आजादी, भीख : कंगना रनौत का सरंक्षण और विकृति

-“देश को आजादी भीख में मिली है.” ऐसा दुस्साहस पुर्ण वक्तव्य देकर फिल्मी दुनिया में अपना एक वजूद बनाने के बाद कंगना राणावत क्या इतनी बड़ी शक्ति हो चुकी है कि देश का प्रधानमंत्री कार्यालय अर्थात पीएमओ, केंद्र सरकार और कानून, उच्चतम न्यायालय असहाय हो गया है?

क्या कंगना राणावत को कोई अदृश्य संरक्षण मिला हुआ है? साफ साफ ये कहना कि 1947 में मिली हुई आजादी हमें भीख में मिली है और इसके बाद यह कहना कि आजादी तो 2014 के बाद मिली है यानी नरेंद्र दामोदरदास मोदी की सरकार आने के बाद.
इस कथन में यह साफ दिखाई देता है कि इस सोच के पीछे कौन सी शक्ति काम कर रही है और देश को कहां ले जाना चाहती है.

दरअसल, कंगना राणावत को जिस तरीके से “पद्मश्री” मिला है जिस तरीके से उसकी हर गलत नाजायज बातों को हवा दी जा रही है वह देश हित में तो नहीं है. मगर एक विशेष विचारधारा और राजनीतिक दल को यह सब सुखद लगता है. परिणाम स्वरूप कंगना राणावत देश में आज चर्चा का विषय बन गई है और कानून के लिए एक चुनौती भी.

आज देश की आम जनता को यह सोचने समझने का गंभीर समय है. जब ऐसे समय में देश की महान विभूतियां स्वतंत्रता सेनानियों पर कोई एक महिला प्रश्न खड़ा कर रही है, जब किसी एक महिला कि यह हिमाकत हो सकती है कि आजादी को भीख कह दे, तो यह समय चिंता करने का है और अपनी धरोहर को समझने का और संभालने का भी है.

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क्योंकि एक प्रवक्ता की तरह जिस तरह कंगना राणावत ने मोर्चा संभाला है, यह जगजाहिर कर चुका है कि आने वाले समय में कंगना कन्हैया कुमार की तरह जेल नहीं जाएंगी. बल्कि उनके पक्ष में हो सकता है कुछ और बड़े नामचीन लोग आकर खड़े हो जाएं और बातों को ट्विस्ट करने लगें. आज का समय ऐसा ही है आजकल पुराने ऐतिहासिक तथ्यों को समाप्त करने का और एक नए युग का निर्माण का भ्रम पालने वाले लोगों का है.

शायद यही कारण है कि रातों-रात यह निश्चय कर लिया गया कि एक नया संसद भवन बनाना चाहिए गांधी जी की, और नेहरू के इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के उन ऐतिहासिक चिन्हों को नष्ट कर दिया जाना चाहिए क्योंकि वहां पर हमें अच्छा करना है!
यह अच्छा करने का भ्रम पैदा करके महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य और स्थानों को नष्ट करने का प्रयास जारी है.

 

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इसी क्रम में हमने देखी है नोटबंदी,ताकि नोट से गांधी जी को हटा दिया जाए. हालांकि यह हो नहीं सका. मगर लोगों के दिलों दिमाग से देश के महान विभूतियों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को खत्म करने कि यह जो सोच है यह अपना काम आज तेजी से कर रही है. क्योंकि वह आज पावरफुल है. ऐसे में यही कहा जा सकता है कि यह देश यह धरोहर आज की पीढ़ी की हाथों में है वह इसे कैसे संभाल पाएगी या फिर नष्ट होने देगी यह उन्हीं के कांधे पर है.

जैल भेजें, कानून के रखवाले

छोटी-छोटी बातों पर देश की बात करने वाले, देशभक्ति की बात करने वाले आज कसौटी पर हैं. क्योंकि आज कंगना राणावत ने देश की आजादी को भी हमें भीख में मिलने का कथन कह कर इन सारे देश भक्ति की हिमायत करने वालों को कटघरे में खड़ा कर दिया है.सवाल है अगर कोई अपना गलत बोलता है तो उसे छूट मिल सकती है क्या? यह प्रश्न भी आज उन लोगों के सामने खड़ा है जो देश और देश भक्ति का राग अक्सर बिला वजह अलापते रहते हैं, और जब आज समय कुछ करने का है, तो मौन है.
आज महाभारत के पात्र समय के उद्घोष का है यानी “समय” चेहरे देखने का है और चेहरे से नकाब उतरते हुए देखने का भी.
सचमुच सत्ता के शीर्ष पर बैठे हुए दोहरे चरित्र के लोगों का सच आज धीरे-धीरे देश की जनता के सामने आता चला जा रहा है.

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बिग बॉस 15 में इन दिनों फैंस को कंटेस्टेंट करण कुंद्रा और तेजस्वी प्रकाश की जोड़ी काफी पसंद आ रही है, जिसके चलते सोशलमीडिया पर आए दिन #Tejran ट्रैंड करता रहता है. हालांकि इस बीच खबरे थीं कि करण कुंद्रा के दिल में तेजस्वी प्रकाश के लिए कोई फिलींग्स नही है. वहीं शो से बाहर करण की गर्लफ्रैंड हैं, जिसके बाद फैंस को काफी निराशा हुई थी. लेकिन अब करण कुंद्रा की दोस्त ने इस खबर पर अपना रिएक्शन दिया है. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

दोस्त ने किया खुलासा

दरअसल, बीते दिनों खबरें थीं कि करण कुंद्रा, तेजस्वी प्रकाश के साथ शो के लिए प्यार का ड्रामा रच रहे हैं. जबकि शो से बाहर उनकी एक गर्लफ्रैंड है, जिसका नाम योगिता बिहानी है. हालांकि अब करण कुंद्रा की एक करीबी दोस्त रोहिणी ने सोशल मीडिया पर इन खबरों को अफवाह बताया है. दोस्त रोहिणी ने ट्विटर पर लिखा, ‘मैं सबको बता देना चाहती हूं कि करण अपने रिश्तों को लेकर हमेशा से ही बहुत वोकल रहा है. वो और योगिता बस अच्छे दोस्त हैं. सच कहूं तो इससे किसी को मतलब नहीं होना चाहिए कि करण की जिंदगी में कौन है. बिना बात किसी का नाम घसीटना बहुत गलत है. कृपया इन चीजों का ध्यान रखें.’

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शो में आएगा नया ट्विस्ट

 

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शो की बात करें तो हाल ही में खबरे हैं कि शमिता शेट्टी मेडिकल लीव के कारण शो से बाहर हो गई हैं. हालांकि कहा जा रहाहै कि वह दो तीन दिन में वापस आ जाएंगी. इसी बीच शो का नया प्रोमो सामने आ गया है, जिसमें शो के वीआईपी कंटेस्टेंट को घर चलाने की पावर दी गई है, जिसके चलते शो में एक बार फिर हंगामा होता नजर आ रहा है.

 

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Anupama: शाह परिवार के सामने बापूजी की औकात दिखाएगी बा, देखें वीडियो

Star Plus के सीरियल ‘अनुपमा’ (Anupama) में बा और वनराज की नाराजगी दिन प्रतिदिन बढ़ रही है, जिसके चलते सीरियल में जमकर फैमिली ड्रामा देखने को मिल रहा है. जहां एक तरफ अनुपमा ने अनुज के साथ अपने रिश्ते को दोस्ती का नाम दे दिया है तो वहीं बापूजी का अनुपमा का साथ देना बा को खल रहा है. वहं अपकमिंग एपिसोड में बा, बापूजी पर भड़कती नजर आने वाली हैं. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

बा ने पार की हदें

 

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अब तक आपने देखा कि अनुज और अनुपमा ने अपनी दोस्ती को बरकरार रखने का फैसला किया है, जिससे समर और बापूजी खुश नजर आते हैं. वहीं सभी दीवाली सेलिब्रेशन मनाते हैं. लेकिन बा आकर एक बार फिर अनुपमा पर इल्जाम लगाना शुरु कर देती है. दरअसल, बा अनुज के पास सिंदूर लेकर कहती है कि उसे अब अपने रिश्ते का नाम देना होगा ताकि समाज में उनका भी सम्मान हो  सके, जिसके चलते बा के उकसाने पर अनुज सिंदूर उठा तो लेता है लेकिन वह अनुपमा की मांग में भरने की बजाय उसके माथे पर टीका लगा देता है, जिसके चलते बा फिर भड़क जाती है.

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बा ने दिखाई बापूजी की औकात

 

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अपकमिंग एपिसोड में आप देखें कि अनुज जहां बा की बातों का करारा जवाब देगा तो वहीं अनुपमा बा से कहेगी कि वो अनुज का प्यार स्वीकार नहीं कर सकती लेकिन वो उनके प्यार का सम्मान करती है और बा को उन्हें शांति से जीने के लिए कहेगी. वहीं बा भड़क जाएंगी और दोनों से कहेंगी कि उनके कारण शाह परिवार की खुशियों को बर्बाद हो गई हैं. इसी कारण बा पर बापूजी गुस्सा करेंगे. लेकिन अब बा किसी चीज की परवाह न करते हुए कहेगी कि वो कौन होते हैं उसे कारखाने से निकालने वाले. बा, बापूजी को बेइज्जत करते हुए कहेगी कि उन्होंने आजतक कोई जिम्मेदारियां नहीं निभाई.

अनुपमा करेगी ये काम

 

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दूसरी तरफ हद तो तब हो जाएगी जब बा, बापूजी की औकात पर सवाल उठाते हुए कहेगी कि जब आपकी हैसियत नहीं थी तो आपने शादी क्यों की. आपने अपनी जिंदगी में किया ही क्या है. जहां छोटी उम्र में वनराज को काम करना पड़ा क्योंकि उसका बाप घर का भार उठाने के लायक नहीं था. वरना अगर मेरा बेटा नहीं होता तो आज हम वृद्धाश्रम में बरतन मांज रहे होते और अगर मेरा बेटा न होता तो वह आज कुंवारी होती. वहीं गुस्से में बा, बापूजी को फैसला सुनाएगी कि अब शाह हाउस और कारखाने पर उनका राज होगा, जिसे सुनकर बापूजी टूट जाएंगे. हलांकि अनुपमा उन्हें अपने घर ले जाएगी और पिता के सम्मान को वापस लाने का फैसला करेगी. इसी के साथ बा का रुप देखकर काव्या , वनराज के लौटने से पहले बापूजी को घर वापस लाने की बात कहती नजर आएगी.

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मराठी लुक में दुल्हन बनीं Pavitra Rishta की Ankita Lokhande, देखें फोटोज

सीरियल ‘पवित्र रिश्ता’ (Pavitra Rishta)से पौपुलर हुई एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे (Ankita Lokhande) इन दिनों सीरियल के दूसरे सीजन में शाहिर शेख के साथ नजर आ रही हैं. इसी बीच अंकिता अपनी शादी की खबरों को लेकर सोशलमीडिया पर छाई हुई हैं, जिसके चलते वह फैंस के लिए अपडेट शेयर करती नजर आ रही हैं. वहीं अंकिता ने बौयफ्रेंड विक्की जैन से शादी से पहले मराठी लुक में वीडियो शेयर की है. आइए आपको दिखाते हैं अंकिता लोखंडे का मराठी अवतार की झलक…

 डांस करते हुए शेयर की वीडियो

 

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सोशलमीडिया पर एक्टिव रहने वाली एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे जल्द ही ब्वौयफ्रेंड विक्की जैन (Vicky Jain) के साथ अपनी शादी की खबरों को लेकर सुर्खियां बटोर रही हैं. वहीं हाल ही में अंकिता लोखंडे ने मराठी लुक में अपनी एक वीडियो शेयर की है, जिसमें वह दोस्त के साथ माधुरी दीक्षित के फेमस सॉन्ग ‘हमको आज कल है इंतजार’ पर जमकर डांस करती नजर आ रही हैं.

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मराठी दुल्हन बनीं अंकिता

 

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वीडियो में अंकिता के लुक की बात करें तो वह ब्लू कलर की नवारी पहने हुए नजर आ रही हैं. मराठी दुल्हन की तरह ज्वैलरी पहने अंकिता बेहद खूबसूरत लग रही हैं. वहीं अंकिता के इस लुक को देखकर फैंस बेताब हैं कि उनका ब्राइडल लुक कैसा होने वाला है.

 

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इंडियन लुक में जीतती हैं दिल

 

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अंकिता लोखंडे अक्सर इंडियन लुक में नजर आती हैं, जिसमें वह बेहद खूबसूरत लगती हैं. फैंस को अंकिता लोखंडे का ये अंदाज काफी पसंद आता है. इसी के चलते सोशलमीडिया पर उनकी फोटोज वायरल होती रहती हैं. सिंपल साड़ी को स्टाइलिश लुक देने वाली अंकिता लोखंडे का फैशन फैंस का दिल जीतता है.

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सुसाइड: क्या पूरी हो पाई शरद की जिम्मेदारियां

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मेरे अंडरआर्म्स में बहुत पसीना आता है और बदबू भी आती है, कोई उपाय बताएं?

सवाल-

मेरी उम्र 37 साल है. मेरे अंडरआर्म्स में बहुत पसीना आता है और बदबू भी आती है. कोई उपाय बताएं?

जवाब-

अंडरआर्म्स में पसीने की बहुत सारी ग्रंथियां होती हैं. पसीना एक तरल पदार्थ है जोकि हमारे शरीर को ठंडा रखता है इसलिए बहुत आवश्यक भी है पर कभीकभी ज्यादा पसीना आने पर हम जो भी खाते हैं उस की गंध बाहर आने लगती है. ऐसे में सफाई की ज्यादा जरूरत होती है. आप एक  कप ऐप्पल साइडर विनेगर लें. उस में आधा कप पानी डाल कर स्प्रे बोतल में भर कर रख लें. रोज रात को अंडरआर्म्स में स्प्रे कर लें और सो जाएं. ऐसा नियमित करने से अंडरआर्म्स की बदबू हमेशा के लिए दूर हो जाती है.

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क्या आप के साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि आप कौंफ्रैंस रूम में खड़े हो कर प्रेजैंटेशन दे रहे हैं, सामने बौस, सीनियर्स और को-वर्कर्स बैठे हैं. मीटिंग काफी महत्त्वपूर्ण है और आप के दिल की धड़कनें बढ़ी हुई हैं. हथेलियां पसीने से भीग रही हैं?

अपने हाथों को आप किसी तरह पोंछने का प्रयास कर रहे होते हैं और घबराहट में आप के हाथों से नोट्स गिरते गिरते बचते हैं. ऐसी परिस्थिति में न सिर्फ आप का आत्मविश्वास घटता है बल्कि आप के व्यक्तित्त्व को ले कर दूसरों पर नकारात्मक असर पड़ता है. यह एक सामान्य प्रक्रिया है जो अकसर हमारे साथ होती है. यह अत्यधिक तनाव अथवा तनावपूर्ण परिस्थितियों की एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है.

पहली मुलाकात, सामाजिक उत्तरदायित्व अथवा किसी निश्चित कार्य को न कर पाने के भय के दौरान भी कुछ इसी तरह की स्थिति महसूस होती है. कई दफा तीखे मसालेदार भोजन, जंक फूड्स, शराब का सेवन, धूम्रपान या कैफीन के अधिक प्रयोग से भी ऐसा हो सकता है.

पसीना शरीर के कुछ खास हिस्सों में अधिक आता है. जैसे हमारी हथेलियां, माथा, पैर के तलवे, बगल की जगहों आदि में, क्योंकि इन हिस्सों में स्वेटग्लैंड्स अधिक मात्रा में होते हैं.

पूरी खबर पढ़ने के लिए- घबराहट में क्यों आता है पसीना

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz   सब्जेक्ट में लिखे…  गृहशोभा-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

Dish Soap सिर्फ बरतन नहीं धोता

क्याआप जानते हैं कि बरतन साफ करने वाला डिश सोप बरतन धोने के अतिरिक्त और भी काम कर सकता है. जी हां, यह कपड़ों की धुलाई भी कर सकता है, साथ ही इस से कार वाश भी कर सकती हैं और फेस वाश भी.

डिश सोप क्या कर सकता है

गैस लीकेज टैस्ट:

एक छोटी कटोरी में 1-2 चम्मच सोप को पानी में घोल कर इसे गैस सिलैंडर के मुख, होज पाइप जौइंट्स और रैगुलेटर पर स्प्रे करें. लीकेज वाली जगह से सोप के बुलबुले नजर आएंगे.

नेल पौलिश हटाए:

कुनकुने पानी और इस सोप के मिश्रण में अपने नाखूनों को कुछ देर डुबोएं. इस से आप के क्यूटिकल्स नर्म हो कर निकल जाएंगे.

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पैट्स के पिस्सू हटाए:

महंगे शैंपू की जगह डिश सोप से अपने कुत्ते, बिल्ली की त्वचा की सफाई करें. इस से रोम के अंदर छिपे पिस्सू भी मर जाएंगे.

चोक्ड ड्रेन साफ करे:

कमोड में 1 कप डिश सोप डाल कर 30 मिनट तक छोड़ दें. इस के बाद एक बालटी गरम पानी थोड़ी ऊंचाई से कमोड में डालें. किचन सिंक और शावर ड्रेन भी इसी तरह साफ कर सकती हैं.

फू्रट फ्लाई भगाए:

एक छोटे बाउल में सफेद विनेगर और डिश सोप की कुछ बूंदें मिला कर किचन काउंटर या अन्य जगह जहां फू्रट फ्लाई की संभावना हो, रख दें. ये मक्खियां इस की महक से आ कर बाउल में गिरेंगी और उस मिश्रण से चिपक कर रह जाएंगी.

काई साफ करे:

2 चम्मच डिश सोप को एक बालटी में 3-4 लिटर पानी के साथ मिलाएं. इस मिश्रण को काई वाली जगह पर लगा कर सूखने के लिए छोड़ दें. काई साफ हो जाएगा.

पेंट हटाए:

पेंटिंग के दौरान अगर पेंट छलक कर सतह पर गिर पड़े तो इस सोप से साफ किया जा सकता है. यहां तक कि आप की त्वचा से भी. पेंटिंग से पहले अपनी त्वचा पर इसे लोशन की तरह लगाने से पेंट गिरा भी हो तो जल्द ही निकल जाएगा.

पौधों को कीड़ों से बचाए:

एक स्प्रे बोतल में 2 बूंदें डिश सोप मिला कर इसे अपने लौन या घर के पौधों पर स्प्रे करने से उन में कीट नहीं लगेंगे.

बालों का रंग हलका करे:

यदि गलती से आप की खुद की बनाई हेयर डाई से बालों का रंग जरूरत से ज्यादा गहरा है तो इस सोप से शैंपू कर हलका किया जा सकता है.

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शैवाल से बचाए:

करीब डेढ़ लीटर सफेद विनेगर, 1 चम्मच डिश सोप और 1 कप नमक का मिश्रण बनाएं. जहांजहां शैवाल हैं वहां इसे लगाने से बहुत जल्द ही उन से छुटकारा मिलेगी.

लौन की घास को अच्छा बनाए:

अगर आप के लौन की घास पतली और पैची है तो कोकोकोला की एक बोतल में थोड़ा डिश सोप और कौर्न सिरप ले कर स्प्रे करें. उस के बाद लौन को नौर्मल पानी से पटाएं. लान की घास घनी और मोटी होगी.

कपड़ों के धब्बे हटाए:

डिश सोप आप की कमीज के कौलर की गंदगी को आसानी से साफ करता है. यह लगभग सभी प्रकार के कपड़ों पर लगे दाग छुड़ाने में काम आएगा. नौर्मल डिटर्जैंट की जगह 1 चम्मच डिश सोप से 1 बालटी में करीबकरीब सभी कपड़ों की धुलाई की जा सकती है.

फर्श की सफाई:

एक बालटी गरम पानी में 2 चम्मच डिश सोप मिला कर कंक्रीट या टाइल फ्लोर पर लगाने से उस की गंदगी आसानी से साफ हो जाती है. वुडन फ्लोर पर इसे न लगाएं.

कंघी ब्रश की सफाई:

कुनकुने पानी में 2 बूंदें डिश सोप मिला कर इसे हेयर ब्रश या कंघी पर लगाने से उस पर लगे तेल के दाग साफ हो जाते हैं.

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जागृति तो सिर्फ पढ़ने से आती है

सिंपल लिविंग हाई थिंकिंग यानी सादा जीवन उच्च विचार पर अमल करने वाले युवाओं की तादाद दिनोंदिन कम होती जा रही है. युवा टिपटौप रहें, अच्छे मनपसंद कपड़े पहनें, वक्त के हिसाब से फैशन करें ये बातें कतई हरज की नहीं, लेकिन उन की सोच और मानसिकता कैसी होनी चाहिए जो उन्हें अपनी मंजिल तक पहुंचा दे यह सबक भोपाल की 24 वर्षीय जागृति अवस्थी से लिया जा सकता है जिस ने इस साल यूपीएससी के इम्तिहान में देशभर में दूसरा स्थान हासिल किया है.

मध्यवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली दुबलीपतली लेकिन आकर्षक दिखने वाली खूबसूरत जागृति भोपाल के शिवाजी नगर स्थित सरकारी आवास में रहती है. उस के पिता सुरेश अवस्थी आयुर्वेदिक कालेज में होमियोपैथी के प्रोफैसर हैं और मां मधुलता हाउसवाइफ हैं. एकलौता भाई सुयश मैडिकल कालेज का छात्र है.

नतीजे के दिन से जागृति के घर मीडिया और बधाई देने वालों का तांता लगा है. हरकोई उस से जानना चाहता है कि उस ने यह मुकाम कैसे हासिल किया.

पड़ोसी होने के नाते इस प्रतिनिधि ने बचपन से ही उसे देखा है. जागृति शुरू से ही आम बच्चों से भिन्न रही है. उस की जिज्ञासा और मासूमियत ने उसे वहां तक पहुंचा दिया जो किसी भी युवा का सपना होता है.

इस प्रतिनिधि ने उस से लंबी अंतरंग बातचीत की तो कई अहम बातें सामने आईं जो बताती हैं कि यों ही कोई आईएएस अधिकारी नहीं बन जाता. इस उपलब्धि के लिए न केवल कड़ी मेहनत करना पड़ती है बल्कि बहुत से सुख और मौजमस्ती भी छोड़नी पड़ती है. आइए, जागृति की जबानी जानें उस के सफर की कहानी:

हाई रिस्क हाई गेन

जागृति ने जिंदगी का बहुत बड़ा जोखिम बीएचईएल की नौकरी छोड़ देने का उठाया था. भोपाल के एनआईटी से इलैक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिगरी लेने के बाद उस की जौब जब इस सरकारी कंपनी में लगी थी तब तक उस ने सिविल सेवाओं के बारे में सोचा भी नहीं था. क्व95 हजार महीने की खासी लगीलगाई नौकरी छोड़ना एक बहुत बड़ी रिस्क था जिस पर दोस्तों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों ने उस के इस फैसले को एक तरह से नादानी करार दिया था. कुछ की सलाह थी कि तैयारी तो नौकरी के साथसाथ भी हो सकती है यानी नौकरी छोड़ने का जोखिम मत उठाओ.

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मगर जागृति ने जोखिम उठाया और कामयाब रही. युवाओं को रिस्क लेना चाहिए. वह कहती है कि इस के लिए जरूरी है अपनेआप पर भरोसा होना कि जो लक्ष्य उन्होंने चुना है उसे हासिल कर ही दम लेंगे. अगर ठान लिया जाए और खुद को पूरी तरह झोंक दिया जाए तो दुनिया का कोईर् काम मुश्किल नहीं.

पत्रपत्रिकाएं जरूरी

जागृति के पेरैंट्स ने कभी उस के फैसलों पर एतराज नहीं जताया बल्कि हमेशा उसे प्रोत्साहित ही किया. जब बच्चे बड़े होने लगे तो मधुलता ने उस की बेहतर पढ़ाई के लिए टीचरशिप की नौकरी छोड़ दी. लेकिन अकेले पढ़ाई में अव्वल होना किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता की गारंटी जागृति नहीं मानती. उस के मुताबिक आप को बहुत सा और हर तरह का साहित्य पढ़ना चाहिए जो सिर्फ पत्रपत्रिकाओं और पुस्तकों में ही मिलता है. सोशल मीडिया और टीवी, मोबाइल का युवाओं को सीमित उपयोग करना चाहिए.

खुद जागृति के घर टीवी नहीं है जो पढ़ाई में बाधक ही होता. वह बताती है कि परीक्षा की तैयारी के लिए उस ने तरहतरह की किताबें पढ़ीं जिस से उस का ज्ञान बढ़ा. वह बचपन में बड़े चाव से चंपक पढ़ा करती थी और अब सरिता, गृहशोभा सहित कारवां पत्रिका भी जरूर पढ़ती है. पत्रपत्रिकाओं के अध्ययन ने उसे व्यावहारिक और तार्किक बनाया.

आईएएस ही क्यों

जागृति जब बीएचईएल में नौकरी करती थी तब उस ने देखा कि छोटे स्तर के कर्मचारी अपने छोटेछोटे कामों के लिए कलैक्टर के दफ्तर भागते थे. कुछ के काम हो जाते थे और कुछ के नहीं. इन लोगों की परेशानी देख उस के मन में भी आईएएस बनने का खयाल आया. वह कहती है कि वह खुद बुदेलखंड इलाके के जिले छतरपुर के छोटे से गांव से है, लिहाजा बचपन में ही उस ने देहाती जिंदगी की दुश्वारियों को देखा है. अब वह महिला और बाल विकास विभाग को प्राथमिकता में रखते हुए काम करेगी.

राजनीतिक हस्तक्षेप

ब्यूरोक्रेट्स को अकसर राजनीतिक दबाव में फैसले लेने पड़ते हैं. अगर ऐसी नौबत कभी आई तो क्या करोगी? इस सवाल पर वह पूरे आत्मविश्वास से बोली कि उसे नहीं लगता कि राजनीतिक दबाव में वह कोई फैसला लेगी. देश में एक संविधान है. उस के दायरे में ही फैसले लेगी. जागृति का मानना है कि कोई भी फैसला आम और वंचित लोगों के भले के लिए संस्थागत तरीके से लिया जाना चाहिए. देश टैक्स के पैसे से चलता है किसी खैरात से नहीं, यह बात सभी को ध्यान में रखनी चाहिए. ऐसा ज्यादा से ज्यादा क्या होगा ट्रांसफर कर दिया जाएगा, जिन की परवाह नहीं.

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महिला आरक्षण

जागृति का ध्यान पिछले दिनों चीफ जस्टिस एनवी रमण के उस बयान जिस में उन्होंने न्यायपालिका में महिलाओं के 50 फीसदी आरक्षण की जोरदार वकालत की थी पर खींचने पर वह बोली कि आरक्षण होना चाहिए, लेकिन यह देखा जाना जरूरी है कि वह कैसे दिया जा रहा है. आरक्षण के मसले पर हमें महिलाओं को विभिन्न तबकों में बांटना होगा क्योंकि सभी की हालत एक सी और ठीक नहीं है जिसे सुधारने के लिए महिला शिक्षा और जागरूकता पर ध्यान दिया जाना जरूरी है.

डाक्टर भीमराव अंबडेकर ने जातिगत आरक्षण दे कर उस तबके का भला ही किया था जो सदियों से शिक्षा से वंचित था. शहरों में तो स्थिति ठीकठाक है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में काफी कुछ काम इस दिशा में होना बाकी है.

शादी के बारे में

जागृति का नजरिया शादी के बारे में बहुत स्पष्ट है. वह हंसते हुए कहती है कि बहुत से चीजों को देखते हुए किसी समकक्ष से ही शादी करेगी लेकिन उस में मम्मीपापा की रजामंदी होगी. उन्होंने उसे इस बारे में भी फैसला लेने की छूट दे रखी है. ऐसा जीवनसाथी पसंद करेगी जिस में आदमी को आदमी समझने का जज्बा हो और जो जमीनी सोच रखता हो.

युवा धैर्य और समझ से काम लें

अब बहुतों की रोल माडल बन चुकी जागृति मौखिक इंटरव्यू में एक मामूली से सवाल पर लड़खड़ा गई. यह सवाल था मध्य प्रदेश का पिनकोड 4 से शुरू होता है और किस राज्य का पिनकोड 4 से शुरू होता है. जबाव बहुत आसान था कि छत्तीसगढ़ का क्योंकि वह मध्य प्रदेश से अलग हो कर ही बना था. वह कहती है अकसर इंटरव्यू में ऐसा होता है कि उम्मीदवार मामूली से सवालों के जवाब मालूम होते हुए भी नहीं दे पाता.

जागृति की नजर में यह घबराहट हालांकि स्वाभाविक है, लेकिन युवाओं को न केवल किसी इंटरव्यू बल्कि जिंदगी की हर लड़ाई में धैर्य और अपनी समझ बनाए रखनी चाहिए. आज का युवा कई अनिश्चितताओं में जी रहे हैं पर आत्मविश्वास एक ऐसी पूंजी है जो उन्हें कभी दरिद्र नहीं होने देती.

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Testosterone का स्‍तर कम होना है खतरनाक

टेस्टोस्टेरोन एक मेल हार्मोन होता है. टेस्टोस्टेरोन पुरुष यौन क्षमता को बढ़ाता है और इसका संबंध यौन क्रियाकलापों, रक्त संचरण और मांसपेशियों के परिणाम के साथ साथ एकाग्रता, मूड और स्मृति से भी होता है. जब कोई पुरुष चिड़चिड़ा या गुस्सैल हो जाता है तो लोग इसे उसके काम या आयु का प्रभाव मानते हैं, पर यह टेस्टोस्टेरोन की कमी से भी होता है.

क्यों होती है टेस्टोस्टेरोन की कमी

आर्थिक दबावों और बढ़ती महंगाई के अलावा सामाजिक समस्याओं के कारण पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन नामक हार्मोन के स्तर में गिरावट हो सकती है. डायबिटीज होने पर भी इस हार्मोन में कमी आती है, इसकी दवाएं अलग होती हैं. टेस्ट करके हार्मोन के कारणों का पता किया जाता है. इसके बाद इंजेक्शन, दवाएं या सर्जरी आदि से इलाज किया जाता है. अत्यधिक तनाव के कारण इस हार्मोन का स्तर गिरता है. कुछ आहार भी पुरूषों के शरीर में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम करते हैं जैसे कि फास्ट फूड, तैलीय भोजन, शराब और प्रोसेस्ड फूड.

टेस्टोस्टेरोन की कमी के नुकसान

समान्य तौर पर उम्र बढ़ने के साथ टेस्टोस्टेरॉन के स्तर में गिरावट देखने को मिलती है. हालांकि अब 30 से ज्यादा उम्र के पुरुषों में भी टेस्टोस्टेरॉन के स्तर में गिरावट देखने को मिल रही है. प्रभावित व्यक्ति के अंदर उपस्थित टेस्टोस्टेरॉन का स्तर उसके सामाजिक व्यवहारों को प्रभावित करता है. यह लोगों की मानसिक शांति के साथ-साथ उनके यौन जीवन पर ही ग्रहण लगा रही है. इससे पुरुषों में यौन शक्ति पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव पुरुषों में उक्त हार्मोन के स्तर को कम सकता है. यह बहुत जरुरी है कि आप टेस्‍टोस्‍टेरोन के स्‍तर को हमेशा बनाए रखें, नहीं तो आगे चल कर आपको बहुत सारी परेशानियों को झेलना पड़ सकता है.

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कैसे बढ़ाएं टेस्टोस्टेरोन

– अगर आपका वजन बहुत ज्यादा है तो आपको कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. शरीर में ज्यादा चरबी, टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ने से रोक सकती है. टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने के लिए अपने वजन को कम करने की कोशिश करें.

– जस्ता और मैग्नीशियम जैसे खनिज शरीर में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं. अतः, पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के उच्च स्तर को बनाएं रखने के लिए उन खाद्य पदार्थों का सेवन करना बहुत जरुरी है जो आपके शरीर में इन खनिजों की जरुरत को पूरा करते हैं.

– जब आप बहुत ज्यादा तनाव में होते हैं, तो आपके शरीर में अधिक मात्रा में हार्मोन स्रावित होते हैं. ये हार्मोनस शरीर में टेस्टोस्टेरोन को बढ़ने से रोकते हैं. ध्यान जैसी सरल और प्रभावशाली तकनीक तनाव से लड़ने में आपकी मदद करेगी.

– मीठा कम खाएं शरीर में शर्करा के स्तर के बढ़ने से इंसुलिन का स्तर बढ़ता है. जब आप मीठा खाते हैं तो आपके शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर अपने आप कम हो जाता है. इस हार्मोन के स्रवण और शारीरिक विकास के लिए जितनी हो सके उतनी कम मीठी चीज़े खाएं.

– रिसर्च के अनुसार अगर आप हर रोज बहुत तीव्रता से 45-75 मिनट के लिए कसरत करते हैं, तो शायद इसे आपके शरीर में टेस्टोस्टेरोन के विकास मे बाधाएं पैदा हो सकती है. कसरत करते समय किसी पेशेवर ट्रेनर की सलाह लें इसे आपको काफी फायदा होगा.

इन उपायों को अपनाने से पुरूष अपने शरीर में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बनाए रख सकते हैं.

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जिद: भाग 4- क्या परिवार से हटकर चंचल कुछ सोच पाई

लेखिकारिजवाना बानो ‘इकरा’

‘‘नहीं, अपनी हैल्प करनी है मुझे,‘‘ आत्मविश्वास भरा जवाब आया चंचल का.

‘‘अपनी हैल्प? हाहाहा…दिमाग तो ठीक है न तुम्हारा चंचल? तुम को किस बात की कमी है?‘‘

‘‘ये जुमला 10 सालों से सुनती आ रही हूं, शिशिर. अब बस भी करो ये ड्रामा. मुझे कब, कैसे, क्या करना है, सबकुछ तो आप और मांजी फैसला लेते हैं. मेरी अपनी कोई मरजी, कोई अस्तित्व नहीं छोड़ा है आप ने. ये कमी है मुझे.‘‘

‘‘हां, तो सही सोचते हैं हम लोग. समझ है ही कहां तुम में. देखो, अपने पीहर 3 दिन रुकी हो और कैसी बातें करनी लगी हो. दिल्ली चली जाओ, आज ही.‘‘

‘‘नहीं, दिल्ली तो मैं रविवार को ही जाऊंगी. बस, आप को बतानी थी ये बात, सो बता दी मैं ने.‘‘

‘‘कह रहा हूं न मैं, आज ही जाओ. और ये कोर्स वगैरह का भूत उतारो अपने दिमाग से, बच्चों पर ध्यान दो बस.‘‘

‘‘शिशिर, बच्चे जितने मेरे हैं, उतने ही आप के भी हैं. और ये मेरा आखिरी फैसला है, सोच लीजिए आप,‘‘ फोन डिस्कनैक्ट हो गया. पीछे खड़ा मनु बहुत खुश है, दीदी को शादी के बाद आज अपने असली रूप में देख रहा है.

‘‘फैसला? मेरी चंचल फैसले कब से करने लगी? वो तो फैसले मानती है बस,‘‘ अब शिशिर को थोड़ी घबराहट हुई, चंचल की ‘जिद‘ दिख रही थी उसे.

आकांक्षा का घर, आज समय से पहले, ब्रैडआमलेट और चाय बना कर तैयार है. हालांकि आज आकांक्षा औफिस के लिए तैयार नहीं हुई है.

‘‘क्या बात है डार्लिंग? आज तो फेवरेट नाश्ता और वो भी समय से पहले? क्या डिमांड होने वाली है आज? हां, और तुम ये आज तैयार क्यों नहीं हुईं? नौकरीवौकरी छोड़ने का इरादा है क्या?‘‘

‘‘हां पंकज, नौकरी छोड़ने का ही इरादा है.‘‘

आमलेट गले में अटक गया पंकज के, ‘‘पगला गई हो क्या?‘‘ गुस्से में चिल्लाया, लेकिन तुरंत उसे अहसास हुआ कि गुस्से से बात नहीं संभाली जा सकती.

‘‘क्या हुआ बेटा? औफिस में कोई दिक्कत? मैं बात करूं चावला से?‘‘

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‘‘नहीं, दिक्कत घर में है, औफिस में नहीं.‘‘

‘‘नाराज हो मुझ से? कुछ चाहिए मेरी प्यारी अक्कू को?‘‘

‘‘हां, चाहिए.‘‘

‘‘क्या चाहिए, मेरी प्यारी अक्कू को?‘‘

खूब समझती है इन चिकनीचुपडी बातों को आकांक्षा. पहले की तरह ही गंभीर रहते हुए आकांक्षा बोली, ‘‘बच्चा चाहिए मुझे.‘‘

‘‘क्या…?‘‘

‘‘मां बनना चाहती हूं मैं. कितने साल और इंतजार करूं अब मैं?‘‘

‘‘तुम जानती हो अक्कू, अभी हम तैयार नहीं हंै. विला ले लें, फिर जितने चाहे बच्चे करना. नहीं रोकने वाला मैं.‘‘

‘‘हम नहीं पंकज, केवल तुम तैयार नहीं हो. मैं पिछले 4 साल से कह रही हूं तुम्हें. पहले गाड़ी, फिर फ्लैट और अब विला. कल कुछ और शामिल हो जाएगा तुम्हारी लिस्ट में.‘‘

‘‘मैं खुश हूं पंकज, जो है उस में और मेरे बच्चे भी खुश रहेंगे, जानती हूं मैं. भौतिक सुखों का कोई अंत नहीं है, मैं थक गई हूं, इस तरह दौड़तेदौड़ते. मुझे ठहराव चाहिए, बच्चा चाहिए मुझे.‘‘

‘‘सुनो तो आकांक्षा…‘‘

‘‘नहीं पंकज, ये मेरा आखिरी फैसला है. अगर तुम्हें नहीं मंजूर, तो मैं कल ही इस्तीफा दे दूंगी. आज छुट्टी ली है बस,‘‘ मुसकराते हुए आकांक्षा बोली.

पंकज को समझ नहीं आ रहा था, वो छुट्टी की बात सुन कर खुश हो या बच्चे की बात सुन कर चिंतित. फिलहाल उसे अपना ‘विला‘ का सपना टूटते हुए दिख रहा था और दिख रही थी आकांक्षा की ‘जिद‘.

जिद तो दोनों ने कर ली थी, लेकिन जिद इतनी भी आसानी से पूरी नहीं होती. एक तरफ, चंचल की सासू मां ने हंगामा मचाया हुआ था, तो दूसरी तरफ, पंकज भी सारे दिन परेशान रहा कि कैसे अपनी बीवी को समझाए वो, कहां, बच्चों के चक्कर में पड़ गई है?

बुध का दिन इसी हलचल में गुजर गया. गुरुवार की सुबह शिशिर ने अपनी नाराजगी जताते हुए फोन नहीं किया, न ही चंचल का फोन उठाया. पंकज को भी कुछ समझ नहीं आ रहा था, बात टालने के लिए वो भी टूर पर निकल गया, इतवार तक.

इतवार भी आ गया. चंचल को भी आज ही दिल्ली लौटना था, लेकिन चंचल ने न जाने का फैसला किया. इधर, आकांक्षा भी अपना सारा सामान पैक कर बैठी थी. पंकज को लगा था, 2-4 दिन दूर रहेगी आकांक्षा उस से तो खुद ही अक्ल आ जाएगी. पंकज के बिना आकांक्षा का कहां मन लगना था. लेकिन जो वो देख रहा था, वो अप्रत्याशित था.

‘‘आकांक्षा, क्या बचपना है ये?‘‘

‘‘बच्चों बिना कैसा बचपना? बच्चे तो इस घर में आने से रहे तो मैं ही बच्चा बन कर देख लेती हूं.‘‘

‘‘बस भी करो ये पागलपन… परेशान हो गया हूं मैं.‘‘

‘‘सो तो मैं भी. चलो परेशानी खत्म कर देते हैं. मैं ने साथ वाली कालोनी में एक रूम व किचन देख लिया है. तलाक के कागजात भिजवा दूंगी.‘‘

‘‘चलती हूं.‘‘

पंकज के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई हो मानो.

‘‘ठहरो आकांक्षा… बैठो, बात तो करो.‘‘

‘‘क्या बात करनी है पंकज? तुम्हारा फैसला मुझे पता है.‘‘

‘‘अच्छा, क्या पता है तुम को? यही ना कि मुझे अपने जैसा बेटा नहीं चाहिए, बल्कि तुम्हारे जैसी बेटी चाहिए. एकदम समझदार, मजबूत और निडर…‘‘

इस बार, आकांक्षा खुद को रोक नहीं पाई. पंकज को गले लगाते ही सालों का दर्द आंसुओं के साथ बहा दिया, आकांक्षा ने. रह गया तो उन दोनों के बीच का प्यार बस.

उधर, दिल्ली में जब शिशिर पूरे परिवार के साथ घर लौटा, तो चंचल और बच्चों को वहां न देख गुस्से से आगबबूला हो गया.

‘‘चंचल की इतनी हिम्मत? अभी बताता हूं उसे…‘‘

इस बार फोन नहीं किया, शिशिर ने, सीधा नासिक के लिए फ्लाइट ली. ‘‘बहुत बोलने लगी है, पीहर बैठ जाने को बोलूंगा न तो अपनेआप सीधी हो जाएगी.‘‘

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रात होतेहोते शिशिर चंचल के घर पहुंच ही गया. चंचल जैसे उसी के इंतजार में बैठी थी. डोरबैल बजी, चंचल ने दरवाजा खोला, एकदम सपाट चेहरे के साथ. न खुशी, न नाराजगी. लेकिन शिशिर तो नाराज था ही.

‘‘अपना सामान पैक करो चंचल… और तुम घर में क्यों नहीं हो? यहां क्यों हो? चल क्या रहा है दिमाग में तुम्हारे.‘‘

‘‘हाथपैर धो कर खाना खा लो शिशिर, डिनर तैयार है. बाद में बात करते हैं.‘‘

तभी आशु आ कर शिशिर से लिपट गया, ‘‘पापा आ गए… पापा आ गए.‘‘

बेटे को देख कर शिशिर अपना गुस्सा भूल गया, कुछ देर को. और फ्रेश होने चला गया.

डिनर के बाद चंचल ने उसे छत पर बुलाया, ‘‘हम्म, बताइए, क्या बोल रहे थे आप?‘‘

‘‘क्या बोलूंगा? तुम फोन क्यों नहीं उठा रही हो? और घर क्यों नहीं पहुंची अब तक?‘‘

‘‘क्या आप को सच में नहीं पता शिशिर?‘‘

‘‘अगर ये तुम्हारे बेकार से सर्टिफिकेट कोर्स और जौब के लिए है तो मुझे कोई बात नहीं करनी इस बारे में. तुम अच्छे से जानती हो, मां को बिलकुल पसंद नहीं ये सब और बच्चे…? बच्चों का भी खयाल नहीं आया तुम्हें? उन्हें कौन देखेगा?‘‘

‘‘शांत हो जाओ शिशिर, बात तो मुझे भी करनी है आप से और इसी बारे में करनी है, लेकिन इस तरह नहीं.‘‘

‘‘जो कौर्स और जौब तुम्हारे लिए बेकार है, वो मेरी आत्मनिर्भरता है. और इतने सालों से बच्चों को देख रही हूं न, आगे भी देख लूंगी.‘‘

‘‘मुझे नहीं पसंद, कह दिया न…‘‘

‘‘बात आप की पसंद की नहीं है, मेरे अस्तित्व की है.‘‘

‘‘तो ठीक है, आज से मेरे घर के दरवाजे बंद तुम्हारे लिए…‘‘

‘‘ठीक है, आप जब चाहें, जा सकते हैं.‘‘

इतना शांत जवाब? शिशिर अंदर तक हिल गया. सिर पकड़ कर बैठ गया, दस मिनट.

‘‘चंचल, क्या तुम सच में मेरे बिना रहना चाहती हो?‘‘

‘‘नहीं… मैं आप के साथ रहना चाहती हूं, लेकिन अपनी पहचान के साथ.‘‘

सुबकते हुए शिशिर बोला, ‘‘ठीक है, सुबह चलो साथ.‘‘

‘‘और मांजी?‘‘

‘‘परेशान मत होओ, सुबह सब साथ चलते हैं. सुहाना मैं और तुम, जब सब साथ मिल कर मनाएंगे तो मां भी मान ही जाएगी.‘‘

दोनों के चेहरे पर प्यार भरी मुसकराहट आ जाती है.

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