पेचीदा हल – भाग 3 : नई जिंदगी जीना चाहता था संजीव

लंबी खामोशी के बाद संजीव संजीदा लहजे में बोला, ‘‘लगता है कि मानसी के साथ अपने गलत रिश्ते को जड़ से खत्म करने का वक्त आ गया है. शिखा से इस रिश्ते को छिपाने की टैंशन और मन में लगातार बनी रहने वाली खीज व अपराधबोध का शिकार बन मैं अभी से हाई ब्लड प्रैशर का मरीज हो गया हूं. मैं तुम से वादा करता हूं कि मानसी से अपना रिश्ता खत्म कर दूंगा.’’

‘‘भाई साहब, मु झ से  झूठा वादा न करना वरना मु झे बहुत दुख होगा,’’ अंजलि की आंखों में एकाएक आंसू भर आए थे.

‘‘मैं रोहित के साथ अपनी दोस्ती का वास्ता देता हूं कि मैं सच बोल रहा हूं.’’

‘‘तब मैं भी आप से वादा करती हूं कि अगली मुलाकात में मैं अमन को उस से फिर कभी न मिलने आने की बात सख्ती से बता दूंगी.’’

संजीव के मन के एक कोने में यह विचार उभरा कि मानसी के साथ उस कारिश्ता तुड़वाने के लिए ही तो कहीं अंजलि ने अपने पुराने प्रेमी अमन से शादी के बाद भी मिलने जाने का सारा मुद्दा जानबू झ कर तो

खड़ा नहीं किया था. मगर फिर विचार को अनदेखा करते हुए संजीव ने उस की दिल से प्रशंसा करी, ‘‘तुम वाकई बहुत सम झदार लड़की हो अंजलि.’’

‘‘थैंक यू, भाई साहब,’’ अपनी तारीफ सुन कर अंजलि खुशी से भर गई

‘‘सही राह दिखाने के लिए ‘थैंक यू’ तो तुम्हें मु झे बोलना चाहिए,’’ मानसी के साथ

अपने गलत रिश्ते को समाप्त करने का फैसला कर लेने से संजीव मन ही मन सचमुच बहुत ज्यादा राहत और अजीब सी खुशी महसूस कर रहा था.

अंजलि को बस अब यही डर था कि कहीं रोहित अमन की खोजबीन न करना शुरू कर दे क्योंकि वह तो पिछले 6 साल से उन के शहर से कहीं दूर बैंगलुरु में रहता है. उस की पोल खुल गई तो संजीव और अंजलि की उन से दोस्ती समाप्त हो जाएगी.

Rubina Dilaik ने प्रेग्नेंसी पर की बात, बताया कैसा है पति अभिनव का हाल

बिग बॉस 14 की विजेता और खूबसूरत अदाकरा रूबीना दिलैक नें हाल ही में गुड न्यूज दी है. वह अपनी लाइफ का नया चैप्टर शुरु करने जा रही है. वह जल्द ही मां बनने वाली है. हालांकि इस गुड न्यूज का अंदाजा फैंस पहले लगा चुके है.

रूबीना दिलैक और अभिनव शुक्ला माता-पिता बनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और इस कपल ने 16 सितंबर को सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा की. कई दौर की अटकलों के बाद, कपल ने घोषणा के साथ सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया. रूबीना ने एक वीडियो भी पोस्ट किया जहां उन्होंने इस नई यात्रा, अपने बेबीमून और बहुत कुछ के बारे में बात की.

प्रेग्नेंसी जर्नी को एन्जॉय करने के लिए रूबीना और अभिनव फिलहाल काम से ब्रेक पर हैं. यह जोड़ा LA की शानदार यात्रा का आनंद ले रहा है.

रूबीना दिलैक ने शेयर किया पहला वीडियो

टीवी एक्ट्रेस रूबीना दिलैक ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो पोस्ट किया है. जिसमें वह खुलकर अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर बोल रही है. रुबीना अपनी वीडियो में बता रही है कि यह वीडियो अपने फैंस के लिए बना रही है. वह अपनी सबसे खास जर्नी फैंस के साथ शेयर करना चाहती है.

पति अभिनव है काफी एक्साइटेड है

रूबीना ने वीडियो में साझा किया कि जब अभिनव को माता-पिता बनने के बारे में पता चला, तो अभिनव की प्रतिक्रिया काफी अनमोल थी. हालांकि, उन्होंने आगे कहा, “कुछ चीजें हैं जिन्हें हमने बेहद निजी रखा है. मैं घबराई हुई हूं और अभिनव पूरी यात्रा को लेकर बिल्कुल उत्साहित हैं.

 

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एक समय था जब दोनों तलाक ले रहे थे

रूबीना दिलैक और अभिनव ने लंबी डेटिंग के बाद साल 2018 में शादी की. दोनों ने प्यार में काफी कसमें खाई थी एक समय बाद दोनों के रिश्ते में दरार आने लगी थी. अभिनव शुक्ला और रूबीना दिलैक ने बिग बॉस 14 में अपने रिश्ते को लेकर खुलकर बात की थी. वह दोनों तलाक लेने वाले थे. वहीं बिग बॉस के घर में दोनों के रिश्ते में सुधार आया. अब दोनों ही जल्द ही माता-पिता बनने जा रहे है.

Govinda की भांजी Ragini Khanna जल्द करेंगी शादी, बोली- खुद पर ध्यान देना है

टीवी सीरियल ‘ससुराल गेंदा फूल’ फेम एक्ट्रेस रागिनी खन्ना आज भी अपने फैंस के दिलों में राज करती है. रागिनी काफी समय से टीवी की दुनिया से गायब है. हालांकि वह अपने ओटीटी के प्रोजेक्ट के जरिए अपने दर्शकों का मनोरंजन करती है. वहीं रागिना खन्ना 35 साल की हो गई है लेकिन वह अभी तक सिंगल है. एक्ट्रेस अपनी पर्सनल लाइफ को लाइमलाइट से दूर रखती है. वहीं अब रागिनी शादी करने के लिए एकदम तैयार है वह जल्द ही शादी कर सकती है.

रागिनी की मां ने घर को बना दिया मैरिज ब्यूरो

टीवी एक्ट्रेस ने मीडिया इंटरव्यू में बताया है कि उनकी मां अब उन्हें शादी के बंधन में बंधते हुए देखना चाहती है. इसी वजह से उनकी मां रागिनी के लिए लड़का तलाश रही है. रागिनी ने बताया कि उनकी मां ने घर में ही मैरिज ब्यूरो खोल लिया है. एक्ट्रेस ने कहा, वह प्रापोजल पर विचार कर रही है और वह हर दिन एक बैचलर की जांच करती है. रागिनी को भी लगता है कि यह सही समय है शादी करने का और घर बसाने का, उम्मीद हैं ऐसा होना चाहिए.

 

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रागिनी खन्ना खुद पर ध्यान देना चाहती है

टीवी एक्ट्रेस ने इंटरव्यू में बताया कि उनके पास गुणों की लंबी लिस्ट नहीं है जो मैं अपने हमसफर मैं देखना चाहती हूं. मैं चाहुंगी वह मुंबई में रहे. मैने बहुत मेहनत की है और शोबिज मैं काम करना जारी रखूंगी. मैंने 10 साल अपने करियर को महत्व दिया है और अब खुद पर ध्यान देना चाहती हूं.

 

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शादी के बाद भी काम करेंगी रागिनी

टीवी एक्ट्रेस ने आगे बताया कि उनकी एक बार हालत खराब हो गई थी.  रागिनी ने कहा, ‘जब मैं ससुराल गेंदा फूल कर रही थी, तो मुझे कई हेल्थ इशूज का सामना करना पड़ा. मैं लगभग अस्पताल में भर्ती हो गई थी. इसलिए, मैं रियलिटी शो, लाइव इवेंट और फिल्मों की ओर चली गई. लेकिन जैसे कुछ कलाकार टीवी और फिल्म को छोड़ देते हैं, मैं शादी के बाद वैसा नहीं करूंगी. टीवी ने मुझे वह बनाया जो मैं आज हूं.’

मोटापे से सिकुड़ता है मस्तिष्क, जानिए कैसे

मोटापा आज लोगों के लिए बेहद आम और सबसे बड़ी परेशानी बन कर उभरी है. खराब डाइट और खराब लाइफस्टाइल के चलते लोगों में ये परेशानी और ज्यादा बढ़ी है. इन कारणों से लोगों के पेट पर चर्बी बढ़ती है. पेट पर जमा होने वाली चर्बी हमारे सेहत को बुरी तरह प्रभावित करती है. इसका सबसे ज्यादा बुरा असर हमारे दिमाग पर होता है. असल में पेट में मौजूद चर्बी से मस्तिष्क की क्रियाशील पदार्थ या बुद्धि (Grey Matter) कम होने लगती है. इस खतरे का खुलासा हाल ही में हुए एक स्टडी में हुआ.

शोध के मुताबिक दिमाग के क्रियाशील पदार्थ में करीब 100 बिलियन से अधिक नर्व कोशिकाएं होती हैं. इनमें सफेद पदार्थ में नर्व फाइबर होता है, जो दिमाग के हिस्सों से जुड़ा होता है.

आपको बता दें कि इस शोध को करीब 9650 लोगों पर किया गया. शोध में सभी लोगों के बौडी मास इंडेक्स (BMI) और कमर से हिप की जांच की गई. नतीजों में 5 में से लगभग 1 व्यक्ति मोटापे से पीड़ित पाया गया.

शोधकर्ताओं ने स्टडी में शामिल लोगों के दिमाग की वौल्यूम का पता लगाने के लिए उनके दिमाग का MRI स्कैन किया.

स्टडी के नतीजों में सामने आया कि 1, 291 लोग, जिनका BMI 30 या इससे ज्यादा था, उनके मस्तिष्क के क्रियाशील पदार्थ (Grey Matter) की वौल्यूम कम रही. स्टडी की रिपोर्ट के मुताबिक, वजन या मोटापे से पीड़ित लोगों के दिमाग का कुछ हिस्सा सिकुड़ने लगता है.

परिवार से दूर दोस्त क्यों जरूरी है

दोस्ती एक ऐसा मीठा रिश्ता है जो जिंदगी में चाशनी सी घोल जाता है… जब हम अपने परिवार से दूर होते हैं तो वहां पर कोई हमारा अपना होता है तो वो दोस्त ही होते हैं जो हमारा परिवार बनते हैं.अक्सर ऐसा होता है जब पढ़ाई करने या जौब करने के लिए हम घर से बाहर चले जाते हैं और घर से कोसो दूर होते हैं तो उस वक्त वहां दोस्त मिलते हैं जो सुख में दुख में हमारा साथ देते हैं…..

कभी-कभी मन बहुत उदास होता है घर वालों की याद आती है हम उनके बारे में सोचते हैं और रो भी देते हैं ऐसे में दोस्त ही होतें हैं जो हमारा सहारा बनते हैं ,हमें हंसाते हैं,हमारा मूड अच्छा करते हैं.कुछ ऐसी बातें होती हैं जो हम अपने परिवार से नहीं कह सकते हैं लेकिन अपने दोस्तों से शेयर करते हैं और उनसे सलाह भी लेते हैं. अब अगर कौलेज की बात करें तो बहुत सी गॉसिप होती हैं भाई लड़कियों को तो चाहिए वही और वो ये गॉसिप्स अपने दोस्तों से ही शेयर करती हैं.लड़कों का तो लेवल पूछो ही मत भाई उनके तो अपने अलग-अलग कांड ही होते हैं.साथ में मिलकर पार्टी करना दोस्तों के सोथ मिलकर हंसी-मज़ाक करना,और अगर ब्रेकप हो गया तो उसका दुखड़ा भी रोना..कोई पसंद आ गया तो उसकी सेंटिंग करवाना …अब आपको हंसी तो आ ही रही होगी लेकिन आजकल की सच्चाई यही है और होता भी यही है.

जब आप किसी प्रौबलम में होते हैं तो दूसरे दोस्त ही हेल्प करते हैं चाहे पैसे की दिक्कत हो या फिर आप बिमार हैं तो आपका ध्यान भी रखते हैं.या फिर कॉलेज में दोस्त के लिए टीचर से झूठ बोलते हैं या फिर ऑफिस में बॉस…ये सब थोड़ा अजीब भले लगे लेकिन दोस्त होते ही ऐसे हैं और  ये सब खट्टी-मीठी सी यादें होती हैं जब आप अपने दोस्तों से अलग होते हैं तो यही सारी यादें आपके साथ रहती हैं जिन्हें आप अपने घर परिवार या कुछ दूसरे दोस्तों से शेयर करते हो कि अरे हम तो ऐसा किया करते थें..हमने साथ में बहुत मस्तियां की हैं…घर से दूर हमारा परिवार हमारे दोस्त ही होते हैं वरना दुनिया में अकेले रहना बहुत मुश्किल है.अकेले होने पर आपके अंदर चिड़चिड़ापन आ जाता है क्योंकि आप सबकुछ अपने अंदर ही दबा कर रखते हो कुछ भी किसी से शेयर नहीं करते.इसलिए लाइफ में एक ऐसा साथी होना जरूरी है जो हर कदम पर आपके साथ हो अगर बोलो हां तो वो भी बोले हां…मज़े की बात तो ये हैं कि दोस्त एक-दूसरे को छेड़ते भी बहुत है लेकिन उसी में उनका जीना है जिसमें वो बहुत खुश रहते हैं.एक-दूसरे को गाली बिना तो बुला ही नहीं सकते लेकिन उसी गाली में उनका प्यार होता है उनका अपनापन होता है….शायद इसलिए ही कहते हैं कि दोस्ती वो अनमोल तोहफा है जिसे जितनी शिद्दत से निभाओगे उतना ही खुश रहोगे और सभी की जिंदगी में एक ऐसा दोस्त होना जरूरी है…..वो कहते हैं न ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे…तोड़ेंगे हम मगर तेरा साथ न छोड़ेंगे.

किचन की सफाई के लिए नींबू है बेस्ट

नींबू अपने चटपटे और खट्टे स्वाद की वजह से खाने में खूब इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन इसके कुछ खास गुणों के कारण इसका इस्तेमाल सौंदर्य बढ़ाने के लिए और घर की सफाई में भी खूब किया जाता है. इसीलिए आज हम आपको नींबू से घर और किचन की सफाई कैसे करें इसकी कुछ टिप्स बताएंगे.  आइए जानें, नींबू के ऐसे ही 7 उपायों के बारे में जो आपके घर के हर कोने को चमकाएं

1. माइक्रोवेव को साफ करने के लिए

एक कप पानी में नींबू के टुकड़े काटकर इसे माइक्रोवेव में 15 मिनट के लिए गर्म होने के लिए रख दें. इसके बाद इसे निकाल ने और माइक्रोवेव को किचन टॉवल से साफ कर लें. यह एक बार फिर से नया सा हो जाएगा.

2. कूड़े के डिब्बे से बदबू हटाने के लिए

नींबू के रस को अच्छी तरह से इसमें डालें और फिर ठंडे पानी से इसे धो दें.

3. सब्जी काटने के चॉपिंग बोर्ड क्लीनिंग के लिए

सब्जी काटने के चॉपिंग बोर्ड से फल और सब्जी के दाग हटाने के लिए नींबू के टुकड़े को इस पर रगड़ने से दाग और सब्जी की महक दोनों निकल जाएगी.

4. कपड़ों से दाग को हटाने के लिए

नींबू के टुकड़े को उस दाग पर रगड़े और फिर इसे धोकर धूप में सूखा लें. दाग गायब हो जाएगा.

5. स्टील के नल में लगे दाग के लिए

बाथरूम में लगे स्टील के नल में लगे दाग हटाने में भी नींबू बहुत काम आता है.

6. सिंक साफ करने के लिए

नींबू को नमक में नि‍चोड़ कर एक गाढ़ा पेस्टं बना लें और उसको साबुन के घोल के साथ मिला कर सिंक की सफाई करें.

7. खिड़की, दरवाजा साफ करने के लिए

आप खिड़कियों के शीशे, शीशे के दरवाजे और यहां तक कि अपनी कार के शीशों को भी नींबू की मदद से साफ कर सकते हैं.

घुटनों के आर्थ्राइटिस को दूर रखने में लाइफस्टाइल में क्या बदलाव होने चाहिए?

सवाल-

मैं 38 वर्षीय आईटी प्रोफैशनल हूं. जब मैं औफिस में बैठा रहता हूं तब भी मेरे घुटनों में बहुत तेज दर्द और जकड़न होती है. मुझे जिम जाने और वर्कआउट करने का समय कभीकभी ही मिल पाता है. मैं ने घुटनों के दर्द के लक्षणों की खोज की तो पाया कि घुटनों का आर्थ्राइटिस 30 वर्ष की प्रारंभिक अवस्था और 40 वर्ष की उम्र में आम समस्या है. क्या आप घुटनों के आर्थ्राइटिस को दूर रखने में जीवनशैली में बदलाव की जरूरत पर और ज्यादा विस्तार से प्रकाश डाल सकते हैं? वे बेसिक चीजें कौन सी हैं, जिन से मैं अपने घुटनों को दुरुस्त रख सकता हूं और दर्द की समस्या से छुटकारा पा सकता हूं?

जवाब-

मैं आप को डाक्टर से सलाह लेने और घुटनों का उचित इलाज कराने की सलाह दूंगा. इंटरनैट पर देख कर खुद अपना इलाज करने से आप को गलत जानकारी मिल सकती है और आप की हालत बिगड़ सकती है. अपने घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए आप को जिम में जाने और बहुत ज्यादा देर तक नहीं बैठना है और समयसमय पर ब्रेक ले कर हलकाफुलका व्यायाम करना है.

किसी भी तरह का हलका व्यायाम जैसे 30 मिनट तक चलने और एस्केलेटर की जगह सीढि़यों से आनेजाने से आप को घुटनों के दर्द से काफी आराम मिल सकता है. सब से ज्यादा महत्त्वपूर्ण बात यह है कि अगर आप का वजन ज्यादा है तो यह आप के घुटनों का मजबूत रखने में सब से बड़ी रुकावट है.

ये भी पढ़ें-

रह्यूमेटाइड आर्थ्राइटिस एक जटिल बीमारी है, जिस में जोड़ों में सूजन और जलन की समस्या हो जाती है. यह सूजन और जलन इतनी ज्यादा हो सकती है कि इस से हाथों और शरीर के अन्य अंगों के काम और बाह्य आकृति भी प्रभावित हो सकती है. रह्यूमेटाइड आर्थ्राइटिस पैरों को भी प्रभावित कर सकती है और यह पंजों के जोड़ों को विकृत कर सकती है.

इस बीमारी के लक्षण का पता लगाना थोड़ा मुश्किल होता है. रह्यूमेटाइड आर्थ्राइटिस में सूजन, जोड़ों में तेज दर्द जैसे लक्षण होते हैं. पुरुषों की तुलना में यह बीमारी महिलाओं को अधिक देखने को मिलती है. वैसे तो यह समस्या बढ़ती उम्र के साथसाथ होती है, लेकिन अनियमित दिनचर्या और गलत खानपान के कारण कम उम्र की महिलाओं में भी यह बीमारी देखने को मिल रही है.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  गृहशोभा-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

पेचीदा हल – भाग 1 : नई जिंदगी जीना चाहता था संजीव

शिखाके पति संजीव का रोहित सब से अच्छा दोस्त था. उस  का महीना भर पहले अंजलि से रिश्ता तय हुआ था. उस शनिवार की शाम को अंजलि बिना फोन किए शिखा से मिलने उस के घर आईर् थी.

खुल कर हंसनेबोलने वाली अंजलि को खोयाखोया सा देख शिखा ने कुछ देर के औपचारिक वार्त्तालाप के बाद उस से पूछ लिया, ‘‘तुम आज परेशान क्यों लग रही हो?’’

अंजलि एकदम संजीदा हो कर बोली, ‘‘शिखा भाभी, मैं अमन के बारे में आप से कुछ बातें करना चाहती हूं.’’

‘‘यह अमन कौन है?’’

‘‘हम दोनों कभी एकदूसरे से बहुत प्यार करते थे,’’ अंजलि ने  िझ झकते लहजे में उसे जानकारी दी.

‘‘फिर तुम दोनों ने शादी क्यों नहीं करी?’’ अपनी हैरानी को काबू में रखते हुए

शिखा ने सवाल किया.

‘‘हमारी जाति का न होने के कारण अमन ओबीसी कैटेगरी का है पर पढ़ने में अच्छा था, इसलिए आज बहुत ऊंची नौकरी पर है. मेरे मातापिता अमन के साथ मेरी शादी करने के

लिए बिलकुल तैयार नहीं हुए थे. फिर अमन ने

6 महीने पहले अपनी बिरादरी में अरेंज्ड मैरिज कर ली, पर वह उसे कतई रास नहीं आई है. वह व्हाट्सऐप पर मेरे संदेश और दोनों के फोटो अभी भी संभाले रख रहा है और बारबार उन्हें देख कर आंहें भरता है. इसीलिए पतिपत्नी के बीच बनी नहीं, दोनों आज की तारीख में अलगअलग रह रहे हैं.’’

‘‘अमन के साथ तुम्हारी मुलाकात अब भी होती है?’’

‘‘हां, होती है,’’ कुछ पलों की खामोशी के बाद अंजलि ने अमन से मिलने की बात स्वीकार कर ली, ‘‘तभी तो मु झे ये सब पता चला है कि अगर मैं उस से नहीं मिली तो वह आत्महत्या

कर लेगा.’’

शिखा ने संजीदा लहजे में पूछा, ‘‘तुम अमन के बारे में मु झ से क्या बात करना चाहती हो?’’

‘‘मु झे उस से अभी भी मिलने जाना पड़ता है, भाभी. मैं ऐसा न करूं तो वह दुखी और निराश हो कर मरने की बात कहता है,’’  अंजलि एकदम भावुक हो उठी.

‘‘मेरी सम झ से तुम्हारा अमन से अब भी मिलते रहना गलत है, अंजलि. यह बात जब कभी रोहित को पता लगेगी, तो उसे बिलकुल अच्छा नहीं लगेगा.’’

‘‘भाभी, मैं इस बात को अच्छी तरह से सम झती हूं, पर मैं उस से मिलने जाने को मजबूर हूं. उसे निराशा और उदासी के कुहरे से निकालना मैं अपनी जिम्मेदारी मानती हूं भाभी.’’

‘‘देखो, कुछ हफ्तों के बाद तुम्हारी शादी रोहित से होने जा रही है और यों भावुक हो कर अपनी भावी खुशियों को दांव पर लगाना तुम्हारे हित में नहीं होगा अंजलि.’’

‘‘इसी सिलसिले में मु झे आप की हैल्प चाहिए,’’ अंजलि की आंखों में बेचैनी के भाव साफ दिखाई दे रहे थे.

‘‘मु झ से कैसी हैल्प चाहिए?’’

‘‘मैं चाहती हूं कि शादी के बाद भी रोहित को मेरे अमन से मिलने जाने की बात न मालूम पड़े और यह काम आप की सहायता के बिना नहीं हो सकेगा भाभी.’’

‘‘मु झे तुम्हारी क्या सहायता करनी

होगी?’’ शिखा जबरदस्त उल झन का शिकार

बन गई.

‘‘भाभी, मैं आप के साथ घूमने का बहाना बना कर उस से मिलने जाया करूंगी.’’

‘‘तुम बेकार की बात कर के मेरा दिमाग खराब…’’

‘‘भाभी, आप पहले मेरी पूरी बात सुन लो, प्लीज,’’ अंजलि ने उसे टोक दिया, ‘‘आप अगर मेरे साथ होंगी, तो रोहित को किसी तरह का शक कभी नहीं होगा. आप को इस नाजुक मामले में मेरी सहायता करनी ही पड़ेगी भाभी. अगर अमन ने आत्महत्या…’’

‘‘सौरी, अंजलि, पर तुम कैसी भी दलील दे कर मु झे इस तरह के गलत काम में अपना साथ देने के लिए कभी राजी नहीं कर सकोगी.’’

अंजलि ने उसे मनाने की कोशिश नहीं छोड़ी और कहा, ‘‘अमन मेरे मामा के घर के

पास रहता है. कभी रोहित या संजीव भैया द्वारा पूछताछ करने की नौबत आई, तो कह दिया

करेंगे कि हम मामामामी से मिलने जा रहे थे कि अमन की मां ने हमें आवाज दे कर अपने घर बुला लिया. आप के मेरे साथ होने के कारण रोहित या संजीव भैया को कभी मु झ पर शक

नहीं होगा.’’

‘‘तुम संजीव के गुस्से को नहीं जानती हो अंजलि. मु झ से इस मामले में कैसी भी सहायता की उम्मीद मत रखो,’’ शिखा ने दृढ़ स्वर में अपना फैसला सुना दिया.

‘‘तब आप एक काम करो. मेरी तरफ से उन्हें आश्वासन जरूर देना कि अमन

के दिमागी हालत से ठीक होते ही मैं उस से मिलना बिलकुल बंद कर दूंगी.’’

‘‘वे इस काम में सहयोग करने के लिए कभी तैयार नहीं होंगे.’’

‘‘आप उन्हें सम झाने की कोशिश तो करो. फिर कल मैं उन से खुद मिल लूंगी,’’ अंजलि थके से अंदाज में जाने के लिए खड़ी हो गई, ‘‘आप भैया से यह जरूर कह देना कि वे अमन के बारे में रोहित से कुछ न कहें.’’

‘‘तुम सम झदारी दिखाते हुए अमन से मिलना एकदम बंद कर दो अंजलि. रोहित…’’

शिखा को टोकते हुए अंजलि भावुक लहजे में बोली, ‘‘ऐसी बेरुखी दिखा कर मैं उसे मौत के मुंह में नहीं धकेल सकती हूं. मेरी कायरता की सजा वह नहीं भुगतेगा भाभी,’’ अपना फैसला सुना कर अंजलि मुड़ी और मुख्य द्वार की तरफ चल पड़ी.

उस रात संजीव देर से घर लौटा. वह प्रौपर्टी का साइड बिजनैस करता था और रोहित के साथ जयपुर के पास बन रहे नए फ्लैटों को देखने सुबह जल्दी निकल गया था.

रात को खाना खाने के बाद छत पर घूमते

हुए शिखा ने अंजलि के साथ हुई सारी

बात संजीव को बता दी. अंजलि अभी भी अपने पुराने प्रेमी अमन के साथ संपर्क बनाए रखना चाहती है, यह बात सुन कर उसे बहुत गुस्सा आया.

‘‘इस शादी को मु झे रोकना ही पड़ेगा,’’ संजीव गुस्से से भर कर बोला, ‘‘मु झे तो लगता है कि अभी भी इन दोनों के बीच गलत तरह का रिश्ता बना हुआ है. एक बार को हम मान लें कि इस समय अंजलि के मन में कोई खोट नहीं है, पर रोहित के साथ शादी हो जाने के बाद अगर उस के पांव फिसल गए, तो रोहित का क्या होगा? इस मामले में बेकार का रिस्क लिया ही क्यों जाए?’’

‘‘रोहित भैया को इस रिश्ते के टूटने से बहुत दुख होगा,’’ शिखा एकदम से उदास हो गई.

‘‘हां, वह अंजलि को बहुत प्यार करने

लगा है, पर बाद के  झं झटों से बचने के लिए

उस का अंजलि से शादी न करना ही ठीक रहेगा.’’

‘‘आप कल अंजलि को सम झाने की कोशिश नहीं करोगे?’’

‘‘नहीं, उसे सम झाने की कोई तुक मु झे

नजर नहीं आ रही है. मैं तो जोर दे

कर कहूंगा कि वह रोहित की जिंदगी से चुपचाप निकल जाए,’’ कठोर लहजे में अपनी राय बता कर संजीव नीचे जाने के लिए सीढि़यों की तरफ

चल पड़ा.

संजीव ने अगले दिन सुबह 10 बजे अंजलि से एक रेस्तरां में मुलाकात करी. कोने की मेज पर बैठ कर दोनों ने गंभीर लहजे में अमन को ले कर बातें करना शुरू किया.

‘‘तुम्हारी अमन से रिश्ता बनाए रखने की जिद तुम दोनों के

बीच देरसवेर गहरी अनबन का कारण बन जाएगी. मैं उसे तुम्हारे साथ शादी करने की सलाह नहीं दूंगा,’’ रोहित ने शुष्क लहजे में अपना मत उसे बता दिया.

‘‘पर हमारी शादी

हो कर रहेगी क्योंकि हम एकदूसरे को बहुत चाहते हैं,’’ अपनी इच्छा बताते हुए अंजलि की आवाज में दृढ़ता की कोईर् कमी नजर नहीं आ रही थी, ‘‘मैं ने शिखा भाभी को इस समस्या का हल बताया है.’’

‘‘रोहित को धोखे में रख कर तुम अमन से मिलती रहो, ऐसा करने में वह तुम्हारा साथ बिलकुल

नहीं देगी.’’

‘‘फिर मैं किसी और तरह से इस समस्या का हल ढूंढ़ूगी. प्लीज, आप इस

मामले में रोहित से कुछ मत कहना.’’

‘‘ऐसा नहीं हो सकता. मैं अपने दोस्त को ये सब बातें जरूर बताऊंगा.’’

‘‘आप ने अगर रोहित को कुछ भी बताया तो ठीक नहीं होगा,’’ अंजलि ने उसे सख्त स्वर में चेतावनी दे डाली.

‘‘क्या तुम मु झे धमकी दे रही हो?’’ संजीव को भी फौरन गुस्सा आ गया.

‘‘आप ऐसा ही सम झ लो.’’

‘‘तब तो मैं उसे सबकुछ बताने अभी जाऊंगा.’’

‘‘तब मैं भी इसी वक्त शिखा भाभी से मिलने जा रही हूं.’’

‘‘ उस से मिलने क्यों जा रही हो?’’ संजीव ने माथे में बल डाल कर पूछा.

‘‘मैं उन्हें मानसी के बारे में सबकुछ बता दूंगी.’’

‘‘यह मानसी कौन है?’’ संजीव की आंखों से उभरे चिंता के भाव साफ बता रहे थे कि अंजलि की बात सुन कर उसे मन ही मन तेज  झटका लगा है.

‘‘मानसी वही है जिस के साथ आप ने शिखा भाभी से शादी करने के बाद भी इश्क का चक्कर चला रखा है.’’

‘‘बेकार की बकवास मत करो. मेरा किसी के साथ कोई चक्कर नहीं चल रहा है.’’

‘‘मैं आप की जानकारी के लिए बता दूं

कि मैं एक ऐसे इंसान को जानती हूं जो आप

की गलत हरकतों के बारे में सारी जानकारी

रखता है.’’

‘‘तब क्या उस ने तुम्हें यह नहीं बताया

कि मानसी और मैं सिर्फ अच्छे दोस्त हैं और

 

मां आनंदेश्वरी: भाग 3- पोस्टर देख के नलिनी हैरान क्यों हो गई

वह गुस्से के कारण तमतमा उठी थी.‘‘एक ओर उस का अपना सपना पूरा होने वाला था, वह स्वतंत्ररूप से कथावाचक बन कर मंच पर बैठ कर कथा सुनाने वाली थी, दूसरी ओर जिन बच्चों के स्वर्णिम भविष्य के जो सपने वह देख रही थी वे सब टूटते दिखाई पड़ रहे थे.

लेकिन अपने मन का दर्द कहे भी तो किस से, इस दुनिया में कोई भी तो ऐसा नहीं था जो उस के मन की पीड़ा बांट सके. वह बिलख उठी थी. उसे अपने चारों तरफ अंधकार ही अंधकार दिखाई पड़ रहा था. वह समझ तो गई कि माताजी ने उस के साथ बदला लेने के लिए रूपा को कहीं गायब किया है.

वह यह भी जान रही थी कि स्वामीजी को भी सबकुछ अवश्य मालूम है. उन्होंने उस के पर काटने के लिए बेटी को अपना हथियार बनाया है. ‘‘स्वामीजी के पैरों पर गिर कर वह घंटों तक सिसकती रही थी, ‘स्वामीजी. मैं आजीवन आप की गुलाम बनी रहूंगी, बस, आप मेरी बेटी रूपा को बुला कर दिखा दीजिए.

बेटे बलराम को यहां से हटा कर होस्टल में पढ़ने के लिए उस का एडमिशन करवा दीजिए.’‘‘वे नाराज हो कर बोले, ‘मैं तो बराबर तुम्हारे साथ था. मुझे स्वयं नहीं मालूम. आप माताजी से पूछिए, वे सब बता देंगी.’ ‘‘जब स्वामीजी ने माताजी को पुलिस का डर दिखाया तो उन्होंने कबूला, ‘रूपा ने मलंग के साथ शादी कर ली है. वह डर के मारे नहीं आ रही है. वह उन के संपर्क में है.’ ‘‘मलंग कथा में कृष्ण का रूप धारण करता था और माताजी का करीबी था.

वह लगभग 35 साल का आकर्षक रंगरूप का आदमी था. सब से बड़ी खासीयत उस की चिकनीचुपड़ी, मीठीमीठी बातें… बस, रूपा को उस ने अपनी बातों में ही फंसा लिया होगा, आनंदी अपनी बेबसी पर सिसकती रही थी. माताजी ने उस के साथ खूब बदला लिया था.

‘‘अब वह बेटे को इन सब से दूर करना चाहती थी जहां इस जगह की उस पर परछाईं भी न पड़े. अभी वह 10 वर्ष का पूरा हुआ था और कक्षा 4 में था. वह पढ़ने के बजाय मोबाइल पर वीडियो देखता या गेम खेलता था. पहले तो स्वामीजी नाराज हो कर बोले, ‘इस की फीस कौन भरेगा?’लेकिन जब आनंदी ज्यादा रोईगिड़गिड़ाई तो वे पिघल गए.‘‘उन के अपना कोई बेटा नहीं था, इसलिए स्वामीजी बलराम को अपना बेटा कहा करते थे.

उन्होंने किसी भक्त से कह कर तुरंत उस का एक बोर्डिंग स्कूल में एडमिशन करवा दिया. सबकुछ इतनी जल्दी हुआ कि वह विश्वास नहीं कर पा रही थी कि उस के जीवन में इतना कुछ घटित हो चुका है.‘बोर्डिंग में जाते समय बलराम उस से लिपट कर रोता रहा था.

उस की आंखों से भी अश्रुधारा बह निकली थी, यहां तक कि स्वामीजी की भी आंखें भीग उठीं तो वे अंदर चले गए थे.‘बलराम बेटा, तुम पढ़लिख कर अपने पैरों पर खड़े होना.’ आज उस की ममता बिलख उठी थी परंतु वह उस के भविष्य की सुनिश्चितता के लिए सबकुछ सहने को तैयार थी.’’

बूआ उस आश्रम में दर्शन करने अकसर जाया करती थीं. आनंदी के चेहरे पर छाई उदासी को देख वे पूछ बैठीं, ‘आनंदी, आज तुम्हें बहुत दिनों के बाद देख रही हूं. तुम्हारा चेहरा बुझा हुआ दिखाई पड़ रहा है?’ उस की आंखें भीग उठी थीं. उस ने आंखों से अपने कमरे की ओर आने का इशारा किया था.

वहां सभी लोग उन दोनों के आपसी संबंधों के बारे जानते थे, इसलिए कुछ नया नहीं था. जब वह कमरे में आई तो उन के कंधे पर सिर रख कर पहले खूब रोई, फिर बोली, ‘दीदी, मैं ने स्वामीजी की शरण ली कि यहां पर मुझे भगवान मिलेंगे और मैं शांति से जी सकूंगी. कम से कम अगला जन्म तो सुधर जाएगा लेकिन दीदी, यहां का जीवन देख कर तो मन वितृष्णा से व्यथित हो उठा है.

सोचा था कि भगवान की शरण में रह कर किसी तरह से बच्चों को पढ़ालिखा कर अपने पैरों पर खड़ा कर दूंगी. लेकिन यहां पर तो धर्म की आड़ में वही धन की लिप्सा, भोगलिप्सा, सामदामदंडभेद से येनकेन प्रकारेण समाज में अपने को श्रेष्ठ दिखाने की होड़ में लगी रहती है. दूसरों की जमीन, धन और स्त्री पर गिद्ध दृष्टि रहती है. ये स्वामीजी, दूसरे कथावाचक, जो समाज में भगवान के समान पूजे जाते हैं, अंदर से सब खोखले होते हैं.

इन के अंदर भी वही मानवीय अवगुण भरे हुए हैं जो सामान्य इंसान में होते हैं. ये अपना साम्राज्य बढ़ाने के लिए दान करो, दान करो का गान करते रहते हैं ताकि ये संपन्न हो कर अपने लिए सुखसुविधा जुटा कर बड़ेबड़े आश्रम बना कर समाज में अपना वैभव दिखा कर सर्वश्रेष्ठ स्थान पर आसीन हो सकें.  ‘समस्या निदान के नाम पर ये लोगों की भावनाओं से खेल कर, उन्हें ठग कर अपना खजाना भरते हैं. ये नशा भी करते हैं, साथ में अन्य असामाजिक कृत्यों में भी संलग्न रहते हैं.

जो भी इन के जाल में फंस जाता है, उस का निकलना मुश्किल हो जाता है क्योंकि? कभी भविष्य का डर दिखाते हैं तो कभी भविष्य की सपनीली दुनिया. ‘दीदी, आप तो लिखती हैं, मेरे जीवन की कहानी जरूर लिखना, कम से कम यहां की असलियत तो बाहर की दुनिया

जाने.‘दीदी, अब मुझे अपनी परीक्षा की तैयारी करनी है क्योंकि कल से ही मेरी फाइनल परीक्षा शुरू है,’ कहती हुई व अपने आंसू पोंछती हुई मुझे बाहर जाने का इशारा किया लेकिन उस की बेबसी देख कर मुझे बहुत दर्द हुआ.

वह अपनी कथा के रिहर्सल में जुट गई थी. आखिर, उस के लिए भी तो परीक्षा की घड़ी थी, जिस में उसे जरूर से पास हो कर खरा उतरना जरूरी था. आखिर, उस के भी तो भविष्य का सवाल था. सुनतेसुनते नलिनी कब झपकी आ गई थी, पता ही नहीं लगा था. जब सूर्य की रश्मियों ने कमरे में उजाला भर दिया तब वह हड़बड़ा कर उठ बैठी थी.  मामी विशेष कमरे में घंटी बजा रही थीं और मधुर स्वर में गा रही थीं, ‘जागो मोहन प्यारे…’वह अभी भी आनंदी के फर्श से अर्श के संघर्ष की कहानी में खोई हुई थी. तभी मामी की आवाज से तंद्रा टूटी थी, ‘‘नलिनी दी उठ गईं.’’ मासूम आनंदी से मां आनंदेश्वरी बनने की कहानी तो वास्तव में बहुत संघर्षभरी जीवन गाथा है. प्रसन्नता इस बात की है कि वह अपने प्रयास में सफल हुई.

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