तनाव, चिंता, अनिद्रा और दर्द से निजात दिलाए कैनबिस मेडिसिन

आज के समय में कोविड की वजह से महिलाओं पर दोहरी जिम्मेदारी आ गई है. अब उन्हें घर के काम के साथ-साथ घर पर ही स्थित ऑफिस, बच्चों व परिवार, सबको संभालना पड़ता है. सभी जानते हैं कि महिला परिवार की मुख्य पिलर होती है, लेकिन वे घर परिवार की जिम्मेदारी में इस कदर उलझ कर रह जाती हैं, तब वे खुद की केयर करना भूल ही जाती हैं.

चाहे उन पर कोई ध्यान दे या न दे, उन्हें सबकी चिंता रहती है. और इसी भागदौड़ में वे अंदर से खुद को थकाथका , बीमार व तनावग्रस्त महसूस करने लगती है. छोट-छोटी बातों पर भी वे परेशान हो जाती हैं, जो सीधे तौर पर उनके तनाव को दर्शाने का काम करता है. ऐसे में हम सबकी यह जिम्मेदार है कि हम अपनी केयरगिवर की हेल्थ का पूरा ध्यान रखें और उनकी परेशान समझने की कोशिश करें. तभी परिवार खुशहाल रह पाएगा.

कोविड ने किया प्रभावित

कोविड महामारी ने वैसे तो हर किसी की शारीरिक व मानसिक हेल्थ को बिगाड़ने का काम किया है, लेकिन इससे महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं. क्योंकि काम व परिवार के हर सदस्य की केयर करने के कारण सबसे ज्यादा उनकी ही मानसिक, शारीरिक व इमोशनल हैल्थ पर असर पड़ा है. इसके वजह से उन पर तनावल, चिंता, अनिद्रा और दर्द का खतरा सबसे अधिक है. लेकिन केयर गिवर्स यानी महिलाओं के लिए ऐसे समय में दूसरों और खुद की केयर करने के प्रति बैलेंस बनाकर चलने की जरुरत है, ताकि वे तनाव, चिंता, अनिद्रा और दर्द से खुद को दूर रखकर खुद का व अपनों का अच्छे से ध्यान रख पाएं. ऐशे में सविकल्प साइंसेज की दवाएं उनकी परेशानी दूर करने में उनका साथ दे सकती हैं.

कहते हैं कि ढूंढने पर समस्याओं का समाधान मिल ही जाता है. ऐसे में सविकल्प साइंसेड एक ऐसा विश्वसनीय ब्रांड है, जो आपकी हर परेशानी को समझता है और आपको घर बैठै इलाज मुहैया करवाता है, वह भी जाने माने डॉक्टरों के द्वारा. तो जानते हैं सविकल्प साइंसेज के प्रौडक्ट्स के बारे में

क्या है सविकल्प साइंसेज

सविकल्प साइंसेज का मुख्यालय नई दिल्ली, भारत में स्थित है. इसके संस्थापक सदस्य कनाडा, स्विट्जरलैंड, अमेरिका तक में हैं. बता दें कि सविकल्प साइंसेड एक रिसर्च एंड डेवलवमेंट आधारित कैनाबिस मेडिसिन और जीवन विज्ञान कंपनी है.

यह भारच और अन्य देशों में कैनबिस मेडिसिन आधारित स्वास्थय कल्याण के मार्ग का नेतृत्व करने की तलाश में है. सविकल्प साइंसेज कैनबिस मेडिसिन के माध्यम से स्वास्थ्य और उपचाप को बढ़ावा देने का काम करता है.

सविकल्प साइंसेज की दवाएं तनाव, चिंता, अनिद्रा और दर्द को दूर करने की दिशा में प्रयासरत है. अधिक जानकारी के लिए विजिट करें: www.savikalpa.com

मेडिकली व साइंटिफिकली एप्रूवड

हम सभी चाहते हैं कि हम सामान्य जीवन जिएं, लेकिन आज स्ट्रेस हम सब पर हावी है, जो ढेरों समस्याओं का कारण बन रहा है. ऐसे में सविकल्प साइंसेज आपके मन को शांत रखने के साथ-साथ आपको एक आसान सोलूशन के द्वारा तनाव, चिंता, अनिद्रा और दर्द से निजात पाने में मदद करता है. बता दें कि कैनबिस मेडिसिन बिल्कुल नई अवधारणा है, जिससे शायद आप भी अभी परिचित न भी हों. लेकिन अगर आप इसके एक बार मेडिकल लाभ जान गए तो आप अपनों व खुद की परेशानियों को दूर करने के लिए इसे अपनाएं बिना नही रह पाएंगे.

सविकल्प साइंसेज एक आधुनिक हैल्थ व वेलनेस कंपनी है, जो कई बीमारियों से राहत पहुंचाने के लिए आयुर्वेद में निहित मेडिकल कैनबिस सोलूशन पर आधारित है. कैनबिस पौधे का इस्तेमाल औषधि के रुप में किया जाता है. सविकल्प साइंसेज का मानना है कि पौधों से प्राप्त दवाएं पूरी तरह से सेफ होने के साथ आपको परेशानी से बाहर निकालने में मदद कर सकती हैं. सविकल्प साइंसेज इस दिशा में डाबर रिसर्च फाउंडेशन जैसी भारत की प्रमुख दवा अनुसंधान संस्था के साथ काम कर रहा है.

कैनबिस ट्रीटमेंट में इस्तेमाल होने वाली दवाओं में कैनाबिनोइड्स नामक एक्टिव फार्मास्यूटिकल तत्व होते हैं, जिनमें अनेक कुदरती औषधिक तत्व पाए जाते हैं. ये ट्रीटमेंट नेचुरल है.

टेलीमेडिसिन से पाएं घर पर केयर

आज की बिजी लाइफस्टाइल में सभी के पास समय का अभाव है. ऐसे में सविकल्प साइंसेज आपको घर बैठे ट्रीटमेंट की सुविधा प्रदान करता है. वो भी ऑनलाइन क्लिनिक के माध्यम से 3 इजी स्टेप्स में

स्टेप 1: बस 2 मिनट के अंदर आप अपने मोबाइल से ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक करें.

स्टेप 2: चयनित टाइम पर एक्सपर्ट डॉक्टर से वीडियो कॉल के जरिए आप अपनी प्रौब्लम शेयर करें.

स्टेप 3: डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवा को आप www.savikalpa.com से खरीद सकते हैं.

अपना अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए विजिट करें: www.eclinic.savikalpa.com

Udaariyaan: खतरे में पड़ेगी फतेह की जान, जैस्मिन और तेजो आएंगी साथ

कलर्स का सीरियल उडारियां इन दिनों दर्शकों का दिल जीत रहा है. तेजो  (Priyanka Chahar Choudhary) और फतेह (Ankit Gupta) की कहानी दर्शकों को काफी पसंद आ रहा है. हाल ही में फतेह का जैस्मिन  (Isha Malviya) को दिया धोखा उसके लिए मुसीबत ले आया है. लेकिन अपकमिंग एपिसोड में फतेह की जान खतरे में पड़ने वाली है. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे (Udaariyaan Latest Episode)…

जैस्मिन हुई होटल से बाहर

 

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अब तक आपने देखा कि तेजो अपनी जिंदगी में आगे बढ़कर अंगद मान और उसकी बेटी के साथ वक्त बीताती नजर आ रही है. वहीं फतेह अपनी जिंदगी में आगे बढ़ता हुआ नजर आ रहा है, जि सके चलते वह कुछ गुंडों से मारपीट करता नजर आ रहा है. इसके बाद वह तेजो से प्यार का इजहार न कर पाने के लिए इमोशनल नजर आता है. दूसरी तरफ जैस्मिन को भी पैसे न चुकाने के कारण मालिक होटल से धक्के मारकर निकाल देता है.

 

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फतेह को लगेगी गोली

अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि फतेह गुंड़ों से भिड़ जाएगा, जिसके चलते एक गुंडा फतेह पर गोली चला देगा. इसी के चलते फतेह को गोली लग जाएगी और वह घायल हो जाएगा. वहीं जैस्मिन और तेजो, फतेह की तलाश करती नजर आएंगी. इसी दौरान अंगद मान भी तेजो के लिए फतेह को ढूंढेगा, जिसके बाद तेजो और फतेह की लव स्टोरी फैंस को देखने को मिलने वाली है.

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अनुज के प्यार को अपनाने के लिए कहेगा वनराज, Anupama से कहेगा ये बात

सीरियल अनुपमा (Anupama) इन दिनों टीआरपी चार्ट्स में पहले नंबर पर बना हुआ है. वहीं मेकर्स भी पूरी कोशिश कर रहे हैं कि सीरियल पहले नंबर पर ही बना रहे, जिसके चलते उन्होंने शो का नया प्रोमो रिलीज (Anupama New Promo)कर दिया है. वहीं इस प्रोमो से फैंस को काफी खुशी होने वाली है. आइए आपको बताते हैं प्रोमो में क्या है खास…

 अनुपमा से वनराज कहेगा ये बात

 

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शो के मेकर्स ने नया प्रोमो रिलीज कर दिया है, जिसमें वनराज, अनुपमा को अनुज के प्यार को अपनाने के लिए कहता नजर आ रहा है. दरअसल, प्रोमो में डौक्टर अनुज के ठीक होने की बात कहते हैं, जिसके बाद अनुपमा खुश होती नजर आ रही है और कह रही है कि वह 26 साल तक उससे बिना किसी उम्मीद के प्यार करता रहा और वह आज तक उसके प्यार को नहीं अपना पाई. वहीं वनराज, अनुपमा की खुशी देखकर कहता है कि अब उसे अपनी जिंदगी में आगे बढ़कर अनुज की तरफ प्यार का हाथ बढाना चाहिए, जिसे सुनकर अनुपमा हैरान रह जाती है.

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अनुपमा देगी अनुज का साथ

 

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दूसरी तरफ अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि अनुज की हालत ठीक हो जाएगी, लेकिन अनुपमा उसका बिजनेस संभालेगी. लेकिन इस बीच अनुज की लाइफ में ऩए शख्स की एंट्री भी होगी, जिसके चलते सीरियल की कहानी में दिलचस्प मोड़ आता नजर आएगा. वहीं बापूजी के बाद वनराज, बा को अनुपमा और अनुज के रिश्ते के लिए मनाता नजर आएगा.

 

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अनुज के एक्सीडेंट से टूटी अनुपमा

अब तक आपने देखा कि अनुज (Gaurav Khanna) जहां अपने प्यार का इजहार करता है तो वहीं अनुपमा और उसपर गुंडे हमला कर देते हैं, जिसके बाद अनुज गुंडों से लड़ता नजर आता है. हालांकि गुंडे उसके सिर पर वार कर देते हैं, जिसके कारण वह बेहोश हो जाता है. लेकिन अनुपमा उसे गाड़ी में तुरंत अस्पताल ले जाती है, जिसके बाद डौक्टर अनुज के सीरियस होने की बात कहते हैं और अनुपमा (Rupali Ganguly) टूट जाती है. वहीं वह समर और जीके को फोन मिलाती है. लेकिन फोन नहीं लग पाता और वह वनराज (Sudhanshu Panday) को फोन लगाती है और पूरी बात बताती है, जिसके बाद वनराज अस्पताल आता है.

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10 साल: नानी से क्यों परेशान थे सभी ?

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मां बनने के बाद बदला Nusrat Jahan का अंदाज, फैंस कर रहे हैं तारीफें

अक्सर सुर्खियों में रहने वाली लोकसभा सांसद और एक्ट्रेस नुसरत जहां (Nusrat Jahan) का फैशन फैंस के बीच चर्चा में रहता है. इंडियन हो या वेस्टर्न हर लुक में नुसरत जहां का अंदाज काफी खूबसूरत लगता है. लेकिन अब मां बनने के बाद नुसरत जहां का नया अंदाज सामने आया है, जिसमें वह बेहद खूबसूरत लग रही थीं. आइए आपको दिखाते हैं नुसरत जहां (Nusrat Jahan Looks) के लुक्स की झलक…

साड़ी लुक की शेयर की फोटो

 

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हाल ही में बेटे को जन्म देने वाली पर्सनल लाइफ को लेकर नुसरत जहां सुर्खियों में हैं. इसी बीच नुसरत जहां ने अपनी साड़ी अंदाज फैंस के साथ शेयर किया है. दरअसल, नुसरत जहां ने अपने औफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट पर कुछ फोटोज शेयर की हैं, जिसमें वह साड़ी पहने नजर आ रही हैं. वहीं फैंस उनके इस लुक की तारीफें कर रहे हैं.

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लुक था खास

 

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दरअसल, नुसरत जहां ने हरे रंग की साड़ी कैरी की थी, जिस पर सीक्वेंस का काम किया गया था, जो बेहद खूबसूरत लग रहा था. वहीं इस लुक के साथ हैवी एंब्रॉइडरी ब्लाउज और हरी चूड़ियां, हैवी ईयररिंग्स कैरी की थी. इसके साथ खूबसूरत मेकअप नुसरत जहां के लुक्स पर चार चांद लगा रहा था. वहीं फैंस उनके फिटनेस और फैशन की तारीफ कमेंट्स में करते नजर आ रहे हैं.

इंडियन लुक से जीतती हैं फैंस का दिल

 

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नुसरत जहां की फिटनेस और फैशन दोनों ही फैंस को पसंद करते हैं. साड़ी से लेकर वेस्टर्न अंदाज देखने लायक होता है, जिसे सोशलमीडिया पर वह शेयर करती रहती हैं. इस लुक को देखकर फैंस जहां तारीफें करते हैं तो वहीं उनके फैशन टिप्स को कैरी भी करती हैं.

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लोकतंत्र और धर्म

धर्म और संस्कृति के नाम पर जो शोषण सदियों से औरतों का हुआ है वह जनतंत्र या लोकतंत्र के आने के बाद ही रुका था पर अब फिर षड्यंत्रकारी धर्म के दुकानदार अपनी विशिष्ट अलग प्राचीन संस्कृति के नाम पर पुरातनी सोच फिर शोप रहे हैं जिस में औरतें पहली शिकार होती है. अफगानिस्तान में तालिबानी शासन में तो यह साफ ही है. पर भारत में भी अनवरत यत्र, हवन, प्रवचनों, तीर्थ यात्राओं, पूजाओं, श्री, आरतियों, धाॢमक त्यौहारों के जरिए लोकतंत्र की दी गई स्वतंत्रता को जमकर छीना जा रहा है. अमेरिका भी आज बख्शा नहीं जा रहा जहां चर्चा की जमकर वकालत की वजह गर्भधत पर नियंत्रण लगाया जा रहा है जो असल में औरत के सेक्स सुख का नियंत्रण है और जो औरत को केवल बच्चे पैदा करने की मशीन बनाता है, एक कर्मठ नागरिक नहीं.

कल्चरल रिवाइवलिज्म के नाम पर भारत में देशी पोशाक, देशी त्यौहार, जाति में विवाह, कुंडली, मंगल देव, वास्तु, आरक्षण के खिलाफ आवाज उठाई जा रही है जो धर्म के चुंगल से निकालने वाले लोकतंत्र को हर कमजोर कर रही है और मंदिरमसजिद गुरुद्वारे धर्म को मजबूर कर रही हैं. इन सब धर्म की दुकानों में औरतों को पल्ले की कमाई तो चढ़ानी ही होती है उन्हें हर बार अपनी लोकतांत्रिक संपत्ति का हिस्सा भी धर्म के दुकानदार को देकर अपना पड़ता है. यह चाहे दिखवा नहीं है क्योंकि ये सारे धर्म की दुकानें पुरुषों द्वारा अपने बनाए नियमों और तौरतरीकों से चलती है और इस में मुख्य जना जो पूजा जाता है. वह या तो पुरुष होता है या हिंदू धर्म किसी पुरुष की संतान या पत्नी होने के कारण पूजा जाता है. भाभी औरत का वजूद नहीं रहता और यह मतपेटियों तक पहुंचता है.

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लोकतंत्र सिर्फ वोट देने का अधिकार नहीं है. लोकतंत्र का अर्थ है सरकार और समाज को चलाने का पुरुष के बराबर का सा अधिकार. इस देश में इंदिरा गांधी, जयललिता और ममता बैनर्जी जैसी नेताओं के बावजूद देश का लोकतंत्र पुरुषों को गुलाम रहा है और धर्म के आवरण में फिर उसी रास्ते पर हर रोज बढ़ रहा है.

नरेंद्र मोदी की सरकार में औरतों की उपस्थिति न के बराबर है. 2014 में सुषमा स्वराज ने प्रधानमंत्री पर ये चाह रखी थी तो उन्हें न चुने जाने के बाद उन को विदेश मंत्री की जगह वीजा मंत्री बना कर दर्शा दिया गया कि औरतों की कोई जगह नहीं है. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन अपने हर वाक्य में जय श्री राम नहीं जय नरेंद्र मोदी बोलती हैं ताकि उन की गद्दी बची रहे. यह एक पढ़ीलिखी, सुघड़, सुंदर, स्मार्ट और हो सकता है कमाऊ पत्नी की तरह जो हर बात में उन से पूछ कर बताऊंगी का उत्तर देती हैं. लोकतंत्र का आखिरी अर्थ है कि हर औरत चाहे दफ्तर में हो, राजनीति में हो, स्कूल में हो या घर में आप फैसले खुद ले सकें.

लोकतंत्र का लाभ औरतों को मिले इस की लंबी लड़ाई स्त्री और पुरुष विचारकों ने 18वीं व 19वीं शताब्दी में लड़ी पर 20वीं के अंत में व 21वीं के प्रारंभ की शताब्दी में यह लड़ाई कमजोर हो गई है. आज अमेरिका की औरतें गर्भपात केंद्रों पर धरने दे रही हैं और भारत की कर्मठ आजाद गुजराती औरतें अपना सकें. पुरुष गुरुओं के नव रही हैं.

लोकतंत्र का अर्थ आॢथक आजादी भी है जो शून्य होती जा रही है. हर उस औरत की महिमा गाई जाती है जिस ने ऊंचा स्थान पाया हो पर यह भी बता दिया जाता है कि यह उस के पिता या पत्नी के कारण मिला है. जिन महिला अधिकारियों के खिलाफ  आजकल कुछ आॢथक अपराध के मामले चल रहे हैं उन की परतें खोलने पर साफ दिख रहा है कि असल बागडोर तो पतियों के हाथों में ही थी.

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लोकतंत्र की भावना को कुचलने में धर्म का ही बड़ा स्थान है क्योंकि पूंजीवाद तो औरतों को बड़ा ग्राहक मानता है. इज्जत देता है और इसलिए लोकतंत्र की रक्षा करता है. धर्म को वेवकूद औरतें चाहिए जिन्हें हांका जा सके और वे अपने एजेंट धरधर भेजते है. लोकतंत्र का कोई एजेंट नहीं है, लोकतंत्र को छलनी करने के सैनिकों की पूरी फौज है. कब तक बचेगा लोकतंत्र और कब तक आजाद रहेंगी औरतें, देखने की बात है. अभी तो क्षितिज पर अंधियारे बादल दिख रहे हैं.

जानलेवा रोग पत्नी वियोग

प्यार वाकई आदमी को अंधा बना देता है. इस के चलते आदमी इतना भावुक, भयभीत और संवेदनशील हो जाता है कि फिर व्यावहारिकता और दुनियादारी नहीं सीख पाता. यही ऋषीश के साथ हुआ, जिस ने नेहा से लव मैरिज की थी. प्रेमिका को पत्नी के रूप में पा कर वह बहत खुश था. पेशे से फुटबाल कोच और ट्रेनर ऋषीश की खुशी उस वक्त और दोगुनी हो गई जब करीब डेढ़ साल पहले नेहा ने प्यारी सी गुडि़या को जन्म दिया. भोपाल के कोलार इलाके में स्थित मध्य भारत योद्धाज क्लब को हर कोई जानता है, जिस का कर्ताधर्ता ऋषीश था. हंसमुख और जिंदादिल इस खिलाड़ी से एक बार जो मिल लेता था वह उस का हो कर रह जाता था. मगर कोई नहीं जानता था कि ऊपर से खुश रहने का

नाटक करने वाला यह शख्स कुछ समय से अंदर ही अंदर बेहद घुट रहा था. ऋषीश की जिंदगी में कुछ ऐसा हो गया जिस की उम्मीद शायद खुद उसे भी न थी. गत 3 जुलाई को 32 साल के ऋषीश दुबे ने जहर खा कर आत्महत्या कर ली तो जिस ने भी सुना वह खुदकुशी की वजह जान कर हैरान रह गया. ऋषीश ने पत्नी वियोग में जान दे दी. उस के मातापिता दोनों बैंक कर्मचारी हैं. उस शाम जब वे घर लौटे तो ऋषीश घर में बेहोश पड़ा था.

घबराए मातापिता तुरंत बेटे को नजदीक के अस्पताल ले गए जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. मौत संदिग्ध थी इसलिए पुलिस को बुलाया गया तो पता चला कि ऋषीश ने जहर खाया था. उस की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. मगर मरने से पहले ऋषीश ने अपनी यादों का जो पोस्टमार्टम कलम से कागज पर किया वह शायद ही कभी मरे, क्योंकि वह जिस्म नहीं एहसास है. तो मैं नहीं रहूंगा

परिवार, समाज और दुनिया से विद्रोह कर नेहा से शादी करने वाला ऋषीश यों ही 3 जुलाई को हिम्मत नहीं हार गया था. हिम्मत हारने की वजह थी कभी उस की हिम्मत रही नेहा जो कुछ महीनों से उस का साथ छोड़ मायके रह रही थी. पति से विवाद होने पर पत्नी का मायके जा कर रहने लगना कोई नई बात नहीं, बल्कि एक परंपरा सी हो चली है, जिस का निर्वाह नेहा ने भी किया और जातेजाते नन्हीं बेटी को भी साथ ले गई, जिस में ऋषीश की सांसें बसती थीं.

2 महीने पहले किसी बात पर दोनों में विवाद हुआ था. यह भी कोई हैरत की बात नहीं थी, लेकिन नेहा ने ऋषीश की शिकायत थाने में कर दी. अपने सुसाइड नोट में ऋषीश ने नेहा को संबोधित करते हुए लिखा कि तुम साथ छोड़ती

हो तो मैं नहीं रहूंगा और मैं साथ छोड़ूंगा तो तुम नहीं रहोगी. 4 पेज का लंबाचौड़ा सुसाइड नोट भावुकता और विरह से भरा है, जिस का सार इन्हीं 2 पंक्तियों में समाया हुआ है. दोनों ने एकदूसरे से वादा किया था कि कुछ भी हो जाए कभी एकदूसरे के बिना नहीं रहेंगे यानी बात मिल के न होंगे जुदा आ वादा कर लें जैसी थी.

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वादा नेहा ने तोड़ा और इसे पुलिस थाने जा कर सार्वजनिक भी कर दिया तो ऋषीश का दिल टूटना स्वाभाविक बात थी. यह वही पत्नी थी जो कभी उस के दिल का चैन और रातों की नींद हुआ करती थी. एक जरा सी खटपट क्या हुई कि वह सब भूल गई. अलगाव से आत्महत्या तक

तुम ने मुझे धोखा दिया धन्यवाद… पत्नी को शादी के पहले के वादे याद दिलाने वाला ऋषीश क्या वाकई पत्नी को इतना चाहता था कि बिना उस के जिंदा नहीं रह सकता था? इस सवाल का जवाब अच्छेअच्छे दार्शनिक और मनोविज्ञानी भी शायद ही दे पाएं. ऋषीश की आत्महत्या की वजह का एक पहलू जो साफ दिखता है वह यह है कि उसे पत्नी से यह उम्मीद नहीं थी. मगर ऐसा तो कई पतियों के साथ होता है कि पत्नी किसी विवाद या झगड़े के चलते मायके जा कर रहने लगती है. लेकिन सभी पति तो पत्नी वियोग में आत्महत्या नहीं कर लेते?

तो क्या आत्महत्या कर लेने वाले पति पत्नी को इतना चाहते हैं कि उस की जुदाई बरदाश्त नहीं कर पाते? इस सवाल के जवाब हां में कम न में ज्यादा मिलते हैं, जिन की अपनी व्यक्तिगत पारिवारिक और सामाजिक वजहें हैं जो अब बढ़ रही हैं, इसलिए पत्नी वियोग के चलते पतियों द्वारा आत्महत्या करने के मामले भी बढ़ रहे हैं. सामाजिक नजरिए से देखें तो वक्त बहुत बदला है. कभी पत्नी तमाम ज्यादतियां बरदाश्त करती थी, लेकिन मायके वालों की यह नसीहत याद रखती थी कि जिस घर में डोली में बैठ कर जा रही हो वहां से अर्थी में ही निकलना.

इस नसीहत के कई माने थे, जिन में पहला अहम यह था कि बिना पति और ससुराल के औरत की जिंदगी दो कौड़ी की भी नहीं रह जाती. दूसरी वजह आर्थिक थी. समाज और रिश्तेदारी में उन महिलाओं को अच्छी निगाहों से नहीं देखा जाता था जो पति को छोड़ देती थीं या जिन्हें पति त्याग देता था. अब हालत उलट है. अब उन पतियों को अच्छी निगाहों से नहीं देखा जाता जिन की पत्नियां उन्हें छोड़ कर चली जाती हैं. पति को छोड़ना आम बात

पत्नी वियोग पहले की तरह सहज रूप से ली जाने वाली बात नहीं रह गई कि गई तो जाने दो दूसरी शादी कर लेंगे. ऐसा अब नहीं होता है, तो यह भी कहा जा सकता है कि हम एक सभ्य, अनुशासित और रिश्तों के समर्पित समाज में रहते हैं. इसी सभ्य समाज का एक उसूल यह भी है कि पत्नी अगर पति को छोड़ कर चली जाए तो पति का रहना दूभर हो जाता है. उसे कठघरे में खड़ा कर तमाम ऐसे सवाल पूछे जाते हैं कि वह घबरा उठता है. ऐसे ही कुछ कमैंट्स इस तरह हैं:

क्या उसे संतुष्ट नहीं रख पा रहे थे? क्या उस का कहीं और अफेयर था? क्या घर वाले उसे परेशान करते थे? क्या उस में कोई खोट आ गई थी? क्या यार एक औरत नहीं संभाल पाए, कैसे मर्द हो? आजकल औरतें आजादी और हालात का फायदा इसी तरह उठाती हैं. जाने दो चली गई तो भूल कर भी झुक कर बात मत करना. अब फंसो बेटा पुलिस, अदालत के चक्करों में. सुना है उस ने रिपोर्ट लिखा दी? अब कैसे कटती हैं रातें? कोई और इंतजाम हो गया क्या? कोई भी पति इन और ऐसे और दर्जनों बेहूदे सवालों से बच नहीं सकता. खासतौर से उस वक्त जब पत्नी किसी भी शर्त पर वापस आने को तैयार न हो.

क्या करे बेचारा पत्नी के वापस न आने की स्थिति में पति के पास करने के नाम पर कोई खास विकल्प नहीं रह जाते. पहला रास्ता कानून से हो कर जाता है जिस पर कोई पढ़ालिखा समझदार तो दूर अनपढ़, गंवार पति भी नहीं चलना चाहता. इस रास्ते की दुश्वारियों को झेल पाना हर किसी के बस की बात नहीं होती. पत्नी को वापस लाने का कानून वजूद में है, लेकिन वह वैसा ही है जैसे दूसरे कानून हैं यानी वे होते तो हैं, लेकिन उन पर अमल करना आसान नहीं होता.

दूसरा रास्ता पत्नी को भूल जाने का है. ज्यादातर पति इसे अपनाते भी हैं, लेकिन इस विवशता और शर्त के साथ कि जब तक रिश्ता पूरी तरह यानी कानूनी रूप से टूट न जाए तब तक भजनमाला जपते रहो यानी तमाम सुखों से वंचित रहो.

तीसरा व चौथा रास्ता भी है, लेकिन वे भी कारगर नहीं. असल दिक्कत उन पतियों को होती है जो वाकई अपनी पत्नी से प्यार करते हैं. ये रास्ता नहीं ढूंढ़ते, बल्कि सीधे मंजिल पर आ पहुंचते हैं यानी खुदकुशी कर लेते हैं जैसे भोपाल के ऋषीश ने की और जैसे राजस्थान के उदयपुर के विनोद मीणा ने की थी. आत्महत्या और प्रतिशोध भी

गत 14 जुलाई को उदयपुर के गोवर्धन विलास थाना इलाके में रहने वाले विनोद का भी किसी बात पर पत्नी से विवाद हुआ तो वह भी मायके चली गई. 5 दिन विनोद ने पत्नी का इंतजार किया पर वह नहीं आई तो कुछ इस तरह आत्महत्या की कि सुनने वालों की रूह कांप गई. कोल माइंस में काम करने वाले विनोद ने खुद को डैटोनेटर बांध लिया यानी मानव बम बन गया और खुद में आग लगा ली. विनोद के शरीर के इतने चिथड़े उड़े कि उस का पोस्टमार्टम करना मुश्किल हो गया.

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विनोद के उदाहरण में प्यार कम दबाव ज्यादा है, जिस का बदला उस ने खुद से लिया. मुमकिन है विनोद को भी दूसरे आत्महत्या करने वाले पतियों की तरह पुरुषोचित अहम पर चोट लगी हो या स्वाभिमान आहत हुआ हो अथवा वह भी दुनियाजहान के संभावित सवालों का सामना करने से डर रहा हो. जो भी हो, लेकिन पत्नी वियोग में इतने घातक और हिंसक तरीके से आत्महत्या कर लेने का यह मामला अपवाद था, जिस में ऋषीश की तरह काव्य या भावुकता नहीं थी. थी तो एक खीज और बौखलाहट जो हर उस पति में होती है, जिस की पत्नी उसे घोषित तौर पर छोड़ जाती है. क्या पति इतने पजैसिव हो सकते हैं कि पत्नी वियोग में जान ही दे दें? इस का सवाल रोजाना ऐसे मामले देखने के चलते न में तो कतई नहीं दिया जा सकता.

तो फिर जाने क्यों देते हैं पत्नी वियोग में आत्महत्या मध्य प्रदेश के सागर जिले के 21 वर्षीय ब्रजलाल ने भी की थी. लेकिन यहां वजह जुदा थी. ब्रजलाल की शादी को अभी 3 महीने ही हुए थे कि उस की पत्नी अपने प्रेमी के साथ भाग गई.

ब्रजलाल के सामने चिंता या तनाव यह था कि अब किस मुंह से वह रिश्तेदारों और समाज के चुभते सवालों का सामना करेगा. हालांकि चाहता तो कर भी सकता था, लेकिन 21 साल के नौजवान से ऐसी उम्मीद लगाना व्यर्थ है कि वह दुनिया से लड़ पता. यहां वजह वियोग नहीं, बल्कि कहीं नाक थी. ब्रजलाल के पास मुकम्मल वक्त और मौका था कि वह अपनी पत्नी की करतूत और उस के मायके वालों की गलती लोगों को बताता और फिर तलाक ले कर दूसरी शादी कर लेता. यह भी लंबी प्रक्रिया होती, लेकिन इस के लिए उस के पास समय तो था पर हिम्मत, सब्र और समझदारी नहीं थी.

समय उन के पास नहीं होता जिन की पत्नियां कुछ या कईर् साल प्यार से गुजार चुकी होती हैं, लेकिन फिर एकाएक छोड़ कर चली जाती हैं, ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जो पति बगैर पत्नियों के नहीं रह सकते वे आखिर उन्हें जाने ही क्यों देते हैं? यह एक दुविधाभरा सवाल है, जिस में लगता नहीं कि पत्नी को चाहने वाला कोई पति जानबूझ कर उसे भगाता या जाने देता हो. तूतू, मैंमैं आम है और दांपत्य का हिस्सा भी है, लेकिन यहां आ कर पतियों की वकालत करने को मजबूर होना ही पड़ता है कि पत्नियां अपनी मनमानी के चलते जाती हैं. वे अपनी शर्तों पर जीने की जिद करने लगें तो पति बेचारे क्या करें सिवा इस के कि पहले उन्हें जाता हुए देखते रहें, फिर विरह के गीत गाएं और फिर पत्नी को बुलाएं. इस पर भी वे न आएं तो उन की जुदाई में खुदकुशी कर लें.

क्या कुछ पत्नियां पति के प्यार को हथियार की तरह इस्तेमाल करती हैं? इस सवाल का जवाब भी साफ है कि हां करती हैं, जिस की परिणीति कभीकभी पति की आत्महत्या की शक्ल में सामने आती है. कोई पत्नी इस जिद पर अड़ जाए कि शादी के 5 साल हो गए अब मांबाप या परिवार से अलग रहने लगें तो पति का झल्लाना स्वाभाविक है कि जब सबकुछ ठीकठाक चल रहा है तो अलग क्यों होएं? इस पर पत्नी जिद करते यह शर्त थोप दे कि ठीक है अगर मांबाप से अलग नहीं हो सकते तो मैं ही चली जाती हूं. जब अक्ल ठिकाने आ जाए तो लेने आ जाना. और वह सचमुच सूटकेस उठा कर बच्चों सहित या बिना बच्चों के चली भी जाती है. पीछे छोड़ जाती है पति के लिए एक दुविधा जिस का कोई अंत या इलाज नहीं होता.

ऐसी और कई वजहें होती हैं, जिन के चलते पत्नियां आगापीछा कुछ नहीं सोच पातीं सिवा इस के कि चार दिन अकेला रहेगा तो पत्नी की कीमत समझ आ जाएगी. ये पत्नियां यह नहीं सोचतीं कि उन की कीमत तो पहले से ही पति की जिंदगी में है जिसे यों वसूला जाना घातक सिद्घ हो सकता है. इस पर भी पति न माने तो पुलिस थाने और कोर्टकचहरी की नौबत लाना पति को आत्महत्या के लिए उकसाने जैसी ही बात है.

बचें दोनों पत्नी को हाथोंहाथ लेने को तैयार बैठे मायके वाले भी बात की तह तक नहीं पहुंच पाते. बेटी या बहन जो कह देती है उसे ही सच मान बैठते हैं और उस का साथ भी यह कहते हुए देते हैं कि अच्छा यह बात है, तो हम भी अभी मरे नहीं हैं.

मरता तो वह पति है जो ससुराल वालों से यह झूठी उम्मीद लगाए रहता है कि वे बेटी की गलती को शह नहीं देंगे, बल्कि उसे समझाएंगे कि वह अपने घर जा कर रहे. वहां पति और उस के घर वालों को उस की जरूरत है. ऐसी कहासुनी तो चलती रहती है. इस की वजह से घर छोड़ आना बुद्धिमानी की बात नहीं. मगर जब ऐसा होता नहीं तो पति की रहीसही उम्मीदें भी टूट जाती हैं. भावुक किस्म के पति जो वाकई पत्नी के बगैर नहीं रह सकते उन्हें अपनी जिंदगी बेकार लगने लगती है और फिर वे जल्द ही सब का दामन छोड़ देते हैं, इसलिए थोड़े गलत तो वे भी कहे जाएंगे. पत्नी के चले जाने

पर पति थोड़ी सब्र रखें तो उन की जिंदगी बच सकती है. कई मामलों में देखा गया है कि पति अहं, स्वाभिमान या जिद को छोड़ पत्नी के मायके जा कर उस से घर चलने के लिए मिन्नतें करता है तो पत्नी के भाव और बढ़ जाते हैं और वह वहीं उस का तिरस्कार या अपमान कर देती है. ऐसी हालत में अच्छेअच्छे का दिमागी संतुलन बिगड़ जाता है तो फिर ऋषीश जैसों की गलती या हैसियत क्या जो प्यार के हाथों मजबूर होते हैं.

क्या करे पत्नी पत्नियों को चाहिए कि समस्या वाकई अगर कोईर् है तो उसे पति के साथ रहते ही सुलझाने की कोशिश करें, वजह पतिपत्नी दोनों वाकई एक गाड़ी के 2 पहिए होते हैं, जिन्हें घर के बाहर की लड़ाई संयुक्तरूप से लड़नी होती है. पति अगर आर्थिक, भावनात्मक या व्यक्तिगत रूप से पत्नी पर ज्यादा निर्भर है या असामान्य रूप से संवेदनशील है तो जिम्मेदारी पत्नी की बनती है कि वह उसे छोड़ कर न जाए.

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क्या किसी ऐसी जिद की सराहना की जानी चाहिए जिस के चलते पत्नी खुद अपनी ही वजह से विधवा हो रही हो. कोई भी हां नहीं कहेगा. मातापिता की भूमिका पति के घर वालों खासतौर से मांबाप को भी चाहिए कि वे ऐसे वक्त में बेटे का खास खयाल रखें बल्कि वह भावुक हो तो नजर रखें और बहू न आ रही हो तो बेटे को समझाएं कि इस में कुछ खास गलत नहीं है और न ही प्रतिष्ठा धूमिल हो रही है और हो भी रही हो तो उस की कीमत बेटे की खुशी के आगे कुछ नहीं. इस तरह की बातें उसे हिम्मत देने वाली साबित होंगी. अगर इतना भी नहीं कर सकते तो उस पर ताने तो बिलकुल न कसें. पतियों को छोड़ कर चली जाने वाली पत्नियां और दुविधा में पड़े विरह में जी रहे पतियों को फिल्म ‘आप की कसम’ का यह गाना जरूर गुनगुना लेना चाहिए- ‘जिंदगी के सफर में गुजर जाते हैं जो मुकाम वे फिर नहीं आते…’

पत्नी विरह प्रधान इस फिल्म में नायक बने राजेश खन्ना ने आत्महत्या तो नहीं की थी पर उस की जिंदगी किस तरह मौत से भी बदतर हो गई थी, यह फिल्म में खूबसूरती से दिखाया गया है. इसलिए पतियों को भी इस गाने का यह अंतरा याद रखना चाहिए- ‘कल तड़पना पड़े याद में जिन की, रोक लो उन को रूठ कर जाने न दो…’

स्मार्ट कुकवेयर बनाएं कुकिंग आसान

आजकल जौब के कारण घर से दूर रहने की वजह से महिला हो या पुरुष किसी के पास इतना समय नहीं होता कि वह किचन में घंटों खड़े रह कर खाना बनाए, साथ ही आज परिवार का हर सदस्य हैल्थ कौंशस हो गया है. ऐसे में जरूरत है टाइम सेव करते हुए हैल्दी डिशेज बनाने की. इस के लिए पेश है किचन कुकवेयर आइटम्स की रेंज.

इंडक्शन

देखने में आकर्षक होने के साथसाथ इस में खाना बनाना काफी आसान होता है, क्योंकि इस में किचन में ही खाना बनाने जैसे झंझटों का सामना जो नहीं करना पड़ता. जहां मन करा वहीं खाना बनाने बैठ गए. इस से समय की भी काफी बचत होती है. इंडक्शन पर इस्तेमाल होने वाले बरतन बिलकुल इंडक्शन से लगे होने के कारण जल्दी खाना पकाने में सक्षम होते हैं. इन में दाल, सब्जी, चावल आदि चीजें तो मिनटों में तैयार हो जाती हैं यानी अब मेहमानों के आने पर नो टैंशन.

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सैंडविच टोस्टर

गैस के मुकाबले टोस्टर में सैंडविच बनाना आसान ही नहीं, बल्कि स्वाद के लिहाज से भी काफी बेहतर होता है, क्योंकि इस में ज्यादा क्रिस्पीनैस जो होती है और बारबार पलटने के झंझट से भी छुटकारा मिलता है. बच्चे हों या बड़े सभी इस में बने सैंडविच बड़े चाव से खाते हैं.

ब्लैक ऐल्यूमिनियम तवा

डोसा बनाना हो या फिर चीला, आप नौर्मल तवे पर बनाने लगीं तो ज्यादा समय लगने के साथसाथ इन के खराब होेने का भी डर बना रहता है. ऐसे में ब्लैक ऐल्यूमिनियम तवे पर ये चीजें आराम से बनाई जा सकती हैं और इस तवे पर इन्हें बनाने के लिए तेल भी न के बराबर लगता है यानी ये चीजें पूरी तरह सेहतमंद भी होंगी.

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बेबी कड़ाही इंडक्शन

बेबी कड़ाही इंडक्शन का आप मल्टीपर्पज यूज कर सकते हैं यानी दालसब्जी बनाने के अलावा यह तड़का लगाने, मैगी बनाने आदि के भी काम आती है और वजन में हलकी होने के कारण इसे हैंडल करना भी काफी आसान होता है, साथ ही छोटी होने के कारण आप को इसे कैरी करने में भी कोई दिक्कत नहीं होगी.

यकीन मानिए आप इन सभी कुकवेयर आइटम्स को प्रयोग कर कम समय में कुकिंग आराम से कर सकती हैं और इन में बना खाना सेहतमंद भी होगा.

रात में सुकून भरी नींद चाहिए, तो तुरंत अपनाएं ये 4 टिप्स

लेखिका- दीप्ति गुप्ता

दिनभर की थकान के बाद हर कोई सोचता है कि रात में अच्छी नींद आ जाए. लेकिन कुछ लोगों को चैन और सुकून की नींद नसीब नहीं होती. तमाम कोशिशों के बाद भी रात में घंटों बिस्तर पर करवटे बदलते रहते हैं. एक दो दिन ऐसा होना सामान्य है. लेकिन लगातार आपके साथ ये हालात बन रहे हैं, तो यह चिंता की विषय है. क्योंकि नींद की कमी आपको थका हुआ और सुस्त बना देती है. इतना ही नहीं अगले दिन आप ऊर्जा में कमी का अनुभव भी कर सकते हैं. कई रिसर्च बताती  हैं कि खराब नींद का असर आपके हार्मोन और मास्तिष्क के काम करने पर पड़ता है. तो अगर आप भी उन लोगों में से हैं, जिनकी स्लीपिंग साइकिल डिस्टर्ब हो रही है या नींद की कमी के कारण लो एनर्जी जैसा फील कर रहे हैं, तो यहां कुछ तरीके हैं, जिन्हें अपनाकर आप  रात में स्वभाविक रूप से बेहतर नींद ले पाएंगे.

1. सही रूटीन बनाएं-

यदि आपको स्वभाविक रूप से नींद नहीं आती, तो इसका मतलब है कि आपका स्लीपिंग रूटीन गड़बड़ है. बता दें कि आपकी बायोलॉजिकल क्लॉक शरीर की सभी चीजों को निर्धारित करती है. इसलिए आपको सोने का एक समय फिक्स करना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि जब एक बार आप अपने शरीर को ये बता देते हैं कि आप इसे किस समय आराम करने देंगे , तो यह आपके मास्तिष्क को रिलेक्स करने और आपको सोने में मदद करने के लिए उन संकेतों को किक करना शुरू कर देता है. इसलिए अगर आपको घंटों तक बिस्तर पर लेटे रहने के बाद भी नींद न आए, तो सबसे पहले साने और जागने का समय फिक्स करें.

2. दिनभर एक्टिव रहें-

जब आप पूरे दिन एक्टिव रहते हैं, तो शरीर थक जाता है और अंत में इसे आराम की जरूरत होती है. कई लोग एक्टिव रहने के लिए व्यायाम भी करते हैं. व्यायाम करने से शरीर एंडोर्फिन हार्मोन रिलीज करता है, जिससे आपको बहुत जल्दी नींद नहीं आती और आप जागे हुए रहते हैं. इसलिए वर्कआउट करते समय एक बात का ध्यान रखें कि इसे सोने के दो घण्टे के भीतर बिल्कुल न करें. यदि आप रोजाना व्यायाम नहीं करते हैं तो आप तेज चलने या एरोबिक  करने की कोशिश करें. इससे आपका सोने का समय बढ़ जाएगा और आपको गहरी नींद भी आ जाएगी.

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3. गर्म पानी से नहाएं-

शायद आप न जानते हों, लेकिन शाम ढलने के बाद सोने से कुछ घण्टे पहले आपके शरीर का प्राकृतिक तापमान कम हो जाता है और सुबह 5 बजे के करीब फिर से ज्यादा हो जाता है. इसलिए सोने से दो घ्ंाटे पहले गर्म पानी से नहाएं. ऐसा करने से आपके शरीर का तापमान बढ़ जाएगा. इसके तुंरत बाद तेजी से ठंडा होने की अवधि आपके शरीर को तुरंत आराम देती है. जब आप ऐसा करते हैं, तो शरीर के तापमान में गर्म से लेकर ठंडी तक की तेज गिरावट से नींद आने लगती है. इसलिए अगर आपको सोने में परेशानी हो रही है तो साने से 90 मिनट पहले गर्म पानी से नहाने की कोशिश करें.

4. चाय पीएं-

वैसे तो कहा जाता है कि चाय पीने से नींद उड़ जाती है, लेकिन जिन लोगों को नींद की समस्या है, डॉक्टर्स उन्हें सोने से पहले कैफीन फ्री चाय पीने की सलाह देते हैं. ऐसे में कैमोमाइल टी बढ़िया विकल्प है. यह मास्तिष्क में रिसेप्टर्स के साथ बातचीत करने के लिए जानी जाती है. इसके नियमित सेवन से आपको स्वस्थ और लगातार नींद की दिनचर्या बनाने में बहुत मदद मिलती है.

नींद आपके स्वास्थ्य में अहम भूमिका निभाती  है. अपर्याप्त नींद बच्चों और वयस्कों में मोटापे के जोखिम को बढ़ाती है. साथ ही इससे हृदय रोग और मधुमेह का खतरा भी बढ़ता है. ऐसे में यहां बताए गए टिप्स आपके लिए मददगार साबित हो सकते हैं.

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मेरी पत्नी ने झूठे दहेज के इल्जाम में फंसा दिया, मैं क्या करुं?

सवाल

मैं विवाहित पुरुष हूं. मेरा विवाह हुए 4 वर्ष हो गए हैं. शादी के बाद से ही पत्नी का मेरे प्रति व्यवहार क्रूरतापूर्ण था. वह बात बात पर मुझे परेशान करती थी. हर समय कोई न कोई डिमांड करती और कहती, मांग पूरी करो वरना तुम्हें व तुम्हारे परिवार को दहेज विरोधी कानून में फंसवा दूंगी. बातबात पर पुलिस स्टेशन में झूठी शिकायत कर के परेशान करना उस की दिनचर्या बनने लगी. परेशान हो कर मैं ने तलाक का केस फाइल कर दिया तो उस ने सचमुच में हमें झूठे दहेज कानून में फंसा दिया. मुझे समझ नहीं आ रहा, क्या करें, इस मुसीबत से कैसे निकलूं? सलाह दें.

जवाब

दरअसल, 498ए दहेज प्रताड़ना कानून महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाया गया था लेकिन आज यह कानून, कवच बनने के बजाय हथियार बन गया है जो कानूनी आातंक का रूप ले रहा है. आप की पत्नी की तरह अनेक पत्नियां इस कानून का दुरुपयोग पतिपत्नी के बीच के अहं, पारिवारिक विवाद, अलग रहने की इच्छा, संपत्ति में हक की चाहत आदि के लिए करती हैं. झूठे मुकदमे दर्ज करवाने के मामले अब बहुत सुनने में आ रहे हैं जो न केवल निराधार होते हैं बल्कि उन के पीछे गलत इरादे होते हैं. ऐसे मुकदमे दर्ज कराने का मकसद पैसा कमाना भी होता है. लेकिन अगर आप सही हैं तो डरे नहीं और पत्नी के खिलाफ सुबूत इकट्ठा करें. वैसे भी,

2 जुलाई, 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने दहेज से जुड़े श्वेता किरन के मामले में निर्णय सुनाते हुए कहा है कि 498ए कानून के अंतर्गत की गई शिकायत में कोई भी गिरफ्तारी तब तक नहीं हो सकती जब तक कोई 2 सुबूत या गवाह उपलब्ध न हों. ऐसा निर्णय इसलिए दिया गया ताकि असंतुष्ट व लालची पत्नियां इस कानून का दुरुपयोग न कर सकें और न ही पति को ब्लैकमेल कर सकें.

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