ब्लैक और ब्लू में वैलेंटाइन धमाका

रूढिवादियों को तोड़ कर अब सामान्य घरों की महिलायें भी वैलेंटाइन डे का उत्साह मनाने लगी हैं. यह वैलेंटाइन आपस में दोस्तों के साथ मनाती हैं. जहां इनके साथ परिवार के लोग खासकर बच्चे भी शामिल होते हैं. पश्चिम के इस त्योहार ने सभी का दिल जीत लिया है. जिससे साफ पता चलता है कि हमारा समाज खुशियों के हर मौके को अपनाने का कोई अवसर गंवना नहीं चाहता है.

वैलेंटाइन डे केवल एक दिन का उत्साह नहीं रह गया है. पूरे सप्ताह यह कई अलग-अलग दिनों के रूप में पूरे देश में मनाया जाने लगा है. यह केवल टीनएज लड़के लड़कियों के बीच ही उत्साह का कारण नहीं रह गया है. अब हाउस वाइफ और वर्किंग वूमेन भी वैलेंटाइन वीक को अपने दोस्तों के साथ पूरे उत्साह से मनाती हैं. यह एक तरह से थीम पार्टी के रूप में मनाई जाने लगी है.

लखनऊ के होटल लिवाना के ईओएस डिस्क में वैलेंटाइन बैशका आयोजन किया गया. इसमें हिस्सा लेने वाली लेडीज ब्लैक और ब्लू ड्रेस में तैयार हो कर आई थीं. ज्यादातर वेस्टर्न ड्रेस में थीं.

वैलेंटाइन बैशकी आयोजक सलोनी केसरवानी ने कहा वैलेंटाइन बैशके दो मकसद थे. एक तो हमने यह तय किया कि विधानसभा चुनाव में वोट जरूर करेगे. दूसरे वैलेंटाइन डे के अलग अलग दिनों को लेकर लोगों ने गाने गाये. कार्यक्रम में इन अलग-अलग दिनों को लेकर प्रॉप्स लगाये गये थे. इसके पास आकर ही लोगों को गाने और डांस को दिखाना था.

यहां सभी ने कपल ने बेस्ट रैंप वाक, ब्यूटी ब्रेन और सुपर डांस किया. यह कपल आपस में दोस्त ही थें. सेल्फी बूथ कट आउट लगे थे. स्वीटी चावला, सलोनी केसरवानी और स्मिता कोहली ने अलग-अलग लव थीम पर गाने गाये और डांस किये. सब को उपहार में फूल दिये गये.

वैलेंटाइन डे पर टीवी सितारों की डेटिंग

इस वैलेंटाइन डे पर किसके संग डेट करना चाहते हैं यह टीवी सितारे.

मोहम्मद नजीम

इस वैलेंटाइन डे पर मैं कटरीना कैफ के साथ डेट करना चाहता हूं. क्योंकि वह सिर्फ खूबसूरत ही नहीं, बल्कि बेहतरीन अदाकारा हैं. मेरा सपना उनसे मिलने का भी है और डेट करने का भी.

रमण हांडा

मैं इस वैलेंटाइन डे पर आलिया भट्ट के साथ डेट करना चाहता हूं. क्योंकि वह खूबसूरत, क्यूट और बबली हैं.

अमल शेरावत

मैं इस वैलेंटाइन डे पर रेखा के साथ डेट करना चाहता हूं. उनकी खूबसूरती और चार्मिंग व्यक्तित्व ने मुझे बोल्ड कर दिया है. मैं एक आइलैंड पर रेखा को ले जाकर उनके साथ कैंडल नाइट डिनर करना चाहता हूं. और आसमान में सितारों के नीचे पुराने कर्णप्रिय गीतों पर उनके साथ डांस भी करना चाहता हूं.

गुंजन उतरेजा

मैं तो श्रद्धा कपूर के साथ डेट करना चाहता हूं.

इस बार वैलेंटाइन को बनाएं अपनी कुकिंग से खास

वैसे तो कई बार ये कह कर मजाक उड़ाया जाता है कि हम तो सिर्फ एक दिन के लिए प्यार के सेलिब्रेशन में यकीन नहीं रखते, लेकिन समझ नहीं आता कि एक्स्ट्रा सेलिब्रेशन से किसी को दिक्कत क्यों होती है!

साल की शुरूआत में त्योहारों को सेलिब्रेट करने के अभी ज्यादा मौके नहीं मिले हैं. लेकिन वैलेंटाइन डे एक ऐसा त्योहार है जो हर किसी के लिए खास है. वैलेंटाइन के मौके पर पूरी दुनिया फैन्सी प्लान बनाने, मंहगे रेस्तरां में डिनर करने की प्लानिंग में जुटी है, लेकिन क्यों न आप कुछ अलग प्लान करें? अपने पार्टनर के साथ इस खास दिन को सेलिब्रेट करते वक्त अपने दिन को खुशी और प्यार से भर दें, रोमांस को हवाओं में बहने दें.

ये बात साबित हो चुकी है कि पुरूषों के दिल का रास्ता उनके पेट से होकर गुजरता है, लेकिन यही बात हम महिलाओं के बारे में कहना चाहते हैं. अगर आपको इस पर यकीन नहीं होता तो महिला फूड ब्लॉगर्स की बढ़ती तादाद और सोशल मीडिया पर महिला शेफ्स की आयी बाढ़ की ओर नजर दौड़ाइए! अपनी पत्नी या प्रेमिका के लिए नाश्ता बनाने कि कोशिश कीजिये और देखिए उनकी आंखों की चमक जो इससे पहले आपने कभी नहीं देखी होगी. उनके सपनों का शहजादा उनकी पसंदीदा डिशेज की ट्रे लेकर सामने खड़ा हो, उसमें एक गुलाब को फूल हो तो बस खुशियों की इससे बढ़िया रेसिपी आपके पास कोई हो ही नहीं सकती.  

शेफ तुषार द्वारा बताई जाने वाली आसान डिशेज के जरिये अपने पार्टनर का पूरा दिन स्वादिष्ट सरप्राइजेस से भरने का प्लान बनाए और प्यार का जादू बिखरने दें.

चीजी लव बाइट

प्यार भरा नाश्ता बनाकर अपनी पत्नी या प्रेमिका की सुबह की शुरूआत को शानदार बनाएं. बस फ्रोजन चीज शॉट्स को पैन में फ्राय कर, मायो मस्टर्ड डिप के साथ गरमा-गरम परोसें और उनकी सुबह की स्वादिष्ट शुरूआत करें.

अपने पसंदीदा शेफ के हाथों के बना लजीज नाश्ता करने के बाद उन्हें अगर एक कप कॉफी मिल जाए तो उन्हें इससे ज्यादा खुशी नहीं हो सकती.  

ऑफिस लंच नोट्स

रिश्ते के शुरूआती दिनों में एक दूसरे को दिए गए सिक्रेट लव नोट्स का वो दौर याद करिये? फ्रोजन आलू टिक्की को प्यार के साथ फ्राय करके के रैप करके पैक करें. साथ ही पुदीने या नींबू वाली लहसुन की चटनी पैक कर लंच को चटपटा बनाएं, और हां टूथपिक के साथ एक लव नोट लगाना न भूलें. आपकी ये रोमेंटिक कोशिश उन्हें शाम को जल्दी ऑफिस से घर खींच लाएगी.

नाइट अंडर द स्टार्स

वैलेंटाइन डे पर सितारों की छांव में स्पेशल डिनर का इंतजाम करें, अपने घर की छत पर या लिविंग रूम में कैंडल जला कर.

पोटैटो वेजेस फ्राय करके स्वादिष्ट साइड डिश को तीखे थाई चिली सॉस के साथ परोंसे. अपने स्वाद को थोड़ा स्पाइसी बनाकर एक खास शाम अपने पार्टनर के साथ बिताएं.

द बेस्ट फॉर द लास्ट: ए डेजर्ट फ्रॉम क्युपिड्स लैंड

कोई भी मेन्यू स्वादिष्ट डेजर्ट के बिना पूरा नहीं होता. डेजर्ट ज्यादा समय लेने वाले या पेचीदा हो सकते हैं. लेकिन इस वैलेंटाइन डे पर अपने मेन्यू को मीठे और नमकीन स्वाद से सराबोर होने दें. ये दोनों स्वाद एक दूसरे से बेहद अलग हैं पर इन्हें प्यार के स्वाद से एक कर दिजिए. कुछ फ्रोजन पोटैटो फ्रेंच फ्राइज को फ्राय कर उसे अपने पंसदीदा सिरप में टॉस करें. फिर चाहे वो चॉकलेट हो, स्ट्रॉबेरी हो या माप्ले हो या फिर तीन का मिक्सचर हो. इसे और जायकेदार बनाने के लिए ऊपर से थोड़ी व्हिप क्रीम डालकर एक अनोखे स्वाद वाले सरप्राइज का मजा लें.

– शेफ तुषार

क्यों वैलेंटाइन डे नहीं मना पाती हैं ऐश्वर्या सखूजा

मशहूर टीवी कलाकार ऐश्वर्या सखूजा शादीशुदा हैं. वह अपने पति रोहित नाग के साथ वैलेंटाइन डे मनाना चाहती है. पर कभी नहीं मना पाती. खुद ऐश्वर्या सखूजा कहती हैं-‘‘हम बहुत कम एक साथ वैलेंटाइन डे मना पाते हैं. क्योंकि अक्सर वैलेंटाइन डे पर मैं और मेरे पति रोहित नाग अलग-अलग शहरों में शूटिंग कर रहे होते हैं. हम मानते हैं कि वैलेंटाइन डे अति खूबसूरत दिन है. मगर हमें एक दूसरे को खास बताने या प्यार जताने के लिए किसी एक खास दिन की जरुरत नहीं है. हमारे लिए तो पूरा वर्ष ही वेलेनाइटन होता है. इस बार भी वैलेंटाइन डे पर वह गोवा में और मैं मुंबई मे रहूंगी.’’

सैक्स महंगा है

सोशल बैवसाइट सर्वे करने वाली एक आईटी कंपनी की हालिया रिपोर्ट चौंकाती है, जिस में पोर्न बेस्ड सर्वे के आधार पर ये आंकड़े दिए गए हैं कि देश में 22 से 34 आयुवर्ग के युवा पोर्नोग्राफी, पेड सैक्स, बैव सैक्स चैट के जरिए अपनी पौकेट ढीली कर रहे हैं. उन की कमाई का लगभग 20 से 30त्न हिस्सा पेड सैक्स के लिए जा रहा है.

माध्यम चाहे जो भी हो, सैक्स के लिए मोटी रकम अदा करनी पड़ रही है यानी सैक्स अब सस्ता व सुलभ नहीं, बल्कि महंगा और अनअफोर्डेबल है. पेड सैक्स की बढ़ती लोकप्रियता व चलन ने सैक्स को आम लोगों की पहुंच से दूर कर दिया है. अब यह पैसे वालों का शौक बन गया है. सैक्स की बढ़ती मांग और आपूर्र्ति के बीच गड़बड़ाए तालमेल ने सैक्स बाज़ार के रेट आसमान पर पहुंचा दिए हैं. इस का दूसरा बड़ा कारण है मोटी जेब वालों की सैक्स तक आसान पहुंच. जहां जैसी जरूरत हो, मोटी रकम दे कर सैक्स बाज़ार से सैक्स खरीद लिया, नो बारगेनिंग, नो पचड़ा. इस का नतीजा हाई रेट्स पेड सैक्स के रूप में सामने आया. सैक्स वर्कर्स ने भी मांग के आधार पर अपनी दरें ऊंची कर लीं.

क्या है पेड सैक्स

सैक्स के लिए जो रकम अदा की जाती है उसे पेड सैक्स कहा जाता है. इस के कई रूप हो सकते हैं. वर्चुअल सैक्स से ले कर लाइव फिजिकल सैक्स तक. औनलाइन सैक्स मसलन, पोर्न वीडियो, पोर्नोग्राफी, औनलाइन पेड फ्रैंडशिप, वीडियो सैक्स, वैब औरिएंटेड सैक्स. औफलाइन सैक्स मसलन, ब्रोथल पिकअप सैक्स, कौलगर्ल औन डिमांड आदि. सैक्स के इन तमाम माध्यमों में कहीं न कहीं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पैसे इनवैस्ट किए जाते हैं. सैक्स के तमाम माध्यमों में सीधे इनवैस्टमैंट को पेड सैक्स कहते हैं.

सैक्स की राह नहीं आसान

कुछ दशक पहले तक सैक्स तक आम लोगों की आसान पहुंच थी. छोटीमोटी रकम अदा कर के यौनसुख का आनंद उठाया जा सकता था, पर सैक्स के विभिन्न मौडल सामने आने के बाद उस की दरों में कई गुणा वृद्धि हुई है.

क्या है इन की कैटेगरी व प्रचलित दरें

– औनलाइन पेड सैक्स : प्रति मिनट डेटा चार्जेज.

– फोन फ्रैंडशिप : 2 से 3 हजार रुपए प्रतिमाह सदस्यता.

–       कौलगर्ल औन डिमांड : 2 से 10 हजार रुपए प्रति घंटा.

–       स्कौर्ट सर्विस (श्रेणी एबीसी ) शुरुआती दर.

–       ब्रोथल सैक्स : 500 से 1,500 रुपए तक नाइट/आवर.

–       हाउस सर्विस : पर शौट (हाउसवाइफ, कालेज/वर्किंग वूमन)  3 से 5 हजार रुपए पर शौट.

मार्केट में चल रही इन दरों को देख कर आसानी से यह कहा जा सकता है कि ऐक्स्ट्रा मैरिटल सैक्स की चाह रखने वालों को अब मनी कैपेबिलिटी भी ऊंची रखनी होगी. यौनतृप्ति की राह आसान नहीं है. सैक्स के बाजार ने एक बड़ा रूप ले लिया है, जहां जिस की जितनी हैसियत है उस हिसाब से यौन संतुष्टि पा सकता है. आम व सामान्य लोगों के लिए यौनलिप्सा के दरवाजे लगभग बंद होते प्रतीत हो रहे हैं.

कौलगर्ल रिचा चंद्रा बताती हैं, ‘‘वर्षों से (लगभग 11 साल पहले) जब वे इस पेशे में आई थीं, तब उन के पास ठीक से खाने व ब्रोथल की मैडम को रैंट चुकाने तक के पैसे नहीं थे, क्योंकि तब ग्राहकों की पेइंग कैपेसिटी बहुत कम थी और मार्केट में सप्लाई ज्यादा. इसलिए औनेपौने रेट पर भी वे ग्राहक पटा लेती थीं, तब न तो इतने बड़े और ग्लैमरस तरीके से उन्हें प्रोजैक्ट किया जाता था और न ही इंटरनैट के जरिए विज्ञापन व प्रचारप्रसार था.

‘‘अब स्थिति बिलकुल उलट है. ऐडवर्ल्ड व सोशल मीडिया की आसान पहुंच ने सबकुछ बदल दिया है. अब वे विज्ञापन के जरिए अपना बेस प्राइस भी तय कर सकती हैं और अपनी सर्विस के लिए बारगेनिंग भी. साथ ही ग्लैमरस प्रोजैक्शन ने मार्केट में उन की प्राइस वैल्यू औैर बढ़ा दी है.

‘‘इस तरह जहां वे पहले वननाइट सर्विस के लिए 200 से 500 रुपए तक ही कमा पाती थीं आज वह बढ़ कर 2 से 5 हजार रुपए तक हो गया है. रिचा आगे बताती हैं कि विवाह से इतर सैक्स की चाह ने भी बाज़ार में क्लाइंट की संख्या में खासा इजाफा किया है. इंटरनैट पर बढ़ते सैक्स के प्रोजैक्शन ने युवाओं में लाइव सैक्स की चाह को बढ़ाया है.’’

चाहे जो हो, सैक्स का बाज़ार महंगाई के प्रभाव से अछूता है. जब तक लोगों की जेबें गरम रहेंगी, बिस्तर भी गरम होता रहेगा. हैसियत और ओहदे के हिसाब से बेहतर सेवाएं भी मिलती रहेंगी. पैसे वालों के लिए अल्ट्रामौडर्न स्कौर्ट्स सर्विस तो आम लोगों के लिए साधारण ब्रोथल सर्विस.

मांग है तो आपूर्त्ति भी लगातार बनी रहेगी, तो पैसा फेंकिए और तमाशा देखिए. इस में हर्ज ही क्या है?

प्रियदर्शनी सिंह ‘स्वीटी’     

वैलेंटाइन डे पर खास : पत्नी अनंतिका के साथ सुदीप साहिर

फिल्म और टीवी कलाकार सुदीप साहिर ने इस बार अपी पत्नी अनंतिका के संग वैलेंटाइन डे मनाने के लिए एक खास योजना बनायी है. वे बताते हैं आज की तारीख में हर इंसान बहुत व्यस्त है, लोग अपने काम के सिलसिले में यात्राएं करते रहते हैं. ऐसे में वेलेनटाइन डे एक ऐसा दिन होता है, जो सब को याद दिलाता है कि हम किससे बहुत प्यार करते हैं. उनकी अहमियत याद दिलाता है. मैं यह नही कहता कि बाकी दिनों में आप अपनी पत्नी या प्रेमिका को भूल जाएं, लेकिन आपके स्पेशल इंसान के लिए एक खास दिन हो,  तो उस दिन के मजे ही कुछ और हैं.

कामकाजी महिला होने के अलावा अनांतिका मां भी हैं, इसलिए मैंने उसके लिए कुछ खास योजना बनायी है. ‘‘दिन में मैं उसे ‘स्पा’ भेजने वाला हूं और फिर रात में हम एक साथ रोमांटिक डिनर लेने वाले हैं. मुझे याद है जब अनांतिका और मैंने डेटिंग करनी शुरू की थी, उसी साल उसे एमबीए करने के लिए इंग्लैंड जाना पड़ा था और मेरा करियर शुरू ही हुआ था, पर मैंने पैसे इकट्ठे किए और हवाई जहाज की टिकट निकाली और वेलेनटाइन डे पर उसकी युनिवर्सिटी के बाहर खडे़ होकर उसके बाहर निकलने का इंतजार करने लगा था. तब उसकी नजर जब मुझ पर पड़ी, उस वक्त उसके चेहरे पर जो भाव थे, उन्हे मैं आज तक नहीं भूला हूं. और मैं शब्दों में वो सब बयान भी नहीं कर सकता.’’

वे आगे कहते हैं ‘‘मेरे लिए रोमांस के मायने यह हैं कि जो चीज सहज है, उससे बाहर निकला जाए. मेरा पसंदीदा रोमांटिक देश इंग्लैंड है, क्योंकि शादी से पहले अनांतिका के संग मैने काफी समय लंदन में बिताया था.

दायित्व और देशभक्ति

यह विडंबना है कि हमारे देश में सीमाओं पर लड़ने वाली सेना टैंकों, राइफलों, लड़ाकू हवाईजहाज और अपने ही रहने के कैंटों, जो देशभर में फैले हैं, में अतिक्रमण की शिकार हैं. सुप्रीम कोर्ट ने हाल में एक फैसले में यह तो कह दिया कि गैरकानूनी रूप से रह रहे बाशिंदों को कैंट वार्डों के चुनावों में वोट देने का हक नहीं है पर उस ने उन्हें हटाने का कोई आदेश नहीं दिया.

सेना के पास लगभग 17 लाख एकड़ जमीन देश के 62 कैंटों में है और करीब 15 लाख एकड़ कैंटों से बाहर है पर इस पर कितनों ने, कब से कब्जा कर रखा है, इस का कोई हिसाब सेना के पास नहीं है.

यह ठीक है कि देश में सेना की जमीन पर अतिक्रमण करने वाले दुश्मन तो नहीं हैं पर फिर भी गैरकानूनी काम तो कर रहे हैं और वह भी सेना की नाक के नीचे. जो लोग सैनिकों की दुहाई देते हुए देशभक्ति के पैरोकार बने रहते हैं उन्हें क्या इस भयंकर अपराध का अंदाजा नहीं है?

27 सितंबर, 2016 को दिए गए निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने कहा भी कि अधिकारियों को तुरंत इन अवैध कब्जाइयों को हटाना चाहिए पर ऐसा हो नहीं पाएगा.

अभिव्यक्ति पर पहरा

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भगवा सरकार को अपरोक्ष रूप से चेताया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में अंगरेजी में कहे जाने वाले शब्द  ‘डाउट, डिसएग्री और डिस्प्यूट’ भी शामिल हैं. भगवा ब्रिगेड कुछ दिनों से इस बात को सिद्ध करने में लगी है कि किसी को भी धर्म, धर्मग्रंथों, धर्म के विचारों, धर्म से जुड़े देवीदेवताओं के बारे कोई संदेह, भिन्न मत प्रकट करने और विरोध करने का हक नहीं है. देशभर में छोटेछोटे गुट, हिंदू धर्म की सनातन परंपरा की रक्षा के नाम पर, विचारों की अभिव्यक्ति पर तरहतरह से आक्रमण करते रहते हैं.

यह कोई नई बात नहीं है. हर सरकार व संस्था चाहती है कि उस की सत्ता पर कोई रोकटोक न लगे, कोई उस की पोल न खोले. धर्मों ने तो सदियों तक मुंह बंद कर ही सत्तासुख भोगा था और ईशनिंदा को मृत्युदंड के लायक बना दिया. राजाओं, जमींदारों, सेठों ने भी अपने खिलाफ आवाज उठाने वाले को दंड दिया.

अभी हाल में नोटबंदी पर रिजर्व बैंक औफ इंडिया ने स्पष्ट कर दिया कि इस के कारण बताना जनहित में न होगा. गनीमत यही है कि सरकार ने नोटबंदी के विरोध को पुराने नोटों को रखने की तरह अपराध नहीं माना है.

जो है, जैसा है, वैसा मान लो की परंपरा ने ही मानव समाज को ज्यादा उन्नति करने से रोका है. जबजब समाज में खुली सोच की छूट मिली है, उन्नति हुई है. ग्रीस और रोमन साम्राज्य बने ही इसलिए थे कि उन्होंने असहमति को स्वीकारा था.

मार्टिन लूथर द्वारा पोप का भंडाफोड़ करने की आजादी हासिल कर पाने के कारण यूरोप में वैचारिक क्रांति हुई जिस के कारण भरपूर विकास हुआ. भारत में विचारों की स्वतंत्रता रही पर वह जातिगत व्यवस्था के दायरे में रही और उसे तोड़ने में यह स्वतंत्रता कभी भी सफल नहीं हुई और इसीलिए पर्याप्त प्राकृतिक साधनों के बावजूद भारत बिखरा व पिछड़ा रहा.

आज देश के नागरिकों के पास संवैधानिक अधिकार हैं पर देशवासी उन्हें मानने को तैयार नहीं. अधिकांश लोग अपनी खरीखरी बात कहने से नहीं, बल्कि सही विचार सुनने व पढ़ने से भी कतराते हैं. प्रणब मुखर्जी ने विचारों की अभिव्यक्ति में जिस डाउट यानी संदेह की बात की है वह तो यहां न के बराबर है. आप विष्णु, राम, कृष्ण, मोहम्मद, ईसा के चरित्र के बारे में कुछ कहने का प्रयास तो करें. आप को, बिना सत्य परखे, अपराधी घोषित कर दिया जाएगा.

आप सरकारी, धार्मिक, सामाजिक मान्यताओं से असहमति प्रकट नहीं कर सकते. अगर करते हैं तो आप को तुरंत अलगथलग कर दिया जाएगा. आप योग और आयुर्वेद को नाटक कह कर देखिए, कौओं के झुंड सिर पर मंडराने लगेंगे.

आप सरकार, धार्मिक संस्थाओं, बैंकों, बड़ी कंपनियों से कोई विवाद नहीं कर सकते. वे बड़ेबड़े वकील लगा कर वर्षों तक आप को उलझाए रख, थका डालेंगे. हमारी सरकारें, समाज, धर्मसंस्थाएं, बैंक, कंपनियां, पार्टियां चाटुकारों को पसंद करती हैं. जो जय बोले, वही जीतता है.

सुखद मरीचिका: भाग-2

लेखिका- सिंधु मुरली

पूर्व कथा

डा. शांतनु के अस्पताल में अंजलि एक ऐसी मरीज बन कर आई थी, जिस का सामूहिक बलात्कार किया गया था. अंजलि से मिलने के बाद डा. शांतनु का ब्रह्मचर्य का प्रण डगमगाने लगा था. लेकिन अंजलि हादसे के बाद बिलकुल टूट चुकी थी. वह मर जाना चाहती थी. ऐसे में डा. शांतनु ने एक अच्छे सलाहकार की भूमिका निभाई और अंजलि का खोया आत्मविश्वास उसे वापस लौटा दिया. अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद अंजलि मुंबई वापस लौट आई. मगर उस का डा. शांतनु से संपर्क लगातार बना रहा.

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शांतनु और अंजलि के बीच फोन पर संपर्क बना रहा. दोनों के स्वर में एकदूसरे के लिए अपार ऊर्जा थी. शांतनु के मन ने तो अब अंजलि से विवाह की बात भी सोचनी शुरू कर दी थी, परंतु जबान तक आतेआते मन ही उन्हें खामोश कर देता.

शांतनु यह बात अच्छी तरह से जानते थे कि सिर्फ उन्हीं के हृदय में अंजलि के लिए ऐसी भावनाएं हैं. यह भी एक कारण था उन की झिझक का और शायद उन का मन अंजलि को विवाह जैसे गंभीर मामले पर बातचीत के लिए और समय देना चाहता था.

‘‘सर, अगले महीने 15 डाक्टरों का दल एक सेमिनार में भाग लेने के लिए दिल्ली

जा रहा है. 7 दिनों का प्रोग्राम है. चीफ पूछ रहे थे कि क्या आप भी जाना चाहेंगे?’’

एक सुबह जूनियर डाक्टर मनु ने शांतनु से पूछा, तो उन का हृदय तो कुछ और ही

सोचने लगा.

‘‘तुम जा रहे हो क्या?’’ उन्होंने डा.

मनु से पूछा.

‘‘औफकोर्स, अपने देश जाने का मौका भला कौन छोड़ना चाहेगा सर,’’ डा. मनु बहुत उत्साहित लग रहे थे.

‘‘तो ठीक है. चीफ से कहो मेरा भी नाम लिख लें,’’ शांतनु ने भी उसी उत्साह से कहा. वे शायद एक फैसला ले चुके थे.

उस दल में 10 विदेशी व 5 भारतीय डाक्टर थे. शांतनु ने अंजलि को अपने आने की सूचना दे दी. वैसे उन का भारत में कोई नहीं था. पिता की मृत्यु के साथ ही सारे रिश्ते भी समाप्त हो चुके थे.

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शांतनु ने दिल्ली पहुंच कर जब अंजलि को फोन किया तो उस ने उन से पूछा, ‘‘आप भारत कब पहुंचे सर?’’ शांतनु ने उस के स्वर में पहले वाला दर्द और गंभीरता का थोड़ा अंश अभी भी महसूस किया.

‘‘बस आधा घंटा हुआ है.’’

‘‘मैं और बूआजी आप से मिलना चाहते हैं,’’ अंजलि ने इच्छा व्यक्त की.

‘‘अभी 5 दिन का सेमिनार है. फिर मैं ही मुंबई आ जाऊंगा तुम से मिलने. मेरी अमेरिका की फ्लाइट भी वहीं से है,’’ शांतनु ने उसे अपना कार्यक्रम बताया.

‘‘सर, यदि बुरा न मानें तो 2 दिन हमारे यहां ठहर जाइएगा,’’ अंजलि ने निवेदन किया तो शांतनु ने हंस कर स्वीकृति दे दी.

5 दिनों तक चलने वाला अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार किन्हीं कारणों से जब 4 दिन में ही समाप्त हो गया तो सभी की खुशी का ठिकाना न रहा. भारतीय मूल के सभी डाक्टर अपनेअपने शहरों की ओर गए तो शांतनु ने मुंबई का रास्ता पकड़ा.

आज सुबह ही अंजलि से उन्हें पता चला कि फैंसी ड्रैस कंपीटिशन में भाग लेने वह

2 दिनों से पूना में है. अंजलि के मुंबई पहुंचने से पहले ही वे स्वयं उस के घर पहुंच कर उसे आश्चर्यचकित करना चाहते थे.

शाम 7 बजे वे अंजलि द्वारा दिए गए पते के अनुसार उस के घर के सामने थे. बूआजी ने उन का स्वागत किया. एकदूसरे को फोटो द्वारा पहले से ही पहचानने के कारण दोनों खुले दिल से मिले.

अंजलि के कंपीटिशन में भाग लेने की बात से डा. शांतनु संतुष्ट थे कि अंजलि ने जीवन की ओर सकारात्मक रुख कर लिया है. इस बार वे अंजलि व बूआजी से अपने मन की बात साफसाफ कहने ही आए थे. जो अंजलि उन्हें अमेरिका में नहीं मिल

पाई वह शायद भारत में मिल जाए, यही सोच रहा था उन का मन. वे मन से अंजलि के जितने करीब जाते, अजंलि फिर उन्हें उतनी ही दूर लगती. शायद इस बार उन के हृदय की मरीचिका का अंत हो जाए, ऐसी उन्हें उम्मीद थी.

‘‘आप जैसे योग्य आदमी के हमारे यहां आने से हमारी तो इज्जत ही बढ़ गई.’’ चाय का कप शांतनु की ओर बढ़ाते हुए बूआजी बोलीं.

उत्तर में शांतनु बस मुसकरा दिए. चायनाश्ते के बाद फ्रैश हो शांतनु ऊपर छत पर टहलने चले गए. बूआजी रसोई में आया को रात के खाने का कार्यक्रम बताने चली गईं.

मुंबई उन्हें पसंद आ गई. उस पर हलकी हवा और चांदनी रात. शांतनु अपने वतन की खुशबू को अपने अंदर बसा कर ले जाना चाहते थे.

थोड़ी देर बाद बूआजी ऊपर आ गईं. कुछ देर इधरउधर की बातें करने के बाद बूआजी शांतनु के पास आईं और हाथ जोड़ते हुए बोलीं, ‘‘मुझे अंजलि ने अपने साथ हुई दुर्घटना के बारे में सब कुछ बता दिया और साथ ही यह भी बताया कि वहां किस तरह अपनों से भी बढ़ कर आप ने उसे संभाला. आज आप की वजह से ही मेरी बच्ची जिंदा है.’’

‘‘ओह, तो उस ने आप को बता दिया. चलिए, एक तरह से अच्छा ही हुआ. उस का भी मन हलका हो गया होगा,’’ शांतनु ने कहा.

‘‘आप ने उस की शादी के बारे में कुछ सोचा है?’’ थोड़ी देर की चुप्पी के बाद शांतनु ने पूछा.

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‘‘अंजलि अभी भी इस सदमे से बाहर नहीं आई है. और जहां तक में उसे जानती हूं, वह शायद इस बात को राज रख कर किसी से भी शादी के लिए तैयार नहीं होगी. और सच जान कर कोई आगे आएगा भी नहीं,’’ बूआजी भरे गले से बोलीं.

‘‘नहीं, ऐसी बात नहीं है. मेरी नजर में एक लड़का है, जो अंजलि के बारे में सब कुछ जानते हुए भी उस से शादी करने का इच्छुक है. हां, उम्र थोड़ी ज्यादा है. मेरा जूनियर है वह, अंजलि को बहुत खुश रखेगा,’’ शांतनु न चाहते हुए भी झूठ बोल गए.

‘‘सच, क्या अमेरिका में है ऐसा कोई?’’ बूआजी की आंखों में चमक आ गई, ‘‘आप मुझे थोड़ा वक्त दीजिए. मैं अंजलि को समझाऊंगी.’’

‘‘बड़ी अभागन है मेरी अंजलि,’’ थोड़ी देर बाद बूआजी बोलीं.

‘‘आप ऐसा मत सोचिए,’’ शांतनु ने उन का धीरज बंधाया.

‘‘मेरी अंजलि भी एक बलात्कार की ही पैदाइश है.’’ बूआजी ने बिना रुके शून्य की ओर देखते हुए कहा.

‘‘क्या?’’ शांतनु चौंके.

‘‘हां, पता नहीं क्यों मैं आप को यह बता रही हूं. आप मेरी बच्ची की जिंदगी बनाने की सोच रहे हैं, इसलिए आप से यह कहने की हिम्मत हुई,’’ बूआजी ने शांतनु से नजरें मिलाते हुए कहा.

‘‘अंजलि की मां और मैं पक्की सहेली थीं. हम दोनों एक ही अस्पताल में स्टाफ नर्स थीं. हमारी दोस्ती के 5 साल बाद वह मेरी भाभी बनी. कविता नाम था उस का. उस की शादी के कई साल गुजर गए लेकिन औलाद न होने का दुख पतिपत्नी दोनों को था. कमी मेरे ही भाई में थी, लेकिन यह बात हम ने उसे कभी पता नहीं चलने दी थी, इसलिए शादी के 17 वर्षों बाद भी मेरे भाई ने औलाद की आस नहीं छोड़ी,’’ बूआजी आज अतीत के सारे पन्ने उलटना चाहती थीं.

उन्होंने आगे कहा, ‘‘एक रात ड्यूटी के समय, उसी के कमरे में किसी ने क्लोरोफार्म सुंघा कर उस के साथ कुकर्म किया था. उस ने यह बात सिर्फ मुझे बताई. शिकायत करती भी तो किस की. चेहरा तो अंधेरे में देखा ही नहीं था. उस समय मेरा भाई भी अपने व्यवसाय के सिलसिले मुंबई में था, इसलिए मैं ने कविता को अंदरूनी सफाई के लिए कहा, पर उस ने तो घर से निकलना ही बंद कर दिया था. मैं भी चुप हो गई. परंतु 1 महीने बाद उस के गर्भवती होने की खबर ने हम दोनों को चौंका दिया.

‘‘कविता गर्भपात कराना चाहती थी, मगर अपने भाई की आस और इस घर में नन्ही जान की उपस्थिति के आभास ने मुझे कठोर बना दिया. यह जानते हुए भी कि उस का इस उम्र में गर्भधारण खतरे से खाली नहीं, मैं ने उसे आखिरकार अपने भाई की खुशियों का वास्ता दे कर मना ही लिया.

‘‘9 महीने बाद अंजलि आई तो भाई की तो खुशी का ठिकाना न रहा. कविता को

पूरे समय परेशानी रही. फिर 4-5 सप्ताह बाद बच्चेदानी में सूजन के कारण उस की

मौत हो गई. यह जानते हुए भी कि अंजलि मेरे भाई का खून नहीं है, मैं ने उसे सीने से लगा लिया,’’ कह कर बूआजी फूटफूट कर रोने लगीं.

अब शांतनु का अस्तित्व हिलने लगा. खुद के आश्वासन के लिए उन्होंने पूछा, ‘‘यह घटना मुंबई की नहीं है क्या?’’

‘‘नहीं, विशाखापट्टनम की है. कविता की मौत के बाद ही हम मुंबई आए थे,’’ बूआजी ने आंसू पोंछते हुए कहा. आज उन के मन का जैसे सारा बोझ उतर गया था.

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विशाखापट्टनम का नाम सुनते ही डा. शांतनु के जीवन की सब से बड़ी परीक्षा का फल घोषित हो चुका था. वे हार गए थे. उन की वर्षों की सज्जनता भी आज उन के पुराने पाप के आगे सिर झुकाए खड़ी थी. उन का सिर घूमने लगा. मुश्किल से वे दीवार के सहारे खड़े रहे.

उन की हालत देख बूआजी चौंकी, ‘‘क्या हुआ आप को?’’

‘‘एक गिलास पानी…’’ यही कह पाए वे.

बूआजी पानी लाने नीचे दौड़ीं. पानी पिला कर बूआजी उन्हें सहारा दे कर नीचे कमरे में ले आईं.

शांतनु को बुरी तरह पसीना आ रहा था. बूआजी उन के पास ही बैठी रहीं. फिर थोड़ी देर बाद वे शांतनु से अंजलि को कुछ न बताने का वादा ले कर बाहर आ गईं.

शांतनु आंखें मूंदे लेटे रहे. उन्हें याद आती रही अपने जीवन की वह एकमात्र गलती, जिस ने उन की जिंदगी के माने ही बदल दिए थे. यही तो थी वह गलती.

अपने दोस्तों की जबान से रोज नएनए रंगीन किस्से सुनने वाले मैडिकल प्रथम वर्ष के छात्र शांतनु ने अपने से 10-11 वर्ष बड़ी स्टाफ नर्स कविता को ही तो क्लोरोफार्म सुंघा कर अपनी वासना का शिकार बनाया था.

अगले ही दिन मुंह छिपा कर वह पिता के पास लौट आया. कोई हल्ला नहीं, शोरशराबा नहीं. कालेज से कोई बुलावा नहीं. करीब 1 महीने तबीयत खराब होने का बहाना कर वह घर पर ही रहा.

फिर अपने ही शहर में रह कर पढ़ाई की. परंतु उस दिन के बाद से वह चैन की नींद नहीं सो पाया. फिर मन लगा कर पढ़ाई में जुट गया और साथ ही साथ अपने जीवन के कई पन्नों को भी पढ़ डाला. फिर 3 वर्ष बाद पिता के न रहने पर मां के पास आ गया.

‘‘बूआजी, आज 10 बजे की फ्लाइट से डा. शांतनु आ रहे हैं याद है न? हम उन्हें लेने एयरपोर्ट चलेंगे,’’ सुबह 6 बजे मुंबई लौटी अंजलि ने गाड़ी से सामान उतारते हुए कहा.

‘‘क्या बताऊं बेटी, वे तो तुझे सरप्राइज देने कल ही यहां आ गए थे, परंतु तबीयत ज्यादा खराब हो जाने से आज सुबह की 4 बजे की इमरजैंसी फ्लाइट से ही वापस लौट गए.’’ बूआजी मायूसी से बोलीं.

‘‘ओह, ऐसा अचानक क्या हो गया उन्हें?’’ अंजलि चिंतित स्वर में बोली, ‘‘चलो, फोन कर के पता करूंगी.’’

‘मैं स्वयं को अध्यात्म ज्ञान में सर्वोपरि समझता था परंतु अपने ही खून को न पहचान पाया. जिस तरह रेगिस्तान में जल होने का एहसास मुसाफिर को थकने नहीं देता है, उसी तरह शायद मेरी मरीचिका मेरी बेटी अंजलि है. अब जो रूपरेखा मैं ने बूआजी के सामने बांधी थी, उस से भी अच्छा लड़का ढूंढ़ना है अपनी अंजलि के लिए.’

विमान में सीट बैल्ट को कसते हुए शांतनु ने अपने मन को और ज्यादा कस लिया. इस नए उद्देश्य की पूर्ति के लिए.

इस तरह फिल्माए गए कंगना और शाहिद के बीच ईरोटिक सीन

हाल ही में पत्रकारों से बात करते हुए कंगना रानौट ने कबूल किया कि विशाल भारद्वाज निर्देशित फिल्म ‘‘रंगून’’ में उन्होंने कुछ ऐसे सीन भी किए हैं, जिन्हे ईरोटिक कहा जा सकता है. फिल्म के ट्रेलर में भी शाहिद कपूर और कंगना रानौट के बीच बारिश के अलावा कीचड़ में चुंबन सीन नजर आते हैं. जबकि इस तरह के दृश्यों में वह खुद असहज थीं.

शाहिद कपूर की चर्चा करते हुए कंगना रानौट कहती हैं-‘‘शाहिद कपूर का मूड़ हर दिन बदलता रहता है. कभी दोस्ताना स्वभाव, तो कभी शंकास्पद स्वभाव. दूसरी बात मुझे फिल्म में इंटीमेट सीन पसंद नहीं हैं. इस तरह के सीन फिल्माना बहुत कठिन होता है. किसी के साथ आपके संबंध बहुत साधारण होते हैं, पर कुछ मिनट बाद आप उसके मुंह में अपना मुंह लगा रहे होते हैं, यह कैसे आसान हो सकता है. इतना ही नहीं शाहिद कपूर की मूंछे भी बहुत परेशान करती थीं.’’

कुल मिलाकर फिल्म ‘‘रंगून’’ के सेट पर कंगना रानौट और शाहिद कपूर के बीच संबंध बहुत अच्छे नहीं थे, मगर कंगना ने कलाकार के तौर पर इस तरह काम किया कि शाहिद के साथ उनके चुंबन व ईरोटिक सीन देखकर कोई कह नहीं सकता कि इनके बीच के संबंध अच्छे नहीं रहे हैं.

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