पति राधव चड्ढा के साथ रोमांटिक डिनर डेट पर गई Parineeti Chopra, देखें फोटो

परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा को काफी लंबे समय बाद मुंबई में एक साथ देखा गया. दोनों ने नवविवाहित जोड़े के रूप में अपना पहला नया साल लंदन और ऑस्ट्रिया में एक साथ मनाया. अभी हाल ही में एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा ने एक्टिंग के साथ-साथ सिंगिग क्षेत्र में भी काम करना चाहती है. यह खबर सुनकर परिणीति के फैंस खुशी से झूम उठे. इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में परिणीति चोपड़ा अपने पति और आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा के साथ दिखाई दीं. परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा का ये वीडियो आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

परिणीति चोपड़ा पति राघव चड्ढा के साथ डिनर डेट

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि परिणीति पति के साथ काफी खुश नजर आ रही है. जहां परिणीति ने पाउडर ब्लू ड्रेस और क्रीमी ओवरकोट पहने देखा गया, वहीं राघव फॉर्मल ब्लैक शर्ट और मस्टर्ड पैंट में नजर आए.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Varinder Chawla (@varindertchawla)

 

परिणीती सिंगिग में रखेंगी कदम

परिणीति रोमांटिक आउटिंग ऐसे समय में हुआ है जब एक्ट्रेस ने गुरुवार को अपने गायन की शुरुआत की घोषणा की. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने एक स्टूडियो में अपने गायन के पर्दे के पीछे की क्लिप साझा कीं. वीडियो में उन्हें 2017 की रोमांटिक फिल्म मेरी प्यारी बिंदु से ‘माना के हम यार नहीं’ गाते हुए भी दिखाया गया है, जिसमें उनके साथ आयुष्मान खुराना भी हैं.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by @parineetichopra

उन्होंने एक भावुक नोट लिखा और बताया कि संगीत हमेशा से उनके लिए खुशी का स्थान रहा है. “संगीत, मेरे लिए, हमेशा मेरी ख़ुशी का स्थान रहा है.. मैंने दुनिया भर के अनगिनत संगीतकारों को मंच पर प्रदर्शन करते देखा है और अब आखिरकार उस दुनिया का हिस्सा बनने का समय आ गया है. मैं अपने जीवन में एक बिल्कुल नया अध्याय शुरू करने के बारे में बहुत भाग्यशाली और धन्य महसूस करती हूं और मैं ईमानदारी से वर्णन नहीं कर सकती कि मैं इस संगीत यात्रा को शुरू करने के लिए कितना उत्साहित हूं.

एकता कपूर के बेटे के बर्थडे पर सजी स्टार किड्स की महफिल, शिल्पा से लेकर तमाम स्टार्स पहुंचे

एकता कपूर ने अपने बेटे रवि के पांचवें जन्मदिन के लिए एक भव्य पार्टी की मेजबानी की और यह सितारों से भरा जश्न था. एकता को टेलीविजन क्वीन कहा जाता है क्योंकि वह एक दशक से अधिक समय से सुपरहिट धारावाहिक देने के लिए जानी जाती हैं. हालांकि, अभिनेत्री ने हमेशा अपने निजी जीवन को मीडिया से दूर रखा, लेकिन 2019 में चीजें बदल गईं और एकता ने सरोगेसी के माध्यम से अपने बच्चे के आगमन के साथ मातृत्व को अपनाने की खुशी साझा की.

एकता कपूर के बेटे रवि कपूर के बर्थडे पर सजी महफिल

एकता कूपर अपने बेटे रवि का 5वा बर्थडे की भव्य पार्टी की मेजबानी की है. इस दौरान एकता के बेटे के बर्थडे पार्टी में शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा अपनी बेटी समीशा शेट्टी के साथ पहुंचे. इस पार्टी में शिल्पा काफी कूल अंदाज में नजर आई और राज कुंद्रा डैशिंग लुक में दिखाई दिए. वहीं समीशा शेट्टी बेहद क्यूट नजर आई.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)

 

करण जौहर के बच्चे रुही और यश

एकता कपूर के बेटे के बर्थडे पार्टी में करण जौहर के क्यूट बच्चे रुही और यश पार्टी में पहुंचे. करण के दोनों ही बच्चे काफी प्यारे लग रहे थे. वहीं इस पार्टी में करण जौहर स्पॉट नहीं किए गए.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)

 

करीना कपूर अपने बेटे जेह अली के साथ नजर आईं

इस पार्टी में करीना कपूर अपने छोटे बेटे जेह के साथ देखा गया. जेह अली खान व्हाइट कलर की शर्ट में नजर आए. जेह बेहद ही क्यूट नजर आ रहे थे.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)

 

दादा और चाचा भी आए नजर

रवि के दादा और चाचा, जीतेंद्र और तुषार कपूर ने अपनी शानदार उपस्थिति से पार्टी की शोभा बढ़ाई. इवेंट से बाहर निकलने के दौरान पपराज़ी के लिए पोज़ देते हुए दोनों डैशिंग और आकर्षक लग रहे थे. जीतेंद्र की सुंदर मुस्कुराहट ने इस अवसर पर खुशी में चार चांद लगा दिए.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Pinkvilla (@pinkvilla)

ये सितारे भी आए नजर

रवि के बर्थडे पार्टी में नेहा धूपिया और अनिता हसनंदानी भी अपने बेटे के साथ पार्टी में पहुंची. पार्टी में झूले के खास अरेंजमेंट किया गया था, जिसपर सभी बच्चों ने जमकर मस्ती की.

जिंदगी का गणित: भाग 1

जिंदगी का गणित सीधा और सरल नहीं होता. वह बहुत उलझा हुआ और विचित्र होता है. रमा को लगा था, सबकुछ ठीकठाक हो गया है. जिंदगी के गणितीय नतीजे सहज निकल आएंगे. उस ने चाहा था कि वह कम से कम शादी से पहले बीए पास कर ले. वह कर लिया. फिर उस ने चाहा कि अपने पैरों पर खड़े होने के लिए कोई हुनर सीख ले. उस ने फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया और उस में महारत भी हासिल कर ली.

फिर उस ने चाहा, किसी मनमोहक व्यक्तित्व वाले युवक से उस की शादी हो जाए, वह उसे खूब प्यार करे और वह भी उस में डूबडूब जाए. दोनों जीवनभर मस्ती मारें और मजा करें. यह भी हुआ. विनोद से उस के रिश्ते की बात चली और उन लोगों ने उसे देख कर पसंद कर लिया. वह भी विनोद को पा कर प्रसन्न और संतुष्ट हो गई पर…

शादी हुए 2 साल गुजरे थे. 7-8 माह का एक सुंदर सा बच्चा भी हो गया था. वह सबकुछ छोड़छाड़ कर और भूलभाल कर अपनी इस जिंदगी को भरपूर जी रही थी. दिनरात उसी में खोई रहती थी. वह पहले एक रेडीमेड वस्त्रों की निर्यातक कंपनी में काम करती थी. जब उस की शादी हुई, उस वक्त इस धंधे में काफी गिरावट चल रही थी. इसलिए उस नौकरी को छोड़ते हुए उसे कतई दुख नहीं हुआ. कंपनी ने भी राहत की सांस ली.

परंतु जैसे ही इधर फिर कारोबार चमका और विदेशों में भारतीय वस्त्रों की मांग होने लगी, इस व्यापार में पहले से मौजूद कंपनियों ने अपने हाथ आजमाने शुरू कर दिए.

राहुल इसी सिलसिले में कंपनी मैनेजर द्वारा बताए पते पर रमा के पास आया था, ‘‘उमेशजी आप के डिजाइनों के प्रशंसक हैं. वे चाहते हैं, आप फिर से नौकरी शुरू कर लें. वेतन के बारे में आप जो उपयुक्त समझें, निसंकोच कहें. मैं साहब को बता दूंगा…

‘‘मैडम, हम चाहते हैं कि आप इनकार न करें, इसलिए कि हमारा भविष्य भी कंपनी के भविष्य से जुड़ा हुआ है. अगर कंपनी उन्नति करेगी तो हम भी आगे बढ़ेंगे, वरना हम भी बेकारों की भीड़ के साथ सड़क पर आ जाएंगे. आप अच्छी तरह जानती हैं, चार पैसे कंपनी कमाएगी तभी एक पैसा हमें वेतन के रूप में देगी.’’

व्यापारिक संस्थानों में आदमी कितना मतलबी और कामकाजी हो जाता है, राहुल रमा को इसी का जीताजागता प्रतिनिधि लगा था. एकदम मतलब की और कामकाजी बात सीधे और साफ शब्दों में कहने वाला. रमा ने उस की तरफ गौर से देखा, आकर्षक व्यक्तित्व और लंबी कदकाठी का भरापूरा नौजवान. वह कई पलों तक उसे अपलक ताकती रह गई.

‘‘उमेशजी को मेरी ओर से धन्यवाद कहिएगा. उन के शब्दों की मैं बहुत कद्र करती हूं. उन का कहा टालना नहीं चाहती पर पहले मैं अपने फैसले स्वयं करती थी, अब पति की सहमति जरूरी है. वे शाम को आएंगे. उन से बात कर के कल उमेशजी को फोन करूंगी. असल में हमारा बच्चा बहुत छोटा है और हमारे घर में उस की देखभाल के लिए कोई है नहीं.’’

चाय पीते हुए रमा ने बताया तो राहुल कुछ मायूस ही हुआ. उस की यह मायूसी रमा से छिपी न रही.

‘‘कंपनी में सभी आप के डिजाइनों की तारीफ अब तक करते हैं. अरसे तक बेकार रहने के बाद  इस कंपनी ने मुझे नौकरी पर रखा है. अगर कामयाबी नहीं मिली तो आप जानती हैं, कंपनी मुझे निकाल सकती है.’’

जाने क्यों रमा के भीतर उस युवक के प्रति एक सहानुभूति सी उभर आई. उसे लगा, वह भीतर से पिघलने लगी है. किसीकिसी आदमी में कितना अपनापन झलकता है. अपनेआप को संभाल कर रमा ने एक व्यक्तिगत सा सवाल कर दिया, ‘‘इस से पहले आप कहां थे?’’

‘‘कहीं नहीं, सड़क पर था,’’ वह झेंपते हुए मुसकराया, ‘‘बंबई में अपने बड़े भाई के पास रह कर यह कोर्स किया. वहीं नौकरी कर सकता था परंतु भाभी का स्वभाव बहुत तीखा था. फिर हमारे पास सिर्फ एक कमरा था. मैं रसोई में सोता था और कोई जगह ही नहीं थी.

‘‘भैया तो कुछ नहीं कहते थे, पर भाभी बिगड़ती रहती थीं. शायद सही भी था. यही दिन थे उन के खेलनेखाने के और उस में मैं बाधक था. वे चाहती थीं कि मैं कहीं और जा कर नौकरी करूं, जिस से उन के साथ रहना न हो. मजबूरन दिल्ली आया. 3-4 महीने से यहां हूं. हमेशा तनाव में रहता हूं.’’

‘‘लेकिन आप तो बहुत स्मार्ट युवक हैं, अच्छा व्यवसाय कर सकते हैं.’’

‘‘आप भी मेरा मजाक बनाने लगेंगी, यह उम्मीद नहीं थी. कंपनी की अन्य लड़कियां भी यही कह कर मेरा मजाक उड़ाती हैं. मुझे सफलता की जगह असफलता ही हाथ लगती है. पिछले महीने भी मैं ज्यादा व्यवसाय नहीं कर पाया था. तब उमेशजी ने बहुत डांट पिलाई थी. इतनी डांट तो मैं ने अपने मांबाप और अध्यापकों से भी नहीं खाई. नौकरी में कितना जलील होना पड़ता है, यह मैं अब जान रहा हूं.’’

मुसकरा दी रमा, ‘‘हौसला रखिए, ऐसा होता रहता है. ऊपर से जो हर वक्त मुसकराते दिखाई देते हैं, भीतर से वे उतने खुश नहीं होते. बाहर से जो बहुत संतुष्ट नजर आते हैं, भीतर से वे उतने ही परेशान और असंतुष्ट होते हैं. यह जीवन का कठोर सत्य है.’’

चलतेचलते राहुल ने नमस्कार करते हुए जब कृतज्ञ नजरों से रमा की ओर देखा तो वह सहसा आरक्त हो उठी. बेधड़क आंखों में आंखें डाल कर अपनी बात कह सकने की सामर्थ्य रखने वाली रमा को न जाने क्या हो गया कि वह छुईमुई की तरह सकुचा गई और उस की पलकें झुक गईं.

‘‘आप मेरी धृष्टता को क्षमा करें, जरूर आप का बच्चा आप की ही तरह बेहद सुंदर होगा. क्या मैं एक नजर उसे देख सकता हूं?’’ दरवाजे पर ठिठके राहुल के पांव वह देख रही थी और आवाज की थरथराहट अपने कानों में अनुभव कर रही थी.

रमा तुरंत शयनकक्ष में चली गई और पालने में सो रहे अपने बच्चे को उठा लाई.

‘‘अरे, कितना सुंदर और प्यारा बच्चा है,’’ लपक कर वह बाहर फुलवारी में खिले एक गुलाब के फूल को तोड़ लाया और रमा के आंचल में सोए बच्चे पर हौले से रख दिया. फिर उस ने झुक कर उस के नरम गालों को चूम लिया तो बच्चा हलके से कुनमुनाया. जेब से 50 रुपए का नोट उस बच्चे की नन्ही मुट्ठी में वह देने लगा तो रमा बिगड़ी, ‘‘यह क्या कर रहे हैं आप?’’

‘‘यह हमारे और इस बच्चे के बीच का अनुबंध है. आप को बीच में बोलने का हक नहीं है, रमाजी,’’ कह कर वह मुसकराया.

‘यह आदमी कोई जादूगर है. कंपनी की अन्य लड़कियों को तो इस ने दीवाना बना रखा होगा,’ रमा पलभर में न जाने क्याक्या सोच गई

घर पर बनाएं कोरियन राइस वाटर स्प्रे, इसके इस्तेमाल से चमक जाएंगे आपके बाल और स्किन

ग्लास स्किन, स्पॉटलेस चेहरे और निखरे रंग की जब भी बात होती है तो कोरियन ब्रांड्स का जिक्र जरूर होता है.कोरिया के लोगों की चमकती स्किन उनकी पहचान है.यही कारण है कि ब्यूटी प्रोडक्ट्स के समंदर में कोरियन ब्यूटी उत्पादों ने अपनी एक अलग और खास पहचान बना ली है.अपने शानदार रिजल्ट के कारण यह लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं.दरअसल, कोरिया के लोग अपनी स्किन और बालों की देखभाल के लिए काफी सचेत रहते हैं.वे ब्रांडेड ब्यूटी प्रोडक्ट्स के साथ ही घर में बने कई डीआईवाई स्प्रे का उपयोग करते हैं.इनमें से सबसे प्रमुख है राइस वाटर.इस नेचुरल राइस वाटर स्प्रे से आपके बाल और स्किन दोनों को ही भरपूर फायदा मिलेगा.इस बजट फ्रेंडली स्प्रे से आपके बाल मजबूत होंगे और स्किन ग्लोइंग बनेगी.

क्यों महत्वपूर्ण है चावल का पानी

चावल का पानी कोरियन लोगों की ब्यूटी प्रोडक्ट श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.इसे बालों और त्वचा के लिए ‘अमृत’ माना जाता है.अमीनो एसिड और कई प्रकार के खनिज और विटामिन से भरपूर राइस वाटर बालों को जड़ों से मजबूत बनाता है.इससे बालों का टूटना, झड़ना, दोमुंह के बालों की समस्या दूर होती है.साथ ही इसके उपयोग से बाल बहुत तेजी से बढ़ते हैं.यह बालों में कोलेजन की मात्रा को बढ़ाने में मदद करता है जिससे बाल मजबूत होते हैं.वहीं चेहरे पर राइस वाटर लगाने से स्किन की झुर्रियां कम होती हैं, दाग धब्बे गायब होते हैं, एक्ने आदि की समस्याएं भी दूर होती हैं.राइस वाटर त्वचा को हाइड्रेट करता है.यह त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद करता है, जिससे त्वचा कोमल और मुलायम बनी रहती है.इसमें एंटीऑक्सीडेंट और अन्य पोषक तत्व होते हैं जो त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाते हैं.यह त्वचा में मेलेनिन की मात्रा को बढ़ाने में मदद करता है.यही कारण है कि इसके उपयोग से चेहरे पर चमक आती है.राइस वाटर त्वचा की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करता है.इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को नुकसान पहुंचाने वाले मुक्त कणों को बेअसर करने में मदद करते हैं.

ऐसे बनाएं राइस वाटर स्प्रे

सबसे पहले आप आधा कप सफेद या ब्राउन राइस लें.ध्यान रखें इसके लिए आप ऑर्गेनिक चावलों का ही उपयोग करें.अब चावलों को अच्छे से धो लें.फिर इन्हें एक अलग कटोरे में निकाल लें.अब चावलों में करीब 2 कप पानी डालें और इन्हें 2 घंटे के लिए छोड़ दें.इसके बाद चावलों को छान लें.इस पानी को किसी भी साफ एयरटाइट कंटेनर या बोतल में स्टोर करें.रातभर इन्हें खमीर उठने के लिए छोड़ दें.खमीर उठने के बाद इसमें एक टीस्पून अरंडी का तेल अच्छे से मिला लें और स्प्रे बोतल में भर लें.तैयार है आपका राइस वाटर स्प्रे।

ऐसे करें इस नेचुरल स्प्रे का उपयोग

यह एक स्प्रे आपके बालों और चेहरे दोनों के काम आएगा.अगर आप इसे बालों के लिए उपयोग में ले रहे हैं तो स्प्रे बोतल को अच्छे से मिक्स करके इसे बालों की जड़ों में स्प्रे करें.अच्छे रिजल्ट के लिए इस स्प्रे का रात में उपयोग करें और रातभर इसे अपना काम करने दें.सुबह आप बाल धो लें.अगर आप चेहरे पर उपयोग करना चाहते हैं तो आप रात को सोने से पहले चेहरे को अच्छे से धो लें.इसके बाद आवश्यकतानुसार राइस वाटर स्प्रे को चेहरे पर लगाएं.रातभर के लिए इसे छोड़ दें.सुबह चेहरा वाॅश कर लें.आपको कुछ ही समय में इसका रिजल्ट नजर आएगा।

मौइस्चराइजर लगाने के बाद भी हाथ ड्राय रहते हैं, मैं क्या करुं?

सवाल

मेरे हाथ काफी रूखे रहते हैं. मौइस्चराइजर लगाने के बाद भी ये सामान्य नहीं दिखते. कोई उपाय बताएं जिस से ये नर्ममुलायम बने रहें?

जवाब-

हाथों की स्किन में औयल ग्लैंड्स नहीं होने के कारण इन्हें औयल देना पड़ता है. इसलिए इन्हें मुलायम और चिकना बनाए रखने के लिए हाथ धोने के बाद हमेशा कोई थिक क्रीम लगाएं. यह आप की त्वचा में औयल को बनाए रखने में मदद करेगी.

आप हाथ धोने के लिए कौन सा साबुन इस्तेमाल करती हैं इस पर भी ध्यान दें. ज्यादातर साबुन आप के हाथों को रूखा बना देते हैं, इसलिए लिक्विड सोप ही बेहतर है. रात को आप थोड़ी सी वैसलीन अपने हाथों पर लगा कर इसे एक ओवरनाइट ट्रीटमैंट की तरह भी इस्तेमाल कर सकती हैं. बस हाथ धोने के बाद इसे अपने हाथों पर लगाएं और कौटन के दस्ताने पहन कर सो जाएं.

ये भी पढ़ें- 

बदलता मौसम सर्दी और गर्मी के बीच की कड़ी है. इस मौसम में तमाम पेड़ नयी कोंपलों की आस में अपने पुराने पत्ते गिरा देते हैं. इस मौसम को पतझड़ का मौसम भी कहते हैं. पतझड़ के महीने में चलने वाली तेज़ हवा जहाँ सुबह-शाम को खुशनुमा बनाती है, वहीँ ये स्किन में रूखापन भी पैदा करती है. हवाओं के कारण होंठ बार-बार ड्राय होते हैं और कभी-कभी तो उनमे गहरी दरारें भी पड़ जाती हैं जो ज़्यादा तकलीफदेय होती हैं.

पतझड़ के मौसम में ड्राय स्किन को स्निग्ध रखने के लिए यदि तेल या क्रीम का इस्तेमाल करें तो हवा में उपस्थित धूलकणों और गर्मी के कारण ये स्किन को और खराब करती है. इन दिनों में सूरज भी अपनी पूरी प्रचंडता दिखाने लगता है, इसकी अल्ट्रावायलेट किरणें स्किन पर मौजूद तेल के साथ मिल कर आपके पूरे कॉम्प्लेक्शन को बर्बाद कर देती हैं.

स्किन में अपनी नमी और कोमलता ही किसी स्त्री के सौंदर्य का आधार है. इस नमी और कोमलता को ड्राय मौसम में भी बनाये रखने के लिए विशेष देखभाल और घरेलू उपचार की आवश्यकता होती है. हर व्यक्ति की स्किन में ड्रायता का पैमाना अलग-अलग होता है. कुछ लोगों की स्किन कम रूखी होती है और कुछ की अधिक. मौसमों के बदलाव के साथ भी ड्रायता कम या ज़्यादा होती रहती है. जब रूखापन बहुत ज़्यादा होने लगे तो उपचार आवश्यक हो जाता है मगर इन उपचारों को जानने से पहले ये जानना बहुत ज़रूरी है कि अत्यधिक रूखेपन के क्या कारण हो सकते हैं.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz   सब्जेक्ट में लिखे…  गृहशोभा-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

Winter Special: सर्दियों में खूबसूरत और फ़ैशनेबल दिखने के लिए ट्राई करें ये आउटफिट्स

वैसे मेरा कहना ग़लत होगा की हम सभी को सर्दियों का मौसम पसंद नहीं है. ठंड का मौसम हर किसी को बहुत लुभाता है. रज़ाई मे बैठकर मूंगफली चबाना हो या सरसों द साग या मक्के की रोटी का मज़ा लेना हो ये सारे मज़े हम सभी सर्दियों मे ही ले सकते है. सर्दियों मे खाने के साथ साथ कपड़े पहने का एक अपना ही एक मज़ा होता है. ठंड मे बच्चे से लेकर बूढ़े , लड़के -लड़कियाँ सारे के सारे ठकपड़ों की खूब सारी लेयर पहने रहते है.  और अगर यहाँ कपड़ों की बात छेड़ ही दी गयी है तो गर्मी हो या सर्दी हम सभी को स्टाइलिश कपड़े पहनने का शौक़ होता है ख़ास कर लेडीस या लड़कीयो दोनो को. इंडिया मे ठंड के मौसम मे कोहरे के साथ साथ शादियां भी खूब होती है. ठंड का टाइम हो और साथ मे हमारे घर मे शादियाँ हो तब तो बहुत बड़ी परेशानी कपड़ों की होतीं है. गर्मियों में शादियों मे लहंगा , साड़ी , बैकलेस चोली या ब्लाऊज जैसे मन चाहे कपड़े पहन लेते है और इस बात का ग़म भी नहीं रहता की हमारे महंगे कपड़े दिख नहीं रहे है. लेकिन सर्दियों मे मेन प्रोब्लम यहीं होती है की कैसे हम सुंदर के साथ -साथ स्टाइलिश भी दिखे और हमें ठंड भी ना लगे , ऐसा होना थोड़ा मुश्किल होता है क्यूँकि यदि आप कोई बहुत सुंदर से साड़ी या ड्रेस पहनते है और साथ मेन उसके शाल या स्वेटर पहन ले तो आपके कपड़ों का सारा लुक ही चला जाता है.

वैसे घबराने की कोई बात नहीं है हम यहां आपको ऐसे ही कुछ स्टाइलिश और फ़ैशनेबल स्वेटर जैकेट के बारे मेन बताएँगे जो आपको इंडीयन और वेस्टर्न लुक दोनो ही दे सके.

1-स्वेटर वाले ब्लाउज

इंडिया मे महिलाओं की  बड़ी समस्या की सर्दियों मे किसी शादी या पार्टी मे साड़ी के साथ ब्लाउज की होती है क्यूँकि गर्मियों मे आप सिंपल ब्लाउज पहन सकती है साड़ी और ब्लाउज दोनो का शो अच्छा आता है लेकिन विंटर मे किसी शादी या पार्टी मे बिना स्वेटर के तो रहना मुश्किल हो जाता है और स्वेटर या शाल से लुक हो जाता है ख़राब इसलिए आप यदि साड़ी पहन्ने के शौक़ीन है तो आज कल स्वेटर वाले ब्लाउज प्रचलन में है आप इसे एक बार ट्राई करिए आपकी साड़ी का लुक बहुत खूबसूरत आएगा और ठंड से बचाव भी होगा.

2-ट्रेंच कोट

अधिकतर महिलायें शादियों मे साड़ियों को पहना पसंद करती है. आप यदि साड़ी पहने के शौकिन है तो सर्दियों में आपको इस बात का ख़ास ध्यान रखे की आप साड़ी मे कुछ ऐसा नया ट्राई करे जिससे आपको ठंड ना लगे उसके लिए आप ट्रेंच कोट साड़ी मे ट्राई कर सकते है. साड़ी के ऊपर ट्रेंच कोट पहने पर साड़ी बहुत ही सुंदर , एलीगेंट लगती है और आप सर्दी से भी बच सकती है.

3-अनारकली स्टाइलिश जैकेट

आप सिर्फ़ साड़ी नहीं इंडो वेस्टर्न ड्रेस को भी पहन सकती है थोड़ा सा चेंज  आपको भी अच्छा लगता है और दूसरों को देखने मे भी. सर्दियों मे आप यदि लहंगा या कोई प्यारी ड्रेस पहन रही है तो आप उसके ऊपर से अनारकली वाली स्टाइलिश जैकेट पहन सकते है जिसका बहुत यूनिक लुक आता है और बहुत ही खूबसूरत लगता है.

4-लेदर जैकेट

लेदर जैकेट का अपना एक अलग ही क़्रेज़ होता है. किसी भी कपड़ों के साथ आपकी ये लेदर जैकेट जंच ही जाती है. लहंगा हों या साड़ी या कोई इंडीयन या वेस्टर्न ड्रेस हो लेदर जैकेट ऊपर से पहन कर आप बहुत स्टाइलिश और अलग लुक देते है इसलिए सर्दियों मे आप लेदर जैकेट को ज़रूर ट्राई करियेगा.

5- वेलवेट या पश्मीना शॉल

यदि लहंगा ,साड़ी या सूट पहनते है आप तो दुप्पटें की बजाय आप वेलवेट या पश्मीना शॉल एक साइड डाल सकती है कुछ अलग दिखेगा और सुंदर भी। वेलवेट या पश्मीना शॉल आपको थोड़ा महंगा पड़ता है लेकिन इसका लुक बहुत अच्छा आता है. इसलिए विंटर मे आप ये ज़रूर ट्राई करिएगा.

6-श्रग

श्रग का अपने आप में ही अलग दिखता है बहुत ही ज़्यादा  स्टाइलिश और यूनिक. इंडियन लुक हो या जींस या वेस्टर्न ड्रेस मे आप श्रग पहने पर आप बहुत ही फ़ैशनेबल दिखती है और विंटर मे बहुत ज़्यादा उपयोगी भी है इसलिए आप अपनी अलमिरा मे इसे रखना ना भूले.

अब आपको परेशान होने की ज़रूरत नहीं होगी. विंटर में आप बस अपनी अलमिरा मे थोड़ा बदलाव लाइए और अपने लुक को चेंज करिए और दिखिए स्टाइलिश और फ़ैशनेबल.

जानें क्या है सीजनल इफेक्टिव डिसओर्डर  

क्या आप सैड यानि सीजनल इफेक्टिव डिसओर्डर के बारे में जानते हैं. जिसे मूड डिसओर्डर के रूप में भी जाना जाता है. जो हर साल एक विशिष्ट समय पर यानि आमतौर पर सर्दियों में ही होता है. जिसे विंटर ब्लूज भी कहते हैं. ये मौसम में आए बदलाव के कारण ही होता है. इसमें प्रभावित व्यक्ति डिप्रेशन, उदासी, नेगेटिव विचारों से घिरना , चिड़चिड़ापन, अत्यधिक थकान , शुगर क्रेविंग्स, रोजमर्रा के कार्यों में दिलचस्पी न लेना, लोगों से बेवजह खुद ब खुद दूरी बनाने लगता है. जिसके कारण वह अंदर ही अंदर इतना परेशान होने लगता है कि उसे समझ ही नहीं आता कि उसके साथ ऐसा क्यों हो रहा है. ऐसे में इस परेशानी की वजह को जानकर इससे समय रहते बाहर निकलना बहुत जरूरी होता है. ताकि व्यक्ति सामान्य जीवन जी सके. तो आइए जानते हैं कैसे-

कैसे पहचाने 

हर समय उदास रहना 

अकसर लोग मौसम में आए बदलाव के बाद जीवन में खुशी का अनुभव करने लगते हैं. सर्दी , गर्मी व मानसून सीजन आते ही वे खुशी से झूम उठते हैं. क्योंकि नई चीज , नया मौसम शरीर में हैप्पी होर्मोन को बढ़ावा देने का काम जो करता है. लेकिन खासकर सर्दियों में जब शरीर को सूर्य की रोशनी नहीं मिल पाती है तो उसे अपनी जिंदगी में अंधेरा , निराशा लगने लगती है. क्योंकि हमारी  किरकाडीएन rhythm का काफी हद तक कंट्रोल सूर्य की रोशनी से जुड़ा होता है. जो हममें खुशी व उदासी जैसे भावों के लिए जिम्मेदार माना जाता है. और इसकी कमी से व्यक्ति खुद को हमेशा उदास उदास  सा फील करने लगता है.

नेगेटिव सोचना 

शरीर में सारा खेल  हार्मोन्स का ही होता है. और जब इन होर्मोन्स में किसी वजह से गड़बड़ी होनी शुरू हो जाती है तो शरीर प्रोपर ढंग से कार्य करने में असमर्थ हो जाता है. ऐसे ही जब शरीर को सूर्य की रोशनी नहीं मिल पाती है तो शरीर में हैप्पी हार्मोन्स के स्तर  में कमी आने लगती है, जो न तो हमें खुश रहने देती है और फिर इसकी वजह से ही हम हर चीज को नेगेटिव नजरिए से देखना शुरू कर देते हैं , जो हमें परेशान करने का काम करती है.

हर काम से मन हटना 

जिस काम को अभी तक हम पूरे मन व लगन से करते थे, लेकिन धीरेधीरे उन चीजों से भी इंटरेस्ट हटना शुरू हो जाता है. ऐसा अकसर शरीर को पर्याप्त रोशनी नहीं मिलने की वजह से होता है. क्योंकि शरीर में विटामिन डी की कमी हमारी हड्डियों को कमजोर बनाने के साथ हमारे एनर्जी लेवल में भी कमी लाती है, जिसकी वजह से हमारा काम से मन हटने लगता है.

शुगर क्रेविंग जब शरीर को प्रोपर सनलाइट नहीं मिल पाती है , तो उससे मेलाटोनिन का लेवल बढ़ता है, जो हमें स्लीपी फील करवाने का काम करता है , तो वहीं सेरोटोनिन के लेवल में गिरावट आने से हमारे मूड पर प्रभाव पड़ने के साथ ये हमारी भूख को बढ़ाने का काम करता है. और ऐसे समय में हम हाई कार्ब्स फूड को ही खाने की इच्छा रखते हैं. जो हमारे वजन व हमारी हैल्थ को भी बिगाड़ने का काम करता है.

लोगों से दूरी बना लेना 

जब शरीर में हैप्पी हार्मोन्स के स्तर में कमी आती है और जिसकी वजह से हम खुद को उदास व नेगेटिव विचारों से घिरा हुआ पाते हैं तो हमें अपने आसपास लोग अच्छे नहीं लगते हैं. हम खुद ही लोगों से दूरी बनाने लग जाते हैं. हम उनकी हर बात को नेगेटिव नजरिए से देखते हैं , जो हमें खुद को लोगों से दूर रखने का काम करता है.

क्या हैं कारण 

किरकाडीएन rhythm – पर्याप्त मात्रा में सूर्य की रोशनी नहीं मिलने से व्यक्ति उदास जैसा फील करने लगता है. ऐसा अकसर  किरकाडीएन rhythm के कारण होता है, जो शरीर में नेचुरल व आतंरिक प्रक्रिया होती है, जो हमारे सोने व उठने के साइकिल को रेगुलेट करने का काम करती है. ये प्रक्रिया लगभग हर 24 घंटे में रिपीट होती है. और जब शरीर को पर्याप्त मात्रा में  सूर्य की रोशनी नहीं मिल पाती है , तो हमारी नींद प्रभावित होने के साथ हमारे मूड पर भी उसका सीधा असर पड़ता है, जो उदासी का एक बड़ा कारण बनता है.

सेरोटोनिन लेवल सन एक्सपोज़र शरीर में सेरोटोनिन के लेवल को रेगुलेट करने में मदद करता है, जिसे खुशी देने वाले होर्मोन के नाम से भी जानते हैं. साथ ही सन एक्सपोज़र की कमी से शरीर में विटामिन डी की भी कमी होने लगती है, जो सीधे तौर पर हमारे में उदासी व हमारे मूड को प्रभावित करने का काम करती है. इससे व्यक्ति ज्यादा नेगेटिव सोचना शुरू कर देता है, जो उसे डिप्रेशन की ओर धकेलने का काम करता है.

मेलाटोनिन लेवल मौसम में आए बदलाव के कारण  शरीर में मेलाटोनिन का लेवल प्रभावित होने के कारण हमारी नींद, मूड और हमारी ओवरआल परफोर्मन्स प्रभावित होती है. क्योंकि मेलाटोनिन होर्मोन हमारी नींद को सुचारू बनाने के लिए जिम्मेदार माना जाता है. लेकिन जब सर्दियों में सूर्य की पर्याप्त रोशनी नहीं मिलने के कारण यानि अकसर पूरे दिन बादल छाए रहने के कारण शरीर में मेलाटोनिन का उत्पादन काफी ज्यादा होने लगता है, तो पूरे दिन नींद आने के साथ हम कार्यों के प्रति इनएक्टिव होने लगते हैं , जो हमारी प्रोडक्टिविटी पर प्रभाव डालने का काम करती है.

क्या है समाधान 

नेचुरल लाइट  सैड यानि सीजनल इफेक्टिव डिसओर्डर से निबटने के लिए जितना संभव हो सके नेचुरल लाइट के संपर्क में रहें. इसके लिए सर्दियों में आप घर को धूप के समय खोलकर रखें, ताकि जितनी भी नेचुरल लाइट घर में आ सके आ पाएं. साथ ही कोशिश करें कि आप नेचुरल लाइट यानि सन एक्सपोज़र के लिए थोड़ी देर धूप में जरूर जाएं , ताकि आप सीजनल   इफेक्टिव  डिसओर्डर से खुद को दूर करने में कामयाब हो सकें.

अवोइड कार्ब्स अनेक रिसर्च के अनुसार, जो भी लोग  सीजनल  इफेक्टिव  डिसओर्डर की समस्या को फेस कर रहे होते हैं , उन लोगों में शुगर व कार्ब रिच फूड खाने की क्रेविंग ज्यादा बढ़ती हैं. इसलिए जरूरी है हैल्दी डाइट से खुद को अधिक ऊर्जावान बनाने के लिए.  विटामिन डी सप्लीमेंट भी इस तरह के डिप्रेशन से लड़ने में सहायक साबित होता है. इसलिए अच्छा खाकर आप खुद को हैल्दी रखें.

एक्टिव रहें   सीजनल इफेक्टिव डिसओर्डर के लिए हमारे आलस व थकान को भी जिम्मेदार माना जाता है. इसलिए अपने एनर्जी लेवल को बूस्ट करने व मूड को ठीक करने के लिए फिजिकल एक्टिविटी को रेगुलर अपने रूटीन में शामिल करना जरूरी है.  विंटर्स में घर में ही न रहें बल्कि कवर करके बाहर भी निकलें और मौसम का मजा लेते हुए खुद को अच्छा फील करवाएं. इससे आप काफी हद तक खुद को  सीजनल  इफेक्टिव  डिसओर्डर से दूर रख सकते हैं.

Winter Special: घर पर बनाएं कुरकुरी और हेल्दी मिस्सी रोटी

मिसी रोटियां राजस्थानी भोजन का आम भाग है. इन्हें तीखी सब्जी या चटपटी लौंजी के साथ परोसकर स्वादिष्ट व्यंजन बनाएं.

सामग्री

1 कप गेहूं का आटा

आधा कप बेसन

आधा टी-स्पून अजवायन

एक टी-स्पून जीरा

एक चुटकी हींग

नमक स्वादअनुसार

4 टी-स्पून पिघला हुआ घी

विधि

सभी सामग्री को एक गहरे बाउल में मिला लें और जरुरत अनुसार पानी का प्रयोग कर सख्त आटा गूंथ लें. आटे को 10 भाग में बांट लें.

थोड़े सूखे आटे का प्रयोग कर, प्रत्येक भाग को गोल आकार में बेल लें. एक नॉन-स्टिक तवा गरम करें और थोड़े घी का प्रयोग कर, प्रत्येक रोटी को दोनों तरफ से सुनहरा होने तक पका लें. गरमा गरम परोसें.

व्रत: भग 3- क्या वर्षा समझ पाई पति की अहमियत

लेखक-अमृत कश्यप

मुसीबत की रात समाप्त होने को नहीं आती. उस ने बड़ी मुश्किल से वह रात काटी और सुबह ही सुबह पति को देखने के लिए अस्पताल दौड़ पड़ी. अपने साथ वह चाय और ब्रैड भी ले गई. पति की बीमारी में उसे पूजापाठ करने का होश भी न रहा. जब अनिल ने उस से पूछा कि आज वह पूजा पर क्यों नहीं बैठी और चाय बना कर कैसे ले आई है तो उस ने कहा, ‘‘पूजापाठ तो बाद में भी हो जाएगा, पहले मुझे तुम्हारी सेहत की चिंता है.’’ अब अनिल ठीक होता जा रहा था. वह अभी हिलनेडुलने के योग्य तो नहीं हुआ था किंतु उसे 5 दिन के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई और वर्षा अपने पति को घर ले आई. अनिल ने अपने मातापिता को इस दुर्घटना के बारे में कोई खबर न होने दी थी. उस का खयाल था कि इस से वे बेकार परेशान होंगे.

दूसरे दिन मंगलवार था. अनिल ने कहा, ‘‘वर्षा, तुम तो हनुमानजी का व्रत रखोगी ही, आज मैं भी व्रत रखूंगा. क्या पता बजरंगबली मुझे जल्दी अच्छा कर दें.’’

‘‘नहींनहीं, तुम कमजोर हो, तुम से व्रत नहीं रखा जाएगा.’’ ‘‘इतनी कमजोर होने पर तुम सारे व्रत रख लेती हो तो क्या मैं एक व्रत भी नहीं रख सकता? मैं आज अवश्य व्रत रखूंगा.’’

‘‘मेरी बात और है, तुम्हारे शरीर से इतना खून निकल चुका है कि उस की पूर्ति करने के लिए तुम्हें डट कर पौष्टिक भोजन करना चाहिए, न कि व्रत रखना चाहिए,’’ वर्षा ने तर्क दिया.

‘‘तुम मुझे धार्मिक कार्य करने से क्यों रोकती हो? क्या तुम नास्तिक हो? फिर बजरंगबली मुझे कमजोर क्यों होने देंगे? मैं खाना न खाऊं, तब भी वे अपने चमत्कार से मुझे हट्टाकट्टा बना देंगे,’’ अनिल ने मुसकरा कर कहा.

‘‘अब तो तुम मेरी बातें मुझे ही सुनाने लगे. मैं कह रही हूं कि अभी तुम्हारे शरीर में इतनी शक्ति नहीं है कि व्रत रख सको. जब हृष्टपुष्ट हो जाओगे तो रख लेना व्रत,’’ वर्षा ने तुनक कर कहा.

‘‘मैं कुछ नहीं जानता. मैं तो आज हनुमानजी का व्रत अवश्य रखूंगा.’’ वर्षा के अनुनयविनय के बाद भी अनिल ने कुछ नहीं खाया और व्रत रख लिया. यद्यपि वर्षा ने स्वयं व्रत रखा था, पति के व्रत रखने पर उसे गहरी चिंता हो रही थी. वह सोच रही थी कि अनिल के शरीर में खून की कमी है, खाली पेट रहने से और नुकसान होगा. यदि डाक्टर के दिए कैप्सूल और दवाएं खाली पेट दी जाएंगी तो लाभ की जगह हानि हो सकती है. वह करे तो क्या करे?

उस ने कहा, ‘‘अब तुम खाली पेट कैप्सूल कैसे खाओगे?’’

‘‘मैं दवा भी नहीं खाऊंगा. जैसा कड़ा व्रत तुम रखा करती हो, वैसा ही मैं भी रखूंगा. आखिर बजरंगबली इतना भी नहीं कर सकते हैं?’’ अनिल ने दृढ़ता से कहा.

‘‘देखो जी, तुम्हें कुछ हो गया तो?’’

वर्षा अपनी बात पूरी न कर पाई थी कि अनिल ने टोकते हुए कहा, ‘‘तो भी क्या होगा? यदि मैं व्रत रख कर मर गया तो मोक्ष प्राप्त होगा, जन्ममरण के बंधन से मुक्त हो जाऊंगा.’’

‘‘ऐसा न कहो जी, जब तुम ही न रहोगे तो मेरी सुध लेने वाला कौन है इस संसार में?’’

‘‘क्यों, तुम्हारे भोलेभंडारी तुम्हें खानेपीने को देंगे, साईं बाबा तुम्हें सहारा देंगे, महालक्ष्मी तुम्हारे ऊपर धन की वर्षा करेंगी. और निर्मल बाबा, आसाराम बापू, श्रीश्री रविशंकर, रामदेव, अम्मा हैं न तुम्हारी देखभाल के लिए. इस के अतिरिक्त और भी देवीदेवता हैं. क्या वे तुम्हारी सहायता नहीं करेंगे?’’ अनिल ने हंसते हुए कहा.

‘‘अजी, छोड़ो जी, वे क्या करेंगे? मेरे लिए तो सबकुछ तुम ही हो.’’

‘‘किंतु मैं तुम्हारे देवीदेवताओं से तो बड़ा नहीं हूं.’’

‘‘हो. मेरे लिए तुम से बढ़ कर कोई नहीं है.’’

‘‘तो आज तक तुम ने मेरी जो उपेक्षा की है, व्रत रखरख कर जो मुझे असंतुष्ट रखा है और…’’

वर्षा को यह एहसास हो गया था कि उस ने अपने पति की परवा न कर के भारी भूल की है और अब उस के तीर उसी पर छोड़े जा रहे हैं. उस ने जरा सी देर के लिए वहां से हट जाना उचित समझा. जिस व्यक्ति के शरीर में रक्त की मात्रा बहुत कम हो, उस का व्रत रखना उचित नहीं होता. दोपहर तक अनिल भूख महसूस करने लगा और उस की आंखें बंद होने लगीं. वर्षा घबरा गई और उस ने पति से व्रत तोड़ने को कहा, किंतु अनिल अपनी जिद पर अड़ा रहा. शाम तक उस की हालत चिंताजनक हो गई. वर्षा ने जबरदस्ती उस का व्रत तुड़वाना चाहा, किंतु उस ने कहा, ‘‘मैं मर जाऊंगा, लेकिन व्रत नहीं तोड़ूंगा. अब तो रात को ही व्रत पूरा कर के कुछ खाऊंगा.’’ जब वर्षा ने बहुत जिद की तो अनिल ने कहा, ‘‘यदि तुम अपना व्रत तोड़ने को तैयार हो तो मैं भी तोड़ लूंगा.’’ पहले तो वह राजी नहीं हुई, फिर अपने पति की हालत देखते हुए उस ने व्रत तोड़ लिया. इस के बाद उस ने अनिल के सामने कुछ फल रख दिए. अनिल ने कहा, ‘‘वर्षा, मेरी एक बात का जवाब दो. तुम ने अपना व्रत क्यों तोड़ा?’’

‘‘तुम्हारे लिए.’’

‘‘क्यों? मेरे लिए यह पाप क्यों किया तुम ने?’’

‘‘मुझे इस समय व्रत से अधिक तुम्हारी चिंता है.’’

‘‘इस का मतलब यह हुआ कि मैं हनुमानजी से श्रेष्ठ हूं?’’

‘‘इस समय तो ऐसा ही समझ लो. तुम्हारी सेहत है तो सबकुछ है.’’

‘‘अब तुम्हारी समझ में मेरी बात आई है. मैं कई महीनों से तुम्हें समझाता रहा, किंतु तुम हमेशा ही मेरी बात की अवहेलना करती रहीं. मेरी सुखसुविधा पर ध्यान न दे कर व्रत रखती रहीं. अब तुम्हें मेरी सेहत की चिंता क्यों सता रही है? यह ठीक है कि तुम ने व्रत तोड़ डाला है, किंतु मैं तोड़ने को तैयार नहीं हूं.’’ अनिल ने गंभीर हो कर कहा.

‘‘तब तो तुम्हारी हालत और ज्यादा खराब हो जाने का डर है,’’ वर्षा ने चिंतित हो कर कहा.

‘‘ऐसा होना तो नहीं चाहिए. आज तक तुम ने पुण्य कमाने के लिए सैकड़ों व्रत रखे हैं. क्या तुम्हारे देवीदेवता तुम्हारे सुहाग की रक्षा भी नहीं करेंगे?’’

एक घंटे बाद अनिल की हालत और खराब हो गई. उस ने आंखें फेर लीं और बहुत निढाल हो गया. अब वह ठीक से बोल भी नहीं पा रहा था. कई बार उसे बेहोशी के दौरे भी पड़ चुके थे. वर्षा रोने लगी. उस के हाथपांव फूल गए. वह अपने किए पर पछताने लगी कि उस ने व्रत रखरख कर अपने पति की उपेक्षा की है. उसे कोई सुख नहीं दिया. वह पश्चात्ताप की आग में जलने लगी कि उस के व्यर्थ के अंधविश्वास से उस का पति दुखी रहा. वे सच कहा करते थे कि औरत के लिए पति सबकुछ होता है. पत्नी को उसी की सेवा करनी चाहिए और उसे प्रसन्न रखने की चेष्टा करनी चाहिए. अनिल में अब बोलने की भी शक्ति नहीं रही थी. वह उसी प्रकार अर्धचेतनावस्था में लेटा रहा. वर्षा ने चुपकेचुपके उस के मुंह में मौसमी का रस डाला और अनिल ने थोड़ी देर बाद आंखें खोल दीं. वह वर्षा की आंखों में देखने लगा जिन में पश्चात्ताप के आंसू साफ दिखाई दे रहे थे. अनिल मुसकराने लगा.

अब टीवी पर धार्मिक सीरियल नहीं चलते, गानों के और न्यूज चैनल चलते हैं. उन्होंने फर्टिलिटी क्लिनिक में जाना शुरू कर दिया और 2 माह में ही वर्षा गर्भवती हो गई थी. उस की फैलोपियन ट्यूब में कोई सूजन थी. वहां देवीदेवता नहीं, वायरस बैठा था जो दवा से गायब हो गया.

हमसफर: भाग 3- पूजा का राहुल से शादी करने का फैसला क्या सही था

शादी के 5 माह बाद अचानक ही राहुल की सेहत तेजी से गिरनी शुरू हो गई. राहुल का वजन कम हो रहा था. उस के चेहरे की जर्दी बढ़ रही थी और यह देख कर घर के लोग परेशान थे.

‘‘राहुल की सेहत लगातार खराब हो रही है बहू, पता नहीं क्या बात है. वह काफी लापरवाह किस्म का इनसान है. तुम ही उसे किसी अच्छे डाक्टर को दिखलाओ,’’ आखिर एक दिन सास शकुंतला ने पूजा को कह ही दिया. उस के कहने के अंदाज से पता चलता था कि वह बेटे की गिरती सेहत को स्त्रीपुरुष के सेक्स संबंधों से जोड़ कर देख रही थीं.

पूजा को इस से हैरानी नहीं हुई थी. वह जानती थी कि राहुल की गिरती सेहत को देख कर लोग ऐसा ही सोच सकते थे. अब किसी को क्या मालूम अधिक सेक्स तो एक तरफ, उन में तो सेक्स संबंध बना भी नहीं था.

अपने सारे मनोभावों को छिपाते हुए पूजा ने सास से कहा, ‘‘आप ठीक कह रही हैं मांजी, मैं कल ही इन्हें किसी अच्छे डाक्टर को दिखलाने ले जाऊंगी.’’

अगले दिन राहुल को साथ ले कर किसी डाक्टर के पास जाने का दिखावा करती हुई पूजा घर से बाहर निकली. किंतु किसी डाक्टर के यहां जाने के बजाय उन्होंने 2-3 घंटे एक मौल में बिताए.

थकावट होने पर उन दोनों ने मौल के रेस्तरां में बैठ कर कोल्ड डिं्रक पी और साथ में हलका सा फास्ट फूड भी लिया.

रेस्तरां में बैठे थकीथकी आंखों से पूजा को देखते हुए राहुल ने कहा, ‘‘हम जो कर रहे हैं क्या वह अपनों के साथ धोखा नहीं?’’

‘‘नहीं, मैं नहीं मानती कि हम किसी को कोई धोखा दे रहे हैं,’’ पूजा ने जवाब दिया.

‘‘एड्स से रोजाना दुनिया में सैकड़ों लोग मरते हैं. अगर मैं भी मर जाऊंगा तो कौन सी अनोखी बात होगी? मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि तुम मेरी बीमारी को छिपा कर क्यों रखना चाहती हो? एकदम से मेरी मौत के सदमे को झेलने से बेहतर होगा कि हकीकत को जान कर मां, बाबूजी, रश्मि और दूसरे लोग मेरी मौत के सदमे को झेलने के लिए खुद को पहले से ही तैयार कर लें.’’ राहुल ने भारी आवाज में कहा.

‘‘मैं भी ऐसा ही चाहूंगी. मगर तुम को एड्स है, मैं ऐसा कभी जाहिर नहीं होने दूंगी. ऐसी दूसरी लाइलाज बीमारियां भी तो हैं जिन से इनसान की मौत यकीनी होती है, जैसे कैंसर. किंतु कैंसर की मौत एड्स से होने वाली मौत से कहीं अधिक सम्मानजनक है. कैंसर डरावना है और एड्स बदनाम. एड्स के बारे में लोगों में अनेक गलतफहमियां हैं. इसलिए कैंसर से तो केवल इनसान मरता है लेकिन एड्स से मरने वाले इनसान के परिवार की उस के साथ ही सामाजिक मौत हो जाती है.

एड्स से मरने वाले इनसान के परिवार को लोग शक और घृणा की नजरों से देखते हुए एक तरह से उस का सामाजिक बहिष्कार कर देते हैं. मैं नहीं चाहती कि तुम्हारे बाद तुम्हारे अपनों के साथ कुछ ऐसा हो. एक एड्स संक्रामक व्यक्ति की पत्नी होने के कारण समाज में मेरी क्या स्थिति होगी इस की शायद तुम ठीक से कल्पना भी नहीं कर सकते. हमारे विवाहित जीवन के अंदरूनी सच को दुनिया तो नहीं जानती. मैं एक शापित जीवन बिताऊं, ऐसा तो तुम भी नहीं चाहोगे,’’ राहुल का हाथ अपने हाथ में लेते हुए पूजा ने कहा.

राहुल की समझ में आने लगा था कि पूजा उस की बीमारी को किन कारणों से छिपा कर रखना चाहती थी. उस की सोच में केवल आज नहीं, आने वाला कल भी था.

जैसेजैसे वक्त करीब आ रहा था राहुल अंदर से टूट रहा था. अपने प्यार से पूजा टूट रहे राहुल को सहारा देने की कोशिश करती.

डाक्टर को दिखलाने की बात कह कर पूजा राहुल को साथ ले कर घर से बाहर जाती. किसी पार्क या रेस्तरां में 2-3 घंटे बिता कर दोनों वापस आ जाते. राहुल एड्स की दवाएं ले रहा था, मगर वे बेअसर हो रही थीं.

ऐसी स्थिति बन रही थी कि पूजा को लग रहा था कि उस को राहुल की बीमारी को ले कर एक और झूठ बोलना ही होगा.

एक रोज मांजी ने पूजा को हाथ से पकड़ अपने पास बिठा लिया और बोलीं, ‘‘राहुल की यह कैसी बीमारी है बहू जो ठीक होने का नाम ही नहीं ले रही? तुम जरूर मुझ से कुछ छिपा रही हो. मुझ को किसी धोखे में मत रखो. मैं राहुल की बीमारी का सच जानना चाहती हूं.’’

‘‘मैं आप से कुछ भी छिपाना नहीं चाहती, मांजी, लेकिन सच बड़ा ही निर्मम और कठोर है. आप सुन नहीं सकेंगी. आप के बेटे को कैंसर है,’’ हिम्मत कर के पूजा को जो कहना था उस ने कह दिया.

उस के शब्द जैसे बम बन कर मांजी के सिर पर फूटे. सदमे में अपना माथा पकड़ते हुए वह सोफे पर लुढ़क सी गईं.

उधर सच को छिपाने के लिए पूजा ने जो झूठ बोला उस का चेहरा छिपाए गए सच से कम डरावना नहीं था.

पूजा के द्वारा राहुल की बीमारी को कैंसर बतलाने के बाद घर का सारा माहौल ही गमगीन और मातमी हो गया था.

मांजी, बाबूजी और रश्मि की आंखों में से बहने वाले आंसू जैसे थम नहीं रहे थे. कोई ठीक से खा नहीं रहा था. कैंसर का भी दूसरा नाम मौत ही तो था. जब मौत का पहरा बैठ गया हो तो किसी को चैन कैसे आ सकता था?

अंत शायद बहुत करीब था. राहुल का शरीर इतना कमजोर हो गया था कि कई बार बाथरूम तक जाने के लिए उसे पूजा के सहारे की जरूरत पड़ती.

पूजा किसी तरह भी कमजोर नहीं पड़ना चाहती थी. हालांकि राहुल की बातें कभीकभी उस को कमजोर करने की कोशिश जरूर करती थीं.

मांजी और बाबूजी बेटे की हालत देख उस को किसी अस्पताल में दाखिल कराने की बातें करते.

लेकिन पूजा इस से मना कर देती.

‘‘इस से कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि कैंसर अपने अंतिम स्टेज में है. अस्पताल में रेडियो थेरैपी से इन की जिंदगी और ज्यादा कष्टपूर्ण हो जाएगी. मैं ऐसा नहीं चाहती,’’ पूजा उन से कहती.

राहुल की अंदर को धंसती निस्तेज आंखें और पीला चेहरा खामोश जबान में बतलाने लगे थे कि उस के जीवन की टिमटिमाती लौ किसी भी घड़ी बुझ सकती थी.

एक रात अचानक राहुल ने पूजा के हाथों को अपने हाथों में लेते हुए वे शब्द कहे तो पूजा को लगा वह घड़ी कुछ फासले पर ही है.

‘‘शायद मेरा वक्त आ गया है मेरे हमसफर. मेरी जिंदगी के उदास सफर में हमसफर बनने के लिए शुक्रिया. दुनिया और समाज कुछ भी समझे, मगर हम दोनों जानते हैं कि हमारे बीच में पतिपत्नी नहीं, दो इनसानों का रिश्ता है. इसलिए मेरे मरने के बाद कभी अपनेआप को विधवा मत मानना. अपने लिए जो भी विकल्प ठीक लगे उसी को चुनना.’’

राहुल के उक्त शब्द पूजा के मर्म को चीर गए.

बड़ी मुश्किल से उस ने खुद को संभाला था.

राहुल ने पूजा से कमरे की खिड़की खोलने का अनुरोध किया और यह भी कहा कि वह उस के पास बैठी रहे.

खिड़की के बाहर चांद चमक रहा था. रात ढल रही थी.

राहुल की बेचैनी भी लगातार बढ़ रही थी.

पूजा हौसला देने वाले अंदाज से बीचबीच में उस के ललाट पर अपना हाथ फेर देती थी. डाक्टर के बताए अनुसार उस ने राहुल को दवा दी तो उस ने आंखें बंद कर लीं.

बैठेबैठे ही न जाने कब पूजा को कुछ मिनटों के लिए नींद की झपकी आ गई.

झपकी जब टूटी तो सब खत्म हो चुका था. राहुल की खुली आंखें पथरा चुकी थीं.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें