Pregnancy में हाई ब्लडप्रेशर की समस्या और समाधान

प्रैग्नेंसी महिलाओं के लिए नाजुक समय होता है. इस दौरान उन के शरीर में गर्भस्थ शिशु के विकास के कारण अनेकानेक परिवर्तन होते हैं. हलकीफुलकी असुविधा, दिक्कतें, लक्षण होना तो इस समय सामान्य माना जाता है. प्रैग्नेंसी में महिलाएं स्वस्थ रहें, प्रसव सकुशल हो तथा हृष्टपुष्ट शिशु का जन्म हो, इस के लिए विशेष देखभाल और सावधानी की जरूरत होती है. गर्भवती महिलाओं को अपनी जीवनशैली में बदलाव लाना पड़ता है. उन्हें नियमित रूप से डाक्टरी जांच करानी चाहिए ताकि प्रैग्नेंसी में होने वाली समस्याओं और रोगों का प्रारंभिक अवस्था में ही पता लगाया जा सके और उन के दुष्परिणामों से बचाव के उपाय किए जा सकें.

प्रैग्नेंसी में महिलाओं को अनेक तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. इन में से हाई ब्लडप्रैशर प्रमुख है. जब प्रैग्नेंसी में सिस्टोलिक रक्तचाप 140 मि.मी. और डायस्टोलिक रक्तचाप 90 मि.मी. से ज्यादा होता है तो यह दशा हाई ब्लडप्रैशर कहलाती है. जब तक डायस्टोलिक रक्तचाप 100 मि.मी. तक रहता है, हलका हाई ब्लडप्रैशर और जब यह 110 मि.मी. से ज्यादा हो जाता है तो गंभीर हाई ब्लडप्रैशर कहलाता है.

जब महिलाओं का प्रैग्नेंसी में रक्तचाप बढ़ जाता है और प्रसव में कुछ समय बाद रक्तचाप सामान्य हो जाता है तो प्रैग्नेंसीजनित हाई ब्लडप्रैशर या प्रेगनेंसी इंड्यूस हाइपरटेंशन (पी.आई.एच.) कहलाता है.

यदि हाई ब्लडप्रैशर के साथ पैरों, हाथों में सूजन, पेशाब में प्रोटीन आती है, तो यह दशा प्री एक्लैम्पसिया कहलाती है. यदि इस दशा पर नियंत्रण नहीं रखा जाए तो इस से अनेक समस्याएं हो सकती हैं. झटके आने लगते हैं, जिसे एक्लैम्पसिया या टौक्सीमिया औफ प्रेगनेंसी कहते हैं.

पहले से हाई ब्लडप्रैशर ग्रस्त महिलाएं मरीज यदि गर्भवती हो जाती हैं तो उन का रक्तचाप बढ़ सकता है, उन में प्री एक्लैम्पसिया ग्रस्त होने की संभावना ज्यादा रहती है.

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पी.आई.एच. क्यों होता है

प्रैग्नेंसी में रक्तचाप क्यों बढ़ जाता है, इस के कारणों में वैज्ञानिकों में मतभेद है. काफी हद तक यह वंशानुगत समस्या होती है. यदि कोई महिला रोगग्रस्त हो जाती है तो भविष्य में उस की बेटियों को भी गर्भकाल में पी.आई.एच. ग्रस्त होने का भय रहता है. कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार यह समस्या शरीर में कैल्सियम की कमी होने या शरीर में रासायनिक स्राव में परिवर्तन होने से भी हो सकती है.

प्रैग्नेंसी में हाई ब्लडप्रैशर

पी.आई.एच. ग्रस्त होने पर रक्तवाहिनियां सिकुड़ जाती हैं, जिस से शरीर के अनेक ऊतक और अंग क्षतिग्रस्त होने लगते हैं, धमनियों से रक्तस्राव हो सकता है.

हलके स्तर का हाई ब्लडप्रैशर होने पर (डायस्टोलिक प्रेशर 100 से कम) महिलाओं के हाथपैरों में सूजन आ सकती है, पेशाब में एलबूमिन प्रोटीन निकलने लग सकती है. यदि इस दौरान लापरवाही रही, परहेज व उपचार नहीं कराया गया और रक्तचाप 110 मि.मी. से ज्यादा हो जाता है तो गंभीर स्थिति आ सकती है.

सिरदर्द, आंखों के सामने अंधेरा, चमक, नजर कम होना, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, पेशाब कम आना, फेफड़ों में सूजन आने के कारण सांस फूल सकती है, गुरदे और जिगर

क्षतिग्रस्त हो सकते हैं, रक्त में प्लेटलेट कणिकाओं की कमी के कारण रक्तस्राव हो सकता है, झटके आ सकते हैं, गर्भ में शिशु का विकास रुक सकता है, मृत्यु भी हो सकती है.

पी.आई.एच. ग्रस्त महिलाओं में हृदय की कार्यक्षमता कम हो जाने से वे मामूली रक्तस्राव बरदाश्त नहीं कर पातीं, साथ ही उन के शरीर में जल या रक्त की कमी की पूर्ति के लिए शिराओं द्वारा ग्लूकोज का घोल या रक्त चढ़ाया जाता है तो भी उन्हें गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. उन्हें ग्लूकोज या रक्त विशेष निगरानी में सावधानीपूर्वक चढ़वाना पड़ता है.

पी.आई.एच. के मरीजों में प्लेटलेट रक्त कणिकाओं की कमी के कारण तथा रक्त में थक्का बनाने वाले अवयव कम हो जाने से शरीर में आंतरिक रक्तस्राव हो सकता है, जिस से विभिन्न अंग फेल हो सकते हैं.

रक्तवाहनियों के सिकुड़ने से गुरदे, जिगर क्षतिग्रस्त हो सकते हैं और कार्य करना बंद कर सकते हैं.

हाई ब्लडप्रैशर का उपचार

गर्भकाल में ब्लडप्रेशर बढ़ जाना गंभीर समस्या की निशानी है. यदि समय पर उपचार नहीं किया गया, तो अनेक गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, मां और शिशु की मृत्यु भी हो सकती है. परहेज, उपचार से काफी कुछ बचाव संभव है. प्रैग्नेंसी में पी.आई.एच. ग्रस्त हो जाने पर ध्येय होता है कि पर्याप्त परहेज, उपचार कर रक्तचाप को सामान्य बनाए रखा जाए. इस के दुष्प्रभावों से गर्भवती महिला का बचाव किया जाए. यदि संभव हो तो गर्भ पूरे समय तक ले जाया जाए. इस दौरान गर्भवती और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य पर बराबर निगरानी होनी चाहिए. हालात बेकाबू और गंभीर होने से पहले ही जरूरत पड़ने पर प्रसव कराना पड़ सकता है.

यदि गर्भवती महिलाएं पी.आई.एच. ग्रस्त हैं तो इन को बाईं करवट लेट कर आराम करना चाहिए.

यदि सिस्टोलिक प्रेशर 160 मि.मी. या डायस्टोलिक रक्तचाप 100 मि.मी. से ज्यादा है तो इन को रक्तचाप कम करने वाली दवाओं का नियमित सेवन अवश्य करना चाहिए. दवाएं इस दौरान बहुत सावधानीपूर्वक दी जानी चाहिए. कुछ दवाएं जैसे पेशाब ज्यादा होने वाली दवाओं के सेवन के घातक प्रभाव हो सकते हैं.

गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की निगरानी रखने के लिए उन का हर 3 सप्ताह पर अल्ट्रासाउंड तथा मां के रक्त की जांचें करानी चाहिए.

पी.आई.एच. ग्रस्त महिला का जब तक रक्तचाप सामान्य न हो जाए, उस का हर दिन वजन लेना चाहिए, हर दूसरे दिन पेशाब में प्रोटीन की जांच तथा हर 4 घंटे पर रक्तचाप की माप होनी चाहिए.

गर्भवती को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, कैल्सियम का सेवन करना चाहिए.

पी.आई.एच. ग्रस्त महिलाओं को भोजन में जल और नमक से परहेज की जरूरत नहीं होती है.

मरीजों को पर्याप्त आराम करना चाहिए. यदि कोई समस्या है तो हास्पिटल में दाखिल कर जांचें और उपचार कराएं.

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प्रैग्नेंसीजनित हाई ब्लडप्रैशर से बचाव

हर गर्भवती महिला की नियमित अंतराल पर रक्तचाप तथा पेशाब में प्रोटीन की जांच जरूरी है, जिस से रोग का जल्दी से जल्दी उपचार शुरू हो सके.

यदि जांच से गर्भवती महिला हाई ब्लडप्रैशर ग्रस्त पाई जाती है और वह गर्भधारण करना चाहती है तो पहले दवाओं, परहेज द्वारा रक्तचाप को सामान्य स्तर पर लाएं तथा खतरों की जानकारी से आगाह हो कर ही गर्भवती होने की कोशिश करें.

यदि वंशानुगत या अन्य कारणों से महिलाओं में पी.आई.एच. ग्रस्त होने का भय है तो उन्हें रोग से बचाव के उपाय करने चाहिए. उन पर विशेष निगरानी की जरूरत होती है.

रोजाना 2 ग्राम कैल्सियम की गोलियों का सेवन करना चाहिए.

आधुनिक शोधों से ज्ञात हुआ है कि पी.आई.एच ग्रस्त या इस की संभावना होने पर अगर महिलाएं गर्भकाल में 13वें से 26वें सप्ताह के मध्य 60 मि.ग्रा. एस्प्रिन की गोली का नियमित सेवन करती हैं, तो उन के पी.आई.एच. ग्रस्त होने की संभावना कम हो जाती है तथा इस के कारण होने वाली समस्याओं से बचाव होता है. इन समस्याओं से बचाव के लिए वे 3 ग्राम मैग्नीशियम ग्लूकोनेट का रोजाना सेवन भी कर सकती हैं. हाई ब्लडप्रैशर या पी.आई.एच. के कारण प्रैग्नेंसी में मां और गर्भस्थ शिशु में अनेक गंभीर और घातक समस्याएं हो सकती हैं. अत: हर गर्भवती महिला की नियमित अंतराल पर रक्तचाप की नाप और पेशाब की जांच आवश्यक है, जिस से रोग का निदान, रोग की शुरुआत में हो सके तथा उचित परहेज, सावधानियों तथा उपचार द्वारा गंभीर समस्याओं से बचाव हो सके.

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Anupama-Anuj की जिंदगी में हुई मालविका की एंट्री, वनराज ने बनाया नया प्लान

स्टार प्लस के सीरियल अनुपमा (Anupama) में जल्द ही नए ट्विस्ट एंड टर्न्स देखने को मिलने वाले हैं. सीरियल की बात करें तो अनुपमा (Rupali Ganguly) ने अनुज (Gaurav Khanna) को जहां अपनी जिंदगी में लाने का मन बना लिया है तो वहीं वनराज (Sudhanshu Pandey) का नया प्लान काव्या को बैचेन कर रहा है. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

अनुपमा को है डर

अब तक आपने देखा कि अनुपमा, अनुज के घर में उसकी देखभाल के लिए रहने का फैसला करती है, जिसके चलते अनुज बेहद खुश होता है. वहीं अनुपमा उसे बताने की कोशिश करती है कि वह अपने और अनुज के रिश्ते को एक मौका देना चाहती है, लेकिन उसे डर है कि वह एक पुरानी अनुपमा न बन जाए. हालांकि बापूजी, अनुपमा को समझाते हैं कि हर कोई किसी पर निर्भर होता है. लेकिन एक लिमिट तक.

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अनुज कहेगा ये बात

 

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अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि अनुज, अनुपमा के घर में रहने से बेहद खुश होगा. इसी बीच वह एक अखबार में मालविका की खबर देखकर परेशान हो जाएगा. दरअसल, अखबार में छपा होगा कि मालविका अहमदाबाद में है, जिसे पढ़कर अनुज हैरान रह जाएगा और मालविका को फोन करेगा और मिलने की बात कहेगा. साथ ही वह मालविका से कहेगा कि वह उससे कितना प्यार करता है, जिसे सुनकर अनुपमा का दिल टूट जाएगा. हालांकि अनुज, अनुपमा को नहीं देखेगा. वहीं मालविका उसे मिलने के लिए बुलाएगी.

मालविका की होगी एंट्री

 

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इसके अलावा आप देखेंगे कि वनराज काला सूट पहनकर काव्या को ताना मारते हुए कहेगा कि बा कहती हैं कि वह सूट में सुंदर दिखता है, इसीलिए वह काला टीका लगाती हैं. वहीं अगर कोई महिला उस पर फिदा हो जाए तो क्या होगा. वनराज की ये बात सुनकर काव्या गुस्से में नजर आएगी. दूसरी तरफ वनराज, अनुपमा से एक रेस्तरां में मिलेगा. जहां अनुपमा कहेगी कि वह अलग दिख रहा है. लेकिन वनराज कहेगा कि आज खास दिन है. इसीलिए वह अलग दिख रहा है. दूसरी तरफ जहां मालविका की एंट्री होती नजर आएगी तो वहीं मालविका से मिलने के लिए अनुज बेकरार नजर आएगा.

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रौयल अंदाज में Ankita Lokhande ने पति विक्की जैन संग लिए फेरे, फोटोज वायरल

सोशलमीडिया पर इन दिनों पवित्र रिश्ता एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे (Ankita Lokhande) छाई हुई हैं. जहां हाल ही में अंकिता और उनके बौयफ्रेंड विक्की जैन (Vicky Jain) की सगीत और सगाई सेरेमनी की वीडियो वायरल हो रही थी तो वहीं अब उनकी शाही शादी की फोटोज वायरल हो रही हैं. आइए आपको दिखाते हैं अंकिता लोखंडे और विक्की जैन की रौयल वेडिंग (Ankita Lokhande-Vicky Jain Royal wedding)की झलक…

रौयल लुक में मारी एंट्री

 

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दरअसल, बीते दिन अंकिता लोखंडे ने मुंबई के फाइव स्टार होटल में ब्वॉयफ्रेंड विक्की जैन (Vicky Jain) संग शादी की है. वहीं इस सेलिब्रेशन में पवित्र रिश्ता की टीम समेत कई सितारे मौजूद नजर आएं. रौयल दुल्हन की तरह अंकिता लोखंडे ने शादी के मंडप में एंट्री मारकर सभी को हैरान कर दिया है.

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लुक था खास

 

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अंकिता लोखंडे के लुक की बात करें तो वह पिंक या रेड नहीं बल्किन गोल्डन कलर के हैवी लहंगे में नजर आईं. वहीं विक्की जैन भी इसी लुक के कौम्बिनेशन को कैरी करते नजर आए. वहीं मंडप में एंट्री के समय घूंघट ओढ़े अंकिता की फैन्स तारीफें करते नहीं थक रहे हैं, जिसके चलते सोशलमीडिया पर काफी वीडियो और फोटोज वायरल हो रही हैं.

 

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सेलेब्स ने की शिरकत

 

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बात करें शादी में मौजूद गेस्ट की तो पवित्र रिश्ता की टीम जहां अंकिता का साथ देती नजर आई तो वहीं शो के लीड एक्टर शाहीर शेख इस शादी में नजर नहीं आए. हालांकि पवित्र पुनिया और एजाज खान ने शादी में शामिल होकर चार चांद लगा दिए. वहीं संगीत सेरेमनी में एक्ट्रेस कंगना रनौत ने आकर सभी को चौंका दिया.

बता दें, हाल ही में खबरें हैं कि अंकिता लोखंडे और विक्की जैन का वेडिंग रिसेप्शन कैंसल हो गया है. हालांकि इसकी वजह मुंबई में बढ़ते कोरोना के मामलों को बताया जा रहा है, जिसके बाद देखना होगा कि कैसा होगा अंकिता लोखंडे और विक्की जैन का वेडिंग रिसेप्शन.

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दिल्लगी बन गई दिल की लगी: क्यों शर्मिंदा थी साफिया

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नन्हे मुन्नों के कपड़ों का रखरखाव

मातापिता जब अपनी नन्ही सी जान को अस्पताल से घर ला रहे होते हैं तो उन की खुशियों की कोई सीमा नहीं होती. बच्चे के आने से पहले ही खूबसूरत रंगबिरंगे क्यूट कपड़ों से घर भरा होता है. मगर इन की खरीदारी और धुलाई करते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि कपड़ों के साथ जुड़ी होती है बच्चे की सेहत और सुरक्षा.

कपड़े खरीदते समय सावधानियां

फैब्रिक: बच्चे के लिए हमेशा मुलायम और आरामदायक कपड़े खरीदें, जिन्हें धोना आसान हो. फैब्रिक ऐसा हो जिस से बच्चे की त्वचा को कोई नुकसान न पहुंचे. बच्चों के लिए कौटन के कपड़े सब से अच्छे रहते हैं. लेकिन ध्यान रहे कि कौटन के कपड़े धुलने के बाद थोड़े सिकुड़ जाते हैं.

साइज: बच्चों के कपड़े 3 माह के अंतराल के आते हैं. ये 0-3 माह, 3-6 माह, 6-9 माह और 9-12 माह के होते हैं. बच्चों को ओवर साइज कपड़े न पहनाएं. ऐसे कपड़े गरदन और सिर पर चढ़ सकते हैं, जिस से दम घुटने का खतरा हो सकता है.

सुरक्षा: बीएल कपूर सुपर स्पैश्यलिटी हौस्पिटल के कंसल्टैंट न्यूनेटोलौजी, डा. कुमार अंकुर कहते हैं कि छोटे बच्चों के लिए हमेशा सिंपल कपड़े खरीदने चाहिए. फैंसी और डैकोरेटिव कपड़े खरीदने से बचें. ऐसे कपड़े खरीदें जिन में बटन, रिबन और डोरियां न हों. बच्चे बटन निगल सकते हैं, जिस से उन का गला चोक हो सकता है. ऐसे कपड़े भी न खरीदें जिन में खींचने वाली डोरियां हों. वे किसी चीज में फंस कर खिंच सकती हैं और बच्चे का गला घुट सकता है.

आराम: ऐसे कपड़े खरीदें जो आसानी से खुल जाएं ताकि कपड़े चेंज कराते वक्त दिक्कत न हो. सामने से खुलने वाले और ढीली आस्तीन के कपड़े अच्छे रहते हैं. ऐसे फैब्रिक के कपड़े लें जो स्ट्रैच हो जाएं ताकि उन्हें पहनाना और उतारना आसान हो, ऐसे कपड़े न खरीदें जिन में जिप लगी हो.

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कपड़े धोने के टिप्स

डा. कुमार अंकुर कहते हैं कि बच्चों की त्वचा संवेदनशील होती है, इसलिए सामान्य डिटर्जैंट का इस्तेमाल न करें. रंगीन और खुशबू वाले डिटर्जैंट तो बिलकुल भी न लगाएं. बेहतर होगा ऊनी कपड़े धोने वाले माइल्ड डिटर्जैंट का इस्तेमाल करें. छोटे बच्चों के कपड़ों को पानी से अच्छी तरह खंगालें ताकि डिटर्जैंट पूरी तरह निकल जाए. अगर बच्चे की त्वचा अधिक संवेदनशील है तो विशेषरूप से छोटे बच्चों के कपड़ों के लिए मिलने वाले डिटर्जैंट का ही इस्तेमाल करें.

बच्चों के कपड़े छोटे और मुलायम होते  हैं, इसलिए उन्हें वाशिंग मशीन के बजाय हाथ  से धोएं तो ज्यादा अच्छा रहता है. अगर आप मशीन में धो रही हैं तो ड्रायर में न सुखाएं. खुले स्थान पर ताजी हवा और सूर्य की रोशनी में सुखाएं. अगर आप फैब्रिक सौफ्टनर का इस्तेमाल करना चाहती हैं तो बेबी स्पैसिफिक सौफ्टनर का प्रयोग करें.

कपड़े धोने के अन्य टिप्स

आइए, जानते हैं कि बच्चों के कपड़ों की साफसफाई किस तरह करें कि उन्हें त्वचा या अन्य किसी तरह का रोग न हो:

  1. कपड़े पर लगे लेबल को ध्यान से पढ़ें. बच्चे के डौलिकेट बेबी क्लोथ्स पर लिखे निर्देशों के हिसाब से चलें.
  2. ज्यादातर कपड़े ज्यादा तापमान से खराब हो जाते हैं. इसलिए कपड़े धोते समय ज्यादा गरम पानी का इस्तेमाल न करें. कुनकुने या ठंडे पानी से ही धोएं.
  3. बच्चों के कपड़ों को रंग, फैब्रिक और दागदब्बों के आधार पर 2-3 हिस्सों में बांट लें. एक तरह के कपड़ों को एकसाथ धोएं. इस से धोने में सुविधा होगी और कपड़े भी सुरक्षित रहेंगे.
  4. बच्चे के कपड़ों में यदि दागधब्बे लग गए हैं तो उन पर बेबी फ्रैंडली माइल्ड डिटर्जैंट लगा कर हलके से रगड़ें, इस से दाग हलके हो जाएंगे. बाद में सामान्य तरीके से धो लें.
  5. डौक्स ऐप की डा. गौरी कुलकर्णी कहती हैं कि जब बच्चे के लिए नए कपड़े खरीदें तो उन्हें पहनाने से पहले धो लें. इस से कपड़े बनाते वक्त काम में लिए गए रसायन शिशु को हानि नहीं पहुंचा पाएंगे. यही नहीं, कपड़ों पर यदि किसी तरह की गंदगी या धूलमिट्टी लगी होगी तो वह भी धुल जाएगी. सिर्फ कपड़े ही नहीं,  केट, चादर, बिस्तर आदि जो शिशु की त्वचा के सीधे संपर्क में आते हैं, प्रयोग से पहले धो लें. ऐसा न करने पर संभव है कि बच्चे की कोमल त्वचा पर खुजली या रैशेज की समस्या पैदा हो जाए.
  6. बच्चे के कपड़ों को कीटाणुओं से मुक्त रखने के लिए कुछ महिलाएं उन्हें ऐंटीसैप्टिक सौल्यूशन में भिगोती हैं. यह उचित नहीं. इस से बच्चे को नुकसान पहुंच सकता है.
  7. कपड़ों को फर्श पर रख कर रगड़ने के बजाय हाथ या रबड़ शीट अथवा मशीन के ढक्कन पर रख कर साफ करें.
  8. बच्चों के कपड़ों को घर के दूसरे सदस्यों के कपड़ों से अलग धोएं. अकसर बड़ों के कपड़ों में गंदगी ज्यादा होती है. सभी कपड़े साथ धोने पर उन के कीटाणु बच्चों के कपड़ों में आ सकते हैं.
  9. कपड़े सूख जाएं तो उन्हें प्रैस कर लें ताकि रहेसहे कीटाणु भी मर जाएं.
  10. कपड़ों को तह लगा कर कवर में या कौटन के कपड़े में लपेट कर रखें.

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जानें क्या है बच्चों में होने वाला Hyperactivity Disorder

ध्यानाभाव एवं अतिसक्रियता विकार (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसआर्डर) एक मानसिक विकार और दीर्घकालिक स्थिति है जो लाखों बच्चों को प्रभावित करती है और अक्सर यह स्थिति व्यक्ति के वयस्क होने तक बनी रह सकती है. एडीएचडी के साथ जुड़ी प्रमुख समस्याओं मे ध्यानाभाव (ध्यान की कमी), आवेगी व्यवहार, असावधानी और अतिसक्रियता शामिल हैं. अक्सर इससे पीड़ित बच्चे हीन भावना, अपने बिगड़े संबंधों और विद्यालय में खराब प्रदर्शन जैसी समस्याओं से जूझते रहते हैं. माना जाता है कि ध्यानाभाव एवं अतिसक्रियता विकार अनुवांशिक रूप से व्यक्ति मे आता है. जिस घर-परिवार में तनाव का माहौल रहता है और जहां पढ़ाई पर अधिक जोर देने की प्रवृत्ति रहती है वहां यह समस्या अधिक होती है. रिसर्च के अनुसार, भारत में लगभग 1.6% से 12.2% तक बच्चों में एडीएचडी की समस्या पाई जाती है.

आईएमए के अध्यक्ष डा. के.के. अग्रवाल ने कहा कि एडीएचडी वाले बच्चे बेहद सक्रिय होते हैं और इस रोग से पीड़ित ज्यादातर बच्चों में व्यवहार की समस्या (बिहेवियरल प्राब्लम्स) देखने को मिलती है. इसलिए उनकी देखभाल करना और उन्हें कुछ सिखाना बेहद मुश्किल हो जाता है. यदि इस कंडीशन को शुरू में ही काबू न किया जाए तो यह बाद में समस्याएं पैदा कर सकती हैं.

एडीएचडी की समस्या ज्यादातर प्री-स्कूल या केजी तक के बच्चों में होती है. कुछ बच्चों में किशोरावस्था की शुरुआत में भी स्थिति खराब हो सकती है. यह व्यस्कों में भी हो सकता है. हालांकि एडीएचडी का स्थायी उपचार नहीं है, फिर भी उपचार से इसके लक्षणों को काफी हद तक कम किया जा सकता है. एडीएचडी का उपचार मनोवैज्ञानिक परामर्श, दवायें, एजुकेशन या ट्रेनिंग से भी किया जा सकता है.

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एडीएचडी के लक्षणों को तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है- ध्यान न देना, जरूरत से अधिक सक्रियता और असंतोष.

एडीएचडी वाले बच्चों को इस तरह संभालें

यदि ऐसा दिखे कि बच्चा आपा खो रहा है, तो उस पर ध्यान दें और उसे किसी अन्य एक्टिविटी में बिजी कर दें.

दोस्तों को घर बुलाएं. इससे बच्चे को लोगों से मिलने-जुलने में आसानी होगी, लेकिन यह सुनिश्चित करें कि बच्चा स्वयं पर से नियंत्रण न खोएं.

अपने बच्चे को अच्छी नींद लेने दें.

शिक्षा, सपोर्ट और क्रिएटिविटी (रचनात्मकता) से एडीएचडी से पीड़ि‍त बच्चों को संभालने में मदद मिलती है. एडीएचडी से पीड़ि‍त बच्चों की बुद्धि या क्षमता का सही से पता नहीं चल पाता, ऐसे में बच्चे की शक्तियों का पता लगाना चाहिए और बेहतर परिणामों के लिए उनकी क्षमताओं पर ध्यान देंना भी आवश्यक है.

आप उन्हे समय देकर और उनकी हर चीज टाइम टेबल के हिसाब से करके सम्हलने में उनकी मदद कर सकती है.

अच्छे काम पर तारीफ करने से या इनाम देने से भी बच्चे के व्यवहार को पाजिटिव किया जा सकता है.

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Christmas Special: घर पर ही बनाएं प्लेन पैनकेक

प्लेन पैनकेक एक कॉन्टिनेंटल ब्रेकफास्ट रेसिपी है. आप चाहें तो इसे जन्मदिन के मौके पर या गेट-टू-गेदर के दौरान बना सकती हैं. अच्छी बात यह है कि इसे बनाना बहुत आसान है.

प्लेन पैनकेक बनाने में लगने वाला समय: 20 मिनट

तैयारी में लगने वाला समय: 10 मिनट

मात्रा: 3 लोगों के लिए

सामग्री:

– 100 ग्राम आटा

– 250 मिली लीटर दूध

– एक अंडा

– 3 चम्मट रिफाइंड

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बनाने की विधि:

– सबसे पहले दूध में अंडे को फोड़कर अच्छी तरह फेंट लें.

– धीरे-धीरे इसमें आटा मिलाएं और लगातार चलाते रहें. इसे लगातार मिलाते रहना जरूरी है, वरना गुठलियां पड़ जाएंगी.

– एक नॉन स्टिक तवे में रिफाइंड डालकर, मध्यम आंच पर गर्म होने दें. अब तैयार बैटर को इस पर पलट दें. ध्यान रखें तवे पर कोई गैप न छूट जाए.

– इसे तब तक पकने दें जब तक कि तवे पर डाला गया बैटर गोल्डन न हो जाए.

– इसके बाद पांच मिनट तक इसे और पांच मिनट पकाएं. आप चाहें तो इसे चॉकलेट सिरप या जैम के साथ सर्व कर सकती हैं.

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Sunrise Pure स्वाद और सेहत उत्सव में आज बनाते हैं हैल्दी वेज मसाला टिक्का

नाश्ता हर गृहिणी की समस्या होती है, कोरोना काल में बाहर का नाश्ता मंगवाना भी सुरक्षित नहीं है, रोज रोज पोहा, वेरमिसेली या सैंडविच भी खाकर बोरियत होने लगती है. हम महिलाओं के सामने तो सबसे बड़ी चुनौती होती है कि नाश्ता ऐसा होना चाहिए जो हैल्दी भी हो और सबको पसन्द भी आये. आपकी इसी समस्या को हल करते हुए हम आपको आज एक ऐसा नाश्ता बनाना बता रहे हैं जो पौष्टिक भी है, टेस्टी भी और जिसे बनाना भी बहुत आसान है. बड़े ही नहीं बच्चों को भी यह बेहद पसंद आता है. तो आइए देखते हैं कि इसे कैसे बनाते हैं-

कितने लोगों के लिए: 6
बनने में लगने वाला समय: 30 मिनट
मील टाइप: वेज

सामग्री

रवा या सूजी 1/4 कप
बेसन 1 कप
बारीक कटा प्याज 1 टेबलस्पून
बारीक कटी गाजर 1 टेबलस्पून
कटी बीन्स 1 टेबलस्पून
कटा टमाटर 1 टेबलस्पून

कटी शिमला मिर्च 1 टेबलस्पून
मटर 1 टेबलस्पून
नमक स्वादानुसार
हींग चुटकीभर
जीरा 1/4 टीस्पून
कटी हरी धनिया 1 टेबलस्पून
हरी मिर्च, अदरक पेस्ट 1 टीस्पून
पानी 2 कप
दही 2 कप
तेल 2 टेबलस्पून
Sunrise Pure चाट मसाला 2 टीस्पून
चिली फ्लैक्स 1 टीस्पून

विधि

  • रवा और बेसन को दही और पानी में अच्छी तरह मिलाएं. ध्यान रखें कि गुठली न रहें.
  • अब तेल, Sunrise Pure चाट मसाला और चिली फ्लैक्स को छोड़कर सभी सब्जियां और मसाले भी अच्छी तरह मिला लें. एक चौकोर ट्रे में चिकनाई लगाकर अलग रख दें.
  • तैयार मिश्रण को एक नॉनस्टिक पैन में डालकर गैस पर चढ़ा दें. लगातार चलाते हुए मिश्रण के गाढ़ा होने तक पकाएं. जब मिश्रण पैन के किनारे छोड़ने लगे तो गैस बंद कर दें और मिश्रण को चिकनाई लगी ट्रे में एकसार फैला दें.
  • आधे घण्टे बाद जब मिश्रण ठंडा हो जाये तो चौकोर टुकड़ों में काट लें.
  • अब गर्म तेल में इन चौकोर टुकड़ों को मंदी आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक शैलो फ्राई करें.
  • तैयार टिक्कों पर Sunrise Pure चाट मसाला और चिली फ्लैक्स बुरकें और टोमेटो सॉस या हरी चटनी के साथ सर्व करें. आप चाहें तो बिना फ्राई किये भी प्रयोग कर सकतीं हैं.

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Miss Universe 2021: हरनाज़ संधू से जानिए सक्सेस का सीक्रेट फार्मूला, पढ़ें लेटेस्ट इंटरव्यू

पंजाब की हरनाज़ संधू 21 साल बाद 12 दिसम्बर 2021 को मिस यूनिवर्स का ताज अपने देश लाने में समर्थ हुई है. इससे पहलेवर्ष 2000 में लारा दत्ता और 1994 में सुस्मिता सेन मिस यूनिवर्स बनी थी. हरनाज़ भारत की तीसरी मिस यूनिवर्स बनी है, जिसमें 79 देशों की सुंदरियों ने भाग लिया था और यह 70 वीं एडिशन था, जिसे इजराइल के Eilatमें आयोजन किया गया. इस ख़िताब को जीतकर हरनाज़ ने परिवार और देश का सम्मान बढाया है.

लाडली परिवार की

हरनाज़ का जन्म पंजाब के गांव कोहली अर्बन स्ट्रीट के बटाला, जिला गुरदासपुर में हुआ था. बचपन से ही हरनाज को सिंगिंग और डांसिंग का शौक रहा.उन्होंने स्कूल और कॉलेज की पढाई चंडीगढ़ से की है, अभी हरनाज़ एम्. ए. पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में कर रही है. उन्होंने केवल 17 वर्ष की आयु में मिस चंडीगढ़ 2017, मिस मैक्स इमर्जिंग स्टार इंडिया 2018 अवार्ड,मिस इण्डिया पंजाब 2019 भी जीत चुकी है. उन्होंने कई फैशन मॉडलिंग कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं में भाग लिया है. हरनाज़ के परिवार में उसका एक भाई हरनूर संधू, माँ रविंदर संधू और पिता पी. एस. संधू है. हरनाज़ अपने एक्सटेंडेड फॅमिली की17 भाइयों में केवल एक लड़की है, इसलिए उनके जन्म पर उनके पिता ने पूरे हॉस्पिटल में मिठाइयाँ बटवाई थी.

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मिली प्रेरणा

पंजाबी परिवार में जन्मी और पली बड़ी हुई हरनाज़ को प्रेरणा उनकी माँ से मिली, जिन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही पुरुषसत्तात्मक सोच को तोड़ने और एक सफल गायनोकोलोजिस्ट बनकर अपने परिवार को चकित किया. ऐसे परिवार से निकलकर  हरनाज़ ने हमेशा अपनी माँ को हेल्थ कैंप में सहयोग दिया और वहां जाकर महिलाओं को मासिक धर्म और उसकी हायजिनके बारें में समझाया. हालाँकि हरनाज़ चंडीगढ़ में रहती है, पर उनका परिवार खेती – बाड़ी से ही जुड़ा है. इसलिए उन्होंने किसान आन्दोलन को सहयोग दिया और मिल बैठकर उनकी बात को सुलझाने की सलाह दी थी.

मेंटल हेल्थ पर काम जरुरी

शांत, मृदुभाषी हरनाज़ ने बहुत कम उम्र में मॉडलिंग शुरू की और ब्यूटी पेजेंट में भाग लेना शुरू कर दिया, इससे उनमे आत्मविश्वास बढ़ता गया और वह मिस यूनिवर्स 2021 बनने में सफल हुई. वह इस मुकाम तक पहुँचने में मेंटल हेल्थ को अधिक महत्व देती है, इसे मजबूत बनाने के लिए उन्होंने रोज मैडिटेशन और योग किया है. उन्होंने कई पंजाबी फिल्मों में भी बतौर एक्टर काम किया है.

हरनाज़ को हॉर्स राइडिंग, सिंगिंग, कुकिंग, लेखन आदि कई विषयों का शौक है, जिसे वह समय मिलने पर करती है. उन्हें पेट का शौक है, उनके घर में एक डौगी है, जिसका नाम ‘roger’ है. इसके अलावा वह आत्मविश्वासी और मध्यम वर्गीय परिवार से है, जिसे ग्लैमर हमेशा आकर्षित करती है. उम्मीद है अगले कुछ सालों में वह बॉलीवुड में भी अभिनय करती हुई दिख सकती है.

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हरनाज़ से जुडी कुछ मजेदार बातें

  • वह जानवर हो या इन्सान किसी की भी नकल (mimic) कर सकती है.
  • वह एक क्लोसेट सिंगर है,
  • हरनाज़ को पंजाबी में दोहे लिखना पसंद है.

GHKKPM: विराट और श्रुति पर फूटा सई का गुस्सा, सबके सामने तोड़ा फोन

सीरियल गुम हैं किसी के प्यार में की कहानी में आए दिन नए ट्विस्ट आ रहे हैं. श्रुति की एंट्री से जहां विराट और सई के रिश्ते में दरार आनी शुरु हो गई है तो वहीं कहा जा रहा है कि सीरियल जनवरी में बंद होने वाला है. हालांकि अभी पूरी जानकारी नहीं आई है. लेकिन मेकर्स सीरियल को और भी दिलचस्प बनाने की तैयारी में लग गए हैं. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

सई को मनाता है विराट

अब तक आपने देखा कि सई, विराट पर शक करती हैं. हालांकि विराट सई को मनाने का प्लान करता है और उसे कैंडी गिफ्ट करता है, जिसे देखकर वह खुश हो जाती है और उससे शक करने के लिए माफी मांगती हैं. वहीं पाखी, सई को ताना मारती है कि वह बच्चों की तरह क्यों पेश आ रही है. लेकिन सम्राट उसे रोक देता है .

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वारिस की बात कहती है भवानी

दूसरी तरफ, विराट, भवानी से सई को उसकी सफलता के लिए आशीर्वाद देने के लिए कहता है, लेकिन भवानी कहती है कि उन्हें केवल सई के प्रैग्नेंट होने की परवाह है. वहीं भवानी, पूरे परिवार के सामने कहती है कि सई को याद रखना चाहिए कि वह उनके घर की बहू है और उन्हें जल्द से जल्द खुशखबरी देनी चाहिए. वहीं इस बात पर पाखी नाराज दिखती है. वहीं विराट, सई के लिए पार्टी का आयोजन करता नजर आता है.

श्रुति-विराट पर भड़केगी सई

 

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अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि विराट, सई की सफलता का जश्न मनाएगा और उसके साथ डांस करेगा. इसी बीच श्रुति की तबीयत बिगड़ने लगेगी और वह विराट को फोन करेगी. लेकिन सई, श्रुति का नाम देखकर फोन उठाकर कहेगी कि वह जब चाहे फोन कर देती है और उसे खूब डांटेगी. वहीं श्रुति, उसे विराट को फोन देने का अनुरोध करेगी, लेकिन सई इनकार करते हुए फोन काट देगी, जिसे देखकर विराट गुस्सा हो जाएगा और उसे फोन देने के लिए कहेगा. लेकिन सई गुस्से में विराट से सवाल करेगी कि उसके और श्रुति के बीच क्या चल रहा है?, जिसे सुनकर सभी चौंक जाएंगे और सई गुस्से में विराट का फोन तोड़ देगी.

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