मेरे गले में काफी खिचखिच रहती है, इस समस्या से कैसे छुटकारा मिलेगा

सवाल

मेरी उम्र 20 साल है. मेरे गले में अकसर खिचखिच की समस्या रहती है, जिस के कारण कई बार बोलतेबोलते अटक जाती हूं. ठंडी चीजों से दूर रहने के बाद भी यह समस्या दूर नहीं हो रही. बताएं क्या करूं?

जवाब

गले में खिचखिच की समस्या कई बार मौसम में बदलाव के कारण होती है और कई बार बैक्टीरिया और वायरस के कारण भी हो सकती है. यदि आप को अकसर यह समस्या बनी रहती है तो इस का मतलब है कि आप को विशेष ऐलर्जी है जिस का कारण बैक्टीरिया और वायरस हैं. इस स्थिति में आप को साफसफाई रखने की जरूरत है. खाना खाने से पहले हाथ जरूर धोएं और किसी का जूठा बिलकुल न खाएं. कब और किन चीजों को खाने के बाद यह समस्या होती है. यह जान कर उन्हें न खाएं. बाहर निकलने पर मास्क अवश्य पहनें. रोज कुनकुने पानी से कुल्ला करें. यदि समस्या गंभीर है तो डाक्टर से संपर्क कर इलाज करवाएं.

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मेरी उम्र 28 साल है. सर्दीजुकाम मेरा पीछा नहीं छोड़ता. एक बार जुकाम हो गया तो वह जल्दी ठीक नहीं होता है और ठीक हो भी जाए तो कुछ दिनों बाद फिर हो जाता है. बताएं क्या करूं?

जवाब

मौसम में बदलाव के साथ सर्दीजुकाम होना आम समस्या है, लेकिन यह समस्या आए दिन परेशान करने लगे तो इसे नजर अंदाज न करें. यदि बारबार जुकाम हो रहा है तो इस के कई कारण हो सकते हैं जैसे तनाव, उचित ट्रीटमैंट न लेना, गलत खानपान, पूरापूरा दिन फील्ड में काम करना और साफसफाई न रखना. आप को डाक्टर से इलाज कराने की जरूरत है. इलाज के साथ तनाव भी कम करें. कम तनाव से इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता है, जिस से शरीर स्वस्थ रहता है. खानपान पर भी ध्यान दें. ठंडी चीजों से दूर रहें. रोज सुबहशाम कुनकुने पानी से दोनों नथुनों की सफाई करें. इस से बैक्टीरिया दूर रहेंगे और आप को जुकाम की समस्या से राहत मिलेगी.

समस्याओं के समाधान ऐल्प्स ब्यूटी क्लीनिक की फाउंडर, डाइरैक्टर डा. भारती तनेजा द्वारा      

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क्या दिल में भी होता है शार्ट सर्किट

दिल में जोरो से धक धक होने लगे तो खुद को धक धक गर्ल या बॉय समझने की भूल मत कर बैठना. संभव है कि आपके दिल में करंट का ओवरफ्लो हो रहा हो. यानि शार्ट सर्किट.  क्या आप जानते हैं  कि  हमारे दिल में भी शार्ट सर्किट होता है. अगर नहीं तो हम आज आपको दिल से जुडी ऐसी  बीमारी के बारे में बताने जा रहे हैं. जिसे मेडिकल टर्म में पीएसवीटी या पैरोसाइमल सुपर वेंट्रिकुलर टेकिकार्डियो कहते हैं.

जाने क्या है पीएसवीटी

नार्मल व्यक्ति के  दिल की  धड़कन 72 -100 प्रति मिनट होती है लेकिन जब दिल में शार्ट सर्किट होता है तो  पीड़ित कि धड़कन 180 -250  प्रति मिनट  तक पहुंच जाती है. जब दिल में  करेंट ओवरफ्लो होता है तो धड़कन तिगुनी बढ़ जाती है.  यह दिल कि गड़बडी के कारण होता है. हमारे दिल में चार चेम्बर्स होते है व दिल में कई नसे होती हैं. इनमे कुछ नसे ऐसी भी होती हैं जिनके ऊपर कवरिंग नहीं होती. जब ऐसी दो नसे आपस में मिलती हैं तो शार्ट सर्किट हो जाता है.

लक्षण

धड़कन का  तेज होना.

शरीर पीला व ठंडा होन.

सांस तेज व एवं बेहोश होना.

असामान्य ब्लड प्रेशर की समस्या होना.

 इलाज

इलेक्ट्रो फिजियोलोजिकल स्टडी के जरिए  शार्टसर्किट वाले प्वाइंट को पकड़ा जाता है।जिसके लिए  पैर के रास्ते से तीन तार दिल तक पहुंचाए जाते है. इसके बाद दिल के अंदर हुए शॉर्ट सर्किट का पता लगाया जाता है। पता चलने पर फिर चौथा तार दिल तक पहुंचाया जाता है और दिल में शाट सर्किट वाले इन तारों पर करीब 350 किलोहर्ट्ज की तरंग छोड़कर इसे फ्यूज कर दिया जाता  है. लेकिन कई बार वो नसे  जो  आपस में मिलकर करंट का ओवरफ्लो करती है यदि वो दिल की दीवारों  को बिलकुल छू रही होती है तो उन्हें फ्यूज करने का रिस्क होता है। ऐसे में मरीज़ को पेसमेकर लगाने की जरूरत भी पड़ सकती है इस िस्थति का पता इलेक्ट्रो फिजियोलाजी स्टडी  करते समय ही चल पाता  है.

कारण

दिल में छेद, मानसिक तनाव व चाय, एल्कोहल व काफी का  ज्यादा सेवन.

जंक फूड का  अधिक सेवन.

खांसी, जुकाम समेत तमाम रोगों की दवाएं धड़कन खराब करती हैं.

हीमोग्लोबिन कम होना.

अनुवांशिक होना.

 बचाव

रक्त का संचार ठीक रखें इसलिए नियमित रूप से व्यायाम करें.

हाई कोलेस्ट्रॉल वाली चीजों से करें परहेज.

तनाव को रखें खुद से दूर .

लापरवाही से बचे

यह समस्या बार बार हो रही है तो इससे दिल कि मासपेशियां कमजोर हो जाती हैं व  दिल फैलने लगता है. जिससे करंट नए रास्तों के जरिए फ्लो होकर धड़कन तेज कर देता है. ऐसे में जान जाने का खतरा होता है. अधिकतर दिल से संबंधित यह समस्या महिलाओं  में ज्यादा देखी जाती है.

विशेषज्ञ – नारायणा हॉस्पिटल ,गुरुग्राम

डॉ विवेक चतुर्वेदी  ,सीनियर कंसलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट

कपड़ो के हिसाब से चयन करें फुटवियर

शादी हो या फिर कोई भी पार्टी महिलाएं ट्रेडिशनल आउटफिट ही पहनना पसंद करती हैं. क्योंकि महिलाओं को पास ट्रेडिशनल ड्रेस में बहुत सारे ऑप्सन मिल जाते है. जैसे साड़ी, गाउन, सूट, प्लाजो-सूट आदि. महिलाएं अपनी कपड़े तो आराम से चुन लेती हैं, लेकिन उन्हें अपने कपड़े के हिसाब से मैचिंग फुटवियर चुनने में परेशानी होती है, जिसके लिए महिलाएं कई सारे फुटवियर खरीद लेती है.

अगर आपको भी अपने कपड़ों के साथ मैचिंग फुटवियर सेलेक्ट करने में परेशानी होती है, तो अब आपको ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है. हम आपको अपने लेख से कुछ ऐसे फुटवियर के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जिन्हें आप आसानी से हर कपड़ो के साथ पहन सकती हैं.

गुजराती चप्पल

अगर आप सूट ज्यादा पहनती हैं, तो आप गुजराती सैंडल को अपनी फुटवियर की लिस्ट में शामिल कर सकती हैं. क्योंकि गुजराती सैंडल न सिर्फ दिखने में अच्छी लगती हैं बल्कि आपको क्लासी लुक भी देने का काम करती हैं. हालांकि, गुजराती सैंडल का फैशन काफी पुराना है, पर पिछले कुछ सालों से महिलाओं ने गुजराती सैंडल सूट के साथ वापस से पेयर करना शुरू कर दिया है, जो अब फैशन ट्रेंड का हिस्सा बन गया हैं.

लेडीज सैंडल

अगर आप कुर्ता या फिर जींस के साथ कुछ ट्रेंडी टॉप वियर कर रही हैं, तो आप इसके साथ लेडीज सैंडल पहन सकती हैं. क्योंकि सैंडल हर इंडियन ड्रेस पर काफी अच्छी लगती हैं. आपको बाजार में इस तरह के कई तरह के फुटवियर आसानी से मिल जाएंगे, जिसे आप अपनी पसंद या फिर आउटफिट्स के मैचिंग के हिसाब से खरीद सकती हैं. लेकिन आप सैंडल का कलर ऐसा सेलेक्ट करें जो आपको हर ड्रेस पर एकदम परफेक्ट बैठे

शिमरी सैंडल

आप फ्रॉक या फिर गाउन के साथ शिमरी सैंडल वियर कर सकती हैं. क्योंकि शिमरी सैंडल को आप न सिर्फ हैवी गाउन पर वियर कर सकती हैं बल्कि आप सिंपल आउटफिट्स के साथ भी इसे वियर कर सकती हैं. लेकिन अगर आपके आउटफिट एक ही कलर के हैं, तो आप उसी आउटफिट के कलर के सैंडल खरीद सकती हैं.

पेंसिल हिल्स

अगर आपका कद थोड़ा छोटा है तो आप ट्रेडिशनल आउटफिट के साथ पेंसिल हील्स पहन सकती हैं. क्योंकि पेंसिल हील्स में न सिर्फ आप खूबसूरत लगेंगी बल्कि ये आपकी ड्रेस में चार चांद लगाने का भी काम करेंगी. क्योंकि हाई हील्स आपके लुक को और आकर्षक बनाती हैं. इसलिए अगर आप सूट, लहंगा या फिर साड़ी पहन रही हैं, तो आप पेंसिल हील्स पहन सकती हैं यकीनन आप बहुत अच्छी लगेंगी.

Winter Special: बच्चों के लिए बनाएं मूंग दाल के टेस्टी पिज्जा और बर्गर

पिज़्ज़ा बर्गर जैसे फ़ास्ट फ़ूड आज बच्चे बड़ों सभी का फेवरिट फ़ूड है. मैकडोनाल्ड, पिज़्ज़ा हट जैसे कई बड़े बड़े ब्रांड तो केवल बर्गर पिज़्ज़ा के लिए ही प्रसिद्ध हैं. निस्संदेह ये आज अधिकांश नई पीढ़ी के फेवरिट हैं परन्तु इनके बेस को बनाने में प्रयोग किया जाने वाला मैदा और प्रिजरवेटिव हमारे पाचनतंत्र के लिए अत्यंत हानिकारक होता है क्योंकि फायबर न होने के कारण मैदा को पचाने के लिए हमारे पाचनतंत्र को बहुत अधिक श्रम करना पड़ता है. आज हम आपको घर पर ही बिना मैदा के मूंग दाल से ही पिज़्ज़ा बर्गर बनाना बता रहे हैं जिसे आप बहुत आसानी से बना सकतीं हैं जो बहुत सेहतमंद भी है और स्वादिष्ट भी. तो आइए देखते हैं कि इन्हें कैसे बनाया जाता है.

सामग्री (बेस के लिए)

– धुली मूंग दाल 2 कप
– खट्टा दही 1.5 कप
– नमक 1 टीस्पून
– फ्लैक्स सीड्स 1/4 टीस्पून
– ईनो फ्रूट सॉल्ट 1 सैशे
– तेल 1/4 टीस्पून

विधि

मूंग को दही के साथ मिक्सी में पीस लें, नमक और फ्रूट साल्ट मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें. अब इसमें नमक, फ्लैक्स सीड्स और ईनो मिलाकर फेंट लें. अब 4 कटोरियों को तेल से ग्रीस कर लें और इनमें तैयार मूंग का मिश्रण डालें ध्यान रखें कि कटोरी को 3/4 ही भरें ताकि मिश्रण को फूलने की जगह रहे. इसे भाप में 15 मिनट तेज आंच पर पकाकर ठंडा होने पर कटोरी से निकाल लें.

2-वेज बर्गर

– कितने लोगों के लिए 2 बनने में लगने वाला समय 20 मिनट
– मील टाइप वेज
– सामग्री (बर्गर के लिए)
– तैयार मूंग की कटोरी 2
– चीज स्लाइस 4
– प्याज स्लाइस 4
– टमाटर स्लाइस 4
– बारीक कटा पत्तागोभी 1/4 कप
– नमक 1/4 टीस्पून
– काली मिर्च 1 चुटकी
– बटर 1/4 टीस्पून
– मेयोनीज 1 टेबलस्पून
– टोमेटो सॉस 1 टीस्पून

सामग्री (टिक्की के लिए)

– उबले आलू 2
– उबले मटर 1 टेबलस्पून
– किसी गाजर 1 टेबलस्पून
– बारीक कटी हरी मिर्च 2
– बारीक कटा प्याज 1
– कटा लहसुन 4 कली
– किसा अदरक 1/2 टीस्पून
– नमक स्वादानुसार
– लाल मिर्च पाउडर 1/8 टीस्पून
– अमचूर पाउडर 1/4 टीस्पून
– कश्मीरी लाल मिर्च 1/4 टीस्पून
– ब्रेड क्रम्ब्स 1 कप
– कॉर्नफ्लोर 1 टेबलस्पून
– तलने के लिए तेल

विधि

टिक्की बनाने के लिए तेल, ब्रेड क्रम्ब्स और कॉर्नफ्लोर को छोड़कर समस्त सामग्री को एक बाउल में अच्छी तरह मिक्स कर लें. तैयार मिश्रण से 2 बड़ी बड़ी टिक्की बनाऐं. कॉर्नफ्लोर को 1 टीस्पून पानी में घोल लें और टिक्की को इस घोल में डालकर ब्रेड क्रम्ब्स में रोल कर लें. अब इन्हें एक पैन में मीडियम आंच पर शैलो फ़्राय कर लें.

पत्तागोभी, प्याज और टमाटर की नमक और काली मिर्च से सीजनिंग कर लें. बर्गर बनाने के लिए तैयार मूंग की कटोरी को बीच से 2 भागों में काट कर एक पैन में बटर लगाकर सुनहरा होने तक सेक लें. अब मेयोनीज में टोमेटो सॉस को अच्छी तरह मिलाएं और सेंकें हुए मूंग के एक स्लाइस पर एक तरफ लगाकर तैयार टिक्की रखें, फिर टमाटर, प्याज, पत्तागोभी का सलाद रखकर चीज स्लाइस रखें और दूसरे मूंग के स्लाइस से कवर कर दें. हैल्दी बर्गर तैयार है आप इसे 30 सेकंड माइक्रोवेब में रखकर सर्व करें.

3-कैप्सिकम पिज्जा

– कितने लोगों के लिए 2
– बनने में लगने वाला समय 10 मिनट
– मील टाइम वेज

सामग्री

– कटोरी 1
– चौकोर कटीलाल, पीली हरी शिमला मिर्च 1/2 कप
– पिज़्ज़ा सॉस 1 टीस्पून
– उबले कॉर्न के दाने 8-10
– ऑलिव्स 4-5
– चिली फ्लैक्स 1 चुटकी
– ऑरिगेनो 1 चुटकी
– चीज क्यूब्स 2

विधि

इडली को बीच से 2 भागों में काट लें. इसे चकले पर रखकर बेलन से हल्का सा बेल दें ताकि इसकी क्रस्ट पतली हो जाये. अब इस पर पिज्जा सॉस लगाकर चीज किस दें. चीज के ऊपर शिमला मिर्च, ऑलिव्स और कॉर्न के दाने अच्छी तरह फैला दें. ऊपर से चिली फ्लैक्स और ऑरिगेनो बुरककर चिकनाई लगे नॉनस्टिक पैन में ढककर धीमी आंच पर चीज के मेल्ट होने तक पकाकर सर्व करें.

 प्रमोशन: भाग 3- क्या बॉस ने सीमा का प्रमोशन किया?

शाम को घर से बाहर गए सदस्य 1-1 कर लौटने लगे. रमाकांत भी बैंक से एक मित्र के घर चले जाने के कारण शाम को ही लौटे.

सीमा से कोई भी सीधे मुंह पेश नहीं आया. उस की बात का कोईर् जवाब ठीक से नहीं दे रहा था. परेशान हो कर सीमा अपने बैडरूम में कैद हो गई.

सीमा के लिए रात का खाना तो उस की ननद व सास ने बना दिया, पर खाने का बुलावा देने उसे कोई नहीं आया. पूरे घर का माहौल मातमी हो रहा था. हरेक से डांट खा कर रोंआसा रोहित भी उस की बगल में आ लेटा.

सीमा का खाना थाली में लगा कर जब राजीव शयनकक्ष में आया तब तक रोहित सो चुका था.

‘‘मेरी तबीयत ठीक नहीं है,’’ उदास सीमा ने ?ाठा बहाना बना कर खाना खाने से इनकार किया तो राजीव फौरन फट पड़ा.

‘‘मेरी परेशानियों को बेकार का ड्रामा कर के बढ़ाओ मत,’’ दबे क्रोध के कारण राजीव की आवाज कांप उठी, ‘‘तुम्हारी नासम?ा के कारण उधर घर वाले मु?ा से नाराज हैं और इधर तुम मु?ो परेशान करने पर तुली हुई हो. अच्छा होता अगर मैं शादी के बाद तुम्हें नौकरी करने की इजाजत ही नहीं देता.’’

‘‘मैं ने इजाजत ले कर नहीं बल्कि आप और आप के सब घर वालों के दबाव में आ कर नौकरी करी थी. मु?ो कोई शौक नहीं था घर से बाहर निकल कर परेशान होने का,’’ सीमा का स्वर ऊंचा हो गया.

‘‘मेरे घर वालों ने आज तक हर सुखसुविधा का खयाल रखा है. गृहस्थी के सभी ?ां?ाटों से तुम नौकरीपेशा होने के कारण ही बची रही हो.’’

‘‘मैं लखपति नहीं बन गई हूं नौकरी कर के. अपने क्व4 हजार के व्यक्तिगत खर्चे को छोड़ कर सारी कमाई हर महीने मैं ने आप के पिता के हाथों में रखी है.’’

‘‘अरे, उन की जिम्मेदारियों को पूरा करने

में हम दोनों हाथ नहीं बंटाएंगे, तो कौन करेगा

यह काम?’’

‘‘लेकिन उन की जिम्मेदारियों को पूरा करने की खातिर मैं अकेलेपन, दुख और अशांति का शिकार बनने को तैयार नहीं हूं.’’

‘‘तुम से कुछ सालों के लिए सम?ादारी भरा व्यवहार करने की मैं उम्मीद भी नहीं रखता हूं अब. बस, मेरे लिए अपने स्वार्थी व्यवहार के कारण इस घर में रहना कठिन मत बनाओ.’’

‘‘मु?ो स्वार्थी कहना उलटा चोर कोतवाल को डांटने जैसा है.’’

‘‘अच्छा बाबा, हम सब चोर हैं और तुम कोतवाल,’’ राजीव ने नाटकीय अंदाज में उस के सामने जोर से हाथ जोड़े, ‘‘अब चुपचाप खाना खाओ और मेरी जान बख्शो.’’

राजीव नाराज नजर आता बाहर घूमने चला गया. सीमा 2-4 कौर से ज्यादा गले से नीचे नहीं उतार सकी. घर के किसी सदस्य के सामने पड़ने से बचने के लिए वह बचा खाना व बरतन रसोई में रखने भी नहीं गई.

राजीव ने लौट कर अपनी नाराजगी भरी खामोशी कायम रखी. दोनों आंखें मूंदे देर तक  बेचैनी से करवटें बदलते रहे.

 

रविवार का दिन शनिवार से भी बदतर गुजरा. रमाकांत ने सुबह ही सुबह

छोटे बेटे संजीव को डांटते हुए घर में हंगामा खड़ा कर दिया.

‘‘नामाकूल. लफंगे,’’ रमाकांत छोटे बेटे

पर बरसे, ‘‘अगर तू पढ़लिख कर आज अच्छी नौकरी कर रहा होता, तो मु?ो किसी के एहसान की जरूरत नहीं रहती. सिर्फ क्व14 हजार कमा

कर तू मोटरसाइकिल और कार के सपने कैसे देखता है, गधे? तू तो जिंदगीभर को दुनिया

वालों की ठोकरें खाने को तैयार होगा.’’

‘‘बड़े भैया और भाभी का गुस्सा मु?ा पर निकालते हुए मु?ो गालियां सुनाने की आप को कोई जरूरत नहीं है,’’ संजीव बुरी तरह बौखला गया, ‘‘मु?ो किसी से कुछ नहीं चाहिए. मैं अपनी जरूरतें और शौक खुद पूरे कर सकता हूं.’’

‘‘वह तो कोई भी कर सकता है पर तेरी बहन के कोटा के कोर्स और उस की शादी का क्या होगा? मैं अपना सबकुछ तुम दोनों पर खर्च कर दूंगा, तो हम बूढ़ेबुढि़या की आगे जरूर दुर्गति होगी. इस स्वार्थी संसार में किसी से कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए.’’

‘‘यह डायलौग मु?ो नहीं, भैयाभाभी को सुनाओ.’’

‘‘ज्यादा बोलेगा तो जबान खींच लूंगा,’’ रमाकांत चीख पड़े.

?ागड़ा बढ़ता देख सुचित्रा बीच में बोली, तो रमाकांत उस के पीछे पड़ गए. कुछ देर बाद राजीव और सविता को भी उन्होंने लपेट लिया और खूब कड़वी चुभती बातें सभी को सुनाईं.

सीमा अपने कमरे से बाहर ही नहीं आई. उस से मिलने भी कोई नहीं अंदर आया. रोहित भी सहमासहमा सा अपनी मां के आसपास

बना रहा.

उस रात भी राजीव और सीमा 2 अजनबियों की तरह अगलबगल सोए. एकदूसरे के मनोभावों को न सम?ाने के घाव की टीस ने उन्हें देर रात तक जगाए रखा.

अगले दिन सोमवार की सुबह सीमा औफिस जाने की तैयारी करने लगी. उस दिन सविता उसे नियत समय पर बैड टी दे गई. उसे नाश्ता व लंच बौक्स भी हमेशा की तरह तैयार मिला. उस दिन बस यही अंतर था कि कोई भी उस के साथ मुसकराते हुए नहीं बोल रहा था. एक खिंचाव, एक शिकायत वह सब के हावभावों से साफ महसूस कर रही थी.

औफिस पहुंचने के कुछ देर बाद सीमा को उस के बौस जतिन ने अपने कक्ष में बुलवा लिया. प्रमोशन के बारे में ‘हां’ या ‘न’ कहने की घड़ी आ चुकी थी.

‘‘तुम्हारा सुस्त चेहरा देख कर ही मैं ने तुम्हारे निर्णय को जान लिया है. सीमा लखनऊ जाना तुम्हारे लिए कठिन होगा, मु?ो मालूम था,’’ जतिन ने सहानुभूति भरे स्वर में वार्त्तालाप आरंभ किया.

‘‘सर, मैं लखनऊ जाऊंगी,’’ सीमा ने ये शब्द कठिनाई से ही अपने गले से बाहर निकाले.

‘‘अरे, मैं तो सोच रहा था कि तुम प्रमोशन लेने से इनकार कर दोगी,’’ जतिन हैरान हो उठे.

‘‘मेरी प्रमोशन के साथसाथ मेरे पति और ससुराल वालों की भी प्रमोशन हुई है. उन सब की प्रमोशन को ‘न’ कहना मेरे लिए संभव नहीं था.’’

‘‘मैं कुछ सम?ा नहीं सीमा?’’ जतिन उल?ान का शिकार बन गए.

 

‘‘सर, प्रमोशन से मेरी पगार बढे़गी और इसी कारण उन सब की जरूरतें,

इच्छाएं और मांगें भी बढ़ कर फैल गईं. मेरे लिए प्रमोशन को न कहना संभव नहीं रहा.’’

‘‘अपने छोटे बच्चे को छोड़ कर लखनऊ

में अकेली कैसे रहोगी सीमा?’’ जतिन चिंतित नजर आए.

‘‘सर, सब के लिए मैं नोट छापने वाली मशीन हूं. मेरी अच्छी तरह से देखभाल करने की पूरी योजना उन सब ने तैयार कर रखी है. मशीन को कम काम करने या बंद होने की सुविधा नहीं होती. उस के सुखदुख को महसूस करने की शक्ति को कोई नहीं पहचानता… कोई महत्त्व नहीं देता,’’ बोलते हुए सीमा का गला भर आया.

‘‘वक्त बदल रहा है और अब शायद औरतों को पुरुषों के बराबर कष्ट ?ोलने की ताकत भी अपने अंदर पैदा करनी होगी. बैस्ट औफ लक, माई डियर. प्रमोशन स्वीकार करने के लिए मेरी शुभकामनाएं.’’

जतिन को नकली मुसकान के साथ धन्यवाद दे कर सीमा उन के कक्ष से बाहर आ गई. कैसी भी खुशी महसूस करने के बजाय उस का दिल इस वक्त जोरजोर से रोने को कर रहा था.

First Date के लिए बेहद खास हैं ये 7 ब्‍यूटी टिप्‍स

आप अपने दोस्त की पार्टी में किसी विशेष लड़के से मिलती हैं और वह आपको अपने साथ डिनर पर जाने के लिए आमंत्रित करता है. आप बहुत अधिक उत्साहित हो जाती हैं क्योंकि आप अपना पहला प्रभाव बहुत अच्छा बनाना चाहती हैं. तो चिंता न करें, यदि आप कुछ निश्चित उपायों को अपनाएँ तो आप जिस लड़के को पसंद करती हैं उसे पहली डेट पर रिझाना कोई कठिन काम नहीं है. विशेष रूप से आपको अपने रूप रंग पर ध्यान देना होगा.

यद्यपि यह बात सच है कि कोई भी पुरुष आपको आपके व्यक्तित्व और रूचि के कारण पसंद करता है न कि आपके रूप रंग के कारण. परन्तु यह भी सच है कि हम अपने रूप रंग के कारण पहली छवि को प्रभावकारी बना सकते हैं. कई बार महिलायें पहली डेट पर जाने से पहले थोड़ी नर्वस (बैचैन) हो जाती हैं और उन्हें समझ में नहीं आता कि किस प्रकार के कपड़े पहने जाएँ या किस तरह का मेकअप किया जाए.

पहली डेट बहुत महत्वपूर्ण अवसर होता है क्योंकि इसके बाद ही बात आगे बढ़ सकती है जो कि आप हमेशा से अपने साथी में चाहते थे. तो आपकी पहली डेट सफल बनाने के लिए कुछ ब्यूटी टिप्स.

1. सादा मेकअप करें पहली डेट पर बहुत अधिक मेकअप न करें या बालों को बहुत अधिक स्टाइलिश न बनायें. बल्कि सादा परन्तु सेक्सी लुक अधिक प्रभाव डालेगा.

2. चेहरे पर कोई प्रयोग न करें डेट से एक दिन पहले फेशियल न करवाएं क्योंकि कभी कभी फेशियल के कारण चेहरे पर मुंहासें या रैशेस आ जाते हैं. और आप नहीं चाहते ऐसा हो, हैं न?

3. विटामिन ई का उपयोग करें आप डेट से एक रात पहले विटामिन ई के तेल से चेहरे पर मसाज करें जिससे आपकी त्वचा नरम और चमकदार हो जाए.

4. अपने नाखूनों का ध्यान रखें गंदे नाखून बहुत ही अनाकर्षक दिखते हैं तो ध्यान रहे कि डेट पर जाने से पहले आप मैनीक्योर और पैडीक्योर करवाएं या आप घर पर ही अपने हाथ और पैर के नाखूनों को संवार सकती हैं.

5. बहुत तीव्र गंध वाली परफ्यूम का उपयोग न करें ऐसी परफ्यूम लगायें जिसकी सुगंध हल्की, मीठी और तरोताज़ा कर देने वाली हो तथा इसकी सीमित मात्रा का ही उपयोग करें.

6. बालों का सेक्सी स्टाइल बनायें ब्यूटी एक्सपर्ट्स के अनुसार लूज कर्ल्स, बीची वेव्स आदि हेयर स्टाइल्स पहली डेट के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं. अपनी हेयर स्टाइल सादी परन्तु सेक्सी रखें.

7. होंठो की देखभाल ध्यान रहे कि डेट से एक दिन पहले अपने होंठों को एक्स्फोलियेट करके अच्छे से मॉस्चराइज करें. हलके रंग का लिप कलर लगायें तथा लिप ग्लॉस की सही मात्रा लगायें.

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Valentine’s Day 2024: ऐसा प्यार कहां: क्या थी पवन और गीता के प्यार की कहानी

पवन जमीन पर अपने दोनों हाथों को सिर पर रखे हुए ऊकड़ू बैठा था. वह अचरज भरी निगाहों से देखता कि कैसे जयपुर की तेज रफ्तार में सभी अपनी राह पर सरपट भागे जा रहे थे.

अचानक एक गरीब लड़का, जो भीख मांग रहा था, एक गाड़ी के धक्के से गिर गया. मगर उस की तरफ मुड़ कर देखने की जहमत किसी ने नहीं उठाई.

थोड़ी देर तक तो उस लड़के ने इधरउधर देखा कि कोई उस की मदद करने आएगा और सहारा दे कर उठाएगा, मगर जब कोई मदद न मिली तो वह खुद ही उठ खड़ा हुआ और आगे बढ़ गया.

उस लड़के को देख पवन ने कुछ देर सोचा और फिर उठ कर सामने रखी बालटी के पानी से मुंह धोया और जेब से कंघी निकाल कर बालों को संवारा.

तभी चाय की दुकान पर बैठे एक बुजुर्ग आदमी बोले, ‘‘पवन, तुम यहां

2 महीने से चक्कर काट रहे हो. देखो जरा, तुम ने अपना क्या हाल बना रखा है. तुम्हारा शरीर भी कपड़े की तरह मैला हो गया है. यह जयपुर है बेटा, यहां तो सिर्फ पैसा बोलता है. तुम जैसे गांव से आए हुए अनपढ़ और गरीब आदमी की बात कौन सुनेगा. मेरी बात मानो और तुम अपने गांव लौट जाओ.’’

‘‘काका, मुझे किसी की जरूरत नहीं है. मैं अपनी पत्नी को खुद ही ढूंढ़ लूंगा,’’ पवन ने कहा.

‘‘यह हुई न हीरो वाली बात… यह लो गरमागरम चाय,’’ रमेश चाय वाला बोला.

चाय की दुकान और रमेश ही पवन का ठिकाना थे. उस का सारा दिन थाने के चक्कर काटने में बीतता और रात होते ही वह इसी दुकान की बैंच को बिस्तर बना कर सो जाता. वह तो रमेश चाय वाला भला आदमी था जो उसे इस तरह पड़ा रहने देता था और कभी उस पर दया आ जाती तो चायबिसकुट भी दे देता.

अकेले में पवन को उदासी घेर लेती थी. हर दिन जब वह सुबह उठता तो सोचता कि आज तो गीता उस के साथ होगी, मगर उसे नाकामी ही हाथ लगती.

उस दिन की घटना ने तो पवन को एकदम तोड़ दिया था. लंबे समय तक हर जगह की खाक छानने के बाद उसे एक घर में गीता सफाई करते हुए मिली तो उस की खुशी का ठिकाना ही न रहा. वह भाग कर गीता से लिपट गया.

गीता की आंखों में भी पानी आ गया था. तभी गार्ड आ गया और उन दोनों को अलग कर के पवन को धक्के मार कर बाहर कर दिया.

बेचारा पवन बहुत चिल्लाया, ‘यह मेरी गीता है… गीता… गीता… तुम घबराना नहीं, मैं तुम्हें यहां से ले जाऊंगा,’ मगर आधे शब्द उस की जबान से बाहर ही न आ पाए कि कोई भारी चीज उस के सिर पर लगी और वह बेहोश हो गया.

आंखें खुलीं तो देखा कि पवन की जिंदगी की तरह बाहर भी स्याह अंधेरा फैल गया. किसी तरह अपने लड़खड़ाते कदमों से पुलिस स्टेशन जा कर वह मदद की गुहार लगाने लगा और थकहार कर वहीं सड़क किनारे सो गया.

सुबह होते ही पवन फिर पुलिस स्टेशन जा पहुंचा, तभी उन में से एक पुलिस वाले को उस की हालत पर तरस आ गया. वह बोला, ‘‘ठीक है, मैं तुम्हारे कहने पर चलता हूं, पर यह बात झूठ नहीं होनी चाहिए.’’

पुलिस को ले कर पवन उसी घर में पहुंचा और गीता के बारे में पूछा. वहां के मालिक ने कहा, ‘हमारे यहां गीता नाम की कोई लड़की काम नहीं करती.’

‘आप उसे बुलाएं. हम खुद ही उस से बात करेंगे,’ हवलदार ने डंडा लहराते हुए रोब से कहा.

अंदर से डरीसहमी एक लड़की आई. उसे देखते ही पवन चिल्लाया, ‘साहब, यही मेरी गीता है. गीता, तुम डरना नहीं, इंस्पैक्टर साहब को सबकुछ सचसच बता दो.’

‘क्या नाम है तेरा?’

‘साहब, मेरा नाम सपना है.’

‘क्या यह तुम्हारा पति है?’

‘नहीं साहब, मैं तो इसे जानती तक नहीं हूं.’

पवन भौचक्का सा कभी गीता को तो कभी पुलिस वाले को देखता रहा.

तभी पुलिस वाला बोला, ‘सौरी सर, आप को तकलीफ हुई.’

सभी लोग बाहर आ गए.

पवन कहता रहा कि वह उस की पत्नी है, पर किसी ने उस की न सुनी. सब उस से शादी का सुबूत मांगते रहे, पर वह गरीब सुबूत कहां से लाता.

‘‘पवन… ओ पवन, कल मेरी दुकान में एक मैडम आई थीं,’’ रमेश चाय वाले की यह बात सुन कर पवन अपने दिमाग में चल रही उथलपुथल से बाहर आ गया. वह अपना सिर खुजलाते हुए बोला, ‘‘हां, बोलो.’’

तभी रमेश चाय वाले ने उसे चाय का गरमागरम प्याला पकड़ाते हुए कहा, ‘‘कल मेरी दुकान में एक मैडम आई थीं और वे गीता जैसी लड़कियों की मदद के लिए एनजीओ चलाती हैं. हो सकता है कि वे हमारी कुछ मदद कर सकें.’’

थोड़ी देर बाद ही वे दोनों मैडम के सामने बैठे थे. मैडम ने पूछा, ‘‘उस ने तुम्हें पहचानने से क्यों मना कर दिया? अपना नाम गलत क्यों बताया?’’

‘‘मैडम, मैं ने गीता की आंखों से लुढ़कता हुआ प्यार देखा था. उन लोगों ने जरूर मेरी गीता को डराया होगा.’’

‘‘अच्छा ठीक है, तुम शुरू से अपना पूरा मामला बताओ.’’

यह सुन कर पवन उन यादों में खो गया था, जब गीता से उस की शादी हुई थी. दोनों अपनी जिंदगी में कितना खुश थे. सुबह वह ट्रैक्टर चलाने ठाकुर के खेतों में चला जाता और शाम होने का इंतजार करता कि जल्दी से गीता की बांहों में खो जाए.

इधर गीता घर पर मांबाबूजी को पहले ही खाना खिला देती और पवन के आने पर वे दोनों साथ बैठ कर खाना खाते और फिर अपने प्यार के पलों में खो जाते.

मगर कुछ दिनों से पवन परेशान रहने लगा था. गीता के बहुत पूछने पर वह बोला, ‘पहले मैं इतना कमा लेता था कि

3 लोगों का पेट भर जाता था, पर अब

4 हो गए और कल को 5 भी होंगे. बच्चों की परवरिश भी तो करनी होगी. सोचता हूं कि शहर जा कर कोई कामधंधा करूं. कुछ ज्यादा आमदनी हो जाएगी और वहां कोई कामकाज भी सीख लूंगा. उस के बाद गांव आ कर एक छोटी सी दुकान खोल लूंगा.’

‘आप के बिना तो मेरा मन ही नहीं लगेगा.’

‘क्या बात है…’ पवन ने शरारत भरे अंदाज में गीता से पूछा तो गीता भी शरमा गई और दोनों अपने भविष्य के सपने संजोते हुए सो गए.

कुछ दिनों बाद वे दोनों शहर आ गए. वहां उन्हें काम ढूंढ़ने के लिए ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ा. जल्दी ही एक जगह काम और सिर छिपाने की जगह मिल गई. रोजमर्रा की तरह जिंदगी आगे बढ़ने लगी.

पवन को लगा कि गीता से इतनी मेहनत नहीं हो पा रही है तो उस ने उस का काम पर जाना बंद करा दिया. वैसे भी फूल सी नाजुक और खूबसूरत लड़की ईंटपत्थर ढोने के लिए नहीं

बनी थी.

अभी बमुश्किल एक हफ्ता ही बीता था कि जहां पवन काम करता था वहां उस दिन बहुत कम लोग आए थे. वहां के मालिक ने पूछा, ‘क्या हुआ पवन, आजकल तेरी घरवाली काम पर नहीं आ रही है?’

पवन ने अपनी परेशानी बताई तो मालिक बोले, ‘कुछ दिनों से मेरे घर पर कामवाली बाई नहीं आ रही है, अगर तुम चाहो तो तुम्हारी घरवाली हमारे यहां काम कर सकती है और तुम इस काम के अलावा हमारी कोठी में माली का काम भी कर लो.’

पवन को जैसे मनचाहा वरदान मिल गया. सोचा कि इस से पैसा भी आएगा और गीता इस काम को कर भी पाएगी. उस ने गीता को बताया तो वह खुशीखुशी राजी हो गई.

इस तरह कुछ महीने आराम से बीत गए. कुछ ही समय में उन्होंने अपना पेट काट कर काफी पैसे इकट्ठा कर लिए थे और अकसर ही बैठ कर बातें करते कि अब कुछ ही समय में अपने गांव लौट जाएंगे.

मगर वे दोनों अपने ऊपर आने वाले खतरे से अनजान थे. गीता जहां काम करती थी, उन के ड्राइवर की नजर गीता पर थी. उधर मालकिन को गीता का काम बहुत पसंद था. वे अकसर पूरा घर गीता के भरोसे छोड़ कर चली जाती थीं.

रोज की तरह एक दिन पवन जब गीता को लेने पहुंचा और बाहर खड़ा हो कर इंतजार करने लगा. तभी ड्राइवर ने उसे साजिशन अंदर जाने के लिए कहा.

डरतेडरते पवन ने ड्राइंगरूम में पैर रखा तभी गीता आ गई और वे दोनों घर चले गए.

सुबह जब दोनों जैसे ही काम पर निकलने लगे कि देखा, मालिक पुलिस को लिए उन के दरवाजे पर खड़े थे.

‘क्या हुआ?’

‘इंस्पैक्टर, गिरफ्तार कर लो इसे.’

पुलिस ने पवन को पकड़ लिया तो उस ने पूछा, ‘मगर, मेरा कुसूर क्या है?’

‘जब तुम कल इन के घर गए थे तब तुम ने इन के घर से पैसे चुराए थे.’

वे दोनों बहुत समझाते रहे कि ऐसा नहीं है, मगर उन गरीबों की बात किसी ने नहीं सुनी और पवन को 2 महीने की सजा हो गई.

उधर गीता को मालिक ने घर से निकाल दिया. उस का तो बस एक ही ठिकाना रह गया था, वह बरसाती वाला घर और पवन की यादें.

उधर पवन के खिलाफ कोई पुख्ता सुबूत न होने के चलते कोर्ट ने उसे 2 महीने बाद निजी मुचलके पर छोड़ दिया.

जब पवन जेल से बाहर आया तो सीधे अपने घर गया, मगर वहां गीता का कोई अतापता नहीं था.

आसपास पूछने पर भी कोई बताने को तैयार नहीं हुआ. मगर उसी जगह काम करने वाली एक बुजुर्ग औरत को दया आ गई, ‘बेटा, मैं तुम्हें सबकुछ बताती हूं. तुम जब जेल में थे, उसी दौरान गीता के पास न कोई सहारा, न ही कोई काम रह गया था. तभी यहां के एक ठेकेदार ने उसे अपने घर के कामकाज के लिए रख लिया, क्योंकि वह अकेला रहता था.

‘तन और मन से टूटी गीता की मदद करने के बहाने वह करीब आने लगा. पहले तो वह मन से पास आया, फिर धीरेधीरे दोनों तन से भी करीब आ गए. गीता को अकसर उस के साथ बनसंवर कर घूमते देखा गया.

‘अब तुम्हीं बताओ, कोई अपनी काम वाली के साथ ऐसे घूमता है क्या? मैं ने तो यहां तक सुना है कि काम करतेकरते उस के साथ सोने भी लगी थी. अब इतनी बला की खूबसूरत लड़की के साथ यही तो होगा.

‘जब लोगों ने बातें करना शुरू कर दिया तो एक दिन रात के अंधेरे में सारा सामान ले कर चली गई. पर कुछ समय पहले ही मुझे बाजार में मिली थी. कह रही थी कि यहीं कालोनी के आसपास घरों में काम करती है.’

यह सब सुन कर पवन को बहुत दुख हुआ, पर उन की कही किसी बात पर उसे यकीन नहीं हुआ.

इतना जानने के बाद एनजीओ वाली मैडम ने पवन से आगे की कहानी पूछी.

पवन ने कहा, ‘‘मैं उसे ढूंढ़ता हुआ वहां पहुंच ही गया. मैं ने गीता को एक घर के अंदर जाते हुए देखा. उस ने पहचानने से मना कर दिया,’’ और पवन की आंखों से झरझर आंसू बहने लगे.

‘‘यह लो पवन, पानी पी लो,’’ मैडम ने कहा, ‘‘तुम ने उस से दोबारा मिलने की कोशिश क्यों नहीं की?’’

‘‘आप को क्या लगता है कि मैं ने उस से मिलने की कोशिश नहीं की होगी. पुलिस का कहना है कि जब तक तू शादी का सुबूत नहीं लाता तब तक उस घर क्या गली में भी दिखाई दिया तो तुझे फिर से जेल में डाल देंगे.

‘‘मैं गरीब कहां से शादी का सुबूत लाऊं? मेरी शादी में तो एक फोटो तक नहीं खिंचा था.’’

‘‘ठीक है पवन, हम तुम्हारी जरूर मदद करेंगे,’’ मैडम ने कहा.

कुछ दिन बाद वे मैडम पवन और पुलिस को साथ ले कर गीता से मिलने गई और वहां जा कर पूछा कि आप के यहां गीता काम करती?है क्या?

उन लोगों में से एक ने एक बार में ही सच बयां कर दिया, ‘‘गीता ही हमारे यहां काम करती थी, मगर उस ने अपना नाम सपना क्यों बताया, यह हम नहीं जानते. जिस दिन पवन पुलिस को ले कर आया था. उसी दिन से वह बिना बताए कहीं चली गई और कभी वापस भी नहीं आई.’’

‘‘मैडम, ये सब झूठ बोल रहे हैं. आप इन के घर की तलाशी लीजिए.’’

मगर गीता सचमुच जा चुकी थी. तभी पुलिस ने गार्ड से पूछा, ‘‘क्या तुम ने गीता को जाते हुए देखा था?’’

‘‘हां साहब… उसी दिन रात 10 बजे के आसपास उसे ड्राइवर से बातें करते हुए देखा था.’’

पुलिस ने उत्सुकतावश पूछा, ‘‘कौन सा ड्राइवर?’’

गार्ड बोला, ‘‘साहब, जहां वह पहले काम करती थी वहीं का कोई ड्राइवर अकसर उस से मिलने आताजाता था.’’

पुलिस ने ड्राइवर का पताठिकाना निकाला. पहले तो उस ने मना कर दिया कि वह गीता को नहीं जानता, पर जब सख्ती की गई तो ड्राइवर ने पुलिस को बताया, ‘‘गीता इस घर के पास ही एक और घर में काम करती थी. उस का वहां के आदमी से अफेयर था. वह आदमी गीता की मजबूरी का फायदा उठाता रहा. उस के उस से नाजायज संबंध थे. उस ने तो गीता को अपने ही मकान में एक छोटा कमरा भी दे रखा था.

‘‘रोजाना गहरी होती हर रात को शराब के नशे में धुत्त वह गीता पर जबरदस्ती करता था. गीता चाहती तो गांव वापस जा सकती थी, पर वहां गांव में कुनबे के लिए रोटी बनाने से बेहतर काम उसे यह सब करना ज्यादा अच्छा लगने लगा था, क्योंकि उसे तो पाउडर और लिपस्टिक से लिपेपुते शहरी चेहरे की आदत हो गई थी.

‘‘मगर जब प्रेमी का मन भर गया और उस में कोई रस नहीं दिखाई देने लगा तो एक दिन चुपचाप अपने घर में ताला लगा कर चला गया.

‘‘जब वह 2-4 दिन बाद भी वापस नहीं आया तो गीता ने उस बन रही बिल्डिंग में जा कर उसे ढूंढ़ा लेकिन वहां पर भी उसे निराशा ही हाथ लगी. उस के रहने का ठिकाना भी न रहा.

‘‘उस के जाने के बाद अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए वह देह धंधे में उतर गई.’’

इतना सुनते ही पवन के होश उड़ गए और वह अपने उस दिन के फैसले पर पछताने लगा कि वे दोनों शहर क्यों आए थे. लेकिन पवन अच्छी तरह जानता था कि ऐसी औरतों के ठिकाने कहां होते हैं.

कुछ दिनों में पुलिस ने फौरीतौर पर छानबीन कर फाइल भी बंद कर दी और मैडम ने भी हार मान ली.

वे पवन को समझाने लगीं, ‘‘उस दुनिया में जाने के बाद सारे प्यार और जज्बात मर जाते हैं. वहां से कोई वापस नहीं आता. जब हम और पुलिस मिल कर कुछ नहीं कर पाए तो तुम अकेले क्या कर पाओगे? अच्छा होगा कि तुम भी गांव वापस चले जाओ और नई जिंदगी शुरू करो.’’

पर, पवन पर तो जैसे भूत सवार था. वह अपनी गीता को किसी भी कीमत पर पाना चाहता था. वह सारा दिन काम करता और रातभर रैडलाइट एरिया में भटकता रहता.

इसी तरह कई महीने बीत गए, मगर उस ने हार नहीं मानी. एक दिन रात को ढूंढ़ते हुए उस की निगाह ऊपर छज्जे पर खड़ी लड़की पर पड़ी. चमकीली साड़ी, आंखों पर भरपूर काजल, होंठो पर चटक लाल रंग की लिपस्टिक और उस पर से अधखुला बदन. अपने मन को मजबूत कर उस ने उस से आंखें मिलाने की हिम्मत की तो देखा कि तो गीता थी.

पवन दूसरे दिन मैडम को ले कर रैडलाइट एरिया के उसी मकान पर गया और लकड़ी की बनी सीढि़यों के सहारे झटपट ऊपर पहुंचा और बोला, ‘‘गीता, तुम यहां…’’ और यह कहते हुए उस के करीब जाने लगा, तभी उस ने उसे झटक कर दूर किया और कहा, ‘‘मैं रेशमा हूं.’’

पवन बोला, ‘‘मैं अब तुम्हारी कोई बात नहीं मानूंगा. तुम मेरी गीता हो… केवल मेरी… गीता घर लौट चलो… मैं तुझ से बहुत प्यार करता हूं, मैं तुम्हें वह हर खुशी दूंगा जो तुम चाहती हो. अब और झूठ मत बोलो.

‘‘मैं जानता हूं कि तुम गीता हो, तुम अपने पवन के पास वापस लौट आओ. तुझे उस प्यार की कसम जो शायद थोड़ा भी कभी तुम ने किया हो. यहां पर तुम्हारा कोई नहीं है. सब जिस्म के भूखे हैं. चंद सालों में यह सारी चमक खत्म हो जाएगी.’’

गीता भी चिल्लाते हुए बोली, ‘‘पवन, मैं चाह कर भी तुम्हारे साथ नहीं चल सकती. तुम्हारी गीता उसी दिन मर गई थी जिस दिन उस ने यहां कदम रखा था. तुम समझने की कोशिश क्यों नहीं करते हो कि मैं गंदी हो चुकी हूं.’’

पवन उस के और करीब जा कर उस का चेहरा अपने हाथों में ले कर बोला, ‘‘तुम औरत नहीं, मेरी पत्नी हो, तुम कभी गंदी नहीं हो सकती. जहां वह रहती है वो जगह पवित्र हो जाती है, तुम यहां से निकलने की कोशिश तो करो. मैं तुम्हारे साथ हूं. तुम्हारा पवन सबकुछ भुला कर नई जिंदगी की शुरुआत करना चाहता है.’’

गीता भी शायद कहीं न कहीं

इस जिंदगी से तंग आ चुकी थी.

पवन की बातों से वह जल्दी ही टूट गई. वे दोनों एकदूसरे से लिपट गए और फफक कर रो पड़े.

पवन और गीता अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने वहां से वापस चल दिए.

मैडम उन को जाते देख बोली, ‘‘जहां न कानून कुछ कर पाया और न ही समाज, वहां इस के प्यार की ताकत ने वह कर दिखाया जो नामुमकिन था. सच में… ऐसा प्यार कहां…’’

सोलमेट: भाग 1- शादी के बाद निकिता का प्रेमी ने उसके साथ क्या किया?

‘‘आज संडे को सुबह सवेरे ही अपने पति प्रणय को फोन में घुसे देख मैं ने उन्हें शरारतभरे अंदाज में अपनी ओर खींचते हुए कहा, ‘‘यह सुबहसुबह मोबाइल में क्या देखने लग गए तुम?’’ ‘‘अरे, कुछ नहीं, वह मेरे बौस का मैसेज है. अरजैंट मीटिंग रखी है, जाना पड़ेगा मु झे,’’ कह कर वे झटके से उठ कर बाथरूम में घुस गए. बाहर निकल कर कहने लगे कि नाश्ता नहीं करूंगा, टाइम नहीं है, इसलिए जल्दी से बस चाय बना दो. प्रणय के औफिस जाने की सुन कर वैसे ही मेरा चेहरा उतर चुका था, सो मैं भुनभुनाते हुए किचन में घुस गई. ‘‘लेकिन तुम ने तो कहा था इस संडे तुम पूरा दिन मेरे साथ बिताओगे?’’ किचन से ही पलट कर मैं ने पूछा, ‘‘कहा था न कि तुम मु झे अघोरा मौल शौपिंग कराने ले चलोगे. हम फिल्म देखेंगे, बाहर ही डिनर करेंगे यानी तुम ने सब झूठ कहा,’’ मैं ने मुंह बनाया. प्रणय हंस पड़ा, ‘‘अरे, नहीं बाबा… मैं ने तुम से कोई झूठ नहीं कहा. सच कहता हूं, मेरा भी मन था तुम्हारे साथ टाइम स्पैंड करने का.

लेकिन बौस ने अरजैंट मीटिंग रख दी तो क्या करें,’’ प्रणय ने बेचारगी दिखाते हुए कहा, तो मु झे और गुस्सा आ गया कि कैसा इंसान है यह. बोल नहीं सकता कि छुट्टी के दिन नहीं आ सकता, घर में भी काम होते हैं. ‘‘मन तो करता है तुम्हारे उस खूंसट बौस को भरभर कर गालियां दूं. अरे, खुद की बीवी तो है नहीं तो क्या जाने वह दूसरों की फिलिंग्स को. बोलते क्यों नहीं कि तुम कोई गुलाम नहीं हो उस के, जो जब बुलाए जाना पड़ेगा.’’ ‘‘गुलाम तो मैं तुम्हारा हूं माई सोलमेट. लेकिन रोटी का सवाल है न बाबा. नहीं कमाऊंगा तो खाऊंगा क्या? फिर मु झे बीवी के टुकड़ों पर पलना पड़ेगा,’’ बोल कर प्रणय हंसा.

मैं ने मुंह बिचका कर कहा, ‘‘ज्यादा कहानियां मत बनाओ? तुम हमेशा ऐसा करते हो. कहते हो नहीं जाऊंगा और चले जाते हो. छुट्टी का सारा मजा किरकिरा कर देते हो.’’ मेरी बात पर प्रणय ने मु झे अपनी बांहों में भरते हुए कहा, ‘‘अच्छा, अब ज्यादा गुस्सा मत करो? मैं जल्द ही लौट आऊंगा. फिर तुम्हें शौपिंग कराने ले चलूंगा. हम फिल्म देखने भी चलेंगे और डिनर भी बाहर ही करेंगे, अब खुश?’’ ‘‘प्रौमिस?’’ मैं ने हाथ आगे बढ़ाते हुए कहा. ‘‘पक्का प्रौमिस,’’ बोल कर प्रणय फटाफट तैयार हो कर औफिस के लिए निकल गए. गाड़ी में बैठते हुए मु झे इशारे से कहा कि मैं फोन करूंगी तो तुम तैयार रहना. प्रणय को ‘बाय’ बोल कर अभी मैं बालकनी से हाल में आई ही थी कि मेरे फोन की घंटी बजी. मु झे लगा प्रणय का ही फोन होगा. शायद वे अपना वालेट या कोई फाइल भूल गए होंगे घर पर. लेकिन फोन किसी अननोन नंबर से था.

इसी नंबर से कल भी फोन आया था मेरे फोन पर लेकिन मैं ने उठाया नहीं क्योंकि बेकार में लोग फोन करकर के कुछ भी ज्ञान बघारने लगते हैं कि आप यह स्कीम ले लो, वह लोन ले लो, बहुत फायदा है इस में वगैरहवगैरह. कैसेकैसे ठग हो गए हैं दुनिया में कि पूछो मत. फोन से ही लोगों का अकाउंट खाली कर देते हैं. अभी परसों ही मैं ने अखबार में पढ़ा था कि एक रिटायर्ड शिक्षक के फोन पर किसी अननोन नंबर से फोन आया. उस आदमी ने बताया वह बैंक से बोल रहा है क्रैडिट कार्ड संबंधी कुछ जानकारी चाहिए. शिक्षक ने जानकारी दे दी और फिर मिनटों में उस के अकाउंट से क्व85 हजार रुपए गोल हो गए. मु झे सम झ नहीं आता कि इतना ठगी के मामले सामने आने के बाद भी लोग अलर्ट क्यों नहीं हैं? उस रिटायर्ड टीचर ने अगर उसे कुछ न बताया होता, तो उस के पैसे तो बच जाते न. ठग लोग ऐसे ही होते हैं. कोई बैंकर बन कर लोगों को फंसाता है तो कोई किसी कंपनी का कस्टमर केयर अधिकारी बन कर लोगों को चुना लगा डालता है. लोगों को अपने जाल में फंसाने के इन के पास कई तरीके होते हैं

. वे कहते हैं न चोर के चौरासी बुद्धि. नयानया रास्ता खोज ही निकालते हैं ये लोगों को ठगने का. खैर, मैं तो भई सतर्क रहती हूं. खुद पर गर्व महसूस करते हुए गाना गुनगुनाते हुए किचन में अपने लिए कौफी बनाने जाने ही लगी कि मेरा फोन फिर बजा. फोन उसी नंबर से था इसलिए मैं ने इग्नोर किया. लेकिन बारबार जब उसी नंबर से फोन आने लगा तो लगा हो सकता अपने किसी पहचान वाले का ही फोन हो. इसलिए इस बार मैं ने फोन उठा लिया. अभी मैं ने ‘हैलो’ कहा ही कि सामने वाले के मुंह से अपना ‘निक नेम सुन कर मैं चौंकी क्योंकि इस नाम से मु झे 1-2 लोग ही बुलाते थे जो मेरे काफी करीब थे. ‘‘जी, कौन बोल रहे हैं आप?’’ मैं ने सवाल किया. सामने वाला आदमी हंसते हुए बोला, ‘‘तुम्हारा सोलमेट. पहचाना मु झे?’’ बोल कर वह ठहाके लगा कर जोर से हंसा. उस की हंसी सुन कर मेरे चेहरे का भाव ही बदल गया क्योंकि यह आदमी कोई और नहीं बल्कि, मेरा पुराना प्रेमी ऋतिक था. ‘‘तुम? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मु झे फोन करने की?’’ बोल कर मैं उस का फोन काटने ही लगी कि… ‘‘नहींनहीं, निक्की डियर, इस बार फोन काटने की गलती मत करना. वरना तुम सोच भी नहीं सकती मैं क्या कर सकता हूं.

वैसे तुम्हारे पति का नंबर है मेरे पास,’’ बोल कर वह फिर हंसा, तो मेरा खून खौल उठा. ‘‘चाहते क्या हो तुम?’’ मैं एकदम से चीख पड़ी. फिर सोचा कि मैं ने तो इस का नंबर ब्लौक कर दिया था. लेकिन लगता है इस बार इस ने मु झे किसी दूसरे नंबर से फोन किया और मैं पहचान न सकी, गलती हो गई मु झ से, ‘‘अब क्या चाहिए तुम्हें बोलो?’’ ‘‘पैसे वे भी पूरे क्व20 लाख,’’ बेशर्म की तरह हंसते हुए ऋतिक बोला कि पैसे के साथ वह मेरा इंतजार करेगा. उसी होटल के रूम नंबर 102 में, जहां हम अकसर मिलते थे. ‘‘क्व20 लाख? तुम्हारा दिमाग तो नहीं खराब हो गया? कहां से लाऊंगी मैं क्व20 लाख? औरऔर मैं क्यों आऊं तुम से मिलने?’’ ‘‘तुम्हें आना तो पड़ेगा निक्की डीयर और वे भी पूरे क्व20 लाख के साथ वरना तुम जानती हो मैं क्याक्या कर सकता हूं. न… न… मेरी बात को गीदड़ भभकी मत सम झना. सच बता रहा हूं, तुम्हारी सारी तसवीरें, जो तुम ने मेरे साथ खिंचवाई थी, फोन चैंटिंग और हां, हमारे प्राइवेट पल के वीडियोज, जो मैं ने अपने फोन में सेव कर रखे हैं प्यारीप्यारी इमोजी के साथ तुम्हारे पति के व्हाट्सऐप पर सैंड कर दूंगा.

फिर न कहना कि बताया नहीं. एक और बात, इस बार मेरे फोन को ब्लौक करने की गलती तो बिलकुल भी मत करना डियर निक्की जान,’’ बोल कर एक खतरनाक हंसी के साथ ऋतिक ने फोन रख दिया. मैं वहीं सोफे पर धम्म से बैठ गई. मेरा दिमाग सुन्न हो चुका था. कुछ सम झ नहीं आ रहा था कि अब मैं क्या करूं? कहीं सच में इस ने हमारी वे सारी तसवीरें और प्राइवेट पल के वीडियो प्रणय को भेज दिए तो क्या होगा. प्रणय तो मु झे अपनी जिंदगी से धक्के मार कर बाहर निकाल देंगे और मांपापा भी मु झे माफ नहीं करेंगे. ओह, अब क्या करूं मैं? अपना सिर पकड़ कर रो पड़ी मैं. तभी फिर मेरा फोन बजा. फोन उठाते ही मैं झल्ला पड़ी, ‘‘देखो, मैं तुम्हें आखिरी बार सम झा रही हूं. मैं सच में तुम्हारी पुलिस में कंप्लेन कर दूंगी… प्लीज, मु झे परेशान करना बंद करो.’’ ‘‘अरे, निकिता क्या हुआ तुम्हें? कौन परेशान कर रहा है मेरी जान को?’’ जब फोन पर प्रणय की आवाज सुनी तो मैं सकते में आ गई. ‘‘तुम, वह… वह मु झे लगा कि फिर… किसी कंपनी वाले ने फोन किया है,’’ मैं ने झट से बात बदली, ‘‘देखो न, ये कंपनी वाले भी न अजीब हैं. कब से फोन करकर के मु झे परेशान कर रहे हैं.’’ ‘‘अरे, तो फोन उठाओ ही मत न.

अच्छा, चलो मैं आता हूं,’’ कह कर प्रणय ने फोन रख दिया और कुछ ही समय में वह मेरे सामने थे. प्रणय को देखते ही मैं उन की बांहों में सिमट गई. मन से काफी डरी हुई थी मैं. मु झे यों अपने इतने करीब पा कर प्रणय शरारत से बोले, ‘‘क्या बात है अगर मु झे पता होता कि मेघ बरसने को तैयार हैं तो मैं औफिस जाता ही नहीं, कोई बहाना बना देता.’’ ‘‘तो बनाया क्यों नहीं?’’ मैं ने उन्हें प्यार से धक्का दिया. ‘‘पता नहीं था न कि आज तुम मूड में हो,’’ प्रणय हंसे. ‘‘ज्यादा बनो मत… और आज तो तुम्हारी कोई अरजैंट मीटिंग थी फिर इतनी जल्दी कैसे आ गए?’’ मेरी बात पर प्रणय बोले कि मैं ने जो उस के बौस को भरभर गालियां दीं उन से वह डर गया. ‘‘मजाक मत करो… बोलो न जल्दी कैसे आ गए?’’ मेरी बात पर वे कहने लगे, ‘‘दरअसल, आज जिस क्लाइंड के साथ मीटिंग होने वाली थी वह किसी कारणवश आ नहीं पाया, इसलिए मीटिंग कैंसिल हो गई. ‘‘अच्छा हुआ,’’ मैं ने छुटकारे की सांस ली. ‘‘छोड़ो वे सब बातें. देखो, मैं, ‘ड्रीम गर्ल 2’ के 2 टिकट ले आया हूं. कब से तुम कह रही थी न तुम्हें ‘ड्रीम गर्ल 2’ देखनी है. चलो, अब जल्दी से तैयार हो जाओ क्योंकि 12 बजे का ‘शो’ है और 11 बजने को हैं. जाने में भी तो समय लगेगा न. अपनी कलाईघड़ी पर नजर डालते हुए प्रणय बोले. मगर अब मेरा मन फिल्म देखने का जरा भी नहीं हो रहा था. लग रहा था बस प्रणय मेरे पास ही बैठे रहें और मैं उन के कंधे पर सिर टिकाए सुकून से आंखें बंद कर सो जाऊं. ‘‘अरे, अब बैठेबैठे क्या सोचने लग गई तुम? तैयार हो जाओ भई,’’ प्रणय ने टोका तो मैं उठ कर कमरे में आ गई. अलमारी से मैरून रंग का कुरताप्लाजो निकाला, मैचिंग इयरिंग्स पहने, लिपस्टिक लगाई, बालों को खुला ही छोड़ दिया और बाहर आ गई. प्रणय ने मु झे भरपूर नजरों से देखा और मुसकरा कर बाहर निकल गए.

मैं भी दरवाजा लौक कर उन के पीछेपीछे चल पड़ी. मु झे साड़ी पहनना ज्यादा पसंद है पर उस में समय लगता है, इसलिए मैं ने कुरताप्लाजो ही पहन लिया. गाड़ी में बैठे खिड़की से बाहर झांकते हुए सोचने लगी कि अगर ऋतिक ने प्रणय को सबकुछ बता दिया तो अनर्थ हो जाएगा. नहींनहीं, ऐसा तो नहीं करेगा वह. सिर्फ मु झे डरा रहा है, लेकिन बता दिया तो क्या होगा. मेरे मन में सवालों का तांता लगा था और जवाब कुछ भी नहीं था मेरे पास. ‘‘ओ मैडमजी, आप ने क्या मु झे अपना ड्राइवर सम झ लिया है?’’ प्रणय की बातों से चौंक कर मैं उन की तरफ देखने लगी. ‘‘हां, आप से ही कह रहा हूं. पति हूं तुम्हारा, बात तो करो मु झ से. पता नहीं क्या सोच रही हो कब से.’’ ‘‘नहीं, कुछ नहीं वह बस… सम झ नहीं आ रहा था क्या कहूं मैं क्यों न कुछ दिनों की छुट्टी ले कर हम कहीं घूमने चलें?’’ ‘‘हां, जा तो सकते हैं पर अभी नहीं क्योंकि अगले महीने से मेरा औडिट शुरू होने वाला है,’’ बोल कर प्रणय ने गाड़ी घुमाई तो मु झे लगा कि वहां ऋतिक खड़ा है. ऋतिक का डर मेरे ऊपर इतना हावी हो चुका था कि हर जगह मु झे वही नजर आ रहा था.

गाड़ी पार्किंग के समय भी मु झे लगा जैसे उस की नजरें मु झ पर ही टिकी हैं. लेकिन यह मेरा भ्रम ही था शायद क्योंकि वह यहां कैसे हो सकता है. वह तो यहां से ढाईतीन हजार किलोमीटर दूर, अपने घर बिहार में रहता है, तो वह यहां कैसे हो सकता है. मैं ने अपने मन को सम झाया. लेकिन फिर लगा नहीं वह तो यहीं इसी शहर में है, तभी तो उस ने मु झे उसी होटल में मिलने बुलाया है. ओह यानी वह मेरा पीछा कर रहा है? मैं तो अब और भी डर गई कि पता नहीं कब प्रणय के सामने मेरा राज खुल जाए और मेरी गृहस्थी तितरबितर हो जाए. इसलिए मैं प्रणय से जिद करने लगी कि हम कहीं घूमने चलते ही हैं. मेरी बात पर प्रणय ने मु झे अजीब नजरों से देखा जैसे कह रहे हों कि मु झे यह अचानक क्या हो गया? क्यों मैं बच्चों की तरह जिद कर रही हूं? लेकिन मैं उन्हें क्या और कैसे बताती कि मैं यहां इस शहर से भगाना चाह रही हूं जितनी जल्दी हो सके. फिल्म अच्छी थी. प्रणय का तो हंसहंस कर पेट ही फूल गया. लेकिन मेरे चेहरे से हंसी गायब थी. मौल में भी मैं ने कुछ नहीं खरीदा, बस विंडो शौपिंग कर लौट आई. होटल में खाना भी बस जरा सा ही खाया. हमें घर आतेआते रात के 10 बज गए. मैं काफी थकी हुई महसूस कर रही थी. तन से नहीं मन से और मन से थका हुआ इंसान खुद को बहुत ही कमजोर महसूस करता है. मैं भी कर रही थी.

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