Winter Special: ईवनिंग स्नैक्स में हरे मटर से बनाएं ये डिशेज

आहार विशेषज्ञों के अनुसार लंच और डिनर में बहुत अधिक गेप नहीं होना चाहिए क्योंकि इस बीच अधिक गेप होने से डिनर तक बहुत तेज भूख लग आती है और हम डिनर का बहुत अधिक मात्रा में सेवन कर लेते हैं….जब कि डिनर बहुत हल्का होना चाहिए ताकि सोने से पूर्व उसे हमारा आहार तंत्र सुगमता से पचा ले. इसलिए शाम का नाश्ता बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि शाम में कुछ हल्का फुल्का खा लेने से हमारी भूख शांत हो जाती है और हम डिनर संतुलित मात्रा में करते हैं जिससे डिनर अच्छी तरह पच जाता है और नाश्ते के समय अच्छी भूख लगती है. आज हम आपको कुछ ईवनिंग स्नैक्स की आसान रेसिपी बता रहे हैं-

-स्टफ्ड मटर पनीर इडली

कितने लोगों के लिए              6

बनने में लगने वाला समय        30 मिनट

मील टाइप                            वेज

सामग्री (इडली के लिए )

सूजी(बारीक)                      1 कप

नमक                                  स्वादानुसार

ईनो फ्रूट साल्ट                     1 सैशे

दही                                    1 कप

तलने के लिए पर्याप्त मात्रा में तेल

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सामग्री ( भरावन के लिए)

ताजे या फ्रोजन मटर             1 कप

किसा पनीर                          1 कप

तेल                                     1 टीस्पून

जीरा                                   1/4 टीस्पून

हींग                                     चुटकी भर

बारीक कटा प्याज                1

कटी हरी मिर्च                       4

लहसुन, अदरक पेस्ट            1 टीस्पून

लाल मिर्च पाउडर                 1/2 टीस्पून

अमचूर पाउडर                     1/2 टीस्पून

गरम मसाला                        1/4 टीस्पून

कटा हरा धनिया                    1 टीस्पून

विधि

सूजी को दही में भिगोकर 15 मिनट के लिए रख दें. भरावन के लिए एक पैन में 1 टीस्पून तेल डालकर प्याज को सौते करके जीरा, अदरक लहसुन को भून लें. अब मटर,  नमक और 1 टीस्पून पानी डालकर 5 मिनट तक ढककर पकाएं. जब मटर गल जाए तो खोलकर 1 मिनट पकाकर पानी सुखाएं. अब मटर को मैशर से मैश करके सभी मसाले और किसा पनीर अच्छी तरह मिलाएं. हरा धनिया डालकर ठंडा होने दें.

ठंडा होने पर 1 टीस्पून मिश्रण को हथेली पर रखकर चपटा करके टिक्की जैसी तैयार कर लें.

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सूजी में आधा कप पानी, नमक और ईनो फ्रूट साल्ट डालकर अच्छी तरह मिलाएं. इडली मोल्ड को चिकना करके 1 चम्मच मिश्रण डालें, इसके ऊपर मटर पनीर की टिक्की रखकर ऊपर से पुनः 1 चम्मच मिश्रण डालकर मटर की टिक्की को पूरी तरह से कवर कर दें. इसी प्रकार सारे मोल्ड्स तैयार कर लें. अब इन्हें भाप में रखकर 10 मिनट तक पकाएं. खोलकर ठंडा होने दें. कढ़ाई में तेल को बहुत अच्छी तरह गर्म करें और ठंडी हुई इडली को सुनहरा होने तक तल लें. बीच से काटकर हरे धनिए की चटनी या टोमेटो सॉस के साथ सर्व करें.

-हरे मटर की घुघनी

कितने लोगों के लिए                4

बनने में लगने वाला समय         20 मिनट

मील टाइप                            वेज

सामग्री

उबले मटर के दाने             डेढ़ कप

उबले आलू                       2

बारीक कटे टमाटर             2

बारीक कटा प्याज              1

बारीक कटी हरी मिर्च            3

हींग                                    चुटकी भर

किसा अदरक                     1 टीस्पून

बारीक कटा लहसुन             4 कली

नमक                                 स्वादानुसार

अमचूर पाउडर                   1/2  टीस्पून

काली मिर्च पाउडर।             1/4 टीस्पून

तेल                                     1 टीस्पून

कटी हरी धनिया                    1 टीस्पून

नीबू का रस                          1 टीस्पून

विधि

आलू को छोटे टुकड़ों में काट लें. अब एक नॉनस्टिक पैन में तेल गरम करके प्याज, हींग, अदरक, लहसुन और हरी मिर्च को भून लें. अब कटे टमाटर,  आलू, मटर तथा सभी मसाले डाल दें. बिना ढके 5 मिनट तक चलाते हुए पकाएं. नीबू का रस और हरा धनिया डालकर सर्व करें.

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मेरी बीवी को कंसीव करने में दिक्कत आ रही हैं, कृपया कारण बताएं?

सवाल

मैं 35 साल का हूं और मेरी बीवी 33 साल की है. मेरी एक बेटी भी है, पर बीवी और बच्चे चाहती है. दिक्कत यह है कि अब वह पेट से नहीं हो पा रही है. मैं ने उसे महिला डाक्टर को भी दिखाया, पर सबकुछ ठीक है. फिर वह पेट से क्यों नहीं हो रही? इस बारे में आप मुझे खुल कर बताएं?

जवाब

जब बीवी में कोई कमी नहीं है, तो वह कभी न कभी जरूर दोबारा पेट से हो जाएगी. आप किसी और माहिर डाक्टर से खुद की भी जांच करा लें. आप के पास बेटी तो है ही. लिहाजा, ज्यादा परेशानी वाली बात नहीं है.

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एक दिन का बौयफ्रैंड

‘‘क्या तुम मेरे एक दिन के बौयफ्रैंड बनोगे?’’ उस लड़की के कहे ये शब्द मेरे कानों में गूंज रहे थे. मैं हक्काबक्का सा उस की तरफ देखने लगा. काली, लंबी जुल्फों और मुसकराते चेहरे के बीच चमकती उस की 2 आंखें मेरे दिल को धड़का गईं. एक अजनबी लड़की के मुंह से इस तरह का प्रस्ताव सुन कर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मुझ पर क्या बीत रही होगी.

मैं अच्छे घर का होनहार लड़का हूं. प्यार और शादी को ले कर मेरे विचार बिलकुल स्पष्ट हैं. बहुत पहले एक बार प्यार में पड़ा था पर हमारी लव स्टोरी अधिक दिनों तक नहीं चल सकी. लड़की बेवफा निकली. वह न सिर्फ मुझे, बल्कि दुनिया छोड़ कर गई और मैं अकेला रह गया.

लाख चाह कर भी मैं उसे भुला नहीं सका. सोच लिया था कि अब अरेंज्ड मैरिज करूंगा. घर वाले जिसे पसंद करेंगे, उसे ही अपना जीवनसाथी मान लूंगा.

अगले महीने मेरी सगाई है. लड़की को मैं ने देखा नहीं है पर घर वालों को वह बहुत पसंद आई है. फिलहाल मैं अपने मामा के घर छुट्टियां बिताने आया हूं. मेरे घर पहुंचते ही सगाई की तैयारियां शुरू हो जाएंगी.

‘‘बोलो न, क्या तुम मेरे साथ..,’’ उस ने फिर अपना सवाल दोहराया.

‘‘मैं तो आप को जानता भी नहीं, फिर कैसे…’’ में उलझन में था.

‘‘जानते नहीं तभी तो एक दिन के लिए बना रही हूं, हमेशा के लिए नहीं,’’ लड़की ने अपनी बड़ीबड़ी आंखों को नचाया. ‘‘दरअसल,

2-4 महीनों में मेरी शादी हो जाएगी. मेरे घर

वाले बहुत रूढि़वादी हैं. बौयफ्रैंड तो दूर कभी मुझे किसी लड़के से दोस्ती भी नहीं करने दी. मैं ने अपनी जिंदगी से समझौता कर लिया है. घर

वाले मेरे लिए जिसे ढूंढ़ेंगे उस से आंखें बंद कर शादी कर लूंगी. मगर मेरी सहेलियां कहती हैं कि शादी का मजा तो लव मैरिज में है, किसी को बौयफ्रैंड बना कर जिंदगी ऐंजौय करने में है. मेरी सभी सहेलियों के बौयफ्रैंड हैं. केवल मेरा ही कोई नहीं है.

‘‘यह भी सच है कि मैं बहुत संवेदनशील लड़की हूं. किसी से प्यार करूंगी तो बहुत गहराई से करूंगी. इसी वजह से इन मामलों में फंसने से डर लगता है. मैं जानती हूं कि मैं तुम्हें आजकल की लड़कियों जैसी बिलकुल नहीं लग रही होऊंगी. बट बिलीव मी, ऐसी ही हूं मैं. फिलहाल मुझे यह महसूस करना है कि बौयफ्रैंड के होने से जिंदगी कैसा रुख बदलती है, कैसा लगता है सब कुछ, बस यही देखना है मुझे. क्या तुम इस में मेरी मदद नहीं कर सकते?’’

‘‘ओके, पर कहीं मेरे मन में तुम्हारे लिए फीलिंग्स आ गईं तो?’’

‘‘तो क्या है, वन नाइट स्टैंड की तरह हमें एक दिन के इस अफेयर को भूल जाना है. यह सोच कर ही मेरे साथ आना. बस एक दिन खूब मस्ती करेंगे, घूमेंगेफिरेंगे. बोलो क्या कहते हो? वैसे भी मैं तुम से 5 साल बड़ी हूं. मैं ने तुम्हारे ड्राइविंग लाइसैंस में तुम्हारी उम्र देख ली है. यह लो. रास्ते में तुम से गिर गया था. यही लौटाने आई थी. तुम्हें देखा तो लगा कि तुम एक शरीफ लड़के हो. मेरा गलत फायदा नहीं उठाओगे, इसीलिए यह प्रस्ताव रखा है.’’

मैं मुसकराया. एक अजीब सा उत्साह था मेरे मन में. चेहरे पर मुसकराहट की रेखा गहरी होती गई. मैं इनकार नहीं कर सका. तुरंत हामी भरता हुआ बोला, ‘‘ठीक है, परसों सुबह 8 बजे इसी जगह आ जाना. उस दिन मैं पूरी तरह तुम्हारा बौयफ्रैंड हूं.’’

‘‘ओके थैंक्यू,’’ कह कर मुसकराती हुई वह चली गई.

घर आ कर भी मैं सारा समय उस के बारे में सोचता रहा.

2 दिन बाद तय समय पर उसी जगह पहुंचा तो देखा वह बेसब्री से मेरा इंतजार कर रही थी.

‘‘हाय डियर,’’ कहते हुए वह करीब आ गई.

‘‘हाय,’’ मैं थोड़ा सकुचाया.

मगर उस लड़की ने झट से मेरा हाथ थाम लिया और बोली, ‘‘चलो, अब से तुम मेरे बौयफ्रैंड हुए. कोई हिचकिचाहट नहीं, खुल कर मिलो यार.’’

मैं ने खुद को समझाया, बस एक दिन. फिर कहां मैं, कहां यह. फिर हम 2 अजनबियों ने हमसफर बन कर उस एक दिन के खूबसूरत सफर की शुरुआत की. प्रिया नाम था उस का. मैं गाड़ी ड्राइव कर रहा था और वह मेरी बगल में बैठी थी. उस की जुल्फें हौलेहौले उस के कंधों पर लहरा रही थीं. भीनीभीनी सी उस की खुशबू मुझे आगोश में लेने लगी थी. एक अजीब सा एहसास था, जो मेरे जिस्म को महका रहा था. मैं एक गीत गुनगुनाने लगा. वह एकटक मुझे निहारती हुई बोली, ‘‘तुम तो बहुत अच्छा गाते हो.’’

‘‘हां थोड़ाबहुत गा लेता हूं… जब दिल को कोई अच्छा लगता है तो गीत खुद ब खुद होंठों पर आ जाता है.’’

मैं ने डायलौग मारा तो वह खिलखिला कर हंस पड़ी. दूधिया चांदनी सी छिटक कर उस की हंसी मेरी सांसों को छूने लगी. यह क्या हो रहा है मुझे. मैं मन ही मन सोचने लगा.

तभी उस ने मेरे कंधे पर अपना सिर रख दिया, ‘‘माई प्रिंस चार्मिंग, हम जा कहां रहे हैं?’’

‘‘जहां तुम कहो. वैसे मैं यहां की सब से रोमांटिक जगह जानता हूं, शायद तुम भी जाना चाहोगी,’’ मेरी आवाज में भी शोखी उतर आई थी.

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‘‘श्योर, जहां तुम चाहो ले चलो. मैं ने तुम पर शतप्रतिशत विश्वास किया है.’’

‘‘पर इतने विश्वास की वजह?’’

‘‘किसीकिसी की आंखों में लिखा होता है कि वह शतप्रतिशत विश्वास के योग्य है. तभी तो पूरी दुनिया में एक तुम्हें ही चुना मैं ने अपना बौयफ्रैंड बनाने को.’’

‘‘देखो तुम मुझ से इमोशनली जुड़ने की कोशिश मत करो. बाद में दर्द होगा.’’

‘‘किसे? तुम्हें या मुझे?’’

‘‘शायद दोनों को.’’

‘‘नहीं, मैं प्रैक्टिकल हूं. मैं बस 1 दिन के लिए ही तुम से जुड़ रही हूं, क्योंकि मैं जानती हूं हमारे रिश्ते को सिर्फ इतने समय की ही मंजूरी मिली है.’’

‘‘हां, वह तो है. मैं अपने घर वालों के खिलाफ नहीं जा सकता.’’

‘‘अरे यार, खिलाफ जाने को किस ने कहा? मैं तो खुद पापा के वचन में बंधी हूं. उन के दोस्त के बेटे से शादी करने वाली हूं. 6-7 महीनों में वह इंडिया आ जाएगा और फिर चट मंगनी पट विवाह. हो सकता है मैं हमेशा के लिए पैरिस चली जाऊं,’’ उस ने सहजता से कहा.

‘‘तो क्या तुम भी ‘कुछकुछ होता है’ मूवी की सिमरन की तरह किसी अजनबी से शादी करने वाली हो, जिसे तुम ने कभी देखा भी नहीं है?’’ कहते हुए मैं ने उस की आंखों में झांका. वह हंसती हुई बोली, ‘‘हां, ऐसा ही कुछ है. पर चिंता न करो. मैं तुम्हें शाहरुख यानी राज की तरह अपनी जिंदगी में नहीं आने दूंगी. शादी तो मैं उसी से करूंगी जिस से पापा चाहते हैं.’’

‘‘तो फिर यह सब क्यों? मेरे इमोशंस के साथ क्यों खेल रही हो?’’

‘‘अरे यार, मैं कहां खेल रही हूं? फर्स्ट मीटिंग में ही मैं ने साफ कह दिया था कि हम केवल 1 दिन के रिश्ते में हैं.’’

‘‘हां वह तो है. ओके बाबा, आई ऐम सौरी. चलो आ गई हमारी मंजिल.’’

‘‘वैरी नाइस. बहुत सुंदर व्यू है,’’ कहते हुए उस के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई.

थोड़ा घूमने के बाद वह मेरे पास आती हुई बोली, ‘‘लो अब मुझे अपनी बांहों में भरो जैसे फिल्मों में करते हैं.’’

वह मेरे और करीब आ गई. उस की जुल्फें मेरे कंधों पर लहराने लगीं. लग रहा था जैसे मेरी पुरानी गर्लफ्रैंड बिंदु ही मेरे पास खड़ी है. अजीब सा आकर्षण महसूस होने लगा. मैं अलग हो गया, ‘‘नहीं, यह नहीं होगा मुझ से. किसी गैर लड़की को मैं करीब क्यों आने दूं?’’

‘‘क्यों, तुम्हें डर लग रहा है कि मैं यह वीडियो बना कर वायरल न कर दूं?’’ वह शरारत से खिलखिलाई. मैं ने मुंह बनाया, ‘‘बना लो. मुझे क्या करना है? वैसे भी मैं लड़का हूं. मेरी इज्जत थोड़े ही जा रही है.’’

‘‘वही तो मैं तुम्हें समझा रही हूं. तुम्हें क्या फर्क पड़ता है, तुम तो लड़के हो,’’ वह फिर से मुसकराई, ‘‘वैसे तुम आजकल के लड़कों जैसे बिलकुल नहीं.’’

‘‘आजकल के लड़कों से क्या मतलब है? सब एकजैसे नहीं होते.’’

‘‘वही तो बात है. इसीलिए तो तुम्हें चुना है मैं ने, क्योंकि मुझे पता था तुम मेरा गलत फायदा नहीं उठाओगे वरना किसी और लड़के को ऐसा मौका मिलता तो उसे लगता जैसे लौटरी लग गई हो.’’

‘‘तुम मेरे बारे में इतनी श्योर कैसे हो कि वाकई मैं शरीफ ही हूं? तुम कैसे जानती हो कि मैं कैसा हूं और कैसा नहीं हूं?’’

‘‘तुम्हारी आंखों ने सब बता दिया मेरी जान, शराफत आंखों पर लिखी होती है. तुम नहीं जानते?’’

इस लड़की की बातें पलपल मेरे दिल को धड़काने लगी थीं. बहुत अलग सी थी वह. काफी देर तक हम इधरउधर घूमते रहे. बातें करते रहे.

एक बार फिर वह मेरे करीब आती हुई बोली, ‘‘अपनी गर्लफ्रैंड को हग भी नहीं करोगे?’’ वह मेरे सीने से लग गई. लगा जैसे वह पल वहीं ठहर गया हो. कुछ देर तक हम ऐसे ही खड़े रहे. मेरी बढ़ी हुई धड़कनें शायद वह भी महसूस कर रही थी. मैं ने भी उसे आगोश में ले लिया. उस पल को ऐसा लगा जैसे आकाश और धरती एकदूसरे से मिल गए हों. कुछ पल बाद उस ने खुद को अलग किया और दूर जा कर खड़ी हो गई.

‘‘बस, कुछ और हुआ तो हमारे कदम बहक जाएंगे. चलो वापस चलते हैं,’’ वह बोली. मैं अपनेआप को संभालता हुआ बिना कुछ कहे उस के पीछेपीछे चलने लगा. मेरी सांसें रुक रही थीं. गला सूख रहा था. गाड़ी में बैठ कर मैं ने पानी की पूरी बोतल खाली कर दी.

सहसा वह हंस पड़ी, ‘‘जनाब, ऐसा लग रहा था जैसे शराब की बोतल एक बार में ही हलक के नीचे उतार रहे हो.’’

उस के बोलने का अंदाज कुछ ऐसा था कि मुझे हंसी आ गई. ‘‘सच, बहुत अच्छी हो तुम. मुझे डर है कहीं तुम से प्यार न हो जाए,’’ मैं ने कहा.

‘‘छोड़ो भी यार. मैं बड़ी हूं तुम से, इस तरह की बातें सोचना भी मत.’’

‘‘मगर मैं क्या करूं? मेरा दिल कुछ और कह रहा है और दिमाग कुछ और.’’

‘‘चलता है. तुम बस आज की सोचो और यह बताओ कि हम लंच कहां करने वाले हैं?’’

‘‘एक बेहतरीन जगह है मेरे दिमाग में. बिंदु के साथ आया था एक बार. चलो वहीं चलते हैं,’’ मैं ने वृंदावन रैस्टोरैंट की तरफ गाड़ी मोड़ते हुए कहा, ‘‘घर के खाने जैसा बढि़या स्वाद होता है यहां के खाने का और अरेंजमैंट देखो तो लगेगा ही नहीं कि रैस्टोरैंट आए हैं. गार्डन में बेंत की टेबलकुरसियां रखी हुई हैं.’’

रैस्टोरैंट पहुंच कर उत्साहित होती हुई प्रिया बोली, ‘‘सच कह रहे थे तुम. वाकई लग रहा है जैसे पार्क में बैठ कर खाना खाने वाले हैं हम… हर तरफ ग्रीनरी. सो नाइस. सजावटी पौधों के बीच बेंत की बनी डिजाइनर टेबलकुरसियों पर स्वादिष्ठ खाना, मन को बहुत सुकून देता होगा.

है न?’’

मैं खामोशी से उस का चेहरा निहारता रहा. लंच के बाद हम 2-1 जगह और गए. जी भर कर मस्ती की. अब तक हम दोनों एकदूसरे से खुल गए थे. बातें करने में भी मजा आ रहा था. दोनों ने ही एकदूसरे की कंपनी बहुत ऐंजौय की थी, एकदूसरे की पसंदनापसंद, घरपरिवार, स्कूलकालेज की कितनी ही बातें हुईं.

थोड़ीबहुत प्यार भरी बातें भी हुईं. धीरेधीरे शाम हो गई और उस के जाने का समय आ गया. मुझे लगा जैसे मेरी रूह मुझ से जुदा हो रही है, हमेशा के लिए.

‘‘कैसे रह पाऊंगा मैं तुम से मिले बिना? नहीं प्रिया, तुम्हें अपना नंबर देना होगा मुझे,’’ मैं ने व्यथित स्वर में कहा.

‘‘आर यू सीरियस?’’

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‘‘यस आई ऐम सीरियस,’’ मैं ने उस का हाथ पकड़ लिया, ‘‘मुझे नहीं लगता कि अब मैं तुम्हें भूल सकूंगा. नो प्रिया, आई थिंक आई लाइक यू वैरी मच.’’

‘‘वह डील न भूलो मयंक,’’ प्रिया ने याद दिलाया.

‘‘मगर दोस्त बन कर तो रह सकते हैं न?’’

‘‘नो, मैं कमजोर पड़ गई तो? यह रिस्क मैं नहीं उठा सकती.’’

‘‘तो ठीक है. आई विल मैरी यू,’’ मैं ने जल्दी से कहा. उस से जुदा होने के खयाल से ही मेरी आंखें भर आई थीं. एक दिन में ही जाने कैसा बंधन जोड़ लिया था उस ने कि दिल कर रहा था हमेशा के लिए वह मेरी जिंदगी में आ जाए.

वह मुझ से दूर जाती हुई बोली, ‘‘गुडबाय मयंक, मैं शादी वहीं करूंगी जहां पापा चाहते हैं. तुम्हारा कोई चांस नहीं. भूल जाना मुझे.’’ वह चली गई और मैं पत्थर की मूर्त बना उसे जाते देखता रहा. दिल भर आया था मेरा. ड्राइविंग सीट पर अकेला बैठा अचानक फफकफफक कर रो पड़ा. लगा जैसे एक बार फिर से बिंदु मुझे अकेला छोड़ कर चली गई है. जाना ही था तो फिर जरूरत क्या थी मेरी जिंदगी में आने की. किसी तरह खुद को संभालता हुआ घर लौटा. दिन का चैन, रात की नींद सब लुट चुकी थी. जाने कहां से आई थी वह और कहां चली गई थी? पर एक दिन में मेरी दुनिया पूरी तरह बदल गई थी. देवदास बन गया था मैं. इधर घर वाले मेरी सगाई की तैयारियों में लगे थे. वे मुझे उस लड़की से मिलवाने ले जाना चाहते थे, जिसे उन्होंने पसंद किया था. पर मैं ने साफ इनकार कर दिया.

‘‘मैं शादी नहीं करूंगा,’’ मेरा इतना कहना था कि घर में कुहराम मच गया.

‘‘क्यों, कोई और पसंद आ गई?’’ मां ने अलग ले जा कर पूछा.

‘‘हां.’’ मैं ने सीधा जवाब दिया.

‘‘तो ठीक है, उसी से बात करते हैं. पता और फोन नंबर दो.’’

‘‘मेरे पास कुछ नहीं है.’’

‘‘कुछ नहीं, यह कैसा प्यार है?’’ मां ने कहा.

‘‘क्या पता मां, वह क्या चाहती थी? अपना दीवाना बना लिया और अपना कोई अतापता भी नहीं दिया.’’

फिर मैं ने उन्हें सारी कहानी सुनाई तो वे खामोश रह गईं. 6 माह बीत गए. आखिर घर वालों की जिद के आगे मुझे झुकना पड़ा. लड़की वाले हमारे घर आए. मुझे जबरन लड़की के पास भेजा गया. उस कमरे में कोई और नहीं था. लड़की दूसरी तरफ चेहरा किए बैठी थी. मैं बहुत अजीब महसूस कर रहा था.

लड़की की तरफ देखे बगैर मैं ने कहना शुरू किया, ‘‘मैं आप को किसी भ्रम में नहीं रखना चाहता. दरअसल मैं किसी और से प्यार करने लगा हूं और अब उस के अलावा किसी से शादी का खयाल भी मुझे रास नहीं आ रहा. आई एम सौरी. आप इस रिश्ते के लिए न कह दीजिए.’’

‘‘सच में न कह दूं?’’ लड़की के स्वर मेरे कानों से टकराए तो मैं हैरान रह गया. यह तो प्रिया के स्वर थे. मैं ने लड़की की तरफ देखा तो दिल खुशी से झूम उठा. यह वाकई प्रिया ही थी.

‘‘तुम?’’

‘‘हां मैं, कोई शक?’’ वह मुसकराई.

‘‘पर वह सब क्या था प्रिया?’’

‘‘दरअसल, मैं अरेंज्ड नहीं, लव मैरिज करना चाहती थी. अत: पहले तुम से प्यार का इजहार कराया, फिर इस शादी के लिए रजामंदी दी. बताओ कैसा लगा मेरा सरप्राइज.’’

‘‘बहुत खूबसूरत,’’ मैं ने पल भर भी देर नहीं की कहने में और फिर उसे बांहों में भर लिया.

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जब खुबसूरत चेहरे से नजर हटाना हो मुश्किल  

पहले अधिकतर प्लास्टिक सर्जरी फायर वर्क्स या किसी दुर्घटना के शिकार व्यक्तियों के किसी अंग या चेहरे को फिर से नार्मल बनाने के लिए किया जाता था, लेकिन पिछले कुछ सालों से ब्यूटी को एनहांस करने के लिए प्लास्टिक सर्जरी की जाती है. ब्रिटिशएसोसिएशन ऑफ़ एस्थेटिक प्लास्टिक सर्जन्स के अनुसार प्लास्टिक सर्जरी कराने वालों की संख्या बढ़ी है, इसमें वयस्कों से लेकर युवा सभी इसे करवाना चाहते है, क्योंकि उन्हें चमकती, सुरक्षित, स्वस्थ और जवां दिखने वाली त्वचा चाहिए.

ये सही है कि उम्र के बढ़ने के साथ त्वचा भी बेजान और रंगत खोने लगती है, ऐसे में सही तकनीक अपनाकर उसे कुछ हद तक ठीक या रोका जा सकता है. यही वजह है कि आज थोड़ी-थोड़ी दूरी पर एक कॉस्मेटिक सर्जन मिल जाते है, ऐसे में बिना जांच-परख के किसी भी प्लास्टिक सर्जन के पास जाने पर लेने के देने पड़ सकते है. द एस्थेटिक क्लिनिक की डॉ. रिंकी कपूर कहती है कि ये सब ठीक तरह से करवाने के लिए एक सही डॉक्टर के पास जाना जरुरी होता है, क्योंकि बढ़ते तनाव, प्रदूषण और चुनौतीपूर्ण मौसम को देखते हुए भारत में महिलाएं हमेशा अपनी त्वचा की स्थिति में सुधार करना चाहती है और सहायक तकनीकों पर खर्च करने को भी तैयार रहती है. उपभोक्ता आज इस बात की परवाह नहीं करते है कि वे अपने चेहरे पर क्या लगा रहे है, पर वेअच्छी तरह से सोच-समझकर ही विकल्प चुनते है.फेस रिजुविनेशन और सबसे अच्छा दिखने या महसूस करने के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है,जो निम्न है,

बोटॉक्स या फिलर्स

झुर्रियों, रेखाओं, आंखों के नीचे डार्क हिस्से को कम करने और स्किन ऐजको रोकने के लिए प्रयोग किया जाता है. बोटॉक्स मांसपेशियों में उन नर्व सिग्नल्स को ब्लॉक करती है,जहां इसे इंजेक्ट किया जाता है. नर्व सिग्नल्स को बाधित करने पर इंजेक्शन वाली मांसपेशी अस्थायी रूप से ढीली पड़ जाती है. चेहरे पर इन चुनी हुई मांसपेशियों को हिलाए बिना, कुछ झुर्रियों को नरम, कमजोर या हटाया जा सकता है. इंजेक्टेबल डर्मल फिलर्स असल में जेल जैसे पदार्थ होते है, जिनमें हयालूरोनिक एसिड जैसे प्राकृतिक पदार्थ होते है, जिन्हें त्वचा के नीचे इंजेक्ट किया जाता है, ताकि इसकी उपस्थिती में सुधार हो सके. झुर्रियों के लिए ये सबसे लोकप्रिय और मिनिमम इनवेसिव थिरेपी है.डर्मल फिलर्स में ऐसे तत्वहोते है, जो उम्र बढ़ने के कारण पतले या धंसे हुए क्षेत्रों को पहले की तरह बनाते है, जो अधिकतर गालों, होठों और मुंह के चारों तरफ पतले हुए त्वचा की वजह से होते है.

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उल्थेरा

त्वचा में कसाव लाने के लिएयह एक एडवांस, नॉन-सर्जिकल और नॉन-इनवेसिव तकनीक है जो फोकस्ड हाई-पावर अल्ट्रासाउंड की ऊर्जा काप्रयोग करती है, जिसका उद्देश्य चेहरे की विभिन्न गहराई पर स्किन टिश्यू को गर्म करना है. यह थिरेपी नए कोलेजन का गठन करती है जिससे नैचुरल हीलिंग प्रोसेस सक्रिय हो जाती है.इसमें त्वचा की लिफ्टिंग या कसावट का प्रभाव दिखता है, क्योंकि चेहरे, गर्दन और डेकोलेट(लो नेकलाइन )पर त्वचा में  ढीलापन  कम होने के साथ-साथ उसकी इलास्टिसिटी बढ़ जाती है. यह एक सुविधाजनक प्रक्रिया है, क्योंकि यह 30 से 90 मिनट तक ही करनी पड़ती है.इसमें किसी चीरे या जनरल एनेस्थेशिया की आवश्यकता नहीं होती है. बहुत कम तैयारी के साथ इसे किया जाता है और अधिकांश मामलों में मिनिमम या कोई रिकवरी टाइम की जरुरत नहीं पड़ती.

कार्बन डाई ऑक्साइड लेजर

त्वचाको फिर से जवां बनाने के लिएCO2 लेज़र स्किन रिसरफेसिंग एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड लेजर (CO2) स्किन को सतह से हटाने (एब्लेटिव लेज़र) का काम करती है,जैसे किसी प्रकार का निशान, मस्से और गहरी झुर्रियों को दूर करने के साथ-साथ त्वचा में कसावट और स्किन टोन को बैलेंस करने में सहायक होता है.

एब्लेटिव लेज़र्स यानि CO2 लेज़र, त्वचा को लेसिरेट कर काम करती है. यह स्किन की पतली बाहरी परत (एपिडर्मिस) को हटाकर अंदरुनी त्वचा (डर्मिस) को गर्म करता है और नए कोलेजन फाइबर के विकास को बढ़ाता है. एपिडर्मिस ठीक होने और इस थिरेपी के बाद त्वचा साफ, चिकना और टाइट दिखाई देने लगती है.

नॉन-एब्लेटिव लेज़र, पल्स लाइट (IPL) डिवाइस, त्वचा को खराब नहीं करते है, बल्कि कोलेजन वृद्धि को प्रोत्साहित करते है, जिससे त्वचा की टोन और बनावट में सुधार होता है. यह कम इनवेसिव है और इसके ठीक होने में समय भी कम लगता है, लेकिन यह कम प्रभावी होता है. सर्जन इलाज की स्थिति और रोगी के कॉस्मेटिक लक्ष्यों के आधार पर लेजर के प्रकार का चयन करते है.

लेजर पिग्मेंटेशन

लेज़र पिग्मेंटेशन रिमूवल एक ऐसी प्रक्रिया है, जो पिग्मेंटेशन और लालिमा को दूर करने के लिए प्रयोग किया जाता है. इसे लेज़र स्किन रिजुवेनेशन के रूप में भी जाना जाता है. यह उम्र के साथ बनने वाले धब्बे, सनस्पॉट, हाइपरपिग्मेंटेशन, फ्लैट पिग्मेंटेड. बर्थमार्क और झाईयों जैसी त्वचा पर गैरजरूरी पिग्मेंटेशन को दूर करने के लिए सबसे एडवांस ट्रीटमेंट में से एक है. लेज़र गर्म होता है और पिग्मेंट को खत्म कर देता है.फिर पिग्मेंट को आसपास की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना सतह पर खींच लिया जाता है. एक बार सतह पर खींचे जाने के बाद, पिग्मेंटेशन के घाव हल्के या सूखकर, उस जगह से निकल जाते है,जहां इसका प्रयोग किया गया है, इससे त्वचा समान टोन और रंगत के साथ निखर जाती है.

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मेसोथेरेपी

त्वचा की चमक के लिए मेसोथेरेपी एक प्रक्रिया है, जिसमें त्वचा की सतह पर छोटे इंजेक्शन लगाए जाते है.इन इंजेक्शनों में त्वचा में स्वाभाविक रूप से पाए जाने वाले विटामिन्स, मिनरल्स और अन्य घटकों का कॉम्बिनेशन होता है, मसलन हयालूरोनिक एसिड जो उम्र के साथ कम होता जाता है. मेसोथेरेपी की इस प्रक्रिया में कोलेजन उत्पादन को बढ़ावा देना, झुर्रियों और महीन रेखाओं को कम करना है. इसके अलावा त्वचा की बनावट में सुधार, चेहरे की समरूपता और सेल्युलाईट को टारगेट करता है.इसमें इंजेक्शन अलग-अलग गहराई पर त्वचा में 1 से 4 मिलीमीटर तक दिया जाता है, लेकिन यह व्यक्ति की स्थिति और इलाज की प्रोसेस पर निर्भर करता है. कई बार डॉक्टर सुई को त्वचा में एक एंगल पर रखकर इंजेक्शन लगाते समय अपनी कलाई को फुर्ती से हटा लेता है.असल में प्रत्येक इंजेक्शन से त्वचा में सोल्यूशन की केवल एक ही छोटी बूंद अंदर जाती है.सही रिजल्ट पाने के लिए मेसोथेरेपी की कई सेशंस की आवश्यकता होती है. इसलिए डॉक्टर के पास 3 से 15 बार जाने के बाद ही सही परिणाम दिखता है.

पीलिंग ऑफ़ स्किन

त्वचा को रिजुवीनेट करने के लिएकेमिकल पील सबसे अच्छा प्रोसेस है. यह अधिकतर एजिंग फेस की त्वचा को जवां और बेजान होने से बचाती है.इससे निकलने वाली नयी स्किन आमतौर पर चिकनी और कम झुर्रीदार होती है.इस प्रोसेस का प्रयोग आमतौर पर चेहरे, गर्दन और हाथों पर, मुंह के आसपास और आंखों के नीचे की महीन रेखाएं, झुर्रियां, हल्के निशान, धब्बे आदि के लिए किया जाता है.

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मेड से निभाना है रिश्ता तो जरुर जानें ये बातें

आज के इस महंगाई युग में अधिकतर महिलाएं काम पर जाती है. इस कारण घर के कामकाज को करने के लिये घर में कामवाली बाई रखना जरूरी सा लगता है. इससे उनका काम कम हो जाए और इस कारण वह समय पर अपने औफिस या काम जा सके. लेकिन सवाल यह उठता है कि कामवाली बाई का समय पर आना और उससे काम लेना कितना मुश्किल है, ये तो आप जानते है. आज के जमाने में काम वाली बाई से काम लेना आसान काम नहीं है, इसलिये आपको काम वाली से भी काम करवाने के लिये कुछ बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए जिससे आपका भी काम हो जाए और उनको भी काम करने में परेशानी महसूस न हो. इसलिए अगर आप ये जरूरी टिप्स अपनाएंगे तो आप भी सुखी और काम वाली बाई भी सुखी.

1. सबसे पहले काम वाली बाई रखते समय और अपने व्यवहार में थोडा इंसानियत का फर्ज निभाना सीखे और थोड़ा दिल और दिमाग से सोचकर ही बात करें. कामवाली के साथ अपनापन रखें वरना वह तो एक दिन में छोड़कर चली जायेगी और इस खास बात का बखूबी ध्यान रखें की जरूरत उसको भी है पैसे की और आपको काम की तो केवल आप ही उस पर हावी न हो.

2. कामवाली बाई रखते समय सभी बातें स्पष्ट कर लें जैसे कि महीने में कितनी छुट्टी लेगी और अगर ज्यादा ली तो क्या करें. इमरजैंसी छुट्टी कैसी लेनी है उसके साथ पहले की छुट्टी मिलानी है या नही सब बातें पुरी तरह से स्पष्ट करें और ज्यादा की तो क्या पैसे काटना है या अलग से एक्स्ट्रा काम करवाना है इत्यादि इससे आप को भी टेंशन नही रहेगा.

3. अब अगर मेहमान वगैरह आने पर क्या एक्स्ट्रा पैसे देना है या नहीं सभी स्पष्ट कर लें.

4. कामवाली बाई का समय निर्धारण कर लें लेकिन एक दिन कभी देर हो जाए तो थोड़ा सा इंसानियन का फर्ज निभाए और उसकी भी बात सुने जिससे आपको पता चले कि वह सच बोल रही है या नहीं.

5. काम वाली को कभी कभी इंसानियन के नाते खाना कपड़े इत्यादि देते रहे जिससे उसे भी काम करने में अच्छा महसूस होगा. साथ में उसके बच्चों की साम्थर्य अनुसार मदद करते रहे कभी तबियत खराब होने पर उसको अपने आप ही छुट्टी का बोल दे. जिससे आपकी अच्छाई पता चलेगी. हो सकता है कभी आपकी तबियत खराब होने पर आपके व्यवहार को ध्यान मे रखकर वह भी आपके घर का एक्स्ट्रा काम अपने आप ही कर दें और छुट्टी न लें. इसलिये उसे बनाकर रखें आप भी उसकी जरूरत का ध्यान रखे और समय आने पर वह भी सोचेगी की मैडमजी ने भी मेरी सहायता की थी. तो चलों मै भी ज्यादा काम कर दू, इससे आपको भी अच्छा लगेगा .

6. कामवाली बाई से बात करते समय संयम रखे. अनापशनाप न बोले सोच-समझकर बोले. फालतू की बातें न बताये उससे उतना ही बोले जितना जरूरी हो वरना बाद में पछताना न पड़े.

7. आड़े वक्त अगर पैसे मांगती है तो ये देख लें कि कोई बहाना तो नहीं बना रही है. काफी सोचसमझकर उसकी मदद कर दें. इससे भी कामवाली से आपका अच्छा रिश्ता बनेगा.

8. अगर आपके यहां सब्जी भाजी ज्यादा है या अन्य वस्तु जो उसको ले जाने में एतराज न हो तो उसको दे दें फेंकने से तो अच्छा है किसी के पेट में चला जायेगा. परन्तु खाना अच्छा ही दे पुराना खराब हुआ न दें नहीं तो आप परेशानी में पड़ सकती हैं इसलिये अच्छा खाना ही दें

9. सबसे बड़ी बात उसके दुख में सहानुभूति के साथ खड़े रहे तो हो सकता है उसको भी लगे की आपको बिना कारण परेशान नही करना चाहिए इसलिये कहते हैं कि कर भला तो हो भला.

10. आप कभी भी अपने घर की पूरी जानकारी कामवाली बाई को न दें और उसके सामने फोन पर शिकायतों की लिस्ट न बताएं या बात करते समय ध्यान रखें की आपकी बात कोई सुन रहा है. इसलिये बात करते समय संयम से ध्यान देकर करें.

11. कामवाली बाई को चोरी का आरोप बिना सोचे समझे न लगाये. पहले घर में वह चीज अच्छी तरह देख लें या पूरे घर के सदस्यों से पूछ लें अच्छी तरह जांच-पड़ताल कर लें और फिर भी आपको लगता है कि बाई पर आरोप लगाया जाए तो सहजता से विनम्रता से पूछकर जबाव से सतुंष्ट होने पर या न होने पर आप होशियारी के साथ उसको हटा दें. नहीं तो वह आपके घर में दूसरी बाई को लगने नही देगी और चारों तरफ आपकी बुराई करते फिरेगी सो अलग. इसलिये ये काम करते समय बड़ी सर्तकता बरतें.

12. कामवाली बाई आपको कोई इधर उधर की बातें चुगली करें तो आप पूरी तरह से विश्वास कर उस व्यक्ति के बारे में आप उसके कहने पर व्यवहार को ने बिगाड़े. वरना हो सकता है आपको पछताना पड़े. इसलिये सबसे बड़ी बात अगर वह इधर उधर की बात बताये तो उसे डांट दें कि मुझे चुगली मत बताये. कभी कभी कामवाली बाई की बातों में आकर लोग सम्बन्ध बिगाड़ बैठते हैं जो गलत है इसलिये दूसरा पक्ष सुनने के बाद ही कोई फैसला लें.

कोरोना और सिमरन

लेखक-रंगनाथ द्विवेदी 

सिमरन अपनी शादी की कुछ सालों तक कितनी खुश थी. सिद्धार्थ को अपने पति के तौर पर पाकर मानो उसने दुनिया पाली हो, लेकिन हमेशा जिंदगी का रंग एक सा नहीं रहता, उसके रंग भी बदलते रहते हैं. क्योंकि सिमरन की जिंदगी इस कायनात की आखिरी तस्वीर नहीं, इसकी और भी तस्वीरें हैं, इसके और भी रंग हैं, जो बदलते रहते हैं. कुछ ऐसा ही बदलाव उसकी जिंदगी में  कोरोना जैसी महामारी से आएगा, उसको इसकी कतई उम्मीद न थी. लेकिन किसी को दुनिया पूरी और मुकम्मल नहीं मिलती. ऐसा सिमरन के साथ भी हुआ. उसको भी उसकी दुनिया मुकम्मल नहीं मिली. कोरोना ने उसके तमाम वे  रंग छीन लिए, जो ना जाने कितनी सिमरन के रहे होंगे.

सिमरन की सारी खुशी, सारे सपने,  सारे अरमान कोरोना की भेंट चढ़ गए. उसके सारे अरमानों को कोरोना वायरस ने ना चाह कर भी हमेशा के लिए लॉकडाउन कर दिया. यह दुनिया कोरोना को परास्त कर लेगी,  लेकिन हां ना जाने मुझे जैसी कितनी सिमरन इस टीस पीड़ा और दर्द के वह जख्म हमेशा हरे रहेंगे जो कोरोना ने दिये है .अब तो  हमेशा के लिए उसके मन में अपने पति को खोने की ये  नागफनी दिल में चूभेगी और यह चुभन हमेशा सिमरन को कोरोना की याद दिलाते रहेगे और हमेशा सिमरन सिसकती रहेगी.

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सिमरन उस पल को याद कर भावुक हो उठती है , जब वे मुंबई घर से कमाने के लिए जा रहे थे तो कुछ समय निकालकर वे कमरे में जब आये तो उन्होंने अपनी सिमरन को बाहों में भरकर उसके माथे का चुंबन लिया और बड़े ही प्यार से मेरी जान कहा था तो उसे क्या पता था कि यह सिमरन की माथे भाग लिया उसके सुहाग का आखिरी चुंबन होगा. अगर वे जानती तो कभी भी उन्हें कमाने के लिए मुंबई ना जाने देती किसी न किसी तरीके से उन्हें रोक लेती लेकिन अचानक चीन से फैले कोरोना ने बहुतों को अपनी चपेट में ले लिया. उसी चपेट में सिमरन की खुशियों की दुनिया भी आ गई.

कोरोना ने बस सिमरन का सुहाग ही नही बल्कि दो मासूम बच्चो के सर से उनके पिता  का असमय साया भी छीन लिया. उनके बुढ़े माँ-बाप के सहारे की एकलौती लाठी को हमेशा के लिये तोड़ दिया. इसके साथ ही जवान बहन की शादी के लाल जोड़े भी रो उठे. कोरोना वायरस का जब तक पता चलता तब तक सिमरन की दुनिया हमेशा के लिए तबाह व बर्बाद हो गई. सिमरन को ये तकलीफ रही की वे उस समय उनके पास न थी.

अब सिमरन को अपने सुन्दर व खूबसूरत चेहरे को मेकप नही, बल्कि सिमरन को अपने पति के यादों के आंसू उसके पूरे चेहरे को सैनिटाइज कर रहे हैं. उसका अब अपने पति की यादों के कोरोना वायरस से बाहर निकल पाना या बच  पाना मुमकिन नहीं.

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आने वाला कल सिमरन के हौसले वह उसके जिम्मेदारियों का है. उसे केवल कोरोना वायरस के यादों के अलावा एक हकीकत जीना है, अपने बच्चों के लिए, बुढ़े सास-ससुर के लिए,

अपनी ननद के लिये, फिर एक लंबे अंतराल के बाद समस्त जिम्मेदारियों के इतर फिर वही याद, वही कोरोना वायरस और उसके पति का उसके माथे पर लिया हुआ आखरी चुंबन. उसके पास यही यादों की वे पूंजी होगी, जिसके सहारे वे–“अपने जिंदगी की आखिरी सांस लेगी”.

घर को रखें वैक्यूम क्लीन

धूल-मिट्टी कई तरह की बीमारियों का कारण बनती है. इस से बचने के लिए हर कोई हर तरह से अपने घर को साफ रखने की पूरी कोशिश करता है. लेकिन केवल झाड़ू पोंछे से हम पूरी तरह घर की साफ सफाई नहीं कर सकते, क्योंकि वह केवल ऊपरी रूप से होती है और उस में समय भी ज्यादा लगता है. वैक्यूम क्लीनर साफसफाई करने का एक ऐसा साधन है, जो परदों, कारपेट, सोफे आदि में छिपी धूल-मिट्टी को अपने पिकअप ब्रश से बाहर खींच लेता है.

आज के धूल-मिट्टी से भरे वातावरण और भागतीदौड़ती जिंदगी में वैक्यूम क्लीनर के बिना किसी भी घर की कल्पना कर पाना मुश्किल है. पुराने ढंग से साफसफाई कर के आप धूल-मिट्टी को तो साफ कर लेते हैं, लेकिन कोने में इकट्ठा होने वाली धूल को साफ नहीं कर पाते. धूल के यही छोटे-छोटे कण ऐलर्जी व बीमारियों का कारण बन जाते हैं. ऐसी स्थिति में केवल वैक्यूम क्लीनर वाले घर ही पूर्ण रूप से साफ कहे जा सकते हैं. वैक्यूम क्लीनर समय की बचत करने के साथ-साथ साफ-सफाई को आसान बना देता है.

वैक्यूम क्लीनर के प्रकार

बाजार में कई तरह के वैक्यूम क्लीनर उपलब्ध हैं, जो अलग-अलग शेप व साइज में हैं. वैक्यूम क्लीनर खरीदते समय हर किसी को अपनी जरूरत को ध्यान में अवश्य रखना चाहिए व प्रोडक्ट से जुड़ी सारी जानकारी हासिल कर लेनी चाहिए. ये हैं अलग-अलग तरह के वैक्यूम क्लीनर :

अपराइट वैक्यूम क्लीनर : यह बहुत पावरफुल क्लीनर माना जाता है. यह कारपेट से भी धूल-मिट्टी को बाहर निकाल देता है.

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कैनीस्टर : यह अपराइट वैक्यूम क्लीनर से थोड़ा छोटा होता है और अलगअलग रेंज में मार्केट में उपलब्ध है. यह फर्श, सीढ़ी, टाइल्स, लकड़ी के फ्लोर, दीवारों, छतों आदि को साफ करता है.

हेपा वैक्यूम क्लीनर : यह क्लीनर उन घरों के लिए ज्यादा उपयोगी सिद्ध होता है, जिन घरों में पालतू जानवर होते हैं, क्योंकि जानवरों के बाल झड़ते रहते हैं, जो घर में कहीं भी इधर-उधर गिरते हैं. इस से अस्थमा जैसी बीमारी होने की संभावना होती है. यह वैक्यूम क्लीनर कारपेट, फ्लोर आदि की पूरी तरह साफ-सफाई करता है.

हैंडहेल्ड वैक्यूम क्लीनर : यह साइज में छोटा व वजन में हलका होता है. ज्यादातर हैंडहेल्ड वैक्यूम क्लीनर बिना तार के होते हैं, जो बैटरी से चलते हैं. इन का प्रयोग कार, किचन की अलमारियों, सोफे के कोने वगैरह को साफ करने के लिए किया जाता है.

इस के ब्रैंड

यूरिका फोर्ब्स : यह भारत में सब से अधिक बिकने वाला ब्रैंड है.

एलजी : यूरिका फोर्ब्स के बाद भारत में बिकने वाला दूसरा बड़ा ब्रैंड है, जिस के अभी बाजार में 2-3 मौडल उपलब्ध हैं.

मोदी होवर : यह ब्रैंड अब इंडियन मार्केट में भी उपलब्ध है. यह वैक्यूम क्लीनर ब्रैंड पूरी दुनिया में पौपुलर है. यूएस के इस ब्रैंड ने अब भारत के मोदी ग्रुप से हाथ मिला लिया है, जिस के माध्यम से अब यह भारत में भी पौपुलर हो रहा है.

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जब करें इस्तेमाल

– वैक्यूम क्लीनर का जब प्रयोग न हो रहा हो, तो उस समय उसे बिजली के बोर्ड से निकाल कर रखें.

– वैक्यूम क्लीनर घर के बाहर या गीले फर्श के लिए प्रयोग नहीं किया जाता, इसलिए इस का प्रयोग ऐसे किसी स्थान पर न ही करें, जिस से बिजली का झटका लगने का कोई डर न रहे.

– वैक्यूम क्लीनर बहुत नाजुक होता है. वह एक बार गिरने या पानी पड़ने से खराब हो सकता है, इसलिए इस का प्रयोग बहुत ध्यान से करना चाहिए.

– वैक्यूम क्लीनर को बच्चों से दूर रखें.

– वैक्यूम क्लीनर नुकीली चीजें साफ करने के लिए इस्तेमाल न करें.

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जब बच्चों के पेट में हो कीड़े की शिकायत

बच्चों के पेट में कीड़े होना आम बात है. बचपन में वे इतने समझदार नहीं होते हैं कि खुद का भला-बुरा समझ पाएं. उन्हें जो दिखता है वही खा लेते हैं. कहीं भी खेलते हैं. इन सब गतिविधियों में वे अपनी सफाई का ठीक से खयाल नहीं रख पाते हैं. यही कारण है कि वे संक्रमित मिट्टी खा लेते हैं या संक्रमित पानी पीते हैं. संक्रमित पानी या मिट्टी खाने से बच्चों के पेट में कीड़े पैदा होते हैं. ये कीड़े या कृमि जमीन पर नंगे पैर चलने से भी शरीर में फैल सकते हैं. निम्न कारणों से बच्चों के पेट में कीड़े होते हैं.

संक्रमित मिट्टी खाने से

पेट में कीड़े होने की कई वजहें हो सकती हैं. पर बचपन में बच्चे मिट्टी अधिक खाते हैं और वह मिट्टी भी संक्रमित होती है. जब बच्चे संक्रमित मिट्टी में खेलते हैं या नंगे पैर या घुटनों के बल मिट्टी पर चलते हैं तो हुकवर्म नाम की क्रीमि बच्चे की त्वचा के संपर्क में आती और फिर बच्चों के शरीर में प्रवेश कर जाती हैं. इससे पेट में संक्रमण फैलता है. इसके अलावा बच्चों के नाखूनों में जब संक्रमित मिट्टी जमी होती है, तब भी उनके पेट में कीड़े हो जाते हैं.

अधपका भोजन

बच्चों के पेट में कीड़े होने का एक प्रमुख कारण अधपका भोजन खाना भी हो सकता है. इसके अलावा, अगर सब्जियों को पकाने से पहले ठीक से धोया न गया हो तब भी संक्रमण फैलाने वाले कीड़ों के अंडे सब्जियों पर चिपके रह जाते हैं. सब्जियों के अलावा जो लोग मांस खाते हैं, उन जीवों में हुकवर्म, व्हिपवर्म और राउंडवर्म के अंडे हो सकते हैं. ये अंडे बच्चों के पेट में संक्रमण पैदा करते हैं.

दूषित पानी

दूषित पानी में संक्रमण फैलाने वाले कीड़े हो सकते हैं. बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत अधिक मजबूत नहीं होती है, जिस वजह से दूषित पानी का असर उन पर अधिक पड़ता है.

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सफाई न रखना

अपने आसपास के स्थानों को साफ न रखने पर कीड़ों का संक्रमण अधिक बढ़ जाता है. जब संक्रमित स्थानों के संपर्क में बच्चे आते हैं तो उनके पेट में भी यह संक्रमण फैलता है, जिससे बच्चों को परेशानी होती है.

कमजोर प्रतिरोधक क्षमता

बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बड़ों के मुकाबले कमजोर होती है. इसलिए उनमें संक्रमण जल्दी फैलता है. इस वजह से बच्चों की ज्यादा देखभाल जरूरी है.

लक्षण

  • बच्चे का स्वभाव चिड़चिड़ा होना
  • पेट में दर्द होना
  • बच्चे का वजन घटना
  • बच्चे के मल द्वार पर खुजली होना
  • उल्टी आना या उल्टी आने जैसा महसूस होना
  • बच्चे में खून की कमी होना
  • दस्त होना या भूख न लगना
  • दांत पीसना भी पेट में कीड़े होने का एक लक्षण है
  • मूत्रमार्ग में संक्रमण होना, जिससे बार-बार पेशाब आना
  • बच्चे के मल से खून आना

उपचार

डी-वर्मिंग

पेट में कीड़ों की संख्या अधिक हो जाने से आंतों में अवरोध पैदा हो सकता है. ऐसे में डाक्टरी सलाह लेना जरूरी है. डाक्टर जांच के बाद कीड़ों के डी-वर्मिंग की प्रक्रिया शुरू करते हैं. जिसके बाद वे जरूरी दवाएं देते हैं. डाक्टरी सलाह के अलावा कुछ घरेलू नुस्खे भी हैं, जिन्हें आप चिकित्सक की सलाह से बच्चों को दे सकते हैं.

तुलसी

पेट के कीड़ों को मारने का तुलसी एक आयुर्वेदिक उपचार है. अगर आपके बच्चे को भी पेट में कीड़े हो गए हैं, तो आप तुलसी के पत्तों का रस दिन में दो बार बच्चे को दें. इससे रोग में आराम मिलेगा.

प्याज

आधा चम्मच प्याज का रस दिन में दो से तीन बार पिलाने से समस्या में आराम मिलता है.

शहद

शहद में दही मिला कर चार से पांच दिन तक इसका सेवन बच्चे को कराएं. इससे पेट के कीड़े खत्म होंगे.

गाजर

कीड़े चाहें बड़ों के पेट में हों या बच्चों के पेट में, गाजर दोनों के लिए लाभदायक है. सुबह खाली पेट गाजर खाने से पेट के कीड़े खत्म होते हैं.

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सुझाव

  • घर को साफ रखें. अच्छे कीटनाशक का प्रयोग करें.
  • बच्चे का डायपर समय-समय पर बदलें.
  • बच्चों को चप्पल पहना कर रखें.
  • बच्चों को कीचड़ में न खेलने दें.
  • साफ और सूखी जगह पर ही खेलने दें.

Bigg Boss 15: अभिजीत और राखी सावंत की हुई लड़ाई, हसबैंड रितेश को बताया ‘भाडे़ का पति’

कलर्स के रियलिटी शो बिग बॉस 15 में इन दिनों VIP और NON VIP के बीच जंग देखने को मिल रही है. वहीं इस बीच फिनाले की रेस भी शुरु हो गई है, जिसके चलते शो में जमकर घमासान देखने को मिल रहा है. इसी बीच शो का नया प्रोमो सामने आया है, जिसमें राखी सावंत (Rakhi Sawant) और अभिजीत बिचकुले के बीच लड़ाई देखने को मिल रही है. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

रितेश को कही ये बात

 

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शो में वाइल्ड कार्ड के रुप में एंट्री करने वाले राखी सावंत और उनके पति रीतेश सिंह खबरों में छाए हुए हैं. जहां सोशलमीडिया पर लोग उन्हें कैमरामैन का दर्जा दे रहे हैं. लेकिन शो के मेकर्स (Colors Tv Instagram) द्वारा रिलीज किए गए प्रोमो में अभिजीत बिचकुले, राखी सावंत के पति रितेश को ‘भाडे़ का पति’ कह रहे हैं, जिसके कारण राखी गुस्से में नजर आ रही हैं और घर में तोड़फोड़ करती दिख रही हैं.

 

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तलाक की बात हुई वायरल

इसके अलावा सोशलमीडिया पर इन दिनों कुछ मीम्स वायरल हो रहे हैं, जिसमें कहा जा रहा है कि शो में ही राखी सावंत कुछ दिनों में अपने पति रितेश को तलाक देती नजर आने वाली हैं. वहीं हाल ही में राखी सावंत की हुई लड़ाई के बाद फैंस ये कयास सच मानते नजर आ रहे हैं.

बता दें, शो में इन दिनों टिकट टू फिनाले की रेस जारी होने वाली है. जहां हाल ही के एपिसोड में नौमिनेशन भी दिखाए जा रहे हैं, जिसके चलते शो में लड़ाईयां भी देखने को मिल रही है. वहीं तेजस्वी और करण कुंद्रा की रोमांटिक लव स्टोरी भी फैंस का दिल जीत रही हैं.

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आधुनिक बीवी: भाग 2- क्या धर्मपाल की तलाश खत्म हो पाई

लेखक- प्रमोद कुमार शर्मा

रेणु जब नहा कर वापस आई तब तक मैं ने फायर प्लेस में आग जला ली थी. हम ने एक हिंदी फिल्म का कैसेट लगाया और देखने लगे. इतने में फोन की घंटी बजी. रेणु ने रिसीवर उठाया और ऊपर जा कर बातें करने लगी. वह करीब आधे घंटे बाद नीचे आई तो मैं ने पूछा, ‘‘किस का फोन था?’’

वह बोली, ‘‘कल की पार्टी में एक दक्षिण भारतीय महिला मिली थी, उसी का फोन था. सुषमा के बारे में ही बातें होती रहीं कि कैसे वह बड़ी बेशर्मी से पाल के गले में बांहें डाल कर शराब पी रही थी.’’

मैं ने बात को आगे न बढ़ाया, उठ कर वीडियो बंद कर दिया और चाय बनाने लगा.

चाय पीने के बाद मैं ऊपर जा कर लेट गया. मुझे छुट्टी के दिन दोपहर बाद थोड़ी देर सोना बड़ा अच्छा लगता है.

जब मेरी आंख खुली तो देखा कि रेणु भी मेरे पास ही सो रही है. मैं उसे सोता छोड़ कर नीचे चला आया और टैलीविजन देखने लगा.

लगभग 1 घंटे बाद रेणु भी नीचे आई और रसोई में जा कर रात के खाने का प्रबंध करने लगी. मैं ने रेणु से कहा कि यदि बर्फ पड़नी बंद न हुई तो लगता है, कल औफिस जाना मुश्किल हो जाएगा.

करीब 8 बजे हम ने खाना खाना और फिर से हिंदी फिल्म देखने लगे. 10 बजे के आसपास हम सोने चले गए.

सुबह उठ कर मैंने देखा कि बर्फ तो पड़नी बंद हो गई है, पर सड़कें अभी बर्फ से ढकी हुई हैं. मेरा औफिस घर से केवल 5-6 मील की दूरी पर है, सो औफिस जाने का निश्चय किया.

औफिस में ज्यादा लोग नहीं आए थे. शाम 5 बजे मैं वापस घर आ गया. रेणु ने चाय बनाई तथा डाक ला कर दी. पूरा सप्ताह ही बीत गया. शुक्रवार की शाम को रीता का फोन आया. उस ने अपने यहां अगले दिन रात के डिनर पर आने का निमंत्रण दिया. हमारा चूंकि अगले दिन कहीं जाने का प्रोग्राम नहीं था, सो ‘हां’ कर दी.

रीता के घर जब पहुंचे तो यह जान कर बड़ा अचंभा हुआ कि पाल वहां निमंत्रित नहीं है. रीता ने अन्य भारतीय परिवारों को भी बुलाया हुआ था. पार्टी में भी सुषमा के बारे में चर्चा होती रही. महिलाओं को इस बात का बड़ा दुख था कि उन्होंने कभी सुषमा जैसा फैशन क्यों नहीं किया या खुल कर लोगों के सामने शराब क्यों नहीं पी. रात को जब हम घर लौटे तो रेणु ने कार में फिर से सुषमा पुराण दोहराना चाहा, पर जब मैं ने उस में कोई दिलचस्पी न दिखाई तो उसे चुप हो जाना पड़ा.

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अगले दिन रेणु ने पाल को फोन किया और उसे घर आने को कहा. लेकिन उस ने यह कह कर मना कर दिया कि उन्हें घर के लिए फर्नीचर वगैरा खरीदने जाना है. पर शाम को करीब 8 बजे वे दोनों अचानक हमारे घर आ पहुंचे.

‘‘अरे, तुम तो खरीदारी के लिए जाने वाले थे?’’ मैं ने पाल से पूछा.

‘‘वहीं से तो आ रहे हैं,’’ वह बोला. उस ने बाद में बताया कि फर्नीचर तो खरीद नहीं पाए क्योंकि सुषमा ने और सामान खरीदने में ही इतने पैसे लगा दिए. हमारे यहां वे लोग रात के खाने तक रुके और फिर घर चले गए.

रेणु ने मुझे बाद में बताया कि पाल ने अपनी पत्नी को 2 हजार डौलर की हीरे की अंगूठी दिलवाई है. उस की असली शिकायत यह थी कि मैं ने कभी हीरे की अंगूठी खरीद कर उसे क्यों नहीं दी. उस ने मुझे कई और ताने भी दिए.

3-4 महीने यों ही गुजर गए. एक दिन औफिस में पाल का फोन आया कि वह मुझ से कुछ बात करना चाहता है. मैं ने उसे शाम को घर आने को कहा तो बोला, ‘‘नहीं, मैं केवल तुम से एकांत में मिलना चाहता हूं.’’

मुझे जल्दी एक मीटिंग में जाना था, सो कहा, ‘‘अच्छा, औफिस के बाद पब्लिक लाइब्रेरी में मिलते हैं.’’

वह इस के लिए राजी हो गया. मैं ने रेणु को फोन कर दिया कि शाम को जरा देर से आऊंगा.

शाम को मैं जब लाइब्रेरी में पहुंचा तो पाल वहां पहले से ही बैठा था. इधरउधर की बातें करने के बाद उस ने मुझ से 5 हजार डौलर उधार मांगे. वह मुझ से कुछ ज्यादा ही कमाता था और काफी समय से नौकरी भी कर रहा था. उस ने अभी तक घर भी नहीं खरीदा था, किराए के फ्लैट में ही रहता था. भारत भी उस ने कभी पैसे भेजे नहीं थे क्योंकि उस के घर वाले बहुत समृद्ध थे. मैं ने पूछा, ‘‘तुम्हें पैसों की ऐसी क्या आवश्यकता आ पड़ी? क्या घर खरीदने जा रहे हो?’’

वह बोला, ‘‘नहीं यार, जब से सुषमा आई है, तब से खर्च कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है. उस ने 3-4 महीने में इतनी खरीदारी की है कि सारे पैसे खर्च हो गए हैं. अब वह नई कार खरीदने को कह रही है.’’

‘‘तो उस में क्या बात है, किसी भी कार डीलर के पास चले जाओ. वह पैसे का प्रबंध करा देगा.’’

वह बोला, ‘‘अब तुम से क्या छिपाऊं. मेरे ऊपर करीब 10-12 हजार डौलर का वैसे ही कर्जा है. यह सब जो हम ने खरीदा है, सब उधार ही तो है. अब जब क्रैडिट कार्ड के बिल आ रहे हैं तो पता चल रहा है.’’

मैं ने आगे कहा, ‘‘पाल, बुरा मत मानना, पर जब तुम्हारे पास इतने पैसे नहीं थे तो इतना सब खरीदने की क्या जरूरत थी?’’

‘‘मेरी नईनई शादी हुई है और सुषमा आधुनिक विचारों की है. चाहता हूं कि मैं उसे दुनियाभर की खुशियां दे दूं, जो आज तक किसी पति ने अपनी पत्नी को न दी हों,’’ उस ने अजीब सा उत्तर दिया.

मैं ने पाल को समझाना चाहा कि उसे अपनी जेब देख कर ही खर्च करना चाहिए और कुछ पैसा बुरे समय के लिए बचा कर रखना चाहिए. पर असफल ही रहा.

अगले दिन मैं ने पाल को 5 हजार डौलर का चैक दे दिया. घर से पिताजी का पत्र आया कि मेरी छोटी बहन मंजु का रिश्ता तय हो गया है तथा 1 महीने के बाद ही शादी है. घर में यह आखिरी शादी थी, सो हम दोनों ने भारत जाने का निश्चय किया और शादी से 2 दिन पहले भारत पहुंच गए. 5-6 वर्ष बाद भारत आए थे. सबकुछ बदलाबदला सा लग रहा था. ऐसा लगा कि भारत में लोगों के पास बहुत पैसा हो गया है. लोग पान खाने के लिए भी सौ रुपए का नोट भुनाते हैं.

शादी में एक सप्ताह ऐसे बीत गया कि समय का पता ही न चला. शादी के बाद कुछ और दिन भारत में रह कर हम वापस अमेरिका लौटे. अगले दिन रविवार था सो, खूब डट कर थकान मिटाई. शाम को बाजार खाने का सामान लेने गए. सुपर मार्केट में अचानक रीता से मुलाकात हुई. मुझ से नमस्कार करने के बाद वह रेणु से बातें करने लगी. बातोंबातों में पता लगा कि पाल के हाल कुछ अच्छे नहीं हैं.

मैं ने घर जा कर पाल को फोन मिलाया तो वह बोला, ‘‘अरे, तुम कब आए?’’

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‘‘कल रात ही आए हैं,’’ मैं ने उत्तर दिया. इधरउधर की बातें करने के बाद उस ने बताया कि उस के औफिस में करीब 50 आदमियों की छंटनी होने वाली है और उस का नाम भी उस सूची में है.

अमेरिका में यह बड़ा चक्कर है. स्थायी नौकरी नाम की कोई चीज यहां नहीं है. जब जरूरत होती है, तो मुंहमांगी तनख्वाह पर रखा जाता है लेकिन जब जरूरत नहीं है तो दूध में गिरी मक्खी की तरह से निकाल दिया जाता है.

मैं ने पाल को समझाते हुए कहा कि उसे अभी से दूसरी नौकरी की तलाश करनी चाहिए, लेकिन वह बहुत ही घबराया हुआ था. फिर मैं ने कहा, ‘‘ऐसा करो, तुम लोग यहां आ जाओ, बैठ कर बातें करेंगे.’’

8 बजे के आसपास पाल और सुषमा आ गए. सुषमा तो रेणु के पास रसोई में चली गई, पाल मेरे पास आ कर बैठ गया. उस ने बताया कि उस पर पहले करीब 15 हजार डौलर का कर्ज था. लेकिन कार लेने के बाद वह 35 हजार डौलर तक पहुंच गया है. यदि नौकरी चली गई और जल्दी से दूसरी नहीं मिली तो क्या होगा?

मैं ने उसे धीरज बंधाते हुए कहा, ‘‘अभी तो 2 महीने तक तुम्हारी कंपनी निकाल ही नहीं रही, तुम इलैक्ट्रिकल इंजीनियर हो और इस लाइन में बहुत नौकरियां हैं. चिंता छोड़ कर प्रयत्न करते रहो.’’

जब उस ने मुझ से मेरे पैसों के बारे में कहना शुरू किया तो मैं ने उसे एकदम रोक दिया, ‘‘मेरे पैसों की तुम बिलकुल चिंता मत करो. जब तुम्हारे पास होंगे, तब दे देना, नहीं होंगे तो मत देना.’’

मैं ने पाल को एक सुझाव और दिया कि सुषमा को भी कहीं नौकरी करनी चाहिए. रात का खाना खाने के बाद वे दोनों अपने घर चले गए.

2 महीने बाद पाल की नौकरी छूट गई तो मुझे बड़ा दुख हुआ. मैं ने 2-3 कंपनियों में पता लगाया, पर कुछ बात न बनी. पाल बहुत हताश हो गया था. उन्हीं दिनों उस के पिताजी का भारत से पत्र आया कि उन के एक मित्र का लड़का न्यूजर्सी स्टेट में पढ़ने आ रहा है. पाल से उन्होंने उस की सहायता करने को लिखा था. जिस यूनिवर्सिटी में वह लड़का पढ़ने आ रहा था, वह हमारे घर के पास ही थी. पाल ने मुझे उसे हवाईअड्डे से लिवा लाने को कहा तो मैं उसे ले आया. उस का नाम अरुण था. पाल अगले दिन उसे यूनिवर्सिटी ले गया तथा उस का रजिस्ट्रेशन वगैरा सब करा दिया.

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