बीहू की शांति: भाग 2-पर्सी दोस्ती की आड़ में लड़की को क्यों फंसता था?

लेस्बियन संबंधों के बारे में सिर्फ पढ़ा भर ही था बीहू ने पर पिछली रात अनुभव भी कर लिया.

‘‘कल रात जो भी हुआ वह ठीक नही था,’’ बीहू ने कहा.

‘‘क्या ठीक नहीं था, लेस्बियन होना कोई नई बात नहीं, हर जगह होता है यह और फिर लड़कों के साथ सैक्स करने से तो अच्छा है, कम से कम बच्चे पैदा होने का तो कोई डर नहीं रहता,’’ यह बात पर्सी ने इस अंदाज से कही थी कि बीहू भी मुसकरा उठी.

बीहू को भी तो लड़कों से दर्द के अलावा कुछ नहीं मिला था पर ऐसा नहीं था कि अपने लेस्बियन होने के गुण को बीहू ने एक ही रात में स्वीकार कर लिया था पर यह तो सच था कि पहली बारिश के बाद जिस तरह से माहौल हलकाफुलका सा हो जाता है वैसा ही हलकापन जरूर महसूस किया था बीहू ने.

शायद इसी कारण अब बीहू कुछ नए किरदारों में भी फिट बैठ रही थी और ‘थिएटर दिवस’ पर रवींद्रालय में आने वाले एक विशेष कार्यक्रम के लिए बीहू और पर्सी ने जम कर मेहनत करी थी. एक प्ले तैयार किया था जिस में यह संदेश था कि औरत किसी तरह से मर्द पर आश्रित नहीं, बच्चा पैदा करने के लिए भी नहीं.

इस प्ले में तमाम तथ्य दिए गए थे जिन से दर्शकों को लगा कि अगर पुरुष पूरी तरह से हिंसक या बलात्कारी बनते जा रहे हैं तो फिर महिलाओं को उन का बहिष्कार कर देना चाहिए और चाहे इस के लिए उन्हें लेस्बियन कल्चर ही क्यों नहीं अपनाना पढ़े.

मगर क्या पुरुषविहीन समाज संभव है? अगर हां तो यह कैसे हो पाएगा? इस प्रश्न के साथ इस प्ले को खत्म किया गया था.

दर्शकों की तालियां बता रही थीं कि उन लोगों को ड्रामा बहुत पसंद आया. सभी कलाकारों ने एकसाथ स्टेज पर आ कर सभी दर्शकों का अभिनंदन किया.

बीहू और पर्सी अपने चेंजिंगरूम में आ कर अभी बैठे  ही थे कि दरवाजे पर खटखट की आवाज आई तो बीहू ने दरवाजा खोला. देखा सामने 30-35 साल की एक शादीशुदा औरत खड़ी थी जो देखने से ही काफी पैसे वाली लग रही थी.

वह बड़ी बेपरवाही से अंदर आ गई और सोफे में धंस गई. अपना परिचय देते हुए उस ने बताया कि उस का नाम शांति है. उस ने उन दोनों की ऐक्टिंग की जम कर तारीफ करी और लेस्बियन कल्चर पर खूब सवालजवाब करने लगी. शांति की सारी बातों के जवाब पर्सी ने बखूबी दिए.

शांति का मिजाज बहुत खुला हुआ और दोस्ताना था जातेजाते वह अपना मोबाइल नंबर भी दे गई और जल्दी ही फिर मिलने का वादा भी कर गई.

उस ने अपना वादा जल्द ही निभाया जब  फोन कर के पर्सी और बीहू को ‘सन ऐंड

शाइन’ नाम के रेस्तरां में बुलाया जहां का तेली भाजा (एक बंगाली डिश)बहुत प्रसिद्ध था. रेस्तरां में शांति जिस तरह से खाने का और्डर दे रही थी उस से वह खाने की शौकीन तो लगी ही, साथ ही साथ बीहू और पर्सी को यह भी पता चल गया कि वह काफी खुले विचारों वाली है.

‘‘पर मुझे ऐसे पैसे का क्या करना,’’ शांति जैसे आज अपना दुख कह ही देना चाहती थी और उस ने अपना सारा दुख बयां कर ही दिया.

शांति और उस के पति बाबुल की शादी एक लव मैरिज थी जोकि भावावेश के चलते करी गई. बाबुल एक ब्राह्मण परिवार से था और शांति एक लोहार परिवार से. दोनों कालेज में थे तभी दोनों में प्यार हुआ. बाबुल एक दिलफेंक लड़का था. दोनों में जिस्मानी संबंध बन गए और शांति को गर्भ ठहर गया.

जब शांति ने बाबुल को इस बारे में बताया तो उस ने इसे अपना बच्चा मानने से ही इनकार कर दिया और उसे नीच जाति का कह कर उलटा आरोप शांति के चरित्र पर ही लगाने लगा. शांति ने रोते हुए सारी बात अपने भाई और घर वालों को बताई. उस के घर वालों ने पुलिस की मदद ली और पुलिस ने ईमानदारी से काम करते हुए बाबुल और उस के मातापिता के समक्ष शांति से शादी करने का प्रस्ताव रखा. पुलिस के दबाव और बदनामी के डर से बाबुल ने शांति से शादी कर ली.

अब घर में पैसा और नौकरचाकर किसी चीज की कमी नहीं है. कमी है तो बस बाबुल के प्रेम की, महीनों बीत जाते हैं वह शांति को छूता तक नहीं और बाबुल के मांबाप बातबात में शांति को लोहार की बेटी होने का ताना देते रहते हैं. उसे लगता है कि उस की जरूरत किसी को नहीं.

इसीलिए जब मैं ने आप का वह प्ले देखा तब मैं ने सोचा कि कितना अच्छा हो अगर इस दुनिया से ये निर्दयी पुरुष खत्म ही हो जाएं.’’

पर्सी और बीहू ने उसे धैर्य बंधाया. बातों का दौर कुछ देर तक चलता रहा. अब समय चलने का हो गया था. तीनों बाहर निकले तो शांति ने उन दोनों को अपनी गाड़ी में ही लिफ्ट दे दी.

बीहू और पर्सी पीछे वाली सीट पर बैठ गईं और शांति भी आगे न बैठ कर उन्हीं के साथ पीछे वाली सीट पर बैठ गई.

तीनों चुप थीं कार में कोई बंगाली संगीत बज रहा था. तभी पर्सी का हाथ शांति की जांघ पर रेंगने लगा. कुछ देर शांति कुछ नहीं बोली फिर उस की सवालिया नजरें पर्सी की ओर उठीं तो पर्सी ने भी निगाहों से ही उसे चुप बैठने को कह दिया, शांति पुरुष संसर्ग की प्यासी थी. फिर भी उसे पर्सी का स्पर्श भा रहा था.

पर्सी और बीहू की मंजिल आ गई थी. दोनों के कमरे को जान और पहचान लिया था शांति ने. जब शांति ने अगली बार मिलने की इच्छा जताई तो पर्सी ने वार्डन की दुहाई देते हुए किसी और जगह मिलने को कहा.

कहीं आप भी ज्यादा नट्स तो नहीं खाते

दिल को स्वस्थ्य बनाए रखने के लिए आहार में नट्स को शामिल करना लाभदायक हो सकता है. नट्स में अनसैचुरेटेड फैटी एसिड के साथ साथ अन्य विटामिन और मिनरल होते हैं. ये बेहद आकर्षक एवं लोकप्रिय स्नैक के तौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं, क्योंकि बहुत ज्यादा महंगे नहीं होते हैं, इन्हें रखना सुविधाजनक होता है, और इन्हें चलते फिरते कहीं भी खाया जा सकता है.

लेकिन कुछ नट्स में ज्यादा कैलोरी होती है, जो नुकसानदायक है. इसलिए इनकी मात्रा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.

मनप्रीत कालरा- आहार विशेषज्ञ और रिबूटगुट प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक बता रही हैं कि किस तरह के नट्स आपके दिल के लिए नुकसानदायक हैं?

नट्स में ज्यादा ऊर्जा होती है, क्योंकि इनमें ज्यादा मात्रा में वसा शामिल है. सैचुरेटेड बसा की मात्रा ब्राजीलियाई नट्स, कैश्यू और मैकाडेमिया नट्स में ज्यादा होती है. इन्हें कम मात्रा में खाएं, क्योंकि इनका ज्यादा सेवन करने से कॉलेस्टेरॉल स्तर बढ़ सकता है.

ड्राई-रोस्टेड, साल्टेड, फ्लेवर वाले, या हनी-रोस्टेड नट्स का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इनमें ज्यादा नमक और कभी अधिक कभी चीनी शामिल हो सकती है. यदि आप किसी पार्टी में हैं तो याद रखें कि साल्टेड नट्स खाने से आपका कॉलेस्टेरॉल लेवल बढ़ सकता है, जो आपके दिल को नुकसान पहुंचा सकता है.

यदि आप नमक और चीनी जैसे अस्वस्थ तत्वों से दूर बने रहकर और नट्स की उचित मात्रा का ध्यान रखकर नट्स लेते हैं तो ये आपके नाश्ते के साथ पोषक स्नैक हो साबित हो सकते हैं.

एक हेल्दी नाश्ते में कितने नट्स होने चाहिए?

नट्स वसायुक्त होते हैं. भले ही इनमें अच्छी वसा ज्यादा हो, लेकिन इनके सेवन से कैलोरी की मात्रा बढ़ सकती है. इसलिए, कम मात्रा में नट्स का सेवन करने की सलाह दी जाती है.

वयस्कों को संतुलित आहार के तौर पर हर सप्ताह 5-6 बार गैर नमक वाले बादाम खाने चाहिए. बच्चों के लिए यह मात्रा उनकी उम्र के हिसाब से अलग हो सकती है. फ्रायड नट्स से परहेज करें और इसके बजाय कच्चे या ड्राई-रोस्टेड पर ध्यान दें. मुट्ठीभर साबुत नट्स या 2 चम्मच नट बटर एक सर्विंग में शामिल करें.

आपको किस तरह के नट्स खाने चाहिए?

ऐसा माना गया है कि कई तरह के नट्स फायदेमंद होते हैं. लेकिन कुछ में ज्यादा पोषक तत्व होते हैं जो अन्य के मुकाबले दिल के लिए अच्छे होते हैं. उदाहरण के लिए, अखरोट ओमेगा-3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत है. बादाम, मैकाडेमिया नट्स, पेकॉन और हेजलनट्स भी दिल के लिए अच्छे माने जाते हैं.

संभव हो तो गैर नमक वाले या गैर-मीठे नट्स का चयन करें. नमक या चीनी मिले हुए नट्स आपके दिल को मिलने वाले लाभ नहीं दे सकते हैं.

नट्स से किसी का स्वास्थ्य कैसे प्रभावित हो सकता है?

नट्स न सिर्फ पोषक होते हैं बल्कि बेहद टेस्टी और अनेक गुणों से भरपूर भी होते हैं. इन्हें कई तरह से आपके आहार में शामिल किया जा सकता है. अपने फूड का जायका सुधारने के लिए केक, डेजर्ज या सूदी में नट्स शामिल करें. हालांकि ज्यादातर लोगों को अत्यधिक मात्रा में नट्स सेवन का स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का पता नहीं होता है. यदि हम ज्यादा मात्रा में नट्स का सेवन करते हैं तो क्या हो सकता है, इस बारे में नीचे जानकारी दी जा रही हैः

  1. जब आप वजन घटाने की कोशिश कर रहे हों तो नट्स अच्छे स्नैक हैं. लेकिन इनका ज्यादा सेवन करने से वजन बढ़ सकता है. इसकी वजह यह है कि नट्स में कैलोरी ज्यादा होती है और निर्धारित मात्रा से ज्यादा सेवन करने से वजन घटाने की आपकी कोशिश प्रभावित हो सकती है और आखिरकार आपके दिल को भी नुकसान पहुंच सकता है.
  2. ज्यादा नट्स खाने के बाद सामान्य तौर पर पेट फूलने और गैस बनने जैसी समस्या होने लगती है. आप इसकी वजह इनमें पाए जाने वाले केमिकल को मान सकते हैं. ज्यादातर नट्स में फाइटेट्स और टैनिन जैसे पदार्थ शामिल होते हैं जिन्हें आसानी से पचाना हमारे पेट के लिए मुश्किल होता है. इसके अलावा, नट्स में कई तरह की वसा होती है जो डायरिया जैसी समस्या बढ़ा सकती है.
  3. कुछ नट्स के अत्यधिक सेवन से फूड पॉइजनिंग हो सकती है. ब्राजीलियाई नट्स, बादाम और जायफल का अत्यधिक सेवन सावधानी के साथ किया जाना चाहिए, क्योंकि इनके नकारात्मक प्रभाव होते हैं. बादाम में हाइड्रोसायनिक एसिड होता है जो सांस लेने में समस्या और दम घुटने का कारण बन सकता है, लेकिन अधिक मात्रा में ब्राजीलियाई नट्स खाने से सेलेनियम की मात्रा भी बढ़ सकती है.

सेलिब्रिटीज का मानसून वार्डरोब सीक्रेट

बरसात के मौसम के लिए कपड़े पहनने के लिए स्टाइल और आचरण के बीच संतुलन होना बहुत जरुरी है, लेकिन भारी बारिश में खुद को सुरक्षित रखते हुए अपनी फैशन समझ को बनाए रखना काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

हालांकि, Monsoon सीजन में, इन बॉलीवुड डीवाज ने Monsoon की ड्रेसिंग कला में जैसे महारत हासिल कर रखी है, बॉलीवुड डीवाज ने काफी सरल और सुंदर तरीके से Monsoon सीजन में खुद को कैरी किया है. इसलिए, हमने इन बी-टाउन डीवाज़ से प्रेरित मानसून लुक का एक कलेक्शन तैयार किया है, जिसे आप इस सीज़न में आत्मविश्वास से पहन सकते हैं.

  1. तारा सुतारिया

अगर बाहर बारिश हो रही हो तो वाइट डैस पहनना एक फैशन आपदा हो सकता है, लेकिन तारा सुतारिया साबित करती हैं कि बारिश के दिन सफेद पोशाक पहनना वर्जित नहीं है. मुंबई की बरसात में तारा सुतारिया ने सफेद रंग की क्लासिक बैकलेस मिडी-ड्रेस पहन रखी थी. सिंगल स्ट्रैप ड्रेस में तारा सुतारिया बेहद खूबसूरत लग रही है.

वाइट डैस के साथ तारा ने लुई वुइटन ( Louis Vuitton) चेन बैग और ग्लेडिएटर सैंडल के साथ डैस को पूरा किया. लाइट मेकअप और सुंदर झुमके पहने हुए तारा बेहद खूबसूरत लग रही है. इसी के साथ उन्होंने एक प्लेड छाते के साथ खुद को बारिश से बचाया.

 

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2. जान्हवी कपूर

अपने मानसून वॉर्डरोब के लिए जान्हवी कपूर का लुक आप ट्राई कर सकते. अपने सामान्य ग्लैमर से हटकर, जान्हवी ने सफेद टी और नीली जींस के ऊपर एक पीले रंग का रेनकोट पहना. आपमें से जो लोग मानसून के दौरान बेसिक्स पर टिके रहना पसंद करते हैं, उनके लिए यह लुक परफेक्ट रहेगा.

 

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3. सारा अली खान

हर कोई जानता है कि सारा अली खान को अपना कुर्ता-पायजामा बहुत पसंद है, लेकिन वह मौनसून के दौरान इस आरामदायक जैकेट और शॉर्ट्स कॉम्बो के लिए अपना पसंदीदा पहनावे को छोड़ देती हैं. सारा मौनसून में कलरब्लॉक्ड विंडचीटर का शॉर्ट्स और कलरफुल स्नीकर्स के साथ पेयर किया.

आपमें से जो लोग अपने कपड़ों पर बारिश की एक भी बूंद गिरने से नफरत करते हैं, आप भी अपने आउटफिट को सुरक्षित और स्वस्थ रखने के लिए इस मानसून में सारा जैसा विंडचीटर  लुक चुन सकते हैं.

 

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4. कैटरीना कैफ

कैटरीना कैफ भी बारिश के दिनों में सफेद रंग को मजबूती से सपोर्ट करती नजर आई. कैटरीना ने बारिश के दौरान खूबसूरत बने रहने के लिए शॉर्ट्स के साथ एक सफेद हुडी में मोनोक्रोम सफेद पहनावा पहना हुआ है.

 

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आपमें से जिन लोगों को बरसात मे ठंड लगने का खतरा है, उनके लिए अपने आउटफिट के साथ हुडी या जैकेट भी पहन सकते हैं. मोनोक्रोम लुक आपके पहनावे को अलग दिखाने का एक शानदार तरीका है और आप कैटरीना की तरह रंगीन छतरी के साथ वाइट कपडें पहन सकते है.

मौनसून में ऐसे चुनें सही शैम्पू

ब्यूटीफुल हेयर हमारी पर्सनेलिटी को निखारते हैं. यही वजह है कि बालों का झड़ना, टूटना, उलझना जैसी प्रौब्लमस से हर महिला परेशान हो जाती है, लेकिन बालों की सही देखभाल और बैलेंस व हेल्दी डाइट लेने से इन प्रौब्लम्स से बचा जा सकता है. इसी प्रौब्लम को लेकर ओरिफ्लेम इंडिया की हेयर ऐक्सपर्ट पल्लवी सहगल कहती हैं कि बालों पर मौसम का भी असर पड़ता है. मौनसून के मौसम में बारबार गीले हो जाने की वजह से बाल उलझ जाते हैं. जिससे वह ज्यादा झड़ने लगते हैं. 60 से 100 बालों का प्रतिदिन झड़ना कोई खास चिंता की बात नहीं. पर 100 से ज्यादा बालों का रोजाना झड़ना चिंता की बात होती है. बालों की तरह-तरह की प्रौब्लम्स के चलते शैंपू के चुनाव में सावधानी बरतना जरूरी है. इसके लिए कुछ खास टिप्स के बारे में आज हम आपको बताएंगे…

1. ग्रीसी हेयर के लिए अपनाएं ये शैम्पू

अगर आप के हेयर ग्रीसी हैं तो मार्केट में कई प्रकार के ग्रीसी हेयर शैंपू मिलते हैं, जो ग्रीसी हेयर को ठीक कर सकते हैं. बारबार आम शैंपू लगाने से बालों और स्कैल्प का औयल कम हो जाता है, जिस से बालों में डैंड्रफ हो जाता है और उन का झड़ना भी बढ़ जाता है. अत: इस मौसम में बाहर जाने से पहले सीरम जरूर प्रयोग करें.

2. हेयर टैक्स्चर के बेस पर चुनें शैम्पू

शैंपू हेयर टैक्स्चर के आधार पर प्रयोग करें. कई बार पूरा परिवार एक ही शैंपू का प्रयोग करता है, जो ठीक नहीं. अगर आप ने हेयर कलर किए हैं तो उस शैंपू का प्रयोग करें, जो कलर न उतारे और यदि बालों में डैंड्रफ है, तो डैंड्रफ हटाने वाले शैंपू का प्रयोग करें. इसी तरह अगर बाल डैमेज हो रहे हों तो हेयर रिपेयर करने वाले शैंपू का प्रयोग करें. शैंपू खरीदने से पहले बालों का टैक्स्चर अवश्य जान लें. कई बार महिलाएं कर्ली बालों को फ्रीजी बाल समझती हैं.

3. मौनसून में हेयर औयलिंग है जरूरी

मौनसून में हेयर औयलिंग बहुत आवश्यक है. इस से बेजान बालों में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है. उन की ग्रोथ बढ़ती है, क्योंकि मसाज से औयल बालों की जड़ों तक पहुंचता है. महीने में 2 बार 2 घंटों तक बालों में औयल लगा कर रखना पर्याप्त होता है. आजकल बाजार में औयल के गुण वाले शैंपू भी उपलब्ध हैं. आजकल अधिकतर महिलाएं हेयर कलरिंग करती हैं. अत: बारिश के मौसम में कलर प्रोटैक्ट रेंज का प्रयोग ठीक रहता है. इस में शैंपू, कंडीशनर इत्यादि शामिल हैं.

4. कलरिंग करते वक्त रखें ध्यान

एक बार कलर करने के बाद बालों को दोबारा 15 दिनों के बाद ही कलर करें. कलर के बाद शैंपू, कंडीशनर लगाने से बाल ठीक रहते हैं. अगर डैमेज हो रहे हों और पोरस भी हैं, तो रैस्टोर वाला शैंपू या फिर हेयर मास्क लगाना सही रहता है. मौनसून में बालों को हमेशा फ्रैश दिखाने के लिए गीले बालों को सुखा कर सीरम लगाएं.

5. हेल्दी डाइट भी है जरूरी

सुंदर बालों के लिए प्रोटीन और विटामिन युक्त डाइट भी आवश्यक है. अगर आप का लाइफस्टाइल ठीक नहीं है, तो सप्लिमैंट का सहारा लें. मल्टी विटामिन और फ्रूट्स का सेवन अवश्य करें. हफ्ते में 2-3 बार बालों में शैंपू जरूर करें. और उन्हें भीगने से बचाएं.

मैं सफेद बालों से परेशान हूं, क्या करूं?

सवाल-

मेरी उम्र 26 वर्ष है. अगले साल विवाह होने वाला है. मेरी समस्या मेरे बालों को ले कर हैं. मेरे बाल सफेद होने लगे हैं. मैं मेहंदी लगाती हूं तो सफेद बाल लाल दिखते हैं. क्या बालों को कुदरती रूप से काला करना संभव है? साथ ही सिर की त्वचा में खुजली भी होती है और बाल बेजान, शुष्क व कमजोर भी हो रहे हैं. मुझे हेयर केयर के टिप्स बताएं जिन से कि मेरे बाल मजबूत और चमकदार हो जाएं?

जवाब-

सफेद बालों को कुदरती रूप से काला नहीं किया जा सकता. मेहंदी से बालों को अस्थाई रूप से काला करने के लिए उस में आंवला पाउडर मिलाएं और साथ ही मेहंदी को लोहे की कड़ाही में भिगोएं. इस से मेहंदी लगाने के बाद बाल कम लाल दिखेंगे.

साथ ही बालों की नियमित औयलिंग करें. सिर की त्वचा पर खुजली की समस्या के समाधान व मजबूत, चमकदार बालों के लिए एक हेयर पैक बनाएं, जिस में मेथी पाउडर में काले तिल का पाउडर बराबर मात्रा में मिला कर उस में दही मिलाएं और फिर इस पेस्ट को बालों में लगाएं. आधे घंटे बाद बालों को सादे पानी से धो कर शैंपू कर लें. नियमित ऐसा करने से बाल घने, मजबूत व चमकदार हो जाएंगे.

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जानना चाहती हैं काले बालों का राज?

आज कल हर कोई अपने सफेद होते बालों से परेशान है. आज की भागदौड़ भरी जिन्दगी में हम अपनी सेहत की तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे पाते हैं और पोषक तत्वों की शरीर में कमी होने के कारण हमारे शरीर में कई शारीरक समस्याएं आ जाती हैं. उनमे से एक प्रमुख समस्या है, बालों का उम्र से पहले सफेद होना. परन्तु प्राकृतिक तरीकों को अपना कर आप सफेद बालों से मुक्ति पा सकते हैं.

ये भी जानते हैं कि क्या मुख्य कारण हैं कि बाल सफेद हो जाने के…

बालों के सफेद होने के कारण :

1. बहुत ज्यादा तनाव में रहना

2. ज्यादा तैलीय चीजों को खाना

3. बहुत ज्यादा साबुन और शेम्पू का इस्तेमाल करना

4. पोष्टिक भोजन ना लेना

बालों को काला करने के 9 घरेलू उपाय :

1. नारियल और निम्बू के रस का मिश्रण सफेद बालों को काला करने में मदद करता है. नारियल के तेल को निम्बू के रस में मिलाकर अपने बालों में इसकी मालिश करें और मालिश करने के बाद तकरीवन एक घंटे के बाद अपने बालों को धो लीजिए.

2. आम की पत्तियों को पीस लें और इससे एक पेस्ट सा तेयार हो जायेगा और इसे अपने बालों में लगायें. करीब 30 मिनट तक इसे लगा रहने दें. इसके बाद साफ पानी से अपने बालों को दों लें.

3. प्याज के रस में निम्बू मिलाकर अपने बालों में लगाएं और करीब 45 मिनट तक खुला छोड़ दें और बाद में इन बालों को अच्छी तरह धो लीजिए. इससे आपको सफेद बालों से मुक्ति मिलेगी और साथ ही साथ आपके बाल झड़ने बंद हो जायेंगे.

4. बालों का शुद्ध घी अपने बालों में लगाने से सफेद बाल जल्दी काले होने शुरू हो जाते हैं. इस घी को प्रतिदिन अपने बालों में लगाना चाहिए.

5. अपने बालों पर तिल के तेल की मालिश करने से सफेद बाल काले होने शुरू हो जाते हैं. इस तेल का इस्तेमाल हमें प्रतिदिन आपने बालों में करना चाहिए.

6. काली चाय सफेद बालों को काला करने में बहुत मदद करती है. काली चाय आपके बालों को मुलायम और चमकदार बनाती है. एक कप पानी में थोड़ी सी चाय की पत्तियां मिला दें और फिर इसे उबाल लें फिर इसमें एक चमच नमक मिला दें. इस पानी को ठंडा होने के बाद अपने बालों पर लगायें एक घंटे बाद अपने बालों को साफ़ पानी से धो लें.

7. लोंग के तेल से अपने बालों की मालिश करें इससे आपके सफ़ेद बालों को रोकने में बहुत मदद मिलेगी.

8. आंवला बालों को काला करने में बहुत अच्छा माना गया है. नारियल के तेल में आंवला के कुछ सूखे टुकड़े उबाल लें. इसे ठंडा हो जाने पर अपने बालों पर इसकी मालिश करें इस मिश्रण को अपने बालों पर कुछ घंटों तक रहने दें. एक – दो दिन छोड़ कर इस मिश्रण को अपने बालों पर लगायें कुछ ही हफ़्तों में आपको इसका फर्क दिखने लगेगा.

9. संतरे के रस में थोडा सा आंवले का रस मिलाकर अपने बालों में लगाने से बालों का झड़ना और सफेद होना बंद हो जाता है.

घर पर बनाएं टेस्टी और हेल्दी साबूदाना पुलाव

साबूदाना एक हेल्दी फूड है, जिसे अक्सर लोग खीर बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्या आपने साबूदाना पुलाव ट्राय किया है. साबूदाना पुलाव बनाना बहुत आसान है. ये हेल्दी के साथ-साथ टेस्टी भी होता है. आज हम आपको साबूदाना पुलाव की रेसिपी के बारे में बताएंगे, जिसे आप ब्रेकफास्ट या डिनर कभी भी बनाकर खा सकते हैं.

हमें चाहिए

  1. साबूदाना 150 ग्राम
  2. घी 2 चम्मच
  3. काजू 40 ग्राम
  4. धनिया पत्ती 50 ग्राम
  5. आलू 2 मध्यम आकार के
  6. हरी मिर्च 7
  7. मूंगफली 20 ग्राम
  8. नींबू का रस 2 चम्मच
  9. काली मिर्च पाउडर आधा चम्मच
  10. सरसों के दाने 1 चम्मच
  11. तेल 1 चम्मच
  12. नमक स्वादानुसार

बनाने का तरीका

सबसे पहले एक गहरे पैन को मध्यम आंच पर रखें और उसमें पानी डालें. इसमें आलू डालें और उबलने दें. जब आलू अच्छी तरह से उबल जाए और सॉफ्ट हो जाए तो उसका छिलका छील लें और उसे छोटे-छोटे आकार में काट लें.

अब हरी मिर्च और धनिया की पत्तियों को भी बारीक बारीक काटकर अलग रख लें. अब साबूदाने को पानी से अच्छी तरह से धोएं और करीब 4-5 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रख दें.

अब एक कढ़ाई में मूंगफली को बिना तेल के ड्राई रोस्ट कर लें. अब इसी कढ़ाई में थोड़ा तेल डालें और काजू फ्राई करें. अब इसी कढ़ाई में तेल की जगह घी गर्म करें. जब घी गर्म हो जाए तो उसमें सरसों के दाने डालें और जब सरसों फूटने लगे तो उसमें हरी मिर्च डालें.

अब कढ़ाई में कटे आलू डालें और जब तक आलू हल्के भूरे रंग के न हो जाएं उसे फ्राई करें. अब कढ़ाई में भीगे हुए साबूदाना के साथ नींबू का रस, काली मिर्च पाउडर और नमक डालकर अच्छी तरह से मिक्स करें. साबूदाना को ढककर 2 से 3 मिनट के लिए अच्छी तरह से पकाएं. अब इस पुलाव को ड्राय फ्रूट्स के साथ अपनी फैमिली और फ्रेंड्स को गरमागरम परोसें.

दो कदम तन्हा: भाग-3

डा. घोषाल ने रवींद्र भवन में प्रोग्राम करवाया था. उस समय रवींद्र भवन पूरा नहीं बना था. उसी को पूरा करने के लिए फंड एकत्र करने के लिए चैरिटी शो करवाया गया था. बड़ी भीड़ थी. ज्यादातर लोग खड़े हो कर सुन रहे थे. तलत ने गजलों का ऐसा समा बांधा था कि समय का पता ही नहीं चला.

डा. दास और अंजलि को भी वक्त का पता नहीं चला. रात काफी बीत गई. दोनों रिकशा पकड़ कर घबराए हुए वापस लौटे थे. डा. दास अंजलि को उस के आवास तक छोड़ने गए थे. अंजलि के मातापिता बाहर गेट के पास चिंतित हो कर इंतजार कर रहे थे. डा. दास ने देर होने के कारण माफी मांगी थी. लेकिन उस रात को पहली बार अंजलि को देर से आने के लिए डांट सुननी पड़ी थी और उस के मांबाप को यह भी पता लग गया कि वह डा. दास के साथ अकेली गई थी. मृणालिनी या उस की सहेलियां साथ में नहीं थीं.

हालांकि दूसरे दिन मृणालिनी ने उन्हें समझाया था और डा. दास के चरित्र की गवाही दी थी तब जा कर अंजलि के मांबाप का गुस्सा थोड़ा कम हुआ था किंतु अनुशासन का बंधन थोड़ा कड़ा हो गया था. मृणालिनी ने यह भी कहा था कि

डा. दास से अच्छा लड़का आप लोगों को कहीं नहीं मिलेगा. जाति एक नहीं है तो क्या हुआ, अंजलि के लिए उपयुक्त मैच है. लेकिन आजाद खयाल वाले अभिभावकों ने सख्ती कम नहीं की.

बालक ने अंजलि का हाथ पकड़ कर जल्दी चलने का आग्रह किया तो उस ने डा. दास से कहा, ‘‘ठीक है, चलती हूं, फिर आऊंगी. कल तो नहीं आ सकती, शादी है, परसों आऊंगी.’’

‘‘परसों रविवार है.’’

‘‘ठीक तो है, घर पर आ जाऊंगी. दोपहर का खाना तुम्हारे साथ खाऊंगी. बहुत बातें करनी हैं. अकेली आऊंगी,’’ उस ने बेटे की ओर इशारा किया, ‘‘यह तो बोर हो जाएगा. वैसे भी वहां बच्चों में इस का खूब मन लगता है. पूरी छुट्टी है, डांटने के लिए कोई नहीं है.’’

डा. दास ने केवल सिर हिलाया. अंजलि कुछ आगे बढ़ कर रुक गई और तेजी से वापस आई. डा. दास वहीं खड़े थे. अंजलि ने कहा, ‘‘कहां रहते हो? तुम्हारे घर का पता पूछना तो भूल ही गई?’’

‘‘ओ, हां, राजेंद्र नगर में.’’

‘‘राजेंद्र नगर में कहां?’’

‘‘रोड नंबर 3, हाउस नंबर 7.’’

‘‘ओके, बाय.’’

अंजलि चली गई. डा. दास बुत बने बहुत देर तक उसे जाते देखते रहे. ऐसे ही एक दिन वह चली गई थी…बिना किसी आहट, बिना दस्तक दिए.

डा. दास गरीब परिवार से थे. इसलिए एम.बी.बी.एस. पास कर के हाउसजाब खत्म होते ही उन्हें तुरंत नौकरी की जरूरत थी. वह डा. दामोदर के अधीन काम कर रहे थे और टर्म समाप्त होने को था कि उसी समय उन के सीनियर की कोशिश से उन्हें इंगलैंड जाने का मौका मिला.

पटना कालिज के टेनिस लान की बगल में दोनों घास पर बैठे थे. डा. दास ने अंजलि को बताया कि अगले हफ्ते इंगलैंड जा रहा हूं. सभी कागजी काररवाई पूरी हो चुकी है. एम.आर.सी.पी. करते ही तुरंत वापस लौटेंगे. उम्मीद है वापस लौटने पर मेडिकल कालिज में नौकरी मिल जाएगी और नौकरी मिलते ही…’’

अंजलि ने केवल इतना ही कहा था कि जल्दी लौटना. डा. दास ने वादा किया था कि जिस दिन एम.आर.सी.पी. की डिगरी मिलेगी उस के दूसरे ही दिन जहाज पकड़ कर वापस लौटेंगे.

लेकिन इंगलैंड से लौटने में डा. दास को 1 साल लग गया. वहां उन्हें नौकरी करनी पड़ी. रहने, खाने और पढ़ने के लिए पैसे की जरूरत थी. फीस के लिए भी धन जमा करना था. नौकरी करते हुए उन्होंने परीक्षा दी और 1 वर्ष बाद एम.आर.सी.पी. कर के पटना लौटे.

होस्टल में दोस्त के यहां सामान रख कर वह सीधे अंजलि के घर पहुंचे. लेकिन घर में नए लोग थे. डा. दास दुविधा में गेट के बाहर खड़े रहे. उन्हें वहां का पुराना चौकीदार दिखाई दिया तो उन्होंने उसे बुला कर पूछा, ‘‘प्रोफेसर साहब कहां हैं?’’

चौकीदार डा. दास को पहचानता था, प्रोफेसर साहब का मतलब समझ गया और बोला, ‘‘अंजलि दीदी के पिताजी? वह तो चले गए?’’

‘‘कहां?’’

‘‘दिल्ली.’’

‘‘और अंजलि?’’

‘‘वह भी साथ चली गईं. वहीं पीएच.डी. करेंगी.’’

‘‘ओह,’’ डा. दास पत्थर की मूर्ति की भांति खड़े रहे. सबकुछ धुंधला सा नजर आ रहा था. कुछ देर बाद दृष्टि कुछ स्पष्ट हुई तो उन्होंने चौकीदार को अपनी ओर गौर से देखते पाया. वह झट से मुड़ कर वहां से जाने लगे.

चौकीदार ने पुकारा, ‘‘सुनिए.’’

डा. दास ठिठक कर खड़े हो गए तो उस ने पीछे से कहा, ‘‘अंजलि दीदी की शादी हो गई.’’

‘‘शादी?’’ कोई आवाज नहीं निकल पाई.

‘‘हां, 6 महीने हुए. अच्छा लड़का मिल गया. बहुत बड़ा अधिकारी है. यहां सब के नाम कार्ड आया था. शादी में बहुत लोग गए भी थे.’’

रविवार को 12 बजे अंजलि

डा. दास के घर पहुंची. सामने छोटे से लान में हरी दूब पर 2 लड़कियां खेल रही थीं. बरामदे में एक बूढ़ी दाई बैठी थी. अंजलि ने दाई को पुकारा, ‘‘सुनो.’’

दाई गेट के पास आई तो अंजलि ने पूछा, ‘‘डाक्टर साहब से कहो अंजलि आई है.’’

दाई ने दिलचस्पी से अंजलि को देखा फिर गेट खोलते हुए बोली, ‘‘डाक्टर साहब घर पर नहीं हैं. कल रात को ही कोलकाता चले गए.’’

‘‘कल रात को?’’

‘‘हां, परीक्षा लेने. अचानक बुलावा आ गया. फिर वहां से पुरी जाएंगे…एक हफ्ते बाद लौटेंगे.’’

दाई बातूनी थी, शायद अकेले बोर हो जाती होगी. आग्रह से अंजलि को अंदर ले जा कर बरामदे में कुरसी पर बैठाया. जानना चाहती थी उस के बारे में कि यह कौन है?

अंजलि ने अपने हाथों में पकड़े गिफ्ट की ओर देखा फिर अंदर की ओर देखते हुए पूछा, ‘‘मेम साहब तो घर में हैं न?’’

‘‘मेम साहब, कौन मेम साहब?’’

‘‘डा. दास की पत्नी.’’

‘‘उन की शादी कहां हुई?’’

‘‘क्या?’’

‘‘हां, मेम साहब, साहब ने आज तक शादी नहीं की.’’

‘‘शादी नहीं की?’’

‘‘नहीं, मेम साहब, हम पुरानी दाई हैं. शुरू से बहुत समझाया लेकिन कुछ नहीं बोलते हैं…कितने रिश्ते आए, एक से एक…’’

अंजलि ने कुछ नहीं कहा. आई तो सोच कर थी कि बहुत कुछ कहेगी, लेकिन केवल मूक बन दाई की बात सुन रही थी.

दाई ने उत्साहित हो कर कहा, ‘‘अब क्या कहें, मेम साहब, सब तो हम को संभालना पड़ता है. बूढे़ हो गए हम लोग, कब तक जिंदा रहेंगे. इन दोनों बच्चियों की भी परवरिश. अब क्या बोलें, दिन भर तो ठीक रहता है. सांझ को क्लिनिक में बैठते हैं,’’ उस ने परिसर में ही एक ओर इशारा किया फिर आवाज को धीमा कर के गोपनीयता के स्तर पर ले आई, ‘‘बाकी साढ़े 8 बजे क्लब जाते हैं तो 12 के पहले नहीं आते हैं…बहुत तेज गाड़ी चला कर…पूरे नशे में. हम रोज चिंता में डूबे 12 बजे रात तक रास्ता देखते रहते हैं. कहीं कुछ हो गया तो? बड़े डाक्टर हैं, अब हम गंवार क्या समझाएं.’’

अंजलि ने गहरी धुंध से निकल कर पूछा, ‘‘शराब पीते हैं?’’

‘‘दिन में नहीं, रात को क्लब में बहुत पीते हैं.’’

‘‘कब से शराब पीने लगे हैं?’’

‘‘वही इंगलैंड से वापस आने के कुछ दिन बाद से. हम तब से इन के यहां हैं.’’

इंगलैंड से लौटने के बाद. अंजलि ने हाथ में पकड़े गिफ्ट को दाई की ओर बढ़ाते हुए पूछा, ‘‘शादी नहीं हुई तो ये दोनों लड़कियां?’’

दाई ने दोनों लड़कियों की ओर देखा, फिर हंसी, ‘‘ये दोनों बच्चे तो अनाथ हैं, मेम साहब. डाक्टर साहब दोनों को बच्चा वार्ड से लाए हैं. वहां कभीकभार कोई औरत बच्चा पैदा कर के उस को छोड़ कर भाग जाती है. लावारिस बच्चा वहीं अस्पताल में ही पलता है. बहुत से लोग ऐसे बच्चों को गोद ले लेते हैं. अच्छे-अच्छे परिवार के लोग. डाक्टर साहब ने भी.

दो सखियां: भाग 1- क्या बुढ़ापे तक निभ सकती है दोस्ती

माहौल कोई भी हो, मौसम कैसा भी हो, दुनिया जाए भाड़ में, उन्हें कोई मतलब नहीं था. वे दोनों जब तक 3-4 घंटे गप नहीं लड़ातीं, उन्हें चैन नहीं पड़ता. उन्हें ऐसा लगता कि दिन व्यर्थ गया. उन्हें मिलने व एकदूसरे से बतियाने की आदत ऐसी पड़ गई थी जैसे शराबी को शराब की, तंबाकू खाने वाले को तंबाकू की. उन्हें आपस में एकदूसरे से प्रेम था, स्नेह था, विश्वास था. एकदूसरे से बात करने की लत सी हो गई थी उन्हें. कोई काम भी नहीं उन्हें. 65 साल के आसपास की इन दोनों महिलाओं को न तो घर में करने को कोई काम था न करने की जरूरत. घर में बहुएं थीं. कमाऊ बेटे थे. नातीपोते थे.

इसलिए दोपहर से रात तक वे बतियाती रहतीं. कभी तारा के घर सितारा तो कभी सितारा के घर तारा. वे क्या बात करती हैं, उस पर कोई विशेष ध्यान भी नहीं देता. हां, बहुएं, नातीपोते, चायनाश्ता वगैरा उन के पास पहुंचा देते. दोनों बचपन की पक्की सहेलियां थीं. एक ही गांव में एकसाथ उन का बचपन बीता. थोड़े अंतराल में दोनों की शादी हो गई. जवानी के राज भी उन्हें एकदूसरे के मालूम थे. कुछ तो उन्होंने आपस में बांटे. फिर इत्तफाक यह हुआ कि विवाह भी उन का एक ही शहर के एक ही महल्ले में हुआ.

शादी के बाद शुरू में तो घरेलू कामों की व्यस्तता के चलते उन की बातचीत कम हो पाती लेकिन उम्र के इस मोड़ पर वे घरेलू कार्यों से भी फुरसत पा चुकी थीं. पानदान वे अपने साथ रखतीं. थोड़ीथोड़ी देर बाद वे अपने हाथ से पान बना कर खातीं और खिलातीं. सितारा मुसलिम थी, तारा हिंदू ठाकुर. लेकिन धर्म कभी उन के आड़े नहीं आया. सितारा ने नमाज पढ़ी शादी के बाद, वह भी परिवार के नियमों का पालन करने के लिए, अंदर से उस की कोई इच्छा नहीं थी. जब उन्हें बात करतेकरते दोपहर से अंधेरा हो जाता तो परिवार का कोई सदस्य जिन में नातीपोते ही ज्यादातर होते, उन्हें लेने आ जाते. उन की बात कभी पूरी नहीं हो पाती. सो, वे कल बात करने को कह कर महफिल समाप्त कर देतीं.

अभी सितारा के घर रिश्तेदार आए हुए थे तो महफिल तारा के घर में उस के कमरे में जमी हुई थी. बहू अभीअभी चाय रख कर गई थी. दोनों ने चाय की चुस्कियों से अपनी वार्त्ता प्रारंभ की. सितारा ने शुरुआत की.

‘‘सब ठीक है घर में, मेरे आने से कोई समस्या तो नहीं?’’

‘‘कोई समस्या नहीं. घर मेरा है. मेरे आदमी ने बना कर मेरे नाम किया है. आदमी की पैंशन मिलती है. किसी पर बोझ नहीं हूं. फिर मेरे बिना तो पत्ता भी नहीं हिलता घर का. तुम कहो, तुम्हारे बहूबेटी को तो एतराज नहीं है हमारे मिलने पर?’’ ‘‘एतराज कैसा? मिल कर चार बातें ही तो करते हैं. अब जा कर बुढ़ापे में फुरसत मिली है. जवानी में तो शादी के बाद बहू बन कर पूरे घर की जिम्मेदारी निभाई. बच्चे पैदा किए, बेटेबेटियों की शादियां कीं. अब जिम्मेदारियों से मुक्त हुए हैं.’’

दोनों के पति गुजर चुके थे. विधवा थीं दोनों. उन के घर मात्र 20 कदम की दूरी पर थे. सितारा ने कहा, ‘‘सुना है कि वर्मा की बेटी का किसी लड़के के साथ चक्कर है.’’

‘‘क्या बताएं बहन, जमाना ही खराब आ गया है. बच्चे मांबाप की सुनते कहां हैं. परिवार का कोई डर ही नहीं रहा बच्चों को.’’

‘‘तुम्हें कैसे पता चला?’’

‘‘बुढ़ापे में कान कम सुनते हैं. बेटेबहू आपस में बतिया रहे थे.’’

‘‘मैं तो यह तमाशा काफी समय से देख रही हूं. छत पर दोनों एकसाथ आते, एकदूसरे को इशारे करते. उन्हें लगता कि हम लोग बुढि़या हैं, दिखाई तो कुछ देता नहीं होगा. लेकिन खुलेआम आशिकी चले और हमारी नजर न पड़े. आंखें थोड़ी कमजोर जरूर हुई हैं लेकिन अंधी तो नहीं हूं न.’’

‘‘हां, मैं ने भी देखा, ट्यूशनकालेज के बहाने पहले लड़की निकलती है अपनी गाड़ी से, फिर लड़का. हमारे बच्चे अच्छे निकले, जहां शादी के लिए कह दिया वहीं कर ली.’’

‘‘हां बहन, ऐसे ही मेरे बच्चे हैं. मां की बात को फर्ज मान कर अपना लिया.’’ अपनेअपने परिवार की तारीफ करतीं और खो जातीं दोनों. न तो दोनों को कंप्यूटर, टीवी से मतलब था, न जमाने की प्रगति से. वे तो जो देखतीसुनतीं उसे नमकमिर्च लगा कर एकदूसरे को बतातीं. इस मामले में दोनों ने स्वयं को खुशनसीब घोषित कर दिया. तारा ने कहा, ‘‘जब घर में यह हाल है तो बाहर न जाने क्या गुल खिलाते होंगे?’’ सितारा ने कहा, ‘‘मांबाप को नजर रखनी चाहिए, लड़की 24-25 साल की तो होगी. अब इस उम्र में मांबाप शादी नहीं करेंगे तो बच्चे तो ये सब करेंगे ही. कुदरत भी कोई चीज है.’’ तारा ने कहा, ‘‘देखा नहीं, कैसे छोटेछोटे कपड़े पहन कर निकलती है. न शर्म न लिहाज. एक दिन मैं ने पूछा भी लड़की से, ‘क्यों बिटिया, दिनभर तो बाहर रहती हो, घर के कामकाज सीख लो. शादी के बाद तो यही सब करना है.’ तो पता है क्या जवाब दिया?’’

‘‘क्या?’’ सितारा ने उत्सुकता से पूछा.

‘‘कहने लगी, ‘अरे दादी, मुझे रसोइया थोड़े बनना है. मैं तो आईएएस की तैयारी कर रही हूं. एक बार अफसर बन गई तो खाना नौकर बना कर देंगे.’ फिर मैं ने पूछा कि लड़की जात हो. कल को शादी होगी तो घर में कामकाज तो करने ही पड़ेंगे. वह हंस पड़ी जोर से. कहने लगी, ‘दादी, आप लोगों को तो शादी की ही पड़ी रहती है. कैरियर भी कोई चीज है.’ शादी की बात करते हुए न लजाई, न शरमाई. बेशर्मी से कह कर अपने स्कूटर पर फुर्र से निकल गई.’’

सितारा ने कहा, ‘‘वर्माजी पछताएंगे. लड़कियों को इतनी छूट देनी ठीक नहीं. जब देखो मोबाइल से चिपकी रहती है बेशर्म कहीं की.’’

‘‘अरे, मैं ने तो यह भी सुना है कि लड़का कोई गैरजात का है. लड़की कायस्थ और लड़का छोटी जात का.’’

‘‘हमें क्या बहना, जो जैसा करेगा वह वैसा भरेगा.’’

‘‘प्यार की उम्र है. प्यार भी कोई चीज है.’’

‘‘यह प्यारमोहब्बत तो जमानों से है. तुम ने भी तो…’’

सितारा ने कहा, ‘‘तुम भी गड़े मुर्दे उखाड़ने लगीं. अरे, हमारा प्यार सच्चा प्यार था. सच्चे प्यार कभी परवान नहीं चढ़ते. सो, जिस से प्यार किया, शादी न हो सकी. यही सच्चे प्यार की निशानी है.’’

‘‘वैसे कुछ भी कहो सितारा बहन, न हो सके जीजाजी थे स्मार्ट, खूबसूरत.’’

अफसोस करते हुए सितारा ने कहा, ‘‘जान छिड़कता था मुझ पर. धर्म आड़े न आया होता तो… फिर हम में इतनी हिम्मत भी कहां थी. संस्कार, परिवार भी कोई चीज होती है. अब्बू ने डांट लगाई और प्यार का भूत उतर गया. काश, उस से शादी हो जाती तो आज जीवन में कुछ और रंग होते. मनचाहा जीवनसाथी. लेकिन घर की इज्जत की बात आई तो हम ने कुर्बानी दे दी प्यार की.’’

‘‘वैसे कहां तक पहुंचा था तुम्हारा प्यार?’’

‘‘बस, हाथ पकड़ने से ले कर चूमने तक.’’

सितारा ने फिर वर्मा की लड़की का जिक्र छोड़ कर अपनी करतूत पर परदा डालते हुए कहा, ‘‘वर्मा की लड़की के तो मजे हैं. देखना भागेगी एक न एक दिन.’’

‘‘हां, लेकिन हमें क्या लेनादेना. भाड़ में जाए. एक बात जरूर है, है बहुत सुंदर. जब लड़की इतनी सुंदर है तो कोई न कोई तो पीछे पड़ेगा ही. अब बाकी दारोमदार लड़की के ऊपर है.’’

‘‘क्या खाक लड़की के ऊपर है. देखा नहीं, उस का शरीर कैसा भर गया है. ये परिवर्तन तो शादी के बाद ही आते हैं.’’

‘‘हां, लगता तो है कि प्यार की बरसात हो चुकी है. एक हम हैं कि तरसते रहे जीवनभर लेकिन जिस पर दिल आया था वह न मिला. कमीने के कारण पूरे गांव में बदनाम हो गई और शादी की बात आई तो मांबाप का आज्ञाकारी बन गया. श्रवण कुमार की औलाद कहीं का.’’

‘‘वह जमाना और था. आज जमाना और है. आज तो लड़केलड़की कोर्ट जा कर शादी कर लेते हैं. कानून भी मदद करता है. हमारे जमाने में ये सब कहां था?’’

‘‘होगा भी तो हमें क्या पता? हम ठहरे गांव के गंवार. आजकल के लड़केलड़कियां कानून की जानकारी रखते हैं और समाज को ठेंगा दिखाते हैं. काश, हम ने हिम्मत की होती, हमें ये सब पता होता तो आज तेरा जीजा कोई और होता.’’

‘‘मैं तो मांबाप के सामने स्वीकार भी न कर सकी. उस के बाद भी भाइयों को पता नहीं क्या हुआ कि बेचारे के साथ खूब मारपीट की. अस्पताल में रहा महीनों. इस बीच मेरी शादी कर दी. मैं क्या विरोध करती, औरत जात हो कर.’’

‘‘सच कहती हो. जिस खूंटे से मांबाप ने बांध दिया, बंध गए. आजकल की लड़कियों को देख लो.’’

‘‘अरी बहन, लड़कियां क्या, शादीशुदा औरतों को ही देख लो. एकसाथ दोदो. घर में पति, बाहर प्रेमी. इधर, पति घर से निकला नहीं कि प्रेमी घर के अंदर. क्या जमाना आ गया है.’’ बातचीत हो ही रही थी कि तभी बाहर से आवाज आई, ‘‘दादी ओ दादी.’’

‘‘लो, आ गया बुलावा. अब जाना ही पड़ेगा.’’

‘‘तुम क्या कह रही थीं?’’

‘‘अब, कल बताऊंगी. अभी चलती हूं.’’

अगले दिन वे फिर मिलीं.

पाकिस्तान में ‘तारा सिंह’ ने मचाई गदर! रिलीज हुआ फिल्म का ट्रेलर

बॉलीवुड की बहुप्रतिक्षित फिल्म ‘गदर 2’ का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे है. बॉलीवुड के स्टार सनी देओल और अमीषा पटेल की ‘गदर 2’ का बुधवार को ट्रेलर रिलीज हो गया. बता दें, ‘गदर 2’ सिनेमाघरों में 11 अगस्त को रिलीज होगी. ऐसे में फिल्म का ट्रेलर को देखने के बाद फैंस को अब बस 11 अगस्त का इंतजार है जब वह सिनेमाघरों में जाकर ‘गदर 2’ देखेंगे.

वैसे तो ‘गदर 2’ का पोस्टर, मोशन पोस्टर, टीजर और गाने देखकर बहुत उत्सुक थे, अब मूवी का ट्रेलर आने के बाद फैंस डबल एक्साइटेड हो गए है.

छा गया ‘गदर 2’ का ट्रेलर

सनी देओल की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘गदर 2’ का ट्रेलर रिलीज हो चुका है. ‘गदर 2’ का ट्रेलर 3.02 मिनट का है, वहीं ट्रेलर में सनी देओल यानी तारा सिंह का रौद्र रूप देखने को मिला है. ट्रेलर में दिखाया गया है तारा सिंह का बेटा जीते पाकिस्तान के कब्जे में होता है तो वह उसे बचाने के लिए पाकिस्तान में तबाही में मचा देता है. तारा सिंह के हमले से दुश्मन धराशायी हो जाते हैं.

फिल्म ‘गदर 2’ में तारा सिंह  और सकीना की रोमांटिक केमिस्ट्री के साथ ही उनके बेटे का रोल कर रहे उत्कर्ष शर्मा भी प्यार में पड़े नजर आएंगे. इस फिल्म के गाने आपके एंटरटेनमेंट को दोगुना करने वाले हैं.

‘गदर 2’ के ये हैं धांसू डायलॉग्स

बॉलीवुड में दमदार आवाज और डायलॉग्स के लिए जाने वाले सनी देओल की ‘गदर 2’ के ये डायलॉग्स बहुत ही जबरदस्त है. ट्रेलर में दिखाया गया है कि जब तारा सिंह पाकिस्तान पहुंच जाते हैं तो उन्हें ललकारा जाता है, उस वक्त हमारे सनी पाजी का दमदार डायलॉग निकल कर आता है- ‘अगर यहां के लोगों को दोबारा मौका मिले ना हिंदुस्तान में बसने का, तो आधा पाकिस्तान खाली हो जाऐगा.’

फिल्म के ट्रेलर में एक और सनी देओल का बेबाक डायलॉग है, जिसमें सनी देओल पाकिस्तानी जनरल को जवाब देते हैं कि- ‘कटोरा लेकर घूमोगे , भीख भी नहीं मिलेगी.’

Anupama: मालती देवी का खुलेगा बड़ा राज, काव्या ने दिया वनराज को धोखा

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ जबसे टेलीकस्ट हुआ तबसे छाया हुआ है. शो के मेकर्स ‘अनुपमा’ को टॉप पर लाने के लिए खूब संघर्ष कर रहे है. शो में आए दिन नए-नए ट्विस्ट आ रहे हैं.  हालांकि रुपाली गांगुली के शो का करंट ट्रैक लोगों के समझ में बिल्कुल भी नहीं आ रहा है.

बीते दिन भी ‘अनुपमा’ में देखने को मिला कि समर को उसके फैसले के लिए पूरा परिवार डांटता है, लेकिन वह भी जवाब देने में कोई कसर नहीं छोड़ता है. वह अपने बाप के सामने जुबान चलाते हुए कहता है कि मैं अच्छा बेटा बनकर थक चुका हूं. यहां तक कि समर अपनी मां अनुपमा की अच्छाई पर भी सवाल उठाता है. वहीं अब अनुपमा के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि मालती देवी का खुलेगा बड़ा राज.

पारितोष बड़े बेटे की जिम्मेदारी संभालेगा

अनुपमा के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि समर को अपनी गलती का पछतावा होता है. डिंपल समर से कहती है वह मालती देवी के साथ काम जरुर करेंगे लेकिन साथ अपनी फैमिली का ही देंगे. वहीं पारितोष खुद सुधारने का फैसला करेगा और कहेगा कि जब अच्छा बेटा समर गलत रास्ते पर आ सकता है तो मैं भी सही रास्ते पर आ सकता हूं और अपनी मम्मी की मदद कर सकता हूं. तोषू की यह बात सुनकर किंजल उसे गले लगा लेगी.

 

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अनुपमा गुरु मां को तेवर दिखाएगी

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ देखने को मिलेगा कि अनुपमा को बुरे सपने आते है. वहीं दूसरी ओर मालती देवी को बच्चे की रोने की आवाज आती है. जिससे वह डर जाती है. वहीं दूसरी ओर अनुपमा गुरु मां से फिर से माफी मांगने की सोचती है. अनुपमा गुरु मां से कहेगी एक मां कभी आपके सामने नहीं झुकेगी, लेकिन एक शिष्या अपनी गलती के लिए आपसे माफी मांगती रहेगी.

काव्या ने दिया वनराज को धोखा

‘अनुपमा’ शो में आए दिन नए-नए ट्विस्ट आ रहे हैं. शो में परिवार का हर एक सदस्य बेबी शावर खुशी से मनाएगा. वहीं काव्या खुद से कहेगी कि मैं सबसे और झूठ नहीं बोल सकती, मुझे परिवार को सच बताना ही होगा. काव्या की इस बात को लेकर माना जा रहा है कि उसने प्रेग्नेंसी से जुड़ा झूठ बोला है. उसके सच बताने के बाद न केवल शाह हाउस, बल्कि कपाड़िया हाउस में भी तूफान देखने को मिलेगा.

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