Father’s Day 2023: पिता का नाम- एक बच्चा मां के नाम से क्यों नहीं जाना जाता

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अपने जैसे लोग: भाग 1-नीरज के मन में कैसी शंका थी

इस नए फ्लैट में आए हमें 6 महीने हो गए हैं. आते ही जैसे एक नई जिंदगी मिल गई है. कितना अच्छा लग रहा है यहां. खुला व स्वच्छ वातावरण, एक ही डिजाइन के बने 10-12 पंक्तियों में खड़े एक ही रंग से पुते फ्लैट. सामने लंबाचौड़ा खुला पार्क, जिस में शाम के समय खेलने के लिए बच्चों की भीड़ लगी रहती है. पार्क से ही लगती हुई दूरदूर तक फैली सांवली, नई बनी चिकनी नागिन सी सड़क, जिस पर एकाध कार के सिवा अधिक भीड़ नहीं रहती. कितना अच्छा लगता है यह सब. हंसतेखेलते हम दूर तक घूम आते हैं.

इन 6 महीनों से पहले जिस जगह 3 महीने गुजार कर आई थी, वहां तो ऐसा लगता था जैसे बदहाली में कोई एक कोना हमें रहने के लिए मिल गया हो. पुरानी दिल्ली में दोमंजिले मकान के नीचे के हिस्से में कमरा रहने को मिला था. धूप का तो वहां नामोनिशान नहीं था. प्रकाश भी नीचे की मंजिल तक पहुंचने में असमर्थ था. आधे कमरे में मैं ने रसोई बनाईर्र्र् हुई थी, आधे में सोना होता. एक छोटी सी कोठरी में नल लगा था, जिसे बरतन साफ करने व कपड़े धोने के अलावा नहाने के काम लाया जाता था.

यह तो अच्छा हुआ कि दिल्ली आने के कुछ महीनों बाद ही ये सरकारी फ्लैट बन कर तैयार हो गए, नहीं तो शायद जीवन या तो उसी बदहाली में बिताना पड़ता या नीरज को नौकरी ही कहीं और तलाश करनी पड़ती.

अपने इस नए मकान को मैं और नीरज थोड़ाथोड़ा कर के इस तरह सजाते रहते जैसे हमें अपने सपनों का महल मिल गया हो और हम अपनी पूर्ण शक्ति के साथ उस में अपनी संपूर्ण कल्पनाओं को साकार होते हुए देखना चाहते हों.

हम दोनों बहुत खुश थे. पर एक दिन शाम को नीरज ने पीछे वाले बरामदे में खड़े हो कर अपने सामने की विशाल कोठियों पर नजर गड़ाते हुए कहा, ‘‘यहां और तो सबकुछ ठीक ही है, लेकिन अपनी पिछली तरफ की ये जो बड़ेबड़े लोगों की कोठियां हैं न, इतनी बड़ीबड़ी… न जाने क्यों आंखों से उतर कर मन के भीतर कहीं चुभ सी जाती हैं. इन के सम्मुख रह कर हीनता का आभास सा होने लगता है. इन के अंदर झांक कर देखने की कल्पना मात्र से बदन सिहर उठता है, सोचता हूं कि कहां हम और कहां ये लोग.’’

मैं आश्चर्य से नीरज के मुंह की ओर ताकती रह गई, ‘‘अरे, ये विचार कैसे आए आप के दिमाग में कि हम इन लोगों से हीन हैं? बड़ी कोठी में रहने और धनवान होने को ही आप महत्त्व क्यों देते हैं? असली महत्त्व तो इस बात का है कि हम जीवन को किस प्रकार से जीते हैं और थोड़ा पा कर भी किस तरह अधिक से अधिक सुखी रह सकते हैं.’’

‘‘आज के युग में धन का महत्त्व बहुत अधिक है, शीला. कई बार तो यही सोच कर मुझे बहुत दुख होता है कि हमें भी किसी बड़े धनवान के यहां जन्म क्यों नहीं मिला या फिर हम इतने योग्य क्यों नहीं हो सके कि हम इतना पैसा कमा सकते कि दिल खोल कर खर्च करते.’’

‘‘यह सब आप के दिल का वहम है. यह सोचना ही निरर्थक है कि हम किसी से कम हैं. देखिए, हमारे पास सबकुछ तो है. हमें इस से अधिक और क्या चाहिए? आराम से गुजर हो रही है.’’

मुझे लगा मैं नीरज को आश्वस्त  करने में काफी सफल हो गई हूं  क्योंकि उस के चेहरे पर संतोष के भाव दिखाई देने लगे थे. हम दोनों प्रसन्नतापूर्वक शाम की चाय पीने लगे.

इतने में 5 वर्षीय बेटा पंकज दौड़ता हुआ आया और बोला, ‘‘मम्मी, देखो यह सामने वाली कोठी का सनी है न. उस के लिए आज उस के पापा एक नई साइकिल लाए हैं 3 पहियों वाली. हमें भी ला दोगी न?’’

चाय का घूंट मेरे गले में ही अटक गया. मैं नीरज की आंखों में झांकने लगी. उस की जीभ तैयार मिली, ‘‘अब ला दो न, सौ रुपए की साइकिल या अभी जो लैक्चर झाड़ रही थीं उस से खुश करो अपने लाड़ले को. कह रही थीं सबकुछ है हमारे पास.’’

पंकज अनुनयभरी दृष्टि से मेरी ओर निहारे जा रहा था, ‘‘सच बताओ मम्मी, लाओगी न मेरे लिए भी साइकिल?’’

मैं ने खींच कर उसे गले से लगा लिया, ‘‘देखो बेटा, तुम राजा बेटा हो न? दूसरों की नकल नहीं करते. हां, जब हमारे पास रुपए होंगे, हम जरूर ला देंगे.’’ मैं ने उसे बहलाना चाहा था.

‘‘क्यों हमारे पापा भी तो दफ्तर में काम करते हैं, रुपए लाते हैं. फिर आप के पास क्यों नहीं हैं रुपए?’’ वह अपनी बात पूरी करवाना चाहता था.

‘‘अच्छा, ज्यादा नहीं बोलते, कह तो दिया ला देंगे. अब जाओ तुम यहां से,’’ मैं ने क्रोधभरे शब्दों में कहा और पंकज धीरेधीरे वहां से खिसक गया. इधर नीरज का चेहरा ऐसे हो रहा था जैसे किसी ने थप्पड़ मारा हो उस के मुंह पर. अपमान और क्रोध से झल्लाते हुए बोला, ‘‘देखूंगा डांटडपट कर कब तक तुम चुप करवाओगी उसे. आज तो यह पहली फरमाइश है. आगे देखना क्याक्या फरमाइशें होती हैं.’’

मैं चुप रही. बात सच ही थी. पहली वास्तविकता सामने आते ही दिमाग चक्कर खा गया था. कैसे गुजारा होगा ऐसे अमीर लोगों के बीच. हमारे सामने पूरी 6 कोठियां हैं. उन में दर्जन से भी ऊपर बच्चे हैं. सभी नित्य नई वस्तुएं व खिलौने लाते रहेंगे और पंकज देख कर जिद करता रहेगा. कहां तक मारपीट कर उस की भावनाओं को दबाया जाएगा. मैं पंकज के भविष्य के बारे में चिंतित हो उठी. कितने ही अक्ल के घोड़े दौड़ाए, पर कहीं कोई रास्ता दिखाई नहीं दिया.

अगले ही दिन शाम को नीरज ने सुझाव दिया, ‘‘एक बात हो सकती है. पंकज को उधर खेलने ही न जाने दो. पीछे से जाने वाला दरवाजा हर समय बंद ही रखा करो. सामने वाले फ्लैट हैं न, उन में सब अपने ही जैसे लोग रहते हैं. उन्हीं के बच्चों के साथ सामने के पार्क में खेलने दिया करो पंकज को.’’

बात मेरी भी समझ में आ गई, न इन बड़े लोगों के बच्चों में खेलेगा न, जिद करेगा. मैं ने पिछला दरवाजा खोलना ही छोड़ दिया. लेकिन पंकज सामने की ओर कभी न निकलता. ऊपर बरामदे में खड़ा हो कर, पीछे की कोठियों वाले उन्हीं लड़कों को देखता रहता, जिन में से कोई तो अपनी नई साइकिल पर सवार होता, कोई रेसिंग कार पर, तो कोई लकड़ी के घोड़े पर. कई बार वह पीछे का दरवाजा खोलने की भी जिद करता और मुझे उसे डांट कर चुप कराना पड़ता. अजीब मुसीबत थी बेचारे की.

Best Summer Sunscreen Cream: तेज धूप में इस्तेमाल करें, ये बेस्ट सनस्क्रीन

गर्मियों में त्वाचा की देखभाल करना बहुत जरूरी होता है. गर्मी में धूप से बचना बेहद मुश्किल होता है. कभी-कभी न चाहते हुए भी आपको किसी न किसी जरूरी काम से घर के बाहर निकलना ही पड़ता है. ऐसे में ज्यादातर लोग धूप और लू से सुरक्षित रहने के लिए फुल स्लीव कपड़ों से लेकर सनग्लास लगाने तक सभी तरीके आजमाते हैं. लेकिन त्वाचा को हर हिस्से को धूप से बचाना मुश्किल होता है. इसलिए कई लोग बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन का इस्तेमाल करते है.

आइए आपको बताते हैं Best Summer Sunscreen Cream

  1. Good Vibes Sunscreen Gel Cream

गुड़ वाइब्स सनस्क्रीन वाटर वेस्ड सनस्क्रीन है. ऑयल फ्री सनस्क्रीन जो धूप के किरणों से बचाता है. गुड़ वाइब्स सनस्क्रीन ई-कॉमर्स वेबसाइट पर उपलब्ध है.

2. Lotus herbal Safe Sunscreen gel

गर्मियों के लिए आप लोटस हर्बल के इस सनस्क्रीन जेल को अपने चेहरे पर अप्लाई कर सकते हैं इसे लगाने के बाद आपकी स्किन धूप से प्रोटेक्ट हो जाती है, जैसे कि धूप स्किन को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाता है. यह आपकी स्किन को धूप से बचाएगा क्योंकि इसमें 50 पीए+++ होता है.

3. Mamaearth Ulta light Sunscreen

यह Mamaearth Sunscreen सबसे ज्यादा बिकने सनस्क्रीन में से एक है. यह आपको सूरज की हानिकारक किरणों से बचाती हैं.  इसे लगाने के बाद 6 घंटे तक चलती हैं. यह best sunscreen for face भी हैं . इसका इस्तेमाल ऑयली और मुहांसे वाली त्वचा पर कर सकते है.

4. Wow Skin Science Sunscreen

 इसमे एसपीएफ 55 के साथ बने इस लोशन में एवोकाडो के गुण मौजूद हैं, जो आपको धूप की किरणों से ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचने देगा. इसे घर से बाहर निकलने से पहले जरूर स्किन पर लगाएं.

5. Lakme Sun Expert Sunscreen

यह गैर-चिपचिपाट और  हल्का जेल सनस्क्रीन जो 97% तक हानिकारक सूरज की किरणों को रोकता है. यह सनबर्न, काले धब्बे, समय से पहले बूढ़ा होना और त्वचा का काला पड़ना रोकता है. यह हाइपोएलर्जेनिक और नॉन-कॉमेडोजेनिक है. यह सनस्क्रीन त्वचा विशेषज्ञों द्वारा परीक्षण किया गया है. इसका उपयोग सभी प्रकार की त्वचा के लिए उपयुक्त है.

बाहुबली एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया ने किया मिर्जापुर फेम विजय वर्मा से प्यार का इजहार

बॉलीवुड और साउथ फिल्मों की खूबसूरत अदाकरा तमन्ना भाटिया काफी सुर्खियों में हैं. तमन्ना भाटिया अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को लेकर काफी चर्चा में है. हाल ही में तमन्ना की अपकमिंग सीरिज ‘लस्ट 2’ का टीजर जारी हुआ है. जिसे लोगों ने खूब पसंद किया है. इसके साथ ही एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया अपने रिलेशनशिप को लेकर काफी सुर्खियों में हैं. विजय वर्मा के संग अपने रिश्ते को लेकर तमन्ना चर्चा में है.

 

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तमन्ना भाटिया ने किया प्यार का इजहार

दरअसल, तमन्ना भाटिया और विजय वर्मा अपनी अपकमिंग वेब सीरिज ‘लस्ट 2’ में नजर आने वाले है. इस सीरिज में दोनो एक्टर्स साथ में रोमांस करेंगे. तमन्ना भाटिया ने बताया ‘लस्ट 2’ के सेट से हम दोनों का प्यार शुरू हुआ. इसी दौरान दोनों करीब आए थे.

तमन्ना भाटिया ने एक इंटरव्यू में कहा,  मेरा ये नहीं मानना है कि आप किसी से इसलिए अट्रैक्ट होते हो कि वह आपका को-स्टार है. मेरे कई को-स्टार रहे हैं. मुझे लगता है कि आप किसी के तब नजदीक आते हो जब आपके मन में उसके लिए फीलिंग होने लगती है. मेरा ये बोलने का मतलब ये है कि कैसे हम दोनों एक दूसरे के नजदीक आएं. इसके अलावा तमन्ना ने बताया कि वो विजय के साथ बहुत स्पेशल बॉन्ड शेयर करती है. साथ ही एक्ट्रेस के लिए विजय अब खुशी का ठिकाना बन चुके हैं.

‘लस्ट 2’ में साथ नजर आएंगे तमन्ना भाटिया और विजय वर्मा

अक्सर तमन्ना भाटिया और विजय वर्मा साथ में कई बार स्पॉट किए गए है. तमन्ना और विजय पैपराजी के सामने जमकर पोज देते रहे है. इन दोनों की वर्कफ्रंट की बात करें तो विजय वर्मा हाल ही में सोनाक्षी सिन्हा की ‘दहाड’ सीरिज में नजर आए थे. वहीं तमन्ना अपनी अपकमिंग वेब सीरिज ‘लस्ट 2’ में नजर आने वाली है. इतना ही नहीं तमन्ना सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है. अपने फैंस के साथ हॉट एडं खूबसूरत तस्वीरे शेयर करती रहती है.

Anupama: अनुज का प्यार ठुकराकर, अपने फर्ज को चुनेगी अनुपमा

अनुपमा धारावाहिक जबसे स्टार प्लास पर टेलीकस्ट हुआ है तभी से टीआरपी की लिस्ट में नंबर वन बना हुआ  है. इस सीरियल को धांसू बनाने के लिए मेकर्स आए दिन नया ट्विस्ट लेकर आते ही रहते हैं. सीरियल अनुपमा के अपकमिंग एपिसोड में होगा धमाकेदार. रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ में देखने को मिलेगा कि समर और डिंपल की शादी के बाद अनुपमा का अमेरिका जाने का सफर शुरू हो गया है. लेकिन अनुपमा परिवार, प्यार और जिम्मेदारी में फंसकर रह गई है.

बीते दिन ‘अनुपमा’ में देखने को मिला कि डिंपल के गृह प्रवेश के साथ ही शाह हाउस में बवाल शुरू हो जाता है. वहीं दूसरी ओर अनुज अनुपमा को मिलने के लिए बुलाता है. लेकिन गुरु मां उसी वक्त पर प्रेस कॉन्फ्रेंस रख देती हैं. वहीं शाह हाउस में समर और डिंपल के लिए पूजा होती है, ऐसे में अनुपमा फंसकर रह जाती है कि उसे कहां जाना है. हालांकि ‘अनुपमा’ में आने वाले ट्विस्ट यहीं पर खत्म नहीं होते हैं.

 

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प्यार को ठुकराकर अनुपमा फर्ज को चुनेगी

टीवी सीरियल अनुपमा के अपकमिंग एपिसोड काफी धमाकेदार होगा. अनुपमा में देखने को मिलेगा कि बा अनुपमा को फोन करके रोएंगी यहां रहना उसका जरूरी है. बा अनुपमा से डिंपल की शिकायत करके कहती है कि यहां आना उसका मुझे बर्बादी नजर आती है. लेकिन अनुपमा बा को समझाती है वह सब मैनेज कर लेगी. इसके बाद अनुपमा अनुज से फोन पर बात करके उससे मिलने का मना कर देती है.

समर और डिंपल की सुहागरात पर बा उनको अलग कर देंगी

‘अनुपमा’ में आने वाले ट्विस्ट यहीं पर खत्म नहीं होते हैं. शो में आगे देखने को मिलेगा कि बा समर और डिंपल की सुहागरात पर उन्हें साथ रहने से मना कर देगी. बा डिंपल को अपने साथ ले जाएंगी. ऐसे में डिंपल का गुस्से में आग-बाबूला हो जाती है. वहीं किंजल उसे समझाने की कोशिश करेगी तो वह किंजल से कहेगी, “आपको छोटी अनुपमा बनना था, आप बन गई. लेकन मैं डिंपल हूं और डिंपल ही रहूंगी. मुझसे कोई किसी भी तरह की उम्मीद न करे.”

खुशियों का आगमन: भाग 3 -कैरियर या प्यार में क्या चुनेंगी रेखा?

‘‘नहीं रेखा, उस ने तुम्हारे साथ कोई विश्वासघात नहीं किया है, बल्कि तुम खुद अंधी बन कर उस से प्यार कर रही थीं. अगर वह तुम्हें अंधेरे में रखना चाहता तो आज मुझ से मिलने नहीं आता और न ही अपनी हकीकत बताता. तुम जैसी खूबसूरत, होशियार और अच्छे घर की लड़की, उस से शादी करने के लिए पीछे पड़ी होने के बावजूद उस ने अपने मन पर संयम रखा.

नासमझी तो तुम कर रही थीं, जो उस का पूरा नाम, उस की हकीकत जाने बगैर उस से शादी करने चली थीं. जिस के साथ तुम पूरी जिंदगी बिताना चाहती हो उस का पूरा नाम, उस की सारी हकीकत जानना, तुम ने कभी मुनासिब नहीं समझा. शादी जैसा जिंदगी का अहम फैसला तुम सिर्फ जज्बातों के सहारे कर रही थीं. कितनी बड़ी गलती तुम करने जा रही थीं. तुम्हें मुझे भी विश्वास में लेने की जरूरत महसूस नहीं हुई.’’

‘‘मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा है, अब मैं क्या करूं, पिताजी?’’

‘‘ठंडे दिमाग से सोचो. राजेश हमें भी पसंद है. तुम दोनों एकदूसरे के लायक हो, एकदूसरे को संतुष्ट कर के तुम दोनों अपनी गृहस्थी को सुखी रख सकते हो, मगर राजेश अब भी अपनी मां के साथ उसी बस्ती में रहता है और भविष्य में भी वहीं रहेगा, क्योंकि वह अपनी मां को दुखी नहीं करना चाहता है. अपनी मां का अपमान वह सहन नहीं कर पाएगा.

आखिर इतना दुखदर्द सह कर, संघर्ष कर उस की मां ने उसे पढ़ालिखा कर काबिल इनसान बनाया है, उसे वह भला अपने से दूर कैसे रख सकता है? इसलिए अब यह फैसला तुम्हारे हाथ में है कि तुम इसे चुनौती समझ कर राजेश को अपनाना चाहोगी? उस की मां को उस के पूर्व इतिहास के बावजूद सास का दर्जा देना चाहोगी?

उस के प्रति मन में किसी तरह का मैल या नफरत की भावना न रखते हुए उसे आदर, सम्मान देना चाहोगी? अगर तुम यह सब करने के लिए तैयार हो तो ही राजेश के बारे में सोचना.

यह सब तुम्हें अब आसान लग रहा होगा, मगर जब तुम उन मुश्किलों का, समस्याओं का सामना करोगी, तब तुम्हें यह सब मुश्किल लगेगा, क्योंकि इन सब मुश्किलों का सामना तुम्हें अकेले ही करना है. यही सब सोच कर तुम फैसला करना.’’

‘‘मगर ये सब बातें उस ने मुझे क्यों नहीं बताईं?’’

‘‘अपनी मां की हकीकत कौन सा बेटा

अपने मुंह से कहेगा, तुम उसे समझने की, जानने की कोशिश करो. मगर अपने भविष्य का फैसला सोचसमझ कर ही करना. हमारा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है, लेकिन पहला कदम तुम्हें उठाना है.’’

उस रात वह पल भर के लिए भी सो नहीं पाई.

रात भर सोचने के बाद भी वह सही निर्णय नहीं ले पा रही थी. क्या यह शादी वह निभा पाएगी? राजेश की मां को सम्मान दे पाएगी? कई सवाल थे पर उन के जवाब उस के पास नहीं थे.

सुबह हुई. सूरज की किरणों से चारों ओर प्रकाश फैल गया और उसी प्रकाश ने उस के विचारों को एक नई दिशा दी और उस ने मिस रेखा साने से उर्मिला रेखा राजेश सावंत बनने का फैसला कर लिया.

Summer special: घर पर ऐसे बनाएं ग्रिल्ड कौलिफ्लौवर और क्रीमी रोस्टेड बेल पेपर पास्ता

हम सभी घर पर पास्ता कई तरह से बनाते रहते है. पास्ता में जो मसाले इस्तेमाल होते हैं वह भी काफी अलग होते हैं. पास्ता को आप लंच में या फिर डिनर में भी खा सकती हैं. आपको अगर तीखा मसालेदार खाना पसंद है या आप creamy फूड खाना पसंद करती हैं तो आप अपनी पसंद का कोई भी फ्लेवर का पास्ता बनाकर खा सकती हैं. अभी हम आपको ग्रिल्ड कौलिफ्लौवर पास्ता की रेसिपी बता रहे हैं इसे आप इंडियन सब्जियों का पास्ता भी कह सकती हैं. ये खाने में जितना tasty होता है आपकी सेहत के लिए भी उतना ही हेल्दी होता है. इसके साथ ही हम आपको क्रीमी रोस्टेड बेल पेपर पास्ता की आसान रेसिपी बताने जा रहे है. इस पास्ता को घर में बनाकर अपने बच्चों को खुश कर सकते है. इन दोनों पास्ता की रेसिपी बहुत आसान है, आपके बच्चे प्लेट चट कर जाएंगे.

ग्रिल्ड कौलिफ्लौवर पास्ता

सामग्री

  1. 1 कप गोभी के टुकड़े
  2. 1 कप पास्ता पका
  3. 1 छोटा चम्मच मिक्सड हर्ब्स
  4. 1 बड़ा चम्मच औलिव औयल
  5. 1 छोटा चम्मच ऐक्सट्रा वर्जिन औलिव औयल
  6. थोड़ी सी लाल, पीली व हरी शिमलामिर्च कटी
  7. 1/4 छोटा चम्मच कालीमिर्च पाउडर
  8. नमक स्वादानुसार

विधि

ग्रिलर में गोभी के टुकड़े, लाल, पीली व हरी शिमलामिर्च औलिव औयल में ग्रिल करें. अब पास्ता, नमक, मिक्स्ड हर्ब्स के साथ ग्रिल्ड सब्जियां मिलाएं. ऐक्स्ट्रा वर्जिन औलिव औयल डाल कर सर्व करें.

क्रीमी रोस्टेड बेल पेपर पास्ता

सामग्री

  1. 1 हरी शिमलामिर्च
  2. 1 कप पास्ता पका
  3. 2 हरे प्याज
  4. 1 मिर्च
  5. 1/2 कप पनीर के छोटेछोटे टुकड़े
  6. 1 बड़ा चम्मच तेल
  7. 1 बड़ा चम्मच क्रीम
  8. नमक स्वादानुसार.

विधि

शिमलामिर्च को अच्छी तरह धो कर साफ कर आंच पर रोस्ट करें. रोस्ट होने पर छिलका और बीज निकाल कर अलग रखें. इसी तरह प्याज को भी रोस्ट करें. मिक्सी में हरी शिमलामिर्च, प्याज और मिर्च का पेस्ट बना लें. कड़ाही में 1 बड़ा चम्मच तेल गरम कर उस में पेस्ट को हलका भून लें. पनीर, क्रीम और पका पास्ता मिला कर गरमगरम सर्व करें.

Summer special: इस चिलचिलाती गर्मियों में खुद को रखें डिटॉक्स, रहेंगे एक दम फ्रेश

गर्मियों का मौसम शुरू हो गया है. इस मौसम में हीटवेव, लू जैसी कई गंभीर समस्याएं सामने आती है. लू लगने के कारण  चक्कर आना, थकान होना, जैसी समस्याएं होना आम बात है. तो ऐसे में इस चिलचिलाती गर्मी में खुद को डिटॉक्स और फ्रेश कैसे रखा जाएं, ये सवाल हर किसी शख्स के दिमाग में रहता है. तो चलिए आज हम आपको खुद को डिटॉक्स रखने के साथ फ्रेश रखने के तरीकों के बारे में सारी जानकारियां देंगे.

  1. पानी भरपूर मात्रा में पीना

गर्मी के मौसम में सबसे पहले और जरूरी चीज ये है की आप भरपूर मात्रा में पानी पीएं, क्योंकि व्यस्त शेड्यूल में हम खाने-पीने का ध्यान नहीं रख पातें. आप चाहें तो इसके लिए मार्केट में पूरे दिन का शेड्यूल बनाएं रखने के लिए पानी की बॉटल आती है वो भी खरीद सकती है. ताकि दिनभर में आपने कितना पानी पीया इसकी जानकारी रहेगी.

2. नींबू

नींबू में आयरन, फाइबर, विटामिन सी जैसी चीजें पाए जाते है. जिसको पीने या खाने से शरीर डिटॉक्स होता है. और साथ ही पाचन-तंत्र भी मजबूत होता है.

3. मौसमी फलों का सेवन

गर्मी में शरीर को डिटॉक्स करने के लिए मौसमी फलों का सेवन करना भी जरूरी होता है. फल में भरपूर मात्रा में पानी के साथ Vitamins और Minerals पाए जाते हैं, जो शरीर को डिटॉक्स रखने के साथ ही आपको एक्टिव रहने में मदद करते है.

4. खाने में बढ़ाए Vitamin C की मात्रा

गर्मियों में खुद को हाइड्रेटेड रखने के लिए विटामिन सी से भरपूर फलों का सेवन करें. संतरा और आंवला जैसी चीजों के सेवन से आप पूरे दिन हाइड्रेटेड रहेंगे.

5. फाइबर का सेवन

खाने-पीने में आप फाइबर की भारी मात्रा रखें. फाइबर से भरपूर खाना खाने से आपके शरीर में जहरीले तत्व खत्म होती है.  इसके लिए आप पत्तागोभी, चुकंदर, मूली एवं अन्य हरी सब्जियों का सेवन करें.

6. एक्सरसाइज करें

गर्मियों में आप सुबह या शाम एक्सरसाइज करें. अगर आपके पास ज्यादा वक्त ना हों, तो आप सिर्फ वॉक या दौड़ भी लगा सकते है. इससे आपके शरीर में नेगेटिव चीजें हटेंगी और आप खुद को फ्रेश फील करेंगे. जिसकी वजह से आपका पूरा दिन एनर्जी से भरपूर होगा.

Father’s day Special: पिता की भूमिका – तब और अब

20वीं शताब्दी में दुनिया में आये सामाजिक, आर्थिक और प्रौद्योगिक बदलावों ने परिवार के कार्य और संरचना में भी आधारभूत परिवर्तन ला दिये हैं- मुख्यतया पिता की परिवार के प्रति जिम्मेदारी और भूमिका के संदर्भ में. आज के पिता परिवार में केवल परम्परागत (परिवार का वह व्यक्ति जो परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये केवल पैसा कमाने का काम करता है) और अनुशासन के रूप में नजर नहीं आते है बल्कि बच्चों के शारीरिक और मनोवैज्ञानिक विकास की चुनौतियों के साथ उनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी लेते है.

इस शताब्दी में महिलाओं के आर्थिक भूमिका में बदलाव ने पिता की भूमिका को और ज्यादा प्रभावित किया है. 1948 से 2001 के बीच कामकाजी महिलाओं का प्रतिशत 33 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत से भी ज्यादा हो गया है. ऐसे में पिता की बच्चों के प्रति जिम्मेदारी दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है. जहां पहले केवल मां को बच्चों के पालनकर्ता के रूप में देखा जाता था वहीं अब पिता की भी उनको संस्कार देने में बराबर की भूमिका निहित है. बच्चों की परवरिश में पिता की भूमिका पर जब हमारी आज की पीढ़ी के बच्चों और उनके पापा से बातचीत हुई तो सामने आया कि

पिछली शताब्दी में पापा

    • बच्चों के लिये आदर्श हुआ करते थे.
    • बच्चे उनका बहुत सम्मान करते थे.
    • बच्चों के मन में पापा का डर भी रहता था जिसके पीछे वो कोई भी गलत काम करने से पहले सोचने को मजबूर हो जाते थे.
    • पापा उनके शिक्षक के रूप में भी होते थे लेकिन दोस्त नहीं बन पाते थे.
    • पापा और बच्चों के बीच कुछ खास विषयों पर ही बातचीत हो पाती थी वो भी तब ही जब पापा चाहते थे. वो खुलकर हर बात पापा से शेयर नहीं कर पाते थे यानी उनके बीच संवाद की कमी हुआ करती थी.
    • पापा घर के मुखिया हुआ करते थे, सभी छोटे-बड़े फैसले उन्हीं के अनुसार लिये जाते थे.
    • इतना सब होने पर भी बच्चों पर बात-बात पर गुस्सा, झिड़कना, डांटना, मारना कभी भी बिना कारण के नहीं होता था.
    • पिता का व्यवहार बहुत ही संयमित और दायित्वपूर्ण हुआ करता था.

वर्तमान समय में पिता…

    • बच्चों के आदर्श उनके अनुसार निश्चित होते है. ये जरूरी नहीं कि वो पिता को ही अपना आदर्श माने.
    • बच्चे अपने फैसले खुद लेना पसंद करते है. उसमें पिता का व्यवधान उन्हें पसंद नहीं.
    • पिता बच्चों के अच्छे दोस्त होते है परन्तु वो सम्मान प्राप्त नहीं कर पाते जो उन्हें मिलना चाहिए.
    • पिता का डर बच्चों में लगभग नहीं के बराबर है.
    • काम के तनाव के बोझ तले पिता बहुत चिड़चिड़े हो जाते है जिसका सीधा असर बच्चों पर पड़ता है.
    • पिता और बच्चों के बीच आज भी खुलकर बातचीत नहीं हो पाती जिसका कारण समय का अभाव नहीं बल्कि आपसी सामंजस्य का अभाव रहा है.
    • पिता का होना उन्हें आर्थिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा प्रदान करता है.
    • घर में फैसले लेने का अधिकार केवल पिता का ही नहीं है बल्कि बच्चे भी उसमें शामिल होना चाहते है.

अगर हम उपरोक्त अंतरों पर ध्यान दें तो यह सामने आता है कि पिछली शताब्दी में और इस शताब्दी में पिता की भूमिका में परिवर्तन केवल पिता की तरफ से ही नहीं बल्कि बच्चों की सोच से भी प्रभावित है. ऐसे में जरूरी है कि –

    • पिता अपने बच्चों के साथ भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक सामीप्य विकसित करें. समय पर वक्त के अनुसार गले से लगाना, पीठ थपथपाना, प्यार करना भी बहुत जरूरी होता है. यह उनके मन में सुरक्षा की भावना विकसित करता है.
    • पिता को यह भी सुनना चाहिए कि बच्चा उनसे क्या कहना चाहता है. बच्चे को अपनी सभी गतिविधियों के बारे में बिना टोके खुलकर बोलने का मौका दिया जाना चाहिए.
    • उसके साथ खाना खाकर, टी.वी. देखकर, वीडियो गेम खेलकर या उसकी अन्य रूचियों में शामिल होकर बच्चे को अपने साथ बातचीत में कम्फर्ट महसूस कराया जा सकता है.
    • पिता बच्चे के साथ मां की अपेक्षा कम समय बिताते है, ऐसे में हमेशा शिक्षक बनकर ही न रहें बल्कि बच्चों से कुछ सीखते हुए उन्हें सिखाते जाना एक अच्छा तरीका है.
    • बच्चों के सामने हमेशा उनकी मां का सम्मान, बच्चों में स्थायित्व और सुरक्षा की भावना को विकसित करता है.

बच्चों के बचपन से लेकर बड़े होने तक यानि जब वे स्कूल में होते है, जौब पर जाते है या शादी होती है और फिर उनके बच्चे होते है, हर मौके पर पिता के साथ बिताये पल बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते है क्योंकि पापा एक पंख की तरह होते हैं, जो उन्हें न केवल सुरक्षा प्रदान करते है बल्कि आकाश में उड़ने के लिए उड़ान भरने का साहस भी देते है.

Father’s day 2023: वह कौन थी- एक दुखी पिता की कहानी?

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