जिंदगी की उजली भोर: भाग 3- रूना को जब पता चला समीर का राज?

इस से आगे रूना से सुना नहीं गया. वह लौटी और बिस्तर पर औंधेमुंह जा पड़ी. तकिए में मुंह छिपा कर वह बेआवाज घंटों रोती रही. आखिरी वाक्य ने तो उस का विश्वास ही हिला दिया. समीर ने कहा था, ‘परसों मैं होटल पैरामाउंट में आप से मिलता हूं. वहीं हम आगे की सारी बातें तय कर लेंगे.’

यह जिंदगी का कैसा मोड़ था? हर तरफ अंधेरा और बरबादी. अब क्या होगा? वह लौट कर चाचा के पास भी नहीं जा सकती. न ही इतनी पढ़ीलिखी थी कि वह नौकरी कर लेती और न ही इतनी बहादुर कि अकेले जिंदगी गुजार लेती. उस का हर रास्ता एक अंधी गली की तरह बंद था.

एक दिन पापा की तबीयत खराब होने का फोन आया. दोनों आननफानन गांव पहुंचे. पापा बहुत कमजोर हो गए थे. गांव का डाक्टर उन का इलाज कर रहा था. उन्हें दिल की बीमारी थी. समीर ने तय किया कि दूसरे दिन उन्हें अहमदाबाद ले जाएंगे. अहमदाबाद के डाक्टर से टाइम भी ले लिया. दिनभर दोनों पापा के साथ रहे, हलकीफुलकी बातें करते रहे.

उन की तबीयत काफी अच्छी रही. रूना ने मजेदार परहेजी खाना बनाया. रात को समीर सोने चला गया. रूना पापा के पास बैठी उन से बातें कर रही थी कि एकाएक उन्हें घबराहट होने लगी. सीने में दर्द भी होने लगा. उस का हाथ थाम कर उन्होंने कातर स्वर में कहा, ‘बेटी, जो हमारे सामने होता है वही सच नहीं होता और जो छिपा है उस की भी वजह होती है. मैं तुम से…’ फिर उन की आवाज लड़खड़ाने लगी. उस ने जोर से समीर को आवाज दी, वह दौड़ा आया, दवा दी, उन का सीना सहलाने लगा. फिर उस ने डाक्टर को फोन कर दिया. पापा थोड़ा संभले, धीरेधीरे समीर से कहने लगे, ‘बेटा, सारी जिम्मेदारियां अच्छे से निभाना और तुम मुझे…मुझे…’

बस, उस के बाद वे हमेशा के लिए चुप हो गए. डाक्टर ने आ कर मौत की पुष्टि कर दी. समीर ने बड़े धैर्य से यह गम सहा और सुबह उन के आखिरी सफर की तैयारी शुरू कर दी. बूआ, बेटाबहू के साथ आ गईं. कुछ रिश्तेदार भी आ गए. गांव के लोग भी थे. शाम को पापा को दफना दिया गया. 2 दिन बाद बूआ और रिश्तेदार चले गए. गांव के लोग मौकेमौके से आ जाते. 10 दिन बाद वे दोनों लौट आए.

वक्त गुजरने लगा. अब समीर पहले से ज्यादा उस का खयाल रखता. कभी

चाचाचाची का जिक्र होता तो वह उदास हो जाती. ज्यादा न पढ़ सकने का दुख उसे हमेशा सताता रहता. लेकिन समीर उसे हमेशा समझाता व दिलासा देता. जब कभी वह उस के मांपापा के बारे में जानना चाहती, वह बात बदल देता. बस यह पता चला कि समीर अपने मांबाप की इकलौती औलाद है. 3 साल पहले मां बीमारी से चल बसीं. पढ़ाई अहमदाबाद में और उसे यहीं नौकरी मिल गई. शादी के बाद फ्लैट ले कर यहीं सैट हो गया.

रूना को ज्यादा कुरेदने की आदत न थी. जिंदगी खुशीखुशी बीत रही थी. कभीकभी उसे बच्चे की किलकारी की कमी खलती. वह अकसर सोचती, काश उस के जल्द बच्चा हो जाए तो उस का अकेलापन दूर हो जाएगा. उस की प्यार की तरसी हुई जिंदगी में बच्चा एक खुशी ले कर आएगा. उम्मीद की डोर थामे अपनेआप में मगन, वह इस खुशी का इंतजार कर रही थी.

सीमा ने जो कल बताया कि समीर किसी खूबसूरत औरत के साथ खुशीखुशी शौपिंग कर रहा था, मुंबई के बजाय बड़ौदा में था, उस का सारा सुखचैन एक डर में बदल गया कि कहीं समीर उस खूबसूरत औरत के चक्कर में तो नहीं पड़ गया है. उसे यकीन न था कि समीर जैसा चाहने वाला शौहर ऐसा कर सकता है. सीमा ने उसे समझाया था, अभी कुछ न कहे जब तक परदा रहता है, मर्द घबराता है. बात खुलते ही वह शेर बन जाता है.

समीर दूसरे दिन लौट आया. वही प्यार, वही अपनापन. रूना का उतरा हुआ

चेहरा देख कर वह परेशान हो गया. रूना ने सिरदर्द का बहाना बना कर टाला. रूना बारीकी से समीर की हरकतें देखती पर कहीं कोई बदलाव नहीं. उसे लगता कि समीर की चाहत उजली चांदनी की तरह पाक है, पर ये अंदेशे? बहरहाल, यों ही 1 माह गुजर गया.

एक दिन रात में पता नहीं किस वजह से रूना की आंख खुल गई. समीर बिस्तर पर न था. बालकनी में आहट महसूस हुई. वह चुपचाप परदे के पीछे खड़ी हो गई. वह मोबाइल पर बातें कर रहा था, इधर रूना के कानों में जैसे पिघला सीसा उतर रहा था, ‘आप परेशान न हों, मैं हर हाल में आप के साथ हूं. आप कतई परेशान न हों, यह मेरी जिम्मेदारी है. आप बेहिचक आगे बढ़ें, एक खूबसूरत भविष्य आप की राह देख रहा है. मैं हर अड़चन दूर करूंगा.’

मेरी सास को ब्रेस्ट कैंसर है, ऐसे में इम्यूनो थेरैपी कराना कितना सही होगा?

सवाल

मेरी सास को स्तन कैंसर है. क्या उन के लिए इम्यूनो थेरैपी से उपचार कराना ठीक रहेगा?

जवाब

कैंसर के उपचार के लिए कई थेरैपियां उपलब्ध हैं. इन का चयन इस आधार पर किया जाता है कि कैंसर कौन से चरण में हैमरीज का संपूर्ण स्वास्थ्य कैसा है और उस की उम्र कितनी है. जिन मरीजों की उम्र 75 से 80 वर्ष हैकीमोथेरैपी और रेडिएशन थेरैपी के साइड इफैक्ट्स को देखते हुए टारगेटेड थेरैपी और इम्यून थेरैपी से उपचार करने का प्रयास किया जाता है.

बायोलौजिकल या इम्यूनो थेरैपी कैंसर के एडवांस ट्रीटमैंट में अपना एक अलग ही महत्त्व रखती है. इस में कैंसर से ग्रस्त कोशिकाओं को मारने के लिए इम्यून तंत्र को स्टिम्युलेट किया जाता है. इस उपचार में मोनोक्लोनल ऐंटीबौडीजचैकपौइंट इनहिबिटर्सकैंसर वैक्सीनसाइटोकिन्स ट्रीटमैंट के द्वारा मरीज को ठीक किया जाता है.

ये भी पढ़ें…

मेरे पति स्मोकिंग करते हैं. उन के फेफड़ों की स्थिति को देखते हुए डाक्टर ने उन्हें स्मोकिंग पूरी तरह बंद करने का सुझाव दिया है. क्या इस कारण मेरे और परिवार के दूसरे सदस्यों के लिए भी फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ जाएगा?

जवाब

विश्वभर में धूम्रपान को फेफड़ों के कैंसर का सब से बड़ा रिस्क फैक्टर माना जाता है. आप धूम्रपान नहीं करतीं लेकिन अपने पति के कारण आप पैसिव स्मोकर तो हैं ही. ऐसे में आप के लिए फेफड़ों के कैंसर का खतरा सामान्य लोगों से अधिक है. आप अपने पति को धूम्रपान पूरी तरह बंद करने के लिए सम?ाएं. यह न केवल उन के लिए बल्कि आप और आप के परिवार के लिए भी अच्छा रहेगा. स्मोकिंग और सैकंड हैंड या पैसिव स्मोकिंग केवल फेफड़ों के कैंसर का ही खतरा नहीं बढ़ाता बल्कि श्वासमार्गमुख गुहाआहार नालअग्नाशयपेटआंतमलाशयमूत्राशयकिडनी जैसे 12 प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ाता है.

-डा. देनी गुप्ता

सीनियर कंसल्टैंटमैडिकल औंकोलौजीधर्मशिला नारायणा सुपर स्पैश्यलिटी हौस्पिटलदिल्ली   

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभाई-8रानी झांसी मार्गनई दिल्ली-110055.

व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.  

गठबंधन: भाग 1-क्यों छिन गया कावेरी से ससुराल का प्यार

‘‘बसइस घर के सामने ही,’’ कावेरी के निर्देश पर ड्राइवर ने कैब रोक दी. टैक्सी से उतर कर बैग कंधे पर लटकाए लंबेलंबे डग भरती हुई वह गेट खोल कर दरवाजे के सामने जा खड़ी हुई, ‘कुछ दिन पापा के साथ बिता लूं, फिर सब दुखदर्द भूल जाने की नई सी उमंग ले कर ही वापस लौटूंगी,’ सोचते हुए कावेरी ने एक नकली मुसकान चेहरे पर चिपका डोरबैल बजा दी.

‘‘अरे वाह कावेरी, आओआओ,’’ अचानक बेटी को आया देख सुधांशु का चेहरा खिल उठा.

‘‘पापा, कैसा लगा मेरा सरप्राइज?’’ सुधांशु से मिलते ही कावेरी की कृत्रिम मुसकान खनकती हंसी में बदल गई. कमरे में पैर फैला कर सोफे पर पीठ टिका कर वह आराम से बैठ गई.

‘‘थक गई शायद? मैं अभी तुम्हारी पसंदीदा दालचीनी वाली चाय बना कर लाता हूं,’’ कह सुधांशु किचन में चले गए.

‘‘आप क्यों? निर्मला नहीं आई क्या आज काम पर?’’ कावेरी सुधांशु के पास जा कर खड़ी हो गई.

‘‘बेटा, एक जरूरी काम के सिलसिले में आज जयपुर के लिए निकलना था मु झे. निर्मला तो इसलिए जल्दी काम निबटा कर चली गई. वैसे मैं सोच रहा हूं कि फ्लाइट की टिकट कैंसिल करवा दूं अब.’’

‘‘पापा, आप चले जाइए. जल्दी वापस आ जाएंगे न? मैं तो अभी कुछ दिन यहीं रहूंगी,’’ कावेरी प्रसन्न दिखने का पूरा प्रयास कर रही थी.

‘‘मैं 2 दिन में लौट आऊंगा. इस बार उदित नाराज नहीं हुआ तुम्हारे कुछ दिन यहां बिताने पर? दिल्ली में हो तो भी बस सुबह आ कर शाम को चली जाती हो वापस. एक दिन भी कहां रहने देता है वह तुम्हें मायके में,’’ सुधांशु के मन में अपने दामाद के प्रति छिपी शिकायत शब्दों में छलक रही थी.

‘‘औफिस के काम से आज ही उदित सिडनी गए हैं, इसलिए आप के साथ कुछ दिन रहने का प्रोग्राम बना लिया मैं ने.’’

‘‘गुड,’’ सुधांशु के चेहरे पर एक लंबी रेखा खिंच गई.

कावेरी भी मुसकरा दी और फिर ड्राइंगरूम में रखे बैग को अपने कमरे में ले जा कर सामान निकाल अलमारी में लगाने लगी.

सुधांशु के साथ बातचीत कर कावेरी का मन हलका हो गया, लेकिन अपने पापा के जाते ही उसे उदासी ने घेर लिया. मस्तिष्क में विचारों की उल झन निराशा को और भी बढ़ा रही थी. शून्य में ताकती वह अपनेआप से ही बातें करने लगी, ‘कितना अपनापन है यहां. दीवारें भी जैसे अनुराग बसाए हैं अपने भीतर. घर के एकमात्र सदस्य पापा तो जैसे स्नेह का पर्याय ही हैं.

‘मम्मी के दुनिया छोड़ कर चले जाने के बाद सालों से मम्मी की भूमिका निभाते हुए अपनी ममता की छांव तले धूप सदृश्य चिंताओं से बचाते आए हैं वे. मैं अकेली संतान हूं तो क्या? सभी नाते मिल कर भी जितना प्रेम नहीं बरसा पाते, जितना पापा ने अकेले ही मु झ पर बरसा दिया. और वहां… कैसे कह दूं कि ससुराल ही अब घर है मेरा? सासूमां के रूप में खोई हुई मां मिल जाएंगी, यही आशा थी मेरी. ससुरजी से पापा जैसा स्नेह चाहा था. लेकिन चाहने मात्र से ही तो सब संभव नहीं होता, फिर और किसी को क्या दोष दूं जब जीवनसाथी ही अनमना सा रहता है मु झ से.

‘विवाह के 3 वर्ष बीत जाने पर भी प्यार और अपनेपन को तरस रही हूं मैं. आशा थी कि कोई नन्ही जान आएगी तो नए रंग भर देगी जीवन में. क्या मैं कम दुखी हूं मां न बन पाने पर कि सभी मु झे किसी अपराधी सा सिद्ध करने में लगे हैं.’

कावेरी एक बार फिर सब याद कर खिन्न हो उठी. विवाह होते ही उसे नौकरी से त्यागपत्र देना पड़ा था. सारा दिन अकेले घर के काम में पिसती हुई वह 2 बोल प्रेम के सुनने को तरस जाती थी. पति उदित अपनी ही दुनिया में खोया रहता. रात में कुछ हसीन लमहों की चाह में वह उदित के करीब जाती तो उस का रवैया ऐसा होता जैसे एहसान कर रहा हो उस पर.

कावेरी को किसी नन्ही आहट की प्रतीक्षा करते हुए 3 वर्ष बीत गए, लेकिन उस की गोद सूनी ही थी. उदित का मनुहार कर एक दिन उसे साथ ले कर वह क्लीनिक चली गईं. वहां डाक्टर ने कावेरी व उदित दोनों के लिए कुछ टैस्ट लिख दिए.

उस रात उदित औनलाइन हुई रिपोर्ट्स देख रहा था और वह बिस्तर पर लेटे हुए उदित की आतुरता से प्रतीक्षा कर रही थी. लैपटौप शटडाउन कर लटका हुआ चेहरा लिए वह आ कर बोला, ‘‘रिपोर्ट्स देख ली हैं. कहा था तुम्हें पहले ही, पर तुम ही जिद पकड़े बैठी थीं कि टैस्ट करवाना है. अब साफ हो चुका है कि तुम्हारे सिस्टम में कुछ कमी है, इसलिए मां नहीं बन पाओगी कभी.’’

कावेरी की रुलाई फूट पड़ी थी. अपने को संयत कर हिम्मत जुटा बोली, ‘‘आप कल प्रिंट निकलवा लेना रिपोर्ट का. ऐसी समस्याओं से कई औरतें 2-4 होती हैं. इलाज तो होता ही होगा कोई न कोई. हम कल ही डाक्टर के पास चलेंगे.’’

‘‘कोई जरूरत नहीं तुम्हें अब अपनी इस कमी का तमाशा बनवाने की. कोई पूछेगा तो कह देंगे कि अभी नहीं चाहते परिवार बढ़ाना. आज के बाद इस बारे में कोई बात नहीं होगी’’ किसी तानाशाह सा आदेश दे उदित मुंह फेर कर लेट गया.

तिरस्कृत हो कावेरी बस आंसू बहा कर रह गई थी. उदित ने अगले दिन अपनी मां को रिपोर्ट के बारे बताया. बस फिर क्या था? आतेजाते ताने कसने देने शुरू कर दिए उन्होंने. ससुरजी उदित को बारबार याद दिलाना नहीं भूलते थे कि उन के रिश्ते के एक भाई ने अपनी बहू के मां न बन पाने की स्थिति में अपने इकलौते बेटे को तलाक दिलवा कर उस का दूसरा विवाह करवा दिया था.

उपेक्षा और प्रताड़ना के अंधेरे से घिरी एक तंग सी गली में स्वयं को पा कर कावेरी बिलकुल अकेली हो गई थी. उदित अकसर डपट देता कि मुंह फुला कर क्यों रहती हो हमेशा? कम से कम मेरे सामने तो मनहूस सा चेहरा लिए न आया करो.

पिछले दिन के अपमान का दंश भी अब तक मर्माहत कर रहा था कावेरी  को. मेरठ से उदित की बूआजी मिलने आई थीं. कावेरी ने हमेशा की तरह अभिवादन कर आदर व्यक्त किया.

उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में कावेरी को गोद भर जाने का आशीर्वाद दिया तो पास खड़ी कावेरी की सासूमां तपाक से बोल उठीं, ‘‘सपने देखने बंद कर दो जीजी अब. यह सुख हमारे हिस्से में कहां? बस अब तो हमारा आंगन बच्चे की किलकारियों के लिए तरसता ही रहेगा सदा.’’

यह सुन बूआजी आंखें फाड़ मुंह बिचकाते हुए बोलीं, ‘‘अरेअरे, यह क्या कह रही हो? कावेरी की सूरत देख कर तो नहीं लगता कि इसे कोई अफसोस है अपने इस अधूरेपन पर. औरत का सारा बनावसिंगार बेकार है अगर एक संतान भी न दे सके परिवार को.’’

‘‘क्या करें अब? यह बां झ लिखी थी लड़के की हिस्से में. जी जलता रहेगा अब तो सदा यों ही हमारा.’’

जहर बु झे तीर से शब्दों का वार असहनीय हो गया और कावेरी चुपचाप वहां से चली गई. अपमान और दुख से विचलित हो रात में उस ने उदित को ये सब बताया तो उदित उलटा उस पर बरसने लगा, ‘‘किसकिस का मुंह बंद करोगी? कुछ गलत तो नहीं कहा मां या बूआजी ने. जानती हो न कि कल 8 बजे की फ्लाइट से मु झे सिडनी जाना है. सोचा था जाने से पहले तुम्हें खुश कर दूंगा, लेकिन सारा मूड औफ कर दिया तुम ने. लाइट बंद कर सो जाओ अब.’’

‘‘मैं भी कल पापा के पास जाना चाहती हूं. उन की तबीयत ठीक नहीं है, आज ही फोन पर बताया था उन्होंने,’’ पहली बार कावेरी ने उदित से  झूठ बोला था.

पापा के फोन का बहाना बना कर आज वह मायके आ गई थी. बचपन में जब कोई बात उसे विचलित करती थी तो पापा के थपकी दे कर सुलाते ही सारा तनाव छूमंतर हो जाता था. उसी थपकी की चाह में कुछ दिन पापा के साथ बिताने आई थी वह.

एअरपोर्ट पहुंच सुधांशु ने मैसेज भेजा तो नोटिफिकेशन टोन सुन  कावेरी की सोच पर विराम लग गया. मैसेज पढ़ने के बाद किचन में जा कर वह अपने लिए नूडल्स बना लाई और वापस कमरे में आ टीवी औन कर बैठ गई. किसी फिल्म में विवाह का दृश्य चल रहा था. गठबंधन की रीत दर्शाए जाने के उपक्रम में वर के कंधे पर लटके पटुका में सिक्का, दूर्वा, चावल, हलदी व फूल रख एक गांठ लगा कर उसे वधू के दुपट्टे से बांधा जा रहा था.

Monsoon Special: मौनसून में ऐसे चुनें सही फुटवियर्स

फुटवियर मौसम के हिसाब से पहनना चाहिए. इसी बात को ध्यान में रखते हुए हम आप को मौनसून के फैशन फुटवियर के बारे में बता रहे हैं. जी हां, जब सर्दी और गरमी में फुटवियर फैशन में बदलाव होता है, तो भला बरसात में क्यों नहीं? मौनसून सीजन में बाजार में फुटवियर के ढेरों विकल्प मिल जाएंगे, जो बरसात में भी आप के स्टाइल में चार चांद लगा देंगे.

1. रेन बूट्स और प्लास्टिक चप्पलों को करें ट्राई

फुटवियर डिजाइनर रेखा कपूर का कहना है कि बाजार रंगीन फ्लिप फ्लौप, फ्लोटर, रेन बूट्स और प्लास्टिक चप्पलों से भरा पड़ा है. ये लाल, नीले, पीले, हरे सभी रंगों में उपलब्ध हैं. इस के अलावा फ्लौवर प्रिंट्स व अन्य आकर्षक डिजाइनों में भी ये मिल जाएंगे, जो आप को एकदम फंकी और हैपनिंग लुक देंगे और आप मौनसून सीजन में एकदम हट कर दिखेंगी.

2. ऐसे चुनें मौनसून के लिए राइट फुटवियर्स

बरसात के दिनों में फुटवियर का चुनाव बहुत सोच-समझ कर करना चाहिए. इन दिनों जूते बिलकुल नहीं पहनने चाहिए, क्योंकि बरसात के दिनों में जूतों के गीले होने पर फंगल इन्फैक्शन होने का खतरा अधिक रहता है. ऐसे में इस मौसम में प्लास्टिक की चप्पलें आदि पहनना ही पैरों के लिए सुरक्षित रहता है.

3. मौनसून में ट्राई करें बैकलैस शूज

दिल्ली के कनाट प्लेस में फुटवियर की दुकान चला रहे महेंद्र बताते हैं कि आजकल म्यूल्स भी काफी इन हैं, जो एक तरह से बैकलैस शूज होते हैं. ये फ्लिप फ्लौप का स्टाइलिश विकल्प हैं. इन्हें पहनना और उतारना भी बेहद आसान है. इन की कीमत क्व150 से क्व200 के बीच है, जो युवाओं की जेब पर अधिक भारी नहीं पड़ती है.

4. जूतों की देखभाल करना न भूलें

एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौनसून में प्लास्टिक के जूतेचप्पलों की सेल अधिक होती है और इस बार गम बूट्स का खास कलैक्शन बाजार में उपलब्ध है. बारिश के मौसम में जूतेचप्पलों को संभाल कर रखने पर भी अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है.

5. प्लास्टिक सैंडल भी मौनसून में हैं बेस्ट

प्लास्टिक के जूते या सैंडल गंदे होने पर आसानी से ब्रश से साफ किए जा सकते हैं.

 

View this post on Instagram

 

#monsoonfootwear 🌸 Size : 36-41 Price : ₹450 + shipping

A post shared by @ theclosetofhappiness1 on

6. मौनसून में रखें रबर शूज का ख्याल

रबड़ के जूते या चप्पलें पहन रही हैं, तो उन्हें इस्तेमाल के बाद तुरंत पंखे के नीचे सूखने के लिए रख दें, क्योंकि गीले रबड़ से बदबू आनी शुरू हो जाती है और फुटवियर जल्दी खराब होने लगता है.

7. स्पोर्ट शूज को सूखाना न भूलें

अगर आपने स्पोर्ट शूज पहने हुए हैं, तो तुरंत लेस खोल कर जूतों को पलट कर सूखने के लिए रख दें. अगर आप इन्हें तुरंत सूखने के लिए रख देंगी तो जूते खराब होने से बच जाएंगे.

8. अलमारी में न रखें मौनसून शूज

जब तक आप के जूते अच्छी तरह से सूख न जाएं तब तक उन्हें बंद अलमारी में न रखें वरना खराब हो जाएंगे. उन पर फंगस भी लग जाएगी.

9. धूप लगाना न भूलें

जूतों को खराब होने से बचाने के लिए उन्हें धूप में सूखने रख दें. इस से अंदर पनप रहे बैक्टीरिया भी खत्म हो जाएंगे.

10. मौनसून में लैदर को कहें न

मौनसून के समय लैदर के जूते और चप्पलें न पहनें. अगर पहनना बहुत ही जरूरी हो तो उन पर वैक्स पौलिश लगाएं. वैक्स लगाने से जूतों को एक पतली सुरक्षा परत मिल जाएगी.

Monsoon Special: इन 7 टिप्स से बरसात में रहेंगे फिट एंड फाइन

चिलचिलाती गरमी से मौनसून की बौछारें राहत तो देती हैं पर बारिश के बाद वातावरण में बढ़ती उमस के कारण वायरल, बैक्टीरियल और फंगल संक्रमण भी सक्रिय हो जाते हैं. इस दौरान डेंगू, मलेरिया आदि के मामले भी बढ़ जाते हैं. फिर उमस भरे मौसम में शरीर में पानी की कमी भी हो सकती है.

तो क्या मौनसून का लुत्फ न उठाएं? नहीं, मौनसून का दिल खोल कर लुत्फ उठाने के लिए बस इन स्वास्थ्य संबंधी उपायों का पालन करें:

 1. मच्छरों से बचाव

वैसे तो डेंगू व मलेरिया के मामले गरमी के महीनों से ही दिखने लगते हैं, लेकिन जब मौनसून की बौछारें शुरू होती हैं तो ये बीमारियां चरम पर पहुंच जाती हैं. उमस बढ़ते ही कीड़ेमकोड़ों को पनपने का माकूल माहौल जो मिल जाता है. ठहरे हुए पानी में मच्छरों को प्रजनन करने की अच्छी जगह मिल जाती है और हवा में बढ़ती उमस उन्हें पनपने का अच्छा मौका मिल जाता है. इसीलिए मच्छरजनित बीमारियों का कहर मौनसून के मौसम में चरम पर होता है. अत: घर के आसपास ठहरे हुए पानी में मच्छर मारने वाली दवा का छिड़काव करें.

2. भरपूर पानी पीते रहें

अत्यधिक उमस का मतलब है कि बहुत ज्यादा पसीना निकलेगा. लिहाजा डीहाइड्रेशन होना पक्का है. पूरे वर्ष की तरह मौनसून के दौरान भी खुद को हाइड्रेटेड रखना जरूरी है. शुद्ध जल का पर्याप्त सेवन करें ताकि आप का शरीर और त्वचा हाइड्रेटेड बनी रहे. इस से आप के शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत भी मिलती है और आप पानी की कमी होने से भी बचे रहते हैं. इस के अलावा भरपूर पानी पीने से शरीर के विषाक्त तत्त्व भी पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकलते रहते हैं.

3. बैक्टीरियल एवं फंगल संक्रमण से बचाव

मौनसून के मौसम में बैक्टीरियल और फंगल संक्रमण बड़ी तेजी से फैलता है, क्योंकि इस मौसम का तापमान और नमी उन की वृद्धि के लिए अनुकूल हो जाती है. त्वचा के संक्रमण से बचने के लिए जरूरी है कि आप अपनी त्वचा को ज्यादा समय तक भीगने से बचाएं. सीलन के कारण फंगल संक्रमण बढ़ता है. बैक्टीरियल और फंगल समस्याओं से बचे रहने के लिए ऐंटीबैक्टीरियल साबुन, क्रीम और पाउडर का इस्तेमाल करें, खासकर तब जब आप की त्वचा ज्यादा संवेदनशील हो.

आर्द्र मौसम में फंगल तेजी से फैलता है. त्वचा के मुड़ने वाले स्थानों पर लाल निशान पड़ जाते हैं. इस के अलावा तैलीय त्वचा में तेजी से दाने निकल आते हैं और खुजली भी होने लगती है. बहुत ज्यादा पसीना निकलने की स्थिति में यदि आप त्वचा को सुखा कर नहीं रखते और कपड़े नहीं बदलते हैं तो भी ऐसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. ज्यादा देर तक पसीने वाले मोजे पहनने से भी समस्या बढ़ जाती है. इसलिए अपने पैरों और जांघों को सूखा और संक्रमण मुक्त रखें.

स्नान करने के बाद तौलिए से त्वचा और सिर को पोंछ कर सुखा लें. जब भी पैरों को धोएं, उन्हें तौलिए से अच्छी तरह पोंछ कर सुखा लें और उंगलियों के बीच के हिस्सों को भी सुखा लें. इस से आप संक्रमण से बचे रहेंगे. घर में प्रवेश करते ही पैरों को धो लें और संभव हो तो पानी में बेटाडीन की कुछ बूंदें मिला कर उस में पैरों को कुछ देर डुबोए रखें. जरूरत हो तो ऐंटीफंगल पाउडर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. पैरों में हवा की आवाजाही बनाए रखने के लिए खुले जूते या चप्पलें पहनें.

4. तैलीय और बाहर के भोजन से परहेज करें

मौनसून के मौसम में अपचता भी एक बड़ी समस्या होती है. जब उमस अधिक होती है तो शरीर में भोजन पचाने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है. फिर जब आप का पाचनतंत्र कमजोर रहता है तो गरिष्ठ भोजन आप के पेट को आसानी से बिगाड़ सकता है. लिहाजा आप अपने पेट को बिगड़ने न दें. इसे संक्रमण की चपेट में न आने दें. तैलीय भोजन भी त्वचा में संक्रमण और अन्य समस्याएं पैदा करने के लिए जिम्मेदार होता है. अत: इस दौरान हलका और आसानी से पचने वाला भोजन ही करें.

इस दौरान चूंकि संक्रमण चरम पर होता है, इसलिए बाहर के भोजन से परहेज करना ही बेहतर होगा. मौनसून के दौरान सड़क किनारे के ढाबों और रैस्टोरैंट में खाना खाने से दूर ही रहें. घर में बना भोजन ही करें. इस से संक्रमण की चपेट में आने की संभावना कम रहेगी, जो इस दौरान वातावरण में तेजी से फैल चुका होता है.

5. आंखों को भी रखें साफ

इस मौसम में आंखों का वायरल संक्रमण भी चिंता का कारण बनता है. हालांकि इस मौसम में संक्रमण से बचना मुश्किल होता है, लेकिन यह तय है कि आंखों की साफसफाई करते रहने से आप संक्रमण के खतरे को कम कर सकते हैं. घर में प्रवेश करते ही साबुन से हाथ धो कर आंखों को पानी से अच्छी तरह धोएं.

हर रात सोने से पहले आंखों में गुलाबजल की कुछ बूंदें डालें. पानी में सल्फर का टुकड़ा डाल कर भी रख सकते हैं. फिर उस पानी से आंखों को साफ कर सकते हैं.

6. प्रतिरक्षण प्रणाली मजबूत रखें

संक्रमण से लड़ने का सब से अच्छा तरीका अपने शरीर को अंदर से मजबूत बना कर रखना है और यह मजबूती सही खानपान से ही संभव हो सकती है. शरीर को चमकदार और अंदर से मजबूत बनाए रखने के लिए नियमित रसदार फल और हरी सब्जियां खाएं. सेब, नाशपाती और अनार जरूर खाएं. भोजन में लहसुन का इस्तेमाल करें. नियमित दही खाएं.

7. साफसफाई के नियमों का पालन करें

मौनसून के दौरान संक्रमण तेजी से फैलता है. इसलिए खुद को जितना साफसुथरा रखेंगे आप के संक्रमित होने की उतनी ही कम संभावना रहेगी. हम सार्वजनिक परिवहन में सफर करते हैं, सार्वजनिक स्थानों और सामुदायिक केंद्रों में जाते हैं जहां हर तरह के लोग होते हैं. इन में से कई लोग संक्रमण से ग्रस्त हो सकते हैं. अत: उन से संक्रमित न होने का सब से अच्छा उपाय यही है कि घर आते ही हाथों और चेहरे को अच्छी तरह धो लें. संभव हो तो स्नान ही कर लें तथा शरीर को अच्छी तरह सुखा लें.

– डा. रविंद्र गुप्ता, इंटरनल मैडिसिन कंसल्टैंट, कोलंबिया एशिया हौस्पिटल

 

BB ott 2: जिया ने एलविश को पिलाया साबुन का पानी, ट्विटर पर ट्रेंड हुआ #ShameonJiya

बिग बॉस ओटीटी 2 काफी चर्चा में है. सलमान खान के शो बिग बॉस ओटीटी 2  में दो लोगों की एंट्री हुई है, एल्विश यादव और आशिका भाटिया. इस समय एल्विश सोशल मीडिया पर चर्चा के विषय बन गए हैं क्योंकि वह घर के अंदर कंटेस्टेंट्स को परेशान कर रहे हैं और एक दिन के भीतर, वह कुछ कंटेस्टेंट्स को परेशान करने में कामयाब रहे.

एल्विश घर के अंदर अपनी राय बहुत स्पष्ट रखते हैं और इसी वजह से कुछ कंटेस्टेंट्स उन्हें पसंद नहीं करते. एल्विश का अब तक बीबी हाउस में अविनाश सचदेव, जिया शंकर और फलक नाज़ से विवाद हो चुका है. कुछ ऐसा ही वाकया हाल ही में जिया शंकर के साथ हुआ. अपनी एक हरकत के कारण वह ट्विटर पर जमकर ट्रोल हो रही हैं. गुस्साए दर्शकों ने जिया शंकर के खिलाफ ‘शेम ऑन जिया शंकर’ ट्रेंड तक शुरू किया. दरअसल, जिया शंकर ने ‘बिग बॉस ओटीटी 2’ में एल्विश यादव को पीने के लिए साबुन का पानी दिया.

ट्विटर पर ट्रेंड हुईं जिया शंकर

जब एल्विश ने जिया को फर्जी कहा तो जिया ने अपनी बात कहने में कोई कसर नहीं छोड़ी. वहीं एल्विश यादव ने जिया शंकर से पीने के लिए पानी मांगा था तो जिया शंकर ने उस पानी में हैंडवॉश मिलाकर दे दिया. दूसरी ओर एल्विश ने एक घूट पानी पी लिया, उसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि जिया शंकर ने जो पानी दिया है उसमें साबुन मिला है. जिया का यह वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह दावा कर रही हैं कि किसी ने ग्लास ठीक से नहीं धोया होगा और जिया को अपनी इस हरकत पर बुरा नहीं लगा.

जिया शंकर पर एल्विश यादव गुस्साए

एल्विश यादव जिया पर काफी गुस्से में नजर आ रहे हैं लेकिन उन्होंने अपनी जुबान पर लगाम लगाई और जिया से कहता है कि, “पानी पिलाना पुण्य का काम है. आपके घर में पिलाते होंगे साबुन वाला पानी, हमारे यहां ये सब नहीं होता.”

अभिषेक मल्हान इस मामले में हस्तक्षेप करता है और जिया शंकर को उसकी मूर्खता का एहसास कराने की कोशिश करता है. लेकिन जिया पर इसका कोई फायदा नहीं हुआ.

जिया शंकर के इस व्यवहार से नेटिजन्स उनसे बेहद नाराज हैं.

TRP List : TMKOC के आगे फिसड्डी साबित हुआ ‘अनुपमा’, जानें बाकी शो का हाल

टीवी सीरियल की दीवानगी हर दर्शकों के दिलों में देखी जा सकती है. दिन-प्रतिदिन टीवी सीरियल जनता को खूब मनोरंजन दे रहे है. मनोरंजन की दुनिया में सारा खेल टीआरपी का है. जनता के मन पसंद शो टीआरपी की किस नंबर पर हैं, आज हम आपको बताएंगे.

साल 2023 के 28वें सप्ताह की टीआरपी लिस्ट जारी कर दी है. इस बार भी ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ पहले और ‘अनुपमा’ दूसरे नंबर पर नजर आया. वहीं इस सप्ताह की लिस्ट से ‘इंडियाज बेस्ट डांसर’ का पत्ता कट चुका है.

TMKOC बना नंबर वन

इस साल 2023 के 28वे हफ्ते की टीआरपी जारी हो गई. दर्शकों का सबसे चाहेता सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ अभी भी नंबर वन पर छाया हुआ है. एक्टर दिलीप जोशी का शो हर बार की तरह इस बार भी सबको पछाड़ते हुए टीआरपी में नंबर वन पर बना हुआ है. ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ ने 74 रेटिंग के साथ पहले नंबर पर जगह बनाई है. वहीं मीडिया खबरों के मुताबिक जल्द ही शो में दयाबेन की वापसी हो सकती है.

अनुपमा ने दूसरे नंबर पर जगह बनाई

रूपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ सीरियल में कई ट्विस्ट और टर्न्स देखने के वाबजूद ‘अनुपमा’ ने दूसरे नंबर पर जगह बनाई है. शो को 70 रेटिंग के साथ दूसरे स्थान मिला है. बता दें कि ‘अनुपमा’  सीरियल में अनुपमा ने छोटी अनु के लिए अमेरिका का सपना तोड़ दिया.

तीसरे स्थान पर ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’

स्टार प्लस का सबसे पुराना सीरियल अभी भी कई सीरियल को टक्कर दे रहा है. शो को खास बनाने के लिए मेकर्स कई प्रयास करते रहते है. वहीं ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ ने 66 रेटिंग के साथ तीसरे स्थान पर जगह बनाई. शो में इन दिनों अबीर का ट्रैक चल रहा है.

चौथे स्थान पर आए द कपिल शर्मा शो

‘द कपिल शर्मा शो’ ने इस बार 66 रेटिंग के साथ चौथे स्थान पर जगह बनाई. बता दें कि शो पर जल्द ही बंद होने वाला है. इसके आखिरी एपिसोड में अनिल कपूर नजर आएंगे.

कुंडली भाग्य

‘कुंडली भाग्य’ ने 59 रेटिंग के साथ पांचवे नंबर पर जगह बनाई है. शो में जल्द ही प्रीता लूथरा परिवार के सामने आएगी, जिससे सबके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी.

राधा मोहन

वहीं सीरियल राधा मोहन इस बार 57 रेटिंग के साथ छठे नंबर पर रहा. ‘राधा मोहन’ की पॉजिशन देखकर कहा जा सकता है कि शो धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है.

‘गुम है किसी के प्यार में’

टीवी सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ लीप आने के बाद नीचे गिरता जा रहा है. इसके साथ ही ये शो भी छठे से सातवें नंबर पर आ चुका है. इस सप्ताह ‘गुम है किसी के प्यार में’ 56 रेटिंग के साथ सातवें नंबर पर रहा.

कुमकुम भाग्य

टीवी सीरियल ‘कुमकुम भाग्य’ 56 रेटिंग के साथ आठवें स्थान पर टिका. बता दें कि एक वक्त ऐसा भी आया था, जब टीआरपी में, टॉप 10 शोज में से ‘कुमकुम भाग्य’ का पत्ता कट गया था.

इसके साथ ही ‘भाग्यलक्ष्मी’ 54 रेटिंग के साथ नौंवे स्थान पर रहा और कलर्स का नया शो ‘शिवशक्ति’ 53 रेटिंग के साथ दसवें स्थान पर दिखा. शो भले ही कुछ दिनों पहले शुरू हुआ है, लेकिन अब कह सकते है कि इस शो ने लोगों के बीच जगह बनानी शुरू कर दी है.

मेरे पेरेंट्स को कैंसर है, क्या कैंसर होने से मैं हाई रिस्क कैटेगरी में आती हूं?

सवाल

मेरी मां को लिवर कैंसर और पिता को प्रोस्टेट कैंसर है. मैं अपने स्वास्थ्य को ले कर बहुत चिंतित हूं. क्या मातापिता दोनों को कैंसर होने से मैं हाई रिस्क कैटेगरी में आती हूं?

जवाब

यह सही है कि आनुवंशिक कारण कैंसर के लिए एक प्रमुख रिस्क फैक्टर्स में से एक है, लेकिन परिवार में जब 3 पीढि़यों तक कैंसर के मामले लगातार होते हैं तब उसे आनुवंशिक या हेरिडिटरी माना जाता है. आप के मातापिता दोनों को कैंसर है, इस से आप को घबराने की जरूरत नहीं है. उन में आपस में कोई रक्त संबंध नहीं है क्योंकि वे अलगअलग परिवारों से आते हैं इसलिए इसे आनुवंशिकता से संबंधित नहीं माना जा सकता है.

ये भी पढ़ें…

डाक्टर मुझे कीमोथेरैपी के बाद स्टेरौयड भी दे रहे हैं. मैं ने पढ़ा है कि स्टेरौयड का सेवन नहीं करना चाहिए. क्या यह सेहत के लिए नुकसानदायक होता है?

अगर आप के डाक्टर आप को कीमोथेरैपी के साथ स्टेरौयड्स दे रहे हैं तो आप को जरूर लेना चाहिए. ये कीमोथेरैपी के साइड इफैक्ट्स से बचने के लिए दिए जाते हैं. कई बार तो ये कीमोथेरैपी का ही हिस्सा होते हैं. ऐसे में इन्हें लेने से कोई दिक्कत नहीं होती. इसलिए डाक्टर द्वारा सु?ाई सभी दवाइयां नियत समय पर और निर्धारित मात्रा में जरूर लें.

ये भी पढ़ें…

मेरी उम्र 54 साल है. 5 साल पहले मेनोपौज हो गया था, लेकिन कभीकभी वैजाइना से ब्लीडिंग होती है. कोई खतरे की बात तो नहीं?

जवाब

मेनोपौज के बाद वैजाइना से ब्लीडिंग होना बिलकुल सामान्य नहीं है. ब्लीडिंग चाहे मेनोपौज के बाद हो या महावारी के बीच अथवा शारीरिक संबंध बनाने के बाद, महिलाओं को इसे गंभीरता से लेना चाहिए. यह सर्वाइकल कैंसर का संकेत हो सकता है. आप तुरंत किसी डाक्टर को दिखाएं, जरूरी जांचें कराएं और उपचार शुरू करें.

-डा. देनी गुप्ता

सीनियर कंसल्टैंटमैडिकल औंकोलौजीधर्मशिला नारायणा सुपर स्पैश्यलिटी हौस्पिटलदिल्ली   

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभाई-8रानी झांसी मार्गनई दिल्ली-110055.

व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.  

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें