दो सखियां: भाग 3- क्या बुढ़ापे तक निभ सकती है दोस्ती

तारा ने भी पुराने दिन याद करते हुए कहा, ‘‘क्या खूब याद दिलाई. हम तो देव आनंद पर फिदा थे. हाय जालिम, क्या चलता था. मेरे पति तो मधुबाला के इतने दीवाने थे कि घर पर उस की फोटो टांग रखी थी. इन का बस चलता तो सौतन बना करले आते.’’

‘‘तभी एक देव आनंद जैसे लड़के पर रीझ गई थीं शादी के बाद?’’

‘‘ताना मार रही हो या तारीफ कर रही हो?’’

‘‘अरे सहेली हूं तेरी, ताना क्यों मारूंगी. अपनी जवानी के दिन याद भी नहीं कर सकते. फिर जवानी में तो सब से खताएं होती हैं.’’

‘‘हां, तू भी तो गफूर भाई को दिलीप कुमार समझ दिल दे बैठी थी.’’

‘‘अरे, उस कमबख्त की याद मत दिलाओ. मुझ से आशिकी बघारता रहता और निकाह कर लिया किसी और से. समझा था दिलीप कुमार, निकला प्राण. मेरा तो घर टूटतेटूटते बचा.’’

‘‘हम औरतों का यही तो रोना है. जिसे देव आनंद समझ कर बतियाते रहे उस ने महल्लेभर में बदनामी करवा दी हमारी. यह तो अच्छा हुआ कि हमारे पति को हम पर भरोसा था. फिर जो पिटाई की थी उस की, वह दोबारा दिखा नहीं. जिसे देव आनंद समझा वह अजीत निकला. खैर, पुरानी बातें छोड़ो, यह बताओ कि जफर भाई के बारे में कुछ सुना है?’’

‘‘हां, सुना तो है. घर की नौकरानी को पेट से कर दिया. इज्जत और जान पर आई तो निकाह करना पड़ा.’’

‘‘लेकिन जफर ठहरे 50 साल के और लड़की 20 साल की.’’

‘‘अरे मर्द और घोड़े की उम्र नहीं देखी जाती. घोड़ा घास खाता है और मर्द ने सुंदर जवान लड़की देखी कि मर्दों का दिमाग घास चरने चला जाता है.’’

‘‘जफर भाई बुढ़ाएंगे तो नई दुलहन को बाहर किसी का मुंह ताकना पड़ेगा.’’

‘‘यह तो सदियों से चला आ रहा है.’’

बातचीत चल रही थी कि इसी बीच फिर आवाज आई, ‘‘दादी, ओ दादी.’’

‘‘लो आ गया बुलावा. बात अधूरी रह गई. कल मिल कर बताऊंगी. तब तक कुछ और पता चलेगा.’’

रात में अल्पविराम लग गया. महिलाओं की गपें उस पर निंदारस, कहीं पूर्णविराम लग ही नहीं सकता था. बुढ़ापे में वैसे भी नींद कहां आती है. खापी कर बेटा काम पर चला जाता. बहू घर के काम निबटा सोने चली जाती. पोती स्कूल चली जाती तो सितारा बैठने चली जाती तारा के घर. तारा का भी यही हाल था. भोजनपानी होने के बाद पोता स्कूल निकल जाता. बहू घर के कामकाज में लगी रहती. कामकाज हो जाता तो बिस्तर पर झपकी लग जाती. अब तारा क्या करे.

अकेला मन और एकांत काटने को दौड़ता. वह सितारा को आवाज देती. कभी सितारा अपने घर महफिल जमा लेती. तारासितारा के अलावा यदि कोई और वृद्ध महिला बैठने आ जाती तो दोनों की बातें रुक जातीं. उन्हें सभ्यता के तकाजे के कारण बात करनी पड़ती, बिठाना पड़ता. लेकिन अंदर से उन्हें ऐसा लगता मानो कबाब में हड्डी. कब जाए? वे यही दुआ करतीं. उन्हें अपने बीच तीसरा ऐसे अखरता जैसे पत्नी को सौतन. फिर दूसरी महिलाओं के पास इतना समय भी नहीं होता कि दोपहर से रात तक बैठतीं.

इस उम्र में तो आराम चाहिए. तारासितारा तो बैठेबैठे थक जातीं तो वहीं जमीन पर चादर बिछा कर लेट जातीं. फिर कोई बात याद आ जाती तो फिर शुरू हो जातीं. उन की थकान तो बात करते रहने से ही दूर होती थी. एक बार सितारा के बेटे ने पूछा भी, ‘‘अम्मी, क्या बात चलती रहती है? घर की बुराई तो नहीं करती हो?’’ सितारा समझ गई कि यह बात बहू ने कही होगी बेटे से. सितारा भी जवाब में कहती, ‘‘क्या मैं अपने बहूबेटे की बुराई करूंगी?’’

बेटे ने कहा, ‘‘नहीं अम्मी, बात यह है कि हम ठहरे मुसलमान और वे हिंदू. आजकल माहौल बिगड़ता रहता है. फिर तुम्हारी सहेली का बेटा तो मुसलिम का विरोध करने वाली पार्टी का खास है. सावधानी रखना थोड़ी.’’

वहीं, तारा के बेटे ने भी कहा, ‘‘अम्मा, हम हिंदू हैं और वे मुसलमान. देखना कहीं धोखे से गाय का मांस खिला कर भ्रष्ट न कर दें. उन का कोई भरोसा नहीं. पाकिस्तान समर्थक हैं वे.’’ अम्मा ने कहा, ‘‘बेटा, हमें क्या लेनादेना तुम्हारी राजनीति से. हम ठहरे उम्रदराज लोग, धर्मकर्म की बातें कर के अपने मन की कह कर दिल हलका कर लेते हैं. मेरे बचपन की सहेली है. मुझे गोमांस नहीं खिलाएगी. इतना विश्वास है. इस के बाद वे मिलीं तो बातों का जायका कुछ बदला.

तारा ने कहा, ‘‘तुम गाय खाती हो. हम लोग तो उसे पूजते हैं.’’ सितारा ने कहा, ‘‘खाने को क्या गाय ही रह गई है. बकरा, मुरगा, मछली सब तो हैं. मैं अपने धर्म को जितना मानती हूं उतना ही दूसरे धर्म का सम्मान करती हूं. मैं पहले तुम्हारी सहेली हूं, बाद में मुसलमान. क्यों? किसी ने कुछ कहा है? भरोसा नहीं है मुझ पर?’’

‘‘नहींनहीं, गंभीर मत हो. ऐसे ही पूछ लिया.’’

‘‘दिल साफ कर लो. पूछने में क्या एतराज करना.’’

‘‘तुम पाकिस्तान की तरफ हो?’’

‘‘ऐसा आरोप लगाया जाता है हम पर.’’

‘‘कभी माहौल बिगड़ा तो क्या करोगी?’’

‘‘तुम्हारे घर आ जाऊंगी, क्योंकि मुझे भरोसा है तुम पर. तुम मेरी और मेरे परिवार की रक्षा करोगी. कभी तुम पर मुसीबत आई तो मैं तुम्हारे परिवार की रक्षा करूंगी,’’ और दोनों सहेलियों की आंखों में आंसू आ गए.

‘‘तुम्हारा बेटा अजय, मुसलमान विरोधी क्यों है? उसे समझाओ.’’

‘‘वह सब समझता है. कहता है, राजनीति है. बस और कुछ नहीं. लेकिन सुना है तुम्हारा बेटा हिंदू विरोधी है?’’

‘‘नहीं रे, वह तो हिंदुओं के डर के कारण मात्र मुसलिम संघों से जुड़ा है. केवल दिखाने के लिए. बाकी वह समझता सब है. हम एक ही देश के रहने वाले पड़ोसी हैं एकदूसरे के. चलो, कोई और बात करो. इन बातों से हमारा क्या लेनादेना.’’ और फिर वे वर्मा की बेटी, गफूर का नौकरानी से निकाह, बहुओं की तानाशाही, बेटों की धनलोलुपता, अपने पोतेपोतियों के स्नेह पर चर्चा करने लगीं.

समाज में फैली अश्लीलता, बेहूदा गीत, संगीत पर भी उन्होंने चर्चा की. अपनी जवानी, बचपन को भी याद किया और बुढ़ापे की इस उम्र में सत्संग आदि पर भी चर्चा की. लेकिन आनंद उन्हें दूसरों की बहूबेटियों के विषय में बात करने में ही आता था. पराए मर्दों के अवैध संबंधों में जो रस मिलता वह दुनिया में और कहां था.

तारा ने कहा, ‘‘मेरा पोता 20 साल का हो चुका है. खुद को शाहरुख खान समझता है.’’

सितारा ने कहा, ‘‘मेरी पोती भी 18 साल की हो गई. अपनेआप को करीना कपूर समझती है.’’

तारा ने कहा, ‘‘एक विचार आया मन में. कहो तो कहूं. बुरा मत मानना, मैं जानती हूं संभव नहीं और ठीक भी नहीं.’’

सितारा ने कहा, ‘‘यही आया होगा कि मेरी पोती शबनम और तुम्हारे पोते अजय की जोड़ी क्या खूब रहेगी? मेरे मन में आया कई बार. लेकिन हमारे हाथ में कहां कुछ है. कितने हिंदूमुसलिम लड़केलड़कियों ने शादी की. वे बड़े लोग हैं. उन की मिसालें दी जाती हैं. हम मिडिल क्लास. हम करें तो धर्म, जात से बाहर. हमारे यहां तो औरतें बच्चा पैदा करने की मशीन भर हैं. जमाने भर के नियमकायदे. फिर पुरुष को 4 शादियों की छूट. तुम्हारे यहां अच्छा है कि एक शादी.’’

तारा ने कहा, ‘‘लेकिन हमारे यहां दहेज जैसी प्रथा भी है. हर धर्म में अच्छाई और बुराई हैं. खैर, यह बताओ कि वर्मा की बेटी का कुछ पता चला? क्या सचमुच एबौर्शन हुआ था उस का? उस के मातापिता शादी क्यों नहीं कर देते उस लड़के से?’’

सितारा ने कहा, ‘‘वर्मा ठहरे कायस्थ. ऊंची जात के. वे कहते हैं मर जाएंगे लेकिन छोटी जात से शादी नहीं करेंगे.’’

‘‘इतना खयाल था तो ध्यान रखना था. अब लड़की तो उसी जात की हो गई जिस जात वाले के साथ सो गई थी. अब अपनी जात में करेंगे तो यह तो धोखा होगा उस लड़के के साथ. अगर लड़के को पता चल गया तो शादी के बाद फिर क्या होगा. धक्के मार कर भगा देगा.’’

तारासितारा की गपें चलती रहतीं. इसी बीच उन के पोते, पोती की भी आंखें लड़ गईं. उन में प्यार हो गया. कब हो गया, कैसे हो गया, उन्हें भी पता न चला. चुपकेचुपके निहारते रहे. फिर ताकने लगे धीरेधीरे, फिर मुसकराने लगे और दीवाने दिल मचलने लगे. बात हुई छोटी सी. फिर बातें हुईं बहुत सी. प्यार परवान चढ़ा. दिल बेकरार हुए और पाने को मचल उठे एकदूसरे को. फिर दोनों ने इकरार किया. फिर तो बातों का सिलसिला चल निकला. मुलाकातें होने लगीं दुनिया से छिप कर, मरमिटने की कसमें खाईं. दुनिया से न डरने की, साथ जीनेमरने की ठान ली. और एक दिन दुनिया को पता चला तो तूफान आ गया.

बुजुर्ग बातें करते हैं. अधेड़ धर्म और समाज की चिंता करते हैं. नौजवान प्यार करते हैं. पहले एक परिवार ने दूसरे को चेतावनी दी. अपनेअपने बच्चों को डांटाफटकारा. उन पर पहरे लगाए. पहरेदार जागते रहे और प्यार करने वाले भाग खड़े हुए. किसी को समाज से निष्कासन की सजा मिली. किसी पर फतवा जारी हुआ. बच्चों ने दूर कहीं शादी कर के घर बसा लिया और अपनेअपने परिवार के साथ थाने में भी सूचना भिजवा दी ताकि लड़की भगाने, अपहरण, बलात्कार जैसी रिपोर्ट दर्ज न हों. समाज पर थूक कर चले गए दोनों. दोनों परिवार कसमसा कर रह गए.

तारासितारा का मिलना बंद हो गया. दोनों को खरीखोटी सुनने को मिलीं, ‘सब तुम लोगों की वजह से. कहीं का नहीं छोड़ा. दिखा दी न अपनी जात, औकात.’ तारासितारा ने भी बचपन की दोस्ती खत्म कर ली. हिंदूमुसलिम दंगों का सवाल ही पैदा नहीं हुआ. बाकायदा कोर्ट मैरिज की थी दोनों ने. फसाद का कोई मौका ही नहीं दिया कमबख्तों ने. कट्टरपंथी मन मसोस कर रह गए. दूसरों पर हंसने वाली तारा और सितारा पर आज दूसरों के साथ उन के घर वाले भी हंस रहे थे. लानतें भेज रहे थे. 2 घनिष्ठ सखियों की दोस्ती समाप्त हो चुकी थी हमेशाहमेशा के लिए.

एक कट्टरपंथी ने सलाह दी, ‘‘भाईजान, हिंदू महल्ले में रहने का अंजाम देख लिया. आज लड़की गई है, कल…ऐसा करें, मकान बेचें और मोमिनपुरा चलें. अपनों के बीच.’’

शर्म और जिल्लत से बचने के लिए अपनी जान से प्यारी लड़की को मृत मान कर सितारा अम्मी सहित वह घर बेच कर मोमिनपुरा चली गईं. ऐसा नहीं है कि मोमिनपुरा की लड़कियों ने हिंदू लड़कों से और बजरंगपुरा की लड़कियों ने मुसलिम लड़कों से विवाह न किया हो, लेकिन जिस पर गुजरी वही नफरत पालता है. बच्चों ने मातापिता को फोन किया. विवाह स्वीकारने का निवेदन किया लेकिन दोनों घर के मिडिल क्लास दरवाजे बंद हो चुके थे उन के लिए. बच्चों ने न आना ही बेहतर समझा. वे अपने दकियानूसी विचारों वाले परिवारों को जानते थे. तारा और सितारा दो जिस्म एक जान थीं.

बचपन की सहेलियां. अलगअलग हो कर भी एकदूसरे को याद करतीं. एकदूसरे की याद में आंसू बहातीं. वह दिनदिन भर बतियाना, एकदूसरे को पान खिलाना, चायनाश्ता करवाना, गपें करने का हर संभव बहाना तलाशना. मीठी ईद की सेंवइयां, दीवाली की मिठाई. लेकिन क्या करें, धर्म के पहरे, समाज की चेतावनी के आगे दोनों बुजुर्ग सहेलियां मजबूर थीं. इश्क की कोई जात नहीं होती. प्यार का कोई धर्म नहीं होता. दिल से दिल का मिलन, प्रेमियों का हो या सखियों का, कहां टूटता है. पहरे शरीर पर होते हैं मन और विचारों पर नहीं. अपने अहं और जिद की वजह से दोनों परिवारों और समाज के लोगों ने उन्हें शेष जीवन मिलने तो नहीं दिया पर सुना है कि

अंतिम समय तारा की जबान पर सितारा का नाम था और सितारा ने तारा कह कर अंतिम सांस ली थी. यह भी सुना है कि दोनों की मृत्यु एक ही दिन लगभग एक ही समय हुई थी. 2 बुजुर्ग सहेलियों में इतना प्रेम देख कर मातापिता ने धर्म की दीवार तोड़ कर, मजहब के ठेकेदारों को ठोकर मारते हुए अजय को अपना दामाद और शबनम को अपनी बहू स्वीकार कर लिया था और उन से निवेदन किया था कि वे घर वापस आ जाएं.

Anupama: पाखी हुई घरेलू हिंसा का शिकार, क्या बेटी को इंसाफ दिला पाएगी अनुपमा

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ में आए दिन नए-नए ट्विस्ट देखने को मिल रहे हैं. ‘अनुपमा’ की टीआरपी को बढ़ाने के लिए  मेकर्स जद्दोजहद कर रहे है. बीते दिन रुपाली गांगुली के ‘अनुपमा’ में देखने को मिला कि काव्या वनराज को अंधेरे में रखने के लिए पछताती है और बेबी शावर के दौरान भी खुश नहीं रहती. वहीं दूसरी ओर मालती देवी को बार-बार बच्चे के रोने की आवाज आती है जिससे वह डर जाती हैं.

पाखी हो रही है घरेलू हिंसा का शिकार

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि अधिक मेहता पाखी पर चिल्लाता है. वहीं उसका हाथ खींचकर बात करेगा. अधिक कहेगा हर चीज तुम्हारी मर्जी से नहीं होगा. क्या सोच के उसे तुम ज्वाइन कर रही हो. न डिग्री है न डिप्लोमा, बताओं क्यों ऑफिस जा रही हो. मुझे और मेरी बहन को परेशान करने.

 

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पाखी पर हाथ उठाएगा अधिक

गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ में देखने को मिलेगा कि अधिक पाखी से  उससे नौकरी छोड़ने के लिए कहेगा, लेकिन पाखी नहीं मानेगी. पाखी अधिक को जवाब देगी कि तुम्हें डर है ना कि मैं कहीं बडी को बता न दूं कि तुम और तुम्हारी बहन पूरे परिवार को खा रहे हैं. इस बात से नाराज होकर अधिक पाखी को तमाचा मार देगा.

अनुपमा सिखाएगी सबक

‘अनुपमा’ में दिखाया जाएगा कि अधिक को जवाब देने के लिए पाखी भी हाथ उठाएगी, लेकिन तभी अधिक भीगी बिल्ली बन जाएगा. दरअसल, वहां पर बा आ आजाएंगी और वह बा के सामने अच्छा पति बनकर दिखाएगा. अधिक बा के सामने जताएगा कि पाखी उसे मारने की कोशिश कर रही थी. अधिक किसी तरह से बा को लेकर वहां से चला जाएगा, और बा से कहेगा किसी से कुछ मत कहना.लेकिन अनुपमा सुन लेती है. अनुपमा अपने बच्चों से बहुत प्यार करती है अगर अनुपमा यह बात पता चली तो वह अधिक की क्लास लगा देगी. लेकिन पाखी भी ठान लेगी कि वह चुप नहीं बैठेगी

BB OTT 2: एल्विश यादव पर फूटा Aashika Bhatia की मां का गुस्सा, इस कमेंट पर भड़की

सलमान खान का कॉन्ट्रोवर्शियल रियलिटी शो बिग बॉस ओटीटी 2 काफी सुर्खियों में है. बिग बॉस ओटीटी 2 को दर्शकों का खूब प्यार मिल रहा है. शो में अभिषेक मल्हन, मनीषा रानी, एल्विश यादव और आशिका भाटिया की चौकड़ी दर्शकों को खूब पसंद आ रही है. बिग बॉस ओटीटी 2 में एल्विश यादव जबरदस्त छा रहे है. दर्शक एल्विश यादव को भर-भर के प्यार दे रहे है. वहीं एल्विश अपने मजाकियां अंदाज और बड़बोलेपन से वह जनता को खूब हंसा रहे है. बिग बॉस ओटीटी 2 के बाते एपिसोड में एल्विश यादव ने आशिका भाटिया के छोटे कपड़ों पर कमेंट किया था. हालांकि, इस पर आशिका की मां ने रिएक्शन दिया है.

आशिका की मां ने एल्विश पर निकाला गुस्सा

मीडिया इंटरव्यू के मुताबिक आशिका की मां ने बताया कि उन्हें एल्विश यादव की बात बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगी. उन्होंने कहा, “मुझे एल्विश की यह बात सुनकर बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगी. इस बात पर एल्विश यादव को रोकना चाहिए थे. क्योंकि उन्हें किसी के कपड़ों पर कमेंट करने का कोई हक नहीं बनता कि तुम छोटे कपड़े क्यों पहनते हो. सामने बोलने की उसकी हिम्मत नहीं थी लेकिन जब आशिका को यह बात पता चलेगी तो उसे बहुत बुरा लगेगा.”

बिग बॉस ओटीटी 2 शो हुआ 2 हफ्ते के लिए एक्सटेंड

फिलहाल शो में बेबीका धुर्वे, पूजा भट्ट, मनीषा रानी, अभिषेक मल्हान, एल्विश यादव, अविनाश सचदेव, जिया शंकर, जद हदीद, और आशिका भाटिया कंटेस्टेंट हैं. पिछले वीकेंड के वार पर फलक नाज घर से बेघर हो गई थी. रियलिटी शो बिग बॉस ओटीटी 2 लगातर टीआरपी बढ़ने और दर्शको का खूब सारा प्यार मिलने के बाद शो को 2 हफ्ते के लिए एक्सटेंड कर दिया गया है.

दो सखियां: भाग 2- क्या बुढ़ापे तक निभ सकती है दोस्ती

तारा ने कहा, ‘‘सुना है पाकिस्तान के राष्ट्रपति को पुलिस ने पकड़ लिया.’’

सितारा ने कहा, ‘‘पाकिस्तान अजीब मुल्क है जहां राष्ट्रपति को पुलिस पकड़ लेती है. भारत में किसी पुलिस वाले की हिम्मत नहीं कि राष्ट्रपति पर उंगली भी उठा सके. यहां पुलिस वाले तो बस गरीबों को ही पकड़ते हैं.’’

‘‘अरे छोड़ो ये सब, यह बताओ, कल क्या कहने वाली थीं?’’ सितारा याद करने की कोशिश करती है लेकिन उसे याद नहीं आता. फिर वह बातों में रस लाने के लिए काल्पनिक बात कहती है, ‘‘हां, मैं कह रही थी कि वर्मा की बिटिया कल छत पर उलटी कर रही थी. कहीं पेट से तो नहीं है?’’

‘‘हाय-हाय, वर्माजी के मुख पर तो कालिख पुतवा दी लड़की ने. घर वालों को तो पता ही होगा.’’

‘‘क्यों न होगा. उस के मांबाप के चेहरे का रंग उड़ा हुआ है. रात में घर से चीखने की आवाजें आ रही थीं. बाप चिल्ला रहा था कि नाक कटवा कर रख दी. क्या मुंह दिखाऊंगा लोगों को. और लड़की सुबकसुबक कर रो रही थी. आज देखा कि वर्माइन अपनी बेटी को बिठा कर रिकशे पर ले जा रही थीं. दोनों मांबेटी के चेहरे उतरे हुए थे. जरूर बच्चा गिराने ले जा रही होगी.’’

‘‘क्या सच में?’’

‘‘तो क्या मैं झूठ बोलूंगी. धर्म कहता है झूठ बोलना गुनाह है, जैसे शराब पीना गुनाह है.’’

‘‘लेकिन क्या मुसलमान शराब नहीं पीते?’’

‘‘अरे, अब धर्म की कौन मानता है. जो पीते हैं वे शैतान हैं.’’

‘‘जीजा भी तो पीते थे.’’ सितारा ने दोनों कान पर हाथ रखते हुए कहा, ‘‘तौबातौबा, कभीकभी दोस्तों के कहने पर पी लेते थे. अब मृतक के क्या दोष निकालना. बहुत भले इंसान थे.’’

‘‘लेकिन मैं ने तो सुना है कि पी कर कभीकभी तुम्हें पीटते भी थे?’’

‘‘किस से सुना है? नाम बताओ उस का?’’ सितारा ने गुस्से में कहा तो फौरन तारा ने उसे पान लगा कर दिया. सितारा ने पान मुंह में रखते हुए कहा, ‘‘अब आदमी कभीकभी गुस्से में अपनी औरत को पीट देता है. मियांबीवी के बीच में थोड़ीबहुत तकरार जरूरी भी है. मैं भी कहां मुंह बंद रखती थी. पुलिस वालों की तरह सवाल पर सवाल दागती थी, ‘देर क्यों हो गई, कहीं किसी के साथ चक्कर तो नहीं है?’’’

‘‘था क्या कोई चक्कर?’’

‘‘होता तो शादी नहीं कर लेते. हमारे मर्दों को 4 शादियों की छूट है. लेकिन मेरा मर्द बाहर चाहे जो करता हो, घर पर कभी किसी को नहीं लाया.’’

फिर थोड़ी देर खामोशी छा जाती. इतने में चायनाश्ता हो जाता. वे फिर तरोताजा हो जातीं और सोचतीं कि कहां से शुरू करें. आखिर 2 औरतें कितनी देर खामोश रह सकती हैं.

‘‘तुम अपनी कहो, कल बहू चिल्ला क्यों रही थी?’’

‘‘अरे, पतिपत्नी में झगड़ा हो गया था किसी बात को ले कर. थोड़ी देर तो मैं सुनती रही, फिर जब नीचे आ कर दोनों को डांटा तो बोलती बंद दोनों की.’’ यह तो तारा ही जानती थी कि जब उस ने पूछा था कि क्या हो गया बहू? तो बहू ने पलट कर जवाब दिया था, ‘अपने काम से काम रखो, ज्यादा कान देने की जरूरत नहीं है. अपने लड़के को समझा लो कि शराब पी कर मुझ पर हाथ उठाया तो अब की रिपोर्ट कर दूंगी दहेज की. सब अंदर हो जाओगे.’

‘‘लेकिन मुझे तो सुनने में आया कि कोई दहेज रह गया था, उस पर…’’

तारा ने बात काटते हुए कहा, ‘‘हम क्या इतने गएगुजरे हैं कि बहू को दहेज के लिए प्रताडि़त करेंगे. किस से सुना तुम ने…सब बकवास है. अब झगड़े किस घर में नहीं होते. हमारा आदमी हमें पीटता था तो हम चुपचाप रोते हुए सह लेते थे. पति को ही सबकुछ मानते थे. लेकिन आजकल की ये पढ़ीलिखी बहुएं, थोड़ी सी बात हुई नहीं कि मांबाप को रो कर सब बताने लगती हैं. रिपोर्ट करने की धमकी देती हैं. ऐसे कानून बना दिए हैं सरकार ने कि घरगृहस्थी चौपट कर दी. सत्यानाश हो ऐसे कानूनों का.’’

‘‘हां, सच कहती हो. घरपरिवार के मामलों में सरकार को क्या लेनादेना. जबरदस्ती किसी के फटे में टांग अड़ाना.’’

तारा ने आंखों में आंसू भरते हुए कहा, ‘‘घर तो हम जैसी औरतों की वजह से चलते हैं. बाहर आदमी क्या कर रहा है, हमें क्या लेनादेना लेकिन आजकल की औरतें तो अपने आदमी की जासूसी करती हैं. वह क्या कहते हैं…मोबाइल, हां, उस से घड़ीघड़ी पूछती रहती हैं, कहां हो? क्या कर रहे हो, घर कब आओगे? अरे आदमी है, काम करेगा कि इन को सफाई देता रहेगा. हमारा आदमी बाहर किस के साथ था, हम ने कभी नहीं पूछा.’’ यह तो तारा ने नहीं बताया कि पूछने पर पिटाई हुई थी कई दफा. उस का आदमी बाहर किसी औरत को रखे हुए था. घर में कम पैसे देता था. कभीकभी घर नहीं आता था. आता तो शराब पी कर. पूछने पर कहता कि मर्द हूं. एक रखैल नहीं रख सकता क्या. तुम्हें कोई कमी हो तो कहो. दोबारा पूछताछ की तो धक्के दे कर भगा दूंगा. उस ने अपने आंसुओं को रोका. पानी पिया. पिलाया. फिर पान का दौर चला.

‘‘अरे तारा, कल बेटा पान ले कर आया था बाजार से. लाख महंगा हो, एक से एक चीजें पड़ी हों सुगंधित, खट्टीमीठी लेकिन घर के पान की बात ही और है.’’

‘‘क्या था ऐसा पान में? क्या तुम ने देखा था?’’

‘‘हां, जब बेटे ने बताया कि पूरे 20 रुपए का पान है. ये बड़ा. तो इच्छा हुई कि आखिर क्या है इस में? खोला तो बेटे से पूछा, ‘ये क्या है?’ तो बेटे ने बताया कि अम्मी, यह चमनबहार है, यह खोपरा है, यह गुलकंद है, यह चटनी है. और भी न जाने क्याक्या. लेकिन अच्छा नहीं लगा, एक तो मुंह में न समाए. उस पर खट्टामीठा पान. अरे भाई, पान खा रहे हैं कोई अचार नहीं. पान तो वही जो पान सा लगे, जिस में लौंग की तेजी, इलाइची की खुशबू, कत्था, चूना, सुपारी हो. ज्यादा हुआ तो ठंडाई और सौंफ. बाकी सब पैसे कमाने के चोंचले हैं.’’ यह नहीं बताया सितारा ने कि उन्हें शक हो गया था कि जमीनमकान के लोभ में कहीं बेटा पान की आड़ में जहर तो नहीं दे रहा है. सो, उन्होंने पान खोल कर देखा था. जब आश्वस्त हो गईं और आधा पान बहू को खिला दिया, तब जा कर उन्हें तसल्ली हुई. बेटेबहू काफी समय से गांव की जमीन बेचने के लिए दबाव बना रहे थे.

‘‘कितनी उम्र होगी तुम्हारी पोती की?’’

‘‘होगी कोई 16 वर्ष की.’’

‘‘लड़का देखा है कोई?’’

‘‘नहीं, बहू कहती है कि 18 से पहले शादी करना गैरकानूनी है. अभी उम्र ही क्या है? मांबाप के यहां चैन से रह लेने दो. फिर तो जीवनभर गृहस्थी में पिसना ही है. एक तो ये कानून नएनए बन गए हैं, फिर लड़की जात. इस उम्र में तो हम 2 बच्चों की अम्मा बन गए थे. लेकिन बहूबेटे कहते हैं कि अभी उम्र नहीं हुई शादी की. पढ़ना कम, घूमना ज्यादा. एक कहो, दस कहती हैं आजकल की औलादें. तौबा.’’

‘‘यही हाल तो हमारे यहां है. जब देखो सिनेमा, टीवी, क्रिकेट. पढ़ाई का अतापता नहीं. 10वीं में फेल हो चुके हैं. उम्र 20 साल के आसपास हो गई है. हम कहें तो उन की अम्मा को बुरा लगता है. बाप, बेटे से पूछता है कितना स्कोर हुआ. यह कैसा खेल है भई.’’

‘‘अच्छा क्रिकेट. हमारे यहां भी यही चलता है. खेल न हुआ, तमाशा हो गया. इस ने इतने बनाए, उस ने आउट किया. बापबेटी में बहस चलती है. कौन, क्यों कैसे आउट हो गया. एंपायर ने गलत फैसला दे दिया. टीवी पर चिपके रहते हैं दिनभर. ये भी नहीं कि अम्मी को मनपसंद सीरियल देख लेने दें. बेटा तो बेटा, पोती रिमोट छीन लेती है हाथ से, न शर्म न लिहाज.’’

‘‘क्या करें, अब हमारे दिन नहीं रहे. बुढ़ापा आ गया. बस, अपनी मौत का रास्ता तक रहे हैं. हमारे जमाने में तो रेडियो चलता था. ये औफिस गए नहीं कि हम ने गीतमाला लगाई. मजाल है कोई डिस्टर्ब कर दे. सास टोक भी दे तो हम कहां मानने वाले थे.’’

‘‘सच कहती हो तारा, हमारे मियां तो हमें अकसर फिल्म दिखाने ले जाते थे, क्या फिल्में बनती थीं. मैं तो मरती थी दिलीप कुमार पर. क्या शानदार गाने, मन मस्त हो जाता था. आजकल तो पता नहीं क्या गा रहे हैं, सिवा होहल्ला के. हीरो बंदर की तरह उछलकूद कर रहा है. हीरोइन ने कपड़े ऐसे पहने हैं कि…नहीं ही पहने समझो. तहजीब का तो कचूमर निकाल दिया है.’’

Monsoon Skincare Tips: बारिश में स्किन पर होती है चिपचिपाहट तो इस्तेमाल करें, ये होममेड टोनर

बरसात के मौसम में हवा में नमी, उमस, पसीना और हल्की गर्मी से स्किन चिपचिपाहट महसूस करती है. Monsoon के सीजन में स्किन की देखभाल करना बेहद जरूरी है. इस मौसम में उमस की वजह से स्किन चिड़चिड़ी महसूस करती है. बारिश में स्किन प्रॉब्लम होना आम बात है. स्किन पर पिंपल के अलावा रैशज या फिर लालपन तक दिखने लगता है. बारिश में अगर भीग जाए तो खुजली समेत कई फंगल इंफेक्शन संबंधित स्किन प्रॉब्लम होने लगती है. इस Monsoon स्किन पर होने वाली चिपचिपाहट से बचना है तो कुछ घरेलू टिप्स आजमा सकते हैं. जानें आप किन तरीकों से घर पर ही होममेड टोनर तैयार कर सकते हैं.

  1. चावल का टोनर

हर भारतीय किचन में चावल जरुर मिलेगा. जो चावल भूख मिटाने के साथ-साथ स्किन केयर के लिए बेस्ट है. आप घर पर चावल का टोनर भी इस्तेमाल कर सकते है. इसके लिए चावल को अच्छे से धोने के बाद इसे भिगो दें. अगले दिन चावल को निकालकर इसकी स्मूदी बना लें और इसमें पानी में मिलाकर एक बोतल में डाल लें. रात में सोने से पहले इसे स्किन पर लगाएं और फर्क देखें.

2. ग्रीन टी टोनर

घर पर ग्रीन टी का टोनर बनाना बहुत आसान है, इसके लिए सबसे पहले आप पैन में पानी लें और इसमें ग्रीन टी बैग शामिल करें. थोड़ी देर गर्म करने के बाद इसे ठंडा होने दें. अब एक बोतल में इसे शामिल करें. रात में सोने से पहले चेहरे को अच्छे से वॉश करें और मॉइस्चराइजर लगाने के बाद इस टोनर को जरूर अप्लाई करें.

3. एलोवेरा टोनर

चिपचिपाहट को दूर करने के लिए एलोवेरा सबसे बढ़िया है. इसके लिए आधा कप गुलाब जल लें और इसमें एलोवेरा जेल के पल्प को मिलाएं. इसे अच्छे से मिक्स करके एक टाइट कंटेनर में स्टोर करें. सुबह उठने के बाद और रात में सोने से पहले इसे स्किन पर अप्लाई करें. ये आपकी स्किन को फ्रेश रखेगा.

4. खीरे का टोनर

खीरे में अधिक मात्रा में पानी होता है और ये स्किन को रिपेयर और कूल करने में भी कारगर होता है. खीरे में पोषक तत्वों के साथ ही एंटीबैक्टीरियल गुण भी होते हैं. खीरे से बनी टोनर स्किन को फ्रेश भी फील कराता है. इसका टोनर बनाने के लिए एक खीरे को कद्दूकस कर लें और एक बोतल में डाल लें. इसमें पानी डालें और रोज वाटर भी ऐड करें. रोज रात में इसे चेहरे पर स्प्रे करना न भूलें.

बीहू की शांति: भाग 3-पर्सी दोस्ती की आड़ में लड़की को क्यों फंसता था?

कुछ दिनों तक मोबाइल पर बातचीत के बाद मुलाकात तय हुई. वे तीनों होटल में गए जहां पर पर्सी ने जम कर लेस्बियन कल्चर की सपोर्ट में भाषणबाजी करी.

अब तक पर्सी समझ चुकी थी कि उसे क्या करना है, ‘‘तो लेस्बियन इतने अच्छे हैं तो आ जाओ न हमारे साथ,’’ कहते हुए अपने होंठ शांति के होंठों से चिपका दिए पर्सी ने. शांति ने अपने पूरे शरीर को ढीला छोड़ दिया. इस समय उस के शरीर पर पर्सी और बीहू अपना सारा प्रेम निछावर कर रही थीं.

शांति ने चरम सुख एक बार नहीं बल्कि 2-2 बार अनुभव किया. प्यासी धरती आज पानी की बूंदों से तृप्त हो रही थी.

उस दिन शर्म की दीवार क्या गिरी फिर तो आए दिन का खेल ही हो गया. अब तीनों जब भी मिलते, जवानी का मजा लेते और बदले में शांति बीहू और पर्सी को पैसे भी दे कर जाती. शांति को बीहू और पर्सी का साथ बहुत अच्छा लग रहा था और अब शांति पहले से ज्यादा खुश नजर आ रही थी पर उस की यह खुशी ज्यादा दिन तक नजर नहीं आई जब एक दिन पर्सी ने घबराते हुए शांति को बताया कि जिस होटल में वे तीनों मजा करने जाते थे वहां के कमरे में शायद स्पाई कैमरा लगा हुआ था और उस कैमरे में हमारी सभी की सैक्स करते समय के न्यूड वीडियो कैद हो गए हैं और अब उस होटल का मालिक हमे ब्लैकमेल कर रहा है और वीडियो को इंटरनैट पर लीक न करने के 2 लाख रुपए मांग रहा है.

‘‘पर कैसा वीडियो है वह और हैं कहां?’’ शांति ने पूछा तो पर्सी ने उसे अपने मोबाइल पर एक अनजान नंबर से आया वीडियो दिखाया जिस में शांति पूरी तरह से नग्न हो कर बिस्तर पर लेटी हुई है जबकि बीहू उस के पैरों को सहला रही है.

शांति दंग रह गई थी. वह किसी भी हालत में यह नहीं चाहती थी कि उस के चरित्र पर कोई लांछन लगा सके पर यहां तो उस का पूरा वीडियो ही बना हुआ है.

शांति ने बीहू को मिलने के लिए बुलाया और एक ही सांस में सारी घटना कह सुनाई. पर्सी भी साथ में थी.

‘‘पर इस बात की क्या गारंटी है कि ब्लैकमेलर एक बार हम से पैसा ले कर दोबारा हम से पैसे नहीं मांगेगा?’’ शांति ने कुछ सोचते हुए कहा.

पर्सी के चेहरे पर बड़ा आत्मविश्वास सा दिखाई दिया जब उस ने कहा कि एक बार पैसे मांगने के बाद वह दोबारा पैसे नहीं मांगेगा.

वैसे तो बीहू जानती थी कि आए दिन लड़केलड़कियों के सैक्स स्कैंडल

इंटरनैट पर अपलोड होते रहते हैं पर फिर भी किसी तरह की बदनामी न हो इसलिए वह भी यही चाहती थी कि बात रफादफा कर दी जाए हालांकि 2 लाख रुपए की रकम छोटी नहीं होती पर फिर मरता क्या न करता.

शांति और बीहू ने 2 लाख रुपए मिल कर किसी तरह पर्सी को दिए ताकि वह उस होटल के मकानमालिक अर्थात उस ब्लैकमेलर को दे सके. फिर कई हफ्तों तक उन लोगों में कोई मुलाकात करना ठीक नहीं समझ.

अभी 6 महीने ही गुजरे थे कि पर्सी ने एक बार फिर से घबराए स्वर में शांति को बताया कि वह ब्लैकमेलर मुझे फोन कर के फिर से पैसे मांग रहा है.

इस बार शांति को पर्सी की बात पर थोड़ा शक हुआ, ‘‘पर उस का फोन बारबार तुम्हारे पास ही क्यों आ रहा है हम में से किसी के पास क्यों नहीं आता.’’

शांति के इस सवाल से सकपका गई पर्सी. उसे इस प्रश्न की आशा न थी, इसलिए उस ने बात बदलते हुए कहा कि हमें जल्द ही कुछ करना चाहिए वरना हम सब बदनाम हो जाएंगे.

आखिर बीहू और शांति के पास कोई पैसों का पेड़ तो था नहीं. वे दोनों परेशान दिखी पर न जाने क्यों शांति को पर्सी की बात पर शक हो रहा था. उस ने शाम को पर्सी से फिर से उस के कमरे पर मिलने को कहा और यह भी कहा कि उसे अपनी इज्जत तो बचानी ही है. अत: कैसे भी हो वह पैसे ले कर आएगी.

शाम को पर्सी, बीहू और शांति एकसाथ थीं. शांति अपने साथ 2 लाख रुपए बैग में ले कर आई थी और बहुत परेशान हो रही थी कि कहीं यह ब्लैकमेलर उस का वीडियो वायरल न कर दे.

पर्सी ने पैसे देख कर उसे भरोसा दिलाया कि वह घबराए नहीं. पैसे दे देंगे तो वह कुछ नहीं करेगा.

शांति के आग्रह पर अपनी टैंशन कम करने के नाते तीनों ने जम कर शराब पी और

पार्टी करी. शराब पी कर सब से पहले पर्सी लुढ़क गई क्योंकि शांति ने चुपके से सिर्फ पर्सी की शराब में ही नींद की गोलियां मिलाई थीं और खुद बीहू और शांति सिर्फ नशे में होने का नाटक भर कर रही थीं. उन दोनों ने पर्सी की उंगली की बायोमीट्रिक छाप से पर्सी का मोबाइल अनलौक किया और उस की छानबीन करी, उस के चैट्स खंगाले और जो समाने आया उस से वे दोनों दंग रह गईं.

पर्सी के अनेक लड़कों और लड़कियों से संबंध थे. वह लेस्बियन होने का दिखावा करती और फिर लड़कियों को अपने जाल में फंसा कर उन के आपसी संबंध का न्यूड वीडियो बना कर बाद में उन्हीं को ब्लैकमेल करती.

शांति को उसी दिन शक हो गया था जब उस के सवाल पर पर्सी के चेहरे का रंग उड़ गया था. तभी उस ने अपने मन की बात बीहू से शेयर करी और तभी दोनों ने मिल कर पूरी प्लानिंग से  पार्टी वाला प्रोग्राम बनाया.

बीहू और शांति ने पर्सी को बैड के सिरहाने से बांध दिया और उस के मोबाइल से ही पुलिस को फोन कर के पर्सी के बारे में सबकुछ बता दिया. पर्सी का पता भी बता दिया. पुलिस द्वारा फोन करने वाले की पहचान पूछे जाने पर सिर्फ ‘एक पीडि़त’ कह कर फोन काट दिया.

बीहू को पर्सी ने धोखे में रखा और अपने जाल में फंसाया. बीहू कभी पर्सी को माफ नहीं करेगी और अब शायद किसी अनजाने पर इतनी जल्दी भरोसा भी नहीं कर पाएगी.

‘‘तुम चाहो तो मुझ पर भरोसा कर सकती हो क्योंकि मैं भी एक सताई हुई औरत हूं,’’ शांति ने जैसे बीहू के मन की बात पढ़ ली थी.

बीहू के चेहरे पर मुसकराहट थी. उस ने कमरे से अपना सारा सामान उठाया और शांति के साथ एक अनजान शहर की ओर जाने वाली बस में बैठ गई.

अब बीहू को किसी ड्रामा स्कूल से नाटक के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं थी. अपने अनुभवों से वह जान चुकी थी कि यहां पर सब तरफ एक नाटक चल रहा है जिस में लोग अपना असली चेहरा छिपाए रहते हैं और नकली चेहरा जनता को दिखाते हैं.

बीहू और शांति बाकी का जीवन एकदूसरे के असली चेहरे के साथ बिताएंगी जबकि दुनिया के सामने उन का नकली चेहरा ही होगा.

पुरुषों द्वारा किसी न किसी रूप में पीडि़त महिलाएं आज आजाद हो चुकी थीं. समाज उन के रिश्ते को ‘अननैचुरल’ भी कह सकता है पर सच तो यह था कि अब बीहू को शांति मिल चुकी थी और अब शांति के साथ बीहू थी.

किचिन का मेकओवर करने के 7 टिप्स

किचिन प्रत्येक घर का महत्वपूर्ण स्थान होता है. ये एक ऐसा स्थान है जहां पर प्रत्येक सदस्य की पसंद नापसंद का ध्यान रखा जाता है और स्वादिष्ट भोजन भी बनाया जाता है. आजकल किचिन को भी महंगे महंगे शेल्फ, ग्लासेज और क्रोकरी से सजाया जाता है परन्तु कई बार सब कुछ होने के बाद भी किचिन भरी भरी और अस्तव्यस्त सी प्रतीत होती है. आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बता रहे हैं. जिनका ध्यान रखकर आप अपनी किचिन का कम खर्चे में भी शानदार मेकओवर कर सकते हैं जिससे आपकी किचिन भी व्यवस्थित और सजी धजी लगेगी-

  1. सही हो कंटेनर्स का चयन 

रसोई में दाल चावल, मसाले के अतिरिक्त अनेकों खाद्य पदार्थ होते हैं जिनके लिए डिब्बो की आवश्यकता होती है. रंग बिरंगे, छोटे बड़े, बेतरतीबी से रखे गए डिब्बे अच्छी खासी किचिन को भी बद्सूरत बना देते हैं इसलिए आपकी किचिन चाहे छोटी हो या बड़ी डिब्बे रसोई की अलमारी के साईज के अनुसार ही खरीदें. ताकि उन्हें अलमारी में करीने से लगाया जा सके और पूरी जगह का उपयोग किया जा सके, साथ ही कोशिश करें कि एक अलमारी में एक रंग, साइज और आकार के डिब्बे ही रखे जाएं ताकि वे दिखने में सुंदर प्रतीत हों.

2. साफ़ सुथरा हो प्लेटफार्म

कई बार प्लेटफार्म पर ही कटलरी, मिक्सी ग्राइंडर, आर ओ जैसे अनेकों सामान को रख दिया जाता है जिससे प्लेटफार्म पूरा भर जाता है और किचिन भरी भरी सी प्रतीत होने लगती है इसलिए जितना हो सके किचिन के प्लेटफार्म को खाली रखें जिससे किचिन बड़ी और व्यवस्थित लगेगी. खाना बनाने के तुरंत बाद प्लेटफार्म को सर्फ के पानी से धोएं या पोंछें. फिर अंत में सूती कपड़े से पोंछकर सुखा दें.

3. उचित हो शेल्फ का चयन

किचिन की किस शेल्फ में क्या रखना है इसका चयन भी अति बुद्धिमानी से करें उदाहरण के लिए दाल-चावल, चाय चीनी, तेल नमक जैसी रोजमर्रा की वस्तुओं को ऐसी जगह पर रखें जहां से आपको लेने में आसानी हो. कभी कभार प्रयोग में आने वाले बर्तनों, खाद्य पदार्थों को स्टोर या ऐसी शेल्फ में रखें जिसे कम खोला जाता हो. शेल्फ का चयन अपनी किचिन के कंटेनर्स के अनुसार करें ताकि उन्हें एक के ऊपर एक आराम से रखा जा सके.

4. लेबलिंग भी है जरूरी

लेबलिंग के अभाव में अक्सर एक चीज को खोजने के लिए प्रत्येक डिब्बे को उठा उठाकर देखना पड़ता है जिससे समय भी व्यर्थ होता है और किचिन भी अस्तव्यस्त हो जाती है. इसलिए प्रत्येक डिब्बे पर लेबल अवश्य लगायें ताकि आपकी किचिन में आपके अतिरक्त कोई दूसरा भी सहजता से काम कर सके. लेबल लगाने के लिए आप कागज की स्लिप्स के स्थान पर पेपर टेप का प्रयोग भी कर सकतीं हैं इसे लगाना और निकालना काफी आसान होता है.

5. डिक्लटरिंग है जरूरी

अक्सर हमारी किचिन में बहुत सारे क्रेक बर्तन, स्नेक्स के डिब्बों के तली में पड़ी नमकीन और महीनों से प्रयोग न किये गये मसाले या अन्य खाद्य पदार्थ इकट्ठे हो जाते हैं जिससे जगह और कंटेनर्स दोनों ही घिरे रहते हैं इसलिए माह में एक बार अपनी किचिन की डिक्लटरिंग अवश्य करें और जितना भी फालतू सामान हो उसे बिना किसी मोह के अपनी किचिन से बाहर कर दें इससे चीजे व्यवस्थित और किचिन साफ़ सुथरी रहेगी.

6. सजावट करें

आजकल किचिन को भी बहुत खूबसूरत और खुला खुला बनाया जाने लगा है. अपनी किचिन को मनीप्लांट, स्नैकप्लांट जैसे इनडोर पौधों से सजाएं. किचिन में प्लांट्स लगाने के लिए आप कांच की खाली बोतलों का भी प्रयोग कर सकतीं हैं. इनमें पौधे लगाने से किचिन में मिटटी की गंदगी नहीं होती. सप्ताह में एक बार आप इनका पानी बदलते रहें पौधे अपने आप बढ़ते रहते हैं.

7. साफ़ सफाई का रखें ध्यान

साफ़ सफाई के अभाव में महंगे से महंगा सामान भी अपनी आभा खो देता है. किचिन केबिनेट्स,  चिमनी, शेल्फ और ग्लासेज की प्रति सप्ताह सफाई अवश्य की जाना चाहिए वरना वे अच्छी से अच्छी किचिन के सौन्दर्य को भी खराब कर देते हैं.

करें ये भी प्रयोग

  • अक्सर हमारी किचिन में कॉफ़ी, मसाले, शहद आदि के प्लास्टिक और कांच के अनेकों खाशीशियाँ और डिब्बे इकट्ठे हो जाते हैं आप इन्हें उबलते पानी में 2-3 घंटे के लिए डालकर रख दें और फिर चाकू से इनका लेबल निकालकर स्क्रबर से अच्छी  तरह रगड़ दें. अब इनमें मनचाहा सामान भरकर लेबल लगा दें.
  • प्लेटफ़ॉर्म को साफ करने के लिए एक स्प्रे बोतल में 1 टीस्पून सर्फ डालकर घोल तैयार कर लें और फिर इससे प्लेटफोर्म, शेल्फ और ग्लासेज साफ करें.
  • खाली और अनुपयोगी कंटेनर्स व बर्तनों को इनडोर पौधे लगाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है.
  • आजकल टच पेनल वाली चिमनी और आर ओ चलन में हैं इन्हें साफ करने के लिए स्प्रे के स्थान पर गीले कपड़े का प्रयोग करें साथ ही गीले कपड़े से पोछने के तुरंत बाद सूखे कपड़े से पोंछ दें अन्यथा टच पेनल के खराब होने की सम्भावना रहती है.
  • सिंक में जूठे बर्तनों को छोड़ने के स्थान पर इन्हें एक टब या बाल्टी में भरकर आंगन या वाशिंग एरिया में रखें.

मेरा वजन दिन पर दिन कम होता जा रहा है, क्या करूं?

सवाल-

मैं 23 साल की विवाहित स्त्री हूं. मेरा 1 बेटा भी है. मेरा वजन पहले से ही कम था, पर इधर कुछ समय से यह घट कर सिर्फ 32 किलोग्राम रह गया है. परिवार के सभी बड़े-बूढ़े अकसर टोकते रहते हैं कि मुझे ठीक से खानापीना चाहिए और खुश रहना चाहिए, पर मैं उन्हें क्या बताऊं कि मैं ठीक से खातीपीती भी हूं और सदैव खुश रहने का जतन भी करती हूं, फिर भी शरीर सूखता जा रहा है. कहीं यह किसी अंदरूनी बीमारी का लक्षण तो नहीं है? कुछ ऐसे व्यावहारिक उपाय बताएं जिन से वजन बढ़ सके और मैं सुंदर तथा हृष्टपुष्ट दिखने लगूं?

जवाब-

यदि किसी व्यक्ति का वजन बिना प्रयत्न किए खुदबखुद घटने लगे और उस की जानकारी में उसे शरीर या मन का कोई रोग न हो, तो इसे यकीनन गंभीरता से लेना चाहिए. अच्छा होगा कि आप या तो अपने फैमिली डाक्टर या किसी इंटर्नल मैडिसिन के विशेषज्ञ डाक्टर से मिलें और अपनी विधिवत जांच कराएं. आंतों के कई प्रकार के रोग जिन में आंतों की पाचनशक्ति कमजोर पड़ जाती है और खाना आंतों से जज्ब होने के बजाय शरीर से व्यर्थ चला जाता है, उन के पनपने से यह परेशानी प्रकट हो सकती है. बिगड़ी हुई डायबिटीज में भी यह लक्षण आम देखा जा सकता है.

शरीर में टीबी का रोग लग जाए तब भी व्यक्ति सूख कर कांटा हो जाता है. कुछ खास हारमोनल रोगों जैसे हाइपरथायरोडिज्म और ऐडिसन रोग में भी वजन घटता चला जा सकता है. किसीकिसी व्यक्ति में वजन घटने के पीछे कभीकभी कैंसर जैसा गंभीर रोग भी कारक होता है. कई लोगों में समूची समस्या मानसिक असंतोष, उदासी और अवसाद से जुड़ी होती है. कुछ में मसला शरीर के किसी बड़े अंग जैसे लिवर, किडनी या हार्ट फैल्योर से भी संबंधित हो सकता है.  समस्या से उबरने के लिए सब से पहली जरूरत वजन घटने के पीछे उस के कारक को ढूंढ़ निकालने की है. जैसे ही डाक्टरी छानबीन से इस का कारण सामने आएगा, वैसे ही उस से उबरने के उपाय बताना आसान हो जाएगा.

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जरूरत से ज्यादा पतला होना भी ठीक नहीं होता. कई बार ज्यादा पतला होना हमारे लिए शर्मिंदगी की वजह बन जाता है. हममें से कई महिलाएं ऐसी हैं जो खाती तो बहुत हैं लेकिन कुछ भी उनके शरीर को लगता ही नहीं. अगर आपके या आपके किसी जाननेवाले के साथ भी ऐसी ही दिक्कत है तो समझ लीजिए कि डाइट में बदलाव की जरूरत है. यहां हम आपको कुछ चीजें बता रहे हैं जो वजन बढ़ाने में मदद कर सकती हैं.

दूध

दूध फैट, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन का मिक्स होता है. इसके साथ इसमें विटामिन और कैल्शियम भी भरपूर होता है.

चावल

चावल से भरे एक कप में 200 कैलरीज होती हैं, जिसमें कार्बोहाइड्रेट भी बड़ी मात्रा में होता है.

YRKKH: अभीर की तलाश में अभिमन्यु पहुंचा अक्षरा के पास, मंजिरी आरोही शॉक

स्टारप्लास का धमाकेदार सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ आए दिन ट्विस्ट पर ट्विस्ट देखने को मिल रहे है. ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ सीरियल अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि गोयनका, शर्मा और बिड़ला परिवार के ऊपर बड़ी परेशानी आने वाली है. वहीं शो में अभीर गुम हो जाता है. वह किसी अंजान शहर में पहुंच जाता है.

अक्षरा को होगी अभीर की फ्रिक

‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ सीरियल के प्रोमो में दिखाया गया है. 6 साल का अभीर न कसौली और न उदयपुर किसी अनजान शहर में पहुंच जाता है. आज के एपिसोड में दिखाया जाएगा कि अभिमन्यु, अभीर को अक्षरा के पास ले जाने की तैयारी करता है. लेकिन मंजरी उसे ऐसा करने से रोकती है. प्रोमो में अभीर कहता है कि मैं अब मम्मी के पास कैसे जाऊंगा ? इतना कहकर वह बेहोश हो जाता है. अभीर के गुम हो जाने से अभिमन्यु परेशान हो जाता है वहीं अक्षरा को अभीर की फ्रिक होती है.

 

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अभिनव की होगी मौत

दरअसल, शो में जल्द ही अभिमनव शर्मा की मौत होने वाली है, जिसके बाद अक्षरा और अभिमन्यु की लाइफ में एक और मोड़ देखने को मिलेगा. ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में आने वाले ट्विस्ट में देखने को मिलेगा कि अभीर के गुम जाने की खबर सुनकर अभिनव उसे ढूंढ़ने के लिए निकालता है और उसी दौरान अभिनव की मौत हो जाएगी. वैसे तो आधिकारिक तौर पर पुष्टी हो गई है कि शो से अभिनाव का किरदार खत्म हो जाएगा. लेकिन शो में अभिनाव की मौत कैसे होगी इस बात की जानकारी अभि सामने नहीं आई है.

बताया जा रहा है ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’  सीरियल में आगे दर्शकों के मनोरंजन के लिए  स्टोरी का आगे बढ़ाने के लिए. सीरियल में ढेर सारा रोमांस और अक्षरा- अभिनव की प्रेम कहानी शुरु होने वाली है.

Bigg Boss ott 2 में पूजा भट्ट चलाती है फोन! भड़के लोग, देखें वीडियो

सलमान खान के कॉन्ट्रोवर्शियल शो बिग बॉस ओटीटी 2 लगातर सुर्खियों में बना हुआ है. बिग बॉस शो हमेशा विवादों में घिरा रहता है. बिग बॉस शो को लेकर हमेशा स्क्रिप्टेड होने के आरोप भी लगते रहे हैं लेकिन होस्ट सलमान खान ने हर बार यही कहते है कि मेकर्स कंटेस्टेंट को कोई स्क्रिप्ट नहीं देते हैं और ये वाकई रियलिटी शो है.

सोशल मीडिया पर तेजी से एक वीडियो वायरल हो रहा है. बिग बॉस ओटीटी 2 से पूजा भट्ट के घर में मोबाइल चलाने और स्क्रिप्ट पढ़ने की वीडियो खूब वायरल हो रही है. जिसके बाद नेटजिन्स ने शो को ट्रोल करना शुरू कर दिया है.

पूजा भट्ट ने इस्तेमाल किया फोन

दरअसल बिग बॉस हाउस में गुरुवार को एक टास्क हुआ था जिसमें पूजा भट्ट फिल्ममेकर थी और उन्हें बाकी के घरवालों को कास्ट करना था. वह अपने मुताबिक किसी को हीरो, हिरोइन, विलन और सपोर्टिंग कास्ट बना सकती है. जब टास्क की शुरुआत होती है तो पूजा सबका पर्सनल इंटरव्यू लेती है. टास्क के बीच  जब मनीषा रानी को पूजा से मिलना था तो वह अपनी सीट पर बैठकर नीचे को देखती हैं कुछ देर के लिए. वहीं उनके हाथ में कुछ मूवमेंट नजर आती है.

यूजर कर रहे ट्रोल

पूजा भट्ट के मोबाइल का इस्तेमाल करते हुए वीडियो वायरल होते ही नेटिज़न्स ने ट्रोल करना शुरू कर दिया. एक इंटरनेट यूजर ने लिखा, “स्क्रिप्ट पढ़ रही है.” एक अन्य इंटरनेट यूजर ने लिखा, “स्क्रिप्ट भूल गई डायरेक्टर.” एक और ने लिखा, “स्क्रिप्टेड शो.” एक नेटीजन ने लिखा, “यह फोन जैसा लग रहा है.” वहीं एक यूजर ने पूछा, “अरे इसके पास मोबाइल कैसे आया. स्क्रिप्टेड.” एक और ने लिखा, “लगता है उसके पास फोन है… पूजा जब से बाहर गई है डेंटल चेक अप के बहाने से तब से शो पूजा ही चला रही है मेकर्स के हिसाब से… स्क्रिप्टेड जैसा लग रहा है.

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