Masala Ae Magic: लॉकडाउन में कम न हो रिश्तों का स्वाद

मनीष और निशिता की शादी को दो साल हो गए हैं. दोनों वर्किंग हैं और अपने अपने काम में बिजी, दिल्ली जैसे शहर की भागती दौड़ती जिंदगी में दोनों को एक दूसरे के लिए कम ही टाइम मिल पाता है. लेकिन लॉकडाउन इनकी जिंदगी में एक नया मोड़ ले आया है.

निशिता काम के साथ-साथ दिन भर किचन में बिजी रहती हैं, जिस वजह से न तो वो मनीष को टाइम दे पाती हैं और न ही अपने काम पर फोकस कर पाती है, जिसका नतीजा ये हुआ कि वो दिन पर दिन चिड़चिड़ी हो गई और आखिरकार उसका सारा गुस्सा मनीष पर फूट पड़ा. नतीजा न दिन भर चूल्हा जला न दोनों ने खाना खाया.

निशिता चटपटे खाने की बेहद शौकीन है और भूखी तो बिल्कुल नहीं रह सकती है. ऐसे में मनीष ने निशिता को मनाने के लिए एक बेहतरीन आइडिया लगाया और मैगी के Ae magic मसाले का नया पैक खोला जो वो लॉकडाउन से पहले लेकर आया था.

क्योंकि निशिता रूम में ही थी इसलिए मनीष ने चुपचाप Masala Ae Magic के साथ मसालेदार आलू-गोभी बनाई और निशिता को सरप्राइज देने के लिए रूम में गया. निशिता, मनीष का ये रूप देखकर हैरान थी और खुश भी. दोनों की नाराजगी दूर हो चुकी थी और अब दोनों मिलकर खाने का स्वाद ले रहे थे.

मनीष की जिंदगी में तो Masala Ae Magic ने स्वाद घोल दिया तो आप किस बात का इंतजार कर रहे हैं. आप भी ट्राय कीजिए ये टेस्टी डिश, जिसका स्वाद दुगुना करेगा Masala Ae Magic.

#lockdown: घर पर बनाएं टेस्टी अचारी बैगन

आज हम आपको टेस्टी अचारी बैंगन की आसान रेसिपी बताएंगे, जिसे आप आसानी से अपनी फैमिली और फ्रेंड्स के लिए फेस्टिवल में बना सकते हैं.

हमें चाहिए-

–  250 ग्राम छोटे गोल बैगन भरावन के लिए

–  2 बड़े चम्मच प्याज का पेस्ट

–  2 छोटे चम्मच अदरक व लहसुन पेस्ट

–  1/2 छोटा चम्मच हलदी पाउडर

–  2 छोटे चम्मच धनिया पाउडर

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–  1/2 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर

–  1/2 छोटा चम्मच अमचूर पाउडर

–  2 छोटे चम्मच सौंफ पाउडर

–  नमक स्वादानुसार.

सामग्री तड़के की

–  2 छोटे चम्मच मस्टर्ड औयल

–  चुटकीभर हींग पाउडर

–  1/2 छोटा चम्मच सौंफ

–  1/2 छोटा चम्मच कलौंजी

–  1/2 छोटा चम्मच राई

–  2 छोटे चम्मच अचार का रैडीमेड पाउडर

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–  1/2 कप फ्रैश टोमैटो प्यूरी

–  नमक स्वादानुसार.

बनाने का तरीका

बैगनों को अच्छी तरह धो कर पोंछ लें. 1 छोटा चम्मच तेल नौनस्टिक कड़ाही में गरम कर प्याज, अदरक व लहसुन और सूखे मसाले डाल कर भून लें. प्रत्येक बैगन में क्रौस का चीरा लगाएं.

ध्यान रहे डंडी की तरफ से जुड़ा रहे. फिर इन में मसाले का पेस्ट भर दें. पुन: बचा तेल गरम कर के सूखे मसालों का तड़का लगाएं. फिर टोमैटो प्यूरी डालें और उस में बैगन डाल दें.

अचार का पाउडर भी डाल दें. ढक कर पकाएं, बीच में उलटतीपलटती रहें. बैगन गल जाएं और मसाला सूख जाए तो समझें बैगन सर्व करने के लिए तैयार हैं.

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महायोग: धारावाहिक उपन्यास, भाग-14

शायद नील के मन में कहीं न कहीं दिया के लिए नरमाहट पैदा हो रही थी परंतु मां का बिलकुल स्पष्ट आदेश…वह करे भी तो क्या? उसे वास्तव में दिया के लिए बुरा लगता था, लेकिन वह अपना बुरा भी तो नहीं होने दे सकता था. उस का अपना भविष्य भी तो त्रिशंकु की भांति अधर में लटका हुआ था. उस के विचारों में उथलपुथल होती रही और इसी मनोदशा में वह 2 प्यालों में चाय ले कर मां के पास डाइनिंग टेबल पर आ बैठा था. मां तब तक बिस्कुट का डब्बा खोल कर बिस्कुट कुतरने लगी थीं.

‘‘मौम, यह ठीक नहीं है.’’

‘‘अब क्या कर सकते हैं? मैं भी कहां चाहती थी कि यह सब हो पर…उस दिन  धर्मानंदजी आए थे, तब भी उन्होंने यही बताया कि अभी डेढ़दो साल तक तुम दिया से संबंध नहीं बना सकते. इस के बाद भी तुम दोनों का समय देखना पड़ेगा.’’

‘‘पर मौम, अभी तो हम ने शादी के लिए भी एप्लाई नहीं किया है. फिर…’’

‘‘शादी के लिए एप्लाई करने का अभी कोई मतलब ही नहीं है जब तक इस के सितारे तुम्हारे फेवर में नहीं आ जाते. वैसे भी तुम्हें क्या फर्क पड़ता है?’’ मां ने सपाट स्वर में अपने बेटे

से कहा. ‘‘मैं ने तो आप से पहले ही कहा था. अभी तो नैंसी  जरमनी गई हुई है. आएगी तो मैं उस के साथ बिजी हो जाऊंगा पर इस का…’’

‘‘अब बेटा, वह तुम्हारा पर्सनल मामला है. मैं तो कभी नहीं चाहती थी कि तुम नैंसी  से रिलेशन बनाओ. वह तुम्हारे साथ शादी करने के लिए भी तैयार नहीं है.’’

‘‘क्या फर्क पड़ता है, मौम, मैं तो उस के साथ बहुत खुश हूं. आप को बहू चाहिए थी. इतनी खूबसूरत लड़की को देख कर मैं भी बहक गया पर आप मुझे उस से दूर रहने के लिए जोर दे रही हैं,’’ नील मां से नाराज था.

दिया कब रसोई के बाहर आ कर खड़ी हो गई थी, किसी को पता नहीं चला. मांबेटे की बात सुन कर दिया के पैर लड़खड़ाने लगे थे. कहां फंस गई थी वह? दबे कदमों से चुपचाप आ कर वह कुरसी पर बैठ गई.

‘‘अरे दिया, उठ गई बेटा, आज तो बहुत सोई और ये सब क्या है?’’ रसोईघर से निकलते हुए सास ने एक के बाद एक सवाल उस पर दाग दिए.

‘‘गुडमौर्निंग दिया, आर यू ओके?’’ नील ने भी अपनी सहानुभूति दिखाने की कोशिश की.

दिया ने एक दृष्टि दोनों की ओर डाली. उस की क्रोध और पीड़ाभरी दृष्टि से  मांबेटे क्षणभर के लिए भीतर से कांप उठे, फिर तुरंत सहज भी हो गए.

‘‘माय पासपोर्ट इज मिसिंग?’’ दिया ने कुछ जोर से कहा.

‘‘अरे, कहां जाएगा? यहीं होगा कहीं तुम्हारे कपड़ों के बीच में. कोई तो आताजाता नहीं है घर में जो चुरा कर ले जाएगा. और किसी को करना भी क्या है तुम्हारे पासपोर्ट का?’’ कितनी बेशर्म औरत है. दिया ने मन ही मन सोचा.

अब तक दिया समझ चुकी थी कि इस प्रकार यहां उस की दाल नहीं गलेगी. अभी तक उस की सास उसे केवल 2-3 बार मंदिर और दोएक बार मौल ले कर गई थीं. मंदिर में भी उसे भारत से आई हुई रिश्तेदार के रूप में ही परिचित करवाया गया था. उसी मंदिर में उस ने उस लंबेचौड़े गौरवपूर्ण पुरुष को देखा था जिसे उस की सास धर्मानंदजी कहती थीं. अभी चाय पीते समय जरूर वे उसी आदमी के बारे में बातें कर रही थीं. उस ने सोचा, ‘पर वह क्यों नील को उस से दूर रखना चाहता है?’

‘‘चलो, चलो, ये सब ठीकठाक कर के अपनी जगह पर जमा दो. मिल जाएगा पासपोर्ट, जाएगा कहां. और अभी करना भी क्या है पासपोर्ट का?’’ दिया की सास ने अपना मंतव्य प्रस्तुत कर दिया.

‘‘आओ, मैं तुम्हारी हैल्प करता हूं. मौम, आप दिया के लिए प्लीज चाय बना दीजिए. यह बहुत थकी हुई लग रही है,’’ नील ने मां से खुशामद की.

‘‘नो, थैंक्स, मैं बना लूंगी जब पीनी होगी,’’ दिया ने कहा और सामान समेट कर अटैची में भरने लगी. कुछ दिनों से जो साहस वह जुटाने की चेष्टा कर रही थी वह फिर से टूट रहा था.

नील दिया के साथ उस का सामान फिर से जमाने का बेमानी सा प्रयास कर रहा था जिस से कभीकभी उस का शरीर दिया के शरीर से टकरा जाता परंतु दिया को इस बात से कोई रोमांच नहीं होता था. दिया एक कुंआरी कन्या थी जिस के तनमन में यौवन की तरंगों का समावेश रहा ही होगा परंतु जब शरीर ही बर्फ हो गया तो…? फिलहाल तो उस का मस्तिष्क अपने पासपोर्ट में ही अटका हुआ था. उस के मन ने कहा, जरूर यह मांबेटे की चाल है परंतु प्रत्यक्ष में तो वह कुछ कहने या किसी प्रकार के दोषारोपण करने का साहस कर ही न सकती थी.

ऊपर से एक और रहस्य, ‘यह नैंसी  कौन है? और नील से उस का क्या रिश्ता हो सकता है?’ उस का मस्तिष्क जैसे उलझता ही जा रहा था. कोई भी तो ऐसा नहीं था जिस से बात कर के वह अपनी उलझनों का हल ढूंढ़ती. कभी नील उस से बात करने का प्रयास करता भी तो पहले तो उस का ही मन न होता पर बाद में उस ने सोचा कि वह बात कर के ही नील से वास्तविकता का पता लगा सकती है. उसे नील के करीब तो जाना ही होगा, तभी उसे पता चल सकेगा कि आखिर वह किस प्रकार इस जाल से छूट सकेगी? वह अंदर ही अंदर सोचती हुई अपनेआप को संभालने का प्रयास कर रही थी. परंतु उस के इस प्रकार के थोड़ेबहुत प्रयास पर नील की मां पानी फेर देतीं. वे किसी न किसी बहाने से नील को उस के पास से हटा देती थीं. उन दोनों की बातें सुनने के बाद उसे यह तो समझ में आने लगा था कि हो न हो, ये सब करतूतें भी कोई ग्रहोंव्रहों के कारण ही हो रही हैं पर पूरी बात न जान पाने के कारण वह कुछ भी कर पाने में स्वयं को असमर्थ पाती.

आज फिर नील की मां उसे मंदिर ले गईं. वहां पर काफी लोग जमा थे. पता चला, कोई महात्मा प्रवचन देने आए थे, इंडिया से. दिया कहां इन सब में रुचि रखती थी परंतु विवशता थी, बैठना पड़ा सास के साथ. दिया का मन उन्हें सास स्वीकारने से भी अस्वीकार कर रहा था. कैसी सास? किस की सास? जैसेजैसे दिन व्यतीत होते जा रहे थे उस का मन अधिक और अधिक आंदोलन करने लगा था. यहां सीधी उंगली से घी नहीं निकलने वाला था, दिया की समझ में यह बात बहुत पहले ही आ चुकी थी. प्रश्न यह था कि उंगली टेढ़ी की कैसे जाए? इस के लिए कोई रास्ता ढूंढ़ना बहुत जरूरी था.

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#lockdown: कोरोना वायरस लगा रहा बैंक अकाउंट में सेंध

पश्चिम बंगाल के एक छोटे से गांव के रहने वाले मदीन की आंखों से बारबार आंसू छलक पङता है. मेहनतमजदूरी से जमा किए उस के 33 हजार रूपए  धोखे से किसी ने उस के अकाउंट से निकाल लिए. कुछ ही महीनों पहले वह महाराष्ट्र से अपने गांव आया था और सोचा था कि इन रुपयों से वह एक भैंस खरीदेगा. थोङेथोङे कर के उस ने पैसे बचाए थे.

बिहारबंगाल बौर्डर पर बसे एक गांव की निशा देवी उस दिन को याद कर फफक पङती है जब किसी ने उसे फोन कर खुद को अधिकारी बताया और कहा,”हैलो, मैं स्वास्थ्य विभाग से बोल रहा हूं. कोरोना महामारी के बीच सरकार की ओर से दी जाने वाली सहायता राशि आप के खाते में भेजनी है. कृपया अपने बैंक खाते का विवरण व एटीएम का पिन नंबर जल्द बताइए.”

निशा से पूरी जानकारी लेते ही फोन डिस्कनैक्ट हो गया और और कुछ ही देर बात उस के मोबाइल पर एक मैसेज आया तो वह बदहवास सी अपने पति को जानकारी देने लगी. उस के अकाउंट से 7,850 रूपए किसी ने निकाल लिए थे जबकि एटीएम कार्ड उसी के पास था. दरअसल, ये दोनों ही साइबर ठगी के शिकार हो गए.

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सोशल मीडिया के जरीए बना रहे शिकार

कोरोना वायरस को महामारी बता कर साइबर अपराधियों ने भोलेभाले लोगों को अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया है. फर्जी वेब पेज, फर्जी ईमेल, फर्जी सोशल मीडिया और फोन के जरीए साइबर ठग लोगों के अकाउंट को बङी शातिराना अंदाज में साफ कर रहे हैं. पुलिस को ऐसे कई मामले मिले हैं जिस में आरोपी खुद को स्वास्थ्य विभाग का अधिकारी बता कर, तो कभी बैंककर्मी बता कर लोगों से ठगी कर रहे हैं. कुछ मामलों में तो ये इलाज के नाम पर चंदा मांग कर भी लोगों को चूना लगा रहे हैं.

सावधान रहें

पिछले दिनों बिहार की राजधानी पटना के साइबर सेल को साइबर क्राइम की कई शिकायतें मिलीं, जिन की जांच करने पर पता चला कि काल करने वाले अधिकतर नंबर विदेशी हैं.

साइबर सेल ने लोगों को ऐसे काल्स से सावधान रहने को कहा है और आगाह किया है किसी भी हालत में किसी अनजान फोन आने पर उसे अपने बैंक खातों, पिन नंबर, आधार कार्ड नंबर अथवा ओटीपी आदि शेयर न करें.

देश के तमाम बैंक भी लगातार अपने ग्राहकों को बैंक खाते से जुङी कोई भी जानकारी साझा करने से मना करते रहे हैं.

ऐसे बचें साइबर अपराध से

साइबर सेल के एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसा कोई भी ईमेल, लिंक व वैब पेज को किसी भी हालत में न ओपन करें न ही उत्तर दें. औनलाइन लेनदेन करते वक्त सावधानी बरतें और मुश्किल पासवर्ड लगाएं. इस से फर्जीवाङा करने वालों को आप के खाते तक पहुंचना आसान नहीं होगा. साथ ही ऐंटी वायरस ऐप से मोबाइल को अपडेट करते रहें.

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एक्सपर्ट्स का मानना है कि फर्जीवाङा से बचने के लिए जागरूक रहना भी बेहद जरूरी है और इस के लिए जरूरी है शुरूआत से ही बच्चों को साइबर अपराध से बचने के बारे में बताते रहें.

खतरे में पड़ी Prateik Babbar की शादी, पत्नी से रह रहे हैं अलग

बौलीवुड हो या टीवी इंडस्ट्री, रिश्ते टूटना एक ट्रैंड बन गया है. हाल ही में खबर थी कि टीवी एक्टर आमिर अली और उनकी वाइफ अलग होने वाले हैं, जिससे उनके फैंस को बहुत दुख हुआ था. वहीं अब एक और बौलीवुड एक्टर का रिश्ता टूटने वाला है. बीते दिनों से बौलीवुड में प्रतीक बब्बर (Prateik Babbar) की शादी सुर्खियों में है. आइए आपको बताते हैं क्या है पूरा मामला…

लंबे समय से एक दूसरे से दूर हैं ये कपल

खबरें हैं कि सान्या (Sanya Sagar) सागर और प्रतीक बब्बर (Prateik Babbar) एक दूसरे से लम्बे समय से नहीं मिले है, जिसके कारण दोनों के बीच कड़वाहट दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है. वहीं हाल ही में सान्या सागर (Sanya Sagar) के प्रतीक बब्बर के घर होने वाली होली पार्टी में और राज बब्बर के एनिवर्सरी पार्टी में न दिखने के कारण यह अंदाजा सही माना जा रहा है कि दोनों के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा है.


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साल भर पहले हुई थी शादी

बीते साल की शुरुआत में ही प्रतीक बब्बर (Prateik Babbar) और सान्या सागर  (Sanya Sagar) की शादी हुई थी. सान्या सागर को लम्बे समय तक डेट करने के बाद प्रतीक ने उनके साथ शादी के बंधन में बंधने का फैसला लिया था, लेकिन अब खबरें हैं कि प्रतीक बब्बर और उनकी पत्नी के बीच कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है. दोनों लम्बे समय से अलग रह रहे है. वहीं इनके बीच इतनी खटपट हो चुकी है कि अब दोनों साथ में रहने के लिए ही राजी नहीं है.

बता दें, एक्टर प्रतीक बब्बर बौलीवुड एक्टर और पौलिटिशयन राज बब्बर के बेटे हैं, जो फिल्मी दुनिया में नजर आ चुके हैं, लेकिन सान्या सागर से बीते साल 23 जनवरी को शादी करने के चलते वह काफी सुर्खियों में रहे थे.

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ब्राइडल लुक में नजर आईं ये टीवी एक्ट्रेस, आप भी कर सकती हैं ट्राय

हौट अंदाज में अक्सर नजर आने वाली शमा सिकंदर (Shama Sikander) इन दिनों सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं. हाल ही में शमा (Shama Sikander)एक वैडिंग फोटोशूट में दुल्हन के लुक में नजर आईं, जिसे फैंस काफी पसंद कर रहे हैं. वहीं शमा का ये लुक सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. आज हम आपको शमा सिकंदर के कुछ इंडियन लुक दिखाएंगे, जिसे आप पार्टी से लेकर वेडिंग तक ट्राय कर सकती हैं. साथ ही इनके साथ का ज्वैलरी कौम्बिनेशन आपके लुक के लिए परफेक्ट औप्शन रहेगा.

1. ब्राइडल लुक करें ट्राय

शमा सिकंदर ने अपना फोटोशूट स्टाइलिश लहंगे में करवाया है. जिसके साथ उन्होंने ज्वैलरी भी कैरी की है. भारी भरकम गहनों के साथ शमा सिकंदर ने शानदार नथ भी पहनी हुई है। नथ शमा सिकंदर के लुक के रॉयल टच दे रही है.

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2.  ज्वैलरी है परफेक्ट

अगर आप वेडिंग सीजन के लिए मौर्डन ज्वैलरी ढूंढ रही हैं तो शमा की ये वेस्टर्न लुक के साथ वेस्टर्न ज्वैलरी परफेक्ट औप्शन है. ट्रैंडी नथ के साथ हैवी कड़े आपके लुक को परफेक्ट बनाने में मदद करेंगे.

3. ट्रैंडी ज्वैलरी करें ट्राय

अगर आप कोई सिंपल लहंगा कैरी करने के लिए सोच रही हैं तो शमा का ये ग्रीन मोतियों वाले नेकलेस के साथ हैवी मांग टीका परफेक्ट औप्शन है. ये आपके लुक को ट्रैंडी के साथ-साथ परफेक्ट बनाने में मदद करेगा.

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4. काला कलर है ट्रैंडी

अगर आप वेडिंग सीजन में लहंगे का कलर चुनने में परेशान हो रही हैं तो शमा सिकंदर का ब्लैक कलर का लहंगा आपके लिए परफेक्ट औप्शन रहेगा. ये आपके लुक को ट्रेंडी दिखाएगा.

 

#coronavirus: कोरोना को तकनीक से मात?

क्या भारत में कोरोना का कहर तीसरी स्टेज में है? अभी यह कहना तो जल्दबाजी होगी लेकिन जिस तरह नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी और इस्थेर डुफलो ने कहा है वह काफी चिंताजनक है. उन्होंने कहा है कि कोरोना वायरस पर पार पाने के लिए और जागरूकता फैलानी होगी और चिकित्सा संबंधी ढांचागत बुनियाद तैयार करना जरूरी है. अगर भारत में यह झुग्गी बस्तियों में फैलता है तो वहां इस महामारी पर काबू पाना मुश्किल हो जाएगा.

अब जबकि पूरी दुनिया में कोरोना वायरस ने 32,000 से ज्यादा जिंदगियों को लील लिया है और भारत में इस के मरीजों की तादाद रोजाना बढ़ रही है तो क्या अब यह जरूरी हो गया है कि नई से नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाए?

वैसे विदेशों में कोरोना से बचने के लिए कई तरह की नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. कई एशियाई देश इस बीमारी से जूझ रहे मरीजों को एप से ट्रैक कर रहे हैं. इस में लोकेशन ट्रैकिंग बड़ा अहम रोल निभा रही है. इजरायल ने अपनी सुरक्षा एजेंसी को यह हक दिया है कि वह अपने नागरिकों की लोकेशन का डाटा 30 दिनों तक इस्तेमाल कर सकती है. दक्षिण कोरिया, चीन और ताइवान ने भी लोकेशन ट्रैकिंग के जरीए ही वायरस को मामलों को रोका. जरमनी और इटली की सरकारों ने इस तकनीक से उन इलाकों का पता लगाया जहां ज्यादा लोग जुटे थे.

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इस के अलावा दूसरी तकनीक मोबाइल एप रही.

अमेरिका में एक एप लांच किया गया जिस के माध्यम से लोग संक्रमण के लक्षण रिपोर्ट कर सकते हैं. इसे बहुत लोगों ने डाउनलोड किया. दक्षिण ‘कोरिया ने कोरोना 100 एम’ नामक एप बनाया. इस से पीड़ित मरीज की लोकेशन पता चलती है. अगर वह पीड़ित किसी दूसरे के 100 मीटर के क्षेत्र में आता है तो एप उसे अलर्ट कर देता है.

इसी तरह चीन में जो एप बनाया गया है वह लोगों को उन की सेहत से मुताबिक खास रंग का कोड रहता है. भारत में भी एक ऐसा एप लांच करने की बात चल रही है या उसे जल्दी ही लांच किया जाएगा जो किसी यूजर को संक्रमित मरीज के पास आते ही अलर्ट कर देगा. यह मरीजों की लोकेशन भी ट्रैक करेगा.

इन तकनीकों के अलावा चीन ने तो बहुत से आइसोलेशन वार्डों में सिर्फ रोबोट ही इस्तेमाल किए थे. ऐसे रोबोट मरीजों का बुखार चेक करते थे, उन्हें दवा देते थे और साथ ही मरीजों को खाना भी देते थे.

चीन के अलावा इटली ने अपने कई शहरों में पुलिस ने जनता पर ड्रोन कैमरों से नजर रखी और लोगों को घरों में रहने की सलाह दी.

चूंकि यह महामारी चीन से शुरू हुई थी इसलिए सब से ज्यादा तकनीकों का इस्तेमाल भी इसी देश ने किया. उस ने भीड़ में किसे बुखार है, इस की जांच के लिए थर्मल कैमरे का इस्तेमाल किया. यह थर्मल कैमरा ज्यादा तापमान वाले शख्स का पता लगाता है.

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चीन ने तो चेहरा पहचानने की तक का इस्तेमाल किया.

भारत के सुदूर दक्षिण भारत के राज्य केरल में पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे से संक्रमित लोगों की पहचान की. लेकिन चूंकि भारत एक बड़ा देश है और इस की ज्यादातर आबादी गांवों में बसती है इसलिए नई तकनीकों का इस्तेमाल शहरों में ज्यादा किया जा सकता. लिहाजा, फिलहाल तो सरकार के कहे मुताबिक लोगों को अपने घरों में बने रहना चाहिए और बेवजह बाहर नहीं निकलना चाहिए.

#lockdown: मेरे सामने वाली खिड़की पे

#lockdown: इन 5 तरीकों से घर पर ही करें अपर लिप्स और आइब्रो

लौकडाउन के चलते हम सब अपने घरों में कैद है. कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए 21 दिन के लौकडाउन की घोषणा के साथ ही हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे हम इस वायरस को हरा पाएं. लौकडाउन के चलते महिलाएं भी अपनी सौंदर्य समस्या को लेकर परेशान हैं कि घर में रहकर किस तरह वो अपनी फिटनेस और ब्यूटी का ख्याल रखें. अब बात करें लड़कियों की तो भले ही हर महीने फेशियल, क्लीनअप और वैक्स ना करवाएं लेकिन अपरलिप्स और आइब्रो  जरूर सेट करवाती हैं.

ऐसे में अगर आप भी अपनी आइब्रो और अपरलिफ्स की बढ़ती ग्रोथ को लेकर परेशान हैं तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि इस आर्टिकल में हम आपके लिए कुछ ऐसे टिप्स लेकर आए हैं जिससे आप घर में ही आसनी से इस प्रौब्लम से छुटकारा पा सकती हैं. जिससे आप सिर्फ अपने पति ही नहीं अपनी नजरों में भी हिट बनी रहेगी. भई सेल्फ केयर भी तो जरूरी है.

अगर आपके चेहरे पर बाल रहेंगे तो खूबसूरती वैसे ही फीकी पड़ जाएगी और जहां तक सवाल आइब्रो और होठों के उपर के बालों की है तो ये हर 15 दिन में इनकी ग्रोथ हो जाती है और ये दिखने में भी गंदे लगते हैं. हम यहां आपको अपरलिप्स के बाल हटाने के लिए कुछ घरेलू उपाय बता रहे हैं जिससे नेचुरल तरीके से ये हट जाएंगे. खासियत ये है कि इनके कोई साइड इफैक्ट नहीं होते और ये सारी चीजें आपके किचन में भी मौजूद रहती हैं.

1. दूध और हल्दी

पहले के समय में जब पार्लर नहीं हुआ करते थे तो इन्हीं तरीकों से महिलाएं अपनी सुंदरता को निखारती थीं. आज पिर उसी जमाने के तरीकों के अपनाकर आप भी अपनी सुंदरता में चार चांद लगा सकती हैं , आपको करना ये है कि हल्दी को दूध में मिलाकर लेप तैयार करें और इसे अपने अपर लिप्स पर लगाएं फिर जब यह सूख जाए तो आधे घंटे बाद हाथों से धीरे-धीरे रगड़ते हुए छुड़ाएं और फिर सादे पानी से धो लें. कुछ दिनों बाद ही आपको फर्क नजर आने लगेगा.

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2. दही, बेसन और हल्दी

आपने कई बार दही और बेसन का नाम सुना हो और इसके स्किन बेनिफिट भी सुने होंगे. तो आपको बता दें कि यह अपरलिप्स के बालों के रिमूव करने का सबसे कारगर तरीका है. इसके लिए आपको सबसे पहले दही, बेसन और हल्दी का पेस्ट तैयार करना होगा और इसे अपने अपरलिफ्स पर अप्लाई करना होगा. हल्के हाथों से मसाज करें और 15-20 मिनट ऐसे ही छोड़ दें. इसके बाद हल्के हाथों से इसे रगड़ कर छुड़ा दें फिर सादे ठंडे पानी से चेहरा धो लें. ऐसा रोज या हफ्ते में 3-4 बार करें.

3. नींबू और चीनी का रस

नींबू नेचुरल ब्लीच का काम करता है. सबसे पहले नींबू का रस निकाल लें फिर चीनी मिलाकर पेस्ट तैयार करें और उसे अपने होठों के उपर के बालों पर लगाएं. 15 मिनट बाद इसे पानी से धो लें. इससे भी आपके अपरलिप्स के बाल हट जाएंगे.

4. अंडे की मदद से

सबसे पहले अंडे को फोड़कर उसके पीले भाग को अलग कर दें. अब सफेद वाले भाग में कार्न फ्लोर और चीनी मिलाकर अच्छे से मिक्स करें, इससे एक चिपचिपा लेप तैयार होगे जिसे अपरलिफ्स पर लगाएं. इस 30 मिनट के लिए सूखने दें फिर कपड़े या वैक्सिंग स्ट्रिप की मदद से खींच दें. ऐसा सप्ताह में एक बार करें.

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5. आइब्रो के लिए क्या करें

इसके लिए आपके पास फेस रेजर, इलेक्ट्रिक ब्यूटी ट्रिमर, कैंची या प्लकर होना चाहिए. आसानी से ब्रो के बाल निकल जाएं इसलिए नहाने के तुरंत बाद या गर्म पानी में डुबोएं तौलिए से दो मिनट तक ढकने के बाद शेप करें. सही शेप देने के लिए आइब्रो ब्रश की मदद से बालों को उनकी ग्रोथ की दिशा में सेट करें. लंबे बाल दिखने पर कैंची की मदद से उन्हें काट लें और बालों को उनकी ग्रोथ की दिशा में ही प्लक करें. अगर आप रेजर का इस्तेमाल कर रही हैं तो पहले आइब्रो पेसिंल से शेप बना लें. आखिर में उस जगह पर आइस या एलोवेरा जेल लगाएं. अगर आफको आइब्रो के बाल पहले बिगड़े हुए हैं तो ज्यादा छेड़ें.

महायोग: धारावाहिक उपन्यास, भाग-19

अब तक की कथा :

एक ओर ग्रहों की शांति करवाई जा रही थी, विवाहिता पत्नी से मां अपने बेटे की रक्षा करना चाहती थीं, दूसरी ओर नैन्सी गर्भवती थी. दोहरे मापदंडों को तोलतेतोलते दिया थक चुकी थी. धर्म ने दिया के समक्ष बहुत सी बातों का खुलासा किया था और वह स्वयं भी इस चक्रव्यूह से निकलने का मार्ग तलाश रहा था. तभी अचानक धर्म का मोबाइल घनघना उठा.

अब आगे…

मोबाइल स्क्रीन पर नंबर देख कर धर्म बोला, ‘ओहो, ईश्वरानंद है,’ कहने के साथ ही उस का मुंह फक पड़ गया, ‘‘जी, कहिए.’’ ‘‘कहिए क्या, अगर खाना, पीना, घूमना हो गया हो तो आ जाओ, धर्म. ऐसे नहीं चलेगा. मेरी बात हो गई है रुचि से. उन्होंने दिया को रात में रुकने की इजाजत दे दी है,’’ आदेशात्मक स्वर में उन्होंने कहा. धर्म दिया को सबकुछ सुनाना चाहता था, इसलिए स्पीकर पहले ही औन कर दिया था.

‘‘जी, अभी वह मन से तैयार नहीं है कीर्तनभजन के लिए. और…’’

‘‘तो करो उसे तैयार. तुम्हारा काम है यह. तुम्हें उस के पीछे लगा रखा है. ले के तो आओ, फिर देखेंगे,’’ उन्होंने फोन बंद कर दिया. दिया रोने लगी.

‘‘देखो दिया, रोने से तो कुछ नहीं होगा. बहुत सोचसमझ कर, पेशेंस रख कर चलना होगा, तभी कोई रास्ता निकल पाएगा. मैं कितनी बार तुम्हें समझा चुका हूं.’’

‘‘तो मैं अपनेआप को उन की गोद में डाल दूं? मेरा अपना कुछ है ही नहीं? कोई अस्तित्व नहीं है मेरा?’’

‘‘नहीं, दिया, तुम्हारा अपना अस्तित्व क्यों नहीं है. पर तुम भी समझती हो इस जाल के बंधन को. निकलेंगे, बिलकुल सहीसलामत निकाल लूंगा मैं तुम्हें यहां से. पर अभी शांति से जैसा मैं कहता हूं वैसा करती चलो. मैं तुम पर आंच नहीं आने दूंगा. मुझ पर भरोसा करो, दिया.’’

‘‘भरोसे की बात नहीं है, धर्म. भरोसा सिर्फ तुम पर ही तो है. पर उन परिस्थितियों का क्या करेंगे जिन में हम घिरे हुए हैं. मुझे तो चारोें ओर अंधेरा ही अंधेरा नजर आ रहा है.’’ ‘‘अंधेरे को चीर कर ही प्रकाश की किरण आती है. कोई न कोई किरण तो अपने नाम की भी होगी ही.’’ दिया के पास और कोई रास्ता नहीं था इसलिए उस ने अपनेआप को धर्म के सहारे छोड़ दिया. वह चुपचाप धर्म के साथ गाड़ी में बैठ कर ईश्वरानंद के एक अन्य ठिकाने की ओर चल दी. गाड़ी में बैठने के बाद धर्म ने कईकई बार दिया के हाथ पर हाथ रख कर उसे यह सांत्वना दी कि चिंता न करे, वह उस के साथ है.

वे दोनों किसी बड़े मकान में पहुंच गए थे. यह सुबह वाला स्थान नहीं था. यह स्थान इस दुनिया का था ही नहीं. यहां तो काले, सफेद, गेहुंए सब रंगों के लोग एक अजीब सी आनंद की मुद्रा में रंगे हुए दिखाई दे रहे थे. वे दोनों जा कर बैठे ही थे कि अचानक उन के सामने वाइन सर्व कर दी गई, साथ में भुने हुए काजू और दूसरे ड्राइफ्रूट्स भी.

दोचार मिनट बाद ही एक गोरी सुंदरी आ कर वहां खड़ी हो गई, ‘‘स्वामीजी इज कौलिंग यू बोथ.’’

‘‘ओके, वी विल कम,’’ धर्म ने कहा.

दिया फिर से घबरा उठी.

‘‘दिया, जाना तो पड़ेगा ही. अच्छा है, पहले ही चले जाएं.’’

एक और रहस्यमयी रास्ते से दोनों ईश्वरानंद के पर्सनल रूम में पहुंच गए. धर्म न चाहते हुए भी इन सब में भागीदारी करता रहा है. दिया के समक्ष वह बेशक नौर्मल रहने की कोशिश कर रहा था पर वास्तव में अंदर से तो बाहर भागने के रास्ते की खोज में ही घूम रहा था उस का दिमाग.

‘‘क्या बात है धर्म, दिया को भेजो बराबर वाले कमरे में. वहां सब वस्त्रादि तैयार हैं. और लोग भी तैयार हो रहे हैं. दिया को वे लोग सब समझा देंगे.’’

दिया ने वहां से चलने के लिए धर्म का हाथ दबाया जिसे ईश्वरानंद ने देख लिया.

‘‘क्या बात है? क्या हो रहा है, दिया?’’ उस ने थोड़ी ऊंची आवाज में दिया से पूछा मानो दिया उस की कोई खरीदी हुई बांदी हो.

‘‘गुरुजी, अभी दिया तैयार नहीं है,’’ उस ने धीरे से ईश्वरानंद के कान में कानाफूसी की. परंतु ईश्वरानंद तो बिगड़ ही गया. आंखें तरेरते हुए धर्म से कहने लगा, ‘‘पागल हो गए हो क्या, धर्म? मैं ने इसीलिए इतनी मेहनत की है?’’

धर्म बड़े विनम्र स्वर में बोला, ‘‘कैसी बात करते हैं आप? आप तो सब जानते हैं. फिर अभी वह बहुत घबराई हुई है. रुचिजी के यहां नील भी तो अभी तक इस से दूर ही रहा है… ग्रहव्रह के चक्करों में. थोड़ा टाइम दीजिए, अगली बार…’’ वह मानो ईश्वरानंद को भविष्य के लिए वचन दे रहा था और दिया का दिल था कि धकधक…

‘‘क्या साला…सब मूड खराब कर दिया…एक अफगानी पीछे पड़ा है, उसे अंगरेज लड़की नहीं चाहिए. पर जब तक इसे ढालोगे नहीं, यह तो तमाशा बना देगी. नहींनहीं, जाओ इसे तैयार करो,’’ वे तैश में आ रहे थे.

धर्म किसी भी प्रकार से दिया को यहां से बचा कर ले जाना चाहता था.

‘‘मैं इसे यहां से अभी ले जाता हूं. इसे रातभर घुमाफिरा कर कोशिश करता हूं कि अगले फंक्शन के लिए यह तैयार हो जाए.’’

‘‘तो क्या तुम इसे यहां से भी ले जाना चाहते हो?’’ ईश्वरानंद फिर भड़के.

‘‘मैं आप को बता रहा हूं. इस को अच्छी तरह स्टडी किया है मैं ने. आप आज इसे यहां से जाने दीजिए. अगले प्रोग्राम में मैं इसे यहां ले कर आप के बुलाने से पहले ही पहुंच जाऊंगा.’’ न जाने ईश्वरानंद के मन में क्या आया, ‘‘ठीक है, तुम इसे यहां से आज तो ले जाओ पर मेरी जबान तुम्हें रखनी होगी. मैं उस अफगानी को 1 महीने का टाइम देता हूं. तुम्हारी जिम्मेदारी है, अब तुम इसे 1 दिन में समझाओ या 1 हफ्ते में.’’

बाहर निकल कर गाड़ी में बैठने के बाद प्रश्न था कि कहां जाया जाए?

जब और कुछ समझ में नहीं आया तो धर्म चुपचाप दिया को अपने घर ले आया. दिया ने धर्म से पूछा भी नहीं कि वह उसे कहां ले कर जा रहा है. धर्म ने गाड़ी रोकी तो वह चुपचाप उतर गई और धर्म के पीछेपीछे चल दी. छोटा सा, 2 कमरों का घर था पर ठीकठाक, साफसुथरा. वह सिटिंगरूम में जा कर सोफे में धंस सी गई.

‘‘मुझे नील की मां को फोन कर के बताना तो होगा ही कि हम ‘परमानंद आश्रम’ में नहीं हैं वरना उन्हें जब पता चलेगा तो बखेड़ा खड़ा हो जाएगा,’’ कह कर धर्म ने नील की मां को फोन लगा दिया और हर बार की तरह स्पीकर औन कर दिया.

‘‘हां, कौन?’’ उनींदी आवाज आई.

‘‘मैं बोल रहा हूं, रुचिजी.’’

‘‘क्या बात है, इस समय?’’

‘‘घबराने की कोई बात नहीं है. मैं ने यह बताने के लिए फोन किया कि हम लोग आश्रम में नहीं हैं.’’

‘‘क्यों? मैं ने तो वहीं भेजा था दिया को, फिर?’’

‘‘जी, लेकिन दिया की तबीयत वहां कुछ खराब हो गई इसलिए मैं ने सोचा कि वहां से बाहर ले जाऊं कहीं.’’

‘‘फिर…ईश्वरानंदजी…?’’

‘‘उन्होंने ही परमिशन दी है. मैंटली तो तैयार हो दिया पहले. वह इस प्रकार कभी गई नहीं है कहीं.’’

‘‘हां, वह सब तो ठीक है पर…’’

‘‘आप चिंता क्यों करती हैं? मैं हूं न उस के साथ. उस के सब ग्रहव्रह ठीक कर के ही उस को आप के पास भेजेंगे.’’

‘‘तो क्या सुबह भी नहीं आओगे? अरे, उस के मांबाप के फोन लगातार आ रहे हैं. उधर, नील ने परेशान कर रखा है. नैन्सी का भूत ऐसा सवार है उस पर कि कहता है उसे नैन्सी के बच्चे को संभालना पड़ेगा. अब मैं इस उम्र में…कुछ करिए धर्मानंदजी, कोई गंडा, तावीज, अंगूठी जो भी हो. यह लड़का तो मुझे मारने पर तुला हुआ है. मैं ने सोचा था कि दिया के ग्रह ठीक हो जाएंगे तो बेशक यहां पड़ी रहेगी. पर…मेरी तो कुछ समझ में ही नहीं आता. उधर, नैन्सी भी शायद कुछ दिन यहां आ कर रहना चाहती है. कैसे करूंगी?’’

‘‘अब कुछ तो सोचना ही पड़ेगा, रुचिजी. आप चिंता मत करिए. मैं देखता हूं क्या हो सकता है.’’ ‘‘सोचो, कुछ करो, धर्म. मेरे अंदर तो न सोचने की शक्ति है न ही करने की. पता नहीं ईश्वरानंदजी ने इतने अमीर घराने की यह लड़की क्यों भिड़वा दी. यह तो हमारे बिलकुल भी काम की नहीं है. यह कहां से पाल लेगी नैन्सी के बच्चे को?’’

‘‘अभी फोन बंद करता हूं, रुचिजी. आप बिलकुल चिंता मत करिए. देखिए क्या होता है?’’

‘‘एक बात जरूर करना. दिया से उस की मां की बात करवा देना. उन के फोन यहां लगातार आ रहे हैं.’’ दिया को अपने सिर के ऊपर आसमान टूटता नजर आने लगा. यह क्या ऊटपटांग मामला है. कितना पेचीदा व उलझा हुआ एक ओर ईश्वरानंद ने अपनी खिचड़ी पकाने के लिए नील को उस के मत्थे मढ़ दिया तो दूसरी ओर नील की मां उसे अपने बेटे के बच्चे की आया बनाना चाहती है.

‘‘यह सब क्या है, धर्म?’’

‘‘बहुत पेचीदा मामला है, दिया. नील की मां समझती हैं कि ईश्वरानंद ने उन के लिए तुम को फंसाया है पर सच बता दूं, रहने दो वरना तुम घबरा जाओगी.’’

‘‘बोलिए न, धर्म…और क्या कर लूंगी मैं घबरा कर? बताइए…’’

‘‘ईश्वरानंद तुम्हें किसी अफगानी के हाथ बहुत अच्छे दामों में बेचना चाहते हैं. नील की मां अपने चने भुनाने की फिराक में थीं और वास्तव में ईश्वरानंद अपने चने भुनाने में लगे हैं.’’

‘‘क्या कमाल है, लड़की कोई ऐसी निष्प्राण चीज है जो उसे गुडि़या की तरह उठा कर खेल लो और फिर कहीं भी फेंक दो. पर जब मजबूरी और दुख किसी लड़की के गले पड़ जाएं तब वह एक चीज ही बन जाती है.

‘‘धर्मजी, बहुत हो गया है. मुझे अपने घर फोन कर देना चाहिए. आखिर मैं कब तक इस सब से जूझती रहूंगी?’’

‘‘दिया, मैं तुम्हें बताना नहीं चाहता था परंतु अब रुक नहीं पा रहा हूं. दरअसल, तुम्हारे पापा के पैर में ऊपर तक जहर फैल जाने से उन की पूरी टांग काट देनी पड़ी थी. उन्हें पिछले 6 महीने फिर से अस्पताल में रहना पड़ा है. इसीलिए तुम्हारे भाई अभी तक यहां नहीं आ पाए वरना…’’

‘‘क्या कह रहे हो, धर्म? किस ने बताया आप को? मैं यहां क्या कर रही हूं, मेरे पापा…’’ दिया का सब्र का बांध टूट गया. वह फिर से फूटफूट कर रोने लगी, ‘‘कितने नीच हैं ये लोग. इंसान तो हैं ही नहीं. न जाने कितनी लड़कियों का जीवन बरबाद कर दिया होगा. पंडित भगवान का एजेंट नहीं होता और न ही संन्यासी योगी. योगी के रूप में ऐसे भोगियों की कमी कहीं नहीं है. पूरे संसार भर में व्यापार फैला कर बैठे हैं ये लोग.’’

दिया बहुत ज्यादा असहज थी. धर्म को लग रहा था कि अब किसी की भी परवा किए बिना वह कुछ न कुछ कर ही बैठेगी. ‘‘सच, तुम ठीक कह रही हो, दिया. इन का व्यापार पूरे संसार में ही तो फैला हुआ है. वहां ईश्वरानंद नहीं होंगे तो कोई और बहुरुपिया होगा. मनुष्य मानवधर्म का पालन तो कर नहीं सकता जबकि बेहूदी चीजों में घुस कर अपना और दूसरों का जीवन बरबाद कर देता है. ‘‘दिया, अब पानी सिर के ऊपर से जा रहा है. अब अगर कुछ न सोचा तो कुछ नहीं कर सकेंगे. मैं अभी तुम्हें पासपोर्ट दिखाता हूं,’’ धर्म ने उठ कर अपनी अलमारी खोली. दिया को अलमारी में बड़ी सी ईश्वरानंद की तसवीर पीछे की ओर रखी हुई दिखाई दी.

अचानक वह चौंक उठा, ‘‘अरे, मैं ने तो ईश्वरानंद की तसवीर के पीछे रखा था तुम्हारा पासपोर्ट. यहां पर तो है ही नहीं, दिया,’’ धर्म पसीना पोंछने लगा था.

‘‘धर्म, आर यू श्योर, यहीं था मेरा पासपोर्ट?’’

धर्म की समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसा हो कैसे सकता है? घर उस का, रखा उस ने फिर कैसे गायब हो गया पासपोर्ट? उधर, दिया को फिर उस पर अविश्वास सा होने लगा. ऐसा तो नहीं कि धर्म उसे बेवकूफ बना रहा हो.

धर्म उस की मनोस्थिति को समझ रहा था परंतु उसे भी यह समझ नहीं आ रहा था कि दिया को क्या सफाई दे?

बेचारा धर्म रोने को हो आया. उसे खुद भी समझ में नहीं आ रहा था कि यह कैसे हुआ होगा? उस ने तो खुद यहां पर संभाल कर रखा था दिया का पासपोर्ट. ‘‘देखो दिया, अब हमारे पास और कोई रास्ता नहीं है. हमें अब पुलिस की मदद लेनी ही पड़ेगी. मुझे पूरा विश्वास है कि यह काम ईश्वरानंद का ही है. पर दिया, एक बात है, अब हमें खुल कर लड़ाई लड़नी पड़ेगी. हमें खुल कर सामने आना पड़ेगा. हो सकता है मुझे भी कुछ सजा भुगतनी पड़े. पर ठीक है, अब और नहीं.’’ आधी रात हो चुकी थी. सारे वातावरण में सन्नाटा पसरा हुआ था. कहीं से भी कोई आवाज नहीं. इतने गहरे सन्नाटे में दिया और धर्म की धड़कनेें तेजी से चढ़उतर रही थीं. दोनों का मन करे या न करे, डू और नाट डू के हिंडोले में ऊपरनीचे हो रहा था और पौ फटते ही दोनों के दिल ने स्वीकार कर लिया था कि और कोई चारा ही नहीं है. उन्हें ऐंबैसी में जा कर बात करनी ही चाहिए.

धर्म को भीतर से महसूस हुआ कि उसे दिया का साथ देना ही होगा और स्वयं को भी इस गंदगी से बाहर निकालना होगा.

-क्रमश:

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