Valentine’s Special: घर पर बनें पनीर से बनाएं ये टेस्टी डिश

पनीर अधिकांश लोंगों को प्रिय होता है. कोई खास अवसर हो या किसी को भी कुछ खास महसूस कराना हो तो अक्सर पनीर की डिश बनाई जाती है. पनीर बनाने के लिए दूध को वेनेगर, नीबू का रस या फिर खट्टे दही से फाड़कर बनाया जाता है. स्टार्टर, स्नैक से लेकर सब्जियां और डेजर्ट तक पनीर से बनाये जाते हैं. पनीर में प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन और ओमेगा 3 भरपूर मात्रा में पाया जाता है. दूध से बने पनीर के अतिरिक्त सोयाबीन के दूध से भी पनीर बनाया जाता है जिसे टोफू कहा जाता है यह प्रोटीन का प्रचुर स्रोत होता है परन्तु सोया पनीर की अपेक्षा दूध से बने पनीर को आम लोंगों द्वारा अधिक पसन्द किया जाता है.

घर पर कैसे बनाएं पनीर

घर पर आप बड़ी आसानी से पनीर बना सकतीं हैं. घर पर पनीर बनाने से यह बाजार की अपेक्षा काफी सस्ता तो पड़ता ही है साथ ही बहुत हाइजीनिक भी रहता है. घर पर पनीर बनाने के लिए आप एक लीटर फुल क्रीम दूध को गैस पर उबलने रख दें. एक छोटी कटोरी में 2 टेबलस्पून सफेद सिरका या नीबू के रस में एक टीस्पून पानी मिलाकर रख लें. जब दूध लगभग उबलने वाला हो तो गैस को धीमा करें और धीरे धीरे तीन बार में सिरका डालें, एक चम्मच से चलाती रहें. कुछ ही देर में दूध फट जाएगा. जैसे ही दूध फटने लगे आप गैस बंद कर दें. अब साफ सूती कपड़े को एक छलनी में रखें और फटे दूध को डालकर ठंडा पानी डाल दें ताकि दूध का कुकिंग प्रोसेस बंद हो जाये. अब सूती कपड़े में गांठ लगाकर एक प्लेट में रखकर भारी चकले से दबा दें. 20 मिनट बाद चकला हटाकर पनीर निकाल लें. तैयार पनीर से अब आप अपनी मनचाही डिश तैयार कर सकतीं हैं.

ऐसे करें पनीर को स्टोर

तैयार पनीर को आप एयरटाइट जार में रखकर इतना पानी डालें कि वह पूरा पानी में डूब जाए. अब जार का ढक्कन लगाकर आप इसे फ्रिज में रखकर सप्ताह भर तक आराम से प्रयोग कर सकतीं हैं. बिना पानी के फ्रिज में रखने से पनीर की ऊपरी सतह कड़ी हो जाती है जो प्रयोग के लायक भी नहीं रहती.

रेस्टोरेंट जैसा पनीर बटर मसाला

कितने लोगों के लिए          4

बनने में लगने वाला समय      30मिनट

मील टाइप                         वेज

सामग्री (ग्रेवी के लिए)

पनीर                   250  ग्राम

बटर                    1 टेबलस्पून

तेल                     1 टेबलस्पून

प्याज                   4

टमाटर(मीडियम)     3

लहसुन                  4 कली

अदरक                 1 इंच

हरी मिर्च                  3

साबुत लाल मिर्च        3

दालचीनी                 1 इंच टुकड़ा

ये भी पढ़ें- Winter Special: नाश्ते में बनाएं साबूदाने की खिचड़ी

साबुत बड़ी इलायची      2

कश्मीरी लाल मिर्च       1 टीस्पून

दही                            2 टेबलस्पून

काजू                         10

धनिया पाउडर              1 टीस्पून

लाल मिर्च पाउडर         1 टीस्पून

गरम मसाला पाउडर        1 टीस्पून

हल्दी पाउडर                   1/2 टीस्पून

पानी                               1 टेबलस्पून

सामग्री(बघार के लिए)

बटर                             1 टेबलस्पून

तेल                              1 टेबलस्पून

कसूरी मैथी                    1 टेबलस्पून

बारीक कटा प्याज            1

बारीक कटे टमाटर            2

नमक                              स्वादानुसार

पानी                               1/2 कप

कश्मीरी लाल मिर्च           1 टीस्पून

विधि(ग्रेवी बनाने की)

दही में धनिया, कश्मीरी लाल मिर्च, गरम मसाला, और हल्दी पाउडर को अच्छी तरह मिक्स कर लें. एक  पैन में बटर और तेल गरम करके धीमी आंच पर प्याज को सौते करें फिर हरी मिर्च, साबुत लाल मिर्च, अदरक, लहसुन, दालचीनी और बड़ी इलायची को भूनकर मसाले वाला दही डालकर 1 से 2 मिनट तक  चलाते हुए भूनें. काजू डालकर टमाटर काट कर डाल दें. नमक और 1 टीस्पून कश्मीरी लाल मिर्च डालकर 1/2 कप पानी डालकर ढककर 5 मिनट तक धीमी आंच पर पकाकर गैस बंद कर दें. ठंडा होने पर इसे मिक्सी में पेस्ट फॉर्म में पीसकर छलनी से छान लें.

ये भी पढ़ें- फैमिली के लिए बनाएं ये 4 Healthy Snacks

बघार के लिए एक पैन में गर्म बटर और तेल में प्याज, टमाटर, कसूरी मैथी, कश्मीरी लाल मिर्च भूनकर पिसी ग्रेवी डालकर एक उबाल ले लें. कटे पनीर के टुकड़े, पानी और नमक डालकर धीमी आंच पर ढककर 5 मिनट तक पकाकर गैस बंद कर दें. फ्रेश क्रीम और कटे हरे धनिए से सजाकर परांठा या रोटी के साथ सर्व करें.

प्यार की जीत: भाग 1- निशा ने कैसे जीता सोमनाथ का दिल

‘‘मैं बिलाल से बेइंतहा मोहब्बत करती हूं. चाहे कुछ भी हो जाए मैं उसी से शादी करूंगी. आप मुझे कुछ भी कर के रोक नहीं सकते. मेरे जन्म से आज तक इन 21 सालों में आप ने सिर उठा कर भी मेरी ओर नहीं देखा क्योंकि मैं एक बेटी हूं. ऐसे में आप अब क्यों मेरी जिंदगी में दखल दे रहे हैं? यह मेरी जिंदगी है. अगर इस मामले में भी मैं आप की बात सुनूंगी तो मेरी पूरी जिंदगी बरबाद हो जाएगी. मैं इसे बरदाश्त नहीं कर सकती हूं. गलत क्या है और सही क्या है, यह मैं जानती हूं. इस के अलावा मैं अब नाबालिग नहीं हूं. अपना जीवनसाथी  चुनने का अधिकार है मुझे.’’ अपने समक्ष खड़ी अपनी बेटी निशा की बातें सुन कर सोमनाथ आश्चर्यचकित रह गए.

सोमनाथ को यकीन ही नहीं हो रहा था कि जो उन के सामने बोल रही है वह उन की बेटी निशा है. निशा ने इस घर में आए इन 2 सालों में अपने पिता के सामने कभी इतनी हिम्मत से बात नहीं की.

निशा को अपने पिता से इस तरह बात करते हुए देख कर उस की मां लक्ष्मी भी हैरान थी. उसे भी निशा के इस नए रूप को देख कर यकीन ही नहीं हो रहा था कि यह उस की बेटी निशा ही है. अगर एक सलवारकमीज खरीदनी होती तो भी वह अपने पापा से पूछने के लिए घबराती. अपनी मां के पास आ कर ‘मां, आप ही पापा से पूछिए और खरीद दीजिए न प्लीज, प्लीज मां’ बोलने वाली निशा आज अपने पापा के सामने अचानक शेरनी कैसे बन गई? अपने पापा के सामने इस तरह खड़े हो कर बेधड़क बातें कर रही निशा को देख कर लक्ष्मी सन्न रह गई.

उस से भी बड़ी हैरानी की बात यह है कि निशा का यह कहना कि वह एक मुसलमान युवक से प्यार करती है और उसी से शादी भी करना चाहती है. इस प्रस्ताव को सोमनाथ के सामने रखने के लिए भी हिम्मत चाहिए, क्योंकि सोमनाथ एक कट्टर हिंदू हैं. उन के सामने उन की बेटी कह रही है कि वह एक मुसलमान युवक से शादी करना चाहती है. लक्ष्मी ने मन में सोचा कि जो भी हो, निशा की हिम्मत की दाद देनी चाहिए.

ये भी पढ़ें- Women’s Day: अकेली लड़की- कैसी थी महक की कहानी

एक कड़वा सच यह है कि लक्ष्मी कभी अपने पति के सामने ऐसी बातें नहीं कर सकती थी. शादी हुए इन 30 सालों में लक्ष्मी ने पति के सामने कभी अपनी राय जाहिर नहीं की. उन के परिवार की प्रथा है कि औरतों को आजादी न दी जाए. उन का मानना है कि स्त्री का दर्जा हमेशा पुरुष से कम होता है.

मगर लक्ष्मी के मायके की बात अलग थी. लक्ष्मी के पिता ने उसे एक महारानी की तरह पालपोस कर बड़ा किया. उस के पिता की 3 बेटियां थीं और वे इस से बहुत खुश थे. वे अपनी लड़कियों को घर की महालक्ष्मी मानते थे और उन्हें भरपूर स्नेह व इज्जत देते. उन्हें अपनी तीनों बेटियों पर गरूर था खासकर अपनी बड़ी बेटी लक्ष्मी पर. लक्ष्मी की बातों को वे सिरआंखों पर रखते थे. लक्ष्मी की ख्वाहिश का मान करते हुए उन्होंने उसे अंगरेजी साहित्य में बीए करने की इजाजत दी.

लक्ष्मी के पिता ने अपनी बेटी की शादी के मामले में एक गलत फैसला ले लिया. सोमनाथ के परिवार के बारे में अच्छी तरह पूछताछ किए बगैर उस परिवार की शानोशौकत को देख कर अपनी बेटी की शादी सोमनाथ से करवाई. शादी के दूसरे दिन ही लक्ष्मी को ससुराल में एक झटका सा लगा. लक्ष्मी को अंगरेजी अखबार पढ़ते देख कर उस के ससुर ने उसे फटकारा, ‘इस तरह सुबह अंगरेजी अखबार पढ़ना एक बहू को शोभा देता है क्या? तुम्हारी मां ने तुम्हें यही सिखाया है क्या? मर्दों की तरह औरतों का अखबार पढ़ना अच्छे संस्कार नहीं हैं. दुनिया के बारे में जान कर तुम क्या करोगी? तुम्हारा काम है रसोई में खाना पकाना और बच्चे पैदा कर के उन का पालनपोषण करना, समझी तुम?’ ससुरजी की बातें सुन कर लक्ष्मी को ताज्जुब हुआ.

ससुराल में आए कुछ ही दिनों में लक्ष्मी को पता चल गया कि औरतों को मर्दों का गुलाम बना कर रहना ही इस घर की परंपरा है. न चाहते हुए भी लक्ष्मी ने अपनेआप को बदलने की कोशिश की.

समय आया जब लक्ष्मी अपने पहले बच्चे की मां बनने वाली थी. जब डाक्टर ने यह खबर सुनाई तो लक्ष्मी बेहद खुश हुई. उस ने खुशी से अपने पति सोमनाथ को यह समाचार सुनाया तो उन्होंने कहा, ‘‘सुनो, अगर लड़का पैदा हुआ तो उसे ले कर इस घर में आना. लड़की पैदा हुई तो उसे अपने मायके में छोड़ कर आना, समझी. खानदान को आगे बढ़ाने के लिए मुझे लड़का ही चाहिए.’’ यह सुनते ही लक्ष्मी सन्न रह गई. वह सोच भी नहीं सकती थी कि कोई आदमी अपनी पहली संतान के बारे में ऐसा भी सोच सकता है.

बहरहाल, लक्ष्मी ने एक लड़के को जन्म दिया और उस के बाद लक्ष्मी की इज्जत उस घर में बढ़ गई. इस का कारण यह था कि लक्ष्मी की दोनों जेठानियां अपनी पहली संतान लड़की होने केकारण उन्हें अपने मायकों में ही छोड़ कर आईर् थीं. लक्ष्मी के ससुर ने उसे एक कीमती गहना तोहफे में दिया. उस के 2 वर्षों बाद जब लक्ष्मी का दूसरा लड़का पैदा हुआ तब से सोमनाथ अपना सीना चौड़ा करते हुए घूमते थे.

ये भी पढ़ें- बीजी यहीं है: क्या सही था बापूजी का फैसला

लक्ष्मी के कई बार मना करने के बावजूद उस के दोनों बेटों संदीप और सुदीप को उस के पति और ससुर ने लाड़प्यार दे कर बिगाड़ दिया. अगर लक्ष्मी बीच में बोले तो, ‘ये दोनों लड़के हैं, शेर हैं मेरे बच्चे. उन्हें पढ़ने की कोई जरूरत नहीं. कुछ भी कर के जिंदगी में सफल हो जाएंगे,’ कह कर लक्ष्मी के दोनों बेटों को पूरी तरह बिगाड़ दिया सोमनाथ ने. लक्ष्मी बेबस हो कर देखती रह गई.

इतने में लक्ष्मी तीसरी बार गर्भवती हुई. सोमनाथ तो बड़े गरूर से कहता रहा, ‘यह भी बेटा ही होगा.’ सोमनाथ की इस बेवकूफी को देख कर लक्ष्मी को समझ में ही नहीं आया कि वह रोए या हंसे.

मगर इस बार लक्ष्मी के एक खूबसूरत बेटी पैदा हुई. लक्ष्मी ने अपनी नन्ही सी परी को अपने सीने से लगा लिया. जब सोमनाथ को यह खबर मिली कि लक्ष्मी ने एक लड़की को जन्म दिया है तो वे गुस्से से पागल हो गए. बच्ची को देखने के लिए भी नहीं आए और ऊपर से उन्होंने चिट्ठी लिखी कि घर वापस आते समय बेटी को मायके में छोड़ कर आना. अगर वहां भी बच्ची को पालना नहीं चाहें तो उसे किसी अनाथ आश्रम में दाखिल करवा देना.

लक्ष्मी अपनी बच्ची को अपनी छोटी बहन के हवाले कर अपने पति के घर वापस आ गई. लक्ष्मी की बहन के 2 बेटे थे, इसलिए उस ने खुशीखुशी लक्ष्मी की बेटी की परवरिश करने की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली. लक्ष्मी की छोटी बहन ने उस प्यारी सी बच्ची का नाम निशा रखा.

लक्ष्मी के बेटे संदीप और सुदीप दोनों अव्वल नंबर के निकम्मे, बदतमीज और बदचलन बने. 10वीं कक्षा में दोनों फेल हो गए और लफंगों की तरह इधरउधर घूमने लगे. लाख कोशिशों के बावजूद लक्ष्मी अपने बेटों को अच्छे संस्कार नहीं दे पाई. संदीप और सुदीप दोनों गैरकानूनी काम कर के 2 बार जेल भी जा चुके थे.

लक्ष्मी ने अपनी बहन की चिट्ठी से यह जान लिया कि निशा पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहती है और अच्छे संस्कारों से आगे बढ़ रही है. लक्ष्मी को इतनी कठिनाइयों के बीच इसी समाचार ने खुश रखा. मगर वह खुशी बहुत दिनों तक नहीं टिकी. लक्ष्मी की छोटी बहन, जिसे कोई बीमारी नहीं थी, अचानक दिल का दौरा पड़ा और 4 दिन अस्पताल में रहने के बाद चल बसी. उस के पति ने सोचा कि एक 21 साल की लड़की को बिन मां के पालना खुद से नहीं होगा, इसलिए निशा को लक्ष्मी के पास छोड़ने का फैसला लिया. उस वक्त निशा फैशन टैक्नोलौजी का कोर्स कर रही थी और वह अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती थी.

आगे पढ़ें- निशा को यह सब बड़ा अजीब सा लगा….

ये भी पढ़ें- किस गुनाह की सजा: रजिया आपा ने क्यों मांगी माफी

अपनी-अपनी जिम्मेदारियां: भाग 2- आशिकमिजाज पति को क्या संभाल पाई आभा

रिनी को घर भेज कर वह आभा के पास ही रुक गया. सोचने लगा कि बैठेबैठाए यह कौन सी मुसीबत आन पड़ी? अब घरबाहर के काम कौन करेगा? आभा पर ही गुस्सा आने लगा उसे कि अगर खुद पर ध्यान देती तो यह मुसीबत न आती. अब क्या करेगा वह? घर, औफिस और अस्पताल के चक्कर में तो मर ही जाएगा.

‘‘पहले वहां जा कर पैसे जमा कर आइए,’’ जब नर्स ने कहा, तो नवल का ध्यान टूटा. लगा अब 4-6 हफ्तों का चक्कर तो लग ही गया, क्योंकि डाक्टर कह रहा था कि इलाज में वक्त लगेगा. सोचसोच कर नवल का माथा घूम रहा था, जो आभा से छिपा न रह सका. वह समझ रही थी कि नवल पर कैसी मुसीबत आन पड़ी. घरबाहर सब कैसे मैनेज होगा? अगर जल्दी अस्पताल से छुट्टी मिल जाए तो अच्छा है. बेचारी को अब भी नवल की ही फिक्र हो रही थी और वह मन ही मन आभा को ही कोसे जा रहा था जैसे उस ने खुद बीमारी को बुलावा दिया हो. वह बेचारी तो खुद दर्द से तड़प रही थी, लेकिन फिर भी नवल का मुंह देखे जा रही थी. अब भी उसे घर की ही चिंता लगी थी कि वहां सब कैसे होगा.

‘‘सुनिएजी, सुमन है मेरे पास, तो आप घर जाइए. वहां भी सब परेशान हो रहे होंगे. जल्द ही ठीक हो जाऊंगी. आप चिंता मत कीजिए,’’ दर्द से कहराते हुए आभा ने कहा.

मगर नवल उस की बातों पर ऐसा झल्ला उठा कि पूछो मत. मुंह बनाते हुए बोला, ‘‘क्या चिंता न करूं? अगर तुम खुद का ध्यान रखती, तो आज यह दिन न आता?’’

मगर वह भूल गया कि एक वही है जो घर में सब का ध्यान रखती है. घरबाहर के कामों से ले कर सब की छोटीबड़ी जरूरतों तक की जिम्मेदारी उसी की है, तो कहां बेचारी को समय मिलता है जो अपना ध्यान रखे.

आभा के अस्पताल में रहने से हफ्तेभर में ही घर की हालत बिगड़ने लगी. इधर नवल औफिस और अस्पताल के चक्कर में पिस रहा था और उधर रिनी और निर्मला घर के कामों को ले कर उलझ पड़तीं. सोनू भी अपनी मनमानी करने लगा था. आभा थी तो डांटडपट कर उसे पढ़ने बैठा दिया करती थी, लेकिन उस के न रहने से वह एकदम लापरवाह हो गया था. दिनभर दोस्तों के साथ घूमताफिरता. जब पूछो, तो सोनू घर पर नहीं है, सुनने को मिलता और नवल का माथा गरम हो जाता. लेकिन किसेकिसे देखे वह?

ये भी पढ़ें- और वक्त बदल गया: क्या हुआ था नीरज के साथ

तभी सुमन आ कर बोली कि उस का पति 14 दिनों के लिए औफिस के काम से बाहर जा रहा है, तो आज रात से वह आभा के पास रुक जाया करेगी. सुन कर नवल ने राहत की सांस ली, क्योंकि वह कई दिनों से ठीक से सो भी नहीं पा रहा था. लगा, जिस सुमन को वह चुगलखोर औरत कह कर संबोधित करता रहा, जिसे देखते ही उसे चिढ़ होने लगती थी आज वही सुमन उस के काम आ रही है. एक वही थी जो आभा के पास जा कर बैठती थी, जब नवल औफिस में होता तब.

आभा के लिए सुबह का चायनाश्ता, दोपहर का खाना ज्यादातर वही तो बना कर ले जाती थी. अपनी करनी पर पछतावा कर मन ही मन वह सुमन का शुक्रगुजार होने लगा. नवल को अब आभा की चिंता सताने लगी थी, क्योंकि डाक्टर कह रहा था कि अगर हैपेटाइटिस बीमारी लंबे समय तक रहे तो लिवर काम करना बंद कर सकता है या फिर कैंसर अथवा घाव हो सकते हैं. कहीं आभा को ऐसा कुछ हो गया तो बिस्तर पर पड़ेपड़े ही वह सोचने लगा. चिंता के मारे उसे नींद नहीं आ रही थी.

नवल जैसे ही अस्पताल पहुंचा तो आभा का मृत शरीर बैड पर पड़ा दिखा.

दोनों बच्चे बिलख रहे थे. निर्मला भी एक कोने में दुबकी यह कहकह कर सिसक रही थीं कि उस के मरने की उम्र न थी. फिर आभा क्यों चली गई? उधर सुमन उसे धिक्कार रही थी कि वही आभा की मौत का जिम्मेदार है. उसी ने उस की जान ली. कहती रही तबीयत ठीक नहीं है दिखा दो डाक्टर को पर नहीं दिखाया. लो देखो मर गई न… मौज करो अब. तभी अचानक हवा का झोंका आया और खिड़की का पल्ला धड़ाम से बंद हुआ तो नवल घबरा कर उठ बैठा. देखा, वहां कोई न था सिवा उस के.

‘उफ, तो यह सपना था?’ अपने दिल पर हाथ रख नवल ने एक गहरी सांस ली और फिर आभा की याद सताने लगी. मन हुआ फोन कर ले, पर लगा नहीं, अस्पताल है. लेकिन आभा को ले कर उस के मन में बुरेबुरे विचार आने लगे. ऐसा ही होता है, मुसीबत के वक्त नकारात्मक बातें दिमाग पर ज्यादा हावी हो जाती है. चाह कर भी इंसान अच्छी बातें सोच नहीं पाता. घबराहट के मारे वह पसीने से तरबतर हो गया. प्यास के मारे गला भी सूखने लगा. देखा, तो जग खाली पड़ा था. आभा थी तो रोज पानी भर कर रख दिया करती थी.

जैसे ही नवल पानी लेने किचन की तरफ जाने लगा, देखा, रिनी के कमरे की लाइट औन है. लगा भूल गई होगी, लेकिन जब कमरे से फुसफुसाने की आवाज आई, तो वह उस ओर बढ़ गया.

ये भी पढ़ें- Valentine’s Special: कढ़ा हुआ रूमाल- शिवानी के निस्वार्थ प्यार की कहानी

वह फोन पर किसी से कह रही थी, ‘‘अरे, समझो, पापा घर पर ही हैं तो कैसे आऊं?’’

उधर से फिर उस ने कुछ बोला, तो रिनी कहने लगी, ‘‘कहा न नहीं आ सकती, अब फोन रखो कोई सुन लेगा… हांहां कल देखती हूं.’’

‘‘रिनी…’’ नवल जोर से चीखा. उस के हाथ से फोन खींच कर अभी कुछ बोलता कि तभी उधर से उस ने फोन काट दिया. दोबारा

फोन मिलाया, पर स्विच औफ आने लगा. जाहिर सी बात थी उस ने अपना फोन स्विचऔफ कर दिया था. लेकिन इतना तो पता चल गया नवल को कि रिनी किसी लड़के से बात कर रही थी. गुस्से से पापा को लाल होते देख रिनी डर के मारे थरथराने लगी.

‘‘किस से बात कर रही थी? कौन था यह लड़का?’’ नवल ने गुस्से में पूछा.

‘‘क… क कौन लड़का… कोई तो नहीं पापा,’’ रिनी साफ झूठ बोल गई.

‘‘चुप, झूठ मत बोल… अभी मैं ने सुना तुम किसी लड़के से मिलने की बात कर रही थी, पर पापा घर पर हैं इसलिए नहीं आ सकती… यही कहा न तुम ने उस लड़के से? बोलो कौन है वह?’’ नवल चीखते हुए बोला.

‘‘कोई तो न था पापा,’’ रिनी बोली.

नवल ने एक जोर का चांटा रिनी के मुंह पर मारते हुए कहा, ‘‘खबरदार जो आज के बाद बिना मेरे पूछे घर से बाहर कदम भी निकाला.’’

आगे पढ़ें- नवल की नींद और उड़ गई….

ये भी पढ़ें- Top 10 Best Crime Story In Hindi: धोखे और जुर्म की टॉप 10 बेस्ट क्राइम की कहानियां हिन्दी में

Pregnancy रोकने के लिए क्या उपाय अपनाए जा सकते हैं?

सवाल

मैं 24 साल की हूं. मेरे विवाह को 2 महीने हुए हैं. प्रैगनैंसी से बचे रहने के लिए कौपर टी, कंडोम और डायाफ्राम में से कौन सा गर्भनिरोधक मेरे लिए सब से अच्छा रहेगा और ये गर्भनिरोधक कितनेकितने साल तक प्रैगनैंसी रोकने के लिए अपनाए जा सकते हैं, कृपया विस्तार से जानकारी दें?

जवाब-

प्रत्येक गर्भनिरोधक विधि के अपने लाभ और अपनी सीमाएं हैं, जिन के बारे में पूरी जानकारी पा कर आप सही फैसला ले सकती हैं. कौपर टी उन स्त्रियों के लिए उपयुक्त गर्भनिरोधक है, जो कम से कम 1 बार संतान धारण कर चुकी होती हैं. नवविवाहिताओं के लिए कौपर टी ठीक नहीं, क्योंकि इसे लगाने पर पैल्विस में सूजन होने का डर रहता है और आगे चल कर प्रैगनैंट होने में भी परेशानी हो सकती है. इस का इस्तेमाल 2 बच्चों के बीच फासला रखने के लिए ही किया जाना चाहिए.

नवविवाहिताओं के अलावा ऐसी स्त्रियां, जिन्हें पहले से पैल्विस का इन्फैक्शन हो, मासिकस्राव ज्यादा या अनियमित हो, पेड़ू में दर्द रहता हो, गर्भाशय की रसौली हो, गर्भाशयग्रीवा की सूजन हो, ऐनीमिया हो या पहले कभी ऐक्टोपिक प्रैगनैंसी हुई हो, उन के लिए भी कौपर टी का इस्तेमाल ठीक नहीं. कंडोम गर्भनिरोध का आसान और सुलभ तरीका है. इस के इस्तेमाल से पहले डाक्टर की सलाह लेना भी जरूरी नहीं. इस के कामयाब बने रहने के लिए सिर्फ इस का सही इस्तेमाल आना जरूरी है. असावधानी बरतने पर सैक्स के दौरान कंडोम के फिसल जाने या फट जाने पर परेशानी खड़ी हो सकती है. डायाफ्राम के साथ भी कंडोम जैसी ही समस्याएं हैं और इस का फेल्यर रेट भी काफी है.

ये भी पढ़ें- मैरिड लाइफ से जुड़ी प्रौब्लम के बारे में बताएं?

नवविवाहिताओं के लिए सुरक्षा का एक और अच्छा उपाय ओरल कौंट्रासैप्टिक पिल्स हैं. इन्हें लेने से कामसुख में किसी तरह का विघ्न नहीं पड़ता और पूरीपूरी सुरक्षा भी मिलती है. लेकिन इन्हें शुरू करने से पहले डाक्टर से सलाह लेना जरूरी है. यदि डाक्टर इजाजत दे, तो इन्हें लगातार 3 साल तक ले सकती हैं. रोज 1 गोली लेनी होती है. प्रैगनैंसी का मन बने तो गोली लेना बंद करने के 1 से 3 महीनों के बाद दोबारा प्रजनन क्षमता पहले जैसी हो जाती है और प्रैगनैंसी में कोई दिक्कत नहीं आती.

ये भी पढ़ें- मैं अपने वैवाहिक जीवन में तालमेल नहीं बैठा पाई?

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz   सब्जेक्ट में लिखे…  गृहशोभा-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

नए रिश्ते: भाग 1- क्या हुआ था रानो के साथ

लेखिका- शशि जैन

रानो घर में दौड़ती हुई घुसी. बस्ता एक तरफ पटक कर वह सरला से लिपट गई. ‘‘दादी बूआ, दादी बूआ, आज हमें मम्मी मिली थीं. हमें मम्मी मिली थीं, दादी बूआ.’’

रानो बड़े उत्तेजित स्वर में बताती जा रही थी कि मम्मी ने उसे क्याक्या खिलाया, क्याक्या कहा.

सरला उस की बातें सुनती रही, उस के सिर और शरीर को सहलाती रही. न रानो के स्वर की उत्तेजना कम हुई थी और न ही सरला के शरीर पर उस के नन्हे हाथों की पकड़ ढीली पड़ी थी. वह अपनी समस्त शक्ति से दादी बूआ के शरीर से चिपटी रही जैसे वही एकमात्र उस का सहारा थी. कुछ ही देर में रानो की उत्तेजना आंसू बन कर टपकने लगी.

‘‘मम्मी घर क्यों नहीं आतीं, दादी बूआ? वे दूसरे घर में क्यों रहती हैं? सब की मम्मी घर में रहती हैं, मेरी मम्मी क्यों नहीं रहतीं? मैं भी यहां नहीं रहूंगी, मैं भी मम्मी के पास जाऊंगी, दादी बूआ.’’

रानो का रोना बढ़ता ही जा रहा था. सरला की समझ में नहीं आ रहा था कि वह उसे कैसे चुप कराए. वह उसे चिपटाए हुए उस का शरीर सहलाती रही. रानो की व्यथा उस की स्वयं की व्यथा बनती जा रही थी. उस की आंखें रहरह कर भरी आ रही थीं. रानो की मम्मी घर पर क्यों नहीं रहतीं, यह क्या वह स्वयं ही समझ सकी थी?

जब वह बूढ़ी होने पर यह बात नहीं जान पाई थी कि रानो की मम्मी उस के साथ क्यों नहीं रहती तो बेचारी रानो ही कैसे समझ सकती थी. वह और रानो तो अल्पबुद्धि थे, यह सब नहीं समझ सकते थे, परंतु प्रदीप तो अपने को बड़ा बुद्धिमान समझता था. क्या उस के पास ही इस बात का कोई उत्तर था और नंदा ही क्या इस का उत्तर जानती थी? वे दोनों समझते हैं कि वे जानते हैं, पर शायद वे भी नहीं जानते कि वे दोनों मिल कर क्यों नहीं रह सके.

ये भी पढ़ें- पछतावा: क्या सही थी लालपरी की गलती

वह रानो को कस कर छाती में दबाए रही, जैसे इसी से वह उसे दुनिया के सारे दुखों से बचा लेगी. उस के हाथों के नीचे नन्हा सा शरीर सुबकता हुआ हिचकोले ले रहा था. वह मन ही मन अपना सारा स्नेह और ममता रानो पर उड़ेल रही थी. धीरेधीरे रानो शांत होने लगी और कुछ ही देर में वह बचपन की शांत गहरी नींद में खो गई. उस का आंसुओं की लकीरों से भरा मासूम चेहरा वेदना की साकार मूर्ति लग रहा था.

जिस नन्ही सी कोमल कली को मां की छाया में पलना चाहिए था, उसे मांविहीना कर के कड़ी धूप में झुलसने को छोड़ दिया गया था.

सरला किचन की टेबल पर सब्जी काटने लगी. मन बहुत सी उलझी हुई गुत्थियों में उलझने लगा.

सत्य क्या है, कौन जान सकता है? वह जीवन में बहुत सी कमियों को झेलती रही थी. उस ने विवाह नहीं किया था. एक छोटी नौकरी के चक्कर में कितने ही लड़कों को न कर दिया था. बाद में मातापिता की मृत्यु के बाद वह इन अभावों को सहती हुई अकेली जीवन व्यतीत करती रही थी. परंतु नंदा को तो सबकुछ मिला था – एक स्वस्थ, सुंदर पति तथा फूल सी प्यारी बिटिया. उस ने किस तरह, कैसे उन्हें हाथ से निकल जाने दिया, क्या उस के लिए पति तथा पुत्री का कोई महत्त्व नहीं था? कुछ तो होगा बहुत ही बड़ा, बहुत ही महत्त्वपूर्ण, जो इन अभावों की पूर्ति कर सका होगा.

वह तो अपने पतिविहीन तथा संतानहीन जीवन को एक यातना समझ कर जी रही थी, परंतु नंदा के लिए इन दोनों का होना ही शायद यातना बन गया था, तभी वह अपने खून और जिगर के टुकड़े को छोड़ कर जा सकी थी. अन्य दिनों की तरह वह आज भी इस प्रश्न को टटोलती रही, पर कोई उत्तर न पा सकी.

प्रदीप आ गया था.

‘‘रानो कहां है, बूआ? दिखाई नहीं दे रही, क्या बाहर खेलने गई है?’’

‘‘सो रही है.’’

‘‘इस समय? तबीयत तो ठीक है?’’ प्रदीप चिंतातुर हो उठा.

‘‘तबीयत तो ठीक है पर उस का मन ठीक नहीं है,’’ बूआ की बात सुन कर प्रदीप प्रश्नचिह्न बना उसे देखता रहा.

‘‘आज उसे उस की मम्मी मिली थी.’’

‘‘क्या नंदा यहां आई थी?’’

‘‘नहीं. वह स्कूल के बाद उसे मिली थी. रानो लौटी तो बेहद उत्तेजित थी. घर आ कर मम्मी को याद करती रोतेरोते सो गई.’’

‘‘कैसी नादानी है नंदा की. बच्ची से मिल कर उसे इस तरह हिला देने का क्या मतलब है? यह तय हो चुका है कि बिना मेरी अनुमति के वह रानो से मिलने की चेष्टा नहीं करेगी. उस ने ऐसा क्यों किया?’’ क्रोध के मारे प्रदीप की कनपटी की नसें फड़क रही थीं.

सरला चुपचाप बैठी सब्जी काटती रही. वह क्या उत्तर दे इन प्रश्नों का. या तो वह पागल है या ये लोग, प्रदीप और नंदा, जो प्राकृतिक सत्य को झुठला कर कोई दूसरा सत्य स्थापित करने की चेष्टा कर रहे हैं. मां अपनी कोखजायी बेटी से बिना अनुमति नहीं मिल सकती? यह कैसा और कहां का नियम है? क्या खून के रिश्तों को कानून के दायरे से घेरा जा सकता है?

प्रदीप दनदनाता हुआ बाहर जाने लगा.

बूआ ने रोका, ‘‘प्रदीप, कहां जा रहा है? चाय तो पी ले, सुबह का भूखाप्यासा है.’’

ये भी पढ़ें- नाज पर नाज: क्या ससुर को हुआ गलती का एहसास

‘‘नहीं, बूआ, भूख नहीं है. जरा काम से जा रहा हूं.’’

‘‘मुझे पता है तू कहां जा रहा है. क्रोध कर के मत जा, प्रदीप. सब संबंध तोड़ देने के बाद तुझे क्रोध करने का हक भी कहां रह गया है?’’

‘‘नहीं बूआ, अब चुप रहने से काम नहीं चलेगा. वह एकदो बार पहले भी ऐसा कर चुकी है. खुशी से रह रही रानो से मिल कर वह उसे कितने दिनों के लिए तोड़ जाती है, रानो अपनी जिंदगी से दूर जा कर अलग हो जाती है. रानो के दिमाग पर इस का कितना गहरा और स्थायी असर पड़ सकता है. मैं ऐसा नहीं होने दे सकता.’’

सरला बड़ी अनमनी सी हो उठी.

‘‘तुम लोग पढ़ेलिखे हो और होशियार, पर मैं इतना जरूर कह सकती हूं कि रानो की जिंदगी आज नहीं, तुम और नंदा दोनों मिल कर बहुत पहले ही तोड़ चुके हो. जिस पौधे को कुशल माली की देखरेख में यत्नपूर्वक सुरक्षित रख कर पाला जाना चाहिए था उसे तो तुम झंझावात में अकेला छोड़ चुके हो. मां से मिलने पर कुछ नया घटित नहीं होता, केवल उस के अंदर दबाढंका विद्रोह ही उभरता है. बच्चा चाहे कुछ और न समझे, पर मां से गहरे लगाव की बात उसे समझनी नहीं पड़ती. इस बेचारी की तो मां है, यह कैसे भूल सकती है? तेरी मां तो तुझे 10-12 साल का छोड़ कर इस लोक से चली गई थी, क्या तुझे कभी उस की याद नहीं आई?’’

आगे पढें- सरला चुप हो गई. बहस…

ये भी पढ़ें- पड़ोसिन: क्या थी सीमा की कहानी

अपनी-अपनी जिम्मेदारियां: भाग 3- आशिकमिजाज पति को क्या संभाल पाई आभा

नवल का गुस्सा देख रिनी सहम गई कि मां ने तो समझा कर छोड़ दिया पर पापा तो जान ही ले लेंगे उस

की, क्योंकि नवल का गुस्सा वह अच्छी तरह जानती थी.

अब नवल की नींद और उड़ गई. सोचने लगा जवान लड़की है. अगर कदम

बहक गए तो क्या होगा? सचेत तो किया था आभा ने कितनी बार, पर वही उस की बात को आईगई कर दिया करता था. पता चला कि रिनी अपने ही कालेज के एक लड़के से प्यार करती है और उस से छिपछिप कर मिलती है. आभा के समझाने के बाद भी जब वह लड़का रिनी से मिलता रहा, तो वह उस के घर जा कर वार्निंग दे आईर् कि अगर फिर कभी दोबारा वह रिनी से मिला या फोन किया, तो पुलिस में शिकायत कर देगी. रिनी को भी उस ने खूब फटकार लगाई थी. कहा था कि अगर नहीं मानी, तो नवल को बता देगी. तब रिनी का ध्यान उस लड़के से हट गया था, लेकिन आभा के न रहने पर वह फिर मनमानी करने लगी थी.

जो बाबा आभा के डर से घर में आना बंद कर चुका था, क्योंकि वह अंधविश्वास विरोधी थी, वह फिर से उस के घर में डेरा जमाने लगा. घर की सुखशांति के नाम पर वह हर दिन कोई न कोई पूजापाठ, जपतप करवाता रहता और निर्मला से पैसे ऐंठता. समझाता कि उस के घर पर किसी का बुरा साया है. कितनी बार कहा नवल ने कि ये सब फालतू की बातें हैं. न पड़ें वे इन बाबाओं के चक्कर में. मगर निर्मला कहने लगी कि वह तो घर की सुखशांति और आभा के अच्छे स्वास्थ्य के लिए ही ये सब कर रही है.

इधर सोनू का मन भी पढ़ाईलिखाई से उचटने लगा था. जब देखो, मोबाइल, लैपटौप में लगा रहता. और तो और दोनों भाईबहन छोटीछोटी बातों पर लड़ पड़ते और ऐसे उठापटक करने लगते कि पूरा घर जंग का मैदान नजर आता. औफिस से आने के बाद घर की हालत देख नवल का मन करता उलटे पांव बाहर चला जाए. एक आभा के न रहने से घर में सब अपनीअपनी मनमानी करने लगे थे. घर की हालत ऐसी बद से बदतर हो गई कि क्या कहें. ऐसी विकट समस्या आन खड़ी हुई थी जिस का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था नवल को.

उधर औफिस में भी कुछ ठीक नहीं चल रहा था. नवल के औफिस में ही एक दोस्त थी रंभा. खूब पटती थी दोनों की. साथ में खानापीना हंसनाबोलना होता था. भले ही घर में आभा इंतजार कर आंखें फोड़ लें, मगर जब तक रंभा मैडम जाने को न कहती, नवल हिलता तक नहीं. रंभा को देखदेख कर ही वह रसिकभाव से कविताएं बोलता और वह इठलाती, मचलती. चुटकी लेते हुए दूसरे कुलीग कहते कि क्या भाभीजी को देख कर भी मन में कविताएं उत्पन्न होने लगती हैं नवल भाई?

ये भी पढ़ें- समय सीमा: क्या हुआ था नमिता के साथ

तब बेशर्मों की तरह हंसते हुए कहता नवल, ‘‘अब भाभी तो घर की मुरगी है न, दाल बराबर.’’

उस की बात पर जहां सब ठहाके लगा

देते, वहीं रंभा और उस के करीब सरक आती. लेकिन आज वही रंभा उसे छोड़ कर दीपक से मन के तार जोड़ बैठी थी. मुंह से चाहे कुछ

न कहे, पर उस के व्यवहार से तो रोज यही झलकता था कि अब नवल में उसे कोई दिलचस्पी नहीं रह गई.

अब नवल भी इतना बेहया तो था नहीं, जो उस के पीछेपीछे चल पड़ता. रंभा का कुछ साल पहले अपने पति से तलाक हो चुका था और अब वह सिंगल थी. वैसे भी ऐसी औरतों का क्या भरोसा, जो वक्त देख कर दोस्त बदल लें.

‘भाड़ में जाए मेरी बला से’, मन में सोच उसी दिन से नवल ने रंभा से किनारा कर लिया, क्योंकि अब उसे अपने घरपरिवार को देखना था. अपनी पत्नी को समय देना था.

ये भी पढ़ें- न्यूजर्सी की गोरी काली बहुएं : क्या खत्म हुई श्रीकांत की दोहरी मानसिकता

कितनी बार आभा ने चेताया था कि रिनी पर ध्यान दो, लड़की है. जरा भी पैर फिसला, तो बदनामी हमारी होगी. मगर हर बार ‘पागलों सी बातें मत करो’ कह कर नवल उसे ही चुप करा दिया करता था. कहता, वह बच्चों के पीछे पड़ी रहती है. क्या कोई मां अपने बच्चों के पीछे पड़ सकती है कभी? वह तो बच्चों के भले के लिए ही उन्हें डांटतीफटकारती थी. परंतु यह बात आज नवल को समझ में आ रही थी कि आभा कितनी सही थी और वह कितना गलत. सुविधाएं और आजादी तो दी उस ने बच्चों को, पर वह नहीं दे पाया जो उन्हें देना चाहिए था. संस्कार, अच्छी सीख, जिम्मेदारी.

पूछने पर डाक्टर ने बताया कि अब आभा पहले से काफी बेहतर है और

2-4 दिन में उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी. लेकिन उस का पूरा खयाल रखना पड़ेगा, क्योंकि अभी भी बहुत कमजोर है.

जब वार्ड में गया, तो आभा सो रही थी, सो उसे जगाना सही नहीं लगा. धीरे से स्टूल खींच कर बैड के समीप ही नवल बैठ गया और एकटक आभा को निहारने लगा. बेजान शरीर, पीला पड़ा चेहरा, धंसी आंखें देख कर सोचने लगा कि क्या यह वही आभा है जिसे कभी वह ब्याह कर लाया था. कैसा फूल सा मुखड़ा था इस का और आज देखो, कैसा मलिन हो गया है. अगर आज मैं इस की जगह होता, तो यह दिनरात एक कर देती. पागल हो जाती मेरे लिए लेकिन मैं क्या कर पा रहा हूं इस के लिए, कुछ भी तो नहीं? सोच कर नवल की आंखें सजल हो गईं.

जब आभा की आंखें खुलीं और सामने नवल को देखा, तो उस के चेहरे पर ऐसा तेज आ गया जैसे अग्नि में आहुति पड़ गई हो. इधरउधर देखने लगी. लगा बच्चे भी आए होंगे. कितने दिन हो गए थे उसे अपने बच्चों को देखे हुए. लग रहा था एक बार आंख भर कर बच्चों को देखे. उठने की कोशिश करने लगी, पर कमजोरी के कारण उठ नहीं पा रही थी.

नवल ने उसे सहारा दे कर बैठाया और पूछा, ‘‘कैसी तबीयत है अब?’’

उस ने इशारे से कहा कि ठीक है.

‘‘डाक्टर कह रहे थे 2-4 दिन में अब तुम घर जा सकती हो.’’

नवल की बात पर वह मुसकराई.

ये भी पढ़ें- Valentine’s Special: ऐसा प्यार कहां: क्या थी पवन और गीता के प्यार की कहानी

‘‘कुछ खाओगी?’’ नवल ने पूछा, तो उस ने न में सिर हिला दिया.

‘‘सब ठीक है तुम चिंता मत करो,’’ यह भी नहीं कह सकता था कि तुम ने ही सब को बिगाड़ा है, क्योंकि बिगाड़ा तो उस ने ही है. अब सब को ठीक करना पड़ेगा, समझानी पड़ेगी उन्हें अपनीअपनी जिम्मेदारी, यह बात नवल ने मन में ही कही.

‘‘तुम अब ज्यादा चिंताफिकर करना छोड़ दो. खुद पर ध्यान दो. यह लो सुमन भाभी भी आ गईं. तो तुम दोनों बातें करो. तब तक मैं घर हो आता हूं,’’ कह कर नवल उठ खड़ा हुआ तो आभा उसे प्रेमभाव से देखते हुए बोली कि वह अपन ध्यान रखे. नवल को लगा कि अभी भी इसे मेरी ही चिंता है.

आगे पढ़ें- बच्चे घर में मौज करते रहे और…

नए रिश्ते: भाग 2- क्या हुआ था रानो के साथ

लेखिका- शशि जैन

प्रदीप क्षणभर को शर्मिंदा सा हो उठा, ‘‘नहीं, बूआ, यह ठीक नहीं है. रानो नंदा से मिलेगी तो उस की कमी और भी ज्यादा महसूस करेगी. उसे भूल नहीं सकेगी. जो मिल नहीं सकता, उसे भूल जाना ही अच्छा है.’’

सरला चुप हो गई. बहस करना बेकार था. मानअपमान का प्रश्न इस घर को तोड़ चुका था, पर वह अब भी खत्म नहीं था. सबकुछ देखतेबूझते भी वह मन ही मन यह उम्मीद करती रहती है कि किसी तरह इस टूटे घर में फिर से बहारें आ जाएं.

बूआ की बात से प्रदीप के दिमाग में उबलता हुआ लावा कुछ ठंडा होने लगा था, परंतु फिर भी वह नंदा के व्यवहार से जरा भी प्रसन्न नहीं था. उस ने नंदा का फोन मिलाया :

‘‘नंदा.’’

‘‘कौन? आप?’’

‘‘तुम रानो के स्कूल गई थीं?’’

‘‘हां,’’ नंदा का सूक्ष्म उत्तर था.

‘‘तुम जानती हो, तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए. रानो स्कूल से लौटी तो बेहद उत्तेजित थी. वह रोतेरोते सो गई. कम से कम अब तो तुम्हें हम लोगों को शांति में रहने देना चाहिए,’’ न चाहने पर भी प्रदीप के स्वर में सख्ती आ गई थी.

उत्तर में उधर से दबीदबी सिसकियां सुनाई पड़ रही थीं.

‘‘हैलो, हैलो, नंदा.’’

नंदा रोती रही. प्रदीप का भी दिल सहसा बहुत भर आया. उस का दिल हुआ कि वह भी रोने लगे. उस ने कठिनाई से अपने को संयत किया.

‘‘नंदा, क्या कुछ देर को मौडर्न कौफीहाउस में आ सकती हो?’’

‘‘वहां क्या कहोगे? कहीं तमाशा न बन जाए?’’

‘‘जरा देर के लिए आ जाओ, जो मैं तुम्हें समझाना चाहता हूं. वह फोन पर न हो सकेगा.’’

‘‘अच्छा, आती हूं.’’

कौफीहाउस के वातानुकूलित वातावरण में भी प्रदीप के माथे पर पसीना उभर रहा था. उसे लगा कि उस का सख्ती से सहेजा गया जीवन फिर उखड़ने लगा है और भावनाओं की आंधी में सूखे पत्ते सा उड़ता चला जा रहा है. दिमाग विचित्र दांवपेंच में उलझने लगा. वह नंदा के साथ बिताए गए जीवन में घूमने लगा. उसे लगा सभी कुछ उलटपुलट गया है.

उसे अधिक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ी. शीघ्र ही नंदा उस के सामने बैठी थी. पहले से कहीं ज्यादा खूबसूरत और आकर्षक, हमेशा की तरह आसपास के लोगों की दृष्टि उस के इर्दगिर्द चक्कर काटने लगी. और हमेशा की तरह उस के हृदय में ईर्ष्या की नन्ही चिनगारी जलने लगी. उस ने तुरंत अपने को संयत किया. नंदा का सौंदर्य व आकर्षण और उस की स्वयं की ईर्ष्या प्रवृत्ति एक घर को नष्ट कर के काफी आहुति ले चुकी थी. उसे अब स्वयं को शांत रखना था.

यत्नपूर्वक छिपाने पर भी नंदा के चेहरे पर रुदन के चिह्न मौजूद थे. वह अनदेखे की चेष्टा करने पर भी बारबार नंदा को देखता रहा. नंदा की बड़ीबड़ी आंखें उस पर स्थिर हो गई थीं और वह बेचैनी सी महसूस करने लगा था.

ये भी पढ़ें- सीक्रेट: रौकी और शोमा के बीच क्या था रिश्ता

अस्थिरता की दशा में उस ने काफी चीजों का और्डर दे दिया था. वह उस से बात शुरू करने के लिए कोई सूत्र ढूंढ़ने लगा.

‘‘रानो ठीक रहती है?’’  नंदा ने ही झिझकते हुए पूछा.

‘‘हां.’’

‘‘ज्यादा याद तो नहीं करती?’’ नंदा का स्वर भीगने लगा था.

‘‘तुम से मिलने से पहले तो नहीं करती.’’

नंदा को देख कर उसे लगा कि अब वह रो देगी.

‘‘मुझे पता नहीं था कि मैं रानो को इतना याद करूंगी. हर समय उसी के बारे में सोचती रहती हूं. उसे देख कर मन को कुछ शांति मिली, पर क्षणभर को ही.’’

‘‘यह सब तो पहले सोचना चाहिए था,’’ प्रदीप का स्वर बेहद ठंडा था.

‘‘उस समय तो हर चीज, हर व्यक्ति और हर भाव के प्रति मन में कटुता व्याप्त हो गई थी. रानो मुझ से इस तरह छिन जाएगी, यह स्वप्न में भी नहीं सोचा था. कभीकभी मन बेहद भटक जाता है. वह नन्ही सी जान कैसे अपनी देखभाल करती होगी?’’ नंदा की आंखों से आंसू टपकने लगे थे.

नंदा से मिलना पूर्णतया सामान्य नहीं हो सकेगा, इस की तो प्रदीप को संभावना थी. परंतु फिर भी एक सार्वजनिक स्थान पर इस तरह से भाव प्रदर्शन के लिए वह तैयार नहीं था. वह काफी परेशान सा हो उठा.

‘‘आजकल क्या कर रही हो,’’ वह रानो की बात छोड़ कर व्यक्तिगत धरातल पर उतर आया.

‘‘मुंबई की एक फर्म में प्रौडक्ट मैनेजर हूं.’’

‘‘तनख्वाह तो खूब मिलती होगी?’’

‘‘बड़ी फर्म है, अच्छा देते हैं. फिर भी रुचि अच्छी तनख्वाह में नहीं, काम में है. मुझ अकेली को कितना चाहिए. काम अच्छा है. नएनए चेहरे, काफी लोगों से मुलाकात, मन की भटकन से बची रहती हूं.’’

‘‘दोबारा शादी करने की सोची?’’

‘‘एक बार का अनुभव क्या काफी नहीं?’’ स्वर में व्यंग्य छिपा था.

‘‘फिर भी, कभी तो सोचा होगा. तुम अभी जवान हो, खूबसूरत भी, कुछ समय बाद यह स्थिति नहीं रहेगी.’’

‘‘जवान दिखने पर भी इस तरह के अनुभव स्त्री को मन से बूढ़ी बना देते हैं. फिर जो कभी न सोचा था वह हो गया, अब सोच कर ही क्या कर पाऊंगी?’’

‘‘काम भी ऐसा है. लोग तुम्हारी ओर आकर्षित तो होते होंगे,’’ प्रदीप अपनी बात पर अड़ा रहा. न चाहने पर भी ईर्ष्या की बेमालूम चिनगारी हवा पाने लगी.

नंदा उदास सी हंसी हंस दी, ‘‘मेरातुम्हारा चोरसिपाही वाला रिश्ता तो खत्म हो चुका है, फिर छिपा कर भी क्या करना है. मैं स्वयं किसी की तरफ आकर्षित नहीं हूं, पर मेरे चारों ओर घूमने वालों की कमी नहीं है. जैसा कि तुम ने कहा, मैं अभी खूबसूरत भी हूं, जवान भी.’’

‘‘इस के लिए तुम क्या करती हो?’’

‘‘कुछ नहीं. मैं उन्हें घूमने देती हूं.’’

‘‘शादी के पैगाम भी आते होंगे?’’

‘‘हां, कई,’’ नंदा नेपकिन को खोल लपेट रही थी.

‘‘फिर शादी क्यों नहीं की?’’ चिनगारी को फिर हवा मिली.

‘कहा न, अनुभव कड़वा है. विवाह में आस्था नहीं रही.’’

‘‘बौस कैसा है?’’

‘‘अच्छा है. वह भी मुझ से विवाह के लिए निवेदन कर चुका है.’’

‘‘मान लेतीं. बड़ा बिजनैस है, रुपएपैसे की बहार रहती.’’

उन के आपसी अनेक मतभेदों में एक कारण नंदा का बेहद खर्चीला स्वभाव भी था.

‘‘खयाल बुरा नहीं. वह 55 वर्ष का  है. विधुर और गंजा. 1 लड़का और 2 लड़कियां हैं.’’

‘‘फिर?’’

‘‘उस के बच्चों को यह विचार पसंद नहीं. सोचते हैं कि मैं उन के पिता के धन की ताक में हूं. वे लोग इस विचार से काफी परेशान रहते हैं.’’

‘‘तुम क्या सोचती हो?’’

‘‘कुछ सोचती नहीं, सिर्फ हंसती हूं. अच्छा, अपनी बताओ, क्या कर रहे हो आजकल?’’

‘‘बस, नौकरी.’’

‘‘विवाह?’’

ये भी पढ़े-ं तरकीब: पति की पूर्व प्रेमिका ने कैसे की नेहा की मदद

‘‘अभी तक तो चल रहा है. नहीं चलेगा तो मजबूरी है. रानो के खयाल से डर लगता है. उस ने रानो को पसंद न किया तो वह मासूम मारी जाएगी. मैं तो दिनभर दफ्तर में रहता हूं. उसे देख नहीं पाता. अभी तो बूआ उस की देखरेख करती हैं, पता नहीं बाद में बूआ रहना पसंद करें या न करें.’’

‘‘तुम यह नहीं कर सकते कि रानो को मुझे दे दो. तुम शादी कर लो. इस से सभी सुखी होंगे,’’ नंदा का स्वर काफी उत्तेजित हो आया था.

‘‘रानो को तुम्हें दे दूं? कभी नहीं, हरगिज नहीं. तुम उस की ठीक से देखभाल नहीं कर सकोगी. अदालत में इतना झगड़ा कर के रानो को लिया है, तुम्हें नहीं दे सकता.’’

आगे पढ़ें- बेकार की बातें सुन कर..

Bigg Boss 15 की विनर बनीं Tejasswi तो गौहर समेत सेलेब्स ने मारा ताना, पढ़ें खबर

टीवी के पौपुलर रियलिटी शो बिग बॉस 15 का ग्रैंड फिनाले हो गया है. वहीं शो को जीतकर एक्ट्रेस तेजस्वी प्रकाश (Tejasswi Prakash) ने ट्रॉफी अपने नाम कर ली है. हालांकि सोशलमीडिया पर फैंस और सेलेब्स काफी नाराज नजर आ रहे हैं. वहीं टॉप 2 में रहने वाले प्रतीक सहजपाल को सपोर्ट करते नजर आ रहे हैं. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

विनर बनने पर गौहर खान ने कसा तंज

एक्ट्रेस तेजस्वी प्रकाश के Bigg Boss 15 की ट्रॉफी अपने नाम करते ही एक्ट्रेस गौहर खान ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘LOL… विनर का नाम घोषित होने पर स्टूडियो में  पसरे सन्नाटे ने सबकुछ कह दिया. बिग बॉस 15 जीतने का सिर्फ एक हकदार था, जिसे पूरी दुनिया ने देखा है. #pratiksehejpal तुमने दिल जीते हैं. हर कोई मेहमान बनकर जाने वालों के फेवरेट तुम थे. तुम्हें लोगों ने प्यार दिया. अपना सिर ऊंचा रखो.’ वहीं बिग बॉ ओटीटी का हिस्सा रहे जीशान ने गौहर खान का साथ देते हुए लिखा,  बीबी विजेता की घोषणा पर ऐसा सन्नाटा, मैंने कभी नहीं सुना!


ये भी पढ़ें- आखिर श्वेता तिवारी ने क्यों मांगी माफी, जानें मामला

दूसरे सेलेब्स ने किया प्रतीक को सपोर्ट

वहीं इसके अलावा एक्ट्रेस काम्या पंजाबी ने प्रतीक सहजपाल के लिए लिखा, ‘प्रतीक तुम मेरे विनर थे और हमेशा रहोगे. तुमने बहुत अच्छा खेला है. खेल में तुम्हारा सफर और इसके लिए तुम्हारे जुनून ने दिल जीत लिया. आशीर्वाद, बहुत सारा प्यार और शुभकामनाएं.’ वहीं मुनमुन दत्ता और गुरमीत चौधरी ने भी प्रतीक सहजपाल को सपोर्ट करते हुए ट्वीट किया हैं. हालांकि तेजस्वी प्रकाश के सपोर्ट में भी इंडस्ट्री के कई सितारे सामने आए हैं, जिनमें नमीश तनेजा, अदा खान जैसे सितारे शामिल हैं.

नागिन में नजर आएंगी तेजस्वी

दूसरी तरफ, बिग बॉस 15 की विनर बनने के बाद तेजस्वी प्रकाश जल्द ही नागिन 6 में नजर आने वाली हैं, जिसका खुलासा उन्होंने बिग बॉस के ग्रैंड फिनाले में किया है. इसके अलावा तेजस्वी को सरप्राइज देते हुए करण कुंद्रा और उनकी फैमिली ने सेलिब्रेशन भी किया है, जिसकी फोटोज और वीडियो सोशलमीडिया पर वायरल हो रही हैं.

ये भी पढ़ें- Bigg Boss 15 Finale: सिद्धार्थ को याद कर इमोशनल हुए सलमान और शहनाज, देखें वीडियो

नए साल का दांव: भाग-2

कपिल बच्चों पर बिना बात के चिल्लाता रहता. वंदिता की बातबात में इंसल्ट करता. खाने की थाली उठा कर फेंक देता. वंदिता ने दिल्ली में रहने वाले अपने भाई और मां से यह दुख शेयर किया तो उन्होंने फौरन कपिल को छोड़ कर आने की सलाह दी. वे बेहद नाराज हुए. उन्होंने कपिल से बात की तो कपिल ने उन की खूब इंसल्ट करते हुए जवाब दिए. संजय और साक्षी सब जान चुके थे. दोनों ने गुस्से में कपिल से बात करना बंद कर दिया था.

उस दिन वंदिता ने सारी स्थिति पर ठंडे दिमाग से सोचा. हर बात पर बारीकी से ध्यान दिया. उस ने सोचा कपिल को छोड़ कर मायके जाना तो समस्या का हल नहीं है. वह कोई नौकरी तो करती नहीं है… वहां जा कर भाई और मां कितने दिन खुशीखुशी उसे सहारा देंगे और वह स्वयं को इतनी कमजोर, मजबूर क्यों सम झ रही है? कपिल बेवफाई कर गया, इस की सजा वह क्यों परेशान, दुखी रह कर भुगते? वह क्यों अपनी हैल्थ इस धोखेबाज के लिए खराब करे और बच्चे? दोनों सुबह के गए रात को आते हैं. व्यस्त हैं, अपने पैरों पर खड़े हैं. नई जौब है. कपिल से नाराज रह कर उन का काम चल ही रहा है. कपिल अपनी ऐयाशियों में मस्त है, सिर्फ वही क्यों इस पीड़ा का दंश सहे?

वह 12वीं कक्षा तक के बच्चों को मैथ की ट्यूशन पढ़ती थी. पूरी सोसाइटी में उस के जैसी मैथ की टीचर नहीं थी. बच्चों से घिरी इतने रोचक ढंग से पढ़ाती कि बच्चों को मैथ जैसा विषय कभी मुश्किल ही न लगता उन के पेरैंट्स भी बहुत खुश रहते. मैथ की ट्यूशन की फीस भी उसे अच्छी मिलती. दिन के 4 घंटे तो उस के ट्यूशन में ही बीतते थे. अपनी जरूरतों के लिए वह इन पैसों को आराम से खर्च करती. नहीं,

वह रोरो कर तो नहीं जाएगी. यह जीवन बारबार नहीं मिलता. वह छोड़ कर कहीं नहीं जाएगी,

जो गलत काम कर रहा है. वह दुखी रहे. वह खुश रहेगी.

हफ्ते में 2 दिन सुबह 6 बजे वंदिता सोसाइटी में ही चलने वाले जिम में जाती थी, वहां उस का एक अलग ही ग्रुप था. सुबह सब के साथ व्यायाम करना उस के मन को खूब भाता था. शिनी भी उस के साथ रहती थी.

अगले दिन जिम में मिलने पर वंदिता के रिलैक्स्ड चेहरे को देख कर शिनी हंसी, ‘‘वाह, क्या बात है… बड़ी खुश लग रही हो… कपिल से कुछ बात हुई क्या?’’

वंदिता खुल कर हंसी, सुबहसुबह किस का नाम ले दिया? वह तो टूर पर गया है.’’

‘‘तो इतनी रिलैक्स्ड क्यों लग रही हो?’’

‘‘बाद में बताऊंगी. आज अमायरा और सिम्मी नहीं आई हैं.’’

‘‘ठीक है,’’ शिनी बोली.

वंदिता घर आई तो बच्चे औफिस के लिए तैयार हो रहे थे. मां को आज खुश देख साक्षी ने कहा, ‘‘मम्मी, पापा आजकल टूर पर जाते हैं तो अच्छा लगता है न?’’

वंदिता हंस पड़ी, ‘‘हां, बहुत.’’

संजय बोला, ‘‘मेरा मन ही नहीं होता उन से बात करने का. आप कैसे बरदाश्त कर रही हैं, मम्मा?’’

‘‘छोड़ो बच्चो, मैं अब उस पर अपनी ऐनर्जी वेस्ट करने वाली नहीं.

मैं ने सोच लिया है कि मु झे कैसे जीना है. वह चाहे कुछ भी करे, मैं अपना मैंटल पीस खत्म नहीं होने दूंगी.

मैं ने कुछ गलत नहीं किया न, फिर दुखी मैं क्यों रहूं?’’

बच्चों ने उसे गले लगा लिया, ‘‘प्राउड औफ यू मम्मी.’’ उस दिन बढि़या

वर्कआउट करने के बाद चारों सहेलियां क्लब हाउस के एक कोने में बैठ गई. सिम्मी ने कहा, ‘‘यार, तू कुछ बदलीबदली सी अच्छी लग रही है.’’

‘‘हां, मैं अब कपिल में उल झ कर दुखी नहीं रहने वाली और भी बहु कुछ है मेरी लाइफ में जिसे मैं ऐंजौय कर सकती हूं… अब बैठ कर एक बेवफा के लिए तो हरगिज नहीं रोऊंगी. जितना रोना था रो ली, अब नहीं. अब तक उस पर मेरे रोने का न असर हुआ है न होगा, उलटा वह धोखेबाज इंसान मु झे रोते देख मेरा मजाक उड़ाता है.’’

अमायरा ने खुश हो कर कहा, ‘‘प्राउड औफ यू यार, आज मोहना का लैंडलौर्ड सुधीर सुबह आया था. कुछ गुस्से में दिख रहा था. कुछ तेज आवाजें आ रही थीं,’’ अमायरा मोहना के फ्लोर के सामने वाले फ्लोर पर रहती थी.

शिनी चौंकी, ‘‘अच्छा?’’

‘‘हां, कुछ ऐसा सुना कि किराया टाइम पर नहीं दिया गया है.’’

सिम्मी ने कहा, ‘‘मु झे अभीअभी आइडिया आया है. यह मोहना ही इस सोसाइटी से चली जाए तो अच्छा रहेगा न? इसे ही भगाते हैं. अमायरा. तुम इस के लैंडलौर्ड को जानती हो?’’

‘‘हां, मोहना को फ्लैट देने के समय काम करवाने कई बार यहां आता था. हमारी उम्र का ही होगा. मेरे पति नितिन से आमनासामना होने पर अच्छी जानपहचान हो गई है. भला इंसान है.’’

‘‘उस का फोन नंबर है?’’

‘‘हां, नितिन के पास है. मेरे सामने ही उस ने अपना नंबर दिया था.’’

फिर चारों सिर जोड़े बहुत देर तक प्लानिंग करतीं रहीं. उस के बाद संतुष्ट हो कर अपनेअपने घर चली गई.

उसी रात सुधीर को नितिन ने फोन किया. दोस्ताना लहजे में हालचाल पूछा  फिर कहा, ‘‘तुम्हारा फ्लैट तो मशहूर हो गया.’’

‘‘कैसे?’’

नितिन ने उसे सब बता दिया कि मोहना का सोसाइटी के ही किसी पुरुष से संबंध हैं

और वह पुरुष रातदिन खूब आताजाता है और मोहना के फ्लैट से काफी डिस्टरबैंस सी रहने लगी हैं.

सुधीर बहुत सभ्य आदमी था, वह आजकल वैसे ही किराया समय पर न मिलने से परेशान था. विनय उस का फोन उठाता नहीं था. 2 महीने का किराया इकट्ठा हो चुका था. नितिन ने यह भी बताया कि विनय का कोई काम है ही नहीं. हर समय शराब में डूबा रहता है. मोहना ही पैसा ऐंठने का काम करती है, किसी से भी. वह तो अच्छा था, सुधीर ने ऐडवांस में डिपौजिट लिया हुआ था. सारी बात सुन कर सुधीर ने एक फैसला ले लिया.

अगले दिन सुबह ही सुधीर को घर आया देख विनय और मोहना हड़बड़ा गए. सुधीर ने कहा, ‘‘1 हफ्ते के अंदर मु झे अपना फ्लैट खाली चाहिए.’’

मोहना गुर्राई, ‘‘यह कोई रूल नहीं है… ऐडवांस नोटिस क्यों नहीं दिया?’’

‘‘रूल की बात तो करना मत तुम लोग… गैर के साथ रातदिन रंगरलियां मनाने वाली रूल की बात करेगी? विनय, आप अपने नशे में इन बातों से आंखें बचा सकते हैं, बिल्डिंग में रहने वाले इन चीजों को बरदाश्त नहीं करेंगे और मु झे इतना भी शरीफ मत सम झ लेना… 1 हफ्ते में फ्लैट खाली नहीं किया तो सामान उठवा कर बाहर फिंकवा दूंगा.’’

नए साल का दांव: भाग-3

काफी बहस हुई पर सुधीर ने दोनों की बोलती बंद कर दी और वार्निंग दे कर चला गया. अमायरा ने अपने फ्लैट की बालकनी से अपने बेटे को स्कूल जाते हुए बाय करते समय सुधीर को आते देख लिया था सो मोहना के फ्लैट के पास खड़े हो कर पूरी बात सुन कर अपने घर चली गई थी.

खुशी के मारे उस की आवाज वंदिता को फोन पर बताते हुए कांप गई, ‘‘बस,

अब तो यह यहां से चली जाएगी… एक मुश्किल तो, खत्म हुई.’’

वंदिता ने शांत स्वर में कहा, ‘‘यह तो तुम लोगों ने बहुत अच्छा किया पर अब कपिल पर मु झे कभी विश्वास नहीं होगा. अब मेरे दिल में उस के लिए कोई जगह नहीं… यह चली जाएगी कोई और आ जाएगी. यही होता रहा है. खैर, थैंक्स यार.’’

उस दिन जब चारों जिम में मिलीं तो सब खुश थीं. वंदिता हंसी, ‘‘तो अमायरा ने मोहना को भगा ही दिया.’’

शिनी ने कहा, ‘‘अब तुम से पार्टी चाहिए.’’

वंदिता जोर से हंसी, ‘‘शर्म करो तुम लोग. इस बात की पार्टी कौन मागता है?’’

‘‘अरे, हम आज की मौडर्न फ्रैंड्स हैं.झ्र ऐसी बातों से निबटेंगे, तो पार्टी तो बनती ही है यार.’’

‘‘ठीक है, पहले इसे आने तो दो.’’

‘‘ठीक है.’’

कपिल 1 हफ्ते के लिए टूर पर था. अब जब तक कुछ बहुत ही जरूरी न हो, उस की और वंदिता की बात ही नहीं होती थी. इस बार जब कपिल टूर से आया तो उस का मूड बहुत ही खराब था. वंदिता ने अंदाजा लगा लिया कि उसे मोहना के फ्लैट खाली करने की टैशन है. कपिल औफिस न गया. बस बैड पर था. कोई काम नहीं कर रहा था. लगातार चैट कर रहा था… मोहना से फोन पर धीरेधीरे बातें कर रहा था. वंदिता प्रत्क्षत: अपने रोज के कामों में व्यस्त थी… ट्यूशन पढ़ा रही थी पर उस की नजरें लगातार कपिल की हरकतों पर थीं. इस आदमी ने उसे बहुत मानसिक कष्ट दिया था. फिर भी उस ने बहुत धैर्य बनाए रख था.

15 दिनों में मोहना ने फ्लैट खाली कर दिया. उस की मेड से ही अमायरा को पता चला कि अब उस ने काफी दूर एक छोटी सी सोसाइटी में एक छोटा सस्ता फ्लैट किराए पर लिया. जिस दिन मोहना का सामान गया, कपिल बैड से उठा ही नहीं. वंदिता ने भी कुछ नहीं पूछा.

चारों सहेलियां मिलीं तो वंदिता ने कहा, ‘‘थैंक्स दोस्तो, तुम लोग सच में मेरी दोस्त हैं.’’

सिम्मी ने कहा, ‘‘पार्टी कब दे रही है?’’

‘‘चलो, अब हम लोग न्यू ईयर पर 2 रातों के लिए माथेरान चलते हैं. आनाजाना, होटल, खानापीना सब मेरी तरफ से. न्यू ईयर पर वहीं धमाल कर के आते हैं. एक चेंज की मु झे सख्त जरूरत है.’’

सब चौंक पड़ी, ‘‘सच?’’

‘‘और क्या, तुम लोग अपनी फैमिली से न्यू ईयर पर छुट्टी ले लो.’’

‘‘हां यार, अब बच्चे बड़े हैं… हमारे हस्बैंड तो जानते ही हैं तुम किस दौर से गुजरी हो.

तुम्हारे साथ न्यू ईयर की ऐसी शुरुआत करने से हमें कोई नहीं रोकेगा पर कपिल का क्या होगा?’’

‘‘उसे माशूका के जाने का दुख मनाने दो. संजय गोवा और साक्षी महाबालेश्वर

जा रही हैं. वे भी न्यू ईयर पर फ्रैंड्स के ही साथ हैं. उन्हें पूरी बात बताई तो वे बहुत खुश हुए.

असल में तुम लोगों के साथ मेरा यह ट्रिप वे दोनों ही स्पौंसर कर रहे हैं. वे चाहते हैं कि मैं तुम लोगों के साथ ऐंजौय कर के जाऊं.’’

‘‘वाह, क्या बात है. मतलब आशिक साहब अकेले रहेंगे. वह है ही इसी लायक.’’

वंदिता बच्चों के साथ अब खूब खुश रहती. कपिल सूजा मुंह ले कर घूमता. वंदिता नाश्ता, खाना चुपचाप टेबल पर रख देती. वह खा कर चला जाता. रात को फिर ऐसे ही खा कर टीवी देखने बैठ जाता.

कभीकभी रात देर से लौटता. वंदिता अंदाजा लगाती मोहना से मिलने गया होगा. पर कपिल अब परेशान था. उस ने मोहना के साथ बहुत रंगरलियां मनाई थीं. अब वह जिस फ्लैट में गई थी, वह वन बैडरूम ही था. यहां वाला टू बैडरूम था.

विनय के बाहर जाने पर यश को दूसरे रूम में सुला कर रातभर मस्ती की जाती थी. अब इस फ्लैट में जगह बहुत कम थी. फ्लोर पर भी प्राइवेसी नहीं थी. मोहना चिढ़ीचिढ़ी रहने लगी थी. वह नाराज भी थी कि कपिल ने ही उस का किराया क्यों नहीं भर दिया था. कपिल उस पर खर्च तो खूब करता था पर किराए की रकम हर महीने क्व32 हजार देना आसाना नहीं था.

मोहना कपिल से अब बहुत कम मिलने लगी थी. यहां से जाने के बाद दोनों के रिश्ते में ठंडापन भर रहा था जो कपिल को बरदाश्त नहीं हो रहा था. इधर वंदिता का केयर फ्री अंदाज उसे और चिढ़ा रहा था. 31 दिसंबर को वंदिता को बैग पैक करते देख कपिल बुरी तरह चौंका, ‘‘कहां जा रही हो?’’

‘‘माथेरान.’’

‘‘क्या?’’ करंट सा लगा कपिल को, ‘‘क्यों? किस के साथ?’’

‘‘तुम भी तो जा रहे न, पर चिंता मत करो, मैं तुम्हें वहां डिस्टर्ब नहीं करूंगी और न ही पूछूंगी किस के साथ जा रहे हो? हां, मैं तुम्हें बता सकती हूं कि मैं किस के साथ जा रही हूं… अपनी सहेलियों के साथ जा रही हूं.’’

कपिल का चेहरा देखने लायक था. कुछ बोल ही नहीं पाया. तभी संजय और साक्षी भी अपनाअपना बैग ले कर आ गए. वंदिता को गले लगा कर खूब प्यार किया और कहा, ‘‘मम्मी, खूब ऐंजौय करना. हम टच में तो रहेंगे ही,’’ और फिर तीनों घूमने निकल गए.

संजय ने चारों सहेलियों के लिए अच्छे होटल में 2 रूम बुक करवा दिए थे. चारों ने जीभर कर ऐंजौय किया. न्यू ईयर की रात

होटल में ही खूब मस्ती की. होटल के खुले गार्डन में म्यूजिक, डांस का आयोजन था. सब ने खूब डांस किया. शानदार खाने का लुत्फ उठाया. कपिल की 2 मिस्ड कौल्स देख चारों खूब हंसीं. वंदिता ने कपिल को वापस फोन नहीं किया.

संजय, साक्षी और वंदिता अपनेअपने फ्रैंड्स के साथ न्यू ईयर का टाइम ऐंजौय कर के जब वापस घर आए तो कपिल बुरी तरह खी झता हुआ टीवी देख रहा था. वे तीनों दूसरे कमरे में नए साल पर कई गई मस्ती शेयर कर रहे थे. उन के खिलखिलाने की आवाजों से कपिल के कान जैसे फट रहे थे. जब तक की अपनी हरकतें वह भी जानता था, कुछ कहने का मुंह था ही नहीं. पैर पटकते हुए उन लोगों के कमरे का दरवाजा बंद कर आया ताकि उन सब के हंसने की आवाजें उसे सुनाई न दें.

कहां कपिल मोहना के साथ न्यू ईयर पर माथेरान जा कर जश्न मनाने वाला था,

पर अकेला खी झता,  झुंझलाता घर में बैठा रह गया था. अकेला होने पर उस ने मोहना को घर आने के लिए बहुत कहा, पर वह नहीं आई. उसे नया आशिक मिल चुका था. कपिल उसे किसी और पुरुष के साथ 1-2 जगह देख चुका था. मोहना ने बहुत जल्दी उसे भुला दिया. अब वह घर में अपनी बिगड़ी स्थिति कैसे संभाले, इसी उधेड़बुन में बेचैन था. वंदिता नए साल के इस दांव से बहुत खुश, उत्साहित हो कर जीवन में आगे बढ़ने के लिए एकदम तैयार थी.

‘‘नितिन ने उसे सब बता दिया कि मोहना का

सोसाइटी के ही किसी पुरुष से संबंध हैं और वह

पुरुष रातदिन खूब आताजाता है…’

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें