपनी प्रैग्नेंसी की फोटोज फैंस के साथ शेयर करती हुई नजर आई थीं. हालांकि इस दौरान उनका वजन काफी बढ़ गया था, जिसके चलते वह ट्रोलिंग का शिकार हो गई थीं. लेकिन एक्ट्रेस ने ट्रोलर्स को करारा जवाब देते हुए अपनी प्रैग्नेंसी के सफर को बेहद खास बताया था. वहीं फैंस और सेलेब्स ने भी एक्ट्रेस का साथ देते हुए ट्रोलर्स को लताड़ लगाई थी.

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मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से मिल रहा बच्‍चों को लाभ

मिशन शक्ति के तहत जहां एक ओर योगी सरकार महिला सुरक्षा, संरक्षण व उनके विकास पर जोर दे रही है वहीं मिशन वात्‍सल्‍य के तहत प्रदेश के बच्‍चों की देखरेख, संरक्षण और उनके पुनर्वासन पर तेजी से काम कर रही है. महिला कल्याण बाल विकास विभाग की ओर से आने वाले 100 दिनों की कार्ययोजना तैयार कर ली गई है. विभाग की ओर से मिशन वात्‍सल्‍य में बाल देखरेख संस्थाओं व किशोर न्याय बोर्डो एवं बाल कल्याण समितियों हेतू एमआईएस पोर्टल की शुरुआत जून में की जाएगी. एमआईएस पोर्टल योजना का पारदर्शी रूप में संचालन किया जाएगा.  योजना से जुड़े सभी भौतिक और वित्तिय सूचनाएं ऑनलाइन प्राप्त होने से योजना संचालन का प्रभावी पर्यवेक्षण व समीक्षा संभव हो सकेगी.

संस्‍थाओं में निवासित बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा व कौशल विकास से जुड़े  डेटा का डिजिटाइजेशन किया जाएगा. बालकों की देखरेख, संरक्षण व पुनर्वासन का प्रभावी पर्यवेक्षण होगा. इसके साथ ही बाल कल्याण समिति व किशोर न्याय बोर्ड के कार्यों की प्रभावी समीक्षा भी की जाएगी. विभाग की ओर से जनपद शांहजहांपुर में 07 करोड़ की लागत से तैयार होने वाले नवीन भवन में 50 की क्षमता के राजकीय सम्‍प्रेक्षण गृह का लोकार्पण किया जाएगा.  जिससे प्रदेश के राजकीय सम्‍प्रेक्षण गृहों में क्षमता से अधिक संवासियों के आवासित रहने की समस्‍या का समाधान इस संस्‍था के संचालन से होगा.

  मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से मिल रहा बच्‍चों को लाभ

यूपी मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत विभाग की ओर से कोविड योजना में कुल 11049 बच्‍चे लाभान्वित हुए. इस योजना के तहत सामान्‍य योजना से कुल 5284, कोविड योजना में 480 अनाथ बच्‍चे, एकल माता पिता वाले 10569 बच्‍चे, सामान्‍य योजना में कुल 295 अनाथ बच्‍चे, सामान्‍य योजना के तहत 4989 एकल माता पिता वाले बच्‍चे लाभान्वित हुए हैं.

इस दिन शुरु होंगी Anupama-अनुज की शादी की रस्में, सामने आया प्रोमो

सीरियल अनुपमा (Anupama) की टीआरपी जहां पहले नंबर पर बनी हुई है तो वहीं मेकर्स सीरियल को दिलचस्प बनाने का एक भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं. इसी के चलते मेकर्स ने सीरियल का नया प्रोमो रिलीज कर दिया है, जिसमें अनुपमा (Rupali Ganguly) की शादी का जश्न शुरु होता नजर आ रहा है. आइए आपको दिखाते हैं नया प्रोमो…

इस दिन शुरु होगीं शादी की रस्में

 

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सीरियल में इन दिनों बा और वनराज शादी को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए नजर आ रहे हैं. हालांकि तोषू और पाखी ने अपनी मां का साथ देने की ठान ली है. इसी बीच सीरियल के नए प्रोमो में अनुपमा की शादी की रस्मों की डेट सामने आ गई है. दरअसल, प्रोमो में अनुपमा मन ही मन सोचती हुई दिख रही है कि उसकी शादी में सिर्फ और सिर्फ समर ही शामिल होगा. लेकिन उसके तीनों बच्चे और किंजल ब्रेकफास्ट बनाकर अनुपमा को खुश करते हुए नजर आ रहे हैं. वहीं अनुपमा को नई दुल्हन होने की बात कहते नजर आ रहे हैं. इसी के साथ प्रोमो में शादी की रस्मों की शुरुआत 4 मई से होने की बात कही गई है.

बापूजी को आएगा हार्ट अटैक

सीरियल के लेटेस्ट ट्रैक की बात करें तो बापूजी समेत पूरा परिवार अनुज के घर पर शगुन की रस्म करने जाएगा. हालांकि बा और वनराज घर पर ही रहेंगे. दूसरी तरफ बा, अनुपमा को एक बार फिर खरी खोटी सुनाएगी. हालांकि अनुपमा उन्हें करारा जवाब देगी. इसी बीच अनुज के घर पर सभी जश्न मनाते दिखेंगे. वहीं अपकमिंग एपिसोड में मालविका और देविका समेत सभी लोग अनुज के साथ मुझसे शादी करोगी… गाने पर डांस करते दिखेंगे. वहीं पाखी और तोशु को अनुज के साथ रस्में करते देख वनराज को जलन होगी. इसी दौरान बापूजी को हार्ट अटैक आ जाएगा. इसी के साथ देखना होगा कि क्या बा और वनराज शादी के लिए मानेंगे.

 

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जनसंख्या कानून और महिलाएं

सरकार ने जापान और चीन से सबक लेते हुए जनसंख्या नियंत्रण कानून को अब निरर्थक मान लिया है. कुछ भारतीय जनता पार्टी सरकारों ने कानून पास किए हैं जो 2 से ज्यादा बच्चे होने पर बहुत सी सुविधाएं छीनते हैं और एक तरह से उस तीसरे बच्चे को अपराधी मान लेते हैं जिस ने न अपनी इच्छा से जन्म लिया, व कुछ गलत किया.

भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों में कूटकूट कर भर दिया गया है कि मुसलमानों को 4 शादियों की छूट है और वे दर्जनों बच्चे पैदा करते हैं. यह बात तर्क की नहीं अंधेपन की है, उन बेवकूफों की जो 2+2 करना नहीं जानते. उन से पूछो कि अगर एक मुसलिम मर्द की 4 बीवियां हैं तो क्या वहां 4 गुने औरतें भी हैं तो उन का खत्म नहीं और होगा. जैसे ले चलो चावड़ी बाजार हजूम दिख जाएगा.

भारतीय जनता पार्टी के अंधभक्त वैसे भी तर्क का उत्तर उसी तरह देते हैं जैसे रामदेव पैट्रोल के दामों के सवाल पर भडक़ते हैं. एक पत्रकार ने पूछा कि आप ने तो 35 रुपए लीटर पैट्रोल दिलाने को कहा था, कहां है वह. तो उस ने जवाब दिया कि तू ठेकेदार है क्या सवाल पूछने का.

तर्क का उत्तर तथ्य से देना न पौराणिक परंपरा न आज है और इसलिए आश्चर्य है कि अपनी पार्टी की राज्य सरकारों के कानूनों पर बिना टिप्पणी किए केंद्र सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण कानून से पल्ला झाड़ लिया.

जनसंख्या कानून की आज कोई आवश्यकता नहीं रह गई क्योंकि कामकाजी औरतें खुद एक या दो से ज्यादा बच्चे नहीं चाहतीं और कानूनी या गैरकानूनी गर्भपात तक करा आती है. अगर गर्भनिरोधक …..और गुलाम हो जाएं तो शायद अब एक बच्चा भी पैदा न हो. क्योंकि 35-40 की आयु से पहले कोई औरत बच्चा चाहती ही नहीं हैं चाहे बाद में डाक्टरों को इलाज और आईवीएच की सुविधा का लाखों खर्च करती फिरे.

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भ्रम भंग

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Summer Special: शादी से बचना है तो जाए यहां

दुनिया में दो प्रकार के लोग हैं एक वो जो अपनी शादी के बारे में जानकार बहुत खुश होते हैं और एक वो जो अपनी शादी का नाम सुनते ही भागते हैं. जिन्हे शादी को लेकर उत्सुकता होती यही उनके मन में लड्डू फूटते हैं न जाने क्या क्या सपने वे सोच लेते है, लेकिन जो लोग शादी नहीं करना चाहते वे इससे बचने के उपाय ढूंढते रहते हैं. ‘शादी कब करोगे?’ ये प्रश्न यूं तो आम है. पर ऐसे लोगों को इस प्रश्न से बहुत चिढ़ होती है.

आज कुछ ऐसे जगहों के बारे में जानते हैं जहां जाते ही आप अपनी ही एक दुनिया बना लेंगे, वहां की वादियों में खो जायंगे और शादी के प्रश्न आप तक पहुंच नहीं पायेंगे.

1. तवांग, अरुणाचल प्रदेश

सबसे बड़ी बात यह है कि, तवांग तक पहुंचना अपने आप में ही बहुत बड़ा कार्य है. यहां आपका पीछा कर पाना किसी के लिए नामुमकिन है. तवांग अरुणाचल प्रदेश की छुपी हुई खूबसूरती है. यहां का जबरदस्त परिदृश्य और यहां की शानदार यात्रा आपके शादी के सारे विचारों को भूलने में तुरंत मदद करेगी.

2. फुगतल मठ, लद्दाख

आप ऐसी जगह और कहीं नहीं आसानी से ढूंढ पाएंगे. लुंग्नाक घाटी के पहाड़ों के चट्टानों में खोद कर बनाए हुए फुगतल मठ मधुमक्खी के छत्ते की तरह प्रतीत होते हैं. इस प्राचीन मठ के ट्रेक पर जाना आपके लिए बहुत ही आसान होगा. इस मठ को अच्छी तरह से जानना और इसके किसी एक प्रार्थना घर में बैठ कर ध्यान लगाना, आपको सारे बेकार विचारों और लोगों से दूर शांति का एहसास कराएगा. पहाड़ के इस गुफा जैसे मठ में आपको कोई आसानी से ढूंढ भी नहीं पाएगा.

3. मॉफ्लांग, मेघालय

जंगल दुनिया का सबसे रहस्यमय स्थान होता है. मॉफ्लांग शिलोन्ग के पास ही एक पवित्र वन होने के लिए जाना जाता है. वहां पर रहने वाले जनजाति के लोगों का मानना है कि यह वन उनकी और उनकी ज़मीन की रक्षा करता है. तो आपको ऐसा नहीं लगता की यह जगह आपको भी सुरक्षित रखेगी? तो आप अपना सामान बांध लीजिए और तैयार हो जाइए मेघालय के मंत्रमुग्ध कर देने वाले स्थान और इसके विरासत गांव मॉफ्लांग की सैर पर जाने के लिए. यह यात्रा आपके सारे नेगेटिव थॉट्स को आप से दूर कर देगी.

4. बैरेन आइलैंड, अंडमान

यह आपके मज़े करने का समय है और बैरेन आइलैंड से अच्छी जगह आपके मज़े के लिए और कोई नहीं होगी. दक्षिण एशिया का यह ज्वालामुखी द्वीप स्कूबा डाइविंग के लिए भी सबसे ज़बरदस्त और विशाल लोकेशन है. बैरेन आइलैंड के चारों तरफ पानी के अंदर की दुनिया अंडमान द्वीप की एक जादुई दुनिया है. यहां डुबकी लगाइए और पानी में शांति का अनुभव करिए. बैरेन आइलैंड में लोगो की चहल पहल बहुत कम होती है और यह शादी से बचने के लिए आपके लिए सबसे बेस्ट जगह है.

5. कच्छ का रण, गुजरात

दूर दूर तक सफ़ेद रेत का मरुस्थल और डूबते सूरज का मनोरम दृश्य आपको एक अलग ही काल्पनिक दुनिया में ले जाएगा. कच्छ का रण बहुत सारे सरप्राइज़ेस से भरा पड़ा है. कच्छ के रण का क्षितिज और मरुस्थल की रंगारंग संस्कृति, गुजरात में यात्रा करने की सबसे प्रमुख जगह है. तो अपने अविवाहित और अकेले होने का फायदा उठाइए और सफेद मरुस्थल के हर एक कोने को छान मार मज़े लीजिए.

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मेरे बेटे को बारबार निमोनिया क्यों हो रहा है?

सवाल-

मेरे बेटे की उम्र 4 साल है. उसे 3 बार निमोनिया हो चुका है. उसे बारबार निमोनिया क्यों हो रहा है और यह कितना खतरनाक है?

जवाब-

5 साल से छोटे बच्चों की इम्यूनिटी कम होती है. इसलिए उन के संक्रमण का शिकार होने की आशंका अधिक होती है. बच्चों में वायरस से होने वाले निमोनिया के मामले अधिक सामने आते हैं. बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए पीसीवी वैक्सीन लगाया जाता है. अगर आप ने अपने बच्चे को नहीं लगवाया तो जरूर लगवाएं. बच्चे की साफसफाई का ध्यान रखें. जब भी जरूरी हो उस के हाथ धुलवाएं. अपने बेटे को ऐसे लोगों से दूर रखें जो बीमार हों या जिन्हें श्वसन मार्ग का संक्रमण हो. आप इन बातों का ध्यान रखेंगी तो आप के बच्चे के लिए निमोनिया की चपेट में आने का खतरा कम हो जाएगा. आप किसी अच्छे बालरोग विशेषज्ञ से भी इस बारे में सलाह ले सकती हैं.

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मां का दूध शुरुआत से ही इम्यूनिटी को बूस्ट करने वाली ऐंटीबौडीज से भरपूर होता है. कोलोस्ट्रम, जो ब्रैस्ट मिल्क की पहली स्टेज कहा जाता है, ऐंटीबौडीज से भरा होता है. यह गाढ़ा व पीले रंग का होने के साथसाथ प्रौटीन, फैट सोलुबल विटामिंस, मिनरल्स व इम्मुनोग्लोबुलिंस में रिच होता है. यह बच्चे की नाक, गले व डाइजेशन सिस्टम पर प्रोटैक्टिव लेयर बनाने का काम करता है, जिसे अपने बच्चे की इम्यूनिटी को बूस्ट करने के लिए जरूर देना चाहिए.

फौर्मूला मिल्क में ब्रैस्ट मिल्क की तरह पर्यावरण विशिष्ट ऐंटीबौडीज नहीं होती हैं और न ही इस में शिशु की नाक, गले व आंतों के मार्ग को ढकने के लिए ऐंटीबौडीज यानी फौर्मूला मिल्क बेबी को कोई खास प्रोटैक्शन देने का काम नहीं करता है. इसलिए शिशु के लिए मां का दूध ही है सब से उत्तम व हैल्दी.

वर्ल्ड ब्रैस्ट फीडिंग वीक

वर्ल्ड ब्रैस्ट फीडिंग वीक दुनियाभर में 1 से 7 अगस्त तक मनाया जाता है, जिस का उद्देश्य ब्रैस्ट फीडिंग के प्रति मां व परिवार में जागरूकता पैदा करना होता है. साथ ही मां के पहले गाढ़े दूध के प्रति भ्रांतियों को भी दूर किया जाता है. इस में बताया जाता है कि जन्म के पहले घंटे से ही शिशु को मां का दूध दिया जाना चाहिए क्योंकि यह बच्चे के लिए संपूर्ण आहार होता है.

मां को दूध पिलाने में उस के परिवार, डाक्टर, नर्स को भी अहम योगदान देना चाहिए क्योंकि ब्रैस्ट फीड न सिर्फ बच्चे को बल्कि मां को भी बीमारियों से बचाने में मदद करता है. रिसर्च के अनुसार अब ब्रैस्ट फीडिंग के प्रति महिलाएं भी इस के महत्त्व को समझते हुए जागरूक हो रही हैं.

पूरी खबर पढ़ने के लिए- सुरक्षा कवच है मां का दूध

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz   सब्जेक्ट में लिखे…  गृहशोभा-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

समझें थायराइड के संकेत

था यराइड ग्रंथि शरीर की एक छोटी सी, लेकिन महत्त्वपूर्ण ग्रंथि है. इस के द्वारा स्रावित हारमोन शरीर की कई प्रमुख गतिविधियों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. जब इस ग्रंथि द्वारा स्रावित हारमोन असंतुलित हो जाते हैं तो उस का प्रभाव पूरे शरीर पर पड़ता है. जब ऐसा होता है तो शरीर कुछ संकेत देता है, लेकिन अकसर लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं क्योंकि इस तरह के संकेत कई और स्वास्थ्य समस्याओं में भी दिखाई देते हैं.

खानपान की गलत आदतों और खराब जीवनशैली के कारण युवा महिलाएं भी बड़ी तेजी से थायराइड से संबंधित गड़बडि़यों की शिकार हो रही हैं. थायराइड ग्रंथि से संबंधित समस्याएं महिलाओं और पुरुषों दोनों को हो सकती हैं. लेकिन इस के 60-70% मामले महिलाओं में ही सामने आते हैं. मीनोपौज की स्थिति में पहुंची महिलाओं में थायराइड की गड़बड़ी से ग्रस्त होने का खतरा युवा महिलाओं की तुलना में दोगुना हो जाता है.

थायराइड ग्रंथि

थायराइड एक तितली के आकार की छोटी सी ग्लैंड है जो गरदन के निचले हिस्से में पाई जाती है. इस का वजन तो औसतन 30 ग्राम होता है, लेकिन इस के कार्य बहुत महत्त्वपूर्ण हैं. थायराइड ग्रंथि को मस्तिष्क में स्थित पिट्युटरी ग्रंथि नियंत्रित करती है. यह थौरौक्सिन (टी3), ट्राईडोथौयरोनिन (टी4) और टीएसएच हारमोंस का स्राव करती है.

ये हारमोन शरीर की मैटाबोलिक क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं. इसलिए इसे ‘मैटाबौलिज्म मैनेजर’ की संज्ञा दी जाती है. मैटाबौलिज्म की दर को स्थिर बनाए रखने के लिए इन हारमोंस का उचित मात्रा में स्रावित होना आवश्यक है. शरीर में इन हारमोंस के स्तर के कारण मैटाबौलिज्म की ‘दर तेज’ या ‘धीमी’ हो सकती है.

थायराइड ग्रंथि से संबंधित समस्याएं

थायराइड ग्रंथि से स्रावित हारमोंस में असंतुलन आने पर 2 तरह की समस्याएं हो जाती हैं:

हाइपरथायरोइडिज्म

हाइपरथायरोइडिज्म यानी थायराइड ग्रंथि की कार्यप्रणाली कम हो जाना. इस में थायराइड ग्रंथि इतनी सक्रिय नहीं रहती कि वह शरीर की आवश्यकता जितने हारमोंस स्रावित कर पाए. इन हारमोंस के कम स्राव से शरीर की मैटाबौलिक क्रियाएं धीमी पड़ जाती हैं.

लक्षण

– वजन बढ़ना.

– बाल झड़ना.

– नींद ज्यादा, दिनभर सुस्ती महसूस करना.

– ठंड ज्यादा लगना.

– शरीर फूल जाना.

– त्वचा रूखी हो जाना.

– पैरों में सूजन आना.

– मासिकधर्म के दौरान हैवी ब्लीडिंग होना

– कब्ज होना.

आप में ये सब लक्षण दिखें जरूरी नहीं है. इन में से 2-3 या फिर सभी लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं.

उपचार

हाइपरथायरोइडिज्म का उपचार केवल दवाइयों से ही संभव है. इस के लिए रोज कृत्रिम थायराइड हारमोन लेना होता है. मुंह से ली जाने वाली यह दवा शरीर में हारमोंस के स्तर को पर्याप्त बनाए रखती है और लक्षणों में भी सुधार आने लगता है.

उपचार न कराने से होने वाली जटिलताएं

अगर हाइपरथायरोइडिज्म का उपचार न कराया जाए तो कोलैस्ट्रौल का स्तर और रक्तदाब बढ़ जाता है, जिस से कार्डियोवैस्क्युलर डिज होने का खतरा बढ़ जाता है. गर्भधारण करने में परेशानी आती है. मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है और अवसाद की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है.

हाइपरथायरोइडिज्म

हाइपर थायराइडिज्म में थायराइड ग्रंथि बहुत सक्रिय हो जाती है जिस से हारमोंस का स्राव सामान्य से अधिक मात्रा में होने लगता है. ये हारमोंस रक्त में घुल जाते हैं और कोशिकाओं के मैटाबौलिज्म को स्टिम्युलेट करते हैं.

लक्षण

– भूख अधिक लगने के बावजूद वजन कम होना.

– गरमी अधिक लगना और पसीना आना.

– दिल की धड़कनें तेज हो जाना.

– घबराहट होना.

– नींद आने में परेशानी होना.

– लूज मोशन होना.

– गर्भधारण करने में परेशानी होना.

– अगर गर्भधारण कर लिया है तो गर्भपात का खतरा होना.

– आंखों का उभर आना.

उपचार

उपचार इस पर निर्भर करता है कि समस्या कितनी गंभीर है, मरीज का स्वास्थ्य कैसा है और उसे कोई दूसरी बीमारी तो नहीं है. हाइपरथायरोइडिज्म केलिए 3 तरह के उपचार उपलब्ध हैं. रेडियोएक्टिव आयोडीन थेरैपी, ऐंटीथायराइड मैडिकेशंस और सर्जरी.

रेडियोऐक्टिव आयोडीन थेरैपी

रेडियोऐक्टिव आयोडीन थेरैपी में ओवरऐक्टिव थायराइड की कार्यप्रणाली को धीमा करने के लिए रेडियोऐक्टिव आयोडीन दी जाती है. रेडियोऐक्टिव आयोडीन थायराइड ग्रंथि द्वारा अवशोषित हो जाती है, जिस से थायराइड ग्रंथि थोड़ी सिकुड़ जाती है और हारमोंस का स्राव कम मात्रा में करने लगती है.

ऐंटीथायराइड मैडिकेशंस

ये दवाइयां थायराइड ग्रंथि को अधिक मात्रा में हारमोंस के स्राव से रोकती हैं. इस से धीरेधीरे लक्षणों में सुधार आने लगता है.

सर्जरी

सर्जरी के द्वारा थायराइड ग्रंथि को

निकाल दिया जाता है. आमतौर पर हाइपरथायरोइडिज्म के उपचार के लिए डाक्टर सर्जरी नहीं करते हैं. सर्जरी तभी की जाती है जब महिला गर्भवती हो और ऐंटीथायराइड मैडिसिन नहीं ले सकती है या मरीज को कैंसरयुक्त नोड्यूल है.

थायराइड टैस्ट

थायराइड फंक्शनिंग टैस्ट एक ब्लड टैस्ट है. इस के द्वारा यह पता लगाया जाता है कि आप की थायराइड ग्रंथि कितने बेहतर तरीके से काम कर रही है. इस में टी3, टी3आरयू, टी4 और टीएसएच टैस्ट शामिल हैं.

कब शुरू करें: 35 वर्ष के बाद

कितने अंतराल के बाद: साल में 1 बार, मगर कई डाक्टरों के अनुसार प्रतिवर्ष थायराइड की जांच कराना जरूरी नहीं है जब तक कि थायराइड से जुड़े कुछ सामान्य लक्षण दिखाई न दें.

-डा. सुंदरी श्रीकांत

निदेशक, इंटरनल मैडिसिन, क्यूआरजी सुपर

स्पैश्यलिटी हौस्पिटल, फरीदाबाद –

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एक्ट्रेस साक्षी तंवर से जानें मां का बच्चे की लाइफ पर कितना होता है प्रभाव

क्या एक माँ अपनी बेटी की हत्या होते देख सकती है? क्या वह इसका बदला आज की तारीख में नहीं लेगी ? फिल्म नहीं रियल लाइफ में भी क्या कोई माँ इसका विरोध कर उसे सजा देना नहीं चाहेगी, जो महिला को कमजोर समझने की गलती करते है?प्रशासन,समाज और परिवार भी उन महिलाओं का साथ नहीं देती और जलील करती है, ऐसे में उस माँ को क्या करने की जरुरत है?ऐसी ही कुछ बातों का जिक्र कर रही थी, प्रसिद्ध टीवी अभिनेत्री साक्षी तंवर जिनकी वेब सीरीज ‘माई’ रिलीज हो चुकी है, जिसमें उनके अभिनय को बहुत तारीफ़ मिल रही है.

अभिनेत्री साक्षी तंवर ने हमेशा ही अपनी किरदार को उम्दा अभिनय से सजीव किया है, जिसे दर्शक अपनी कहानी समझ बैठते है. धारावाहिक ‘कहानी घर घर की’ सीरियल में मुख्य भूमिका ‘पार्वती’ की निभाने वाली अभिनेत्री साक्षी तंवर को आज पूरा देश जानता है. इस धारावाहिक को देश के लगभग सभी तबकों में देखा गया और पार्वती लगभग हर घर की  हिस्सा बन गयी थी.अभिनेत्री साक्षी तंवर राजस्थान की है औरउन्हें बचपन से ही अभिनय की इच्छा थी, इसलिए उन्होंने पहले कॉलेज की नाटकों में भाग लेना शुरू किया. अभिनय की शुरुआत उन्होंने यही से किया था, लेकिन इसमें निर्माता एकता कपूर की एक बड़ी ब्रेक ने उन्हें टीवी इंडस्ट्री का स्टार बना दिया. इसके बाद से उन्होंने जो भी काम किये, सभी में सफल रही.

छोटा पर्दा ही नहीं, बड़े पर्दे पर भी उनके अभिनय की चर्चा है. साक्षी ने जीवन में कभी कोई प्लानिंग नहीं की, जो काम जैसे आता गया, उसे ग्रहण करती गयी. साक्षी अपने परिवार के बेहद करीब है और हर फैसले को लेने से पहले माता-पिता से चर्चा करती है. धारावाहिक ‘बड़े अच्छे लगते हो’ में उन्होंने राम कपूर के साथ एक किसिंग सीन देकर कंट्रोवर्सी की शिकार हुई, लेकिन वह इस ओर अधिक ध्यान नहीं देती.अभी वह सिंगल मदर बन चुकी है उन्होंने एक लड़की दित्या तंवर को अडॉप्ट किया है. विनम्र और हंसमुख स्वभाव की साक्षी Netflix पर वेब सीरीज ‘माई में मुख्य भूमिका माँ की निभाई है,जो अपनी बेटी की हत्या करने वाले को सबक सिखाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है. उनसे ज़ूम पर बात करना बहुत रोचक था, पेश है कुछ खास अंश.

सवाल – अभिनय की प्रेरणा कहाँ से मिली?

जवाब – मैं आईपी एस की तैयारी कर रही थी, साथ ही सॉफ्टवेर इंजीनियर का कोर्स कर रही थी और मैंने कभी अभिनय करने की कोशिश नहीं की थी, लेकिन नियति मुझे यहाँ ले आई है. मेरी दोस्त का एक म्यूजिक पर आधारित कार्यक्रम ‘अलबेला सुरबेला’ दूरदर्शन पर थी, उसकी को-एंकर नहीं आई, तो उन्होंने मुझे बुला लिया, उस समय मोबाइल नहीं थी. मैं दिल्ली में घर पर थी, उन्होंने मुझे बुलाया और मैंने उसे किया. यही से मेरी जर्नी शुरू हुई, क्योंकि मुझे देखकर लोगों ने ऑफर दिया और आज मैं यहाँ पर हूं.

सवाल – परिवार का सहयोग कितना रहा?

जवाब – परिवार का सहयोग हमेशा से रहा, इसलिए मैं इतने सालों तक काम कर पाई. मेरे परेंट्स से लेकर भाई-बहन, फ्रेंड्स सबका सहयोग किसी न किसी रूप में मिला है. सबकी सहयोग के बिना सफलता पूर्वक काम करना मुश्किल होता है.

सवाल – इस वेब सीरीज को करने की खास वजह क्या रही?

जवाब – इसकी थीम मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी, क्योंकि किसी भी माँ के लिए बच्चे की देख-भाल कितनी अहम होती है और बच्चे को कोई कुछ भी कह दें , तो माँ सबसे पहले लड़ने के लिए तैयार हो जाती है. इसकी कहानी भी वैसी ही प्रेरणादायक सभी माओं के लिए है. इसमें मेरी बेटी को मेरी आँखों के सामने एक ट्रक वाला आकर कुचल देता है, जिसे सभी एक दुर्घटना कहते है,लेकिन माँ को नहीं लगता है कि वह एक दुर्घटना है और वह पता करने की कोशिश कर रही है कि उसकी बेटी के साथ ऐसा क्यों हुआ? जब मुझे इसकी कहानी सुनाई गई तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए थे, क्योंकि किसी भी माँ के लिए ऐसी घटना  अकल्पनीय होता है, उसके आँखों के सामने बच्चे की मृत्यु हो जाती है. इस चरित्र का ग्राफ बहुत ही कमाल का है. एक अच्छी माँ जो सबको सम्हाल रही है, कैसे इतनी क्रूर बन जाती है,उसे दिखाया गया है.

सवाल –रियल लाइफ में आप एक सिंगल मदर है, लेकिन ऐसी माँ की भूमिका निभाना कितना चुनौतीपूर्ण था?

जवाब –निर्देशक के साथ बहुत सारे  वर्कशॉप हुए, मुख्य दृश्यों को लेकर चर्चा की गयी. साथी कलाकारों के साथ मिलकर उनके सुझाव लिए, इससे अभिनय करना आसान हो गया, क्योंकि एक सीधी-सादी औरत को क्रूर बनना आसान नहीं था.

सवाल – इस भूमिका से तो आप रिलेट नहीं कर पाती, लेकिन क्या आपके माँ बनने के बाद से इमोशन्स को समझने में आसानी हुई?

जवाब – किसी कलाकार के लिए किसी किरदार को निभाने के लिए वैसा बनने की जरुरत नहीं होती, क्योंकि मैंने बहुत कम उम्र में माँ, नानी, दादी की भूमिका निभाई है. एक कलाकार के लिए वही चरित्र चैलेंजिंग होती है, जिसका उससे कोई नाता न हो. यही अभिनय इंडस्ट्री की एक ब्यूटी है, जिसमे आप खुद से बड़ा और छोटा दोनों भूमिकाएं निभा सकते है. ये कहानी एक फिक्शनल चरित्र है और एक काल्पनिक कथा है, जिसमे बच्चे को तकलीफ पहुँचाने वाले अपराधी की सूरत क्या हो सकती है, इसे बताने की कोशिश की गयी है.

सवाल – बेटी और काम के साथ सामंजस्य कैसे कर रही है?

जवाब – बेटी के साथ बहुत अच्छा समय बीत रहा है. अभी मुझे समय भी अधिक मिल जाता है, क्योंकि अभी मैं टेलीविजन पर काम नहीं करती. बीते दो साल कोविड में मैंने बेटी और पेरेंट्स के साथ काफी समय बिताया. इसके अलावा थोड़ी अब बड़ी हो चुकी है, इसलिए थोड़ी समझदार भी है. इसके अलावा कोविड की वजह से माई फिल्म की शूटिंग थोड़े – थोड़े समय बाद हो रही थी, इससे समय काफी मिला.

सवाल – आप अपनी जर्नी से कितना संतुष्ट है, कोई मलाल रह गया है क्या?

जवाब –मैं अपनी पहली शो से ही संतुष्ट हूं, कभी मैंने इतना सोचा भी नहीं था, जितना मुझे मिला है. जो भी मेरे साथ होता गया, मैं करती गयी और दर्शकों का साथ मिलता रहा, इसलिए कोई रिग्रेट नहीं है. देखा जाय तो मैं अपनी पहली शो से ही बहुत संतुष्ट थी. मैं दर्शकों की शुक्रगुजारहूं, क्योंकि उन्होंने मेरी हर अभिनय को देखा, सराहा और मुझे हमेशा अच्छा करने के लिए प्रेरित किया.

सवाल –महिलाएं इतनी आगे बढ़ जाने के बावजूद भी उन्हें अत्याचार, घरेलू हिंसा, रेप जैसी वारदातों का सामना करना पड़ रहा है,इसकी जिम्मेदार किसे मानती है, समाज, परिवार या धर्म?

जवाब – इन समस्याओं से निपटने के लिए सबको समग्र रूप से काम करने की जरुरत है. किसी एक अकेले को जिम्मेदार मानना ठीक नहीं. समग्र रूप से काम करने पर उसका समाधान भी समग्र ही होगा.

सवाल – कई बार आपको कंट्रोवर्सी का सामना करना पड़ा, इसे कैसे लिया?

जवाब –जब आप किसी डेस्टिनेशन के लिए सफर करते है, तो रास्ते में आये स्टेशन को पीछे छोड़ देना पड़ता है और मैं भी वैसा ही करती हूं.

सवाल – आपका अपनी माँ से रिश्ता कैसा रहा है, आप क्या मिस करती है?

जवाब –माँ बेटी के रिश्ते से बढ़कर कोई दूसरा रिश्ता नहीं होता. इसे मैं तब अच्छी तरह से समझ पाई, जब मैं खुद माँ बनी. मेरी माँ सबको खाना खिलाकर खुद अंत में खाती थी, अगर किसी कारणवश घर आने में देरी होती थी, तो भी वह इन्तजार करती थी. मैंने कई बार उन्हें खा लेने के लिए कहा,पर उन्होंने हमेशा कहा कि तुम जिस दिन माँ बनोगी उस दिन इसे समझ पाओगी, ये वाकई सही था, आज मैं इसकी गहराई को समझती हूं. मैं बहुत खुशनसीब हूं, क्योंकि मैं अपनी परिवार के साथ रहती हूं. मेरी माँ और बेटी के साथ रहने का अनुभव बहुत अच्छा होता है.

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