घर पर बनाएं रेस्टोरेंट स्टाइल मिक्स वेज पास्ता

बड़ों से लेकर बच्चों तक पास्ता सभी का फेवरेट होता है. जिसके लिए वह अपनी बाहर से पास्ता और्डर करते हैं. लेकिन आज हम आपको घर पर टेस्टी और यमी पास्ता कैसे बनाएं यह बताएंगे. जिससे आप अपनी फैमिली को खुश कर पाएंगे.

हमें चाहिए…

200 ग्राम पास्ता

2 शिमला मिर्च

150 ग्राम पास्ता सौस

200 ग्राम ब्रोकली

200 ग्राम मशरूम

50 ग्राम बीन्स

1/2 छोटा चम्मच अजीनोमोटो

2-1/2 बड़ा चम्मच औलिव औयल

1 छोटा चम्मच सोया सौस

1/2 छोटा चम्मच आर्गानो पाउडर

1/2 छोटा चम्मच चिल्ली फ्लेक्स

नमक स्वादानुसार.

बनाने का तरीका

-सबसे पहले बीन्स ब्रोकली को धोकर मीडियम साइज में काट लें और 2 चुटकी नमक मिलाकर 5 मिनट तक स्टीम कर लें. अब मशरूम को धोकर उसके डंठल हटा दें और दो टुकड़ों को काट लें.

-कढ़ाई में औलिव औयल डालकर गरम करें. तेल गरम होने पर उसमें बीन्स डाल दें और एक मिनट तक चलाते हुए भून लें. उसके बाद ब्रोकली डालें और उसे भी एक मिनट भून लें. इसके बाद मशरूम, अजीनोमोटो, ओरगेनो पाउडर, चिल्ली फ्लेक्स, सोयासास, नमक डालकर, दो मिनट भून लें और ढ़क कर गैस बंद कर दें.

-अब एक बर्तन में पास्ता रखें, फिर उसमें इतना पानी डालें, जिससे वे आसानी से डूब जाएं. उसके बाद पानी में आधा छोटा चम्मच नमक और एक छोटा चम्मच तेल डाल दें और मध्यम आंच पर पकाएं. लगभग 10 मिनट बाद, जब पास्ता नरम हो जाए, गैस बंद कर दें और बर्तन का पानी छानकर निकाल दें.

-अब शिमला मिर्च धोकर उसके बीज हटा दें और मध्यम आकार के टुकड़े काट लें. इसके बाद कढ़ाई में तेल डाल कर उसे गरम करें. तेल गरम होने पर उसमें शि‍मला मिर्च डाल दे और 2 मिनट भून लें.

इसके बाद उबला हुआ पास्ता, पास्ता सौस और अजीनोमोटो डाल दें और 1-2 मिनट चलाते हुए भून लें. अब पहले से तैयार की गयी मिक्स वेज पास्ता में मिला दें और अच्छी तरह से चलाकर मिक्स कर लें. इसके बाद गैस बंद कर दें.

घर पर ही बना सकती हैं अपना फेस टोनर

क्या आप अपने टोनर से संतुष्ट हैं? क्या आपको लगता है कि जिस फायदे के लिए आपने टोनर खरीदा था वो आपको मिल रहा है? ज्यादातर मामलों में ऐसा होता है कि हम लोगों के कहने पर और विज्ञापन देखकर ब्यूटी प्रोडक्ट्स खरीद लेते हैं लेकिन उनसे हमें वो फायदा नहीं मिल पाता है, जिसकी हमें उम्मीद होती है. इसके बाद हम सिर्फ कीमत वसूलने के लिए ही उस प्रोडक्ट को यूज करते हैं.

अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा ही है तो घबराने की जरूरत नहीं है. आप चाहें तो अपना नेचुरल स्‍क‍िन टोनर घर पर ही बना सकती हैं. टोनर पोर्स को खोलने का काम करता है और चेहरे की गंदगी साफ करता है. नेचुरल तरीके से टोनर तैयार करने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इसके लिए बहुत बड़ी कीमत नहीं चुकानी पड़ती है और इसका कोई साइड-इफेक्ट भी नहीं होता.

घर पर आप अपनी स्किन के अनुसार अपना टोनर बना सकती हैं. अगर आपके चेहरे पर बहुत अधिक मुंहासें हैं तो आप उन चीजों का इस्तेमाल कर सकती हैं जो एंटी-बैक्टीरियल हों. इसके अलावा अगर आपकी स्क‍िन ड्राई है तो आप मॉइश्चराइज करने वाली चीजों का इस्तेमाल कर सकती हैं.

आप चाहें तो इन उपायों से अपना स्क‍िन टोनर घर पर ही बना सकती हैं:

1. गुलाब जल और सिरके के इस्तेमाल से

अगर आपकी स्क‍िन नॉर्मल है तो चार चम्मच गुलाब जल और चार चम्मच सिरका ले लें. इन्हें अच्छी तरह मिला लें. उसके बाद एक कॉटन बॉल को इसमें डिप करके चेहरे की सफाई करें. इससे पोर्स तो खुलेंगे ही, चेहरा भी साफ हो जाएगा.

2. बर्फ भी है एक अच्छा टोनर

शायद आपको पता न हो लेकिन बर्फ भी एक बहुत अच्छा टोनर है. अगर आपकी स्क‍िन ऑयली है तो ये आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा. एक मुलायम और बारीक से कपड़े में बर्फ को लपेट लें. इससे पूरे चेहरे की मसाज करें. इससे स्क‍िन को ठंडक को मिलेगी ही साथ ही पोर्स भी खुल जाएंगे.

3. तुलसी की पत्त‍ियां

अगर आपकी स्क‍िन पर बहुत अधिक मुंहासे हैं तो आपके लिए तुलसी की पत्त‍ियों का टोनर बहुत फायदेमंद रहेगा. तुलसी की कुछ पत्तियों को उबाल लें. पांच मिनट तक उबालने के बाद इसे ठंडा होने दें. इसके बाद इसे छान लें और कॉटन बॉल से चेहरे की सफाई कर लें. बचे हुए तुलसी के पानी को एक बोतल में स्टोर करके रख लें.

अपनी कमाई सास के हाथ पर कब रखें, कब नहीं

भले ही सासबहू के रिश्ते को 36 का आंकड़ा कहा जाता है पर सच यह भी है कि एक खुशहाल परिवार का आधार कहीं न कहीं सासबहू के बीच अच्छे सामंजस्य और एकदूसरे को समझने की कला पर निर्भर करता है.

एक लड़की जब शादी कर के किसी घर की बहू बनती है तो उसे सब से पहले अपनी सास की हुक़ूमत का सामना करना पड़ता है. सास सालों से जिस घर को चला रही होती है उसे एकदम से बहू के हवाले नहीं कर पाती. वह चाहती है कि बहू उसे मान दे, उस के अनुसार चले.

ऐसे में बहू यदि कामकाजी हो तो उस के मन में यह सवाल उठ खड़ा होता है कि वह अपनी कमाई अपने पास रखे या सास के हाथों पर रख दे. वस्तुतः बात केवल सास के मान की नहीं होती बहू का मान भी मायने रखता है. इसलिए कोई भी फैसला लेने से पहले कुछ बातों का ख्याल जरूर रखना चाहिए.

बहू अपनी कमाई सास के हाथ पर कब रखे—

1. जब सास हो मजबूर

यदि सास अकेली हैं और ससुर जीवित नहीं तो ऐसे में एक बहू यदि अपनी कमाई सास को सौंपती है तो सास उस से अपनापन महसूस करने लगती है. पति के न होने की वजह से सास को ऐसे बहुत से खर्च रोकने पड़ते हैं जो जरूरी होने पर भी पैसे की तंगी की वजह से वह नहीं कर पातीं. बेटा भले ही अपने रुपए खर्च के लिए देता हो पर कुछ खर्चे ऐसे हो सकते हैं जिन के लिए बहू की कमाई की भी जरूरत पड़े. ऐसे में सास को कमाई दे कर बहू परिवार की शांति कायम रख सकती है.

2. सास या घर में किसी और के बीमार होने की स्थिति में

यदि सास की तबीयत खराब रहती है और डॉक्टरबाजी में बहुत रुपए लगते हैं तो यह बहू का कर्तव्य है कि वह अपनी कमाई सास के हाथों पर रख कर उन्हें इलाज की सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद करे.

3. अपनी पहली कमाई

एक लड़की जैसे अपनी पहली कमाई को मांबाप के हाथों पर रख कर खुश होती है वैसे ही यदि आप बहू हैं तो अपनी पहली कमाई सास के हाथों पर रख कर उन का आशीर्वाद लेने का मौका न चूकें.

4. यदि आप की सफलता की वजह सास हैं

यदि सास के प्रोत्साहन से आप ने पढ़ाई की या कोई हुनर सीख कर नौकरी हासिल की है यानी आप की सफलता की वजह कहीं न कहीं आप की सास का प्रोत्साहन और प्रयास है तो फिर अपनी कमाई उन्हें दे कर कृतज्ञता जरुर प्रकट करें. सास की भीगी आंखों में छुपे प्यार का एहसास कर आप नए जोश से अपने काम में जुट सकेंगी.

5. यदि सास जबरन पैसे मांग रही हो

पहले तो यह देखें कि ऐसी क्या बात है जो सास जबरन पैसे मांग रही है. अब तक घर का खर्च कैसे चलता था?

इस मामले में अच्छा होगा कि पहले अपने पति से बात करें. इस के बाद पतिपत्नी मिल कर इस विषय पर घर के दूसरे सदस्यों से विचारविमर्श करें. सास को समझाएं. उन के आगे खुल कर कहें कि आप कितने रुपए दे सकती हैं. चाहे तो घर के कुछ खास खर्चे जैसे राशन /बिल/ किराया आदि की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले लें . इस से सास को भी संतुष्टि रहेगी और आप पर भी अधिक भार नहीं पड़ेगा.

6. यदि सास सारे खर्च एक जगह कर रही हो

कई परिवारों में घर का खर्च एक जगह किया जाता है. यदि आप के घर में भी जेठ, जेठानी, देवर, ननद आदि साथ में रह रहे हैं और सम्मिलित परिवार की तरह पूरा खर्च एक ही जगह हो रहा है तो स्वभाविक है कि घर के प्रत्येक कमाऊ सदस्य को अपनी हिस्सेदारी देनी होगी.

सवाल यह उठता है कि कितना दिया जाए? क्या पूरी कमाई दे दी जाए या एक हिस्सा दिया जाए? देखा जाए तो इस तरह की परिस्थिति में पूरी कमाई देना कतई उचित नहीं होगा. आप को अपने लिए भी कुछ रुपए रकम बचा कर रखना चाहिए. वैसे भी घर के प्रत्येक सदस्य की आय अलगअलग होगी. कोई 70 हजार कमा रहा होगा तो कोई 20 हजार, किसी की नईनई नौकरी होगी तो किसी ने बिजनेस संभाला होगा. इसलिए हर सब सदस्य बराबर रकम नहीं दे सकता.

बेहतर होगा कि आप सब इनकम का एक निश्चित हिस्सा जैसे 50% सास के हाथों में रखें. इस से किसी भी सदस्य के मन में असंतुष्टि पैदा नहीं होगी और आप भी निश्चिंत रह सकेंगी.

7. यदि मकान सासससुर का है

जिस घर में आप रह रही हैं यदि वह सासससुर का है और सास बेटेबहू से पैसे मांगती है तो आप को उन्हें पैसे देने चाहिए. कुछ और नहीं तो घर और बाकी सुखसुविधाओं के किराए के रूप में ही पैसे जरूर दें

8. यदि शादी में सास ने किया है काफी खर्च

अगर आप की शादी में सासससुर ने शानदार आयोजन रखा था और बहुत पैसे खर्च किए थे. लेनदेन, मेहमाननवाजी तथा उपहार वितरण आदि में कोई कसर नहीं छोड़ी थी. बहू और उस के घरवालों को काफी जेवर भी दिए थे तो ऐसे में बहू का भी फर्ज बनता है कि वह अपनी कमाई सास के हाथों में रख कर उन्हें अपनेपन का अहसास दिलाए.

9. ननद की शादी के लिए

यदि घर में जवान ननद है और उस की शादी के लिए रुपए जमा किए जा रहे हैं तो बेटेबहू का दायित्व है कि वे अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा दे कर अपने मातापिता को सहयोग करें.

10. जब पति शराबी हो*

कई बार पति शराबी या निकम्मा होता है और पत्नी के रुपयों पर अय्याशी करने का मौका ढूंढता है. वह पत्नी से रुपए छीन कर शराब में या गलत संगत में खर्च कर सकता है. ऐसी स्थिति में अपने रुपयों की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि आप ला कर उन्हें सास के हाथों पर रख दें.

कब अपनी कमाई सास के हाथों में न रखें

1. जब आपकी इच्छा न हो

अपनी इच्छा के विरुद्ध बहू अपनी कमाई सास के हाथों में रखेगी तो घर में अशांति पैदा होगी. बहू का दिमाग भी बौखलाया रहेगा और उधर सास बहू के व्यवहार को नोटिस कर दुखी रहेगी. ऐसी स्थिति में बेहतर है कि सास को रुपए न दिए जाएं.

2. जब ससुर जिंदा हो और घर में पैसों की कमी न हो

यदि ससुर जिंदा हैं और कमा रहे हैं या फिर सास और ससुर को पेंशन मिल रही है तो भी आप को अपनी कमाई अपने पास रखने का पूरा हक है. परिवार में देवर, जेठ आदि हैं और वे कमा रहे हैं तो भी आप को कमाई देने की जरूरत नहीं है.

3. जब सास टेंशन करती हो

यदि आप अपनी पूरी कमाई सास के हाथों में दे रही हैं इस के बावजूद सास आप को बुराभला कहने से नहीं चूकती और दफ्तर के साथसाथ घर के भी सारे काम कराती हैं, आप कुछ खरीदना चाहें तो रुपए देने से आनाकानी करती हैं तो ऐसी स्थिति में सास के आगे अपने हक के लिए लड़ना लाजिमी है. ऐसी सास के हाथ में रुपए रख कर अपना सम्मान खोने की कोई जरूरत नहीं है बल्कि अपनी मर्जी से खुद पर रुपए खर्च करने का आनंद लें और दिमाग को टेंशनफ्री रखें.

4. जब सास बहुत खर्चीली हो

यदि आप की सास बहुत खर्चीली हैं और आप जब भी अपनी कमाई ला कर सास के हाथों में रखती हैं तो वे उन रुपयों को दोचार दिनों के अंदर ही बेमतलब के खर्चों में उड़ा देती हैं या फिर सारे रुपए मेहमाननवाजी और अपनी बेटियों के परिवार और बहनों पर खर्च कर देती हैं तो आप को संभल जाना चाहिए. सास की खुशी के लिए अपनी मेहनत की कमाई यूं बर्बाद होने देने के बजाय उन्हें अपने पास रखिए और सही जगह निवेश कीजिए.

5. जब सास माता की चौकी कराए

जब सासससुर घर में तरहतरह के धार्मिक अनुष्ठान जैसे माता की चौकी वगैरह कराएं और पुजारियों की जेबें गर्म करते रहें या अंधविश्वास और पाखंडों के चक्कर में रूपए बर्बाद करते रहें तो एक पढ़ीलिखी बहू सास की ऐसी गतिविधियों का हिस्सा बनने या आर्थिक सहयोग करने से इंकार कर सकती है. ऐसा कर के वह सास को सही सोच रखने को प्रेरित कर सकती है.

बेहतर है कि उपहार दें

इस सन्दर्भ में सोशल वर्कर अनुजा कपूर कहती हैं कि जरूरी नहीं आप पूरी कमाई सास को दें. आप उपहार ला कर सास पर रुपए खर्च कर कर सकती हैं. इस से उन का मन भी खुश हो जाएगा और आप के पास भी कुछ रूपए बच जाएंगे. सास का बर्थडे है तो उन्हें तोहफे ला कर दें, उन्हें बाहर ले जाएं, खाना खिलाएं, शॉपिंग कराएं, वह जो भी खरीदना चाहें वे चीजें खरीद कर दें. त्यौहारों के नाम पर घर की साजसजावट और सब के कपड़ों पर रूपए खर्च कर दें.

पैसों के लेनदेन से घरों में तनाव पैदा होते हैं पर तोहफों से प्यार बढ़ता है, रिश्ते सँभलते हैं और सासबहू के बीच बॉन्डिंग मजबूत होती है. याद रखें रुपयों से सास में डोमिनेंस की भावना बढ़ सकती है जब कि बहू के मन में भी असंतुष्टि की भावना उत्पन्न होने लगती है. बहू को लगता है कि मैं कमा क्यों रही हूं जब सारे रुपए सास को ही देने हैं.

इसलिए बेहतर है कि जरूरत के समय सास पर या परिवार पर रूपए जरूर खर्च करें पर हर महीने पूरी रकम सास के हाथों में रखने की मजबूरी न अपनाएं.

फिर वही शून्य: क्या शादी के बाद पहले प्यार को भुला पाई सौम्या

घुटनों से जुड़ी बीमारी का इलाज बताएं?

सवाल

मैं 48 साल की गृहिणी और जोड़ों के दर्द से पीडि़त हूं. मेरे घुटनों में करीब 13 सालों से दर्द है. डाक्टरों के पास जाने पर पता चला कि मेरे घुटनों की हालत बहुत बिगड़ चुकी है और इन्हें बदलने की जरूरत है. औपरेशन से पहले मैं अपने घुटनों को आराम देने के लिए क्या कर सकती हूं?

जवाब-

घुटनों को बदलवाने की सर्जरी से पहले आप को अपने बढ़े वजन को कम करना चाहिए और घुटनों के इर्दगिर्द की उन मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए व्यायाम करना चाहिए, जो चलनेफिरने में आप के घुटनों को मदद करती हैं. सर्जरी के बाद फिजियोथेरैपिस्ट की देखरेख में की जाने वाली फिजिकल थेरैपी दर्द को कम करने में काफी प्रभावशाली हो सकती है. फिजियोथेरैपी में मांसपेशियों को मजबूत करना, दोनों घुटनों की चलनेफिरने के बाद घर पर नियमित व्यायाम करना जरूरी है.

सवाल-

मेरे घुटनों में बहुत ज्यादा दर्द होता है. सर्दियों में यह और बढ़ जाता है. क्या सर्जरी ही दर्द से मुक्ति का एकमात्र इलाज है?

जवाब

सर्दियों में जोड़ों में दर्द होने की बहुत ज्यादा संभावना होती है. बैरोमीट्रिक दबाव में बदलाव से घुटनों में सूजन और बहुत तेज दर्द हो सकता है. चूंकि घुटने ही शरीर का पूरा भार वाहन करते हैं, इसलिए अपने वजन पर निगरानी रखनी बहुत जरूरी है. अगर आप में घुटनों के आर्थ्राइटिस की पहचान हुई है तो इस का मतलब यह नहीं है कि आप को अभी घुटने बदलवाने की आवश्यकता है.

अगर आप को बारबार घुटनों में दर्द होता है तो डाक्टर से सलाह लेनी चाहिए. आप की स्थिति की गंभीरता के आधार पर डाक्टर आप के इलाज के तरीके पर फैसला कर सकता है. आमतौर पर शुरुआत में मरीज को अपने लाइफस्टाइल में बदलाव लाने, उचित आहार लेने, वजन कम करने और नियमित व्यायाम की सलाह दी जाती है. सर्जरी की सलाह मरीज को तभी दी जाती है, जब दर्द कम करने की किसी भी तकनीक से मरीज को कोई आराम न मिले.

सवाल

जब से मेरा वजन बढ़ा है तब से घुटनों में दर्द बहुत बढ़ गया है. क्या वजन बढ़ने के कारण घुटनों में शरीर का वजन सहन करने की क्षमता प्रभावित होती है?

जवाब

शरीर का वजन बढ़ना ही जोड़ों, खासकर घुटनों पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है. शरीर का बढ़ा 1 किलोग्राम वजन भी घुटनों पर 4 गुना ज्यादा दबाव डाल सकता है. इसलिए वजन को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है, क्योंकि इस से आप के घुटनों पर पड़ने वाला ज्यादा दबाव कम हो सकता है. शरीर का वजन कम रखने से आर्थ्राइटिस से जुड़ा दर्द कम हो सकता है और यह शुरुआती चरण से बाद की स्टेज में जाने से रुक सकता है.

सवाल-

मैं 21 साल का बैडमिंटन खिलाड़ी हूं. पिछले साल मुझे बैडमिंटन कोर्ट में चोट लग गई थी. उसी के बाद से मेरे बाएं घुटने में पहले जैसी ताकत नहीं रह गई है. सर्दियों में यह बहुत ज्यादा दर्द करता है. क्या टीकेआर मेरे लिए विश्वसनीय समाधान होगा?

जवाब-

घुटनों के दर्द ने नौजवानों, युवाओं और बुजुर्गों सभी को समान रूप से जकड़ रखा है. आप के  मामले में घुटनों को बदलने की सर्जरी का फैसला लेने से पहले डाक्टर से मिल कर सही जांच कराना ठीक होगा. अगर आप का डाक्टर आप को टीकेआर की सलाह देता है, तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है. यह बहुत ही सुरक्षित प्रक्रिया है.

अब इस क्षेत्र में उपलब्ध नई तकनीकों से एक इंप्लांट की मदद से क्षतिग्रस्त घुटनों को बदला जा सकता है, जिस से कुछ ही हफ्तों में आप के घुटनों में पहले जैसी ताकत वापस आ जाएगी. इस के अतिरिक्त इस से अपना लाइफस्टाइल भी सुधारने में मदद मिलेगी. इंप्लांट कराने से तापमान का पारा गिरने या सर्दियों में आप के घुटनों को बेहतर तरीके से कामकाज करने में मदद मिलेगी.

सवाल-

क्या आप बदलते मौसम में घुटनों को नुकसान से बचाने के लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव का सुझाव दे सकते हैं? मैं एक 45 वर्षीय मरीज हूं. जो लंबे समय से घुटनों के पुराने दर्द से पीडि़त हूं?

जवाब-

तलेभुने पदार्थ न खाएं. धूम्रपान छोड़ दें. विटामिन डी सप्लिमैंट्स लें. घुटनों के इर्दगिर्द की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए टहलने, सैर करने के साथसाथ हलकेफुलके व्यायाम भी करने की जरूरत होगी. हलकेफुलके शारीरिक व्यायाम से घुटनों पर कम दबाव पड़ेगा. अगर चलने से आप के घुटनों में तकलीफ होती है तो आप पानी में रह कर किए जाने वाले व्यायाम जैसे वाटर ऐरोबिक्स, डीप वाटर रनिंग (गहरे पानी में जौगिंग) करने पर विचार कर सकते हैं. आप ऐक्सरसाइज करने वाली साइकिल का भी प्रयोग कर सकते हैं.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  गृहशोभा-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

गांठ खुल गई- भाग 3 : क्या कभी जुड़ पाया गौतम का टूटा दिल

3 दिनों बाद इषिता आ भी गई. गौतम के घर गई तो वह गहरी सोच में था.

उस ने आवाज दी. पर उस की तंद्रा भंग नहीं हुई. तब उसे झंझोड़ा और कहा, ‘‘किस सोच में डूबे हुए हो?’’

‘‘श्रेया की यादों से अपनेआप को मुक्त नहीं कर पा रहा हूं,’’ गौतम ने सच बता दिया.

इषिता गुस्से से उफन उठी, ‘‘इतना सबकुछ होने के बाद भी उसे याद करते हो? सचमुच तुम पागल हो गए हो?’’

‘‘तुम ने कभी किसी को प्यार नहीं किया है इषिता, मेरा दर्द कैसे समझ सकती हो.’’

‘‘कुछ घाव किसी को दिखते नहीं. इस का मतलब यह नहीं कि उस शख्स ने चोट नहीं खाई होगी,’’ इषिता ने कहा.

गौतम ने इषिता को देखा तो पाया कि उस की आंखें नम थीं. उस ने कहा, ‘‘तुम्हारी आंखों में आंसू हैं. इस का मतलब यह है कि तुम ने भी प्यार में धोखा खाया है?’’

‘‘इसे तुम धोखा नहीं कह सकते. जिसे मैं प्यार करती थी उसे पता नहीं था.’’

‘‘यानी वन साइड लव था?’’

‘‘कुछ ऐसा ही समझो.’’

‘‘लड़का कौन था. निश्चय ही वह कालेज का रहा होगा?’’

इषिता उसे उलझन में नहीं रखना चाहती थी, रहस्य पर से परदा हटाते हुए कह दिया, ‘‘वह कोई और नहीं, तुम हो.’’

गौतम ने चौंक कर उसे देखा तो वह बोली, ‘‘कालेज में पहली बार जिस दिन तुम से मिली थी उसी दिन तुम मेरे दिल में घर कर गए थे. दिल का हाल बताती, उस से पहले पता चला कि तुम श्रेया के दीवाने हो. फिर चुप रह जाने के सिवा मेरे पास रास्ता नहीं था.

‘‘जानती थी कि श्रेया अच्छी लड़की नहीं है. तुम से दिल भर जाएगा, तो झट से किसी दूसरे का दामन थाम लेगी. आगाह करती, तो तुम्हें लगता कि अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए उस पर इलजाम लगा रही हूं. इसलिए तुम से दोस्ती कर ली पर दिल का हाल कभी नहीं बताया.

‘‘श्रेया के साथ तुम्हारा सबकुछ खत्म हो गया, तो सोचा कि मौका देख कर अपनी मोहब्बत का इजहार करूंगी और तुम से शादी कर लूंगी. पर देख रही हूं कि आज भी तुम्हारे दिल में वह ही है.’’

दोनों के बीच कुछ देर तक खामोशी पसर गई. गौतम ने ही थोड़ी देर बार खामोशी दूर की, ‘‘उसे दिल से निकाल नहीं पा रहा हूं, इसीलिए कभी शादी न करने का फैसला किया है.’’

‘‘तुम्हें पाने के लिए मैं ने जो तपस्या की है उस का फल मुझे नहीं दोगे?’’ इषिता का स्वर वेदना से कांपने लगा था. आंखें भी डबडबा आई थीं.

‘‘मुझे माफ कर दो इषिता. तुम बहुत अच्छी लड़की हो. तुम से विवाह करता तो मेरा जीवन सफल हो जाता. पर मैं दिल के हाथों मजबूर हूं. किसी से भी शादी नहीं

कर सकता.’’

इषिता चली गई. उस की आंखों में उमड़ा वेदना का समंदर देख कर भी वह उसे रोक नहीं पाया. वह उसे कैसे समझाता कि श्रेया ने उस के साथ जो कुछ भी किया है, उस से समस्त औरत जाति से उसे नफरत हो गई है.

3 दिन बीत गए. इषिता ने न फोन किया न आई. गौतम सोचने लगा, ‘कहीं नाराज हो कर उस ने दोस्ती तोड़ने का मन तो नहीं बना लिया है?’

उसे फोन करने को सोच ही रहा था कि अचानक उस के मोबाइल की घंटी बज उठी. उस समय शाम के 6 बज रहे थे. फोन किसी अनजान का था.

उस ने ‘‘हैलो’’ कहा तो उधर से किसी ने कहा, ‘‘इषिता का पापा बोल रहा हूं. तुम से मिलना चाहता हूं. क्या हमारी मुलाकात हो सकती है?’’

उस ने झट से कहा, ‘‘क्यों नहीं अंकल. कहिए, कहां आ जाऊं?’’

‘‘तुम्हें आने की जरूरत नहीं है बेटे. 7 बजे तक मैं ही तुम्हारे घर आ जाता हूं.’’

इषिता उसे 3-4 बार अपने घर ले गई थी. वह उस के मातापिता से मिल चुका था.

उस के पिता रेलवे में उच्च पद पर थे. बहुत सुलझे हुए इंसान थे. वह उन की इकलौती संतान थी. मां कालेज में अध्यापिका थीं. बहुत समझदार थीं. कभी भी उस के और इषिता के रिश्ते पर शक नहीं किया था.

इषिता के पापा समय से पहले ही आ गए. गौतम के साथसाथ उस की मां और बहन ने भी उन का भरपूर स्वागत किया.

उन्होंने मुद्दे पर आने में बहुत देर नहीं लगाई. पर उन चंद लमहों में ही अपने शालीन व्यक्तित्व की खुशबू से पूरे घर को महका दिया था. इतनी आत्मीयता उड़ेल दी थी वातावरण में कि उसे लगने लगा कि उन से जनमजनम का रिश्ता है.

कुछ देर बाद इषिता के पापा को गौतम के साथ कमरे में छोड़ कर मां और बहन चली गईं तो उन्होंने कहा, ‘‘बेटा, इषिता तुम्हें प्यार करती है और शादी करना चाहती है. उस ने श्रेया के बारे में भी सबकुछ बता दिया है.

‘‘श्रेया से तुम्हारा रिश्ता टूट चुका है तो इषिता से शादी क्यों नहीं करना चाहते? वैसे तो बिना कारण भी कोई किसी को नापसंद कर सकता है. यदि तुम्हारे पास इषिता से विवाह न करने का कारण है तो बताओ. मिलबैठ कर कारण को दूर करने की कोशिश करें.’’

उसे लगा जैसे अचानक उस के मन में कोई बड़ी सी शिला पिघलने लगी है. उस ने मन की बात बता देना ही उचित समझा.

‘‘इषिता में कोई कमी नहीं है अंकल. उस से जो भी शादी करेगा उस का जीवन सार्थक हो जाएगा. कमी मुझ में है. श्रेया से धोखा खाने के बाद लड़कियों से मेरा विश्वास उठ गया है.

‘‘लगता है कि जिस से भी शादी करूंगा वह भी मेरे साथ बेवफाई करेगी. ऐसा भी लगता है कि श्रेया को कभी भूल नहीं पाऊंगा और पत्नी को प्यार नहीं कर पाऊंगा,’’ गौतम ने दिल की बात रखते हुए बताया.

‘‘इतनी सी बात के लिए परेशान हो? तुम मेरी परवरिश पर विश्वास रखो बेटा. तुम्हारी पत्नी बन कर इषिता तुम्हें इतना प्यार करेगी कि तुम्हारे मन में लड़कियों के प्रति जो गांठ पड़ गई है वह स्वयं खुल जाएगी.’’

वे बिना रुके कहते रहे, ‘‘प्यार या शादी के रिश्ते में मिलने वाली बेवफाई से हर इंसान दुखी होता है, पर यह दुख इतना बड़ा भी नहीं है कि जिंदगी एकदम से थम जाए.

‘‘किसी एक औरतमर्द या लड़कालड़की से धोखा खाने के बाद दुनिया के तमाम औरतमर्द या लड़केलड़की को एकजैसा समझना सही नहीं है.

‘‘यह जीवन का सब से बड़ा सच है कि कोई भी रिश्ता जिंदगी से बड़ा नहीं होता. यह भी सच है कि हर प्रेम संबंध का अंजाम शादी नहीं होता.

‘‘जीवन में हर किसी को अपना रास्ता चुनने का अधिकार है. यह अलग बात है कि कोई सही रास्ता चुनता है कोई गलत.

‘‘श्रेया के मन में गलत विचार भरे पड़े थे. इसलिए चंद कदम तुम्हारे साथ चल कर अपना रास्ता बदल लिया. अब तुम भी उसे भूल कर जीने की सही राह पर आ जाओ. गिरते सब हैं पर जो उठ कर तुरंत अपनेआप को संभाल लेता है, सही माने में वही साहसी है.’’

थोड़ी देर बाद इषिता के पापा चले गए. गौतम ने मंत्रमुग्ध हो कर उन की बातें सुनी थीं.

श्रेया के कारण लड़कियों के प्रति मन में जो गांठ पड़ गई थी वह खुल गई.

अब देर करना उस ने मुनासिब नहीं समझा. इषिता के पापा को फोन किया, ‘‘अंकल, कल अपने घर वालों के साथ इषिता का हाथ मांगने आप के घर आना चाहता हूं.’’

उधर से इषिता के पापा ने कहा, ‘‘वैलकम बेटे. देर आए दुरुस्त आए. अब तुम्हें आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता. तुम ने अपने भीतर के डर पर विजय जो प्राप्त कर ली है.’’

फैस्टिव फिटनैस टिप्स

उत्सवी माहौल होता ही ऐसा है कि लोग दिनरात मौजमस्ती के रंग में रंगे रहते हैं. ऐसे में वक्तबेवक्त सोना और खानापीना तो आम बात है. हां, इन वजहों से आप की सेहत खराब न हो, इस के लिए यहां बताई गई बातों पर गौर जरूर करें.

खानपान

फैस्टिव सीजन में मिठाई और पार्टी से पूरी तरह परहेज करना मुमकिन नहीं होता. फिर भी अपने डेली रूटीन में कुछ बातों का ध्यान रखने से आप काफी हद तक त्योहारों के साइड इफैक्ट्स से खुद को महफूज रख सकती हैं.

– हमारे शरीर में पानी का बहुत ज्यादा महत्त्व है. अत: सुबह उठ कर 2 गिलास कुनकुना पानी पीने से शरीर के अच्छे बैक्टीरिया शरीर में रहते हैं और पानी शरीर को नई ऊर्जा देता है. इस के कुछ देर बाद अजवाइन को उबाल कर उस के पानी को पीने से आप काफी हद तक फैट को कंट्रोल कर सकती हैं. दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीना न भूलें.

– सुबह खाली पेट 1 चम्मच अलसी के बीज भी कोेलैस्ट्रौल कम करने में सहायता कर सकते हैं. नमकरहित खाना या खाने में कम नमक का प्रयोग करने से भी आप अपने वजन को कंट्रोल कर सकती हैं, साथ ही बैली फैट भी नहीं बढ़ता. ब्लडप्रैशर भी ठीक रहता है. त्योहारों के दौरान रात के खाने से ले कर सुबह के नाश्ते तक हफ्ते में 2 दिन नमक का प्रयोग करें.

– खाना खाने से आधा घंटे पहले और 1 घंटा बाद पानी न पीएं. पूरे दिन में न ज्यादा ठंडा न ज्यादा गरम पानी पीएं. ऐसा करने से पाचनशक्ति बढ़ाने में मदद मिलेगी.

– घर में बनने वाली मिठाई में चीनी की जगह गुड़ का प्रयोग करें. दुकान से भी बेसन से बनी मिठाई ही खरीदें. काफी शोधों से पता चला है कि चीनी, गेहूं और दूध शरीर में जलन पैदा करते हैं, जिस से शरीर में ऊर्जा की कमी होने लगती है.

– नीबू पानी या विटामिन सी सप्लिमैंट लेने से जलन से बचा जा सकता है.

अच्छी नींद

फैस्टिव सीजन की भागदौड़ के चलते महिलाएं भरपूर नींद नहीं ले पातीं. जो बहुत नुकसानदायक सिद्ध होता है. इसलिए कम से कम 6-7 घंटे की नींद जरूर लें, क्योंकि सोने के दौरान शरीर से निकलने वाला कैमिकल मैलाटोनिन शरीर को ऊर्जावान बनाता है.

वार्मअप ऐक्सरसाइज

चाहे आप गृहिणी हों या कामकाजी सभी को त्योहारों के कामकाज से निबटने के लिए ऐनर्जी की जरूरत होती है. अत: इस के लिए सुबह की हुई वार्मअप ऐक्सरसाइज पूरे दिन के लिए ऊर्जा से भर देती है. ये ऐक्सरसाइजेज बहुत ही सरल और इफैक्टिव हैं.

– घुटनों को बारीबारी से 10-10 बार छाती की तरफ ले जाना.

– एक ही जगह 2 मिनट खड़े हो कर जौगिंग करना.

– 4-4 बार फौरवर्ड बेंडिंग ऐंड साइड बेंडिंग करना.

– 5-5 बार धीरेधीरे दोनों ओर गरदन घुमाना.

शारीरिक और मानसिक तनाव को दूर करने के लिए कानों को कंधों से छुआना, कंधों को घुमाना. नैक स्ट्रैचिंग को भी आजमाया जा सकता है.

पोस्चर

– खड़े हो घुटनों को हलका सा मोड़ कर रखें.

– सोते समय 1 तकिया गरदन के नीचे और 1 तकिया पैरों के बीच में करवट सोते हुए और सीधे सोते हुए तकिया घुटनों के नीचे लगाएं.

– गाड़ी में घूमते समय अगर गाड़ी की सीट नीची है तो एक कुशन कूल्हों के नीचे लगा कर बैठें.

– सीधा कमर को न मोड़ कर घुटनों को मोड़ कर नीचे झुक कर कोई चीज उठाएं.

– एक पैर को आगे और एक को पीछे रख कर ऊपर से कुछ उतारें.

– खाना पकाते समय कंधों को पीछे रखें और गरदन को हर 2-3 मिनट में सीधा करती रहें.

– डा. एकता अग्निहोत्री

जैसे को तैसा: भाग 2- भावना लड़को को अपने जाल में क्यों फंसाती थी

छाया अपने कमरे में यह सोचसोच कर करवटें बदल रही थी कि आखिर अमन को हो क्या गया है? क्यों वह इस तरह से सब से व्यवहार करने लगा है? रागिनी भी पूछना चाहती थी उस से कि कोई समस्या है तो बताएं, साथ मिल कर सुल   झा लेंगे. लेकिन अमन कैसे बताए किसी को कि वह एक बहुत बड़ी मुसीबत में फंस चुका है जिस से वह चाह कर भी बाहर नहीं निकल पा रहा है.

‘काश, काश मैं समय को पलट पाता. काश, मैं उस भावना का असली रूप देख पाता, तो आज मेरी जिंदगी कुछ और ही होती.’

अमन अपने मन में सोच ही रहा था कि उस का फोन घनघना उठा. भावना का ही फोन था. ‘नहीं, मैं इस का फोन नहीं उठाऊंगा’ फोन को घूरते हुए अमन बड़बड़ाया. लेकिन अंजाम के डर से उस ने फोन उठा लिया.

‘‘इतनी देर लगती है तुम्हें फोन उठाने में?’’ भावना गुर्राई.

‘‘नहीं, वह मैं सो गया था इसलिए… फोन की आवाज सुन नहीं पाया, सौरी. बोलो न क्या बात है?’’

‘‘बातवात कुछ नहीं, वह कल मु   झे 2 लाख रुपयों की सख्त जरूरत है, तो तुम मेरे घर आ कर दे जाओगे या मैं ही आ जाऊं पैसे लेने?’’ भावना के लफ्ज काफी सख्त थे.

‘‘द… द… दो लाख… पर इतनी जल्दी 2 लाख रुपए कहां से आएंगे?’’

‘‘वह तुम जानो… मु   झे तो बस 2 लाख रुपए चाहिए, वह भी कल के कल,’’ कह कर भावना ने फोन रख दिया और अमन अपना सिर पकड़ कर बैठ गया. मन तो किया उस का अपनी मां की गोद में सिर रख कर खूब रोए और कहे कि अब उसे नहीं जीना है.मर जाना चाहता है वह. मगर छाया हाई बीपी की मरीज है. इसलिए वह अपने आंसुओं को खुद ही पीता रहा घंटों तक. रागिनी से भी वह कुछ नहीं बता सकता था क्योंकि हो सकता है यह सब जानने के बाद वह उस से शादी करने से मना कर दे और वह रागिनी को किसी भी हाल में खोना नहीं चाहता था. अपने ही गम में डूबे कब अमन की आंखें लग गईं और कब सुबह हुई उसे पाता ही नहीं चला. घड़ी में देखा तो सुबह के 7 बज रहे थे.

रात में ठीक से नींद न आने के कारण उस का सिर दर्द से फटा जा रहा था. इसलिए अपनी आंखें बंद कर वह सोने की कोशिश करने ही लगा कि उस का फोन घनघना उठा.उसे लगा भावना का ही फोन है. इसलिए    झल्ला कर बोला, ‘‘आखिर तुम चाहती क्या हो? बोलो न? क्यों तुम मु   झे चैन से जीने देना नहीं चाहती? एक काम करो, बंदूक लाओ और मार दो मु   झे. एक बार में सारा किस्सा ही खत्म हो जाएगा.’’

रागिनी चौंकी क्योंकि फोन पर वही थी. लेकिन उस ने सिर्फ इतना ही कहा, ‘‘अमन, मैं रागिनी बोल रही हूं. ’’

‘‘र… रागिनी… तुम, मु   झे लगा कि मेरे बौस का फोन है. बताओ, इतनी सुबहसुबह क्यों फोन किया? तुम ठीक हो?’’

‘‘हां, मैं तो ठीक हूं. वह मैं ने इसलिए फोन किया कि भैयाभाभी चाहते हैं अगर हमारी शादी अगले महीने के फर्स्ट वीक में हो जाती तो सही होता क्योंकि फिर इतनी दूर अमेरिका से तुरंत आना उन के लिए पौसिबल नहीं हो पाएगा न.’’

‘‘हां, वह कल हमारी बात नहीं हो पाई इस बारे में. सोच रहा हूं औफिस से सीधे तुम्हारे घर ही आ जाऊंगा. भैया तो रहेंगे न?’’

‘‘हांहां, भैया घर पर ही रहेंगे. तुम आ जाओ,’’ रागिनी पूछना चाहती थी कि कोई परेशानी तो नहीं है उसे लेकिन पूछ नहीं पाई.

‘‘ओके, फिर हम शाम को मिलते हैं,’’ अमन फोन रख लेटा ही था कि देखा छाया चाय की ट्रे लिए खड़ी है. वह हड़बड़ा कर उठ खड़ा हुआ और हाथ से चाय की ट्रे लेने की कोशिश करने ही लगा. मगर छाया खुद ही चाय की ट्रे टेबल पर रख पानी का खाली जग ले कर वहां से चलती बनी. छाया के चेहरे से ही लगा रहा था कि कल की बात को ले कर अभी भी वह उस से नाराज है. नाश्ते की टेबल पर भी उस ने अमन से कोई बात नहीं की और न ही अमन ने क्योंकि उन के सवालों के क्या जवाब देता वह इसलिए खापी कर सीधे औफिस के लिए निकल गया.

आज शाम औफिस से लौटते हुए अमन को रागिनी के घर जाना था, उस के भैयाभाभी से मिलने. लेकिन वह तो खुद ही रात के 12 बजे घर लौटा, फिर क्या जाता उन से मिलने. रास्ते में जब उस ने अपना फोन चैक किया तो रागिनी और छाया की कई मिस्डकौल्स थीं. वापस जब उस ने उन्हें कौल किया तो किसी ने उस का फोन नहीं उठाया. घर आने पर छाया ने उस से कोई बात भी नहीं की और न ही कुछ पूछाताछ की. खाना डाइनिंग टेबल पर रख सोने चली गई. अमन को भूख तो लगी थी, पर कुछ खाया नहीं. केवल एक गिलास पानी पी कर वह भी सोने चला गया.

‘‘अब गुस्से वाली बात तो है ही न. वहां रागिनी और उस के भैयाभाभी इस का इंतजार कर रहे थे और इन जनाब को कुछ याद ही नहीं रहा.’’

सुबह नाश्ते के टेबल पर छाया ने तल्खी से कहा और फिर जूठे प्लेट्स उठा कर वहां से चलती बनी. अमन के जवाब का इंतजार भी नहीं किया. लेकिन वह जवाब भी क्या देता? यही कि उसे सब याद था, पर जा नहीं पाया रागिनी के भैयाभाभी से मिलने क्योंकि वह उस भावना के साथ था. हां, उसी भावना के साथ जिस का वह मुंह भी नहीं देखना चाहता. लेकिन मजबूर है कि उस की उंगलियों पर नाचने को विवश है.

दूसरे दिन शाम को अमन जब औफिस से घर आया तो काफी थका हुआ महसूस कर रहा था. छाया घर पर नहीं थी इसलिए उस ने खुद ही अपने लिए चाय बनाई. रात के खाने की टेबल पर भी वह चुप ही रहा. बिस्तर पर जब सोने गया, तो फिर उसी बेचैनी ने उसे आ घेरा क्योंकि उसे तो हर पल इसी बात का डर लगा रहता था कि पता नहीं कब भावना का फोन आ जाए और पता नहीं क्या कह दे. इंसान की आंखें नींद से कितनी भी बो ि  झल क्यों न हों, लेकिन अगर सिर पर चिंता मंडरा रही हो तो नींद हवा हो जाती है. अमन के साथ भी यही हो रहा था. भावना नाम के चक्रव्यूह में वह ऐसे फंस चुका था कि उस की रातों की नींद और दिन का चैन गायब हो चुका था. औफिस में भी उस से ठीक से काम नहीं हो पा रहा था.

मन करता अमन का कि चीखचीख कर दुनिया को भावना की सारी सचाई बता दे. लेकिन क्या इस आग में वह नहीं    झुलसेगा क्योंकि सारी तसवीरें और वीडियो तो यही कह रहे हैं कि अमन ने भावना का बलात्कार किया है. फिर क्या रागिनी के भैया कभी अपनी बहन की शादी अमन से होने देंगे और छाया विश्वास करेगी कि अमन सही बोल रहा है और उस ने भावना के साथ कुछ गलत नहीं किया है? नहींनहीं, उस का चुप रहना ही बेहतर है.

रात के सन्नाटे में घड़ी की टिकटिक उस के सिर पर हथौड़े की चोट की तरह बरस रही थी. मन तो कर रहा था उस का कि घड़ी की बैटरी निकाल कर फेंक दे ताकि वह बजना बंद हो जाए. सोचता, काश समय पीछे जा पाता, तो वह सबकुछ ठीक कर देता. लेकिन यह कहां संभव था. समय कभी पीछे गया है किसी का? हां, उस समय में किए गए अच्छेबुरे कर्म जरूर इंसान के साथसाथ चलते हैं. आज भी उस मनहूस दिन को याद कर अमन तड़प उठता है. सोचता है, काश वह न हुआ होता, तो आज उस की जिंदगी कुछ और ही होती.

आज से 4 साल पहले भावना से उस की पहली मुलाकात अपने एक दोस्त की बर्थडे पार्टी में हुई थी. शौर्ट ड्रैस में इतनी खूबसूरत लड़की को देख कर मनचला अमन का मन मचल उठा था. लेकिन जब अचानक से वह पार्टी के बीच से ही गायब हो गई, तो उस का मन उदास हो गया. पूछने पर अमन के दोस्त ने बताया कि वह लड़की यानी भावना उस के ही औफिस में काम करती है. अभी पिछले महीने ही इंदौर से ट्रांसफर हो कर वह दिल्ली आई है.

उस के बारे में अमन और भी बहुत कुछ जानना चाहता था, मगर दोस्त से पूछते नहीं बना. घर आ कर भी वह उस के ही खयालों में खो गया. सुबह जब नींद खुली तो भावना का ही मुसकराता चेहरा नजर आया उसे. लेकिन न तो उस के पास भावना का कोई फोन नंबर था और न ही उस के घर का अतापता ही कि वह उस से कौंटैक्ट कर पाता.

उस दिन संडे की छुट्टी से ऊब कर जब वह मौल पहुंचा तो भावना को वहां देख कर

उस की आंखें चमक उठीं. बिना कुछ सोचेसम   झे लपक कर वह उस के करीब आ गया और बोला,  ‘‘हाय, आप वही हैं न… आई मीन… मेरे दोस्त संतोष के बर्थडे पार्टी में मिले थे हम. याद आया?’’

‘‘हां… याद आया. आप अ… मन…’’ भावना रुकरुक कर बोल रही थी क्योंकि ठीक से उसे उस का नाम याद नहीं आ रहा था.

‘‘हां, मैं अमन. अमन सिंह राठौर,’’ बड़ी गरमजोशी के साथ अमन ने अपना हाथ आगे बढ़ाया.

उस की बात पर भावना मुसकरा कर बोल पड़ी, ‘‘नाम ही काफी है. सरनेम बताने की जरूरत नहीं है.’’

उस की बात पर अमन बुरी तरह से    झेंप गया. बोला, ‘‘आई थिंक… यू आर राइट. और सरनेम में रखा ही क्या है. रखा तो नाम में है.’’

उस की बात पर भावना खिलखिला कर हंस पड़ी तो अमन भी हंसने लगा. उस दिन के बाद से दोनों अच्छे दोस्त बन गए. उन की रोज फोन पर बातें और मुलाकातें होने लगीं.

भेडि़या: भाग 2- मीना और सीमा की खूबसूरती पर किसकी नजर थी

अगले दिन चमेली जसोदा को 25 नंबर के आगे मिली. दोनों ने साथ में काम किया था.

बरामदे में शीला और सान्याल बैठी बियर पी रही थीं. चमेली दोनों के बीच होने वाली वार्त्तालाप को बड़े ध्यान से सुन रही थी.

शीला, ‘‘समाज के इस घिनौना नंगे सच को लोगों के सामने तो लाना ही होगा.’’

‘‘सो तो है. वह दिल्ली में हुए निर्भया कांड के बारे में पढ़ा?’’ सान्याल बोली.

‘‘हां, मैं ने तो टीवी पर सारा डिटेल में देखा है. सरेआम लोग दरिंदगी कर रहे हैं. सरकार कोई ऐक्शन क्यों नहीं लेती?’’

‘‘बेचारी लड़कियां… थैंकगौड… मेरी बेटियां तो आउट औफ इंडिया हैं,’’ शीला ने बियर का लंबा सिप खींचा.

सान्याल ने सिर घुमा कर शीला को ऐसे देखा जैसे बाकी दुनिया की लड़कियां तो कूड़ाकरकट हैं.

‘‘यू आर राइट शीला,’’ सान्याल को लगा कि अभी यह औरत 1 ग्लास और गटक सकती है. मुंह जुठारने को पूछ ही लिया, ‘‘वन मोर?’’

‘‘नो… नो, इनफ…’’

आखिरी घूंट हलक में उडे़ला और उठ गई, ‘‘ओके सान्याल, मैं चलूं? मिलती हूं सैटरडे को. पैसों का हिसाबकिताब पार्टी के बाद कर लेंगे.’’

शीला जा चुकी थी. सान्याल ने उसे सीढि़यां उतरते देख लिया था.

‘‘स्साली, इडियट. मुफ्ती की मिल जाती है न इसीलिए चिपक जाती है. पूरी बोतल खाली कर के ही हिलती है… यहां से,’’ सान्याल खुद से बातें कर रही थी. इस बीच 2-4 मोटीमोटी  अंगरेजी में गालियां और जड़ दीं शीला को.

चमेली का मन किया कह दे यहां तो सभी ऐसे हैं, मुंह पर कुछ पीछे कुछ. सोचा नहीं, कल को इन दोनों के घर में नौकरी करनी है. चुप रहना ही ठीक होगा.

काम खत्म कर के सड़क पर आई तो

कुछ लोगों को    झुंड में खड़ा देखा. सब काम वालियां थीं.

‘‘अरे क्या हुआ?’’

कुसुम कह रही थी, ‘‘कल रात को नेपाली गार्ड ने 26 नंबर कोठी के पीछे की लेन में भेडि़या देखा.’’

26 नंबर वाली बोली, ‘‘अरे, अरे यानी इसी सामने वाली कोठी के पीछे?’’

‘‘हां, बिलकुल,’’ सीमा ने ऐसे पक्का किया जैसे उस ने अपनी आंखों से देखा.

सब के चेहरे पर भय था जैसे भेडि़या सामने खड़ा हो. सभी के होंठों पर ताले लगे थे.

शायद कोई भी इस विषय पर बात करना नहीं चाहता था. कारण, यह पहली बार नहीं हुआ है. पहले भी जंगली सूअर, लकड़बग्घा और नील गाय जैसे जानवरों को कोठी वालों ने पिछली लेन में घूमते देखा है.

चमेली ने फोन निकाल कर समय देखा दोपहर के 2 बजे थे. जल्दीजल्दी कदम बढ़ाए. बेटियां स्कूल से आ चुकी होंगी. चलने लगी तो जसोदा ने रोका, ‘‘चमेली, आज मैडम के यहां पार्टी है. मेरी जगह तू काम कर ले.’’

‘‘पार्टी तो रात को होगी?’’

‘‘हां.’’

‘‘चल साथ में. रास्ते में सोच कर बताती हूं.’’

चमेली का गणित फिर से चालू हो गया… पार्टी… मतलब पूरे हजार रुपए यानी तिरपाल की जगह  ऐस्बैसटस शीट की छत पड़ सकती है. यह ठीक रहेगा.

झट से कह दिया, ‘‘हांहां ठीक है. तू फिक्र मत कर. ठीक 8 बजे शीला मैडम के यहां पहुंच जाऊंगी… सब संभाल लूंगी.’’

बेटियों की फिक्र ने उस के पैरों को गति दे दी थी. यों तो घर पर बसेसर है पर वह भी कई दफा दारू के अड्डे पर जा बैठता है. दारू की लत से चमेली बहुत आजिज है.

लड़कियां अभी तक लौटी न थीं. रास्ता अकेला है. चमेली को पता नहीं है कि 3 दिन पहले क्या हुआ था और आज भी.

मीना और सीमा तेजी से चलती हुई घर की ओर आ रही थीं. तभी सामने से एक हट्टोकट्टे  बदसूरत मुच्छड़ ने बिलकुल नजदीक से साइकिल से रास्ता काटा, दोनों पीछे हट गईं. सहम कर तेजी से घर को बढ़ गईं. दोबारा फिर दोनों को घूर कर गंदा सा फिकरा कसा और उन को छूता हुआ सामने जा खड़ा हुआ. वहीं से दोबारा कमैंट मारा, ‘‘हाय मैं सदके जावां.’’

दोनों बड़ी तेजी से आगे बढ़ने लगीं. डर से चेहरे सफेद थे. कुछ देर बाद देखा मुच्छड़ एक पेड़ के पीछे छिपा खड़ा था. इरादा नेक न था.

एक बार फिर साइकिल करीब ला कर वहशियाना हंसी के साथ बोला, ‘‘आ जाओ… दोनों को खुश कर दूंगा. साथ में पैसे भी दूंगा.’’

मीना और सीमा, सूखे पत्ते सी कांप गईं.

तभी पीछे से धीरू चाचा की आवाज सुनाई दी, ‘‘क्या हुआ बेटियो?’’

‘‘कुछ नहीं चाचा.’’

मीना ने कह तो दिया, किंतु उन्हें भी माजरा सम   झते देर न लगी, ‘‘डरो नहीं मैं साथ हूं. चलो मेरे साथ चलो, मैं भी घर ही जा रहा हूं.’’

बिना कुछ कहे, धीरू के साथ चल दीं. पेड़ के पास खड़े मुच्छड़ के लिए गंदी गाली निकली थी धीरू ने.

‘‘आज लेट हो गईं?’’ चमेली दोनों के चेहरों को देख हैरान थी. लपक कर करीब आई, ‘‘क्या हुआ?’’

दोनों बस्ते फेंक मां से जा चिपकीं. रुलाई रुक नहीं रही थी. बड़ी मुश्किल से कहा, ‘‘वह, वह…’’

‘‘अरे क्या वह… वह… तुम ने भी भेडि़या देख लिया?

‘‘हां… हां,’’ सच बोलने की हिम्मत न थी.

जो भी हो मुच्छड़ भेडि़ए से कम तो नहीं है. दोनों ने चेहरे घुमा कर रजामंदी में सिर हिलाया.

‘‘बस्ती वाले भी आज यही बता रहे थे,

तुम सहेलियों के साथ आया करो. चलो खाना

खा लों.’’

‘‘नहीं, हमें भूख नहीं है.’’

‘‘अरे, थोड़ा सा तो खा लो,’’ मां ने बड़े प्यार से कहा.

नहीं खाया. दोनों चुपचाप खाट पर लेट कर सोने का बहाना करने लगीं.

‘‘देखो मैं पड़ोस वाली कमलो के घर जा रही हूं. दरवाजा बंद कर लो. बापू भी आता ही होगा. आए तो खाना दे देना.’’

मां के जाते ही दोनों उठ कर बैठ गईं.

‘‘सुन मीना कल हम स्कूल नहीं जाएंगे.’’

‘‘मैं भी यही सोच रही हूं. यह रावण फिर पीछे आएगा.’’

‘‘तू ठीक कहती है.’’

‘‘लेकिन कब तक छुट्टी करेंगे? हम किसी को बता भी नहीं सकते. जिसे भी बताएंगे. हमें ही गलत सम   झेगा.’’

‘‘तो फिर भैया को कहूं?’’

‘‘न… न… यह गजब न करना. फिर तो खुलेआम दुश्मनी हो जाएगी. क्या, भैया उसे छोड़ेगा? मुच्छड़ की हड्डीपसली का चूरा बना कर नदी में बहा देगा. बड़ी बदनामी होगी.’’

‘‘फिर हम क्या करें?’’

‘‘छोड़, देखा जाएगा.’’

अगले दिन दोनों घर से बाहर न निकलीं. दरवाजे की मोटी संध से बाहर    झांक लेतीं. हादसे की दहशत बरकरार थी.

अगले दिन मां के जाने के बाद दोनों ने मन की भड़ास निकाली, ‘‘अरे वह तिरपाली बनिया भी ऐसा ही दिखता है. जाने कैसी भूखी नजरों से घूरता है जैसे खा जाएगा. छि: कैसी घिनौनी हंसी है और वह दूध वाला मोटा लाला? कोई उस की बेटी को ऐसे देखे तो लाला सामने वाले का पेट चीर कर अंतडि़यों का सालन बना कर खा जाएगा. एकदम कसाई दिखता है.’’

सारा दिन दोनों बहनें यही सब बातें करती रहीं. मुंह में अन्न का एक दाना तक न गया. मन ही नहीं करता था. कौर तोड़तीं तो कभी मुच्छड़, कभी तिरपाली तो कभी लाला का डरावना चेहरा उन्हें विचलित करता.

गांठ खुल गई- भाग 2 : क्या कभी जुड़ पाया गौतम का टूटा दिल

पहले छुट्टियों में पिता की दुकान संभालता था. अब पिता के कहने पर भी दुकान पर नहीं जाता था. उसे लगता था कि दुकान पर जाएगा तो महल्ले की लड़कियां उस पर छींटाकशी करेंगी तो वह बरदाश्त नहीं कर पाएगा.

इसी तरह घटना को 2 वर्ष बीत गए. इषिता ने ग्रैजुएशन कर ली. जौब की तलाश की, तो वह भी मिल गई. बैक में जौब मिली थी. पोस्टिंग मालदह में हुई थी.

जाते समय इषिता ने उस से कहा, कोलकाता से जाने की इच्छा तो नहीं है पर सवाल जिंदगी का है. जौब तो करनी ही पड़ेगी, पर 6-7 महीने में ट्रांसफर करा कर आ जाऊंगी. विश्वास है कि तब तक श्रेया को दिल से निकाल फेंकने में सफल हो जाओगे.

इषिता मालदह चली गई तो गौतम पहले से अधिक अवसाद में आ गया. तब उस के मातापिता ने उस की शादी करने का विचार किया.

मौका देख कर मां ने उस से कहा, ‘‘जानती हूं कि इषिता सिर्फ तुम्हारी दोस्त है. इस के बावजूद यह जानना चाहती हूं कि यदि वह तुम्हें पसंद है तो बोलो, उस से शादी की बात करूं?’’

‘‘वह सिर्फ मेरी दोस्त है. हमेशा दोस्त ही रहेगी. रही शादी की बात, तो कभी किसी से भी शादी नहीं करूंगा. यदि किसी ने मुझ पर दबाव डाला तो घर छोड़ कर चला जाऊंगा.’’

गौतम ने अपना फैसला बता दिया तो मां और पापा ने उस से फिर कभी शादी के लिए नहीं कहा. उसे उस के हाल पर छोड़ दिया.

लेकिन एक दोस्त ने उसे समझाते हुए कहा, ‘‘श्रेया से तुम्हारी शादी नहीं हो सकती, यह अच्छी तरह जानते हो. फिर जिंदगी बरबाद क्यों कर रहे हो? किसी से विवाह कर लोगे तो पत्नी का प्यार पा कर अवश्य ही उसे भूल जाओगे.’’

‘‘जानता हूं कि तुम मेरे अच्छे दोस्त हो. इसलिए मेरे भविष्य की चिंता है. परंतु सचाई यह है कि श्रेया को भूल पाना मेरे वश की बात नहीं है.’’

दोस्त ने तरहतरह से समझाया. पर वह किसी से भी शादी करने के लिए राजी नहीं हुआ.

इषिता गौतम को सप्ताह में 2-3 दिन फोन अवश्य करती थी. वह उसे बताता था कि जल्दी ही श्रेया को भूल जाऊंगा. जबकि हकीकत कुछ और ही थी.

हकीकत यह थी कि इषिता के जाने के बाद उस ने कई बार श्रेया को फोन लगाया था. पर लगा नहीं था. घटना के बाद शायद उस ने अपना नंबर बदल लिया था.

न जाने क्यों उस से मिलने के लिए वह बहुत बेचैन था. समझ नहीं पा रहा था कि कैसे मिले. अंजाम की परवा किए बिना उस के घर जा कर मिलने को वह सोचने लगा था.

तभी एक दिन श्रेया का ही फोन आ गया. बहुत देर तक विश्वास नहीं हुआ कि उस का फोन है.

विश्वास हुआ, तो पूछा, ‘‘कैसी हो?’’

‘‘तुम से मिल कर अपना हाल बताना चाहती हूं. आज शाम के 7 बजे साल्ट लेक मौल में आ सकते हो?’’ उधर से श्रेया ने कहा.

खुशी से लबालब हो कर गौतम समय से पहले ही मौल पहुंच गया. श्रेया समय पर आई. वह पहले से अधिक सुंदर दिखाई पड़ रही थी.

उस ने पूछा, ‘‘मेरी याद कभी आई थी?’’

‘‘तुम दिल से गई ही कब थीं जो याद आतीं. तुम तो मेरी धड़कन हो. कई बार फोन किया था, लगा नहीं था. लगता भी कैसे, तुम ने नंबर जो बदल लिया था.’’

उस का हाथ अपने हाथ में ले कर श्रेया बोली, ‘‘पहले तो उस दिन की घटना के लिए माफी चाहती हूं. मुझे इस का अनुमान नहीं था कि मेरे झूठ को पापा और भैया सच मान कर तुम्हारी पिटाई करा देंगे.

‘‘फिर कोई लफड़ा न हो जाए, इस डर से पापा ने मेरा मोबाइल ले लिया. अकेले घर से बाहर जाना बंद कर दिया गया.

‘‘मुंबई से तुम्हें फोन करने की कोशिश की, परंतु तुम्हारा नंबर याद नहीं आया. याद आता तो कैसे? घटना के कारण सदमे में जो थी.

‘‘फिलहाल वहां ग्रैजुएशन करने के बाद 3 महीने पहले ही आई हूं. बहुत कोशिश करने पर तुम्हारे एक दोस्त से तुम्हारा नंबर मिला, तो तुम्हें फोन किया. मेरी सगाई हो गई है. 3 महीने बाद शादी हो जाएगी.

‘‘यह कहने के लिए बुलाया है कि जो होना था वह हो गया. अब मुद्दे की बात करते हैं. सचाई यह है कि हम अब भी एकदूसरे को चाहते हैं. तुम मेरे लिए बेताब हो, मैं तुम्हारे लिए.

‘‘इसलिए शादी होेने तक हम रिश्ता बनाए रख सकते हैं. चाहोगे तो शादी के बाद भी मौका पा कर तुम से मिलती रहूंगी. ससुराल कोलकाता में ही है. इसलिए मिलनेजुलने में कोई परेशानी नहीं होगी.’’

श्रेया का चरित्र देख कर गौतम को इतना गुस्सा आया कि उस का कत्ल कर फांसी पर चढ़ जाने का मन हुआ. लेकिन ऐसा करना उस के वश में नहीं था. क्योंकि वह उसे अथाह प्यार करता था. उसे लगता था कि श्रेया को कुछ हो गया तो वह जीवित नहीं रह पाएगा.

उसे समझाते हुए उस ने कहा, ‘‘मुझे इतना प्यार करती हो तो शादी मुझ से क्यों नहीं कर लेतीं?’’

‘‘इस जमाने में शादी की जिद पकड़ कर क्यों बैठे हो? वह जमाना पीछे छूट गया जब प्रेमीप्रेमिका या पतिपत्नी एकदूसरे से कहते थे कि जिंदगी तुम से शुरू, तुम पर ही खत्म है.

‘‘अब तो ऐसा चल रहा है कि जब तक साथ निभे, निभाओ, नहीं तो अपनेअपने रास्ते चले जाओ. तुम खुद ही बोलो, मैं क्या कुछ गलत कह रही हूं? क्या आजकल ऐसा नहीं हो रहा है?

‘‘दरअसल, मैं सिर्फ कपड़ों से ही नहीं, विचारों से भी आधुनिक हूं. जमाने के साथ चलने में विश्वास रखती हूं. मैं चाहती हूं कि तुम भी जमाने के साथ चलो. जो मिल रहा है उस का भरपूर उपभोग करो. फिर अपने रास्ते चलते बनो.’’

श्रेया जैसे ही चुप हुई, गौतम ने कहा, ‘‘लगा था कि तुम्हें गलती का अहसास हो गया है. मुझ से माफी मांगना चाहती हो. पर देख रहा हूं कि आधुनिकता के नाम पर तुम सिर से पैर तक कीचड़ से इस तरह सन चुकी हो कि जिस्म से बदबू आने लगी है.

‘‘यह सच है कि तुम्हें अब भी अथाह प्यार करता हूं. इसलिए तुम्हें भूल जाना मेरे वश की बात नहीं है. लेकिन अब तुम मेरे दिल में शूल बन कर रहोगी, प्यार बन कर नहीं.’’

श्रेया ने गौतम को अपने रंग में रंगने की पूरी कोशिश की, परंतु उस की एक दलील भी उस ने नहीं मानी.

उस दिन से गौतम पहले से भी अधिक गमगीन हो गया.

इस तरह कुछ दिन और बीत गए. अचानक इषिता ने फोन पर बताया कि उस ने कोलकाता में ट्रांसफर करा लिया है. 3-4 दिनों में आ जाएगी.

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