दीप जल उठे: प्रतिमा की सासु मां क्यों उसे अपनी बहु नहीं बेटी मानने लगी

दफ्तर से आतेआते रात के 8 बज गए थे. घर में घुसते ही प्रतिमा के बिगड़ते तेवर देख श्रवण भांप गया कि जरूर आज घर में कुछ हुआ है वरना मुसकरा कर स्वागत करने वाली का चेहरा उतरा न होता.  सारे दिन महल्ले में होने वाली गतिविधियों की रिपोर्ट जब तक मुझे सुना न देती उसे चैन नहीं मिलता था. जलपान के साथसाथ बतरस पान भी करना पड़ता था. अखबार पढ़े बिना पासपड़ोस  के सुखदुख के समाचार मिल जाते थे. शायद  देरी से आने के कारण ही प्रतिमा का मूड बिगड़ा हुआ है. प्रतिमा से माफी मांगते हुए बोला, ‘‘सौरी, मैं तुम्हें फोन नहीं कर पाया. महीने का अंतिम दिन होने के कारण बैंक में ज्यादा काम था.’’

‘‘तुम्हारी देरी का कारण मैं समझ सकती हूं, पर मैं इस कारण दुखी नहीं हूं,’’ प्रतिमा बोली.

‘‘फिर हमें भी तो बताओ इस चांद से मुखड़े पर चिंता की कालिमा क्यों?’’ श्रवण ने पूछा.

‘‘दोपहर को अमेरिका से बड़ी भाभी का फोन आया था कि कल माताजी हमारे पास पहुंच रही हैं,’’ प्रतिमा चिंतित होते हुए बोली.

‘‘इस में इतना उदास व चिंतित होने कि क्या बात है? उन का अपना घर है वे जब चाहें आ सकती हैं.’’ श्रवण हैरानी से बोला.

‘‘आप नहीं समझ रहे. अमेरिका में मांजी का मन नहीं लगा. अब वे हमारे ही साथ रहना चाहती हैं.’’ प्रतिमा ने कहा.

‘‘अरे मेरी चंद्रमुखी, अच्छा है न, घर में रौनक बढ़ेगी, बरतनों की उठापटक रहेगी, एकता कपूर के सीरियलों की चर्चा तुम मुझ से न कर के मां से कर सकोगी. सासबहू मिल कर महल्ले की चर्चाओं में बढ़चढ़ कर भाग लेना,’’ श्रवण चटखारे लेते हुए बोला.

‘‘तुम्हें मजाक सूझ रहा है और मेरी जान सूख रही है,’’ प्रतिमा बोली.

‘‘चिंता तो मुझे होनी चाहिए, तुम सासबहू के शीतयुद्ध में मुझे शहीद होना पड़ता है. मेरी स्थिति चक्की के 2 पाटों के बीच में पिसने वाली हो जाती है. न मां को कुछ कह सकता हूं, न तुम्हें.’’

कुछ सोचते हुए श्रवण फिर बोला, ‘‘मैं तुम्हें कुछ टिप्स देना चाहता हूं. यदि तुम उन्हें अपनाओगी तो तुम्हारी सारी परेशानियां एक झटके में उड़नछू हो जाएंगी.’’

‘‘यदि ऐसा है तो आप जो कहेंगे मैं करूंगी. मैं चाहती हूं मांजी खुश रहें. आप को याद है पिछली बार छोटी सी बात से मांजी नाराज हो गई थीं.’’

‘‘देखो प्रतिमा, जब तक पिताजी जीवित थे तब तक हमें उन की कोई चिंता नहीं  थी. जब से वे अकेली हो गई हैं उन का स्वभाव बदल गया है. उन में असुरक्षा की भावना ने घर कर लिया है. अब तुम ही बताओ, जिस घर में उन का एकछत्र राज था वो अब नहीं रहा. बेटों को तो बहुओं ने छीन लिया. जिस घर को तिनकातिनका जोड़ कर मां ने अपने हाथों से संवारा, उसे पिताजी के जाने के बाद बंद करना पड़ा.

‘‘उन्हें कभी अमेरिका तो कभी यहां हमारे पास आ कर रहना पड़ता है. वे खुद को बंधन में महसूस करती हैं. इसलिए हमें कुछ ऐसा करना चाहिए जिस में उन्हें अपनापन लगे. उन को हम से पैसा नहीं चाहिए. उन के लिए तो पिताजी की पैंशन ही बहुत है. उन्हें खुश रखने के लिए तुम्हें थोड़ी सी समझदारी दिखानी होगी, चाहे नाटकीयता से ही सही,’’ श्रवण प्रतिमा को समझाते हुए बोला.

‘‘आप जैसा कहेंगे मैं वैसा ही करने को तैयार हूं,’’ प्रतिमा ने आश्वासन दिया.

‘‘तो सुनो प्रतिमा, हमारे बुजुर्गों में एक ‘अहं’ नाम का प्राणी होता है. यदि किसी वजह से उसे चोट पहुंचती है, तो पारिवारिक वातावरण प्रदूषित हो जाता है यानी परिवार में तनाव अपना स्थान ले लेता है. इसलिए हमें ध्यान रखना होगा कि मां के अहं को चोट न लगे बस… फिर देखो…’’ श्रवण बोला.

‘‘इस का उपाय भी बता दीजिए आप,’’ प्रतिमा ने उत्सुकता से पूछा.

‘‘हां… हां… क्यों नहीं, सब से पहले तो जब मां आए तो सिर पर पल्लू रख कर चरणस्पर्श कर लेना. रात को सोते समय कुछ देर उन के पास बैठ कर हाथपांव दबा देना. सुबह उठ कर चरणस्पर्श के साथ प्रणाम कर देना,’’ श्रवण ने समझाया.

‘‘यदि मांजी इस तरह से खुश होती हैं, तो यह कोई कठिन काम नहीं है,’’ प्रतिमा ने कहा.

‘‘एक बात और, कोई भी काम करने से पहले मां से एक बार पूछ लेना. होगा तो वही जो मैं चाहूंगा. जो बात मनवानी हो उस बात के विपरीत कहना, क्योंकि घर के बुजुर्ग लोग अपना महत्त्व जताने के लिए अपनी बात मनवाना चाहते हैं. हर बात में ‘जी मांजी’ का मंत्र जपती रहना. फिर देखना मां की चहेती बहू बनते देर नहीं लगेगी,’’ श्रवण ने अपने तर्कों से प्रतिमा को समझाया.

‘‘आप देखना, इस बार मैं मां को शिकायत का कोई मौका नहीं दूंगी.’’

‘‘बस… बस… उन को ऐसा लगे जैसे घर में उन की ही चलती है. तुम मेरा इशारा समझ जाना. आखिर मां तो मेरी ही है. मैं जानता हूं उन्हें क्या चाहिए,’’ कहते हुए श्रवण सोने के लिए चला गया.

प्रतिमा ने सुबह जल्दी उठ कर मांजी के कमरे की अच्छी तरह सफाई करवा दी. साथ ही उन की जरूरत की सभी चीजें भी वहां रख दीं. हम दोनों समय पर एयरपोर्ट पहुंच गए. हमें देखते ही मांजी की आंखें खुशी से चमक उठीं. सिर ढक कर प्रतिमा ने मां के पैर छुए तो मां ने सिर पर हाथ रख कर आशीर्वाद दिया.

पोते को न देख कर मां ने पूछा, ‘‘अरे तुम मेरे गुड्डू को नहीं लाए?’’

‘‘मांजी वह सो रहा था.’’ प्रतिमा बोली.

‘‘बहू… आजकल बच्चों को नौकरों के भरोसे छोड़ने का समय नहीं है. आएदिन अखबारों में छपता रहता है,’’ मांजी ने समझाते हुए कहा.

‘‘जी मांजी, आगे से ध्यान रखूंगी,’’ प्रतिमा ने मांजी को आश्वासन दिया. रास्ते भर भैयाभाभी व बच्चों की बातें होती रहीं. घर पहुंच कर मां ने देखा जिस कमरे में उन का सामान रखा गया है उस में उन की जरूरत का सारा सामान कायदे से रखा था. 4 वर्षीय पोता गुड्डू दौड़ता हुआ आया और दादी के पांव छू कर गले लग गया. ‘‘मांजी, आप पहले फ्रैश हो लीजिए, तब तक मैं चाय बनाती हूं,’’ कहते हुए प्रतिमा किचन की ओर चली गई.

रात के खाने में सब्जी मां से पूछ कर बनाई गई. खाना खातेखाते श्रवण बोला, ‘‘प्रतिमा कल आलू के परांठे बनाना, पर मां से सीख लेना तुम बहुत मोटे बनाती हो,’’ प्रतिमा की आंखों में आंखें डाल कर श्रवण बोला.

‘‘ठीक है, मांजी से पूछ कर ही बनाऊंगी.’’ प्रतिमा बोली.

मांजी के कमरे की सफाई भी प्रतिमा कामवाली से न करवा कर खुद करती थी, क्योंकि पिछली बार कामवाली से कोई चीज छू गई थी, तो मांजी ने पूरा घर सिर पर उठा लिया था.

अगले दिन औफिस जाते समय श्रवण को एक फाइल न मिलने के कारण वह बारबार प्रतिमा को आवाज लगा रहा था. प्रतिमा थी कि सुन कर भी अनसुना कर मां के कमरे में काम करती रही. तभी मांजी बोलीं, ‘‘बहू तू जा, श्रवण क्या कह रहा सुन ले.’’

‘‘जी मांजी.’’

दोपहर के समय मांजी ने तेल मालिश के लिए शीशी खोली तो प्रतिमा ने शीशी हाथ में लेते हुए कहा, ‘‘लाओ मांजी मैं लगाती हूं.’’

‘‘बहू रहने दे. तुझे घर के और भी बहुत काम हैं, थक जाएगी.’’

‘‘नहीं मांजी, काम तो बाद में भी होते रहेंगे. तेल लगातेलगाते प्रतिमा बोली, ‘‘मांजी, आप अपने समय में कितनी सुंदर दिखती होंगी और आप के बाल तो और भी सुंदर दिखते होंगे, जो अब भी कितने सुंदर और मुलायम हैं.’’

‘‘अरे नहीं, ऐसी कोई बात नहीं, हां तुम्हारे बाबूजी जरूर कभीकभी छेड़ दिया करते थे. कहते थे कि यदि मैं तुम्हारे कालेज में होता तो तुम्हें भगा ले जाता.’’ बात करतेकरते उन के मुख की लालिमा बता रही थी जैसे वे अपने अतीत में पहुंच गई हैं.

प्रतिमा ने चुटकी लेते हुए मांजी को फिर छेड़ा, ‘‘मांजी गुड्डू के पापा बताते हैं कि आप नानाजी के घर भी कभीकभी ही जाती थीं, बाबूजी का मन आप के बिना लगता ही नहीं था. क्या ऐसा ही था मांजी?’’

‘‘चल हट… शरारती कहीं की… कैसी बातें करती है… देख गुड्डू स्कूल से आता होगा,’’ बनावटी गुस्सा दिखाते हुए मांजी नवयौवना की तरह शरमा गईं. शाम को प्रतिमा को सब्जी काटते देख मांजी बोलीं, ‘‘बहू तुम कुछ और काम कर लो, सब्जी मैं काट देती हूं.’’

मांजी रसोईघर में गईं तो प्रतिमा ने मनुहार करते हुए कहा, ‘‘मांजी, मुझे भरवां शिमलामिर्च की सब्जी बनानी नहीं आती, आप सिखा देंगी? ये कहते हैं, जो स्वाद मां के हाथ के बने खाने में है, वह तुम्हारे में नहीं.’’

‘‘हां… हां… क्यों नहीं, मुझे मसाले दे मैं बना देती हूं. धीरेधीरे रसोई की जिम्मेदारी मां ने अपने ऊपर ले ली थी. और तो और गुड्डू की मालिश करना, उसे नहलाना, उसे खिलानापिलाना सब मांजी ने संभाल लिया. अब प्रतिमा को गुड्डू को पढ़ाने के लिए बहुत समय मिलने लगा. इस तरह प्रतिमा के सिर से काम का भार कम हो गया था.’’

साथसाथ घर का वातावरण भी खुशनुमा रहने लगा. श्रवण को प्रतिमा के साथ कहीं घूमने जाना होता तो वह यही कहती कि मां से पूछ लो, मैं उन के बिना नहीं जाऊंगी. एक दिन पिक्चर देखने का मूड बना. औफिस से आते हुए श्रवण 2 पास ले आया. जब प्रतिमा को चलने के लिए कहा तो वह झट से ऊंचे स्वर में बोल पड़ी, ‘‘मांजी चलेंगी तो मैं चलूंगी अन्यथा नहीं.’’ वह जानती थी कि मां को पिक्चर देखने में कोई रुचि नहीं है. उन की तूतू, मैंमैं सुन कर मांजी बोलीं, ‘‘बहू, क्यों जिद कर रही हो? श्रवण का मन है तो चली जा. गुड्डू को मैं देख लूंगी.’’ मांजी ने शांत स्वर में कहा.

‘अंधा क्या चाहे दो आंखें’ वे दोनों पिक्चर देख कर वापस आए तो उन्हें खाना तैयार मिला. मांजी को पता था श्रवण को कटहल पसंद है, इसलिए फ्रिज से कटहल निकाल कर बना दिया. चपातियां बनाने के लिए प्रतिमा ने गैस जलाई तो मांजी बोलीं, ‘‘प्रतिमा तुम खाना लगा लो रोटियां मैं सेंकती हूं.’’

‘‘नहीं मांजी, आप थक गई होंगी, आप बैठिए, मैं गरमगरम रोटियां बना कर लाती हूं.’’ प्रतिमा बोली. ‘‘सभी एकसाथ बैठ कर खाएंगे, तुम बना लो प्रतिमा,’’ श्रवण बोला.

एकसाथ सभी को खाना खाते देख मांजी की आंखें नम हो गईं. श्रवण ने पूछा तो मां बोलीं, ‘‘आज तुम्हारे बाबूजी की याद आ गई. आज वे होते तो तुम सब को देख कर बहुत खुश होते.’’

‘‘मां मन दुखी मत करो,’’ श्रवण बोला.

प्रतिमा की ओर देख कर श्रवण बोला, ‘‘कटहल की सब्जी ऐसे बनती है. सच में मां… बहुत दिनों बाद इतनी स्वादिष्ठ सब्जी खाई है. मां से कुछ सीख लो प्रतिमा…’’

‘‘मांजी सच में सब्जी बहुत स्वादिष्ठ है… मुझे भी सिखाना…’’

‘‘बहू… खाना तो तुम भी स्वादिष्ठ बनाती हो.’’

‘‘नहीं मांजी, जो स्वाद आप के हाथ के बनाए खाने में है वह मेरे में कहां?’’ प्रतिमा बोली.

श्रवण को दीवाली पर बोनस के पैसे मिले तो देने के लिए उस ने प्रतिमा को आवाज लगाई. प्रतिमा ने आ कर कहा, ‘‘मांजी को ही दीजिए न…’’ श्रवण ने लिफाफा मां के हाथ में रख दिया. मांजी लिफाफे को उलटपलट कर देखते हुए रोमांचित हो उठीं. आज वे खुद को घर की बुजुर्ग व सम्मानित सदस्य अनुभव कर रही थीं. श्रवण व प्रतिमा जानते थे कि मां को पैसों से कुछ लेनादेना नहीं है. न ही उन की कोई विशेष जरूरतें थीं. बस उन्हें तो अपना मानसम्मान चाहिए था.

अब घर में कोई भी खर्चा होता या कहीं जाना होता तो प्रतिमा मां से जरूर पूछती. मांजी भी उसे कहीं घूमने जाने के लिए मना नहीं करतीं. अब हर समय मां के मुख से प्रतिमा की प्रशंसा के फूल ही झरते. दीवाली पर घर की सफाई करतेकरते प्रतिमा स्टूल से जैसे ही नीचे गिरी तो उस के पांव में मोच आ गई. मां ने उसे उठाया और पकड़ कर पलंग पर बैठा कर पांव में मरहम लगाया और गरम पट्टी बांध कर उसे आराम करने को कहा.

यह सब देख कर श्रवण बोला, ‘‘मां मैं ने तो सुना था बहू सेवा करती है सास की, पर यहां तो उलटी गंगा बह रही है.’’

‘‘चुप कर, ज्यादा बकबक मत कर, प्रतिमा मेरी बेटी जैसी है. क्या मैं इस का ध्यान नहीं रख सकती,’’ प्यार से डांटते हुए मां बोली.

‘‘मांजी, बेटी जैसी नहीं, बल्कि बेटी कहो. मैं आप की बेटी ही तो हूं.’’ प्रतिमा की बात सुनते ही मांजी ने उस के सिर पर हाथ रखा और बोलीं, ‘‘तुम सही कह रही हो बहू, तुम ने बेटी की कमी पूरी कर दी.’’

घर में होता वही जो श्रवण चाहता, पर एक बार मां की अनुमति जरूर ली जाती. बेटा चाहे कुछ भी कह दे, पर बहू की छोटी सी भूल भी सास को सहन नहीं होती. इस से सास को अपना अपमान लगता है. यह हमारी परंपरा सी बन चुकी है. जो धीरेधीरे खत्म भी हो रही है. मांजी को थोड़ा सा मानसम्मान देने के बदले में उसे अच्छी बहू का दर्जा व बेटी का स्नेह मिलेगा, इस की तो उस ने कल्पना ही नहीं कीथी. प्रतिमा के घर में हर समय प्यार का, खुशी का वातावरण रहने लगा. दीवाली नजदीक आ गई थी. मां व प्रतिमा ने मिल कर पकवान बनाए. लगता है इस बार की दीवाली एक विशेष दीवाली रहेगी, सोचतेसोचते श्रवण बिस्तर पर लेटा ही था कि अमेरिका से भैया का फोन आ गया. उन्होंने मां के स्वास्थ्य के बारे में पूछा और बताया कि इस बार मां उन के पास से नाराज हो कर गई हैं. तब से मन बहुत विचलित है.

यह तो हम सभी जानते हैं कि नंदिनी भाभी और मां के विचार कभी नहीं मिले, पर अमेरिका में भी उन का झगड़ा होगा, इस की तो कल्पना भी नहीं की थी. भैया ने बताया कि वे माफी मांग कर प्रायश्चित करना चाहते हैं अन्यथा हमेशा उन के मन में एक ज्वाला सी दहकती रहेगी. आगे उन्होंने जो बताया वह सुन कर तो मैं खुशी से उछल ही पड़ा. बस अब 2 दिन का इंतजार था, क्योंकि 2 दिन बाद दीवाली थी.

इस बार दीवाली पर प्रतिमा ने घर कुछ विशेष प्रकार से सजाया था. मुझे उत्साहित देख कर प्रतिमा ने पूछा, ‘‘क्या बात है, आप बहुत खुश नजर आ रहे हैं?’’

अपनी खुशी को छिपाते हुए मैं ने कहा, ‘‘तुम सासबहू का प्यार हमेशा ऐसे ही बना रहे बस… इसलिए खुश हूं.’’

‘‘नजर मत लगा देना हमारे प्यार को,’’ प्रतिमा खुश होते हुए बोली. दीवाली वाले दिन मां ने अपने बक्से की चाबी देते हुए कहा, ‘‘बहू लाल रंग का एक डब्बा है उसे ले आ.’’ प्रतिमा ने जी मांजी कह कर डब्बा ला कर दे दिया. मां ने डब्बा खोला और उस में से खानदानी हार निकाला.  हार प्रतिमा को देते हुए बोलीं, ‘‘लो बहू,

ये हमारा खानदानी हार है, इसे संभालो. दीवाली इसे पहन कर मनाओ, तुम्हारे पिताजी की यही इच्छा थी.’’  हार देते हुए मां की आंखें खुशी से नम हो गईं.

प्रतिमा ने हार ले कर माथे से लगाया और मां के पैर छू कर आशीर्वाद लिया. मुझे बारबार घड़ी की ओर देखते हुए प्रतिमा ने पूछा तो मैं ने टाल दिया. दीप जलाने की तैयारी हो रही थी तभी मां ने आवाज लगा कर कहा, ‘‘श्रवण जल्दी आओ, गुड्डू के साथ फुलझडि़यां भी तो चलानी हैं. मैं साढ़े सात बजने का इंतजार कर रहा था, तभी बाहर टैक्सी रुकने की आवाज आई. मैं समझ गया मेरे इंतजार की घडि़यां खत्म हो गईं.

मैं ने अनजान बनते हुए कहा, ‘‘चलो मां सैलिब्रेशन शुरू करें.’’

‘‘हां… हां… चलो, प्रतिमा… आवाज लगाते हुए कुरसी से उठने लगीं तो नंदिनी भाभी ने मां के चरणस्पर्श किए… आदत के अनुसार मां के मुख से आशीर्वाद की झड़ी लग गई, सिर पर हाथ रखे बोले ही जा रही थीं… खुश रहो, आनंद करो… आदिआदि.’’

भाभी जैसे ही पांव छू कर उठीं तो मां आश्चर्य से देखती रह गईं. आश्चर्य  के कारण पलक झपकाना ही भूल गईं. हैरानी से मां ने एक बार भैया की ओर एक बार मेरी ओर देखा. तभी भैया ने मां के पैर छुए तो खुश हो कर भाभी के साथसाथ मुझे व प्रतिमा को भी गले लगा लिया. मां ने भैयाभाभी की आंखों को पढ़ लिया था. पुन: आशीर्वचन देते हुए दीवाली की शुभकामनाएं दीं मां की आंखों में खुशी की चमक देख कर लग रहा था दीवाली के शुभ अवसर पर अन्य दीपों के साथ मां के हृदयरूपी दीप भी जल उठे. जिन की ज्योति ने सारे घर को जगमग कर दिया.

रेड लहंगे में हौट अवतार में दिखीं Jackky की दुल्हानियां, देखें फोटोज

बॉलीवुड एक्ट्रेस रकुलप्रीत सिंह इन दिनों काफी सुर्खियों में हैं. एक्ट्रेस जल्द ही शादी के बंधन में बनने वाली है. रकुलप्रीत फिल्ममेकर जैकी भागनानी के साथ शादी करने जा रही है. रकुलप्रीत सिंह और जैकी भागनानी बॉलीवुड के सबसे प्यार कपल में से एक है. इन दोनों को लव स्टोरी काफी लाइमलाइट में रही है. इनके रिलेशन को 3 साल हो गए है अब फाइनली यह कपल जल्दी शादी के बंधन में बंधने वाले है. रकुलप्रीत सिंह और जैकी भागनानी 21 फरवरी को गोवा में डेस्टिनेशन वेडिंग करेंगे. शादी से पहले रकुल ने सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा की है. रेड लहंगे में एक्ट्रेस हॉट नजर आ रही है.

लाल लहंगे में हौट नजर आई रकुलप्रीत सिंह

शादी की खबरों के बीच एक्ट्रेस रकुलप्रीत सिंह ने बीते दिन अपने इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर पोस्ट की है. इस फोटो में रकुल हॉट नजर आ रही है. बता दें कि, एक्ट्रेस 21 फरवरी को गोवा में फिल्ममेकर और प्रोड्यूसर जैकी भागनानी के साथ शादी करने जा रही है. इंस्टाग्राम पर पोस्ट की गई तस्वीरों में रकुल बला की खूबसूरत लग रही है. उन्होंने रेड कलर का लहंगा पहना हुआ है. रेड ब्लाउज और लहंगे में किसी ब्यूटी क्वीन से कम नहीं लग रहीं हैं. रकुल ने अपने इस लुक को गोल्डन झुमके, कंगन, जूतियों और रिंग्स के साथ एक्सेसराइज किया और फोटो में एक से बढ़कर एक पोज दिए है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Rakul Singh (@rakulpreet)

फैंस ने लगाई तारीफों की झड़ी

ग्लॉसी मेकअप के साथ ओपन हेयरस्टाइल लुक को मैच करते हुए रकुल ने सबको अपना दीवना बना दिया है. ऐसे में उनके फैंस तारीफों के पुल बांध दिए है. इन फोटो में रकुल अपनी पतली कमर और कर्वी फिगर को जमकर फ्लॉट करती नजर आ रही है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Rakul Singh (@rakulpreet)

मन का बोझ: भाग 1

 

कुम्हार का गधा अपनी पीठ पर बो?ा ढोता है. लेकिन पीठ से वह बो?ा उतरते ही गधा बो?ारहित हो जाता है क्योंकि वह वजनरूपी बो?ा था. मगर कुम्हार के मन का बो?ा उतरने का नाम ही नहीं लेता. लगता है वह तो उस के साथ उस की अंतिम सांस तक रहने वाला है. ऐसे ही हर आदमी अपने मन में कोई न कोई बो?ा लिए जीता है जो उस के साथ अंतकाल तक रहता है.

अभिषेक के पापा का चूडि़यों का छोटा सा बिजनैस था. उस का बड़ा भाई आशुतोष इस बिजनैस में उन का हाथ बंटाता था. अभिषेक पढ़ने में होनहार था, इसलिए यह तय हुआ कि उच्च शिक्षा के लिए उसे किसी बड़े शहर भेजा जाए.

इंटर करने के बाद अभिषेक का एडमिशन कुछ डोनेशन दे कर दक्षिण भारत के एक प्राइवेट इंजीनियरिंग कालेज में करा दिया गया. अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिषेक को उम्मीद थी कि उसे जल्द ही कोई अच्छी नौकरी मिल जाएगी. मगर उस का न तो कहीं प्लेसमैंट हुआ और न ही और कहीं जल्दी नौकरी लगी.

इस समय तक आशुतोष ने अपने पापा के बिजनैस पर पूरी पकड़ बना ली थी और वह यह बिलकुल नहीं चाहता था कि अभिषेक घर वापस आ कर उस के बिजनैस में कोई दखल दे, हिस्से की बात तो बहुत दूर. अभिषेक के पापा अनुभवी थे. वे बखूबी जानते थे घरघर मटियालेचूल्हे. इसलिए उन्होंने भाइयों को आपसी अनबन से बचाने के लिए एक रिश्तेदार की सिफारिश अभिषेक से कोलकाता की एक फर्म में नौकरी पर लगवा दिया. वह खुशीखुशी कोलकाता के लिए रवाना हो गया. पापा ने चैन की सांस ली. आशुतोष तो मन ही मन खुश हो रहा था कि चलो बला टली.

अब अभिषेक के पापा बड़े गर्व से सीना तान कर कहते, ‘‘भाई, मैं तो औरतों की कलाइयों में चूडि़यां पहनातेपहनाते थक गया. लेकिन देखो, अब इस मनिहार का बेटा कोलकाता में इंजीनियर हो गया इंजीनियर.’’

अभिषेक की नौकरी लगते ही उस के लिए रिश्ते आने लगे. आशुतोष भी चाह रहा था कि जल्दी से जल्दी अभिषेक की शादी हो और वह कोलकाता में ही सैटल हो जाए ताकि वह घर की तरफ न देखे. फिर तो घर की सारी संपत्ति पर अपना ही हक.

अभिषेक के पापा आशुतोष के मनोभाव को भलीभांति सम?ाते थे. वे जानते थे कि आशुतोष अपने सगे छोटे भाई को घर की संपत्ति में से फूटी कौड़ी भी नहीं देना चाहता. वे यह भी जानते थे कि आशुतोष के सामने अब उन की अपनी कोई अहमियत नहीं रह गई है. आशुतोष ने पूरा बिजनैस अपने हाथ में ले लिया है. उस ने दुकान को आधुनिक तरीके से डैकोरेट करवा लिया था. औरतों को चूडि़यां पहनाने के लिए 2 लड़कियां रख ली थीं. बस, उन की इतनी हैसियत रह गई थी कि समय बिताने के लिए दुकान पर जा कर बैठ जाते थे और आवश्यकता पड़ने पर औरतों की कलाइयां में अभी भी चूडि़यां पहना देते थे. कभी आशुतोष को किसी काम से बाहर जाना पड़ जाता था तो उस दिन उन्हें गल्ले पर बैठ जाने का मौका भी प्राप्त हो जाता था.

उन्हीं दिनों अभिषेक के परिवार वालों को अभिषेक के लिए एक रिश्ता पसंद आ गया. लड़की वाले रुड़की के रहने वाले थे. लड़की का नाम शीतल था. वह उच्च शिक्षा प्राप्त थी. शीतल ने रुड़की विश्वविद्यालय से भौतिक विज्ञान में एमएससी कर रखी थी. वर्तमान में वह रुड़की के ही एक डिगरी कालेज में पढ़ा रही थी और शाम को कोचिंग क्लासेज भी ले रही थी. उस की आमदनी बहुत अच्छी थी. अभिषेक और शीतल ने भी एकदूसरे को पसंद कर लिया. जल्द ही दोनों की शादी हो गई.

लेकिन अभी वे हनीमून मना कर लौटे ही थे जब फर्म के मैनेजर ने एक दिन अभिषेक को अपने कैबिन में बुलाया और कहा, ‘‘अभिषेक, बड़े अफसोस के साथ आप को बताना पड़ रहा है कि आप का काम कहीं से भी संतोषजनक नहीं है. या तो आप का कालेज आप को इंजीनियरिंग की बारीकियां सिखा नहीं पाया या फिर आप नहीं सीख पाए. नियमानुसार फर्म आप को 1 महीने पहले नोटिस दे रही है, उस के बाद आप की सेवाएं समाप्त.’’

यह सुन कर अभिषेक के पैरों तले की जमीन खिसक गई. वह अपनी कमजोरी जानता था. इंजीनियरिंग की डिगरी पा लेना अलग बात है और इंजीनियरिंग के काम में माहिर होना अलग. उसे पता था कई इंजीनियरिंग कालेज केवल पैसे कमाने की मशीन बन कर रह गए हैं. वे केवल इंजीनियरिंग की डिगरियां बांटने का धंधा भर कर रहे हैं. न तो उन के पास इंजीनियरिंग के स्टूडैंट्स को पढ़ाने के लिए ढंग के टीचर हैं और न ही प्रयोगशालाओं में ढंग के उपकरण. वे हर साल न जाने कितने स्टूडैंट्स का जीवन दांव पर लगा रहे हैं.

अभिषेक ने जीवन में संघर्ष करना तो सीखा ही नहीं था. उस ने कोई और विकल्प ढूंढ़ने के बजाय अपने मातापिता की शरण ली और उन्हें सचाई से अवगत कराया. शीतल से यह बात अभिषेक और उस के परिवार वालों ने पूरी तरह छिपा कर रखी. शीतल के लाए दहेज की एक बड़ी रकम आशुतोष ने शादी में खर्च के नाम पर हड़प ली थी. अभिषेक को यह बात पसंद तो नहीं आई थी लेकिन उस की यह हिम्मत भी नहीं थी कि वह इस मसले पर कुछ बोले. अब तो बिलकुल नहीं जब उस की नौकरी जाती रही. वह पूरी तरह से अपने परिवार पर निर्भर हो गया.

क्विकी: भाग 2- आखिर उसने क्या फैसला लिया

इन के होंठ कांपने लगे, चेहरे का रंग एकदम बदल गया. चाय के कप को मेज पर पटक कर पास ही रखा अपना ब्रीफकेस  झटके से खोला और कागजात उलटतेपलटते हुए बोले, ‘‘तो कान खोल कर सुन लो, बाबूजी से मेरी तुलना करने का तुम्हें कोई अधिकार नहीं है और जहां तक तरक्की का प्रश्न है मु  झे इस की जरा भी परवाह नहीं है क्योंकि आज के युग में योग्यता से अधिक चाटुकारिता को महत्त्व दिया जाता है, जो मेरे जैसे व्यक्ति के बूते की बात नहीं है. और हां, तुम मु  झ से फालतू की बकवास मत किया करो. हर समय लड़ने को तैयार रहती हो. अपनी कमाई की घौंस न दिया करो.’’

‘‘मैं क्यों लड़ने को तैयार रहती हूं?   झगड़ा तो आप ने शुरू किया था. क्यों आप ने मु  झे…’’

‘‘कह ही दिया तो कौन सा पहाड़ टूट पड़ा? जो पार्टनर अपनी खुशी से अपने पति को कुछ भी समय न दे सके उसे और क्या कहा जा सकता है? तुम्हीं बोलो, तुम ने 11 सालों में आज तक मेरे लिए क्या किया है?’’

‘‘आप के लिए मैं ने अपना मजहब छोड़ दिया, घर छोड़ा.’’

‘‘तो मैं ने भी तुम्हारे लिए अपना घरपरिवार तक छोड़ दिया,’’ और यह कहतेकहते इन का शरीर गुस्से से बुरी तरह कांपने लगा.

11 सालों में मैं ने इन के लिए क्या किया है, यह सुन कर मु  झे ऐसा लगा जैसे अचानक ही मु  झ से कोई कठिन प्रश्न पूछ लिया गया हो, जिस का सचमुच तत्काल मु  झ से ठोस उत्तर देते नहीं बना. आंखें बुरी तरह से भर आईं.

फिर भी हार न मानने की जिद में मैं बोल ही पड़ी, ‘‘ठीक है, न तो आज तक मैं ने आप के लिए कुछ किया है, न आगे करने का कोई इरादा है. आप को जहां करने वाले मिलें, वहीं चले जाइए. मु  झ से आप का   झगड़ा, नखरे व शौकीनमिजाजी बरदाश्त नहीं होती. अपनेआप को न जाने क्या सम  झते हैं? आज से आप को मु  झ से बात करने की कोई जरूरत नहीं है.’’

‘‘तो तुम भी कान खोल कर सुन लो,

आज से इस घर में या तो तुम ही रहोगी या मैं,’’ और   झटके से बैक पैक ले कर कमरे से बाहर निकल गए.

बैक पैक इतने   झटके और तेजी में उठाया गया था कि कुछ देर पहले किनारे पर रखे गए कपप्लेट नीचे गिर कर टूट गए.

मैं कपप्लेट के टूटे टुकड़े उठाने लगी तो मेरे थमे आंसू बह निकले. एक बार जी में आया कि अभी इस घर को छोड़ कर चली जाऊं. 5-6 दिन रोज में ही बच्चों के साथ घर संभालने में जनाब के सारे होश गुम हो जाएंगे, सारी हेकड़ी धरी रह जाएगी. लेकिन फौरन ही मु  झे अपनी वास्तविक स्थिति का खयाल हो आया कि इतनी बड़ी दुनिया में इस घर को छोड़ कर मेरा और कहीं ठौरठिकाना भी तो नहीं. न मायके में और न ही ससुराल में. अपने छोटे से डिसीजन के कारण दोनों जगह मेरी स्पेस ही मिट चुकी थी. फिर जैसे मैं अपनेआप से ही पूछने लगी कि क्या आज सुबह वाले प्रशांत 11 साल पहले वाले ही प्रशांत हैं जो मेरे आगेपीछे डोला करते थे?

हम दोनों लखनऊ में पढ़ा करते थे. प्रशांत बीएससी के अंतिम वर्ष में और मैं बीएससी के दूसरे वर्ष में. न मालूम कैसे 1-2 बार की मुलाकात प्यारमुहब्बत में बदल गई और हम प्यार में अंधे बने यह भी भुला बैठे कि मैं मुसलमान हूं और ये हिंदू. ये भावुक प्रवृत्ति के होने के कारण प्यार में कुछ ज्यादा ही डूबे रहते थे. इसीलिए बेचारे उस साल फेल भी हो गए. उन दिनों हिंदूमुसलिम विवाद उफान पर थे पर हम दोनों को परवाह नहीं थी. 1-2 बार कुछ धमकियां भी मिलीं.

फेल होते ही इन के घर वालों ने इन्हें लखनऊ से वापस बुला लिया. घर वालों को शायद इन के प्यार की भनक भी मिल गईर् थी और इसीलिए उन लोगों ने इन्हें बिहार के एक इंजीनियरिंग कालेज में दाखिल करवा दिया.

मैंने भी बीएससीकरने के बाद एमएससी में दाखिला ले लिया. हम दोनों की दोस्ती व्हाट्सऐप और फेसटाइम के जरीए बरकरार रही. एक बार प्रशांत कुछ दिनों के लिए मिलने लखनऊ आए. घूमतेफिरते गोमती तट पर न मालूम भावुकता के किन क्षणों में हम लोगों ने शादी करने का फैसला कर लिया और मैं ने चुपचाप 2 दोस्तों और एक वकील की हैल्प से कोर्ट मैरिज कर ली. किंतु अभी प्रशांत मु  झे साथ ले जाने की स्थिति में नहीं थे और मैं भी चाहती थी कि एमएससी की पढ़ाई पूरी कर लूं इसलिए लखनऊ में ही रही.

मेरे कट्टर धर्मावलंबी घर वालों को हमारी शादी की खबर कहां से मिल गई, नहीं मालूम. उन्होंने मेरी पढ़ाई छुड़वा कर जबरदस्ती घर में बैठा लिया.

कुछ दिन मैं ने बहुत हाथपैर मारे, मगर कुछ न कर सकी. मेरी स्थिति पिंजरे में बंद पक्षी की सी थी. मेरे लिए घर से भाग कर प्रशांत के पास जाना या उन से संपर्क स्थापित करना संभव नहीं था.

उधर मेरे विवाहित होते हुए भी किसी मुसलिम युवक से मेरी शादी करने के प्रयत्न शुरू हो गए. पर काफी कोशिशों के बाद भी मेरे घर वालों को इस में सफलता नहीं मिली.

एक दिन घर में खलबली मच उठी. प्रशांत कुछ दोस्तों के साथ मु  झे मांगने आ गए. मेरे घर वाले किसी भी कीमत पर मु  झे प्रशांत को सौंपने को तैयार न थे.

प्रशांत और उन के मित्र निराश लौट ही रहे थे कि न मालूम कौन सी ताकत मु  झे अपने घर वालों के सामने खींच ले गई और मैं बेधड़क बोल पड़ी, ‘‘हम लोग बाकायदा शादी कर चुके हैं. अब ये लेने आए हैं तो अच्छा है, आप मु  झे इन के साथ जाने दीजिए. इन का धर्म आप से भिन्न है तो क्या हुआ, अच्छेभले इंजीनियर हैं, मैं इन के साथ खुशीखुशी गुजरबसर कर लूंगी. मु  झे भी नौकरी मिल जाएगी.’’

मेरी बातों का मेरे घर वालों पर क्या असर पड़ा, यह जाने बगैर ही मैं जिस हालत में थी.उसी में बिना कुछ लिएदिए कमरे की दहलीज लांघ गई.

निकलतेनिकलते मामूजान के बस ये शब्द मेरे कानों से टकराए, ‘‘साबिरा, तेरे लिए हम सब मर चुके हैं, खबरदार जो कभी अपनी मनहूस शक्ल हमें दिखाने आई.’’

रास्ते में ही मु  झे यह भी पता चल गया था कि मु  झ से विवाह के कारण प्रशांत के घर वाले भी उन से बेहद नाराज हैं. लेकिन हम लोगों ने किसी की नाराजगी की परवा किए बिना अपना वैवाहिक जीवन प्रारंभ कर दिया.

इन 11 सालों में छोटेमोटे   झगड़े तो अवश्य हुए थे, पर इतना उग्र रूप आज पहली बार ही सामने आया था. इसी वजह से इन की आज की बात ने मेरे दिलोदिमाग में जैसे हथौड़े से चलाने शुरू कर दिए थे. यह ठीक है कि वैवाहिक जीवन के आरंभ में प्यार का जो तूफान दिखाई देता है वह समय के साथसाथ शांत हो जाता है, उस में एक प्रकार का ठहराव सा आ जाता है.

घरगृहस्थी की बढ़ती जिम्मेदारियों के कारण पत्नी पति की ओर पहले जैसा ध्यान नहीं दे पाती. कई बार अधिक थकहार जाने के कारण वह पति की इच्छाओं की भी पूर्ति नहीं कर पाती. पर इस से पुरुष यह क्यों सम  झने लगता है कि उस की पत्नी उस की उपेक्षा करने लगी है? वह क्यों नहीं उस की स्थिति को सम  झने का प्रयत्न करता?

मगर अब जब मैं ने अधिक सोचा तो मु  झे लगा कि गलती मेरी भी थी. मु  झे छोटी सी बात के लिए इतनी ज्यादा बहस नहीं करनी चाहिए थी.

मेरे गले में काफी खिचखिच रहती है, इस समस्या से कैसे छुटकारा मिलेगा

सवाल

मेरी उम्र 20 साल है. मेरे गले में अकसर खिचखिच की समस्या रहती है, जिस के कारण कई बार बोलतेबोलते अटक जाती हूं. ठंडी चीजों से दूर रहने के बाद भी यह समस्या दूर नहीं हो रही. बताएं क्या करूं?

जवाब

गले में खिचखिच की समस्या कई बार मौसम में बदलाव के कारण होती है और कई बार बैक्टीरिया और वायरस के कारण भी हो सकती है. यदि आप को अकसर यह समस्या बनी रहती है तो इस का मतलब है कि आप को विशेष ऐलर्जी है जिस का कारण बैक्टीरिया और वायरस हैं. इस स्थिति में आप को साफसफाई रखने की जरूरत है. खाना खाने से पहले हाथ जरूर धोएं और किसी का जूठा बिलकुल न खाएं. कब और किन चीजों को खाने के बाद यह समस्या होती है. यह जान कर उन्हें न खाएं. बाहर निकलने पर मास्क अवश्य पहनें. रोज कुनकुने पानी से कुल्ला करें. यदि समस्या गंभीर है तो डाक्टर से संपर्क कर इलाज करवाएं.

ये भी पढ़ें….

मेरी उम्र 28 साल है. सर्दीजुकाम मेरा पीछा नहीं छोड़ता. एक बार जुकाम हो गया तो वह जल्दी ठीक नहीं होता है और ठीक हो भी जाए तो कुछ दिनों बाद फिर हो जाता है. बताएं क्या करूं?

जवाब

मौसम में बदलाव के साथ सर्दीजुकाम होना आम समस्या है, लेकिन यह समस्या आए दिन परेशान करने लगे तो इसे नजर अंदाज न करें. यदि बारबार जुकाम हो रहा है तो इस के कई कारण हो सकते हैं जैसे तनाव, उचित ट्रीटमैंट न लेना, गलत खानपान, पूरापूरा दिन फील्ड में काम करना और साफसफाई न रखना. आप को डाक्टर से इलाज कराने की जरूरत है. इलाज के साथ तनाव भी कम करें. कम तनाव से इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता है, जिस से शरीर स्वस्थ रहता है. खानपान पर भी ध्यान दें. ठंडी चीजों से दूर रहें. रोज सुबहशाम कुनकुने पानी से दोनों नथुनों की सफाई करें. इस से बैक्टीरिया दूर रहेंगे और आप को जुकाम की समस्या से राहत मिलेगी.

समस्याओं के समाधान ऐल्प्स ब्यूटी क्लीनिक की फाउंडर, डाइरैक्टर डा. भारती तनेजा द्वारा      

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभा, ई-8, रानी झांसी मार्ग, नई दिल्ली-110055.

स्रूस्, व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.      

क्या दिल में भी होता है शार्ट सर्किट

दिल में जोरो से धक धक होने लगे तो खुद को धक धक गर्ल या बॉय समझने की भूल मत कर बैठना. संभव है कि आपके दिल में करंट का ओवरफ्लो हो रहा हो. यानि शार्ट सर्किट.  क्या आप जानते हैं  कि  हमारे दिल में भी शार्ट सर्किट होता है. अगर नहीं तो हम आज आपको दिल से जुडी ऐसी  बीमारी के बारे में बताने जा रहे हैं. जिसे मेडिकल टर्म में पीएसवीटी या पैरोसाइमल सुपर वेंट्रिकुलर टेकिकार्डियो कहते हैं.

जाने क्या है पीएसवीटी

नार्मल व्यक्ति के  दिल की  धड़कन 72 -100 प्रति मिनट होती है लेकिन जब दिल में शार्ट सर्किट होता है तो  पीड़ित कि धड़कन 180 -250  प्रति मिनट  तक पहुंच जाती है. जब दिल में  करेंट ओवरफ्लो होता है तो धड़कन तिगुनी बढ़ जाती है.  यह दिल कि गड़बडी के कारण होता है. हमारे दिल में चार चेम्बर्स होते है व दिल में कई नसे होती हैं. इनमे कुछ नसे ऐसी भी होती हैं जिनके ऊपर कवरिंग नहीं होती. जब ऐसी दो नसे आपस में मिलती हैं तो शार्ट सर्किट हो जाता है.

लक्षण

धड़कन का  तेज होना.

शरीर पीला व ठंडा होन.

सांस तेज व एवं बेहोश होना.

असामान्य ब्लड प्रेशर की समस्या होना.

 इलाज

इलेक्ट्रो फिजियोलोजिकल स्टडी के जरिए  शार्टसर्किट वाले प्वाइंट को पकड़ा जाता है।जिसके लिए  पैर के रास्ते से तीन तार दिल तक पहुंचाए जाते है. इसके बाद दिल के अंदर हुए शॉर्ट सर्किट का पता लगाया जाता है। पता चलने पर फिर चौथा तार दिल तक पहुंचाया जाता है और दिल में शाट सर्किट वाले इन तारों पर करीब 350 किलोहर्ट्ज की तरंग छोड़कर इसे फ्यूज कर दिया जाता  है. लेकिन कई बार वो नसे  जो  आपस में मिलकर करंट का ओवरफ्लो करती है यदि वो दिल की दीवारों  को बिलकुल छू रही होती है तो उन्हें फ्यूज करने का रिस्क होता है। ऐसे में मरीज़ को पेसमेकर लगाने की जरूरत भी पड़ सकती है इस िस्थति का पता इलेक्ट्रो फिजियोलाजी स्टडी  करते समय ही चल पाता  है.

कारण

दिल में छेद, मानसिक तनाव व चाय, एल्कोहल व काफी का  ज्यादा सेवन.

जंक फूड का  अधिक सेवन.

खांसी, जुकाम समेत तमाम रोगों की दवाएं धड़कन खराब करती हैं.

हीमोग्लोबिन कम होना.

अनुवांशिक होना.

 बचाव

रक्त का संचार ठीक रखें इसलिए नियमित रूप से व्यायाम करें.

हाई कोलेस्ट्रॉल वाली चीजों से करें परहेज.

तनाव को रखें खुद से दूर .

लापरवाही से बचे

यह समस्या बार बार हो रही है तो इससे दिल कि मासपेशियां कमजोर हो जाती हैं व  दिल फैलने लगता है. जिससे करंट नए रास्तों के जरिए फ्लो होकर धड़कन तेज कर देता है. ऐसे में जान जाने का खतरा होता है. अधिकतर दिल से संबंधित यह समस्या महिलाओं  में ज्यादा देखी जाती है.

विशेषज्ञ – नारायणा हॉस्पिटल ,गुरुग्राम

डॉ विवेक चतुर्वेदी  ,सीनियर कंसलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट

कपड़ो के हिसाब से चयन करें फुटवियर

शादी हो या फिर कोई भी पार्टी महिलाएं ट्रेडिशनल आउटफिट ही पहनना पसंद करती हैं. क्योंकि महिलाओं को पास ट्रेडिशनल ड्रेस में बहुत सारे ऑप्सन मिल जाते है. जैसे साड़ी, गाउन, सूट, प्लाजो-सूट आदि. महिलाएं अपनी कपड़े तो आराम से चुन लेती हैं, लेकिन उन्हें अपने कपड़े के हिसाब से मैचिंग फुटवियर चुनने में परेशानी होती है, जिसके लिए महिलाएं कई सारे फुटवियर खरीद लेती है.

अगर आपको भी अपने कपड़ों के साथ मैचिंग फुटवियर सेलेक्ट करने में परेशानी होती है, तो अब आपको ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है. हम आपको अपने लेख से कुछ ऐसे फुटवियर के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जिन्हें आप आसानी से हर कपड़ो के साथ पहन सकती हैं.

गुजराती चप्पल

अगर आप सूट ज्यादा पहनती हैं, तो आप गुजराती सैंडल को अपनी फुटवियर की लिस्ट में शामिल कर सकती हैं. क्योंकि गुजराती सैंडल न सिर्फ दिखने में अच्छी लगती हैं बल्कि आपको क्लासी लुक भी देने का काम करती हैं. हालांकि, गुजराती सैंडल का फैशन काफी पुराना है, पर पिछले कुछ सालों से महिलाओं ने गुजराती सैंडल सूट के साथ वापस से पेयर करना शुरू कर दिया है, जो अब फैशन ट्रेंड का हिस्सा बन गया हैं.

लेडीज सैंडल

अगर आप कुर्ता या फिर जींस के साथ कुछ ट्रेंडी टॉप वियर कर रही हैं, तो आप इसके साथ लेडीज सैंडल पहन सकती हैं. क्योंकि सैंडल हर इंडियन ड्रेस पर काफी अच्छी लगती हैं. आपको बाजार में इस तरह के कई तरह के फुटवियर आसानी से मिल जाएंगे, जिसे आप अपनी पसंद या फिर आउटफिट्स के मैचिंग के हिसाब से खरीद सकती हैं. लेकिन आप सैंडल का कलर ऐसा सेलेक्ट करें जो आपको हर ड्रेस पर एकदम परफेक्ट बैठे

शिमरी सैंडल

आप फ्रॉक या फिर गाउन के साथ शिमरी सैंडल वियर कर सकती हैं. क्योंकि शिमरी सैंडल को आप न सिर्फ हैवी गाउन पर वियर कर सकती हैं बल्कि आप सिंपल आउटफिट्स के साथ भी इसे वियर कर सकती हैं. लेकिन अगर आपके आउटफिट एक ही कलर के हैं, तो आप उसी आउटफिट के कलर के सैंडल खरीद सकती हैं.

पेंसिल हिल्स

अगर आपका कद थोड़ा छोटा है तो आप ट्रेडिशनल आउटफिट के साथ पेंसिल हील्स पहन सकती हैं. क्योंकि पेंसिल हील्स में न सिर्फ आप खूबसूरत लगेंगी बल्कि ये आपकी ड्रेस में चार चांद लगाने का भी काम करेंगी. क्योंकि हाई हील्स आपके लुक को और आकर्षक बनाती हैं. इसलिए अगर आप सूट, लहंगा या फिर साड़ी पहन रही हैं, तो आप पेंसिल हील्स पहन सकती हैं यकीनन आप बहुत अच्छी लगेंगी.

Winter Special: बच्चों के लिए बनाएं मूंग दाल के टेस्टी पिज्जा और बर्गर

पिज़्ज़ा बर्गर जैसे फ़ास्ट फ़ूड आज बच्चे बड़ों सभी का फेवरिट फ़ूड है. मैकडोनाल्ड, पिज़्ज़ा हट जैसे कई बड़े बड़े ब्रांड तो केवल बर्गर पिज़्ज़ा के लिए ही प्रसिद्ध हैं. निस्संदेह ये आज अधिकांश नई पीढ़ी के फेवरिट हैं परन्तु इनके बेस को बनाने में प्रयोग किया जाने वाला मैदा और प्रिजरवेटिव हमारे पाचनतंत्र के लिए अत्यंत हानिकारक होता है क्योंकि फायबर न होने के कारण मैदा को पचाने के लिए हमारे पाचनतंत्र को बहुत अधिक श्रम करना पड़ता है. आज हम आपको घर पर ही बिना मैदा के मूंग दाल से ही पिज़्ज़ा बर्गर बनाना बता रहे हैं जिसे आप बहुत आसानी से बना सकतीं हैं जो बहुत सेहतमंद भी है और स्वादिष्ट भी. तो आइए देखते हैं कि इन्हें कैसे बनाया जाता है.

सामग्री (बेस के लिए)

– धुली मूंग दाल 2 कप
– खट्टा दही 1.5 कप
– नमक 1 टीस्पून
– फ्लैक्स सीड्स 1/4 टीस्पून
– ईनो फ्रूट सॉल्ट 1 सैशे
– तेल 1/4 टीस्पून

विधि

मूंग को दही के साथ मिक्सी में पीस लें, नमक और फ्रूट साल्ट मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें. अब इसमें नमक, फ्लैक्स सीड्स और ईनो मिलाकर फेंट लें. अब 4 कटोरियों को तेल से ग्रीस कर लें और इनमें तैयार मूंग का मिश्रण डालें ध्यान रखें कि कटोरी को 3/4 ही भरें ताकि मिश्रण को फूलने की जगह रहे. इसे भाप में 15 मिनट तेज आंच पर पकाकर ठंडा होने पर कटोरी से निकाल लें.

2-वेज बर्गर

– कितने लोगों के लिए 2 बनने में लगने वाला समय 20 मिनट
– मील टाइप वेज
– सामग्री (बर्गर के लिए)
– तैयार मूंग की कटोरी 2
– चीज स्लाइस 4
– प्याज स्लाइस 4
– टमाटर स्लाइस 4
– बारीक कटा पत्तागोभी 1/4 कप
– नमक 1/4 टीस्पून
– काली मिर्च 1 चुटकी
– बटर 1/4 टीस्पून
– मेयोनीज 1 टेबलस्पून
– टोमेटो सॉस 1 टीस्पून

सामग्री (टिक्की के लिए)

– उबले आलू 2
– उबले मटर 1 टेबलस्पून
– किसी गाजर 1 टेबलस्पून
– बारीक कटी हरी मिर्च 2
– बारीक कटा प्याज 1
– कटा लहसुन 4 कली
– किसा अदरक 1/2 टीस्पून
– नमक स्वादानुसार
– लाल मिर्च पाउडर 1/8 टीस्पून
– अमचूर पाउडर 1/4 टीस्पून
– कश्मीरी लाल मिर्च 1/4 टीस्पून
– ब्रेड क्रम्ब्स 1 कप
– कॉर्नफ्लोर 1 टेबलस्पून
– तलने के लिए तेल

विधि

टिक्की बनाने के लिए तेल, ब्रेड क्रम्ब्स और कॉर्नफ्लोर को छोड़कर समस्त सामग्री को एक बाउल में अच्छी तरह मिक्स कर लें. तैयार मिश्रण से 2 बड़ी बड़ी टिक्की बनाऐं. कॉर्नफ्लोर को 1 टीस्पून पानी में घोल लें और टिक्की को इस घोल में डालकर ब्रेड क्रम्ब्स में रोल कर लें. अब इन्हें एक पैन में मीडियम आंच पर शैलो फ़्राय कर लें.

पत्तागोभी, प्याज और टमाटर की नमक और काली मिर्च से सीजनिंग कर लें. बर्गर बनाने के लिए तैयार मूंग की कटोरी को बीच से 2 भागों में काट कर एक पैन में बटर लगाकर सुनहरा होने तक सेक लें. अब मेयोनीज में टोमेटो सॉस को अच्छी तरह मिलाएं और सेंकें हुए मूंग के एक स्लाइस पर एक तरफ लगाकर तैयार टिक्की रखें, फिर टमाटर, प्याज, पत्तागोभी का सलाद रखकर चीज स्लाइस रखें और दूसरे मूंग के स्लाइस से कवर कर दें. हैल्दी बर्गर तैयार है आप इसे 30 सेकंड माइक्रोवेब में रखकर सर्व करें.

3-कैप्सिकम पिज्जा

– कितने लोगों के लिए 2
– बनने में लगने वाला समय 10 मिनट
– मील टाइम वेज

सामग्री

– कटोरी 1
– चौकोर कटीलाल, पीली हरी शिमला मिर्च 1/2 कप
– पिज़्ज़ा सॉस 1 टीस्पून
– उबले कॉर्न के दाने 8-10
– ऑलिव्स 4-5
– चिली फ्लैक्स 1 चुटकी
– ऑरिगेनो 1 चुटकी
– चीज क्यूब्स 2

विधि

इडली को बीच से 2 भागों में काट लें. इसे चकले पर रखकर बेलन से हल्का सा बेल दें ताकि इसकी क्रस्ट पतली हो जाये. अब इस पर पिज्जा सॉस लगाकर चीज किस दें. चीज के ऊपर शिमला मिर्च, ऑलिव्स और कॉर्न के दाने अच्छी तरह फैला दें. ऊपर से चिली फ्लैक्स और ऑरिगेनो बुरककर चिकनाई लगे नॉनस्टिक पैन में ढककर धीमी आंच पर चीज के मेल्ट होने तक पकाकर सर्व करें.

 प्रमोशन: भाग 3- क्या बॉस ने सीमा का प्रमोशन किया?

शाम को घर से बाहर गए सदस्य 1-1 कर लौटने लगे. रमाकांत भी बैंक से एक मित्र के घर चले जाने के कारण शाम को ही लौटे.

सीमा से कोई भी सीधे मुंह पेश नहीं आया. उस की बात का कोईर् जवाब ठीक से नहीं दे रहा था. परेशान हो कर सीमा अपने बैडरूम में कैद हो गई.

सीमा के लिए रात का खाना तो उस की ननद व सास ने बना दिया, पर खाने का बुलावा देने उसे कोई नहीं आया. पूरे घर का माहौल मातमी हो रहा था. हरेक से डांट खा कर रोंआसा रोहित भी उस की बगल में आ लेटा.

सीमा का खाना थाली में लगा कर जब राजीव शयनकक्ष में आया तब तक रोहित सो चुका था.

‘‘मेरी तबीयत ठीक नहीं है,’’ उदास सीमा ने ?ाठा बहाना बना कर खाना खाने से इनकार किया तो राजीव फौरन फट पड़ा.

‘‘मेरी परेशानियों को बेकार का ड्रामा कर के बढ़ाओ मत,’’ दबे क्रोध के कारण राजीव की आवाज कांप उठी, ‘‘तुम्हारी नासम?ा के कारण उधर घर वाले मु?ा से नाराज हैं और इधर तुम मु?ो परेशान करने पर तुली हुई हो. अच्छा होता अगर मैं शादी के बाद तुम्हें नौकरी करने की इजाजत ही नहीं देता.’’

‘‘मैं ने इजाजत ले कर नहीं बल्कि आप और आप के सब घर वालों के दबाव में आ कर नौकरी करी थी. मु?ो कोई शौक नहीं था घर से बाहर निकल कर परेशान होने का,’’ सीमा का स्वर ऊंचा हो गया.

‘‘मेरे घर वालों ने आज तक हर सुखसुविधा का खयाल रखा है. गृहस्थी के सभी ?ां?ाटों से तुम नौकरीपेशा होने के कारण ही बची रही हो.’’

‘‘मैं लखपति नहीं बन गई हूं नौकरी कर के. अपने क्व4 हजार के व्यक्तिगत खर्चे को छोड़ कर सारी कमाई हर महीने मैं ने आप के पिता के हाथों में रखी है.’’

‘‘अरे, उन की जिम्मेदारियों को पूरा करने

में हम दोनों हाथ नहीं बंटाएंगे, तो कौन करेगा

यह काम?’’

‘‘लेकिन उन की जिम्मेदारियों को पूरा करने की खातिर मैं अकेलेपन, दुख और अशांति का शिकार बनने को तैयार नहीं हूं.’’

‘‘तुम से कुछ सालों के लिए सम?ादारी भरा व्यवहार करने की मैं उम्मीद भी नहीं रखता हूं अब. बस, मेरे लिए अपने स्वार्थी व्यवहार के कारण इस घर में रहना कठिन मत बनाओ.’’

‘‘मु?ो स्वार्थी कहना उलटा चोर कोतवाल को डांटने जैसा है.’’

‘‘अच्छा बाबा, हम सब चोर हैं और तुम कोतवाल,’’ राजीव ने नाटकीय अंदाज में उस के सामने जोर से हाथ जोड़े, ‘‘अब चुपचाप खाना खाओ और मेरी जान बख्शो.’’

राजीव नाराज नजर आता बाहर घूमने चला गया. सीमा 2-4 कौर से ज्यादा गले से नीचे नहीं उतार सकी. घर के किसी सदस्य के सामने पड़ने से बचने के लिए वह बचा खाना व बरतन रसोई में रखने भी नहीं गई.

राजीव ने लौट कर अपनी नाराजगी भरी खामोशी कायम रखी. दोनों आंखें मूंदे देर तक  बेचैनी से करवटें बदलते रहे.

 

रविवार का दिन शनिवार से भी बदतर गुजरा. रमाकांत ने सुबह ही सुबह

छोटे बेटे संजीव को डांटते हुए घर में हंगामा खड़ा कर दिया.

‘‘नामाकूल. लफंगे,’’ रमाकांत छोटे बेटे

पर बरसे, ‘‘अगर तू पढ़लिख कर आज अच्छी नौकरी कर रहा होता, तो मु?ो किसी के एहसान की जरूरत नहीं रहती. सिर्फ क्व14 हजार कमा

कर तू मोटरसाइकिल और कार के सपने कैसे देखता है, गधे? तू तो जिंदगीभर को दुनिया

वालों की ठोकरें खाने को तैयार होगा.’’

‘‘बड़े भैया और भाभी का गुस्सा मु?ा पर निकालते हुए मु?ो गालियां सुनाने की आप को कोई जरूरत नहीं है,’’ संजीव बुरी तरह बौखला गया, ‘‘मु?ो किसी से कुछ नहीं चाहिए. मैं अपनी जरूरतें और शौक खुद पूरे कर सकता हूं.’’

‘‘वह तो कोई भी कर सकता है पर तेरी बहन के कोटा के कोर्स और उस की शादी का क्या होगा? मैं अपना सबकुछ तुम दोनों पर खर्च कर दूंगा, तो हम बूढ़ेबुढि़या की आगे जरूर दुर्गति होगी. इस स्वार्थी संसार में किसी से कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए.’’

‘‘यह डायलौग मु?ो नहीं, भैयाभाभी को सुनाओ.’’

‘‘ज्यादा बोलेगा तो जबान खींच लूंगा,’’ रमाकांत चीख पड़े.

?ागड़ा बढ़ता देख सुचित्रा बीच में बोली, तो रमाकांत उस के पीछे पड़ गए. कुछ देर बाद राजीव और सविता को भी उन्होंने लपेट लिया और खूब कड़वी चुभती बातें सभी को सुनाईं.

सीमा अपने कमरे से बाहर ही नहीं आई. उस से मिलने भी कोई नहीं अंदर आया. रोहित भी सहमासहमा सा अपनी मां के आसपास

बना रहा.

उस रात भी राजीव और सीमा 2 अजनबियों की तरह अगलबगल सोए. एकदूसरे के मनोभावों को न सम?ाने के घाव की टीस ने उन्हें देर रात तक जगाए रखा.

अगले दिन सोमवार की सुबह सीमा औफिस जाने की तैयारी करने लगी. उस दिन सविता उसे नियत समय पर बैड टी दे गई. उसे नाश्ता व लंच बौक्स भी हमेशा की तरह तैयार मिला. उस दिन बस यही अंतर था कि कोई भी उस के साथ मुसकराते हुए नहीं बोल रहा था. एक खिंचाव, एक शिकायत वह सब के हावभावों से साफ महसूस कर रही थी.

औफिस पहुंचने के कुछ देर बाद सीमा को उस के बौस जतिन ने अपने कक्ष में बुलवा लिया. प्रमोशन के बारे में ‘हां’ या ‘न’ कहने की घड़ी आ चुकी थी.

‘‘तुम्हारा सुस्त चेहरा देख कर ही मैं ने तुम्हारे निर्णय को जान लिया है. सीमा लखनऊ जाना तुम्हारे लिए कठिन होगा, मु?ो मालूम था,’’ जतिन ने सहानुभूति भरे स्वर में वार्त्तालाप आरंभ किया.

‘‘सर, मैं लखनऊ जाऊंगी,’’ सीमा ने ये शब्द कठिनाई से ही अपने गले से बाहर निकाले.

‘‘अरे, मैं तो सोच रहा था कि तुम प्रमोशन लेने से इनकार कर दोगी,’’ जतिन हैरान हो उठे.

‘‘मेरी प्रमोशन के साथसाथ मेरे पति और ससुराल वालों की भी प्रमोशन हुई है. उन सब की प्रमोशन को ‘न’ कहना मेरे लिए संभव नहीं था.’’

‘‘मैं कुछ सम?ा नहीं सीमा?’’ जतिन उल?ान का शिकार बन गए.

 

‘‘सर, प्रमोशन से मेरी पगार बढे़गी और इसी कारण उन सब की जरूरतें,

इच्छाएं और मांगें भी बढ़ कर फैल गईं. मेरे लिए प्रमोशन को न कहना संभव नहीं रहा.’’

‘‘अपने छोटे बच्चे को छोड़ कर लखनऊ

में अकेली कैसे रहोगी सीमा?’’ जतिन चिंतित नजर आए.

‘‘सर, सब के लिए मैं नोट छापने वाली मशीन हूं. मेरी अच्छी तरह से देखभाल करने की पूरी योजना उन सब ने तैयार कर रखी है. मशीन को कम काम करने या बंद होने की सुविधा नहीं होती. उस के सुखदुख को महसूस करने की शक्ति को कोई नहीं पहचानता… कोई महत्त्व नहीं देता,’’ बोलते हुए सीमा का गला भर आया.

‘‘वक्त बदल रहा है और अब शायद औरतों को पुरुषों के बराबर कष्ट ?ोलने की ताकत भी अपने अंदर पैदा करनी होगी. बैस्ट औफ लक, माई डियर. प्रमोशन स्वीकार करने के लिए मेरी शुभकामनाएं.’’

जतिन को नकली मुसकान के साथ धन्यवाद दे कर सीमा उन के कक्ष से बाहर आ गई. कैसी भी खुशी महसूस करने के बजाय उस का दिल इस वक्त जोरजोर से रोने को कर रहा था.

First Date के लिए बेहद खास हैं ये 7 ब्‍यूटी टिप्‍स

आप अपने दोस्त की पार्टी में किसी विशेष लड़के से मिलती हैं और वह आपको अपने साथ डिनर पर जाने के लिए आमंत्रित करता है. आप बहुत अधिक उत्साहित हो जाती हैं क्योंकि आप अपना पहला प्रभाव बहुत अच्छा बनाना चाहती हैं. तो चिंता न करें, यदि आप कुछ निश्चित उपायों को अपनाएँ तो आप जिस लड़के को पसंद करती हैं उसे पहली डेट पर रिझाना कोई कठिन काम नहीं है. विशेष रूप से आपको अपने रूप रंग पर ध्यान देना होगा.

यद्यपि यह बात सच है कि कोई भी पुरुष आपको आपके व्यक्तित्व और रूचि के कारण पसंद करता है न कि आपके रूप रंग के कारण. परन्तु यह भी सच है कि हम अपने रूप रंग के कारण पहली छवि को प्रभावकारी बना सकते हैं. कई बार महिलायें पहली डेट पर जाने से पहले थोड़ी नर्वस (बैचैन) हो जाती हैं और उन्हें समझ में नहीं आता कि किस प्रकार के कपड़े पहने जाएँ या किस तरह का मेकअप किया जाए.

पहली डेट बहुत महत्वपूर्ण अवसर होता है क्योंकि इसके बाद ही बात आगे बढ़ सकती है जो कि आप हमेशा से अपने साथी में चाहते थे. तो आपकी पहली डेट सफल बनाने के लिए कुछ ब्यूटी टिप्स.

1. सादा मेकअप करें पहली डेट पर बहुत अधिक मेकअप न करें या बालों को बहुत अधिक स्टाइलिश न बनायें. बल्कि सादा परन्तु सेक्सी लुक अधिक प्रभाव डालेगा.

2. चेहरे पर कोई प्रयोग न करें डेट से एक दिन पहले फेशियल न करवाएं क्योंकि कभी कभी फेशियल के कारण चेहरे पर मुंहासें या रैशेस आ जाते हैं. और आप नहीं चाहते ऐसा हो, हैं न?

3. विटामिन ई का उपयोग करें आप डेट से एक रात पहले विटामिन ई के तेल से चेहरे पर मसाज करें जिससे आपकी त्वचा नरम और चमकदार हो जाए.

4. अपने नाखूनों का ध्यान रखें गंदे नाखून बहुत ही अनाकर्षक दिखते हैं तो ध्यान रहे कि डेट पर जाने से पहले आप मैनीक्योर और पैडीक्योर करवाएं या आप घर पर ही अपने हाथ और पैर के नाखूनों को संवार सकती हैं.

5. बहुत तीव्र गंध वाली परफ्यूम का उपयोग न करें ऐसी परफ्यूम लगायें जिसकी सुगंध हल्की, मीठी और तरोताज़ा कर देने वाली हो तथा इसकी सीमित मात्रा का ही उपयोग करें.

6. बालों का सेक्सी स्टाइल बनायें ब्यूटी एक्सपर्ट्स के अनुसार लूज कर्ल्स, बीची वेव्स आदि हेयर स्टाइल्स पहली डेट के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं. अपनी हेयर स्टाइल सादी परन्तु सेक्सी रखें.

7. होंठो की देखभाल ध्यान रहे कि डेट से एक दिन पहले अपने होंठों को एक्स्फोलियेट करके अच्छे से मॉस्चराइज करें. हलके रंग का लिप कलर लगायें तथा लिप ग्लॉस की सही मात्रा लगायें.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें