Father’s day 2023: ध्रुवा- क्या आकाश के माता-पिता को वापस मिला बेटा

हर मातापिता की तरह आकाश के मातापिता ने भी अपने 25 वर्षीय बेटे की शादी के ढेर सारे सपने संजो रखे थे जिन्हें आकाश के एक फैसले ने मिट्टी में मिला दिया था.

“बेटा आकाश, मिश्रा जी हमारे जवाब के इंतज़ार में हैं, उन की बेटी सुकन्या एमबीए कर के,” मां इंद्रा देवी ने बात शुरू ही की थी कि “मां, आप ने सोच भी कैसे लिया कि मैं ध्रुवा को भूल जाऊंगा, उस का और मेरा साथ आज का नहीं, जन्मजन्मांतर का है. कभी तभी तो सोचिए न मां, कि इतनी भीड़भरी दुनिया में वही क्यों मिली मुझे,” आकाश ने मां की बात को बीच में ही काटा.

“इस में सोचने वाली तो कोई बात ही नहीं. तुम पैसे वाले हो, देखने में स्मार्ट हो. इस से ज्यादा एक लड़की को और क्या चाहिए. उस ने सोचसमझ कर तुम पर डोरा डाला है,” मां इंद्रा देवी ने क्रोधित होते हुए कहा.

“मां, मैं गया था उस के पीछे. उस ने तो महीनों तक मुड़ कर भी नहीं देखा था मेरी ओर,” आकाश हारना नहीं चाहता था, उसे हर हाल में अपने प्यार की जीत चाहिए थी.

“हां, तो तुम्हें कोई अपनी बिरादरी की नहीं मिली. वही एक हूर की परी है दुनिया में,” मां अब भी अपनी संस्कृति, रीतिरिवाज का मोरचा संभाले बोली.”

“जो होना था वह हो चुका. कल उस के मातापिता आ रहे हैं आप लोगों से मिलने के लिए और मैं नहीं चाहता आने वाले समय की बुनियाद में थोड़ी सी भी खटास शामिल हो,” आकाश ने दृढ़ निश्चय लेते हुए कहा.

“कल क्लाइंट के साथ मेरी इंपौर्टेंट मीटिंग है,” आकाश के पिता ने अपनी नाराजगी को अमलीजामा पहनाने की कोशिश की.

“और मेरी महिला समिति की किटी पार्टी है,” मां ने मोबाइल में आंखें गड़ाए कहा.

“समझ गया, आप लोग किसी भी हाल में ध्रुवा को नहीं अपनाने वाले. लेकिन मैं भी कह देता हूं आने वाली परिस्थिति के जिम्मेदार आप लोग ही होंगे,” आकाश का चेहरा गुस्से से तमतमा रहा था. अपनी बात कह कर आकाश कमरे से निकल गया.

मातापिता की रजामंदी न मिलने से खीझा हुआ तो वह पहले से ही था, रहीसही कसर दोस्त मनीष के कोरोना पौजिटिव होने की खबर ने पूरी कर दी जिस के संसर्ग में वह भी पिछले कई दिनों से रह रहा था. लेकिन फिलहाल समस्या यह थी कि वह ध्रुवा से क्या कहेगा… रोज उस के सामने अपने मातापिता के खुले विचारों वाले होने के सौ किस्से सुनाया करता था और आज जब सही में खुले विचार से बेटे की खुशियां समेटने की बारी आई तो वे मुकर गए थे.

यही सब सोचता उन कड़ियों को जोड़ने लगा जहां से इस सारे अफसाने की शुरुआत हुई थी. असम राज्य के शिवसागर जिला अपनी खूबसूरती के साथसाथ कई और संस्कृतियों को भी अपनी गोद में उसी प्रकार बढ़नेपनपने देता है जैसे कि वे वहीं की हों. वहीं के एक कौन्वैंट स्कूल में आकाश पढ़ता था. हिंदी फिल्मों के शौकीन आकाश ने गर्लफ्रैंड बनाने के कई प्रयास किए पर हर बार नाकामयाब रहा. उसी समय ध्रुवा ने उसी स्कूल में दाखिला लिया. वैसे तो ध्रुवा के मातापिता की कहीं से औकात न थीं इतने बड़े स्कूल में पढ़ाने की लेकिन ध्रुवा इतनी अच्छी पेंटिंग करती थी कि उसे उस स्कूल के लिए स्कौलरशिप मिली थी और यहीं से शुरुआत हुई थी उन दोनों के प्रेम कहानी की. हुआ यों था कि एक दिन ध्रुवा को कक्षा में डांट पड़ रही थी. ‘ओहो, ध्रुवा, तुम ने फिर होमवर्क नहीं किया,’ राधिका मैम ने उस की कौपी डैस्क पर पटकते हुए कहा. 10वीं कक्षा के सभी विद्यार्थियों की नजर ध्रुवा पर गई- गोरा सा मुखड़ा, बड़ीबड़ी कजरारी आंखें, हलके गुलाबी रंग के होंठ.

‘बोलो, बोलती क्यों नहीं,’ राधिका मैम ने फिर धमकाया.

‘मैडम, मुझे मैथ्स अच्छी नहीं लगती. वैसे भी ए प्लस बी होलस्कवैर का इस्तेमाल जीवन के किस मोड़ पर होता है, मुझे बताएं जरा,’ ध्रुवा ने मासूमियत से उत्तर दिया.

‘बस ध्रुवा, एक तो तुम ने होमवर्क नहीं किया, ऊपर से बड़ीबड़ी बातें…’

‘मैडम, आप ने कभी रंगों के साथ खेला है. उन्हें कागज या कपड़ों पर उकेरा है…’ ध्रुवा अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाई थी कि छुट्टी की घंटी बज गई और सभी कक्षा से बाहर निकल गए.

ध्रुवा का मासूम, सुंदर सा चेहरा, बेबाक हो कर बोलना और नुमाइश में लगी ध्रुवा की पेंटिंग जिस की खूब तारीफ हो रही थी. इन सारी बातों ने आकाश के मन को मोह लिया था.

आकाश चौधरी ध्रुवा की कक्षा का हैड बौय था. कसरती बदन, ऊंचा मस्तक, घुंघराले बालों वाला यह लड़का लड़कियों के बीच हमेशा चर्चा का विषय बना रहता. दरअसल, आकाश हमेशा से स्कूल टौपर भी था.

‘आप को मैथ्स अच्छी नहीं लगती?’ एक दिन ध्रुवा को लाइब्रेरी में अकेला पा कर आकाश ने पूछा.

‘क्या आप रंगों की भाषा जानते हैं? ध्रुवा ने चिढ़ कर जवाब दिया जैसे किसी ने उस की दुखती रग पर हाथ रख दिया हो.

उसी का तो मैं दीवाना हो गया हूं, आकाश के मन की आवाज थी जो उस के मन में ही दब कर रह गई. पहली मुलाकात में भला कैसे कह सकता है इतनी सारी बातें.

‘आप की पेंटिंग देखी हैं मैं ने, बहुत अच्छा बनाती हैं आप,’ संयोग से मिले अंतरंग पलों को भला कैसे जाने दे सकता था आकाश.

‘क्या फायदा मैथ्स में तो फिसड्डी हूं न,’ ध्रुवा ने होंठों को टेढ़ा करते हुए कहा.

‘आप कहें तो मैं आप की मदद कर सकता हूं,’ आकाश ने अपनी ओर से पहल करते हुए कहा.

‘सच्ची, फिर ठीक है,’ ध्रुवा लगभग उछल पड़ी थी.

स्कूल का टौपर लड़का उस की मदद करना चाह रहा था. इस से अच्छी बात क्या हो सकती थी भला.

इस तरह अपनीअपनी ख्वाहिशों को जरूरतों का नाम दे कर दोनों जीवन के उस राह पर चलने लगे जिसे ज्ञानी लोग बकवास और साधारण लोग पवित्र प्रेम का दर्जा देते हैं.

और इस तरह धीरेधीरे दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा.

शुरुआत में तो मुलाकातें छोटी होती थीं पर सपने बड़े होते थे. फिर एक शाम की सिंदूरी बेला में अपने प्यार को सचाई का जामा पहनाने की कोशिश में आकाश का पुरुषत्व हावी हो बैठा जिसे ध्रुवा ने भी नादानी में स्वीकार कर लिया और नदी का अस्तित्व सागर में विलीन हो गया.

इस समर्पण के सिलसिले को रोकने की कोशिश दोनों में से किसी ने न की. नतीजा यह निकला कि ध्रुवा अपनी पढ़ाई भी संपन्न न कर पाई. उसे अपने गर्भवती होने का पता लग चुका. उस ने आकाश को बताने में तनिक भी देरी न की. साधारणतया ऐसी परिस्थितियों में लड़का चिल्लाता है, मुकर जाता है या भागने की कोशिश करता है लेकिन आकाश चौधरी ने इस खुशी को उतने ही प्रसन्नता से स्वीकार किया जितना शायद वह विवाह के बाद स्वीकार करता.

कमी इतनी ही थी की ध्रुवा के मांग में उस के नाम का सिंदूर नहीं था. लोक, समाज की तो जैसे आकाश को परवा ही न थी. उसे, बस, इतना लग रहा था वह पिता बनने वाला है और वह उस जिम्मेदारी को निभाने के लिए पूर्णरूप से तैयार है. ध्रुवा से वह सचमुच प्यार करता था.

आकाश के पिता महेश चौधरी कंप्यूटर कंपनी के मालिक थे जिस का इकलौता वारिस आकाश ही था. अपने पिता के व्यवसाय को उसे आगे ले जाना है, यह बात उसे बचपन से ही घुट्टी की तरह पिलाई गई थी और उस ने भी उसे स्वीकार कर लिया था और व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए मेहनत भी करता था. आज जब उस ने अपने मातापिता के सामने ध्रुवा से विवाह करने का प्रस्ताव रखा तो मातापिता ने जातिवाद को ऊपर रखते हुए इस विवाह से साफ इनकार कर दिया.

अब चिंता की लकीरें आकाश के माथे पर खिंचने लगी थीं क्योंकि इकलौता बेटा होने की वजह से उसे लगता था वह जो चाहेगा मातापिता उस के लिए सहर्ष इजाजत दे देंगे लेकिन मातापिता ने साफ इनकार कर दिया. फिर भी उस ने कदम पीछे नहीं किया. देरसवेर मातापिता मान जाएंगे, यह सोच कर कुछ दोस्तों की मदद से शादी करने का फैसला ले लिया और मन ही मन ध्रुवा को दुलहन के जोड़े में देख मुसकराने लगा.

24 मार्च की शाम को आकाश ने ध्रुवा को फोन किया, ‘बस, कल भर की देरी है, फिर हम दोनों और हमारा मुन्ना…’

ध्रुवा ने बीच में टोका, ‘मुन्ना क्यों, मुन्नी…’

‘चलो ठीक है मुन्नी, फिर हम तीनों एकसाथ होंगे. मैं तुम्हें हर वह खुशी देने की कोशिश करूंगा जिस की चाहत तुम ने सपने में भी की होगी,’ आकाश बोला.

मुझे यकीन है तुम पर, आकाश,’ ध्रुव तो निहाल हुई जा रही थी.

‘ध्रुवा, तुम्हें मुझ पर यकीन तो है न,’ कहतेकहते आकाश एकदो बार खांसने लगा.

‘अपनेआप से ज्यादा,’ ध्रुवा ने मोबाइल को चूमते हुए कहा जैसे वह मोबाइल को नहीं, अपने उस विश्वास को चूम रही थी जो नैटवर्क के दूसरे छोर पर खांस रहा था.

अचानक से आकाश की खांसी बढ़ने लगी, वह बोला, ‘अभी रखता हूं, फिर बाद में बात करते हैं.’

‘ठीक है, थोड़ा पानी पी लो, खांसी ठीक हो जाएगी,’ ध्रुवा ने कहा.

एक सप्ताह पहले से ही 25 मार्च, 2020 का दिन शादी के लिए तय किया गया. शिवसागर का औडिटोरियम बड़ा ही भव्य और विशालकाय है जिस में दोनों सात फेरे लेने वाले थे. सबकुछ योजना के मुताबिक चल रहा था. लेकिन नियति ने अपनी अलग नीति बनाई थी जिस के बारे में किसी को कुछ पता न था.

रात होतेहोते आकाश की खांसी बढ़ने लगी और शरीर तपने लगा. रात के 12 बजतेबजते आकाश को अस्पताल ले जाने की नौबत आ गई. ऐसे में ध्रुवा को खबर देने की जरूरत किसी ने महसूस न की.

अस्पताल पहुंच कर पता चला आकाश कोरोना पौजीटिव है और उसे औक्सीजन की सख्त जरूरत है. मातापिता का रोरो कर बुरा हाल था. उन्होंने इलाज में कोई कसर न छोड़ी. वैंटिलेटर पर भी रखा गया लेकिन बहुत देर हो चुकी थी. अगले दिन शाम के 4 बजतेबजते आकाश ने आखिरी सांस ले ली और मातापिता के सामने उन की दुनिया उजड़ गई. सबकुछ इतनी जल्दी हो गया कि किसी को यकीन नहीं हो रहा था.

जिस वक्त सात फेरे लेने का समय था उस वक्त उस के पिता उसे मुखाग्नि दे रहे थे.

आखिर एक दोस्त की मदद से ध्रुवा तक खबर पहुंची जो सुबह से औडिटोरियम में इंतजार कर रही थी. आकाश के मोबाइल पर कई बार कौल की जो आकाश के घर में बैड के साइड की टेबल पर रखा था. अब ध्रुवा को काटो तो खून नहीं, अब क्या होगा उस का. चारों तरफ सबकुछ बंद. घर जाने तक की गुंजाइश न थी. शादी के बाद जिस घर जाने की बात थी, अब वह रहा नहीं. पेट में 3 महीने का बच्चा लिए अंधेरे रास्ते से गुजर रही थी. दहाड़े मार कर आकाश का नाम लेले कर रोए जा रही थी. पर कोई सुनने वाला न था. पागलों की तरह अपने शरीर से कपड़े, गहने नोचनोच कर फेंक रही थी.

सवाल था, जाए तो कहां जाए? इसी कशमकश में चली जा रही थी. रात अपने घर के सीढ़ियों पर गुजारी. मातापिता अलग नाराज थे. सुबह हुई तो मां ने स्थिति जान कर थोड़ी सहानुभूति दिखाई. लौकडाउन की वजह से सबकुछ बंद हो चुका था. गर्भपात कराने की भी गुंजाइश नहीं रह गई थी. ऐसे में अब उसे एक ही रास्ता सूझ रहा था जिस रास्ते से गुजर कर वह आकाश के पास पहुंच सकती थी. उस ने दिल पर पत्थर रख कर वही रास्ता चुन लिया. बस, सही तरीका अपना कर अंजाम देना चाहती थी.

कहते हैं, मृत्यु जब तक बांहें न फैलाए तब तक कोई अपनी मरजी से उस की आगोश में नहीं जा सकता और वही हुआ. हर कोशिश नाकाम रही. अकेली जान होती, तो रोचिल्ला कर रह लेती. लेकिन उस की कोख में आकाश की निशानी पल रही थी और उस के साथ वह कोई नाइंसाफी नहीं होने देना चाहती थी. अगली सुबह उस ने थोड़ी हिम्मत जुटाई. दृढ़ निश्चय किया और मातापिता को साथ ले कर आकाश के घर पहुंची. निकलते समय बैग में जीवन को

खत्म करने की सामग्री रखना न भूली. वाचमैन ने गेट पर ही रोक दिया. ध्रुवा जो ठान कर आई थी, उसे अंजाम दिए बगैर वापस जाना नहीं चाहती थी.

उस ने एक कागज़ के टुकड़े पर लिखा, ‘मां, आप अपना इकलौता बेटा खो चुकी हैं, कम से कम उस की आखिरी निशानी को तो बचा लीजिए.’

आकाश के मातापिता, जो बेटे को खो कर अपने लिए जीने की वजह खो चुके थे, उस कागज के टुकड़े को पढ़ते ही दौड़ कर बाहर आए. कहने के लिए शब्द नहीं थे. सभी के आंसुओं ने अपनीअपनी बात कही. इंदिरा देवी का जातिवाद बेटे को खो कर खामोश हो चुका था. ध्रुवा को घर के अंदर लेते वक्त सभी ने आकाश को अपने आसपास महसूस किया जैसे उन का बेटा लौट आया हो.

Father’s day 2023: सायोनारा- क्या देव ने पिता के खिलाफ जाकर अंजू से शादी की?

उन दिनों देव झारखंड के जमशेदपुर स्थित टाटा स्टील में इंजीनियर था. वह पंजाब के मोगा जिले का रहने वाला था. परंतु उस के पिता का जमशेदपुर में बिजनैस था. यहां जमशेदपुर को टाटा भी कहते हैं. स्टेशन का नाम टाटानगर है. शायद संक्षेप में इसीलिए इस शहर को टाटा कहते हैं. टाटा के बिष्टुपुर स्थित शौपिंग कौंप्लैक्स कमानी सैंटर में कपड़ों का शोरूम था.

देव ने वहीं बिष्टुपुर के केएमपीएस स्कूल से पढ़ाई की थी. इंजीनियरिंग की पढ़ाई उस ने झारखंड की राजधानी रांची के बिलकुल निकट बीआईटी मेसरा से की थी. उसी कालेज में कैंपस से ही टाटा स्टील में उसे नौकरी मिल गई थी. वैसे उस के पास और भी औफर थे, पर बचपन से इस औद्योगिक नगर में रहा था. यहां की साफसुथरी कालोनी, दलमा की पहाड़ी, स्वर्णरेखा नदी और जुबली पार्क से उसे बहुत लगाव था और सर्वोपरी मातापिता का सामीप्य.

खरकाई नदी के पार आदित्यपुर में उस के पापा का बड़ा सा था. पर सोनारी की कालोनी में कंपनी ने देव को एक औफिसर्स फ्लैट दे रखा था. आदित्यपुर की तुलना में यह प्लांट के काफी निकट था और उस की शिफ्ट ड्यूटी भी होती थी. महीने में कम से कम 1 सप्ताह तो नाइट शिफ्ट करनी ही पड़ती थी, इसलिए वह इसी फ्लैट में रहता था. बाद में उस के पापामम्मी भी साथ में रहने लगे थे. पापा की दुकान बिष्टुपुर में थी जो यहां से समीप ही था. आदित्यपुर वाले मकान के एक हिस्से को उन्होंने किराए पर दे दिया था. इसी बीच टाटा स्टील का आधुनिकीकरण प्रोजैक्ट आया था. जापान की निप्पन स्टील की तकनीकी सहायता से टाटा कंपनी अपनी नई कोल्ड रोलिंग मिल और कंटिन्युअस कास्टिंग शौप के निर्माण में लगी थी.

देव को भी कंपनी ने शुरू से इसी प्रोजैक्ट में रखा था ताकि निर्माण पूरा होतेहोते नई मशीनों के बारे में पूरी जानकारी हो जाए. निप्पन स्टील ने कुछ टैक्निकल ऐक्सपर्ट्स भी टाटा भेजे थे जो यहां के वर्कर्स और इंजीनियर्स को ट्रेनिंग दे सकें. ऐक्सपर्ट्स के साथ दुभाषिए (इंटरप्रेटर) भी होते थे, जो जापानी भाषा के संवाद को अंगरेजी में अनुवाद करते थे. इन्हीं इंटरप्रेटर्स में एक लड़की थी अंजु. वह लगभग 20 साल की सुंदर युवती थी. उस की नाक आम जापानी की तरह चपटी नहीं थी. अंजु देव की टैक्निकल टीम में ही इंटरप्रेटर थी. वह लगभग

6 महीने टाटा में रही थी. इस बीच देव से उस की अच्छी दोस्ती हो गई थी. कभी वह जापानी व्यंजन देव को खिलाती थी तो कभी देव उसे इंडियन फूड खिलाता था. 6 महीने बाद वह जापान चली गई थी. देव उसे छोड़ने कोलकाता एअरपोर्ट तक गया था. उस ने विदा होते समय 2 उपहार भी दिए थे. एक संगमरमर का ताजमहल और दूसरा बोधगया के बौद्ध मंदिर का बड़ा सा फोटो.

उपहार पा कर वह बहुत खुश थी. जब वह एअरपोर्ट के अंदर प्रवेश करने लगी तब देव ने उस से हाथ मिलाया और कहा, ‘‘बायबाय.’’ अंजु ने कहा, ‘‘सायोनारा,’’ और फिर हंसते हुए हाथ हिलाते हुए सुरक्षा जांच के लिए अंदर चली गई. कुछ महीनों के बाद नई मशीनों का संचालन सीखने के लिए कंपनी ने देव को जापान स्थित निप्पन स्टील प्लांट भेजा. जापान के ओसाका स्थित प्लांट में उस की ट्रेनिंग थी. उस की भी 6 महीने की ट्रेनिंग थी. इत्तफाक से वहां भी इंटरप्रेटर अंजु ही मिली. वहां दोनों मिल कर काफी खुश थे. वीकेंड में दोनों अकसर मिलते और काफी समय साथ बिताते थे.

देखतेदेखते दोस्ती प्यार में बदलने लगी. देव की ट्रेनिंग खत्म होने में 1 महीना रह गया तो देव ने अंजु से पूछा, ‘‘यहां आसपास कुछ घूमने लायक जगह है तो बताओ.’’ हां, हिरोशिमा ज्यादा दूर नहीं है. बुलेट ट्रेन से 2 घंटे से कम समय में पहुंचा जा सकता है.

‘‘यह तो बहुत अच्छी बात है. मैं वहां जाना चाहूंगा. द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका ने पहला एटम बम वहीं गिराया था.’’ ‘‘हां, 6 अगस्त, 1945 के उस मनहूस दिन को कोई जापानी, जापानी क्या पूरी दुनिया नहीं भूल सकती है. दादाजी ने कहा था कि करीब 80 हजार लोग तो उसी क्षण मर गए थे और आने वाले 4 महीनों के अंदर ही यह संख्या लगभग 1 करोड़ 49 लाख हो गई थी.’’ ‘‘हां, यह तो बहुत बुरा हुआ था… दुनिया में ऐसा दिन फिर कभी न आए.’’

अंजु बोली, ‘‘ठीक है, मैं भी तुम्हारे साथ चलती हूं. परसों ही तो 6 अगस्त है. वहां शांति के लिए जापानी लोग इस दिन हिरोशिमा में प्रार्थना करते हैं.’’

2 दिन बाद देव और अंजु हिरोशिमा गए. वहां 2 दिन रुके. 6 अगस्त को मैमोरियल पीस पार्क में जा कर दोनों ने प्रार्थना भी की. फिर दोनों होटल आ गए. लंच में अंजु ने अपने लिए जापानी लेडी ड्रिंक शोचूं और्डर किया तो देव की पसंद भी पूछी.

देव ने कहा, ‘‘आज मैं भी शोचूं ही टेस्ट कर लेता हूं.’’

दोनों खातेपीते सोफे पर बैठे एकदूसरे के इतने करीब आ गए कि एकदूसरे की सांसें और दिल की धड़कनें भी सुन सकते थे. अंजु ने ही पहले उसे किस किया और कहा, ‘‘ऐशिते इमासु.’’

देव इस का मतलब नहीं समझ सका था और उस का मुंह देखने लगा था. तब वह बोली, ‘‘इस का मतलब आई लव यू.’’

इस के बाद तो दोनों दूसरी ही दुनिया में पहुंच गए थे. दोनों कब 2 से 1 हो गए किसी को होश न था. जब दोनों अलग हुए तब देव ने कहा, ‘‘अंजु, तुम ने आज मुझे सारे जहां की खुशियां दे दी हैं… मैं तो खुद तुम्हें प्रपोज करने वाला था.’’

‘‘तो अब कर दो न. शर्म तो मुझे करनी थी और शरमा तुम रहे थे.’’

‘‘लो, अभी किए देता हूं. अभी तो मेरे पास यही अंगूठी है, इसी से काम चल जाएगा.’’

इतना कह कर देव अपने दाहिने हाथ की अंगूठी निकालने लगा. अंजू ने उस का हाथ पकड़ कर रोकते हुए कहा, ‘‘तुम ने कहा और मैं ने मान लिया. मुझे तुम्हारी अंगूठी नहीं चाहिए. इसे अपनी ही उंगली में रहने दो.’’

‘‘ठीक है, बस 1 महीने से भी कम समय बचा है ट्रेनिंग पूरी होने में. इंडिया जा कर मम्मीपापा को सब बताऊंगा और फिर तुम भी वहीं आ जाना. इंडियन रिवाज से ही शादी के फेरे लेंगे,’’ देव बोला.

अंजू बोली, ‘‘मुझे उस दिन का बेसब्री से इंतजार रहेगा.’’

ट्रेनिंग के बाद देव इंडिया लौट आया. इधर उस की गैरहाजिरी में उस के पापा ने उस के लिए एक लड़की पसंद कर ली थी. देव भी उस लड़की को जानता था. उस के पापा के अच्छे दोस्त की लड़की थी. घर में आनाजाना भी था. लड़की का नाम अजिंदर था. वह भी पंजाबिन थी.

उस के पिता का भी टाटा में ही बिजनैस था. पर बिजनैस और सट्टा बाजार दोनों में बहुत घाटा होने के कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली थी. अजिंदर अपनी बिरादरी की अच्छी लड़की थी. उस के पिता की मौत के बाद देव के मातापिता ने उस की मां को वचन दिया था कि अजिंदर की शादी अपने बेटे से ही करेंगे. देव के लौटने के बाद जब उसे शादी की बात बताई गई तो उस ने इस रिश्ते से इनकार कर दिया.

उस की मां ने उस से कहा, ‘‘बेटे, अजिंदर की मां को उन की दुख की घड़ी में यह वचन दिया था ताकि बूढ़ी का कुछ बोझ हलका हो जाए. अभी भी उन पर बहुत कर्ज है… और फिर अजिंदर को तो तुम भी अच्छी तरह जानते हो. कितनी अच्छी है. वह ग्रैजुएट भी है.’

‘‘पर मां, मैं किसी और को पसंद करता हूं… मैं ने अजिंदर को कभी इस नजर से नहीं देखा है.’’

इसी बीच उस के पापा भी वहां आ गए. मां ने पूछा, ‘‘पर हम लोगों को तो अजिंदर में कोई कमी नहीं दिखती है… अच्छा जरा अपनी पसंद तो बता?’’ ‘‘मैं उस जापानी लड़की अंजु से प्यार करता हूं… वह एक बार हमारे घर भी आई थी. याद है न?’’

देव के पिता ने नाराज हो कर कहा, ‘‘देख देव, उस विदेशी से तुम्हारी शादी हमें हरगिज मंजूर नहीं. आखिर अजिंदर में क्या कमी है? अपने देश में लड़कियों की कमी है क्या कि चल दिया विदेशी लड़की खोजने? हम ने उस बेचारी को वचन दे रखा है. बहुत आसलगाए बैठी हैं मांबेटी दोनों.’’

‘‘पर पापा, मैं ने भी…’’

उस के पापा ने बीच में ही उस की बात काटते हुए कहा, ‘‘कोई परवर नहीं सुननी है हमें. अगर अपने मम्मीपापा को जिंदा देखना चाहते हो तो तुम्हें अजिंदर से शादी करनी ही होगी.’’ थोड़ी देर तक सभी खामोश थे. फिर देव के पापा ने आगे कहा, ‘‘देव, तू ठीक से सोच ले वरना मेरी भी मौत अजिंदर के पापा की तरह निश्चित है, और उस के जिम्मेदार सिर्फ तुम होगे.’’ देव की मां बोलीं, ‘‘छि…छि… अच्छा बोलिए.’’

‘‘अब सबकुछ तुम्हारे लाड़ले पर है.’’ कह कर देव के पापा वहां से चले गए. न चाहते हुए भी देव को अपने पापामम्मी की बात माननी पड़ी थी. देव ने अपनी पूरी कहानी और मजबूरी अंजु को भी बताई तो अंजु ने कहा था कि ऐसी स्थिति में उसे अजिंदर से शादी कर लेनी चाहिए. अंजु ने देव को इतनी आसानी से मुक्त तो कर दिया था, पर खुद विषम परिस्थिति में फंस चुकी थी. वह देव के बच्चे की मां बनने वाली थी. अभी तो दूसरा महीना ही चला था. पर देव को उस ने यह बात नहीं बताई थी.

उसे लगा था कि यह सुन कर देव कहीं कमजोर न पड़ जाए. अगले महीने देव की शादी थी. देव ने उसे भी सपरिवार आमंत्रित किया था. लिखा था कि हो सके तो अपने पापामम्मी के साथ आए. अंजु ने लिखा था कि वह आने की पुरजोर कोशिश करेगी. पर उस के पापामम्मी का तो बहुत पहले ही तलाक हो चुका था. वह नानी के यहां पली थी. देव की शादी में अंजु आई, पर उस ने अपने को पूरी तरह नियंत्रित रखा. चेहरे पर कोई गिला या चिंता न थी. पर देव ने देखा कि अंजु को बारबार उलटियां आ रही थीं.

उस ने अंजु से पूछा, ‘‘तुम्हारी तबीयत तो ठीक है?’’

अंजु बोली, ‘‘हां तबीयत तो ठीक है… कुछ यात्रा की थकान है और कुछ पार्टी के हैवी रिच फूड के असर से उलटियां आ रही हैं.’’ शादी के बाद उस ने कहा, ‘‘पिछली बार मैं बोधगया नहीं जा सकी थी, इस बार वहां जाना चाहती हूं. मेरे लिए एक कैब बुक करा दो.’’

‘‘ठीक है, मैं एक बड़ी गाड़ी बुक कर लेता हूं. अजिंदर और मैं भी साथ चलते हैं.’’ अगले दिन सुबहसुबह देव, अजिंदर और अंजु तीनों गया के लिए निकल गए. अंजु ने पहले से ही दवा खा ली थी ताकि रास्ते में उलटियां न हों. दोपहर के कुछ पहले ही वे लोग वहां पहुंच गए. रात में होटल में एक ही कमरे में रुके थे तीनों हालांकि अंजु ने बारबार अलग कमरे के लिए कहा था.

अजिंदर ने ही मना करते कहा था, ‘‘ऐसा मौका फिर मिले न मिले. हम लोग एक ही रूम में जी भर कर गप्प करेंगे.’’ अंजु गया से ही जापान लौट गई थी. देव और अजिंदर एअरपोर्ट पर विदा करने गए थे. एअरपोर्ट पर देव ने जब बायबाय कहा तो फिर अंजु ने हंस कर कहा, ‘‘सायोनारा, कौंटैक्ट में रहना.’’ समय बीतता गया. अजिंदर को बेटा हुआ था और उस के कुछ महीने पहले अंजु को बेटी हुई थी.

उस की बेटी का रंग तो जापानियों जैसा बहुत गोरा था, पर चेहरा देव का डुप्लिकेट. इधर अजिंदर का बेटा भी देखने में देव जैसा ही था. देव, अजिंदर और अंजु का संपर्क इंटरनैट पर बना हुआ था. देव ने अपने बेटे की खबर अंजु को दे रखी थी पर अंजु ने कुछ नहीं बताया था. देव अपने बेटे शिवम का फोटो नैट पर अंजु को भेजता रहता था. अंजु भी शिवम के जन्मदिन पर और अजिंदर एवं देव की ऐनिवर्सरी पर गिफ्ट भेजती थी.

देव जब उस से पूछता कि शादी कब करोगी तो कहती मेरे पसंद का लड़का नहीं मिल रहा या और किसी न किसी बहाने टाल देती थी. एक बार देव ने अंजु से कहा, ‘‘जल्दी शादी करो, मुझे भी गिफ्ट भेजने का मौका दो. आखिर कब तक वेट करोगी आदर्श पति के लिए?’’ अंजु बोली, ‘‘मैं ने मम्मीपापा की लाइफ से सीख ली है. शादीवादी के झंझट में नहीं पड़ना है, इसलिए सिंगल मदर बनूंगी. एक बच्ची को कुछ साल हुए अपना लिया है.’’

‘‘पर ऐसा क्यों किया? शादी कर अपना बच्चा पा सकती थी?’’

‘‘मैं इस का कोई और कारण नहीं बता सकती, बस यों ही.’’

‘‘अच्छा, तुम जो ठीक समझो. बेबी का

नाम बताओ?’’

‘‘किको नाम है उस का. इस का मतलब भी बता देती हूं होप यानी आशा. मेरे जीवन की एकमात्र आशा किको ही है.’’

‘‘ओके उस का फोटो भेजना.’’

‘‘ठीक है, बाद में भेज दूंगी.’’

‘‘समय बीतता रहा. देव और अंजु दोनों के बच्चे करीब 7 साल के हो चुके थे. एक दिन अंजु का ईमेल आया कि वह 2-3 सप्ताह के लिए टाटा आ रही है. वहां प्लांट में निप्पन द्वारा दी मशीन में कुछ तकनीकी खराबी है. उसी की जांच के लिए निप्पन एक ऐक्सपर्ट्स की टीम भेज रही है जिस में वह इंटरप्रेटर है.’’ अंजु टाटा आई थी. देव और अजिंदर से भी मिली थी. शिवम के लिए ढेर सारे गिफ्ट्स लाई थी.

‘‘किको को क्यों नहीं लाई?’’ देव ने पूछा.

‘‘एक तो उतना समय नहीं था कि उस का वीजा लूं, दूसरे उस का स्कूल… उसे होस्टल में छोड़ दिया है… मेरी एक सहेली उस की देखभाल करेगी इस बीच.’’ अंजु की टीम का काम 2 हफ्ते में हो गया. अगले दिन उसे जापान लौटना था. देव ने उसे डिनर पर बुलाया था. अगली सुबह वह ट्रेन से कोलकाता जा रही थी, तो देव और अजिंदर दोनों स्टेशन पर छोड़ने आए थे. अंजु जब ट्रेन में बैठ गई तो उस ने अपने बैग से बड़ा सा गिफ्ट पैक निकाल कर देव को दिया.

‘‘यह क्या है? आज तो कोई बर्थडे या ऐनिवर्सरी भी नहीं है?’’ देव ने पूछा.

अंजु ने कहा, ‘‘इसे घर जा कर देखना.’’ ट्रेन चली तो अंजु हाथ हिला कर बोली, ‘‘सायोनारा.’’

अजिंदर और देव ने घर जा कर उस पैकेट को खोला. उस में एक बड़ा सा फ्रेम किया किको का फोटो था. फोटो के नीचे लिखा था, ‘‘हिरोशिमा का एक अंश.’’ देव और अजिंदर दोनों कभी फोटो को देखते तो कभी एकदूसरे को प्रश्नवाचक नजरों से. शिवम और किको बिलकुल जुड़वा लग रहे थे. फर्क सिर्फ चेहरे के रंग का था.

Rubina Dilaik एक्सीडेंट के बाद किस हालत में है, पति अभिनव शुक्ला ने बताया

टीवी सीरियल एक्ट्रेस और बिग बॉस 14 सीजन की विनर रुबीना दिलैक हाल ही में एक बुरे कार एक्सीडेंट का शिकार हो गई है. जिसकी जानकारी रुबीना दिलैक के पति अभिनव शुक्ला ने खुद सोशल मीडिया पर दी है. अभिनव शुक्ला ने बताया कि एक्ट्रेस रुबीना दिलैक का गंभीर एक्सीडेंट 10 जून को उस समय हुआ जब वो मुंबई में दोपहर से कार से जा रही थी.

इसके बाद एक्ट्रेस रुबीना दिलैक के पति ने सोशल मीडिया के जरिए उनकी हालत के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि फिलहाल वो ठीक हैं और उनका इलाज चल रहा है.  रुबीना दिलैक के पति अभिनव शुक्ला ने ट्वीट में लिखा है कि, हमारे साथ ‘हमारे साथ हुआ है, आपके साथ भी ऐसा हो सकता है. फोन पर ट्रैफिक लाइट जंप करने वाले बेवकूफों से सावधान रहें. ऊपर से ऐसा करने के बाद वहां खड़े होकर मुस्कुराते हुए. अधिक जानकारी बाद में दूंगा. रुबीना कार में थी वो ठीक है, उसे मेडिकल के लिए ले जा रहा हूं.’ ये घटना 10 जून के दिन हुई थी.


रुबीना ने ट्वीट कर बताया अपना हाल

अभिनव शुक्ला के ट्वीट के बाद खुद ही टीवी एक्ट्रेस रुबीना दिलैक ने अपनी तबियत की जानकारी एक ट्वीट के जरिए दी. रुबीना ने आज सुबह एक ट्वीट कर कहा, ‘एक्सीडेंट के कारण मेरे सिर और पीठ के निचले हिस्से में काफी चोट लगी है. इस वक्त में गहरे सदमे में हूं. मैंने मेडिकल टेस्ट करवाया है. फिलहाल सब ठीक है. हमने लापरवाह ट्रक चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. हमारा नुकसान हुआ है. मैं आप सभी से निवेदन करती हूं कि हमारी और आप अपनी सभी की सुरक्षा के लिए सड़क के नियमों का पूरा पालन करें.’

रुबीना दिलैक टीवी की स्टार एक्ट्रेस है. वह टीवी सीरियल छोटी बहू नजर आई थी. इसके बाद रुबीना कलर्स के टीवी सीरियल शाक्ति में लीड रोल में नजर आई थी. उसके बाद रुबीना बिग बॉस 14 सीजन में नजर आई और बिग बॉस 14 की विनर बनी.

मिसकैरेज के दर्द को भूलकर हनीमून के लिए रवाना हुई दीपिका की ननद सबा

टीवी एक्टर शोएब इब्राहिम की दुलारी बहन और दीपिका कक्कड़ की प्यारी ननद सबा इब्राहिम अपने पति खालिद के साथ हनीमून के लिए कश्मीर रवाना हुई. पिछले महीने मई, 2023 में सबा इब्राहिम का मिसकैरेज हो गया था. सबा अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर बहुत ही खुश थी लेकिन वह दुखी भी थी क्योंकि उनको लगातार ब्लीडिंग हो रही थी. ऐसे में उन्हें काफी डर था कि बच्चा बचेगा या नहीं. हालांकि ऊपरवाले को कुछ और ही मंजूर था और सबा का डर सच में साबित हो गया. लेकिन इस बात को बीतो एक महीना हो गया है.

अब सबा इब्राहिम इस दुख से उबर चुकी है. वह अब शादी के बाद पहली बार हनीमून के लिए अपने पति संग कश्मीर जा रही है. बता दें, सबा इब्राहिम यूट्यूब व्लॉगर है वह व्लॉग के जरिए अपने फैंस को अपडेट्स देती रहती है. सबा ने अपने लेटेस्ट वीडियो में बताया है कि वह अपने पति के साथ हनीमून के लिए रवाना हो गई है.

सबा ने नोएडा में की शॉपिंग

सबा इब्राहिम और खालिद ने अपनी व्लॉगिंग वीडियो में बताया कि वह जहां-जहां रुके है वहीं उसी जगह की अपडेट फैन्स को दी. साथ ही वह नोएडा सेक्टर 16 के एक मशहूर मॉल में भी आए. वहां, से उन्होंने काफी शॉपिंग की. इसके बाद वहां मॉल में सबा के कुछ सब्सक्राइबर्स भी मिले. उनके साथ उन्होंने सेल्फी भी ली. देर हो जाने के कारण, उन्होंने दिल्ली में ही रात बीताने का फैसला किया और सुबह जम्मू के लिए निकलने का प्लान किया.

 

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जम्मू पहुंचे सबा और खालिद

बता दें, खालिद ने अपने वीडियो में बताया कि उन्हें ट्रेन की टिकट नहीं मिली इसी वजह से वह अब कार से कश्मीर की दूरी तय करेंगे. इसके बाद दोनों कपल वहीं पास में कोई होटल देखते है और वहीं उस होटल में स्टे करते है. इसके बाद दोनों थोडी शॉपिंग करते है और फिर सुबह रवाना होते है. जगह-जगह रुककर वह व्लॉगिंग करते है और बताते हैं वहां से कश्मीर कितना दूर है और अंत में वह जम्मू पहुंच जाते हैं, जिसके बाद सबा की खुशी का कोई ठिकाना नहीं होता.

रिश्तेनाते: भाग 3- दीपक का शक शेफाली के लिए बना दर्द

शेफाली उम्र में भी सन्नी से बड़ी थी और रिश्ते में भी. शेफाली ने अपने को बड़ा माना था तो सन्नी ने भी उसे बड़प्पन दिया था. सन्नी अपनी मां की भले ही नहीं सुने, मगर वह शेफाली की बात को टालने की कभी हिम्मत नहीं करता था.

कभीकभी तो शेफाली को ऐसा लगता कि वह उस से डरने लगा था.

इस बात का एहसास शेफाली को उस वक्त हुआ था जब कपड़ों की धुलाई करते हुए उसे सन्नी की पतलून की जेब से गुटके का एक अनखुला पाउच मिला था.

‘‘कालेज में जा कर क्या यही बुरी आदतें सीख रहे हो?’’ गुटके का पाउच सन्नी को दिखलाते हुए शेफाली ने डांटने वाले अंदाज में कहा था.

बाद में सन्नी ने उस से कई बार माफी मांगी

थी. ऐसी घटनाओं से उन के रिश्ते में विश्वास बढ़ा था. सन्नी के साथ शेफाली का एक पवित्र रिश्ता था. उन्मुक्त होने के बाद भी उस रिश्ते में एक मर्यादा थी.

लेकिन शेफाली को नहीं मालूम था कि सन्नी के साथ उस की अंतरंगता को दीपक किसी दूसरी नजर से देख रहा था. उस के अंदर शंका का नाग कुंडली मार कर बैठ गया था. देवरभाभी के बीच पवित्र रिश्ते में भी उसे कुछ गलत दिखने लगा था.

इस बात से शेफाली तब तक बेखबर रही

जब तक कि दीपक के मन में कुंडली मारे बैठा शक का नाग अपना फन उठा कर फुंफकार नहीं उठा था. उस वक्त शिखा जन्म ले चुकी थी और शेफाली भविष्य के नए सपने संजो रही थी.

दीपक के शक की जहरीली फुंफकार ने शेफाली को हक्काबक्का सा कर दिया था.

जिंदगी के ऐसे बदरंग पहलू के बारे में तो उस ने कभी सोचा भी नहीं था. किसी औरत के लिए सब से मुश्किल काम होता है अपने चरित्र पर शक करने वाले इनसान के साथ रहना.

जल्दी ही दीपक के साथ दांपत्य संबंधों में

शेफाली का दम घुटने लगा था.

सन्नी और शेफाली के रिश्ते पर शक जाहिर कर के दीपक ने संबंधों में ऐसी दरारें पैदा कर दी थीं, जिन का भरना मुश्किल था. पतिपत्नी के रिश्ते की असली बुनियाद तो विश्वास ही होती है. इस बुनियाद को शक की दीमक जब खोखला कर देती है तो उस पर उन के रिश्ते की इमारत बहुत दिनों तक खड़ी नहीं रह पाती.

ऐसा ही हुआ था. रिश्तों की इमारत ढह गई और शेफाली ने दीपक से अलग होने का फैसला कर लिया.

बहुत कुछ अप्रत्याशित और बुरा घट गया था. मगर इस का अच्छा पहलू केवल यही था कि उन के संबंध टूटने का ज्यादा तमाशा नहीं हुआ. दूसरे नाजुक रिश्ते अप्रभावित रहे. एक परिवार भी टूटने से बच गया. सब कुछ शेफाली और दीपक के बीच में ही निबट गया था.

होटल आ गया था. बाहर के सर्द मौसम से होटल के अंदर दाखिल होना शरीर को थोड़ा राहत देने वाला अनुभव था. यह राहत शेफाली को अतीत की यादों से भी बाहर ले आई.

सन्नी भले ही शर्म और संकोच महसूस कर रहा था, लेकिन शेफाली ने अमित से उसे मिलवाते हुए उस के बारे में कुछ भी नहीं छिपाया था.

अमित ने भी इसे बड़े सहज भाव से लिया था और सन्नी के प्रति गरमजोशी दिखलाई थी.

शेफाली अपने अतीत और वर्तमान को एकसाथ देख बड़ा अजीब महसूस कर रही थी. शेफाली ने कमरे में लगे फोन से 3 कप कौफी और कुछ स्नैक्स का आर्डर दे दिया था.

अमित का कोई भाई नहीं था. दूसरी शादी के बाद शेफाली को पति जरूर मिल गया था, मगर सन्नी वाला रिश्ता नहीं. सन्नी जैसे देवर की कमी लगातार उसे महसूस होती थी.

कौफी के आने तक अमित सन्नी से उस की

पढ़ाई और भविष्य के बारे में उस की योजनाओं पर चर्चा करता रहा. अमित ने सन्नी से एक भी ऐसा सवाल नहीं पूछा, जिस का संबंध उस के निजी जीवन से होता.

कौफी के आने के बाद चर्चा का रुख बदला और उस में शेफाली भी शामिल हो गई. इस बार की चर्चा शिमला के इतिहास और दूसरे हिल स्टेशनों के मुकाबले में उस की खास खूबियों पर केंद्रित रही.

अंत में तो अमित ने सन्नी को अपने यहां आने का खुला निमंत्रण तक दे डाला.

इस के जवाब में सन्नी कुछ भी नहीं कह सका था. अमित से मिलने के बाद सन्नी जब जाने लगा तो शेफाली उसे होटल के गेट तक छोड़ने आई.

सन्नी के चेहरे से लगता था कि कुछ सवाल उस के सीने में उमड़घुमड़ रहे थे.

‘‘हम 2-4 दिन यहीं हैं. हो सके तो मिलने आ जाना.’’

‘‘जी.’’

‘‘कुछ कहना चाहते हो?’’ शेफाली ने पूछा.

‘‘शायद, अगर आप को बुरा न लगे.’’

‘‘तुम कहो, मुझे बुरा नहीं लगेगा,’’ शेफाली ने कहा.

सन्नी कुछ पल खामोश रहा. शायद वह जो कहना चाहता था, उसे कहने में उसे संकोच हो रहा था.

‘‘मैं आज भी आप की उतनी ही इज्जत करता हूं जितनी कि पहले करता था. आप की नाराजगी का डर भी है मुझे. जो कहना चाहता हूं शायद वह मेरी गुस्ताखी भी लगे. इस के बाद भी मैं अपनी बात कहूंगा. आप ने भैया से संबंध को तोड़ा, मगर इस का दर्द दूसरे रिश्तों में भी फैला. दुनिया में बहुत से शादीशुदा स्त्री और पुरुष झगड़ते हैं, उन में बनती नहीं, लेकिन वे सब एकदूसरे को छोड़ तो नहीं देते. अगर झगड़े होते हैं तो सुलहसफाई के अवसर भी होते हैं, किंतु आप लोगों ने तो सुलहसफाई वाला कोई अवसर ढूंढ़ा ही नहीं, सीधे ही जिंदगी का इतना बड़ा फैसला ले लिया. आखिर ऐसी क्या बात हो गई थी, जिस में सुलहसफाई और शादीशुदा संबंधों को बनाए रखने की गुंजाइश ही खत्म हो गई थी? मैं आज आप से इस सवाल का जवाब मांगता हूं, हालांकि बदले हुए हालात में इस का मुझे हक नहीं,’’ सन्नी के शब्दों में एक अनकहा दर्द था.

शेफाली उस के इस दर्द को महसूस कर

सकती थी. उस का यह दर्द एक नासूर बन जाता, अगर शेफाली उस के सवाल का सही जवाब देती.

इसलिए सन्नी के सवाल के जवाब में शेफाली ने स्नेह से अपना हाथ उस के कंधे पर रखते हुए कहा, ‘‘तुम एक ऐसे सवाल का जवाब क्यों मांगते हो, सन्नी, जिस से अब कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है. जो बीत गया, खत्म हो गया और जिस के वापस आने की कोई संभावना नहीं, उस के लिए अब सवालों में उलझने से क्या फायदा? अतीत कभीकभी राख के उस ढेर जैसा भी होता है जिस को कुरेदने की कोशिश में उस में दबी हुई चिनगारियां हाथ को जला भी देती हैं. इसलिए अच्छा है कि अपने सवाल से तुम भी अतीत की राख को मत टटोलो.’’

शेफाली की बात से सन्नी क्या समझा, क्या

नहीं, वह कह नहीं सकती. मगर लगता था उस ने अपने सवाल का जवाब मांगने की जिद का इरादा छोड़ दिया था.

‘‘चलता हूं,’’ झुक कर शेफाली के कदमों को छूते हुए सन्नी ने कहा.

शेफाली के सीने में कुछ कसक गया. सच था, एक रिश्ता टूटने से कई रिश्ते टूटे थे.

शेफाली की आंखों में नमी आ गई. भरी हुई आंखों से उस ने धुंध में गायब होते हुए सन्नी को देखा.

अतीत बुरा हो या अच्छा, अगर उस से कभी सामना हो जाए तो वह दर्द ही देता है.

खुशियों का आगमन: भाग 2-कैरियर या प्यार में क्या चुनेंगी रेखा?

आखिर एक पार्टी में राजेश से मुलाकात हो ही गई. रेखा ने जबरन अपने चेहरे पर मुसकान बिखेरते हुए पूछा, ‘‘अरे, ईद का चांद आज कैसे दिखाई दे दिया.’’

‘‘अगर यही मैं कहूं तो?’’

‘‘बहुत गस्से में हो?’’

‘‘मेरे गुस्से की तुम्हें क्यों इतनी फिक्र होने लगी?’’

‘‘मुझे नहीं तो और किसे होगी? अब और कितना तड़पाओगे?’’

‘‘मैं कौन होता हूं तड़पाने वाला?’’

‘‘अब फैसला करने का वक्त आ गया है,

राजेश, मैं बारबार तुम्हारी मिन्नतें नहीं करूंगी.’’

‘‘हम ने जो तय किया था क्या वह भूल गईं?’’

‘‘मगर मेरे घर वाले अब ज्यादा दिनों तक रुकने के लिए तैयार नहीं हैं. मेरी शादी के लिए काफी रिश्ते आ रहे हैं. पिताजी ने भी उस दिन बातोंबातों में पूछ लिया कि क्या तुम्हें कोई लड़का पसंद है?’’

‘‘अरे, बाप रे. तुम ने कहीं मेरा नाम तो नहीं बताया न?’’

‘‘नहीं, क्योंकि मैं चाहती हूं कि तुम खुद घर आ कर अपना परिचय दो.’’

खाने की टेबल के पास सभी लोग आ जाने से उन की बातचीत वहीं रुक गई. उस ने तय किया कि वह खुद ही घर वालों को सब बता देगी.

रेखा के घर आते ही भाई ने मजाक करते हुए कहा, ‘‘क्यों रेखा, शादी करने का विचार है या नहीं? अरे भई, मैं भी अभी कुंआरा हूं.’’

‘‘रेखा की शादी होने पर मैं भी चैन की सांस लूंगा,’’ पिताजी ने कहा.

‘‘लड़कियों के लिए शादी, बच्चे, घरसंसार सभी वक्त पर हों तो ही अच्छा है,’’ मां ने चिंता भरे स्वर में कहा.

काफी सोचने के बाद रेखा ने तय

किया कि आज वह पिताजी को सब बता

देगी. आखिर यह दिनरात की टेंशन कौन

पाले? राजेश कोई निर्णय लेने के लिए तैयार नहीं है. अब पिताजी ही मुझे सही राह दिखा सकते हैं.

उस ने हिम्मत जुटाई. पिताजी से जो कहना है, मन में उस की पूरी तैयारी कर ली. फै्रश हो कर चाय का कप लिए वह पिताजी

के पास आ कर बैठ गई, मगर तभी उस का मौसेरा भाई मनी काफी दिनों बाद घर आया.

उस से बातचीत और चुटकुलों में 2 घंटे यों ही बीत गए.

‘‘रेखा बेटी, मेरे लिए जरा पानी लाना,’’

पिताजी के कमरे से आवाज आई.

पिताजी के लिए पानी ले कर जाते वक्त उस ने यह जान लिया कि आज फिर कोई नया रिश्ता आया होगा. शायद मनी भैया ही यह रिश्ता ले कर आए होंगे. अगर पिताजी ने

शादी का जिक्र छेड़ा तो मैं राजेश के बारे में उन्हें सब कुछ बता दूंगी. यही निश्चय कर

वह कमरे में दाखिल हुई. पानी का गिलास टेबल पर रख कर वह पलंग के किनारे खड़ी हो गई.

‘‘बेटी, मुझे तुम से कुछ बात करनी

है,’’ पिताजी के खुद ही विषय छेड़ने पर उस का काम और आसान हो गया. अब कहां से शुरू करूं, वह अभी यही सोच रही थी कि पिताजी ने कहा, ‘‘दोपहर में राजेश घर

आया था.’’

यह सुनते ही उस का दिल धड़क

उठा. इस अप्रत्याशित घटना का सामना

वह कैसे कर सकती थी, लिहाजा खामोश

खड़ी सोचती रही. कितना छिपा रुस्तम है राजेश. मैं ने उस की इतनी मिन्नतें कीं, तब इनकार करता रहा और अब खुद ही हाथ

मांगने आ गया. पिताजी को वह जरूर पसंद

आ गया होगा. आखिर पसंद किस की है? मगर पिताजी के हावभावों से कैसे अंदाजा लगाया जाए?

‘‘राजेश किस तरह का लड़का है?’’ पिताजी ने पूछा.

‘‘अच्छा है, हम दोनों एकदूसरे को पसंद करते हैं. उस का स्वभाव, व्यक्तित्व, पढ़ाई, लगन, जिद, महत्त्वाकांक्षा सभी मुझे पसंद हैं. इस के अलावा हम दोनों एक ही नौकरी में होने

के कारण एकदूसरे की समस्याएं, काम के

लिए लगने वाला समय आदि सभी बातों

से अच्छी तरह परिचित हैं. इसलिए मेरे

नौकरी करने पर उसे कोई आपत्ति नहीं होगी. पिताजी, राजेश के साथ शादी कर के मैं

सुखी रहूंगी.’’

‘‘अच्छी तरह सोच लिया है?’’

‘‘जी हां, हम दोनों एकदूसरे के अनुरूप हैं, पढ़ाई, स्वभाव, नौकरी आदि सब मामलों में.’’

‘‘उस की जाति के बारे में कभी पूछा

है?’’

‘‘जाति? जी नहीं, कभी जरूरत ही नहीं पड़ी और आप भी तो जातिभेद वगैरह में विश्वास नहीं करते हैं. इसलिए मैं ने कभी उस से इस बारे में नहीं पूछा.’’

‘‘हां, यह सच है कि मैं जातिभेद में विश्वास नहीं करता हूं. मगर शादीब्याह में पूछताछ भी तो जरूरी होती है, क्या तुम्हें उस का पूरा नाम पता है?’’

‘‘पूरा नाम? राजेश सावंत.’’

‘‘जिस के साथ तुम पूरी जिंदगी गुजारने जा रही हो, उस का पूरा नाम भी तुम्हें पता

नहीं है?’’

वह खामोश खड़ी रही.

‘‘उस का पूरा नाम जानना चाहती हो, क्या

है? राजेश उर्मिला सावंत.’’

‘‘क्या?’’

‘‘हां, क्योंकि उस की सिर्फ  मां है, उस के पिता के बारे में न उसे और न ही उस की मां को कुछ पता है.’’

‘‘यह आप क्या कह रहे हैं?’’

‘‘मैं सच कह रहा हूं, बेटी, उसे अपने पिता के बारे में कुछ पता नहीं है और न ही उस की मां को पता है, क्योंकि उस की मां एक वेश्या थी और राजेश एक वेश्या का बेटा है.’’

‘‘नहीं, यह सब गलत है, राजेश मेरे साथ

ऐसा नहीं कर सकता है. उस ने मुझे अंधेरे में रखा है, पिताजी, उस ने मेरे साथ विश्वासघात किया है,’’ और वह पिता के गले लग कर रोने लगी.

Beauty Tips for Summer: आज ही फॉलो करें, ये 10 समर ब्यूटी टिप्स

गर्मियों का सीजन आ चुका है ऐसे में त्वचा का देखभाल करना बहुत जरूरी है. धूप में निकलने की वजह से टेंनिग होने लगती है. गर्मियों में आपकी त्वचा रूखी,बेजान और धब्बे हो जाते है. जिसके कारण मुहांसे और त्वचा की एलर्जी बढ़ जाती है. इसलिए, इस सीजन में जब आप शॉर्ट्स और स्लीवलेस कपड़े पहनने की सोचे, तो एक बार ये सुनिश्र्चित कर लें कि आपकी त्वचा सुरक्षित रहे. अपने स्किनकेयर रूटीन को लेकर आलस्य न करें और स्वस्थ रहने के लिए गर्मियों में इन आसान स्किन केयर टिप्स का पालन करें.

  1. हाइड्रेटेड रहना

गर्मियों में पानी पीना सेहत के लिए अच्छा है. इस समय आपका शरीर अधिक नमी खोने के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है. इसलिए, जरूरी है कि आप लगातार ज्यादा से ज्यादा पानी पीकर खुद को हाइड्रेट करें.

त्वचा को सॉफ्ट और नमीयुक्त रखते हुए शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने के लिए कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं. अगर आप पानी पीने के शौकीन नहीं हैं, तो उसकी जगह नरियल पानी पी सकते हैं.

2. वातित पेय पदार्थों से बचें

वातित पेय पदार्थों में ढ़ेर सारा फॉस्फोरिक एसिड होता है जो सेहत के लिए बुरा है. गर्मियों में पानी, जूस और नरियल पानी पीना सबसे बेहतरीन है. जब आप धूप में निकले कैफिन युक्त पदार्थों से बचें, क्योंकि ये सब पानी के स्तर को कम करते हैं.

3. टोनर का इस्तेमाल करें

गर्मियों में त्वचा की सुरक्षा करना एक चुनौतीपूर्ण काम है. लेकिन एक साधारण टोनर, जैसे गुलाब जल, आपका समर फ्रेंड हो सकता है. आप स्किन टोनर का उपयोग करके अपनी गर्मियों की त्वचा देखभाल व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बना सकते हैं, क्योंकि यह गर्मियों में खुलने वाले छिद्रों को कम करने में मदद कर सकता है जिससे मुँहासे और पिंपल्स होने की संभावना कम हो जाती है.

4. होठों की देखभाल करें

आपके होठों नाजुक होते है गर्मियों के दौरान सूख और शुष्क हो सकते हैं. इसलिए, गर्मियों में होंठों की त्वचा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिप ऑयल या लिप बाम का उपयोग करें.

5 . पर्याप्त नींद लें

अक्सर लोग गर्मियों में कम नींद लेते हैं. काम के कारण, वे गर्मियों में कम सोते हैं. हालांकि, गर्मियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण त्वचा देखभाल करना बेहद जरूरी है कि आप ठीक से सोएं. सात से आठ घंटे की नींद जरूरी है. और आपको गर्मियों के दौरान दिन में सोने से बचना चाहिए क्योंकि यह आपको रात के दौरान  नींद लेने से रोक सकता है.

6. शरीर को कवर करें

गर्मियों में शरीर को कवर करें क्योंकि, अक्सर सूरज की किरणों से उम्र बढ़ने का कारण भी बनती हैं और मुख्य रूप से त्वचा कैंसर के लिए जिम्मेदार होती हैं. तो, गर्मियों में इस सौंदर्य टिप का उपयोग करें और अपने आप को कवर करें, खासकर जब सूरज अपने चरम पर हो, या सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक बाहर निकलने से बचें. अपनी त्वचा को अंदर से ठीक करने के लिए अपने खाली समय में आम को अपने चेहरे पर लगाएं.

7. सनस्क्रीन का प्रयोग करें

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि बाहर धूप है या बादल छाए हुए हैं, आपको सनस्क्रीन लगानी चाहिए. यह आपकी त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए गर्मियों में सबसे अच्छी त्वचा देखभाल युक्तियों में से एक है. हालांकि, यह सोचकर लालच न करें कि उच्च एसपीएफ़ का मतलब अधिक सुरक्षा है.

8. किस तरह से सनस्क्रीन का उपयोग करें 

यह सच है क्योंकि एसपीएफ़ 30 उत्पादों की तुलना में 50-100 एसपीएफ़ के साथ सनस्क्रीन केवल 2-3% अतिरिक्त अवरोध प्रदान करते हैं. इसलिए, नियमित रूप से सनस्क्रीन का उपयोग करें और हर 90 मिनट में दोबारा लगाएं. अपने चेहरे की त्वचा की सुरक्षा के लिए आप ग्लोइंग स्किन के लिए फेस मास्क लगा सकते हैं.

9. स्किन को साफ करें

गर्मियों में त्वचा को दिन में कम से कम दो बार सौम्य फ़ेस वॉश से साफ़ करें जो आपकी त्वचा के प्रकार के अनुकूल हो. यह गर्मियों में तैलीय त्वचा की देखभाल के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है. गर्मियों में अपनी त्वचा को तरोताजा करने के लिए आप फेस मिस्ट का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

10. एक्सफोलिएट करें

सप्ताह में कम से कम दो से तीन बार अपनी त्वचा को एक्सफोलिएट करना महत्वपूर्ण है,  अखरोट के स्क्रब का प्रयोग करें. ऐसा करने से डेड स्किन सेल्स खत्म हो जाते हैं जो गर्मियों में आपके रोमछिद्रों को बंद कर देते हैं. यह रक्त परिसंचरण में सुधार करता है और गर्मियों में त्वचा की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करता है.

बोलने की आजादी के नाम पर जहर फैला रहे है

व्हाट्सएप और ट्विटर अब के नहीं रहेंगे जो अब तक थे. लगता है उन में खुल कर हेट स्पीच और फेक न्यूज देने के दिन लदने लगे हैं. अंधभक्तों की एक बड़ी फौज ने उस बहुत ही उपयोगी मीडिया का जो गलत इस्तेमाल अपना जातिवादधर्मवाद और पुरुषबाद फैलाने के लिए किया था वह कम होने लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में साफ कहा है कि हेट स्पीच देने वालों के खिलाफ पुलिस को खुद एक्शन शुरू करना होगा. व्हाट्सएपट्विटरइंस्टाग्रामफेसबुकयूंट्यूव इसी हेट स्पीच ने बलबूते पर पनत रहे थे.

यह आम बात है कि जहां आपस में 4 जने झगडऩे लगें. 40 लोग तमाशा देखने के लिए खड़े हो जाते हैं. आज की औरततों का सब से बड़ा पार टाइम कोई विवादकिसी की चुगलीकिसी के घर का झगड़ा है. किट्टी पाॢटयों में किस के घर में क्या हुआ की बात होती हैक्या अच्छा करा जाए की नहीं.

व्हाट्सएपफेसबुकइंस्टाग्रामट्विटर के माध्यम से हेट स्पीच और फेक न्यूज की खट्टीमीठी गोली ऐसे ही नहीं दी जाती है. इस के पीछे बड़ा उद्देश्य है पूजापाठ करने वालों के चंदा जमा करनामंदिरों के लिए भीड़ जुटानाघरों में दान करने की लत डालनाआम जनता को तीर्थों में ले जानाआम औरत को बहकाकर पति या सास के अत्याचार से बचने के लिए व्रतपाठमन्नत का सहारा लेना जिस से धर्म की दुकान पर सोना बरसे.

यह ऐसे ही नहीं है कि देश भर में मंदिरोंभक्तोंआश्रणोंबाबाओं की खेती दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ रही है. इस में व्हाट्सएपट्विटरइंस्टाग्राम और फेसबुक का बड़ा हाथ है जिस पर धर्म के दुकानदार बुरी तरह छाए हुए है ओर हर पोज में बड़ा चौड़ा बखान किया जाता है. फेक न्यूज और हेट स्पीच के लिए आए लोग इस प्रचार से प्रभावित होते ही हैं.

एल्ट न्यूज चलाने वाले मोहम्मद जुबेर पर पोस्को एक्ट में शिकायत करने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने अब शिकायतों के खिलाफ मुकदमा दायरकरने का आदेश दिया है. मोहम्मद जुबैर के खिलाफ शिकायत करने वाले ने ट्वीटर पर एक तीखे कमेंट धर्म को लेकर किए थे जिस पर जुबेर ने कहा था कि महाश्य गालियां बकने से पहले कम से कम डीपी से अपनी पोती का फोटो तो हटा दो. इस पर चाइल्ड एब्यूज का मामला बना डाला गया और पुलिस ने तुरंत जुबेर को गिरफ्तार भर कर लिया. सुप्रीम कोर्ट ने इसे रिहा कर दिया और अब पुलिस कहती है कि अपराध बनता ही नहीं है. यह नहीं बताती कि जब अपराध बनता ही तो गिरफ्तार क्यों किया था.

पुलिस अफसरो को तो सजा हाई कोर्ट ने नहीं दी है पर शिकायती के खिलाफ झूठी शिकायत का मुकदमा करने का आदेश दे दिया है. व्हाट्सएपइंस्टाग्रामफेसबुकट्विटर पर फेक न्यूज डालने वालों के यह चेतावनी है. मजा तब आएगा जब इन्हें फौरवर्ड करने वालों को भी बराबर का अपराधी माना जाने लगे. दानपुण्य की दुकान चलाने के लिए धाॢमक पंडों ने पूरे समाज को कितने ही टुकड़ों में बांट डाला है. औरतों को तो अलगअलग माना जाता रहा हैअब सब धर्मों ही नहीं जातियों को टुकड़ों में बांट दिया है.

इन डिजिटल प्लेटफार्मों पर दलितकुर्मीअहीरजाटराजपूरब्राह्मïवैश्व गु्रप बने हुए हैं जिन में अपनाअपना बखान किया जाता है. फेक न्यूज से हर जाति अपने को महान बता रही है. हरेक के अपने मंदिरपुजारी हैं. ये प्लेट फार्म अलगाव को बुरी तर फैला रहे हैं.

मोबाइल आज फोन नहीं मशीनगन बन गया है जो आप के दिमाग को भून सकता है और आप इस से सैंकड़ों के दिमाग भूल सकते हैं.

पुरुषों के अधिक झूठ बोलने के पीछे का राज क्या है, जानिये यहां

सुरेश ने फ़ोन पर नीलम को कहा कि उसे घर आने में देर होगी और आज रात की पार्टी में नहीं जा सकेगा. नीलम को पहले गुस्सा आया, लेकिन सुरेश के काम की व्यस्तता को समझकर चुप रह गई. वह अपनी सहेली से फ़ोन पर बात कर ही रही थी कि अचानक दरवाजे की घंटी बजी, दरवाजा खोला, तो सामने सुरेश हँसता हुआ खड़ा था, क्योंकि उसे पता था कि नीलम गुस्सा होगी. अब नीलम ने सहेली के साथ बात करना बंद किया और सुरेश को डांटने लगी कि ये कैसा झूठ है, जो मुझे तकलीफ दें. सुरेश ने हँसते हुए जवाब दिया कि मैं तुम्हे सरप्राइज देना चाहता था, इसलिए ऐसा किया. अब नीलम मान गई और दोनों पार्टी में चले गए. ये मजेदार, छोटी सी झूठ थी और सरप्राइज होने की वजह से सब ठीक हो गया, लेकिन ऐसी कई घटनाएं देखी गई है, जहाँ झूठ  बोलने की आदत ने सारे रिश्ते ख़त्म कर दिए.

सफ़ेद झूठ…..’, ‘झूठ बोले कौवा काटे…’ आमदनी अठन्नी…..आदि कई ऐसी फिल्में है, जो झूठ बोलने को लेकर ही कॉमेडी के रूप में बनाई गई और दर्शकों ने ऐसी फिल्मों को पसंद किया, क्योंकि ये पर्दे पर थी, रियल लाइफ में नहीं, लेकिन झूठ बोलने की आदत कई बार जीवन के लिए खतरनाक भी हो जाती है और इस झूठ को सच साबित करने में सालों लग जाते है.

ये सही है कि हर धर्म में झूठी बातों का शिकार महिलाएं ही हुई है, इसे कहने वाले पुरुष ही है, क्योंकि महिलाएं संवेदनशील होती है और इन धर्मगुरुओं की बातों को सहजता से मान लेती है, मसलन बीमार होने पर भी व्रत या उपवास करना, अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए नंगे पाँव मीलों चलना आदि सभी निर्देशों को महिलाएं सच्चे मन से पूरा करती है.

रिसर्च में भी ये बात सामने आई है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में झूठ कम बोल पाती है. असल में अधिकतर महिलाएं पुरुषों से अधिक सेंसेटिव और इमानदार होती है, उनपर लोग आसानी से ट्रस्ट कर सकते है. इसलिए उन्हें अधिक झूठ बोलने की जरुरत नहीं पड़ती. जेंडर को लेकर शोध करने पर यह भी पाया गया कि झूठ बोलने से अगर झूठ बोलने वाले को फायदा होता है, तो वह बार-बार झूठ बोलता है. पुरुषों के लगातार झूठ बोलने की वजह 3 है, शेम , प्रोटेक्शन एंड रेपुटेशन.

असल में अपना रियल चेहरा छुपाने के लिए लोग झूठ बोलते है, ताकि दूसरे की भावनाओं को ठेस न पहुंचे. इसके अलावा दूसरों को इम्प्रेस करने, उत्तरदायित्व से पल्ला झाड़ने, कुकर्मों को छिपाने के लिए, सामाजिक पहलूओं से दूर भागने, कनफ्लिक्ट को दूर करने, आदि कई कारणों से बोलते है. मनोवैज्ञानिक मानते है कि झूठ बोलना लाइफ की एक कंडीशन है.

मस्तिष्क की एक्टिविटी के बारें में बात की जाय तो पता चलता है कि झूठ बोलने से हमारे मस्तिष्क की कुछ पार्ट स्टीमुलेट भी हो जाता है. इसमें पहले फ्रंटल लोब यानि जिसकी क्षमता सच्चाई को आसानी से दबाने की होती है और ये झूठ को एक इंटेलेक्चुअल तरीके से रखने की क्षमता रखता है. दूसरा लिम्बिक सिस्टम, जो अधिकतर एंग्जायटी की वजह से होता है, इसमें झूठ बोलना एक धोखा भी माना जाता है और व्यक्ति कई बार अपराधबोध या स्ट्रेस्ड से ग्रसित होकर भी झूठ बोलता है. तीसरा टेम्पोरल लोब में व्यक्ति झूठ बोलने के बाद से एक आनंद महसूस करता है. झूठ बोलने पर हमारा ब्रेन सबसे अधिक व्यस्त रहता है.

इस बारें में काउंसलर राशिदा कपाडिया कहती है कि सर्वे में भी ये स्पष्ट है, झूठ बोलने की आदत लड़कों को बचपन से ही शुरू हो जाती है और ये झूठ वे अपनी माँ से अधिकतर बोलते है. इसकी वजह यह है कि पुरुष संबंधों में कडवाहट नहीं चाहते, क्योंकि सही बात शायद उनके पार्टनर को पसंद न हो, तर्क-वितर्क चल सकता है.

इसलिए उसे अवॉयड करने के लिए पुरुष झूठ का सहारा लेते है. इसके अलावा किसी काम को अवॉयड करना, या सोशल इवेंट में नहीं जाना, हो तो झूठ बोलते रहते है. साथ ही पुरुषों का इगो बड़ा होता है, वे अपनी कमजोरियां दिखाना नहीं चाहते, इस वजह से भी झूठ बोलते है. कई बार किसी दूसरे शौक को पूरा करने के लिए झूठ बोलने का सहारा लिया जाता है. साथ ही यह भी देखा गया है कि पुरुषों को गिल्ट फीलिंग महिलाओं की अपेक्षा कम होती है.

महिलाओं में अपराधबोध अधिक होता है, वे झूठ बोलकर अधिक समय तक नहीं रह पाती और सच बोल देती है. पुरुष इमोशनल कम होते है और प्रैक्टिकल अधिक सोचते है. झूठ बोलना उनके लिए बड़ी बात नहीं होती, क्योंकि व्यवसाय या जॉब में वे छोटी-छोटी झूठ बोलते रहते है. पुरुषों का झूठ पकड़ना आसान नहीं होता, क्योंकि वे बहुत सफाई से झूठ बोल लेते है और  महिलाएं भी उसे आसानी से विश्वास कर लेती है.

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