जिंदगी की उजली भोर: भाग 2- रूना को जब पता चला समीर का राज?

सुबह वह तेज बुखार से तय रही थी. समीर ने परेशान हो कर छुट्टी के लिए औफिस फोन किया.  उसे डाक्टर के पास ले गया. दिनभर उस की खिदमत करता रहा. बुखार कम होने पर समीर ने खिचड़ी बना कर उसे खिलाई. उस की चाहत व फिक्र देख कर रूना खुश हो गई पर रात की बात याद आते ही उस का दिल डूबने लगता.

दूसरे दिन तबीयत ठीक थी. समीर औफिस चला गया. शाम होने से पहले उस ने एक फैसला कर लिया, घुटघुट कर मरने से बेहतर है सच सामने आ जाए, इस पार या उस पार. अगर दुख  को उस की आखिरी हद तक जा कर झेला जाए तो तकलीफ का एहसास कम हो जाता है. डर के साए में जीने से मौत बेहतर है.

उस दिन समीर औफिस से जल्दी आ गया. चाय वगैरह पी कर, फ्रैश हुआ. वह बाहर जाने को निकलने लगा तो रूना तन कर उस के सामने खड़ी हो गई. उस की आंखों में निश्चय की ऐसी चमक थी कि समीर की निगाहें झुक गईं, ‘‘समीर, मैं आप के साथ चलूंगी उन से मिलने,’’ उस के शब्द चट्टान की मजबूती लिए हुए थे, ‘‘मैं कोई बहाना नहीं सुनूंगी,’’ उस ने आगे कहा.

समीर को अंदाजा हो गया, आंधी अब नहीं रोकी जा सकती. शायद, उस के बाद सुकून हो जाए. समीर ने निर्णयात्मक लहजे में कहा, ‘‘चलो.’’

रास्ता खामोशी से कटा. दोनों अपनीअपनी सोचों में गुम थे. होटल पहुंच कर कैबिन में दाखिल हुए. सामने एक खूबसूरत औरत, एक बच्ची को गोद में लिए बैठी थी. रूना के दिल की धड़कनें इतनी बढ़ गईं कि  उसे लगा, दिल सीना फाड़ कर बाहर आ जाएगा, गला बुरी तरह सूख रहा था. रूना को साथ देख कर उस के चेहरे पर घबराहट झलक उठी. समीर ने स्थिर स्वर में कहा, ‘‘रोशनी, इन से मिलो. ये हैं रूना, मेरी बीवी. और रूना, ये हैं रोशनी, मेरी मां.’’

रूना को सारी दुनिया घूमती हुई लगी. रोशनी ने आगे बढ़ कर उस के सिर पर हाथ रखा. रूना शर्म और पछतावे से गली जा रही थी. कौफी आतेआते उस ने अपनेआप को संभाल लिया. बच्ची बड़े मजे से समीर की गोद में बैठी थी. समीर ने अदब से पूछा, ‘‘आप कब जाना

चाहती हैं?’’

‘‘परसों सुबह.’’

‘‘कल शाम मैं और रूना आ कर बच्ची को अपने साथ ले जाएंगे,’’ समीर ने कहा.

वापसी का सफर दोनों ने खामोशी से तय किया. रूना संतुष्ट थी कि उस ने समीर पर कोई गलत इल्जाम नहीं लगाया था. अगर उस ने इस बात का बतंगड़ बनाया होता तो वह अपनी ही नजरों में गिर जाती.

घर पहुंच कर समीर ने उस का हाथ थामा और धीरेधीरे कहना शुरू किया, ‘‘रूना, मैं

बेहद खुश हूं कि तुम ने मुझे गलत नहीं समझा. मैं खुद बड़ी उलझन में था. अपने बड़ों के ऐब खोलना बड़ी हिम्मत का काम है. मैं चाह कर भी तुम्हें बता नहीं सका. करीब 4 साल पहले, पापा ने रोशनी को किसी प्रोग्राम में गाते सुना था. धीरेधीरे उन के रिश्ते गहराने लगे. उस वक्त मैं अहमदाबाद में एमबीए कर रहा था.

‘‘मेरी अम्मी हार्टपेशैंट थीं. अकसर ही बीमार रहतीं. पापा खुद को अकेला महसूस करते. घर का सारा काम हमारा पुराना नौकर बाबू ही करता. ऐसे में पापा की रोशनी से मुलाकात, फिर गहरे रिश्ते बने. रोशनी अकेली थी. रिश्तों और प्यार को तरसी हुई लड़की थी. बात शादी पर जा कर खत्म हुई. अम्मी एकदम से टूट गईं. वैसे पापा ने रोशनी को अलग घर में रखा था. लेकिन दुख को दूरी और दरवाजे कहां रोक पाते हैं.

‘‘जब मुझे पता लगा, मैं गांव गया. बूआ भी आईं, काफी बहस हुई. पापा ने अपना पक्ष रखा, बीवी की बीमारी, उन के कहीं न आनेजाने की वजह से वे भी बहुत अकेले हो गए थे. जिंदगी बेरंग और वीरान लगती थी. एक तरह से अम्मी का साथ न के बराबर था. ऐसे में रोशनी से हुई उन की मुलाकात.

‘‘जरूरत और हालात ने दोनों को करीब कर दिया. उस का भी कोई न था, परेशान थी. वह प्रोग्राम में गाने गा कर जिंदगी बसर कर रही थी. दोनों की उम्र में फर्क होने के बाद भी आपस में

अच्छा तालमेल हो गया तो शादी ही बेहतर थी.

‘‘पापा अपनी जगह सही थे. यह भी ठीक था कि बीमारी से अम्मी चिड़चिड़ी और रूखी हो गई थीं. वे किसी से मिलना नहीं चाहती थीं. पर अम्मी का गम भी ठीक था. जो हो गया उसे तो निभाना था. बूआ का बेटा बाहर पढ़ने गया था. बूआ अकसर अम्मी के पास रहतीं. पापा दोनों घरों का बराबरी से खयाल रखते. लेकिन अम्मी अंदर ही अंदर घुल रही थीं. जल्दी ही वे सारे दुखों से छुटकारा पा गईं. मैं एक हफ्ता रुक कर वापस आ गया.

‘‘पापा रोशनी को घर ले आए. बूआ और गांव के मिलने वाले पापा से नाराज से थे. मगर रोशनी ने पापा व घर को अच्छे से संभाल लिया. वह मेरा भी बहुत खयाल रखती. रोशनी बहुत कम बोलती. एक अनकही उदासी उस की आंखों में तैरती रहती. मुझ से उम्र में वह 5-6 साल ही बड़ी होगी पर उस में शोखी व चंचलता जरा भी न थी. इसी तरह 1 साल गुजर गया.

‘‘एमबीए के बाद मुझे अहमदाबाद में अच्छी नौकरी मिल गई. अकसर गांव चला जाता. एक बार मैं ने रोशनी में बड़ा फर्क देखा, वह खूब हंसती, मुसकराती, गुनगुनाती, जैसे घर में रौनक उतर आई. पापा भी खूब खुश दिखते. फिर मैं 3-4 माह गांव न जा सका. फिर तुम से शादी तय हो गई. मैं शादी के लिए गांव गया. पर बहुत सन्नाटा था. बस, पापा और बाबू ही घर पर थे. पापा बेहद मायूस टूटेबिखरे से थे. घर में रोशनी नहीं थी. दिनभर पापा चुपचुप रहे. रात जब मेरे पास बैठे तो उदासी से बोले, ‘रोशनी चली गई. मैं ने ही उसे जाने दिया. वह और उस का सहपाठी अजहर बहुत पहले से एकदूसरे को चाहते थे. पर अजहर के मांबाप उस से शादी करने के लिए नहीं माने. वह नाराज हो कर बाहर चला गया. आखिर मांबाप इकलौते बेटे की जुदाई सहतेसहते थक गए. उसे वापस बुलाया और रोशनी से शादी

पर राजी हो गए. अजहर आ कर मुझ से मिला, सारी बात बताई. मैं रोशनी की खुशी चाहता था. सारी जिंदगी उसे बांध कर रखने का कोई फायदा न था.

‘‘‘मुझे पता था कि उस ने अकेलेपन और एक सहारा  पाने की मजबूरी में मुझ से शादी की थी. मुझ से शादी के बाद भी वह बुझीबुझी ही रहती थी. बस, जब अजहर ने उसे आने के बारे में बताया तब ही उस के चेहरे पर हंसी खिल उठी. फिर मेरी व उस की उम्र में फर्क भी मुझे ये फैसला करने पर मजबूर कर रहा था. मैं ने उसे अजहर के साथ जाने दिया. बस, एक दुख है, उस की कोख में मेरा अंश पल रहा था. मैं ने उस से वादा किया, बच्चा होने के बाद मैं तलाक दे दूंगा. फिर वह अजहर से शादी कर ले. उसे यह यकीन दिलाया कि बच्चे की पूरी जिम्मेदारी मैं उठाऊंगा. अब बेटा, यह जिम्मेदारी मैं तुम्हें सौंपता हूं कि रोशनी की शादी के पहले तुम उस से बच्चा ले लेना और उस की परवरिश तुम ही करना.  यह मेरी ख्वाहिश और इल्तजा है.’

‘‘रूना, मैं ने उन्हें वचन दिया था कि यह जिम्मेदारी मैं जरूर पूरी

करूंगा. अभी तक अजहर ने रोशनी को अलग फ्लैट में बड़ौदा में रखा है. वहीं उस ने बच्ची को जन्म दिया. पापा ने तलाक दे दिया. बस, वह बच्ची के जरा बड़े होने का इंतजार कर रही है ताकि वह बच्ची को हमें सौंप कर अजहर से शादी कर के नई जिंदगी शुरू कर सके. मैं बच्ची के सिलसिले में ही रोशनी से मिलने जाता था. उस की जरूरत का सामान दिला देता था. अजहर ने अपने घर में रोशनी की शादी और बच्ची के बारे में नहीं बताया है. जब हम इस बच्ची को ले आएंगे तो वे दोनों नवसारी जा कर शादी के बंधन में बंध जाएंगे.’’

यह सब सुन कर वह खुशी से भर उठी और इतना समझदार और जिम्मेदार पति पा कर

उसे बहुत गर्व हुआ. उसे याद आया, सीमा ने उसे बताया था कि बड़ौदा मौल में समीर एक खूबसूरत औरत के साथ था. तो वह औरत रोशनी थी. अच्छा हुआ, उस ने इस बात को ले कर कोई बवाल नहीं मचाया.

समीर ने रूना का हाथ थाम कर प्यार से कहा, ‘‘रूना, मेरी इच्छा है कि हम रोशनी की बच्ची को अपने पास ला कर अपनी बेटी बना कर रखेंगे, इस में तुम्हारी इजाजत की जरूरत है.’’ समीर ने बड़ी उम्मीदभरी नजरों से रूना को देखा, रूना ने मुसकरा कर कहा, ‘‘मां खोने का दुख मैं उठा चुकी हूं. मैं बच्ची को ला कर बहुत प्यार दूंगी, अपनी बेटी बना कर रखूंगी. मैं बहुत खुशनसीब हूं कि मुझे आप जैसा शौहर मिला. आप एक बेमिसाल बेटे, एक चाहने वाले शौहर और एक जिम्मेदार भाई हैं. हम कल ही जा कर बच्ची को ले आएंगे. मैं उस का नाम ‘सवेरा’ रखूंगी क्योंकि वह हमारी जिंदगी में एक उजली भोर की तरह आई है.’’

समीर ने खुश हो कर रूना का माथा चूम लिया. उसे सुकून महसूस हुआ कि उस ने पापा से किया वादा पूरा किया. समीर और रूना के चेहरे आने वाली खुशी के खयाल से दमक रहे थे.

घर पर बनाएं टोमैटो सूप विद रोस्टेड आमंड

मौनसून का सीजन चल रहा है. ऐसे मौसम में गर्मा-गर्म  सूप पीने का मजा ही अलग है. आज हम आपको टोमैटो सूप विद रोस्टेड आमंड और प्रोबायोटिक योगर्ट की रेसिपी बताने जा रहे है तो देर किस बात की. घर पर बनाएं टोमैटो सूप विद रोस्टेड आमंड और प्रोबायोटिक योगर्ट.

1.टोमैटो सूप विद रोस्टेड आमंड

सामग्री

  1.  2 छोटे चम्मच औलिव औयल 
  2. 1 तेजपत्ता
  3.   2 प्याज कटे हुए 
  4.  6 टमाटर चकोर टुकड़ों में कटे हुए 
  5.  31/2 कप वैजिटेबल स्टौक
  6.   11/2 कप फुलक्रीम दूध 
  7.  थोड़ा सा कालीमिर्च पाउडर 
  8. थोड़े से भुने बादाम के टुकड़े 
  9.  थोड़ी सी क्रीम 
  10.  थोड़े से बेसिल के पत्ते 
  11.  नमक स्वादानुसार.

विधि

एक बड़े सौस पैन में औयल को मीडियम आंच पर गरम कर के उस में तेजपत्ता और प्याज डाल कर सुनहरा होने तक भूनें. फिर इस में टमाटर डाल कर 3-4 मिनट तक चलाते हुए इस में वैजिटेबल स्टौक डाल कर एक उबाल आने दें. फिर इसे हलकी आंच पर रख कर तब तक पकाएं जब तक सूप गाढ़ा न हो जाए. बीचबीच में चलाना न भूलें. फिर सूप को आंच से उतार कर थोड़ा ठंडा होने के लिए रख दें. अब इस में से तेजपत्ता निकाल कर इस में बादाम डाल कर इस की स्मूद प्यूरी बनाएं. फिर इसे पैन में डाल कर इस में दूधनमक और कालीमिर्च डाल कर चलाते हुए दोबारा गरम करें. ध्यान रखें सूप को उबालना नहीं है. फिर इसे सूप प्लेट में सर्व कर के ऊपर से क्रीम व बेसिल के पत्तों से गार्निश कर गरमगरम सर्व करें.

2. प्रोबायोटिक योगर्ट

सामग्री

  1.   200 मिलीलिटर हंग कर्ड 
  2.  200 मिलीलिटर फ्रैश क्रीम 
  3.  250 मिलीलिटर कंडैस्ड मिल्क
  4.  100 ग्राम अल्फांसो आम 
  5.  100 मिलीलिटर प्रोबायोटिक मिल्क.

विधि

एक बाउल में हंगकर्डकंडैंस्ड मिल्कक्रीम व प्रोबायोटिक मिल्क को मिला कर अच्छी तरह फेंटें. फिर इस में फ्लेवर के लिए मैंगो प्यूरी ऐड करें. अब इन्हें रमेकिंस बाउल्स में डाल कर ओवन में वाटर बाथ यानी हौट वाटर पैन में रख कर 160 डिग्री सैल्सियस पर 15 मिनट बेक करें. फिर मैंगो के टुकड़ों से गार्निश कर के ठंडाठंडा सर्र्व करें.                    

आम जनता के लिए नहीं हवाई यात्रा

इंडिगो और एअर इंडिया के 500-500 एअरक्राफ्ट खरीदने  के समाचार को देशभर में ढोल पीटपीट कर बताया जा रहा है मानों यह अचीवमैंट सरकार की हो. अगर देश में एअर टै्रफिक बढ़ रहा है तो यह साबित करता है कि ट्रेनें और रोड जर्नी अभी भी महंगी या टाइम लेने वाली है और जिस के पास पैसा है वह जैसेतैसे बाई एअर ही जाना चाहता है.

एअरपोर्ट और एअर जर्नी अब कोई लग्जरी नहीं रह गए हैं. ये इतने बड़े देश में जरूरी हो गए हैं.

अगर दिनों का सफर घंटों में पूरा हो जाए तो जो ऐक्स्ट्रा पैसा देना पड़ता है वह ज्यादा नहीं लगता. बड़े देश में लोग इधर से उधर तो जाएंगे ही और जैसेजैसे नौकरियों और व्यापार के नए अवसर अपने घर से दूर मिलेंगे लोग एअर सर्विस के कारण ज्यादा मोबाइल होंगे ही.

अब एअरलाइंस पूरी तरह निजी हाथों में हैं, सारे एअरक्राफ्ट निजी कंपनियों के पास हैं और एअरपोर्ट भी अब निजी ठेकेदारों के हाथों में हैं. पर निजी हाथों में जाने का मतलब यह नहीं है कि पैसेंजरों को कंपीटिशन का फायदा हो रहा है. हर एअरलाइंस जानती है कि अब कस्टमर उस के पास खुदबखुद आ रहा है और अब निजी एअरलाइंस की सेवाएं सरकारी एअरलाइंस की सेवाओं से ज्यादा घटिया होने लगी हैं.

सरकार ने कानून बना कर हर प्रोडक्ट की एक एमआरपी तय कर रखी है पर एअरलाइंस के टिकटों की कोई एमआरपी नहीं है. ये कंपनियां तांगे वालों से भी ज्यादा मोलभाव करती हैं पर यह भेदभाव एकतरफा होता है. कार्टेल बना कर यानी 4-5 एअरलाइंस मिल कर किसी भी सैक्टर को महंगा कर सकती हैं और दाम 20% से 100% तक बढ़ा लेती हैं. कम चलने वाले सैक्टरों को कैंसिल करना भी आम है.

अब एअरलाइंस का कोई फिक्स्ड टाइमटेबल भी नहीं है. एक एअरलाइंस एक सैक्टर पर 1 दिन में 5 उड़ानें भर सकती है तो दूसरे दिन 2 ही. चूंकि बुकिंग अब वैबसाइट पर होती है, आप को पता नहीं चलेगा कि कौन सी फ्लाइट कैंसिल की गई है.

500-500 एअरक्राफ्टों को खरीदनेका मतलब यह तो है कि ज्यादा लोग सफर बाई एअर करेंगे पर यह भी है कि उन्हें खाना भी महंगा खरीदना पड़ेगा और पीने का पानी भी. सिक्युरिटी के नाम पर पानी की बोतल न ले जाने देने का नियम होने पर पानी का व्यापार करने वाले चांदी काट रहे हैं. इसी तरह एअरपोर्टों पर या एअरक्राफ्टों में खाना बेहद महंगा है. ज्यादातर एअरक्राफ्ट इस असुविधा को कम नहीं करेंगे क्योंकि इस पर ग्राहकों का कोई दबाव है ही नहीं.

एअरपोर्ट बनाना और एअरलाइंस खड़ी करना तथा उस के लिए अनुमतियां लेना एक बड़ा मुश्किल काम है. सरकार की मिलीभगत है कि यह मुश्किल ही रहे ताकि केवल खास लोग ही सफर कर पाएं. ये खास लोग आमतौर पर शिकायत भी नहीं करते क्योंकि इन के पास समय नहीं होता और बरबाद करने के लिए पैसा होता है. जहां आम जनता और ज्यादा गरीब होती जा रही है, वहीं यह भारीभरकम अरबों डौलरों की डील की जाती है.

देश में अमीरगरीब का फासला जिस तेजी से बढ़ रहा है, वह एक नई वर्ण व्यवस्था और जाति व्यवस्था को जन्म दे रहा है. अब ऊंची कास्टों में एक बहुत अमीर और जरा से अमीरों की नई सबकास्ट पैदा होे गई है. वर्ण व्यवस्था के हिमायती जब इस 500-500 हवाईजहाजों की डील पर खुशी मना रहे हैं तो असल में इस की खुशी मना रहे हैं कि पौराणिक व्यवस्था मजबूत हो गई है.

Monsoon special: बारिश में न खाएं ये चीजें, नहीं तो हो जाएंगे मुंहासे

बरसात का मौसम चल रहा है. मौनसून सीजन बहुत ही सुहाना होता है बरसात के होने से ठंड़ा मौसम हो जाता है. इसके साथ ही मौनसून में काफी उमस होती है. मौनसून सीजन में कई स्किन समास्याएं उत्पन्न हो जाती है. इन दिनो आसानी से स्किन रैशेज, पिंपल्स, एक्ने या मुहांसे की समास्याएं होती है. इसी वजह से बरसात के मौसम में मुंहासों को रोकने के लिए आपको कुछ खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए. हम आपको यहां उन्हीं आहार के बारे में बताने जा रहे हैं जो मुंहासों का कारण बनते हैं.

  1. दही

दही सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है. गर्मियों में दही खाना अच्छा होता है. लेकिन बरसात के मौसम में दही खाना ठीक नहीं होता क्योंकि इससे एक्ने की समस्या हो सकती है. असल में दही के सेवन से पित्त-कफ में बढ़ोत्तरी हो सकती है, जो एक्ने का कारण हो सकते हैं.

2. चॉकलेट

मौनसून के समय चॉकलेट न खाएं क्योंकि चॉकलेट हमारी गो-टू स्वीट है! लेकिन यह आपके लिए चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि बहुत अधिक चॉकलेट खाने से मुंहासों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि चॉकलेट कोको, दूध और चीनी से भरी हुई हैं, जो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली में हस्तक्षेप कर सकती हैं और इस वजह से, पिंपल्स का कारण बन सकती हैं.

3. फास्ट फूड

वैसे तो फास्ट फूड खाना हेल्थ के लिए अच्छा नहीं होता है. लेकिन बरसात के समय फास्ट फूड नहीं खाना चाहिए इससे मुंहासों खतरा बढ़ जाता है. फास्ट फूड में फैट, रिफाइंड कार्ब्स और कैलोरी से भरे होते हैं. फास्ट फूड जैसे बर्गर, पिज्जा, नगेट्स, हॉट डॉग, मिल्कशेक, सोडा, आदि मुँहासे के विकास को बढ़ा सकते हैं. आंकड़ो के मुताबिक इन फास्ट फूड के सेवन से मुँहासे के विकास में 24% की वृद्धि हो सकती है.

4. कॉफी

कॉफी का सेवन ज्यादातर वर्किंग लोग करते हैं. कॉफी पीने से लोगों को लगता है कि वे एनर्जेटिक फील करते हैं और काम करने की क्षमता बेहतर होती है. वहीं, आयुर्वेद के अनुसार, ज्यादा मात्रा में कॉफी पीना सही नहीं होता है. इसमें हीटिंग प्रॉपर्टी होती है, जो कि पित्त को बढ़ाने का काम कर सकता है, जो एक्ने का कारण बन सकते हैं.

5. उड़द दाल

बरसात के समय में का उड़द दाल सेवन कम करना चाहिए. उड़द दाल के सेवन से पित्त कफ में बढ़ोत्तरी हो सकती है, जो कि एक्ने का मुख्य कारण हो सकता है. इसलिए, अगर आपको काफी ज्यादा एक्ने की प्रॉब्लम रहती है, तो बेहतर है कि इन दिनों उड़द की दाल का सेवन न करें.

Monsoon Special: 8 टिप्स- मौनसून में ऐसे हों लुक्स

मौनसून की बारिश यकीनन गरमी से राहत दिलाती है, मगर इस सीजन में परेशानियां भी कम नहीं होती हैं, जैसे जलभराव के कारण जाम में फंस जाना, बारिश में भीग जाना, कपड़ों पर दागधब्बे लग जाना आदि.

माना कि मौनसून की इन परेशानियों से बचा नहीं जा सकता, लेकिन इस सीजन के अनुकूल परिधान पहन कर परेशानियों को कम जरूर कर सकती हैं. पेश हैं, इस मौसम के कुछ ड्रैसिंग टिप्स

1.जींस और कौरडरौय को करें अवाइड

भले ही ये आप को कितने ही पसंद क्यों न हों, लेकिन इन्हें पहन कर आप बारिश में भीग गईं तो ये आप को खासी परेशानी दे सकते हैं. ये काफी मात्रा में पानी सोख लेते हैं और फिर जल्दी सूखते भी नहीं हैं. सूखने में कम से कम 1 दिन लग ही जाता है. फिर इतने ज्यादा भीगे कपड़े पहनने से न केवल आप असहज महसूस करेंगी, बल्कि ये आप के शरीर को नम भी कर सकते हैं. इतना ही नहीं फंगल एवं बैक्टीरियल संक्रमण से भी ग्रस्त कर सकते हैं.

2.चुनें शौर्ट एवं कैप्री

कैप्रीज, शौर्ट, स्कर्ट इस मौसम के लिए बैस्ट हैं. ये न केवल आप को कूल और आरामदायक रखेंगे, बल्कि बारिश में फंस जाएं तो असुविधा भी कम होगी. हां,यह सुनिश्चित कर लें कि कैप्री शरीर से चिपकने वाली यानी बहुत टाइट न हो. पर्याप्त ढीली हो, ताकि जल्दी सूख सके. शौर्ट भी ऐसा हो जिस पर रोड पर चलते समय छींटों के दाग न पड़ें.

3.चुनें गहरे और चमकीले रंगों की ट्यूनिक

मौनसून गहरे और चमकीले रंग पहनने का मौसम होता है. ट्यूनिक को पैरों में फ्लैट फ्लिप फ्लौप के साथ, लाइट लैगिंग या कैप्री के साथ स्टाइल किया जा सकता है. ऐसी ड्रैसिंग बेहद आरामदायक अनुभव देती है.

कुछ डार्क कलर जैसे नेवी ब्लू या डार्क ग्रीन को अपने वार्डरोब में शामिल कर के अपने आसपास के सुस्त, ग्रे क्लाउडी वातावरण में चमक ला सकते हैं.

4.ढीला और हलका टौप चुनें

रोजाना पहनने के लिए शौर्ट कुरती, रूमी टौप और अलकी टीशर्ट आम हैं. फैब्रिक भी हलका चुनें जैसे लायक्रा या पौलिएस्टर जो कि रिंकल फ्री भी होता है और कौटन के मुकाबले सूखता भी जल्दी है.

5.लाइट चैकर्ड फौर्मल लुक को कहें हां

इस सीजन में आरामदायक और हलकी हाफ स्लीव फौर्मल शर्ट चलन में होती है, जो औफिस लुक के लिए एकदम परफैक्ट है, जो औफिस में टीशर्ट नहीं पहन सकतीं, उन के लिए हाफ स्लीव फौर्मल शर्ट बेहतर विकल्प हो सकती है.

6.ट्रांसपैरेंट कपड़ों को कहें न

यदि आप ट्रांसपैरेंट टौप या कुरता पहनती हैं तो बारिश आप को शर्मिंदा कर सकती है. इसलिए ध्यान रखें, बारिश में हमेशा सौलिड और डार्क कलर के टौप का ही चुनाव करें. ऐसे कपड़े पहन कर आप बेफिक्र मौसम का लुत्फ भी उठा सकती हैं. सौलिड ड्रैस मैटीरियल पहनने का एक और प्लस प्वौइंट यह है कि अगर आप बारिश में भीग जाएं तो आप के कपड़े जल्दी सूख जाते हैं. फिर अंडरशर्ट पहनने की भी जरूरत नहीं रहती.

7.वार्डरोब में रखें कुछ हलकी विंडचीटर्स

आप को अपने बैग में हमेशा एक अल्ट्रा लाइट विंडचीटर ले जाने की सलाह दी जाती है. बारिश होने के दौरान आप इसे जल्दी से पहन सकती हैं और यह आप के कपड़ों को बूंदाबांदी के साथसाथ सड़क पर वाहनों के जरीए उड़ने वाले कीचड़ से भी बचाएगी. यदि आप को अचानक ठंड महसूस हो, तो यह आप को गरम भी रखेगी.

8.पहने आरामदायक और मजबूत फुटवियर

सड़क पर फिसलने या सड़क पर कीचड़ से बचने के लिए आरामदायक जूते पहनना बहुत जरूरी है. वाटरपू्रफ लैदर स्लिप ओन्स, फ्लोटर्स या स्नीकर्स इस सीजन के लिए बैस्ट हैं, क्योंकि ये आप को बारिश से सुरक्षित रखेंगे और जल्दी खराब भी नहीं होंगे, तो कुछ समय के लिए अपने फौर्मल शूज को कह दें बायबाय.

– मोनिका ओसवाल

ऐग्जीक्यूटिव डाइरैक्टर, मोंटे कार्ल

Monsoon Special: बारिश और एलर्जी

मौनसून में जरा सी भी लापरवाही ऐलर्जी और इन्फैक्शन से ग्रस्त कर सकती है. बरसात के शुरू होने के साथ ही ये बीमारियां काफी परेशान करने लगती हैं. इस के साथ ही त्वचा और आंखों से संबंधित रोग भी काफी परेशान करते हैं.

1.स्किन इन्फैक्शन

बरसात की शुरुआत होते ही हमारी त्वचा के लिए परेशानी बढ़ जाती है. चूंकि इस दौरान वातावरण में ह्यूमिडिटी बहुत ज्यादा होती है. ऐसे में बैक्टीरिया, वायरस, फंगस आदि काफी तेजी से ग्रो करते हैं और जैसे ही ये त्वचा के संपर्क में आते हैं, त्वचा को संक्रमित कर देते हैं. हालांकि इन दिनों त्वचा को अगर सब से ज्यादा किसी माइक्रोब से संक्रमित होने का डर होता है, तो वह है फंगस. बरसात के मौसम में सब से ज्यादा फंगस यानी फफूंद के कारण ही त्वचा संक्रमित होती है और कई प्रकार के स्किन डिजीज होने की संभावना बनी रहती है.

2.रैड पैचेज यानी लाल चकत्ते

फंगल इन्फैक्शन की वजह से त्वचा खासकर बगलें, पेट और जांघों के बीच के जोड़ और स्तनों पर गोल, लाल पपड़ीनुमा चकत्ते निकल आते हैं. इन में काफी खुजली होती है.

इस परेशानी से बचने के लिए बगल, ग्रोइन और शरीर में जहांजहां जोड़ हैं वहां ऐंटीफंगल पाउडर लगाएं ताकि पसीना और नमी एकत्रित न होने पाए. बारबार फंगल इन्फैक्शन होने पर मैडिकेटेड पाउडर का इस्तेमाल करें.

3.हीट रैशेज

इस मौसम में पसीना काफी आता है, जिस से त्वचा के छिद्र यानी स्किन पोर्स बंद हो जाते हैं. इस वजह से त्वचा पर लाल फुंसियां यानी घमौरियां निकल आती हैं. इन में काफी खुजली और जलन होती है.

प्रिकली हीट पाउडर लगाएं. ढीले और सूती कपड़े पहनें. त्वचा की साफसफाई का पूरा खयाल रखें. घमौरियों के होने पर कालामाइन लोशन का इस्तेमाल करें. इस से खुजली से राहत मिलेगी.

4.पैरों का इन्फैक्शन

फंगल इंफैक्शन के कारण पैरों की उंगलियां संक्रमित हो जाती हैं. असल में इस मौसम में नंगे पांव गीले फर्श पर चलने या देर तक पानी में पैरों के रहने के कारण वहां मौजूद फंगस उंगलियों को संक्रमित कर देता है.

इस संक्रमण की वजह से उंगलियां लाल हो कर सूज जाती हैं और उन में खुजली भी होती है. इस संक्रमण के होने पर रोगी को चलने में काफी तकलीफ होती है. इस संक्रमण के कारण कई बार अंगूठे के नाखून यानी टो नेल्स और दूसरे नाखून भी संक्रमित हो जाते हैं. इस संक्रमण के होने पर नाखून बदरंग और कमजोर हो कर अपनी चमक खो देते हैं.

फुट और नेल इन्फैक्शन से बचने के लिए गीली जमीन पर नंगे पैर न चलें. पैरों को ज्यादा देर तक गीला न रहने दें. गीले जूतेचप्पल पहनने से बचें. बहुत देर तक जूतेमोजे न पहने रखें, क्योंकि इस से पसीना निकलता है और वह सूख नहीं पाता है, जिस से फंगल इन्फैक्शन हो सकता है. इस मौसम में सैंडल्स और फ्लोटर्स ही पहनें. नाखूनों को समयसमय पर काटते रहें और उन की साफसफाई का विशेष ध्यान रखें. सूती मोजे पहनें.

5.साइट संक्रमण

मौनसून में आंखों को सब से ज्यादा तकलीफ साइट संक्रमण से ही होती है. इस संक्रमण के होने पर पलकों पर एक प्रकार का लंप यानी गांठ सी हो जाती है. इस की वजह से आंखों में काफी दर्द होता है. यह संक्रमण बैक्टीरिया द्वारा आंखों के संक्रमित होने के कारण होता है. गरम पानी में कपड़ा डुबो कर सेंकने और हर 2-3 घंटे पर आंखों की सफाई करने से रोगी को आराम मिलता है.

इस के अलावा इस मौसम में आंखों का लाल हो जाना. उन में जलनचुभन और खुजली होना आम बात है.

6.ऐथलीट फुट

यह बीमारी उन लोगों को होती है, जो काफी लंबे समय तक पानी में रहते हैं, खासकर गंदे पानी में. इस संक्रमण की शुरुआत अंगूठे से होती है. वहां की त्वचा सफेद या हरे रंग की हो जाती है. उस में बहुत ज्यादा खुजली होने लगती है. कई बार तो यहां की त्वचा से दुर्गंधयुक्त स्राव या पस भी निकलने लगता है.

इस संक्रमण से बचने के लिए पानी से निकलने के बाद पैरों को गरम पानी और साबुन से साफ करें. उस के बाद अच्छी तरह सुखाएं. बूट पहनने से बचें.

7.अस्थमा

मौनसून में हवा में परागकण और फंगस जैसे ऐलर्जन के मौजूद रहने के कारण अस्थमा की परेशानी बढ़ जाती है. मौनसून में अस्थमा के तेज होने के कई कारण होते हैं:

– गरज के साथ तेज बारिश के होने से इस मौसम में रोगी को अस्थमा के अटैक आने लगते हैं. चूंकि इस मौसम में तेज हवा चलती है इस कारण बड़ी मात्रा में फूलों के परागकण निकल कर हवा में फैल जाते हैं, जो सांस के साथ रोगी के शरीर में चले जाते हैं. नतीजा रोगी की परेशानी बढ़ जाती है.

– इस मौसम में ह्यूमिडिटी यानी आर्द्रता के बढ़ने से फंगल स्पोर्स या मोल्ड्स काफी तेजी से पनपते हैं. ये फंगस या मोल्ड्स दमे के रोगी के लिए बेहद स्ट्रौंग ऐलर्जन होते हैं. ऐसे में वातावरण में इन की वृद्धि अस्थमा रोगियों की परेशानी का सबब बन जाती है. यही कारण है कि इस मौसम में दमा के अटैक ज्यादा आते हैं.

– बरसात के कारण हवा में सल्फर डाइऔक्साइड और नाइट्रोजन औक्साइड की मात्रा में वृद्धि हो जाती है. फलतया वायु प्रदूषण के स्तर में वृद्धि हो जाती है. ये सल्फर डाइऔक्साइड और नाइट्रोजन औक्साइड दमे के रोगियों को सीधा प्रभावित करते हैं और परेशानी बढ़ा देते हैं.

– मौनसून के दौरान गाडि़यों के धुएं के कारण होने वाला वायु प्रदूषण आसानी से समाप्त नहीं होता. इस वजह से अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ जाता है.

– मौनसून के मौसम में कुत्ते, बिल्ली अकसर घर के अंदर ही रहते हैं, बाहर कम निकलते हैं. इस वजह से उन के बालों में रूसी की मात्रा बढ़ जाती है. यह रूसी भी अस्थमा रोगियों की परेशानी को बढ़ाती है.

– मौनसून के दौरान वायरल इन्फैक्शन में वृद्धि हो जाती है. इस वजह से भी रोगी में दमे के लक्षण उभर आते हैं.

 सावधानियां 

– इस दौरान नियमित रूप से दमा की दवा लेते रहें. जो गंभीर रूप से अस्थमा से पीडि़त हों वे अपने साथ इनहेलर के द्वारा ली जाने वाली दवा भी लेते रहें ताकि उन के वायुकोष में सूजन न हो.

– आर्द्रता यानी ह्यूमिडिटी और नम जगहों को समयसमय पर एअर आउट करें. डीह्यूमिडिफायर के माध्यम से ऐसी जगहों की आर्द्रता को 25 से 50% तक कम करें.

– जरूरत पड़ने पर एअर कंडीशन का प्रयोग करें.

– बाथरूम की नियमित सफाई करें और उन उत्पाद का इस्तेमाल करें, जो फफूंद को खत्म करते हों.

– भाप को बाहर निकालने के लिए ऐग्जौस्ट फैन का इस्तेमाल करें.

– इन दिनों इनडोर प्लांट्स को बैडरूम से बाहर रखें.

– बाहरी स्रोतों जैसे गीली पत्तियों, बाग की घास, कूड़े आदि से दूर रहें, क्योंकि वहां फफूंद होने का डर रहता है.

– फंगस को खत्म करने के लिए ब्लीच और डिटर्जैंट वाली क्लीनिंग सौल्यूशन का प्रयोग करें.

– जिस समय सब से ज्यादा परागकण हवा में फैले हों जैसे एकदम सुबह उस समय बाहर जाने से बचें.

– जब परागकण ज्यादा मात्रा में हवा में फैले हों उस समय खिड़कियां बंद रखें.

– रोएंदार तकिए और बिस्तर का इस्तेमाल न करें.

– सप्ताह में 1 बार गरम पानी से चादरों और तकियों के कवरों को साफ करें.

– महीने में 2 बार गरम पानी से घर के सारे परदों को साफ करें.

– इन दिनों कालीन न बिछाएं. अगर कालीन बिछा रखा है, तो उसे साफ करते समय मास्क का प्रयोग करें.

– इस बात का ध्यान रखें कि घर में धूल न जमने पाए. गीले कपड़े से लैंपशेड, खिड़कियों के शीशों को साफ करें.

8.आई इन्फैक्शन

इन दिनों हवा में मौजूद परागकण, धूलकण और दूसरे ऐलर्जन के कारण आंखें संक्रमित हो कर लाल हो जाती हैं. इसे ऐलर्जिक कंजक्टिवाइटिस कहते हैं. इस वजह से आंखों में सूजन आ जाती है. हालांकि इस कंजक्टिवाइटिस में आंखों से पानी नहीं निकलता है, लेकिन उन में खुजली बहुत ज्यादा होती है. इस परेशानी से बचने के लिए ऐलर्जन से बच कर रहें. समयसमय पर आंखों में आईड्रौप डालें.

सावधानी

– गंदे हाथों से आंखों को स्पर्श न करें.

-अगर आप को महसूस होता है कि आप को ऐलर्जिक कंजक्टिवाइटिस हो गया है, तो तुरंत साफ पानी से आंखों को धोएं और ठंडे पानी में पट्टी डुबो कर आंखों पर दबा कर रखें.

– अगर घर में किसी को कंजक्टिवाइटिस हुआ है, तो उसे ड्रौप डालने के बाद अपने हाथों को साफ पानी से धोएं.

– इन दिनों अपना तौलिया, साबुन, तकिया और दूसरी व्यक्तिगत चीजें किसी दूसरे के साथ शेयर न करें. ऐसा करना इसलिए जरूरी है, क्योंकि इन्फैक्शन हमेशा हाथों, कपड़ों आदि से फैलता है.

– इन दिनों कौंटैक्ट लैंस के इस्तेमाल से बचें.

– घर से बाहर निकलते समय धूप का चश्मा जरूर लगाएं.

– सड़क किनारे बिकने वाली चीजों को खाने से बचें.

– बाहर से आने के बाद अपने हाथों को साफ पानी से धोएं.

– बारबार आंखों को स्पर्श न करें.

– आंखों को पोंछने के लिए रूमाल या तौलिए के बजाय डिस्पोजेबल टिशू का इस्तेमाल करें.

– हाथों को समयसमय पर साफ पानी से धोते रहें.

– इन दिनों कौस्मैटिक्स का इस्तेमाल न करें.

– आंखों की साफसफाई का पूरा ध्यान रखें. उन्हें साफ और ठंडे पानी से धोएं.

– आंखों को दिन में 3-4 बार साफ करें.

– नाखूनों को समयसमय पर काटते रहें.

– अगर आंखों में चुभन महसूस हो रही है, तो रगड़ें नहीं वरना संक्रमण हो सकता है.

– परेशानी होने पर डाक्टर को दिखाएं

डा. पी के मल्होत्रा

सरोज सुपर स्पैश्यलिटी हौस्पिटल, नई दिल्ली

Anupama के खिलाफ हुई गुरु मां, क्या बच्चों को बनाएंगी निशाना?

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ जबसे टेलीकस्ट हुआ है तभी से दर्शकों का चाहेता सीरियल बन गया है. रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly) और गौरव खन्ना (Gaurav Khanna) स्टारर ‘अनुपमा’ में नए-नए ट्विस्ट और टर्न्स आते ही रहते है. शो के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि गुरु मां और मालती देवी अनुपमा से बदला लेने का प्लान तैयार किया है.

वनराज और बा को सता रहा है डर

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि लीला बा शाह हाउस में बैठी वनराज शाह से कहेगी- अब अनुपमा ने सही किया या गलत किया, लेकिन मालती देवी अब तो गलत ही करेगी. इस पर वनराज कहता है कि, अब मालती कुछ भी करें उसका सीधा असर हम पर ही पड़ेगा. वहीं कपाड़िया हाउस में अनुज अपने भाई से कहेगा चाहे कुछ भी हो जाए, मैं मालती देवी को अनु को एक बाल भी बंका करने नहीं दूंगा.

 

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मालती देवी ने पकड़ी कमजोरी

रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly) और गौरव खन्ना (Gaurav Khanna) स्टारर ‘अनुपमा’ में आगे देखने को मिलेगा कि मालती देवी गुरुकुल में बैठी है और अपने आप से कहेगी जिसे सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे. गुरु मां से मालती कहेगी कि, उसे लगता है कि मां होना उसकी सबसे बड़ी ताकत है. असल में वह सबसे बड़ी कमजोरी है. उसी कमजोरी पर मैं वार करुंगी. रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly) और गौरव खन्ना (Gaurav Khanna) स्टारर ‘अनुपमा’ में मनोरंजन यहीं खत्म नहीं होता अब यह देखना होगा कि, क्या मालती देवी अब छोटी अनु को निशाना बनाएंगी.

मालती का अगला कदम क्या होगा

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि, अनुपमा की ममता का फायदा उठाकर गुरु मां अपनी शिष्या को पराजित करेगी. इस मंगलवार को शो में दिखाया जाएगा कि वह माया की वजह से प्लेन मे बैठकर उतर गई थी. क्योंकि उसे माया की रूह दिखाई पड़ गई, जिसने उसे कहा उसकी बच्ची को उसकी जरुरत है.

Monsoon Skin care Tips: 10 ब्यूटी प्रोडक्ट जो आपकी किट में जरुर होने चाहिए

Monsoon सीजन अपने साथ खुशियां, सुहावना मौसम और ठंडी हवा लेकर आता है. चिलचिलाती गर्मी के बाद, मौनसून राहत तो देता है लेकिन इसके साथ नमी भी बढ़ जाती है जिससे त्वचा संबंधी कई समस्याएं हो जाती हैं. लेकिन, अपनी त्वचा की देखभाल और ब्यूटी रूटीन में कुछ सरल उपाय के साथ, आप बारिश के मौसम में भी अपनी त्वचा को स्वस्थ, चमकदार और पोषित रख सकते हैं.

जब मौनसून की बात आती है तो ऐसे मे ब्यूटी और स्किन केयर के लिए बेहतरीन प्रोडक्ट बहुत जरूरी है. आवश्यक है जो हमें इस मौसम में आने वाली कठिनाइयों, जैसे नमी, बारिश और संभावित स्किन प्रॉब्लम से निपटने में मदद करें. आज हम आपको इस लेख में बताएंगे 10 ब्यूटी प्रोडक्ट (10 Beauty Product) हैं जिन्हें आपको अपनी मानसून किट में शामिल करना चाहिए:

  1. स्पार्कलिंग फेस वॉश 

मौनसून के मौसम में चमकदार फेस वॉश का उपयोग करने से आपकी त्वचा को ताजगी और  सफाई मिल सकती है. स्पार्कलिंग फेस वॉश के इस्तेमाल से नमी की वजह से स्किन में जमा होने वाली अशुद्धियों, अतिरिक्त तेल और पसीने को हटाने में सहायता करती है. हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सभी प्रकार की त्वचा को स्पार्कलिंग  फेस वॉश से लाभ नहीं होगा, खासकर यदि आपकी त्वचा संवेदनशील (Senstive) या ड्राई  (Dry) है, तो एक सौम्य क्लींजर चुनें जो आपकी त्वचा के प्रकार के लिए उपयुक्त हो.

2. क्लींजर का इस्तेमाल करें

फेस की गंदगी, पसीना और अतिरिक्त तेल हटाने के लिए एक सौम क्लींजर उपयोग करें. एक्सपर्ट के मुताबिक हमेशा, ऐसे क्लींजर की तलाश करें जो आपकी त्वचा के लिए कोमल हो और कठोर तत्वों से मुक्त हो.

3. वाटरप्रूफ मस्कारा

बारिश या उमस के कारण दाग-धब्बे से बचने के लिए वॉटरप्रूफ मस्कारा का इस्तेमाल करें. यहां तक ​​कि अगर आप अपने आप को भारी बारिश में भी पाते हैं, तो भी आपकी पलके घनी बनी रहेंगी.

4. हाइड्रेटिंग लिप बाम

एक हाइड्रेटिंग लिप बाम आपके होठों को नमीयुक्त रखेगा. चूंकि मौनसून का मौसम शुष्क हो सकता है, इसलिए होंठों की उचित देखभाल करना महत्वपूर्ण है. ऐसे लिप बाम की तलाश करें जिसमें शिया बटर या नारियल तेल जैसे पौष्टिक तत्व हों.

5. वाटर बेस्ड मॉइस्चराइज़र

मौनसून के मौसम में, जब नमी का स्तर अधिक होता है, वाटर बेस्ड मॉइस्चराइज़र का उपयोग करना फायदेमंद हो सकता है. वाटर बेस्ड मॉइस्चराइज़र की बनावट हल्की होती है और यह त्वचा को ऑयली या भारीपन छोड़े बिना हाइड्रेट करता है.

6. लूज कॉम्पैक्ट पाउडर

बरसात के मौसम में क्रीम-आधारित उत्पाद के बजाय लूज़ कॉम्पैक्ट पाउडर लगाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है, खासकर यदि आप चमक को नियंत्रित करना चाहते हैं और साथ ही मैट फ़िनिश भी बनाए रखना चाहते हैं. तो लूज़ पाउडर तेल को सोखने और मेकअप को लंबे समय तक बनाए रखने की क्षमता के लिए जाना जाता है.

7. पेन आई लाइनर

मौनसून के मौसम के दौरान, लिक्विड आईलाइनर के बजाय पेन लाइनर का उपयोग करना एक बेस्ट विकल्प है क्योंकि उनके पास अधिक स्मज-प्रूफ और लंबे समय तक चलने वाला फॉर्मूला होता है. इसमें बोल्ड और लंबे समय तक टिकने वाले गुण होते है और ये बढ़िया ग्रिप देता है.

8. लाइटवेट मॉइस्चराइज़र

मौनसून के मौसम में भले ही उमस हो, फिर भी आपकी त्वचा को हाइड्रेटेड रखने की ज़रूरत होती है. एक नॉन-ऑयली, हल्का मॉइस्चराइज़र चुनें जो त्वचा पर भारीपन महसूस किए बिना पर्याप्त हाइड्रेशन प्रदान करता हो.

9. ऑयल फ्री सनस्क्रीन

मौसम चाहे जो भी हो, धूप से बचाव जरूरी है. अपनी त्वचा को यूवी किरणों से बचाने के लिए, ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एसपीएफ़ वाले नॉन-ऑयली सनस्क्रीन का उपयोग करें.

10. अपनी त्वचा को विटामिन सी प्रदान करें

एक्सफ़ोलीएटिंग चमकदार त्वचा पाने का एक शानदार तरीका है, आप हर दिन अपना चेहरा साफ़ नहीं कर सकते. इसलिए अपने फेस को चमक प्रदान करने के लिए,  सुबह और रात की त्वचा देखभाल  में विटामिन सी सीरम जोड़ें.  चेहरे पर विटामिन सी सीरम का उपयोग करने से आपका चेहरा चमकदार दिखेगा.

बिजी शेड्यूल की वजह से अपनी स्किन की तरफ ध्यान नहीं दे पा रही हूं, क्या करूं?

सवाल

मेरी उम्र 45 वर्ष है. 1 महीने बाद मेरे बेटे की शादी है. काम की व्यवस्तता के कारण अपनी ओर कम ही ध्यान दे पा रही हूं. मैं जानना चाहती हूं कि मुझे फेशियल कितने दिन पहले कराना चाहिए? मेरे बाल भी हलकेहलके सफेद हो रहे हैं. मुझे उस दिन कैसा हेयरस्टाइल बनाना चाहिए?

आप को अपने बेटे की शादी से 3-4 दिन पहले फेशियल कराना चाहिए. किसी प्रोफैशनल सैलून में जा कर बालों पर ब्रैंडेड हेयर कलर करा सकती हैं या फिर सफेद बालों को छिपाने के लिए हिना का इस्तेमाल कर सकती हैं. किसी अच्छे पार्लर में जा कर आप अपने चेहरे और बालों की लंबाई के मुताबिक हेयरस्टाइल बनवा सकती हैं.

हर कोई खूबसूरत दिखना चाहता है लेकिन आजकल की भागदौड़ भरी लाइफ में यह आसान काम नही है. हाल ही किए गए एक सर्वे के मुताबिक एक औफिस जाने वाली महिला मेकअप के लिए 55 मिनट देती है. इसीलिए अपनी खूबसूरती को निखारने के लिए और अपने डेली रूटीन को बदलने के लिए इन टिप्स को जरूर फौलो करें…

1. रात को कर लें प्लानिंग…

रात को ही सुबह की प्लानिंग करते हुए अपने सामान को व्यस्थित रखें, इससे सुबह आप को फैसला लेने में कम वक्त के साथ सामान ढूंढ़ने में भी समय नही लगेगा.

2. बालों के लिए माइक्रोफाइबर टौवेल का इस्तेमाल…

रोजाना इस्तेमाल होने वाले टौवेल के मुकाबले माइक्रोफाइबर टौवेल ज्यादा जल्दी पानी सोखता है. यह न केवल आप के ड्रायर से बाल सुखाने का समय आधा करता है, बल्कि आप के बालों को लगने वाली गरमी की मात्रा भी कम करता है.

3. बीबी या सीसी क्रीम…

रोजाना इस्तेमाल होने वाली बीबी या सीसी क्रीम में एसपीएफ होता है. यह आप की त्वचा को नमी देने के साथ कोमल बनाती है. साथ ही धूप से बचाते हुए चमकदार बनाती है. इसे लगाने के बाद आप को कंसीलर, फाउंडेशन, मौइस्चराइजर और सनस्क्रीन लगाने की जरूरत नही पड़ती है.

जिंदगी की उजली भोर: भाग 1- रूना को जब पता चला समीर का राज?

समीर को बाहर गए 4 दिन हो गए थे. वैसे यह कोई नई बात न थी. वह अकसर टूर पर बाहर जाता था. रूना तनहा रहने की आदी थी. फ्लैट्स के रिहायशी जीवन में सब से बड़ा फायदा यही है कि अकेले रहते हुए भी अकेलेपन का एहसास नहीं होता.

कल शाम रूना की प्यारी सहेली सीमा आई थी. वह एक कंपनी में जौब करती है. उस से देर तक बातें होती रहीं. समीर का जिक्र आने पर रूना ने कहा कि वह मुंबई गया है, कल आ जाएगा.

‘मुंबई’ शब्द सुनते ही सीमा कुछ उलझन में नजर आने लगी और एकदम चुप हो गई. रूना के बहुत पूछने पर वह बोली, ‘‘रूना, तुम मेरी छोटी बहन की तरह हो. मैं तुम से कुछ छिपाऊंगी नहीं. कल मैं बड़ौदा गई थी. मैं एक शौपिंग मौल में थी. ग्राउंडफ्लोर पर समीर के साथ एक खूबसूरत औरत को देख कर चौंक पड़ी. दोनों हंसतेमुसकराते शौपिंग कर रहे थे. क्योंकि तुम ने बताया कि वह मुंबई गया है, इसलिए हैरान रह गई.’’

यह सुन कर रूना एकदम परेशान हो गई क्योंकि समीर ने उस से मुंबई जाने की ही बात कही थी और रोज ही मोबाइल पर बात होती थी. अगर उस का प्रोग्राम बदला था तो वह उसे फोन पर बता सकता था.

सीमा ने उस का उदास चेहरा देख कर उसे तसल्ली दी, ‘‘रूना, परेशान न हो, शायद कोई वजह होगी. अभी समीर से कुछ न कहना. कहीं बात बिगड़ न जाए. रिश्ते शीशे की तरह नाजुक होते हैं, जरा सी चोट से दरक जाते हैं. कुछ इंतजार करो.’’

रूना का दिल जैसे डूब रहा था, समीर ने झूठ क्यों बोला? वह तो उस से बहुत प्यार करता था, उस का बहुत खयाल रखता था. आज सीमा की बात सुन के वह अतीत में खो गई…

मातापिता की मौत उस के बचपन में ही हो गई थी. चाचाचाची ने उसे पाला. उन के बच्चों के साथ वह बड़ी हुई. यों तो चाची का व्यवहार बुरा न था पर उन्हें एक अनचाहे बोझ का एहसास जरूर था. समीर ने उसे किसी शादी में देखा था. कुछ दिनों के बाद उस के चाचा के किसी दोस्त के जरिए उस के लिए रिश्ता आया. ज्यादा छानबीन करने की न किसी को फुरसत थी न जरूरत समझी. सब से बड़ी बात यह थी कि समीर सीधीसादी बिना किसी दहेज के शादी करना चाहता था.

चाची ने शादी 1 महीने के अंदर ही कर दी. चाचा ने अपनी बिसात के मुताबिक थोड़ा जेवर भी दिया. बरात में 10-15 लोग थे. समीर के पापा, एक रिश्ते की बूआ, उन का बेटाबहू और कुछ दोस्त.

वह ब्याह कर समीर के गांव गई. वहां एक छोटा सा कार्यक्रम हुआ. उस में रिश्तेदार व गांव के कुछ लोग शामिल हुए. बूआ वगैरह दूसरे दिन चली गईं. घर में पापा और एक पुराना नौकर बाबू था. घर में अजब सा सन्नाटा, जैसे सब लोग रुकेरुके हों, ऊपरी दिल से मिल रहे हों. वैसे, बूआ ने बहुत खयाल रखा, तोहफे में कंगन दिए पर अनकहा संकोच था. ऐसा लगता था जैसे कोई अनचाही घटना घट गई हो. पापा शानदार पर्सनैलिटी वाले, स्मार्ट मगर कम बोलने वाले थे.

उस से वे बहुत स्नेह से मिले. उसे लगा शायद गांव और घर का माहौल ही कुछ ऐसा है कि सभी अपनेअपने दायरों में बंद हैं, कोई किसी से खुलता नहीं. एक हफ्ता वहां रह कर वे दोनों अहमदाबाद आ गए. यहां आते ही उस की सारी शिकायतें दूर हो गईं. समीर खूब हंसताबोलता, छुट्टी के दिन घुमाने ले जाता. अकसर शाम का खाना वे बाहर ही खा लेते. वह उस की छोटीछोटी बातों का खयाल रखता. एक ही दुख था कि उस का मायका नाममात्र था, ससुराल भी ऐसी ही मिली जहां सिवा पापा के कोई न था. शादी को 1 साल से ज्यादा हो गया था पर वह  3 बार ही गांव जा सकी. 2 बार पापा अहमदाबाद आ कर रह कर गए.

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