Back to Office : ऐसे बैठाएं तालमेल

कोरोना वायरस के कारण औफिस क्या बंद हुए औफिस फ्रैंड्स की आपसी बातचीत ही कम हो गई. अब सिर्फ काम के सिलसिले में ही बात होती थी. औफिस में जो ग्रुप मस्ती होती थी वह अब न तो जूम मीटिंग में थी और न ही मैसेज में वह बात थी. ऐसा एहसास हो रहा था जैसे हम अपनों से काफी दूर हो गए थे. घर से काम होने के कारण वर्कलोड भी काफी बढ़ गया था, जिस कारण औफिस फ्रैंड्स से दिन में कई बार बात जरूर होती थी, लेकिन वह बात सिर्फ काम तक ही सीमित रहती थी. न घूमनाफिरना और न वह मस्ती, हम सभी उसे मिस कर रहे थे. मन ही मन यही सोच रहे थे कि काश फिर से औफिस खुल जाएं ताकि हम वही पुरानी मस्ती फिर से कर सकें.

आखिर फिर से धीरेधीरे जीवन पटरी पर आने लगा और औफिस भी खुलने लगे. एक दिन जूम मीटिंग के जरीए बौस से पता चला कि अगले हफ्ते से औफिस खुल रहे हैं. यह खबर सुन कर ऐसा लगा कि फिर से हमें खुली हवा में सांस लेना का मौका मिल रहा है.

काम के साथसाथ हम अब अपने औफिस फ्रैंड्स के साथ मस्ती भरे पल भी बिता पाएंगे, जोकि वर्क फ्रौम होम में संभव नहीं था. ऐसे में जब फिर लौट रहे हैं औफिस के पुराने दिन तो आपस में ट्यूनिंग बैठाने के लिए फिर से दोहराएं कुछ चीजों को ताकि कुछ सालों की दूरी कुछ ही समय में फिर दूर हो सके. तो जानिए इस के लिए क्या करें:

एकदूसरे को गिफ्ट्स दें

गिफ्ट लेना किसे पसंद नहीं होता है. ऐसे में जब आप इतने लंबे समय के बाद औफिस जा रहे हैं तो मन में ऐक्साइटमैंट तो बहुत होगी ही क्योंकि इतने दिनों बाद औफिस को देखेंगे, औफिस फ्रैंड्स से मिलेंगे, उन के साथ बातें करेंगे. ऐसे में जब आप उन से मिलें तो उन्हें यह कह कर गिफ्ट दें कि यह तेरे बर्थडे का गिफ्ट है, जो मैं तुम्हें दूर रहने के कारण दे नहीं पाई थी.

इस से आप की औफिस दोस्त को एहसास होगा कि अभी भी आप को उस का खयाल है. इस से फिर दोबारा से ट्यूनिंग बैठाने में आसानी होगी या फिर आप उस की पसंद की चीज गिफ्ट में दे कर पुराने दिनों की याद को फिर से ताजा कर सकते हैं.

टी टाइम में करें मस्ती

वर्क फ्रौम होम के दौरान जिस टी टाइम को आप मिस कर रहे थे, अब उसे फिर से जी लेने का समय आ गया है क्योंकि औफिस जो खुल गया है. रामू चाय की दुकान पर औफिस वर्क से ले कर पर्सनल टौपिक्स जो शेयर होते थे. ऐसे में अब जब आप औफिस लौट रहे हैं, तो टी टाइम को ऐंजौय करना न भूलें. यह सोच कर टी टाइम को न छोड़ें कि घर में तो हम ने टी टाइम लेना ही छोड़ दिया था.

जान लें कि टी टाइम से न सिर्फ आप खुद को फ्रैश फील करेंगे बल्कि इस के बहाने औफिस दोस्तों के साथ फिर खुल कर बातचीत होगी, हंसीमजाक होगा, पुराने दिन फिर लौट आएंगे और यह टी टाइम आपस में बौंडिंग को स्ट्रौंग बनाने में मदद करेगा.

लंच टाइम में लंच भी मस्ती भी

घर में तो जब मन करा तब लंच कर लिया और यह लंच भी काम के साथसाथ एक टेबल पर या बैड पर अकेले बैठ कर कर लिया. जो न तो खाने का आनंद लेने दे रहा था और न ही इस ब्रेक में हम मस्ती कर पा रहे थे. अगर थोड़ा रिलैक्स करने का सोचा भी तो भी हाथ में फोन पर या तो फेसबुक देख रहे होते थे या फिर व्हाट्सऐप अथवा कुछ और खंगालने में लगे रहते थे जो औफिस के लंच टाइम से बिलकुल अलग था, जिसे हम घर में मिस करने के अलावा कुछ नहीं कर सकते थे.

लेकिन अब जब आप का औफिस खुल गया है तो लंच टाइम में पहले की तरह दोस्तों के साथ कुछ ही मिनटों में लंच कर के मस्ती के लिए कभी पास की मार्केट में निकल जाओ या फिर लंच ब्रेक में मस्ती भरे पल स्पैंड करो, पुरानी यादों को बातों से ताजा करो. इस मस्ती से आप फिर से पहले की तरह एकदूसरे से जुड़ पाएंगे.

औफिस के बाद आउटिंग

पहले जब आप का औफिस खत्म हो जाता था और उस के बाद आप कभी औफिस के दोस्तों के साथ खाने के लिए कभी पास की लोकल मार्केट या फिर शौपिंग करने चले जाते थे. याद है न आप को वे दिन. लेकिन बीच में वर्क फ्रौम होम के कारण इस सब पर ब्रेक सा लग गया था.

लेकिन अब जब दोबारा औफिस जाने का मौका मिल रहा है तो औफिस वर्क के साथसाथ औफिस के बाद आउटिंग या फिर मस्ती जरूर करें. इस से एक तो औफिस के स्ट्रैस से छुटकारा मिलेगा, दूसरा आप अपने औफिस के फ्रैंड्स के साथ दिल खोल कर मस्ती भी कर पाएंगे.

बीचबीच में गौसिप

घर से जब हम काम कर रहे थे तो न तो काम का वह मजा आ रहा था क्योंकि बीचबीच में ऐंटरटेन करने वाले औफिस के दोस्त जो नहीं थे. साथ में बोरियत अलग थी. ऐसे में बैक टू औफिस आप को इस बोरियत से छुटकारा दिलाएगा क्योंकि अब काम के साथसाथ गौसिप, मस्ती, एकदूसरे की टांगखिंचाई जो होगी.

इसलिए खुद को रिफ्रैश करने के लिए काम के बीच में छोटेछोटे ब्रैक जरूर लें ताकि इस से काम के न्यू आइडियाज मिलने के साथसाथ आप थोड़ीथोड़ी देर में खुद को तरोताजा कर सकें क्योंकि सिर्फ और सिर्फ काम करते रहने से बोरियत होने के साथसाथ काम से इंटरैस्ट भी हटता है.

चटपटी बातों के लिए भी समय

वर्क फ्रौम होम जितना शुरू में अच्छा लग रहा था, उतना बाद में उस से ऊबने लगे. ऐसे में बैक टु औफिस इस बोरियत से तो आप को बाहर निकालेगा ही, साथ ही आप को औफिस के दोस्तों के साथ चटपटी बातों के लिए भी समय मिल जाएगा जैसे यार प्रिया छोटी ड्रैस में कितनी हौट लग रही है, देखो रोहन नेहा को इंप्रैस करने के लिए उस के आगेपीछे ही घूमता रहता है.

लग रहा है कि इस बार स्नेहा टारगेट को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक चली जाएगी, वगैरावगैरा. ऐसी बातें भले ही हमें शोभा नहीं देती हैं, लेकिन ऐसी बातें कर के मजा बहुत आता है.

रोमांस का भी मिलेगा मौका

अरे घर में बैठ कर काम करने से हम औफिस में रोमांस को काफी मिस करते थे. अब जब किसी को देख या मिलजुल ही नहीं रहे थे तो किसी पर क्रश होना तो बहुत दूर की बात थी. ऐसे में अब जब औफिस दोबारा से खुल गए हैं तो काम, मस्ती के साथसाथ रोमांस का भी फुल मजा ले सकेंगे जो आप में नई ऊर्जा का संचार करने का काम करेगा. आप जिसे पसंद कर रहे हैं उसे देख कर काम करने का मजा ही अलग होगा. भले ही यह मस्ती के लिए हो, लेकिन आप को ऐसा कर के खुशी बहुत मिलेगी.

नए लोगों को जानने का मौका

इस दौरान बहुत से लोगों ने औफिस छोड़ा होगा व उन के बदले बहुत से नए लोगों ने औफिस जौइन किया होगा, लेकिन वर्क फ्रौम होम के कारण आप की उन नए लोगों से बौंडिंग उतनी स्ट्रौंग नहीं बन पाई होगी, जितनी दूसरे लोगों से. ऐसे में बैक टू औफिस में आप को नए लोगों को जानने, उन्हें सम झने, उन से कुछ नया सीखने का भी मौका मिलेगा, साथ ही आप भी उन्हें काम के बेहतर टिप्स दे पाएंगे जो आप लोगों को एकदूसरे के करीब लाने का काम करेगा.

मोटिवेट करें

भले ही वर्क फ्रौम होम के कारण आप सभी काफी समय तक एकदूसरे से दूर रहे हैं, लेकिन अब जब दोबारा से औफिस जाने का मौका मिल रहा है तो एकदूसरे को पहले की तरह मोटिवेट करना न भूलें. उन्हें काम में हैल्प भी करें, उन्हें गुड वर्क के लिए मोटिवेट भी करें. इस से आप सब के बीच दोबारा से स्ट्रौंग बौंडिंग बनेगी. यह आप के स्ट्रैस को भी कम करने का काम करेगा क्योंकि जब आप किसी को मोटिवेट करेंगे तो वह भी आप को प्रोत्साहित किए बिना नहीं रहेगा, जो आप की प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने में मददगार साबित होगा. इस तरह आप फिर से बैक टु औफिस में ट्यूनिंग बैठा सकते हैं.

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Bigg Boss OTT फेम मिलिंद गाबा ने की गर्लफ्रैंड से सगाई, फोटोज वायरल

करण जौहर के रियलिटी शो ‘बिग बॉस ओटीटी’ कंटेस्टेंट  रह चुके सिंगर मिलिंद गाबा (Millind Gaba) ने हाल ही में अपनी गर्लफ्रेंड प्रिया बेनिवाल (Pria Beniwal) के साथ सगाई की है, जिसकी वीडियो और फोटोज सोशलमीडिया पर वायरल हो रही हैं. वहीं खबरे हैं कि दोनों इसी महीने की 16 तारीख को शादी के बंधन में बंधने वाले हैं. शादी से पहले आइए आपको दिखाते हैं गैंड सगाई की वायरल फोटोज और वीडियो…

सगाई में शामिल हुए कई सेलेब्स

 

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हाल ही में दिल्ली में मिलिंद गाबा और उनकी मंगेतर की इंगेजमेंट सेरेमनी हुई थी, जिसमें पंजाबी इंडस्ट्री के अलावा कई बड़े सितारे देखने को मिले हैं. वहीं इन सेलेब्स की लिस्ट में सपना चौधरी (Sapna Choudhary), सुयश राय, प्रिंस नरुला (Prince Narula) से लेकर गुरु रंधावा जैसे सितारों का नाम शामिल है.

 

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डांस करते नजर आए सेलेब्स

 

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मिलिंद गाबा और प्रिया बेनिवाल की सगाई में सेलेब्स जमकर डांस और गाना गाते नजर आएगा. दरअसल, सोशलमीडिया में वायरल वीडियो में मिलिंद गाबा ‘माय नेम इज लखन’ गाने पर दोस्तों के साथ डांस करते नजर आए तो वहीं मंगेत्तर प्रिया भी समा बांधती नजर आईं. इसके अलावा सोशलमीडिया पर मिलिंद गाबा ने अपनी सगाई की फोटोज भी फैंस के साथ शेयर की हैं, जिसमें वह मंगेत्तर प्रिया संग रोमांटक पोज देते हुए नजर आ रहे हैं. ब्लैक कलर के कोट और पैंट में जहां मिलिंद गाबा डैशिंग लग रहे हैं तो वहीं क्रीम कलर के हैवी लहंगे में प्रिया बेनिवाल बेहद खूबसूरत लग रही हैं.

 

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बता दें, मिलिंद गाबा पंजाबी इंडस्ट्री और बौलीवुड के जाने माने सिंगर हैं. वहीं वह करण जौहर के बिग बौस ओटीटी में नजर आ चुके हैं. हालांकि उनके अचानक शो से एलिमनेट होने के चलते करण जौहर भी काफी ट्रोलिंग का शिकार हुए थे. इसके अलावा शो में ही वह अपनी गर्लफ्रेंड संग रिश्ते और शादी के बारे में भी जिक्र कर चुके हैं.

 

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सई से दोबारा शादी करेगा विराट! पाखी को लगेगा झटका

स्टार प्लस के सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ (Ghum Hai Kisi Ke Pyaar Mein) की कहानी इन दिनों दिलचस्प मोड़ लेती नजर आ रही है. जहां सई  (Aishwarya Sharma) और विराट (Neil Bhatt) के बीच नजदीकियां बढ़ रही हैं तो वहीं पाखी और सम्राट का रिश्ता बिगड़ता नजर आ रहा है. वहीं सीरियल में राजीव की एंट्री के बाद सीरियल की कहानी में बदलाव देखने को मिलने वाला है. आइए आपको बताते हैं क्या होगी सीरियल की आगे की कहानी…

विराट को पता चला सच

 

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अब तक आपने देखा कि जहां शिवानी, राजीव को माफ करने का फैसला करती है तो वहीं सई दोनों की शादी कराने की कोशिश करती है. लेकिन विराट उसे जेल पहुचाने का प्लान बनाता है. हालांकि राजीव के मनाने पर विराट मान जाता है और सई का साथ देते हुए नजर आता है. इसी के चलते दोनों शिवानी और राजीव की शादी के बारे में चौह्वाण परिवार को बताते हुए नजर आने वाले हैं.

विराट से दोबारा शादी करेगी सई

अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि राजीव और शिवानी की दोबारा शादी के चलते विराट भंडारे का आयोजन करेगा. जहां वह पूरे परिवार को बुलाएगा ताकि शादी में पूरा परिवार हिस्सा ले, इसी के साथ राजीव भी सई और विराट को एक करने की कोशिश करेगा और दोनों की दोबारा शादी करवाता हुआ नजर आएगा. हालांकि सई और विराट की शादी से चौह्वाण परिवार को झटका लगेगा.

सई से सवाल पूछेगा विराट

इसके अलावा आप देखेंगे कि सई, विराट को उनकी शादी के कपड़े दिखाएगी, जिसे देखकर विराट निराश हो जाएगा और पूछेगा कि क्या वह फिर से उनकी शादी की प्लानिंग कर रही है. लेकिन सई कहेगी कि वह उनके जैसे 2 टूटे हुए दिलों को फिर से मिलाने और उनकी शादी कराने में विराट की मदद चाहती है, जिसे सुनकर विराट मुस्कुराएगा.

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जरूरत देश को सुधारने की है

जब भी कोई भारतीय मूल का जब पश्चिमी देशों में किसी ऊंची पोस्ट पर पहुंचता है, हमारा मीडिया जोरशोर से नगाड़ बजाता है मानो भारत ने कोई कमाल कर दिया सपूत पैदा कर के. असल में विदेशों में भारतीय मूल के लोगों को भारत से कोई खास प्रेम नहीं होता. वे भारतीय खाना खाते हों, कभीकभार भारतीय पोशाक पहन लेते हों, कोई भारतीय त्यौहार मना लेते हों वर्ना इन का प्रेम तो अपने नए देश के प्रति ही रहता है और गंदे, गर्म, बदबूदार, गरीब देश से उन का प्यार सिर्फ तीर्थों से रहता है. यह जरूर मानने वाली बात है कि भारतीय नेता तो नहीं पर धर्म बेचने वाले लगातार इन के संपर्क में रहते हैं और पौराणिक विधि से दान दक्षिणा झटक ले आते हैं.

ब्रिटेन के वित्तमंत्री रिथी सुचक की चर्चा होती रहती है पर उस का प्रेम कहां है यह उस का 1 लाख पौंड विचस्टर कालेज को दान देने से साफ है जहां वह पढ़ा था. रिथी के मातापिता ने उसे अमीरों के स्कूलों में भेजा था जहां अब फीस लगभग 50 लाख रुपए सालाना है.

यह क्या जताता है. यही कि इन भारतीय मूल के लोगों को अपनी जन्मभूमि से कोई प्रेम नहीं है. वे इंग्लैंड में पैदा हुए, वहीं पले और वहीं की सोच है. स्किन कलर से कोई फर्क नहीं पड़ता. धर्म का असर भी सिर्फ रिचुअल पूरे करने में होता है क्योंकि गोरे उन्हें खुशीखुशी ईसाई भी नहीं बनाते. हिंदू कट्टरों की तरह ईसाई कट्टरों की भी कमी नहीं है क्योंकि हिंदू मंदिरों की तरह ईसाई चर्चों के पास भी अथाह पैसा है और धर्म के नाम पर पैसा वसूलना एक आसान काम है. भगवा कपड़े पहन कर मनमाने काम कर के आलीशान मकानों में रहना भारत में भी संभम है, ब्रिटेन में भी, अमेरिका में भी. रिथी का इन अंधविश्वासों का कितना साया है पता नहीं भारत प्रेम न के बराबर है, यह साफ है. उसी मंत्रिमंडल में गृहमंत्री प्रीति पटेल भी इसी गिनती में आती है और अमेरिका की कमला हैरिस व निक्की हैली भी.

अपने भारतीय होने की श्रेष्ठता का ढिंढ़ोरा ज्यादा न पीटें जरूरत तो देश को सुधारने की है ताकि चीन जापान की तरह लोग अपनेआप आदर दें पर यहां तो हम सब कुछ मंदिर के नाम पर नष्ट करने में  लगे हैं.

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पीछा करता डर: नंदन का कौनसा राज था

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नमक कितना ज्यादा चीनी कितनी कम

जरा सी बारिश होते ही हमारा मन गरमगरम चाय के साथ तले व मसाला बुरके हुए पकौड़ों के लिए ललचा उठता है. नमकीन पकौड़ों पर बुरके मसाले का तीखापन जब चाय के मीठे से टकराता है, तो मीठी चाय भी तीखी, मगर फीकी लगने लगती है और हम बिना सोचेसमझे चाय का स्वाद बढ़ाने के लिए चाय में एक शुगर क्यूब या फिर 1 चम्मच चीनी और डाल देते हैं. यही नहीं, गरमी के मौसम में पता नहीं कितनी बार मीठीनमकीन मसालेदार शिकंजी पी लेते हैं. कोल्ड ड्रिंक और आइसक्रीम में तो जैसे हम सब की जान बसती है.

इस तरह हमें पता ही नहीं चलता कि वक्तबेवक्त खानेपीने की उठती तलब को शांत करने और अपनी जीभ का स्वाद बढ़ाने के लिए हम अनजाने में अपने खानपान में नमक, मिर्चमसालों और चीनी की मात्रा बेवजह ही बढ़ाते रहते हैं. चीनी, नमक और मसाले डालने से उस समय तो व्यंजन का स्वाद निश्चित रूप से कई गुना बढ़ जाता है, लेकिन इन के दुष्प्रभाव बाद में पता चलते हैं, जो बहुत ही कष्टप्रद होते हैं, क्योंकि ये गंभीर शारीरिक और मानसिक रोगों का कारण बनते हैं. वैसे शारीरिक और मानसिक विकास के लिए चीनी, नमक और मसालों का विशेष महत्त्व है. लेकिन एक सीमित मात्रा तक प्रयोग करने पर ही ये लाभ पहुंचाते हैं. इन का जरूरत से ज्यादा प्रयोग हमारे शरीर को फायदे के बजाय नुकसान पहुंचाता है. अध्ययन बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों से हमारे खानपान में चीनी, नमक और मसालों का सेवन कई गुना बढ़ा है.

आज हमारी दिनचर्या ही कुछ ऐसी हो गई है कि अपने खानपान में इन तीनों को कम करना सचमुच एक कठिन काम बन चुका है. इस का एक कारण डब्बाबंद खानपान है. 3-4 दशक पहले तक डब्बाबंद खानपान का चलन न के बराबर था, इसलिए समस्याएं इतनी नहीं थीं. दरअसल, डब्बाबंद खाने को लंबे समय तक सुरक्षित और फ्रैश रखने के लिए उस में सोडियम और चीनी अधिक मात्रा में डाली जाती है. पर आजकल डब्बाबंद खानपान का चलन जिस तरह से बढ़ा है, उसी का परिणाम हैं- उच्च रक्तचाप, अस्थमा, बढ़ता मोटापा और फैलती कमर जैसी परेशानियां.

आइए, हम आप को बताते हैं कि हमें नमक, चीनी और मसाले कितने और कैसे खाने चाहिए :

ज्यादा चीनी खतरे की घंटी

मीठा हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी है. इस से हमें शक्ति व ऊर्जा प्राप्त होती है. लेकिन जरूरत से ज्यादा मीठा खाने से वजन बढ़ सकता है. चीनी में कैलोरी की मात्रा अधिक होती है. वैसे चीनी में कोई विटामिन, मिनरल या  पौष्टिक तत्त्व नहीं होता. यह मानव शरीर को सिर्फ ऊर्जा व शक्ति प्रदान करती है और वह भी 1 ग्राम में 4 कैलोरी की दर से. इस तरह अधिक मिठाइयां, ठंडे पेय, बिस्कुट व चाकलेट लेने से आहार का संतुलन बिगड़ जाता है और आहार की पौष्टिकता नष्ट हो जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार प्रतिदिन 1,600 कैलोरीयुक्त आहार लेने वाला युवा व स्वस्थ व्यक्ति प्राकृतिक पदार्थों से प्राप्त होने वाली चीनी के अतिरिक्त 6 छोटे चम्मच यानी 24 ग्राम चीनी बिना किसी जोखिम के ले सकता है. इसी तरह 2,200 कैलोरीयुक्त आहार लेने वाला व्यक्ति 12 चम्मच यानी 48 ग्राम चीनी ले सकता है. मीठे के नाम पर हम ज्यादा कोल्ड ड्रिंक्स और आइसक्रीम आदि लेते हैं, जो सिर्फ कैलोरीज बढ़ाते हैं, शरीर को किसी भी प्रकार का पोषण नहीं देते. कोल्ड ड्रिंक्स की जगह सादा ठंडा पानी, डब्बाबंद फू्रट जूस की जगह आधा कप 100% ताजे फलों का रस और खाने के बाद मीठे की जरूरत महसूस हो तो खीर या हलवे की जगह ताजे फल लेने चाहिए.

शरीर में जरूरत से कम या ज्यादा चीनी होने पर आप के शरीर में खतरे की घंटी बजने लगती है. रक्त में चीनी की मात्रा बढ़ने पर प्यास और भूख बहुत लगती है और पेशाब भी बारबार आता है. दूसरी तरफ अगर आप खाने के समय में जरूरत से ज्यादा गैप रखते हैं, कम खाते हैं, व्यायाम ज्यादा करते हैं या फिर खाली पेट अलकोहल का सेवन करते हैं, तो रक्त में चीनी का स्तर गिरने से आप बेजान सा महसूस करते हैं.

नमक का प्रयोग

नमक हमारे आहार का एक अनिवार्य हिस्सा है. भारत में प्रति व्यक्ति नमक का खर्च 15 ग्राम प्रतिदिन है. ‘द साइंटिफिक कमेटी औन न्यूट्रीशियंस’ हर व्यक्ति को प्रतिदिन 4 ग्राम नमक लेने की सलाह देती है. सोडियम हमारे शरीर के विकास के लिए अत्यंत जरूरी तत्त्व है, लेकिन सोडियम का जरूरत से ज्यादा प्रयोग एक नहीं अनेक समस्याओं को जन्म देता है. जैसे, अस्थमा, छाती में जलन, अस्थि रोग, सूजन, उच्च रक्तचाप आदि. इन सब रोगों से बचने के लिए हमें नमक का प्रयोग बहुत सोचसमझ कर करना चाहिए. शरीर में नमक की कमी की वजह से मांसपेशियों में ऐंठन, सिर चकराना और पैरों आदि में सूजन जैसी परेशानियां हो सकती हैं, जो आगे चल कर गंभीर स्नायु रोग का रूप धारण कर सकती हैं. आहार विशेषज्ञा शायस्ता आरजू बताती हैं कि कम नमक खाने वाला व्यक्ति बहुत ज्यादा पानी पी लेता है, तो वह वाटर इंटौक्सिकेशन का शिकार हो सकता है. नमक कई प्रकार का होता है, लेकिन आमतौर पर घरों में पैक्ड आयोडाइज्ड नमक ही प्रयोग होता है. बाजार में कई प्रकार के नमक उपलब्ध हैं, लेकिन किसी भी प्रकार के नमक के प्रयोग से पहले उस की विशेषताओं के बारे में जान लेना चाहिए.

नमक नमक में अंतर

समुद्री नमक : यह आम नमक की तरह ही पोषक होता है. इस नमक में पोटैशियम, मैग्नीशियम और आयोडीन जैसे तत्त्व प्राकृतिक रूप से मौजूद रहते हैं. यह देखने और स्वाद में दूसरे नमक से भिन्न होता है. समुद्री नमक में आम नमक के मुकाबले खनिजों की मात्रा अधिक होती है और इस में समुद्र की महक महसूस की जा सकती है. 

अपरिष्कृत पहाड़ी नमक : इस नमक में विभिन्न प्रकार के 84 से अधिक खनिज पाए जाते हैं, लेकिन इस का प्रयोग खाद्यपदार्थों में स्वाद या महक के लिए नहीं किया जाता. आमतौर पर भुने आलू, मीट, सी फूड या पोल्ट्री फूड से बने व्यंजनों में इस का प्रयोग किया जाता है.

काला नमक : इस का प्रयोग विशेष रूप से स्वाद और महक के लिए किया जाता है, लेकिन ध्यान रहे इस के अधिक प्रयोग से जोड़ों में दर्द, खून की कमी, थकान और रक्त नलिकाओं में अवरोध की शिकायत हो सकती है. एक अध्ययन से पता चला है कि जो महिलाएं गर्भावस्था के दौरान काले नमक का प्रयोग अधिक करती हैं, उन के बच्चे कमजोर पैदा होते हैं और बीमारियों से लड़ने की उन की क्षमता दूसरे बच्चों के मुकाबले कम होती है.

मसालों का प्रयोग

मसाले भोजन को सुगंधित और स्वादिष्ठ बनाने के साथसाथ खाने को रिच लुक प्रदान करते हैं. चीनी, नमक और फैट का आदर्श विकल्प हैं- जड़ीबूटियां और मसाले. मसालों के महत्त्व को रेखांकित करते हुए आहार विशेषज्ञा विजयलक्ष्मी आयंगर बताती हैं, ‘‘मसालों में फाइटो न्यूट्रीऐंट्स होते हैं, जो हमारे शरीर के हैल्दी सैल्स को कैंसर सैल्स में परिवर्तित होने से रोकते हैं.’’ नमक की तरह ही कोई भी पैमाना मसालों के सुरक्षित प्रयोग और विषाक्त तत्त्वों के बारे में सही और पूरी जानकारी नहीं देता. यह बात 100% सही है कि कम मात्रा में और नियमित अंतराल से उपयोग किए गए मसाले हमें सुरक्षा प्रदान करते हैं. मसाले हमें छाती में जलन, आंखों में चुभन, बढ़ते कोलैस्ट्रौल, कैंसर, मधुमेह, जोड़ों के दर्द और अलसर जैसी बीमारियों से राहत पहुंचाते हैं. कई वर्षों से मसालों का प्रयोग बुखार, पेट दर्द, त्वचा रोग, बदहजमी, गले के संक्रमण, सर्दीजुकाम आदि के उपचार के लिए होता आ रहा है. आहार विशेषज्ञा कंचन सग्गी का कहना है, ‘‘मसाले किसी भी बीमारी को पूरी तरह से ठीक तो नहीं कर सकते, लेकिन उस बीमारी की गंभीरता को काफी हद तक कम कर सकते हैं और अस्थाई रूप से आराम भी पहुंचाते हैं.’’

मसालों की खूबियां

लौंग : दांत दर्द से लौंग तुरंत राहत प्रदान करती है. यह एक बहुत अच्छे माउथ फ्रैशनर का काम भी करती है.

अदरक या सोंठ : कोलैस्ट्रौल कम करने से ले कर रक्तचाप नियंत्रित करने और थकान दूर करने तक में सहायक है.

हलदी : हलदी स्वाद में कड़वी और प्रभाव में गरम होती है. यह कफ और पित्त के दोषों को दूर करती है. कटने, छिलने और जलने पर हलदी का प्रयोग ऐंटीसेप्टिक की तरह भी किया जाता है. इसी गुण के कारण हलदी का प्रयोग स्वास्थ्य और सौंदर्यवर्धन के लिए भी होता है.

दालचीनी : यह एक पेड़ की छाल होती है. यह बलगम, गैस, खुजली, हृदय रोग, मूत्राशय रोग, बवासीर, पेट के कीड़े, सायनस दूर करने और वीर्य बढ़ाने में सहायक है.

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Summer Special: ऐसे बनाएं टेस्टी छेने की खीर

नाम से ही पता चल रह है कि यह छेने से बनेगी. आपने छेने से बने हुए रसगुल्ले और मिठाई तो खाई होगी, लेकिन कभी खीर ट्राई की. जो खाने में बहुत ही टेस्टी होती है. आमतौर पर खीर भी कई तरह की बनती है जैसे कि चावल, सूतफेनी, ड्राई फ्रूट्स की लेकिन इस बार ट्राई करें छेने से बनी हुई रेसिपी.

सामग्री

1. आधा कप छेना

2. आधा लीटर फुल क्रीम दूध

3. बारीक कटे और उबले 10 बादाम और पिस्ता

4. 1 छोटी इलायची

5. एक चौथाई चम्मच सिट्रिक एसिड

6. स्वादानुसार चीनी

7. 5-6 किशमिश

ऐसे बनाएं खीर

सबसे पहले एक नॉन स्टिक पैन में दूध डालकर गर्म करें फिर इसमें छेना डालें और अच्छी तरह से मिलाएं. जब दूध में उबाल आए तब इसमें चीनी डालकर चलाते रहें और इसके बाद इसमें पिस्‍ते, किशमिश, छोटी इलायची और बादाम डालकर अच्छी तरह से धीमे से मिला लें.

और फिर सिट्रिक एसिड मिलाएं और इसे गैस से उतार लें. और ठंडा होने दें. थोड़ा ठंडा होने पर इसे आधा घंटे के लिए फ्रिज में रखें. दें. इसे बाद ठंडी-ठंडी टेस्टी खीर सर्व करें.

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मैरिड लाइफ में क्यों आ रही दूरियां

सैक्सलैस विवाह के 70% केस युवा जोड़ों के हैं और यह समस्या तेजी से बढ़ रही है. इस के लिए एक ही उपाय है कि दूसरी चीजों की तरह सैक्स के लिए भी समय निकालें, क्योंकि जब आप इस का स्वाद जानेंगे तभी इसे करेंगे. कुछ समय एकदूसरे के साथ जरूर बिताएं. कन्फ्यूशियस ने कहा था कि खाना व यौन इच्छा दोनों मानव की प्राकृतिक जरूरतें हैं.

मनोविज्ञानी और मनोचिकित्सक डा. पुलकित शर्मा इस बढ़ते रोग के संबंध में कुछ सवालों के जवाब दे रहे हैं:

सैक्सलैस विवाह सामान्य होने का कोई सूचक है?

हां, है. विवाहित लोग कैरियर के तनाव से घिरे हैं और अब उन के पास अंतरंगता के लिए बिलकुल भी समय नहीं है. दूसरा, अब चिड़चिड़ाहट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. विवादों को सुलझाने के बजाय स्त्री तथा पुरुष सैक्स की इच्छापूर्ति को बाहर ढूंढ़ रहे हैं.

क्यों कोई विवाह सैक्सलैस होता है?

यदि हम इन बातों को छोड़ दें कि किसी साथी को सैक्स संबंधी या मानसिक समस्या हो तो भी विवाह की शुरुआत सैक्सलैस नहीं होती, लेकिन बाद में हो जाती है. शुरुआत में अपनी यौन क्षमता को ले कर पुरुषों में विशेष घबराहट होती है. उन्हें डर रहता है कि वे अपने साथी को संतुष्ट कर पाएंगे या नहीं और यह डर इतना ज्यादा होता है कि वे अपनी यौन क्रिया को सही अंजाम नहीं दे पाते. शुरुआत में जोड़े सैक्स तथा अपने संबंधों को अच्छा बताते हैं, लेकिन समय के साथ प्यार तो बढ़ता है, परंतु विवाह सैक्सलैस हो जाता है.

तनाव से डिपे्रशन बढ़ता है, जिस से सैक्सुल इच्छा घटती है व प्रदर्शन ठीक प्रकार से नहीं हो पाता है. तीसरा कारण है पोर्नोग्राफी. यह लोगों की कल्पनाओं को रंग देती है, जिस से वे जो रील में देखते हैं वैसा ही रियल में करने की कोशिश करते हैं.

क्या सैक्सलैस विवाह वाले जोड़े कम खुश रहते हैं?

भले ही रिश्ता अच्छा हो, परंतु सैक्सहीन विवाहित जोड़े नाखुश रहते हैं, क्योंकि सैक्स प्यार व आत्मीयता का जरूरी हिस्सा है. इस विवाह को कोई एक साथी इच्छाहीन व बेकार महसूस करता है.

क्या सैक्स को दोबारा सक्रिय किया जा सकता है?

हां. बस पहले यह जानने की जरूरत है कि समस्या कहां है? क्या यह समस्या बाह्य है जैसे तनाव, पारिवारिक माहौल आदि. इस बारे में खुल कर बात करें व बिना साथी की इच्छा से कोई फैसला न करें ताकि दूसरा साथी बुरा न महसूस करे. काम का तनाव घटा कर एकदूसरे के साथ ज्यादा समय बिताएं, आपसी विवाद सुलझाएं, यौन क्रियाओं को बढ़ाएं, एकदूसरे की जरूरतों को समझें व इच्छापूर्ति की कल्पना करें, साथी को आराम दें, उसे उत्साहित करें. मनोवैज्ञानिक से सलाह भी ले सकते हैं.

क्या सैक्सहीन विवाह वाले तलाक की ओर बढ़ रहे हैं?

हां, ऐसा हो रहा है, क्योंकि एक साथी अपनेआप को उत्तेजित महसूस करने लगता है या वह महसूस करने लगता है कि उसे धोखा दिया जा रहा है. इसलिए वह भी सैक्स का विकल्प बाहर खोजने लगता है, जिस से बंधेबंधाए रिश्ते में समस्या आने लगती है.

यौन संतुष्टि दर में कमी

भारत में हुए सैक्स सर्वे दर्शाते हैं कि पिछले दशक में यौन संतुष्टि की दर मात्र 29% रह गई. सैक्स से बचने के लिए पत्नियों की पुरानी आदत है कि आज नहीं हनी. आज मुझे सिरदर्द है. 50% पुरुष भी अपनी पत्नी से सैक्स न करने के लिए सिरदर्द का झूठा बहाना बनाते हैं. 43% पति मानते हैं कि उन की आदर्श बिस्तर साथी उन की पत्नी नहीं है. 33% के करीब पत्नियां मानती हैं कि विवाह के कुछ सालों बाद सैक्स अनावश्यक हो जाता है. 14% स्त्रीपुरुषों को नहीं पता कि वे बैडरूम में किस चीज से उत्तेजित होते हैं जबकि 18% के पास कोई जवाब नहीं है कि वे सैक्स के बाद भी संतुष्ट हुए हैं. 60% जोड़े यौन आसन के बारे में कल्पना करते हैं. फिर भी आधे से ज्यादा जोड़े नए आसन के बजाय नियमित आसन ही अपनाते हैं. 39% जोड़े ही यौन संतुष्टि पाते हैं.

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Summer Special: समर वेकेशन में घूम आयें यहां

गर्मियों की शुरूआत होते ही लगता है बस किसी ऐसी जगह चले जाएं, जहां इससे गर्मी से राहत मिल सके. अगर रिलैक्स होने के साथ ही वेकेशन एन्जॉय करने का मूड है तो पहाड़ों की सैर से छुट्टियों की शुरुआत करें. यहां का मौसम देता है गर्मियों में ठंडक का अहसास.

1. औली, उत्तराखंड

स्की के लिए बहुत ही एडवेंचरस और सेफ जगह है औली. उत्तराखंड की ये जगह काफी शांत और सुकून भरी है. अप्रैल के महीने में यहां घूमने का प्लान करें. इस वक्त यहां का टेंपरेचर 7-17 डिग्री होता है. चारों तरफ बर्फ से ढ़के पहाड़ यहां की खूबसूरती को दोगुना करते हैं. ट्रैकिंग के लिए यहां एक दिन काफी है. गर्मियों की शुरूआत औली टूर के साथ करना बेस्ट रहेगा.

2. पचमढ़ी, मध्य प्रदेश

सतपुरा टाइगर रिजर्व के पास पचमढ़ी, मध्य प्रदेश की सबसे खूबसूरत जगहों में शामिल है. ये यहां का एकमात्र हिल स्टेशन है जो चारों ओर से सतपुरा पहाड़ी से घिरा हुआ है. यहां कई खूबसूरत गुफाएं, जंगल और बैम्बू फॉरेस्ट देखने को मिलते हैं. ठंड और शांत इस इस जगह पर जाना गर्मियों से राहत दिलाएगा.

3. मॉन, नागालैंड

मॉन, नागालैंड जाने का प्लान अप्रैल के पहले वीक में बनाएं जिस वक्त यहां एलेआन्ग फेस्टिवल कोन्याक नागा सेलिब्रेट किया जाता है. पतझड़ मौसम खत्म होने और फसलों की बुआई के बाद नए साल का स्वागत इस फेस्टिवल को मनाकर किया जाता है. जिसमें ट्रेडिशनल से लेकर मॉडर्न दोनों तरह के कल्चर को एन्जॉय किया जा सकता है. ट्रेडिशनल डांस, म्यूजिक और कई प्रकार के खेल यहां होते हैं. यहां रहने वाले जन-जातियों में खुशी और शांति का संदेश देना होता है. इस दौरान यहां नागाओं का काफी भीड़ इकट्ठा होती है.

4. कदमत आइलैंड, लक्षद्वीप

कदमत आना आपके ट्रिप को यादगार बना सकता है. इस आइलैंड की नेचुरल ब्यूटी देखने लायक है. महज 3.12 स्क्वेयर किमी के एरिया में फैला बहुत ही छोटा-सा आइलैंड है. जहां डाइविंग और स्वीमिंग जैसी कई सुविधाएं मौजूद हैं. लक्षद्वीप के सबसे खूबसूरत आइलैंड में शामिल है कदमत.

5. कन्याकुमारी, तमिलनाडु

कन्याकुमारी को लैंड ऑफ हिडन वंडर्स भी कहा जाता है. ज्यादातर टूरिस्ट यहां कन्याकुमारी मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं. इसके अलावा गांधी मेमोरियल भी यहां देखने लायक है. साथ ही यहां का ध्यान मंडल जहां स्वामी विवेकानंद ने 3 दिनों तक तपस्या की थी. इस जगह को अब पब्लिक के लिए खोल दिया गया है. तमिल कवि तिरुवल्लूर की 133 मीटर ऊंचे स्टैचू भी है यहां. अप्रैल माह में यहां घूमने के लिए मौसम सबसे अच्छा होता है.

6. दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल

दार्जिलिंग खासतौर से अपने चाय के बागानों के लिए मशहूर है. इसके अलावा यहां का आर्किटेक्चर देखने और फर्मेन्टेड बियर का स्वाद लेने भी पहुंचा जा सकता है. पीस पेगोडा में बौद्ध कल्चर को देखने का मौका भी मिलता है. टाइगर हिल से कंचनजंघा पर उगते सूरज को देखने का नजारा ही अलग होता है. अप्रैल माह में यहां आकर इन सारे एक्सपीरियंस को एन्जॉय किया जा सकता है.

7. वायनाड, केरल

वायनाड के हरे-भरे पहाड़, खुशबू बिखेरते इलायची, वनीला, कॉफी और चाय के बागान मूड को रिफ्रेश करने के साथ ही ट्रिप को भी यादगार बनाने का काम करते हैं. पैदल घूमकर आप ट्रिप को ज्यादा अच्छे से एन्जॉय कर सकते हैं. वायनाड को खासतौर से पुरानी जनजातियों का गढ़ कहा जाता है. इनके कल्चर, लाइफ और खानपान का तरीका अपनाकर बॉडी का डिटाक्सीफाई भी किया जा सकता है. अप्रैल महीने में यहां आने की प्लानिंग बेस्ट रहेगी.

8. कलीमपोंग, पश्चिम बंगाल

हिमालय पर्वत और आसपास के हरे-भरे कलीमपोंग की खूबसूरत वादियां आपके ट्रिप को रोमांचक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़तीं. तीस्ता नदी के आसपास रुकने का प्लान करें जिससे यहां की खूबसूरती को बहुत ही करीब से जाना जा सकता है इसके अलावा अप्रैल माह में यहां चारों ओर इलायची और दालचीनी की खुशबू बिखरी रहती है. घने जंगलों में रेड पांडा और ब्लैक बियर जैसे कई सारे जानवर भी देखे जा सकते हैं.

9. कुन्नूर, तमिलनाडु

नीलगीरी पहाड़ों के नाम से मशहूर कुन्नूर की खूबसूरती को करीब से देखने का मजा तो अप्रैल माह में ही आता है. इस समय यहां टूरिस्टों की संख्या सबसे ज्यादा होती है. गर्मियों की शुरूआत में लगने वाले फ्रूट शो को एन्जॉय करने के साथ ही बोटेनिकल गॉडर्न और सिम्स पार्क भी देखने लायक होता है. डॉलफिन नोज प्वाइंट से नीलगीरी की खूबसूरती को निहारने का नजारा आप लाइफटाइम नहीं भूल पाएंगे.

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पलटवार : भाग 3- जब स्वरा को दिया बहन और पति ने धोखा

सुबह उठ कर उस ने अपनी दिनचर्या के अनुसार सारे काम किए. अमित तथा श्रेया को बैड टी दी. डाइनिंग टेबल पर नाश्ता लगा दिया और नहाने के लिए जाने को हुई तभी उस का मोबाइल बज उठा. अमित जल्दी से फोन उठाने के लिए लपका, तभी स्वरा ने उठा लिया. स्क्रीन पर नाम देख कर मुसकराने लगी. ‘हैलो, हांहां, पूरा प्रोग्राम वही है, कोई भी फेरबदल नहीं है. मैं भी बस तैयार हो कर तुम्हारे पास ही आ रही हूं.’ फोन रख कर उस ने बड़े ही आत्मविश्वास से अमित की ओर मुसकरा कर देखा.

अमित की आंतें जलभुन गईं. आज फिर कहां जा रही है, लगता है पर निकल आए हैं, कतरने होंगे, घर के प्रति पूरी तरह समर्पित, भीरू प्रवृत्ति की स्त्री इतनी मुखर कैसे हो गई, क्या इसे मेरी तनिक भी चिंता नहीं है. इस तरह तो यह मुझे धोखा दे रही है. क्या करूं, कुछ समझ में नहीं आ रहा है. इस के पापा ने तो बताया था कि विशेष से श्रेया की शादी फिक्स हो गई है तो फिर यह क्या है? इसी ऊहापोह में फंसा हुआ वह अपने कमरे में जा कर धड़ाम से बैड पर गिर गया. आज फिर औफिस की छुट्टी हो गई, लेकिन कब तक? आखिर कब तक? वह इसी प्रकार छुट्टी लेता रहेगा. बस, अब कुछ न कुछ फैसला तो करना ही है. वह सोचने पर विवश था.

तभी, श्रेया ने धीरे से परदा हटा कर झांका, ‘‘जीजू, आज शाम की फ्लाइट से मैं मांपापा के पास पुणे वापस जा रही हूं. मैं ने अपना त्यागपत्र कंपनी को भेज दिया है. अब जब अगले माह मेरी शादी हो रही है और मुझे कनाडा चले जाना है तो जौब कैसे करूंगी.’’

अमित मौन था. उस ने श्रेया को यह भी नहीं बताया कि उस के पापा का फोन आया था और वह इन सब बातों से अवगत है. श्रेया अपने कमरे में चली गई पैकिंग करने. अमित बैड पर करवटें बदल रहा था मानो अंगारों पर लोट रहा हो.

दरवाजे की घंटी की आवाज पर अमित ने दरवाजा खोला. स्वरा ही थी. ‘‘आ गईं आप? अमित के स्वर में व्यंग्य था, ‘‘बड़ी जल्दी आ गईं, अभी तो रात के 10 ही बजे हैं. इतनी भी क्या जल्दी थी, थोड़ी देर और एंजौय कर लेतीं.’’

‘‘शायद, तुम ठीक कह रहे हो’’, स्वरा ने मुसकरा कर अंदर आते हुए कहा, ‘‘तुम दोनों की फिक्र लगी थी, भूख लगी होगी, अब खाना क्या बनाऊंगी, कहो तो चीजसैंडविच बना दूं. चाय के साथ खा लेना.’’

‘‘बड़ी मेहरबानी आप की. इतनी भी जहमत उठाने की क्या जरूरत है. श्रेया शाम की फ्लाइट से पुणे वापस चली गई है. तुम्हारे पापा का फोन आया था. मैं ने भी खाना बाहर से और्डर कर के मंगा लिया था. तुम टैंशन न लो. जाओ, सो जाओ,’’ अमित ने कुढ़ते हुए कहा और सोने लगा.

स्वरा मन ही मन हंस रही थी. कैसी मिर्च लगी है जनाब को, कितने दिनों से मैं जो उपेक्षा की शरशय्या पर लोट रही थी, उस का क्या. न तो मैं मूर्ख हूं, न ही अंधी, जो इन दोनों की बढ़ती नजदीकियों को समझ नहीं पा रही थी या देख नहीं पा रही थी.

अरे, अमित तो पुरुष है भंवरे की प्रवृत्ति वाला, जहां कहीं भी सौंदर्य दिखा, मंडराने लगा. यद्यपि ऐसा कभी भी नहीं हुआ कि पिछले 2 वर्षों में उस ने कभी भी अपनी बेवफाई का कोई भी परिचय दिया हो, लेकिन श्रेया, वह तो मेरी सगी बहन है, मेरी ही मांजायी. क्या उसे मेरा ही घर मिला था सेंध लगाने को. अमित से निकटता बढ़ाने से पूर्व क्या उसे एक बार भी मेरा खयाल नहीं आया. किसी ने सच ही कहा है, ‘आग और फूस एक साथ रहेंगे तो लपटें तो उठेंगी हीं,’ जिन्हें वह स्पष्ट देख रही थी. उस ने मन ही मन निश्चय ले लिया था कि यह बात अब और आगे नहीं बढ़ने देगी.

सुबह वह थोड़ा निश्ंिचत हो कर  उठी. नहाधो कर नाश्ता लगाया.  ‘‘अमित, श्रेया इतनी जल्दी क्यों चली गई. आज भी तो जा सकती थी,’’ उस ने सामान्य लहजे में कहा.

‘‘तो तुम्हें क्या, तुम अपनी लाइफ एंजौय करो. तुम्हें तो यह भी नहीं पता होगा कि श्रेया की शादी विशेष के साथ तय हो गई है. जो अगले माह में होगी. तुम्हारे पापा का ही फोन आया था. अरे हां, यह विशेष कहीं वही तो नहीं जिस के साथ तुम घूमफिर रही हो,’’ अमित ने चुभने वाले लहजे में कहा.

अब स्वरा चुप न रह सकी, ‘‘हां,  वही है. बताया तो था हम लोग क्लासमेट थे. तुम मिलना चाहो तो लंच पर बुला लेते हैं. और उस ने फोन लगा दिया. अमित हैरान था. इस के पापा ने तो बताया था कि विशेष वहां आया हुआ है तो फिर ये किस के साथ 2 दिनों से घूमफिर रही थी.’’

स्वरा ने बड़ा ही शानदार लंच बनाया था. सभी कुछ अमित की पसंद का था. पालक पनीर, भरवां करेले, मटर पुलाव, फू्रट सलाद, पाइनऐप्पल रायता और केसरिया खीर. 2 बजे दरवाजे की घंटी बज उठी. अमित ने दरवाजा खोला, सामने उस के मामा की बेटी निधि खड़ी मुसकरा रही थी. वह स्वरा की भी खास सहेली बन गई थी.

‘‘हाय दादा, भाभी कहां हैं?’’

‘‘वह तो किचन में है. उस का कोई दोस्त लंच पर आने वाला है. बस, उसी की तैयारी कर रही है,’’ अमित हड़बड़ा गया था.

‘‘अच्छा, तो भाभी से कहिए उन का दोस्त आ गया है,’’ निधि मुसकरा रही थी.

‘‘क्या? कहां है?’’ अमित का माथा चकरा रहा था.

‘‘आप के सामने ही तो है.’’

‘‘तुम?’’

‘‘सच, भाभी बहुत मजेदार हैं. 2 दिनों से जो मजे वे कर रही थीं, वर्षों से नहीं किए थे.’’

‘पूरे दिनदिन भर साथ रहना, रात में देर से आना,’ अमित उलझन में था. तभी पीछे से हंसती हुई स्वरा ने आ कर अमित के गले में अपनी बांहें डाल दीं, ‘‘हां अमित, ये हम दोनों की मिलीभगत थी,’’ स्वरा के स्वर में मृदु हास्य का पुट था.

‘‘दादा, और श्रेया कहां है, भाभी कह रही थीं आजकल आप उस के साथ घूमफिर व खूब मौजमस्ती कर रहे हैं,’’  निधि के स्वर में तल्खी थी.

‘‘अरे भई, इन्हीं की बहन की आवभगत में लगा था ताकि श्रेया को यह न लगे कि मैं उस की अवहेलना कर रहा हूं. आखिर वह मेरी इकलौती साली है और फिर सौंदर्य किसे आकर्षित नहीं करता. फिर, हमारे बीच दोस्ती ही तो थी,’’ अमित ने सफाई पेश की ताकि वह असल बात को छिपा सके.

‘‘अच्छा, वाह दादा, दोस्ती क्या ऐसी थी कि रात में देरदेर से आते थे. अकसर बाहर ही खापी लेते थे.’’

अब अमित खामोश था. उस की कुछ भी कहनेसुनने की अब हालत नहीं थी. सच ही तो है, जब 2 दिनों से स्वरा उस के बगैर ही एंजौय करती रही, तब वह भी तो जलभुन रहा था और वह तो इतने दिनों से मेरी उपेक्षा की शिकार हो रही थी. जबकि उस के समर्पण में कोई भी कमी न थी. तो स्वरा ने गलत क्या किया?

अकस्मात उस ने स्वरा को अपनी बाहों में उठा लिया और गोलगोल चक्कर काटते हुए हंसतेहंसते बोला, ‘‘भई वाह, तुम्हें तो राजनीति में होना चाहिए था. मेरी ओर से तुम्हारा गोल्ड मैडल पक्का.’’

स्वरा भी उस के गले में बाहें डाले झूल रही थी. उस का सिर अमित के सीने पर टिका था. निधि ने दोनों का प्यार देख कर वहां से चली जाना ही उचित समझा. उसे लगा कि दोनों के बीच कुछ था जो अब नहीं है. अब उस के वहां होने का कोई औचित्य भी नहीं था. उस ने राहत की सांस ली और गेट से बाहर आ गई.

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