मुझे नहीं जाना: क्या वापस ससुराल गई अलका

शाम 7 बजे जब फोन की घंटी बजी तब ड्राइंगरूम में अलका, उस की मां गायत्री और पिता ज्ञानप्रकाश उपस्थित थे. फोन पर वार्तालाप अलका ने किया.

अलका की ‘हैलो’ के जवाब में दूसरी तरफ से भारी एवं कठोर स्वर में किसी पुरुष ने कहा, ‘‘मुझे अलका से बात करनी है.’’

‘‘मैं अलका ही बोल रही हूं. आप कौन?’’

‘‘मैं कौन हूं इस झंझट में न पड़ कर तुम उसे ध्यान से सुनो जो मैं तुम से कहना चाहता हूं.’’

‘‘क्या कहना चाहते हैं आप?’’

‘‘यही कि अपने पतिदेव को तुम फौरन नेक राह पर चलने की सलाह दो, नहीं तो खून कर दूंगा मैं उस का.’’

‘‘ये क्या बकवास कर रहे हो.’’

‘‘मैं बकवास न कर के तुम्हें चेतावनी दे रहा हूं. अलका मैडम,’’ बोलने वाले की आवाज क्रूर हो उठी, ‘‘अगर तुम्हारे पति राजीव ने फौरन मेरे दिल की रानी कविता पर डोरे डालने बंद नहीं किए तो जल्दी ही उस की लाश को चीलकौवे खा रहे होंगे.’’

‘‘ये कविता कौन है मैं नहीं जानती… और न ही मेरे पति का किसी से इश्क का चक्कर चल रहा है. आप को जरूर कोई गलतफहमी…’’

‘‘शंकर उस्ताद को कोई गलतफहमी कभी नहीं होती. मैं ने पूरी छानबीन कर के ही तुम्हें फोन किया है. अगर तुम अपने आप को विधवा की पोशाक में नहीं देखना चाहती हो तो उस मजनू की औलाद राजीव से कहो कि वह मेरी जान कविता के साए से भी दूर रहे.’’

अलका कुछ और बोल पाती इस से पहले ही फोन कट गया.

अपने मातापिता के पूछने पर अलका ने घबराई आवाज में वार्तालाप का ब्योरा उन्हें सुनाया.

गायत्री रोने ही लगीं. ज्ञानप्रकाश ने गुस्से से भर कर कहा, ‘‘तो राजीव इस कविता के चक्कर में उलझा हुआ है. मैं भी तो कहूं कि साल भर अभी शादी को हुआ नहीं और 2 महीने से पत्नी को मायके में छोड़ रखा है. जरूर उस ने इस कविता से गलत संबंध बना लिए हैं.’’

‘‘उस अकेले को दोष मत दो, जी,’’ गायत्री ने सुबकते हुए कहा, ‘‘दामादजी ने तो दसियों बार इस मूर्ख के सामने वापस लौट आने की विनती की होगी, लेकिन इस की जिद के आगे उन की एक न चली.’’

‘‘अलका को कुसूरवार मत कहो. हमारी बेटी ने राजीव से प्रेमविवाह किया है. उसे सुखी रखना उस का कर्तव्य है. अगर अलका अलग घर में जाने की जिद पर अड़ी हुई है तो वह मेरी समझ से कुछ गलत नहीं कर रही,’’ कह कर ज्ञानप्रकाश अलका की तरफ देखने लगे.

‘‘पापा, आप ठीक कह रहे हैं. मैं ने नौकरानी बनने के लिए शादी नहीं की थी राजीव से,’’ अलका ने अपने मन की बात फिर दोहराई.

‘‘अलका, तुम राजीव को फोन कर के इसी वक्त यहां आने के लिए कहो. ऐसी डांट पिलाऊंगा मैं उसे कि इश्क का भूत फौरन उस के सिर से उतर कर गायब हो जाएगा,’’ ज्ञानप्रकाश की आंखों में चिंता व क्रोध के मिलेजुले भाव नजर आ रहे थे.

अलका राजीव को फोन करने के लिए उठ खड़ी हुई.

करीब घंटे भर बाद राजीव अपनी ससुराल पहुंचा. उस के पिता ओंकारनाथ और मां कमलेश भी उस के साथ आए थे. उन तीनों के चेहरों पर चिंता और तनाव के भाव साफ झलक रहे थे.

कुछ औपचारिक वार्तालाप के बाद ओंकारनाथ ने परेशान लहजे में ज्ञानप्रकाश से कहा, ‘‘बहू से फोन पर मेरी भी बात हुई थी. मुझे लगा कि वह किसी बात को ले कर बहुत परेशान है. इसलिए राजीव के साथ उस की मां और मैं ने भी आना उचित समझा.’’

‘‘ये अच्छा ही हुआ कि आप दोनों साथ आए हैं राजीव के. सारी बात आप दोनों को भी मालूम होनी चाहिए. शाम को 7 बजे हमारे यहां एक फोन आया था. फोन करने वाले ने हमें राजीव के बारे में बड़ी गलत व गंदी तरह की सूचना दी है,’’ ज्ञानप्रकाश ने नाराज अंदाज में राजीव को घूरना शुरू कर दिया था.

‘‘फोन किसी शंकर नाम के आदमी का था?’’ कमलेश के इस सवाल को सुन कर अलका और उस के मातापिता बुरी तरह से चौंक उठे.

‘‘आप को कैसे मालूम पड़ा उस का नाम, बहनजी?’’ गायत्री अचंभित हो उठीं.

‘‘क्योंकि उस ने शाम 6 बजे के आसपास हमारे यहां भी फोन किया था. राजीव और उस के पिता घर पर नहीं थे, इसलिए मेरी ही उस से बातें हो पाईं.’’

‘‘क्या कहा उस ने आप से?’’

‘‘उस ने आप से क्या कहा?’’ कमलेश ने उलट कर पूछा.

गायत्री के बजाय ज्ञानप्रकाश ने गंभीर हो कर उन के प्रश्न का जवाब दिया, ‘‘बहनजी, शंकर ऐसी बात कह रहा था जिस पर विश्वास करने को हमारा दिल तैयार नहीं है, लेकिन वह बहुत क्रोध में था और राजीव को गंभीर नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दे रहा था. इसलिए राजीव से हमें पूछताछ करनी ही पड़ेगी.’’

‘‘क्या वह किसी कविता नाम की लड़की से मेरे अवैध प्रेम संबंध होने की बात आप को बता रहा था?’’ राजीव गहरी उलझन और परेशानी का शिकार नजर आ रहा था.

अलका ने उस के चेहरे पर

पैनी नजरें गड़ा कर कहा, ‘‘हां,

कविता की ही बात कर रहा था वह. कौन है ये कविता?’’

‘‘मैं तो सिर्फ एक कविता को ही जानता हूं, जो मेरे विभाग में मेरे साथ काम करती है. तुम्हें याद है शादी के बाद हम एक रात नीलम होटल में डिनर करने गए थे. तब एक लंबी सी लड़की अपने बौयफैं्रड के साथ वहां आई थी. मैं ने तुम्हें उस से मिलाया था, अलका.’’

अलका ने अपनी सास की तरफ मुड़ कर कहा, ‘‘मम्मी, मैं ने आप से उस लड़की का जिक्र घर आ कर किया था. वह राजीव से बहुत खुली हुई थी. उसे ‘यार, यार’ कह कर बुला रही थी. वह अपने बौयफ्रैंड के साथ न होती तो राजीव से उस के गलत तरह के संबंध होने का शक मुझे उसी रात हो जाता. मेरा दिल कहता है कि राजीव जरूर उस के रूपजाल में फंस गया है और उस के पुराने प्रेमी शंकर ने क्रोधित हो कर उसे जान से मारने की धमकी दी है,’’ बोलते- बोलते अलका की आंखें डबडबा आईं, चेहरा लाल हो चला.

‘‘बेकार की बात मुंह से मत निकालो, अलका,’’ राजीव को गुस्सा आ गया, ‘‘घंटे भर से अपने मातापिता को यह बात समझाते हुए मेरा मुंह थक गया है कि कविता से मेरा कोई चक्कर नहीं चल रहा है. अब तुम भी मुझ पर शक कर रही हो. क्या तुम मुझे चरित्रहीन इनसान समझती हो?’’

‘‘अगर दाल में कुछ काला नहीं है तो ये शंकर क्यों जान से मार देने की धमकी तुम्हें दे रहा है?’’ अलका ने चुभते स्वर में पूछा.

‘‘उस का दिमाग खराब होगा. वह पागल होगा. अब मैं कैसे जानूंगा कि वह क्यों ऐसी गलतफहमी का शिकार हो गया है?’’ राजीव चिढ़ उठा.

‘‘अगर वह सही कह रहा हो तो तुम कौन सा अपने व कविता के प्रेम की बात सीधेसीधे आसानी से कुबूल कर लोगे?’’ अलका ने जवाब दिया.

‘‘तब मेरे पीछे जासूस लगवा कर मेरी इनक्वायरी करा लो, मैडम,’’ राजीव गुस्से से फट पड़ा, ‘‘मैं दोषी नहीं हूं, लेकिन मैं एक सवाल तुम से पूछना चाहता हूं. तुम 2 महीने से मुझ से दूर यहां मायके में जमी बैठी हो. ऐसी स्थिति में अगर मैं किसी दूसरी लड़की के चक्कर में पड़ भी जाता हूं तो तुम्हें परेशानी क्यों होनी चाहिए? जब तुम्हें मेरी फिक्र ही नहीं है तो मैं कुछ भी करूं, तुम्हें क्या लेनादेना उस से?’’

‘‘मेरा दिल कह रहा है कि तुम ने मुझ पर लौटने का दबाव बनाने के लिए ही शंकर वाला नाटक किया है. लेकिन तुम मेरी एक बात ध्यान से सुन लो. जब तक तुम मेरे मनोभावों को समझ कर उचित कदम नहीं उठाओगे तब तक मैं तुम्हारे पास नहीं लौटूंगी,’’ अलका झटके से उठ कर अपने कमरे में चली गई.

चायनाश्ता ले कर मेहमान अपने घर लौटने लगे. चलतेचलते ओंकारनाथ ने स्नेह भरा हाथ अलका के सिर पर रख कर कहा, ‘‘बहू, मैं ने कुछ प्रापर्टी डीलरों से कह दिया है तुम दोनों के लिए किराए का मकान ढूंढ़ने के लिए. तुम दोनों का साथसाथ सुखी रहना सब से ज्यादा महत्त्वपूर्ण है. किराए का मकान मिलने तक अगर तुम घर लौट आओगी तो हम सब को बहुत खुशी होगी.’’

जवाब में अलका तो खामोश रही लेकिन गायत्री ने कहा, ‘‘ये आगामी इतवार को पहुंच जाएगी आप के यहां.’’

मेहमानों के चले जाने के बाद अलका ने कहा, ‘‘मां, एक तो मुझे इस कविता के चक्कर की तह तक पहुंचना है. दूसरे, अगर मैं राजीव के साथ रहूंगी तो उस पर मकान जल्दी ढूंढ़ने के लिए दबाव बनाए रख सकूंगी. इन बातों को ध्यान में रख कर ही मैं ससुराल लौट रही हूं.’’

शुक्रवार की दोपहर में एक अजीब सा हादसा घटा. अलका अपने कमरे में आराम कर रही थी कि खिड़की का कांच टूट कर फर्श पर गिर पड़ा. वह भाग कर ड्राइंगरूम में पहुंची. तभी उस के पिता ने घबराई हालत में बाहर से बैठक में प्रवेश किया और अलका को देख कर कांपती आवाज में उस से बोले, ‘‘शंकर दादा के 2 गुंडों ने पत्थर मार कर शीशा तोड़ा है. पत्थर पर कागज लिपटा है…उसे ढूंढ़. उस में हमारे लिए संदेश लिख कर भेजा है शंकर दादा ने.’’

पत्थर पर लिपटे कागज में टाइप किए गए अक्षरों में लिखा था :

‘अलका मैडम,

अपने पति राजीव की करतूतों का फल भुगतने को तैयार हो जाओ. आज शीशा तोड़ा गया है, कल उस का सिर फूटेगा. कविता सिर्फ मेरी है. उस पर गंदी नजर डालने वाले के पूरे खानदान को तबाह कर दूंगा मैं, शंकर दादा.’

पत्र पढ़ने के बाद गायत्री, ज्ञानप्रकाश व अलका के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं.

पूरी घटना की खबर दोपहर में ही ओंकारनाथ के परिवार तक भी पहुंच गई. खबर सुन कर सभी मानसिक तनाव व चिंता का शिकार हो गए. सब से ज्यादा मुसीबत का सामना राजीव को करना पड़ा. हर आदमी उसे कविता से अवैध प्रेम संबंध रखने का दोषी मान रहा था. वह सब से बारबार कहता कि कविता से उस का कोई गलत संबंध नहीं है, पर कोई उस की बात पर विश्वास करने को राजी न था.

रविवार की सुबह अलका अपने पिता के साथ ससुराल पहुंच गई.

रात को शयनकक्ष में पहुंच कर उन दोनों के बीच बड़ी गरमागरमी हुई. राजीव अपने को दोषी नहीं मान रहा था और अलका का कहना था कि कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है जो शंकर उस्ताद यों गुस्से से फटा जा रहा है.

आखिरकार राजीव ने अलका को मना ही लिया. तभी उस ने अपनेआप को राजीव की बांहों के घेरे में कैद होने

दिया था.

पूरा एक सप्ताह शांति से गुजरा और फिर शंकर दादा की एक और हरकत ने उन की शांति भंग कर डाली. किसी ने रात में उस की मोटरसाइकिल की सीट को फाड़ डाला था. हैंडिल पर लगे शीशे फोड़ दिए थे. ऊपर से उस पर कूड़ा बिखेरा गया था.

उस के हैंडिल पर एक चिट लगी हुई थी जिस पर छपा था, ‘अब भी अपनी जलील हरकतों से बाज आ जा, नहीं तो इसी तरह तेरा पेट फाड़ डालूंगा.’

राजीव चिट उखाड़ कर उसे गायब कर पाता उस से पहले ही ओंकारनाथ वहां पहुंच गए. उन के शोर मचाने पर पूरा घर फिर वहां इकट्ठा हो गया. जो भी राजीव की तरफ देखता, उस की ही नजरों में शिकायत व गुस्से के भाव होते.

शंकर दादा का खौफ सभी के दिल पर छा गया. दिनरात इसी विषय पर बातें होतीं. राजीव को उस के घर व ससुराल का हर छोटाबड़ा सदस्य चौकन्ना रहने की सलाह देता.

शंकर दादा का अगला कदम न जाने क्या होगा, इस विषय पर सोचविचार करते हुए सभी के दिलों की धड़कनें बढ़ जातीं.

लगभग 10 दिन बिना किसी हादसे के गुजर गए. लेकिन ये खामोशी तूफान के आने से पहले की खामोशी सिद्ध हुई.

एक रात राजीव और अलका 10 बजे के आसपास घर लौटे. एक मारुति वैन उन के घर के गेट के पास खड़ी थी, इस पर उन दोनों ने ध्यान नहीं दिया.

राजीव की मोटरसाइकिल के रुकते ही उस वैन में से 3 युवक निकल कर बड़ी तेज गति से उन के पास आए और दोनों को लगभग घेर कर खड़े हो गए.

‘‘क…कौन हैं आप लोग? क्या चाहते हैं?’’ राजीव की आवाज डर के मारे कांप उठी.

‘‘अपना परिचय ही देने आए हैं हम तुझे, मच्छर,’’ बड़ीबड़ी मूंछों वाले ने दांत पीसते हुए कहा, ‘‘और साथ ही साथ सबक भी सिखा कर जाएंगे.’’

फिर बड़ी तेजी व अप्रत्याशित ढंग से एक अन्य युवक ने अलका के पीछे जा कर एक हाथ से उस का मुंह यों दबोच लिया कि एक शब्द भी उस के मुंह से निकलना संभव न था. बड़ीबड़ी मूंछों वाले ने राजीव का कालर पकड़ कर एक झटके में कमीज को सामने से फाड़ डाला. दूसरे युवक ने उस के बाल अपनी मुट्ठी में कस कर पकड़ लिए.

‘‘हमारे शंकर दादा की चेतावनी को नजरअंदाज करने की जुर्रत कैसे हुई तेरी, खटमल,’’ मूंछों वाले ने आननफानन में 5-7 थप्पड़ राजीव के चेहरे पर जड़ दिए, ‘‘बेवकूफ इनसान, ऐसा लगता है कि न तुझे अपनी जान प्यारी है, न अपने घर वालों की. कविता भाभी पर डोरे डालने की सजा के तौर पर क्या हम तेरी पत्नी का अपहरण कर के ले जाएं?’’

‘‘मैं सौगंध खा कर कहता हूं कि कविता से मेरा कोई प्रेम का चक्कर नहीं चल रहा है. आप मेरी बात का विश्वास कीजिए, प्लीज,’’ राजीव उस के सामने गिड़गिड़ा उठा.

2 थप्पड़ और मार कर मूंछों वाले ने क्रूर लहजे में कहा, ‘‘बच्चे, आज हम आखिरी चेतावनी तुझे दे रहे हैं. कविता भाभी से अपने सारे संबंध खत्म कर ले. अगर तू ने ऐसा नहीं किया तो तेरी इस खूबसूरत बीवी को उठा ले जाएंगे हम शंकर दादा के पास. बाद में जो इस के साथ होगा, उस की जिम्मेदारी सिर्फ तेरी होगी, मजनू की औलाद.’’ फिर उस ने अपने साथियों को आदेश दिया, ‘‘चलो.’’

एक मिनट के अंदरअंदर वैन राजीव व अलका की नजरों से ओझल हो गई. वैन का नंबर नोट करने का सवाल ही नहीं उठा क्योंकि नंबर प्लेट पर मिट्टी की परत चिपकी हुई थी.

पूरे घटनाक्रम की जानकारी पा कर ज्ञानप्रकाश व ओंकारनाथ के परिवारों में चिंता और तनाव का माहौल बन गया. 3 दिन बाद अलका के मातापिता ने सब को रविवार के दिन अपने घर लंच पर आमंत्रित किया.

कुछ मीठा ले आने के लिए ज्ञानप्रकाश और ओंकारनाथ बाजार की तरफ चल दिए. रास्ते में ज्ञानप्रकाश ने तनाव भरे लहजे में अपने समधी से पूछा, ‘‘अलका कैसी चल रही है?’’

ओंकारनाथ ने मुसकरा कर जवाब दिया, ‘‘बिलकुल ठीक है वह. कल मैं ने राजीव से कहा कि जा कर वह मकान देख आओ जिस का पता प्रापर्टी डीलर ने बताया है. अलका ने मेरी बात सुन कर फौरन कहा कि वह किसी किराए के मकान में जाने की इच्छुक नहीं है. उस का ऐसा ‘मुझे नहीं जाना’ वाला कथन सुन कर मुझे अपनी मुसकान को छिपाना बहुत मुश्किल हो गया था दोस्त. हमारी योजना सफल रही है.’’

‘‘यानी कि अलका की अकेले रहने की जिद समाप्त हुई?’’ ज्ञानप्रकाश एकाएक प्रसन्न नजर आने लगे थे.

‘‘बिलकुल खत्म हुई. सुनो, हमारा कितना नुकसान हुआ है कुल मिला कर?’’ ओंकारनाथ ने जानना चाहा.

‘‘छोड़ो यार,’’ ज्ञानप्रकाश ने कहा, ‘‘मेरी बेटी अलका का जो खून सूख रहा होगा आजकल उस की कीमत क्या रुपयों में आंकी जा सकती है समधी साहब.’’

‘‘ज्ञानप्रकाश, हमतुम अच्छे दोस्त न होते तो अलका की अलग रहने की जिद से पैदा हुई समस्या का समाधान इतनी आसानी से नहीं हो पाता. अब बहू सब के बीच रह कर घरगृहस्थी चलाने के तरीके बेहतर ढंग से सीख जाएगी और चार पैसे भी जुड़ जाएंगे उन के पास,’’ ओंकारनाथ ने अपने समधी के कंधे पर हाथ रख कर अपना मत व्यक्त किया.

‘‘आप का लाखलाख धन्यवाद कि उस के सिर से अलग होने का भूत उतर गया,’’ ज्ञानप्रकाश ने राहत की गहरी सांस ली.

‘‘मुझे धन्यवाद देने के साथसाथ अपने दोस्त के बेटे को भी धन्यवाद दो,  जिस ने शंकर उस्ताद की भूमिका में ऐसी जान डाल दी कि उस की आवाज व हावभाव को याद कर के अलका के अब भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं.’’

‘‘नाटकों में भाग लेने का उस का अनुभव हमारे खूब काम आया.’’

‘‘उस को हिदायत दे देना कि जो उस ने किया है हमारे कहने पर, उस की चर्चा किसी से न करे.’’

‘‘मेरे बेटे व बहू को अगर कभी पता लग गया कि उन की रातों की नींद उड़ाने वाला नाटक हमारे इशारे पर खेला गया था तो मेरा तो बुढ़ापा बिगड़ जाएगा. मैं कभी एक शब्द नहीं मुंह से निकालूंगा,’’ ओंकारनाथ ने संकल्प किया.

‘‘हम ने जो किया है, सब के भले को ध्यान में रख कर किया है, समधीजी. कांटे से कांटा निकल गया है. अब शंकर दादा गायब हो जाएंगे तो धीरेधीरे राजीव व अलका सामान्य होते चले जाएंगे. नतीजा अगर अच्छा निकले तो कुछ गलत कार्यशैली को उचित मानना समझदारी है,’’ ज्ञानप्रकाश की बात का सिर हिला कर ओंकारनाथ ने अनुमोदन किया और दोनों अपने को एकदूसरे के बेहद करीब महसूस करते हुए बाजार पहुंच गए.

फिर वही शून्य- भाग 1 : क्या शादी के बाद पहले प्यार को भुला पाई सौम्या

सुनहरी सीपियों वाली लाल साड़ी पहन कर जब मैं कमरे से बाहर निकली तो मुझे देख कर अनिरुद्ध की आंखें चमक उठीं. आगे बढ़ कर मुझे अपने आगोश में ले कर वह बोले, ‘‘छोड़ो, सौम्या, क्या करना है शादीवादी में जा कर? तुम आज इतनी प्यारी लग रही हो कि बस, तुम्हें बांहों में ले कर प्यार करने का जी चाह रहा है.’’

‘‘क्या आप भी?’’ मैं ने स्वयं को धीरे से छुड़ाते हुए कहा, ‘‘विशाल आप का सब से करीबी दोस्त है. उस की शादी में नहीं जाएंगे तो वह बुरा मान जाएगा. वैसे भी इस परदेस में आप के मित्र ही तो हमारा परिवार हैं. चलिए, अब देर मत कीजिए.’’

‘‘अच्छा, लेकिन पहले कहो कि तुम मुझे प्यार करती हो.’’

‘‘हां बाबा, मैं आप से प्यार करती हूं,’’ मेरा लहजा एकदम सपाट था.

अनिरुद्ध कुछ देर गौर से मेरी आंखों में झांकते रहे, फिर बोले, ‘‘तुम सचमुच बहुत अच्छी हो, तुम्हारे आने से मेरी जिंदगी संवर गई है. अपने आप को बहुत खुशनसीब समझने लगा हूं मैं. फिर भी न जाने क्यों ऐसा लगता है जैसे तुम दिल से मेरे साथ नहीं हो, कि जैसे कोई समझौता कर रही हो. सौम्या, सच बताओ, तुम मेरे साथ खुश तो हो न?’’

मैं सिहर उठी. क्या अनिरुद्ध ने मेरे मन में झांक कर सब देख लिया था? नहीं, ऐसा नहीं हो सकता. खुद को संयत कर मैं ने इतना ही कहा, ‘‘आप भी कैसी बातें करते हैं? मेरे खुश न होने का क्या कारण हो सकता है? इस वक्त मुझे बस, समय से पहुंचने की चिंता है और कोई बात नहीं है.’’

शादी से वापस आतेआते काफी देर हो गई थी. अनिरुद्ध तो बिस्तर पर लेटते ही सो गए, लेकिन मेरे मन में उथलपुथल मची हुई थी. पुरानी यादें दस्तक दे कर मुझे बेचैन कर रही थीं, ऐसे में नींद कहां से आती?

कितने खुशनुमा दिन थे वे…स्कूल के बाद कालिज में प्रवेश. बेफिक्र यौवन, आंखों में सपने और उमंगों के उस दौर में वीरांगना का साथ.

वीरांगना राणा…प्यार से सब उसे वीरां बुलाते थे. दूध में घुले केसर सी उजली रंगत, लंबीघनी केशराशि, उज्ज्वल दंतपंक्ति…अत्यंत मासूम लावण्य था उस का. जीवन को भरपूर जीने की चाह, समस्याओं का साहस से सामना करने का माद्दा, हर परिस्थिति में हंसते रहने की अद्भुत क्षमता…मैं उस की जीवंतता से प्रभावित हुए बिना न रह सकी. हम दोनों कब एकदूसरे के निकट आ गईं, खुद हमें भी न पता चला.

फिर तो कभी वह मेरे घर, कभी मैं उस के घर में होती. साथ नोट्स बनाते और खूब गप लड़ाते. मां मजाक में कहतीं, ‘जिस की शादी पहले होगी वह दूसरी को दहेज में ले जाएगी,’ और हम खिलखिला कर हंस पड़ते.

एक दिन वीरां ने मुझ से कहा, ‘आज भाई घर आने वाला है, इसलिए मैं कालिज नहीं चलूंगी. तू शाम को आना, तब मिलवाऊंगी अपने भाई से.’

वीरां का बड़ा भाई फौज में कैप्टन था और छुट्टी ले कर काफी दिन के बाद घर आ रहा था. इसी वजह से वह बहुत उत्साहित थी.

शाम को वीरां के घर पहुंच कर मैं ने डोरबेल बजाई और दरवाजे से थोड़ा टिक कर खड़ी हो गई, लेकिन अपनी बेखयाली में मैं ने देखा ही नहीं कि दरवाजा सिर्फ भिड़ा हुआ था, अंदर से बंद नहीं था. मेरा वजन पड़ने से वह एक झटके से खुल गया, मगर इस से पहले कि मैं गिरती, 2 हाथों ने मुझे मजबूती से थाम लिया.

मैं ने जब सिर उठा कर देखा तो देखती ही रह गई. वीरां जैसा ही उजला रंग, चौड़ा सीना, ऊंचा कद…तो यह था कैप्टन समर राणा. उस की नजरें भी मुझ पर टिकी हुई थीं जिन की तपिश से मेरा चेहरा सुर्ख हो गया और मेरी पलकें स्वत: ही झुक गईं.

‘लो, तुम तो मेरे मिलवाने से पहले ही भाई से मिल लीं. तो कैसा लगा मेरा भाई?’ वीरां की खनकती आवाज से मेरा ध्यान बंटा. उस के बाद मैं ज्यादा देर वहां न रह पाई, जल्दी ही बहाना बना कर घर लौट आई.

उस पूरी रात जागती रही मैं. उन बलिष्ठ बांहों का घेरा रहरह कर मुझे बेचैन करता रहा. एक पुरुष के प्रति ऐसी अनुभूति मुझे पहले कभी नहीं हुई थी. सारी रात अपनी भावनाओं का विश्लेषण करते ही बीती.

समर से अकसर ही सामना हो जाता. वह बहन को रोज घुमाता और वीरां मुझे भी साथ पकड़ कर ले जाती. दोनों भाईबहन एक से थे, ऊपर से सताने के लिए मैं थी ही. रास्ते भर मुझे ले कर हंसीठिठोली करते रहते, मुझे चिढ़ाने का एक भी मौका न छोड़ते. मगर मेरा उन की बातों में ध्यान कहां होता?

मैं तो समर की मौजूदगी से ही रोमांचित हो जाती, दिल जोरों से धड़कने लगता. उस का मुझे कनखियों से देखना, मुझे छेड़ना, मेरे शर्माने पर धीरे से हंस देना, यह सब मुझे बहुत अच्छा लगने लगा था. कभीकभी डर भी लगता कि कहीं यह खुशी छिन न जाए. मन में यह सवाल भी उठता कि मेरा प्यार एकतरफा तो नहीं? आखिर समर ने तो मुझे कोई उम्मीद नहीं दी थी, वह तो मेरी ही कल्पनाएं उड़ान भरने लगी थीं.

अपने प्रश्न का मुझे जल्दी ही उत्तर मिल गया था. एक शाम मैं, समर और वीरां उन के घर के बरामदे में कुरसी डाले बैठे थे तभी आंटी पोहे बना कर ले आईं, ‘मैं सोच रही हूं कि इस राजपूत के लिए कोई राजपूतनी ले आऊं,’ आंटी ने समर को छेड़ने के लहजे में कहा.

‘मम्मा, भाई को राजपूतनी नहीं, गुजरातिन चाहिए,’ वीरां मेरी ओर देख कर बडे़ अर्थपूर्ण ढंग से मुसकराई.

आंटी मेरी और समर की ओर हैरानी से देखने लगीं, पर समर खीज उठा, ‘क्या वीरां, तुम भी? हर बात की जल्दी होती है तुम्हें…मुझे तो कह लेने देतीं पहले…’

समर ने आगे क्या कहा, यह सुनने के लिए मैं वहां नहीं रुकी. थोड़ी देर बाद ही मेरे मोबाइल पर उस का फोन आया. अपनी शैली के विपरीत आज उस का स्वर गंभीर था, ‘सारी सौम्या, मैं खुद तुम से बात करना चाहता था, लेकिन वीरां ने मुझे मौका ही नहीं दिया. खैर, मेरे दिल में क्या है, यह तो सामने आ चुका है. अब अगर तुम्हारी इजाजत हो तो मैं मम्मीपापा से बात करूं. वैसे एक फौजी की जिंदगी तमाम खतरों से भरी होती है. अपने प्यार के अलावा तुम्हें और कुछ नहीं दे सकता. अच्छी तरह से सोच कर मुझे अपना जवाब देना…’

‘सोचना क्या है? मैं मन से तुम्हारी हो चुकी हूं. अब जैसा भी है, मेरा नसीब तुम्हारे साथ है.’

Raghav Chadha की दुल्हन बनीं Parineeti Chopra, देखें वेडिंग फोटोज

बॉलीवुड एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा और आप पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने उदयपुर के द लीला पैलेस होटल में बीते दिन 24 सितंबर को बड़े ही धूनधाम से शादी की. परिणाति राघव के संग सात जन्मों के बंधन में बंध गए है. वहीं अब कपल की शादी की तस्वीरें फैंस के सामने आ चुकी है.

परिणीति ने चुनरी पर लिखवाया ये खास शब्द

राघव और परिणीति की शादी की तस्वीरें देखने के लिए फैंस काफी उत्सुक थे. #Raghneeti का फर्स्ट लुक देखने का कल से ही बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. अब ये इंतजार हुआ खत्म, क्योंकि परिणीति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर अपनी शादी की तस्वीरें साझा की हैं. इन फोटोज में ये जोड़ा बेहद ही प्यारा और खूबसूरत लग रहा है. वहीं इन फोटोज में देख सकते है कि परिणीति ने अपने वेडिंग लुक के साथ सिर पर एक लंबी चुनरी ओढ़ी, जिस पर उन्होंने एक खास शब्द लिखवाया.

देखें वेडिंग की खास फोटोज

परिणीति चोपड़ा अपनी शादी में पेस्टल रंग के लहंगे में नजर आईं. जिसके साथ ही वह न्यूड मेकअप लुक में नजर आ रही है. इन तस्वीरों में परिणीति बला की खूबसूरत नजर आ रही है. अपने इस लुक के साथ उन्होंने अपने गले में दुपट्टा ओढ़ने के साथ-साथ, अपने सिर पर भी एक लंबी चुनरी ओढ़ रखी थी.

 

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सिंपल से दुपट्टे पर साइड में गोल्डन कलर से वर्क हो रखा है. साइड में मोती का वर्क है. लेकिन परिणीति ने सिर पर जो ओढ़नी ओढ़ रखी है उसमें गोल्डन रंग से अपने पति राघव चड्ढा का नाम गुदवाया. जो उनकी सिर पर ओढ़ी चुनरी पर साफ-साफ नजर आ रहा है.

मनीष मल्होत्रा ने डिजाइन किया था परिणीति का वेडिंग लुक

परिणीति चोपड़ा का वेडिंग लुक मशूहर फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा ने डिजाइन किया था. वहीं इस शादी में वह उदयपुर में गए थे. परिणीति और राघव की शादी में सानिया मिर्जा, हरभजन सिंह, सीएम अरविन्द केजरीवाल, पंजाब के सीएम भगवंत मान सहित कई सितारे और बड़ी हस्तियां पहुंचीं.

बेटी दिवस’ (Daughter’s Day) पर क्या कहते है सितारे, आइये जानें

हर साल सितंबर का चौथा रविवार ‘बेटी दिवस’ (Daughter’s Day) के रूप में मनाया जाता है. इस साल 2023 में यह दिन 24 सितंबर को मनाया जा रहा है. इस दिन को आम लोगों के साथ – साथ सेलेब्स भी मनाते है और खुद को बेटी होने का गर्व महसूस करती है. इतना ही नहीं उन्होंने समय के साथ – साथ इसकी गहराई को महसूस किया है और वे अपने परिवार की जिम्मेदारियों को बखूबी निभाने में भी सक्षम हुई है, जबकि बचपन में वे घर की सबसे लाडली और प्रोटेक्टिव चाइल्ड रही. आज भी इसे हर बेटी एन्जॉय कर रही है. इस बार वे नेशनल डॉटर्स डे को कैसे मनाने वाली है और इस दिन का उनके जीवन में कितना महत्व है, आइये जानते है.

सेलेस्टी बैरागे

उडती का नाम रज्जो फेम अभिनेत्री सेलेस्टी बैरागे कहती है कि मैं परिवार की सबसे बड़ी बेटी हूँ मेरा एक छोटा भाई मृदुतपोल भी है. मैं असम की एक कॉलोनी में पली और बड़ी हुई हूँ और हमेशा कॉलोनी की दूसरे बच्चों के साथ खेलती थी, इससे मेरे अंदर सबसे मिलजुलकर रहने की आदत पनपी. मेरे पेरेंट्स ने मेरे किसी भी निर्णय का हमेशा साथ दिया और मैं बचपन से एक प्रिंसेस की तरह ही बड़ी हुई हूँ, लेकिन बड़ी होने पर मेरा रिश्ता पेरेंट्स के साथ काफी बदल चुका है. वे भी समय के साथ – साथ काफी बदले है, इससे मुझे उनके साथ किसी बात को शेयर करने में किसी प्रकार की हिचकिचाहट नहीं होती. वे मेरे जीवन के सबसे बड़े चीयरलीडर्स है.

 

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फर्नाज़ शेट्टी

अभिनेत्री फर्नाज़ कहती है कि बेटी होना और बड़ी बेटी होने में बहुत अंतर होता है. मैं परिवार की बड़ी बेटी हूँ और मेरे दायित्व भी सबसे अलग है. देखा जाय तो पहला बच्चा किसी भी परिवार के लिए बहुत अधिक माइने रखता है, क्योंकि परिवार की आशाएं भी बड़ी बेटी से काफी होती है. मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूँ कि मैं एक बेटी, महिला और बहन हूँ और मुझे जिम्मेदारी निभाने का मौका मिल रहा है, नहीं तो लाइफ बड़ी बोरिंग हो जाती. मेरी माँ ने मुझे बेटी होने के गर्व को हमेशा महसूस करवाया है. उन्हें मेरे हर कामयाबी और काम से बहुत ख़ुशी मिलती है. यही मुझे आगे बढ़ने में भी प्रेरित करती है. मैने खुद को भाई से कभी कमतर नहीं समझी और न ही मेरी माँ ने मेरी तुलना कभी भाई से किया. मैं उनके लिए हमेशा स्पेशल हूँ और स्पेशल ही रहूंगी, ऐसा मैं सोचती हूँ.

 

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सुरभि दास

अभिनेत्री सुरभि दास का कहना है कि परिवार की इकलौती बेटी होने की वजह से मेरी जिम्मेदारियां बहुत अधिक है, लेकिन मैं उनके लिए स्पेशल भी हूँ. मैं कभी भी ‘पापा की परी गर्ल’ बनकर नहीं रही, जिसे सभी पैम्पर करें. मैंने बहुत कम उम्र में परिवार की किम्मेदारियां सम्हाली है, इससे मुझे किसी निर्णय को लेने, मैच्योर होने और एक मजबूत महिला होने में मदद मिली है. बेटी होने का मुझे गर्व है, क्योंकि मैं अपनी परिवार के किसी भी निर्णय को ले सकती हूँ. समय के साथ पेरेंट्स के साथ मेरा रिश्ता गहरा हुआ है, जिसमे खासकर मेरी माँ के साथ मेरा रिश्ता बहुत गहरा है.

 

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शीबा आकाशदीप

अभिनेत्री शीबा आकाशदीप कहती है कि बेटी होना मेरे लिए बहुत ख़ुशी की बात है, क्योंकि बेटियों को सबसे अधिक प्यार मिलता है. मुझे कभी भी नहीं लगा कि मैं बेटी हूँ और मेरी बातें परिवार वाले कम सुनते है. मैं खुद को अपने परिवार का स्पेशल मानती हूँ. समय के साथ – साथ परिवार के साथ मेरी बोन्डिंग बढती गई है. शादी के बाद मैंने इसे और अधिक स्ट्रोंग और इंटेंस पाया है.

 

YRKKH में लीप के बाद होगी किस एक्टर की होगी एंट्री, हुआ खुलासा

टीवी सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है कई सालों से दर्शकों के बीच छाया हुआ है. प्रणाली राठौड़ और हर्षद चोपड़ा स्टारर ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ इन दिनों काफी ड्रामा से गुजर रहा है. वहीं शो के मेकर्स ने अक्षरा और अभिमन्यु को एक करने की तैयारी कर ली है. टीवी सीरियल का नया प्रोमो आया जिसमें देखने को मिल रहा है कि अक्षरा और अभिमन्यू की मेहंदी सेरेमनी हो रही है.

वैस तो कहा जा रहा है कि इस शो में जल्द ही लीप देखने को मिलेंगा. मेकर्स अभिमन्यू और अक्षरा की कहानी का अंत कर देंगे. जिसके बाद सीरियल में 15 या 20 साल का लीप आएगा. इसके बाद शो अबीर पर चलेगा. वहीं मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है इस शो के लिए. इन दो एक्टर्स को लीड रोल के लिए अप्रोच किया जा रहा है. शहीर शेख और करण कुंद्रा का नाम लीड रोल के लिए लिया जा रहा है. इसमें कितनी सच्चाई है आपको बताते है.

नहीं होंगे शो का हिस्सा शहीर शेख और करण कुंद्रा

टीवी सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है को लेकर कई सारी मीडिया रिपोर्ट सामने आई है. दावा किया जा रहा था कि हर्षद चोपड़ा की जगह लीड रोल में शहीर शेख और करण कुंद्रा का नाम सामने आ रहा था. वहीं अब फैंस कंफर्मेंशन का इंतजार कर रहे है. लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं.

बता दें कि शहीर शेख इन दिनों अपनी फिल्म की शूटिंग में बिजी हैं, जिसमें वह कृति सेनन के साथ नजर आएंगे. इसके अलावा, करण कुंद्रा पहले ही ये रिश्ता क्या कहलाता है का हिस्सा रह चुके हैं. वह सीरियल में सीरत (शिवांगी जोशी) के बॉयफ्रेंड रणवीर के रोल में नजर आए थे, तो साफ है कि करण कुंद्रा भी इस शो का हिस्सा नहीं बन सकते हैं. मीडिया रिपोर्ट  के मुताबिक, जिसमें दावा किया गया है कि ये दोनों अभिनेता इस सीरियल का हिस्सा नहीं बन रहे हैं.

हमसफर: भाग 2- प्रिया रविरंजन से दूर क्यों चली गई

दूसरे दिन शाम को जब रवि आए तो मैं ने उन से पड़ोसियों के व्यंग्य और आक्षेपों की बात कही. रवि बोले, ‘‘तुम क्यों दूसरों की बातों में अपना दिमाग खराब करती हो? तुम शहर से बाहर घूमने भी तो नहीं जातीं. अच्छा हो कि

तुम कुछ दिनों की छुट्टी ले कर मां के पास चली जाओ या उन्हें यहां बुला लो. तुम्हें अच्छा लगेगा. क्यों अपनेआप को सब से काटती जा रही हो?’’

‘‘रवि, मैं तुम्हारे बिना कहीं जाने की कल्पना भी नहीं कर सकती. 2 दिन का विछोह भी मेरे लिए कठिन है. और मां को कैसे बुला लूं? मां इस बात को कभी नहीं स्वीकार करेंगी कि उन की बेटी एक…’’

‘‘फिर तुम बताओ प्रिया, मैं अपना घरबार, बीवीबच्चे छोड़ कर तो तुम्हारे पास रह नहीं सकता, यह सब तुम्हें पहले सोचना था.’’

रवि के कथन और इस प्रकार की प्रतिक्रिया से मैं अवाक रह गई. मेरे विश्वास को ठेस लगी.

‘‘खैर छोड़ो, चलो कहीं लौंग ड्राइव पर चलते हैं,’’ रवि बोले.

मैं आहत सी बोली, ‘‘नहीं रवि, आज मन नहीं है.’’

थोड़ी देर में रवि चले गए तो मैं सोचने लगी कि यह क्या कर डाला मैं ने? रवि ठीक ही तो कहते हैं. वे मेरे लिए अपना घरबार तो नहीं छोड़ सकते. दोष मेरा है. यह जानने के बाद कि रवि शादीशुदा हैं मु  झे पीछे हट जाना चाहिए था. पर मैं दिल के हाथों मजबूर हो गई. रवि की चाहत में बुराभला सब कुछ भूल गई.

मेरा औफिस से लौटने के बाद पहला काम होता था लेटर बौक्स खोल कर उस दिन की डाक देखना. एक दिन देखा तो एक निमंत्रणपत्र था विवाह का, वह भी रवि के घर से. रवि के बेटे के विवाह का. मु  झे आश्चर्य हुआ. रवि ने पहले तो नहीं बताया.

रवि आए तो मैं ने कहा, ‘‘तुम ने पहले नहीं बताया कि तुम्हारा विवाह योग्य बेटा है.’’

‘‘इस में बतलाने को क्या था?’’

‘‘अच्छा छोड़ो इस बात को, मु  झे सिर्फ इतना बताओ कि क्या सचमुच अपने घर शादी में शामिल होने के लिए बुलाया है मु  झे? तुम रोज आते हो, निमंत्रण खुद भी तो दे सकते थे. मैं शादी में आऊं तो क्या कह कर मेरा परिचय कराओगे अपने परिवार से?’’

‘‘तुम मेरी मित्र हो क्या इतना काफी नहीं?’’

‘‘केवल मित्र?’’

‘‘अब चलता हूं, बहुत से काम हैं. एक

ही बेटा है, बहुत जश्न से उस की शादी करना चाहता हूं.’’

विवाह समारोह में सम्मिलित होने के लिए मैं दिन भर ऊहापोह में रही. अंतत: निर्णय ले ही लिया कि मैं वरवधू के स्वागत समारोह में अवश्य जाऊंगी. उपहार दफ्तर से लौटते वक्त ही लेती आई थी.

नियत समय पर मैं रवि के घर पहुंच गई. वाकई विवाह स्थल की सजावट काबिलेतारीफ थी. काफी गहमागहमी थी. मैं तो वहां किसी को भी नहीं जानती थी. आंखें रवि को खोज रही थीं. रवि पुरुषों की भीड़ में नजर आए. उन्होंने भी मुझे देख लिया था पर लगा जैसे मु  झ से बचना चाहते हैं. तभी मेरे करीब आई एक आवाज ने मु  झे चौंका दिया, ‘‘तो आखिर आप आ ही गईं.’’

यह वही व्यंग्य भरी आवाज थी जिस ने मु  झे बहुत आहत किया था. अपने करीब खड़ी एक महिला को संबोधित करते हुए वे बोलीं, ‘‘दीदी, ये वही हैं जिन का जिक्र मैं ने किया था.’’

उन महिला ने आग्नेय और हिकारत भरी दृष्टि मेरी तरफ डाली और बोलीं, ‘‘आप जैसी महिलाएं, जो दूसरों की हरीभरी गृहस्थी में आग लगाती हैं, समाज के लिए कलंक हैं. अपना कैरियर बनाने के गरूर में आप जैसी औरतें समय रहते विवाह तो करतीं नहीं पर शरीर की भूख मिटाने के लिए जूठी पत्तल चाटने से नहीं चूकतीं.’’

इस से आगे मैं नहीं सुन सकी. वहां खड़े रहना मुश्किल हो गया. किसी तरह तेजतेज कदमों से चल कर गाड़ी तक आई और डोर खोल कर धम से बैठ गई. वरवधू के लिए लाए गिफ्ट को सीट पर फेंक दिया और गाड़ी स्टार्ट कर दी. घर पहुंचने पर थकीथकी चाल से चलते हुए दरवाजा खोला और ढह गई पलंग पर. इतना अपमान, इतने अपशब्द जीवन में पहली बार   झेले थे.

उस के बाद मैं रोज रवि के आने का इंतजार करती और सोचती रहती कि क्यों नहीं आए रवि? बेटे के विवाह को तो कई दिन बीत गए. कहां जाऊं मैं? जब से रवि जीवन में आए सब कुछ तो छोड़ दिया. न क्लब जाती न पार्टियों में. यहां तक कि आर्ट गैलरी में भी जाना छोड़ दिया, जिस का बड़ा चाव था.

लंबी प्रतीक्षा के बाद एक दिन रवि आए तो मैं भरभरा कर उन पर ढह गई, ‘‘कहां थे इतने दिन?’’

‘‘शांत हो प्रिया और सुनो. मेरा यहां आना अब नहीं हो सकेगा. पत्नी को सब कुछ पता चल गया. उसी ने रोक लगाई है. फिर घर में बहू आ गई है. क्या यह सब मु  झे शोभा देगा?’’

आहत होती हुई मैं बोली, ‘‘यह सब तुम क्या कह रहे हो रवि, क्या भूल गए अपने उस वादे को जो तुम ने मु  झ से किया था?’’

‘‘तुम्हें सब कुछ पहले सोचना था. कौन पत्नी सह सकती है दूसरी औरत?’’

‘‘पहले तो मेरे लिए पूरी दुनिया से लोहा लेने के लिए तैयार थे.’’

‘‘प्रिया सम  झा करो, अब बात कुछ और है.’’

‘‘मैं सम  झ गई थी उसी समय जब तुम ने बताया था कि तुम शादीशुदा हो. मु  झे तभी तुम से नाता तोड़ लेना था, लेकिन मैं दिल के हाथों मजबूर थी. यह क्यों नहीं कहते रवि कि तुम मु  झ से कटना चाहते हो. तुम्हारा जी भर गया मु  झ से. मैं तो केवल अपने प्यार का वास्ता दे कर ही तुम्हें रोक सकती हूं. बाकी तो मेरा कोई अधिकार नहीं. अधिकार मिलता है रिश्ते से और हमारा कोई रिश्ता ही नहीं. मु  झे क्या मिला रवि? केवल तुम्हारा इंतजार. हफ्तों न भी आओ तो मैं शिकायत नहीं कर सकती. सब कुछ जानते हुए भी तुम्हारे प्यार के जाल में उल  झती चली गई.’’

‘‘प्रिया, वर्तमान में, सचाई में जीना सीखो. भावुकता इंसान को कमजोर बनाती है. मैं तुम से दूर नहीं, अलग नहीं. जब भी तुम्हें जरूरत होगी, आता रहूंगा.’’

‘‘बस रवि, बस,’’ कह कर मैं ने रवि को चुप करा दिया. थोड़ी देर में वे मेरे घर से चले गए.

लगामरहित सोशल प्लेटफौर्म

सोशल   मीडिया प्लेटफौर्मों में व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर के बाद अब फेसबुक की कंपनी से ट्विटर जैसा थ्रैड्स भी जुड़ गया है. सोशल मीडिया आज मुख्य मीडिया से ज्यादा महत्त्व का हो गया है. मुसीबत यह है कि इन सब का कोई संपादक नहीं है, कोई यह नहीं देख रहा है कि लोग जो फौरवर्ड कर रहे हैं या लिख रहे हैं वह मतलब का है या नहीं, भ्रामक है या नहीं, झूठा है या सच्चा, उकसाता है या थोड़ा मनोरंजन करता है आदिआदि.

दरअसल, सोशल मीडिया सुलभ है, हाथ में ले कर एकदूसरे से बात करने के लिए बने मोबाइल पर यह मिल रहा है, इसलिए इसे जम कर देखा जा रहा है. वहीं, इस पर बकवास करने वालों की भीड़ इतनी बड़ी हो गई है कि सही व समझदारी की बात ढूंढ़ना मुश्किल हो गया है.दुनिया की सारी सरकारें आज सोशल मीडिया से भयभीत हैं क्योंकि इस ने चौराहों पर होने वाली गपों को एक क्षेत्र तक सीमित न रख कर दुनियाभर में फैला दिया है. इस से जहां सरकारों की पोल खोली जा रही है वहीं सरकारों के समर्थक जम कर अपना प्रचार कर रहे हैं और आमजन सरकारी झूठ को सच मानने लगे हैं.

जो काम कभी समाचारपत्रों और पत्रिकाओं के लेखक-संपादक बड़ी गंभीरता और जिम्मेदारी से करते थे वही चीज आज नौसिखिए बिना आगेपीछा सोचे पोस्ट कर रहे हैं. सरकारों को उन मैसेजों की तो चिंता है जो सत्ता में बैठे नेताओं और जनता की परेशानियों पर खरीखोटी सुनाएं. पर जो उन की ?ाठी बड़ाई करें या फालतू के लोगों के स्वास्थ्य, चमत्कारी उपायों, डरावने व घिनौने वीडियो पोस्ट करें उन की कोई चिंता नहीं है.

मार्क जुकरबर्ग का थैड्स एलन मस्क के ट्विटर को नुकसान पहुंचा कर दोनों का बंटाधार कर दे तो अच्छा है वरना सोशल मीडिया उस मुकाम पर पहुंच चुका है जहां यह सिर्फ लोगों को परियों की कहानियां सुनाने वाला रह गया है और उन्हें लगातार मानसिक दीवालिया बना रहा है. शातिर लोग पैसा बनाने या सिर्फ चख लेने के लिए जो बातें सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं, वे तर्क, तथ्य, विवेक से दूर हैं. वे लोगों की सोचनेसमझने की शक्ति को कुंद कर रही हैं.

इन पर कंट्रोल करना सरकार का काम नहीं है, लोगों का खुद का है. यदि समाज को समझदारी और विशेषज्ञों की जानकारी चाहिए तो सोशल मीडिया कभी काम का नहीं हो सकता क्योंकि इस में कौन सा तथ्य कहां से आया, कभी पता नहीं चल सकता. बाजार में मजमा लगा कर झूठी कहानियों के बल पर मर्दानगी की दवाएं बेचने वालों से भी बदतर है यह क्योंकि वहां एक शक्ल तो होती है. सोशल मीडिया पर न पता है, न सूरत है, न स्रोत है.

लोग, बस, इस से भ्रमित हुए चले जा रहे हैं.सोशल मीडिया से लाभ हो रहा है तो टैक्नोलौजी देने वाले प्लेटफौर्मों को, जो मनचाहे मुनाफे विज्ञापनों से कमा रहे हैं. लोग इन विज्ञापनों से भी वैसे ही बहकाए जा रहे हैं जैसे अपने धर्मगुरुओं और नेताओं के चमत्कारों के माध्यम से बहकाए जाते हैं.

मुझे कोई सच्चे मन से प्यार करने वाला इंसान नहीं मिल रहा, क्या कमी है मुझ में?

सवाल

इस साल मैं 24 वर्ष की हो जाऊंगी. मेरी जौब भी लग गई है. अब मैं पढ़ाईलिखाई से फ्री हो गई हूं. नौकरी करने के अलावा कोई दूसरा काम करने को नहीं है. लेकिन मैं एक महीने के अंदर ही अपनी रूटीन लाइफ से बोर हो गई हूं. दरअसल कालेज टाइम में कई बौयफ्रैंड बनाए थे. कई बौयफ्रैंड वाली बात जान कर आप को लगेगा कि मैं लड़कों के साथ फ्लर्ट करती हूं लेकिन ऐसा हरगिज नहीं, बल्कि मैं ‘वन मैन वुमन’ थिंकिंग वाली लड़की हूं लेकिन मुझे लड़के ही ऐसे मिले जो प्यार को ले कर सीरियस ही नहीं होते थे जबकि मैं इमोशनल हूं और बहुत जल्दी किसी एक से जुड़ जाती हूं और उस के प्रति वफादार रहती हूं लेकिन मुझे लड़के ऐसे मिले जिन्होंने मुझ से सिर्फ अपने मतलब के लिए दोस्ती की और फिर प्यार का वास्ता दिया जिसे मैं सच मान बैठती थी.

लेकिन अब मुझे लड़कों की फितरत के बारे में पता चल गया. मेरा अब कोई बौयफ्रैंड नहीं है. मैं बिलकुल सीधीसपाट लाइफ जी रही हूं. लेकिन जब दूसरे लड़केलड़कियों को साथ देखती हूं तो मन रोता है. मैं ने तो सब को सच्चे मन से प्यार किया था लेकिन मुझे कोई सच्चा दिलवाला नहीं मिला. मेरा भी मन करता है कि कोई मुझे सच्चा प्यार करने वाला मिले. लेकिन पता नहीं क्यों मुझे धोखेबाज मिलते हैं. जबकि मैं देखने में सुंदर हूं, स्मार्ट हूं, पढ़ीलिखी हूं. अब तो जौब भी कर रही हूं. क्यों मुझे कोई सच्चा इंसान नहीं मिल रहा जो सच्चे मन से मुझे प्यार करे और जीवनभर साथ रहे? क्या कमी है मुझ में?

जवाब

आप की बातें सुन कर अफसोस हुआ कि आप को कोई ऐसा सच्चा इंसान नहीं मिला जो आप को वाकई सच्चा प्यार करता और जीवनभर साथ निभाने का वादा करता. इस चक्कर में आप एक, फिर दूसरा, फिर तीसरा बौयफ्रैंड बनाती चली गईं. लेकिन हर बार निराशा हाथ लगी.ऐसा लग रहा है कि आप नई रिलेशनशिप में जाने के लिए बहुत जल्दबाजी कर जाती हैं. लाइफ में कदम सोचसमझ कर उठाने चाहिए. एक ब्रेकअप हुआ तो दूसरी रिलेशनशिप में जाने से पहले बहुतकुछ सोचनासमझना होता है.

पहले ब्रेकअप में जो गलतियां हुईं उन्हें एनालिस करने की जरूरत होती है. प्यार करना और उसे जीवनभर निभाने की बात करना कोई खेल नहीं है. जब आप किसी के साथ रिश्ते में जुड़ते हो तो साथ में कई बातें जुड़ी होती हैं. लड़के जब एक लड़की के साथ जीवनभर साथ निभाने की बात करते हैं तो वे भी एक बार यह जरूर देखते हैं कि वह लड़की उस के परिवार के साथ जुड़ पाएगी? क्या वह शादी कर के उसे खुशी दे पाएगी? क्या इस लड़की से शादी कर के वह आगे लाइफ में और तरक्की करेगा?अब आप एक बार सोचिए जब आप किसी लड़के के साथ रिलेशनशिप में आती हैं तो आप उसे क्या फील करवाती हैं? क्या आप उस लड़के को फील करवाती हैं कि आप से बेहतर लाइफपार्टनर उसे नहीं मिल सकता. आप एक फुल मैरिज मैटीरियल पैकेज हैं?लाइफ को प्रैक्टिकल हो कर भी सोचना होता है.

यह बात बिलकुल सही है कि प्यार लाइफ में न हो तो कुछ नहीं लेकिन जैसे एक महंगी, शानदार गाड़ी मिल जाए लेकिन उस में डालने के लिए पैट्रोल न हो तो वह किस काम की. इसलिए आप शांत दिमाग से बैठ कर सोचिए कि आप अपनी रिलेशनशिप में कहां गलती करती हैं. कुछ तो ऐसे लूज पौइंट होंगे जो आप से रह जाते होंगे. रिलेशनशिप को मजबूत कैसे बनाएं, ऐसे कई वीडियो उपलब्ध हैं. लेख पढि़ए. आप को कई नई बातें सोचनेसमझने में मदद मिलेगी.

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभा, ई-8, रानी झांसी मार्ग, नई दिल्ली-110055.,

व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.

 

बच्चों को खिलाएं हैल्दी और टेस्टी रैसिपीज

शोभा मुखर्जी 39 साल की है. वह दिल्ली के रोहिणी इलाके के आनंदा अपार्टमैंट में अपने हसबैंड के साथ रहती है. उन का 1 बेटा है. बेटे आरव की उम्र 7 साल और बेटी शोभा की शिकायत है कि जब भी वह उसे खाना देती है तो वह उसे खाने में बहुत नखरे करता है. कभीकभी तो वह खाना खाता ही नहीं है. आलूमेथी की सब्जी अकसर अपनी प्लेट में ही छोड़ देता है. लेकिन वह जंक फूड बड़े चाव से खाता है खासकर पिज्जा और बर्गर. उस के खाना न खाने पर कई बार मु?ो उसे जंक फूड देना पड़ता है. जबकि मैं नहीं चाहती कि आरव ज्यादा जंक फूड खाए. मैं चाहती कि वह ज्यादा से ज्यादा हैल्दी फूड खाए ताकि फिट रह कर बीमारियों से दूर रहें.’’

यह प्रौब्लम सिर्फ शोभा की ही नहीं है. इस समस्या से तमाम मांएं जू?ा रही हैं. बच्चों को तो बस बर्गर, पिज्जा, पास्ता, फ्रैंच फ्राइस, मोमोस, रोल आदि पसंद होते हैं. लेकिन जंक फूड से पोषण नहीं मिलता. इस से सिर्फ मोटापा और बीमारियां मिलती हैं.

बच्चे खासकर हरी सब्जियां जिन में घीया, तोरी और पालक शामिल हैं, खाने से कतराते हैं. वहीं फलों की बात करें तो चीकू, केला उन्हें पसंद नहीं आते. दूध पीने के नाम पर तो बच्चे मुंह बनाने लग जाते हैं. ऐसे में उन्हें हैल्दी और पोषणयुक्त खाना खिलाना किसी चैलेंज से कम नहीं होता है.

अगर आप बच्चों को न्यूट्रिशन से भरपूर खाना खिलाना चाहती हैं तो आप को खाना बनाने और बच्चों को खाना खिलाने के तरीकों में कुछ बदलाव कर के नए तरीकों को अपनाना होगा. कुछ ऐसे स्मार्ट तरीके हैं जिन्हें अपना कर आप बच्चों को न्यूट्रिशन से भरपूर खाना खिला सकती हैं. आइए, जानते हैं उन स्मार्ट तरीकों को:

अपने फूड का नाम खुद रखें

खाने को अपना नया नाम दें. बच्चे खाने का वही बोरिंग सा नाम सुन कर थक जाते हैं इसलिए खाने का नया नाम रखें. कोशिश करें कि नाम कुछ फनी और इंट्रस्टिंग हो जैसे नौर्मल से ब्रैडआमलेट का नाम बदल कर एग्गी ब्रैड रख सकती हैं.

इस का नाम सुन कर बच्चे सोचेंगे कि कोई नई डिश है और वे इसे बड़े चाव से खाएंगे. इसी तरह ब्रोकली से बनी डिश को आप बेबी ट्री नाम दे सकती हैं. ब्रोकली माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का बेहतरीन सोर्स हैं. इस से विटामिन के, बी6, बी2, बी9 और सी पाया जाता है.

चेंज करें फूड की शेप

बच्चों को खाना खिलाने का एक अन्य तरीका उस की शेप को बदलना है. बच्चे सैंडविच को ट्राइऐंगुलर शेप में देखदेख कर बोर हो गए होंगे. उन्हें सैंडविच नई शेप में परोसें. इस के लिए आप उसे स्टार, हार्ट और सर्कल शेप में ट्राई कर सकती हैं. इस के लिए मार्केट में डिफरैंट टाइप के शेप कटर मिलते हैं. ध्यान रहे कि सैंडविच ब्राउन ब्रैड का ही बनाएं. इसे और अट्रैक्टिव बनाने के लिए इस पर टोमैटो सौस से आंखें और मुंह बना सकती हैं. इस पर पतलीपतली मूली या गाजर से मूंछें भी बना सकती हैं. ऐसा क्रिएटिव सैंडविच देख कर बच्चे बारबार इसे खाने की फरमाइश करेंगे.

इसी तरह अलगअलग तरह के फेस पैनकेक बना सकती हैं जैसे स्माइली फेस. यह बच्चों को बहुत पसंद आएगा. इसी तरह आप टोस्ट और इडली को भी अलगअलग शेप में तैयार कर सकती हैं, जिन्हें खा कर बच्चे आप के खाने के फैन हो जाएंगे.

रंगों का खेल

बच्चों को फ्रूट्स खिलाना बिलकुल आसान नहीं है. लेकिन उन्हें न्यूट्रिशन से भरपूर डाइट देनी है तो यह सब तो खिलाना ही होगा. आप फलों के साथ रंगों का खेल नहीं खेल सकती हैं जैसे अगर बच्चे फल खाने से इनकार करते हैं तो आप फल को अलगअलग शेप में काट कर सकती है जैसे मंकी और खरगोश का फेस. आप अलगअलग फलों को काट कर घर या ट्री की शेप दे कर बच्चों को खाने के लिए तैयार कर सकती हैं.

नो स्टोर जंक फूड

जब घर में जंक फूड रखा होता है तो बच्चे उसे खाने की जिद्द करते हैं. ऐसे में बेहतर है कि आप घर में जंक फूड न के बराबर ही स्टोर करें. कोशिश करें कि घर में ज्यादा से ज्यादा हैल्दी फूड रखें. अगर वे इस में से कुछ खाएंगे भी तो आप बेफिक्र हो जाएं क्योंकि यह हैल्दी फूड ही होगा.

बच्चों के फ्रैंडस को इन्वाइट करें

बच्चों के फ्रैंडस को घर पर इन्वाइट करें. उन्हें खाने के लिए वे चीजें दें जो उन्हें पसंद हों, लेकिन हैल्दी और डिफरैंट स्टाइल में. इस के लिए आप ड्राई फ्रूट्स को पीनट बटर में कोट कर के दे सकती हैं. इस के अलावा मखाने रोस्ट कर के भी दे सकती हैं.

सब्जियों को दें ड्रैसिंग का साथ

बच्चों को कुछ कच्ची सब्जियां जैसे गाजर और खीरा खाने को दें. टेस्ट के लिए ऊपर थोड़ी सी ब्राउन शुगर लगा दें. कुछ सब्जियों पर दही की भी ड्रेसिंग की जा सकती है. एक रिसर्च के मुताबिक, रोजाना फल या सब्जियां खाने से कार्डियोमैटाबोलिक बीमारी का खतरा 6 से 7% तक ही रहता है.

बच्चे मफिन खाना बेहद पसंद करते हैं. ऐसे में आप मफिन को हैल्दी बनाने के लिए केले या सेब का इस्तेमाल सकती हैं.

आप इस में ड्राई फ्रूट्स भी पीस कर या काट कर डाल सकती हैं. ओट्स, औरेंज और किशमिश से भी मफिन तैयार कर सकती हैं. ओट्स पोषक तत्त्वों से भरपूर होता है. इस में विटामिन ई और फाइबर प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है. इस तरह से बच्चे टेस्टी और हैल्दी मफिन खा सकेंगे.

फलों का कबाब

बच्चों को फल खिलाना आसान नहीं. लेकिन उन्हें हैल्दी बनाने के लिए फल तो खिलाने ही होंगे. इस के लिए आप फलों का कबाब बना सकती हैं. कबाब बनाने के लिए 3 या 4 तरह के फलों को एक स्टिक में डाल लें और फिर उन पर नमक और चाट मसाला बुरक दें. फ्लों का कसाब तैयार हो गया. आप के बच्चे इसे खेलखेल में ही खा जाएंगे और उन्हें फलों का पोषण मिल जाएगा.

हैल्दी ऐंड टेस्टी बीटरूट रोल

अगर आप के बच्चे हैल्दी खाना खाने में नखरे करते हैं तो आप उन्हें  कौर्न और पनीर से बना बीटरूट रोल दे सकती हैं. बीटरूट रोल बनाने के लिए आटे में उबले बीटरूट पल्प डाल कर गूंध लें और परांठा बना लें.  इस की फिलिंग मनपसंद मसाले से तैयार कर सकती हैं. इस के बाद परांठे को रोल की शेप दे दें.

सेब को दें जैम का रूप

सेब को हैल्थ के लिए बहुत अच्छा माना जाता है. लेकिन बच्चे इसे आसानी से नहीं खाते. अगर आप बच्चों को सेब खिलाना चाहती हैं तो सेब का जैम इस्तेमाल कर सकती हैं. आप इसे बच्चों को रोटी या ब्रैड के साथ दे सकती हैं. यकीन मानिए आप के बच्चे इसे बड़े चाव से खाएंगे.

बच्चे हैल्दी फूड से ज्यादा टेस्टी फूड की भाषा सम?ाते हैं, इसलिए बच्चों को हैल्दी और टेस्टी दोनों ही तरह के फूड का कौंबिनेशन दें. इस से उन्हें टेस्ट और न्यूट्रिशन दोनों मिलेंगे.

किस को न करें मिस

भारत में ‘किस’ सिर्फ रील लाइफ में ही देखने को मिलती है, रियल लाइफ में नहीं. इस किस सीन को परदे पर देख कर हम खुश तो होते हैं, लेकिन जब इस पर अमल की बात आती है तो खुलेपन की बात तो छोडि़ए, बैडरूम में भी ज्यादातर दंपती एकदूसरे को सपोर्ट नहीं करते हैं. जबकि, किस पर हुए कई सर्वे बता चुके हैं कि इस से कोई नुकसान नहीं, बल्कि फायदा ही होता है.

कई महिलाएं और पुरुष अकसर यह बहाने बनाते देखे जा सकते हैं कि सुनो न, आज मन नहीं है, बहुत थक गया हूं/गई हूं. कल करेंगे, प्लीज. जब आप अपने पार्टनर के साथ चंद प्यारभरे लमहे गुजारना चाहें और ऐसे में आप का पार्टनर कल कह कर बात टाल दे तो आप को बुरा लगना स्वाभाविक है. लेकिन क्या आप ने कभी यह सोचा है कि ऐसा कह कर आप अपना रिश्ता तो खराब नहीं कर रहे हैं? अगर ऐसा है तो सावधान हो जाएं. बहुत से ऐसे शादीशुदा जोड़े हैं जो एकदूसरे की फीलिंग्स को इसी तरह हर्ट कर अपना रिश्ता बिगाड़ लेते हैं.

सभी को प्यार को ऐक्सप्रैस करने का हक है. ऐसे में पार्टनर जब इस तरह से संबंध को रोकेगाटोकेगा तो इस से न सिर्फ आप का रिश्ता प्रभावित होगा बल्कि मन में भी खटास आएगी. इतना ही नहीं, ऐसा करना आप के शारीरिक व मानसिक संतुलन पर भी बुरा असर डालेगा. आप को मालूम होना चाहिए कि किस थेरैपी दे कर आप का पार्टनर पलभर में आप की सारी थकान को गायब कर सकता है. इसलिए इसे मना करने से पहले थोड़ा सोच लें. आइए, अब जानें किस की खूबियों को :

  1. रिश्ता मजबूत बनाता है किस 

यह तो हम सभी जानते हैं कि लिपलौक करने से रिश्ता अधिक मजबूत बनता है. एकदूसरे के साथ लिपलौक करने से एकदूसरे के प्रति ऐक्स्ट्रा प्यार का एहसास मिलता है. ऐसा लगता है कि मेरा पार्टनर मुझ से बेहद प्यार करता है. किस करने से औक्सीटौसिन हारमोन बनता है, जो रिश्तों को ज्यादा मजबूत बनाता है.

2. सैक्सुअल प्लैजर को बढ़ाता है 

सैक्स करने से जहां दिनभर की थकान या किसी भी तरह का तनाव तो कम होता ही है, आप का रिश्ता भी ज्यादा स्ट्रौंग बनता है. लेकिन किसी भी किस के बिना आप की सैक्स ड्राइव अधूरी रहती है. सैक्स से पहले किस आप का सैक्सुअल प्लैजर बढ़ाता है. आसान शब्दों में कहें तो सैक्स करने से पहले अपने पार्टनर के साथ एक किस सैशन जरूर करें. ऐसा करना आप के प्लैजर को न सिर्फ बढ़ावा देगा, बल्कि आप के पार्टनर को भी पूरी तरह से संतुष्ट करेगा.

3. स्पिट स्वैपिंग भगाए बीमारी 

चुंबन करते समय जब तक स्पिट स्वैपिंग न हो तब तक किस करना बेमानी सा है. किस या लिपलौक करते समय अपने पार्टनर के साथ बेझिझक हो पूरा मजा लें और स्पिट यानी थूक आने पर पोंछें नहीं, बल्कि उस की स्वैपिंग करें, क्योंकि यह कई संक्रमणों को दूर करता है. सैक्स के दौरान किए जाने वाले किस से इम्यूनिटी भी बढ़ती है.

4. मिलती हैं जहां की खुशियां 

किस करते वक्त एंडोफिंस नाम का तत्त्व निकलता है जो आप को खुश रखने में मदद करता है. अगर आप टैंशन में हैं या गहन सोचविचार में तो पार्टनर को किस करना आप के लिए दवा का काम करेगा.

5. दवा का काम करे किसिंग सैशन 

हौट किसिंग सैशन के दौरान आप का शरीर एक ऐड्रेनलीन हारमोन रिलीज करता है, जो किसी भी तरह के दर्द को कम करने में मददगार होता है. अब दर्द को कम करने के लिए भी आप यह सैशन कई बार ट्राई कर सकते हैं. अगर आप के सिर में दर्द है तो लिपलौक जरूर ट्राई करें और इस का असर देखें और फिर इस का कोई साइड इफैक्ट भी नहीं होता है.

6. तनाव भगाए किस

दिन के ढलतेढलते इंसान भी काफी थकाथका सा महसूस करने लगता है, इसलिए सिर्फ अपने काम का दबाव या अपने हारमोनल बदलावों को ब्लेम करना गलत होगा. थके होने पर आप घर जा कर बस अपने पार्टनर के साथ एक किस थेरैपी लीजिए. यकीन मानिए, आप की थकान पलक झपकते छूमंतर हो जाएगी और आप फ्रैश महसूस करेंगे. दरअसल किसिंग करने से कार्टिसोल नामक हार्मोन लैवल कम होता है जो आप के इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है. एंडोक्राइन सिस्टम से दिमाग भी स्वस्थ रहता है.ऐक्स्ट्रा

7. कैलोरीज करता है कम 

अपनी हैल्थ के प्रति सचेत लोग अपनी अति कैलोरी को कम करने के लिए या तो ट्रेडमिल पर रनिंग करते हैं या फिर डाइट पार्ट फौलो करते हैं. अगर आप कभी जिम जाना भूल जाएं या पार्टी का मौका देख डाइट चार्ट को एक दिन के लिए फौलो न कर पाएं तब भी आप अपने पार्टनर के साथ किसिंग सैशन कर के अपनी कैलोरी बर्न कर सकते हैं. जी हां, जितनी कैलोरी आप की जिम सैशन में कम नहीं होगी उतनी आप की किसिंग सैशन में हो जाएगी. इतना ही नहीं, कैलोरी बर्न करने के अलावा किस करने से आप के चेहरे की भी ऐक्सरसाइज होती है. किस आप की स्किन मसल्स को भी टाइट करता है, जिस से आप दिखेंगे जवांजवां.

8. डैंटिस्ट को भी रखे दूर 

किस मुंह, दांतों और मसूड़ों की बीमारी से भी आप को दूर रखता है. मुंह में लार कम बने तो भी किसिंग फायदेमंद हो सकता है.

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