समलैगिकता के साथ भारतीय परिवारों के पाखांड पर बात करती फिल्म ‘‘सहेला’’

ब्रिटिश फिल्मकार डैनी बॉयल ने 2008 में भारत आकर जुहू की स्लम बस्ती में पलने वाले 18 साल के बालक जमाल की कहानी बयां करने वाली फिल्म ‘स्लमडौग मिलेनियर’ का फिल्मांकन झुग्गी झोपड़ी में किया था,जिसमें जमाल का किरदार देव पटेल ने निभाया था.इसी के चलते वह महज अठारह साल की उम्र में स्टार कलाकार बन गए थे.यह उनके कैरियर की दूसरी फिल्म थी.इंग्लैंड में बसे देव पटेल गुजराती भी बोलते हैं.उनके पूर्वज भारत के गुजरात में जामनगर और उंझा में रहते थे.तब से अब तक वह  ‘लायन’,‘होटल मंुबई’,‘आई लास्ट माई बौडी’ सहित तकरीबन सत्रह फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं.देव पटेल ने 2018 में घोषणा की थी कि अब वह अभिनय के साथ ही बतौर सह लेखक और निर्देशक एक्शन रोमांच प्रधान फिल्म ‘‘मंकी मैन’’ बना रहे है ,जिसके निर्माता रघुवीर जोशी थे.इस फिल्म की क्या प्रगति हुई पता नही ,मगर अब देव पटेल ने रघुवीर जोशी के निर्देशन में अंग्रेजी-हिंदी भाषी फिल्म ‘‘सहेला’’ (कंपेनियन) का निर्माण किया है,जिसका दक्षिण एशियाई प्रीमियर 27 अक्टूबर से पांच नवंबर तक चलने वाले ‘जियो मामी मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2023’ हो रहा है.

सिडनी में फिल्मायी गयी फिल्म ‘‘सहेला (कंपेनियन)’’ की कहानी पश्चिमी सिडनी में रह रहे भारतीय समुदाय और वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है.जिसमें षादी के बाद पति पत्नी के बीच उस वक्त दरार पैदा होती है,जब पत्नी नित्या को पता चलता है कि उसका पति रवि ओझा समलैंगिक है.वीर (एंटोनियो अकील) और नित्या (अनुला नावलेकर) सिडनी के पैरामाट्टा में रहने वाले एक खुशहाल शादीशुदा जोड़े हैं.उन्हें एक साथ सितार बजाना पसंद है, वह एक सफल दंत चिकित्सक है, और वह अपनी लेखांकन परीक्षा के लिए अध्ययन कर रहा है.हालाँकि, जैसे-जैसे बचपन से उनमें निहित सांस्कृतिक अपेक्षाएँ प्रभावित होने लगती हैं, यह दोनों दिखावे को बनाए रखने के लिए संघर्ष करते हैं.टूटने के बिंदु पर पहुंचने के बाद, वीर अपनी कामुकता के बारे में नित्या के सामने आता है.यह रहस्योद्घाटन जोड़े के बीच अलगाव का कारण बनता है, जिससे उनके परिवार के गहरे सांस्कृतिक मूल्यों पर सामाजिक अपमान के बादल मंडराते हैं. जैसे ही वीर आत्म-खोज की यात्रा पर निकलता है, नित्या अपनी वास्तविकता के ताने-बाने से जूझती है, और उन्हें अन्वेषण और परिवर्तन के रास्ते पर ले जाती है. यद्यपि वह अभी भी भावनात्मक रूप से एक-दूसरे से बंधे हुए हैं, फिर भी वह प्रेम पर एक वैकल्पिक दृष्टिकोण खोजते हैं.

मुंबई में जन्में व पले बढ़े मूलतः गुजराती रघुवीर जोशी का देव पटेल के संग काफी पुराना जुड़ाव है. देव पटेल के अभिनय से सजी फिल्मों ‘बेस्ट एक्सोटिक मैरीगोल्ड होटल (1-2), जीरो डार्क थर्टी और द रिलक्टेंट फंडामेंटलिस्ट जैसी फिल्मों में सहायक निर्देशक के रूप में रघवुीर जोशी ने काम किया. वह डेम जूडी डेंच के सहायक और अभिनेता देव पटेल को हिंदी भाषा के कोच रहे हैं.  2018 में रघुवीर जोशी ने लघु फिल्म ‘यमन’ का निर्देशन किया,जिसे पाम स्प्रिंग्स फिल्म फेस्टिवल और इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ लॉस एंजिल्स (आईएफएफएलए) के लिए चुना गया था और सकारात्मक समीक्षा मिली, जिसने ‘सहेला‘ की अवधारणा के प्रमाण के रूप में मार्ग प्रशस्त किया. रघुवीर जोशी,देव पटेल के निर्देशन में बन रही फिल्म ‘मंकी मैन’ के सह-निर्माता भी हैं, जो ब्रॉन स्टूडियो और थंडर रोड द्वारा निर्मित है.पर अब रघुवीर जोशी निर्देशित फिल्म ‘‘सहेला’’ का निर्माण देव पटेल ने किया है.

निर्देशक रघुवीर जोशी कहते हैं-‘‘हमारी फिल्म ‘सहेला’ भारतीय परिवारों के पाखंड को रेखांकित करती है.यह फिल्म प्यार और आत्म- खोज का एक अंतरंग चित्रण है,जो हमारे समाज में पारिवारिक अपेक्षाओं और स्थापित लैंगिक भूमिकाओं के बोझ को चुनौती देती है.यह एक ऐसी कहानी है,जो प्रेम के बारे में हमारी धारणाओं को फिर से परिभाषित करती है,कामुकता की जटिलता और अनुरूपता को तोड़ने से मिलने वाली स्वतंत्रता की खोज करती है.अपनी फिल्म ‘सहेला‘ में मैंने इस बात को भी रेखांकित किया है कि प्यार का सबसे गहरा काम ‘जाने देने’ की शक्ति है.’’

फिल्म ‘‘सहेला’’ (कंपेनियन) को अभिनय से संवारने वाले कलाकार हैं-एंटोनियो अकील,अनुला नावलेकर, हरीश पटेल,अनिता पटेल, निकोलस ब्राउन,जॉर्जिया ब्लिजार्ड,गस मरे, निकोलस बर्टन,सबा जैदी आब्दी,  जैन अयूब,शीबा चड्ढा,लीना बहल,विपिन शर्मा,सक्षम शर्मा,अनन्या दीक्षित, ताई हारा,मार्टिन हार्पर,मिरांडा डौट्री,वसीम खान व अन्य.

35 साल बाद साथ आए कमल हासन और मणिरत्न, रिलीज हुआ ‘ठग लाइफ’ का टीजर

साउथ इंडस्ट्री के मशहूर अभिनेता कमल हासन का आज 7 नंवबर को 69वां जन्मदिन था. एक्टर के बर्थडे के एक दिन पहले ‘ठग लाइफ’ टीजर रिलीज हो चुका है. फिल्म की टीजर सोशल मीडिया पर छाया हुआ है. दरअसल, अभिनेता कमल हासन और साउथ फिल्म के डायरेक्टर मणिरत्न 35 साल बाद फिर एक साथ काम करने जा रहे है. ‘ठग लाइफ’ से अभिनेता इतने साल बाद मणिरत्न के साथ काम करने जा रहे है. इससे पहले अभिनेता कमल हासन ट्वीट करके जानकारी दे चुके है कि उनकी  फिल्म K234 का नाम बदलकर ‘ठग लाइफ’ कर दिया गया है.

जन्मदिन के एक दिन पहले रिलीज हुआ टीजर

साउथ सुपरस्टार कमल हासन ने अपने जन्मदिन से पहले सोशल मीडिया हैंडल इंस्टाग्राम पर ‘ठग लाइफ’का टीजर जारी किया. फैंस इस पर जबरदस्त प्रतिक्रिया दे रहे है, यह फिल्म मणिरत्न और ए आर रहमान के बैनर तले बन रही है. इस फिल्म में अभिनेता कमल हासन का पैसा भी लगा है इसके साथ ही वह हीरो के भूमिका में भी नजर आएंगे. इस फिल्म का टीजर इतना धांसू है, जब ट्रेलर रिलीज होगा तब फैंस की प्रतिक्रिया क्या होगी. यह तो पता चल ही जाएगा.

 

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 ‘ठग लाइफ’ एक एक्शन पैक्ड फिल्म है

जैसे कि अभिनेता कमल हासन की अपकमिंग फिल्म का ‘ठग लाइफ’ टीजर रिलीज हो चुका है. यह फैंस से को काफी पसंद आया है. टीजर की शुरुआत में कमल हासन एक वीरान मैदान में निहत्थे खड़े हैं. उन्होंने एक क्रीम कलर की शॉल ओढ़ रखी है. हाथों में पट्टियां बांधी हुई है, उनकी आंखो में गुस्सा दिख रहा है. वह एक्शन करते नजर आ रहे है उनके पीछे मौजूद काले कपड़े पहने हुए राक्षस नजर आ रहे है. जिसे अभिनेता दमदार एक्शन के साथ उन्हें मारते नजर आ रहे है.

इतना ही नहीं कमल हासन के साथ-साथ इस फिल्म में जयम रवि, त्रिशा कृष्णम, अभिरमी नासिर अहम रोल में नजर आएंगे.   ‘ठग लाइफ’ क्शपैक्ड धांसू फिल्म हैं, दावा किया जा रहा है कि यह फिल्म केजीएफ को टक्कर देगी.

कमल हासन की वर्कफ्रांट

साउथ के सुपरस्टार कमल हासन ‘विक्राम में नजर आए थे. इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया था. वहीं अभिनेता अपनी अपकमिंग फिल्म  ‘ठग लाइफ’ में नजर आएंगे.

रियालिटी शो बिग बौस को अपराधियों का सहारा

विवादास्पद टीवी रियालिटी शो ‘बिग बॉस’ दर्शकों को मनोरंजन प्रदान करने के साथ-साथ दर्शकों को चैंकाने और आश्चर्य चकित करने में कोई कसर नहीं छोड़ता. प्रत्येक सीजन में जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से विविध प्रकार के प्रतियोगी घर में प्रवेश करते हैं. लेकिन लगभग हर सीजन में आपराधिक पृष्ठभूमि के प्रतिस्पर्धियों की उपस्थित जरुर नजर आती है.

टीवी रियालिटी शो ‘‘बिग बौस’’ का सीजन 17 प्रसारित हो रहा है.जैसे जैसे इसके सीजन बढ़ रहे हैं,वैसे वैसे इसकी टीआरपी भी लगातार गिरती जा रही है.‘बिग बौस’ के हर सीजन में प्रतियोगियों के बीच आपस में झगड़ने से लेकर बहुत कुछ ऐसा होता है,जिसके खिलाफ लगातार आवाजें उठती रही हैं. मगर ‘बिग बौस’ की पहचान झगड़ा व अश्लीलता ही बनकर रह गयी है. ‘बिग बौस 17’ शुरू होने से पहले सलमान खान ने कहा था कि अगर उन्हे लगेगा कि शो में कुछ भी हिंदुस्तानी कल्चर के अनुरूप नहीं है,तो वह उस पर बंदिश लगाएंगे और प्रतिस्पर्धी के खिलाफ एक्शन लेंगे. मगर ‘बिग बौस 17’ में दो प्रतिस्पर्धी हैं- ईशा मालवीय और समर्थ.पूरे विश्व ने देखा कि यह दोनों कलाकार बेड के अंदर किस तरह की अश्लील हरकतें कर रहे थे.पर सलमान खान चुप हैं.

इतना ही नही पिछले दिनों जब केद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने एल्विश पर सांप व सांप का जहर बेचने सहित कई गंदे आरोप लगाए,तब उत्तर प्रदेश पुलिस ने नोएडा के एक फार्म हाउस पर छापा मारकर सांप व सांप का विष बेचने के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार करते हुए उन पांच के साथ ही एल्विश का भी नाम एफआई आर में लिखा गया और उन्हे पकड़ने के लिए भागदौड़ शुरू की. तब एलविश ने मेनका गांधी पर पलट वार करते हुए कहा कि उन्हे माफी मांगने पडे़गी,ऐसी धमकी दे डाली.और खुद ‘बिग बौस 17’ में पहुॅच गए. उधर जिस पुलिस इंस्पेक्टर ने एफआई आर में एल्विश का नाम लिखा था,उसे लाइन हाजिर कर दिया गया.यानी कि उस पुलिस इंस्पेक्टर को सजा दे दी गयी.क्योंकि एल्विश का भाजपा से अति गहरे संबंध हैं.मगर लोग कह रहे है कि ‘बिग बौस’ को तो अपराधियों के ही सहारे की दरकार रहती है.

बिग बौस सीजन: दो से ही अपराधियों को बोलबाला

जब रियालिटी षो ‘‘बिग बौस’’ की शुरूआत हुई थी,तब पहला और तीसरा सीजन कम विवादास्पद थे.पहले सीजन के हौस्ट अरशद वारसी थे.दूसरे सीजन की हौस्ट शिल्पा शेट्टी थीं.दूसरे सीजन में अपराधियो का ही बोलबाला था.‘बिग बौस’ के सीजन दो में राहुल महाजन, आशुतोष कौशिक,राजा चैधरी,देवेंद्र सिंह उर्फ बंटी चोर और मोनिका बेदी प्रतिस्पर्धी थीं.मोनिका बेदी का संबंध गैंगस्टर अबू सलेम से रहा है. सितंबर 2002 में मोनिका बेदी और अबू सलेम को जाली दस्तावेजों पर देश में प्रवेश करने के लिए पुर्तगाल में जेल की सजा दी गई थी.2006 में एक भारतीय अदालत ने बेदी को फर्जी नाम पर पासपोर्ट हासिल करने के लिए दोषी ठहराया.नवंबर 2010 में सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी सजा को बरकरार रखा,लेकिन जेल की सजा को उस अवधि तक कम कर दिया,जो वह पहले ही काट चुकी थीं.

‘बिग बौस’ राहुल महाजन का अच्छा संबंध है.राहुल महाजन डोमैस्टिक वायलेंस’ के अपराधी हैं.सबसे पहले वह 2010 में ‘बिग बौस सीजन’ दो के प्रतिस्पर्धी बने.वह सीजन के फाइनलिस्ट थे. लेकिन ग्रैंड फिनाले से कुछ दिन पहले राहुल महाजन, राजा चैधरी, आशुतोष कौशिक और जुल्फी सैयद घर से बाहर निकलने के लिए दीवार पर चढ़ गए थे.उसके बाद 2015 में राहुल महाजन ‘बिग बौस हल्ला बोल’ तथा 2020 में ‘बिग बौस सीजन 14’ का भी हिस्सा बने.उन पर अपने दिवंगत पिता प्रमोद महाजन के आवास पर शराब में नशीली दवाओं का सेवन करने का आरोप लगाया गया था. हालाँकि, उन्हें मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप से बरी कर दिया गया था और उन पर केवल प्रतिबंधित दवाओं के सेवन के लिए मामला दर्ज किया गया था.बाद में उनकी पूर्व पत्नी डिंपी महाजन ने भी उनके खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया था.

अभिनेत्री श्वेता तिवारी के पूर्व पति और अभिनेता राजा चैधरी  भी घरेलू हिंसा के आरोप में जेल जा .चुके हैं. आशुतोष कौशिक भी शराब पीकर मोटर सायकल चलाने के आरोप में जेल जा चुके हैं. देवेंद्र सिंह उर्फ बंटी चोर पर छह सौ से अधिक चोरी के मुकदमे दर्ज हैं. वह 15 साल जेल में रहे और कई बार जेल से भागे.पर ‘बिग बौस ’के सीजन दो से उनके अपराध धुल गए.

तीसरे सीजन में हौस्ट के रूप में अमिताभ बच्चन आए,तो माना गया कि अब ‘बिग बौस’ शायद पारिवारिक रियालिटी शो बन जाएगा.मगर अफसोस ऐसा नही हुआ.

बिग बौस सीजन 4

चैथे सीजन से हौस्ट /संचालन की बागडोर सलमान खान ने संभाली और तब से इस शो में अश्लीलता व अपराधियों का बोलबाला हो गया. ‘बिग बौस’ के सीजन चार के हौस्ट के रूप में सलमान खान की एंट्री होने के साथ ही इस शो में सैंकड़ों हत्याएं और अपहरण करके चारों तरफ दहशत फैला चुकी चंबल घाटी की रानी सीमा परिहार प्रतिभागी बनकर आ गयी थी. सीमा परिहार के अलावा ‘बिग बौस 4‘ में श्वेता तिवारी, साक्षी प्रधान, मनोज तिवारी, वीना मलिक और अश्मित पटेल जैसे सेलेब्स भी थे.लेकिन सीमा परिहार, सलमान खान की फेवरेट बन गई थीं. उन्हें शो में सलमान खान से खूब प्यार मिला था. ज्ञातब्य है कि बिग बौस के सरगना यानी कि हौस्ट अभिनेता सलमान खान ‘हिट एंड रन’ के अलावा काले हिरण के शिकार के मामले में अपराधी हैं. वह जेल जा चुके हैं.दोनों ही भयानक अपराध हैं.हालाँकि अब वह उस दौर से उबर चुके हैं, लेकिन वह अक्सर उन कठिनाइयों को साझा करते हैं,जिनका सामना उन्हें तब करना पड़ख् जब उन पर आपराधिक आरोप लगाए गए थे.बहरहाल,‘बिग बौस’ के सीजन 4 से दबी जुबान लोगों नेे कहा था कि जब अपराधी ‘बिग बौस’ का सरगना होगा,तो अब इस शो में अपराधियों का महिमा मंडन किया जाएगा.हर अपराधी को पाक साफ साबित करने का अवसर देने वाला शो बन जाएगा,और उसके बाद हर सीजन में इस शो के साथ अपराधी का जुड़ना अनिवार्य सा हो गया है.जबकि इस शो में एडल्ट फिल्म स्टार से लेकर चोर व अन्य अपराधियों के प्रतिभागी बनने से भी खूब विवाद होते रहते हैं.

बिग बौस सीजन 6

राजनीतिक कार्टूनिस्ट और कार्यकर्ता असीम त्रिवेदी ‘बिग बौस 6’ का हिस्सा थे.उन पर अपने कार्टून के माध्यम से राष्ट्रीय प्रतीक, संसद, भारतीय ध्वज और संविधान का अपमान करने के गंभीर आरोप लगे. इसके अलावा उनके खिलाफ राजद्रोह (भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए) का मामला भी दर्ज किया गया था.उन्हें अपने काम की सामग्री से संबंधित राजद्रोह के आरोप में मुंबई में गिरफ्तार किया गया था.

बिग बौस सीजन 7

अजाज खान ने बिग बॉस सीजन 7 में भाग लिया था और उन्हें ड्रग्स रखने के आरोप में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने गिरफ्तार किया था. 26 माह की जेल की सजा काटने के बाद वह जमानत पर रिहा हुए.उसके बाद अपना दर्दनाक अनुभव साझा करते हुए उन्होने सर्वोच्च न्यायालय पर अपना भरोसा जताया.

अरमान कोहली को 2013 में बिग बॉस हाउस से गिरफ्तार किया गया था, जब उन्होंने कथित तौर पर बिग बॉस 7 में सह-प्रतियोगी सोफिया हयात का शारीरिक शोषण किया था.2021 में उन्हें कोकीन रखने के लिए ड्रग मामले में एनसीबी द्वारा गिरफ्तार किया गया था और एक साल की जेल की सजा हुई थी.

बिग बौस सीजन 16

बिग बौस सीजन 16 में साजिद खान थे,जिन पर दर्शकों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर निशाना साधा था.क्योंकि साजिद खान पर 2018 में ‘मी टू’ आंदोलन के समय गभीर आरोप लगे थे.कई अभिनेत्रियों ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. उन्हें हाउसफुल 4 छोड़ने के लिए कहा गया और फरहाद सामजी ने निर्देशक का पद संभाला.यहां तक कि गायिका सोना महापात्रा ने भी साजिद को प्रतियोगियों में से एक के रूप में अनुमति देने के लिए चैनल की आलोचना की थी.

बिग बौस सीजन 17 ने दी सीजन दो कोे मात

‘बिग बौस’ के सीजन 17 ने तो सारे रिकार्ड तोड़ डाले.इस शो में जेल जा चुकी जिग्ना वोरा व मुनव्वर फारूकी प्रतिस्पर्धी हैं.जबकि सांप और सांप का विष बेचने के आरोप में  गिरफ्तारी की तलवार लटकते ही गेस्ट के तौर पर एलविष भी ‘बिग बौस 17’ में जगह दे दी गयी है.

जी हाॅ! बिग बौस 17 की प्रतिस्पर्धी जिग्ना वोरा भी जेल जा चुकी हैं.उन पर पत्रकार जे डे की हत्या के आरोप में जेल भेजा गया था.लंबे समय तक चले मुकदमे के बाद अदालत ने उन्हे बरी कर दिया था.मुनव्वर फारूकी को 2021 में हिंदू देवी देवताओं के खिलाफ बयानबाजी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, बाद में उन्हे सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली.इस षो में जिग्ना वोरा हमदर्दी बटोरने के सारे हथकंडे अपना रही हैं.

एक एपीसोड में जिग्ना वोरा ने मुनव्वर फारुकी से एक हाई-प्रोफाइल व्यक्ति के साथ अपने रिश्ते का जिक्र कर अपनी भावनाओं और बेबसी को व्यक्त करते हुए बताती हैं कि तलाक के बाद उसके एक्स ने शादी कर ली. वह एक दिल दहला देने वाली घटना साझा करती है-‘ जब मुझे गिरफ्तार कर लिया गया था,तब मेरे एक्स को कोई चिंता नहीं हुई.वह सुबह ही अहमदाबाद से मुंबई हवाई जहाज से आया था.एअरपोर्ट पर उसने ब्रेकिंग न्यूज में मेरी गिरफ्तारी की खबर देखी और एअरपोर्ट से ही वह वापस अहमदाबाद चला गया था.

स्टैंडअप कमेडियन मुनव्वर फारूकी भी अपराधी है.2021 में मध्यप्रदेष पुलिस ने हिंदू देवी देवताओं का अपमान करने के जुर्म में गिरफ्तार किया था.बाद में उन्हे सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी.2020 में मुनव्वर फारूकी ने यूट्यूब पर एक वीडियो पोस्ट किया था,तब भी उन पर मुकदमा दर्ज हुआ था.‘बिग बौस सजन 17’ में मुनव्वर फारूकी ने बताया कि गुजरात दंगे में किस तरह उनका घर तबाह हुआ था.

‘बिग बौस 17’ में जहां कई आपराध के आरोपी प्रतियोगी हैं,वहीं इस बार ड्ग्स मामले में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की जमानत के लिए लड़ाई लड़ने वाली वकील सना रईस खान भी प्रतिस्पर्धी हैं.सना रईस खान मुंबई की एक आपराधिक वकील हैं, जो बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में मामलों पर बहस करती हैं.बिग बौस में डेब्यू से पहले इंस्टाग्राम पर सना के 47,000 फॉलोअर्स थे.सना नियमित रूप से अपने द्वारा संभाले जाने वाले कुछ मामलों में अपनी उपलब्धियों की समाचार क्लिपिंग और अपने निजी जीवन की कुछ झलकियाँ भी इंस्टाग्राम पर साझा करती रहती हैं.  कुल मिलाकर ‘बिग बौस’ और इसके प्रतियोगियों का कानूनी मामलों से एक लंबा इतिहास रहा

भविष्य को जन्म देता आईवीएफ

इंदिरा आईवीएफ, बिरला आईवीएफ, दिल्ली आईवीएफ का नाम तो आप ने सुना ही होगा. आजकल इन के फर्टिलिटी ऐंड आईवीएफ क्लीनिक्स जगहजगह आप को देखने को मिल जाएंगे. ये क्लीनिक्स भारत और दुनिया में बढ़ रही एक गंभीर समस्या घटती प्रजनन दर की तरफ इशारा करते हैं, जिस पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है, फिलहाल भारत में तो नहीं.

साल दर साल प्रजनन दर में देखी जा रही लगातार गिरवट इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में ये एक बड़ी समस्या बन कर सामने आ सकती है. भारत में अभी इस का कोई खास असर दिखाई नहीं देता, लेकिन समस्या बढ़ रही है.

रिसर्च ऐक्सपर्ट ऐरन ओ नाईल के द्वारा अगस्त, 2023 में पब्लिश की गई फर्टिलिटी रेट के अनुसार एशिया के प्रमुख देशों में प्रजनन क्षमता काफी कम देखी गई. प्रजनन क्षमता का अर्थ एक औरत अपने जीवनकाल में कितने बच्चों को जन्म देती है से लिया जाता है.

पिछले 50 वर्षों में दुनियाभर में प्रजन्न दर में भारी गिरावट आई है. 1952 में औसत वैश्विक परिवार में 5 बच्चे थे जिन की संख्या अब 2 या 3 तक सिमट कर रह गई है और एशियाई देशों में यह 1 तक पहुंच चुकी है.

नशे की लत है गलत

इस की कुछ खास वजहें हैं जिन के कारण ऐसा होना माना जा रहा है. जैसेकि बढ़ता शैक्षिक स्तर खासकर महिलाओं में जो उन्हें लेट और कम बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करता है ताकि जीवन स्तर का ध्यान रखा जा सके. इसी को ध्यान में रखते हुए महिला व पुरुष शादी नहीं कर रहे. इस में उन्हें 35-40 साल की उम्र लग रही है, जिस उम्र में महिला में ऐग बनना कम होने लगते हैं और पुरुष में स्पर्म. ऐसे में महिलाएं गर्भधारण की समस्या से जूझने लगती हैं.

हाल ही के दिनों में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही हैं और आधुनिक जीवनशैली का पालन कर रही हैं और इसी के साथ उन की खानेपीने की आदतें बदल रही हैं. धूम्रपान और शराब का सेवन कामकाजी के लिए अब आम बात हो गई है.

साथ ही महिला और पुरुष की शारीरिक क्रियाओं में कमी आ रही है. शारीरिक निष्क्रियता को महिलाओं की फर्टिलिटी के कम होने का मुख्य कारण माना जाता है. घरों में आधुनिक तकनीकों के आ जाने से वे अब शारीरिक श्रम नहीं करतीं. जिस से पिछले कुछ सालों में फर्टिलिटी दर में कमी आई है. इस के अलावा बढ़ती उम्र, अनियमित मासिकधर्म पैटर्न भी इस के कुछ कारणों में से हैं.

इन सब कारणों से गर्भधारण करने में समस्याएं आ रही हैं, जिस का वैज्ञानिक कृत्रिम उपाय ढूढ़ चुके हैं आईवीएफ के रूप में.

क्या है आईवीएफ

आप ने ‘विक्की डोनर’ और ‘गुड न्यूज’ जैसी फिल्में तो देखी ही होंगी. ये फिल्में इसी आईवीएफ तकनीक के आसपास घूमती हैं. ‘विक्की डोनर’ में वह एक क्लीनिक में अपने स्पर्म डोनेट कर के जो औरतें मां नहीं बन पा रही हैं उन की मदद करता है. अन्नू कपूर उस क्लीनिक का मालिक है जो उसे स्पर्म डोनेशन के लिए तैयार करता है. वहीं ‘गुड न्यूज’ आईवीएफ की प्रक्रिया के दौरान कपल्स को किनकिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है को बताती है. डाक्टर की गलती के कारण 2 कपल के स्पर्म आपस में ऐक्सचेंज हो जाते हैं. फिर वह कपल किस तरह मानसिक तनाव से गुजरता है. इसे यह फिल्म बखूबी दिखाती है.

1978 में सर्जन पैट्रिक स्टेप्टी ने राबर्ट एडवर्ड के साथ मिल कर पहली बार आईवीएफ तकनीक में सफलता प्राप्त की, जिस के द्वारा 1978 में ही लुइस ब्राउन का जन्म हुआ. इस के बाद इस के परीक्षणों का सिलसिला चलता रहा और आईवीएफ जिसे विट्रो फर्टिलाइजेशन भी कहा जाता है तकनीक में सफलता हासिल होती गई.

आईवीएफ प्रक्रिया की बात करें तो यह जटिल क्रियाओं की एक शृंखला है, जिस में गर्भधारण (कंसीव) नहीं कर पा रही महिलाओं के कंसीव कर पाने को संभव बनाया जाता है. इस का उपयोग बच्चों में आनुवंशिक समस्याओं को फैलने से रोकने के लिए भी किया जा सकता है.

आनुवंशिक और शारीरिक समस्याओं के चलते महिलाओं में कंसीव करने की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं. यदि कंसीव हो भी जाए तो मिसकैरिज हो जाता है या डिलिवरी में दिक्कत आती है. ऐसी समस्याओं से ही छुटकारा पाने के लिए डाक्टरों के सुझाव पर दंपतियों द्वारा आईवीएफ ट्रीटमैंट का इस्तेमाल किया जाता है, जिस में जब महिला का शरीर ऐग को फर्टिलाइज करने में सक्षम नहीं होता है, तो उसे लैब में फर्टिलाइज किया जाता है. इस में महिला के ऐग्स और पुरुष के स्पर्म को मिलाया जाता है. जब भू्रण का निर्माण हो जाता है, तो उसे वापस महिला के गर्भाशय में डाल दिया जाता है.

यह एक लंबी प्रक्रिया है

डाक्टर परामर्श के बाद ओवेरियन स्टिम्युलेशन में अंडाशय में अंडे की संख्या बढ़ाने के लिए कुछ हारमोनल दवाइयां दी जाती हैं. 8 से 10 दिन तक रोजाना इंजैक्शन दिए जाते हैं. फिर ट्रिगर इंजैक्शन, जिस से अंडे को मैच्योरिटी दी जाती है. जब अंडे मैच्योर हो जाते हैं तो अल्ट्रासाउंड की मदद से महिला के अंडाशय से मैच्योर अंडों को बाहर निकाल लिया जाता है. उस के बाद पुरुष का स्पर्म ले कर उस में से सही स्पर्म को अलग कर लिया जाता है. अंडे और स्पर्म को लैब में फर्टिलाइजेशन के लिए रखा जाता है. सावधानी के साथ 1-1 कर के स्पर्म को अंडे के अंदर डाला जाता है. अंडा जब भ्रूण बन जाता है, तो कुछ दिन उसे मौनिटर करने के बाद गर्भ में स्थानांतरित कर दिया जाता है.

डाक्टर की सलाह से भ्रूण स्थानांतरण तक एक औसत आईवीएफ प्रक्रिया में लगभग 6 से 8 सप्ताह का समय लगता है. स्थितियों के आधार पर हर रोगी के लिए स्टैप्स समान होते हैं. लेकिन महिला का शरीर हर स्टैप पर कैसे प्रतिक्रिया करता है यह महिला और उस के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है.

जानकारों का कहना है कि आईवीएफ आप को गर्भधारण की 100त्न गारंटी नहीं देता है. कंसीव होने की संभावना एक महिला के अंडों की उम्र और एक जोड़े के लिए कई अन्य कारकों पर निर्भर करती है. लेकिन औसतन 35 वर्ष की उम्र के बाद कंसीव कर पाने की संभावनाएं कम होती जाती हैं.

तैयार होने की जरूरत

एक इंटरव्यू के दौरान फिल्म अभिनेत्री कश्मीरा शाह ने खुलासा किया कि 10 साल और 14 आईवीएफ कोशिशों के बाद के शरीर में बहुत सारे स्टेराइड्स जा चुके थे जिस से उस का लुक बहुत खराब और वजनी हो गया था. उस के बाद भी वे मां नहीं बन पाईं. आईवीएफ के जरीए प्रैगनैंट न होने के बाद कश्मीरा और कृष्णा ने सैरोगेसी का रास्ता अपनाया.

रिएलिटी शो ‘शार्क टैंक इंडिया सीजन 2’ में नमिता थापर जो वहां जज थीं आईवीएफ पर अपना अनुभव शेयर करते हुए बताती हैं कि यह एक महिला के लिए मानसिक और शारीरिक पीड़ा ला सकता है.

एमक्योर फार्मास्यूटिकल्स की मालिक ने आईवीएफ प्रक्रिया के साथ अपने संघर्ष के बारे में बात की. उन का कहना था कि जो 25 इंजैक्शन दिए गए थे उन से उन्हें शारीरिक और मानसिक पेन से गुजरना पड़ा था.

इस तरह महिला को मां बनने के लिए आईवीएफ के दौरान कई शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जिन के लिए उन्हें पहले से तैयार होने की जरूरत होती है.

बड़ा है बाजार

आईवीएफ का देश में 6 हजार करोड़ का कारोबार है. इस तकनीक से भारत में सालाना 2 लाख बच्चे पैदा होते हैं. यह बाजार कितना बड़ा है इस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत की सब से बड़ी फर्टिलिटी क्लीनिक शृंखला इंदिरा आईवीएफ में हिस्सेदारी खरीदने के लिए इच्छा रखने वालों की लाइन लगी है. इस शृंखला का मूल्य 8 हजार करोड़ रुपए से 10 हजार करोड़ रुपये रहने का अंदाजा है.

वर्तमान में इस के पास भारतीय आईवीएफ बाजार की 16 से 17त्न हिस्सेदारी है तथा देशभर में 116 क्लीनिक चलाती है.

भारत में आईवीएफ इलाज के लिए सामान्य खर्च 90 हजार रुपए से ले कर 1 लाख 70 हजार रुपए के बीच आता है. यह एक जनरल आकड़ा है. यह खर्च इस से भी ज्यादा हो सकता है क्योंकि ये एक जटिल प्रक्रिया है. खर्च कितना होगा यह राज्य, हौस्पिटल, उस में दी जाने वाली सुविधाओं और महिलापुरुष के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है.

गर्भावस्था के 9 महीने की अवधि को ध्यान में रखें, तो एक से डेढ़ लाख रुपए और जुड़ जाते हैं. भारत में सालाना 2 लाख से 2 लाख 50 हजार रुपए या इस से भी अधिक लोग आईवीएफ के माध्यम से पेरैंट बन रहे हैं.

सावधान रहे क्योंकि आईवीएफ इस से जुड़ी समस्याओं और खतरों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता जो शारीरिक और मानसिक दोनों ही तरह के हो सकते हैं.

आईवीएफ ट्रीटमैंट के दौरान महिलाओं के शारीरिक स्वास्थ्य के अनुसार मां और बच्चे को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. ये समस्याएं ट्रीटमैंट के कारण और खराब स्वास्थ्य के कारण भी हो सकती हैं.

जानकारों का मानना है कि आईवीएफ ट्रीटमैंट की वजह से प्रीमैच्योर डिलिवरी का रिस्क थोड़ा बढ़ जाता है, जिस से शिशु भी अंडरवेट व कमजोर जन्म लेता. अधिकतर केसों में यह संभावना होती है. अगर महिला के गर्भाशय में गलती से एक से ज्यादा भू्रण चले जाते हैं, तो मल्टीपल बर्थ होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. मिसकैरिज का रिस्क भी उतना ही रहता है जितना कि नैचुरल तरीके से कंसीव करने वाली महिलाओं को.

ऐक्टोपिक प्रैगनैंसी

सब से बड़ा रिस्क होता है एक्टोपिक प्रैगनैंसी का. फर्टिलाइज एग जब गर्भाशय में न जा कर किसी दूसरे भाग में चला जाता है जैसे फैलोपियन ट्यूब, ऐब्डौमिनल कैविटी या गर्भाशय ग्रीवा में तो यह महिला स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ा खतरा बन जाता है. अगर समय रहते ऐक्टोपिक प्रैगनैंसी का पता न चले, तो महिला की जान भी जा सकती है.

ये शारीरिक रूप से होने वाली समस्याएं हैं. यह जरूरी भी नहीं कि हर महिला को इन समस्यों का सामना करना पड़ता हो. लेकिन ट्रीटमैंट के खतरों को नकारा भी नहीं जा सकता.

इस से अलग आईवीएफ में धोखाधड़ी की समस्याएं भी बढ़ती जा रही हैं. इस पर कोई भी कंट्रोल बौडी न होने और किसी भी सरकारी संस्था के नजर न रखे जाने के अभाव में देश में बिजली की रफ्तार से सैकड़ों फर्टिलिटी क्लीनिक खुल गए हैं. उन की सेवाओं और उपचार पर निगरानी रखने वाला कोई नहीं है. मां बनने की इच्छा रखने वाली महिलाओं के साथ आईवीएफ के नाम पर कितनी ही जगह धोखाधड़ी देखी जा रही है. अत: इस से सावधान रहने की जरूरत है.

2022 में वाराणसी में आईवीएफ के नाम पर 53 महिलाओं के साथ धोखाधड़ी का मामला सामने आया था. यह मामला दिल्ली की स्त्रीरोग विशेषज्ञा डा. मनिका खन्ना के खिलाफ वाराणसी के कैंट का है, जिस में डा. ने आईवीएफ की ऐवज में प्रति महिला औसतन ढाई से तीन लाख रुपए वसूले जिस के बाद भी कोई महिला मां नहीं बन सकी. ऐसे में उन्हें आर्थिक, मानसिक और शारीरिक यातनाओं से गुजरना पड़ा.

उसी साल ग्रेटर नोएडा में फर्जी डाक्टर ने पकड़े जाने से पहले तक 80 से ज्यादा महिलाओं का आईवीएफ ट्रीटमैंट किया. यह काम वह फर्जी डिगरी के सहारे कर रहा था. इस बात का खुलासा तब हुआ जब लापरवाही के चलते एक महिला की जान भी चली गई. महिला के परिजनों की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया तब जा कर डाक्टर पकड़ा गया.

धोखाधड़ी से बचें

आईवीएफ फर्टीलिटी सैंटर धोखाधड़ी का घर बनते जा रहे हैं.यदि आप सतर्कता न बरतें तो ऐसी धोखाधड़ी आपके साथ भी हो सकती है.

भारत में क्यों बढ़ रहा आईवीएफ का कोरबार? भारत में औरत का मां न बन पाना एक अभिशाप की तरह लिया जाता है. मां न बन पाने के कारण उसे हीन दृष्टि से देखा जाता है. समाज में उन का मिलनाजुलना कम हो जाता है. शादीब्याह, गोदभराई और शुभकामों में उस की उपस्थिति सब को खटकने लगती है. पुरुष घरों में उस की अनदेखी शुरू कर देते हैं. अपनों द्वारा दिए गए बां?ा, नपुंसक जैसे संबोधन शब्द महिलापुरुष दोनों को मानसिक रूप से परेशान कर देते हैं. इसे एक सामाजिक कलंक या टैबू की तरह लिया जाता है. इस से तनाव इतना बढ़ जाता है कि कई औरतों के मन में खुद को खत्म कर लेने जैसे विचार आने लगते हैं.

आदर्श समाज का चोला ओढ़ा समाज प्राकृतिक रूप से मां न बन पाने के कारण औरतों को तरहतरह की यातनाएं देता है. उन पर मानसिक, शारीरिक आघात करता है. तलाक व दूसरी शादी जैसी धमकियां आम हो जाती हैं. महिलाओं के लिए आईवीएफ किसी वरदान से कम नहीं है.

यह उपचार महंगा भी है पर जब वंशवृद्धि की बात आती है तो यह समाज किसी भी पद्धति को अपनाने से पीछे नहीं हटना चाहता. यही कारण है कि देश में इस का बाजार बढ़ रहा है.

खेल है जंग का मैदान नहीं

अहमदाबाद में भारतपाकिस्तान वर्ल्ड कप क्रिकेट मैच में भारत की जीत कुछ ही ओवरों के बाद साफ  होने लगी थी और पता लग रहा था कि पाकिस्तानी खिलाडि़यों की हिम्मत टूट चुकी है पर फिर भी जिस तरह वहां नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भारतीय दर्शक ‘जय श्रीराम’ के नारे लगा कर पाकिस्तानी खिलाडि़यों को चिढ़ाने लगे उस से साफ था कि जो काम जुलाई, 1971 में सेना के जनरल जिया उल हक ने पाकिस्तान में जुल्फीकार अली भुट्टो की सरकार का तख्ता पलटने के बाद किया, यहां शुरू हो चुका है और सरकार के मंसूबे, आम आदमी की सोच खासतौर पर उस आदमी की जो महंगे स्टेडियम में हजारों के टिकट खरीद कर जा सकता है, खराब हो चुकी है.

पाकिस्तान भारत से काफी साल दो कदम आगे रहा है जबकि उसे पार्टीशन में सिंध का रेगिस्तान, ब्लूचिस्तान की पहाडि़यां और पूर्वी बंगाल के दलदल भरे इलाके मिले थे.

जिया उल हक ने वही किया जो अब हमारे यहां हो रहा है. नकली मुकदमों से विरोधी दलों के नेताओं को जेलों में बंद कर दिया गया. जुल्फीकार अली भुट्टो पर एक विरोधी की हत्या का आरोप लगा कर उसे फांसी की सजा दिलवा दी. 9 साल में संविधान, जो बना ही मुश्किलों से था और जिस में वैसे ही धर्म की बात ज्यादा थी, आम लोगों के हकों की कम, इस के एकएक कर के चिथड़े कर दिए. इस संविधान की डिजाइन में अनेक छेद थे, जिस के जिया उल हक ने चिथड़ेचिथड़े कर दिए.

जिया उल हक ने अपने राज में इसलामी कानून की कट्टरता लागू कर डाली. देश का विनाश शुरू हो गया और अब 50 साल बाद पता चल रहा है कि वह क्या कर गया था.

उस पाकिस्तान के खिलाडि़यों के खिलाफ नारे लगाने का मतलब है कि क्रिकेट दर्शकों की भीड़ में भी धर्म का जहर घुल गया है.

1 लाख से ज्यादा दर्शकों में अगर 1 या 2 हजार भी हल्ला मचाने वाले हों तो भीड़ को भड़कने से कोई नहीं रोक सकता पर ये 1 या 2 हजार लोग देश को गहरी खाई में ले जा रहे हैं, यह खेल के मैदान से साफ है.

जहां तक खेलों में अच्छे रहने का सवाल है, रूस ने वर्षों कम्यूनिज्म की तानाशाही सहन की पर ओलिंपिक में वह हमेशा पहले 3 में रहा. इस का मतलब यह नहीं था कि रूसी जनता खुश थी. वह ‘जय श्रीराम’ की तरह लेनिन, स्टालिन, मार्क्स के नारे लगाती थी. शहरों में मार्क्स और लेनिन की बड़ी मूर्तियां थीं पर स्टोरों में खाली शेल्फ मुंह चिढ़ा रहे थे. यही पाकिस्तान में जिया उल हक व उस के बाद परवेज मुशर्रफ ने किया. गिरे हुए देश की खिल्ली उड़ाने का मतलब है कि हम खुद कितने नीचे गिर गए हैं.

पाकिस्तानी क्रिकेट खिलाड़ी भारत के बुलाने पर भारत में हैं, वे जबरन नहीं घुसे हैं. उन का मजाक उड़ाना अपनी नई संस्कृति की साफ झलक दिखाना है. सदियों से बेइज्जती करना हमारे खून में है. हमारे यहां दलितों को तो जानवर समझ ही जाता था, शूद्रों का मजाक भी उड़ाया जाता रहा है. इन के नाम तक अपमानजनक रखे जाते थे. दान देने वाले बनियों के नाम भी कालूराम, गैंडामल जैसे रखे जाते थे ताकि उन में अपनेआप कमजोरी छाई रहे.

जो फायदा पढ़ाईलिखाई का पिछले 50-60 साल में हुआ था, उसे अब धो डाला गया है. अरबों के बने स्टेडियम में एक मेहमान टीम का माखौल उड़ाना बताता है कि हमारी कलई कितनी पतली है. हम हिटलर के नाजियों से कम नहीं हैं, जिन्होंने यहूदियों को बेइज्जत करने का कोई मौका 1935 से

1945 के बीच नहीं छोड़ा और जरमनी को नष्ट करवा दिया. वे तो बाद में विश्व युद्ध में हारने पर सम?ा गए कि किस कुएं में थे पर क्या हम समझेंगे जो खिलाडि़यों के साथ वैसा बरताव कर रहे हैं जैसा हिटलर ने 1936 के बर्लिन के ओलिंपिक खेलों में किया था, जब उस ने एक काले अमेरिकी खिलाड़ी को पदक पहनाने से इनकार कर दिया था जो सरकार के बुलावे पर बर्लिन पहुंचा था?

Diwali Special: मनमुटाव भूल कर मनाएं त्योहार

आलिया जब 19 साल की थी तब ही उस के पिता मनोज यादव ने अपनी प्रौपटी के कागज तैयार करवा लिए थे, जिन में उन्होंने अपनी प्रौपटी के 2 हिस्से कराए. एक हिस्सा अपने बेटे सुमित यादव और दूसरा हिस्सा आलिया यादव के नाम किया.

अब तक सुमित इस सोच में बैठा था कि वह पूरी संपत्ति का एकलौता वारिस है, दूसरा कोई नहीं. लेकिन जब सुमित को पता चला कि आलिया भी संपत्ति में हिस्सेदार है तो उस के तोते उड़ गए. वह नहीं चाहता था कि किसी दूसरे को भी हिस्सा देना पड़े. वह भी घर की बेटी को तो बिलकुल नहीं.

मगर सुप्रीम कोर्ट ने भी बेटियों को बाप की प्रोपर्टी में हिस्सा देने का फैसला दिया है. ऐसे में सुमित की जरा भी नहीं चली और आलिया को भी प्रौपर्टी में हिस्सा मिल गया. इस बात को गुजरे 9 साल हो गए हैं, लेकिन सुमित और आलिया के बीच मनमुटाव आज भी कायम है.

ऐसी ही कहानी अहमदाबाद की डिंपल और मयंक की है. डिंपल की अपनी भाभी यामिनी से बिलकुल नहीं बनती है. डिंपल और मयंक भाईबहन हैं. लेकिन जब से मयंक की शादी हुई है तब से वह हर वक्त यामिनीयामिनी करता रहता है.

डिंपल को ऐसा लगता है कि उस के और उस के भाई के बीच में जो बौंडिंग थी वह डिंपल के आने से खत्म हो गई है. इसलिए डिंपल और यामिनी के बीच में काफी मनमुटाव है. इसी वजह से डिंपल ने तीजत्योहार पर अपने मायके आना भी छोड़ दिया.

मनमुटाव होना कोई नई बात नहीं

अभिषेक और नैना की कहानी भी मनमुटावों से भरी है. वैसे भाईबहन के बीच मनमुटाव होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन यही मनमुटाव रिश्तों को खत्म करने का कारण भी बनता है. असल में अभिषेक और नैना के बीच मनमुटाव इस बात से है कि नैना की शादी में अभिषेक और नैना के देवर के बीच में बहसबाजी हो गई. यह बहसबाजी इतनी ज्यादा बढ़ गई कि अभिषेक ने कहा कि मु?ो अपनी बहन की शादी आप के घर में नहीं करनी. नैना इस बात से बहुत आहत हुई क्योंकि वह यह शादी तोड़ना नहीं चाहती थी. बहुत सम?ाने के बाद आखिर नैना की शादी उस घर में हो गई.

मगर उस दिन के बाद से नैना के ससुराल वाले आए दिन उसे अभिषेक की बात के लिए ताना कसते रहते हैं. आज 3 साल हो गए, लेकिन अभिषेक और नैना के बीच का मनमुटाव खत्म नहीं हुआ.

ऐसे ही न जाने कितने ही मनमुटाव हर रिश्ते में होते हैं. फिर चाहे वह मनमुटाव ननदभाभी के बीच हो, चाहे सासबहू के बीच हो या फिर चाचाभतीजे के बीच हर रिश्ते में रहेगा ही रहेगा. लेकिन जरूरी यह है कि आप इस मनमुटाव के बीच भी अपने रिश्तों को अहमियत दें. अपने मनमुटाव को आप त्योहारों के बीच में न आने दें. इसे साइड में ही रखें. आप बस अपनों के साथ खास पलों को जीएं. यही वे पल हैं जो आप की यादों को और यादगार बनाऐंगे.

त्योहार को भरपूर जीएं

अगर आप और आप के भाई या बहन के बीच किसी बात को ले कर मनमुटाव है तो आप बेशक उसे दूर न करें, आप उन पर वर्क भी न करें, लेकिन अपने त्योहार पर इस मनमुटाव को भूल जाएं और बस अपने त्योहार को भरपूर जीएं क्योंकि यही भाईबहन जो आप के साथ ताउम्र रहेंगे.

दोस्त तो बस मन बहलाने, घूमनेफिरने के लिए हैं. आखिर में तो परिवार ही काम आता है. इसलिए त्योहार में अपने परिवार को शामिल करें या परिवार का हिस्सा खुद बनें ताकि आप के बीच अपनापन बना रहे. इस से आप के बच्चे भी अपने बड़ेबुजुर्गों से भी मिल लेंगे और उन्हें भी दादादादी, नानानानी, मामामामी का प्यार मिलेगा.

बच्चों को शामिल करें

अगर आप को लगता है कि त्योहार पर मिलने से भी आप और आप के भाई या बहन के बीच चल रहा मनमुटाव खत्म नहीं होगा तो आप बिलकुल सही हैं. यह मनमुटाव एक दिन में खत्म नहीं होगा. लेकिन हमारी राय यह है कि अगर आप मनमुटाव होते हुए भी त्योहारों पर अपने रिश्तेदारों से मिलते हैं तो आप अपने साथ कुछ नई यादें बनाते हैं. साथ बिताए इन पलों को आप और आप का रिश्तेदार हमेशा याद रखेगा.

त्योहारों पर मनमुटाव होते हुए भी अपने रिश्तेदारों से मिलने का एक कारण यह भी है कि अब परिवार छोटे हो गए हैं. अब परिवार में सिर्फ पतिपत्नी और बच्चे शामिल हैं. ऐसे में वे नए लोगों और अपने रिश्तेदारों से दूर ही रहते हैं. अगर त्योहारों में आप अपने बच्चों को उन के चाचाचाची, मौसामौसी से मिलाएंगे तो वे भी खुश हो जाएंगे और आप का भी उन से मेलजोल  बढ़ेगा.

ऐथनिक आउटफिट को दें वैस्टर्न टच

फैस्टिव सीजन में हर युवती और हर महिला ऐथनिक आउटफिट ही चाहती है. जो भी नया फैशन आता है उसे खरीदने के लिए मार्केट में भीड़ उमड़ पड़ती है. मगर फैस्टिव सीजन खत्म होने के बाद ये आउटफिट्स अलमारी के कोने में पड़े रहते हैं.

जहां एक ओर एक कपड़े को कई बार पहनने का मतलब गरीबी समझ लिया जाता है तो वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे खराब फैशन सैंस भी समझ लेते हैं. कई बार लोग इन्हें पहनते पहनते बोर हो जाते हैं. वे अब कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं. जो लोग अमीर होते हैं या जिन्हें लगता है कि ये कपड़े अब उन के किसी काम के नहीं हैं. वे इन्हें गरीबों को दान कर देते हैं.

इन महंगे कपड़ों को खरीदने में जो रुपए लगे होते हैं वे भी नहीं वसूल पाते. अगर आप इन कपड़ों से अपने पैसे वसूलना चाहती हैं तो आप को इन कपड़ों को ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए. लेकिन समस्या यह भी है कि दोबारा इस्तेमाल करने से वे आउट औफ फैशन और बोरिंग लगेंगे. इस के लिए आप को कुछ ऐसे हैक चाहिए जो आप के ऐथनिक आउटफिट को एकदम नए लुक में बदल दें.

इस के लिए सब से अच्छा तरीका है ऐथनिक आउटफिट को वैस्टर्न आउटफिट में बदलना. इस से वे अपने ऊपर लगे बोरियत के टैग को हटा सकेंगे.

आइए, अब कुछ ऐसे ही हैक जानते हैं जो ऐथनिक आउटफिट को वैस्टर्न आउटफिट में बदल देगा:

साड़ी विद जींस

साड़ी एक ऐसा ऐथनिक वियर है, जो हर महिला और लड़की के वार्डरोब में होता ही है. वैसे तो साड़ी पेटीकोट या शेपवियर के साथ पेयर की जाती है. लेकिन अगर आप साड़ी को इस तरह से पहनतेपहनते बोर हो गई हैं और अब कुछ नया ट्राई करना चाहती हैं तो साड़ी को जींस के साथ ट्राई कर सकती हैं. इस से आप को यूनीक स्टाइल मिलेगा. जहां आप जींस को लैगिंग के साथ भी चेंज कर सकती हैं वहीं ब्लाउज की जगह क्रौप टौप भी पहन सकती हैं.

ऐक्स्ट्रा लुक देने के लिए आप बैल्ट भी ट्राई कर सकती हैं. ज्वैलरी के लिए गोल्डन या औक्साइड ज्वैलरी पेयरअप कर सकती हैं. इस के साथ आप को हील ऐलिगैंट लुक देगी. अगर आप की हाइट अच्छी है तो आप फ्लैट स्लीपर और जूती पहन सकती हैं. सोनम कपूर भी एक इवेंट के दौरान इस लुक को ट्राई कर चुकी हैं.

चिकनकारी कुरते के साथ जींस

चिकनकारी कुरता तो हर लड़की के वार्डरोब में बड़ी आसानी से मिल ही जाता है. अगर आप इसे लैगिंग और प्लाजो के साथ पहन कर बोर हो गई हैं तो इसे स्किनी, रिपड और बौयफ्रैंड जींस के साथ ट्राई करें. ध्यान रहे कुरता थोड़ा लूज ही हो. ज्वैलरी के लिए आप चांद बालियां और लौंग झुमके कैरी करें. बालों को खुला छोड़ सकती हैं.

अगर आप खुला नहीं रखना चाहतीं तो लूज बन ट्राई कर सकती हैं. इस के साथ फ्लैट स्लीपर या जूती पहनें. अगर आप की हाइट कम है तो पौयटेट हील पहन सकती हैं. अगर आप कंफर्टेबल लुक चाहती हैं तो ब्लैक शूज और स्पार्ट्स शूज ट्राई कर सकती हैं. अनुष्का शर्मा की हिंदी फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ का ब्रेकअप सौंग अपने इसी लुक की वजह से रातोंरात सब का फैवरिट बन गया था.

ऐथनिक जैकेट को कैसे करें कैरी

अगर आप के पास सूटसलवार का एक सैट पड़ा है जिस के साथ एक ऐथनिक जैकेट भी है और आप इसे कई बार पहन चुकी हैं और अब नहीं पहनना चाहती हैं तो इस के लिए आप अपनी इस जैकेट को वैस्टर्न टच दे कर एक नया लुक क्रिएट कर सकती हैं. इस ऐथनिक जैकेट को जींस और टौप के साथ कैरी कर सकती हैं. जींस और टौप का कलर अपनी पसंदानुसार चुनें.

आप चाहें तो ऐथनिक जैकेट को कुरते के साथ भी कैरी कर सकती हैं. इस के अलावा आप कुरते के लिए अंगरखा कुरते को भी चुन सकती हैं. इस के साथ वी नैक औकसाइट ज्वैलरी कैरी करें. साथ ही औक्साइट ब्रैसलेट भी पहनें. बालों की फ्रैंच चोटी कर के आगे की साइड से कुछ लटे निकाल लें. आप इसे हाई हील के साथ कंप्लीट करें. आप का फैस्टिव लुक एक नए अंदाज में तैयार है. फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ में अनुष्का शर्मा ने इस लुक से वाहवाही लूटी थी.

जींस, ब्लाउज, दुपट्टा से पाएं वैस्टर्न लुक

अगर आप फैस्टिव सीजन में नई ड्रैस लेने की सोच रही हैं तो अपना माइंड बदल दें. आप बस ब्लाउज, दुपटटे और जींस की हैल्प से यूनीक वैस्टर्न लुक तैयार कर सकती हैं. सब से पहले ब्लाज और जींस पहन लें.

ध्यान रहे जींस स्किनी जींस ही हो. फिर दुपट्टे के साइड वाले कोने को जींस के अंदर खोस लें. इस के बाद जैसे साड़ी का पल्ला लिया जाता है वैसे ही दुप्पटे को सैट कर लें. इस के साथ लौकेट स्टाइल में औक्साइड या कुंदन की ज्वैलरी कैरी करें. हाथ में वाच पहनें. इस के साथ पौयटेंट हील पहनें. बालों को ब्लो ड्राई कर के ओपन छोड़ सकती हैं.

इस लुक को कई सैलिब्रिटीज भी ट्राई कर चुकी हैं. आजकल लड़कियों में इस लुक का बेहद क्रेज है.

लौंग ए लाइन कुरता विद जींस या शौर्ट्स

लौंग ए लाइन कुरते को लैगिंग के साथ पहनना अब आउट औफ फैशन हो गया है. इसे वैस्टर्न आउटफिट बनाने के लिए शौर्ट्स के साथ पहनें. बालों को स्ट्रैट कर के ओपन कर लें. क्यूट लुक के लिए हाफ बन भी बना सकती हैं. इस आउटफिट में मिनिमम ज्वैलरी कैरी करें. कानों में मल्टीकलर इयररिंग्स या हूप पहन सकती हैं.

हाथों को सुंदर दिखाने के लिए बड़े साइज में औक्साइड रैड या ग्रीन कलर की रिंग पहनें. अपने इस लुक को आप सैंडल या कैजुअल शूज के साथ कंप्लीट करें.

घेरेदार प्लाजो के साथ टैंग टौप घेरेदार प्लाजो पहनना अच्छा औपशन है. इसे फुल हाईनैक क्रौप टौप के साथ पहना जा सकता है. इसे आप शर्ट के साथ ऐक्सचेंज भी कर सकती हैं. ज्वैलरी के लिए मार्केट में आने वाले कुंदन पैंडैंट ट्राई कर सकती हैं.

आप औक्साइड ज्वैलरी की तरफ भी जा सकती हैं. इस के लिए लौंग लौकेट और नैकलैस टाइप की ज्वैलरी ट्राई कर सकती हैं. इस के साथ के मैचिंग इयररिंग्स पहनें. बालों को स्ट्रेट कर सकती हैं.

अगर आप ने हैवी चोकर औक्साइड ज्वैलरी पहनी है तो इयररिंग्स को अवौइट भी कर सकती हैं. इस के साथ हील पहनें. आजकल पार्टियों में इस लुक को बहुत पसंद किया जा रहा है.

लहंगा विद शर्ट

आप की ऐंग्जमैंट का लहंगा वार्डरोब में बेकार रखा है. आप सम?ा नहीं पा रही हैं कि इसे कैसे दोबारा पहना जाए तो इसे वैस्टर्न स्टाइल में कैरी कर सकती हैं. इस के लिए आप अपने लहंगे को सफेद शर्ट के साथ ट्राई कर सकती हैं, साथ में पर्ल ज्वैलरी पहनें और आपन हेयर करें. यह एकदम परफैक्ट कौंबिनेशन है.

आप चाहें तो लो पोनीटेल कर के इसे माथापट्टी के साथ स्टाइल कर सकती हैं. माथापट्टी आप को रिच लुक देगी. इस के साथ ट्राइपेरेट सैंडल या हील कुछ भी पहन सकती हैं. दोनों ही आप के लुक को पूरा करेंगे.

दुनिया अगर मिल जाए तो क्या: भाग-2

‘‘बात ही ऐसी करती हैं मैम. आ जाएंगी अपनी दलित बस्ती को बीच में ले कर. कोई खबर आई नहीं कि उन्हें दुख होना शुरू हो जाता है.’’

सहर ने कहा, ‘‘तुम अपनी जाति को ले कर नहीं आते? कभी सोचा है कि इतनी बड़ी डिग्री लेने जाने वाला इंसान हिंदू राष्ट्र की बात करते हुए कैसा लगता होगा?’’ सहर के आगे तो ओनीर वैसे ही हारने लगता था, फिर भी बोला, ‘‘काफी दिनों से सोच रहा हूं कि तुम, सहर नौटियाल. यह सरनेम कम ही सुना है. मुंबई के तो नहीं हो तुम लोग?’’

‘‘तुम सचमुच जाति से बढ़ कर नहीं सोच सकते?’’

‘‘मुझे भविष्य में एक इतिहासकार बनना है, राजनीति में जाना है.’’

‘‘उस के लिए इतना पढ़ने की क्या जरूरत है?’’ सहर के इतना कहते ही सब हंस पड़े. सब के और्डर सर्व हो चुके थे, सब खानेपीने लगे. सब जानते थे कि ओनीर को सहर पसंद है पर सहर के पेरैंट्स में से कोई तो मुसलिम है, ओनीर इसलिए कुछ आगे नहीं बढ़ता है. बस, इतना ही पता था सब को. और यही सच भी था.

सहर ने नीबूपानी का एक घूंट भरते हुए कहा, ‘‘कोई हिंदू, कोई मुसलिम, कोई ईसाई है, सब ने इंसान न बनने की कसम खाई है.’’ सहर की गंभीर आवाज पर कुछ सैकंड्स के लिए सन्नाटा छा गया.

ओनीर ने जलीकटी टोन में कहा, ‘‘बस, इसी से सब चुप हो जाते हैं, तुम्हें पता है.’’

सहर ने कहा, ‘‘ओनीर, वैसे तो तुम्हारा अपना सोचने का ढंग है पर मेरे खयाल से एक दोस्त की हैसियत से यह जरूर कहना चाहूंगी कि हम आज जहां बैठे हैं, हमारे और उन नफरत फैलाने वाले लोगों में कुछ फर्क तो होना ही चाहिए न? तुम वही भाषा बोलते हो जो एक सम?ादार इंसान को नहीं बोलनी चाहिए.’’

‘‘जो दिख रहा है, वही तो बोलता हूं.’’

‘‘नहीं, जो दिख रहा है, वह ज्यादातर मनगढ़ंत है, सही नहीं है. दूसरे स्किल की तरह हमें अब फैक्ट चैकिंग की स्किल भी डैवलप करनी चाहिए. तलाशना होगा कि क्या सच है और क्या ?ाठ. मैं ने तो पढ़ा है कि फिनलैंड और कुछ देशों में तो स्कूली कोर्स में आजकल फैक्ट चीकिंग पढ़ाई जा रही है. हमारे यहां भी यह कोर्स शुरू होना चाहिए क्योंकि अब इनफौर्मेशन कई जगहों से आ रही है और उसे बीच में कोई चैक करने वाला नहीं है. पहले मीडिया हमारे लिए यह काम करता था पर अब तो बीच में मीडिया भी नहीं है.’’

‘‘यह सब तुम मुझे क्यों सुना रही हो?’’

‘‘तुम्हें ही तो इतिहासकार बनना है न,’’ सहर मुसकरा दी, आगे कहा, ‘‘इतिहास लिखोगे तो सारे तथ्य लिखना. सच सब से ज्यादा जरूरी होता है, याद रखना. इतिहासकार को सच ही लिखना चाहिए. उस से फायदा होगा या नुकसान, यह देखना इतिहासकार का काम नहीं होता है.’’

‘‘पर यह सब मुझे सुनाने से क्या होगा, क्या मैं बेवकूफ हूं?’’

सहर हंस पड़ी, बोली, ‘‘अच्छा सुनने की सलाहियत से अच्छा कहने का शऊर आता है.’’

‘‘एक तो तुम पता नहीं कैसी हिंदी बोलती हो, कभी उर्दू. मुझे तो तुम्हारी आधी बातें समझ ही नहीं आतीं. ठीक से इंग्लिश में ही बात क्यों नहीं कर लेतीं?’’

‘‘फिर कहोगे, हिंदू राष्ट्र में सब को हिंदी ही बोलनी है. अंगरेजों ने गुलाम बनाया था न, इसलिए उन की भाषा नहीं बोल रही.’’ उस की इस बात पर सब जोर से हंसे, ओनीर ?ोंप गया. सिर्फ सहर ही उसे चुप करवा सकती थी. नएनए प्रेम में पड़े इंसान के लिए सबकुछ इतना भी आसान नहीं होता और ओनीर तो सहर के प्रेम में बुरी तरह डूबा था.

‘‘बहुत दिनों से पूछना चाह रहा था, तुम लोग उत्तराखंड से हो न? नौटियाल सरनेम वहीं से है न?’’

‘‘वाह, मुझ पर भी रिसर्च हो रही है.’’

सब हंसने लगे, ओनीर चिढ़ा, ‘‘कुछ ठीक से बताओगी अपने बारे में? अब तो कालेज भी खत्म होने को आए.’’

‘‘हम नौटियाल लोग करीब 700 साल पहले टिहरी से आ कर तली चांदपुर में नौटी गांव में आ कर बस गए थे. नौटियाल चांदपुर गढ़ी के राजा कनकपाल के साथ संवत 945 में मालवा से आ कर यहां बसे, इन के बसने के स्थान का नाम गोदी था जो बाद में नौटी के नाम में बदल गया और नौटियाल जाति मशहूर हुई. यह सब मेरे

पापा ने मेरी मम्मी को बताया

था और मुझे मम्मी ने. और कुछ पूछना है?’’

सहर के बोलने के ढंग में कुछ ऐसी बात थी कि जब वह बोलती, कोई उसे बीच में न टोकता. वह चुप हुई तो ओनीर, जो उसे अपलक देख रहा था, बोला, ‘‘फिलहाल इतना ही. बस, एक बात और, बुरा मत मानना, तुम्हारे पेरैंट्स में से कौन मुसलिम है?’’

‘‘मम्मी.’’

‘‘वे कहां की हैं?’’

‘‘यहीं मुंबई की.’’

‘‘तो पापा उत्तराखंड से आए थे?’’

‘‘हां,’’ कहते हुए सहर का चेहरा कुछ उदास सा हुआ. सब ने यह नोट किया तो युवान ने बात बदली, ‘‘चलो, अब सब क्लास में.’’

सहर और ओनीर दोनों ही जानते थे कि समय के साथ उन के दिल में एकदूसरे के लिए वैसे भाव नहीं हैं जैसे साथ में रहने वाले और दोस्तों के लिए हैं. कई बार ऐसा भी तो होता है न कि प्यार करने वाले अपने मुंह से कुछ भी नहीं कह रहे हैं पर आसपास के लोग दोनों की निगाहों में बहुतकुछ पढ़ लेते हैं. आंखों का काम सिर्फ देखना थोड़े ही होता है. आंखें बहुतकुछ कहतीसुनती भी तो हैं. इस तरह आंखें कभीकभी तो जबां और कानों का भी काम कर रही होती हैं.

कुछ महीने और बीते, पीएचडी हो गई. दीक्षांत समारोह के दिन ओनीर ने सहर से पूछा, ‘‘थोड़ी देर जुहू चलोगी?’’

पूरे दिन के सैलिब्रेशन के बाद ओनीर और सहर समुद्र के किनारे टहल रहे थे. अचानक ओनीर ने कहा, ‘‘सहर, मैं तुम्हें प्यार करने लगा हूं. क्या तुम भी मेरे लिए कुछ ऐसा सोचती हो?’’

ऐसे पल जीवन में इतने आम नहीं होते जितने लगते हैं. ये पल हमेशा के लिए स्मृतियों में अपनी पैठ बना लेते हैं. सहर को दिल ही दिल में ऐसे पलों की उम्मीद थी, यह कुछ बड़ा सरप्राइज नहीं था पर फिर भी ठंडी सी एक फुहार उस के अंदर तक उतर गई. उस ने बस ‘हां’ में सिर हिला दिया, फिर कुछ रुक कर कहा, ‘‘पर तुम जिस तरह से सोचते हो, हमारा रास्ता कभी

एक हो नहीं सकता. थोड़ा प्रैक्टिकल हो कर कहूं तो तुम कास्ट को ज्यादा महत्त्व देते हो, इसलिए तुम्हारा दिमाग दिल पर हावी ही रहेगा, हम साथ चल नहीं पाएंगे.’’

प्री दीवाली नाइट्स में पहने यूनिक आउटफिट्स

आजकल प्री दीवाली फेस्टिवल में गरबा का खूब चलन है. डांडिया या गरबा नाइट्स के जरिए सेलिब्रेशन की एक्साइटमेंट बढ़ जाती है. अट्रैक्टिव दिखने के लिए आप बॉलीवुड के कई सेलिब्रिटी के फैशन को फॉलो कर सकते हैं. फेस्टीवल डांस में लोग डांडिया नाइट्स में जाने का प्लान बनाते हैं. आजकल के युवाओं में ये जोश कुछ ज्यादा ही है. अलग-अलग कपड़ों को स्टाइल करके अट्रैक्टिव दिखने की कोशिश करते हैं. गरबा सेलिब्रेशन के लिए आउटफिट कैसी होनी चाहिए इसका क्रेज ज्यादा रहता है. महिलाएं लहंगा, साड़ी या सूट के फॉर्मेट्स को पर ज्यादा फोकस करती हैं. ज्यादातर महिलाएं अलग से कपड़ा लेकर डिजाइनर लहंगे सिलवाती हैं. आउटफिट से पूरी पर्सनालिटी ही बदल जाती है. बिहार में तो गरबे के लिए बंबू स्टिक की धूम मची हुई है. गुजरात और राजस्थान में डांडिया की धूम है. गुजरात में गरबा प्रेमिओं में काफी उत्साह है. गुजरात के अलग-अलग हिस्सों में गरबा की धूम देखते ही बनती है.

एक समय था जब गरबा में फाल्गुनी पाठक के गाने बजते थे. गरबा नाइट्स की शान हुआ करती थीं सिंगर फाल्गुनी पाठक. उन्हे रिप्लेस करना कोई मामूली बात नहीं थी. लेकिन समय बदलता है. देखते-देखते अब गरबा का ट्रेंड ही बदल गया. कई अलग-अलग तरह के नए गाने आ गए जिसने गरबा नाइट्स में धूम मचा दी.

हैवी आउटफिट करें इग्नोर

फेस्टीवल नाइट्स में फैशनेबल बनने के चक्कर में हैवी आउटफिट या मेकअप को कैरी करने से बचें. क्योंकि अगर अगर आप ऐसा करती हैं तो इस वजह से पूरे इवेंट में आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. आप हैवी आउटफिट के साथ डांस नहीं कर सकती हैं. लाइट मेकअप और लाइट आउटफिट बेस्ट रहती है. ताकि बिना झिझक डांस भी कर पाएं और बार-बार मेकअप उतरने की टेंशन भी खत्म.

आलिया भट्ट लुक

हाल ही में आलिया भट्ट के कई आउटफिट्स फेमस हुए हैं. जिन्हें लोग काफी पसंद कर रहे हैं इन्हें आप गरबा नाइट के लिए फॉलो कर सकती हैं. एक लुक में आलिया ने पिंक साड़ी पहनी हुई है. एक्ट्रेस का बेकलेस ब्लाउज लुक बेहद अट्रैक्टिव लग रहा है. एक्ट्रेस के गोल्ड झुमके लुक में चार चांद लगा रहे हैं. मेकअप पर पिंक लिप्सटिक भी काफी जच रही है. आलिया का गंगु बाई मूवी में भी एक लहंगा काफी फेमस हुआ था उसे भी गरबा के लिए ट्राई कर सकती हैं.

श्रद्धा कपूर का लहंगा लुक

दीवाली सेलिब्रेशन के दौरान आप श्रद्धा कपूर की तरह ऑरेंज लहंगा वियर कर सकती हैं. एक्ट्रेस का लहंगा अट्रैक्टिव होने के साथ-साथ लाइट वेट भी है. डांडिया नाइट में अलग और ब्यूटीफुल नजर आने के लिए आप एक्ट्रेस के इस लुक को कॉपी कर सकती हैं. श्रद्धा कपूर के और भी ऐसे कई आउटफिट हैं जिन्हें आप फॉलो कर सकती हैं.

कियारा आडवाणी लुक

हाल ही कियार आडवाणी की मूवी सत्य प्रेम की कथा में कियारा का गरबा लुक भी काफी फेमस हुआ है. कियारा का लहंगा लुक भी लोगों को बेहद पसंद आ रहा है. उसको कॉपी करना भी पर्सनॉलिटी को अलग लुक देगा.

अनारकली सिंपल लुक

गरबा नाइट में सिंपल और अट्रैक्टिव नजर आने के लिए अनारकली सूट को भी ट्राई किया जा सकता है. मार्केट में इसके डिजाइन्स की भरमार है. देसी लुक देने वाला अनारकली सूट आपको 500 से 1000 रुपये या ज्यादा से ज्यादा 1500 के बीच आसानी से मिल जाएगा. क्योंकि अनारकली भी एक तरह से लहंगे का पूरा पूरा लुक देता है. इसलिए गरबे में ये भी एक बेस्ट ऑप्शन हो सकता है.

लौटती बहारें: भाग 4- मीनू के मायके वालों में कैसे आया बदलाव

अचानक अम्मांजी की आवाज आई, ‘‘बहू, मेरा और नीलम का खाना मत बनाना. हमारा खाना वहीं होगा.’’ मैं आहत सी हो गई. मैं नईनवेली दुलहन पर मुझे तो कोई किसी योग्य समझता ही नहीं. मन मार कर काम में लग गई. तभी अचानक नीलम जीजी की जोरजोर से रोने की आवाजें आने लगीं. मैं डर गई कि क्या हुआ. कहीं राहुल को चोट तो नहीं लग गई. मैं आटे से सने हाथों को जल्दी से धो कर अंदर कमरे की ओर दौड़ी. अंदर जा कर देखा नीलम जीजी अपना सामान बिखराए रो रही थीं. अम्मांजी बैग खोल कर कुछ ढूंढ़ रही थीं. पूछने पर मालूम चला कि नीलम दीदी का एक बैग शायद जल्दबाजी में औटोरिकशा में ही छूट गया. उस में उन के जेवर भी थे.

यह सुन कर मुझे बहुत बुरा लगा. अब तो औटोचालक की ईमानदारी पर ही उम्मीद लगाई कि शायद पुलिस स्टेशन में जमा करा दे अथवा घर आ कर लौटा जाए. नीलम को न तो औटो का नंबर याद था और न ही चालक का चेहरा. इस से परेशानी और बढ़ गई. घर में गहरा तनाव छा गया था. पापाजी ने इन्हें भी औफिस से बुलवा लिया था. दोनों पुलिस स्टेशन रपट लिखवाने गए. पर वहां जा कर भी कोई ऐसी तसल्ली नहीं मिली जिस से तनाव कम हो जाता. बेटी का मायके आ कर जेवर खो देना मायके वालों के लिए बहुत बदनामी काकारण था. शेखर और रवि दोनों मिल कर जीजी को दिलासा दे रहे थे. नीलम जीजी एक ही प्रलाप किए जा रही थीं कि ससुराल जा कर क्या मुंह दिखाऊंगी. अम्मां औटो वाले को कोस रही थीं. मैं और पापाजी दोनों बेबस से खड़े थे.

उस दिन किसी ने खाना नहीं खाया. मैं ने बड़ी कठिनाई से राहुल को दूध व बिस्कुट खिलाए. अगले दिन शाम तक न पुलिस स्टेशन से कोई खबर आई और न ही औटोचालक का ही कुछ अतापता मिला. सभी निराश हो चले थे. मुझे नीलम जीजी की दशा देख कर बहुत दुख हो रहा था. कितने उत्साह से विवाह में शामिल होने आई थीं और किस परेशानी में घिर गईं. अगर कभी मायके जा कर मेरे साथ यह घटना हो जाती तो? यह सोच मैं मन ही मन कांप गई. मेरे मन में विचारों की उधेड़बुन चल रही थी कि कैसे नीलम जीजी की परेशानी दूर करूं.

अचानक दिमाग में बिजली कौंधी. मैं दृढ़ कदमों से अपने कमरे में गई और अपनी अलमारी से सारे जेवर निकाल लाई. जेवरों का डब्बा मैं ने नीलम जीजी को देते हुए कहा, ‘‘लो जीजी, ये जेवर आज से आप के हुए. मेरे तो फिर बन जाएंगे… अभी आप का जेवरों के कारण कोई अपमान नहीं होना चाहिए.’’

सभी हैरानी से मेरा मुंह देखने लगे मानो उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा हो. कुछ ही क्षणों बाद घर के सभी सदस्य गहने लेने से इनकार करने लगे तो मैं ने सधे स्वर में कहा, ‘‘मैं जेवर, नीलम जीजी को दे कर कोई एहसान नहीं कर रही हूं. आप सब मेरा परिवार हैं. आप के मानअपमान में मैं भी बराबर की हिस्सेदार हूं. आजकल आएदिन लूटपाट की खबरें आती रहती हैं. गहने तो अधिकतर लौकरों की शोभा ही बढ़ाते हैं,’’ यह कह मैं किचन की ओर चल दी.

तभी नीलम जीजी ने लपक कर मेरा हाथ पकड़ लिया और कहने लगीं, ‘‘नहींनहीं भाभी मैं अपनी लापरवाही की सजा आप को नहीं दे सकती,’’ और फिर से जेवर वापस करने लगीं. इस बार मैं ने उन्हें राहुल का वास्ता दे कर जेवर ले लेने को कहा. कोई चारा न देख कर उन्होंने जेवर ले लिए.

शेखर और रवि भैया मुझे प्रशंसाभरी नजरों से देख रहे थे. पापा ने मेरी पीठ थपथपाते हुए कहा, ‘‘बहू, इस समय जो तुम ने हमारे लिए किया उसे हम जीवन भर नहीं भुला पाएंगे.’’

हर समय पराए घर की और पराया खून की रट लगाने वाली अम्मांजी लज्जित सी सिर झुकाए बैठी थीं. जेवरों का यों खो जाना कोई मामूली चोट न थी. फिर भी फिलहाल उस पर मरहम लगा दिया. सभी बेमन से थोड़ाबहुत खा कर सो गए.

नीलम जीजी जैसेतैसे सहेली की शादी निबटा कर चली गईं. ससुराल में जा कर बताया कि भाभी के जेवर नए डिजाइन के थे, इसलिए उन से बदल लिए. उन की ससुराल वाले खुले विचारों के लोग थे. अत: उन्होंने कोई पूछताछ नहीं की. इस घटना के बाद से सब का मेरे प्रति व्यवहार बदल गया. शेखर बाहर घुमाने भी ले जाने लगे. खाना बन जाने पर रवि भैया और शेखरजी डाइनिंगटेबल पर प्लेटें, डोंगे रखवाने

में मेरी मदद करते. खाने के समय सब मेरा इंतजार करते. एक दिन तो अम्मां ने यहां तक कह दिया, ‘‘बहू रोटियां बना कर कैसरोल में रख लिया करो. सब के साथ ही खाना खाया करो.’’

मैं मन ही मन इस बदलाव से खुश थी. पर मन में रेनू और राजू की चिंता, किसी फांस की तरह चुभती रहती. मैं ऊपर से सामान्य दिखने का प्रयत्न करती रहती. मुझे सहारनपुर से लौटे लगभग 2 महीने होने को आए थे.

पापा का 2-3 बार कुशलमंगल पूछने के लिए फोन आ चुका था. मम्मी से भी बात हो गई थी. रेनू और राजू से एक बार भी बात नहीं हो पाई. उन के बारे में जब भी पूछा, पापा ने घर पर नहीं हैं कह कर बहाना बना दिया. हो सकता है वे दोनों बात करना न चाहते हों. कल रात जब खाना बना रही थी तो सहारनपुर से पापा का फोन आया. घबराए हुए थे. उन्होंने कहा, ‘‘मीनू बेटी, तेरी मम्मी की तबीयत खराब है, उन्हें पीलिया हो गया है. तुम्हें बहुत याद कर रही हैं.’’

मैं समझ गई मम्मी की तबीयत ज्यादा ही खराब होगी. तभी पापा ने मुझे फोन किया वरना नहीं करते. मेरी आंखें भर आईं. मैं ने पापा को आने का आश्वासन दे कर फोन काट दिया. पीछे मुड़ी तो कमरे में अम्मां और पापाजी खड़े थे. मेरे चेहरे पर चिंता की रेखाएं देख कर पूछने लगे, ‘‘बहू, मायके में सब कुशलमंगल तो है?’’ मम्मी की तबीयत के बारे में बतातेबताते मैं रो पड़ी.

अम्मां ने मुझे सांत्वना दी. पापाजी ने कहा, ‘‘तुम सुबह ही शेखर को ले कर चली जाओ. मम्मी की देखभाल करो. शेखर के पास छुट्टियां कम हैं पर 1-2 दिन रह कर लौट आएगा. तुम जितने दिन चाहो रह लेना.’’ अगले दिन मैं और शेखर सहारनपुर जा पहुंचे. सारा घर अस्तव्यस्त हो रखा था. मैं ने मम्मी को देखा तो हैरान रह गई. वे बहुत कमजोर हो गई थीं. आंखों में बहुत पीलापन आ गया था.

इलाज तो चल ही रहा था, पर मुझे तसल्ली न हुई. मैं और शेखर मम्मी को दूसरे डाक्टर के पास ले गए. शहर में इन का अच्छे डाक्टरों में नाम आता था. मुआयना करने के बाद डाक्टर ने कहा कि मर्ज काफी बढ़ गया है, पर परहेज और आराम करने से सुधार आ सकता है. घर पहुंचने पर पाया रेनू और राजू भी आ गए थे. मुझे देख कर दोनों के चेहरे उतर गए, पर मैं भी उन से औपचारिक बातें ही करती.

चौथे दिन मम्मी के स्वास्थ्य में सुधार दिखने लगा. पापा के चेहरे पर भी रौनक लौट आई. यह देख बहुत अच्छा लगा. दोपहर को मैं मम्मी को खिचड़ी खिलाने लगी. घर में कोई नहीं था. मम्मी ने खिचड़ी खा कर प्लेट एक ओर रख कर मेरे दोनों हाथ पकड़ कर मुझे पलंग पर अपने पास ही बैठा लिया. उन की आंखों में आंसू थे. वे रोते हुए बोलीं, ‘‘मीनू, बेटी पिछली बार हम से तुम्हारा बड़ा अपमान हो गया था. मुझे माफ कर दे बेटी. मैं मजबूर हो गई थी,’’ और फिर मेरे सामने हाथ जोड़ने लगीं.

मुझे बहुत बुरा लगा. मैं ने उन के हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘मम्मी, आप यह क्या कर रही हैं? आप न तो पिछली बातें सोचेंगी और न ही कहेंगी. बस अपनी सेहत पर ध्यान दें.’’ धीरेधीरे मां खुलती गईं. अपनी मन की पीड़ा से मुझे अवगत कराने लगीं. उन्होंने बताया कि रेनू किस तरह घर के प्रति लापरवाह हो गई है. जब से बीमार हुईं हूं सवेरे ही कुछ बना कर डाइनिंगटेबल पर रख जाती है. शाम को भी यही हाल है. जल्दबाजी में कुछ भी कच्चापक्का बना कर दे देती है. कुछ कहो या पूछो तो गुस्सा हो जाती है.

राजू भी दिन भर बाहर रहता है. खानेपीने का कोई नियम नहीं. तेरे पापा ने चाय बनानी सीख ली है. चाय तो वे ही बना लेते हैं. ये सब सुन कर मन बेहद दुखी हुआ. मैं भी रेनू और राजू के बहकते कदमों के बारे में मम्मी को सतर्क करना चाहती थी पर उन के स्वास्थ्य को देखते हुए मैं ने इस विषय पर चुप्पी ही साध ली.

अगले दिन मैं ने अपनी सहेली चित्रा को फोन किया. वह मुझ से मिलने घर आ गई. विवाह के बाद मैं उसे मिल न पाई थी. चित्रा मेरी बचपन की एक मात्र अंतरंग सखी थी. वह एक धनी व्यवसायी की बेटी थी, परंतु घमंड से कोसों दूर थी. बेहद स्नेहमयी थी. इसीलिए वह हमेशा मेरे दिल के करीब रही. दोनों एकदूसरे के दुखसुख में भागीदार रहती थीं. चित्रा के आने पर मेरा मन खुश हो उठा. हम दोनों पहले मम्मी के पास बैठीं.

मम्मी बोलीं, ‘‘अरे चित्रा, आज तो तू मीनू को कहीं बाहर घुमा ला. जब से आई है मेरी सेवा में लगी है. अब मैं ठीक हूं.’’ चित्रा ने चलने का अनुरोध किया तो मैं मना न कर पाई. वह अपनी कार में आई थी. दोनों एक रेस्तरां में पहुंच गईं. चित्रा ने कौफी और सैंडविच का और्डर दिया. फिर दोनों बतियाने लगीं. चित्रा मुझ से मेरे विवाह और ससुराल के अनुभव सुनने के लिए बेताब थी. फिर अचानक चित्रा गंभीर हो गई. बोली, ‘‘मीनू, हम दोनों कितने समय बाद मिले हैं. मैं तेरा दिल दुखाना नहीं चाहती हूं पर इस विषय पर चुप्पी साध कर भी मैं तेरा और तेरे परिवार का नुकसान नहीं करना चाहती.’’

मैं ने उसे सब कुछ खुल कर बताने को कहा तो चित्रा ने कहा, ‘‘मीनू तू तो जानती है कि मेरा छोटा भाई रजत और राजू कालेज में एकसाथ ही हैं. रजत ने मुझे बताया कि राजू 3-4 महीनों से कालेज में बहुत कम दिखाई देता है. वह कुछ दादा टाइप लड़कों के साथ घूमता है. प्रोफैसर उसे कई बार चेतावनी दे चुके हैं. मुझे लगता है उसे अभी न रोका गया तो वह गलत रास्ते पर आगे बढ़ जाएगा, फिर वहां से लौटना कठिन हो जाएगा.’’ मैं ने चित्रा को शुक्रिया कहा और बोली, ‘‘तू ने सही समय पर मुझे सचेत कर दिया. राजू से आज ही बात करती हूं.’’

बात निकली तो मैं ने रेनू के बारे में भी चित्रा को सब बता दिया. मेरी बात सुन कर चित्रा कहने लगी, ‘‘वैसे तो इस उम्र में लड़कियों और लड़कों में आकर्षण आम बात है पर परेशानी तब होती है जब लड़के मासूम लड़कियों को बहलाफुसला कर उन से संबंध बना कर उन के आपत्तिजनक वीडियो बना कर ब्लैकमेल करने लगते हैं.’’ मैं ने कहा, ‘‘बस चित्रा मुझे यही चिंता खा रही है. रेनू सुनने को तैयार ही नहीं है. क्या करूं?’’

अभी हम बातें कर ही रही थीं कि एकाएक मेरी नजर सामने की टेबल पर पड़ी. वहां एक नवयुवक और एक नवयुवती हाथों में हाथ डाले जूस पी रहे थे. वे धीरेधीरे बातें कर रहे थे. मुझे लगा कि इस लड़के को कहीं देखा है. दिमाग पर जोर डाला और ध्यान से देखा तो याद आ गया. यह वही लड़का है, जिस के साथ रेनू बाइक पर घूमती है. बस अब मेरा दिमाग तेजी से काम करने लगा. इस फ्लर्टी लड़के के चक्कर में रेनू मेरा इतना अपमान कर रही थी. मैं ने झटपट एक प्लान बनाया और चित्रा को समझाया. चित्रा वाशरूम जाने के बहाने उन दोनों के पास जा कर रुकेगी और मैं समय नष्ट न करते हुए मोबाइल से उन का फोटो ले लूंगी. अगर वह जोड़ा सचेत हो जाता है, तो मैं कैमरे का रुख चित्रा की ओर कर के उसे पोज देने को कहने लगूंगी. मगर दोनों प्रेमी अपने आसपास की चहलपहल से बेखबर एक ही गिलास में जूस पीने में मस्त थे. मैं ने जल्दी से फोटो लिए और हम दोनों रेस्तरां से बाहर आ गईं.

घर पर रेनू और राजू भी आ चुके थे. राजू तो चित्रा को घर आया देख सकपका सा गया पर चित्रा को रेनू बहुत पसंद करती थी, इसलिए वह चित्रा से बहुत प्यार से मिली. एकदूसरे का हालचाल पूछ कर रेनू सब के लिए चाय बनाने चली गई. कुछ देर रुक राजू मौका देख कर कोचिंग क्लास के बहाने बाहर जाने लगा तो चित्रा ने लपक कर उस का हाथ पकड़ लिया और बोली, ‘‘क्यों मैं इतने दिनों बाद आई हूं, मुझ से बातचीत नहीं करोगे? मीनू के ससुराल जाने के बाद अब मैं ही तुम्हारी दीदी हूं. मुझ से अपने मन की बात कह सकते हो,’’ यह कहतेकहते वह राजू को अलग कमरे में ले गई.

चित्रा ने राजू को समझाया, ‘‘तुम्हारी हरकतों से तुम्हारा कैरियर तो खराब होगा ही, पूरे घर के मानसम्मान पर भी धब्बा लगेगा. तुम्हारे मातापिता तुम से कितनी उम्मीदें लगाए बैठे हैं.’’ राजू सब सिर झुकाए सुनता रहा.

चित्रा ने आगे कहा, ‘‘तुम कल से नियमित कालेज जाओ… उन लड़कों से मिलनाजुलना बंद करो. अगर इस में कोई भी समस्या सामने आती है, तो प्रोफैसर आदित्य के पास चले जाना. वे मेरे कजिन हैं. हर तरह से तुम्हारी मदद करेंगे. हां, अब तुम्हारी सारी गतिविधियों पर ध्यान भी रखा जाएगा. याद रहे तुम्हारी मीनू दीदी उसी कालेज में टौपर रह चुकी हैं.’’ राजू चित्रा का बहुत आदर करता था. अत: ये सब सुन कर रो पड़ा. उस ने चित्रा से वादा किया कि वह उन की बातों पर अमल करेगा. चित्रा ने प्यार से उस की पीठ थपथपाई. तभी रेनू चाय बना कर कर ले आई. उधर मैं ने भी अपना काम कर लिया. मैं ने रेस्तरां में खींचे गए फोटो वहीं रख दिए जहां टेबल पर रेनू ने चाय रखी थी. मैं वहां से उठ कर मम्मी के कमरे में चली गई. रेनू चाय के लिए सब को बुलाने लगी. हम सब हंसतेखिलाते चाय पीने लगे. तभी रेनू की नजर फोटो पर पड़ गई, ‘‘किस के फोटो हैं ये?’’ कह कर उन्हें उठा लिया.

चित्रा बोली, ‘‘ये मेरे फोटो खींच रही थी. मेरे तो खींच नहीं पाई. यह जोड़ा रेस्तरां में बैठा था, उस की खिंच गई. मीनू तू तो मोबाइल से भी फोटो नहीं खींच पाती.’’ फोटो देखते ही रेनू के चेहरे का रंग बदल गया. हम चुपचाप अनजान बने चाय पीते रहे.

रेनू चुपचाप वहां से चली गई. हम थोड़ी देर बाद रेनू के कमरे में जा पहुंचे. वह बिस्तर पर पड़ी रो रही थी. चित्रा ने उस से प्यार से रोने का कारण पूछा तो उस ने पहले तो बहाना किया पर उस का बहाना मेरे और चित्रा के सामने नहीं चला. मैं ने पुचकार कर पूछा तो उस ने उस लड़के के बारे में सब बता दिया. मैं ने और चित्रा ने उसे इस उम्र में होने वाली गलतियों से आगाह किया और पढ़ाईलिखाई में ध्यान देने को कहा.

रेनू रोतेरोते मेरे गले लग गई और बोली, ‘‘दीदी, मुझे डांटो, मैं बहुत खराब हूं.’’ तब मैं ने प्यार से समझाया, ‘‘सुबह का भूला अगर शाम को घर वापस आ जाए तो उसे भूला नहीं कहते. अब मम्मीपापा की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी तुम्हारी है.’’

रेनू ने हां में सिर हिला दिया. राजू भी सिर झुकाए खड़ा था. वह भी मेरे गले लग गया. चित्रा जाते समय मम्मीपापा से मिलने गई तो हंस कर बोली, ‘‘अंकल जिस काम के लिए मैं यहां आई थी उसे तो भूल कर जा रही थी. दरअसल, पापा ने मुझे आप के पास इसलिए भेजा था कि पापा को अपने व्यवसाय के लिए एक अनुभवी अकाउंटैंट चाहिए. यदि आप यह कार्य संभाल लें तो उन की चिंता कम हो जाएगी.’’

पापा की खुशी की सीमा न रही. बोले, ‘‘नेकी और पूछपूछ. चित्रा बेटी तुम्हारा यह उपकार कभी नहीं भूलूंगा.’’ यह सुन कर चित्रा प्यार भरे गुस्से से बोली, ‘‘अंकल आप ऐसा कहेंगे तो मैं आप से बहुत नाराज हो जाऊंगी.’’

पापा ने मुसकरा कर अपने कान पकड़ लिए तो सभी जोर से हंस पड़े. सारा माहौल खुशगवार हो गया. मम्मी अब ठीक थीं. रेनू ने भी घर के कामकाज में ध्यान देना शुरू कर दिया था. मैं ने भी ससुराल लौटने की इच्छा जताई. इस बार

राजू मुझे ससुराल छोड़ने जा रहा था. अगले दिन मैं जाने से पहले मम्मीपापा के कमरे के पास से गुजर रही थी तो मुझे उन की बातचीत सुनाई पड़ी. मम्मी कह रही थीं, ‘‘देखो हम बेटियों को पराया धन, पराई अमानत कह कर दुखी करते हैं परंतु बेटियां पति के घर जा कर भी पिता की चिंता नहीं छोड़तीं.’’

पापा हंस कर बोले, ‘‘तुम ने वह कहावत नहीं सुनी है कि बेटे अपने तब तक रहते हैं जब तक न हो वाइफ और बेटियां तब तक साथ रहती हैं जब तक हो लाइफ.’’ यह सुन कर मैं भी मुसकरा दी. अगले दिन मैं मायके से विदा हो कर ससुराल आ गई. सभी मुझ से और राजू से बहुत प्यार से मिले. शेखर ने राजू को पूरी दिल्ली घुमाया. कई तोहफे दिए. नीलम जीजी भी राजू से मिलने आईं. राजू बहुत ही अच्छे मूड में विदा हुआ.

अम्मां के घुटनों के दर्द के लिए मैं एक तेल लाई थी. उस से मालिश कर के अम्मां और पापाजी के कमरे से निकली तो पापा की आवाज सुनाई दी, ‘‘बहुएं तो प्यार की भूखी होती हैं. जब तक उन्हें पराए घर की, पराए खून की कहते रहेंगे वे ससुराल में अपनी जगह कैसे बनाएंगी?’’ अम्मां बोलीं, ‘‘सच कह रहे हो शेखर के पापा… वे बेचारियां अपना मायके का सब कुछ छोड़ कर हमारे आसरे आती हैं और हम उन्हें अपनाने में पीछे हटते हैं.’’

‘‘ये नादानियां तुम्हीं ने सब से ज्यादा की हैं,’’ पापा ने कहा तो अम्मां ने शर्म से सिर झुका लिया.

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