Raksha Bandhan Special: मेकअप से ऐसे पायें नेचुरल निखार

आज के समय में हर लड़की नेचुरली खूबसूरत दिखना चाहती है. जिसका सबसे बेस्ट तरीका है न्यूड मेकअप. आज के ब्यूटी ट्रेंड की बात करे तो न्यूड मेकअप लुक को ज्यादा पसंद किया जा रहा है. टीनेजर्स से लेकर ब्राइड तक इस लुक को बखूबी पसंद कर रही हैं.

न्यूड मेकअप लुक में आपका चेहरा बहुत नैचुरल और ग्लोइंग दिखता है. इस लुक की खास बात है दिन हो या रात आप इस न्यूड मेकअप लुक को कभी-भी कैरी कर सकती हैं.

न्यूड मेकअप लुक आपको न सिर्फ नेचुरल ब्यूटीफुल बल्कि यंग लुक भी देता है. अगर आप भी न्यूड मेकअप लुक चाहती हैं, तो आजमाएं ये कुछ खास टिप्स.

सेलिब्रिटी हो या कौलेज गर्ल न्यूड मेकअप लुक हर लड़की की डिमांड बन चुका है. न्यूड मेकअप आपकी स्किन को इवन टोन और एट्रेक्टिव लुक देता है. बस जब भी आप ये मेकअप ट्रिक अपनाएं अपनी स्किन टोन का खास ध्यान में रखें.

1. फेस मेकअप                               

न्यूड मेकअप के लिए बेस हमेशा लाइट यूज किया जाता है. ध्यान रखे बेस जितना न्यूट्रल रहेगा आप उतनी ही खूबसूरत दिखेंगी. बेस लगाने से पहले चेहरे पर मौइस्चराइजर लगाना न भूले. स्किन को ज्यादा सौफ्ट और ग्लोइंग बनाने के लिए आप बेस में फेस सीरम को मिला कर लगा सकती हैं. ज्यादातर लोग नेक कवर करना भूल जाते हैं, इससे उनका मेकअप बहुत भद्दा लगने लगता है, इसलिए फाउंडेशन लगाते वक्त गले पर भी फाउंडेशन लगाएं.

2. न्यूड आई मेकअप

चेहरे की आधी खूबसूरती आंखों में छुपी होती है, अगर आंखे खूबसूरत हों तो चेहरा अपने आप खूबसूरत लगने लगता है. न्यूड मेकअप में सबसे जरूरी है की आंखे नेचुरल रूप से खूबसूरत दिखें. आई मेकअप के लिए हमेशा ऐसे आइशेडो को चुनें जो आपकी स्किन से मिलता हो और एक बेहतरीन न्यूड लुक दे. न्यूड लुक के लिए आप हलका औरेंज, पीच, चौको, ब्राउन शैड के आईशेडो इस्तेमाल कर सकती हैं.

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3. लाइनर और मसकारा

आंखो को और आकर्षित बनाने के लिए आप लाइनर और मसकारा का इस्तेमाल करना न भूले. आईशेडो के बाद आंखो पर लाइनर लगाएं. ध्यान रखें लाइनर न ज्यादा मोटा हो न ज्यादा पतला. पलकों को खूबसूरत दिखाने के लिए डार्क कलर का मसकारा लगाएं और उन्हें कर्ल कर लें. इससे आपकी पलकें नेचुरल खूबसूरत दिखेंगी.

4. नेचुरल-न्यूड ब्लश

ब्लशर लगाना हर लड़कियों को पसंद होता है. नेचुरल-न्यूड शैड के लिए आप पिंक, पीच, ब्राउन ब्लश यूज कर सकती हैं. ब्लश यूज करते वक्त अपने होंठों के रंग का जरूर ध्यान दें. ब्लश जब भी लगाएं ऊपर से नीचे की ओर लगाएं. ब्लश लगाते समय ध्यान रखें ब्लश मौइस्चराइजर समान लगा हो.

5. हाईलाइटर का यूज

हाईलाइटर न्यूड लुक को और भी अट्रेक्टिव बना देता है. आपने गालों को नेचुरली हाइलाइट करने के लिए अपने स्किन टोन से मैच हाईलाइटर का इस्तेमाल करें ध्यान रखें हाइलाईटर जरूरत से ज्यादा न लगाएं.

6. न्यूड लिप कलर

न्यूड लुक में सबसे ज्यादा ध्यान लिप कलर पर दिया जाता है. अगर आपने पूरा मेकअप लाइट और न्यूड किया है, लेकिन आपकी लिपस्टिक डार्क शैड की हैं, तो यकीन मानिये आपका मेकअप परफेक्ट नहीं लगेगा. न्यूड लिपशैड के लिए आप पीच शैड, पीच प्लेजर, राइट रेड ब्राउन बेब, बेबी पिंक, बोल्ड औरेंज, प्रीटी पिंक को यूज कर सकती हैं.

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रिश्तों की अजीब उलझनें

सिचुएशन 1

आप किसी परिचित के यहां खाना खाने गए हैं लेकिन खाना या तो बेस्वाद है या फिर इतना स्पाइसी कि गले से नीचे उतारना मुश्किल है. कई बार आप जिन चीजों को हाथ तक नहीं लगाते, यदि वे आप के आगे परोस दी जाएं तो भी मुश्किल होती है, जैसे प्याज व लहसुन से बना भोजन या कद्दू, करेले जैसी सब्जियां.

ऐसे संभालें

किसी ने बड़े चाव से भोजन परोसा और आप नखरे दिखाएं कि आप को यह भोजन कतई पसंद नहीं, तो यह अशिष्टता होगी और मेजबान का अपमान भी होगा. मेजबान का दिल दुखाने के बजाय आप को कुछ बहाने बनाने होंगे, जैसे आज मेरा फास्ट है, तबीयत ठीक नहीं है इसलिए दिन में एक बार खाती हूं, पेट गड़बड़ है या अभीअभी घर से खा कर ही आए हैं. साथ ही, उन से कहें, ‘ऐसा कीजिए आप मुझे एक कप चाय पिला दीजिए.’ इस से उन का मान भी रह जाएगा और आप अरुचिकर भोजन खाने से भी बच जाएंगे.

सिचुएशन 2

आप की फ्रैंड की नईनई शादी हुई है. आप को पता चल गया है कि उस का पति अच्छा इंसान नहीं है. वह आवारा है, नशेड़ी है या फिर बदनाम इंसान है. ऊपर से सहेली पूछ रही है कि बता, मेरा पति कैसा लगा?

ऐसे संभालें

बसीबसाई गृहस्थी को उजाड़ना बुद्धिमानी की बात नहीं. जब शादी हो ही चुकी है तो सहेली को उस के पति के बारे में सबकुछ साफसाफ बता देना ठीक नहीं होगा. कई बार शादी के बाद इंसान बदल भी  जाता है.  हो सकता है जिसे आप आवारा या बदनाम समझ रही हों, वह शादी के बाद सुधर जाए. लेकिन सहेली से आप अपने मुंह से यह सब कहेंगी, तो उस का दांपत्य जीवन शुरू से ही खटाई में पड़ जाएगा और वह अपने पति के बारे में बुरी धारणा बना लेगी या तो दुखी होगी या फिर पति के साथ दुर्व्यवहार करेगी और उसे उसी नजरिए से देखने लगेगी. इस से बात बनने के बजाय बिगड़ जाएगी. बेहतर होगा कि सहेली के पूछने पर, ‘हां, अच्छे लग रहे हैं. इन्हें भरपूर प्यार देना और सुखी जीवन जीना.’ फिर मजाकमजाक में यह भी कह दें कि शुरू से ही ध्यान रखना, इन्हें कोई बुरी आदत न लग जाए.

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सिचुएशन 3

आप किसी के बारे में बुराभला कह रही हैं और पता चले कि वह तो आप के ठीक पीछे खड़ा है और सबकुछ सुन चुका है.

ऐसे संभालें

बात को छिपाने या बहाने बनाने से कोई फायदा नहीं. या तो आप को बेहद कुशल अभिनेता बनते हुए यह जताना होगा कि आप उस की उपस्थिति के बारे में जानती थीं और आप ने जानबूझ कर ऐसा सुनाने व छेड़ने के लिए कहा या फिर सीधेसीधे माफी मांग लेने में ही फायदा है. भले ही वह बुरी तरह नाराज हो जाए और उस वक्त आप को माफ न करे, लेकिन फिर भी गुस्से की आंच जरा धीमी तो पड़ ही जाती है.

सिचुएशन 4

आप की फ्रैंड अचानक आप के सामने अजीब तरह की ड्रैस पहन कर आती है और पूछती है कि कैसी लग रही हूं मैं. सच यह है कि वह बहुत बेढंगी और फनी लग रही है. न तो ड्रैस अच्छी है और न ही उस की बौडी पर पहनने लायक है.

ऐसे संभालें

फ्रैंड का मजाक उड़ाने की गलती न करें. इस से उस का मन दुखी होगा, शर्मिंदगी महसूस होगी और रिश्तों पर विपरीत असर पड़ेगा लेकिन, वह आप की फास्ट फ्रैंड है इसलिए उस से किसी गलतफहमी में रखना भी ठीक नहीं वरना दूसरे उस का मजाक बनाएंगे. उसे कुछ ऐसा कहें, ‘अरे वाह, कलर तो काफी अच्छा चूज किया, लेकिन यह स्टाइल मुझे जरा कम जंचा. आजकल ऐसी स्टाइल कम चल रही है. इस से अच्छा होता कि तुम मौजूद फैशन के मुताबिक ड्रैस खरीदतीं.  एक काम करो, इसे घर में या कौंप्लैक्स में ही पहनना. बाहर जाना हो, तो इस के बजाय अपनी अमुक ड्रैस पहनना. तेरी कदकाठी और फिगर पर वह ज्यादा मस्त लगती है. इस प्रकार आप इशारों ही इशारों में उसे ड्रैस की कमी बता देंगी.

सिचुएशन 5

पड़ोसिन का निकला हुआ पेट देख कर आप को लगा कि वह गर्भवती है और आप ने बिना आगापीछा सोचे पूछ डाला, ‘कब की डेट है?’ भौचक्की पड़ोसिन ने कहा, ‘काहे की डेट है? मैं प्रैग्नैंट थोड़ी हूं?’

ऐसे संभालें

बात को तुरंत ट्विस्ट देते हुए मजाकिया लहजे में अपनापन जताते हुए कुछ ऐसा कहें, ‘अरी बावली बहन, मैं ने तो तुझे जानबूझ कर ऐसा कहा. अपनी सेहत पर ध्यान दे. मोटा पेट हजार बीमारियों की जड़ है. सुबहशाम वाक, जौगिंग वगैरा किया कर वरना आज जो सवाल मैं ने मजाक में किया है वही सवाल लोग सचमुच तुझ से करने लगेंगे. मुझे ही देख, मैं ने खानपान कितना कंट्रोल किया, तब जा कर मोटापा काबू में आया है वरना टुनटुन हो जाती. मेरे हसबैंड तो सुबहशाम वाक पर जाते हैं और व्यायाम भी करते हैं.’

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सिचुएशन 6

आप के मित्र दंपती में अनबन हो गई. अनबन भी ऐसी कि तलाक तक बात पहुंच गई. दोनों ही आप के दोस्त हैं. दोनों आप से अलगअलग मिल कर एकदूसरे की बुराई करते हैं, आप से राय मांगते हैं और दूसरे पक्ष से संबंध तोड़ने के लिए कहते हुए संबंधों की दुहाई देते हैं.

ऐसे संभालें

इस स्थिति में आप दोनों को कभी खुश नहीं रख सकते. दोनों को खुश रखने की कोशिश करेंगी तो दोनों से ही संबंधों में खटास आ जाएगी. चूंकि स्थिति काफी बिगड़ चुकी है और तलाक तक की नौबत आ गई है, इसलिए दोनों में तालमेल बैठाने या उन के संबंधों को जोड़ने की कोशिश भी बेकार साबित होगी. बेहतर यह होगा कि आप किसी एक से हमदर्दी रखें, उसे भावनात्मक या आर्थिक सहारा दें, उस का संबल बन कर एक अच्छी दोस्त साबित हों. हां, इस के लिए उसे चुनें जो दिल से आप के ज्यादा करीब हो, कम दोषी हो और जिस के साथ आप के रिश्ते ज्यादा पुराने रहे हों.

सेहत के लिए वरदान मल्टीग्रेन आटा

रोटी हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करने का मुख्य स्रोत है. अनेकानेक व्यंजन खा लेने के बाद भी हमें संतुष्टि केवल रोटी खाने पर ही होती है. लगभग हर अनाज कार्बोहाइड्रेट का मुख्य स्रोत होता है. आमतौर पर भारतीय घरों में रोटी बनाने के लिए गेहूं, बाजरा, मक्का और ज्वार जैसे अनाज का प्रयोग किया जाता है.

अधिकांश घरों में मूलत: गेहूं की सादी रोटियां ही बनाई जाती हैं, परंतु गेहूं की रोटी स्वादिष्ठ अधिक, पौष्टिक कम होती है. इसलिए गेहूं में यदि अन्य अनाज को मिला कर आटा पिसवाया जाए तो ऐसे आटे से बनी रोटी की पौष्टिकता बढ़ जाती है. इस प्रकार के आटे को मल्टीग्रेन आटा या कौंबिनेशन फ्लोर कहा जाता है. मल्टीगे्रन आटे से बनी रोटी विभिन्न प्रकार के रोगों में भी लाभदायक होती है.

कैसे तैयार करें मल्टीग्रेन आटा

इस प्रकार का आटा तैयार करने के लिए गेहूं तथा अन्य अनाज का अनुपात 3-2 का रखें. मसलन, यदि आप को 5 किलोग्राम आटा तैयार करना है तो गेहूं की मात्रा 3 किलोग्राम तथा सोयाबीन, मक्का, जौ, चना आदि अनाज की मात्रा 500-500 ग्राम रखें. यदि आप बाजार का पैक्ड आटा प्रयोग करती हैं, तो इसी अनुपात में गेहूं के आटे में अन्य अनाज का आटा मिला कर प्रयोग करें.

विभिन्न रोगों में मल्टीग्रेन आटे का उपयोग

मधुमेह के रोगी 5 किलोग्राम गेहूं के आटे में डेढ़ किलोग्राम चना, 500 ग्राम जौ और 50 ग्राम मेथीदाना मिला कर पिसवाएं. मेथी ब्लडशुगर को नियंत्रित करती है.

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5 किलोग्राम गेहूं के आटे में प्रोटीन के मुख्य स्रोत 500 ग्राम सोयाबीन, 1 किलोग्राम चना और 500 ग्राम जौ मिला कर पिसवाए गए आटे की रोटी खाने से बढ़ती उम्र के बच्चों को लाभ होता है.

गर्भवती महिलाओं को गेहूं के आटे में सोया, पालक, मेथी, बथुआ और लौकी जैसी हरी सब्जियों और थोड़ी सी अजवाइन का मिला कर उस का प्रयोग करना चाहिए. मेनोपौज की प्रक्रिया से गुजर चुकी महिलाओं के शरीर में हारमोन परिवर्तित हो जाते हैं. ऐसे में अधिकतर महिलाओं को हाई ब्लडप्रैशर, हाई कोलैस्ट्रौल और डायबिटीज जैसी बीमारियां घेर लेती हैं. ऐसी स्थिति में 10 किलोग्राम आटे में 5 किलोग्राम गेहूं, 1 किलोग्राम सोयाबीन, डेढ़ किलोग्राम

चना और 1 किलोग्राम जौ मिला कर उस आटा का प्रयोग करें.

मोटापे के शिकार लोगों को गेहूं के आटे के बजाय केवल चना, ज्वार, बाजरा जैसे विभिन्न अनाज से बनी रोटी का प्रयोग करना चाहिए.

दुबलेपन के शिकार और कब्ज के रोगी 5 किलोग्राम गेहूं में 1 किलोग्राम चना और 1 किलोग्राम जौ डाल कर आटा पिसवाएं. फिर इस में विभिन्न हरी सब्जियां डाल कर प्रयोग करें. इन लोगों को फाइबर्स की आवश्यकता रहती है, जिन की पूर्ति चना, जौ और हरी सब्जियां कर देती हैं.

ब्लडप्रैशर के रोगियों को 5 किलोग्राम गेहूं के आटे में 500 ग्राम सोयाबीन, 1 किलोग्राम चना और 250 ग्राम अलसी मिला कर उसे प्रयोग करना चाहिए.

आटा सदैव मोटा पिसवाएं और बिना छाने चोकरयुक्त ही प्रयोग करें. इस से आप के पाचनतंत्र को भोजन पचाने के लिए अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ेगी, क्योंकि चोकर में निहित फाइबर्स रोटी को सुपाच्य बना देते हैं.

रोटी सदैव बिना घी लगाए ही खाएं, क्योंकि घी लगी रोटी गरिष्ठ और अधिक कैलोरीयुक्त हो जाती है, जो शीघ्र पचती नहीं है.

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कंजूस: भाग 3- आखिर क्या था विमल का दर्दभरा सच

लेखक- अनूप श्रीवास्तव

‘‘जीतोड़ मेहनत से काम करने से धीरेधीरे पैसे इकट्ठे होते गए और मेरा काम बढ़ता गया. फिर मैं ने अपनी एक दुकान खोली, जिस में डेयरी का दूध, ब्रैड और इस तरह के बस एकदो ही सामान रखना शुरू किया. जब कोई पूरी ईमानदारी और मेहनत से अपना काम करता है तो वक्त भी उस की सहायता करता है. मेरा उसूल रहा है कि न तो किसी की बेईमानी करो, न किसी का बुरा करो और मेहनत से कभी पीछे मत हटो. मेरी लगन और मेहनत का परिणाम यह है कि आज वही दुकान एक जनरल स्टोर बन चुकी है और उसी की बदौलत यह मकान खरीद सका हूं. श्रद्धा तो थोड़ाबहुत जानती है पर बच्चे कुछ नहीं जानते क्योंकि वे तो शुरू से ही यह मकान और मेरा जनरल स्टोर देख रहे हैं. वे शायद समझते हैं कि उन के पिता पैदायशी अमीर रहे हैं, जिन को पारिवारिक व्यवसाय विरासत में मिला है. उन को क्या पता कि मैं कितना संघर्ष कर इस मुकाम पर पहुंचा हूं.’’

विमल की बातें सुन कर बच्चे तो जैसे हैरान रह गए. वास्तव में वे यही सोचते थे कि  उन के पिता का जनरल स्टोर उन को विरासत में मिला होगा. उन को न तो यह पता था न ही वे कल्पना कर सकते थे कि उन के पिता ने अपने बचपन में कितने उतारचढ़ाव देखे हैं, कैसे गरीबी का जीवन भी जिया है और कैसी विषम परिस्थितियों में किस तरह संघर्ष करते हुए यहां तक पहुंचे हैं. पुरानी स्मृतियों का झंझावात गुजर गया था पर जैसे तूफान गुजर जाने के बाद धूलमिट्टी, टूटी डालियां व पत्ते बिखरे होने से स्थितियां सामान्य नहीं लगतीं, कुछ इसी तरह अब माहौल एकदम गंभीर व करुण सा हो गया था. बात बदलते हुए श्रद्धा बोली, ‘‘अच्छा चलिए, वे दुखभरे दिन बीत गए हैं और आप की मेहनत की बदौलत अब तो हमारे अच्छे दिन हैं. आज हमें किसी बात की कमी नहीं है. आप सही माने में सैल्फमेडमैन हैं.’’ ‘‘श्रद्धा, इसीलिए मेरी यही कोशिश रहती है कि न तो हमारे बच्चों को किसी बात की कमी रहे, न ही वे किसी बात में हीनता का अनुभव करें. यही सोच कर तो मैं मेहनत, लगन और ईमानदारी से अपना कारोबार करता हूं. बच्चो, तुम लोग कभी किसी बात की चिंता न करना. तुम्हारी पढ़ाई में कोई कमी नहीं रहेगी. जिस का जो सपना है वह उसे पूरा करे. मैं उस के लिए कुछ भी करने से पीछे नहीं रहूंगा.’’

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‘‘यह बात हुई न. अब तो कल का प्रोग्राम पक्का रहा. चलो बच्चो, अब कल की तैयारी करो,’’ बूआ के इतना कहते ही सारे बच्चे चहकने लगे मगर जाने क्यों विमल का 15 वर्षीय बड़ा बेटा रजत अभी भी गंभीर ही था.‘‘क्या हुआ रजत, अब क्यों चिंतित हो?’’ बूआ ने पूछा ही था कि रजत उसी गंभीर मुद्रा में कहने लगा, ‘‘बूआ, अब पुराना समय बीत गया जब पापा को पैसों की तंगी रहती थी. अब हमारे पास पैसे या किसी चीज की कमी नहीं है बल्कि हम अमीर ही हो गए हैं. तो फिर पापा क्यों ऐसे रहते हैं. अब तो वे अपनी वे इच्छाएं भी पूरी कर सकते हैं जो वे गरीबी के कारण पूरी नहीं कर सके होंगे.’’रजत के प्रश्न से विमल चौंक गया, फिर कुछ सोच कर कहने लगा, ‘‘बेटा, मुझे खुशी है कि तुम ने यह प्रश्न पूछा. वास्तव में हमारी आज की जीवनशैली, आदतें या खर्च करने का तरीका इस बात पर निर्भर नहीं होता कि हमारी आज की आर्थिक स्थिति कैसी है बल्कि हमारे जीने के तरीके तय करने में हमारा बचपन भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है. अपने बचपन में मैं ने जैसा जीवन जिया है, उस प्रकार का जीवन जीने वालों के मन में कटु माहौल सा बन जाता है, जिस से वे चाह कर भी बाहर नहीं आ सकते. जो आर्थिक संकट वे भुगत चुके होते हैं, पैसे के अभावों की जो पीड़ा उन का मासूम बचपन झेल चुका होता है, उस के कारण वे अमीर हो जाने पर भी फुजूलखर्ची नहीं कर सकते.

‘‘आर्थिक असुरक्षा के भय, अपमानजनक परिस्थितियों की यादों के कष्टप्रद दंश, एकएक पैसे का महत्त्व या पैसों की तंगी की वजह से अभावों में गुजरे समय की जो पीड़ा  अंतर्मन में कहीं गहरे बैठ जाती है उस से चाह कर भी उबरना बहुत कठिन होता है. हकीकत तो यह है कि हमारा आज कितना भी बेहतर हो जाए या मैं कितना भी अमीर क्यों न हो जाऊं लेकिन मैं जिस तरह का बचपन और संघर्षमय अतीत जी चुका हूं वह मुझे इस तरह से खर्च नहीं करने देगा. लेकिन क्या तुम जानते हो कि वास्तव में कंजूस तो वह होता है जो जरूरी आवश्यकताओं पर खर्च नहीं करता है. ‘‘तुम लोगों को पता होगा कि घर में दूध, मौसम के फलसब्जियों या मेवों की कमी नहीं रहती. हां, मैं तुम लोगों को फास्ट फूड या कोल्ड डिं्रक्स के लिए जरूर मना करता हूं क्योंकि आज भले ही ये सब फैशन बन गया है पर ऐसी चीजें सेहत के लिए अच्छी नहीं होतीं. इस के अलावा तुम लोगों की वे सारी जरूरतें, जो आवश्यक हैं, उन को पूरा करने से न तो कभी हिचकता हूं न ही कभी पीछे हटूंगा. तुम्हारे लिए लैपटौप भी मैं ने सब से अच्छा खरीदा है. तुम लोगों के कपड़े हमेशा अच्छे से अच्छे ही खरीदता हूं. इसी तरह तुम लोगों की जरूरी चीजें हमेशा अच्छी क्वालिटी की ही लाता हूं. मैं अपने अनुभव के आधार पर एक बात कहता हूं जिसे हमेशा याद रखो कि जो इंसान अपनी आमदनी के अनुसार खर्च करता और बचत करता है, अपने आने वाले कल के लिए सोच कर चलता है, वह कभी परेशान नहीं होता. अच्छा, अब रात बहुत हो गई है और सब को कल घूमना भी है, इसलिए चलो, अब सोने की तैयारी की जाए.’’

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कंजूस: भाग 2- आखिर क्या था विमल का दर्दभरा सच

लेखक- अनूप श्रीवास्तव

‘‘वैसे रज्जो, अगर देखा जाए तो इस में बच्चों का उतना दोष भी नहीं है. दरअसल, मैं ही आजकल की जिंदगी नहीं जी पाता हूं. न तो आएदिन बाहर खाना, घूमनाफिरना, न ही रोजरोज शौपिंग करना, नएनए मौडल के टीवी, मोबाइल बदलना, अकसर नए कपड़े खरीदते रहना. ऐसा नहीं है कि मैं इन बातों के एकदम खिलाफ हूं या यह बात एकदम गलत है पर क्या करूं, मेरी ऐसी आदत बन गई है. मगर इस का भी एक कारण है और आज मैं तुम सब को अपने स्वभाव का कारण भी बताता हूं,’’ इतना कह कर विमल गंभीर हो गए तो सब ध्यान से सुनने लगे.

विमल बोले, ‘‘रज्जो, तुझे अपना बचपन तो याद होगा?’’

‘‘हांहां, अच्छी तरह से याद है, भैया.’’

‘‘लेकिन रज्जो, तुझे अपने घर के अंदरूनी हालात उतने अधिक पता नहीं होंगे क्योंकि तू उस समय छोटी ही थी,’’ इतना कह कर विमल अपने बचपन की कहानी सुनाने लगे : उन के पिता लाला दीनदयाल की गिनती खातेपीते व्यापारियों में होती थी. उन के पास पुरखों का दोमंजिला मकान था और बड़े बाजार में गेहूंचावल का थोक का व्यापार था. विमल ने अपने बचपन में संपन्नता का ही समय देखा था. घर में अनाज के भंडार भरे रहते थे, सारे त्योहार कई दिनों तक पूरी धूमधाम से परंपरा के अनुसार मनाए जाते थे. होली हो या दशहरा, दिल खोल कर चंदा देने की परंपरा उस के पूर्वजों के समय से चली आ रही थी. विमल जब कभी अपने दोस्तों के साथ रामलीला देखने जाता तो उन लोगों को सब से आगे की कुरसियों पर बैठाया जाता. इन सब बातों से विमल की खुशी देखने लायक होती थी. विमल उस समय 7वीं कक्षा में था पर उसे अच्छी तरह से याद है कि पूरी कक्षा में वे 2-3 ही छात्र थे जो धनी परिवारों के थे क्योंकि उन के बस्ते, पैन आदि एकदम अलग से होते थे. उन के घर में उस समय के हिसाब से ऐशोआराम की सारी वस्तुएं उपलब्ध रहती थीं. उस महल्ले में सब से पहले टैलीविजन विमल के ही घर में आया था और जब रविवार को फिल्म या बुधवार को चित्रहार देखने आने वालों से बाहर का बड़ा कमरा भर जाता था तो विमल को बहुत अच्छा लगता था. उस समय टैलीफोन दुर्लभ होते थे पर उस के घर में टैलीफोन भी था. आकस्मिकता होने पर आसपड़ोस के लोगों के फोन आ जाते थे. इन सारी बातों से विमल को कहीं न कहीं विशिष्टता का एहसास तो होेता ही था. उसे यह भी लगता था कि उस का परिवार समाज का एक प्रतिष्ठित परिवार है.

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पिछले कुछ समय से जाने कैसे दीनदयाल को सट्टे, फिर लौटरी व जुए की लत पड़ गई थी. उन का अच्छाखासा समय इन सब गतिविधियों में जाने लगा. जुए या ऐसी लत की यह खासीयत होती है कि जीतने वाला और अधिक जीतने के लालच में खेलता है तो हारने वाला अपने गंवाए हुए धन को वापस पा लेने की आशा में खेलता है. दलदल की भांति जो इस में एक बार फंस जाता है, उस के पैर अंदर ही धंसते जाते हैं और निकलना एकदम कठिन हो जाता है. पहले तो कुछ समय तक दीनदयाल जीतते रहे मगर होनी को कौन टाल सकता है. एक बार जो हारने का सिलसिला शुरू हुआ तो धीरेधीरे वे अपनी धनदौलत हारते गए और इन्हीं सब  चिंता व समस्याओं से व्यवसाय पर पूरा ध्यान भी नहीं दे पाते थे. उन की सेहत भी गिर रही थी, साथ ही व्यापार में और भी नुकसान होने लगा. विमल को वे दिन अच्छी तरह से याद हैं जब वह कारण तो नहीं समझ पाया था पर उस के माता और पिता इस तरह पहली बार झगड़े थे. उस ने मां को जहां अपने स्वभाव के विपरीत पिता से ऊंची आवाज में बात करते सुना था वहीं पिता को पहली बार मां पर हाथ उठाते देखा था. उस दिन जाने क्यों पहली बार विमल को अपने पिता से नफरत का एहसास हुआ था. फिर एक दिन ऐसा आया कि उधार चुकता न कर पाने के कारण उन का पुश्तैनी मकान, जो पहले से ही गिरवी रखा जा चुका था, के नीलाम होने की नौबत आ गई. इस के बाद दीनदयाल अपने परिवार को ले कर वहां से दूर एक दूसरे महल्ले में किराए के एक छोटे से मकान में रहने को विवश हो गए. हाथ आई थोड़ीबहुत पूंजी से वे कुछ धंधा करने की सेचते पर उस के पहले ही उन का दिल इस आघात को सहन नहीं कर सका और वे परिवार को बेसहारा छोड़ कर चल बसे.

यह घटना सुनते हुए रजनी की आंखें नम हो आईं और उस का गला रुंध गया. कटु स्मृतियों के दंश बेसाख्ता याद आने से पुराने दर्द फिर उभर आए. कुछ पल ठहर कर उस ने अपनेआप को संयत किया फिर कहने लगी, ‘‘मुझे आज भी याद है कि भैया के ऊपर बचपन से ही कितनी जिम्मेदारियां आ गई थीं. हम लोगों के लिए फिर से अपना काम शुरू करना कितना कठिन था. वह तो जाने कैसे भैया ने कुछ सामान उधार ले कर बेचना शुरू किया था और अपनी मेहनत से ही सारी जिम्मेदारियां पूरी की थीं.’’ ‘‘रज्जो सच कह रही है. इसी शहर में मेरे एक मित्र के पिता का थोक का कारोबार था. हालांकि वह मित्र मेरी आर्थिक रूप से मदद तो नहीं कर सका मगर उस ने मुझे जो हौसला दिया, वह कम नहीं था. मैं ने कैसेकैसे मिन्नतें कर के सामान उधार लेना शुरू किया था और उसे किसी तरह बेच कर उधार चुकाता था. वह सब याद आता है तो हैरान रह जाता हूं कि कैसे मैं यह सब कर पाया था. जैसेतैसे जब कुछ पैसे आने शुरू हुए तो मैं ने अम्मा, दीदी और रज्जो के साथ दूसरे मकान में रहना शुरू किया. हमारे साथ जो कुछ घटित हुआ, इस तरह की खबरें बहुत तेजी से फैलती हैं और जानते हो इस का सब से बड़ा नुकसान क्या होता है? आर्थिक नुकसान तो कुछ भी नहीं है क्योंकि पैसों का क्या है, आज नहीं तो कल आ सकते हैं पर पारिवारिक प्रतिष्ठा को जो चोट पहुंचती है और पुरखों की इज्जत जिस तरह मिटती है उस की भरपाई कभी नहीं हो सकती. मैं अपना बचपन अपने बाकी साथियों की तरह सही तरीके से नहीं जी पाया और उस की भरपाई आज क्या, कभी नहीं हो सकती.

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‘‘लेकिन यह मत समझो कि इस की वजह केवल पैसों का अभाव रहा है. अपना सम्मान खोने के बाद भी सिर उठा कर जीना आसान नहीं होता. मुझे अच्छी तरह से याद है कि इन सब घटनाओं से मैं कितनी शर्मिंदगी महसूस करता था और अपने दोस्तों का सामना करने से बचता था. तू तो छोटी थी पर मां तो जैसे काफी दिन गुमसुम सी रही थीं और मेरी खुशमिजाज व टौपर दीदी भी इन सब घटनाओं से जाने कितने दिन डिप्रैशन में रही थीं. इन सारी घटनाओं की चोट मेरे अंतर्मन में आज भी ताजा है और मैं अकेले में उस पीड़ा को आज भी ऐसे महसूस करता हूं जैसे कल की घटना हो. अब मुझे पता चला कि एक आदमी की लापरवाही और गैरजिम्मेदारी का खमियाजा उस के परिवार के जाने कितने लोगों को और कितने समय तक भुगतना पड़ सकता है. आज भी अगर कोई पुराना परिचित मिल जाता है तो भले ही वह हमारा अतीत भूल चुका हो परंतु मैं उस को देख कर भीतर ही भीतर शर्मिंदा सा महसूस करता हूं. मुझे ऐसा लगता है कि मेरे सामने वह व्यक्ति नहीं कोई आईना आ गया है, जिस में मेरा अतीत मुझे दिख रहा है.

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GHKKPM: सम्राट संग मस्ती करती नजर आईं सई, फोटोज हुई वायरल

सीरियल गुम है किसी के प्यार में की कहानी में इन दिनों ट्विस्ट एंड टर्न्स देखने को मिल रहे हैं, जहां पाखी के पति सम्राट की एंट्री से पूरा चव्हाण परिवार खुश है तो वहीं विराट और सई के बीच दूरियां देखने को मिल रही हैं. इसी बीच सीरियल के सेट से कुछ फोटोज वायरल हुई हैं, जिसमें सम्राट और सई मस्ती करते नजर आ रहे हैं. आइए आपको दिखाते हैं वायरल फोटोज…

सेट पर मस्ती करती दिखीं सई

 

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हाल ही में सई यानी आयशा सिंह ने अपने सोशलमीडिया अकाउंट पर कुछ फोटोज शेयर की हैं, जिसमें वह सम्राट यानी एक्टर योगेंद्र विक्रम सिंह के साथ मस्ती करती नजर आ रही हैं. वहीं इन फोटोज में दोनों की बौंडिंग काफी खास नजर आ रही है, जिसके चलते फैंस सवाल पूछ रहे हैं.

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विराट – पाखी भी नही रहे पीछे

सई के अलावा विराट और पाखी यानी ऐश्वर्या शर्मा और नील भट्ट भी अक्सर मस्ती करते हुए नजर आते हैं. वहीं हाल ही में नील भट्ट ने एक वीडियो शेयर की है, जिसमें पाखी यानी ऐश्वर्या शर्मा गाना गाते नजर आ रही हैं. वहीं इस वीडियो की खास बात उसका कैप्शन है, जिसमें एक्टर ने लिखा कि ये सौंग मैं अपनी नानी मां को डेडिकेट करते हूं, जो कि अपनी होने वाली पोता बहू से ये गाना सुनना चाहती थीं.

सेट पर चढ़ा मस्ती का खुमार

सीरियल गुम है किसी के प्यार में पर जहां बीते दिनों #baspankapyar का खुमार पाखी यानी ऐश्वर्या शर्मा पर देखने को मिला था तो वहीं हाल ही में सीरियल की पूरी टीम इस वायरल रील पर मस्ती करती नजर आई थीं, जिसे देखने के बाद शो के फैंस मजेदार रिएक्शन देते नजर आए थे.

 

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बता दें शो में इन दिनों सम्राट ने घर वापसी के बाद पाखी से तलाक लेने का फैसला किया है. वहीं विराट ने भी सई से अपने सारे रिश्ते तोड़ लिए हैं. अब देखना है कि गुम हैं किसी के प्यार में कहानी कौनसा नया मोड़ लेती है.

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खीरे-टमाटर खाने पर मजबूर हुईं Anupamaa, रो रोकर बताया अपना दर्द

साराभाई वर्सेज साराभाई की मोनिशा से अनुपमा के रोल में पहचान बनाने वाली रुपाली गांगुली का शो इन दिनों टीआरपी चार्ट्स में छाया हुआ है. वहीं सीरियल के कलाकार भी सेट मस्ती करते नजर आते रहते हैं. लेकिन हाल ही में अनुपमा यानी रुपाली गांगुली ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह अपने डाइटिंग का दर्द बयां कर रही हैं. आइए आपको दिखाते हैं वीडियो…

डाइट की वीडियो की शेयर

 

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एक्ट्रेस रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly) अपने फैंस से जुड़े रहने के लिए अक्सर सोशलमीडिया पर नई-नई वीडियो शेयर करती रहती हैं. इसी बीच रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly) ने एक मजेदार वीडियो फैंस के साथ शेयर किया है, जिसमें वह डाइटिंग का दर्द फैंस के साथ बांटती नजर आ रही हैं. दरअसल, वीडियो में पिज्जा, पुडिंग और मिठाई सामने होने के बावजूद डाइटिंग के चलते सलाद खाती दिख रही हैं. वहीं बैकग्राउंड में ‘कभी कभी तो लगे जिन्दगी में रही ना खुशी और ना मजा’ गाना बज रहा है.

 

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सीरियल में दिखेगा अनुपमा का दमदार अंदाज

 

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रुपाली गांगुली के सीरियल की बात करें तो अपकमिंग एपिसोड में अनुपमा का दमदार अंदाज काव्या को हैरान कर देगा. दरअसल, किंजल के बौस के छेड़छाड़ मामले में अनुपमा बड़ा कदम उठाएगी. वहीं किंजल के बौस को पूरे स्टाफ के सामने जहां बेइज्जत करती नजर आएगी तो वहीं एक जोरदार तमाचा लगाती नजर आएगी, जिसे देखकर काव्या हैरान रह जाएगी. दूसरी तरफ पूरा शाह परिवार उसके इस कदम की तारीफ करेगा.

 

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बता दें, हाल ही में सीरियल अनुपमा के सितारे अवौर्ड से सम्मानित किए गए हैं. वहीं काव्या यानी मदालसा शर्मा (Madalsa Sharma) को इंटरनेशनल आइकॉनिक अवॉर्ड्स द्वारा बेस्ट खलनायिका के खिताब मिला है. इसी के साथ सीरियल से दूसरे सितारों को भी अवौर्ड मिला है, जिसकी फोटोज सोशलमीडिया पर वायरल हो रही है.

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नए जमाने की बिंदास दुल्हन के लिए चुनें परफेक्ट जूलरी

सदियों से हम देखते आए हैं कि एक लड़की अपनी शादी में दुल्हन बनकर डरी सहमी सी चुपचाप एक कोने में बैठी रहती है और आंसू भरी आंखों के साथ परिवार से विदा ले लेती है. जबकि दूसरी ओर दूल्हा सज धज कर गाजेबाजे के साथ ग्रैंड तरीके से एंट्री लेता है और शादी के हर मूवमेंट को पूरा एंजौय करता है. लेकिन अब समय आ गया है बदलाव का.

शादी के सारे मजे दूल्हा ही क्यों ले. शादी का दिन जितना दूल्हे के लिए खास होता है है उतना ही स्पेशल दुल्हन के लिए भी होता है. तो अब उसे भी चमकना है, उसे भी अपने दिन को खास बनाने का मौका मिलना चाहिए. ताकि वो भी दूल्हे की तरह अपनी शादी में शाही तरीके से किसी ग्रैंड मैनर में एंट्री कर सारे पुराने रीतिरिवाजों को तोड़ते हुए अपने इस दिन को खास बनाएं और दुनिया को करे इस खास मूवमेंट के लिए इंस्पायर ताकि ये शादी सही मायनो में उसे अपनी शादी लगे.

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इसलिए ही मालाबार गोल्ड एंड डायमंड प्रोडक्ट रेंज के तहत हम बनाते हैं ऐसी शानदार जूलरी, जिन्हें न सिर्फ दुल्हन सेलिब्रेट कर सके बल्कि ये उसके खास दिन को भी स्पेशल बनाए. मालाबार गोल्ड लाएं हैं ऐसे खास प्रोडक्ट्स जो न सिर्फ उसकी चमक बढ़ाएं बल्कि उसे नई पहचान, नई उमंग और नए कोन्फिडेन्स के साथ अपने दिन को खास बनाने में मदद करें. भले ही ये दुल्हन देश के किसी भी कोने की हो, हमारे मालाबार गोल्ड एंड डायमंड जूलरी के साथ उसे मिलता है यूनीक टच, ताकि हर दुल्हन लगे खास और हर शादी का दिन हो सबसे स्पेशल.

तो दुनिया वालों जरा संभल कर, क्योंकि आ रही है आज की नई सदी की दुल्हन, रास्ता देना तो बनता ही है. मालाबार गोल्ड एंड डायमंड के साथ ‘ द ब्राइड्स ऑफ इंडिया ‘ .

यूपी ने कायम की मिसाल, वैक्सिनेशन छह करोड़ पार

यूपी ने कोरोना टीकाकरण में दूसरे प्रदेशों को पीछे छोड़ते हुए अपने  नाम एक नया रिकार्ड हासिल किया है. महाराष्‍ट्र, दिल्‍ली, आंध्र प्रदेश, वेस्‍ट बंगाल समेत दूसरे कई राज्‍यों से आगे निकल 6 करोड़ से अधिक टीकाकरण की डोज दी हैं. यह आंकड़ा देश के दूसरे प्रदेशों से कहीं अधिक है. यूपी टीकाकरण के साथ ही सर्वाधिक जांच करने वाला प्रदेश है. ट्रिपल टी की रणनीति व टीकाकरण से यूपी में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर नियंत्रण में हैं. प्रदेश में वृहद टीकाकरण अभियान के तहत ‘सबका साथ, सबका विकास, सबको वैक्सीन, मुफ्त वैक्सीन’ के मूल मंत्र पर टीकाकरण किया जा रहा है.

प्रदेश में वैक्‍सीन की पहली खुराक 5 करोड़ 07 लाख से अधिक और 94 लाख से अधिक वैक्‍सीन की दूसरी डोज दी जा चुकी है. बता दें क‍ि मेगा वैक्सिनेशन में एक दिन में सर्वाधिक टीकाकरण कर यूपी देश के दूसरे प्रदेशों के समक्ष नज़ीर पेश कर चुका है. योगी सरकार ने मेगा वैक्सिनेशन ड्राइव के तहत एक दिन में 20 लाख लोगों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया था जिसके सापेक्ष में यूपी ने 29.52 लाख लोगों का टीकाकरण किया था. जो एक दिन में किया गया अब तक का सर्वाधिक टीकाकरण था. एक दिन में अब तक सबसे अधिक वैक्‍सीन की डोज लगाकर योगी सरकार रिकार्ड बना चुकी है.

14 दिनों के अंदर एक करोड़ टीकाकरण कर अपने लक्ष्‍य के करीब पहुंचा यूपी

यूपी में टीकाकरण अभियान को गति देते हुए शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में युद्धस्‍तर पर टीकाकरण किया जा रहा है. तीन अगस्‍त को यूपी ने पांच करोड़ टीकाकरण कर एक कीर्तिमान बनाया था वहीं महज 14 दिनों में एक करोड़ टीकाकरण कर यूपी ने छह करोड़ टीकाकरण कर अपने निर्धारित टीकाकरण लक्ष्‍य की ओर तेजी  से आगे बढ़ रहा है. 31 अगस्‍त तक 10 करोड़ लोगों को टीका लगाने का लक्ष्‍य निर्धारित किया है. मिशन जून के तहत प्रदेश सरकार ने एक करोड़ लोगों को वैक्‍सीन की डोज लगाने का लक्ष्‍य निर्धारित किया था लेकिन प्रदेश में इससे कहीं अधिक एक करोड़ 29 हजार टीके की डोज दी गई.

यूपी ऐसे रहा महाराष्ट्र, दिल्ली और अन्य प्रदेशों से टीकाकरण में अव्वल

25 करोड़ के आबादी वाले उत्तर प्रदेश से देश के दूसरे प्रदेश टीकाकरण में कहीं पीछे हैं.  वेस्ट बंगाल, महाराष्ट्र, दिल्ली समेत अन्य प्रदेशों में जहां काम आबादी होने के बावजूद टीकाकरण धीमी गति से चल रहा कहीं यूपी लगातार रिकॉर्ड बना रहा है. वेस्ट बंगाल में अब तक तीन करोड़ 47 लाख, केरल में दो करोड़ 47 लाख,महाराष्ट्र में पांच करोड़ 03 लाख, दिल्ली में एक करोड़ 17  लाख और तमिलनाडु दो करोड़ 72 लाख ही वैक्सिनेशन किया गया है.

सुविधाओं से लैस होगी एटीएस

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में आतंकी गतिविधियों के प्रभावी रोकथाम के लिए बड़ी पहल की है. उन्होंने प्रदेश में पहली बार एक साथ एटीएस की 12 इकाइयों की स्थापना की संस्तुति की है. साथ ही एटीएस को और मजबूत करने के लिए प्रस्ताव मांगा है, आशा है कि जल्द ही एटीएस को और अत्याधुनिक संसाधनों से लैस किया जाएगा और समुचित मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाएगा.

प्रदेश के संवेदनशील 10 जिलों मेरठ, अलीगढ़, श्रावस्ती, बहराइच, ग्रेटर नोएडा (जेवर एयरपोर्ट), आजमगढ़ (निकट एयरपोर्ट), कानपुर, सोनभद्र, मीरजापुर और सहारनपुर के देवबंद में एटीएस इकाई/कमाण्डो ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा. इसके लिए संबंधित जिलों में भूमि आवंटित हो गई है और भवनों के निर्माण के लिए कार्यवाही चल रही है. इसके अलावा वाराणसी और झांसी में एटीएस इकाई की स्थापना के लिए जल्द ही भूमि आवंटन होने की संभावना है. शासन के निर्देशानुसार एटीएस को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए इंडो-नेपाल बॉर्डर पर बहराइच और श्रावस्ती में एटीएस की नई फील्ड यूनिट स्थापित की जा चुकी है और कार्य सुचारु रूप से चल रहा है.

एटीएस आतंकी मंसूबों पर फेर रहा पानी, राष्ट्र द्रोहियों को भेज रहा जेल

एटीएस ने विभिन्न आतंकवादी संगठनों आईएसआईएस, हिजबुल मुजाहिद्दीन, जैश-ए-मोहम्मद, जेएमबी, आईएसआई जासूस, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई), नक्सल, टेरर फंडिंग, एबीटी/बांग्लादेश, बब्बर खालसा, जाली भारतीय मुद्रा आदि से सम्बन्धित 69 आतंकवादियों, विभिन्न अपराधों से संबंधित 216 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इसके अलावा मूक बधिर छात्रों, कमजोर आय वर्ग के लोगों को धन, नौकरी और शादी का लालच देकर धर्मांतरण कराने वाले सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. इसके अलावा 16 जनवरी को एटीएस ने कूट रचित प्रपत्रों के आधार पर भारी मात्रा में फर्जी मोबाईल सिम एक्टीवेट कराने से संबंधित 18 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है, जिसमें तीन चीनी नागरिक भी शामिल हैं. यह मामला आर्थिक घोटाले के साथ-साथ राष्ट्र विरोधी गतिविधियों से जुड़ा है, जिसकी गहराई से जांच हो रही है.

खतरनाक ऑपरेशन के लिए स्पॉट की पांच टीमें और स्नाईपर्स की चार टोलियां तैयार

प्रदेश में एनएसजी की तरह खतरनाक ऑपरेशन को विशेषज्ञ तरीके से करने के लिए एटीएस के विशेष पुलिस संचालन दल (स्पॉट) का गठन 2017 में किया गया है. स्पॉट कर्मियों ने बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी आदि पुलिस के विशेषज्ञ प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण लिया है. स्पॉट की पांच टीमें तैयार हैं, दो टीमें प्रशिक्षण ले रही हैं और दो अन्य टीमों के लिए कार्यवाही चल रही है. इसके अलावा यूपी पुलिस की पहली स्नाईपर्स टीम की चार टोलियां तैयार की गई हैं, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) ने प्रशिक्षण दिया है. इसके बाद यूपी पुलिस की दक्षता और प्रभावशीलता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है.

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