प्यार की जीत: भाग 2- निशा ने कैसे जीता सोमनाथ का दिल

पहले तो सोमनाथ ने निशा को फैशन टैक्नोलौजी की पढ़ाई करने की इजाजत देने से सख्त मना कर दिया. लेकिन लक्ष्मी ने उन से गुजारिश की, ‘कोर्स को खत्म होने में अब सिर्फ एक ही साल बाकी है, उसे बीच में रोकना नहीं. उसे पूरा करने दीजिए, मैं आप के पैर पड़ती हूं.’ बहुत सोचने के बाद आखिरकार सोमनाथ ने निशा को कालेज भेजने के लिए मंजूरी दी.

निशा को यह सब बड़ा अजीब सा लगा. एक तो  पहली बार वह अभी अपनी 21 साल की उम्र में अपने जन्मदाता मांबाप से मिल रही थी, दूसरी बात जिस माहौल में वह बड़ी हुई थी वहां इस तरह औरतें अपने पति के सामने झोली फैला कर नहीं खड़ी होती थीं. दोनों को वहां पर बराबर का सम्मान दिया जाता था.

लक्ष्मी ने भी अपनी बेटी के प्रति अपना प्यार नहीं जताया. उस के मन में एक ही विचार था कि पढ़ाई खत्म होते ही निशा का ब्याह एक ऐसे घर में हो जहां औरतों को इज्जत दी जाए. बेटी की शादी में पिता की उपस्थिति जरूरी है, इसलिए लक्ष्मी अपने पति से अपनी बेटी के बारे में कोई भी बहस नहीं करना चाहती थी और सोमनाथ की हर बात मानती थी.

सोमनाथ की देखादेखी उन के दोनों बेटे भी औरतों की इज्जत नहीं करते थे. दोनों मिल कर अकसर निशा को नीचा दिखाने की कोशिश में लगे रहते. बचपन से लाड़प्यार और इज्जत से पली निशा को इस माहौल में घुटन होने लगी. उसे इस बात का बहुत अफसोस था कि उस की मां ने भी अपना प्यार जाहिर नहीं किया.

इसी बीच निशा के कालेज में वार्षिक महोत्सव हुआ और तभी पहली बार उस की मुलाकात बिलाल से हुई. उस उत्सव में भाग लेने के लिए कई कालेजों से बहुत सारे छात्र आए हुए थे. निशा एक अच्छी गायिका थी और उस की आवाज में मिठास थी. जिस के कारण उस के कालेज के छात्रों और अध्यापकों ने निशा को गाने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि उन के कालेज को पुरस्कार मिले. निशा ने उस प्रतियोगिता के लिए खूब तैयारी भी की. उस के साथ उस की सहेली गिटार बजाने वाली थी.

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मगर उत्सव के दिन जो लड़की गिटार बजाने वाली थी उस के पिता बीमार हो कर अस्पताल में भरती थे और वह उत्सव में न आ सकी. निशा अब उलझन में पड़ गई. गिटार के बिना निशा का गाना अधूरा होगा और इसी कारण उसे पुरस्कार मिलने की उम्मीद नहीं थी. निशा असमंजस में पड़ गई और रोने लगी. उस की सहेलियां ढाढ़स बंधाने लगीं और उसे चुप कराने की कोशिश कर रही थीं.

उसी वक्त एक नौजवान वहां आया और उस ने कहा, ‘एक्सक्यूज मी, मैं आप की बातें सुन रहा था और मैं समझ गया हूं कि आप को एक गिटार बजाने वाला चाहिए. अगर आप को कोई एतराज न हो तो क्या मैं आप की मदद कर सकता हूं?’ इसे सुन कर निशा और उस की सहेलियां ताज्जुब से एकदूसरे को देखने लगीं. एक पल के लिए वे सोच में पड़ गईं कि क्या जवाब दें.

निशा और उस की सहेलियों को उस अनजान युवक का प्रस्ताव स्वीकार करने में झिझक हुई. वह किसी और कालेज का छात्र है, फिर वह क्यों अपने कालेज को छोड़ कर हमारे कालेज के लिए गिटार बजाने को तैयार है, ऐसा क्यों? उन के मन में यह डर था कि यह ईव टीजिंग का कोई चक्कर तो नहीं.

उस युवक ने हंसते हुए कहा, ‘मैं एक अच्छा गिटारिस्ट हूं. इसलिए मैं ने सोचा कि मैं आप की मदद करूं, अगर आप बुरा न मानें तो. ज्यादा मत सोचिए, हमारे पास वक्त बहुत कम है.

उस की गंभीरता देख कर निशा और उस की सहेलियां उस लड़के की मदद लेने के लिए तैयार हो गईं. उस लड़के ने तुरंत अपने दोस्त से गिटार ले कर निशा के साथ मिल कर 2 बार रिहर्सल किया. निशा ने देखा कि वह उस के साथ बड़ी तमीज के साथ बातें कर रहा था और बहुत ही मृदुभाषी था. निशा स्पर्धा को ले कर बहुत परेशान थी और इस हड़बड़ी में उस ने उस लड़के का नाम तक नहीं पूछा.

जब उन की बारी आई तो दोनों मंच पर आए. निशा अपनेआप को भूल कर अपने गाने में मंत्रमुग्ध हो गई और उसे पुरस्कार भी मिला. पुरस्कार लेते समय निशा उस लड़के को भी अपने साथ मंच पर ले गई.

विदाई के समय उस लड़के ने निशा को अपना नाम बताया, ‘मेरा नाम बिलाल है. मैं अंगरेजी साहित्य में एमए कर रहा हूं. आप मेरा मोबाइल नंबर सेव कर लीजिए. अगर आप को कोई परेशानी न हो तो हम फोन पर बात कर सकते हैं और दोस्ती को आगे कायम रख सकते हैं.’ निशा ने एक मीठी सी मुसकान के साथ बात कर रहे बिलाल की ओर देखा.

निशा ने पहली बार बिलाल को गौर से देखा. 6 फुट का कद, चौड़े कंधे, गेहुंआ रंग, बड़ीबड़ी आंखें और चौड़ा माथा तथा उस के चेहरे पर छलक रही एक मधुर मुसकान. निशा को लगा कि सच में बिलाल एक आकर्षक युवक है. इस के अलावा लड़कियों के प्रति उस का बरताव निशा को बेहद पसंद आया.

उस घटना के बाद दोनों अकसर फोन पर बातें करते थे. बिलाल की आवाज में भी एक अनोखा जादू था. बड़े अदब से बात करने वाला उस का अंदाज निशा को उस की ओर खींचने लगा. कई बार फोन पर बात होने के बाद दोनों ने एक कौफी शौप में मिलने का फैसला लिया. बिलाल एक बड़ी गाड़ी में आया. फोन पर इतनी बातें करते वक्त कभी अपनी हैसियत के बारे में उस ने कुछ भी नहीं बताया. अब भी बड़ी नम्रता से कहा, ‘वापस जाते

समय आप को मोटरबाइक में छोड़ना अच्छा नहीं लगेगा, इसलिए गाड़ी ले कर आया.’ उस की आवाज में जरा भी घमंड नहीं था.

बिलाल ने अपने परिवार के बारे में सबकुछ बताया. उस ने बताया कि लखनऊ की मशहूर कपड़े की दुकान जमाल ऐंड संस के मालिक हैं उस के पिता और उस की मां घर पर ही बुटीक चलाती हैं जहां वे डिजाइनर साडि़यां तैयार कर उन्हें बेचती हैं. उस के बडे़ भाई पिता के साथ कारोबार संभालते हैं और एक छोटी बहन कालेज में पढ़ती है. यह सुनती रही निशा बिलाल को अपने परिवार के बारे में क्या बताए, सोचने लगी. अपने पिता या अपने भाइयों की झूठी तारीफ करने के बजाय वह चुप रही.

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दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई. एक दिन बिलाल ने कौफी शौप में कौफी पीते समय कहा, ‘निशा, मुझे बातें घुमाना नहीं आता. मैं आप से बेहद प्यार करता हूं और आप से शादी करना चाहता हूं. क्या आप को मेरा प्यार कुबूल है.’ यह बात सुन कर निशा को एक झटका सा लगा, क्योंकि वह बिलाल को दोस्त ही मानती रही और कभी भी उस ने उसे इस नजरिए से नहीं देखा था. इस के अलावा निशा ने सोचा कि दोनों के बीच मजहब की दीवार है और यह शादी कैसे हो सकती है?

‘मैं जानता हूं कि हमारा मजहब अलग है मगर वह हमारे बीच नहीं आ सकता. आप को जल्दबाजी में फैसला लेने की जरूरत नहीं है. आप मेरे बारे में और हमारे रिश्ते के बारे में आराम से ठंडे दिमाग से सोचिए. आप मुझ से शादी न करना चाहें तो भी मैं दोस्ती को बरकरार रखना चाहता हूं.’

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Alia Bhatt की गंगूबाई काठियावाड़ी: गंगा से गंगू

सच्चे जीवन से उठाई गई गंगा बाई काठियावाड़ की कहानी फिल्म में तब्दील हो कर दर्शकों के लिए थियेटरों में आ गई है. और जैसा कि निर्देशक संजय लीला भंसाली का फिल्मी इंद्रजाल सर चढ़कर बोलता है इस फिल्म को देखने के बाद भी आप एक ऐसे एहसास से गुजरेंगे जो आपको आपके दिमाग को मनोरंजन के साथ एक नई चेतना से भरपूर कर देता है.

संजय  लीला भंसाली एक बार फिर से अपने बेहतरीन अंदाज में यह मूवी लाए हैं. फिल्म में संगीत और गानों के बल पर ऐसे चरित्र हमारे  आते जाते हैं जिनके बारे में किताब के पन्नों में लिख दिया गया . अपने समय के यह चरित्र जो अपने दर्द भरी जिंदगी के बीच जीवन के रंग बिखेरते  हैं इस फिल्म में आपको यदा-कदा दिख जाएंगे.

फिल्म है ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ जो  हुसैन जैदी की किताब ‘माफिया क्वींस आफ मुंबई’ से प्रेरित है.

गंगू बाई एक ऐसा चरित्र थी जो कभी पाक साफ गंगा बाई काठियावाड़ी  थी जो  मुंबई के कमाठीपुरा इलाके में, प्यार में धोखा खा कर आ फंस गई थी. और आगे चल कर ‘”इलाके” पर राज करने वाली बन जाती हैं.

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आप कह सकते हैं कि वह एक माफिया डान थी लेकिन उसकी कहानी आपको रुलाती है और सोचने पर मजबूर भी कर देती है.

समय आने पर गंगूबाई इस इलाके की वेश्याओं या सेक्स वर्करों के अधिकारों की रक्षा करने वाली  बन, बड़ा नाम हासिल करती  है.

खास बात यह है कि फिल्म में कोठे वालियों का जीवन तो है ही साथ ही इसमें एक अद्भुत नारीवादी विमर्श के खातिर स्वर चित्रित है. अंत आते आते  फिल्म कई ऐसे सवाल भी उठाती है जिनका संबंध समाज में “औरत” की विभिन्न स्थितियों से  है.

गंगूबाई की भूमिका में महेश भट्ट की बिटिया आलिया भट्ट ने कमाल का काम किया है.  जिस भाव प्रवणता में आलिया भट्ट ने कोठे वाली को पेश किया है उसमें विश्वसनीयता  है . साथ ही वह बात भी है जो किसी महिला चरित्र को दमदार और दशकों से बांधने वाली होती है.

पाठकों को यह बताते चलें कि गंगूबाई उस समय की “कोठे वाली” है जब मुंबई पर करीम लाला जैसे माफिया डान का रौब गालिब था.फिल्म में करीम लाला को बदल कर रहीम लाला के रूप में पेश किया गया है और गंगू इस रहीम लाला  को राखी भाई बना करके अपना रहनुमा बना लेती है. दर्शकों की खूब तालियां बटोरने की क्षमता इन दृश्यों में है.

गंगू बाई काठियावाड़ फिल्म देखते हुए सबसे मौजूं सवाल यह उठता कि क्या सेक्स वर्करों के बच्चों को सामान्य स्कूलों में प्रवेश मिल सकता है? ऐसे चुनिंदा कितने प्रश्नों को निदेशक संजय लीला भंसाली बड़ी सहजता के साथ उठाते हैं

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अजय देवगन ने इसमें करीम लाला की भूमिका निभाई है. एक ऐसा माफिया डान जिसके दिल में कमजोर के लिए रहम है.फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का चरित्र भी है जिनसे गंगूबाई कोटे वालों की समस्याओं को लेकर मिलती है हालांकि इसका इतिहास में कहीं कोई जिक्र नहीं है मगर किताब में इसे दर्ज किया गया है. फिल्म के गीत और संगीत दिल को संस्पर्श करने वाले हैं .

किंजल होगी प्रैग्नेंट, क्या अधूरा रह जाएगा अनुज-अनुपमा का सपना!

सीरियल अनुपमा (Anupama) की कहानी में जल्द ही नया मोड़ आने वाला है. जहां वनराज (Sudhanshu Panday) और बा के सपने पूरे होते नजर आएंगे तो वहीं अनुज (Gaurav Khanna) और अनुपमा (Rupali Ganguly) के बीच दूरी होती नजर आएगी. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे (Anupama Upcoming Update)…

अनुपमा के बर्थडे की हुई तैयारी

 

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अब तक आपने देखा कि अनुपमा के बर्थडे की तैयारी किंजल- बापूजी समेत पूरा शाह परिवार करता है. हालांकि बा इस बात से नाखुश नजर आती हैं, जिसके चलते वह बापूजी के ताना मारते हुए दिखती हैं. वहीं अनुज और अनुपमा, शाह हाउस आते हैं. जहां अनुज, अनुपमा की प्यार भरी नोंकझोंक होती हुई दिखती है.

 

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अनुपमा को ताना मारेगा वनराज

 

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वनराज औफिस से घर आएगा. जहां पूरा परिवार उसे देखकर नाखुश नजर आएगा. वहीं अनुपमा, अनुज के साथ शाह हाउस पहुंचेगी जहां वनराज दरवाजा खोलेगा और ताना मारते हुए कहेगा कि क्या वे सोच रहे हैं कि वह यहाँ क्या कर रहा है, उसने बालकनी से उन्हें आते देखा और इसलिए अनुपमा के बर्थडे पर आरती करने का विचार किया. हालांकि अनु वापस ताना मारती है कि बड़े लोगों की आरती की जाती है. वह कहता है कि आखिरकार उसने स्वीकार कर लिया कि वह अपने पति से बड़ा है.

किंजल की प्रैग्नेंसी का सच आएगा सामने

 

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अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि पार्टी में किंजल बेहोश हो जाएगी, जिसके चलते पूरा परिवार परेशान नजर आएगा. वहीं अनुपमा को कुछ गड़बड़ महसूस होगी और वह किंजल से अकेले में पूछेगी कि क्या हुआ है, जिसके चलते किंजल बताएगी कि वह प्रैग्नेंट है. वहीं किंजल की प्रैग्नेंसी की खुशी में अनु डांस करेगी और कहती है कि वह अपने जीवन की सबसे बड़ी खुशखबरी की घोषणा करना चाहती है. हालांकि अनुज सोचता है कि वह शादी के बारे में बताएगी. लेकिन अनु परिवार को किंजल की प्रैग्नेंसी के बारे में बताएगी, जिसके कारण अनुज उदास हो जाएगा.

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फेस वैक्स करने से पहले जान लें ये बातें

हाथ, पैर और पीठ के अनचाहे बालों से छुटकारा पाने केलिए ज्यादातर महिलाएं वैक्स कराती हैं लेकिन कुछ महिलाओं के चेहरे पर भी काफी बाल होते हैं. बाल कम हों और उनकी ग्रोथ अधिक न हो तो उसे थ्रेड से निकाला जा सकता है लेकिन जब ग्रोथ बहुत अधिक हो तो वैक्स का इस्तेमाल करना पड़ता है.

चेहरे पर वैक्स कराना और शरीर के किसी और हिस्से पर वैक्स कराने में काफी अंतर है. चेहरे पर वैक्स कराने के दौरान अगर एक छोटी सी भी गलती हो जाए तो वह जिंदगीभर का दाग बन सकता है. ऐसे में चेहरे पर वैक्स कराने के दौरान कुछ बातों का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है.

चेहरे पर बाल कैसे हैं और उनकी ग्रोथ कैसी है

अगर आपके चेहरे पर मौजूद बालों की ग्रोथ बहुत अधिक है तो आपके लिए वैक्स कराना ही बेस्ट ऑप्शन रहेगा. थ्रेड से काफी दर्द होगा और बाल भी पूरी तरह से साफ नहीं हो सकेंगे.

वैक्स का सही चुनाव

चेहरे पर इस्तेमाल होने वाला वैक्स, दूसरे वैक्स से अलग होता है. यह बहुत स्मूद होता है ताकि स्किन छिले नहीं और जलन भी न हो. चेहरे पर मौजूद अनचाहे बालों को हटाने के लिए जिस वैक्स का इस्तेमाल किया जाता है उसमें एलोवेरा, शहद होता है ताकि त्वचा को कम से कम नुकसान हो. इसके साथ ही वैक्स ऐसा होना चाहिए जो लंबे समय तक टिके.

स्किन टाइप

आपको अपना स्किन टाइप पता होना चाहिए. अगर आपकी स्किन बहुत सेंसटिव है तो बेहतर यही होग कि आप पहले किसी स्किन स्पेशलिस्ट से मिल लें. ऐसा न हो कि इतना दर्द सहने के बाद आपको इन्फेक्शन सहना पड़े.

वैक्स कराने का सही तरीका

कई लोग घर पर ही वैक्स करते हैं लेकिन चेहरे पर वैक्स करना इतना आसान नहीं है. चेहरे पर वैक्स करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपको अच्छी तरह वैक्स करना आता हो. वरना दुर्घटना हो सकती है. वैक्स का ताप, स्ट्रिप सबकुछ सही होना चाहिए.

ध्यान देना है जरूरी

वैक्स करने के बाद भी त्वचा की देखभाल करना जरूरी है. वैक्स करने के बाद कोई अच्छा मॉइश्चराइजर लगाएं. इसके साथ ही साबुन के बजाय चेहरा धोने के लिए फेस वॉश का इस्तेमाल करें.

सनस्क्रीन लगाने पर पसीना बहुत आ जाता है, क्या करूं?

सवाल-

मेरी उम्र 18 वर्ष है. मैं सनस्क्रीन लगा कर बाहर जाना चाहती हूं पर जब भी सनस्क्रीन लगाती हूं पसीना बहुत आ जाता है. क्या करूं?

जवाब-

सनस्क्रीन के अंदर जिंक रहता है जिसे स्किन पर लगाने से पसीना आता ही है. आप जब भी घर से बाहर जाना चाहती हों बाहर जाने से 10 मिनट पहले सनस्क्रीन लगा लें. जितना पसीना आना होगा वह आ जाएगा. रूमाल से फेस को धीरेधीरे टैप करें. इस से पसीना सूख जाएगा और उस के ऊपर हलका पाउडर लगाया जा सकता है या ऐसे भी बाहर जाया जा सकता है. अब पसीना दोबारा नहीं आएगा.

बस ध्यान रखना है कि आप जिस क्लीनिक में जाएं वहां पर किसी डाक्टर से या काउंसलर से बात करें. वह आप को चैक कर के बताएंगे कि आप की प्रौब्लम हारमोनल तो नहीं है. अगर हारमोनल असंतुलन है तो उस के लिए कुछ दवा भी जरूर देंगे.

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गर्मियों का मौसम आने तो है, ऐसे में जहां हमारे आउटफिट्स मौसम के अनुसार पूरी तरह से बदल जाएंगे, ठीक उसी तरह हमारे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स में भी काफी बदलाव होगा. क्योंकि अब हमें अपनी स्किन को सूर्य की हार्श किरणों से बचाने के लिए सनस्क्रीन को आवश्यक रूप से  अपने स्किनकेयर रूटीन में शामिल जो करना होगा. वैसे तो सनस्क्रीन हर मौसम में जरूरी होता है, लेकिन इसकी खास तौर पर जरूरत गर्मियों में महसूस होती है. वरना इसके अभाव में स्किन टेन होने से लेकर स्किन डेमेज तक हो सकती है. यहां तक की स्किन कैंसर का भी डर बना रहता है. लेकिन सवाल ये उठता है कि मार्केट में तो ढेरों सनस्क्रींस मिलते हैं , ऐसे में हम अपनी स्किन के लिए फिजिकल या केमिकल किस सनस्क्रीन का चुनाव करें. तो आइए जानते हैं इस संबंध में .

क्या है सनस्क्रीन 

जिस तरह से पानी हमारी बोडी को हाइड्रेट रखकर हमें सुरक्षा प्रदान करता है, ठीक उसी तरह सनस्क्रीन हमारी स्किन के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है. ये खतरनाक अल्ट्रावायलेट किरणों से स्किन को बचाता है, जिससे स्किन टेन होने से बचने के साथसाथ स्किन एलर्जी, स्किन रेडनेस जैसी समस्याओं से भी निजात मिलता है. क्योंकि सनस्क्रीन में एसपीएफ यानि सन प्रोटेक्शन फैक्टर जो होता है. जैसे अगर आपकी स्किन धूप में निकलते ही आपको टेनिंग या जलन जैसा फील होने लगे तो इसका मतलब आपकी स्किन धूप के संपर्क में आते ही जलने लगती है . इसलिए जरूरी है आपके लिए 25 या फिर 30 एसपीएफ युक्त सनस्क्रीन का चयन करने की. क्योंकि ये आपको 5 – 6 घंटे सुरक्षा प्रदान करने का काम जो करेगा.

पूरी खबर पढ़ने के लिए- फिजिकल vs केमिकल सनस्क्रीन 

छेना से बनाएं ये टेस्टी मिठाइयां

दूध को फाड़ने के बाद पानी से अलग हुए पदार्थ को छेना कहा जाता है. पहले जहां दूध का फटना एक सामान्य बात हुआ करती थी वहीं अब हर घर में फ्रिज होने से दूध फटता तो नहीं है परन्तु हां आप स्वयं पनीर या छेना बनाने के लिए वेनेगर, या नीबू के रस की मदद से दूध को फाड़ती हैं. कई बार घर में दूध बहुत अधिक बच जाता है ऐसे में आप उसे फाड़कर छेना बना सकतीं हैं. छेने को जब गर्म में ही कपड़े में बांधकर किसी भारी बर्तन से दबा दिया जाता है तो वह पनीर बन जाता है. आज हम आपको छेने से बहुत टेस्टी मिठाइयां बनाना बताएगें जिन्हें बनाना बहुत आसान है और जो खाने में बहुत टेस्टी भी हैं. फटे दूध को एक सूती कपड़े में डालकर उसका पानी हाथ  से दबाकर अच्छी तरह निचोड़ दें और फिर ये मिठाइयां बनाइए तो आइये देखते हैं कि इन्हें कैसे बनाया जाता है-

-छेना पोडा

कितने लोगों के लिए                6

बनने में लगने वाला समय           50 मिनट

मील टाईप                        वेज

सामग्री

तैयार छेना                                 250 ग्राम

शकर                                     1/2 कप

इलायची पाउडर                     1/4 टीस्पून

बारीक कटी मेवा                   1 टेबलस्पून

सूजी या रवा                        1 टीस्पून

बेकिंग सोडा                         1 चुटकी

तेल                                    1/4 टीस्पून

नमक                                      1 चुटकी

पत्तल या दोने के पत्ते              4

विधि

छेना को एक प्लेट में डालकर हल्का सा मैश कर लें. अब रवा, मेवा, नमक, बेकिंग सोडा  और शकर डालकर अच्छी तरह मसलें यदि सूखापन लगे तो थोडा सा छेने का पानी मिलाएं. एक बेकिंग डिश को तेल से ग्रीस करके पत्तल या दोने के पत्ते खोलकर तले में बिछाएं. अब इसमें तैयार छेने का मिश्रण डालें. कुकर में नमक की लेयर डालकर बेकिंग डिश रखकर एकदम धीमी आंच पर 40 मिनट तक पकाएं. माइक्रोवेब में 50 मिनट तक 180 डिग्री पर बेक करें, अंत के 20 मिनट में तापमान 220 डिग्री कर दें ताकि छेना पोडा का रंग गहरा हो जाये. जब एकदम ठंडा हो जाये तो काटकर सर्व करें.

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-छेना बाईट

कितने लोगों के लिए                         6

बनने में लगने वाला समय                     25 मिनट

मील टाईप                                   वेज

सामग्री

तैयार छेना                                 250 ग्राम

मिल्क पाउडर                               250 ग्राम

मावा                                     250 ग्राम

पीसी शकर                                200 ग्राम

घी                                       1 टीस्पून

इलायची पाउडर                             1 टीस्पून

पिस्ता कतरन                              1 टीस्पून

विधि

एक पैन में घी गर्म करके इलायची पाउडर डालकर समस्त सामग्री को एक एक करके डाल दें. मद्धिम आंच पर लगातार चलाते हुए मिश्रण के गाढ़ा होने तक पकाएं. जब मिश्रण पैन के किनारे छोड़कर बीच में इकट्ठा होने लगे तो गैस बंद कर दें. मिश्रण को चिकनाई लगी ट्रे में जमा दें. उपर से पिस्ता कतरन डालकर एक कटोरी से हल्का सा दबा दें ताकि कतरन अच्छी तरह चिपक जाये. ठंडा होने पर छोटे छोटे बाईट में काटें. सिल्वर फॉयल में रैप करके बाईट तैयार करें. आप चाहें तो इसे माइक्रोवेब में भी बना सकतीं हैं.

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घर पर ही पायें सैलून लुक

अगर आप हेयर स्टाइल करना चाहती हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपके बाल हीट की वजह से खराब होंगे. डायसन एक्सपर्ट के अनुसार एयर रैप की मदद से आप अपनी मर्जी से तापमान और हीट को सेट कर सकती हैं. अधिक हीट डेमेज से बचने के लिए लो हीट सेटिंग्स कर सकती हैं.

इसकी मदद से आप अपने बालों में कर्ल, वेव, रफ बालों को स्मूद करना और एक नेचुरल फिनिश पाने जैसे हेयर स्टाइल प्राप्त कर सकती हैं. अपने हेयर टाइप, लंबाई, स्टाइल और अपनी मर्जी के हिसाब से आप इसकी सेटिंग कर सकती हैं और बालों के स्टाइल को कस्टमाइज कर सकती हैं.

स्टाइलिंग : लुक बुक

लो बन

घर पर रहने के कारण बहुत सी महिलाएं बहुत दिनों तक बालों को धोती नहीं हैं जिस कारण सिर में काफी नेचुरल ऑयल इकठ्ठे हो जाते हैं. इन नेचुरल ऑयल को एक क्रिएटिव हेयर स्टाइल में तब्दील कर एक खूबसूरत लुक क्रिएट किया जा सकता है. आप लो बन बना सकती हैं. इसके लिए भी एयर रैप का प्रयोग कर सकती हैं. सिर धोने के बीच में आप बालों में वेव, कर्ल आदि करके बालों का अच्छा स्टाइल बना सकती हैं. इस लुक को प्राप्त करने के लिए निम्न स्टेप्स का प्रयोग करें

सबसे पहले उठे हुए बालों को थोड़ा पानी के साथ भिगो लें.

बालों को फ्रिज मुक्त बनाने के लिए और कर्ल्स में थोड़ा खिंचाव लाने के लिए एयर रैप का प्रयोग करें.

एक इलास्टिक बैंड लें और बालों को गर्दन से भी नीचे की पोनी टेल में सिक्योर कर लें ताकि बाल स्मूद हो सकें.

अब बालों को थोड़ा सा मोड़ कर एक बन बना लें और इसके बाद थोड़ा हेयर स्प्रे छिड़क लें.

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बैंग और फ्रिंजेस

अगर आपने बैंग और फ्रिंज वाला हेयर स्टाइल चुना है तो समय-समय पर हेयर ड्रेसर के पास न जाने के कारण बाल काफी अन इवन तरीके से उगने लगते हैं. जो काफी बिखरे बिखरे और भद्दे लगने लगते हैं. फ्रिंज को निम्न प्रकार मेंटेन करके रख सकती हैं.

बाल धोने के बाद हमेशा फ्रिंज को ब्लो ड्राई करके रखें. प्राकृतिक रूप से बाल सुखाने से बाल थोड़े अलग अलग स्ट्रीक में निकलने लगते हैं जिससे मेसी हेयर हो जाते हैं.

ब्लो ड्राइंग करते समय ब्रश की मदद से बालों को ऊपर करें ताकि बाल पूरी तरह से सूख सकें. इससे बालों में थोड़ी वॉल्यूम भी एड होगी. इसके लिए आप सुपर सोनिक हेयर ड्रायर या फिर एयर रैप का प्रयोग कर सकते हैं.

अगर आप बालों में कोई स्टाइल एड करना चाहती हैं तो फ्रिंज को पहले अपने माथे के आगे से हटाना पड़ता है. एयर स्ट्रेटनर लें और बालों को पीछे लेकर जाते हुए स्ट्रेट करें ताकि वह चेहरे से पीछे हट जाएं.

इसके अलावा एयर रैप से आप आगे पड़े बालों को थोड़ा कर्ल भी कर सकती हैं.

स्मूद एंड स्लीक

इस समय हम सभी अपनी सेहत और स्किन की काफी केयर कर रहे हैं. लेकिन बालों की केयर करना भी काफी जरूरी होता है. अगर आप बालों में अधिक हीट का प्रयोग किए बिना ही स्टाइल करना चाहती हैं तो इसके कोराल स्ट्रेटनर का प्रयोग कर सकती हैं. इसकी यूनिक फ्लेक्सिंग प्लेट तकनीक बालों को सीधा करने में मदद करती है और इससे नुकसान भी बाकी हेयर स्टाइलिंग टूल्स के मुकाबले आधा होता है. अगर स्ट्रेट बाल चाहिए तो इस टूल की मदद से आसनी से प्राप्त कर सकती हैं.

सिर धोने के बाद बालों में स्टाइल क्रीम लगाएं और आराम आराम से ब्लो ड्राई कर लें.

इसके लिए एयर रैप की स्मूदनिंग ब्रश अटैचमेंट का प्रयोग कर सकती हैं. इससे बालों की स्मूदनेस बढ़ जायेगी जिससे हेयर स्टाइल लंबे समय तक टिका रहेगा.

अब इस स्ट्रेटनर का प्रयोग करके अपने बालों को स्ट्रेट करना शुरू करें.

मीडियम स्पीड के साथ बालों के छोटे छोटे सेक्शन ले और उन्हें स्टाइल करें.

हेयर लाइन सेक्शंस के लिए हीट सेटिंग को कम कर दें.

बाल स्ट्रेट होने के बाद अपनी मर्जी से उन्हें अरेंज करें.

कर्ल्स और वेव

अगर आपके बाल थोड़े घुंघराले हैं और आप उन्हें स्ट्रेट करने की बजाए थोड़ा नेचुरल लुक पसंद करती हैं तो आप उनमें थोड़ी-थोड़ी वेव्स या फिर कर्ल्स एड कर सकती हैं. डिफ्यूसर अटैचमेंट के साथ डायसन के सुपर सॉनिक हेयर ड्रायर की मदद से आप अपने बालों में वेव या फिर कर्ल्स एड कर सकती हैं और इस काम में ज्यादा मेहनत और समय भी नहीं लगने वाला है. इसके लिए निम्न स्टेप्स का पालन करें :

बाल धोने के बाद उससे सारा पानी निचोड़ दें. इसके लिए या तो तौलिया या फिर टी शर्ट का प्रयोग करें.

अपने बालों की नेचुरल वेव को बरकरार रखने के लिए और इन्हें स्मूद रखने के लिए एक मॉइश्चराइजिंग क्रीम लगाएं.

अब बालों में कंघी करने के बाद हेयर ड्रायर का लो एयर फ्लेम पर प्रयोग करें. अपने बालों के हिसाब से ड्रायर की सेटिंग्स तय करें.

अब बालों का एक एक सेक्शन लें और उसे डिफ्यूजर में डाल दें. इसे जब तक दोहराएं जब तक बाल पूरी तरह से न सुख जाएं. बालों के स्टाइल होने के बाद हेयर सीरम लगाएं.

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टेक्सचर एंड कॉल्स

इस हेयर स्टाइल को प्राप्त करने के लिए  सुपर सोनिक ड्रायर का प्रयोग कर सकती हैं. इसके लिए निम्न स्टेप्स फॉलो करें :

सबसे पहले बालों को धो लें और धोने के बाद उन्हें मीडियम सेक्शंस में बांट दें. इसके बाद कंडीशनर अप्लाई करें.

अगर बालों में उलझनें हैं तो एक वाइड टूथ कॉम्ब की मदद से बालों में कंघी कर लें और सारी उलझनों को निकाल दें.

इसके बाद भी बालों में थोड़ा लीव इन कंडीशनर लगाएं और अगर जरूरत पड़े तो बालों में पानी भी छिड़क लें.

अब हेयर ड्रायर लें और बालों को स्ट्रेच और लूज करती जाएं.

अगर बाल ज्यादा लंबे हैं तो अधिक स्ट्रेच न करें.

इस प्रक्रिया को सारे बालों में दोहराएं.

पूरी प्रक्रिया होने के बाद कर्ल्स को अपने मुताबिक अरेंज करने के लिए वाइड टूथ कंघी का प्रयोग करें और स्टाइल को एक फाइनल टच दे.

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जानें एक्ट्रेस फ्लोरा सैनी के फिटनेस मंत्र

हिंदी, तमिल, तेलगू, कन्नड़ फिल्मों में काम करने के अलावा ऑल्ट बालाजी की सबसे बोल्ड वेब सीरीज ‘गंदी बात’ के 5वें सीजन से धमाल मचाने वाली ग्लैमरस एक्ट्रेस फ्लोरा सैनी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है. अक्सर अपनी बोल्ड और सेक्सी फोटोज शेयर करती रहती है. हाल ही में उन्होंने वीमेंस डे के मौके पर महिलाओं को फिट रहने के अपने पर्सनल सीक्रेट्स शेयर किए है. उनके फिट रहने का राज क्या है बताते है उन्ही की जुबानी.

एक्ट्रेस फ्लोरा सैनी का फिटनेस मंत्र-

1.वीमेंस डे आने वाला है इस मौके पर महिलाओं को क्या संदेश देना चाहती है?

मैं ये ही कहना चाहती हूं महिलाएं बहुत ही स्ट्रांग है , सुपर वीमेंस है. अपने आप को किसी के कहने पर कभी कम मत समझना, सारे आदमियों की जितनी भी पोस्ट है उन पर कब्जा करना, सबको दिखा देना आप कितना अच्छा कर सकती हो. यंग लड़कियों के लिए इंस्प्रेशन बनना. महिलाओं के लिए वर्क लाइफ और प्रोफेशनल लाइफ दोंनो को बैलेंस करना आसान नही है बिग सेल्यूट आल द वीमेंस.

2.आपकी नजर में महिलाओं के लिए हेल्थ अवेरनेस होना कितना जरूरी है?

मेरे नजरिए में महिलाओं, पुरुषों और बच्चों , सभी के लिए हेल्थ अवेरनेस होना जरूरी है. पहले  हमारे समय में प्ले ग्राउंड होते थे उस समय बच्चे खेलते थे. पर अब सब चेंज हो चुका है. आजकल के बच्चे अपना  समय मोबाइल या फिर गेम पर ज्यादा बिताते  है. इसलिए  बहुत जरूरी है कि बच्चों को अधिक से अधिक एक्टिवेटी में शामिल करें. महिलाएं अगर अपने लिए टाइम नहीं निकाल पा रहीं हैं तो वह घर के काम करके भी अपने को फिट रख सकती हैं. अपने घर को साफ करके जो वर्क आउट होता है उससे बढ़िया कुछ हो ही नहीं सकता.

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3.महिलाओं को ऐसी कौन सी 5 चीजें स्ट्रांग बनाती है?

मुझे 5 चीजे तो नही पता बट महिलाएं, आदमियों के मुकाबले ज्यादा स्ट्रांग है. मेरी मम्मी कहती है आदमियों को जब स्ट्रेस होता है तो उन्हें कुछ न कुछ सहारे की जरूरत होती है वो स्ट्रेस में सिगरेट और शराब का सहारा लेते है लेकिन महिलाओं को इन सब चीजों की जरूरत नहीं होती है. हमारी नानी, दादी, मां और बहनों ने कम पैसों में भी घर चलाया है. बहुत सारे बच्चों को एक साथ एजुकेट किया है. महिलाएं बनी ही स्ट्रांग है. जो अपने अंदर से एक बच्चे को निकाल सकती है वो कुछ भी कर सकती है. उसकी लाइफ में कुछ भी हो जाए वो दोबारा उसे फिर से शुरू कर सकती है. महिलाओं की स्ट्रेंथ ही उसकी खूबसूरती है.

4- लॉक डाउन बहुत लंबा सफर रहा जिसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत पड़ा है आप इससे बाहर कैसे निकली?

लॉक डाउन लंबा सफर जरूर था थैंकफुली मैं अपना ऐप चला रही थी तो मैं मेंटली काफी बिजी थी. मैंने बहुत सारे लोगों को एडवाइज जरूर दी जिन्हें डिप्रेशन हुआ, अकेलापन महसूस हुआ. आजकल की लाइफ डिजिटल ज्यादा हो गई है लोग आपस में कम मिलते है डिजिटली फोन पर सोशल मीडिया के जरिए ज्यादा टच में रहते है तो लॉक डाउन एक क्रेच कोर्स था. हमें ये रिलाइज करने के लिए की ह्यूमेन इमोशन को मत भूले एक दूसरे से मिलना, गले लगाना सिंपल सी चीज है इसमें कितनी हीलिंग है.

मेरी 3 चीजे जो लॉक डाउन से रिलेटेड है जिससे आपको जिंदगी में किसी भी चीज से मेंटल स्ट्रेस नही होगा. एक तो मीठा खाएं, मीठा खा कर अपना गम भूल जाएं, जो मीठा खाता है तो हैप्पी हार्मोन्स आते है. दूसरा अच्छा गाना लगाएं तो आटोमेटेकली आपको लगेगा कि अच्छे गाने पर डांस करू और जो आदमी डांस करेगा तो वह बिना स्माइल किये रहेगा नही,  उसे डिप्रेशन होएगा नही और तीसरा अच्छे दोस्तों से बात करना यानी खुशमिजाज दोस्त जो पॉजिटिव वाइवज वाले हो, आज के समय मैं हंसी, ख़ुशी और मुस्कुराहट ही सबसे बड़ा खजाना है जिससे आपके दिमाग में निगेटिव ख्याल ही नही आते है.

5.बॉडी को फिट रखने के लिए दिन की शुरुआत किस तरह करतीं है?

मेरे दिन की शुरुआत बुलेट कॉफी से होती है. आप भी सोच रहें होंगे कि आख़िर  बुलेट कॉफी है क्या? तो मैं आपको बता दूं कि ये नॉर्मल ब्लैक कॉफी का

थोड़ा हाईटेक वर्जन है, जिसमें घी और कोकोनेट  ऑयल डाला जाता है . ये पीने में बहुत टेस्टी होता है. मैं इसे अपने तरीके से टेस्टी बनाती हूं. इसको पीने के बाद काफी देर तक भूख नहीं लगती क्योंकि ये हैवी होती है.पर  मैं जब शूट पर होती हूं तो एक कड़क मसाला चाय पीती हूं.

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6.योग या एक्सरसाइज में क्या करना पसंद करती है?

ये मेरे मूड पर डिपेंड करता है उस समय स्ट्रेसफुल डे है कैसा दिन है. मुझे डांस करना पसंद है. अगर मैं  शूट पर होती हूं तो शॉट के बीच में डायलॉग याद करते हुए चलती रहती हूं इससे मेरी वॉक होती रहती है.

7- फिट रहने के लिए रुटीन फालो करने के क्या नियम है?

फिट रहने के लिए रूटीन को फॉलो करना बहुत जरूरी होता है पर लोग ऐसा नहीं कर पाते. अकसर देखने को  मिलता है कि न्यू ईयर पर लोग फिट रहने का रेसलूशन लेते हैं पर थोड़े दिन बाद ब्रेक हो जाता है. ऐसा ना हो इसके लिये बहुत जरूरी है कि रूटीन को ब्रेक ना होने दें.

8.आप वेजिटेरियन है या नॉन वेजिटेरियन डाइट में क्या लेती है. डाइट प्लान क्या है?

वैसे तो मैं नॉन वेजिटेरियन हूं मगर मुझे वेजिटेरियन खाना बहुत पसंद है. अगर मुझे ऑप्शन दिया जाए तो मैं वेजिटेरियन खाना ही पसंद करती हूं. मुझे लगता है कि यह बहुत कंपलीट खाना है. वैसे अभी तो मैं स्ट्रिक्ट डाइट पर हूं तो चिकन और सैलिड बहुत जरूरी है मेरी डाइट में. वेजिटेरियन में अगर  मुझे ऑप्शन दिया जाए तो मैं इडली की बहुत बड़ी फैन हूं.

जब शौहर का मिजाज हो आशिकाना

रंगीन, आशिकमिजाज पति पाना भला किस औरत की दिली तमन्ना न होगी? अपने ‘वे’ इश्क और मुहब्बत के रीतिरिवाजों से वाकिफ हों, दिल में चाहत की धड़कन हो, होंठों पर धड़कन का मचलता इजहार रहे, तो इस से ज्यादा एक औरत को और क्या चाहिए? शादी के बाद तो इन्हें अपनी बीवी लैला लगती है, उस का चेहरा चौदहवीं का चांद, जुल्फें सावन की घटाएं और आंखें मयखाने के प्याले लगते हैं. लेकिन कुछ साल बाद ही ऐसी बीवियां कुछ घबराईघबराई सी, अपने उन से कुछ रूठीरूठी सी रहने लगती हैं. वजह पति की रंगीनमिजाजी का रंग बाहर वाली पर बरसने लगता है.

यही करना था तो मुझ से शादी क्यों की

शादी से पहले विनय और रमा की जोड़ी को लोग मेड फौर ईचअदर कहते थे. शादी के बाद भी दोनों आदर्श पतिपत्नी लगते थे. लेकिन वक्त गुजरने के साथसाथ विनय की आंखों में पहले वाला मुग्ध भाव गायब होने लगा. राह चलते कोई सुंदरी दिख जाती, तो विनय की आंखें उधर घूम जातीं. रमा जलभुन कर खाक हो जाती. जब उस से सहा न जाता, तो फफक पड़ती कि यही सब करना था, तो मुझ से शादी ही क्यों की? क्यों मुझे ठगते रहते हो?

तब विनय जवाब देता कि अरे भई, मैं तुम से प्यार नहीं करता हूं. यह तुम ने कैसे मान लिया? तुम्हीं तो मेरे दिल की रानी हो.

सच यही था कि विनय को औफिस की एक लड़की आकर्षित कर रही थी. खुशमिजाज, खिलखिलाती, बेबाक मंजू का साथ उसे बहुत भाने लगा था. उस के साथ उसे अपने कालेज के दिन याद आ जाते. मंजू की शरारती आंखों के लुकतेछिपते निमंत्रण उस की मर्दानगी को चुनौती सी देते लगते और उस के सामने रमा की संजीदा, भावुक सूरत दिल पर बोझ लगती. रमा को वह प्यार करता था, अपनी जिंदगी का एक हिस्सा जरूर मानता था, लेकिन रोमांस के इस दूसरे चांस को दरकिनार कर देना उस के बस की बात न थी.

ये मेरे पति हैं

इसी तरह इंदिरा भी पति की आशिकाना हरकतों से परेशान रहती थी. उस का बस चलता तो देबू को 7 तालों में बंद कर के रखती. वह अपनी सहेलियों के बीच भी पति को ले जाते डरती थी. हर वक्त उस पर कड़ी निगाह रखती. किसी पार्टी में उस का मन न लगता. देबू का व्यक्तित्व और बातचीत का अंदाज कुछ ऐसा था कि जहां भी खड़ा होता कहकहों का घेरा बन जाता. महिलाओं में तो वह खास लोकप्रिय था. किसी के कान में एक शेर फुसफुसा देता, तो किसी के सामने एक गीत की पंक्ति ऐसे गुनगुनाता जैसे वहां उन दोनों के सिवा कोई है ही नहीं. उस की गुस्ताख अदाओं, गुस्ताख नजरों पर लड़कियों का भोला मन कुरबान हो जाने को तैयार हो जाता. उधर इंदिरा का मन करता कि देबू के गले में एक तख्ती लटका दे, जिस पर लिख दे कि ये मेरे पति हैं, ये शादीशुदा हैं, इन से दूर रहो.

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बेवफा होने का मन तो हर मर्द का चाहता है

घर में अच्छीखासी पत्नी होते हुए भी आखिर कुछ पति क्यों इस तरह भटकते हैं? यह सवाल मनोवैज्ञानिक एवं मैरिज काउंसलर से पूछा गया, तो उन्होंने एक ऐसी बात बताई, जिसे सुन कर आप को गुस्सा तो आएगा, लेकिन साथसाथ मर्दों के बारे में एक जरूरी व रोचक जानकारी भी प्राप्त होगी. उन का कहना था कि मर्दों के दिलोदिमाग व खून में ही कुछ ऐसे तत्त्व होते हैं, जो उन के व्यवहार के लिए बुनियादी तौर पर काफी हद तक जिम्मेदार होते हैं यानी कुदरत की तरफ से ही उन्हें यह बेवफाई करने की शह मिलती है.

इस का मतलब यह भी निकलता है कि बेवफा होने का मन तो हर मर्द का चाहता है, पर किसी की हिम्मत पड़ती है किसी की नहीं. किसी को मौका मिल जाता है, किसी को नहीं. किसी की पत्नी ही उसे इतना लुभा लेती है कि उसे उसी में नित नई प्रेमिका दिखती है, तो कुछ में आरामतलबी का मद्दा इतना ज्यादा होता है कि वे यही सोच कर तोबा कर लेते हैं कि कौन इश्कविश्क का लफड़ा मोल ले.

अब सवाल उठता है कि सामाजिक सभ्यता के इस दौर में आखिर कुछ पति ही इन चक्करों में क्यों पड़ते हैं? लीजिए, इस प्रश्न का उत्तर भी मनोवैज्ञानिकों के पास हाजिर है. जरा गौर करें:

पत्नी से आपेक्षित संतोष न मिलना

अकसर इन पतियों के अंदर एक अव्यक्त अतृप्ति छिपी रहती है. सामाजिक रीतिरिवाजों का अनुसरण कर के वे शादी तो कर लेते हैं, गृहस्थ जीवन के दौरान पत्नी से प्रेम करते हैं, फिर भी कहीं कोई हूक मन में रह जाती है. या तो पत्नी से वे तनमन की पूर्ण संतुष्टि नहीं पा पाते या फिर रोमांस की रंगीनी की हूक मन को कचोटती रहती है. जहां पत्नी से अपेक्षित संतोष नहीं मिलता, वहां बेवफाई का कुछ गहरा रंग इख्तियार करने का खतरा रहता है. कभीकभी इस में पत्नी का दोष होता है, तो कभी नहीं.

माफ भी नहीं किया जा सकता

रवींद्रनाथ टैगोर की एक कहानी का यहां उदाहरण दिया जा सकता है. हालांकि पत्नी नीरू के अंधे होने का कारण पति ही होता है, फिर भी पति एक अन्य स्त्री से चुपचाप विवाह करने की योजना बना डालता है. वह पत्नी नीरू से प्यार तो करता है, लेकिन फिर भी कहीं कुछ कमी है. जब पति की बेवफाई का पता नीरू को चलता है, तो वह तड़प कर पूछती है, ‘‘क्यों तुम ने ऐसा सोचा?’’

तब वह सरलता से मन की बात कह देता है, ‘‘नीरू, मैं तुम से डरता हूं. तुम एक आदर्श नारी हो. मुझे चाहिए एक साधारण औरत, जिस से मैं झगड़ सकूं, बिगड़ सकूं, जिस से एक साधारण पुरुष की तरह प्यार कर सकूं.’’

नीरू का इस में कोई दोष न था, लेकिन पति के व्यवहार को माफ भी नहीं किया जा सकता. हां, मजबूरी जरूर समझी जा सकती है. मगर सब पत्नियां नीरू जैसी तो नहीं होतीं.

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औरतें इतनी खूबसूरत क्यों होती हैं

‘‘पत्नी तो हमारी ही हस्ती का हिस्सा हो जाती है भई,’’ कहते हैं एक युवा शायर, ‘‘अब अपने को कोई कितना चाहे? कुदरत ने दुनिया में इतनी खूबसूरत औरतें बनाई ही क्यों हैं? किसी की सुंदरता को सराहना, उस से मिलना चाहना, उस के करीब आने की हसरत में बुराई क्या है?’’

इन शायर साहब की बात आप मानें या न मानें, यह तो मानना ही पड़ेगा कि रोमांस और रोमानी धड़कनें जिंदगी को रंगीन जरूर बनाती हैं. कुछ पति ऐसे ही होते हैं यानी उन्हें एकतरफा प्यार भी रास आता है.

सुबह का वक्त है. निखिलजी दफ्तर जाने की तैयारी में लगे हैं. सामने सड़क पर सुबह की ताजा किरण सी खूबसूरत एक लड़की गुजरती है. मुड़ कर इत्तफाकन वह निखिलजी के कमरे की ओर देखती है और निखिलजी चेहरे पर साबुन मलतेमलते खयालों में खो जाते हैं.

पत्नी चाय ले कर आती है, तो देखती है कि निखिलजी बाहर ग्रिल से चिपके गुनगुना रहे हैं, ‘जाइए आप कहां जाएंगे…’

‘‘अरे कौन चला गया?’’ पत्नी पूछती है.

तब बड़ी धृष्टता से बता भी देते हैं, ‘‘अरे कितनी सुंदर परी अभी इधर से गई.’’

‘‘अच्छाअच्छा अब जल्दी करो, कल पहले से तैयार हो कर बैठना,’’ और हंसती हुई अंदर चली जाती है.

यही बात निखिलजी को अपनी पत्नी की पसंद आती है. ‘‘लाखों में एक है,’’  कहते हैं वे उस के बारे में, ‘‘खूब जानती है कहां ढील देनी है और कहां डोर कस कर पकड़नी है.’’

लेकिन वे नहीं जानते कि इस हंसी को हासिल करने के लिए पत्नी को किस दौर से गुजरना पड़ा है. शादी के लगभग 2 साल बाद ही जब निखिलजी अन्य लड़कियों की प्रशंसा करने लगे थे, तो मन ही मन कुढ़ गई थी वह. जब वे पत्रिकाओं में लड़कियों की तसवीरें मजे लेले कर दिखाते तो घृणा हो जाती थी उसे. कैसा आदमी है यह? प्रेम को आखिर क्या समझता है यह? लेकिन फिर धीरेधीरे दोस्तों से, छोटे देवरों से निखिलजी की इस आदत का पता चला था उसे.

‘‘अरे, ये तो ऐसे ही हैं भाभी.’’

दोस्त कहते, ‘‘इसे हर लड़की खूबसूरत लगती है. हर लड़की को ले कर स्वप्न देखता है, पर करता कुछ नहीं.’’

और धीरेधीरे वह भी हंसना सीख गई थी, क्योंकि जान गई थी कि प्रेम निखिल उसी  से करते हैं बाकी सब कुछ बस रंगीनमिजाजी  की गुदगुदी है.

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औरत एक पहेली: संदीप और विनीता के बीच कैसी थी दोस्ती- भाग 3

दरवाजे पर लहराता परदा एक ओर खिसका कर मैं ने अंदर प्रवेश किया तो सभी शब्द मेरे हलक में ही सूख गए. सामने कुरसी पर एक ऐसा इनसान बैठा हुआ था, जिस की कमर के नीचे दोनों टांग गायब थीं. उसे इनसान न कह कर सिर्फ एक धड़ कहा जाए तो बेहतर होगा.

‘‘आ जाओ, रेखा, मुझे विश्वास था  जीवन में दोबारा तुम से मुलाकात अवश्य होगी,’’ एक दर्दीला चिरपरिचित स्वर गूंज उठा.

उस पुरुष को पहचान कर मेरा रोंआरोंआ सिहर उठा था. पैरों तले जमीन खिसकती जा रही थी.

यह कोई और नहीं, मेरे भूतपूर्व पति सूरज थे. इन से वर्षों पहले मेरा तलाक हो चुका था. फिर मैं ने संदीप के साथ नई दुनिया बसा ली थी और संदीप को अपने अतीत से हमेशा अनभिज्ञ रखा था.

अब सूरज को देख कर मेरे कड़वे अतीत का वह काला पन्ना फिर से उजागर हो गया था, जिस की यादें मेरे मन की गहराइयों में दफन हो चुकी थीं.

वर्षों पहले मांबाप ने बड़ी धूमधाम से मेरा विवाह सूरज के साथ किया था. सूरज एक कुशल वास्तुकार थे. घर भी संपन्न था. विवाह के प्रथम वर्ष में ही मैं एक सुंदर, स्वस्थ बेटे की मां बन गई थी.

फिर हमारी खुशियों पर एकाएक वज्रपात हुआ. एक सड़क दुर्घटना में सूरज की दोनों टांगों की हड्डियां टूट कर चूरचूर हो गई थीं. जान बचाने हेतु डाक्टरों को उन की टांगें काट देनी पड़ी थीं.

एक अपाहिज पति को मेरा मन स्वीकार नहीं कर पाया. मैं खिन्न हो उठी. बातबात पर लड़ने, चिड़चिड़ाने लगी. मन का असंतोष अधिक बढ़ गया तो मैं सूरज को छोड़ कर मायके  में जा कर रहने लगी थी.

मायके वालों के प्रयासों के बाद भी मैं ससुराल जाने को तैयार नहीं हो पाई तो सब ने मुझे दुखी देख कर मेरा तलाक कराने के लिए कचहरी में प्रार्थनापत्र दिलवा दिया. मैं सूरज से छुटकारा पा कर किसी समर्थ पूर्ण पुरुष से विवाह करने के लिए अत्यंत इच्छुक थी.

एक दिन हमेशा के लिए हमारा संबंधविच्छेद हो गया. कानून ने सूरज की विकलांगता के कारण हमारे बेटे विक्की को मेरी सुपुर्दगी में दे दिया.

विक्की की वजह से मेरे पुनर्विवाह में अड़चनें आने लगीं. बच्चे वाली स्त्री से विवाह करने के लिए कौन पुरुष तैयार हो सकता था. मेरे मायके वाले भी विक्की की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लादने के लिए तैयार नहीं हो पाए.

इन सब बातों की जानकारी हो जाने पर एक दिन सूरज की माताजी मेरे मायके आ पहुंचीं. उन्होंने रोरो कर विक्की को मुझ से ले लिया.

सूरज की माताजी प्रसन्न मन से वापस लौट आईं. मेरा बोझ हलका हो गया था. विक्की की जुदाई के गम से अधिक मुझे दूसरे विवाह की अभिलाषा थी.

एक दिन मेरा विवाह संदीप से संपन्न हो गया. हम दोनों का यह दूसरा विवाह था. संदीप विधुर थे. विवाह की पहली रात ही हम दोनों ने अपनेअपने अतीत को हमेशा के लिए भुला देने की प्रतिज्ञा कर ली थी.

फिर एक दिन मायके जाने पर मुझे मालूम हुआ कि सूरज की माताजी सूरज और विक्की को ले कर किसी अन्य शहर में चली गई हैं.

‘‘बैठो, रेखा. खड़ी क्यों हो? लगता है, मुझे अचानक देख कर हैरान रह गई हो. तुम ने तो समझ लिया होगा मैं कहीं मरखप गया होऊंगा.’’

‘‘नहीं, सूरज, ऐसा मत कहो. सभी को जीवित रहने का पूरापूरा अधिकार है,’’ मेरे मुंह से अचानक निकल गया और मैं एक कुरसी पर निढाल सी बैठ गई.

‘‘मेरे जीवित रहने का अधिकार तो तुम छीन कर ले गई थीं. रेखा, तुम छोड़ कर चली गईं तो मैं लाश बन कर रह गया था. अगर विनीता का सहारा नहीं मिलता तो मैं अब तक अवश्य मर चुका होता. आज विनीता की बदौलत ही मैं इतनी बड़ी फर्म का मालिक बना बैठा हूं.’’

बहुत प्रयत्न करने के बाद भी मेरे आंसू रुक नहीं पाए. मैं ने मुंह फेर कर रूमाल से अपना चेहरा साफ किया.

सूरज कहते जा रहे थे, ‘‘तुम्हें वह नर्स याद है जो मेरी देखभाल के लिए मां ने घर में रखी थी. वह शर्मीली सी छुईमुई लड़की विनी.’’

‘ओह, अब मैं समझी कि मुझे विनीताजी का चेहरा इतना जानापहचाना क्यों लग रहा था.’

‘‘तुम विनी को नहीं पहचान पाईं, परंतु विनी ने पहली बार देख कर ही तुम्हें पहचान लिया था. उस ने मुझे तुम्हारे बारे में, तुम्हारी आर्थिक स्थिति और रहनसहन के बारे में सभी कुछ बतला दिया था. मैं तुम्हारी यथासंभव सहायता करने के लिए तुरंत तैयार हो गया था. मेरे आग्रह पर विनीता ने कदमकदम पर तुम्हारी और तुम्हारे पति की मदद की थी.

‘‘मेरे पैर मौजूद होते तो मैं खुद चल कर तुम्हारे घर आता. तुम्हारे सामने दौलत के ढेर लगा कर कहता, ‘जितनी दौलत की आवश्यकता हो, ले कर अपनी भूख मिटा लो. तुम इसी वजह से मुझे छोड़ कर गई थीं कि मैं अपाहिज हूं. दौलत पैदा करने में असमर्थ हूं…तुम्हें पूर्ण शारीरिक सुख नहीं दे पाऊंगा…’’ कहतेकहते सूरज का गला भर आया था.

‘‘बस, रहने दो सूरज, मैं और अधिक नहीं सुन सकूंगी,’’ मैं रो पड़ी, ‘‘एक जहरीली चुभती हुई यादगार ही तो हूं, भुला क्यों नहीं दिया मुझे.’’

‘‘कैसे भुला पाता कि मेरे विक्की की तुम मां हो…’’

‘‘विक्की कहां है, सूरज? वह कैसा है, क्या मैं उसे देख सकती हूं,’’ मैं व्यग्र हो कर कुरसी से उठ कर खड़ी हो गई.

सूरज अपनेआप को संयत कर चुके थे, ‘‘विक्की यानी विकास से तुम विनीता के दफ्तर में मिल चुकी हो. वह विनीता के बराबर वाली कुरसी पर बैठ कर दफ्तर के कामों में उस का हाथ बंटाता है. अब वह एक प्रसिद्ध वास्तुकार है. तुम्हारे मकान का नक्शा उसी ने तैयार किया था.’’

‘‘सच, वही मेरा विक्की है,’’ हर्ष व उत्तेजना से मैं गद्गद हो उठी. मेरी आंखों के सामने वह गोरा, स्वस्थ युवक घूम गया, जिस से मैं कई बार मिल चुकी थी, बातें कर चुकी थी. मेरे मकान के मुहूर्त पर वह विनीता के साथ मेरे घर भी आया था.

अचानक मेरे मन में एक अनजाना डर उभर आया, ‘‘क्या विक्की जानता है कि मैं उस की मां हूं?’’

‘‘नहीं, वह उस मां से नफरत करता है जो उस के अपाहिज पिता को छोड़ कर सुख की तलाश में अन्यत्र चली गई थी. वह विनीता को ही अपनी सगी मां मानता है. जानती हो रेखा, वह मुझे कितना चाहता है, मेरे बिना भोजन भी नहीं करता.’’

‘‘सूरज, मेरी एक बात मानोगे.’’

‘‘कहो, रेखा.’’

‘‘विक्की से कभी मत कहना कि मैं उस की मां हूं. यही कहना कि विनीता ही उस की असली मां है,’’ रोती हुई मैं सूरज के कमरे से बाहर निकल आई.

जिस पौधे को मैं उजाड़ कर चली गई थी, विनीता ने उसे जीवनदान दे कर हराभरा कर दिया था, मैं सोचती रह गई कि स्वार्थी विनीता है या मैं. कितना गलत समझ बैठी थी मैं विनीता को. इस महान नारी ने 2 बार मेरा घर बसाया था. एक बार अपाहिज सूरज और मासूम बेसहारा विक्की को अपनाकर और दूसरी बार मेरा मकान बनवा कर.

मैं सीढि़यां उतर कर नीचे आ गई.

घर वापस लौटी तो मेरे चेहरे की उड़ी हुई रंगत देख कर बच्चे और संदीप सब सोच में पड़ गए. एकसाथ ही मुझ से कारण पूछने लगे. मैं ने एक गिलास पानी पिया और इत्मीनान से बिस्तर पर बैठ कर संदीप से कहने लगी, ‘‘सुनो, तुम विनीताजी के दफ्तर में जा कर उन्हें और उन के पूरे परिवार को रात के खाने के लिए आमंत्रित कर आओ. उन्होंने हमारे लिए इतना सब किया है, हमारा भी तो उन के प्रति कुछ फर्ज है.’’

बच्चे हैरानी से एकदूसरे का मुंह ताकते रह गए. संदीप मेरी ओर ऐसे देखने लगे, जैसे कह रहे हों, ‘औरत सचमुच एक पहेली होती है. उसे समझ पाना असंभव है.

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