विश्वासघात: सीमा के कारण कैसे टूटा प्रिया का घर

प्रिया ने पालने में सोई अपनी नवजात बच्ची को मुसकराते देखा तो वह भी मुसकरा दी. प्रिया उस में अपना और निर्मल का अक्स ढूंढ़ने की कोशिश करने लगी. निर्मल को एक बेटी की चाह थी जबकि वह बेटा चाहती थी, क्योंकि वह निर्मल के व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित थी. प्रिया एक छोटे शहर में पलीबढ़ी थी. इकलौती संतान होने के कारण मातापिता की दुलारी थी. निर्मल की बूआ उन के पड़ोस में रहती थीं. वे ही निर्मल का रिश्ता उस के लिए लाई थीं. निर्मल मुंबई में मल्टीनैशनल कंपनी में काम करते थे. उन के मातापिता कार दुर्घटना में चल बसे थे. उन के जाने के बाद बूआ ने ही उन की परवरिश की थी. प्रिया के मातापिता को निर्मल पसंद थे, इसलिए चट मंगनी और पट ब्याह कर दिया.

शादी के 1 हफ्ते बाद प्रिया निर्मल के साथ मुंबई आ गई. निर्मल एक अपार्टमैंट में 7वीं मंजिल पर 3 कमरों के फ्लैट में रहते थे. शादी के बाद दोनों ने फ्लैट को बड़े जतन से सजाया. निर्मल अपने नाम के अनुसार स्वभाव से बहुत ही निर्मल थे. उन में बिलकुल बनावटीपन नहीं था. कुछ ही समय बाद प्रिया ने निर्मल को 2 से 3 होने की खुशखबरी सुना दी. दोनों बहुत खुश थे. अब निर्मल उस का बहुत ध्यान रखने लगे थे. उसी दौरान निर्मल के प्रमोशन ने उन की खुशी को दोगुना कर दिया. परंतु काम की जिम्मेदारी बढ़ने की वजह से अब वे ज्यादा व्यस्त रहने लगे.

प्रिया दिन भर अकेले काम करते थक जाती थी, इसलिए दोनों ने एक बाई रखने का फैसला किया. महानगर मुंबई में लोग बहुत व्यस्त रहते हैं. किसी को किसी से कोई लेनादेना नहीं होता. अंतर्मुखी होने के कारण प्रिया भी ज्यादातर घर में ही रहती थी. इसीलिए उन्होंने बिल्डिंग के सिक्योरिटी गार्ड से बाई ढूंढ़ने के लिए मदद मांगी. कुछ ही दिन बाद उस ने एक बाई को भेजा. लगभग 30 साल की दुबलीपतली रमा बाई को उन्होंने मामूली पूछताछ के बाद काम पर रख लिया. रमा बाई ने बताया कि वह पास की बिल्डिंग में और 3 घरों में काम करती है. उसके 2 बच्चे हैं. पति स्कूल में चपरासी है. इस से अधिक जानने की उन्होंने जरूरत नहीं समझी.

रमा बाई सुबह 8 बजे काम पर आती और करीब 10 बजे तक काम निबटा कर चली जाती. जब वह काम करने आती तब निर्मल के औफिस जाने का समय होता था, इसलिए प्रिया ज्यादातर निर्मल के लिए नाश्ता और टिफिन तैयार करने में व्यस्त होती थी. धीरेधीरे रमा बाई घर की सदस्य जैसी बन गई. वह प्रिया के छोटेमोटे कामों जैसे बाजार से दूधसब्जी लाने में मदद करने लगी. अब अकसर प्रिया का मौर्निंग सिकनैस की वजह से जी मचलाने लगा और उस के लिए खाना बनाना मुश्किल होने लगा. यह देख कर एक दिन रमा बाई ने उस के आगे एक प्रस्ताव रखा. बोली, ‘‘मैडमजी, मेरी एक छोटी बहन है. बेचारी गूंगी है, शादी नहीं हो पाई, इसलिए हमारे साथ ही रहती है. अगर आप कहें तो जब तक आप की डिलिवरी नहीं हो जाती आप उसे खाना बनाने और दूसरे कामों के लिए रख लें. आप को जो ठीक लगे उसे दे देना. सुबह मैं साथ ले आया करूंगी और शाम को साथ ले जाया करूंगी.’’

प्रिया और निर्मल को उस की बात जंच  गई, इसलिए उन्होंने हां कह दिया. अगले ही दिन रमा बाई अपने साथ 22-23 वर्ष की लड़की को ले आई. उस ने उस का नाम सीमा बताया. सीमा देखने में बहुत सुंदर थी. प्रिया को उस के गूंगे होने पर बहुत तरस आया. सीमा उन के घर खाना बनाने का काम करने लगी. वह सभी काम बहुत अच्छे तरीके से व समय से पहले कर देती. वह प्रिया को समय से फल काट कर खिलाती, समय पर खाना खिलाती. पतिपत्नी दोनों सीमा के काम से बेहद खुश थे. कभीकभी निर्मल को औफिस के काम से बाहर जाना पड़ता. तब प्रिया सीमा को रात को घर पर रोक लेती. सीमा निर्मल का कुछ विशेष ही ध्यान रखती थी, परंतु प्रिया को इस में कोई बुराई नजर नहीं आई, इसलिए उस ने उस पर कुछ ज्यादा ध्यान नहीं दिया. फिर उन दिनों अकसर तबीयत खराब रहने के कारण वह परेशान भी रहती थी.

हालांकि प्रिया को सीमा का निर्मल के बूट पौलिश करना और बाथरूम में कपड़े रखना शुरू से अखरता था, परंतु दूसरे ही क्षण वह इसे नारीसुलभ जलन समझ कर भूल जाती. कभीकभी तो उसे अपने इस विचार पर खुद पर शर्म महसूस होती कि एक गूंगी लड़की पर शक कर रही है. इस बीच प्रिया का चौथा महीना शुरू हो गया था. उस दिन निर्मल औफिस की फाइलें घर ले आए थे और आते ही ड्राइंगरूम में टेबल पर सभी फाइलें फैला कर काम करने बैठ गए. प्रिया की तबीयत सुबह से ही ठीक नहीं थी, इसलिए उस ने सीमा को रात को घर पर रोक लिया. खाना खा कर वह बैडरूम में आराम करने लगी और निर्मल अपना काम निबटाने में व्यस्त हो गए.

करीब रात के 1 बजे कुछ आवाजों से उस की नींद टूट गई. निर्मल बिस्तर पर नहीं थे. उन के तेजतेज बोलने की आवाज आ रही थी. वह ड्राइंगरूम की ओर तेज कदमों से भागी. वहां का दृश्य देख कर अवाक रह गई. सीमा एक ओर खड़ी रो रही थी. उस के कपड़े अस्तव्यस्त और कई जगह से फटे थे. प्रिया को देख कर निर्मल हकबका कर सफाई देने लगे, ‘‘प्रिया, मैं ने कुछ नहीं किया. यह अचानक आ कर मुझ से लिपट गई. जब मैं ने इसे पीछे धकेला तो इस ने अपने कपड़ों को फाड़ना शुरू कर दिया.’’

सीमा लगातार रोए जा रही थी. वह प्रिया के गले से लिपट गई. उस की हालत देख कर प्रिया का चेहरा तमतमा उठा. उस के अंदर की औरत जैसे जाग उठी. बोली, ‘‘मुझे आप से कतई यह उम्मीद नहीं थी कि आप इतना गिर जाएंगे.’’ ‘‘प्रिया, यह झूठी है… मैं सच कह रहा हूं… मैं ने कुछ नहीं किया,’’ निर्मल लगातार अपनी सफाई दे रहे थे. ‘‘सचाई सामने है और फिर भी आप…छि:,’’ कहते हुए वह सीमा को अपने बैडरूम में ले आई. प्रिया ने उसे पानी पिलाया और किसी तरह चुप करवाया.

‘‘सीमा, मैं बहुत शर्मिंदा हूं…प्लीज मुझे माफ कर दो,’’ प्रिया ने सीमा के आगे हाथ जोड़ते हुए कहा.

प्रिया मन ही मन खुद को उस का कुसूरवार मान रही थी, क्योंकि उसी के कहने पर उस पर विश्वास कर सीमा रात को रुकी थी. फिर उस ने उसे अपने साथ ही सुला लिया. अगले दिन रमा बाई के आते ही सीमा ने रोरो कर और इशारों से उसे सब कुछ बता दिया. वह बारबार निर्मल की ओर इशारा कर के रो रही थी. उस की हालत देख कर रमा बाई ने हंगामा खड़ा कर दिया. उस ने उन के सामने ही पुलिस को फोन कर दिया. प्रिया और निर्मल ने उसे रोकने का भरसक प्रयत्न किया. ‘‘क्या मैडमजी, तुम भी अपने आदमी को बचाना चाहती हो? सीमा की जगह तुम्हारी बहन होती तब क्या करतीं?’’ रमा बाई गुस्से से बोली.

10 मिनट में पुलिस की वरदी में 1 आदमी उन के सामने खड़ा था. निर्मल उसे और रमा बाई को अपनी सफाई देते रहे, पर दोनों ने उन की एक न सुनी. प्रिया दोनों हाथों से सिर पकड़े वहीं सोफे पर चुपचाप बैठी रही. पुलिस वाले ने निर्मल को थाने चलने को कहा. निर्मल बहुत घबरा गए. वे मिन्नत करने लगे. आखिर उस पुलिस वाले ने 50 हजार पर रमा बाई और निर्मल में समझौता करवा दिया. अचानक बच्ची के रोने की आवाज से प्रिया की तंद्रा भंग हो गई. वह भूतकाल से वर्तमान में लौट आई. वह उठ कर बैठने का प्रयास करने लगी. तभी बाहर से निर्मल उस के मातापिता के साथ कमरे में दाखिल हुए और उन्होंने लपक कर बच्ची को गोद में उठा लिया. अपने मातापिता को देख कर प्रिया के पीले पड़े चेहरे पर खुशी फैल गई.

‘‘अरे हमारी गुडि़या अपने नानानानी के पास आने के लिए रो रही है,’’ प्रिया की मां ने निर्मल से बच्ची को अपनी गोद में लेते हुए कहा.

‘‘प्रिया, कैसी हो?’’ बाबूजी ने उस के सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए पूछा.

‘‘बिलकुल ठीक हूं,’’ प्रिया ने मुसकरा कर उत्तर दिया.

‘‘तुम ने जूस नहीं लिया…यह लो जूस पी लो,’’ निर्मल ने जूस का गिलास उस के हाथ में थमा दिया.

प्रिया धीरेधीरे जूस पीने लगी. निर्मल के माथे पर बालों की एक लट झूलती बड़ी अच्छी लग रही थी. पिछले 2 दिनों से वे अकेले भाग दौड़ कर रहे थे. नर्स बता रही थी कि एक क्षण के लिए भी उन्होंने पलक नहीं झपकी. मां की गोद में गुडि़या सो गई थी. उसे पालने में लिटा कर मां ने उस के हाथ से जूस का खाली गिलास ले लिया.

‘‘नींद आ रही है…तू भी सो जा. मैं तेरे लिए नाश्ता बना कर लाती हूं,’’ फिर उस के बाबूजी से बोली, ‘‘आप भी नहा लीजिए. निर्मल बेटा, तुम किचन में सामान निकालने में मेरी मदद कर दो. मैं नाश्ता बनाती हूं. फिर सब साथ मिल कर बैठेंगे,’’ कहते हुए मां कमरे से बाहर निकल गईं. प्रिया को बहुत कमजोरी महसूस हो रही थी. पिछले 5 महीने उस ने बड़े ही कष्ट से काटे थे. वह मानसिक और शारीरिक यातना से गुजरी थी. सीमा वाले हादसे के बाद वह निर्मल के साथ एक छत के नीचे रहना नहीं चाहती थी, परंतु आने वाले बच्चे के भविष्य और मांबाबूजी के खयाल से उस ने चुप्पी साध ली. आज भी वह यह सोच कर कांप जाती है कि अगर उस ने अलग होने का फैसला कर लिया होता और अपने मायके लौट जाती तब कितना बड़ा अनर्थ हो जाता. वह तो गनीमत थी कि डाक्टर की सलाह मान कर उस ने रोज पार्क जाना शुरू कर दिया था. वहीं उस की मुलाकात तनु से हुई. तनु उस के साथ स्कूल में पढ़ती थी. एक दिन उस ने बताया कि उस ने घर के काम के लिए एक लड़की रख ली है जो गूंगी है, तो प्रिया का दिल जोर से धड़कने लगा.

‘‘क्या नाम है उस का?’’ कांपते होंठों से प्रिया ने पूछा.

‘‘सीमा, बेचारी बोल नहीं सकती. मेरी बाई को बहन है,’’ तनु ने जवाब दिया.

प्रिया का दिल अनजाने डर से कांप उठा. उसे लगा कि अगर तनु को पता चल गया तो क्या सोचेगी उस के पति के चरित्र को ले कर. प्रिया ने तनु से मेलजोल कम कर दिया. तनु का फोन भी वह नहीं उठाती. लगभग 2 महीने बीत गए.

फिर एक दिन कैमिस्ट की दुकान पर तनु उस से टकरा गई. उस का रंग पीला हो गया था. वह कुछ बुझीबुझी सी थी. उस ने पहले की तरह उस से बातचीत करने में कोई उत्सुकता नहीं दिखाई. औपचारिकता के नाते उस ने उस से बातचीत की. उस के होंठों से हंसी जैसे गुम ही हो गई थी. 2 ही दिन बाद तनु उसे फिर से पार्क में मिल गई. वह बहुत उदास और बीमार सी लगी. प्रिया इस का कारण पूछे बिना रह नहीं सकी. थोड़ी सी नानुकर के बाद तनु टूट गई. उस ने रोतेरोते अपना दुख बांटा जिसे सुन कर प्रिया सकते में आ गई.  तनु ने उसे जो कुछ बताया वह हूबहू उस की कहानी से मिलता था. तनु के मोबाइल में सीमा का फोटो था, इसलिए उस के प्रति उस का संदेह गहरा हो गया.

उस ने अपनी आपबीती तनु को सुनाई. तब दोनों ने तय किया कि वे सीमा के बारे में पता लगाएंगी और फिर एक दिन वे दोनों सीमा और रमा बाई के बारे में पूछतेपूछते उन के घर जा पहुंचीं. बाहर गली में ही उन्होंने भीड़ लगी देखी. पानी भरने के लिए औरतें आपस में लड़ रही थीं. ‘‘तुम दोनों बहनें अपने को समझती क्या हो?’’ पानी की बालटी पकड़े एक औरत बोली.

‘‘खबरदार, जो कोई आगे आया, काट कर फेंक दूंगी सब को,’’ दूसरी आवाज आई. तनु और प्रिया वहीं रुक उन की लड़ाई देखने लगीं. दोनों यह देख कर हैरान रह गईं कि सीमा फर्राटे से बोल रही थी.

‘‘सब से पहले हम दोनों पानी भरेंगी. तुम सब चुडै़लें सुबहसुबह हमारा दिमाग क्यों खराब कर रहीं,’’ सीमा चिल्ला रही थी.

तनु प्रिया का हाथ पकड़ उसे खींचते हुए गली से बाहर ले आई.

‘‘यह सीमा गूंगी नहीं है. देखा कैसे फर्राटे से बोल रही है,’’ प्रिया ने कहा.

‘‘हां प्रिया, इस का मतलब इन दोनों ने जो हमारे साथ किया वह सोचीसमझी साजिश के तहत किया,’’ तनु ने गुस्से से कहा.

‘‘हमें इन्हें सबक सिखाना होगा, लेकिन कैसे, समझ नहीं आ रहा ,’’ प्रिया बोली.

‘‘चलो हम इन्हें पुलिस के हवाले करते हैं,’’ तनु ने प्रिया का हाथ पकड़ते हुए कहा.

‘‘लेकिन इस से पहले हमें इन के खिलाफ सुबूत इकट्ठे करने होंगे.’’ घर आ कर उन्होंने अपनेअपने पतियों को सारा माजरा समझाया. फिर सब ने मिल कर फैसला किया कि वे पुलिस के साथ मिल कर उस के सहयोग से इन्हें पकड़वाएंगे. फिर चारों थाने में गए और अपने साथ हुई ठगी की आपबीती सुनाई. पुलिस ने सब से पहले मालूम किया कि वे दोनों फिलहाल कहां काम कर रही हैं. उन्हें पता चला कि वे अभी किसी नवदंपती के घर पर ही काम कर रही हैं. तब पुलिस ने उस दंपती के साथ मिल कर उन का भांडा फोड़ने की योजना बनाई. संयोग से उन के घर में सीसीटीवी कैमरा लगा था. कुछ ही दिनों में रमा बाई और सीमा ने वहां भी ऐसा ही खेल खेला, परंतु कैमरे में उन की सारी हरकत कैद हो गई और जो आदमी पुलिस की वरदी में आया वह रमा बाई का शराबी पति था जो पहले दंपती को डराताधमकाता था और फिर पैसे ले कर समझौता करवाता था. उन तीनों को ठगी करने के जुर्म में जेल हो गई. प्रिया की मां उस के लिए नाश्ता ले आई थीं. उन्होंने प्रिया के सिर पर प्यार से हाथ रखा तो प्रिया मुसकरा दी.

शरीर में हो रहे इन बदलावों को भूलकर भी न करें इग्नोर, हो सकते हैं हार्ट अटैक के ये संकेत

हार्ट अटैक एक बहुत ही गंभीर समस्या है. इस स्थिति में धमनियां ब्लॉक हो जाती हैं और ह्दय की मांसपेशियों में ब्लड फ्लो ठीक से नहीं हो पाता, ऐसे में क्लॉटिंग होना शुरू हो जाती  है. इस क्लॉटिंग की वजह से खून को ह्दय तक पहुंचने में कठिनाई होती है और इसे ऑक्सीजन नहीं मिल पाती.  वैसे हार्ट अटैक के एक लक्षण से हम सभी लगभग वाकिफ हैं.

अचानक और तेजी से सीने में दर्द होना और दर्द हाथ से नीचे तक फैल जाना. लेकिन हार्ट अटैक की स्थिति के लिए केवल इस एक संकेत को ही समझना काफी नहीं है बल्कि और भी कई ऐसे चेतावनी संकेत हैं, जो हार्ट अटैक के लिए जिम्मेदार हैं. नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट के अनुसार, यूएस में लगभग 5.7 मिलियन लोगों को हार्ट फेलियर की समस्या है. वर्तमान में इसका कोई खास इलाज नहीं है, लेकिन जीवनशैली में बदलाव और दवाओं जैसे उपचार जीवन की गुणवत्ता के मामले में बदलाव ला सकते हैं. कई स्थितियों के लिए आप इसके संकेतों को जितनी जल्दी समझ लेंगे, उतनी ही जल्दी इसे नियंत्रित किया जा सकेगा. यहां ऐसे 6 संकेत दिए गए हैं, जो बताएंगे कि आपका दिल अब पहले की तरह काम नहीं कर रहा और यह स्थिति हार्ट अटैक की संभावना को बढ़ा रहे है. तो आइए जानते हैं हार्ट अटैक के 6 मुख्य संकेतों के बारे में.

1. सांस न ले पाना-

जब कार्यक्षमता की बात आती है, तो दिल और फेफड़ों का बहुत अहम रोल होता है. दिल का दाहिना भाग ऑक्सीजन की कमी वाले ब्लड को लेता है और उसे फेफड़ों में पंप करता है, ताकि उसे ऑक्सीजन की ताजगी मिल सके. डॉक्टर कहते हैं कि सांस की परेशानी हार्ट अटैक का मुख्य संकेत है. इसका मतलब है कि आप कितनी भी गहरी सांस लें, आपको ऐसा नहीं लगता कि आपको पर्याप्त ऑक्सीजन मिल रही है.

2. पैरों में सूजन आ जाना-

जब आपका दिल ठीक से काम नहीं करता, तो यह लंग्स में कम ब्लड पंप करता है . इसका असर सबसे पहले आपके शरीर के निचले हिस्से में दिखाई देता है, जिसे एडिमा भी कहते हैं. यह आपके पैरों को प्रभावित करता है. यदि आप सूजी हुई उंगली को दबाते हैं और इसका असर कई सैकंड तक रहता है, तो यह एडिमा का संकेत है.

3. अचानक वजन बढ़ जाना-

अगर आपका वजन तेजी से बढ़ रहा है, तो इसे फैट समझने की गलती मत कीजिए. हो सकता है कि आपके पेट में किसी तरह के तरल पदार्थ का निर्माण हो रहा हो. विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसा अचानक हो सकता है कि कुछ ही दिनों में आपका वजन पांच किलो तक बढ़ जए.

4. हर समय थकावट महसूस करना-

हार्ट फेलियर के दौरान शरीर जिस तरह से कंपेन्सेट करता है, ब्लड को मास्तिष्क और मांसपेशियों में पहुंचने में दिक्कत होती है. इससे कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है.

5. भ्रमित महसूस करना-

हार्ट फेल की समस्या सकुर्लेशन के कारण होती है. जब आपके मास्तिष्क में ठीक से ब्लड नहीं पहुंच पाता, तो आपको हल्के चक्कर , एकाग्रता में कमी और भ्रमित होने का अनुभव कर सकते हैं. गंभीर मामलों में आपको बेहोशी जैसी महसूस हो सकती है.

6. हमेशा हाथ और पैरों का ठंडा रहना-

लोगों के हाथ और पैर ठंडे होना आम बात है. लेकिन अगर अचानक से आपके हाथ और पैर ठंडे हो गए हैं और मौजे पहनने के बाद भी यह गर्म नहीं हो रहे, तो यह हार्ट फेलियर का संकेत हो सकता है. डॉक्टर्स का कहना है कि इस तरह के लक्षणों से बचने के लिए रात में अपना सिर ऊपर उठाकर सोएं, ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं और धूम्रपान से परहेज करें.

यदि हार्ट अटैक के लक्षण मामूली हैं, तो आपको जितनी जल्दी हो सके दिल की जांच करानी चाहिए. इससे आप दिल के दौरे से काफी हद तक बच सकते हैं.

हमसफर: भाग 1- पूजा का राहुल से शादी करने का फैसला क्या सही था

शादी में बस चंद दिन ही रह गए थे. पिछली बार जब पूजा अपने मंगेतर राहुल से मिली थी तो दोनों में यह तय हुआ था कि शादी के करीब होने से उन को अब मुलाकातों का सिलसिला रोक देना चाहिए. यह दुनियादारी के लिहाज से ठीक भी था.

इस आपसी फैसले को अभी कुछ ही दिन बीते थे कि पूजा के पास राहुल का फोन आ गया. उस ने कहा, ‘‘पूजा, मैं आप से मिलना चाहता हं. कल शाम को 5 बजे मैं लाबेला कौफी हाउस में आप का इंतजार करूंगा. कुछ ऐसी बातें हैं जो शादी से पहले मेरे लिए आप को बतलाना बहुत जरूरी है.’’

‘‘क्या इन बातों को कहने के लिए शादी तक इंतजार नहीं हो सकता?’’

‘‘नहीं, ऐसी बातें शादी से पहले बतला देना जरूरी होता है.’’

मंगेतर के फोन से बेचैन पूजा को अगले दिन के इंतजार में रात भर नींद नहीं आई. आखिर क्या बतलाना चाहता था वह शादी से पहले उस को? अपने किसी अफेयर के बारे में तो नहीं? अगर इस तरह की कोई बात थी तो पहले की इतनी मुलाकातों में राहुल ने उस को क्यों नहीं बतलाई? अब जबकि शादी की तारीख बिलकुल सिर पर आ गई तो इस तरह की बात उस को बतलाने का क्या तुक और मकसद हो सकता था?

पूजा खुद से ही तरहतरह के सवाल लगातार पूछती रही.

दूसरे दिन शाम को राहुल से मिलने के लिए घर से निकलते वक्त पूजा ने सुषमा भाभी को ही इस बारे में बतलाया. ‘लाबेला’ कौफी हाउस में पूजा पहले भी 2-3 बार राहुल के साथ बैठ चुकी थी. अत: उम्मीद के अनुसार राहुल कौफी हाउस में बाईं तरफ वाले कोने की एक मेज पर बैठा उस के आने का इंतजार कर रहा था.

टेबल की तरफ बढ़ती हुई पूजा तनाव और अनिश्चितता से घिर गई. बैठते ही बोली, ‘‘मैं सारी रात सो नहीं सकी. ऐसी क्या बात थी जो आप फोन पर नहीं कह सकते थे? मेरे मन में कई तरह के विचार आते रहे.’’

‘‘किस तरह के विचार?’’ राहुल ने पूछा. वह काफी थकाथका नजर आ रहा था.

‘‘मैं सोचती रही, शायद आप शादी से पहले अपने किसी अफेयर के बारे में मुझ से कुछ कहना चाहते हैं,’’ पूजा ने अपने मन की बात कह दी.

‘‘एक लड़की होने के नाते आप इस से ज्यादा शायद सोच भी नहीं सकतीं.’’

‘‘फिर आप ही बतलाएं वह ऐसी कौन सी बात है जिसे कहने के लिए आप शादी तक इंतजार नहीं कर सकते थे?’’

‘‘इंतजार में शायद बहुत देर हो जाती.’’

‘‘राहुल, आप की बातें पहेली जैसी क्यों हैं? जो भी आप कहना चाहते हैं खुल कर क्यों नहीं कहते?’’

‘‘अगर इस समय मैं आप से यह कहूं कि मैं आप से शादी नहीं कर सकता तो आप को कैसा लगेगा?’’ राहुल ने कहा.

‘‘मैं समझूंगी कि आप अच्छा मजाक कर लेते हैं.’’

‘‘मैं मजाक कभी नहीं करता,’’ राहुल ने कहा.

उस के शब्दों में छिपी संजीदगी से पूजा जैसे ठिठक सी गई. उसे सारी उम्मीदें और सपने बिखरते हुए लगे.

‘‘शादी से इनकार तो आप पहले दिन भी कर सकते थे, अब जब शादी की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. इस इनकार का मतलब?’’ सदमे की हालत में पूजा ने पूछा.

‘‘शायद अपनी झूठी और खोखली खुशियों की खातिर मैं आप की जिंदगी बरबाद नहीं कर सकता,’’ शून्य में देखते हुए राहुल ने कहा.

‘‘बहुत खूब, आप को लगता है कि शादी के टूटने से मैं आबाद हो जाऊंगी,’’ पूजा ने कहा.

‘‘इनकार के पीछे की सचाई को जानने के बाद शायद आप को ऐसा ही लगे.’’

‘‘कैसी सचाई?’’

‘‘एक ऐसी सचाई जो पिछले 2 महीनों से मेरी अंतरात्मा को कचोट रही है. मैं आप को किसी धोखे में नहीं रखना चाहता. मुझे इस बात की भी परवा नहीं कि सच को जानने के बाद आप मुझ से नफरत करेंगी या हमदर्दी. असलियत यह है पूजा कि मैं एच.आई.वी. पोजिटिव हूं, मुझ को एड्स है. मौत मेरे काफी करीब है,’’ वीरान आंखों से पूजा को देखते हुए राहुल ने शांत स्वर में कहा.

पूजा को ऐसा लगा जैसे उस के सिर पर कोई बम फटा हो. गहरे सदमे की हालत में हक्कीबक्की सी वह राहुल के चेहरे को देखती रह गई. एक खौफ का सर्द एहसास पूजा को अपनी रगों में उतरता महसूस हुआ.

यह देख राहुल के अधरों पर एक फीकी मुसकराहट की रेखा खिंच गई. वह बोला, ‘‘अब मैं ने जब इस बदनाम और जानलेवा बीमारी का जिक्र आप से कर ही दिया है तो इस को ले कर जरूर आप के दिमाग में कुछ सवाल उठ रहे होंगे. सब से बड़ा सवाल तो यही होगा कि मुझ में ऐसी लाइलाज बीमारी आई कहां से? शायद आप को ऐसा लग रहा होगा कि मैं ने गंदी बाजारू औरतों से सेक्स संपर्क कर के इस बीमारी को अपने खून में दाखिल किया है. मगर ऐसा नहीं है. मैं ने कभी भी किसी औरत से सेक्स संपर्क नहीं किया. यह बीमारी तो उस संक्रामक खून का नतीजा है जो 2 वर्ष पहले एक एक्सीडेंट के बाद डाक्टरों की लापरवाही से मुझ को चढ़ा दिया गया था. मौत चुपके से मेरी धमनियों में उतर गई और मुझ को इस का पता भी नहीं चला.

‘‘मैं लगातार मौत के करीब जा रहा हूं, मगर मेरे घर के लोगों को मेरी बीमारी की कोई जानकारी नहीं. इसलिए जो हुआ उस में उन का जरा भी कुसूर नहीं. मैं भी असलियत को भूल कर कुछ समय के लिए स्वार्थी हो गया था मगर मेरी अंतरात्मा लगातार मुझ को कचोटती रही. यह शादी एक धोखे और पाप से ज्यादा कुछ नहीं होगी जो मैं नहीं करूंगा. इस के साथ ही उस एक बात को स्वीकार करने में मुझ को जरा भी हिचक नहीं कि आप को देखने और शादी की बात पक्की होने के बाद अपनी कल्पनाआें में मैं ने संपूर्ण जीवन जी लिया. मरने का शायद मुझे अब बहुत गम नहीं होगा.’’

जैसे ही राहुल ने अपनी बात खत्म की, खामोशी से सब सुन रही पूजा ने कहा, ‘‘आप ने अपनी बात तो कह दी, अपना फैसला भी सुना दिया लेकिन यह कैसे सोच लिया कि आप ने जो फैसला किया है वही मेरा फैसला भी होगा?’’

पूजा के शब्दों से हैरान राहुल खालीखाली नजरों से उस को देखने लगा.

पूजा ने उस का हाथ अपने हाथों में ले लिया और बोली, ‘‘अगर आप में सच को कहने की हिम्मत है तो मुझ में भी सच का साथ देने की ताकत है. आप की जिंदगी का बाकी जितना भी सफर है उस में मैं आप को अकेला नहीं छोड़ूंगी. यह शादी हर हालत में होगी.’’

‘‘आप भावुकता में ऐसा कह रही हैं. आप को शायद ठीक से मालूम नहीं कि एड्स क्या है? लोग तो एड्स के शिकार व्यक्ति के पास भी नहीं फटकते और आप एक ऐसे व्यक्ति के साथ शादी करना चाहती हैं.’’

‘‘मैं लोगों की तरह गलतफहमियों में नहीं जीती. एड्स किसी इनसान के साथ उठनेबैठने या उस के साथ खानेपीने से तो नहीं होता. शादी के बाद अगर हम पतिपत्नी के बजाय 2 दोस्तों की तरह रहेंगे और उन खास पलों से परहेज करेंगे जिन से इस बीमारी का दूसरे में जाने का अंदेशा होता है तो शादी के बंधन से हमें कोई भी समस्या नहीं होगी.

‘‘जिंदगी कितनी बाकी है? मौत कब आएगी, मेडिकल साइंस और डाक्टर इस की भविष्यवाणी नहीं कर सकते जो मौत कल आनी है उस के लिए आज की जिंदगी की कुर्बानी क्यों करें हम? जितना भी वक्त बचा है उसी में पूरी जिंदगी जीनी होगी अब आप को. मैं उस जिंदगी में आप की हमसफर रहूंगी, यह मेरा फैसला है,’’ राहुल के हाथ को अपने हाथों से दबाते पूजा ने दृढ़ स्वर में कहा.

पूजा के शब्दों से राहुल की उदास और बुझी आंखों में जिंदगी जीने की चमक आ गई.

पूजा ने राहुल के अंदर के विश्वास को बढ़ाने के लिए उस के हाथ को सहलाया ओर बोली, ‘‘जब मैं ने जिंदगी के सफर में आप का हमसफर बनने का फैसला कर लिया है तो एक वचन आप को भी मुझे देना होगा.’’

‘‘कैसा वचन?’’ राहुल ने पूछा.

‘‘जैसे आप ने अब तक अपनी बीमारी को राज रखा है, शादी के बाद भी आप इस को ऐसे ही राज रखेंगे. इस के बारे में कभी भी अपनी जबान पर एक शब्द न लाएंगे.’’

‘‘इस से क्या होगा? मौत जैसेजैसे करीब होगी, बीमारी को लोगों से छिपाना आसान नहीं होगा. उन को कुछ तो जवाब देना ही होगा,’’ राहुल की आवाज में उदासी थी.

‘‘शादी के बाद वह सब देखना मेरा काम होगा. लोगों को क्या जवाब देना है, यह भी मैं ही देखूंगी. मगर आप किसी से कुछ नहीं कहेंगे.’’

‘‘अगर आप की ऐसी जिद है तो मैं वादा करता हूं कि मैं अपनी जबान पर कभी अपनी बीमारी का जिक्र नहीं लाऊंगा. मेरी कोशिश रहेगी कि मेरी बीमारी का राज मेरे साथ ही इस दुनिया से जाए,’’ राहुल ने कहा.

एक सप्ताह बाद दोनों की शादी हो गई. शादी पूरी धूमधाम के साथ हुई. इस शादी के पीछे का भयानक सच उन दोनों के अलावा शादी में शामिल कोई भी तीसरा नहीं जानता था.

अग्नि के इर्दगिर्द शादी के फेरे लेते हुए दोनों के मस्तिष्क में कुछकुछ चल रहा था, मगर उन के चेहरों पर कोई शिकन नहीं थी.

 

Winter Special: आज ही घर पर बनाएं सेहत और स्वाद से भरपूर पकौड़े वाली कढ़ी

वैसे तो कढ़ी संपूर्ण भारत में जानी जाती है लेकिन यह खासतौर पर उत्तर और पाश्चिम भारत की बहुत ही लोकप्रिय डिश है. कढ़ी कई प्रकार की होती है जैसे कि पकौड़े वाली कढ़ी, मगौंडी की कढ़ी, कच्चे आम की कढ़ी, सिंधी कढ़ी, राजस्थानी कढ़ी, गुजराती कढ़ी, इत्यादि-इत्यादि. तो चलिए आज हम आपको टाटा समपन्न बेसन से बने पकौड़े वाली स्पेशल कढ़ी बनाने की रेसिपी बताते हैं.

सामग्री

बेसन

हल्दी पाउडर- 1 चम्मच

मिर्ची पाउडर- 1 चम्मच

नमक- स्वादानुसार

पानी- 2 कप

तेल- 1 कप

जीरा- ½ चम्मच

सूखी लाल मिर्च- 2

दही- 2 चम्मच

विधि

स्पेशल पकौड़े वाली कढ़ी बनाने के लिए आप सबसे पहले पकौड़े बना लें. पकौड़े बनाने के लिए एक बाउल में 2 चम्मच बेसन लें. उसमें आधा चमम्च हल्दी पाउडर, आधा चम्मच मिर्ची पाउडर, स्वादानुसार नमक और थड़ा सा पानी डालें.

इन सब सामग्रियों को एक साथ मिलाएं. ध्यान रखें घोल ना ज्यादा पतला हो ना गाढ़ा.

अब एक पैन लें. पैन में तेल गर्म करें. तेल जब गर्म हो जाए तो टाटा समपन्न बेसन से बने घोल के छोटे छोटे पकौड़े बना लें. पकौड़े जब गोल्डन ब्राउन हो जाएं तब उन्हें निकाल लें. आपके पकौड़े बन कर तैयार हैं.

अब एक दूसरे बाउल में 2 चम्मच बेसन और 2 चम्मच दही डालें. इस मिक्सचर में आधा चम्मच हल्दी पाउडर, आधा चम्मच मिर्ची पाउडर, नमक और पानी मिलाएं. आपके कढ़ी का घोल तैयार हो चुका है. अब बारी है इसे तड़का लगाने की.

तड़का लगाने के लिए गैस पर पैन चढाएं. पैन में दो चम्मच तेल डालें. तेल जब गर्म हो जाए तो उसमें आधा चम्मच जीरा और 2 सूखी लाल मिर्च डालें.

इसके बाद तैयार किया हुआ टाटा समपन्न बेसन का घोल डालें और पकाएं. जब यह घोल पक जाए तब इसमें पकौड़े डालें.

आपका स्पेशल कढ़ी पकौड़ा बन कर तैयार है.

 

क्रॉप टॉप पहनने की कैसे हुई शुरुआत, एथनिक ड्रेस के साथ भी इसे कर सकती हैं कैरी

क्रॉप टॉप यानी हाफ शर्ट, बेली शर्ट या कटऑफ शर्ट. यह एक ऐसा टॉप है जो कमर और पेट के आकर्षण को सब के सामने लाता है. आप यह कह सकते हैं कि क्रॉप टॉप को शरीर के मध्य भाग पर ध्यान आकर्षित करने के लिए पहना जाता है. जिन लड़कियों को अपने इस हिस्से को हाईलाइट करना होता है वे बिंदास क्रॉप टॉप पहन सकती हैं. 1980 के दशक से क्रॉप टॉप फैशन की दुनिया में स्टाइल का प्रतीक रहा है. गायिका मैडोना ने अपने “लकी स्टार” गाने में जालीदार क्रॉप टॉप पहना था.

आजाद मिजाज की लड़कियां पहनती थीं क्रॉप टॉप

इसे पहनने की शुरुआत उन महिलाओं ने की थी जो खुले  थीं और अपनी आजादी को महसूस कराना चाहती थीं. 1970 और 80 के दशक में पॉप कल्चर के समय क्रॉप टॉप प्रचलन में था. शुरुआती दौर में पुरुष इस का इस्तेमाल जिम में करते थे. ये उनके द्वारा पेट के 6 पैक दिखाने का तरीका था. जिम में कुछ लड़के बिना शर्ट के वर्कआउट करते थे. उनको ऐसा करने से रोकने के लिए शर्ट के निचले हिस्से को काट कर कुछ छोटा कर दिया जाता था जिस ने बाद में फैशन का रूप ले लिया और महिलाओं ने भी इसे व्यापक तौर पर अपना लिया. हिंदी फिल्म जगत में भी क्रॉप टॉप का चलन बहुत पुराना है. 1973 में रिलीज़ हुई फिल्म बॉबी में डिंपल कपाडिया ने भी सफ़ेद काले रंग में नॉट वाला क्रॉप टॉप पहना था जो उस समय लोगों ने बहुत पसंद किया. फैशन हमेशा कुछ बदलाव के साथ वापस आता रहता है. ऐसा ही कुछ क्रॉप टॉप के साथ हुआ है. आज यह लड़कियों और महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय ड्रेस है.
कितने तरह के होते हैं क्रॉप टॉप

200 से 800 के प्राइस रेंज में क्रॉप टॉप आप को हर जगह मिल जाएंगे. आप के शहर के एक छोटे से स्टोर से ले कर दुनिया के सब से बड़े फैशन ब्रांड तक. ये कई डिज़ाइन के मिलते हैं मसलन ; स्लीवलेस क्रॉप टॉप, लॉन्ग स्लीव क्रॉप टॉप, बैकलेस क्रॉप टॉप, बैगी क्रॉप टॉप, ऑफ शोल्डर क्रॉप टॉप, विंटर क्रॉप टॉप, टर्टलनेक क्रॉप टॉप आदि. इस के अलावा हाफ क्रॉप टॉप जिन में कमर का काफी हिस्सा दिखाई देता है. ट्राइऐंगल क्रॉप टॉप में नीचे की शेप त्रिकोण जैसी होती है. काव्ल नेक क्रॉप टॉप जिनके गले के चारों ओर कपड़ा होता है. डीप नेक क्रॉप टॉप यानि गहरे गले के क्रॉप टॉप और डेनिम के बने क्रॉप टॉप भी होते हैं.

क्रॉप टॉप एक ऐसा मल्टीपर्पज आउटफिट है जिसे कई अलग अलग तरीकों से और कई आउटफिट्स के साथ आसानी से कैरी किया जा सकता है. यंग और कॉलेज गर्ल्स के बीच तो इसका कुछ ज्यादा ही क्रेज़ है क्योंकि ये कम्फर्टेबल होने के साथ-साथ काफी कूल और स्टाइलिश भी दिखता है. इतना ही नहीं इसे किसी भी उम्र की महिलाएं जीन्स, स्कर्ट, शॉर्ट्स, ट्राउज़र्स या पलाज़ो वगैरह किसी के साथ भी मिक्स एंड मैच करके पहन सकती हैं.

क्रॉप टॉप की एक खासियत ये है कि इसे वेस्टर्न के अलावा ट्रेडिशनल आउटफिट्स जैसे साड़ी लहंगे और दूसरे एथनिक ड्रेसेस के साथ भी स्टाइल किया जा सकता है. क्रॉप टॉप की लंबाई करीब ब्लाउज के बराबर होती है इसीलिए इसे साड़ी या लहंगे के साथ ब्लाउज़ की तरह भी पेयर कर इन को नया लुक दिया जा सकता है.  यही नहीं ऐसे बहुत सारे ड्रेस हैं जिन के साथ क्रॉप टॉप पेयर कर के आप स्टाइल दीवा बन सकती हैं.

क्रॉप टॉप को ऐसे करें कैरी

आप अपनी लॉन्ग स्कर्ट को  फ्लेयर्ड या ऑफ शोल्डर क्रॉप टॉप के साथ स्टाइल कर सकती हैं और अपने लुक को और अट्रैक्टिव बना सकती हैं. मिडी, डेनिम या मैक्सी स्कर्ट के साथ भी क्रॉप टॉप मॉडर्न और स्टाइलिश लगते हैं. क्रॉप टॉप और जीन्स का कॉम्बो सबसे ज्यादा कम्फर्टेबल और ट्रेंडी है. ये हर तरह की जीन्स के साथ अच्छा लगता है, चाहे वो हाई वेस्ट हो, मॉम जीन्स हो, फ्लेयर्ड हो या फिर बूटकट.
इसी तरह क्रॉप टॉप के साथ प्लाजो को स्टाइल करना काफी कूल और एलीगेंट हैं. रोजाना पहनने के लिए सिंपल क्रॉप टॉप के साथ रेगुलर प्लेन या प्रिंटेड पलाज़ो ट्राय करें. किसी स्पेशल इवेंट या पार्टी के लिए शिफॉन क्रॉप टॉप के साथ हैवी सिल्क प्लाज़ो चुनें. जबकि स्मार्ट बबली लुक के लिए शॉर्ट्स के साथ क्रॉप टॉप पहनें . मॉल में घूमना हो, बीच पर मस्ती करनी हो या दोस्तों के साथ डिनर ये हर मौके के लिए परफेक्ट है.

आप डेट पर जा रही हैं और एक स्टाइलिश और प्रेज़ेंटेबल लुक चाहती हैं तो बिना कुछ ज्यादा सोचे पेंसिल स्कर्ट और क्रॉप टॉप पहनें. आप धोती या हैरम पैंट्स के साथ भी क्रॉप टॉप पहन सकती हैं. इसी तरह पेपलम स्कर्ट और क्रॉप टॉप स्टाइलिश दिखने के सब से फैशनेबल तरीकों में से एक हैं. इतना ही नहीं घुटने की लंबाई वाली फ्लेयर्ड या ए-लाइन स्कर्ट के साथ एक अच्छी फिटिंग वाला क्रॉप टॉप आप को एक यूनिक लुक दे सकता है.

मैक्सी स्कर्ट और क्रॉप टॉप बसंत के मौसम के लिए एकदम परफेक्ट हैं. आप प्रिंटेड स्कर्ट और प्लेन क्रॉप टॉप, या प्लेन स्कर्ट और प्रिंटेड टॉप पहन सकती हैं. जब तक आप अपने क्रॉप टॉप मैचिंग सेट लुक को फ्लॉन्ट नहीं करना चाहतीं तब तक इनमें से एक को प्लेन ही रखें. मैक्सी स्कर्ट के साथ ऑफ-शोल्डर, फुल स्लीव्स, लूज़ या फ्लेयर्ड कोई भी क्रॉप टॉप पेयर किया जा सकता है.

एथनिक ड्रेस के साथ भी पहन सकती हैं क्रॉप टॉप

एथनिक ड्रेसेस जैसे लहंगे या साड़ी के साथ भी क्रॉप टॉप को पेयर किया जा सकता है. फंक्शन छोटा हो या बड़ा ज्यादातर महिलाएं लहंगा पहनना पसंद करती हैं. सिंपल लहंगे को और स्टाइलिश दिखाने के लिए क्रॉप टॉप्स ट्राई कर सकती हैं. आप लहंगे के साथ फ्लोरल या ऑफ़ शोल्डर क्रॉप टॉप्स को कैरी कर सकती हैं. यह लुक आप की खूबसूरती पर चार चांद लगा देगा. इसपर आप डार्क कलर की लिपस्टिक लगाएं. इसके साथ एलीगेंट लॉन्ग ईयररिंग्स काफी अच्छे लगेंगे. वन शोल्डर क्रॉप टॉप्स आपको इंडो वेस्टर्न लुक देते हैं. आप इसे भी लहंगे  के साथ ट्राई कर सकती हैं. इसी तरह साड़ी के एथनिक लुक में भी वेस्टर्न तड़का डालते हुए स्मार्ट क्रॉप टॉप को ब्लाउज की तरह पहनें तो आप का रूप निखर जाएगा. साड़ियों के साथ ऑफ शोल्डर और रफल्ड क्रॉप टॉप आजकल ट्रेंड में हैं.

जैकेट के साथ

क्रॉप टॉप पहनना पसंद है पर मौसम में थोड़ी ठंडक है तो इसे पेयर करें एक स्टाइलिश जैकेट के साथ. इस तरह से आप क्रॉप टॉप भी पहन पाएंगी और इस मौसम में आपका स्टाइल भी बरकरार रहेगा. आप लेदर जैकेट, डेनिम शर्ट या एक लंबी जैकेट भी यूज़ कर सकती हैं और ये बन जाएगी एक शानदार मोनोक्रोम ड्रेस.

क्रॉप टॉप आज लड़कियों का सबसे पसंदीदा पहनावा है लेकिन अपने स्टाइल और शारीरिक बनावट के अनुसार इसका चयन करना चाहिए.क्रॉप टॉप का मुख्य उद्देश्य आप के सुंदर, सुडौल और आकर्षक कमर और नाभि को दिखाना है. किन्तु अगर आप के पेट पर चर्बी ज्यादा है या आप बहुत पतले हैं तो आप इस तरह के वस्त्र पहन कर आकर्षक दिखने की जगह भद्दी दिखेंगी. कमर का अनुपात शरीर के अनुपात से मेल खाता होना चाहिए यानी आप स्लिम ट्रिम हों तब ही यह आप पर फबेगा.  आप को अपनी शारीरिक संरचना के हिसाब से ही इन का चुनाव करना चाहिए.

मैं वह नहीं: भाग 1- आखिर पाली क्यों प्रेम करने से डरती थी

आज कालेज में पाली का आखिरी दिन था. उस के साथ के सभी स्टूडैंट्स बहुत खुश दिखाई दे रहे थे. एक वही थी जो आज भी चुपचाप खिड़की के पास बैठ कर बाहर ?ांक रही थी.

रितु ने पूछा, ‘‘तुम ने घर जाने की तैयारी कर ली पाली?’’

‘‘कर लूंगी इतनी भी क्या जल्दी है.’’

‘‘क्या बात है पाली तुम घर जाने के नाम से सीरियस क्यों हो जाती हो? घर जाना सब को अच्छा लगता है. मेरी मम्मी के रोज फोन आ रहे हैं कि कब आ रही हो. वे मु?ो लेने आने वाले थे पर मैं ने ही मना कर दिया.’’

रितु की बात का पाली ने कोई उत्तर नहीं दिया और वैसे ही चुपचाप बाहर देखती रही.

4 साल से वे दोनों बीटैक करने के दौरान एकसाथ एक ही कमरे में रहती आ रही थी. इतना तो वह सम?ा गई थी कि पाली यहां से जाने के लिए तैयार नहीं. मजबूरी है कि डिगरी पूरी होते ही 2-4 दिन से ज्यादा वह यहां नहीं रह सकती.

‘‘तुम चाहो तो कुछ दिनों के लिए मेरे साथ आ सकती हो पाली. मम्मी को खुशी होगी.’’

‘‘फिर कभी आऊंगी,’’ छोटा सा उत्तर दे कर उस ने बात खत्म कर दी.

रितु अपना सामान पैक करने में व्यस्त थी. पाली के पास वैसे भी बहुत ज्यादा सामान नहीं था. वह चाहती तो कब का उसे समेट सकती थी लेकिन उस ने अपनी ओर से अभी तक कोई तैयारी नहीं की थी. शाम के समय वह रोज की तरह थोड़ी देर के लिए होस्टल के सामने वाले पार्क में चली आई. वहां पर उस का सहपाठी पार्थ उस का इंतजार कर रहा था. उस ने भी वही प्रश्न दोहरा दिया.

‘‘मु?ो घर जाने की जल्दी नहीं है. जब मन करेगा चली जाऊंगी. तुम कब जा रहे हो?’’

‘‘कल शाम की ट्रेन से निकल जाऊंगा. तुम चाहो तो 1-2 दिन रुक सकता हूं.’’

‘‘इस की जरूरत नहीं है. मु?ो अकेले रहना ज्यादा अच्छा लगता है,’’ कह कर पाली ने बात खत्म कर दी.

पिछले कई सालों से वे दोनों एकसाथ पढ़ रहे थे. पार्थ को वह बहुत अच्छी लगती थी. वह खुद भी बहुत हैंडसम और स्मार्ट था. उस के लिए लड़कियों की कमी नहीं थी

फिर भी उसे गुमसुम अपने में ही मस्त रहने वाली पाली अच्छी लगती. वह उस से बात करने के अवसर ढूंढ़ता रहता पर पाली उसे नजरअंदाज करती रहती.

‘‘आगे क्या करने का इरादा है?’’

‘‘अभी कुछ सोचा नहीं है. घर जा कर सोचूंगी.’’

‘‘मेरे लिए जौब का औफर आ गया है. कुछ दिन घर में बिता कर जौइन कर लूंगा. तुम चाहो तो तुम्हारे लिए भी कोशिश कर सकता हूं.’’

‘‘अभी रहने दो. जरूरत होगी तो बता दूंगी,’’ वह बोली.

पार्थ ने उस की बात का जरा भी बुरा नहीं माना. जानता था वह ऐसी ही है. थोड़ी देर बाद वह बोला, ‘‘कहीं घूम आते हैं फिर पता नहीं साथ बैठ कर कब कौफी पीने का मौका मिले.’’

पार्थ के कहने पर पाली उस के साथ सड़क पार एक छोटे से कैफे में आ गई. पार्थ को अच्छा लगा. उस ने इस समय उस की बात काटी नहीं.

‘‘मैं तुम्हें बहुत मिस करूंगा पाली,’’ पार्थ बोला तो उस ने नजरें उठा कर देखा और बोली कुछ नहीं.

कौफी खत्म करते ही पाली बोली, ‘‘चलते हैं. तुम्हें घर जाने की तैयारी करनी होगी.’’

4 साल का साथ इस तरह छूटने का पार्थ को बुरा लग रहा था. उसे कम से कम आज पाली से ऐसे ठंडे व्यवहार की उम्मीद नहीं थी. अगले दिन पार्थ अपने घर चला गया और पाली भी सामान समेट कर जाने की तैयारी करने लगी.

रितु बोली, ‘‘मैं मदद कर दूं?’’

‘‘नहीं मैं कर लूंगी.’’

‘‘फोन करती रहना. मु?ो तुम्हारी बहुत याद आएगी. भूलना मत.’’

‘‘कर दूंगी पर कभी मिस हो जाए तो बुरा मत मानना,’’ पाली बोली.

रितु की नजर बारबार घड़ी पर लगी हुई थी. उस ने कैब बुला ली. जाते समय पाली उसे छोड़ने बाहर तक आई. उस के गले लगा कर बैस्ट औफ जर्नी कह कर हाथ हिला उसे विदा किया. आज रात उसे कमरे में अकेले ही रहना था.

शाम को थोड़ी देर अकेले पार्क में बिता कर पाली कमरे में चली आई. उस के साथ पढ़ने वाले सभी साथी 1-1 कर के जा रहे थे. उस ने भी अगले दिन घर जाने का प्रोग्राम बना लिया और इस की सूचना अपनी छोटी बहन मौली को दे दी. उसे पापामम्मी को खबर करने के बजाय मौली से बात करना अच्छा लगता .वह जानती थी मौली यह बात सब को बता देगी.

पापा ने मौली से पूछा, ‘‘वह कैसे आ रही है ट्रेन से या टैक्सी से?’’

‘‘मैं ने पूछा नहीं पापा. जब चलोगी तो बता देगी. आप तो जानते हैं ज्यादा पूछने पर वह बात का जवाब नहीं देती,’’ मौली बोली तो रूपेश चुप हो गए. उन्हें बेटी की आदतें पता थीं.

घर पर पाली किसी से ज्यादा बात न करती. बस थोड़ीबहुत बातें उस की मौली से हो जातीं. मम्मी से तो जैसे उस का कोई नाता ही न था. अपनी जरूरत की बातें भी वह मौली के माध्यम से उन तक पहुंचा देती.

कई बार रूपेश ने उसे सम?ाया, ‘‘पाली, अब तुम छोटी नहीं रह गई हो. मम्मी से खुल कर बात किया करो कम से कम अपनी जरूरत की बातें उन्हें बता दिया करो .वह कितनी परेशान हो जाती है.’’

‘‘आई एम सौरी पापा,’’ कह कर वह बात खत्म कर देती.

रितु ने रात को फोन पर बात कर उस का हालचाल पूछा, ‘‘मेरे बगैर तुम्हें कमरे में अच्छा नहीं लग रहा होगा?’’

‘‘हां खालीपन लग रहा है. एक रात की बात है कल मैं भी चली जाऊंगी.’’

‘‘पाली जिंदगी खुल कर जीना सीखो यार. क्यों इस तरह से बु?ाबु?ा रहती हो. पार्थ तुम्हें बहुत पसंद करता है. हर समय तुम्हारे आगेपीछे घूमता रहता है फिर भी तुम उस से बात करने में कतराती हो.’’

‘‘जिस बात का मेरे पास कोई जवाब नहीं है तुम बारबार वही क्यों पूछती हो मैं जैसी हूं ठीक हूं. मु?ो अपने से कोई शिकायत नहीं.’’

‘‘लेकिन मु?ो है. इतने सालों में तुम जरा भी नहीं बदली. जिस तरह पहले दिन हम मिले थे आखिर तक भी तुम्हारा बरताव वैसा ही ठंडा बना रहा. रिश्तों में थोड़ी गरमाहट हो तो वे बड़ा सुकून देते हैं.’’ रितु बोली.

पाली चुप हो गई. वह कुछ कह कर अपने जज्बात किसी से सा?ा नहीं करना चाहती थी.

‘‘मेरी बात बुरी लगी हो तो हवा में उड़ा देना. तुम तो जानती हो मैं ऐसी ही हूं,’’ कह कर रितु ने फोन रख दिया.

थोड़ी देर बाद मौली का फोन आ गया, ‘‘दी, आज तुम कमरे में अकेली हो. दोस्तों से बात करने का अच्छा मौका मिल रहा होगा.’’

‘‘मु?ो रितु के साथ भी कोई परेशानी नहीं  थी मौली. वह बहुत अच्छी लड़की है. मेरा बहुत खयाल रखती थी.’’

‘‘मैं तुम्हारा बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही हूं दी. कल कब तक पहुंचोगी?’’

‘‘शाम तक आ जाऊंगी. तब तक तुम भी कालेज से घर पहुंच जाओगी.’’

‘‘ठीक है कल मिलते हैं बाय,’’ कह कर मौली ने फोन रख दिया.

आज पाली को रितु की कमी खल रही थी लेकिन दूसरे ही क्षण उस ने इस विचार को ?ाटक दिया और सोने की कोशिश करने लगी. सुबह आराम से नाश्ता करने के बाद वह कैब से स्टेशन चली आई. इस शहर के छूटने का उसे जरा भी दुख नहीं हो रहा था. इतने साल पढ़ाई के दौरान भी उसे यहां से कोई खास लगाव नहीं रहा. वह पता नहीं किस मिट्टी की बनी थी. न उसे दोस्तों से लगाव था और न ही उस जगह से जहां वह रह रही थी. पार्थ ने फोन कर के उस का हालचाल पूछ लिया था. उसे अच्छा लगा जब उस ने सुना वह आज घर जा रही है.

‘‘मैं तुम्हें याद कर रहा हूं पाली. यह बात तुम जानती हो फिर भी कभी अपने मुंह से कुछ नहीं कहती. कभी तो 2 शब्द प्यार के बोल कर मेरा भी हौसला बढ़ा दिया करो. मैं ही अपनी

ओर से बगैर पूछे तुम पर अपने जज्बात लादता रहता हूं.’’

‘‘तुम्हारी जिंदगी तुम्हारे हिसाब से और मेरी मेरे हिसाब से चलेगी पार्थ. हमें दोनों को एकसाथ मिलाना नहीं चाहिए.’’

‘‘मैं चाहता हूं हम दोनों मिल कर एकसाथ जिंदगी शुरू करें लेकिन तुम्हारे मन की बात न जान कर अकसर हिचक जाता हूं. सम?ा नहीं आता तुम क्यों इस तरह से व्यवहार करती हो.’’

‘‘तुम अपने व्यवहार के लिए स्वतंत्र हो. मैं ने तुम्हें कभी फोर्स नहीं किया कि तुम मु?ा से आ कर मिला करो. यह तुम्हारी इच्छा है कि तुम मु?ा से आ कर बात करते हो.’’

‘‘तुम्हें मु?ा से मिलना अच्छा नहीं लगता?’’ पार्थ ने पूछा.

पाली ने कोई जवाब नहीं दिया.

‘‘ठीक है घर जा कर इस बारे में सोचना,’’ कह कर पार्थ ने बात खत्म कर दी.

पाली असमंजस में थी उसे क्या जवाब दे. पार्थ से बात करना उसे अच्छा लगता था लेकिन एक सीमा तक. उस से आगे न वह कभी खुद बढ़ी और न उस ने कभी उसे बढ़ने का मौका दिया. वह भी एक सुल?ा हुआ लड़का था. उसने उस की इच्छा के खिलाफ कभी कुछ करने

की नहीं सोची. यह बात पाली भी भलीभांति जानती थी. कालेज में उस के लिए लड़कियों की कमी न थी. समय काटने के लिए वह किसी को भी अपना दोस्त बन सकता था फिर भी वह अपना अधिकांश समय पाली के साथ बिताना पसंद करता.

घर पर सब पाली का इंतजार कर रहे थे. रूपेश ने पूछा, ‘‘आने में दिक्कत तो नहीं हुई पाली?’’

‘‘नहीं पापा. सफर ठीक रहा.’’

जिया चाह कर भी उस से बात न कर सकी. वह जानती थी पाली उस की बात का कोई जवाब नहीं देगी. वह बोली, ‘‘तुम फ्रैश हो जाओ पाली. मैं खाना लगा देती हूं.’’

मां के कहने पर वह कमरे में आ गई. मौली अभी कालेज से नहीं आई थी इसीलिए घर

बहुत शांत लग रहा था वरना उस की बातों से घर गूंजता रहता. कुछ देर में मौली आ गई और पाली के गले लगते हुए बोली, ‘‘दी, अब तुम यहीं रहोगी कहीं नहीं जाओगी. मु?ो तुम्हारे बगैर अच्छा नहीं लगता.’’

‘‘तुम आते ही जाने की बात करने लगी.’’

‘‘जानती हूं तुम ने जो सोचा होगा वह

कर के रहोगी इसीलिए मैं ने तुम्हें अपनी इच्छा बता दी.’’

‘‘ठीक है बाबा नहीं जाऊंगी,’’ पाली बोली और फिर दोनों खाने की टेबल पर आ गईं.

पाली को सम?ा नहीं आ रहा था कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद वह आगे क्या करेगी? रिजल्ट आने में अभी 1 महीने का समय बाकी था. वह पढ़ाईलिखाई में बहुत अच्छी थी. पापा की इच्छा थी वह इंजीनियर बने इसीलिए उस ने बीटैक की पढ़ाई की.

रूपेश आते ही उस से यह प्रश्न नहीं करना चाहते थे. अगले दिन मौली उसे ले कर बाजार

आ गई.

‘‘दी, मु?ो कुछ ड्रैस खरीदनी है. दोनों साथ मिल कर खरीदेंगी.’’

‘‘मेरे पास बहुत ड्रैसेज हैं. मु?ो कुछ नहीं लेना.’’

‘‘जानती थी तुम्हारा यही जवाब होगा. आज तुम्हें एक ड्रैस मेरे हिसाब से भी लेनी होगी. तुम इतनी सुंदर हो तो फिर भी तुम अपना खयाल नहीं रखती हो. मेरे फीचर तुम्हारे जैसे होते तो मैं अपनेआप को किसी हीरोइन से कम नहीं सम?ाती.’’

उस की बात सुन कर पाली मुसकरा दी.

उस ने ?ाठ नहीं कहा था. मौली के मुकाबले वह देखने में बहुत सुंदर थी फिर भी उसे सजनेसंवरने का कोई शौक नहीं था. सच पूछा जाए तो उसे जीवन में कोई शौक था ही नहीं. उसे खुद पता नहीं था उसे क्या करना है?

पाली के साथ के स्टूडैंट्स ने मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने का मन बना लिया था और वे उस के लिए प्रयास भी करने लगे थे. पाली का इस में भी कोई रु?ान नहीं था. इतना वह भी जानती थी कि पढ़लिख कर अपने पैरों पर खड़ा होना आज के समय में बहुत जरूरी है.

पाली इस के लिए अपने को मानसिक रूप से तैयार भी कर रही थी लेकिन कहां जौब करेगी यह उस ने अभी सोचा नहीं था. पार्थ ने उस से कहा था साथ मिल कर जौब कर लेंगे लेकिन उस ने उस की बात को भी अनसुना कर दिया था.

1 हफ्ता गुजर जाने के बाद रूपेश ने पूछा, ‘‘पाली, तुम्हारा भविष्य के बारे में क्या इरादा है?’’

‘‘रिजल्ट आने के बाद ही कुछ निर्णय लूंगी. अभी से कुछ नहीं कह सकती.’’

‘‘तुम्हारे सामने 2 विकल्प हैं नौकरी और पढ़ाई. उन में से तुम्हें जो ठीक लगे वह कर लेना. दोनों के लिए ही तुम्हें घर से बाहर जाना होगा.’’

‘‘जानती हूं पापा और इस के लिए मानसिक रूप से तैयार भी हूं,’’ संक्षिप्त सा उत्तर दे कर उस ने बात खत्म कर दी.

जिया कभी भी पाली पर अपनी इच्छा नहीं थोपती और अपनी ओर से उसे खुश रखने की कोशिश करती. फिर भी वह जिया से पर्याप्त दूरी बना कर रखती. पता नहीं उस के मन में क्या था जिसे वह कभी खुल कर किसी से कह नहीं पाई. यह सच था जिया उस की सौतेली मां थी.

पाली की मम्मी की बर्षों पहले कैंसर के कारण मौत हो गई थी. पाली उस समय मात्र 6 साल की थी. बेटी की परवरिश के लिए रूपेश ने जिया से दूसरी शादी कर ली थी. जिया स्वभाव से सरल थी. उस ने पाली को पूरे दिल से अपनाने की कोशिश की थी लेकिन इतने छोटे बच्चों के मन में कब कैसे सौतेली मां की गांठ लग गई वह सम?ा नहीं पाई.

मौली जिया की अपनी बेटी थी. वह कभी दोनों में कोई अंतर न करती. मौली पाली से बहुत प्यार करती थी. जैसेजैसे पाली बड़ी हो रही थी उस ने पापा से भी बात करना बहुत कम कर दिया था. अब उन के बीच में बात का माध्यम मौली थी जो अपनी चटपटी बातों से सब का दिल बहलाए रहती और साथ ही पाली की जरूरतें मम्मीपापा तक पहुंचाती रहती.

पाली के बगैर पार्थ का दिल नहीं लग रहा था. वह उसे अपने दिल की हर बात बताना चाहता था लेकिन वह इस का मौका ही नहीं देती. आपसी बातचीत में भी पार्थ ही बातें करता रहता. वह केवल उस की बातें सुनती और बहुत जरूरी हो तब छोटा सा उत्तर दे कर बात खत्म कर देती. उस ने अपने जज्बात रितु के हाथों उस तक पहुंचाने की कोशिश की थी. बदले में उस ने उसे पाली की मनोदशा बता दी.

‘‘तुम जानते हो हम दोनों रूम पार्टनर है लेकिन वह अपनी कोई बात मु?ा से भी नहीं कहती. मु?ो भी उस के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं है. वह फोन पर भी किसी से ज्यादा बात

नहीं करती. छोटी बहन से उस की बौंडिंग अच्छी है. वही अकसर इस से बातें करती रहती है.

तभी उस के चेहरे पर जरा सी मुसकान दिखाई देती है अन्यथा वह गुमसुम सी किताबों में ही खोई रहती है.’’

‘‘उस ने कभी मेरे बारे में तुम से बात नहीं की?’’

‘‘वह किसी के बारे में कोई बात नहीं करती यह तुम अच्छी तरह जानते हो. मेरी भी हिम्मत नहीं पड़ती कि उस से ज्यादा कुछ पूछ सकूं.’’

पार्थ को सम?ा नहीं आ रहा था पाली के बारे में कैसे जानकारी जुटाए. जब तक दोनों

साथ पढ़ रहे थे कम से कम उस का चेहरा तो दिखाई दे जाता था. अब वह यहां से दूर चली गई थी तो वह बेचैन हो गया. उस ने मन बना लिया कि वह लखनऊ जा कर उस के बारे में सबकुछ पता करेगा.

1 हफ्ता घर में बिता कर पार्थ लखनऊ के लिए निकल गया. रितु ने उस के घर का पता दे दिया था और मौली के बारे में भी जितनी जानकारी वह फोन पर सुनती थी वह उसे दे दी.

पार्थ पाली के घर से कुछ दूरी पर खड़ा हो कर मौली का इंतजार कर रहा था. कालेज

से आते हुए वह घर के मोड़ पर दिखाई दे गई. पार्थ तेज कदमों से उस के पास पहुंच गया. बोला, ‘‘सुनिए.’’

एक अनजान लड़के को सामने देख कर मौली ने बुरा सा मुंह बनाया.

‘‘प्लीज, मेरी मदद कीजिए. मैं पाली का क्लासफैलो हूं. मेरा नाम पार्थ है. हम दोनों अच्छे दोस्त हैं.’’

‘‘दी ने कभी आप के बारे में कोई जिक्र नहीं किया.’’

‘‘वह किसी का भी जिक्र कहां करती है. तभी तो मु?ो यहां आना पड़ा,’’ कह कर उस से फोन पर रितु और पाली के साथ अपने बहुत सारे फोटो दिखा दिए. मौली को यकीन हो गया कि वह सही कह रहा है.

‘‘पाली के बारे में कुछ जानना चाहता हूं. क्या आप मु?ो कुछ समय दे सकेंगी?’’

‘‘मैं 1 घंटे बाद आप से मिलती हूं. आप मेरा पार्क में इंतजार कीजिए.’’

‘‘प्लीज, इस बारे में पाली को कुछ मत बताइगा.’’

‘‘मैं आप की स्थिति सम?ा सकती हूं,’’ मौली बोली.

पार्थ वहां से जा कर कुछ दूरी पर स्थित पार्क में मौली का इंतजार करने लगा.

1 घंटे बाद मौली आ गई, ‘‘कहिए आप क्या पूछना चाहते हैं?’’

मेरे चेहरे पर पिंपल मार्क्स हैं , अब मैं क्या करुं?

सवाल-

मेरी उम्र 16 साल है. मेरे चेहरे पर फुंसियां निकली थीं तो मैं ने उन्हें फोड़ दिया था. अब उन के मार्क्स रह गए हैं जो देखने में भद्दे लगते हैं. कोई घरेलू उपाय बताएं जिस से मार्क्स खत्म हो जाएं तथा मेरे चेहरे का ग्लो लौट आए?

जवाब-

कई बार दानों को छील देने से त्वचा पर उस के भद्दे निशान पड़ जाते हैं. आप घर पर रोज सुबहशाम अपने चेहरे को धो कर एएचए सीरम से फेस की मसाज कर सकती हैं. ऐसा करने से मार्क्स काफी हद तक कम हो जाएंगे. लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो आप माइक्रोडर्मा एब्रेजर व लेजर थेरैपी की सिटिंग्स ले सकती हैं. इस थेरैपी में लेजर की किरणों से त्वचा को रीजनरेट कर के नया रूप दिया जाता है. उस के बाद यंग स्किन मास्क से त्वचा को निखारा जाता है.

सवाल-

वैक्सिंग के बाद मेरी स्किन पर लाल धब्बे उभर आते हैं. मैं अनचाहे  बालों को हटाने के लिए क्या उपाय अपना सकती हूं?

जवाब-

आप वैक्सिंग से पहले ऐंटीऐलर्जिक टैबलेट ले सकती हैं. वैसे इस समस्या से परमानैंट छुटकारा पाने के लिए पल्स लाइट ट्रीटमैंट की सिटिंग्स ले सकती हैं. ये एक इटैलियन टैक्नोलौजी है जो अनचाहे बालों को रिमूव करने का सब से तेज, सुरक्षित व दर्दरहित समाधान है. लेजर अंडरआर्म्स के बालों पर ज्यादा इफैक्टिव होती है. इसी कारण इस की कुछ ही सिटिंग्स में बाल न के बराबर हो जाते हैं. इस से 80% तक अनचाहे बाल दूर हो जाते हैं और शेष बाल इतने पतले और हलके रंग के हो जाते हैं कि वे नजर नहीं आते.

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Winter Special: स्किन के लिए बेहद फायदेमंद है फेस स्टीम 

स्किन को क्लीन व नौरिश कौन नहीं करना चाहता. क्योंकि इससे न सिर्फ आपकी स्किन हैल्दी बनी रहती है, साथ ही आपको ग्लोइंग स्किन भी मिलती है. लेकिन क्या आप जानती हैं कि ग्लोइंग व हाइड्रेट स्किन के लिए सिंपल व इजी प्रोसेस है फेस स्टीमिंग. जिसे आप घर पर भी खुद से कर सकती हैं या फिर पार्लर में जाकर भी करवा सकती हैं . ये पोर्स को ओपन करके उसमें जमी धूलमिट्टी व गंदगी को क्लीन करके स्किन को क्लीन, क्लियर , ग्लोइंग व हाइड्रेट करने में मदद करता है. साथ ही ये स्किन में ब्लड के सर्कुलेशन को भी इम्प्रूव करके चेहरे में नई जान डालने का काम करता है.

कैसी कैसी फेस स्ट्रीमिंग 

1.  स्किन को हाइड्रेट करना 

अगर आप स्किन को हाइड्रेट करना चाहती हैं तो आप थोड़े से सूखे हुए कैमोमिल के फूल में बराबर मात्रा में सूखी हुई गुलाब की पत्तियां डालकर व उसमें थोड़ा सा लेमन जेस्ट डालकर उसकी स्टीम लें. कम से कम 10 मिनट तक स्टीम लें. इससे आपकी स्किन हाइड्रेट हो जाएगी.

कैसे वर्क करता है– 

– कैमोमिल में एंटीओक्सीडैंट्स प्रोपर्टीज होने के कारण ये स्किन को फ्री रेडिकल्स से बचाने के साथसाथ हैल्दी सेल्स को प्रमोट करने का काम करते हैं. जिससे स्किन पर ग्लो नजर आने लगता है. वहीं गुलाब की पत्तियों में विटामिन सी होने के कारण ये स्किन के नेचुरल ग्लो को बनाए रखकर सेल्स में मोइस्चर को सील करके स्किन को नेचुरली हाइड्रेट रखने का काम करता है. और लेमन जेस्ट एन्टिओक्सीडेंट में रिच होने के कारण स्किन को डीटोक्स करने में मदद करता है.

2. सूथिंग इफेक्ट के लिए 

स्किन को अगर सूथिंग यानि उसे ठंडक देकर आराम पहुंचना चाहते हैं तो उसके लिए आप गरम पानी के बाउल में कुछ खीरे के टुकड़े ,  कैमोमिल टी बैग व उसके साथ एसेंशियल आयल की  कुछ बूंदें  डालकर उससे चेहरे को 10 – 15 मिनट तक स्टीम दें. स्किन में अंतर आपको मिनटों में नजर आने लगेगा.

कैसे वर्क करता है–  

– खीरे में एन्टिओक्सीडेंट्स प्रोपर्टीज होने के कारण ये स्किन को ठंडक पहुंचाने का काम करती

है. इससे स्किन की रेडनेस, पफीनेस धीरेधीरे कम होने लगती है. कैमोमिल टी में एंटीइंफ्लेमेटरी प्रोपर्टीज होने के कारण ये स्किन इर्रिटेशन को दूर कर हीलिंग प्रोसेस को तेज करने का काम करता है. वहीं एसेंशियल आयल स्किन टेक्सचर को इम्प्रूव करके स्किन को सूदिंग इफेक्ट देने  का काम करता है.

3. डीटोक्स योर स्किन 

धूलमिट्टी , प्रदूषण के कारण हमारी स्किन पर डस्ट जमा हो जाती है, जो स्किन पर एक्ने, ब्लैकहेड्स, वाइटहेड्स का कारण बनती है. ऐसे में स्टीम से स्किन को डिटोक्स करना जरूरी होता है. ताकि स्किन नैचुरली निखर सके.  इसके लिए आप गरम पानी में थोड़ा सा लेमन जेस्ट , ग्रीन टी बैग को डालकर उससे स्किन को डिटोक्स करें. इस प्रोसेस से स्किन डिटोक्स होने से प्रोब्लम फ्री हो जाएगी.

कैसे वर्क करता है– 

– ग्रीन टी में टैनिन होता है, जो एस्ट्रिंजेंट का काम करता है. जो आंखों के आसपास की सूजन को कम करने के साथसाथ स्किन को टाइट करके उसे यंग लुक देने का काम करता है. वहीं लेमन जेस्ट पिगमेंटशन को कम कर स्किन को बेहतरीन तरीके से डिटोक्स करता है.

4. स्किन एजिंग को रोकने के लिए 

आज महिलाएं स्किन की एजिंग को रोकने के लिए महंगीमहंगी क्रीम्स टाई करने से लेकर हर वो ब्यूटी ट्रीटमेंट लेने की कोशिश करती हैं , जिससे स्किन से एजिंग को दूर रखकर खुद को हमेशा जवां बनाए रख सके. ऐसे में स्किन एजिंग को रोकने के लिए बेस्ट है , कुछ ड्राई रोजमेरी , कुछ ड्राई कैमोमाइल के फूल के साथ कुछ बूंदे एसेंशियल आयल के कॉबिनेशन से मिलाकर फेस को स्टीम देने की. ये स्किन पर मिनटों में मैजिक इफेक्ट देने का काम करता है.

कैसे वर्क करता है– 

– कैमोमाइल के फूल अपनी ब्लीचिंग प्रोपर्टी के कारण स्किन को ब्राइट बनाने का काम करते हैं. साथ ही ये स्पोट्स को फेड करके फाइन लाइन्स को कम करने का काम करते हैं . तो वहीं रोजमेरी स्किन को फर्म करके स्किन पर एजिंग के साइन को कम करने का काम करता है. एसेंशियल आयल तो है ही कई खूबियों से भरपूर, जो स्किन को हाइड्रेट, फ्रेश लुक देने का काम करता है.

5. ड्राईनेस दूर करने के लिए 

अगर आप स्किन की ड्राईनेस से तंग आ चुकी हैं, जिसके कारण न तो आपको अपने फेस को टच करने को मन करता है और न ही खुद को बारबार निहारने को दिल करता है , तो ये फेस स्टीम खासकर के आपके लिए ही है, जिसे जरूर टाई करें. जिसमें है ड्राई रोज पेटल्स व लैवेंडर आयल. इससे आपकी स्किन का मोइस्चर लौक होने के साथ स्किन नेचुरली ग्लो भी करने लगती है.

कैसे वर्क करता है– 

– गुलाब की पत्तियों में कोलेजन के उत्पादन को बढ़ाने की क्षमता होने के कारण ये हैल्दी स्किन सेल्स को प्रमोट करके उनमें मोइस्चर को लौक करके स्किन को हाइड्रेट करने का काम करती है. साथ ही इसकी एन्टिओक्सीडेंट्स प्रोपर्टी चेहरे से काले घेरे को भी कम करके स्किन को क्लीन बनाने का काम करती है. इसी के साथ जब इसमें लैवेंडर आयल को शामिल किया जाता है , जिसमें एंटीफंगल व हाइड्रेट प्रोपर्टीज होने के कारण ये स्किन की रेडनेस को दूर करने के साथ उसे प्रोपर मोइस्चर प्रदान करने का काम करती है, जिससे स्किन की ड्राईनेस दूर होने लगती है.

फेस स्टीमिंग के फायदे 

– ये पोर्स को ओपन करके उसमें जमा गंदगी को रिमूव करके स्किन को क्लीन बनाने में मदद करता है. इस प्रोसेस के बाद ब्लैकहेड्स भी सोफ्ट होकर उन्हें बाहर निकालने में भी आसानी होती है.

– वार्म स्टीम से स्किन में ब्लड फ्लो बढ़ता है, जिससे स्किन नेचुरली ग्लो करने लगती है.

– जब गंदगी के कारण पोर्स क्लोग हो जाते हैं , तो उससे डेड स्किन सेल्स के साथ उसमें बैक्टीरिया के होने से स्किन पर एक्ने, इंफेक्शन के चांसेस बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं. जबकि स्टीम से डेड स्किन निकलने से स्किन हैल्दी बन पाती है.

– स्टीम स्किन में आयल के उत्पादन को नेचुरली बढ़ाकर स्किन को हाइड्रेट रखने में मदद करती है.

– फेसिअल स्टीम कोलेजन और इलास्टिन के उत्पादन को बढ़ाकर स्किन को फर्म और यंगर लुक देने का काम करता है.

– इसमें एसेंशियल आयल स्किन को रिलैक्स करने में मदद करती है. फेस को स्टीम देने के लिए आप फेस स्टीमर, बाउल या फिर हॉट टोवेल की मदद ले सकती हैं.

स्टीम लेने के बाद

– चेहरे पर स्टीम के बाद उसे हलके हाथों से एक्सफोलिएट करें, जिससे सारी गंदगी अच्छे से बाहर निकल जाए.

– फिर चेहरे को हलके हाथों से साफ कर उस पर मॉइस्चराइजर अप्लाई करें. इस तरह फेस को स्टीम देकर आप अपनी स्किन को हाइड्रेट व क्लीन बना सकती हैं.

धंधा अपनाअपना: भाग 3- स्वामीजी के साथ क्या हुआ था

यह सुन उस व्यक्ति ने अपनी आंखें बंद कर लीं. उस के चेहरे पर छाए भावों को देख कर लग रहा था कि उस के भीतर भारी संघर्ष चल रहा है. चंद पलों बाद उस ने अपनी आंखें खोलीं और बोला, ‘‘स्वामीजी, मैं एक अरबपति आदमी था, लेकिन व्यापार में घाटा हो जाने के कारण मैं पूरी तरह बरबाद हो गया. सभी रिश्तेदारों और परिचितों ने मुझ से मुंह मोड़ लिया था. एक दिन मुझे पता चला कि यूरोप में एक बंद फैक्टरी कौडि़यों के भाव बिक रही है. मेरी पत्नी आप की अनन्य भक्त है. उस की सलाह पर मैं ने अपना मकान और पत्नी के गहने बेच कर वह फैक्टरी खरीद ली. आप को उस फैक्टरी में 20% का साझेदार बना कर मैं ने उस फैक्टरी को दोबारा चलाना शुरू कर दिया. शुरुआती दिनों में काफी परेशानियां हुईं लेकिन आप के आशीर्वाद से पिछले सप्ताह से वह फैक्टरी फायदे में आ गई. इस समय उस से 5 लाख रुपये रोज का फायदा हो रहा है. इसलिए 20% के हिसाब से मैं रोज

1 लाख रुपए आप के चरणों में अर्पित कर देता हूं.’’

‘‘लेकिन तुम ने यह बात गुप्त क्यों रखी?’’ मुझे बता भी तो सकते थे? स्वामीजी ने पूछा.

‘‘मैं ने सुना है कि आप मोहमाया और लोभ से काफी ऊपर हैं. इसलिए आप को बता कर आप की साधना में विध्न डालने का साहस मैं नहीं कर सका.’’

‘‘वत्स, धन्य हो तुम. तुम जैसे ईमानदार व्यक्तियों के बल पर ही यह दुनिया चल रही है वरना अब तक अपने पाप के बोझ से यह रसातल में समा चुकी होती,’’ स्वामीजी ने गंभीर स्वर में सांस भरी फिर आशीर्वाद की मुद्रा में आते हुए बोले, ‘‘ईश्वर की कृपा दृष्टि तुम पर पड़ चुकी है. जल्द ही तुम्हें 5 लाख रुपए नहीं, बल्कि 5 करोड़ रोज का मुनाफा होने वाला है.’’

‘‘सत्य वचन महाराज,’’ उस व्यक्ति ने श्रद्धा से शीश झुकाया फिर बोला, ‘‘यूरोप में ही एक और बंद पड़ी खान का पता लगा है, मैं ने हिसाब लगाया है कि अगर उसे ठीक से चलाया जाए तो 5 करोड़ रुपए रोज तो नहीं लेकिन 5 करोड़ रुपए महीने का फायदा जरूर हो सकता है.’’

‘‘तो उस फैक्टरी को खरीद क्यों नहीं लेते?’’

‘‘खरीद तो लेता, लेकिन उस के लिए करीब 20 करोड़ रुपए चाहिए. मैं ने काफी भागदौड़ की, लेकिन फंड का इंतजाम नहीं हो पा रहा है. एक बार मुझे व्यापार में घाटा हो चुका है, इसलिए फाइनैंसर मुझ पर दांव लगाने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं,’’ उस व्यक्ति के स्वर में निराशा झलक उठी.

‘‘वत्स, फंड की चिंता मत करो. ऊपर वाले ने तुम्हें मेरी शरण में भेज दिया है, इसलिए अब सारी व्यवस्थाएं हो जाएंगी,’’ स्वामीजी मुसकराए.

‘‘वह कैसे?’’

‘‘तुम जैसे व्यक्तियों का दिया मेरे पास बहुत कुछ है. वह मेरे किसी काम का नहीं है. तुम उसे ले जाओ और फैक्टरी खरीद लो,’’ स्वामीजी ने कहा.

‘‘आप मुझे इतना रुपया दे देंगे?’’ उस व्यक्ति की आंखें आश्चर्य से फैल गईं.

‘‘अकारण नहीं दूंगा,’’ स्वामीजी मुसकराए, ‘‘मुझे अपने भक्तों के कल्याण के लिए बहुत सारे कार्य करने हैं. इस सब के लिए बहुत पैसा चाहिए. इसलिए इस पैसे से तुम फैक्टरी खरीद लो, लेकिन उस में 51 प्रतिशत शेयर मेरे होंगे.’’

‘‘आप धन्य हैं महाराज,’’ वह व्यक्ति एक बार फिर स्वामीजी के चरणों में लोट गया.

‘‘श्रद्धा और सत्या, तुम दोनों अभी इन के साथ इन के निवास पर जाओ.

साझेदारी के कागजात तुरंत बना लो ताकि फैक्टरी को जल्द से जल्दी खरीद लिया जाए,’’ स्वामीजी ने आज्ञा दी.

अगले ही दिन साझेदारी के कागजात तैयार हो गए. स्वामीजी ने हजारों भक्तों की चढ़ाई की कमाई अपने अनन्य भक्त को सौंप दी. वह भक्त फैक्टरी खरीदने यूरोप चला गया.

स्वामीजी की आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने जगमगा रहे थे. किंतु जब 1 महीने तक उस भक्त का कोई संदेश नहीं आया तो उन्होंने श्रद्धानंद और सत्यानंद को उस के निवास पर भेजा. वहां उपस्थिति गार्ड ने उन दोनों को देखते ही बताया, ‘‘उन साहब ने तो 2 महीने के लिए यह कोठी किराए पर ली थी, किंतु आप लोगों के आने के

2 दिनों बाद वे अचानक ही इसे खाली कर के चले गए थे. किंतु जाने से पहले वे आप लोगों के लिए एक लिफाफा दे गए थे. कह रहे थे कि आप लोग एक न एक दिन उन से मिलने यहां जरूर आएंगे.’’

इतना कह कर गार्ड अपनी कोठरी के भीतर से एक लिफाफा ले आया. डगमगाते कदमों से वे दोनों स्वामी दिव्यानंद के पास लौट आए और लिफाफा उन्हें पकड़ा दिया.

स्वामीजी ने लिफाफा फाड़ा तो उस के भीतर से एक पत्र निकला, जिस में लिखा था:

‘‘आदरणीय स्वामी जी,

सादर चरण स्पर्श. अब तो आप को विश्वास हो गया होगा कि यह शरीर नश्वर है. इस के अंदर निवास करने वाली आत्मा का परमात्मा से मिलन ही परमानंद है. किंतु काम, क्रोध, लोभ नामक बेडि़यां इस मिलन में सब से बड़ी बाधा हैं. जिस दिन कोई व्यक्ति इन बेडि़यों को तोड़ देगा उस दिन वह मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर हो जाएगा. आप ने अपने भक्तों की बेडि़यां तोड़ने का कार्य किया है और मैं ने आप की इन बेडि़यों को तोड़ने की छोटी सी चेष्टा की है. आप इसे ‘धंधा अपनाअपना’ भी कह सकते हैं.

आप का एक सेवक स्वामीजी उस पत्र को अपलक निहारे जा रहे थे और श्रद्धा और सत्या उन के चेहरे को.

धंधा अपनाअपना: भाग 2- स्वामीजी के साथ क्या हुआ था

निर्मलजी ने वादा निभाया. सूर्योदय से पहले स्वामीजी के मंच के ऊपर सीसी टीवी कैमरा लग गया. उधर उस भक्त ने भी अपनी रीति निभाई. आज फिर वह लाल वस्त्र में लिपटी 1 लाख की गड्डी स्वामीजी के चरणों में अर्पित कर गया था. श्रद्धानंद और दिव्यानंद आज भी उस भक्त का पता नहीं लगा पाए.

रात के 11 बजे स्वामीजी बड़ी तल्लीनता के साथ सीसी टीवी की रिकौर्डिंग देख रहे थे. अचानक एक दृश्य को देखते ही वे बोले, ‘‘इसे रिवाइंड करो.’’

श्रद्धानंद ने रिकौर्डिंग को रिवाइंड कर के चला दिया. स्वामीजी ने 2 बार और रिवाइंड करवाया. श्रद्धानंद को उस में कोई खास बात नजर नहीं आ रही थी, लेकिन स्वामीजी की आज्ञा का पालन जरूरी था.

‘‘रोकोरोको, यहीं पर रोको,’’ अचानक स्वामीजी चीखे, श्रद्धानंद ने रिकौर्डिंग तुरंत रोक दी.

‘‘जूम करो इसे,’’ स्वामीजी ने आज्ञा दी तो श्रद्धानंद ने जूम कर दिया.

‘‘यह रहा मेरा शिकार,’’ स्वामीजी ने सोफे से उठ कर स्क्रीन पर एक जगह उंगली रख दी. फिर बोले, ‘‘हलका सा रिवाइंड कर स्लो मोशन में चलाओ इसे.’’

श्रद्धानंद ने स्लो मोशन में रिकार्डिंग चला दी. रिकौर्डिंग में करीब 45 साल का एक व्यक्ति हाथों में फूलों का दोना लिए स्वामीजी के करीब आता दिखाई पड़ा. करीब आ कर उस ने फूलों को स्वामीजी के चरणों में अर्पित करने के बाद अपना शीश भी उन के चरणों में रख दिया. इसी के साथ उस ने अत्यंत शीघ्रता के साथ अपनी जेब से लाल रंग के वस्त्र में लिपटी गड्डी निकाली और फूलों के नीचे सरका दी. एक बार फिर शीश नवाने के बाद वह उठ कर तेजी से बाहर चला गया.

‘‘यह कोई तगड़ा आसामी मालूम पड़ता है. इस का चेहरा तुम दोनों ध्यान से देख लो. मुझे यह आदमी चाहिए… हर हालत में चाहिए,’’ स्वामीजी की आंखों में अनोखी चमक उभर आई.

‘‘आप चिंता मत करिए. कल हम लोग इसे हर हालत में पकड़ लाएंगे,’’ सत्यानंद ने आश्वस्त किया.

‘‘नहीं वत्स,’’ स्वामीजी अपना दायां हाथ उठा कर शांत स्वर में बोले, ‘‘वह मेरा अनन्य भक्त है. उसे पकड़ कर नहीं, बल्कि पूर्ण सम्मान के साथ लाना. स्मरण रहे कि उसे कोई कष्ट न होने पाए.’’

‘‘जो आज्ञा,’’ श्रद्धानंद और सत्यानंद ने शीश नवाया और कक्ष से बाहर चले गए.

अगले दिन उन दोनों की दृष्टि हर आनेजाने वाले भक्त के चेहरे पर टिकी थी. रात के करीब 8 बजे जब शरीर थक कर चूर होने लगा तब वह व्यक्ति आता दिखाई पड़ा.

‘‘देखो वह आ गया,’’ श्रद्धानंद ने सत्यानंद को कुहनी मारी.

‘‘लग तो यही रहा है. चलो उसे उधर ले कर चलते हैं,’’ सत्यानंद ने कहा.

‘‘अभी नहीं. पहले उसे गड्डी चढ़ा लेने दो ताकि सुनिश्चित हो जाए कि यह वही है जिस की हमें तलाश है,’’ श्रद्धानंद फुसफुसाए.

पिछले कल की तरह वह व्यक्ति आज भी मंच के करीब आया. फूल अर्पित करने के बाद उस ने स्वामीजी के चरणों में शीश नवाया, लाल रंग में लिपटी नोटों की गड्डी को चढ़ाने के बाद वह तेजी से उठ कर बाहर चल दिया.

‘‘मान्यवर, कृपया इधर आइए,’’ श्रद्धानंदजी महाराज ने उस के करीब आ कर सम्मानित स्वर में कहा.

‘‘क्यों?’’

‘‘स्वामीजी आप से भेंट करना चाहते हैं,’’ सत्यानंदजी महाराज ने बताया.

‘‘मुझ से? किसलिए?’’ वह व्यक्ति घबरा उठा.

‘‘वे आप की भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हैं. इसलिए आप को साक्षात दर्शन दे कर आशीर्वाद देना चाहते हैं,’’ श्रद्धानंदजी महाराज ने बताया, ‘‘बड़ेबड़े मंत्री और अफसर स्वामीजी के दर्शनों के लिए लाइन लगा कर खड़े होते हैं. आप अत्यंत सौभाग्यशाली हैं, जो स्वामीजी ने आप को स्वयं मिलने के लिए बुलाया है. अब आप का भाग्योदय निश्चित है.’’

यह सुन उस व्यक्ति के चेहरे पर राहत के चिह्न उभर आए. श्रद्धानंदजी महाराज और सत्यानंद महाराज ने उसे एक खूबसूरत कक्ष में बैठा दिया.

करीब आधा घंटे बाद स्वामीजी उस कक्ष में आए और अत्यंत शांत स्वर में बोले, ‘‘वत्स, तुम्हारे ललाट की रेखाएं बता रही हैं कि तुम्हें जीवन में बहुत बड़ी सफलता मिलने वाली है.’’

स्वामीजी की वाणी सुन वह व्यक्ति उन के चरणों में लेट गया. उस की आंखों से श्रद्धा सुमन बह निकले. स्वामीजी ने उसे अपने हाथों से पकड़ कर उठाया और फिर स्नेह भरे स्वर में बोले, ‘‘उठो वत्स, अश्रु बहाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि एक नया सवेरा तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है.’’

‘‘स्वामीजी, आप के दर्शन पा कर मेरा जीवन धन्य हो गया,’’ वह व्यक्ति हाथ जोड़ कर बोला. भावातिरेक में उस की वाणी अवरुद्ध हो रही थी.

स्वामीजी ने उसे अपने साथ सोफे पर बैठाया और फिर बोले, ‘‘वत्स, एक प्रश्न पूछूं तो क्या उस का उत्तर सचसच दोगे?’’

‘‘आप आज्ञा करें तो उत्तर तो क्या आप के लिए प्राण भी देने के लिए तैयार हूं,’’ उस व्यक्ति ने कहा.

स्वामीजी ने अपनी दिव्यदृष्टि उस के चेहरे पर टिका दी फिर सीधे उस की आंखों में झंकते हुए बोले, ‘‘तुम प्रतिदिन 1 लाख रुपयों की गड्डी मेरे चरणों में क्यों चढ़ा रहे हो?’’

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