जिद: भाग 4- क्या परिवार से हटकर चंचल कुछ सोच पाई

लेखिकारिजवाना बानो ‘इकरा’

‘‘नहीं, अपनी हैल्प करनी है मुझे,‘‘ आत्मविश्वास भरा जवाब आया चंचल का.

‘‘अपनी हैल्प? हाहाहा…दिमाग तो ठीक है न तुम्हारा चंचल? तुम को किस बात की कमी है?‘‘

‘‘ये जुमला 10 सालों से सुनती आ रही हूं, शिशिर. अब बस भी करो ये ड्रामा. मुझे कब, कैसे, क्या करना है, सबकुछ तो आप और मांजी फैसला लेते हैं. मेरी अपनी कोई मरजी, कोई अस्तित्व नहीं छोड़ा है आप ने. ये कमी है मुझे.‘‘

‘‘हां, तो सही सोचते हैं हम लोग. समझ है ही कहां तुम में. देखो, अपने पीहर 3 दिन रुकी हो और कैसी बातें करनी लगी हो. दिल्ली चली जाओ, आज ही.‘‘

‘‘नहीं, दिल्ली तो मैं रविवार को ही जाऊंगी. बस, आप को बतानी थी ये बात, सो बता दी मैं ने.‘‘

‘‘कह रहा हूं न मैं, आज ही जाओ. और ये कोर्स वगैरह का भूत उतारो अपने दिमाग से, बच्चों पर ध्यान दो बस.‘‘

‘‘शिशिर, बच्चे जितने मेरे हैं, उतने ही आप के भी हैं. और ये मेरा आखिरी फैसला है, सोच लीजिए आप,‘‘ फोन डिस्कनैक्ट हो गया. पीछे खड़ा मनु बहुत खुश है, दीदी को शादी के बाद आज अपने असली रूप में देख रहा है.

‘‘फैसला? मेरी चंचल फैसले कब से करने लगी? वो तो फैसले मानती है बस,‘‘ अब शिशिर को थोड़ी घबराहट हुई, चंचल की ‘जिद‘ दिख रही थी उसे.

आकांक्षा का घर, आज समय से पहले, ब्रैडआमलेट और चाय बना कर तैयार है. हालांकि आज आकांक्षा औफिस के लिए तैयार नहीं हुई है.

‘‘क्या बात है डार्लिंग? आज तो फेवरेट नाश्ता और वो भी समय से पहले? क्या डिमांड होने वाली है आज? हां, और तुम ये आज तैयार क्यों नहीं हुईं? नौकरीवौकरी छोड़ने का इरादा है क्या?‘‘

‘‘हां पंकज, नौकरी छोड़ने का ही इरादा है.‘‘

आमलेट गले में अटक गया पंकज के, ‘‘पगला गई हो क्या?‘‘ गुस्से में चिल्लाया, लेकिन तुरंत उसे अहसास हुआ कि गुस्से से बात नहीं संभाली जा सकती.

‘‘क्या हुआ बेटा? औफिस में कोई दिक्कत? मैं बात करूं चावला से?‘‘

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‘‘नहीं, दिक्कत घर में है, औफिस में नहीं.‘‘

‘‘नाराज हो मुझ से? कुछ चाहिए मेरी प्यारी अक्कू को?‘‘

‘‘हां, चाहिए.‘‘

‘‘क्या चाहिए, मेरी प्यारी अक्कू को?‘‘

खूब समझती है इन चिकनीचुपडी बातों को आकांक्षा. पहले की तरह ही गंभीर रहते हुए आकांक्षा बोली, ‘‘बच्चा चाहिए मुझे.‘‘

‘‘क्या…?‘‘

‘‘मां बनना चाहती हूं मैं. कितने साल और इंतजार करूं अब मैं?‘‘

‘‘तुम जानती हो अक्कू, अभी हम तैयार नहीं हंै. विला ले लें, फिर जितने चाहे बच्चे करना. नहीं रोकने वाला मैं.‘‘

‘‘हम नहीं पंकज, केवल तुम तैयार नहीं हो. मैं पिछले 4 साल से कह रही हूं तुम्हें. पहले गाड़ी, फिर फ्लैट और अब विला. कल कुछ और शामिल हो जाएगा तुम्हारी लिस्ट में.‘‘

‘‘मैं खुश हूं पंकज, जो है उस में और मेरे बच्चे भी खुश रहेंगे, जानती हूं मैं. भौतिक सुखों का कोई अंत नहीं है, मैं थक गई हूं, इस तरह दौड़तेदौड़ते. मुझे ठहराव चाहिए, बच्चा चाहिए मुझे.‘‘

‘‘सुनो तो आकांक्षा…‘‘

‘‘नहीं पंकज, ये मेरा आखिरी फैसला है. अगर तुम्हें नहीं मंजूर, तो मैं कल ही इस्तीफा दे दूंगी. आज छुट्टी ली है बस,‘‘ मुसकराते हुए आकांक्षा बोली.

पंकज को समझ नहीं आ रहा था, वो छुट्टी की बात सुन कर खुश हो या बच्चे की बात सुन कर चिंतित. फिलहाल उसे अपना ‘विला‘ का सपना टूटते हुए दिख रहा था और दिख रही थी आकांक्षा की ‘जिद‘.

जिद तो दोनों ने कर ली थी, लेकिन जिद इतनी भी आसानी से पूरी नहीं होती. एक तरफ, चंचल की सासू मां ने हंगामा मचाया हुआ था, तो दूसरी तरफ, पंकज भी सारे दिन परेशान रहा कि कैसे अपनी बीवी को समझाए वो, कहां, बच्चों के चक्कर में पड़ गई है?

बुध का दिन इसी हलचल में गुजर गया. गुरुवार की सुबह शिशिर ने अपनी नाराजगी जताते हुए फोन नहीं किया, न ही चंचल का फोन उठाया. पंकज को भी कुछ समझ नहीं आ रहा था, बात टालने के लिए वो भी टूर पर निकल गया, इतवार तक.

इतवार भी आ गया. चंचल को भी आज ही दिल्ली लौटना था, लेकिन चंचल ने न जाने का फैसला किया. इधर, आकांक्षा भी अपना सारा सामान पैक कर बैठी थी. पंकज को लगा था, 2-4 दिन दूर रहेगी आकांक्षा उस से तो खुद ही अक्ल आ जाएगी. पंकज के बिना आकांक्षा का कहां मन लगना था. लेकिन जो वो देख रहा था, वो अप्रत्याशित था.

‘‘आकांक्षा, क्या बचपना है ये?‘‘

‘‘बच्चों बिना कैसा बचपना? बच्चे तो इस घर में आने से रहे तो मैं ही बच्चा बन कर देख लेती हूं.‘‘

‘‘बस भी करो ये पागलपन… परेशान हो गया हूं मैं.‘‘

‘‘सो तो मैं भी. चलो परेशानी खत्म कर देते हैं. मैं ने साथ वाली कालोनी में एक रूम व किचन देख लिया है. तलाक के कागजात भिजवा दूंगी.‘‘

‘‘चलती हूं.‘‘

पंकज के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई हो मानो.

‘‘ठहरो आकांक्षा… बैठो, बात तो करो.‘‘

‘‘क्या बात करनी है पंकज? तुम्हारा फैसला मुझे पता है.‘‘

‘‘अच्छा, क्या पता है तुम को? यही ना कि मुझे अपने जैसा बेटा नहीं चाहिए, बल्कि तुम्हारे जैसी बेटी चाहिए. एकदम समझदार, मजबूत और निडर…‘‘

इस बार, आकांक्षा खुद को रोक नहीं पाई. पंकज को गले लगाते ही सालों का दर्द आंसुओं के साथ बहा दिया, आकांक्षा ने. रह गया तो उन दोनों के बीच का प्यार बस.

उधर, दिल्ली में जब शिशिर पूरे परिवार के साथ घर लौटा, तो चंचल और बच्चों को वहां न देख गुस्से से आगबबूला हो गया.

‘‘चंचल की इतनी हिम्मत? अभी बताता हूं उसे…‘‘

इस बार फोन नहीं किया, शिशिर ने, सीधा नासिक के लिए फ्लाइट ली. ‘‘बहुत बोलने लगी है, पीहर बैठ जाने को बोलूंगा न तो अपनेआप सीधी हो जाएगी.‘‘

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रात होतेहोते शिशिर चंचल के घर पहुंच ही गया. चंचल जैसे उसी के इंतजार में बैठी थी. डोरबैल बजी, चंचल ने दरवाजा खोला, एकदम सपाट चेहरे के साथ. न खुशी, न नाराजगी. लेकिन शिशिर तो नाराज था ही.

‘‘अपना सामान पैक करो चंचल… और तुम घर में क्यों नहीं हो? यहां क्यों हो? चल क्या रहा है दिमाग में तुम्हारे.‘‘

‘‘हाथपैर धो कर खाना खा लो शिशिर, डिनर तैयार है. बाद में बात करते हैं.‘‘

तभी आशु आ कर शिशिर से लिपट गया, ‘‘पापा आ गए… पापा आ गए.‘‘

बेटे को देख कर शिशिर अपना गुस्सा भूल गया, कुछ देर को. और फ्रेश होने चला गया.

डिनर के बाद चंचल ने उसे छत पर बुलाया, ‘‘हम्म, बताइए, क्या बोल रहे थे आप?‘‘

‘‘क्या बोलूंगा? तुम फोन क्यों नहीं उठा रही हो? और घर क्यों नहीं पहुंची अब तक?‘‘

‘‘क्या आप को सच में नहीं पता शिशिर?‘‘

‘‘अगर ये तुम्हारे बेकार से सर्टिफिकेट कोर्स और जौब के लिए है तो मुझे कोई बात नहीं करनी इस बारे में. तुम अच्छे से जानती हो, मां को बिलकुल पसंद नहीं ये सब और बच्चे…? बच्चों का भी खयाल नहीं आया तुम्हें? उन्हें कौन देखेगा?‘‘

‘‘शांत हो जाओ शिशिर, बात तो मुझे भी करनी है आप से और इसी बारे में करनी है, लेकिन इस तरह नहीं.‘‘

‘‘जो कौर्स और जौब तुम्हारे लिए बेकार है, वो मेरी आत्मनिर्भरता है. और इतने सालों से बच्चों को देख रही हूं न, आगे भी देख लूंगी.‘‘

‘‘मुझे नहीं पसंद, कह दिया न…‘‘

‘‘बात आप की पसंद की नहीं है, मेरे अस्तित्व की है.‘‘

‘‘तो ठीक है, आज से मेरे घर के दरवाजे बंद तुम्हारे लिए…‘‘

‘‘ठीक है, आप जब चाहें, जा सकते हैं.‘‘

इतना शांत जवाब? शिशिर अंदर तक हिल गया. सिर पकड़ कर बैठ गया, दस मिनट.

‘‘चंचल, क्या तुम सच में मेरे बिना रहना चाहती हो?‘‘

‘‘नहीं… मैं आप के साथ रहना चाहती हूं, लेकिन अपनी पहचान के साथ.‘‘

सुबकते हुए शिशिर बोला, ‘‘ठीक है, सुबह चलो साथ.‘‘

‘‘और मांजी?‘‘

‘‘परेशान मत होओ, सुबह सब साथ चलते हैं. सुहाना मैं और तुम, जब सब साथ मिल कर मनाएंगे तो मां भी मान ही जाएगी.‘‘

दोनों के चेहरे पर प्यार भरी मुसकराहट आ जाती है.

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जिद: भाग 3- क्या परिवार से हटकर चंचल कुछ सोच पाई

लेखिकारिजवाना बानो ‘इकरा’

‘‘हम्म… मुझे लगता था कि तेरे पास बंगला है, गाड़ी है, पैसा है, सब है तो तू तो बहुत खुश होगी. लेकिन जब अंकल ने बताया कि तुम साल में एक ही बार पीहर आती हो, तो कुछ खटका सा हुआ. सब ठीक है न चंचल? तुम बिजी रहती हो, इसीलिए कम आ पाती हो न घर?‘‘

अब बारी चंचल की थी, ‘‘हां, बिजी तो रहती हूं. 2 बच्चे, सासससुर, जेठजेठानी और पतिदेव. उस पर से इतनी बड़ी कोठी. कहां समय मिलता है?‘‘

चंचल की आंखों का शून्य, लेकिन आकांक्षा पढ़ चुकी थी, ‘‘और जौब…? तुझे तो अपनी आजादी बहुत पसंद थी. जौब क्यों नहीं की तुम ने?‘‘

‘‘शिशिर…‘‘

‘‘शिशिर? तुम ने बात की थी न शादी से पहले ही उस से तो…? फिर क्या बात हुई?‘‘

‘‘हां, की थी, लेकिन मांजी को पसंद नहीं और शिशिर भी मां का कहा नहीं टाल सकते. सो, अब सुहाना और आशु ही जौब है मेरी,‘‘ मुसकराते हुए चंचल बोली.

‘‘हम्म…तू खुश है?‘‘

‘‘हां बहुत, सबकुछ तो है मेरे पास, किस बात की कमी है?‘‘

तभी भाई का फोन आ गया, ‘‘दीदी, आशु आप को ढ़ूंढ़ रहा है तब से. रोरो कर बुरा हाल कर लिया है अपना. आप आ जाइए, जल्दी.‘‘

‘‘ओह्ह, आई मैं बस. तब तक उसे तुम किंडर जौय दिला लाओ. थोड़ा ध्यान भटकेगा उस का. मैं पहुंच ही रही हूं बस,‘‘ फोन डिस्कनैक्ट होने के साथ ही चंचल उठ खड़ी हुई.

‘‘निकलना होगा अक्कू मुझे. आशु रो रहा है. आते वक्त नाना के साथ खेलने में इतना बिजी था कि मैं ने डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा.‘‘

‘‘अच्छा सुन, फोन करना… और मिलती भी रहना अब, बिजी मैडम,‘‘ गले लगाते हुए आकांक्षा ने बोला.

हड़बड़ाहट में भी चंचल के चेहरे पर मुसकान आ गई. ‘‘मिलते हैं. चल, बाय. खयाल रखना अपना. मैं फोन करती हूं.‘‘

10 मिनट बाद चंचल अपने घर थी और आशु में बिजी हो गई. उधर आकांक्षा भी अपने वीकेंड वाले काम निबटाने में लग गई है. सबकुछ रुटीन जैसा दिख रहा है, चल भी रहा है, लेकिन दोनों के मन में उथलपुथल मची है.

अपनेअपने रुटीन में बिजी ये दोनों सहेलियां, जिन के पास खुद के बारे में सोचने का समय नहीं होता, वो दोनों ही एकदूसरे के बारे में सोच रही हैं, बल्कि सोचे ही जा रही हैं.

चंचल की आंखों के सामने से आकांक्षा को रोना नहीं आ रहा. और आकांक्षा के जेहन से चंचल के ये शब्द, ‘‘सबकुछ तो है मेरे पास, किस बात की कमी है?‘‘

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आकांक्षा जानती है कि इस बात का मतलब है कि जो दिख रहा है, वो सच नहीं है. इधर चंचल आकांक्षा के साथसाथ मौडल मीनाक्षी के बारे में भी सोच रही थी. सब से कमजोर बैकग्राउंड होने के बाद भी उस ने वो पा लिया, जो उस ने चाहा था. उस के पास सब से ज्यादा जो था, वो थी ‘जिद‘, वरना उस के सपनों का कौन मजाक नहीं उड़ाता था कालेज में.

रविवार के बाद सोमवार भी इसी तरह गुजर गया. न औफिस में मन लगा आकांक्षा का, न घर में. मांपापा, भाईबच्चे, सब के होते हुए भी चंचल अपने में खोई सी रही. जाने क्या था वो, जो दोनों के मन में बीज ले रहा था.

मंगल की शाम को चंचल ने भाई को आवाज लगाई, ‘‘मनु, ओ मनु…‘‘

‘‘आया दीदी.‘‘

‘‘एक बात बता… एमबीए कंपलीट हुए मुझे 10 साल हो गए न, इतना गैप हो जाने के बाद कोई जौब मिलेगी क्या मुझे?‘‘

‘‘जौब? अचानक से दीदी? जीजाजी से पूछा आप ने? और समधिनजी, उन को बुरा लगा तो…?‘‘

‘‘मैं ने जो पूछा, उस में से किसी एक बात का भी जवाब नहीं दिया तू ने. तेरे जीजाजी और समधिनजी को नहीं करनी जौब. मुझे करनी है जौब. अब तू कुछ हैल्प कर सकता है तो बता या मैं कुछ और सोचूं?‘‘

अपनी दीदी में अचानक से आए आत्मविश्वास को देख आश्चर्यमिश्रित खुशी से मनु बोला, ‘‘अरे, करूंगा क्यों नहीं? लेकिन सच बात यह है कि इतने गैप के बाद आप को अच्छा पैकेज मिलना मुश्किल है. बहुत स्ट्रगल रहेगा, जौब मिलना भी एक मुश्किल टास्क रहेगा. कंपनियां एक्सपीरियंस्ड लोगों को पहले बुलाती हंै.‘‘

‘‘अच्छा…‘‘ मायूस हो गई चंचल.

‘‘अरे, इस में उदास होने वाली क्या बात है? पूरी बात तो सुनिए.‘‘

‘‘सुना…‘‘

‘‘वर्क फ्रौम होम कर सकती हैं आप दीदी. शेयर मार्केट की करंट स्ट्रेटेजी समझने के लिए एक सर्टिफिकेट कोर्स कर लो आप. फिर आप अपने हिसाब से औनलाइन टाइम स्पैन सलैक्ट कर पाएंगी. और बच्चों को भी देख पाएंगी.‘‘

‘‘हम्म…. ठीक.‘‘

‘‘मुझे कल तक का समय दो, मैं पूरी डिटेल्स पता कर के बताता हूं आप को.‘‘

इधर, डिनर पर पंकज, हमेशा की तरह अपनी कंपनी और मालिक संचेती के बखान किए जा रहा था, लेकिन आकांक्षा का ध्यान न खाने में था और न ही पंकज की बातों में. डिनर के बाद पंकज ने पूछा भी, ‘‘तबीयत तो ठीक है न तुम्हारी? इतवार से देख रहा हूं तुम्हें, बुझीबुझी सी हो. और तुम ने बताया भी नहीं कि तुम्हारी सहेली से मुलाकात कैसी रही? क्या झटका दे दिया उस ने मेरी जान को?‘‘

‘‘कुछ भी तो नहीं,‘‘ एक फीकी मुसकान के साथ आकांक्षा उठ कर अपने काम में लग गई.

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पंकज ने भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया. वह अपनी जिम्मेदारी पूरी कर चुका है. अब न बताएं तो आकांक्षा की मरजी. आकांक्षा भी जानती थी कि औपचारिकता थी वो, दोबारा नहीं पूछने वाला पंकज.

मंगल की रात दोनों सहेलियों के लिए मंगलकारी या यों ही कहिए, क्रांतिकारी रही. आकांक्षा ने खुद को इस बात के लिए तैयार किया कि वो पंकज को साफसाफ शब्दों में बात करेगी कि वो मां बनने की खुशी से अब और दूर नहीं रह सकती और चंचल ने तमाम कोर्सेज देख कर, दिल्ली के एमिटी कालेज में एप्लाई भी कर दिया.

बुधवार की सुबह दोनों के लिए परीक्षा की घड़ी थी जैसे. चंचल शिशिर के फोन का इंतजार कर रही थी और आकांक्षा पंकज के जागने का.

‘‘हैलो, कैसी है मेरी दो जान? और जान की स्वीट सी मम्मी? सुबह हुई या नहीं?‘‘

‘‘हैलो शिशिर, हम सब अच्छे हैं. आप लोग सब कैसे हैं?‘‘

शिशिर को याद आया कि सालों से चंचल ने उसे नाम से नहीं बुलाया है, एकदम से अपना नाम सुन कर चैंक सा गया, ‘‘हम भी बढ़िया. क्या बात है चंचल? सब ठीक है न?‘‘

‘‘हां, सब बढ़िया. क्यों, क्या हुआ?‘‘

‘‘लगा मुझे, अच्छा सुहाना से बात कराओ तो…‘‘

‘‘शिशिर, मुझे आप से कुछ बात करनी है?‘‘

‘‘हां, हां, बताओ.‘‘

‘‘मैंने एमिटी से शेयर मार्केट में स्पेशलाइजेशन सर्टिफिकेट कोर्स एप्लाई किया है.‘‘

‘‘अच्छा? क्यों अपने गरीब भाई को हैल्प करनी है क्या तुम्हें?‘‘ व्यंग्यात्मक हंसी हंसते हुए शिशिर बोला.

आगे पढ़ें- चिकनीचुपडी बातों को आकांक्षा….

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Anupama की मांग भरेगा अनुज, बा समेत शाह परिवार होगा हैरान

सीरियल अनुपमा में नए-नए ट्विस्ट आ रहे हैं, जिसे दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं. वहीं सोशलमीडिया पर फैंस अनुज और अनुपमा की शादी से जुड़ी फोटोज वायरल कर रहे हैं, जिसे देखकर अब मेकर्स ने भी अनुपमा की जिंदगी में अनुज को लाने का प्लान कर दिया है. अपकमिंग एपिसोड में फैंस को अनुज को अनुपमा की शादी दिखने वाली है. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

घर में अकेले रह गए काव्या, बा और तोषू

अब तक आपने देखा कि दीवाली सेलिब्रेशन में जहां अनुपमा अपने नए घर में एंजौय कर रही है तो वहीं शाह हाउस में मातम सा छाया हुआ है. दरअसल, बापूजी, किंजल, पाखी, समर और नंदनी सभी अनुपमा के साथ सेलिब्रेशन की धूम मचाते हुए नजर आ रहे हैं. वहीं काव्या, बा और तोषू अकेले घर में रह गए हैं. हालांकि बा पूरी कोशिश करने वाली है कि अनुपमा और अनुज से बदला ले सके, जिसके चलते वह अनुपमा के डांस एकेडमी जाती हैं.

 

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अनुज भरेगा अनुपमा की मांग

 

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जहां अनुपमा और अनुज अपनी दोस्ती को एंजॉय करते हुए दिवाली मनाते हैं वहीं बा आकर रंग में भंग डाल देती हैं. अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि बा एक बार फिर अनुपमा और अनुज के रिश्ते पर सवाल उठाते हुए कहेंगी कि अगर अनुपमा का साथ देना चाहते हो तो दोस्त बनकर नहीं जीवनसाथ बनकर साथ दो क्योंकि बिना रिश्ते का प्यार अय्याशी और बदनामी होता है, जिसके जवाब में अनुज सिंदूर से अनुपमा की मांग भरता हुआ नजर आएगा. वहीं अनुज के इस कदम  से जहां अनुपमा हैरान होगी तो वहीं पूरा शाह परिवार चौंक जाएगा. हालांकि देखना होगा कि अनुज के इस कदम से क्या होगा अनुपमा का रिएक्शन.

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यूपी में “हर घर नल” योजना की केंद्र सरकार ने की खुलकर तारीफ

बुंदेलखंड और विंध्‍य समेत प्रदेश भर के ग्रामीण इलाकों में पीने के साफ पानी की आपूर्ति पर पर लगातार काम कर रही राज्‍य सरकार की 735 पेयजल आपूर्ति योजनाओं पर केंद्र सरकार ने अपनी मुहर लगा दी है. राज्यस्तरीय योजना स्वीकृति समिति ने गुरुवार को ग्रामीण क्षेत्रों में नल से पानी कनेक्शन के लिए राज्‍य सरकार की ओर से भेजे गए  1,882 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है . इस बीच केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ट्वीट कर यूपी में हर घर नल योजना की प्रगति की जमकर तारीफ की है. केंद्रीय मंत्री ने राज्‍य सरकार की तारीफ करते हुए कहा है कि यूपी ने हर घर नल से जल योजना को जन आंदोलन बना दिया है. केंद्र सरकार ने हर घर नल योजना को लेकर पहली बार किसी राज्‍य की इस तरह तारीफ की है .

बैठक में स्‍वीकृत की गई इन योजनाओं से 33 जिलों के 1262 गांवों की 39 लाख की आबादी को फायदा होगा. बैठक में समिति द्वारा 735 योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गयी. इसके तहत 4.03 लाख ग्रामीण परिवारों को पानी के कनेक्शन दिए जाने की योजना है . मौजूदा समय में प्रदेश में 2.64 करोड़ में से कुल 34 लाख (12.9%) ग्रामीण परिवारों को उनके घरों तक नल का पानी मिल रहा है.

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने अपने ट्वीट मे इस बात का भी उल्लेख किया है कि राज्य में 1882 करोड़ रुपये के प्रस्ताव स्वीकृत किए गए हैं ताकि गांवों में आसानी से नल कनेक्शन पहुंचाए जा सकें. इससे 1262 गांवों के 39 लाख लोगों को लाभ मिलेगा. उन्‍होंने लिखा है कि योगी जी की सरकार ने वर्ष 2021-22 में 78 लाख परिवारों को नल कनेक्शन देने की संवेदनशील योजना बनाई है. यूपी में “जल जीवन भी और अब मिशन भी “ बन चुका है.

यूपी में युद्ध स्तर पर हर घर को नल से जल देने की योजना पर काम तेजी से किया जा रहा है. सरकार अगले महीने बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र के सैकड़ों गांवों में हर घर को नल से जल देने की शुरुआत करने जा रही है. इसके लिए कई इलाकों में ट्रायल रन चल रहा है.

पूरब की तरक्की नया “गेटवे” पूर्वांचल एक्सप्रेसवे

पूर्वांचल की बदहाली, गरीबी, बेबसी और अति पिछड़ेपन का दंश कभी लोकसभा में गाजीपुर के तत्कालीन सांसद विश्वनाथ गहमरी ने इस भावुकता से उठाया था कि सदन में बैठे अधिकांश माननीयों की आंखें नम हो गई थीं. पूरब के लोगों की आंखें एक बार फिर छलकने को बेताब हैं. पर, इस बार आंसू खुशी के होंगे, समृद्धि के पूरे होते सपनों के होंगे, देश की अर्थव्यवस्था में सिरमौर बनने के लिए बढ़ते कदम के होंगे. अवसर होगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों 341 किमी लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के उद्घाटन का. इस एक्सप्रेसवे के रूप में पूरब के लोगों को तरक्की का “गेटवे” भी मिल जाएगा.

पूर्वांचल के लोगों के लिए दिल्ली अब दूर नहीं होगी, गाजीपुर से सिर्फ 10 घण्टे में देश की राजधानी पहुंचा जा सकेगा. पहले इसका दोगुना या इससे भी अधिक समय लगता था. योगी सरकार ने यूपी में रोड कनेक्टिविटी को अर्थव्यवस्था के मजबूत प्लेटफार्म के रूप में तैयार किया है. सीएम के निर्देश पर उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को भी इसी मंशा से विकसित किया गया है. पूर्व की सरकारों में जिन जिलों में पारंपरिक सड़कें ही चलने लायक नहीं थीं, वहां सिक्स लेन एक्सप्रेसवे की सौगात विकास की नई इबारत लिखने जा रही है. यह एक्सप्रेसवे सिर्फ आमजन की आवागमन सुगमता का ही मार्ग नहीं है बल्कि निवेश व औद्योगिक विकास से रोजगार का भी नया द्वार खोलने वाला है.

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के दायरे में आने वाले जनपदों में कारोबारी गतिविधियों को नया विस्तार तो मिलेगा ही, एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ इंडस्ट्रियल क्लस्टर स्थानीय श्रम शक्ति को सेवायोजित भी करेंगे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के समीप पांच इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं. इसके लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की तरफ से नौ हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि चिन्हित भी कर ली गई है. चूंकि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के दायरे में आने वाले अधिकांश जिले कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था वाले हैं, इसलिए इंडस्ट्रियल क्लस्टर में पहली प्राथमिकता फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स पर है. इसके अलावा टेक्सटाइल, रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद, बेवरेज, केमिकल, मेडिकल उपकरणों से जुड़ी फैक्ट्रियां भी स्थापित होंगी. इन फैक्ट्रियों में स्थानीय श्रम शक्ति को रोजगार मिल सके, इसके लिए प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर उन्हें प्रशिक्षित भी किया जाएगा.

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और बलिया लिंक एक्सप्रेसवे से जोड़कर तीव्रतम होगी विकास की रफ्तार
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को निर्माणाधीन गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और बलिया लिंक एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा जाएगा. दो लिंक एक्सप्रेसवे से जोड़कर पूर्वी उत्तर प्रदेश में विकास की रफ्तार तीव्रतम की जाएगी. इससे गोरखपुर, संतकबीर नगर, बलिया समेत करीब आधा दर्जन अतिरिक्त जिले पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएंगे.

आपात स्थिति में वायुसेना के भी काम आ सकेगा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे

पूर्वांचल एक्सप्रेस वे को इतना मजबूत बनाया गया है कि आपातकालीन आवश्यकता पर वायुसेना अपने लड़ाकू विमान की इस पर लैंडिंग भी कर सकती है. एक्सप्रेसवे पर सुल्तानपुर में बकायदे 3.2 किमी लंबी सड़क को वायुसेना की हवाई पट्टी के रूप में ही विकसित किया गया है. प्रधानमंत्री द्वारा सुल्तानपुर में एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किए जाने से पूर्व वायुसेना यहां लड़ाकू विमान की ट्रायल लैंडिंग कर सकती है.

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे : एक नजर में

शिलान्यास – 14 जुलाई 2018
एक्सप्रेसवे का प्रारंभिक स्थान- एनएच 731 के लखनऊ-सुल्तानपुर रोड पर स्थित लखनऊ का चांदसराय गांव
अंतिम स्थान – एनएच 19 पर गाजीपुर का हैदरिया गांव (यूपी-बिहार बॉर्डर से 18 किमी पहले)
ले आउट – पूर्णतः प्रवेश नियंत्रित 6 लेन, कुल लम्बाई 340.824 किमी
परियोजना की लागत – 22494.66 करोड़ रुपये, भूमि अधिग्रहण समेत
कवर हुए जनपद – 9 (लखनऊ, बाराबंकी, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अम्बेडकरनगर, आजमगढ़, मऊ व गाजीपुर)

बीमारू और आपराधिक छवि से बाहर निकल रहा आजमगढ़

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की छवि बीमारू जिले, माफिया और आतंकवादी सरपरस्ती की बन गई थी. योगी सरकार के प्रयास से यह छवि बदल रही है. दो लोकसभा, 10 विधानसभा क्षेत्र, 8 तहसीलें और 22 ब्लॉक आजमगढ़ का  भूगोल है. पिछले चार दशक तक उसके इतिहास के पन्नों में आतंक और बीमारू शब्दों की यथार्थ बारंबारता रही.

 कभी इस जिले की पहचान

अयोध्या सिंह हरिऔध व श्याम नारायण पांडेय जैसे साहित्य सर्जकों से रही, ब्लैक पॉटरी जैसे खूबसूरत कुटीर उद्योग से रही, अस्सी के दशक से वह जिला माफियागिरी और टेरर कनेक्शन के नाम पर बदनाम हो गया. निवेश और विकास की बात तो दूर, यहां स्थापित कारोबारी ही पलायित होने लगे. किसी भी बड़े शहर में आजमगढ़ का नाम खौफ का पर्याय हो चला था. इन सबके बावजूद सीटों के गणितीय फॉर्मूले में तत्कालीन सत्ताधीश तमाशा देखते रहे.

बीते साढ़े चार सालों से आजमगढ़ माफिया की बजाय विकास का गढ़ बनने की राह पर सरपट आगे बढ़ा है. वैसे तो यह जिला सपा का गढ़ माना जाता है लेकिन जिले की विकासपरक पहचान की पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की है. योगी जिले को राज्य विश्वविद्यालय की सौगात देने जा रहे हैं.

यह सच है कि आजमगढ़ कभी भारतीय जनता पार्टी का राजनीतिक किला नहीं रहा. लेकिन, यह भी उतना ही सच है कि इस जिले की पहली बार सुधि भाजपा सरकार ने ही ली. मार्च 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही योगी आदित्यनाथ ने आजमगढ़ के विकास को बहुत तवज्जो दी. मुख्यमंत्री ने आजमगढ़ की जनता से विश्वविद्यालय की स्थापना का वादा किया था और उसे पूरा भी कर दिखाया है. एक बात तो साफ हो गई है कि आने वाले दिनों में आजमगढ़ की नई पहचान उच्च शिक्षा के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में हो सकेगी. जबकि बीते चार दशकों में कभी हाजी मस्तान तो कभी दाऊद इब्राहिम,अबू सलेम, अबू बकर जैसे माफिया डॉन ही और कई बार बम ब्लास्ट के टेरर कनेक्शन जिले की बदनाम पहचान बन गए थे. साढ़े चार सालों में प्रदेश की कानून व्यवस्था का ऐसा बोलबाला हुआ है कि आजमगढ़ कभी माफिया पनाह मांगने लगे हैं.

आजमगढ़ की जनता ने समाजवादी पार्टी को सिर आंखों पर बैठाया लेकिन जनता को उसके नेताओं ने वोट बैंक तक ही सीमित रखा. 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां के लोगों ने मुलायम सिंह यादव को अपना रहनुमा बनाया तो 2019 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव को. इसके बावजूद आजमगढ़ के माथे पर बीमारू का कलंक चस्पा रहा. रहनुमा बनकर सपा नेता आजमगढ़ की जनता को ही भूल बैठे. राजनीतिक विरोधियों का क्षेत्र भले रहा लेकिन सीएम योगी ने जनता को विकास परियोजनाओं का उपहार देने में कभी भेदभाव नहीं किया. पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के माध्यम से आजमगढ़ के विकास के एक नई तस्वीर उभरने वाली है. इन दोनों एक्सप्रेसवे के जरिए आजमगढ़ प्रमुख कारोबारी और औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित होगा. इससे बड़े पैमाने पर स्थानीय रोजगार सृजित होगा. मुंबई और खाड़ी देशों को होने वाला युवाओं का पलायन भी रुकेगा. यही नहीं सीएम योगी के नियमित पर्यवेक्षण में यहां एयरपोर्ट भी बनकर तैयार है और जल्द ही आजमगढ़ और आसपास के लोगों को बड़े शहरों के लिए सीधी एयर कनेक्टिविटी हो जाएगी. इतना ही नहीं आजमगढ़ के पारंपरिक कुटीर शिल्प ब्लैक पॉटरी को भी अंतरराष्ट्रीय पहचान योगी सरकार ने ही दिलाई है. यह कुटीर उद्योग प्रोत्साहन के अभाव में दम तोड़ रहा था. सरकार ने इसे आजमगढ़ की ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) योजना में शामिल किया. ओडीओपी में शामिल होते की इस कुटीर उद्योग से जुड़े उद्यमियों के दिन बहुर गए हैं. इस कुटीर उद्योग की धमक और वैश्विक मंच पर भी होने लगी है.

चाइल्ड फ्री ट्रिप

मुंबई निवासी सुनीता के बच्चे 9वीं क्लास में थे, तो वे और उस के पति निलिन पुणे एक शादी में गए थे. शादी में जाना जरूरी था और बच्चों की परीक्षाएं थीं. बहुत सोचविचार के बाद पतिपत्नी बच्चों को खूब सम झाबु झा कर मेड को निर्देश दे कर 2 रातों के लिए पुणे चले गए थे.

वे बताती हैं, ‘‘पहले तो मेरा मन ही उदास रहा कि बच्चों को कोई परेशानी न हो जाए, हम सोसाइटी में भी नएनए थे. मैं भी कई दिन से घर में बोर हो रही थी. इस से पहले बच्चों को कभी अकेला नहीं छोड़ा था. पर जब चले गए तो हैरान रह गई. बेकार की जिस चिंता में मैं डरतेडरते गई थी, पहली रात में ही बच्चों से बात कर के इतनी खुशी हुई जब देखा दोनों मस्त हैं, अपनाअपना काम कर रहे हैं, हमारे बिना सब मैनेज कर लिया है, उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई है. तब जा कर मैं ने अपनी पहली चाइल्ड फ्री ट्रिप जी भर कर ऐंजौय किया. उस के बाद तो हम अकसर 1-2 रात के लिए दोनों घूम

आते, बच्चों ने भी यही कहा कि हम तो स्कूलकालेज में उल झे रहते हैं, आप लोग आराम से जाया करें.

‘‘बच्चे जब फ्री हुए तो उन के साथ कभी चले गए वरना फिर तो हम 2-3 रातों से 1 हफ्ते के ट्रिप पर भी आ गए और अब अकसर जाते रहते हैं. कुछ दिन वी टाइम बिता कर फ्रैश हो कर वापस लौटते हैं. मन खुश रहता है.’’

अब तो कोरोनाकाल के चलते लौकडाउन में फैमिली टाइम कुछ ज्यादा ही हो गया. बहुत से लोगों पर वर्क फ्रौम होम का काफी प्रैशर रहा, घर के अन्य सदस्यों की जरूरतें और बच्चों की औनलाइन क्लासेज के चलते पतिपत्नी को एकदूसरे के साथ बिताने के लिए फुरसत के पल बहुत ही मुश्किल से मिल रहे थे. दोनों पर काम का काफी प्रैशर रहा. शायद यही कारण है कि कुछ नौर्मल होने पर पतिपत्नी एकदूसरे के साथ कुछ क्वालिटी टाइम बिताने के लिए बच्चों के बिना ट्रिप प्लान करते दिखाई दिए जो शायद जरूरी भी हो गया था.

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एक मजेदार किस्सा

नीता तो अपना एक मजेदार किस्सा बताते हुए कहती हैं, ‘‘एक बार पति अपने औफिस की किसी मीटिंग में दूसरे शहर जा रहे थे. वहां मेरी एक अच्छी फ्रैंड रहती थी, मेरा मन हुआ कि मैं भी चली जाऊं और उस से मिल आऊं. एक ही बेटा है जो उस टाइम 8वीं क्लास में था. उस के दोस्त की मम्मी ने कहा कि बेटे को उन के पास छोड़ कर जा सकती हूं.

‘‘मैं एक रात के लिए चली गई. बेटे ने टाइम अपने फ्रैंड के घर इतना ऐंजौय किया कि उस के बाद कई दिन तक कहता रहा कि मम्मी, वापस किसी फ्रैंड के यहां मिलने जाओगी तो मैं रह लूंगा. उस के बाद हम पतिपत्नी जब भी बाहर गए, वह अकेला होने पर कभी अपने दोस्तों को बुला लेता, कभी उन के घर चला जाता. हम भी एक छोटा हनीमून टाइप चीज मना आते और बेटा भी अपना टाइम बढि़या ऐंजौय करता.’’

बहुत सारी हौस्पिटैलिटी इंडस्ट्री एडल्ट्स को इस तरह का टाइम बिताने के लिए कई तरह के औप्शंस और औफर देती रहती हैं. लग्जरी रिजौर्ट्स बढ़ते जा रहे हैं. कुछ एअरलाइंस तो छोटे बच्चों से दूर बैठने के लिए सीट्स चुनने का भी औप्शंस देती हैं. आइए अब इसी ट्रैंड पर बात करते हैं:

प्राइवेसी भी मस्ती भी

बच्चों के बिना पतिपत्नी का अकेले ट्रिप पर जाना नई बात नहीं है. 90 के दशक में कैरेबियन सिंगल्स रिजोर्ट ने इस आइडिया को सामने रखा था. यह ट्रैंड किसी को भी एक रूटीन से हट कर अपनी पर्सनल स्पेस देने की बात करता है. चाहे सनसैट क्रूसेस पर जाना हो, शानदार स्पा ट्रीटमैंट हो, किसी भी तरह की रोचक ऐक्टिविटी प्लान की जा सकती है.

आजकल इंडिया में यह ट्रैंड काफी कारणों से चलन में है. व्यस्त रूटीन, बच्चों की देखभाल और उन के कभी न खत्म होने वाले काम और अन्य जिम्मेदारियां निभातेनिभाते आजकल एडल्ट्स एकदूसरे के साथ टाइम बिताना भूल ही जाते हैं या चाह कर भी बिता नहीं पाते हैं. आजकल दोनों जब इस तरह का प्लान बनाते हैं, अच्छी जगह पर प्राइवेसी की आशा रखते हैं.

वी टाइम ऐंजौय

इंडिया में अकसर पार्टनर्स गोवा, जयपुर, कूर्ग और नौर्थ के हिल स्टेशंस पर जाना पसंद करते हैं. आजकल कई लोग थाईलैंड, मैक्सिको और सैशल्स जाना पसंद कर रहे हैं. एडल्ट्स औनली हौलिडेज में कैंडल लाइट डिनर्स,

स्कूबा डाइविंग, जंगल सफारीज और रेन फौरेस्ट का मजा लिया जा सकता है. पार्टनर्स अब वी टाइम को ऐंजौय करना चाहते हैं और कर भी रहे हैं.

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एडल्ट औनली हौलिडेज प्लान

– जहां भी जाना हो, ऐंडवांस में प्लान कर लें. ऐन मौके पर बुकिंग की परेशानी हो सकती है.

– दोनों मिल कर ऐसी चीजों को ऐक्स्प्लोर करें जिन में दोनों की ही सामान रुचि हो.

– यदि पहली बार बच्चों के बिना जा रहे हैं तो शुरू में 2 या 3 दिनों के लिए ही जाएं.

– अगर आप बच्चों को अकेले छोड़ कर जा रहे हैं तो धीरेधीरे इस आइडिया पर उन से बाते करते हुए कई बातों का ध्यान रखने के लिए सम झाते रहें जिस से वे मैंटली तैयार हो जाएं.

– हर तरह की इमरजैंसी में आप बच्चों से बात करने की पहुंच में हों, इस बात का ध्यान रखें.

– जब बच्चे साथ नहीं हैं, तो कुछ रोमांटिक नए अनुभव ले कर रोमांस रिचार्ज करें.

– कपल स्पा थेरैपी से अपनी इस छुट्टी को यादगार बना सकते हैं.

– अपनी अनुपस्थिति में किसी भरोसे के व्यक्ति को उन्हें बीचबीच में देखने के लिए कह कर जाएं.

– बच्चों को वीडियोकौल कर के उन्हें जुड़े रहने का एहसास दिलाते रहें.

– जिसे बच्चों की केयर करने के लिए कह कर जा रहे हैं, उन्हें बच्चों की मैडिकल केयर के बारे में भी जरूर बता दें.

Festive स्ट्रैस नहीं चेहरे पर दिखेगा सिर्फ ग्लो

त्योहार जहां परिवार के लिए खुशियां ले कर आते हैं, वहीं घर की महिलाओं के लिए घर के ढेर सारे काम के साथसाथ ढेर सारी थकान भी लाते हैं. घर की महिलाएं शौपिंग, कुकिंग, क्लीनिंग में इतनी अधिक बिजी हो जाती हैं कि त्योहारों में खुद पर ध्यान देना ही भूल जाती हैं जिस का परिणाम थकान के रूप में उन के चेहरे पर साफ दिखाई देने लगता है. ऐसे त्योहारों पर आप कुछ खास तरह के डी स्ट्रैस स्किन केयर प्रोडक्ट्स से अपने चेहरे के स्ट्रैस को दूर करने के साथसाथ नैचुरल ग्लो भी पा सकती हैं.

आइए, जानते हैं इस संबंध में कौस्मैटोलौजिस्ट भारती तनेजा से:

कौफी केयर

इस केयर में कौफी स्क्रब के साथ मसाज क्रीम व पैक होता है, जिस से चाहे आप हाथपैरों की केयर करें या फिर स्किन की, यह आप के पूरे शरीर को डी स्ट्रैस कर के आप को फ्रैश फील करवाने का काम करता है. कौफी में ऐंटीऔक्सीडैंट्स प्रौपर्टीज होने के कारण यह स्किन को अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाने के साथसाथ ब्लड फ्लो को इंप्रूव करने का भी काम करता है, जिस से स्किन की ओवरऔल हैल्थ इंप्रूव होती है.

साथ ही यह स्किन पर जमी धूलमिट्टी व गंदगी को रिमूव कर के स्किन पर ग्लो व व्हाइटनिंग इफैक्ट भी लाता है. जिस से स्किन चमकदमक उठती है. जब कौफी क्रीम का इस्तेमाल किया जाता है तो उस से स्किन रिलैक्स, रिजनरेट होने के साथसाथ उस का स्ट्रैस भी कम हो जाता है.

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ऐसैंशियल औयल्स

स्किन को डी स्ट्रैस करने की बात हो और ऐसैंशियल औयल्स का जिक्र न हो ऐसा हो ही नहीं सकता क्योंकि इन औयल्स से स्किन पर मसाज करने मात्र से स्किन पर ग्लो तो आता ही है, साथ ही स्किन का स्ट्रैस भी कौफी कम हो जाता है और स्किन अंदर से खिल उठती है.

फेसेज कनाडा अर्बन बैलेंस 6 इन 1 नाम से स्किन मिरैकल फेशियल औयल आता है, जिस से स्किन की मसाज करने मात्र से स्किन स्ट्रैस फ्री हो कर उस पर एकदम से ग्लो नजर आने लगता है. तभी तो इस का नाम मिरैकल फेशियल औयल है.

जब बाल खिलेखिले व क्लीन नजर आते हैं तो चेहरा अपनेआप खिला व स्ट्रैस फ्री हो उठता है. बालों की केयर के लिए बीटी हेयर औयल व हेयर टौनिक को मिला कर इस्तेमाल करने से बालों में बहुत ही बेहतर रिजल्ट मिलता है. जहां लैवेंडर औयल की खूबियां आप को डी स्ट्रैस करने में मददगार होती हैं, वहीं रोज मैरी औयल आप के बालों की ग्रोथ को अच्छा करने के साथसाथ आप को महका भी देता है.

यह औयल ब्रेन के निंबिक पार्ट को, जोकि हमारे इमोशंस को कंट्रोल करता है, उसे फील गुड करवाने का काम करता है, जिस से हम डी स्ट्रेस हो कर हमारी ओवरऔल स्किन पर उस का असर साफ नजर आता है.

अरोमा थेरैपी

अरोमा थेरैपी हमारी स्किन को डी स्ट्रैस करने का काम करती है. इसे सूंघने भर से हमारी स्किन डी स्ट्रैस हो जाती है. क्योंकि इस की भीनी भीनी खुशबू माइंड को फ्रैश कर आप की स्किन के सारे स्ट्रेस को कम जो कर देती है. इसे स्लीप या डी स्ट्रैस औयल भी कहते हैं.

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रोज मिस्ट

जैसा नाम वैसा काम. यह स्किन को रिलैक्स, कूलिंग इफैक्ट देने के साथसाथ पोर्स को भी श्रिंक करने का काम करता है. आप चाहे कितने भी स्ट्रैस में क्यों न हों, आप का चेहरा भागदौड़ के कारण कितना भी मुरझाया हुआ क्यों न हो लेकिन जैसे ही आप चेहरे पर रोज मिस्ट का स्प्रे या फिर रोज मिस्ट अप्लाई करती हैं तो चेहरे की सारी थकान छूमंतर हो जाती है और चेहरे पर पिंक ग्लो नजर आने लगता है.

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मां और बच्चों की केयर से जुड़ी सावधानियों के बारे बताइए?

सवाल-

मेरी उम्र 37 वर्ष है और मेरी 7 महीने में प्रीमैच्योर डिलिवरी हुई है. मैं पूरी प्रैगनैंसी के दौरान लगातार मैडिसिन पर चल रही हूं. मेरा दूध बच्चे के लिए पूरा नहीं हो पाता है इसलिए मैं उसे फौर्मूला मिल्क दे रही हूं. लेकिन उस से बच्चे का पेट साफ ही नहीं हो पाता है. लगातार बच्चे को कौन्सिपेशन रहती है. कृपया बताएं कि मैं क्या करूं?

जवाब

आप के बच्चे का जन्म 7वें महीने में हुआ है. समय से पहले जन्म होने के कारण ऐसे बच्चों का संपूर्ण शारीरिक व मानसिक विकास सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त पोषण का मिलना बेहद आवश्यक हो जाता है क्योंकि ऐसे बच्चों का जीवन तब तक संकट में होता है जब तक इन का पूरा टर्म यानी 36 हफ्ते पूरे न हो जाएं. ऐसे में बच्चे की मां के गर्भ के समान तापमान में संरक्षित रखने के लिए जितना उसे नियोनेटल केयर यूनिट में रखा जाना आवश्यक होता है उतना ही जरूरी है उसे आवश्यक न्यूट्रिशन प्रदान करना. इसलिए बच्चे की मां का दूध दिया जाना चाहिए. अगर आप का दूध नहीं बन पा रहा है तो अपने लिए न्यूट्रिशनिस्ट की मदद से संपूर्ण आहार सुनिश्चित करें. बच्चे को 8-12 बार फीड करने की कोशिश करें क्योंकि जब बच्चा स्तनपान करता है तो ऐसे हारमोन बनते हैं जिन से अपनेआप दूध बनने लगता है. खाने में दूध, अलसी, ओट्स और गेहूं का सेवन बढ़ाएं.

सवाल-

मेरी 2 महीने की बच्ची है. मेरे घर में सभी सदस्य कोरोना पीडि़त हो गए हैं. मैं थोड़ा डरी हुई हूं कि क्या मुझे अपनी बच्ची को स्तनपान करवाना चाहिए? मेरे घर के सभी सदस्य ऐसा करने से मना कर रहे हैं?

जवाब

वर्ल्ड हैल्थ और्गेनाइजेशन द्वारा साफतौर पर यह दिशानिर्देश जारी किए हैं कि हर मां कोरोना प्रभावित होने के बावजूद अपने बच्चे को स्तनपान करवा सकती है. यहां आप तो कोरोना से प्रभावित हैं भी नहीं तो आप को बिना किसी संशय के बच्चे को स्तनपान करवाते रहना चाहिए. आप का दूध ही बच्चे के लिए सुरक्षाकवच का काम करेगा, फिर चाहे वह कोरोना हो या अन्य कोई भी संक्रमण. साथ ही आप को बच्चे के आहार में गोजातीय दूध आधारित उत्पादों जैसेकि फौर्मूला मिल्क से बचना चाहिए. आखिर में यह बेहद आवश्यक है कि आप बच्चे का नियमित चैकअप करवाती रहें. हर ऐक्टिविटी पर रखें नजर. जैसे ही आप को कोई लक्षण दिखाई दे तुरंत डाक्टर के पास जाएं.

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सवाल

मैं ने 40 वर्ष की आयु में आईवीएफ की मदद से 2 जुड़वां बच्चों को जन्म दिया है. मेरी डिलिवरी औपरेशन से हुई है. औपरेशन की वजह से मेरा शरीर बेहद कमजोर हो गया है. मैं दोनों बच्चों को ठीक से फीड नहीं करा पाती, उन्हें ज्यादातर गाय का दूध देना पड़ता है. अब बच्चे भी ऊपर का दूध पीने में ज्यादा सहज रहते हैं. अगर मैं उन्हें फीड करवाने की कोशिश भी करती हूं तो वे पीते नहीं हैं.

जवाब-

औपरेशन से डिलिवरी होने की वजह से आप यकीनन अपने बच्चों को पहले घंटे में अपना दूध नहीं पिला पाई होंगी. मां का पहला दूध बच्चे के लिए प्रतिरक्षा का काम करता है. ऐसे में आप के लिए बहुत जरूरी हो जाता है कि आप बच्चों को अपना दूध दें. अगर वे आप का दूध नहीं पीते हैं तो अपना मिल्क, पंप की मदद से स्टरलाइज किए गए कंटेनर में निकालें और बच्चों को चम्मच की मदद से पिलाएं.

गायभैंस का दूध बिलकुल नहीं दें क्योंकि इस दूध से बच्चों को ऐलर्जी और अन्य हैल्थ रिस्क हो सकते हैं. इस दूध के सेवन से बच्चे में इन्फैक्शन का खतरा बढ़ जाता है. अगर आप को लगता है कि 2 बच्चों के लिए आप का दूध पर्याप्त नहीं है तो नियोलेक्टा का 100% ह्यूमन मिल्क भी आप बच्चों को दे सकती हैं क्योंकि यह उत्पाद डोनेट किए गए ब्रैस्ट मिल्क को ही पाश्च्युराइज्ड कर के बनाया जाता है. लेकिन पहले डाक्टर से सलाह जरूर कर लें.

सवाल-

मेरा बच्चा 4 महीने का है. उसे मेरी मदर इन ला चम्मच से साधारण पानी और अन्य सभी तरह के पेयपदार्थ पिलाती हैं और कभीकभी आलू मैश कर के भी देती हैं. मैं अपने बच्चे की सेहत को ले कर चिंतित हूं. मैं ने सभी जगह पढ़ा है और डाक्टर भी यही सलाह देते हैं कि 6 महीने तक बच्चे को सिर्फ मां का दूध दें और कुछ भी ऊपर का खानपान नहीं देना चाहिए. क्या इस से मेरे बच्चे की पाचनक्रिया पर प्रभाव पड़ेगा?

जवाब-

घर में अकसर बड़ेबुजुर्ग अपने देशी नुसखे बच्चों पर आजमाते हैं. हालांकि उन की भावना अच्छी होती है लेकिन एक डाक्टर होने के नाते मैं इस की सपोर्ट नहीं करती. बच्चे की पाचनक्रिया विकसित हुए बिना उसे अनाज या अन्य खाद्यपदार्थ नहीं देना चाहिए. इतना ही नहीं अगर गरमी का मौसम हो तो भी बच्चे को बारबार और आवश्यकतानुसार स्तनपान कराने पर उसे पानी या किसी अन्य तरल पेय की आवश्यकता नहीं होती है. इसलिए दाई या अन्य लोगों के कहने पर पानी आदि अन्य पेयपदार्थ देने की कोशिश न करें.

मानव दूध ऐंटीबौडी प्रदान करता है और आसानी से पचने योग्य होता है. इस में वे सभी आवश्यक पोषक तत्त्व होते हैं, जो बच्चे के संपूर्ण विकास के लिए बेहद आवश्यक होते हैं.

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सवाल-

मैं 7 महीने के बच्चे की मां हूं. मेरा दूध इतना ज्यादा बनता है कि कई बार कहीं भी बहने लगता है, जो मेरे लिए काफी मुश्किल भरी स्थिति हो जाती है. मैं क्या करूं?

जवाब-

अगर आप का दूध बहुत अधिक मात्रा में बनता है तो इस का मतलब है आप पूरी तरह से स्वस्थ हैं. ब्रैस्ट मिल्क कुदरत की नेमत की तरह है. अगर अपने बच्चे को फीड कराने के बाद भी आप का बहुत दूध बनता है तो आप पंप की मदद उसे निकाल कर मदर मिल्क बैंक में डोनेट कर सकती हैं क्योंकि दुनिया में लाखों बच्चे ऐसे हैं जिन्हें कई कारणों से मां के दूध का पोषण नहीं मिल पाता और उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ती है. इसलिए आप अपने नजदीकी मदर मिल्क बैंक में दूध को जरूर डोनेट करें. यदि आप जाने में समर्थ नहीं हैं तो मिल्क बैंक से संपर्क करें. वे स्वयं आप के यहां से मिल्क कंटेनर तय समय पर कलैक्ट कर लेंगे.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz   सब्जेक्ट में लिखे…  गृहशोभा-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

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