सितंबर में करें इन शहरों की सैर…

सितंबर में मानसून पूरे भारत में हर जगह पहुंच चुका होता है और इस महीने में न तो ज्यादा गर्मी होती है न हीं ज्यादा उमस. इस मौसम में भारत के कुछ हिस्सों में घूमने जाना फायदे का सौदा हो सकता है क्योंकि मानसून में इन शहरों के नजारे देखने लायक होते हैं.

आइए जानें, ऐसे ही कुछ शानदार शहरों के बारे में जो मानसून में और भी ज्यादा खूबसूरत हो जाते हैं…

1. श्रीनगर, कश्मीर

कश्‍मीर राज्‍य की ग्रीष्‍मकालीन राजधानी श्रीनगर है जिसे धरती का स्‍वर्ग और पूरब के वेनिस के नाम से जाना जाता है. झेलम नदी के तट पर स्थित खूबसूरत झीलों, महान ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक महत्‍व रखने वाले इस शहर की खूबसूरती सितंबर महीने में और भी बढ़ जाती है.

2. अमृतसर, पंजाब

अमृतसर पंजाब का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र शहर माना जाता है. पवित्र इसलिए माना जाता है क्योंकि सिक्खों का सबसे बड़ा गुरूद्वारा स्वर्ण मंदिर अमृतसर में ही है. ताजमहल के बाद सबसे ज्यादा पर्यटक अमृतसर के स्वर्ण मंदिर को ही देखने आते हैं.

3. शिमला, हिमाचल प्रदेश

शिमला, एक खूबसूरत हिल स्टेशन है जो हिमाचल प्रदेश की राजधानी है. इस जगह को ‘समर रिफ्यूज’ और ‘हिल स्टेशंस की रानी’ के रूप में भी जाना जाता है. सितंबर में यहां के पहाड़ों जाखू, प्रॉस्पैक्ट, ऑव्सर्वेटरी, एलीसियम और समर को  देखना के सुखद अहसास हो सकता है.

4. लाचेन, सिक्किम

उत्तरी सिक्किम जिले में एक छोटा सा शांत कस्बा लाचेन स्थित है. इसके नाम का अर्थ है बड़ा दर्रा और हाल ही में सिक्किम सरकार द्वारा पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित किये जाने के कारण यह काफी लोकप्रिय पर्यटन गन्तव्य बनता जा रहा है. लाचेन प्राकृतिक सुन्दरता और वन्यजीव जन्तु की विविधता के कारण लगभग सभी पर्यटकों को रोचक लगता है.

5. नैनीताल, उत्तराखंड

आज भी नैनीताल में सबसे अधिक ताल हैं. इसे भारत का लेक डिस्ट्रिक्ट कहा जाता है क्योंकि यह पूरी जगह झीलों से घिरी हुई है. ‘नैनी’ शब्द का अर्थ है आंखें और ‘ताल’ का अर्थ है झील. झीलों का शहर नैनीताल उत्तराखंड का प्रसिद्ध पर्यटन स्‍थल है.

6. शि‍लांग, मेघालय

मेघालय का शिलांग छु‍टि्टयां बिताने के लिए बहुत अच्छी जगह है. गाड़ी से जाने योग्‍य पर्वतीय स्‍थानों में से एक माना जाने वाला शिलांग ऐसा पर्यटन स्‍थल जहां ज्यादा पैदल नहीं चलना होता. शिलांग की उपयुक्‍त सुविधाएं, मनोरम दृश्‍य, खुशहाल लोग, बादल और लंबे पाइन के पेड़, पर्वत, घाटियां, और एक शानदार गोल्‍फ कोर्स, इसे एक अच्‍छा पर्यटन स्थल बनाते हैं.

7. मसूरी, उत्तराखंड

मसूरी उत्तराखंड की प्रकृति की गोद में बसा हुआ अत्‍यंत मनोरम शहर है. मसूरी को ‘पहाड़ों की रानी’ भी कहा जाता है. मसूरी सौंदर्य, शिक्षा, पर्यटन व व्यावसायिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है.

8. कोच्चि, केरल

यह मध्य केरल में है. केरल की बाकी जगहों पर जाने के लिए कोच्चि से आसानी होगी. यह केरल घूमने के लिए शुरुआती पड़ाव की तरह है. इस वजह से भी कोच्चि लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया.

9. कुन्नूर तमिलनाडु

कुन्नूर तमिलनाडु राज्य के नीलगिरि जिले में स्थित एक प्रसिद्ध एवं खूबसूरत पर्वतीय पर्यटन स्थल है. यहां की हरियाली और मनमोहक दृश्य पर्यटकों को बरबस ही खींच लाते हैं. यह स्थान मनमोहक हरियाली, जंगली फूलों और पक्षियों की विविधताओं के लिए जाना जाता है. यहां ट्रैकिंग और पैदल सैर करने का अलग ही आनन्द है. चाय के बागानों की सैर पर्यटकों को खूब भाती है.

10. खंडाला, महाराष्ट्र

यह जगह महाराष्ट्र में, पश्चिमी घाट में स्थित एक पर्वतीय स्थल है. यह लोनावला से तीन किलोमीटर और कर्जत से सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. मुंबई और पुणे के बीच की मुख्य कड़ी मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे, खंडाला से ही होकर गुजरता है. ड्यूक की नाक (ड्यूक्स नोज) नामक पहाड़ी चोटी से खंडाला और भोर घाट के सुन्दर नजारों का आनन्द लिया जा सकता है.

“सूरत के कारण मैं रिजेक्ट हो गया था”

यह सच है कि मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती. अगर फिल्म इंडस्ट्री में मेहनत के बलबूते पर अपनी जगह और नाम कमाने वालों की बात की जाए तो रेमो डिसूजा का नाम उनमें सब से ऊपर होगा.

रेमो ने कभी डांस की ट्रेनिंग नहीं ली. सिर्फ माइकल जैक्सन के वीडियो देख कर डांस सीखा. उन डांस वीडियोज के किराए के पैसों का भी बड़ी मुश्किल से इंतजाम कर पाते थे. पैसों की तंगी के चलते उन्होंने अपनी डांस क्लास सुपर ब्रैट्स खोली और लोगों को डांस सिखाने लगे.

शुरुआती दौर में रेमो को इस क्षेत्र में बहुत संघर्ष करना पड़ा. एक बार तो उनके पास पैसे की इतनी तंगी आ गई कि उन्हें अपनी 2 रातें बिना कुछ खाए पीए स्टेशन पर गुजारनी पड़ीं. पर कहते हैं न कि मेहनत के बाद खुशी का समय जरूर आता है. ऐसा ही रेमो के साथ भी हुआ.

एक डांस कंपिटिशन में विजेता बनने के बाद लोगों को रेमो के हुनर की पहचान हुई और पहला चांस रामगोपाल वर्मा की फिल्म ‘रंगीला’ में उर्मिला के साथ ग्रुप डांस करने का मिला. पहला बड़ा ब्रेक सोनू निगम के अलबम ‘दीवाना’ से मिला. इसके बाद रेमो ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा.

स्टार प्लस के ‘डांस प्लस’ के दूसरे सीजन के मौके पर रेमो ने रिऐलिटी शो की सचाई और अपने जीवन के कुछ अच्छेबुरे पलों को शेयर किया. पेश हैं, कुछ अहम अंश…

डांस शो में सिर्फ डांस ही होना चाहिए

कई सारे डांस रिऐलिटी शो इस समय छोटे परदे पर दस्तक दे चुके हैं और कई आने वाले हैं. इन सब के बीच कैसे अपने शो की टीआरपी बढ़ा पाएंगे? सवाल के जवाब में रेमो का कहना है, ‘‘हमारा काम सिर्फ अच्छी प्रतिभाओं को जज करने का है. शो को रोचक बनाना तो प्रतिभागियों का काम है. हमारे शो में कई नए डांस के एक्ट देखने को मिलेंगे. कई एक्ट तो ऐसे हैं, जिन्हें मैं खुद पहली बार देख रहा हूं.

एक लड़का ‘ऐनिमेशन’ डांस एक्ट ले कर आया तो एक ‘डांस होल’ ले कर, जिस का नाम मैंने भी पहली बार सुना था. मैं मानता हूं कि अगर शो डांस का है, तो उस में सिर्फ डांस ही होना चाहिए और कोई ड्रामा नहीं. हमारे देश में अच्छा डांस देखने वालों की कमी नहीं है.’’

दिल तो क्षेत्रीय नृत्य में बसता है

डांस से फिल्में बनाने के शौक पर रेमो कहते हैं, ‘‘मैं तो हमेशा डांस की दुनिया में ही जीता हूं. अगर दिल की बात बताऊं तो मुझे क्षेत्रीय डांस बहुत पसंद है. मैंने बंगाल के ‘छाऊ’ डांस के ऊपर एक बांग्ला फिल्म बनाई थी, जो आज तक रिलीज नहीं हो पाई. हमारे यहां क्षेत्रीय नृत्य की सीमा सिर्फ उसी क्षेत्र विशेष तक सीमित है जहां का वह नृत्य है.

अंतर्राष्ट्रीय लेवल की तो छोडि़ए उसे राष्ट्रीय स्तर पर भी आज पहचान प्राप्त नहीं हुई है. इसलिए मैं डांस पर आधारित फिल्में बनाता हूं. मेरी सारी फिल्में एक जैसी नहीं होतीं. सब से पहले मैंने ‘फालतू’ बनाई थी, जो अलग थी. इसके बाद ‘एबीसीडी’ के दोनों भाग डांस बेस्ड थे. एक और फिल्म मैं सलमान और शक्ति को ले कर बना रहा हूं, जिस का निर्देशन डिकोस्ट्रा कर रहे हैं. यह स्ट्रीट डांसर की कहानी पर आधारित है.’’

डांस का शौक

रेमो अपने बारे में बताते हैं, ‘‘मेरे पापा नेवी में थे, इसलिए मैं पूरा देश घूमा हुआ हूं. मैं सबसे ज्यादा गुजरात में रहा हूं. इसी कारण गुजराती और हिंदी पर अच्छी पकड़ है. मैंने किसी से डांस नहीं सीखा है. घर पर रह कर ही फिल्मी गानों पर डांस करता था.

एक दिन एक डांस वीडियो देखा, जिसे देख कर मैं ने अपने दोस्त से कहा कि एक आदमी ऐसा डांस कैसे कर सकता है? तब मुझे पता चला कि वह डांस वाला आदमी और कोई नहीं माइकल जैक्सन है. उसी दिन से मैंने उन जैसा डांस करने की कोशिश शुरू कर दी और मैंने तय किया कि मुझे इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाना है.

दोस्तों की मदद से माइकल जैक्सन के वीडियो कैसेट मंगवाए. उस समय एक दिन का किराया 25रुप्या था. बड़ी मुश्किल से पैसों का जुगाड़ हो पाता था. मैंने उनका एक वीडियो एक दिन में 100 से भी ज्यादा बार देखा था. उन के डांस स्टैप्स को कौपी करने की कोशिश करने लगा. मैं माइकल जैक्सन को ही अपना गुरु मानता हूं.’’

ड्रीम प्रोजेक्ट

अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के बारे में रेमो बताते हैं, ‘‘मैं एक डांस इंस्टिट्यूट खोलना चाहता हूं जहां हर तरह के डांस के प्रशिक्षण की सुविधा हो और वहां से निकलने के बाद हर छात्र को सर्टीफिकेट दिया जाए, जिसे दिखा कर वह इसी क्षेत्र में अपना करियर बना सके.

हमारे यहां क्लासिकल डांस के लिए तो डिग्री, सर्टीफिकेट दिए जाते हैं पर हिपहोप, बैले, कंटैंपररी डांस के लिए कोई इंस्टिट्यूट नहीं है. इनकी उपलब्धता से लोगों का डांस के प्रति और रुझान बढ़ेगा और प्रतिभाएं सही जगह पहुंचेंगी.’’

वह लमहा कभी नहीं भूलता

हर आदमी की जिंदगी में कुछ ऐसा घटता है कि कितना भी समय हो जाए जेहन में वह घटना हमेशा ताजा रहती है. रेमो के साथ भी ऐसी ही घटना घटी. उस के बारे में वे बताते हैं, ‘‘मैं जब ‘रंगीला’ फिल्म में डांस के लिए औडिशन देने गया तो वहां 250 प्रतिभागियों में से 50 का चयन होना था.

मेरा डांस देखे बिना ही मुझे रिजैक्ट कर दिया गया, क्योंकि जो चयनित हुए थे उनकी तुलना में मैं बहुत दुबलापतला था और फिर मेरा चेहरा भी सामान्य था. मैंने सिलेक्शन कर रहे लोगों से रिक्वैस्ट की कि चेहरे को न देख एक बार मेरे डांस को देखें. तब मैंने डांस किया और मेरा सिलैक्शन हो गया.

उस लमहे को मैं कभी नहीं भूल सकता, क्योंकि सूरत के कारण मैं रिजैक्ट हो गया था पर सीरत ने मुझे सिलैक्ट करा दिया. इस के अलावा मैं आश्रम के बच्चों को डांस सिखाता था. उन बच्चों में से एक स्पैशल बच्चा भी था, जिस के हाथों में मूवमैंट न के बराबर थी. धीरे धीरे मेरी सिखाने की लगन और उस बच्चे की मेहनत रंग लाई. वह बच्चा डांस करने में पारंगत हो गया. उसे डांस करते देख मुझे जो खुशी होती है उसे मैं शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता.’’

बॉलीवुड में सब को नचाया

रेमो बॉलीवुड के कई सितारों को कोरियोग्राफ कर चुके हैं. वे कहते हैं, ‘‘मैंने आमिर खान और शाहरुख खान को छोड़ कर सभी को अपनी उंगलियों पर नचाया है. दीपिका, रणवीर कपूर, रणवीर सिंह, कैटरीना कैफ, सलमान सभी डांस में परफैक्ट हैं, पर मेरी असली परीक्षा अजय देवगन को कोरियाग्राफ करने में होगी, क्योंकि उन की फिल्म ‘शिवाय’ में मैं ही कोरियाग्राफर हूं.’’

युवा बनाएं डांस में करियर

डांस में करियर बनाने का सपना देख रहे युवाओं से रेमो का कहना है, ‘‘सपना देखना और उसे सच करना 2 अलग अलग बातें हैं. जो सपना देखते हो उसे पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करो, लेकिन जल्दी परिणाम की आशा मत करो. आप की मेहनत और लगन को दुनिया खुद सलाम करेगी.

जब से डांस रिऐलिटी शोज शुरू हुए हैं नवयुवकों को अच्छे मौके मिल रहे हैं. धर्मेश, शक्ति, पुनीत, राघव इन्हीं शोज से निकले हैं, जो पैसा और शोहरत दोनों कमा रहे हैं.’’  

जैकी चेन को मिलेगा लाइफ टाइम अचीवमेंट का ऑस्कर

लोकप्रिय अभिनेता जैकी चेन को फिल्म एडिटर एने वी.कोआटेस, कास्टिंग डायरेक्टर लेन स्टालमास्टर और डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर फ्रेडरिक विसेमान को लाइफ टाइम अचीवमेंट का ऑस्कर अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा.

सूत्रों के मुताबिक जैकी को नवम्बर में गवर्नर पुरस्कार से नवाजा जाएगा. ‘अकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर्स आर्ट्स एंड साइंसेस’ ने इसकी घोषणा की.

अपने बयान में अकादमी की अध्यक्ष चेरल बोने इसाक्स ने कहा कि यह लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड जैकी, लेन और फ्रैडिक जैसे लोगों के लिए ही बना है, अपने काम के सच्चे लोग.

चेरल ने कहा कि बोर्ड ऐसे कलाकारों की बेहतरीन उपलब्धि के लिए उन्हें सम्मानित कर काफी खुश है. इन चारों कलाकारों को 12 नवम्बर को हाईलैंड सेंटर और हॉलीवुड के डोल्बे बॉलरूम में अकादमी के आठवें वार्षिक गवर्नर पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा.

‘पद्मावती’ के लिए शाहरुख ने रखी ये शर्त

संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ रिलीज होने से पहले ही काफी चर्चा में है. फिल्म की स्टारकास्ट और उनकी डिमांड को लेकर कई खबरें सामनें आ रही हैं. हाल ही में खबर आई थी की शाहिद कपूर ने फिल्म में अपने रोल को लेकर कुछ शर्ते रखी हैं, तो अब खबर आ रही है की शाहरुख खान भी फिल्म में अहम भूमिका निभाएंगे जिसके लिए उन्होंने भी भंसाली के सामने कुछ शर्त रखी है.

शाहरुख ने भंसाली से कहा है कि वो फिल्म के टाइटल में बदलाव करें. दरअसल ‘पद्मावती’ एक खूबसूरत रानी की जिंदगी पर आधारित फिल्म है, जिसमें शाहरुख को लगता है कि अगर वो इस फिल्म में काम करेंगे तो उनका रोल पद्मावती के प्रभाव के आगे दब जाएगा. बस यही वजह है कि उन्होंने भंसाली से फिल्म का टाइटल बदलने की शर्त रखी है.

बता दें कि फिल्म में पद्मावती का अहम किरदार दीपिका पादुकोण निभा रही हैं. वहीं उनके पति के रोल में शाहिद कपूर और अलाउद्दीन खिलजी की भूमिका में रणबीर सिंह नजर आएंगे जैसी की खबरें आ रही हैं. अब देखना होगा की शाहरुख का फिल्म में क्या रोल होगा. फिलहाल तो वो इम्तियाज अली की फिल्म ‘द रिंग’ की शूटिंग में व्यस्त हैं.

ऐश्वर्या राय बनेंगी कवयित्री

बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री एश्वर्या राय सिल्वर स्क्रीन पर कवयित्री का किरदार निभाती नजर आ सकती हैं. बॉलीवुड फिल्मकार करण जौहर इन दिनों फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ बना रहे हैं. इस फिल्म में रणबीर कपूर, ऐश्वर्या राय बच्चन और अनुष्का शर्मा की अहम भूमिका है.

सूत्रों की माने तो यह फिल्म अस्सी के दशक में बनी फिल्म दूसरा आदमी से प्रेरित है.

चर्चा है कि फिल्म में ऐश्वर्या कवयित्री का किरदार निभाती नजर आएंगी. अपनी इस भूमिका को लेकर ऐश्वर्या काफी उत्साहित हैं. यह फिल्म इस वर्ष दीपावली के अवसर पर प्रदर्शित होगी. 

क्रेडिट कार्ड से बेहतरीन शॉपिंग के 5 टिप्स

 

क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग सुविधाजनक है और कैश हाथ में न होने पर भी जरूरत का सामान आसानी से लिया जा सकता है. लेकिन समझदारी से इसका यूज नहीं करने पर आप बहुत बड़ी परेशानी में फंस सकते हैं.

हालांकि यह भी सच है कि क्रेडिट कार्ड से खरीदारी के दौरान थोड़ा लालच बढ़ जाता है और तब खुद पर कंट्रोल करना मुश्किल होता है. ऐसे में थोड़ी समझदारी दिखाना जरूरी है. ऐसा न हो कि आप एक ही बार में क्रेडिट कार्ड की सारी लिमिट खत्म कर दें और फिर बाद में इंस्टॉलमेंट देने पर आपको परेशानी हो या जरूरी खर्चे तक रोकने की नौबत आ जाए.

क्रेडिट कार्ड फायदे की चीज है. तो जानते हैं ऐसे 5 टिप्स, जो इस सीजन में अच्छी खरीदारी के साथ ही क्रेडिट कार्ड को समझदारी से इस्तेमाल करने का तरीका भी बताएंगे –

1) क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग करते समय हर बार आप रिवार्ड प्वॉइंट्स कमाते हैं. अक्सर 100-250 की खरीद पर आपको 1 पॉइंट मिलता है. हालांकि यह अलग-अलग कार्ड और बैंक पर डिपेंड करता हैं. समझदारी इसी में है कि आप अपने जुटाए हुए प्वॉइंट्स से अपडेट रहें और शॉपिंग की पेमेंट करने के दौरान इनको भी यूज कर लें. इस तरह आपको खासी बचत मिल सकती है.

2) क्रेडिट कार्ड से खरीदारी के बाद अपने मोबाइल में सारी पेमेंट डीटेल और इंस्टालमेंट के रिमाइंडर लगा लें, जिससे आपको याद रहे कि ड्यू डेट से पहले ही आपको इसे क्लीयर कर देना है ताकि बाद में ब्याज का ज्यादा बोझ न पड़ें. कोशिश करें कि जब तक आप पहले वाली पेमेंट न कर दें, तब तक और शॉपिंग न करें.

3) फालतू के खर्च से बचने की कोशिश करें. कभी भी बंपर ऑफर्स या सेल को देखकर यह न सोचें कि सारा फायदा अभी ही उठा लें. हमेशा ध्यान रखें कि कंपनियां और ब्रांड्स अक्सर कोई न कोई ऑफर लेकर आते ही रहते हैं. ऐसे में लालच में न पड़े. वरना बाद में ब्याज समेत इसका ज्यादा बोझ आपकी जेब पर पड़ सकता है.

4) बजट से थोड़ा कम ही खर्च करने का टारगेट बनाएं. अगर आपके क्रेडिट कार्ड की लिमिट 1 लाख है तो कोशिश करें कि आप 80 हजार में ही अपनी शॉपिंग निपटा लें. ऐसा करने से जरूरत के समय आप इस बचाए हुए क्रेडिट का इस्तेमाल कर पाएंगे.

5) हर महीने अपने क्रेडिट कार्ड की स्टेटमेंट सावधानी से चेक करने की आदत डालें. एक अच्छा तरीका यह भी है कि आप क्रेडिट कार्ड के जरिए खरीदे गए सामान का बिल हमेशा पेमेंट क्लीयर होने तक संभाल कर रखें. इससे आप आसानी से स्टेटमेंट के साथ बिल को वैरिफाई कर पाएंगे कि कहीं कोई एक्सट्रा चार्ज तो नहीं लगा या कोई और गड़बड़ी तो नहीं है.

इसके अलावा साइबर सिक्योरिटी भी एक बड़ा मुद्दा है. कभी भी अपने क्रेडिट कार्ड का पिन नंबर और सिक्योरिटी कोड किसी को न दें. इसमें आपके पैसे की ही सुरक्षा है.

नंगे पैर चलने के फायदे

क्या आपको याद है आप आखि‍री बार नंगे पैर कब चले थे? शायद ही याद हो. सुबह उठने के साथ ही हम मशीन बन जाते हैं और मशीन की ही तरह कामों में लग जाते हैं. जूतों के फीते बांधते हैं और निकल पड़ते हैं काम पर. घर लौटते-लौटते रात हो जाती है और उसके बाद थककर बिस्तर पर गिर पड़ते हैं. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि इस एक छोटी सी आदत को अपने लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाकर आप बहुत सी बीमारियों से बच सकते हैं.

आपने अपने घर में नाना-नानी या दादा-दादी को ये कहते सुना होगा कि सुबह नंगे पैर घास पर टहलने से आंखों की रोशनी बढ़ती है. लेकिन सुबह नंगे पैर घास पर टहलने का ये इकलौता फायदा नहीं है. रोज सुबह कुछ दूर नंगे पैर टहलकर आप लंबे समय तक जवान बने रह सकते हैं.

नंगे पैर जमीन पर चलने से बॉडी पोश्चर सही रहता है. इससे कमर भी सीधी रहती है, जिससे कमर और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बहुत सी परेशानियां दूर हो जाती हैं. इसके अलावा नंगे पैर चलने से पैरों के दर्द में भी फायदा होता है.

नंगे पैर चलने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है. जिससे पैरों का निचला हिस्सा मजबूत होता है. रोजाना कुछ देर नंगे पैर चलने से पैरों का पुराना दर्द भी दूर हो जाता है. एक शोध के अनुसार, नंगे पैर चलने से तनाव भी कम होता है और दिमाग शांत होता है.

वैक्सिंग के नए तरीके

त्वचा को खूबसूरत, कोमल और अनचाहे बालों से आजाद बनाने के लिए वैक्सिंग से बेहतर कोई विकल्प नहीं. वैक्सिंग से न केवल अनचाहे बाल रिमूव होते हैं वरन टैनिंग जैसी समस्या भी दूर होती है. वैक्सिंग कराने के बाद सामान्यतया त्वचा कम से कम 2 सप्ताह तक मुलायम रहती है. जो बाल फिर से उगते हैं, वे भी बारीक और कोमल होते हैं. नियमित वैक्सिंग कराने से 3-4 सप्ताह तक बाल नहीं आते. समय के साथ बालों का विकास भी कम हो जाता है.

एल्प्स ब्यूटी क्लीनिक की डायरैक्टर भारती तनेजा के अनुसार वैक्स कई तरह की होती हैं:

सौफ्ट वैक्स यानी रैग्युलर वैक्स

यह सब से ज्यादा कौमन और इस्तेमाल की जाने वाली वैक्स है, जो शहद या चीनी के घोल से तैयार की जाती है. हेयर रिमूव करने के साथसाथ यह टैनिंग को भी रिमूव करती है और साथ ही स्किन को सौफ्ट व ग्लौसी बनाती है.

चौकलेट वैक्स

इस वैक्स की मदद से स्किन पोर्स बड़े हो जाते हैं, जिस से बाल आसानी से निकल जाते हैं और ज्यादा दर्द भी नहीं होता. इस के अलावा चौकलेट के अंदर स्किन सूदिंग तत्त्व पाए जाते हैं, जो बौडी को रिलैक्स करते हैं. कोको पाउडर बेस्ड इस वैक्स से बाल पूरी तरह रिमूव हो जाते हैं और स्किन सौफ्ट व स्मूद नजर आती है. इस वैक्स को कराने से रैड पैचेज पड़ने के आसार भी न के बराबर रह जाते हैं. यह वैक्स सैंसिटिव स्किन के लिए भी अच्छी साबित होती है. इस के अलावा चौकलेट का अरोमा बहुत ही आकर्षक होता है, जो विशेष आनंद की अनुभूति कराता है.

ऐलोवेरा वैक्स

ऐलोवेरा के पल्प से बनी यह वैक्स स्किन को नरिश करने के साथसाथ रिजुविनेट भी करती है. यह बौडी के सैंसिटिव एरिया जैसे अंडरआर्म्स और बिकिनी पार्ट के लिए काफी अच्छी होती है.

ब्राजीलियन वैक्स

यह भी हार्ड वैक्स का ही एक टाइप है, जिसे विशेष तौर पर बिकिनी एरिया के लिए ही बनाया गया है. इस से सभी जगह के अनचाहे बालों को जैसे आगे, साइड, पीछे और बीच में से रिमूव किया जाता है. वैक्सिंग के दर्द को कम करने के लिए इस वैक्स को जल्दी करना जरूरी होता है.

लिपोसोल्यूबल वैक्स

यह वैक्स औयल बेस्ड होती है. बालों की जड़ों पर तो इस की ग्रिप अच्छी होती ही है, साथ ही यह स्किन पर भी डैलिकेट होती है. इस वैक्स को इस्तेमाल करने से पहले स्किन पर औयल लगाया जाता है और बालों को रिमूव करने के लिए छोटीछोटी स्ट्रिप्स यूज की जाती हैं. यह वैक्स बहुत गरम भी हो जाए, तो भी स्किन को कोई नुकसान नहीं होता है.

इन बातों का भी रखें ध्यान

स्किन लेजर क्लीनिक के डर्मेटोलौजिस्ट डाक्टर मुनीष पाल कहते हैं कि वैक्सिंग कराने से पहले और बाद में कुछ सावधानियां जरूरी हैं. वैक्सिंग कराते समय त्वचा जल सकती है, लाल हो सकती है, त्वचा का संक्रमण हो सकता है. जहां वैक्सिंग की है वहां दर्द होना, त्वचा में जलन, त्वचा के रंग में बदलाव आना, फफोले पड़ना, त्वचा का टैक्स्चर बदल जाना, खुजली होना जैसी समस्याएं भी हो जाती हैं.

चेहरे पर वैक्सिंग

चेहरे पर अत्यधिक बाल होना कुछ महिलाओं के लिए बहुत बड़ी समस्या हो जाती है. कुछ पार्लर इस से छुटकारा पाने के लिए वैक्सिंग कराने की सलाह देते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि चेहरे पर वैक्सिंग कराना नुकसानदायक हो सकता है. चेहरे की त्वचा बहुत मुलायम होती है इसलिए समय से पहले झुर्रियां पड़ सकती हैं. अगर बाल मोटे हैं तो लेजर हेयर रिमूवल सर्वश्रेष्ठ विकल्प है. आप ब्लीचिंग का विकल्प भी चुन सकती हैं. वैक्सिंग से हेयर फौलिकल्स को बहुत नुकसान पहुंचता है जिस से संक्रमण और सूजन हो सकती है. इस के कारण दाग भी पड़ सकते हैं जिन का उपचार करना कठिन होता है.

वैक्सिंग के पहले

वैक्सिंग कराने से पहले इन बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है:

– वैक्सिंग करने वाले के हाथ बिलकुल साफ होने चाहिए.

– जिस हिस्से की वैक्सिंग करनी है वह भी पूरी तरह साफ होना चाहिए.

– वैक्सिंग किसी अच्छे पार्लर में ही कराएं.

– ध्यान रखें कि वैक्स और पट्टियां अच्छे ब्रैंड की हों.

– वैक्सिंग कराने से 1 दिन पहले त्वचा की स्क्रबिंग करें. यह मृत त्वचा को बाहर निकाल देती है, जो हेयर फौलिकल्स को बंद कर देती है, जिस के कारण हेयर इनग्रोन की समस्या हो सकती है.

वैक्सिंग के बाद

वैक्सिंग कराने के तुरंत बाद त्वचा लाल हो सकती है और उस पर रैशेज दिखाई दे सकते हैं, जो कुछ घंटों बाद अपनेआप गायब हो जाते हैं. यह हिस्टामिन रिऐक्शन के कारण होता है, क्योंकि वैक्सिंग बालों को जड़ों से निकाल देती है. यह बहुत जरूरी है कि उस क्षेत्र को साफ और बैक्टीरिया मुक्त रखा जाए.

– वैक्सिंग कराने के 24 घंटे बाद तक धूप में न निकलें.

– 12 घंटे तक कोई सनबाथिंग नहीं.

– 24 घंटे तक क्लोरीन युक्त स्विमिंग पूल में स्विमिंग न करें.

– स्पा और सोना बाथ भी न लें.

– कोई भी खुशबू वाली क्रीम न लगाएं वरना जलन हो सकती है.

– त्वचा पर बैक्टीरिया के विकास को रोकने के लिए टीट्री युक्त उत्पाद लगाएं.

– अगर वैक्सिंग के बाद त्वचा लाल हो गई हो तो 1/2 कटोरी वसारहित दूध में 1/2 कटोरी ठंडा पानी मिलाएं. इस में पेपर टौवेल भिगोएं और उसे त्वचा पर रखें. कुछकुछ घंटों में यह तब तक दोहराती रहें जब तक आराम न मिले. दूध में पाया जाने वाला लैक्टिक ऐसिड त्वचा को आराम पहुंचाता है.

– इनग्रोन हेयर ग्रोथ को रोकने के लिए वैक्स किए क्षेत्र पर तुरंत बर्फ लगाएं. इस से रोमछिद्र बंद हो जाएंगे और बैक्टीरिया का प्रवेश रुक जाएगा. कुछ देर बाद वैक्स किए क्षेत्र को सैलिसिलिक ऐसिड युक्त क्लींजर से धो लें.

– अगर वैक्सिंग के बाद जलन हो रही है, तो ऐलोवेरा युक्त क्रीम लगाएं. ध्यान रहे कि इस में अलकोहल नहीं होना चाहिए. जलन को कम करने के लिए बर्फ का इस्तेमाल भी कर सकती हैं.

– वैक्सिंग कराने के तुरंत बाद जिम न जाएं, क्योंकि इस से चिकनी त्वचा पर बैक्टीरिया फैलने का खतरा अधिक होता है.

– वैक्सिंग कराने के कुछ घंटों बाद तक टाइट कपड़े न पहनें, क्योंकि इस से त्वचा पर रगड़ लग सकती है और उस में जलन हो सकती है.

जरूरी सावधानियां

– किसी भी बड़े समारोह से ठीक पहले वैक्सिंग न कराएं, क्योंकि आप अंदाजा नहीं लगा सकतीं कि आप की त्वचा वैक्सिंग के प्रति क्या प्रतिक्रिया देगी.

– अगर आप वैक्सिंग कराती हैं, तो बीचबीच में शेव न करें. इस से बाल कड़े हो जाते हैं और वैक्सिंग करने में समस्या आती है. जिन्हें त्वचा संबंधी कोई समस्या है जैसे ऐक्जिमा, कहीं से त्वचा कटी हुई है या घाव है उन्हें वैक्सिंग से दूर रहना चाहिए.

– अगर वैक्सिंग कराने के 24 घंटे बाद तक त्वचा में दर्द या जलन हो तो तुरंत किसी त्वचारोग विशेषज्ञ को दिखाएं.

लेजर तकनीक

डाक्टर मुनीष पाल के मुताबिक अगर आप अपने चेहरे या शरीर के अनचाहे बालों से छुटकारा पाना चाहती हैं, तो वैक्सिंग या लेजर का विकल्प चुनें, क्योंकि इन में त्वचा शेविंग की तुलना में अधिक समय तक मुलायम रहती है.

लेजर के बाद कुछ महिलाओं में फिर से बालों का विकास होता है. लेकिन बालों के विकास का काल हर किसी में अलगअलग हो सकता है. लेजर ट्रीटमैंट के बाद जो बाल आते हैं वे पतले, मुलायम और हलके रंग के होते हैं. इसलिए लेजर को अनचाहे बालों से छुटकारा पाने का सब से अच्छा विकल्प माना जाता है. लेजर उपचार की कितनी सीटिंग्स लेनी होंगी और कितना खर्च आएगा यह इस पर निर्भर करता

है कि शरीर के किस भाग की त्वचा से बाल निकालने हैं और वहां बालों का विकास कितना है.

पूरी तरह से निराश करती है ‘अकीरा’

‘अकीरा’ खत्म होते होते दिमाग में पहला सवाल उठता है कि क्या इस फिल्म के निर्देशक ए मुरूगादास ही हैं, जो हिंदी में ‘गजनी’ और ‘होलीडे: ए सोल्जर नेवर आफ ड्यूटी’ जैसी फिल्में निर्देशित कर चुके हैं? कहानी, निर्देशन, अभिनय व संगीत को लेकर भी यह फिल्म निराश ही करती है.

फिल्म पूरी तरह से मुंबईया मसालों से भरपूर है. नयापन कुछ भी नहीं है. फिल्म की हीरो सोनाक्षी सिन्हा हैं, मगर उनमें हीरो जैसा अदम्य जोश या साहस कहीं नजर नही आता है.

फिल्म की कहानी के केंद्र जोधपुर में बसे अपने पूरे परिवार के साथ रहने वाली अकीरा शर्मा (सोनाक्षी सिन्हा) है, जिसके माता पिता ने उसे बचपन में ही आत्मरक्षा के लिए जूडो कराटे व बॉक्सिंग की ट्रेनिंग दिलायी है. पर कम उम्र में ही एक साथ चार पांच लड़कों की पिटाई कर देने की आदत के चलते अकीरा पर तेजाब फेंकने आए युवक पर ही तेजाब गिर जाता है. पर अदालत अकीरा को दोषी मानकर बाल सुधार गृह में भेज देती है.

सुधार गृह से निकलने के बाद अकीरा पढ़ाई करना चाहती है, पर उसके माता पिता की मौत हो जाने के कारण उसे मुंबई अपने भाई के पास जाना पड़ता है. अकीरा का भाई मुंबई के एक कालेज में अकीरा का एडमिशन करवा देता है.

यहां मुंबई में ए सी पी गोविंद राणे (अनुराग कश्यप) की एक विवादास्पद सीडी लीक हो जाती है और हालात ऐसे बन जाते हैं कि इसमें अकीरा फंस जाती है. अब पुलिस उसका एनकाउंटर करना चाहती है. अकीरा एनकाउंटर से बच जाती है, पर उसे पागल घोषित कर एक मनोचिकित्सक अस्पताल में भर्ती करा दिया जाता है. जहां उसे बिजली के झटके दिए जाते हैं. अब अकीरा को क्रूर पुलिस वालों से निपटना है.

इंटरवल के बाद फिल्म के लेखक, पटकथा लेखक और निर्देशक सभी भूल गए हैं कि वह फिल्म को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं. बेचारा दर्शक सोचता है कि फिल्म कब खत्म होगी? लेखक ने फिल्म के अंदर पात्र काफी जोड़ दिए, पर इन पात्रों को कहानी के साथ ठीक से नहीं जोड़ पाया. फिल्म के संवाद भी घटिया हैं. फिल्म का क्लायमेक्स तो बहुत घटिया है. फिल्म का गीत संगीत भी आकर्षित नहीं करता.

जहां तक फिल्म में अभिनय का सवाल है, तो फिल्म देखते समय दिमाग में बार बार एक ही सवाल गूंज रहा था कि क्या फिल्म ‘लुटेरा’ में पाखी राय चौधरी का किरदार निभाने वाली अदाकारा सोनाक्षी सिन्हा ही अकीरा शर्मा हैं. शायद यह उनके करियर का सबसे घटिया अभिनय है. या यूं कहें कि सोनाक्षी सिन्हा ने इस फिल्म में बेमन से काम किया है, तो शायद ज्यादा सटीक बैठेगा.

यदि सोनाक्षी सिन्हा ने पूरी लगन से यह फिल्म की है तो सवाल उठता है कि क्या अभिनय के स्तर पर वह चुक गयीं? बतौर अभिनेता अनुराग कश्यप भी कुछ खास नहीं कर पाए. फिल्मकार ने कोंकण सेन शर्मा की प्रतिभा को जाया किया है.

फिल्म के अंदर ग्लैमर, रोमांस, हास्य यानी कि दर्शक को आकर्षित करने वाले सारे तत्व गायब हैं. एक्शन की भरमार है. मगर एक्शन दृष्यों में सोनाक्षी सिन्हा सुस्त व दबी हुई नजर आती हैं.

दो घंटे 19 मिनट की अवधि वाली ए आर मुरूगादास द्वारा निर्मित व निर्देशित फिल्म ‘अकीरा’ के संगीतकार विशाल शेखर व कलाकार सोनाक्षी सिन्हा, अनुराग कश्यप, कोंकणा सेन शर्मा, अमित साध,अतुल कुलकर्णी हैं.

परंपरा और इतिहास का अद्भुत संगम वाराणसी

वाराणसी पर्यटन के लिहाज से बहुत ही अच्छा शहर है. यहां आसपास ऐसे तमाम शहर हैं जहां पर्यटक घूम सकते हैं. नवंबर-दिसंबर माह में यहां घूमना सब से अच्छा होता है. यहां दीवाली के 15 दिन के बाद देव दीवाली मनाई जाती है. इसमें गंगा के घाटों को सजाया जाता है.

यह त्योहार पर्यटकों के लिए सब से प्रमुख आकर्षण होता है. इस में गंगा नदी पूरी तरह से दीपों जगमगा उठती है. त्योहार की रात हजारों की संख्या में लोग यहां आते हैं. लोग नावों पर बैठ कर गंगा की सैर करने और दीप दान करने जैसे अवसरों का लाभ लेते हैं. केवल गंगा घाट ही नहीं आसपास की इमारतों को भी दीयों से सजाया जाता है.

बनारसी सिल्क साडि़यों और कालीनों ने भी इस शहर को वैश्विक बाजार में पहचान दिलाई है. यहां घाटों पर सुबह कुछ देर समय बिताना मन और चित्त को शुद्ध करने का अनोखा अनुभव है.

सारनाथ

वाराणसी से सिर्फ 10 किलोमीटर दूर है सारनाथ, जो बौद्ध धर्मावलंबियों का एक बड़ा तीर्थ है. ऐसा विश्वास है कि बोधगया में ज्ञान प्राप्त करने के बाद बुद्ध ने पहला उपदेश यहीं सारनाथ में दिया था. इसे महाधर्म चक्र परिवर्तन के नाम से भी जाना जाता है. धमेकस्तूप का निर्माण यह संकेत है कि उस समय इस की क्या अहमियत रही होगी.

चौखंडी स्तूप वह जगह है जहां पहली बार सारनाथ आए बुद्ध की अपने पहले 5 शिष्यों से मुलाकात हुई थी. यह जगह धर्म राजिकास्तूप और मूलगंधकुटी विहार जैसी पुरातात्विक महत्त्व की संरचनाओं के लिहाज से भी खासी अहमियत रखती है. सम्राट अशोक ने 273-232 ईसा पूर्व यहां बौद्ध संघ के प्रतीकस्वरूप विशालकाय स्तंभ स्थापित किया था. इस के ऊपर स्थापित सिंह आज देश का राष्ट्रीय प्रतीक है.

विंध्याचल

विंध्यपर्वत शृंखला के बीच मिर्जापुर के पास गंगा के किनारे यह स्थान एक और तीर्थ है. विंध्यवासिनी की शक्ति पीठ लाखों लोगों को हर साल आकर्षित करती है. इस के आसपास अष्टभुजा और खोह मंदिर जैसे कई प्रमुख तीर्थस्थल हैं, जहां साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है. अप्रैल और अक्तूबर की नवरात्रि में तो यहां का आयोजन देखने वाला होता है.

सोनभद्र

यह एक प्राचीन स्थल है, जहां के शिवद्वार और रेणुकेश्वर मंदिर के आसपास महाभारत काल के प्रतीक और मूर्तियां देखने को मिलती हैं. विजयगढ़ महल इस इलाके के शक्तिशाली शासकों की गाथा बयान करता है.

यहां पुरातात्विक, धार्मिक और प्रकृति से जुड़ी नायाब चीजें देखने को मिलेंगी. गुफाओं की दीवारों पर उकेरे गए चित्र एक बड़ा आकर्षण हैं. प्रकृति से प्रेम करने वालों के लिए लखनिया और मुक्खाप्रपात आकर्षक स्थल हैं. यहां से कुछ ही दूरी पर है कैमूर वाइल्ड लाइफ सैंक्युअरी. यहां जंगली जानवरों और पक्षियों की कई प्रजातियां देखने को मिलती हैं.

चुनार

वाराणसी से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह जगह धर्म, इतिहास और प्रकृति का अद्भुत संगम है. गंगा के किनारे विंध्य शृंखला पर बसे जंगल में दिन में यादगार ट्रैकिंग की जा सकती है. चुनार का किला एक और दर्शनीय स्थल है, जिस के आगोश में समाए हैं लगभग 1000 साल पुराने विशाल पत्थरों से बने मंदिर. झिरना नाले पर बना प्रसिद्ध दुर्गाखोह मंदिर प्राकृतिक रौक शैल्टर का बेहतरीन नमूना है. इस की दीवारों पर दुर्लभ आकृतियां और चित्र उकेरे हुए हैं.

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