टैडी बियर: भाग 1- क्या था अदिति का राज

 

‘‘सुनिए,मुझे टैडीबियर चाहिए, बिलकुल ऐसा…’’ मोबाइल पर एक फोटो दिखाते हुए अदिति ने एक बार फिर उम्मीदभरी नजर दुकानदार पर गड़ाई. मगर उस ने सरसरी नजर मोबाइल पर डालते हुए इनकार में सिर हिला दिया.

मायूस चेहरा लिए अदिति सौफ्ट टाएज की दुकान से बाहर निकली तो उस की कालेज की पुरानी सहेली देवांशी खीज कर बोली, ‘‘क्या हुआ है तुझे… मुझे सुबहसुबह फोन कर के बुला लिया कि जरूरी शौपिंग करनी है… 2 घंटे से कम से कम 6 दुकानों में टैडीबियर पूछ चुकी है… हम क्या टैडीबियर खरीदने आए है यहां?’’

देवांशी के खीजने पर अदिति ने मासूमियत से मुंह बनाते हुए हां कहा. तो देवांशी उसे हैरानी से देखती हुई बोली, ‘‘अच्छा दिखा मुझे कैसा टैडीबियर चाहिए तुझे,’’ कहते हुए उस के हाथ से मोबाइल छीन लिया. फिर ध्यान से वह फोटो देखा जिस में अदिति पिंक कलर की खूबसूरत ड्रैस में धु्रव और एक टैडीबियर के साथ दिखाई दे रही थी.

शादी से पहले खिंचाई इस तसवीर में टैडी को अदिति ने एक खास अंदाज में

पकड़ा था और अदिति को उसी पोज में धु्रव ने. यह फोटो सोशल साइट पर खूब वायरल हुआ था.

देवांशी जानती थी कि यह टैडीबियर अदिति का धु्रव को दिया पहला उपहार था और वह पिंक ड्रैस धु्रव का अदिति को दिया पहला उपहार. इस फोटो के साथ ही अदिति ने अपने सिंगल स्टेटस को इंगेज्ड में बदल दिया था. फोटो में दिखाई देने वाले टैडी जैसा एक और टैडीबियर खरीदने आई अदिति उस की समझ से परे थी.

देवांशी के चेहरे पर सवाल देख कर अदिति बोली, ‘‘उफ, बड़ी गलती हो गई… मुझे धु्रव से यह टैडी मांगना ही नहीं चाहिए था.’’

‘‘मांग लिया मतलब? तूने अपना दिया गिफ्ट वापस मांग लिया? क्या कह कर गिफ्ट वापस मांगा और क्यों?’’ देवांशी ने हैरानी से पूछा.

अदिति बोली, ‘‘यार मजबूरी में मांगना पड़ा. लंबी कहानी है तू नहीं समझेगी. सारा पेंच इसी में तो है. मैं तो शादी के बाद इस टैडी को भूल भी गई थी पर धु्रव नहीं भूला. अगले हफ्ते हमारी शादी की सालगिरह है. मेरा भाई अर्णव आ रहा है. बेवकूफ अर्णव ने धु्रव से पूछ लिया कि जीजू आप को दिल्ली से कुछ मंगवाना तो नहीं है. यह सुन कर धु्रव ने कह दिया कि वह टैडीबियर लेता आए जिसे मैं मायके में छोड़ आई हूं. अब अर्णव परेशान है कि जो टैडी अब घर में है ही नहीं, उसे कहां से लाए… मैं ने सोचा उस जैसा दूसरा ढूंढ़ कर उस की परेशानी हल कर दूं.’’

‘‘उस जैसा दूसरा… मतलब कि यह फोटोवाला टैडी तुम्हारे मायके से गुम हो गया है?’’ देवांशी ने अपनी समझ से अंदाजा लगाया.

तब अदिति ने खुलासा किया, ‘‘अरे यार हुआ यों कि धु्रव को दिया यह टैडीबियर अर्णव का ही था. अर्णव का भी नहीं था, बल्कि अर्णव को वह अपनी गर्लफ्रैंड से मिला था.  बाद में दोनों के बीच ब्रेकअप हो गया. उन दिनों मेरे और धु्रव के बीच में चक्कर चल रहा था सो उस खूबसूरत टैडी को मैं ने अर्णव से मिन्नतें कर के मांग लिया. और धु्रव को दे दिया.

‘‘एक दिन अर्णव का मूड खराब था. उस का मेरा झगड़ा हो गया… अब क्या जानती थी कि बेवकूफ अर्णव से मेरा झगड़ा इतना महंगा पड़ेगा कि वह गुस्से में भर कर अपना टैडीबियर मुझ से वापस मांग लेगा… तू तो मुझे जानती है कि मैं किसी की धौंस सहन नहीं करती हूं… मैं ने भी प्रैस्टिज इशू बना कर किसी तरह जोड़तोड़ कर के उस का टैडी धु्रव से वापस मांग कर उस के मुंह पर मार दिया…’’

‘‘हांहां, पर धु्रव से क्या कह कर वापस मांगा… मतलब टैडी मांगने के लिए क्या

जोड़तोड़ की?’’

देवांशी ने उत्सुकता से पूछा तो अदिति सीने पर हाथ रख कर स्वांग भरती कहने लगी, ‘‘अरे, उस समय तो धु्रव को यह कह कर बहला लिया कि इस टैडी में मुझे तुम दिखते हो. तुम तो हमेशा मेरे पास रहते नहीं हो, इसलिए इस टैडी को मैं सदा अपने पास रखना चाहती हूं ताकि तुम्हें मिस न करूं… धु्रव भावुक हो गया. ये सब सुन कर उस ने टैडी मुझे सौंप दिया और मैं ने उस ईडियट अर्णव को… और अर्णव ने अपनी बेवकूफ ऐक्स गर्लफ्रैंड को वापस कर दिया.’’

‘‘कैसा भाई है तेरा… और तू भी न… धु्रव को पहला गिफ्ट दिया वह भी भाई की गर्लफ्रैंड का जो उस ने तेरे भाई को दिया था.’’

‘‘अरे मैं ने सोचा फालतू पड़ा है… मतलब टैडी बड़ा क्यूट था… उन का तो ब्रेकअप हो ही चुका था. क्या करता अर्णव उस का सो दे दिया.’’

‘‘दे दिया नहीं ठिकाने लगा दिया.’’

देवांशी के यह कहने पर अदिति धीमे से बोली, ‘‘हां यार, यही गलती हो गई… पर अर्णव, जैसा भी है, है तो आखिर मेरा भाई… हालांकि उस ने झगड़े के बाद परेशान बहुत किया. जानती है, मैं तो तब डर ही गई थी, जब वह चिढ़ कर कहने लगा था कि मैं धु्रव को बता दूंगा कि जो टैडी तुम्हें अदिति ने दिया है दरअसल वह मेरी गर्लफ्रैंड ने मुझे दिया था. अब सोच, वह मुझे शर्मिंदा करे उस से पहले ही मैं ने तिकड़म कर मामला सुलटा लिया वरना पता नहीं क्या होता… अब क्या जानती थी कि धु्रव को अपनी पहली शादी की सालगिरह आतेआते पहली डेट की वह निशानी याद आ जाएगी…’’

अदिति की बात सुन कर देवांशी ने सिर पकड़ लिया. कुछ देर चुप रहने के बाद वह बोली, ‘‘तू ऐसा कर, ऐसा टैडी औनलाइन सर्च कर…’’

‘‘वह भी कर लिया नहीं मिला,’’

अदिति बोली.

देवांशी कुछ देर मौन रहने के बाद बोली, ‘‘अब एक ही रास्ता है… जैसे तुम ने मुझे सारी बात बताई वैसे ही उस की ब्रेकअप वाली फ्रैंड को बता दे. शायद वह तुम्हारी बेवकूफी को समझे और तरस खा कर वह टैडी वापस कर दे.’’

‘‘अर्णव ने यह भी सोचा था, पर पता चला अब वह इंडिया में नहीं है. उस से कोई कौंटैक्ट ही नहीं हो पा रहा है…’’

‘‘बेचारे अर्णव ने मेरी शादी से पहले अपनी इस हरकत के लिए मुझ से माफी मांग ली थी. मैं भी उस की इस बेवकूफी को भाईबहन की बेवकूफियां समझ कर भुला चुकी थी पर अब बता क्या करूं?’’

‘‘तू पागल है अदिति, बिलकुल पागल… शादी के पहले हम बहुत सी बेवकूफियां करते हैं, पर वे बेवकूफियां शादी के बाद भी जारी रहें यह सही नहीं है. सुन, मैं धु्रव को सब बता देती हूं,’’ देवांशी ने मोबाइल उठा लिया.

अदिति ने उस के हाथ से मोबाइल छीनते हुए कहा, ‘‘क्या कर रही है तू… किस मुंह से कहूंगी कि जानूं, मैं ने तुम्हें बेवकूफ बनाया… तुम्हें दिया हुआ पहला गिफ्ट मांगा हुआ था. और तो और, मैं ने तुम्हें बेवकूफ बना कर उसे तुम से वापस हासिल कर के अपने भाई को दे दिया और भाई ने अपनी ब्रेकअप वाली गर्लफ्रैंड को… देख देवांशी, मैं धु्रव को बहुत प्यार करती हूं और ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहती हूं, जिस से उसे मेरा वह प्यार, वे सारी फीलिंग्स छलावा लगें… वह मुझे तो क्या मेरी पूरी फैमिली को चालू समझेगा.’’

दुनिया अगर मिल जाए तो क्या: भाग-1

क्लासरूम में जैसे ही चैताली आई, ओनीर ने मुंह बना कर अपने साथी धवन को इशारा किया, आ गई. चैताली रोज से अलग कुछ अच्छे मूड में थी. बाकी स्टूडैंट्स ने चैताली को विश किया. ये सब मुंबई के इस कालेज में इतिहास में पीएचडी कर रहे स्टूडैंट्स थे. ओनीर ने यों ही एक नजर सहर पर भी डाली, मन में सोचा, हद है यह लड़की. इतना सुंदर कौन होता है, काश.

चैताली ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘जानती हूं, अब आप को बेसब्री से इंतजार होगा कि कब आप के नाम के आगे डाक्टर लगे. है न?’’ सब स्टूडैंट्स ने हंसते हुए ‘हां’ में गरदन हिला दी.

चैताली की आदत थी, वह एकदम से किसी मशीनी तरीके से लैक्चर की शुरुआत नहीं करती थी, पहले कुछ सामयिक मुद्दों पर थोड़ी बात करती थी, फिर काम की बातों पर आती थी. आज भी उस ने पूछ लिया, ‘‘पेपर पढ़ा आप लोगों ने या वह वीडियो देखा जिस में दलित मांबेटी को जिंदा जला दिया गया? पता नहीं, देश में यह हो क्या रहा है.

युवान सोशल मीडिया की सारी खबरों पर बात कर सकता था. उस के पास अथाह नौलेज थी. वैसे तो ये सारे स्टूडैंट्स इस समय शिक्षा के क्षेत्र में सब से ऊंची डिग्री लेने जा रहे थे. सभी खूब ज्ञानी थे. इतिहास यों भी पिछली घटनाओं, उन के परिणामों और आधुनिक समाज पर प्रभाव का अध्ययन है. युवान ने कहा, ‘‘मैम, हां, देखा, दुख होता है.’’

‘‘आप लोगों को भी लगता है कि पिछले कुछ समय में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं?’’

ओनीर के संस्कार और परवरिश ने उसे हिंदू राष्ट्र का अंधसमर्थक बना दिया था. वह खड़ा हो गया. उसे जब भी गुस्सा आता, बैठ कर आराम से बात करना उस के हाथ में न रहता, यह अब तक सब जान गए थे. चैताली भी अनुभवी थी, समझ गई कि बात अब कहां जाएगी. ओनीर ने कहा, ‘‘क्यों मैम, इस से पहले देश में कभी किसी के साथ अन्याय हुआ ही नहीं था?’’

‘‘मैं वर्तमान की बात कर रही हूं.’’

‘‘मैं नहीं मानता.’’

‘‘तुम्हारे मानने, न मानने से कुछ बदलने वाला नहीं है. इतिहास के स्टूडैंट हो, तर्क और तथ्य के साथ बात किया करो. कल किसी कालेज में प्रोफैसर बनोगे, स्टूडैंट्स को सही पाठ पढ़ाना तुम्हारा फर्ज होगा, व्हाट्सऐप वाला ज्ञान उन के दिमाग से निकालना होगा.’’

ओनीर हमेशा उन की व्हाट्सऐप वाली बात पर बहुत चिढ़ता था, अब भी चिढ़ गया.

‘‘मैं प्रोफैसर नहीं बनना चाहता. मैं इतिहासकार या जर्नलिस्ट बनूंगा. इतिहास के वो पन्ने ढूंढ़ढूंढ़ कर सब के सामने रखूंगा कि लोग जानें कि मुगलों ने हिंदुओं पर कितने अन्याय किए हैं, एक राजनीतिक पार्टी जौइन करूंगा जो हिंदू राष्ट्र की समर्थक है. लोगों को दलितों पर हुए अन्याय दिखते हैं, जो इतिहास में हमारे साथ हुआ, उस की बात कोई नहीं करता. दलित लोग अपना तमाशा खुद ही ज्यादा बनाते रहते हैं. उन के दिलदिमाग में ही हीनभावना भरी रहती है.’’

‘‘तुम्हारे जैसे स्टूडैंट्स मेरी क्लास में हैं, दुख होता है. इतना पढ़लिख कर भी…

‘‘तो आप भी तो इतना पढ़लिख कर सिर्फ आज की न्यूज में किसी दलित की ही न्यूज लाईं, मैम. आप को भी तो अपनी जाति से सहानुभूति रहती है, मैं क्यों नहीं अपनी जाति पर गर्व कर सकता?’’

ओनीर चैताली के साथ अशिष्टता कर रहा था, सब को दिख रहा था. पर कोई कुछ बोला नहीं क्योंकि ओनीर सब पर एक अकड़ के साथ हावी रहता था पर जब सहर उठ कर खड़ी हुई, ओनीर के लिए फिर बस वहां हर तरफ सहर ही थी. वह सबकुछ भूल गया, अपलक सहर को देखने लगा. सहर उदार विचारों की लड़की थी, सब उसे पसंद करते. उस ने आहिस्ता से ओनीर को जैसे सोते से जगाया, ‘‘ओनीर, मैम से इस तरह आप का बात करना बिलकुल अच्छा नहीं लग रहा है. वे हमारी प्रोफैसर हैं, उन की रिस्पैक्ट करना हमारा फर्ज है.’’

ओनीर फिर चिढ़ा, ‘‘मैं गलत बात को गलत कह रहा हूं. मैम से मेरी कोई पर्सनल प्रौब्लम थोड़े ही है.’’

‘‘आप को पता है कि आप मैम से गलत तरह से बात कर रहे थे, इस तरह की जातिगत बहस हमारी क्लासरूम तक न ही पहुंचे तो अच्छा रहेगा. मैम, अब आप बताएं कि अगले प्रोजैक्ट के लिए क्या करना है, काफी टाइम वेस्ट हो गया है.’’

ओनीर ने सहर को देखा, वाइट कुरते, जीन्स में पतली, लंबी सी सुंदर सहर, हमेशा की तरह उस के दिल में उतर गई, फिर सोचा, काश…

सहर को बहुत सारे शेर, गजलें, गीत, याद रहते थे. वह बहुत अच्छा गाती भी थी. जब भी कोई शेर कहती, उस की जादुई आवाज में सामने वाले जैसे खुद को भूल जाते. वह अपनी इस शायरी के लिए पूरे कालेज में मशहूर थी. कोई भी फंक्शन होता, कुछ न कुछ जरूर गाती. इस समय भी उस ने चैताली को देख कर कहा, ‘‘मैम, यह आप के लिए, ‘‘जहर मीठा हो तो पीने में मजा आता है, बात सच कहिए मगर यूं कि हकीकत न लगे.’’

सब हंस पड़े. पढ़ाई शुरू हुई. उस के बाद सहर के चेहरे से ओनीर नजरें हटा न पाया.

चैताली ने आज क्लास को फिर गंभीर मुद्रा में ही नोट्स दिए. थोड़ी देर बाद सब अपनेअपने दोस्तों के साथ कौफी हाउस की तरफ चल दिए. वहां का स्टाफ सब को पहचानता ही था, सहर अपनी फ्रैंड्स नितारा और मिराया के साथ नीबू पानी का और्डर दे कर बैठ गई. बराबर में ही लड़के अपना और्डर दे कर बैठ गए. नितारा ने ओनीर को छेड़ दिया, ‘‘तुम आज कुछ कोल्डड्रिंक ले लो, दिमाग बहुत गरम है तुम्हारा.’’

रसोई: सुधीर ने विभा के सामने कौन-सी शर्त रख दी

‘‘विभा  चाय ले आओ बढि़या सी,’’ घर के अंदर घुसते ही सुधीर ने पत्नी को आवाज लगातार कहा और खुद पिता के निकट बैठ गया.

‘‘पापा, देखो 4 कमरे निकल आए हैं

और अलग स्पेस भी,’’ सुधीर ने उत्सुकता से पिता के सामने नक्शा बिछा कर कहा.

‘‘बढि़या, अच्छा यह बता कि ड्रांइगरूम का साइज क्या है? छोटा नहीं होना चाहिए. दिनभर वहीं बैठना होता है मुझे,’’ पिता ने नक्शे को देखते हुए कहा.

‘‘अरे पापा, यह देखो पूरे 15 बाई 15 का निकल रहा है. ध्यान से देखो न. 2 बैडरूम

14 बाई 12 के और एक 12 बाई 12 का,’’

सुधीर की आवाज में अलग खनक थी.

‘‘बस सब बढि़या हो गया. बस अब काम शुरू करवा दे प्लाट पर. इस दड़बे से निकलें बाहर,’’ पिता ने कहा.

‘‘रसोई का क्या साइज है?’’ विभा ने पूछा.

‘‘अरे यार तुम चाय रखो पहले. बहुत थक गया हूं,’’ सुधीर ने कहा.

सुधीर और ससुर को चाय पकड़ा विभा फिर नक्शे को देखने लगी.

‘‘8 बाई 8 की रसोई तो बहुत छोटी बनेगी,’’ विभा बोली.

‘‘आठ बाई 8 की रसोई छोटी नहीं होती और वैसे भी तुम्हें कौन सा रसोई में खाट बिछानी है, खाना ही तो बनाना है,’’ चाय का घूंट भरते हुए सुधीर बोला.

‘‘मेरा तो पूरा दिन वहीं बीतता है बस खाट ही नहीं बिछाती.

गरमी में कितनी घुटन हो जाती है तुम क्या जानो,’’ विभा के स्वर में उदासी थी.

‘‘अरे यार, मम्मी ने पूरी जिंदगी इस 6 बाई 6 की रसोई में बीता दी. उन्होंने तो कभी शिकायत नहीं की छोटी रसोई की,’’ सुधीर चिढ़ते हुए बोला.

‘‘कभी खड़े हो कर देखना जून की गरमी में. खुद पता चल जाएगा मैं शिकायत कर रही हूं या परेशानी बता रही हूं,’’ विभा बोली.

‘‘यार नौटंकी न करो. काम में विघ्न मत डालो. अब नक्शा बन गया है,’’ सुधीर झल्लाते हुए बोला.

‘‘तो ठीक करवा ले नक्शा. शिकायत नहीं की तो क्या मुझे दिक्कत नहीं थी? खूब परेशानी होती थी इस पिंजरे सी रसोई में खाना बनाने में.

पूरी जिंदगी सोचती रही कि अगर नया घर बना तो रसोई खूब खुली बनाऊंगी,’’ अब तक चुप बैठी सुधीर की मां बोल पड़ी.

‘‘सच में मां, मैं अपने बैडरूम से ज्यादा रसोई को खुला चाहती हूं ताकि 4 मेहमानों के आने पर खाना बनाने में दिक्कत न हो,’’ सास की बात से बल ले विभा बोली.

‘‘बिलकुल सही है. औरत की पूरी जिंदगी रसोई के धुंए में स्वाहा हो जाती है लेकिन किसी को इस का एहसास नहीं होता. सुधीर तू रसोई का साइज 2 फुट बढ़ा और देख रसोई में हवा और रोशनी बराबर हो,’’ मां ने आदेश दिया.

‘‘फिर तो ड्राइंगरूम छोटा करना होगा. पापा से पूछ लो पहले मां,’’ सुधीर ने पिता की ओर देख कर कहा.

‘‘तेरे पापा को बनाना पड़ता है क्या खाना?’’ मां ने चिढ़ते हुए कहा.

‘‘बेटा सुधीर, रोटियां चाहिए तो जो ये सासबहू कहें मान ले भई,’’ पिता ने पत्नी की ओर देख बेचारा बन कर कहा.

‘‘नहीं पापा, रहने दीजिए. यदि आप दोनों की सहमति नहीं है तो मैं कुछ नहीं कहूंगी,’’ विभा ने कहा.

‘‘अरे बेटा, मेरी सहमति तो सब की खुशी में है और सब की खुशी तो घर की लक्ष्मी से जुड़ी है. वह दुखी तो कैसी सहमति और फिर हम दोनों को यह बात समझनी चाहिए थी कि कैसे गरमी में एक औरत घर का पेट भरने के लिए गरमी में बिना शिकायत जलती रहती है.’’

ससुरजी की बात सुन विभा का चेहरा खिल उठा. उस ने सुधीर की ओर देखा.

‘‘ठीक है भई. बहुमत की जयजयकार है. कल ही रसोई के साइज और वैंटिलेशन को ले कर बात करता हूं. लेकिन एक शर्त पर,’’ सुधीर ने कहा.

‘‘कौन सी शर्त?’’ मां ने पूछा.

‘‘मुझे समोसे खाने हैं वह भी मां के हाथों के,’’ सुधीर चहकते हुए बोला.

‘‘तू नहीं सुधरेगा. अब भी मां को गरमी में मारेगा. बीवी को बोल अपनी,’’ मां ने नकली गुस्सा दिखाते हुए कहा.

‘‘नहीं मां, आप की बहू को कुछ नहीं कहूंगा क्योंकि जान गया हूं कि बहुमत उसी के पास है,’’ सुधीर ने विभा की ओर दोनों हाथ जोड़ कर कहा.

सुधीर की इस हरकत पर तीनों के चेहरे पर हंसी खिल गई जैसे वसंत की धूप आंगन में पसर गई.

मुलाकात: क्या आरती को मिला मदन का प्यार

आरती ने जब कार से उतरने के लिए पैर बाहर निकाला तो अचानक पूरे बदन में सिहरन सी हुई. उसे लगा कि वापस चली जाए और दावत को टाल दे, मगर फिर उस ने दोबारा कुछ सोचा और कार लौक कर के  फटाफट आयोजनस्थल की तरफ चल दी.

आरती को उस की एक परिचिता ने इस आयोजन का कार्ड दिया था. मगर अभीअभी उस की परिचिता ने फोन कर उसे बताया कि उसे अचानक शहर से बाहर जाना पड़ रहा है. मगर आरती तब तक तैयार हो कर घर से निकल चुकी थी. आयोजनस्थल में काफी रौनक थी. गेट पर

2 युवतियों ने स्वागत किया और आरती को गुलाब का एक ताजा फूल दिया. गेट से समारोहस्थल के हौल में भीतर आते ही 2 सेवक कुरसी ले कर उस के समीप आ गए. एक सेवक ट्रे में शीतल पेय ले आया और दूसरा सनैक्स.

आरती को यह आवभगत बेहद अचछी लगी. अब उस ने चारों तरफ नजर घुमा कर गौर से छानबीन की. कोई भी जानपहचान वाला नहीं दिखा यानी आरती को पूरा समय यहां बिलकुल अकेले ही बैठना था.

यह दावत किसी रियल स्टेट वालों ने अपनी फर्म की प्रमोशन के लिए रखी थी. बड़ीबड़ी स्क्रीन्स पर उन का प्रचार स्वत: हो रहा था. अब 2 गायक मंच पर आए और गीतसंगीत आरंभ हो गया. इसी गहमागहमी और मधुर संगीत के आनंद में सिर हिला कर सहज ?ामती हुई आरती की नजर अचानक किसी से टकराई. पहले कभी इस नैनमटक्का की आदत नहीं थी  सो आरती एकदम सकपका सी गई. वह घबरा कर अपनी जगह से उठी और फट से  बाहर आ गई. उस ने कार स्टार्ट की और घर चल दी. वैसे भी उसे वहां 1 घंटा हो ही गया था.

इतना काफी था मगर वह अजनबी चेहरा और उस की नशीली आंखें… 1-2 दिन तक तो आरती उस अजनबी को भुला न सकी. हमेशा सोचती रहती कि एक अनजान सी जगह थी. सारे अजनबी थे. किसी से जानपहचान नहीं. मगर वह एक अपरिचित उसे एक नजर मिलते ही अपना सा लगा और वह तो भाग कर ही चली आई. उफ… पानी पीते यही सब सोचती आरती के गले में पानी की कुछ बूंदें अटक गईं. वह एक बार फिर घबरा गई.

3-4 दिन बाद आरती सुपरबाजार से राशन लेने गई थी तो किसी जानेपहचाने चेहरे को देख कर एकदम ठिठक गई, ‘उफ, यह तो वही है जो उस आयोजन में दिखाई दिया था,’ आरती मन ही मन में सोचने लगी.

सब्जी और राशन ले कर वह अपनी कार की तरफ जा ही रही थी कि किसी ने पीछे से टोका, ‘‘अजी सुनिए तो.’’

‘‘उफ, यह तो सिरफिरा है. औरतों का

पीछा करने वाला सनकी है,’’ आरती को मन ही मन झंझलाहट सी होने लगी. न जाने कैसेकैसे लोग हैं.

वह जवाब दिए बगैर चलती रही कि दोबारा आवाज आई, ‘‘अजी बगैर चाबी के कार

कैसे चलेगी… यह लीजिए.’’

‘‘आरती यह सुन कर सकपका गई. चाबी सचमुच उस के पास नहीं थी. अब उसे सहीसही याद आया कि वह सब्जी लेते समय कार की चाबी भूल आई थी.

‘‘ये लीजिए,’’ अब वे महाशय सामने आ गए थे.

‘‘शुक्रिया,’’ आरती ने लजा कर कहा.

‘‘मेरा नाम मदन है. और आप उस दिन भी मिली थीं, उस आयोजन में है न?’’

‘‘जीजी हां मैं वहां आई थी,’’ अब आरती ने सहज हो कर आराम से बिना घबराए और दोस्ताना अंदाज में जवाब दिया तो मदन की भी हिम्मत बढ़ी. बोला, ‘‘अगर ऐतराज न हो तो क्या हम कौफी पी सकते हैं.’’

‘‘अच्छा, ठीक है. मैं आती हूं,’’ कह कर आरती ने अपने हाथों में लटक रहे सब्जी के बैग व अन्य सामान को कार में रखा. फिर बोली, ‘‘चलें?’’

‘‘जी चलिए.’’

इस पर आरती हौले से हंस दी.

‘‘तो आप जमीन आदि खरीदने में रुचि रखती हैं,’’ मदन ने कौफी का सिप लेते हुए कहा.

‘‘जी नहीं बिलकुल नहीं. बस ऐसे ही.’’

‘‘ऐसे ही का मतलब?’’

‘‘मतलब मेरी एक परिचिता ने मुझे मनुहार कर के उस आयोजन में आने को कहा था.’’

‘‘ओह, क्या बात है. आप मनुहार तो मान ही लेती हैं.’’

‘‘अ,.. जी… जी,’’ आरती संकोच से बोली.

मदन ने मजाक किया, ‘‘बिलकुल मैं ने अनुरोध किया तो कौफी पीने भी आ गईं. है न.’’

‘‘अरे, मदनजी,’’ कह कर आरती इस बात पर फिर हंस दी. दोनों बातबात पर हंसते रहे.

उस दिन की यह मुलाकात बस इतनी सी

ही रही थी. मगर अब मदन और आरती 1-2 बार आगे भी  इसी तरह अनायास मिल गए. मगर दोनों ही बडी हैरत में थे कि न तो एकदूजे से

फोन नंबर लिया और न कोई पता मांगा. लेकिन यह मुलाकात है कि बारबार खुदबखुद हो ही

जाती है.

एक दिन ऐसी ही एक मुलाकात में मदन ने प्यार से कहा, ‘‘आरती, एक बात कहूं?’’

‘‘हां, कहो,’’ आरती ने उसे हौसला दिया, ‘‘बिलकुल कहो मदन,’’ आरती अब उस से जरा सी भी औपचारिक नहीं रही थी.

‘‘आरती बात यह है कि तुम भी अभी अविवाहित हो न?’’

‘‘हां तो?’’

‘‘आरती, मैं भी एक साथी ही खोज रहा हूं. तुम से साफसाफ पूछना चाहता हूं.’’

‘‘अरे, मदन इतनी जल्दी. अभी तो तुम मेरे विषय में कुछ भी नहीं जानते. तुम इतनी जल्दी यह फैसला कैसे ले रहे हो?’’ आरती को यह प्रस्ताव अच्छा भी लगा और अजीब भी.

‘‘बात यह है आरती कि मैं तुम्हें अपना जीवनसाथी बनाना चाहता हूं्. तुम्हारे अतीत को नहीं मैं तुम से बहुत प्रभावित हूं आरती,’’ मदन ने रोमांटिक हो कर कहा तो आरती का दिल भी धड़कने लगा. वह बोली,’’ मगर मदन मेरा यह जीवन तो कांटों की सेज है.’’

‘‘ओह चलो, तो बताओ अपने बारे में.’’

मदन ने सुनने की ख्वाहिश की तो आरती ने बताया, ‘‘मदन मेरे माता पिता अब 62 साल के हैं,’’ और मेरा एक भाई है वह भारतीय प्रशासनिक सेवा में अफसर है.’’

‘‘ओह, ग्रेट,’’ मदन ने बात काटी.

आरती बोली, ‘‘मदन पूरी बात तो सुनो. वे अफसर थे पर अब वे जेल में हैं.’’

‘‘अरे, जेल में? पर कैसे?’’

‘‘यह लंबी कहानी है मदन. मेरे भाई के

पास मानव संसाधन मंत्रालय का बेहद गोपनीय विभाग था. 2 साल पहले जब पिता एक निजी कंपनी से रिटायर हुए तो उन के पास रोजगार

नहीं रहा. तब मैं खुद बीएड कर रही थी तो वे भाई से बोले कि कुछ मदद चाहिए बेटा इलाज कराना है. मगर भाई ने साफ मना कर दिया. उस के बाद मैं ने भी 2-3 बार फोन किया तो भाई मु?ा से बहस करने लगे कि मैं ने तो घर में छोटी होने का बस लाभ ही लाभ लिया है. मैं तो बैठ कर ऐश कर रही हूं. फिर मैं ने समझाया कि भैया अब घर में कोई आमदनी नहीं है. पापा को कोई पैंशन नही मिलेगी तो वे चीखने लगे कि पिता को अगर पैंशन नहीं मिलती तो पहले की बचत तो होगी? वे तो बस तेरे लिए ही रखी है आदिआदि.

‘‘बस इन ओछी बातों से आहत होने के बाद मैं ने भाई से संबंध काट लिए और इस घटना के कुछ हफ्ते बाद अखबार में पढ़ा कि एक सेवा संबंधी जरूरी भरती में बड़ा घोटाला हुआ है. उस में भाई के खिलाफ काफी सुबूत मिले और भाई जेल में डाल दिए गए हैं. भाभी ने भी कुछ दिन पहले ही उन से तलाक ले लिया. अब 32 साल के भाई अकेले हो गए हैं,’’ कह कर आरती खामोश हो गई.

‘‘ओह, यह तो दुख की बात है,’’ मदन ने गंभीर हो कर कहा.

आरती बोली, ‘‘भाई मुझ से 7 साल बडे़ हैं. पापा ने उन की पढ़ाई के लिए

मकान तक बेचा. हम लोग किराए के मकान में आ गए. मैं हमेशा सोफे पर ही सोती ताकि भैया जो अपने कमरे में सामान फैला कर पढ़ते थे परेशान न हों. मगर भैया ने सफलता मिलते ही अपनी बचपन की साथी से विवाह कर लिया और इस की सूचना हमें फोन पर दी. इस घटना से पापा पर क्या बीती थी. यह तो वही जानते हैं. मगर भाभी ने तो असुरक्षा में गलत कदम उठाया.’’

‘‘आरती यह क्या कह रही हो? गलत

कदम कैसे?’’

‘‘मदन मेरे भाभी और भैया बचपन के साथी रहे… भाभी के घर मे भी बहुत गरीबी थी. वे अपने छोटे भाईबहन आदि को विवाह के बाद भैया के बंगले में ले आई और हम लोगों को भैया से एकदम अलग कर दिया. मगर था तो भाई ही न, इसलिए एक बार तो मैं उन के विवाह के एक साल बाद राखी पर हिम्मत कर के भैया से मिलने गई भी पर मत पूछो कि क्या हुआ.’’

‘‘बताओ न आरती,’’ मदन जानना चाहता था.

‘‘मदन, मैं तो अपनी अच्छी भावना से ही गई थी. हम तो अपना गुजारा जैसेतैसे कर ही रहे थे और मातापिता को इसी बात की खुशी थी कि बेटा इतने बडे़ पद में आ गया. बाद में उन की यह नाराजगी भी खत्म हो गई कि भैया ने गुपचुप विवाह किया. मदन फिर यह हाल हो गया था कि समय का खेल मान कर हम तीनों लोग अपने हाल में जी रहे थे.’’

‘‘फिर क्या हुआ आरती?’’ मदन उत्सुक था.

‘‘मदन, जब मैं राखी ले कर गई उसी समय भाभी तथा उन के पीहर वाले सब के सब सजधज कर एक बहुत महंगी गाड़ी में कहीं जा रहे थे. बताया भी नहीं कि कहां जा रहे है. बस, मु?ो वहीं बैठा कर सब तुरंत चले गए. भैया तो शहर से बाहर थे…

‘‘भाभी ने तो मुझे अंधेरे में रखा, मैं बाहर बैठी 2 घंटे इतजार करतीकरती

लौट गई तो शायद उसी समय मेरे पीछे भैया भी आए होंगे और भाभी ने भाई को उलटा मेरे ही लिए न जाने कैसी गलत बातें कह दी और अगले दिन भाई ने मुझे फोन पर ही खूब लताड़ा. खैर, मैं तो उस पल ही वह रहासहा रिश्ता भी खत्म

कर के भाई को भूल कर बस अपने पढ़नेलिखने में रम गई.’’

‘‘अच्छा,’’ मदन ने एक बार फिर गहरी सांस ली, ‘‘आरती, तो अब तुम नौकरी कर रही हो न?’’ उस ने पूछा.

आरती बोली, ‘‘मदन अभी तो एक निजी स्कूल में हूं. आगे जो भी हो पर मातापिता को अकेले इस तरह छोड़ कर तो कदापि नहीं जा सकती.’’

‘‘आरती एक बात मेरी भी सुनो. मेरी कहानी भी ऐसी ही है.’’

‘‘अच्छा मदन बताओ न,’’ आरती उस का चेहरा ताकने लगी.

‘‘तो सुनो आरती, जब मैं ने होश संभाला तो रोज सुबहशाम बस यही पाया कि मेरी माताजी मेरे युवा चाचा की गोद में जबतब बैठी रहती. दोनों खिलखिलाते रहते और रहे मेरे पिता तो वे एक नंबर के जुआरी और शराबी थे. वे काम पर जाते थे पर सारा पैसा ऐसे ही उड़ा दिया करते थे. बड़ा होने लगा तो मैं अपनी माता और चाचा के इस अवैध प्रेम से परेशान नहीं था.

‘‘आरती मैं यह सच हौलेहौले सम?ा रहा था कि माता को असली प्यार चाचा ने दिया और रहे चाचा तो वे विवाह तक नहीं कर रहे थे यानी वे भी मेरी माता को बेहद चाहते थे. आरती अपने मातापिता की मैं अकेली संतान हूं. जब मैं 10वीं कक्षा में पढ़ता था तो मेरे पिता ने बीमार हो कर इस संसार से विदा ले ली और मेरी माताजी

1 महीने बाद ही मेरे चाचा के साथ भाग गई.’’

ओह, आरती का चेहरा सफेद पड़ गया.

‘‘दरअसल, आरती घर किराए का था. आसपास के

लोग उन पर आए दिन उंगली उठाने लगे थे. मुझे भी ले जा रहे थे. मैं भाग आया वापस.

मैं उन के साथ जानबूझ कर

नहीं गया.’’

‘‘फिर तुम कैसे रहे मदन?’’ आरती ने भरे गले से पूछा.

‘‘मेरा तो कोई रहा ही नहीं था आरती. मैं ने यही पर निर्धन छात्रावास में रह कर आगे की पढ़ाई की. फिर कालेज के दिनों में मोमबत्तियां बना कर बेचीं. आगे फिर बैंक से कर्ज लिया. मैं दिनरात काम करता रहा और आज हाल यह है कि मेरा मोमबत्तियां बनाने का कारखाना है. आरती मैं अपने पैरों पर खड़ा हूं.’’

आज यह कहानी सुन कर मैं तुम्हें पहले से भी अधिक चाहने लगी हूं,’’ आरती ने उस का हाथ पकड़ कर कहा.

मदन बोला, ‘‘आरती, मैं हमेशा तुम्हारा इंतजार करूंगा. तुम्हें पहली नजर में देख कर ही मेरा दिल धड़क उठा था. आरती मैं सचमुच तुम से दिल लगा बैठा हूं.’’

यह सुन कर आरती की आंखों से आंसू

बहने लगे. बोली, ‘‘चलो मदन, आज ही और अभी मैं तुम्हें मातापिता से मिलवाने ले चलती हूं.’’

आरती के मातापिता को मालूम था कि आरती की पसंद खराब हो ही नहीं सकती है. मदन उन्हें बेहद अच्छा लगा.

‘‘मैं आप का कोई खोया हुआ बेटा हूं यह मान लीजिए,’’ मदन ने कहा तो वे दोनों फफकफफक कर रोने लगे.

मदन ने उन के आंसू पोंछे और कहने लगा, ‘‘मेरा भी अपना कोई नहीं है और आप ने मु?ो अपना लिया. समय का यही न्याय है. हम 4 लोग एकसाथ रहेंगे. यह किराए का मकान खाली करवा कर मैं आप को कल ही लेने आ रहा हूं,’’ मदन ने उत्साह से कहा.

यह सुन कर आरती खुशी के मारे 7वें आसमान में थी. वह सोच रही थी कि अगर उस दिन कार में बैठ कर वापस लौट जाती तो उसे मदन जैसा जीवनसाथी नहीं मिलता.

Diwali Special: बौलीवुड के सितारे कैसे मनांएगे दीवाली

भारतीय संस्कृति में हर त्यौहार का अपना महत्व है.हर त्यौहार एक जश्न होता है.इस जश्न को मनाने के लोगो के अपने अपने अंदाज है.बौलीवुड में तो यह पैसे के दिखावे का त्यौहार/उत्सव रहा है.बौलीवुड में दीवाली के दिन मां लक्ष्मी का पूजन करने से अधिक जष्न मनाने व एक दूसरे को उपहार देने का उत्सव ज्यादा है, जिसमें हर धर्म के कलाकार शिरकत करते हैं.अमिताभ बच्चन,अनिल कपूर,शाहरुख खान, आमीर खान,एकता कपूर,भूषण कुमार सहित कई फिल्मी हस्तियां ‘दीवाली पार्टी का आयोजन कर दीवाली का जश्न मनाते हैं.जी हाॅ! कई बॉलीवुड सितारे दिवाली पार्टी के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर देते हैं. इन सितारों को दिवाली जश्न काफी शानदार और देखने लायक होता है.इनकी पार्टी में बौलीवुड के तमाम सितारे भी शामिल होते हैं.

दिवाली से एक सप्ताह पहले या दिवाली के दिन जिस कलाकार की फिल्म प्रदर्शित हो और  वह सफल हो जाए, उसके यहां दीवाली का जश्न देखते ही बनता है.मगर अफसोस की बात यह है कि इस बार दीवाली से पहले जितनी फिल्में प्रदर्शित हुई हैं,वह सभी फिल्में बुरी तरह से असफल हो चुकी है.जिसके चलते बौलीवुड में उदासी का माहौल है. मगर शाहरुख खान अति उत्साहित हैं. इस वर्ष उनकी दो फिल्में ‘पठान’ व ‘जवान’ बाक्स आफिस पर धमाल  मचा चुकी हैं.और उन्हे पूरा यकीन है कि 22 दिसंबर को प्रदर्शित होने वाली उनकी फिल्म ‘डंकी’ सफलता के नए रिकार्ड बनाएगी.फिल्म ‘डंकी’ का निर्माण शाहरुख खान ने खुद राज कुमार हिरानी व जियो स्टूडियो के साथ मिलकर किया है.तो वहीं दीवाली के दिन यानी कि रविवार,12 नवंबर को सलमान खान की फिल्म ‘‘टाइगर 3’’ प्रदर्शित होगी. इस फिल्म को लेकर कोई उत्साह नजर नही आ रहा है.इससे पहले सलमान खान की बतौर अभिनेता और बतौर अभिनेता सात आठ फिल्में बुरी तरह से बाक्स आफिस पर दम तोड़ चुकी हैं.इससे भी सलमान खान उत्साहित नही है.वैसे ‘टाइगर 3’ का निर्माण ‘यशराज स्टूडियो’ ने किया है और इसके निर्देशक मनीष शर्मा हैं.यह पहला मौका है,जब ‘यशराज फिल्मस’ दीवाली का बहाना कर अपनी फिल्म ‘टाइगर 3’ का ‘प्रेस शो’ भी नहीं करेगा. इसलिए सलमान खान कैंप में दीवाली के जष्न को लेकर फिलहाल खामोशी है. माना कि बौलीवुड में बाक्स आफिस पर फिल्मों की लगातार असफलता के चलते उदासी है,फिर भी बौलीवुड के कलाकारों ने दीवाली उत्सव मनाने की तैयारियां कर ली हैं.

आइए,जानते है कि इस बार दीवाली पर बौलीवुड के सितारे क्या करने वाले हैं

 ‘‘दीवाली पर हमारे मन्नत में ‘अतिरिक्त चमक-दमक‘ होगी.’’ शाहरुख खान

‘‘हमारे लिए तो दीवाली का त्यौहार खुशियो का त्याहार है.हम खुशियां बांटने में यकीन करते हैं.हम त्योहारों का आनंद लेते है क्योंकि त्योहार हमें अपने प्रियजनों के साथ समय बिताने का मौका देते हैं.इस अवसर पर हमारे मन्नत में ‘अतिरिक्त चमक-दमक‘ होगी.मुझे लगता है,त्योहारों में,आप सिर्फ परिवार के एक साथ रहने और कुछ जश्न मनाने और कुछ का इंतजार करने की उम्मीद करते हैं.अगर और कुछ नहीं, तो बस घर में ढेर सारी मिठाइयाँ रखना, कुछ वजन बढ़ाना और ताश खेलना.साथ रहने का मजा ही कुछ और है परिवार और घर को सजाना, इसलिए मैं इसके लिए उत्सुक हूं.दीवाली का त्योहार उपहार देने व लेने का दिन है.वैसे भी हम तो हर त्यौहार मनाते हैं.दिवाली के दिन हम अपने परिचितों को ‘दिवाली उपहार’ भेजते हैं.हम चाहते हैं कि सभी इस त्योहार में खुश होकर जश्न मनाए.हम अपनी कंपनी ‘रेड चिल्ली’ के दफ्तर जाकर सभी कर्मचारियों के संग भी दिवाली मनाते हैं.इस बार भी हम यह सब करने वाले हैं.’’

‘‘पति बेटी के साथ दीवाली का जश्न मनाउंगी,दिए जलाउंगी..’’ आलिया भट्ट

आलिया भट्ट कहती हैं-‘‘बचपन से अब तक मैने दीवाली का जश्न अलग अलग शहरों में मनाती आयी हूं.मेरे पापा हमेशा दीवाली के दिन जश्न मानते आए हैं.मैं जब से समझदार हुई हूं या यूं कहें कि पिछले कुछ वर्षों से दीवाली का त्योहार अपने दोस्तों व सहेलियों के साथ मनाते आए हैं.दीवाली के दिन हम सभी मिलते हैं और एक साथ मिलकर दिए जलाते हैं.अच्छा, मीठा व स्वादिष्ट भोजन करते हैं.कई तरह के गेम खेलते हैं.मौज मस्ती करते हैं.हाॅ! इस दिन हम सभी परंपरा गत भारतीय पोशाक ही पहनते हैं.मैं तो हर दीवाली के दिन अति खूबसूरत लाल रंग या पीले रंग की साड़ी पहनकर ही दिए जलाती हूं.

लेकिन इस बार की दीवाली मेरे लिए कुछ खास मायने रखती है.यह दीवाली मेरी शादी के बाद की दूसरी दीवाली होगी,जब मैं अपने पति रणबीर कपूर व ससुराल के सदस्यों के साथ मनाउंगी,वहीं मेरी सबसे बड़ी खुशी यह दीवाली मेरी बेटी की पहली दीवाली होगी,जो छह नवंबर को एक वर्ष की हुई है.तो इस बार हम दीवाली सही मायनों में खुशी के लिए मनाएंगे.हम कलाकार वैसे भी पटाखा चलाने से दूर रहते हैं.इस बार तो हम अपनी बेटी की वजह से भी ऐसा नही करेंगे.तीसरी बात हम तो हर मुंबई वासी से आग्रह करना चाहते हैं कि वह पटाखे कम जलाकर प्रदूषण पर रोक लगाए.क्योकि इन दिनों मुंबई में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ा हुआ है.

हमारे लिए यह पांच दिन का महोत्सव है..’’ अनन्या पांडे

अनन्या पांडे कहती हैं-‘‘हमारे लिए दीवाली का त्यौहार पाॅच दिन का होता है.हम धनतेरस से भईयादूज तक दिवाली का पांच दिवसीय महोत्सव मनाते हैं.धनतेरस से पहले ही हम घर को खूबसूरती से सजाते हैं.इस बार के लिए मेरे मन में घर को सजाने की कई तरकीबें मेरे दिमाग में हैं.मिठाइयां भी बांटूॅंगी.घर के अंदर ही दीवाली के दिन अपने दोस्तों व परिवार के लोगों के लिए एक छोटी सी पार्टी रखने वाली हूं,पर यह पार्टी परंपरागत भारतीय षैली मंे ही होगी.मेरे मन मे इस बार की दीवाली बहुत खास बनाने की कई योजनाएं हैं,अभी से उनकी चर्चा नहीं करना चाहती.

‘‘ मैं तो दिवाली के त्यौहार को काफी इंज्वाॅय करती हूं.’’जया ओझा

मुंबई की दीवाली की बात ही कुछ और होती है.जब कोई त्यौहार आता है तो लगता है कि जैसे स्वर्ग उतर आया हो.पर इस बार अभी तक तो दीवाली पर महंगाई का असर नजर आ रहा है.लोग इस बार टैंशन फ्री होकर मस्ती के साथ दिवाली नही मना पाएंगे,पर मैं तो दिवाली के त्यौहार को काफी इंज्वाॅय करती हूं.इस बार भी पारंपरिक शैली में लक्ष्मी पूजन,दिए जलाने व पटाके फोड़कर दिवाली मनाउंगी.’’

‘‘रंगोली बनाने का शौक..’’ अनुस्मृति सरकार

‘‘मुझे रंगोली बनाने का बड़ा शौक हैं.मैं हर दिवाली तरह तरह की रंगोली बनाती हूं.दिवाली की अलग अलग तरह की प्रतिमाएं बनाती हूं दिवाली मैं हमेशा अपने रिश्तेदारों के साथ उनके यहां जाकर हर एक पल को इंज्वाॅय करती हूं.पर उनका आशिर्वाद लेती हूं.मैं अपने प्रशंसकों वाॅर्म और हैप्पी दिवाली कहना चाहूंगी.सभी का जीवन खुशियों,तरक्की और मस्ती से परिपूर्ण रहें.’’

‘‘दिवाली परिवार के साथ..’’ एकता जैन

अभिनेत्री एकता जैन कहती हैं- ‘‘दिवाली का मजा नही आता, अगर हम उसे अपने परिवार के साथ नहीं मनाते हैं.दिवाली के मौके पर धनतेरस से लेकर दिवाली की पूजा तक मेरा पूरा परिवार एक साथ रहता हैं.दिवाली के दिन हम पूजा करने के बाद एक साथ बैठकर भोजन करते हैं.उसके बाद पटाकें फोड़ते हैं.खुले आकाष के नीचे मिठाइयां खाते हैं.दिवाली के समय मैं अपने हाथों में फुलझड़ी जलाना पसंद करती हूं.मैं तो दिवाली के त्यौहार को काफी इंज्वाॅय करती हूं .इस बार भी पारंपरिक शैैली में लक्ष्मी पूजन,दिए जलाने व पटाके फोड़कर दिवाली मनाउंगी. हर वर्ष की तरह इस बार भी हम दिन में अनाथाश्रम जाकर अनाथ बच्चों के साथ इस जश्न को मनाने वाली हॅूं.इस बार हम अपने पारिवारिक ‘एनजीओ’ की तरफ से दूसरो की जिंदगी में दीवाली के अवसर पर उजाला भरने वाले हैं,पर उसको लेकर अभी हम बात नही करना चाहते. ’’

‘‘ सभी की दिवाली बहुत ही खुशनुमा तरक्की से भरपूर हो.’’ पंकज झा

अपने घर में अभी से ढेर सारे दिए लाकर रख दिए है,जिनसे दिवाली के दिन मैं अपने पूरे घर को रोशन करुॅंगा.मुझे तो रंगोली बनाना और आकाश कैंडिल बनाना भी आता है.मैं दिवाली के दिन पैसों की देवी लक्ष्मी को अपने घर लाने का पूरा प्रयास करुॅंगा.इसलिए इस दिवाली मैं अपने घर पर ही रहकर उनका स्वागत करना चाहूंगा. दिवाली ढेर सारे नए कपड़ों,पटाकों और मिठाइयों को दोस्तों व रिश्तेदारों के साथ मिलकर मनाने का त्यौहार है.वह बहुत ही स्पेशल समय होता है,जब सभी दोस्त व रिष्तेदार मजा करने के लिए इकट्ठा होते हैं.सभी की दिवाली बहुत ही खुशनुमा व तरक्की से भरपूर हो.’’

‘‘हम सपरिवार लक्ष्मी पूजन करेंगे..’’ सुरेंद्र पाल

दिवाली का त्यौहार तो पूरे पारिवारिक सुख का अहसास करने का त्यौहार है.मैं हर साल दिवाली का त्यौहार अपने ही घर पर रहकर अपने तीनों बच्चों के साथ मनाता हॅंू.इस बार भी हम सपरिवार लक्ष्मी पूजन करेंगे.दिये जलाएंगे,पटका फोड़ेंगे..हम मां लक्ष्मी की आराधना करने में कोई कसर बाकी नहीं रखेंगे.’’

 ‘‘यह दीवाली मेरे लिए दोहरी खुशी लेकर आयी है..’’ सिमरत कौर

‘गदर 2’फेम अदाकारा सिमरत कौर कहती हैं-‘‘मेेरे लिए दीवाली का त्यौहार का मतलब सदैव लक्ष्मी पूजा का त्यौहार, रोषनी, मिट्टी के दिये और बहुत सारी मिठाइयां ही रहा है.मेरे पास बहुत सारी अच्छी बचपन की यादें हैं कि कैसे हम इस त्यौहार को सेलीबे्रट करते थे.लक्ष्मी गणेश पूजा के बाद हमारा पहला काम मिट्टी के दियों को जलाना और पटाका फोड़ना होता था.हमारे घर में दिवाली के दौरान पान रखने की परंपरा हैं.यह दीवाली मेरे लिए दोहरी खुषियां लेकर आयी है.मेरी फिल्म ‘गदर 2’ ने जबरदस्त सफलता हासिल की है.इसके अलावा मुझे नाना पाटेकर के साथ एक नई फिल्म ‘जर्नी’ भी मिल गयी है। इस वजह से इस बार दीवाली मेरे लिए ढेर सारी खुशियां लेकर आयी है.’’

‘‘लोग दीवाली मिल जुलकर प्यार मोहब्बत के साथ मनाएं’’ दिव्या दत्ता

हम चाहते हैं कि इस बार दीवाली लोग मिल जुलकर प्यार मोहब्बत के साथ बिना पटाखे फोडे़ मनाएं.मिल जुल कर,एक साथ बैठकर भोजन करें,मिठाई का सेवन करे और लोगों के बीच मिठाई बांटें.अच्छी अच्छी बातें करे,अच्छा उपहार दें.दीवाली का त्योहार दो दिए जलाकर, एक अनार फोड़कर,एक फुलझड़ी जलाकर भी मनाया जा सकता है.कम से कम मैं तो इसी तरह से दीवाली मनाउंगी.जो लोग दिखावे के लिए बोरी भरकर पटाखे लेकर आते हैं और अपने घर के सामने फोड़ते हंै,वह सबसे पहले अपने घर के अंदर प्रदूषण को निमंत्रण देते हैं,फिर मोहल्ले और पूरे शहर में कम से कम इससे बचने का प्रयास तो किया ही जाना चाहिए. ’’

मालती देवी की सारी चलाकी निकालेगी अनुपमा, देगी सख्त चेतावनी

टीवी सीरियल अनुपमा में दर्शकों के बीच काफी छाया हुआ है. शो के मेकर्स आए दिन नया ट्विस्ट लेकर आ जाते है, जिसे देख के जनता सिर चकरा जाता है. रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर अनुपमा में जबरदस्त ड्रामा होने वाला है. वहीं सीरियल में मालती देवी लगातर अपनी चालबाजी दिखा रही है. अनुपमा ने बहुत ही मुश्किल से मालती देवी और अनुज की दूरियों को कम करने की कोशिश की थीं, लेकिन अब मालती देवी ने कपाड़िया हाउस को हड़पने की कोशिश शुरू कर दी है. बीते कुछ एपिसोड में देखने के लिए मिला था कि मालती देवी एक-एक करके पाखी और छोटी अनु को अनुपमा के खिलाफ करने की कोशिश कर रही है. अब अनुपमा इस वजह से मालती देवी की क्लास लगाएगी

मालती देवी की सारी हेकड़ी निकालेगी अनुपमा

टीवी सीरियल अनुपमा के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि मालती देवी और अनुपमा किचन एरिया में होगी. यहां पर अनुपमा मालती देवी की हर चाल पर जवाब देगी. वह पाखी के बारे में बात करते हुए मालती देवी से बोलती है कि आपने स्वीटी के मन में डाली कि मैं उससे प्यार नहीं करती. ये आपने गलत किया. मेरे लिए मेरी बेटी और बहू बराबर है. कभी किसी पर ध्यान ज्यादा देना पड़ता है. इसका मतलब दूसरे से कम प्यार नहीं है. मालती देवी इस दौरान अनुपमा को ताने की तरह बोलती है.

हालांकि अनुपमा ऐसा होने नहीं देती. वह बोलती है, ‘सब जानते हैं कि मुझे ताने देने की आदत नहीं है. पाखी ने दुनिया को दुश्मन मान बैठी है और उससे उसकी मां के खिलाफ ही बातें कर दी. आपने बात-बात पर मेरा घर कहना शुरू कर दिया, लेकिन मानना भी शुरू किया.

 

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गिरगिट की तरह रंग बदलेगी मालती देवी

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर अनुपमा में आगे देखने को मिलेगा कि अनुपमा की इन बातों पर मालती देवी कहती है कि, मुझ पर आरोप लगाने  से पहले पूछ तो लो मैंने पाखी से कुछ कहा है या नहीं. तब अनुपमा कहती है कि पाखी मेरी बेटी है, तो मुझे पता है कि वो कब क्या कह रही और क्यों. इसके बाद मालती देवी को याद दिला देती है कि कपाड़िया हाउस उसका और अनुज का घर है, तो डिंपी जितना समय चाहे यहां रह सकती है.

कपाड़िया हाउस डिंपी का मायका है. मालती देवी अनुपमा पर आरोप लगा देती है कि उसे अपने पति से ज्यादा एक्स पति वनराज का ज्यादा ध्यान रखती है. अनुपमा मालती देवी को याद दिला देती है कि अनुज आज भी मिस्टर कपाड़िया और मिसेस कपाड़िया को ही अपने माता-पिता मानता है. आखिर में अनुपमा मालती देवी को बच्चो के बीच में फूट न डालने की चेतावनी देती है. तभी वहां पर अनुज आ जाता है और मालती देवी अचानक ही अपना रंग बदल लेती है और अनुपमा से हाथ जोड़कर माफी मांगने लगती है.

मुझे ल्यूकोडर्मा के सफेद दाग हैं, कोई उपाय बताएं

सवाल

मेरे शरीर पर ल्यूकोडर्मा के सफेद दाग मेरी बड़ी परेशानी बन गए हैं. क्या यह सही है कि इन्हें त्वचा से मैचिंग रंग से पेंट किया जा सकता है?

जवाब

ल्यूकोडर्मा को ले कर समाज में कई अंधविश्वास फैले हुए हैं. आधुनिक समय में जहां एक ओर इस समस्या का समाधान खोजा जा रहा है वहीं दूसरी ओर आधुनिक विधि परमानैंट कलरिंग द्वारा अब इन सफेद दागों पर त्वचा से मेल खाता रंग भी किया जा सकता है. इस से दाग छिप जाते हैं और कई सालों तक आप की हीनभावना कम हो जाती है. यह रंग सफेद दाग वाली त्वचा को नौर्मल त्वचा से मिलताजुलता बना देता है. ज्यादातर इस रंग का असर 1 से 10 साल तक देखा गया है.

इस विधि में अधिक समय नहीं लगता. अगर आप के निशान बढ़ रहे हैं तो पहले उन का इलाज करना जरूरी है. बाद में परमानैंट मेकअप किया जाता है. इस विधि में शुरू में एक पैच टैस्ट किया जाता है और कलर रुकने पर पूरी त्वचा पर कलर किया जा सकता है. ये कलर्स अपू्रव्ड कलर्स होते हैं. इन का कोई साइड इफैक्ट नहीं होता क्योंकि इन में नीडल का इस्तेमाल होता है. इसलिए ल्यूकोडर्मा पैच को कलर किसी ऐक्सपर्ट से करवाएं और ध्यान रखें कि जहां भी आप परमानैंट मेकअप करवाएं वहां हाइजीन पर खास ध्यान दिया जाता हो.

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मैं 26 साल की हूं. डिलिवरी के बाद मेरी ब्रैस्ट का आकार बढ़ गया है. मैं अब ब्रैस्टफीडिंग नहीं करवा रही पर मेरी ब्रैस्ट बहुत ढीली हो गई है. कृपया कोई इलाज बताएं?

जवाब

डिलिवरी के बाद स्तनों का आकार बढ़ना स्वाभाविक है. जब तक आप ब्रेस्ट फीड करवा रही हैं तब तक स्तन स्वाभाविक रूप में रहते हैं. जब ब्रैस्टफीडिंग छोड़ देती हैं तो कई बार ब्रैस्ट ढीली पड़ जाती है. आप की मसल्स काफी ढीली पड़ गई हैं. आप इन्हें कसने के लिए कुछ ऐक्सरसाइज करना शुरू कर दें. आर्म्स को आगे से पीछे की ओर घूमाना काफी फायदेमंद रहता है या फिर पेट के बल लेट कर सांस को खींच कर कुछ देर रुकें.

इस से भी मसल्स टाइट हो जाती हैं. इस के अलावा आप सही माप की ब्रा पहनें जो ब्रैस्ट को नीचे से सहारा दें. किसी अच्छे कौस्मैटिक क्लीनिक में जा कर ब्रैस्ट फार्मिंग की सिटिंग्स भी ले सकती हैं. घर पर रोजाना नीचे से ऊपर की तरफ प्रैशर देते हुए विटामिन ई औयल की मसाज करें.

आप 1 कप कसूरीमेथी को रात को 1 कप पानी में भिगो दें. सुबह उसे पीस लें और उस में1 चम्मच औलिव औयल मिला लें. इस का ब्रैस्ट पर लेप कर लें और कुछ देर बाद धो लें. यह टाइटनिंग पैक की तरह काम करता है. इस से भी ब्रैस्ट फर्म हो जाती है.

समस्याओं के समाधानऐल्प्स ब्यूटी क्लीनिक की फाउंडर,

डाइरैक्टर डा. भारती तनेजा द्वारा

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभा, ई-8, रानी  झांसी मार्ग, नई दिल्ली-110055.

स्रूस्, व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.

प्रदूषण बन सकता है बांझपन की वजह

दिल्ली में तमाम कोशिशों के बावजूद वायु प्रदूषण सेहत के लिए सुरक्षित सीमा से 16 गुणा बढ़ गया. दीवाली के पटाखों से देश की राजधानी फिर ज़हरीले धुएं से भर गई. उस पर पराली के धुएं से हालात और भी खराब हो रहे हैं. हर साल इस समय वायु प्रदुषण का कहर इसी तरह लोगों का दम घोटने लगता है.

सिर्फ दीवाली ही नहीं बाकी समय भी देश के बहुत से इलाकों में वायु प्रदूषण का जहर लोगों की जिंदगी प्रभावित करता रहा है. आज हम जिस वातावरण में जी रहे हैं उस में वायु प्रदूषण का स्तर चरम पर है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा हाल ही में जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार आज विश्व की 92 प्रतिशत जनसंख्या उन क्षेत्रों में रह रही है जहां वायु प्रदूषण विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षा सीमाओं से अधिक है. बढ़ता वायु प्रदूषण गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और मृत्यु के एक प्रमुख कारण के रूप में उभर रहा है.

वायु प्रदूषण और हमारा स्वास्थ्य

वायु प्रदूषण का प्रभाव हमारे शरीर के प्रत्येक अंग और उस की कार्यप्रणाली पर पड़ता है. इस के कारण हृदय रोग, स्ट्रोक, सांस से संबंधित समस्या, डायबिटीज, बांझपन वगैरह की आशंका बढ़ जाती है.

हाल में हुए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जो लोग ऐसे स्थानों पर रहते हैं जहां अत्यधिक ट्रैफिक होता है उन की प्रजनन क्षमता में 11 प्रतिशत की कमी आ जाती है. आइये इंदिरा आईवीएफ हॉस्पिटल की डॉ सिम्मी अरोड़ा से जानते हैं कि विषैली हवा में सांस लेने से प्रजनन क्षमता पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से नकारात्मक प्रभाव कैसे पड़ता है;

वायु प्रदूषण का प्रजनन क्षमता पर प्रत्यक्ष प्रभाव

अंडों की क्वालिटी प्रभावित होना

पार्टिकुलेट मैटर (पीएम), ओजोन, नाइट्रोजन डाय ऑक्साइड, सल्फर डाय औक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, भारी धातुएं और हानिकारक रसायनों का एक्सपोज़र महिलाओं में अंडों की क्वालिटी को प्रभावित करता है. अंडों की खराबी महिलाओं में बांझपन का एक प्रमुख कारण है.

मासिक चक्र संबंधी गड़बड़ियां

प्रदूषण अंडों की क्वालिटी और सेक्स हार्मोनों के स्त्राव को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है जिस का सीधा प्रभाव मासिक चक्र पर पड़ता है. इस के कारण पीरियड्स देर से आना, ब्लीडिंग कम होना या पीरियड्स स्किप होना जैसी समस्याएं हो जाती है जिन के कारण कंसीव करना कठिन हो जाता है.

वीर्य और शुक्राणुओं की क्वालिटी और मात्रा प्रभावित होना

वायु में मौजूद प्रदूषित कण वीर्य की क्वालिटी को प्रभावित करते हैं. शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाती है. उन की संरचना में परिवर्तन आ जाता है और उन की गतिशीलता भी प्रभावित होती है. जिस से पुरूष बांझपन का खतरा बढ़ जाता है.

दिल्ली स्थित एम्स द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार 3 दशक पहले एक सामान्य भारतीय पुरूष में शुक्राणुओं की संख्या औसतन 6 करोड़/मिलीलीटर होता थी. अब यह घट कर 2 करोड़/ मिलीलीटर रह गई है.

गर्भपात का खतरा बढ़ना

जो महिलाएं ऐसे क्षेत्रों में रहती हैं जहां वायु में पीएम 2.5, पीएम10, नाइट्रोजन डाय औक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, ओजोन और सल्फर डाय ऑक्साइड की मात्रा अधिक होती है उन में गर्भपात का खतरा उन महिलाओं की तुलना में अधिक होता है जो कम प्रदूषित स्थानों पर रहती हैं.

मृत बच्चे के जन्म लेने की आशंका

प्रदूषित वातावरण में रहने वाली महिलाओं के मृत बच्चे को जन्म देने की आशंका अधिक होती है. यही नहीं जन्म के समय बच्चे का वज़न कम होना, समय से पहले प्रसव और बच्चे में जन्मजात विकृतियां होने का खतरा भी अधिक होता है.

वायु प्रदूषण का प्रजनन क्षमता पर अप्रत्यक्ष प्रभाव

डायबिटीज के कारण प्रजनन क्षमता प्रभावित होना

वायु प्रदूषण विशेषकर वाहनों से निकलने वाला धुआं, नाइट्रोजन डाय ऑक्साइड, तंबाकू से निकलने वाला धुआं, पीएम 2.5 आदि इंसुलिन रेज़िस्टेंस और टाइप 2 डायबिटीज़ के सब से प्रमुख कारण हैं. इंसुलिन रेज़िस्टेंस के कारण पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) और मेटाबॉलिक सिंड्रोम एक्स दोनों की आशंका अत्यधिक बढ़ जाती है जो महिलाओं में बांझपन के सब से बड़े कारण हैं.

डायबिटीज़ के कारण तंत्रिकाएं को भी नुक्सान पहुंचता है. इस का सीधा संबंध पेनिस के ठीक प्रकार से कार्य न करने से है क्यों कि इस से पेनिस की तंत्रिकाएं भी क्षतिग्रस्त हो जाती हैं.

हार्मोनों के स्त्राव में असंतुलन और बांझपन

इंसुलिन एक हार्मोन है जिसके असंतुलन का प्रभाव सेक्स हार्मोनों जैसे एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रौन और टेस्टोस्टेरौन के स्तर पर भी पड़ता है.

प्रदूषण थायरौइड ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोनों को भी प्रभावित करता है, जिससे महिलाओं की प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है.

प्रदूषण से बचने के लिए जरूरी उपाय

अधिक प्रदूषण वाली जगहों पर जाने से बचें, अगर जाना जरूरी हो तो मॉस्क का प्रयोग करें.

अपने घर को रोज वैक्यूम क्लीनर से साफ करें ताकि धूलकण जमा न हो पाएं.

घर की हवा को साफ रखने और प्रदुषण से बचने के लिए एयर प्युरिफायर लगवाएं.

अगर आप ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां प्रदूषण अधिक है तो खिड़कियों और दरवाजों पर मोटे पर्दे लगाएं.

आप ऐसी जगहों पर काम करते हैं जहां रसायनों का एक्सपोज़र अधिक है तो पूरी सावधानी रखें.

धूम्रपान से बचें.

अगर आप टहलने जाते हैं तो ऐसी जगह चुनें जहां प्रदूषण कम हो.

अपने घर में इनडोर प्लांट्स भी लगाएं. ये इनडोर पॉल्युशन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

पोषक भोजन और अधिक मात्रा में पानी व तरल पदार्थों का सेवन करें ताकि शरीर से टौक्सिन फ्लश हो सकें.

Diwali Special : इस त्योहार कुछ ऐसा हो श्रृंगार

माना कि दीवाली रोशनी का त्योहार है, जिस के आगमन की आहट से ही आप अपने आशियाने को सजानेसंवारने में जुट जाती हैं. लेकिन इस खास पर्व पर सिर्फ अपने आशियाने को संवारना और स्वादिष्ठ पकवान बनाना ही काफी नहीं, बल्कि इस अवसर पर आकर्षक नजर आने के लिए अपनी पर्सनैलिटी को निखारना भी जरूरी है. इस खास पर्व पर आप की खूबसूरती में चार चांद लगाने के लिए हम ने फैस्टिव मेकअप लुक्स के साथसाथ मेकअप के कुछ खास और न्यू प्रोडक्ट्स भी जुटाए हैं.

यों तो आप ने अब तक दीवाली के दिन पहनने के लिए कपड़ों की खरीदारी कर ली होगी. लेकिन आकर्षक लुक के लिए सिर्फ अच्छे कपड़े खरीदना ही काफी नहीं है. आप को अपने नैननक्श को भी मेकअप से हाईलाइट करना होगा. आप कितने भी महंगे कपड़े पहन लें. अगर आप के चेहरे पर मेकअप नहीं है, तो आप हुस्न की मलिका नजर नहीं आ सकतीं, जबकि सादे कपड़ों के साथ भी यदि आप सही ढंग से मेकअप करें, तो मिनटों में आप का रूप निखर उठता है. दरअसल, मेकअप चेहरे की खूबसूरती को निखारने के साथसाथ चेहरे की कमियों को छिपाता भी है यानी मेकअप करने के बाद खूबसूरत नजर न आने का कोई चांस ही नहीं होता.

वैसे इस दीवाली बैलेंस्ड लुक के लिए आप मेकअप आर्टिस्ट क्रिस्टल फर्नांडिज द्वारा

बताए गए मेकअप के ये डिफरैंट फैस्टिव लुक भी ट्राई कर सकती हैं. लेकिन इस बात का खास ध्यान रखें कि फैस्टिव सीजन में ही नहीं बाकी मौकों पर भी मेकअप करते समय इन बातों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है.

बैलेंस्ड लुक के लिए ट्राई करें ये 6 फैस्टिव लुक:

ज्वैल्ड लुक: ज्वैल्ड लुक के लिए शुरुआत आई मेकअप से करें. सब से पहले आईलिड पर शैंपेन शेड का आईशैडो लगाएं. फिर ज्वैल टोंड जैल या लिक्विड आईलाइनर लगाएं. ब्लैक मसकारे का सिंगल कोट लगा कर आई मेकअप पूरा करें. लिप मेकअप के लिए फ्रैश टोंड लिपग्लौस अप्लाई करें. अब पिंक या ब्राउन शेड का ब्लशऔन लगा कर चीकबोंस को हाईलाइट करें.

शिमर गर्ल लुक: शिमर गर्ल लुक के लिए सब से पहले आइब्रोज बोन पर व्हाइट शिमर आईशैडो लगाएं ताकि आईशैडो और आईलाइनर का शेड उभर कर दिखे. जिस शेड का आईशैडो लगा रही हैं, उस का डार्क शेड आईलाइनर के लिए यूज करें जैसे आईशैडो के लिए सी ग्रीन शेड चुन रही हैं, तो आईलाइनर के लिए डार्क ग्रीन चुनें. अब मसकारे के 2 कोट लगा कर आई मेकअप पूरा कर लें. होंठों के लिए लिपग्लौस और चीकबोंस के लिए फ्रैश शेड ब्लशर चुनें.

बोल्ड लुक: अगर आप गोरी हैं, तो पिंकिश रूबी या रैड, सांवली या गेहुएं रंग की हैं, तो डार्क बरगंडी शेड की लिपस्टिक लगाएं. आई मेकअप के लिए पलकों पर स्नोव्हाइट शेड का आईशैडो अप्लाई करें और फिर लाइट शेड का आईलाइनर लगाएं और ब्लैक मसकारा लगा कर आई मेकअप कंप्लीट करें. अब चीकबोंस को हाईलाइट करने के लिए नैचुरल शेड का ब्लशर लगाएं.

शाइनी सिल्वर लुक: डार्क शेड की लिपस्टिक लगा कर लिप मेकअप को हैवी लुक दें. अब आई मेकअप के लिए सिल्वर आईशैडो लगा लें और फिर ग्रे शेड का आईलाइनर लगा लें. अब सिल्वर मसकारा लगा कर आई मेकअप कंप्लीट करें. चीकबोंस के लिए लाइट शेड का चुनाव करें.

गोल्डन ग्लो लुक: पलकों पर गोल्डन शेड का आईशैडो लगाएं. अब डार्क चौकलेट शेड का आईलाइनर यूज करें. पिंक या गोल्डन शेड की शीयर लिपस्टिक लगाएं और आखिर में नैचुरल ब्लशर से चीकबोंस को हाईलाइट करें. इस के अलावा गोल्डन ग्लो के लिए पंपकिन, कौपर या जिंजरब्रेड शेड्स का इस्तेमाल भी चीक्स, लिप्स और आई मेकअप के लिए कर सकती हैं.

चौको लुक: आईशैडो के लिए कौपर शेड इस्तेमाल करें. अब आंखों के कोनों में डार्क ब्राउन कलर का आईलाइनर लगाएं. ऊपरी और निचली आईलिड पर ब्लैक कलर का पैंसिल आईलाइनर अप्लाई करें. अब ब्लैक मसकारा के 2 कोट लगा कर आई मेकअप कंप्लीट करें. होंठों पर गोल्डन ब्राउन लिपग्लौस लगाएं.

खास मेकअप प्रोडक्ट्स

अगर आप यह सोच रही हैं कि रैग्युलर मेकअप शेड्स से आप फैस्टिव लुक पा सकती हैं, तो आप गलत हैं. फैस्टिव लुक के लिए आप को अपने वैनिटी बौक्स में कुछ खास मेकअप प्रोडक्ट्स को जगह देनी होगी. आइए, जानते हैं वे मेकअप प्रोडक्ट्स कौनकौन से हैं:

मूस: बेस मेकअप के लिए अपने वैनिटी बौक्स में कौंपैक्ट और फाउंडेशन की जगह मूस रखें. मेकअप की शुरुआत करने से पहले चेहरे को फेसवाश से धोएं. फिर पूरे चेहरे पर मूस लगा कर मेकअप का बेस तैयार कर लें. मूस का चुनाव अपनी स्किनटोन को ध्यान में रख कर करें.

व्हाइट आईशैडो: आई मेकअप को क्लीन बेस देने के लिए वैनिटी बौक्स में व्हाइट आईशैडो जरूर रखें. आई मेकअप की शुरुआत करने से पहले आईब्रोज बोन पर व्हाइट आईशैडो लगाएं. उस के बाद मनचाहा आईशैडो, आईलाइनर यूज करें. ऐसा करने से आईब्रोज भी हाईलाइट होंगी.

जेट ब्लैक आईलाइनर: आई मेकअप को मिनटों में ड्रामैटिक लुक देने के लिए जेट ब्लैक आईलाइनर जरूर खरीदें. इसे लगाने के बाद आईशैडो और मसकारा लगाने की जरूरत नहीं पड़ती. जेट ब्लैक आईलाइनर आई मेकअप को स्मोकी इफैक्ट देने के लिए काफी है.

शिमर ब्लशर: फैस्टिव सीजन में अपने लुक को ग्लैम टच देने के लिए शिमर ब्लशर का इस्तेमाल करें. शिमर ब्लशऔन लगाने के बाद आई मेकअप और लिप मेकअप के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी होगी. इस के इस्तेमाल से चेहरा शाइन करेगा.

न्यूड लिप कलर: माना कि लिपस्टिक के डार्क शेड्स लिप मेकअप को बोल्ड लुक देते हैं, लेकिन लिप मेकअप को हाईलाइट करने का यह फौर्मूला काफी पुराना हो गया है. इन दिनों लिपस्टिक के न्यूड शेड डिमांड में हैं. लिपस्टिक के पीच, पिंक जैसे शेड्स हौट लुक दे सकते हैं.

ग्लिटर फौर हेयर: लिप और आई मेकअप के साथसाथ बालों पर भी ग्लिटर का इस्तेमाल आप को फैस्टिव लुक दे सकता है. इसलिए अपने वैनिटी बौक्स में ग्लिटर स्प्रे को खास जगह दें. सिल्वर और गोल्डन के साथ ही अलगअलग कलर्स के हेयर ग्लिटर भी मिलते हैं. आप चाहें तो उन का भी चुनाव कर सकती हैं.

बैलरीना पिंक नेल पेंट: नेल पेंट्स के डार्क या निओन शेड्स को कहें बायबाय और फैस्टिव लुक के लिए बैलरीना पिंक नेल पेंट खरीद कर घर ले आएं. हैवी मेकअप के साथ नाखूनों पर लगा यह लाइट शेड नेल पेंट आप की खूबसूरती में चार चांद लगा सकता है.

यह सच है कि मेकअप चेहरे की खूबसूरती को बढ़ाता है, लेकिन मेकअप के दौरान हुई गलती आप की खूबसूरती को बिगाड़ भी सकती है. इसलिए मेकअप प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल सूझबूझ से करें.

दीवाली को यादगार बनाने के लिए घर को सजानेसंवारने के साथसाथ खुद भी सजेंसंवरें ताकि इस खूबसूरत त्योहार को ताउम्र यादों में सहेजा जा सके…

त्योहार कोई भी हो, उस दिन खुद को सब से खूबसूरत नजर आने का मौका अपने हाथ से कतई न जाने दें…

ग्लिटर आईशैडो का इस्तेमाल करती हूं

‘‘मैट फिनिश मेकअप से लुक काफी अच्छा आता है. यह हर फेस टाइप पर सूट भी करता है, इसलिए मैं ज्यादातर समय मैट फिनिश मेकअप प्रोडक्ट्स ही इस्तेमाल करती हूं. लेकिन दीवाली रात के समय मनाई जाती है इसलिए मेकअप में थोड़ा ग्लिटर भी जरूरी है. ऐसे में आई मेकअप के लिए मैं ग्लिटर आईशैडो का इस्तेमाल करूंगी और होंठों को नैचुरल टच देने के लिए मैट फिनिश की पिंक शेड लिपस्टिक बिलकुल परफैक्ट रहेगी.’’

-अंकिता शर्मा

दीवाली में नैचुरल मेकअप पसंद है

‘‘शूटिंग के दौरान हैवी मेकअप होने के कारण मैं बाकी समय नैचुरल मेकअप करना ज्यादा पसंद करती हूं. मैं दीवाली के दिन नैचुरल लुक के लिए काजल और मसकारा का इस्तेमाल आई मेकअप के लिए करती हूं और लिप्स को नैचुरल लुक देने के लिए लिपबाम लगा कर लिपग्लौस लगाती हूं.’’

-मोना सिंह

ट्रैडिशनल लुक पसंद है

‘‘दीवाली के दिन मैं प्योर ट्रैडिशनल लुक पसंद करती हूं. सुबह पीले रंग की पारंपरिक साड़ी और शाम को लाल रंग की साड़ी के साथ सोने के आभूषण पहनती हूं. चेहरे की खूबसूरती बढ़ाने के लिए आंखों में काजल, होंठों पर लिपस्टिक, माथे पर लाल रंग का पाउडर वाला सिंदूर और पैरों में अलता भी लगाती हूं. कुदरती निखार के लिए दीवाली से एक दिन पहले चेहरे पर हलदी वाला उबटन और मुलतानी मिट्टी का लेप लगाती हूं. इस से चेहरे की रंगत खिल उठती है और मेकअप की दोहरी परत की जरूरत नहीं होती.’’

-नेहा मर्दा

पूरा फोकस आई मेकअप पर

‘‘दीवाली मौके पर इंडियन आउटफिट पहनने पर मेरा पूरा फोकस अपने आई मेकअप पर होता है. मुझे लगता है कि आंखें चेहरे का आकर्षण होती हैं, जिन्हें मेकअप से और भी आकर्षक बनाया जा सकता है. अपनी आंखों को स्मोकी लुक देने के लिए मैं ब्लैक कलर का थिक आईलाइनर लगाती हूं और डार्क ब्लैक शेड का मसकारा. इस से आई मेकअप हैवी नजर आता है. आई और लिप मेकअप को बैलेंस्ड लुक देने के लिए होंठों पर न्यूड शेड की लिपस्टिक भी लगाती हूं.’’

-ऐश्वर्या सखूजा

ड्रैस से मैच करती लिपस्टिक लगाती हूं

‘‘मुझे लगता है कि फैस्टिव सीजन के लिए ब्राइट मेकअप परफैक्ट होता है. मैं खुद भी अपना मेकअप ब्राइट रखती हूं. बेस मेकअप को नैचुरल लुक देती हूं. लिप मेकअप के लिए पिंक या कोरल शेड की, जो ड्रैस से मैच करे वही लिपस्टिक लगाती हूं.  आई मेकअप को शाइनी इफैक्ट देने के लिए ग्लिटर इस्तेमाल करती हूं.’’

-सना खान

साड़ी पहनना पसंद है

‘‘मैं दीवाली के मौके पर साड़ी पहनना पसंद करती हूं. मुझे लगता है कि साड़ी के साथ इंडियन मेकअप ज्यादा खूबसूरत नजर आता है. इंडियन मेकअप के अनुसार आई मेकअप के लिए डार्कलिप और चीक मेकअप के लिए लाइट शेड मेकअप प्रोडक्ट्स यूज करने चाहिए. इसलिए मैं आई मेकअप को हैवी लुक देने के लिए काजल, आईलाइनर और डार्क शेड का आईशैडो लगाती हूं. लिप्स पर न्यूड शेड की लिपस्टिक और चीक्स को हाईलाइट करने के लिए लाइट शेड का ब्लशऔन यूज करती हूं.’’

-बरखा बिष्ट

Diwali Special: फैमिली के लिए बनाएं Cheese Paper Rice Ball

गुरुवार के दिन रविवार आने का इंतिजार परवान चढ़ जाता है. यूं तो हर दिन एक लड़ाई है, पर संडे का इंतजार करना तो और भी मुश्किल होता है. विकडे ब्लूज को दूर करें चीज पेपर राइस बौल्स से. हमें मैसेज कर के जरूर लिखें कि आपको ये रेसिपी कैसी लगी.

सामग्री

– 1 कप बासमती चावल पके

– 1 बड़ा चम्मच लाल, पीली व हरी शिमलामिर्च बारीक कटी

– 2 बड़े चम्मच कौटेज चीज कद्दू कस किया

– 1 बड़ा चम्मच मोजरेला चीज

– 1 बड़ा चम्मच कौर्न फ्लोर

– 1 हरीमिर्च कटी

– 2 बड़े चम्मच धनियापत्ती कटी

– 1 बड़ा चम्मच चाट मसाला

– तलने के लिए पर्याप्त तेल

– 1/2 कप बैडक्रंब्स

– नमक व कालीमिर्च स्वादानुसार

विधि

तेल व ब्रैडक्रंब्स छोड़ कर बाकी सारी सामग्री को एक बाउल में थोड़ा सा पानी मिला कर मिश्रण तैयार करें. तैयार मिश्रण की बौल्स बना कर ब्रैडक्रंब्स में कोट करें और सुनहरा होने तक तलें. सौस के साथ गरमागरम परोसें.

 – व्यंजन सहयोग : शैफ एम. रहमान

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