अनजाने पल: क्यों सावित्री से दूर होना चाहता था आनंद

एक ब्रेकअप ऐसा भी: भाग-3

उस का यह व्यवहार करण को बहुत बुरा लगा. दिल को चोट लगी थी.

अब नैना अकसर अभिनव के साथ बाहर निकलने लगी. उसे किसी की परवा न थी. वह अपने दिल की बात सुन रही थी. अभिनव करण की अपेक्षा काफी विनम्र और अंडरस्टैंडिंग नेचर का था. वैसे भी, नया नया प्यार था, सो, वह नैना को बहुत खास महसूस करा था. उस की छोटीछोटी ख़ुशियों का खयाल रखता. नैना को अब जिंदगी से कोई शिकायत नहीं थी.

एक दिन वह अभिनव के साथ किसी क्लब में थी. वहीं करण अपनी बीवी के साथ पहुंचा. नैना को पति के बजाय किसी और पुरुष के साथ देख कर उस का खून खौल उठा. यदि नैना अपने पति के साथ होती तो उसे बुरा नहीं लगता, मगर वह किसी और के साथ थी. नैना ने भी करण को देख लिया था, मगर उसे इग्नोर कर वह अभिनव की आंखों में देखती रही. करण से यह सब सहन नहीं हो रहा था. वह उस दमघोटू माहौल से दूर जाना चाहता था. उस ने अपनी बीवी से तबीयत ठीक न होने का बहाना बनाया और घर वापस लौट आया. आ कर एक कमरे में बंद हो गया. उस का दिल टूट गया था. भले ही नैना उस की बीवी नहीं थी पर वह उसे बीवी से ज्यादा प्यार करता था. नैना ऐसा कैसे कर सकती है, यह सोचसोच कर करण का सिर फट रहा था. एक बार फिर से उस ने नैना को फोन लगाया.

इस बार भी नैना ने फोन पिक नहीं किया, तो करण ने उसे व्हाट्सऐप किया, ‘यार, तुम ऐसा कैसे कर सकती हो? इतनी आसानी से मेरी जगह किसी और को कैसे दे सकती हो?’

थोड़ी देर बाद नैना का जवाब आया, ‘मैं ने पहले भी लैटर में लिखा था करण, अब मैं आगे बढ़ चुकी हूं. मैं ने मूव औन कर लिया है और तुम्हें भी ऐसा करने की पूरी आजादी है.’

‘पर हमारा प्यार, हमारा वह रिश्ता क्या कोई माने नहीं रखता? तुम मुझे ऐसे छोड़ कैसे सकती हो?’

‘मिस्टर करण, आप ने मुझ से शादी नहीं की है. इसलिए मुझ पर पतियों वाली मिल्कियत न जमाओ. तुम्हारे पास मेरे लिए वक्त नहीं रहा. इतने महीनों से लगातार मुझे इग्नोर कर रहे हो. यह तो मेरी बेवकूफी थी कि मैं फिर भी प्यार की उम्मीद करती रही. देखो करण, तुम्हारे लिए हमेशा से तुम्हारा परिवार अधिक महत्त्वपूर्ण रहा है. तुम ने हमेशा मुझ से ऊपर अपने घरवालों की इच्छा और जरूरतों को रखा. पहले अपने पिता के कारण मुझ से शादी नहीं की. अब बीवीबच्चों के चलते तुम्हारे पास मेरे लिए समय नहीं. तुम ने कभी भी मेरी परवा नहीं की. ऐसे में भला इस तरह के सवाल करने का हक तुम्हें किस ने दिया?’

नैना का रूखा जवाब उसे अंदर तक आहत कर गया. कहीं न कहीं वह नैना को दिल से चाहता था. इसलिए, शादी के बावजूद उसे अपना बना कर रखा था. पर आज उस के दिल का वह कोना रो रहा था. वह पूरी रात बेचैन रहा. बीवी ने कारण पूछा, तो टाल गया. अगले दिन औफिस के काम में उस का बिलकुल भी मन नहीं लगा, तो उस ने नैना को जवाब देने की सोचा.

उस ने नैना के मेल का जवाब लिखना शुरू किया- ‘नैना, तुम मुझे कभी नहीं समझ पाईं. मेरे प्यार को भी महसूस नहीं कर पाईं. याद है जब कई वर्षों बाद दोबारा तुम्हें औफिस में अपनी कलीग के रूप में देखा था, तो मैं कैसे रो पड़ा था. तुम्हें गले से लगा लिया था. दिल किया था कि तुम्हें खुद में ऐसे समेट लूं कि तुम कभी भी दूर न जा सको. पर मैं गलत था. तभी तो तुम ने मेरी कोई परवा नहीं की और ऐसे अचानक ब्रेकअप कर लिया. तुम ने किसी और को अपनी जिंदगी में शामिल कर लिया. मुझे तुम से ऐसी उम्मीद कतई नहीं थी.

‘तुम्हें शायद हमारी वे मुलाक़ातें याद नहीं जब केवल तुम मेरे साथ थीं और कोई नहीं था. बीवी से औफिस ट्रिप का बहाना बना कर मैं तुम्हें कश्मीर ले कर गया. हम ने धरती के उस बेहद खूबसूरत स्थल पर 5 दिन बिताए. कितने मनोरम पल थे वे. तुम्हें कहांकहां नहीं घुमाया. तुम एक इशारा करती थीं और वह चीज तुम्हारे लिए उसी पल खरीद कर लाता था. तुम्हारी हर ख़्वाहिश, हर तमन्ना और हर उम्मीद पूरी की. अब जब परिस्थितियां बदल रही हैं, मैं ने थोड़ी दूरी बनाई, जो जरूरी थी, तो तुम ने एकदम से मेरा साथ छोड़ दिया. मेरी दुनिया से पूरी तरह निकल गईं. प्यार में ऐसा भी कभी होता है क्या? 20 सालों का प्यार ऐसे अचानक बिलकुल खत्म किया जा सकता है? यदि तुम्हें लगता है कि ऐसा किया जा सकता है और तुम मेरे बगैर खुश रह सकती हो, तो ठीक है. ऐसा ही करते हैं. हम अब पूरी तरह ब्रेकअप ही कर लेते हैं.’

नैना के पास करण का यह मेल पहुंचा. उस ने मेल में लिखे एकएक शब्द को महसूस किया. सारी यादें ताजा हो गईं. नैना की आंखों से आंसू बह निकले. बहुत देर तक वह उस मेल को बारबार पढ़ती रही और रोती रही.

कुछ देर बाद उस ने अपना चेहरा धोया, कपड़े बदले और फिर से चेहरे पर मुसकान सजा कर अभिनव को फोन लगाया, “अभिनव, आज मैं चाहती हूं कि तुम मुझे कहीं ऐसी जगह ले जाओ जहां मुझे दुनिया की कोई तकलीफ़, कोई दर्द, कोई याद मेरे पास न फटके. बस, केवल मैं होऊं, तुम्हारा प्यार हो और एक सुकून हो.”

“जैसी आज्ञा मैडम,” अभिनव ने जवाब दिया.

नैना का चेहरा संतोष और सही फैसले की मजबूती से चमक उठा. उस की जिंदगी में अब करण कहीं नहीं था.

Monsoon Special: बारिश के लिए करें अपने आशियाने को तैयार

मानसून में घर की, खासकर लकड़ी के फर्नीचर और दरवाजे-खिड़कियों की देखभाल बहुत जरूरी होती है, वरना मानसून के बाद उनका आकार और रंग, दोनों खराब हो सकता है. अगर आप अपना घर बारिश के लिए तैयार नहीं रखती हैं तो यह मौसम भारी मुसीबत का कारण बन सकता है. बारिश का मतलब है नमी, बदबू मारते कपड़े, अलमारियों में फंगल इंफेक्शन और भी बहुत कुछ. इसलिए इस खूबसूरत मौसम का मजा आप ले सकें, इसके लिए आपको थोड़ी-सी तैयारी करनी होगी.

1. मानसून में हो फर्नीचर की देखभाल

मौसम की नमी लकड़ी की गुणवत्ता और आकार पर बहुत बुरा असर डालती है. इसमें फंगस जमा हो सकती है. इस मौसम में हल्के गीले कपड़े की बजाय साफ-नरम और सूखे कपड़े से फर्नीचर साफ करें. लेमिनेटेड फर्नीचर जैसे स्टडी डेस्क, अलमारी, शटर या डोर को साफ करने के लिए साबुन और पानी का इस्तेमाल करें. इस बात का खास खयाल रखें कि अलमारी में रखने से पहले कपड़े पूरी तरह से सूख चुके हों. अलमारी में थोड़ी-बहुत सूखी नीम की पत्तियां भी डाल दें.

2. कारपेट्स और रग्स का रखें ख्याल

मानसून कारपेट्स और रग्स पर बहुत ही बुरा असर डालता है. बारिश में खिड़कियां खुली न रखें, उनसे नमी अंदर आकर कारपेट्स में जमा हो जाएगी. नम कारपेट्स फंगस का बहुत बड़ा कारण होते हैं. इसी तरह से कारपेट पर गीले फुटवियर ले जाने से भी बचें. बेहतर होगा कि पंखा चलाए रखें. कारपेट्स को नियमित रूप से वैक्यूम क्लीन करती रहें. वैसे अच्छा यही होगा कि इस मौसम में भारी कारपेट्स उठा कर रख दें. आप ईकोफ्रेंडली कारपेट्स भी इस्तेमाल कर सकती हैं. इनकी ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती.

3. सीलन को रोकें

बारिश के दिनों में अक्सर दीवारों और छतों पर सीड़न आ जाती है. अगर दीवार या छत पर हल्की सी भी दरार है, खिड़कियां सही नहीं हैं तो घर की दीवारें बुरी तरह से प्रभावित होती हैं. इससे पेंट भी पपड़ी के रूप में उतर सकता है. इन दिनों जो पेंट्स लगाए जाते हैं, वे भी नमी को आसानी से पकड़ लेते हैं और फिर पपड़ी के रूप में उतर जाते हैं. आरसीसी की छत में भी पानी घुस सकता है. इसलिए बारिश आने से पहले ही पूरे घर की दीवारों को चेक करें और सारे पाइपों और नालियों की सफाई करवा लें.

4. सोफे की सफाई

बारिश के मौसम में सोफों को वैक्यूम क्लीन करना न भूलें. वैक्यूमिंग करते समय क्लीनर को गर्म हवा वाले मोड पर रखें. सोफे के कोनों में नेफ्थलीन की गोलियां डाल दें.

ये भी करें

रसोई के सारे केबिनेट्स को खाली करके अच्छी तरह साफ करें. खाना खुला न छोड़ें. फ्रिज को भी अच्छी तरह साफ करके देख लें, जो खाद्य सामग्री पुरानी हो गई है, उसे फेंक दें. पेड़-पौधों की कटाई करें. बारिश में पेड़-पौधे जल्दी बढ़ते हैं, इसलिए इन्हें ट्रिम कर दें.

बारिश के मौसम में दीमक बहुत तेजी से बढ़ती है. इसलिए पूरे घर के खिड़की-दरवाजे चेक करें कि कहीं कोई दीमक तो नहीं लगी हुई. इस मौसम में घर में कोई तोड़-फोड़ या रिनोवेशन न करवाएं.

बारिश से पहले गद्दों को निकालकर धूप दिखा दें. इससे बारिश में कोई कीड़े बिस्तरों में नहीं लगेंगे.

नमी को पूरी तरह से नियंत्रित करने की कोशिश करें. इलेक्ट्रिकल गैजेट्स को लेकर विशेष सावधानी बरतें. उन्हें सिलिकॉन पाउच में रखें.

Monsoon Special: बारिश के साइड इफैक्ट्स

मानसून की रिमझिम बारिश लोगों को चिलचिलाती गरमी से तो राहत दिलाती है, मगर यह भी सच है कि इस मौसम में सिर्फ बड़ेबुजुर्गों को ही नहीं, युवाओं, महिलाओं और बच्चों को भी तरहतरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है. इस मौसम में लगातार बारिश होती रहती है, जिस से हर जगह पानी, कीचड़, गंदगी देखने को मिलती है. इस से जीवाणुओं और विषाणुओं को पनपने का भरपूर मौका मिलता है. मक्खीमच्छर इसी मौसम में सब से ज्यादा पनपते हैं. इस मौसम में पाचनतंत्र भी कमजोर हो जाता है, जिस से शरीर का इम्यून सिस्टम गड़बड़ा जाता है. शरीर की रोगाणुओं और विषाणुओं से लड़ने की ताकत कम हो जाती है और संक्रामक रोगों के होने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए जरूरी है कि इस मौसम में अपने स्वास्थ्य पर तो ध्यान दे हीं, परिवार के सदस्यों को भी रोगों से बचने के उपाय बताएं.

बीमारियां कैसीकैसी

गंदा पानी संक्रामक रोगों के फैलने का बहुत बड़ा कारण है. जगहजगह गंदे पानी के जमाव की वजह से कीटपतंगों व मक्खीमच्छरों के पनपने की आशंका होती है. मच्छरों के काटने से मलेरिया तथा डेंगू फैलता है. बारिश के दिनों में पानी के तेज बहाव के कारण पानी के पाइप लीक करने लगते हैं और कई जगह टूट भी जाते हैं, जिस की वजह से बारिश या फिर सीवेज का पानी वाटर सप्लाई के पानी में मिल कर उसे प्रदूषित कर देता है. इस से कौलरा, टायफाइड, डायरिया, हैपेटाइटिस जैसी बीमारियों के होने की आशंका बढ़ जाती है. मौसम के तापमान में अचानक गिरावट आ जाने तथा सर्द हवाओं की वजह से खांसीजुकाम, निमोनिया, टौंसिलाइटिस, त्वचा संबंधी रोग, आंखों का रोग जैसे कंजंक्टिवाइटिस के होने की भी आशंका बनी रहती है. इस मौसम में हृदय, फेफड़ों, गुरदों, मस्तिष्क संबंधी बीमारियां तथा पीलिया होने की आशंका भी ज्यादा होती है. समय रहते ध्यान न देने से कई बार मरीज की मौत भी हो जाती है.

समय पर कराएं इलाज

मानसून में मच्छरों से मलेरिया, डेंगू जैसी जानलेवा बीमारियां ज्यादा होती हैं. इन के प्रति थोड़ी सी भी लापरवाही से परिणाम घातक हो सकता है. डेंगू काफी खतरनाक रोग होता है. यह बड़ेबूढ़ों के साथ बच्चों को भी संक्रमित करता है, इसलिए इस की थोड़ी सी भी शंका हो यानी मरीज को तेज बुखार, उलटियां, कमजोरी, सिरदर्द होने लगे तो तुरंत इलाज कराएं. गंदे पानी की वजह से पाचनतंत्र की बीमारियां भी आम बात है. इन में टायफाइड, डायरिया, डिसेंट्री के साथसाथ कालरा तक के होने की संभावना होती है. उलटियां, दस्त, बुखार, कमजोरी महसूस होने पर तुरंत इलाज कराएं. अत्यधिक उलटियां या दस्त होने पर मरीज के शरीर में पानी की कमी हो जाती है. ऐसी स्थिति में समय पर अस्पताल न ले जाने पर मरीज के मरने तक की संभावना रहती है. यदि कोई डायबिटीज, हार्टअटैक तथा उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों से ग्रस्त हो तो उसे भी इस मौसम में विशेषतौर पर सावधानी बरतनी चाहिए. डायबिटीज के मरीजों को नंगे पांव चलने से बचना चाहिए. गंदे पानी तथा कीचड़ से सने पैरों से संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है. नंगे पांव चलने की वजह से लैप्टोस्पाइरोसिस नामक संक्रमण हो सकता है.

यदि इस मौसम में बच्चों को सर्दी, खांसी या बुखार होने लगे, तो तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए. बहुत छोटे बच्चों को मौसम बदलने की वजह से खासकर श्वसनतंत्र की बीमारियां, जैसे निमोनिया होने की प्रबल संभावना होती है. इस का भी इलाज समय से कराना जरूरी होता है.

बेहतर है बचाव

कहते हैं इलाज से बेहतर है बचाव. इसलिए इन दिनों यदि भावी मुसीबतों से बचाव के लिए तैयारी कर लें, तो मानसून के दौरान होने वाली समस्याओं से तो नजात पा लेंगे, मानसून की बारिश का भी भरपूर आनंद उठा सकेंगे. इस दौरान क्याक्या सावधानियां बरतनी चाहिए. आइए जानें- 

मच्छरों से बचाव : बारिश के दिनों में मच्छरों का प्रजनन बड़ी तेजी से होता है. बारिश के ठहरे पानी में ये तेजी से पनपते हैं. इस दौरान घर तथा बाहर जगहजगह नालियों, गड्ढों, कूलरों, पुराने बरतनों और ड्रमों में पानी जमा रहता है, जहां इन की संख्या में बेतहाशा वृद्धि होती है. इन के काटने से मलेरिया जैसी घातक बीमारी के होने की संभावना होती है. अत: इन से बचाव के लिए हर तरह की एहतियात बरतनी चाहिए. मानसून से पहले ही घर की नालियों की सफाई करवा दें. यदि कहीं गड्ढा है, तो उसे मिट्टी से भरवा दें ताकि बारिश का पानी जमा न हो पाए. मार्केट में मलेरिया से बचाव के लिए दवाएं मिलती हैं, जिन का पहले से सेवन कर लेने से इस की संभावना नहीं रहती. रात को मच्छरदानी लगा कर सोएं. कई लोग मच्छरदानी की जगह मस्क्यूटो क्वायल लगा कर सोते हैं, जिस का निरंतर प्रयोग हानिकारक हो सकता है. इस के धुएं में पाए जाने वाले रसायन शरीर के लिए हानिकारक होते हैं. शाम को घर में नीम की सूखी पत्तियों का धुआं करें. मच्छरों को भगाने के लिए यह अचूक घरेलू उपाय है. मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए नालियां, गड्ढों तथा आसपास जमे पानी में मिट्टी का तेल या फिनाइल का छिड़काव करें. यदि आप घूमने जा रहे हैं, तो मस्क्यूटो रेवेलेंट ट्यूब रखना न भूलें. बच्चों को भी रात को सोते समय उन के हाथपैरों, बांहों आदि खुली जगहों पर इसे लगाएं.

डाइट का रखें ध्यान : मानसून में प्रदूषित पेयजल से होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है. हमेशा उबला या फिल्टर्ड पानी ही पिएं. बाहर का पानी, जूस या कच्चे भोज्यपदार्थों का सेवन करने से परहेज करें खासकर सड़क के किनारे खड़े ठेले वालों से चाट, पकौड़े, समोसे न तो खुद खाएं और न ही अपने बच्चों को खाने को दें.

डाक्टरों का मानना है कि फिल्टर्ड वाटर को भी उबाल कर पिएं. केवल फिल्टर कर देने से सारे विषाणु या जीवाणु नहीं मरते हैं. प्रदूषित पानी से टायफाइड, पीलिया, डायरिया, डिसेंट्री, कौलरा के साथसाथ पाचनतंत्र की कई दूसरी बीमारियां भी होती हैं. इन से बचने के लिए खुला खाना खाने और बिना पैकिंग वाला दूषित पानी पीने से बचना चाहिए. खाना बनाने के लिए भी फिल्टर्ड पानी का प्रयोग करें या पानी को खौला कर ठंडा कर लें. गरम पानी पीने से खाना अच्छी तरह पचता है. बाहर के खुले भोज्यपदार्थों पर मक्खियां भिनभिनाती हैं, उन्हें न खाएं. कच्ची सब्जियां खाने से बचें. बारिश के गंदे पानी में चलने से भी तरहतरह की बीमारियां होती हैं, क्योंकि इस से सीवेज वाटर में पाए जाने वाले कीटाणु या जीवाणु शरीर के सीधे संपर्क में आ जाते हैं, जो रोग का कारण बनते हैं. अत: बच्चों को गंदे पानी में चलने या खेलने से रोकें. उन्हें मौसम के अनुरूप ड्रैस पहनाएं ताकि सर्दीखांसी से बचाव हो सके. इस मौसम में बच्चों को गमबूट पहनने के लिए दें और घर लौटने के बाद यदि कपड़े भीगे हों तो उन्हें तुरंत बदल दें. भीगे कपड़ों से सर्दीखांसी होने की संभावना रहती है. बाल गीले हों तो साफ तथा सूखे तौलिए से अच्छी तरह पोंछ दें. एयरकंडीशंड कमरों में गीले कपड़ों में न जाने दें. पैर गीले या गंदे हों तो उन्हें साफ पानी में धोने तथा सूखे तौलिए से पोंछ लेने की हिदायत दें.

मानसून में पाचनतंत्र से संबंधित 2 तरह की बातें देखने को मिलती हैं. पहली, भोजन को पचाने की गति धीमी हो जाती है, जिस कारण सारे खाद्यपदार्थ आसानी से नहीं पचते. फलस्वरूप शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता कम हो जाती है. दूसरी बात यह है कि इस दौरान बैक्टीरिया तथा वायरस ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं. इसलिए खानपान में यदि पर्याप्त हाइजीन मेंटेन नहीं करेंगे तथा सही खाना नहीं खाएंगे तो संक्रमण की प्रबल संभावना रहेगी. इस मौसम में यह समस्या सामने आती है कि क्या खाएं, क्या नहीं. अत: इस मौसम में कच्ची सब्जियों के सेवन से बचें. फलों से भी परहेज करें, क्योंकि फलों तथा सब्जियों में नमी की वजह से तरहतरह के बैक्टीरिया तथा वायरस पनपते हैं. अत: इन की जगह अंकुरित तथा पूरी तरह से पकी सब्जियां ही खाएं. मांस से भी परहेज करें, क्योंकि गरिष्ठ भोजन आसानी से नहीं पचता. यदि आप नानवेज नहीं छोड़ना चाहते तो ताजा ही खाएं. मछली इस मौसम में न खाएं, क्योंकि इस समय मार्केट में ताजा मछलियां कम मिलती हैं.

अपनी डाइट में सूप, गाय का दूध तथा नारियलपानी की मात्रा को बढ़ा दें. इस से शरीर की रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता बढ़ती है. ज्यादा तेल, घी तथा मसालेदार खाने से भी बचें. पानी में शहद तथा नीबू की थोड़ी मात्रा डाल कर सेवन करें. इस से इम्यून सिस्टम सुदृढ़ होता है.

खानपान के नियम

खाने में नमक का प्रयोग कम से कम करें, क्योंकि इस से गैस तो बनती ही है, शरीर में पानी का जमाव भी होता है.

अत्यधिक तले भोज्यपदार्थों से परहेज करें, क्योंकि इस मौसम में पाचन क्षमता कमजोर होती है.

मक्का, बाजरा के आटे में अत्यधिक पोषक तत्त्व होते हैं, इसलिए इस आटे का सेवन करें. ऐसे खाद्यपदार्थ जिन में पानी की मात्रा ज्यादा होती है, जैसे करी आदि, को न लें.

सलाद से परहेज करें.

खट्टे भोज्यपदार्थों से बचें.

बाजार के रायते, पनीर का सेवन न करें.

मानसून में करेलों, मेथी के सेवन से संक्रमण से बचाव होता है. इन्हें डाइट में शामिल करें.

कुछ अतिरिक्त सावधानियां

घर को अंदर तथा बाहर से हमेशा साफ तथा सूखा रखें.

घर के आंगन में या बाहर आसपास बारिश के पानी को जमा न होने दें.

शरीर को ढक कर रखें. कम तापमान होने पर संक्रमण की संभावना होती है.

एसी वाले कमरे में भीगे केश तथा भीगे कपड़े पहन कर न जाएं.

पैर गीले हों तो सुखा लें. उन्हें गीला मत छोड़ें.

फल तथा सब्जियों को साफ पानी से धोएं.

खूब पानी पिएं ताकि शरीर में पानी की कमी न होने पाए.

बच्चों को कीचड़, बारिश के गंदे पानी में न खेलने दें.

Vickey Kaushal ने खास अंदाज में मनाया कैटरीना का बर्थडे, शेयर की तस्वीर

कैटरीना कैफ 16 जुलाई को 40 साल की हो गईं. अभिनेत्री को सोशल मीडिया पर फैंस और फॉलोअर्स से खूबसूरत जन्मदिन के विशेस मिले. कई बॉलीवुड सेलिब्रिटीज ने भी एक्ट्रेस को उनके 40वें जन्मदिन पर शुभकामनाएं दीं. कुछ समय पहले, कैटरीना कैफ के पति-अभिनेता विक्की कौशल ने अभिनेत्री को ‘जन्मदिन की शुभकामनाएं’ देने के लिए उनकी एक साथ प्यार भरी तस्वीरें साझा कीं.

विक्की ने कैटरीना के जन्मदिन पर रोमांटिक तस्वीरें साझा कीं

एक्टर विक्की कौशल ने अपनी ‘वाइफ’ कैटरीना को उनके 40वें जन्मदिन पर बधाई देने के लिए अपनी हालिए छुट्टियों की दो रोमांटिक तस्वीरें साझा कीं. तस्वीरें शेयर करते हुए विक्की ने लिखा, “तुम्हारे जादू से हैरान हूं…हर रोज. जन्मदिन मुबारक हो मेरा प्यार!” तस्वीरों में, कैटरीना को विक्की के साथ प्यार भरी नज़रें मिलाते हुए मुस्कान दिखाते हुए देखा जा सकता है.

कैटरीना ने पीले रंग की डैस पहनी है जबकि विक्की ने कैजुअल लुक चुना है तस्वीरों में कपल समुद्र किनारे एन्जॉय करते नजर आ रहे है.

 

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फैंस की प्रतिक्रियाएं देखें

जैसे ही विक्की कौशल ने कैटरीना को जन्मदिन की बधाई देने के लिए रोमांटिक तस्वीरें डालीं, उनके फैंस ने इस पर तुरंत प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी. एक ने लिखा, “सबसे प्यारी जोड़ी.” एक अन्य ने टिप्पणी की, “बॉलीवुड की परफेक्ट जोड़ी.” एक-दूसरे के प्रति जोड़े के प्यार की प्रशंसा करते हुए, एक फैन ने कहा, “एलेक्सा प्ले “लवर” बाय टेलर स्विफ्ट.” कई फैंस ने कैटरीना को ‘जन्मदिन की शुभकामनाएं’ दीं और रेड दिल वाले इमोजी बनाए.

15 जुलाई को विक्की और कैटरीना को हाथों में हाथ डाले मुंबई एयरपोर्ट पर आते देखा गया था. कपल ने सुरक्षा जांच में एंट्री करने से पहले पापराज़ी के लिए पोज़ दिया और उनकी ओर हाथ हिलाया.

कैटरीना और विक्की की शादी

कैटरीना और विक्की ने दिसंबर 2021 में राजस्थान में एक भव्य डेस्टिनेशन वेडिंग में शादी के बंधन में बंधे. लेकिन अपनी शादी से पहले उन्होंने कभी भी अपने रिश्ते के बारे में सार्वजनिक रूप से बात नहीं की थी.

Bigg Boss OTT 2: क्या सलमान ने छोड़ दिया है शो, समाने आई ये वजह

टीवी का कॉन्ट्रोवर्शियल रियलिटी शो बिग बॉस का ओटीटी वर्जन फैंस को खूब पसंद आ रहा है. इस शो को जनता का काफी प्यार मिल रहा है. इस शो में टीवी स्टार के साथ-साथ बॉलीवुड के एक्टर्स और तमाम सोशल मीडिया स्टार्स को भी जगह दी गई है.

इस बार बिग बॉस ओटीटी को सलमान खान होस्ट कर है. शो को दर्शकों का खूब प्यार मिल रहा है. बिग बॉस ओटीटी सलमान खान से जुड़ा हुआ है वह हर वीकेंड पर शो होस्ट करते है इसके साथ ही वीकेंड का वार पर सलमान सबकी क्लास लगाते है. दावा किया जा रहा है सलमान खान बॉस ओटीटी 2 की होस्टिंग छोड़ रहे है.

सलमान ने छोड़ा बिग बॉस

दरअसल पिछले वीकेंड वार पर सलमान खान के हाथ में सिगरेट नजर आई थी, जिसे दर्शकों ने नोटिस कर लिया था. एपिसोड़ वायरल होते ही सोशल मीडिया पर सलमान खान  का सिगरेट पीना एक मुद्दा बन गया था, जिस वजह से उन्हें खूब ट्रोल किया गया. लेकिन सलमान को कुछ लोगों ने सपोर्ट करते हुए कहा सिगरेट पीना इसमे क्या गलत है.

काफी चर्चा के बाद, सलमान इस विवाद के बाद शो की होस्टिंग छोड़ सकते हैं. वहीं, अब दावा किया जा रहा है कि सलमान ने बिग बॉस ओटीटी 2 की होस्टिंग को छोड़ने का फैसला लिया है. इसी के साथ ही सलमान टीवी पर प्रसारित होने वाले बिग बॉस के सीजन 17 को भी होस्ट नहीं करेंगे. कहा जा रही है कि सलमान और निर्माताओं को कुछ लेना-देना हो सकता है, जिन्होंने जानबूझकर होस्टिंग के बीच सलमान के सिगरेट पीने वाले शॉट को वीकेंड का वार में एपिसोड प्रसारित किया.

इस वीकेंड पर नहीं दिखे सलमान

अभी हाल ही में बिग बॉस ओटीटी 2 के वीकेंड के वार पर सलमान खान होस्टिंग करते नजर नहीं आए. ऐसे में कहा गया कि सलमान किसी मिटमेंट की वजह से एपिसोड की शूटिंग नहीं कर पाए. उनकी जगह पर कृष्णा अभिषेक और भारती सिंह ने वीकेंड का वार होस्ट किया था. हालांकि कृष्णा अभिषेक की होस्टिंग को जनता को पसंद नहीं आई. सलमान वीकेंड के वार पर कड़क अंदाज में सभी कंटेस्टेंट्स को फटकार लगाते हैं, ये भारती और कृष्णा मिलकर नहीं कर पाए.

Monsoon special: बालों के लिए वरदान यह चीज आप के घर में ही है

Monsoon सीजन चल रहा है ऐसे में मौसम सुहाना हो जाता है. बरसात के मौसम में अक्सर बाल झड़ने की समास्या उत्पन्न हो जाती है. झड़ते बालों से छुटकारा पाने के लिए हमारे घर में मौजूद कई चीजें हमारे ब्यूटी को बढ़ाने में काम आती है. अब चाहे स्किन हो या हमारे हेयर्स की केयर, भारतीय किचन में मौजूद हर चीज काम की साबित हो सकती है.

Monsoon के सीजन में बहुत से लोगों को बालों के झड़ने की समस्या अधिक होती है ड्राई स्कैल्प के कारण बालों में रूसी इंचिग की समस्या भी आने लगती है. अगर आप भी अपने बालों के लिए किसी अच्छी होमरेमडी की तलाश में हैं तो ये लेख आपके लिए ही बहुत काम के लिए है.

आप अपने किचन में रखे मेथी के दानों को इस्तेमाल में ला सकते हैं. मेथी के दानों में आयरन प्रोटीन होता है. यह बालों की ग्रोथ उन्हें टूटने से बचाने में कारगर है. आइए जानते हैं मेथी के दानों का कैसे कर सकते हैं इस्तेमाल.

हेयर मास्क का करें इस्तेमाल

मेथी के दानों की गुडनेस को अपने बालों में उतारने के लिए इसका इस्तेमाल हेयर मास्क की तरह कर सकते हैं. इसके लिए मेथी के दानों को रात भर के लिए पानी में भिगो कर छोड़ दें. अगली सुबह मेथी के दानों को मिक्सर में पीस कर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट में कोकोनट मिल्क को एड कर सकते हैं. इस पेस्ट को अपनी स्कैल्प पर अप्लाई कर कुछ देर छोड़ दें. करीब आधे घंटें बाद नॉर्मल पानी से हेयर वॉश कर लें. इस मास्क को हफ्ते में तीन बार ट्राई कर सकते हैं.

मेथी के बीज खाने में करें इस्तेमाल

इसके अलावा आप मेथी के दानो का सेवन नार्मल यूज़ की तरह कर सकते है. सबसे पहले आप मेथी के दानों को पानी के सुबह पी सकते है.

Monsoon Special: बारिश के मौसम में कैसे करें विटामिन डी की कमी को पूरा

हमारे शरीर के लिए धूप बेहद आवश्यक होती है, क्योंकि इस से विटामिन डी की आवश्यकता को पूरा किया जा सकता है. विटामिन डी हमारे शरीर के लिए आवश्यक तत्वों में से एक है. यह कैल्शियम को अवशोषित करने में मदद करता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाए रखता है. इस के अलावा मांसपेशियों के लिए भी विटामिन डी की आवश्यकता होती है और यह आप के शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती है. विटामिन डी की पूर्ति सूर्य के संपर्क में आने से होती है. ज्यादातर लोगों को इस तरीके से कुछ विटामिन डी मिल जाती है, लेकिन बारिश होने के कारण हम सूर्य के संपर्क में नहीं आ पाते और विटामिन डी को प्राप्त करना हमारे लिए मुश्किल हो जाता है. हमारे शरीर को ठीक से काम करने के लिए नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी की आवश्यकता है.

इसलिए अगर धूप ना हो, तो इस की आवश्यकता को पूरा करने के लिए यहां हम आप को कुछ तरीके बताएंगे. तो देरी किस बात की है, आइए जानते हैं इन तरीकों के बारे में-

डाइट

आप की डाइट से विटामिन डी प्राप्त करने में मदद मिल सकती है. आप अपने डाइट में कम मात्रा में विटामिन डी वाले कुछ अन्य खाद्य पदार्थ जैसे अंडे की जर्दी, पनीर और मशरूम शामिल कर सकते हैं. कई खाद्य पदार्थ विटामिन डी से भरपूर होते हैं, जैसे गाय का दूध, पौधे आधारित दूध, संतरे का रस, दही आदि.

सप्लीमेंट

अगर आप की डाइट विटामिन डी की आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाती है, तो आप सप्लीमेंट ले सकती हैं.
विटामिन डी वसा में घुलनशील होती है और इसलिए जब आप सप्लीमेंट को किसी भोजन या नाश्ते के साथ लेती हैं तो यह अच्छे से अवशोषित होते हैं.

सावधानियां

कई लोग यह जाने बिना कि उन्हें सप्लीमेंट की आवश्यकता है या नहीं, इस का सेवन कर लेते हैं, लेकिन आ पको पहले विटामिन डी की कमी है या नहीं, यह निर्धारित करना चाहिए. इस के लिए पहले ब्लड टेस्ट कराना जरूरी है. अगर विटामिन डी की कमी पाई जाती है, तो आप डाक्टर की मदद से सप्लीमेंट का सेवन कर सकती हैं.

अधिक विटामिन डी के सेवन से हो सकता है स्वास्थ्य को खतरा

बहुत अधिक विटामिन डी लेना आप के शरीर के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है. आप के रक्त में विटामिन डी का अधिक स्तर उलटी, मतली, भूख न लगना, डिहाइड्रेशन, मांसपेशियों में कमजोरी, दर्द, अत्यधिक पेशाब आना और गुरदे की पथरी होने का कारण बन सकता है. इसीलिए अगर आप को विटामिन डी की कमी है, तो एक बार माहिर डाक्टर से जरूर परामर्श करें.

हार्ट अटैक के केस बहुत बढ़ रहे है. ऐसे में मुझे जानना है हार्ट अटैक आने पर क्या करें?

सवाल

आजकल हार्ट अटैक के मामले बहुत बढ़ गए हैं. मैं जानना चाहती हूं कि हार्ट अटैक आने पर क्या करना चाहिए?

जवाब

हार्ट अटैक के समय धमनियों में जो अवरोध/ब्लौकेज होती है वह थक्का बनने के कारण पूरे 100% तक हो जाती है. इस से रक्त का प्रवाह रुक जाता है और हृदय की मांसपेशियां नष्ट होने लगती हैं. अधिकतर मामलों में मरीज को छाती में तेज दर्द या सांस फूलने की समस्या होती है. अत: जैसे ही मरीज सांस उखड़ने या छाती में दर्द होने की शिकायत करे तो उसे तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए. इस के पहले सोर्बिट्रेट टैबलेट को जीभ के नीचे रखना चाहिए, एहतियात के तौर पर मरीज को एक डिस्प्रिन की गोली भी दी जा सकती है. मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए ताकि शीघ्र ब्लौकेज को निकाला जा सके और हृदय को क्षतिग्रस्त होने से बचाया जाए.

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मैं 56 वर्षीय घरेलू महिला हूं. मुझे एक बार हार्ट अटैक आ चुका है. क्या मेरे लिए सैकंड हार्ट अटैक का खतरा बहुत बढ़ गया है?

जवाब

जिन्हें पहले हार्ट अटैक आ चुका है उन्हें दोबारा आने का रिस्क सामान्य लोगों से बहुत ज्यादा होता है. हर साल यह खतरा 10-15% बढ़ जाता है. 5 साल में 50% लोगों को दूसरा अटैक आ जाता है. पहले हार्ट अटैक के बाद जीवनशैली में बदलाव लाएं, तलेभुने खाद्यपदार्थों का सेवन न करें, बाहर का खाना खाने से बचें, घर पर बना सादा खाना खाएं.

अपने रक्त में शुगर और कोलैस्ट्रौल के स्तर और रक्तदाब को नियंत्रित रखें. नियत समय पर अपनी दवा लें. धूम्रपान और सैकंड हैंड स्मोकिंग भी सैकंड हार्ट अटैक आने के खतरे को बढ़ा देता है इसलिए अगर आप के परिवार में कोई धूम्रपान करता है तो उस से दूर रहें.

डा. आनंद कुमार पांडेय

डाइरैक्टर ऐंड सीनियर कंसल्टैंट, इंटरनैशनल कार्डियोलौजी, धर्मशिला नारायणा सुपर स्पैश्यलिटी हौस्पिटल 

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभा, ई-8, रानी झांसी मार्ग, नई दिल्ली-110055.

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भुट्टा परांठा पिज्जा: स्वाद भी सेहत भी

आज पिज्जा, नूडल्स और पास्ता जैसे फास्ट फूड हर आयुवर्ग की पहली पसंद हैं। ये खाने में भी सभी को बहुत पसंद आते हैं, पर इन फास्ट फूड का सब से बड़ा नुकसान यह है कि इन का बेस मैदा का होता है और इन्हें लंबे समय तक ताजा रखने के लिए अनेक प्रिजर्वैटिव का प्रयोग करने के साथसाथ पिज्जा तैयार करते समय इन का स्वाद बढ़ाने के लिए फूड कलर और ऐसेंस का प्रयोग किया जाता है, जो सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह होते हैं.

आज यह हमारे आहार का प्रमुख हिस्सा बन चुका है इसलिए इस से बचा तो नहीं जा सकता पर घर पर थोड़े से प्रयास से हैल्दी पिज्जा जरूर बनाया जा सकता है, जो सभी को बेहद पसंद भी आएगा और इस तरह हम फास्ट फूड का सेवन भी भरपूर कर सकेंगे और इन के नुकसानों से बचे भी रहेंगे.

इस समय भुट्टे का सीजन चल रहा है, इसलिए आज हम आप को भुट्टे से पिज्जा बनाना बता रहे हैं, जिसे आप घर की सामग्री से बड़ी आसानी से बना सकते हैं।

आइए, जानते हैं कि इसे कैसे बनाया जाता है :

कितने लोगों के लिए : 4
बनने में लगने वाला समय : 30 मिनट
मील टाइप : वेज

सामग्री
ताजा भुट्टे : 2
मक्के का आटा : 4 बङे चम्मच
कौर्नफ्लोर : 2 बङे चम्मच
चिली फ्लैक्स : 1 बङा चम्मच
पिज्जा सीजनिंग : 1 बङा चम्मच
पिघला मक्खन : 2 बङे चम्मच
बारीक कटा प्याज : 1 छोटा
बारीक कटी शिमलामिर्च : 1 बङा चम्मच
पनीर (बारीक कटा) : 1 बङा चम्मच
औलिव औयल : 1 बङा चम्मच
पिज्जा सौस : 1 बङा चम्मच
मोजरेला चीज : 200 ग्राम
नमक स्वादानुसार

विधि : भुट्टे के दानों को निकाल कर बारीक पीस लें. फिर कौर्नफ्लोर, मक्के का आटा और स्वादानुसार नमक मिला कर आटे जैसा गूंध लें और बिना रेस्ट दिए तैयार मिश्रण से पिज्जा बेस जितना बड़ा परांठा बनाएं। इसे घी लगा कर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंकें. जब यह ठंडा हो जाए तो बटर लगा कर पिज्जा सौस लगाएं और कटा प्याज, शिमलामिर्च, पनीर और औलिव औयल डाल कर मोजरेला चीज को किस दें. ऊपर से चिली फ्लैक्स और पिज्जा की सीजनिंग डाल कर 5 मिनट माइक्रोवेब में 220 डिग्री पर बेक कर के सर्व करें.

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