असमंजस: क्यों अचानक आस्था ने शादी का लिया फैसला

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लौट जाओ सुमित्रा: भाग 2- उसे मुक्ति की चाह थी पर मुक्ति मिलती कहां है

कहीं ऐसा तो नहीं कि उस के अंदर ही कहीं एक ज्वालामुखी धधक रहा था जिस की तपिश ठंड के वेग को छूने भी नहीं दे रही थी, लेकिन उस की देह को दग्ध रखा हुआ था.

सुमित्रा अपनी बात जारी रखे हुए थी, ‘‘पहले अपनेआप से ही संघर्ष किया जाता है, अपने को मथा जाता है और मैं तो इस हद तक अपने से लड़ी हूं कि टूट कर बिखरने की स्थिति में पहुंच गई हूं. सारे समीकरण ही गलत हैं. विकल्प नहीं था और हारने से पहले ही दिशा पाना चाहती थी, इसीलिए चली आई आप के पास. जब पांव के नीचे की सारी मिट्टी ही गीली पड़ जाए तो पुख्ता जमीन की तलाश अनिवार्य होती है न?’’ इस बार सुमित्रा ने प्रश्न किया था. आखिर क्यों नहीं समझ पा रहे हैं वे उस को?

‘‘ठीक कहती हो तुम, पर मिट्टी कोे ज्यादा गीला करने से पहले अनुमान लगाना तुम्हारा काम था कि कितना पानी चाहिए. फिर तलाश खुदबखुद बेमानी हो जाती है. हर क्रिया की कोई प्रतिक्रिया हो, यह निश्चित है. बस, अब की बार कोशिश करना कि मिट्टी न ज्यादा सख्त होने पाए और न ही ज्यादा नम. यही तो संतुलन है.’’

‘‘बहुत आसान है आप के लिए सब परिभाषित करना. लेकिन याद रहे कि संतुलन 2 पलड़ों से संभव है, एक से नहीं,’’ सुमित्रा के स्वर में तीव्रता थी और कटाक्ष भी. क्यों वे उस के सब्र का इम्तिहान ले रहे हैं.

‘‘ठीक कह रही हो, पर क्या तुम्हारा वाला पलड़ा संतुलित है? तुम्हारी नैराश्यपूर्ण बातें सुन कर लगता है कि तुम स्वयं स्थिर नहीं हो. लड़खड़ाहट तुम्हारे कदमों से दिख रही है, सच है न?’’

जब उत्साह खत्म हो जाता है तो परास्त होने का खयाल ही इंसान को निराश कर देता है. सुमित्रा को लग रहा था कि उस की व्यथा आज चरमसीमा पर पहुंच जाएगी. सभी के जीवन में ऐसे मोड़ आते हैं जब लगता है कि सब चुक गया है. पर संभलना जरूरी होता है, वरना प्रकृति क्रम में व्यवधान पड़ सकता है. टूटनाबिखरना…चक्र चलता रहता है. लेकिन यह सब इसलिए होता है ताकि हम फिर खड़े हो जाएं चुनौतियां का सामना करने के लिए, जुट जाएं जीवनरूपी नैया खेने के लिए.

‘‘कहना जितना सरल है, करना उतना सहज नहीं है,’’ सुमित्रा अड़ गई थी. वह किसी तरह परास्त नहीं होना चाहती थी. उसे लग रहा था कि वह बेकार ही यहां आई. कौन समझ पाया है किसी की पीड़ा.

‘‘मैं सब समझ रहा हूं पर जान लो कि संघर्ष कर के ही हम स्वयं को बिखरने से बचाते हैं. भर लो उल्लास, वही गतिशीलता है.’’

‘‘जब बातबात पर अपमान हो, छल हो, तब कैसी गतिशीलता,’’ आंखें लाल हो उठी थीं क्रोध से पर बेचैनी दिख रही थी.

‘‘मान, अपमान, छल सब बेकार की बातें हैं. इन के चक्कर में पड़ोगी तो हाथ कुछ नहीं आएगा. मन के द्वार खोलो. फिर कुंठा, भय, अज्ञानता सब बह जाएगी. सबकुछ साफ लगने लगेगा. बस, स्वयं को थोड़ा लचीला करना होगा.’’ बोलने वाले के स्वर में एक ओज था और चेहरे पर तेज भी. अनुभव का संकेत दे रहा था उन का हर कथन. बस, इसी जतन में वे लगे थे कि सुमित्रा समझ जाए.

रात का समय उन्हें बाध्य कर रहा था कि वे अपने ध्यान में प्रवेश करें पर सुमित्रा तो वहां से हिलना ही नहीं चाहती थी. चाहते तो उसे जाने के लिए कह सकते थे पर जिस मनोव्यथा से वह गुजर रही थी उस हालत में बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचे उसे जाने देना ठीक नहीं था. भटकता मन भ्रमित हो अपना अच्छाबुरा सोचना छोड़ देता है.

‘‘मैं अपने पति से प्यार नहीं करती,’’ सुमित्रा ने सब से छिपी परत आखिर उघाड़ ही दी. कब तक घुमाफिरा कर वह तर्कों में उलझती और उलझाती रहती.

‘‘यह कैसा भ्रम है सुमित्रा?’’ उन के आश्चर्य की कोई सीमा नहीं थी.

‘‘यह कटु सत्य है,’’ उस की वाणी में तटस्थता थी. झिझक खुल जाना ही अहम होता है. फिर डर नहीं रहता.

‘‘कितने वर्ष हो गए हैं विवाह को?’’

‘‘यही कोई 12.’’

‘‘जिस इंसान के साथ तुम 12 वर्षों से रह रही हो, उस से प्यार नहीं करतीं. बात कुछ निरर्थक प्रतीत होती है?’’

‘‘यही सच है. मैं ने अपने पति से एक दिन भी प्यार नहीं किया. वास्तविकता तो यह है कि मुझे कभी महसूस ही नहीं हुआ कि वे मेरे पति हैं. एक पत्नी होेने का स्वामित्व, अधिकार दिया ही कहां मुझे.’’ हर जगह एक तरलता व्याप्त हो गई थी.

‘‘यह क्या कह रही हो, पति का पति होना महसूस न हुआ हो. रिश्ते इतने क्षीण धागे से तो नहीं बंधे होते हैं. परस्परता तो साथ रहतेरहते भी आ जाती है. एहसासों की गंध तो इतनी तीव्र होती है कि मात्र स्पर्श से ही सर्वत्र फैल जाती है. तुम तो 12 वर्षों से साथ जी रही हो, पलपल का सान्निध्य, साहचर्य क्या निकटता नहीं उपजा सका? मुझे यह बात नहीं जंचती,’’ स्वर में रोष के साथ आश्चर्य भी था.

सुमित्रा पर गहरा रोष था कि क्यों न वह प्यार कर सकी और अपने ऊपर ग्लानि. अपनी शिष्या, जो बाल्यावस्था से ही उन की सब से स्नेही शिष्या रही है, को न समझ पाने की ग्लानि. कहां चूक हो गई उन से संस्कारों की धरोहर सौंपने में. उन्हें ज्यादा दुख तो इस बात का था कि अब तक वे उस के भीतर जमे लावे को देख नहीं पाए थे. कैसे गुरु हैं वे, अगर सुमित्रा आज भी गुफाओं के द्वार नहीं खोलती तो कभी भी वे उन अंधेरों को नहीं देख पाते.

‘‘आप को क्या, किसी को भी यह बात अजीब लग सकती है. सुखसंसाधनों से घिरी नारी क्योंकर ऐसा सोच सकती है. यही तो मानसिकता होती है सब की. असल में समृद्धि और ऐश्वर्य ऐसे छलावे हैं कि बाहर से देखने वालों की नजरें उन के भौतिक गुणों को ही देख पाती हैं, गहरे समुद्र में कितनी सीपियां घोंघों में बंद हैं, यह तो सोचना भी उन के लिए असंभव होता है.’’

‘‘मुझे लगता है कि सुमित्रा, तुम परिवार को दार्शनिकता के पलड़े में रख कर तोलती हो, तभी सामंजस्य की स्थिति से अवगत नहीं. सिर्फ कोरी भावुकता, निरे आदर्शों से परिवार नहीं चलता, न ही बनता है.’’

‘‘मैं किन्हीं आदर्शों या भावुकता के साथ घर नहीं चला रही हूं,’’ सुमित्रा भड़क उठी थी, ‘‘आप समझते क्यों नहीं, न जाने क्यों मान बैठे हैं कि मैं ही गलत हूं. जिस घर की आप बात कर रहे हैं, वह मुझे अपना लगता ही कहां है. आप ने उच्चशिक्षा के साथ पल्लू में यही बांधा कि पति का घर ही अपना होता है, लेकिन मैं तो अपनी मरजी से उस की एक ईंट भी इधरउधर नहीं कर सकती.’’

फफक उठी थी वह. रहस्यों को खोलना भी कितना पीड़ादायक होता है, अपनी ही हार को स्वीकार करना. 12 वर्षों से वह जिस तूफान को समेटे हुई थी यह सोच कर कि कभी तो उसे पत्नी होने का स्वामित्व मिलेगा, उसे आज यों बहती हवा के साथ निकल जाने दिया था. उपहास उड़ाएगा सारा संसार इस सत्य को जान कर जिसे उस ने बड़ी कुशलता से आवरणों की असंख्य तहों के नीचे छिपा कर रखा था ताकि कोई उस के घर की प्रतिष्ठा के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश न करे.

सुमित्रा बोले जा रही थी, ‘‘मैं अपने मन के संवेगों को उन के साथ नहीं बांट सकती. शेयर करना भी कुछ होता है. बहुतकुछ अनकहा रह जाता है जो काई की तरह मेरे हृदय में जमा हुआ है. इतनी फिसलन हो गई है कि अब स्वयं से डरने लगी हूं कि कहीं पग धरते ही गिर न जाऊं.

‘‘पतिपत्नी का रिश्ता क्या ऐसा होता है जिस में भावनाओं को दबा कर रखना पड़ता है. मैं थक गई हूं. मेरा मन थक गया है. सब शून्य है, फिर कहां से जन्म लेगा प्यार का जज्बा?’’ सुमित्रा बेकाबू हो गई थी.

‘‘ऐसा भी तो हो सकता है कि वह तुम्हें बुद्धिजीवी मानने के कारण छोटीछोटी बातों से दूर रखना चाहता हो. तुम्हें ऊंचा मानता हो और तुम नाहक रिश्तों में काई जमा कर जी रही हो. तुम्हारे अध्ययन, तुम्हारे सार्थक विचारों से अभिभूत हो कर वह तुम्हारी इज्जत करता है और तुम ने नाहक ही थोथे अहं को पाल रखा है.’’ स्वर इतना संयमित था कि एकबारगी तो वह भी हिल गई. तटस्थता जबतब सहमा देती है.

आधी रात को घर से नंगे पैर क्यों निकल गए अमिताभ

अमिताभ बच्चन आधी रात को अपने 81वें जन्मदिन का जश्न मनाने के लिए मुंबई स्थित अपने घर के बाहर एकत्र हुए सैकड़ों फैंस का स्वागत करने के लिए बाहर निकले. जब सुपरस्टार ने अपने हाथ जोड़कर जलसा के बाहर खड़ी भीड़ का अभिवादन किया तो जोरदार जयकारों और तालियों के साथ उनका स्वागत किया गया.

अमिताभ बच्चन अपने फैंस से मिलने के लिए अपने घर के बाहर निकाले रहे हैं. शोले अभिनेता एक ऊंचे मंच पर खड़े थे ताकि हर कोई उनकी एक झलक देख सके. सुरक्षा से घिरे हुए वह मुस्कुराए और अपने फैंस की ओर हाथ हिलाया.

आधी रात को जलसा के बाहर फैंस के साथ मनाया जन्मदिन

अमिताभ बच्चन 11 अक्टूबर, 2023 को 81 वर्ष के हो गए. अभिनेता ने मुंबई स्थित आवास, जलसा के बाहर अद्भूत उपस्थिति ने फैंस को खुश कर दिया, वहीं उनकी बहू ऐश्वर्या राय बच्चन और पोती आराध्या और नव्या भी दिखाई दी. तीनों को अपने फोन से तस्वीरें लेते देखा गया.

 

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ऐश्वर्या राय बच्चन, नव्या और आराध्या को वीडियो लेते और वीडियो कॉलिंग करते हुए देख सकते हैं क्योंकि बिग बी अपने जन्मदिन पर बाहर अपने लाखों फैंस का स्वागत कर रहे हैं. अमिताभ बच्चन ने जाहिर तौर पर अपना 81वां जन्मदिन परिवार के सदस्यों के साथ मनाया. उनकी बेटी श्वेता बच्चन नंदा ने उसी रात की एक तस्वीर पोस्ट की और उन्हें 81वें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं.

 

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अमिताभ बच्चन की अपकमिंग फिल्में

81 साल की उम्र में भी बच्चन हमेशा की तरह सक्रिय हैं, जिससे साबित होता है कि उम्र उनके लिए सिर्फ एक नंबर है. उन्हें आखिरी बार सूरज बड़जात्या की फिल्म ऊंचाई में अनुपम खेर, परिणीति चोपड़ा और बोमन ईरानी के साथ देखा गया था. उनके अपकमिंग फिल्में कल्कि 2898 ई., सेक्शन 84 और गणपथ भी रिलीज के लिए तैयार हैं.

Amir Khan ने की नई फिल्म की घोषणा, ‘सितारे है जमीन पर’ से करेंगे दमदार कमबैक

बॉलीवुड के दमदार एक्टर आमिर खान जल्द ही पर्दे पर कमबैक करने जा रहे है. लाल सिंह चड्ढा बॉक्स ऑफिस पर पिटने के बाद से आमिर गायब हो गए. आमिर खान के फैंस उनकी अगली फिल्म का काफी लंबे से इंतजार कर रहे थे. फिलहाल आमिर खान प्रोड्यूसर की कुर्सी संभाले हुए है. हाल ही में उन्होंने लहौर 1947 की घोषणा की है अब एक्टर ने एक और फिल्म की घोषणा कर दी है. वह अपनी फिल्म साल 2024 में बड़े पर्दे पर लाएंगे. इस फिल्म के साथ आमिर अक्षय कुमार की बेलकम 3 को टक्कर देंगे.

आमिर की फिल्म का नाम आया सामने

बॉलीवुड में मिस्टर परफेक्शनिस्ट के नाम से जाने वाले आमिर खान अपनी फिल्मों में बारीकियों पर काम करते है. आमिर खान साल 2024 में अक्षय कुमार की बेलकम 3 टक्कर देने के लिए क्रिसमस पर अपनी नई फिल्म से वापसी कर रहे है. इसी बीच उनके फैंस खुशी झूम उठे है. आमिर ने मीडिया इंटरव्यू में कहा कि, वो एक एक्टर की तौर पर फिल्म ‘सितारे है जमीन पर’ से वापसी करने वाले है. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि फिल्म ‘तारे जमीन पर’  दर्शकों को खूब रुलाया था और अब ‘सितारे है जमीन पर’ आपको खूब हंसाएगी. सबको जमकर हंसाने वाली है.’ आमिर खान के इस बयान ने साफ कर दिया है कि वह कॉमेडी फिल्म से बॉक्स ऑफिस पर वाससी करने वाले हैं.

आपको बता दें, आमिर खान लास्ट फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ में नजर आए थे. जो बॉक्स ऑफिस पर खासा कमाई नहीं कर सकी. इस फिल्म में आमिर खान के साथ करीना कपूर अहम रोल में थी.

बेटे को लेकर कही ये बात

मीडिया इंटरव्यू के दौरान आमिर ने अपनी फिल्म के साथ-साथ बेटे के बारे में भी बताया. एक्टर ने कहा कि उनके बेटे जुनैद बॉलीवुड में निर्माता फिल्म ‘प्रीतम प्यारे से’ डेब्यू करेंगे. यह बिल्कुल तय कि आमिर के बेटे जुनैद पर्दे के पीछे काम करेंगे वह एक्टिंग नहीं करेंगे.

मेरे टखनों की मांसपेशियों में दर्द है मुझे कोई उपाय बताएं

सवाल

मुझे खुद को फिट रखनेके लिए दौड़ना पसंद है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से मेरे टखनों की मांसपेशियों में दर्द, खिंचावऔर कड़ापन महसूस हो रहा है.मैं क्या करूं?

जवाब

ऐसा लगता है कि ऊंचीनीची सतह पर दौड़ने या किसी और कारण से आप के टखने चोटिल हो गए हैं. यह समस्या टखनों की हड्डियों के फ्रैक्चर होने या मांसपेशियों, लिगामैंट्स और टैंडन के क्षतिग्रस्त होने से होती है. टखनों में होने वाली समस्याओं को स्पोर्ट्स इंजरी कहा जाता है क्योंकि इस के अधिकतर मामले खिलाडि़यों में ही देखे जाते हैं. अगर समस्या लगातार बनी हुई है तो किसी और्थोपैडिक सर्जन को दिखाएं. पहले नौनसर्जिकल उपायों से उपचार किया जाता है. जब इन से मरीज को आराम नहीं मिलता तो एंकल ऐंथ्रोस्कोपी प्रक्रिया द्वारा टखने की सर्जरी की जाती है. यह एक मिनिमली इनवेसिव सर्जरी है जो काफी आसान और दर्दरहित होती है.

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मैं 55 वर्षीय बैंककर्मी हूं. मु   झे औस्टियोपोरोसिस है. अपनी हड्डियों की मजबूती के लिए मैं क्या उपाय कर सकती हूं?

जवाब

हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए आप संतुलित और पोषक भोजन का सेवन करें जिस में सब्जियां, फल, दूध व दुग्ध उत्पाद, सूखे मेवे, अंडे, साबूत अनाज और दालें शामिल हों. नियमित रूप से ऐक्सरसाइज और वाक करें. इस से बोन डैंसिटी बढ़ती है. रोज कम से कम 20-30 मिनट सुबह की कुनकुनी धूप लें. इस से आप को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिल जाएगा जो आप की हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी है. अगर आप धूम्रपान या शराब का सेवन करती हैं तो बंद कर दें. नियमित अंतराल पर अपना बोन डैंसिटी टैस्ट कराती रहें.

सवाल

मैं 35 वर्षीय कामकाजी महिला हूं. मुझे नी आर्थ्राइटिस है. मैं जानना चाहती हूं कि क्या बिना सर्जरी के इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है?

नी आर्थ्राइटिस यानी घुटनों का आर्थ्राइटिस एक लगातार गंभीर होती समस्या है क्योंकि समय के साथ घुटनों के जोड़ों की खराबी बढ़ती जाती है. कई कारण हैं जो घुटनों के आर्थ्राइटिस का कारण बन सकते हैं जैसे घुटनों में लगी कोई चोट, गठिया, औटो इम्यून डिजीजेज आदि. अगर आप की समस्या ज्यादा गंभीर नहीं है तो आप अपने संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाएं. जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाएं, मोटापे को नियंत्रण में रखें. नियमित रूप से ऐक्सरसाइज करें. डायग्नोसिस के बाद उचित उपचार करने में देरी न करें तो बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है और किसी हद तक घुटना प्रत्यारोपण से बचा जा सकता है.

-डा. ईश्वर बोहराजौइंट रिप्लेसमैंट सर्जन,

बीएलके सुपर स्पैश्यलिटी हौस्पिटल, नई दिल्ली.

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभा, ई-8, रानी झांसी मार्ग, नई दिल्ली-110055.

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Festival Special: इन 11 Makeup टिप्स से बनाएं लुक को खास

हर महिला की ख्वाहिश होती है कि वह सब से सुंदर दिखे. महिलाओं की इसी चाह को पूरा करने के लिए पेश हैं कुछ खास मेकअप टिप्स:

1. चीक्स पर रैड या पीच शेड का ब्लशऔन लगाएं. रात की पार्टी के वक्त हलका गहरा ब्लशर लगा सकती हैं.

2. नाखूनों पर नेल पेंट लगाने के बजाय नेल आर्ट बनाना भी डिफरैंट आइडिया रहेगा. अपनी मनचाही या दूसरी कोई ट्रैंडी नेल आर्ट जैसे पर्ल, ग्लिटरी, ब्लैक ऐंड व्हाइट इत्यादि बनवा सकती हैं.

3. परफैक्ट मेकअप के लिए जरूरी है क्लीन स्किन. ऐसे में अपनी स्किन को क्लींजिंग मिल्क की मदद से क्लीन कर लें. इस के बाद पोर्स को बंद करने के लिए किसी अच्छी क्वालिटी के टोनर से स्किन टोन कीजिए. सर्द हवाएं स्किन को रूखा बना देती हैं, इसलिए मेकअप से लगभग 15 मिनट पहले स्किन को मौइश्चराइजर से मौइश्चराइज कर लें. ऐसा करने से स्किन स्मूद हो जाएगी और मेकअप भी अच्छी तरह स्प्रैड होगा.

4. चेहरे पर मौइश्चराइजर मेनटेन करने के लिए सिलिकोन बेस्ड प्री बेस लगाएं और फिर मूज लगा कर चेहरे को फ्लालैस लुक दें. मूज चेहरे पर लगाते ही पाउडर फौर्म में तबदील हो जाता है. ऐसे में ऊपर से पाउडर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती.

5. मेकअप में सब से पहले थीम को ध्यान में रखें. आप किसी पार्टी में जा रही हैं और अगर पार्टी का कोई थीम है, तो मेकअप उसी थीम पर फोकस करें.

6. आंखों के लिए कुछ डिफरैंट चुनना चाहिए. ज्यादा कुछ नहीं बस हलका सा बेसिक आईशैडो लगाने के बाद ग्लिटर कलर से आईलाइन बनाएं और उस पर ब्लैक आईलाइनर लगाएं ताकि ब्लैक लाइनर के ठीक ऊपर ग्लिटर लाइनर दिखाई दे. अब सफेद काजल लगाने के बाद बेसिक आईशैडो का एक कोट ब्रश की सहायता से आंखों के ठीक नीचे काजल की तरह लगाएं.

7. अगर आप ईवनिंग पार्टी के लिए तैयार हो रही हैं तो आईज को स्मोकी लुक दे सकती हैं, क्योंकि इस मौके पर ज्यादातर महिलाएं रैड कलर पहनती हैं. ऐसे में आंखों पर रैड शेड लगाएं और उसे ब्लैक के साथ मर्ज कर लें. फेस मेकअप में लाइनर को फोकस में रखें.

8. आंखों से बाहर निकाल कर लाइनर लगाएं. ब्लैक विंग्ड लाइनर से आईज को कैट लुक दें और रात में शाइन के लिए आईज के आउटर कौर्नर पर स्वरोस्की स्टड लगा लें. इस में ड्रैस से मैच करते स्टोन का यूज कर सकती हैं. बोल्ड काजल और डबल कोट मसकारे से आंखों को सजाना न भूलें.

9. खास सैलिब्रेशन में सभी महिलाएं बेहद स्टाइलिश गाउन या अन्य वैस्टर्न ड्रैस पहनती हैं, इसलिए मेकअप भी इस दिन कुछ स्टन्निंग सा होना चाहिए. दिन के वक्त आंखों पर लाइट जैसे कौपर या गोल्डन शेड लगाएं और आईलिड पर ब्लैक लाइनर, कलरफुल लुक चाहती हैं तो ऐमरल्ड ग्रीन, टर्क्वाइज ब्लू, ब्राउन या पर्पल शेड का लाइनर लगा सकती हैं.

10. अगर आप ने डार्क स्मौकी मेकअप किया है, तो लिप्स पर रैडिश टोन लेता न्यूट्रल शेड जैसे पीच या कौपर कलर की लिपस्टिक लगाएं और लिप्स को लिपग्लौस से सील कर दें. ऐसा करने से लिप्स शाइन भी करेंगे.

11. अपनी ड्रैस के अनुसार हेयरस्टाइल बनाएं. अगर हमेशा बालों को खुला रखती हैं, तो इस बार फ्रैंच बन बनाएं. डिजाइनर चोटी भी बना सकती हैं. बालों को खुला रखना चाहें तो कर्ल करना भी एक बढि़या विकल्प है.

-भारती तनेजा

(डाइरैक्टर औफ एल्पस ब्यूटी क्लीनिक ऐंड ऐकैडमी)

Festival Special: इस त्योहार सजे घरसंसार

फैस्टिव सीजन में हर कोई अपना घर खूबसूरत सजावट और रोशनी से गुलजार करना चाहता है. लेकिन डैकोर के सही तरीकों व तकनीकों के बिना घर की सजावट अधूरी ही रहती है. ऐसे में इस त्योहार पर अपने आशियाने में कैसे लगाएं चारचांद, बता रहे हैं राजेश कुमार.

घर की सजावट से जुड़ी 3 चीजें अहम हैं. आप की पसंद, घर का साइज और आप का बजट. मार्केट में ऐसे औप्शंस की कमी नहीं है जो आप को कन्फ्यूज कर देंगे. जरूरी नहीं है घर की सजावट में सिर्फ नई चीजें ही इस्तेमाल की जाएं, कुछ पुरानी और विंटेज कलैक्शन टाइप चीजें भी आप के घर को एकदम नया लुक दे सकती हैं. दीवाली के मौके पर सजावट के लिए जरूरी सामान की बात करें तो इस में कैंडल्स, फल, दीए, बंदनवार, रंगोली, लाइटिंग, मोटिफ्स, फ्लोटिंग कैंडल्स के अलावा घर के इंटीरियर के लिए रंगीन कुशंस, परदे, प्लांट्स और रंगबिरंगी इलैक्ट्रिक ?ालरें प्रमुख तौर पर काम आती हैं. इन के इर्दगिर्द ही घर की सारी साजसज्जा सिमटती है.

रोशनी से गुलजार आशियाना

दीवाली में सजावट की सब से अहम चीज है रोशनी. चूंकि यह त्योहार ही रोशनी का है इसलिए इस दिन दीप, कैंडल्स और इलैक्ट्रिक लाइट्स वगैरह हर घरमें जगमगाहट भरती हैं. लाइटिंग काफी महत्त्वपूर्ण है, ध्यान रखें कि यह खूबसूरत तो हो लेकिन भारीभरकम रंगों व चुभने वाले प्रकाश वाली न हों. बैडरूम घर का मुख्य भाग होता है, वहां सफेद रोशनी ही करें. इस से आप रिलैक्स फील करेंगे.

घर के किसी कोने को उभारने के लिए ट्रैक लाइट जबकि स्टाइलिश लुक के लिए फेयरी लाइट्स का विकल्प ठीक होता है. इस के अलावा घर के हर कोने में रोज जलने वाले दीए मिट्टी के बने हों और उन पर कुछ पेंट या ड्राइंग कर उन्हें नया लुक दें. दीए के साथसाथ कैंडल की जगमगाहट भी जरूरी है. इसलिए कई रंगों और डिजाइंस की कैंडल्स प्रयोग में लाएं, घर जगमगा उठेगा. लडि़यों और दीयों का कौंबिनेशन भी बनाया जा सकता है. इस का इफैक्ट अच्छा लगता है.

घर का बदलें इंटीरियर

दीवाली पर घर सिर्फ पेंट करने से ही नहीं चमकता. आप घर की दीवारों को कई तरह के वाल पेपर्स और सीनरी के जरिए भी नया लुक दे सकते हैं. फर्नीचर के साथ भी कई क्रिएटिव ऐक्सपैरीमैंट कर सकते हैं. मसलन, ऐंटीक लुक का फर्नीचर आजमाएं. कोई कलर थीम चुन लें और फिर उसी के अनुसार घर की साजसज्जा करें. मैचिंग का विशेष ध्यान रखें. नक्काशीदार सामान के जरिए भी घर को डिफरैंट लुक दे सकते हैं. कुछ और तरीके भी अपनाए जा सकते हैं, मसलन, घर के पायदान बदल कर नए लगाएं, सोफों के कुशन कवर बदलें, फर्नीचर को रिअरेंज करें, घर के इनडोर प्लांट्स के गमले पेंट करें, परदों का कौंबिनेशन और कलर थीम बदलें, किचन को मौड्यूलर अंदाज में सजाएं.

फूलों से सजेमहके घर

रंग और रोशनी के अलावा फूल डैकोरेशन में नया आकर्षण जोड़ते हैं. दीए तो रात में ही जगमगाते हैं जबकि फूल तो घर को दिनरात सजाते व महकाते रहते हैं. फूलों को घर में कई तरह से सजाया जा सकता है. पानी के टब से ले कर थाली तक, फूल अपने रंग और खुशबू से घर का कोनाकोना महका देते हैं. स्टील के प्लैटर के किनारे पर ताजा फूल रखें और फिर मिठाइयां सजा दें या फिर बेंत की टोकरी ले कर उस में नीचे फूल सजा कर, अलगअलग तरह की ढेर सारी चौकलेट्स भर कर मेज पर रख सकते हैं.

किसी पानी भरे गुलदान में किनारों पर ही फूल या पंखडि़यां बिछा कर बीचोंबीच पानी पर तैरते दीए या कैंडल रखने से रोशनी, रंग और खुशबू से आप का आशियाना अलग ही रंगत में रोशन होगा. हां, सजाने से पहले फूलों को ताजा बनाए रखने के लिए फूलों की डंडियों को किसी गहरे बरतन में पानी में डुबो कर रखें, ताकि वे ज्यादा से ज्यादा पानी सोख सकें. जब आप इन की डंडियों को अरेंजमैंट के लिए काटेंगी तो इन का नीचे से जल्दी सूखना शुरू हो जाएगा.

पुराने कांच के डिजाइनर गिलासों, पौट या होल्डर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. फूलों की सजावट के लिए रचनात्मकता और थोड़े से तकनीकी ज्ञान की जरूरत होती है. सजावट के बाद फूलों की नमी बनाए रखने के लिए उन पर पानी छिड़कते रहें.

रंग, रंगोली और शौपिंग

बिना रंगोली के दीवाली की हर सजावट अधूरी है. आमतौर पर रंगोली बनाने में कलई का सफेद रंग, गेरू का लाल रंग, पीली मिट्टी का पीला रंग व कई रंगबिरंगे गुलाल उपयोग में ला सकते हैं. आजकल बाजार में मिलने वाली रैडीमेड रंगोलियां भी इस्तेमाल की जा सकती हैं. मुख्यद्वार या फर्श का एक छोटा हिस्सा इस्तेमाल करें और गीली चौक से रंगोली का आकार बनाएं. इस के बाद गुलाल के विभिन्न रंगों व चावलों से उसे सजाएं. चावलों को कई रंगों में रंग कर भी रंगोली बना सकते हैं. समतल रंगोली बनाएं, स्थान को अच्छी तरह धो कर सुखा लें. अगर आप को रंगोली बनानी नहीं आती तो कोई बात नहीं, मार्केट में डिजाइनर खांचे मौजूद हैं.

रही बात खरीदारी की, तो शौपिंग लोकल मार्केट के बजाय थोक बाजारों से करें. इन जगहों से सस्ता और वैरायटी वाला सामान मिलेगा. सजावटी कैंडल्स जहां 50 से 350 रुपए के बीच मिलती हैं वहीं रंगोली के पैटर्न स्टिकर्स आप को महज 15 से 20 रुपए में मिल जाएंगे. इस के अलावा सजावट की लरें और कैंडल भी 50 रुपए से शुरू हो कर 800 रुपए तक में मिल जाएंगी. दीवारों पर लगाने के लिए चाइनीज 3डी पेंटिंग्स भी 40 रुपए से ले कर 500 रुपए तक में खरीदी जा सकती हैं.

कुल मिला कर इस दीवाली पर आप अपने घर को बिना किसी इंटीरियर डिजाइनर की मदद के भी रंग, रोशनी, और फूलों से न सिर्फ महका व सजा सकते हैं बल्कि इस त्योहार को सजावट के खास अंदाज से कुछ अलग और यादगार भी

Festival Special: ऐसे करें नकली मिठाई की पहचान

अभी भी त्योहार का मजा मिठाइयों से ही आता है. केवल खुद खाने में ही नहीं, फैस्टिवल में मिठाइयां उपहार में भी देने का रिवाज है. दशहरा से ले कर दीवाली तक मिठाइयों की खरीदारी सब से अधिक होती है. इन की दुकानों के आगे लगी भीड़ इस बात की गवाह होती है कि लोग फैस्टिवल सीजन में कितनी मिठाई खरीदते हैं. मगर मिठाई की बढ़ी हुई खपत को पूरा करने और ज्यादा मुनाफे के लिए फैस्टिव सीजन में नकली मिठाई बनाने का काम बढ़ जाता है. मिठाई में सब से ज्यादा खोया ही नकली यानी मिलावटी होता है. इस के अलावा मिठाई में डाला जाने वाला रंग भी नकली होता है. बेसन और बूंदी से तैयार होने वाले लड्डू और बालू शाही तक मिलावटी हो जाती हैं.

यही वजह है कि अब मिठाई कम खरीदी जा रही है. अब ज्यादातर लोग ड्राईफ्रूट्स, चौकलेट और मेवे से तैयार मिठाई उपहार में देने लगे हैं. यह महंगी होने के बावजूद लोगों की पहली पसंद बनती जा रही है.

मिलावट की वजह से फैस्टिवल में मिठाई का मजा किरकिरा न हो ऐसे में उसे खाने से पहले उस की जांच कर लेनी जरूरी होती है. अब यह जांच आप खुद भी कर सकते हैं, जिस से सेहत को नुकसान नहीं होता है.

1. कैसे बनता है नकली खोया

1 किलोग्राम दूध से सिर्फ 200 ग्राम खोया ही निकलता है. इस से खोया बनाने वालों और व्यापारियों को ज्यादा फायदा नहीं हो पाता. अत: ज्यादा लाभ के लिए मिलावटी खोया बनाया जाता है. इसे बनाने में शकरकंदी, सिंघाड़े का आटा, आलू और मैदे का इस्तेमाल होता है. आलू का प्रयोग सब से ज्यादा होता है.

नकली खोए से बनने वाली मिठाई जल्दी खराब हो जाती है. इस के अलावा नकली खोया बनाने में स्टार्च, आयोडीन और आलू इसलिए मिलाया जाता है ताकि खोए का वजन बढ़ जाए. इस के अलावा खोए का वजन बढ़ाने के लिए उस में आटा भी मिलाया जाता है.

नकली खोया असली खोए की तरह दिखे इस के लिए उस में कैमिकल भी मिलाया जाता है. कुछ दुकानदार मिल्क पाउडर में वनस्पति घी मिला कर खोया तैयार करते हैं. इस के लिए सिंथैटिक दूध का प्रयोग किया जाता है. फैस्टिवल से पहले बाजार में सिंथैटिक दूध का भी आतंक बढ़ जाता है.

सिंथैटिक दूध बनाने के लिए सब से पहले उस में यूरिया डाल कर उसे हलकी आंच पर उबाला जाता है. उस के बाद उस में कपड़े धोने वाला डिटर्जैंट, सोडा स्टार्च, वाशिंग पाउडर आदि मिलाया जाता है. उस के बाद थोड़ा असली दूध भी मिलाया जाता है. इस दूध से तैयार होने वाला खोया सब से खराब होता है.

2. शरीर को नुकसान देती मिलावटी मिठाई

मिलावटी खोए और सिंथैटिक दूध से फूड पौइजनिंग हो सकती है. इस से उलटी और दस्त की शिकायत भी हो सकती है. ये किडनी और लिवर पर भी बहुत असर डालते हैं. इन से स्किन से जुड़ी बीमारी भी हो सकती है. अधिक मात्रा में नकली मावे से बनी मिठाई खाने से लिवर को भी नुकसान पहुंच सकता है. लिवर का साइज बढ़ जाता है. इस से कैंसर तक का खतरा हो सकता है. ऐसे में यह जरूरी है कि खाने से पहले असली दूध और नकली दूध में फर्क करना समझ लें. इस के लिए थोड़ा सजग रह कर असली और नकली दूध में फर्क कर सकते हैं.

सिंथैटिक दूध से साबुन जैसी गंध आती है, जबकि असली दूध में कोई खास गंध नहीं आती. असली दूध का स्वाद हलका मीठा होता है जबकि नकली दूध का स्वाद डिटर्जैंट और सोडा मिला होने की वजह से कड़वा हो जाता है.

इस के साथ ही साथ असली दूध स्टोर करने पर अपना रंग नहीं बदलता जबकि नकली दूध कुछ वक्त के बाद पीला पड़ने लगता है. अगर असली दूध में यूरिया भी हो तो यह हलके पीले रंग का ही होता है. वहीं अगर सिंथैटिक दूध में यूरिया मिलाया जाए तो यह गाढ़े पीले रंग का दिखने लगता है. अगर असली दूध को उबालें तो उस का रंग नहीं बदलता, वहीं नकली दूध उबालने पर पीले रंग का हो जाता है. असली दूध को हाथों के बीच रगड़ने पर कोई चिकनाहट महसूस नहीं होगी. मिलावट का यह महाजाल त्योहारों के मौसम में खासतौर से रचा जाता है. इस में मिठाई, मावा, दूध, पनीर और घी के तो पूरे पैसे लिए जाते हैं, लेकिन इस के बदले मिलती बीमारियां हैं.

3. आसान है असली-नकली की पहचान

दूध में मिलावट की पहचान करना आसान है. थोड़े से दूध में बराबर मात्रा में पानी मिलाएं. अगर उस में झाग आए तो समझ लें कि इस में डिटर्जैंट की मिलावट है. सिंथैटिक दूध की पहचान करने के लिए दूध को हथेलियों के बीच रगड़ें. अगर साबुन जैसा लगे तो दूध सिंथैटिक हो सकता है. सिंथैटिक दूध गरम करने पर हलका पीला हो जाता है.

ऐेसे ही मिलावटी खोए की पहचान के लिए फिल्टर पर आयोडीन की 2-3 बूंदें डालें. अगर वह काला पड़ जाए तो समझ लें कि मिलावटी है. खोया अगर दानेदार है तो वह मिलावटी हो सकता है. इस की पहचान के लिए उंगलियों के बीच उसे मसलें. दाने जैसे लगें तो खोया मिलावटी है.

मिलावटी घी की पहचान के लिए उस में कुछ बूंदें आयोडीन टिंचर की मिला दें. अगर घी का रंग नीला हो जाए तो वह मिलावटी हो सकता है.

पनीर को पानी में उबाल कर ठंडा कर लें. इस में कुछ बूंदें आयोडीन टिंचर की डालें. अगर पनीर का रंग नीला हो जाए तो समझ लें कि वह मिलावटी है. मिठाई पर चढ़े चांदी के वर्क में ऐल्यूमिनियम धातु की मिलावट की जाती है, जो सेहत के लिए अच्छी नहीं होती. ऐल्यूमिनियम की मिलावट की आसानी से जांच की जा सकती है. चांदी के वर्क को जलाने से वह उतने ही वजन का छोटे से गेंद जैसा हो जाता है. अगर वर्क मिलावटी हुआ तो वह स्लेटी रंग का जला हुआ कागज बन जाएगा.

चौकलेट, कौफी या चौकलेट पाउडर में चिकोरी और गुड़ की मिलावट की जाती है. चौकलेट का पाउडर बना लें और उस पाउडर पर 1 गिलास पानी छिड़कें. कौफी और चौकलेट पाउडर पानी के ऊपर तैरने लगेगा और चिकोरी नीचे बैठ जाएगी. यही हाल गुड़ की मिलावट का है. पानी में चौकलेट डालिए. अगर गुड़ हुआ तो चिकना मीठा सा लिसलिसा पदार्थ पानी में घुल जाएगा.

Festive Special: ब्रेड क्रम्ब्स से बनाएं ये टेस्टी डिशेज

ब्रेड का उपयोग प्रत्येक घर में किया जाता है. आजकल तो मैदा से बनने वाली प्लेन ब्रेड के अतिरिक्त गार्लिक, आटा, ब्राउन और  मल्टीग्रेन जैसी अनेकों ब्रेड बाजार में उपलब्ध है. अक्सर ब्रेड से डिशेज बनाते समय उनके किनारों को काटकर अलग कर दिया जाता है. कई बार तो ये ब्रेड के किनारे  इतनी अधिक मात्रा में इकट्ठे हो जाते हैं कि समझ ही नहीं आता कि इनका क्या करें. आमतौर पर ब्रेड के इन किनारों को पीसकर ब्रेड बना लिया जाता है और फिर इन ब्रेड क्रम्ब्स को डिश के ऊपर लपेटने या डिश को थिक टैक्सचर देने के लिए किया जाता है परन्तु आज हम आपको ब्रेड क्रम्ब्स से बनने वाली दो डिशेज के बारे में बता रहे हैं जिन्हें बनाना तो बेहद आसान है ही साथ ही ये बहुत स्वादिष्ट भी बनतीं हैं. तो आइए देखते हैं कि इन्हें कैसे बनाते हैं-

-ब्रेड क्रम्ब्स गुलाबजामुन

कितने लोंगों के लिए          4

बनने में लगने वाला समय     30 मिनट

मील टाइप                          वेज

सामग्री

ब्रेड क्रम्ब्स  2 कटोरी

शकर 1 कटोरी

पानी    1/2 कटोरी

घी    पर्याप्त मात्रा में

ताजी मलाई युक्त दूध  3/4 कटोरी

बारीक कटी मेवा  1टेबलस्पून

इलायची पाउडर  1/2 टीस्पून

विधि

ब्रेड क्रम्ब्स में दूध को धीरे धीरे मिलाकर आटे जैसा गूंथ लें. अब शकर में पानी और इलायची पाउडर डालकर चिपचिपी सी चाशनी तैयार करें. तैयार ब्रेड के मिश्रण में से छोटी सी लोई लेकर हथेली पर फैलाएं और बीच में थोड़ी सी कटी मेवा रखकर चारों तरफ से अच्छी तरह बंद कर दें.इसी प्रकार सारे बॉल्स तैयार कर लें. गर्म घी में इन बॉल्स को डालकर धीमी आंच पर सुनहरा होने तक तलें. गर्म गर्म तले गुलाबजामुन को चाशनी में डालें. 2 घण्टे के बाद चाशनी में से निकालकर सर्व करें.

-ब्रेड क्रम्ब्स मठरी

कितने लोंगों के लिए          6

बनने में लगने वाला समय    30 मिनट

मील टाइप                         वेज

सामग्री

ब्रेड क्रम्ब्स  1 कटोरी

सूजी  1/4 कटोरी

गेहूं का आटा   1/4 कटोरी

मैदा 1/4 कटोरी

नमक  स्वादानुसार

अजवाइन  1/4 टीस्पून

बारीक कटा प्याज  1

अदरक, हरी मिर्च, लहसुन पेस्ट 1टीस्पून

कसूरी मेथी  1 टेबलस्पून

तलने के लिए तेल   पर्याप्त मात्रा में

विधि

ब्रेड क्रम्ब्स में मैदा, बेसन, आटा सभी मसाले, नमक, अदरक, लहसुन हरी मिर्च पेस्ट, 2 टेबलस्पून तेल और कसूरी मैथी को भली भांति मिलाएं. धीरे धीरे पानी डालते हुए कड़ा आटा गूंथे. इसे ढककर आधे घण्टे के लिए रख दें. आधे घण्टे बाद बड़ी सी लोई लेकर चकले पर बेलें. मनचाहे आकार में मठरी काटकर गर्म तेल में मद्धिम आंच पर सुनहरा होने तक तलकर बटर पेपर पर निकालें. एयरटाइट जार में भरकर प्रयोग करें.

लौट जाओ सुमित्रा: भाग 1- उसे मुक्ति की चाह थी पर मुक्ति मिलती कहां है

‘‘मैं मुक्ति चाहती हूं.’’

‘‘किस से?’’

‘‘सब से.’’

‘‘मनुष्यों से, अपने परिवेश से या भौतिक वस्तुओं से?’’

‘‘अपने परिवेश से, उस में रहने वाले लोगों से.’’

‘‘यानी सुखसुविधाएं नहीं छोड़ना चाहती, केवल लोगों का त्याग करना चाहती हो. इस के पीछे तुम्हारा क्या कोई खास मकसद है?’’

‘‘मैं उन्हें त्यागना नहीं चाहती. न इसे छोड़ना कह सकते हैं. केवल मुक्ति चाहती हूं ताकि छू सकूं, उन्मुक्त आकाश को.’’

‘‘इस के लिए किसी का त्याग करना आवश्यक नहीं है, साथ रहतेरहते भी खुली हवा को भीतर समेटा जा सकता है. कौन रोकता है तुम्हें आकाश छूने से. शायद तुम्हारी सोच में ही जंग लग गया है या तुम मुक्ति की परिभाषा से अपरिचित हो.’’

‘‘नहीं, यह सच नहीं है. उन्मुक्त आकाश को छूने के लिए अपने ही पैरों की जरूरत होती है, किसी सहारे या बैसाखी की नहीं. इसलिए मुझे मुक्ति चाहिए. संबंधों की तटस्थता या घुटन नहीं.’’

‘‘यह तो पलायन होगा.’’

‘‘हां, हो भी सकता है, और नहीं भी.’’

‘‘यानी?’’

‘‘मुक्ति मार्ग भी तो है, दिशा भी तो है. फिर पलायन कैसा?’’ निस्पृहता का गुंजन उस की आवाज में निहित था.

‘‘फिर घरपरिवार, पति, बच्चे, समाज का क्या होगा, उन के प्रति क्या तुम्हारी कोई जिम्मेदारी नहीं है?’’

‘‘जिम्मेदारी अशक्त व बेसहारों की होती है. वे सक्षम हैं, अपनी जरूरतें स्वयं पूरी कर सकते हैं.’’

‘‘क्या तुम्हें उन की जरूरत नहीं?’’

‘‘कभी महसूस होती थी, पर अब नहीं. सब अपनाअपना जीवन जीना चाहते थे. कोई अतिक्रमण, न व्यवधान अपेक्षित है. फिर निरर्थक ही क्यों अपनी उपस्थिति को ले कर जीऊं.’’

‘‘निरर्थकता कैसी, जगह स्थापित करनी पड़ती है, अपनी उपस्थिति का बोध कराना पड़ता है, वही तो संबल होती है. पलायन करने से क्या निरर्थकता का बोध कम हो जाएगा? नहीं, बल्कि और बढ़ेगा ही. पीछे भागने के बजाय अपने को पुख्ता कर सब में आत्मविश्वास बांटो, फिर देखना तुम कैसे महत्त्वपूर्ण हो जाओगी.’’

‘‘ऐसा कुछ नहीं होता. यह मात्र स्वयं को छलने का प्रयास है. अपने ही अस्तित्व का बोध कराने के लिए अगर संघर्ष करना पड़े तो उस की क्या महत्ता रह जाएगी.’’

‘‘यह छल नहीं है, बल्कि तुम्हारे भीतर का कोई भटकाव है वरना जीवन के प्रति इतनी घोर निराशा संभव नहीं है. क्या पाना चाहती हो?’’ प्रश्नकर्ता विचलित मन को भांप गया था. विचलित मन में ही ऐसे निरर्थक, दिशाहीन भावों का वास होता है. उफनती लहरें ही उद्वेग का प्रतीक होती हैं. जब तक इन में कोई कंकड़ न फेंके या तूफान न आए, वे शांत बनी रहती हैं.

‘‘मैं ने कहा न, मुझे मुक्ति चाहिए अपनेआप से.’’

‘‘वह तो मृत्यु पर ही संभव है.’’

‘‘फिर?’’

प्रश्नदरप्रश्न, वरना समाधान कैसे संभव होगा. भीतर तक टटोलना हो तो शब्दों से भेदना अनिवार्य होता है. संवादहीनता की स्थिति जड़ बना देती है, भटकाव बढ़ता जाता है. मन के भीतरबाहर न जाने कितनी गुफाएं होती हैं, सब के अंधेरे चीर कर वहां तक रोशनी पहुंचाना तो संभव नहीं. लेकिन जब निश्चित कर लिया है कि दिशाभ्रमित इंसान को राह सुझानी है तो फिर पीछे क्या हटना.

‘‘यानी एक अंतहीन दौड़ पर निकलना चाहती हो? रुकोगी कहां, कुछ निश्चित किया है?’’

‘‘दौड़ कैसी, यह तो विराम होगा. उस के लिए कुछ भी निश्चित करना अनिवार्य नहीं है.’’

‘‘नहीं, तुम भ्रमित हो, अपने को तोड़मरोड़ कर अपनी जिम्मेदारियों से भाग कर तुम विराम की घोषणा कर रही हो? दौड़ तो इस के बाद ही यात्रा है- दिशाहीन, उद्देश्यहीन दौड़. घरपरिवार, समाज, नातेरिश्तों को तोड़ कर आखिर किस की खातिर जीना चाहती हो? अपनी?’’

‘‘नहीं, बिलकुल नहीं, अपने से मोह कतई नहीं है. मैं तो मर जाना चाहती हूं.’’

‘‘यानी फिर पलायन? डर कर, घबरा कर भागना ही पलायन है. मुक्ति तो उद्देश्यों की पूर्ति से मिलती है. पहले अपने मन को शांत व नियंत्रित करो.’’

‘‘लेकिन?’’

विस्मित है वह कैसे समझाए कि मन के उद्वेग तो कब के कुचले पड़े हैं. मन को नियंत्रित करतेकरते ही तो घबरा गई है वह. कुचली हुई भावनाएं सिर उठाने लगी हैं, तभी तो वह परेशान है. चली जाना चाहती है सारी उलझनों से बच कर. जब पाने की राह अवरुद्ध हो तो खोने की राह तलाशने में कैसी झिझक.

‘‘उत्तर तुम्हें स्वयं ही ढूंढ़ना होगा. खुद को इस तरह समेटने का अर्थ है स्वयं को आत्मकेंद्रित करना.’’

‘‘उत्तर मिलता तो यों नैराश्य न आ जकड़ती. जड़ता सहभागिता न होने लगती. अपने को झिंझोड़ कर थक गई हूं.’’ स्वर भीग गया था जैसे बड़े जतन से संभाला रुदन बहने को आतुर है.

कब तक कोई बांध सकता है संवेगों को. ज्वालामुखी तक फट जाता है, तब मानवीय संवेदना तो उस के सामने बहुत क्षीण है. वह तो जरा से दुख से ही भरभरा कर ढहने लगती है.

‘‘लौट जाओ सुमित्रा. जाओ और खोजो उस उत्तर को वह तुम्हारे भीतर ही मिलेगा लेकिन अपने अंतर्द्वद्वों से लड़ना होगा. अपने मनोभावों से तुम्हें संघर्ष करना होगा. उस के लिए अपने परिवेश में लौटना अत्यंत आवश्यक है. सब से जुड़ कर ही तलाश संभव है, एकांत में तुम किस जिजीविषा को शांत करने निकली हो?’’

धीरेधीरे शाम होने लगी थी. हवा के झोंके सुखद एहसास से भर रहे थे. पक्षी भी अपने घोंसलों में लौटने को तैयार थे. बीतता हर पल अपने साथ सब को घरों में लौटा रहा था. संध्या की बेला भी अजीब है. पहरेदार की तरह आ खड़ी होती है सब को भीतर खदड़ने के लिए. कोई चतुराई दिखा उसे धोखा देने का प्रयत्न करता है तो वह रात को बिखरा देती है. अंधेरे से भला किसे डर नहीं लगता. सारे प्रपंच धरे रह जाते हैं और हर ओर सन्नाटा फैल जाता है. भयानक खामोशी के आगे सारी चहलपहल ध्वस्त हो जाती है.

लेकिन सुमित्रा क्यों नहीं लौट पा रही है? क्या उसे सन्नाटे से भय नहीं लगता या उस के भीतर और गहरा सन्नाटा है जो व्याप्त खामोशी को चोट देने को आकुल है, तभी तो शायद वह निकली है उस अनदेखी, अनजानी मुक्ति की तलाश में जिस का ओरछोर स्वयं उसे मालूम नहीं है.

घोर पीड़ा का उद्भव सदा एक रहस्य ही रहा है. अनुभूति तो स्पष्ट होती है क्योंकि वह भीतरबाहर सब जगह बजती रहती है किसी दुखद आवाज की तरह, किंतु उस के अंकुर के फूटने का आभास तभी हो सकता है जब हम सतर्क हों. पीड़ा सामान्य स्थिति की द्योतक नहीं है, वही तो है जो सारी विमुखता प्रियजनों से विमुखता, अपने कर्मकर्तव्यों से विमुखता, की उत्तरदायी है.

‘‘मैं लौटना नहीं चाहती. अगर ऐसा होता तो निकलती ही क्यों. मैं ने बहुत चाहा कि अपने भीतर के कोलाहल को हृदय के कपाटों से बंद कर दूं पर शायद कमजोर थी, इसलिए ऐसा न कर सकी. तभी तो फट पड़ा है कोलाहल. अब कैसे शांत करूं उसे? कोई रास्ता नहीं दिखा, तभी तो भागी चली आई मुक्ति की तलाश में.’’

‘‘पलायन कौन से कोलाहल को शांत कर सकता है, बल्कि और हलचल ही मचा देता है. कोरी शून्यता है जो तुम्हें लगता है कि भर जाएगी. रिक्तता की पूर्ति कैसे होगी? इस पूर्णता की प्राप्ति के लिए तुम कहां भागोगी? कोई दिशा निर्धारित की है क्या तुम ने?’’

‘‘मुझे कुछ सुझाई नहीं दे रहा है. अगर रोशनी की हलकी सी कौंध भी देख पाती तो यों आप के पास दौड़ी चली नहीं आती उत्तर पाने, समाधान ढूंढ़ने.’’

सुमित्रा की कातरता बढ़ती ही जा रही थी और रात की नीरवता भी.

संध्या तक जो हवा कोमल लग रही थी वही अब कंपकंपाने लगी थी. फरवरी की शामें चाहे गुनगुनी हों पर रातें अभी भी ठंडी थीं. रात का मौन और नींदों में प्रवेश होने के बाद बंद कपाटों से उत्पन्न सन्नाटा लीलने को आतुर था. कभीकभी कोलाहल से त्रस्त हो इंसान सिर्फ सन्नाटे की अपेक्षा करता है, उसे ढूंढ़ने के लिए स्थान खोजता है और कभी वही सन्नाटा उसे खंजर से भी अधिक नुकीला महसूस होता है. तब वही आतुर निगाहों से अपने आसपास किसी को देखने की चाह करने लगता है.

सुमित्रा क्या इन दोनों ही स्थितियों से परे है या फिर वह अनजान बन रही है ताकि किसी तरह कमजोर या लक्ष्यहीन न महसूस करे. तभी अपने आसपास के वातावरण के प्रति कितनी तटस्थ लग रही है. इसीलिए तो मात्र एक साड़ी में लिपटे होने पर भी ठंड उसे कंपा नहीं रही थी.

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