Eid Special: जानिए मटन बिरयानी बनाने का आसान तरीका

घर में कुछ इस तरह बनाएं मटन बिरयानी, जिसकी सूची नीचें दी गई है. उसके अनुसार आप घर पर बडे ही आसान तरीके से मटन बिरयानी पका सकते है.

सामग्री

-500 ग्राम मटन (विद बोन),

-2 बड़े कप बासमती चावल पानी में भिगोया,

-1 बड़ा चम्मच अदरकलहसुन का पेस्ट,

-1/2 छोटा चम्मच केसर दूध में भिगोया,

-1 कप हंग कर्ड,

-1/2 छोटा चम्मच हलदी पाउडर,

-1 बड़ा चम्मच तेल,

-1 छोटा चम्मच मक्खन,

-2 मध्यम आकार के प्याज कटे ,

-5-6 लौंग

– 2-3 टुकड़े दालचीनी

 -1 छोटा चम्मच गरममसाला,

-8-10 छोटी इलायची,

-3-4 बड़ी इलायची,

-1/2 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर

-थोड़ी सी धनियापत्ती बारीक कटी

-थोड़ी सी पुदीनापत्ती बारीक कटी,

-1 छोटा चम्मच जीरा पाउडर,

-1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर

-नमक स्वादानुसार.

विधि

-मटन में हंग कर्ड, नमक, हलदीपाउडर और अदरकलहसुन का पेस्ट मिला कर 4 घंटे तक फ्रिज में मैरिनेट होने के लिए रखें. पैन में तेल गरम कर के कटे हुए प्याज में से थोड़ा सा अलग कर बाकी सुनहरा होने तक फ्राई कर के अलग रख लें.

-फिर प्रैशर कुकर में चावल, नमक, लौंग, दालचीनी, छोटी और बड़ी इलायची और 5 कप पानी डाल कर पकाएं. एक बरतन में घी गरम कर के बचा हुआ कटा प्याज, कटी हरी मिर्च और अदरकलहसुन का पेस्ट डाल कर अच्छी तरह से मिलाएं.

-अब इस में मैरिनेटेड मटन डाल कर तेज आंच पर 7 से 8 मिनट तक पकाएं. अब आंच को कम कर के इस में धनिया पाउडर, जीरा पाउडर और लालमिर्च डाल कर मटन अच्छी तरह पक जाने तक पकाएं.

-फिर इस में टमाटर, नमक, 1/2 गरममसाला पाउडर और कटी हुई धनियापत्ती डाल कर चलाते हुए कुछ देर तक पकाएं. अब एक मोटी पेंदी के बरतन में चावल और मटन की सामग्री खत्म होने तक लेयर बना लें.

-अंत में केसर दूध, बटर, पुदीनापत्ती और बचा हुआ गरममसाला पाउडर डाल कर बरतन को एल्युमिनियम फौयल से ढक कर 180 डिग्री सेल्सियस पर प्रीहीटेड ओवन में 20 मिनट तक रखें. फ्राइड प्याज से गार्निश कर परोसें.

Eid Special: घर पर ऐसे बनाएं शीर खुरमा

सामग्री

  • ताजा दूध – 4 कप
  • इलाईची – 1 पिसी हुई
  • शक्कर – स्वादानुसार
  • सेवईयां – 1 कप
  • घी – 2 चम्मच
  • सुखा मेवा और सूखे फल
  • बादाम – 2 चम्मच
  • काजू – 2 चम्मच
  • किशमिश – 2-3 चम्मच
  • खजूर – 4
  • इलाईची पाउडर – 1/4 चम्मच
  • केसर – 5 से 6 जवे
  • केवड़ा एसेंस या गुलाब जल – 1/4 चम्मच

विधि

केसर को 2 चम्मच गर्म पानी में, खजूर को काटकर गर्म दूध में और बादाम को 15 से 20 मिनट तक गर्म पानी में भिगोयें.

इसके बाद बादाम के छिलके को निकालकर उसे छोटे-छोटे टुकड़ो में काट लीजिये. बादाम को सुखा लीजिए.

अब एक चम्मच घी गर्म करे और उसमे सारे मेवा को धीमी आंच पर कुछ मिनटों तक फ्राई करें. अब मेवों को निकालकर इसी में किशमिश फ्राई करे.

अब गैस पर कढ़ाई रखें और 1 चम्मच घी को गर्म करके धीमी आंच पर सेवईयां हल्की सुनहरी होने तक फ्राई करें.

अब एक भगोने में दूध को उबालें और धीमी आंच पर तब तक पकायें जब तक दूध गाढ़ा न हो जाये. इसी में पिसी हुई इलाईची भी डाल दें. दूध पकाते समय उसे बीच बीच में हिलाते रहें.

अब इस में शक्कर डाल कर धुलने तक पकाते रहें. अब उसमे फ्राई की हुई सेवईयाँ भी डाले.

अच्‍छी तरह पक जाने पर कुछ देर के लिए आंच से हटा लें और इसमें दूध डालकर भिगोयी हुई खजूर और केसर मिला दें.

इसके बाद सभी सूखे मेवे डालकर वापस गैस पर रखें और 2 मिनट तक पकायें.

हल्‍का ठंडा होने पर उसमे एसेंस डालकर अच्छी तरह मिलाएं. ठंडा करने पर यह और भी गाढ़ा और स्वादिष्ट लगेगा.

Summer Special: गरमी में ऐसे करें स्किन केयर

सीनियर कंसल्टेंट डर्मेटौलोजिस्ट डा. नरेश भार्गव के अनुसार, गरमी हो या सर्दी हर मौसम में हमारी त्वचा को खास देखभाल की जरूरत होती है. गरमी में सूर्य की हानिकारक किरणों, धूलमिट्टी और तैलीय ग्रंथियों की अधिक सक्रियता का प्रभाव हमारी त्वचा पर सब से ज्यादा पड़ता है, जिस के कारण प्रिक्ली हीट, पिग्मैंटेंशन, फंगस, ब्लैकहैड्स, पिंपल, एक्ने, डैंड्रफ और स्किन ऐलर्जी आदि समस्याओं से रूबरू होना पड़ता है. लेकिन अगर हम कुछ खास बातों का ध्यान रखते हुए उन पर चलें तो इन समस्याओं से काफी हद तक बचाव संभव है.

बचाव के उपाय

ठंडक का एहसास:

डा. भार्गव के अनुसार, गरमियों में त्वचा के रोगों के निदान के लिए शरीर को ठंडा रखना बेहद जरूरी है. इस के लिए दिन में 2 से 3 बार नहाना चाहिए तथा शरीर को ठंडक देने वाले पेयपदार्थ, जैसे लस्सी, दही, नीबूपानी, दूध आदि का सेवन करना चाहिए. साथ ही, धूप के संपर्क में कम से कम आना चाहिए. अंदरूनी हिस्सों की साफसफाई: डा. भार्गव के अनुसार, शरीर के अंदरूनी हिस्सों की साफसफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि शरीर के अंदरूनी हिस्सों, जैसे बगलों, घुटने, कुहनियां आदि में पसीने के कारण बैक्टीरिया पनपते हैं, जिस से शरीर में पसीने की दुर्गंध आने लगती है. इसलिए इन हिस्सों को अच्छी तरह साफ कर के और सुखा कर टैल्कम पाउडर लगाना चाहिए.

सही खाद्यपदार्थों का सेवन:

डा. भार्गव गरमियों में उचित खानपान की सलाह देते हैं. उन के अनुसार, गरमियों में तैलीय व गरिष्ठ भोजन की अपेक्षा ऐसा सादा एवं फलाहारी भोजन सब से उपयुक्त है, जो शरीर को उपयुक्त ऊर्जा व नमी प्रदान करे. इसलिए फलसब्जियों और पानी को अपने आहार में ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए और कैफीन वाली चीजों, जैसे चायकाफी आदि का इस्तेमाल जरूरी हो तो भी कम से कम करना चाहिए.

फेसवाश का प्रयोग:

गरमियों में आमतौर पर हर कोई 2 से 3 बार नहाता है. ऐसे में साबुन के अत्यधिक प्रयोग से उस की त्वचा रूखी व बेजान हो जाती है. इसलिए साबुन की जगह सौम्य फेसवाश और बौडी शैंपू के प्रयोग से अपनी त्वचा की नमी बरकरार रखें.

नियमित टोनिंग:

आप की त्वचा हमेशा जवां व खूबसूरत बनी रहे, इस के लिए नियमित रूप से क्लींजिंग, टोनिंग व मौइश्चराइजिंग करें. तैलीय त्वचा होने पर औयलफ्री मौइश्चराइजर का इस्तेमाल करें. ज्यादा असर के लिए मौइश्चराइजर को फ्रिज में रखें. जब आप धूप से घर लौटें तो चेहरा धोने के बाद ठंडाठंडा मौइश्चराइजर चेहरे पर लगाएं और गरमी में ठंडक का एहसास पाएं.

सनस्क्रीन का प्रयोग:

त्वचा को खूबसूरत बनाए रखने के लिए टोनिंग के साथ सनस्क्रीन का प्रयोग जरूर व नियमित करें, क्योंकि धूप में निकलने पर सूर्य की हानिकारक किरणों के संपर्क में आने के कारण हमारी त्वचा पर सनबर्न, असमय झुर्रियां आदि समस्याएं उभर आती हैं. जबकि नियमित सनस्क्रीन के इस्तेमाल से इन समस्याओं की प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है तथा इन से बचा जा सकता है. इसलिए घर से बाहर निकलने से कम से कम आधा घंटा पहले इसे लगा लें तथा धूप में ज्यादा रहने की स्थिति होने पर 3 घंटे के बाद दोबारा सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें. सनस्क्रीन केवल चेहरे पर ही नहीं बल्कि शरीर के हर उस हिस्से पर लगाएं, जो धूप के सीधे संपर्क में आता है.

त्वचा के अनुसार सनस्क्रीन

डा. भार्गव के अनुसार, त्वचा के अनुरूप ही सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए. जैसे:

नौर्मल और ड्राई स्किन:

नौर्मल और ड्राई स्किन के लिए नौर्मल 30+एसपीएफ का सनस्क्रीन उपयुक्त है, जो त्वचा पर सुरक्षा कवच का काम करता है.

तैलीय त्वचा:

इस प्रकार की त्वचा के लिए नौनऔयली 30 या 30+एसपीएफ सनस्क्रीन बेहतर व उपयुक्त है.

सैंसिटिव त्वचा:

नाजुक त्वचा के लिए न्यूट्रल सोप स्किन सनस्क्रीन अच्छा है.

ब्लैकहैड्स के लिए:

गरमियों में ब्लैकहैड्स की समस्या में बढ़ोतरी हो जाती है, जो आप की खूबसूरती में ग्रहण लगा देते हैं. इन से निबटने के लिए महीने में 2 बार किसी अच्छे पार्लर में जा कर फेस क्लीनिंग कराएं तथा इस के बाद टोनर का प्रयोग करें. ब्लैकहैड्स को कभी भी जबरदस्ती दबा कर निकालने की कोशिश न करें.

पैडिक्योर:

गरमियों में पैरों की उंगलियों के बीच में नियमित सफाई नहीं होने के कारण फंगस की समस्या उत्पन्न हो जाती है. इस से बचने के लिए उचित साफसफाई का ध्यान रखते हुए महीने में 1 या 2 बार पार्लर जा कर पैडिक्योर करवाएं.

वैक्सिंग:

वैक्सिंग करवाने से अनचाहे बालों से छुटकारा तो मिलता ही है, त्वचा की डैडस्किन भी निकलती है. इसलिए नियमित रूप से बालों की ग्रोथ के हिसाब से वैक्सिंग जरूर करवाएं.

उचित मेकअप प्रोडक्ट का चुनाव:

प्रसिद्ध मेकअप आर्टिस्ट सोनिया बत्रा के अनुसार, गरमियों में मैट मेकअप प्रोडक्ट का इस्तेमाल करना चाहिए तथा शाइनी लुक के लिए मैट प्रोडक्ट पर शिमर या शाइनर का इस्तेमाल किया जा सकता है. इस के अलावा क्रीमी बेस प्रोडक्ट की जगह वाटरबेस प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें. इस के साथ आजकल न्यूड मेकअप फैशन में है, इसलिए मेकअप लाइट ही रखें.

मेकअप उतारना:

गरमियों में रात को सोने से पहले मेकअप उतारना बहुत जरूरी होता है ताकि आप की त्वचा खुल के सांस ले सके. मेकअप उतारने के लिए क्लींजिंग मिल्क या मेकअप रिमूवर का इस्तेमाल करें.

फेशियल:

गरमियों के मौसम और त्वचा के अनुसार आप फेशियल जरूर करवाएं ताकि आप का चेहरा हर पल खिलाखिला रहे. गरमियों के मौसम में आप ग्लाइकोलिक पीलिंग या स्पा फेशियल करवा सकती हैं.

बालों की देखभाल:

गरमियों में लगातार पसीने के कारण बाल बहुत चिपचिपे हो जाते हैं. अत: इन की नियमित सफाई पर ध्यान दें. आजकल मार्केट में कई प्रकार के शैंपू उपलब्ध हैं, जिन के नियमित इस्तेमाल से बालों पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है. लेकिन इन्हें खरीदते समय अपने बालों की प्रकृति का विशेष ध्यान रखें.

तनमन महके:

गरमियों में पसीने की गंध से छुटकारा पाने के लिए नहाने के पानी में कुछ बूंदें एसेंशियल औयल की या फिर गुलाबजल की डाल कर नहाएं. इस के अलावा बौडी डियोड्रैंट, बौडी स्प्रे या परफ्यूम का इस्तेमाल जरूर करें. ध्यान रखें कि परफ्यूम हमेशा बौडी के वार्म पौइंट्स, जैसे गरदन और कलाइयों पर ही लगाना चाहिए.

घरेलू फेसपैक:

गरमियों में घरेलू फेसपैक बनाने के लिए दही व मुलतानी मिट्टी में थोड़ा सा शहद मिला कर चेहरे पर लगाएं. यह पैक गरमियों के लिए अति उत्तम है.

योग एक वरदान:

नियमित रूप से योग को अपने दैनिक कार्यों में सम्मिलित करें. स्वस्थ तनमन के लिए योग से बेहतर अन्य कोई साधन नहीं है.

अगर वजन कम करते समय मील के बीच में लगे भूख तो फॉलौ करें ये 5 टिप्स

अगर आप भी वजन कम करने की जर्नी पर निकल पड़े हैं तो शुरुआत में यह आपके लिए बिलकुल भी आसान नहीं रही होगी क्योंकि इस रूटीन को काफी समय तक पालन करना सबके बस की बात नहीं होती है. खास कर अपने मन पसन्द स्नैक्स को बाय बोल कर बोरिंग डाइट फॉलो करने से आपका मन जल्द ही भर जाता होगा .

बहुत सारे लोगों की यह शिकायत रहती है कि उन्हें एक समय का खाना खाने के बाद दूसरे समय के खाने के बीच में बहुत भूख लग जाती है और इस बीच वह खुद का कंट्रोल खो कर अन हेल्दी स्नैक्स खाने लगते हैं . इस वजह से आपको बाद में बहुत पछतावा भी महसूस करना पड़ता होगा .

इस बीच खुद को अन हेल्दी स्नैक्स खाने से रोकने के लिए और अपना हेल्दी रूटीन पालन करते रहने के लिए इन टिप्स का पालन कर सकते हैं .

  1. घर पर बनाएं स्नैक्स का चुनाव करें :

अगर आप दुकान से खरीद कर स्नैक्स खाते हैं तो उनमें शुगर, ट्रांस फैट और बहुत सारी अन हेल्दी चीजें मिक्स हुई मिलेंगी जो आपको वजन कम नहीं करने देंगी इसलिए आप खुद घर पर बना कर भी स्नैक्स का सेवन कर सकते हैं . आप हेल्दी प्रोटीन बार बना सकते हैं, एनर्जी बॉल्स बना सकते हैं या फिर पॉप कॉर्न बना कर भी खा सकते हैं . इनसे आपकी भूख भी कंट्रोल होगी और आपकी बाहर का खाने की क्रेविंग भी शांत हो जायेगी .

  1. खुद को रखें हाइड्रेटेड :

कई बार आपके शरीर में डीहाइड्रेशन हो जाती है और आप उसे भी भूख समझ कर खाना खाने लगते हैं . इसलिए पूरा दिन पानी पीते रहें और खुद को हाइड्रेटेड जरूर रखें ताकि इस तरह की दुविधा में आने पर ओवर ईटिंग करने से बच सकें . ज्यादा पानी पीते रहने से भी आपका पेट ज्यादा समय तक भरा रहेगा . रोजाना कम से कम 8 गिलास पानी तो जरूर पिएं . अगर आपको भूख लगती है तो सबसे पहले पानी पी कर चेक करें .

  1. ओवर ईटिंग करने से बचें :

आपको माइंड फूल ईटिंग करनी चाहिए मतलब कि आपको आप क्या खा रहे हैं और किस मात्रा में खा रहे हैं इस बात का जरूर ध्यान रखना चाहिए ताकि ओवर ईट करने से बच सकें . आपको खाना खाते समय टीवी और मोबाइल जैसी डिस्ट्रेक्शन से बचना होगा . अगर आप गैजेट्स का प्रयोग करके खाना खाते हैं तो आप अपने पोर्शन साइज का ध्यान रखे बिना जितना आपका मन करता है उतना खाते रहते हैं फिर चाहे आपको भूख हो या न हो .

  1. होल फूड्स का सेवन करें :

स्नैक्स का सेवन करते समय भी होल फूड का सेवन कर सकते हैं जो आपको पोषण प्रदान करते हैं . इनमें आप फल, सब्जियां, नट्स और सीड्स आदि का चुनाव कर सकते हैं . इनमें आपको काफी सारे विटामिन, मिनरल और पौष्टिक तत्व मिलते हैं . इनका पाचन भी आसानी से हो जाता है और यह आपके शरीर को लंबे समय तक भरा रखने में भी मदद करते हैं .

  1. अन हेल्दी चीजों को अपने आस पास भी न रखें :

अगर आपको अन हेल्दी चीजें दिखेंगी ही नहीं तो वह आपको याद भी नहीं आएंगी जिस वजह से आपका उन्हें खाने का मन नहीं करेगा . अगर कोई अन हेल्दी चीज आपके घर में ही नहीं होगी तो आप भूख लगने पर कुछ हेल्दी खाना खाने का प्रयास कर सकते हैं जो आपके स्वास्थ्य के लिए सही रहेगा .

निष्कर्ष

ऐसी ही कुछ टिप्स का पालन करके आप दिन में अन हेल्दी खाने से खुद को बचा सकते हैं.

मेरे कानों पर बाल है जिसके कारण मुझे बहुत शर्मिंदगी महसूस होती है, क्या करूं?

सवाल

कानों पर बाल होने के कारण मुझे बहुत शर्मिंदगी महसूस होती है. कृपया कोई उपचार बताएं जिस से मैं इन से मुक्ति पा सकूं ?

जवाब

कानों के बालों से मुक्ति पाने के लिए उन की सावधानीपूर्वक कटिंग करें. बालों से हमेशा के लिए छुटकारा पाने हेतु लेजर हेयर रिमूवल औप्शन अच्छा रहेगा. लेजर लाइट की बीम बालों की जड़ों को हमेशा के लिए नष्ट कर देती है, जिस से बाल दोबारा नहीं उगते. यह उपचार करवाने के लिए किसी अच्छे सैलून में ही जाएं.

आजकल बाजार में कई तरह के इलैक्ट्रिक रेजर उपलब्ध हैं. इस रेजर से कानों के बाल हटा सकती हैं. हां, रेजर चलाने से पहले इस बात का ध्यान रखें कि वह स्किन के न ज्यादा पास हो और न ही ज्यादा दूर. लोशन या क्रीम का प्रयोग बहुत ही आसान होता है. इन में ऐसे रसायन होते हैं जो बालों को गला जड़ से निकाल देते हैं. लोशन या क्रीम लगाने से पहले अपनी स्किन पर टैस्ट जरूर कर लें. अगर कहीं कटा या जला हो तो क्रीम को उस जगह न लगाएं. क्रीम को कानों के बालों पर कुछ देर लगाए रखने के बाद गरम तौलिए से पोंछ लें.

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सवाल

मेरे बाल बारिश के मौसम में बहुत चिपचिपे हो जाते हैं, साथ ही उन में रूसी भी हो जाती है. क्या कोई ऐसा उपाय है जिस से मैं अपनी यह समस्या दूर कर सकूं?

जवाब

आप शैंपू के बाद बालों की देखभाल के लिए सिरके का प्रयोग करें. इस से बालों में ब्लड सर्कुलेशन सुचारू होता है जो बालों को टूटने से बचा कर उन्हें मजबूती प्रदान करता है.

अगर आप के बाल औयली हैं तो शैंपू के बाद नीबू के साथ सिरका लगाएं और 15 मिनट बाद बालों को ठंडे पानी से धो लें. नैचुरल सिरका लगाने से बाल कोमल होने के साथसाथ उन में नमी भी आ जाती है जिस से वे आपस में उलझते नहीं हैं.

अगर आप की सिर की त्वचा रूखी है और उस में रूसी की परेशानी है तो आप को बाल धोने के बाद सिरका और थोड़ा सा बादाम का तेल मिक्स कर के लगाना चाहिए. इस मिश्रण से स्कैल्प में नमी आती है और रूसी हमेशा के लिए दूर हो जाती.

Eid Special: फैमिली के लिए बनाएं कश्मीरी पुलाव

अगर आप लंच या डिनर में टेस्टी रेसिपी ट्राय करना चाहते हैं तो कश्मीरी पुलाव की ये रेसिपी आपके लिए परफेक्ट औप्शन है. कश्मीरी पुलाव आसानी से बनने वाली रेसिपी है, जिसे आप अपनी फैमिली को खिला सकते हैं.

हमें चाहिए

– 1/2 कप बासमती चावल

– 4-5 केसर की किस्में

– 1/4 कप सेब, कटा हुआ

– 1/4 कप अनार के दाने

– 1/4 कप अंगूर (बीजरहित), वैकल्पिक

– नमक – स्वाद अनुसार

– 2 टेबलस्पून घी

– तेल, प्याज तलने के लिये

– 1 कप पानी

– 1 टेबलस्पून दूध

– 5-6 काजू, कटे हुए

– 5-6 बादाम, कटे हुए

– 1 तेज पता

– 2 लोंग

– 1 हरी इलायची

– 2-इंच लंबा दालचीनी का टुकड़ा

– 1 हरी मिर्च, लंबी कटी हुई

– 1/2 टीस्पून कद्दूकस किया हुआ अदरक

– 1/4 टीस्पून सोंफ पाउडर

– 1 प्याज, लंबाई में कटा हुआ

बनाने का तरीका

– चावल को 2-3 बार पानी से धो ले और 15 मिनट तक पानी में भिगो दें. बाद में चावल मे से अतिरिक्त पानी निकालें और चावल को अलग रखें.

– केसर की किस्मों को 1 टेबलस्पून गरम दूध में भिगो दें.

– एक गहरे पैन/कड़ाही में मध्यम आंच पर 1 टेबलस्पून घी गरम करें. उसमें काजू और बादाम डालें और उन्हें हल्का सुनहरा होने तक भून लें. उन्हें थाली में निकालें.

– उसी पैन/कड़ाही में बाकी बचा हुआ 1 टेबलस्पून घी डाले और उसमें तेज पता, लोंग, हरी इलायची और   दालचीनी का टुकड़ा डाले और 30 सेकंड तक भून लें. उसमे हरी मिर्च, कद्दूकस किया हुआ अदरक और   सोंफ पाउडर डाले और फिर से 30 सेकंड के लिये भून लें.

– भिगोये और पानी निकाले हुए चावल डालें.

– 1-2 मिनट के लिये भून लें.

– 1 कप पानी, भिगोया हुआ केसर और नमक डालें. अच्छी तरह से मिला ले और मध्यम आंच पर   उबालने  रखे.

– जब वे उबलने लगे तब आंच को धीमी कर दे और ढक्कन लगाकर 8-10 मिनट या चावल पक जाय तब   तक पकने दें. बीच में ढक्कन न खोले और चावल को भी मत हिलाये. चावल के पक जाने पर गैस बंध कर  दे और बिना ढककन खोले 5-7 मिनट के लिये रहने दें. बाद में ढक्कन खोले और चावल को कांटे से फुला लें.

– इसी बीच दूसरे पैन में प्याज तलने के लिये 3-4 टेबलस्पून तेल को गरम करे. हाथ से प्याज के लच्छों     को अलग कर ले और बाद में तेल में डाले और भूरा होने तक तले. प्याज को बीच- बीच में हिलाते रहे.

– पके हुए चावल में हल्के तले हुए सूखे मेवे, कटे हुए ताजे फल और हल्का तला हुआ प्याज डालें.

– हल्के से मिला ले और सर्विंग बाउल मे निकालें. हरे धनिये से सजाये.

Summer Special: स्किन की टैनिंग दूर करता है ‘शुगर स्क्रब’

त्वचा हमारे शरीर में सबसे संवेदनशील अंग है जो आसानी से हमारे आस-पास के माहौल से प्रभावित हो जाता है. हम इसे कितना भी कवर या बचाने की कोशिश करें, यह सूर्य और अन्‍य पर्यावरणीय कारकों से क्षतिग्रस्‍त हो ही जाती है.

ऐसे में हमें त्‍वचा पर जमा मृत कोशिकाओं के साथ टैनिंग को दूर करने के लिए कुछ उपायों की जरूरत होती है. क्या आप जानते हैं कि इसके लिए नींबू और चीनी से बेहतर विकल्‍प आपके लिए कुछ और हो ही नहीं सकता.

नींबू में टैंनिंग को दूर करने के गुण पाए जाते हैं और ये त्वचा के रोम छिद्रों में छिपी गंदगी को साफ करने में मदद करता है और साथ में चीनी एक शक्तिशाली एक्‍सफोलिएटिंग एंजेट होने के कारण साथ मिलाने से इसके फायदों को कई गुणों कर देती हैं.

इसके लिए आपको जरुरत होगी :

1. आधा ताजा नींबू

2. आधा कप दानेदार चीनी

3. 1 बड़ा चम्मच ऑलिव ऑयल

4. 1 बड़ा चम्मच आर्गेनिक शहद

यही तत्‍व जरुरी क्‍यों है ?

नींबू- नींबू विटामिन सी से भरपूर होता है और आमतौर पर एजिंग स्पॉट्स और सूरज से क्षतिग्रस्‍त त्‍वचा के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है. साथ ही यह पोर्स को बंद करने और रंगत को निखारने में मदद करता है.

चीनी – चीनी एक एक्‍सफोलिएटर के रूप में काम करती है और धीरे-धीरे शरीर की बंद सभी मृत कोशिकाओं को निकाल कर त्‍वचा की संपूर्ण बनावट में सुधार करती है.

ऑलिव ऑयल – ऑलिव ऑयल एक उत्‍कृष्‍ट एमोलिएंट है जो त्‍वचा को गहराई से पोषण और साफ करता है. इसके अलावा यह एजिंग के निशान को दूर करने में मदद करता है.

शहद – शहद प्राकृतिक एंटीऑक्‍सीडेंट और एंटीबैक्‍ट‍ीरियल गुणों से भरपूर होता है, जो त्‍वचा को पर्यावरण से होने वाले नुकसान से रक्षा करता है. इसके अलावा त्‍वचा को पोषण और नमी प्रदान करता है.

स्‍क्रब बनाने का तरीका :

1: एक कटोरी में नींबू का रस और ऑलिव ऑयल लेकर पेस्‍ट बना लें. अगर आप गाढ़ा या पतला पेस्‍ट बनाना चाहते हैं तो उसी हिसाब से ऑलिव ऑयल को कम या ज्‍यादा कर सकते हैं.

2 : फिर इसमें शहद को मिलाकर धीरे-धीरे मिक्‍स करें.

3 : अंत में, चीनी मिलाकर सभी चीजों को अच्‍छे से मिला लें.

तो अब आपका घर में बना नींबू और चीनी का टैन हटाने वाला स्‍क्रब तैयार है.

इस चीनी के स्‍क्रब को लगाने का तरीका

इस फेस स्‍क्रब को लगाने के लिए सबसे पहले अपने चेहरे को साफ पानी से धो लें और धीरे-धीरे इस स्‍क्रब को सर्कुलर मोशन में रगड़कर 2-3 मिनट तक मसाज करें. फिर स्‍क्रब को 5-7 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें. ठंडे पानी से चेहरे को धोकर पोछ लें. अगर त्‍वचा पर ड्राईनेस महसूस हो रही है तो मॉश्‍चराइजर लगा लें.

कंप्यूटर की वजह से मेरी आंखों में दर्द होने लगता है, मैं ऐसी क्या चीज यूज करूं कि कोई साइड इफैक्ट न पड़े?

सवाल

मैं अकसर कंप्यूटर पर बहुत देर तक काम करती हूं जिस कारण आंखों में दर्द होने लगता है. इस से मुझे अच्छी गहरी नींद भी नहीं आती. मैं ऐसी क्या चीज यूज करूं कि कोई साइड इफैक्ट न पड़े?

जवाब 

गुलाबजल का आंखों पर बहुत अच्छा असर पड़ता है और यह अच्छी नींद लेने में भी मदद करता है. गुलाबजल को आंखों के लिए इस्तेमाल करने का सब से अच्छा तरीका है कि गुलाबजल में रुई भिगोएं और उसे बंद आंखों पर 15 मिनट रखा रखें. इस से बहुत राहत मिलेगी. आंखों के आसपास गुलाबजल लगाने से डार्क सर्कल्स भी दूर होते हैं और आंखों की थकान भी चली जाती है.

आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा में गुलाबजल का इस्तेमाल आंखों के इन्फैक्शन और ऐलर्जी को दूर करने के लिए किया जाता है.

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सवाल

बेटी के जन्म के बाद मेरे पेट पर स्ट्रैच मार्क्स के निशान पड़ गए हैं. बताएं उन्हें कैसे दूर करूं?

जवाब 

आप स्ट्रैच मार्क्स के निशानों पर वर्जिन कोकोनट औयल लगाएं, जो स्ट्रैच मार्क्स को कम करने में मदद करता है. यह औयल त्वचा के रंग की चमक बनाए रखने में भी सहायक होता है. इस के इस्तेमाल से त्वचा अधिक चमकदार, मुलायम नजर आने लगेगी. इस के अलावा किसी भी प्रकार के निशान के लिए जैसे कभीकभी हमें किसी चोट का निशान पड़ जाता है या फिर खरोंच के निशान हो जाते हैं, यह उन निशानों को भी मिटाने में फायदेमंद साबित होता है. हर रात चेहरे पर वर्जिन कोकोनट औयल को एक नाइट क्रीम के रूप में इस्तेमाल करें.

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सवाल

 मेरी स्किन औयली है. मैं चेहरे पर क्या लगाऊं जिस से ऐक्सट्रा औयल खत्म हो जाए?

जवाब 

आप के चेहरे के लिए मुलतानी मिट्टी का पेस्ट सब से फायदेमंद रहेगा. सुबह या शाम जब भी समय मिले, इसे करीब 5 मिनट के लिए फेस पर लगा लें. इस से स्किन का औयल खत्म हो जाएगा. मुलतानी मिट्टी में पाए जाने वाले तत्त्व फेस से मुंहासे हटाने में भी मदद करते हैं. दरअसल, इस में मैग्नीशियम क्लोराइड होता है, जो मुंहासों की समस्या या औयली स्किन के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है. मुलतानी मिट्टी स्किन को क्लीन कर मिनटों में शाइनिंग देती है.

सपनों को न छोड़ने को लेकर क्या कहती है, निर्देशक राजश्री ओझा, पढ़े इंटरव्यू

बिना किसी फिल्मी पृष्ठभूमि के हिंदी सिनेमा में आने वालों को जो संघर्ष करना पड़ता है, वैसा ही संघर्ष राजश्री ने भी किया, लेकिन इस दौरान उनका सबसे बड़ा मानसिक सहारा बने उनके पिता प्रमोद ओझा.

यहां तक कि जब उनकी पहली फिल्म ‘चौराहे’के निर्माता ने बीच में ही हाथ खींच लिए, तो उनके पिता ने ही ये फिल्म पूरी कराई.सोनी लिव पर उनकी वेब सीरीज पॉटलॉक काफी लोकप्रिय सीरीज है, जिसे राजश्री ने बड़ी मेहनत और लगन से बनाई है.

होती है कहानी की चुनौती

वेब सीरीज को बनाने की चुनौती के बारें में पूछने पर खूबसूरत, विनम्र, हंसमुख राजश्री ओझा बताती है कि निर्देशक के रूप में मुझे ये देखना पड़ता है कि कहानी से खुद को दर्शक जोड़ सकें. ‘पॉटलॉक’ एकपरिवार की कहानी है, इसमें दर्शकों को सीरीज को देखते हुए लगना चाहिए कि वे अपने आसपास ऐसे कुछ व्यक्ति को देखा या जानते है, जिसे वे सीरीज में देख रहे है. मैने आसपास कई ऐसे चरित्र देखे है, और उसी से प्रेरित हूँ. इसके दूसरे सीजन में चरित्र को आगे आकर अपनी कहानी कहने का मौका मिला है.

 

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मिली प्रेरणा

राजश्री ओझा ने जब इंडस्ट्री में आने का मन बनाया,तो उन्हें यह कहना मुश्किल था कि वह डायरेक्टर बनना चाह रही हैं, क्योंकि उनके पिता चाहते थे कि वे कुछ और बने. राजश्री को फिल्मों में आने की प्रेरणा के बारें में पूछने पर वह कहती है कि मैं कोलकाता से हूँ, वहां मेरा जन्म हुआ है. मेरे परिवार के सभी किताबें पढ़ते और फिल्मे देखते थे. मैं भी फिल्मे देखती थी, कहानियां पढने का मुझे शौक था, इसी से मुझे प्रेरणामिली. इसके अलावा मुझे कोलकाता कल्चर बहुत पसंद है. कक्षा 5 के बाद मैं बैंगलोर चली गई.मेरे कैरियर को लेकर पिता को थोड़ी चिंता थी, क्योंकि उन्हें मैंने कुछ बताया भी नहीं. असल में मुझे बचपन से ही सत्यजीत रे की फिल्में बहुत पसंद थी. मुझे लगता है तभी से मेरे अंदर एक निर्देशक बनने की चाह उत्पन्न हो गई थी, फिर तय किया कि न्यूयॉर्क जाकर फिल्म निर्माण की ट्रेनिंग लेनी चाहिए. काफी समय से सोच रही थी कि पिता को यह बात बताऊं, लेकिन हिम्मत नहीं हो रही थी.मैं कंप्यूटर विज्ञान पढने अमेरिका गई. स्नातक करने के बाद न्यूयॉर्क जाकर फिल्म में डिप्लोमा करने की बात पिता को बताई, तो उन्होंने अपने दिल पर पत्थर रखकर जाने की इजाजत दी. मैंने वहां पर थिएटर भी किया, कुछ फिल्मे बनाई और अवार्ड भी जीते.बाद में फिल्म मेकिंग में मास्टर्स किया. इससे पिता को लगा कि मैं कुछ अच्छा कर रही हूँ. असल में मुझे चार्ली चैपलिन की ब्लैक एंड व्हाइट फिल्में और सत्यजीत रे की कॉमेडी फिल्म ‘गुपी गाइन बाघा बाईन’देखने के बाद से ही लगा था कि इसे मैं भी बना सकती हूँ. यही से मेरे अंदर एक पैशन ने जन्म लिया.

मिली संतुष्टि

सीरियल और फिल्म के बीच की कड़ी है वेब सीरीज, आपने फिल्में भी बनाई है, ओटीटी से आपको कितनी संतुष्टि मिली है?पूछने पर राजश्री कहती है कि ओटीटी ने मुझे बहुत संतुष्टि दिया है. ये सही है कि ओटीटी, फिल्म और धारावाहिक के बीच की कड़ी है. मुझे फिल्म और ओटीटी में कोई खास अंतर नहीं दिखा, सिर्फ टाइम का अंतर है. काम वही पसंद होता है, जिसे आप अच्छी तरह से दर्शा सकते है. इसमें समय महत्वपूर्ण होता है, समय मिलने पर किसी चरित्र को अच्छी तरह से प्रेजेंट किया जा सकता है, गानों और कहानी को अच्छी तरह से दिखाया जा सकता है. जबकि फिल्म में समय के हिसाब से और सीरियल्स में चैनल के हिसाब से काम करना पड़ता है. ओटीटी सभी क्रिएटर्स के लिए एक अच्छा समय लेकर आया है. पूरा विश्व इसे घर बैठे देख सकता है. बाहर के वेब सीरीज और देश के वेब सीरीज में अंतर यही है कि वहां का बजट तीन गुना और समय अधिक होता है,जो देश में नहीं मिलता.

 

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होती है मानसिक तनाव

राजश्री आगे कहती है कि महिलाओं को मानसिक तनाव कैरियर में होता है.देखा जाय तो हर क्षेत्र में मानसिक तनाव होता है, घर में बैठे या काम करें, स्ट्रेस बहुत होता है. मैंने अपनी माँ को घर में रहकर भी तनाव लेते हुए देखा है. ये लाइफ का एक पार्ट होता है. हर किसी को होता है. कभी अच्छा तो कभी बुरा दिन सबके लिए होता है. मैं बहुत लकी हूँ कि मुझे मेरी माँ से मानसिक शक्ति मिली है. दरअसल लाइफ कभी आसान नहीं होती.

नहीं है कोई समस्या

राजश्री कहती है कि महिलाओं के लिए निर्देशक बनना चुनौतीपूर्ण होता है. मैं 20 साल से काम कर रही है, काम खुद में चुनौती होती है. ये टफ होता है, कहानी को विजुअल और प्रभावी तरीके से बनाना आसान नहीं होता. इसे मैं समस्या नहीं समझती. मुझे याद है जब दिल्ली में मैं थी, तो मैं कभी-कभी रात में घर आती थी, तो सभी मुझे इतनी रात को बाहर रहने से मना करते थे, लेकिन तब मैं दिल्ली को जानती नहीं थी, क्योंकि मैं बैंगलोर की हूँ.इतनी बाधाएं वहां नहीं थी. महिलाओं के लिए ऐसे कई चुनौतियाँ होती है, जो पुरुषों को नहीं होता.

ड्रीम को न छोड़े अधूरा

निर्देशक हंसती हुई कहती है कि मेरे बहुत सारे ड्रीम है, जिसे मैं आगे करना चाहती हूँ और महिलाओं को मेरा मेसेज है कि अपने ड्रीम को पूरा करें, किसी के लिए इंतज़ार न करें, मलाल न रखे. शादी करें, बच्चों को भी पालें, पर ड्रीम न छोड़े.

मैं ने जरा देर में जाना

‘‘सुबहसे बारिश लगी है. औफिस जाते हुए मु?ो कार से सत्संग भवन तक छोड़ दो न,’’ अनुरोध के स्वर में एकता ने अपने पति प्रतीक से कहा तो उस के माथे पर बल पड़ गए.

‘‘सत्संग? तुम कब से सत्संग और प्रवचन के लिए जाने लगीं? जिस एकता को मैं 2 साल से जानता हूं वह तो जिम जाती है, सहेलियों के साथ किट्टी पार्टी करती है और मेरे जैसे रूखे

पति की प्रेमिका बन कर उस की सारी थकान दूर कर देती है. सत्संग में कब से रुचि लेने लगीं? घर पर बोर होती हो तो मेरे साथ औफिस चल कर पुराना काम संभाल सकती हो, मु?ो खुशी होगी. इन चक्करों में पड़ना छोड़ दो, यार,’’ एकता के गाल को हौले से खींचते हुए प्रतीक मुसकरा दिया, ‘‘अब मैं चलता हूं. शाम को मसाला चाय के साथ गोभी के पकौड़े खाऊंगा तुम्हारे हाथ के बने,’’ अपने होंठों को गोल कर हवा में चुंबन उछालता हुआ प्रतीक फरती से दरवाजा खोल बाहर निकल गया.

एकता ने मैसेज कर अपनी सहेली रुपाली को बता दिया कि वह आज सत्संग में नहीं आएगी. बु?ो मन से कपड़े बदलकर बैड पर बैठे हुए वह एक पत्रिका के पन्ने उलटने लगी और साथ ही अपने पिछले दिनों को भी. 2 वर्ष पूर्व प्रतीक को पति के रूप में पा कर जैसे उस का कोई स्वप्न साकार हो गया था. प्रतीक गुरुग्राम की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में मैनेजर था और एकता वहां रिसैप्शनिस्ट. प्रतीक दिखने में साधारण किंतु अपने भीतर असीम प्रतिभा व अनेक गुण समेटे था.

एकता गौर वर्ण की नीली आंखों वाली आकर्षक युवती थी. जब कंपनी की ओर से एकता को प्रतीक का पीए बनाया गया तो दोनों को पहली नजर में इश्क सा कुछ लगा. एकदूसरे को जानने के बाद वे और करीब आ गए. बाद में दोनों के परिवारों की सहमति से विवाह भी हो गया.

प्रतीक जैसे सुल?ो व्यक्ति को पा कर एकता का जीवन सार्थक हो गया था. एक निम्न मध्यवर्गीय परिवार में पलीबढ़ी एकता के पिता की पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मीनगर में परचून की दुकान थी. परिवार में एकता के अतिरिक्त मातापिता और भाई व भाभी थे. ग्रैजुएशन के बाद एकता ने औफिस मैनेजमैंट में डिप्लोमा कर गुरुग्राम की कंपनी में काम करना शुरू किया था.

प्रतीक एक मध्यवर्गीय परिवार से जुड़ा था, जिस में एक भाई प्रतीक से बड़ा और एक छोटा था. बहन इकलौती व उम्र में सब से बड़ी थी. प्रतीक का बड़ा भाई शेयर बेचने वाली एक छोटी सी कंपनी में अकाउंटैंट था और छोटा बैंक अधिकारी था. मातापिता अब इस दुनिया में नहीं थे. विवाह से पहले प्रतीक दिल्ली के पटेल नगर में बने अपने पुश्तैनी घर में रहता था. बाद में गुरुग्राम में 2 कमरों का मकान किराए पर ले कर रहने लगा था.

विवाह के बाद स्वयं को एक संपन्न पति की पत्नी के रूप में पा कर एकता जितनी प्रसन्न थी उतनी ही वह प्रतीक के इस गुण के कारण कि वह संबंधों के बीच अपने पद व रुपएपैसों को कभी भी नहीं आने देता. निर्धन हो या धनी सभी का वह समान रूप से सम्मान करता था.

एकता का सोचना था कि प्रतीक विवाह के बाद उसे नौकरी पर जाने के लिए मना कर देगा क्योंकि मैनेजर की पत्नी का उस के अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ काम करना शायद प्रतीक को अच्छा नहीं लगेगा, लेकिन प्रतीक ने ऐसा नहीं किया. दफ्तर में एकता के प्रति उस का व्यवहार पूर्ववत था.

विवाह के 1 वर्ष बाद जीवन में नए मेहमान के आने की आहट हुई. अभी प्रैगनैंसी को 3 माह ही हुए थे कि एकता का ब्लड प्रैशर हाई रहने लगा. अपने स्वास्थ्य को देखते हुए एकता ने नौकरी छोड़ दी. घर पर काम करने के लिए फुल टाइम मेड थी, इसलिए उस का अधिकतर समय फेसबुक और व्हाट्सऐप पर बीतने लगा. प्रतीक उस की तबीयत में खास सुधार न दिखने पर डाक्टर से संपर्क के लिए जोर डालता रहा, लेकिन एकता किसी व्हाट्सऐप गु्रप में बताए देशी नुसखे आजमाती रही.

जब उस की तबीयत दिनबदिन बिगड़ने लगी तो प्रतीक अस्पताल ले गया. डाक्टर की देखरेख में स्वास्थ्य कुछ सुधरा, लेकिन समय से पहले डिलिवरी हो गई और बच्चे की जान चली गई. प्रतीक उसे अकेलेपन से जू?ाते देख वापस काम पर चलने को कहता लेकिन एकता तैयार न हुई.

पड़ोस में रहने वाली रुपाली ने एकता को सोसायटी की महिलाओं के गु्रप में शामिल कर लिया. वे सभी पढ़ीलिखी थीं. एकदूसरे का बर्थडे मनाने, किट्टी आयोजित करने और घूमनेफिरने के अलावा वे शंभूनाथ नामक पंडितजी के सत्संग में भी सम्मिलित हुआ करती थीं. पुराणों की कथा सुनाते हुए शंभूनाथजी मानसिक शांति की खोज के मार्ग बताते थे. सब से सुविधाजनक रास्ता उन के अनुसार विभिन्न अवसरों पर सुपात्र को दान देने का था. दान देने के इतने लाभ वे गिनवा देते थे कि एकता की तरह अन्य श्रोताओं को भी लगने लगा था कि थोड़ेबहुत रुपएपैसे शंभूनाथजी को दे देने से जीवन सफल हो जाएगा.

एक दिन प्रवचन सुनाते हुए शंभूनाथजी ने अनजाने में होने वाले पापों के दुष्परिणाम की बात की. सुन कर एकता सोच में पड़ गई. अंत में उस ने निष्कर्ष निकाला कि उसके नवजात की मृत्यु का कारण संभवत: उस से अज्ञानतावश हुआ कोई पाप होगा. पंडित शंभूनाथ की कुछ अन्य बातों ने भी उस पर जादू सा असर किया और उन के द्वारा दिखाए मार्ग पर चलना उसे सही लगने लगा.

आज प्रतीक का शुष्क प्रश्न कि वह कब से सत्संग में जाने लगी, उसे अरुचिकर लग रहा

था. सोच रही थी कि प्रतीक तो उस की प्रत्येक बात का समर्थन करता है, आज न जाने क्यों सत्संग जाने की बात पर वह अन्यमनस्क हो उठा. शाम को प्रतीक के लौटने तक वह इसी उधेड़बुन में रही.

रात का खाना खा कर बिस्तर पर लेटे हुए दोनों विचारमग्न थे कि प्रतीक बोल उठा, ‘‘अलमारी में पुराने कपड़ों का ढेर लग गया है. सोच रहा हूं मेड को दे देंगे.’’

‘‘हां, बहुत से कपड़े खरीद तो लिए हैं मैं ने, लेकिन पहनने का मौका नहीं मिला. नएनए पहन लेती हूं हर जगह. कल ही दे दूंगी. अच्छा सुनो, इस बात से याद आया कि कुछ पैसे चाहिए मु?ो. कल सत्संग भवन में हमारे गु्रप की ओर से दान दिया जाएगा.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘पंडितजी ने कहा था कि दान देने से न सिर्फ इस जीवन में बल्कि अगले जन्म में भी कष्ट पास नहीं फटकते.’’

‘‘देखो एकता, तुम अपने पर कितना भी खर्च करो मु?ो ऐतराज नहीं, ऐतराज तो छोड़ो बल्कि मैं तो चाहता हूं कि तुम मौजमस्ती करो और खूब खुश रहो. तुम्हारा यों पंडितजी की बातों में आ कर व्यर्थ पैसे लुटा देना सही नहीं लग रहा मु?ो तो.’’

‘‘गु्रप में फ्रैंड्स को क्या जवाब दूंगी?’’ मुंह बनाते हुए एकता ने पूछा.

‘‘मेरे विचार से तुम्हें उन लोगों को भी सही दिशा दिखानी चाहिए.’’

प्रतीक की इस बात को सुन एकता निरुत्तर हो गई.

गु्रप की महिलाएं रुपयेपैसे के अतिरिक्त फल, अनाज व मिठाई भी पंडितजी को दिया

करती थीं, लेकिन एकता मन मसोस कर रह जाती. एकता के बारबार कहने पर भी प्रतीक का दान देने की बात पर नानुकुर करना उसे रास नहीं आ रहा था. आर्थिक स्तर पर अपने से निम्न संबंधियों से प्रतीक का मैत्रीपूर्ण व्यवहार रखना, मेड को पुराने कपड़े, खाना व कंबल आदि देने को कहना तथा ड्राइवर के बेटे की पुस्तकें खरीदना एकता को असमंजस में डाल रहा था. दूसरों की मदद को सदैव तत्पर प्रतीक दानपुण्य के नाम से क्यों बिफर उठता है, इस प्रश्न का उत्तर उसे नहीं मिल पा रहा था.

शंभूनाथजी ने वट्सऐप ग्रुप बना लिया था. उस पर वे विभिन्न अवसरों, तीजत्योहारों आदि पर दान देने के मैसेज डालने लगे थे. प्रत्येक मैसेज के साथ दान की महत्ता बताई जाती. सुख, शांति व पापों से मुक्ति इन सभी के लिए दानदक्षिणा को अपनी दिनचर्या में सम्मिलित करना बताया जाता.

गु्रप की सभी महिलाओं के बीच होड़ सी लग जाती कि कौन शंभूनाथजी को अधिक से अधिक दान दे कर न केवल स्वयं को बल्कि परिवार को भी पापों से मुक्ति दिलवाने का महान प्रयास कर रहा है? एकता भी इस से अछूती न रही. प्रतीक से किसी न किसी बहाने पैसे मांग कर वह पंडितजी को दे देती थी. मन ही मन इस के लिए वह अपने को दोषी भी नहीं मानती थी क्योंकि उस का विचार था कि इस से प्रतीक पर भी कष्ट नहीं आएंगे. सत्संग में विभिन्न कथाएं सुनकर वह भयभीत हो जाती कि विपरीत भाग्य होने पर किसी व्यक्ति को कैसेकैसे कष्ट ?ोलने पड़ते हैं. मन ही मन वह उन सखियों का धन्यवाद करती जिन के कारण वह पंडितजी के संपर्क में आई थी वरना नर्क में जाने से कौन रोकता उसे.

उस दिन प्रतीक औफिस से लौटा तो चेहरे की आभा देखते ही एकता सम?ा गई कि कोई प्रसन्नता का समाचार सुनने को मिलेगा. यह सच भी था. प्रतीक को कंपनी की ओर से प्रमोशन मिली थी. शाम की चाय पीकर प्रतीक एकता को घर से दूर कुछ दिनों पहले बने एक फाइवस्टार होटल में ले गया.

कैंडल लाइट डिनर में एकदूसरे की उपस्थिति को आत्मसात करते हुए दोनों भविष्य के नए सपने बुन रहे थे. प्रतीक ने बताया कि अब वह एक आलीशान फ्लैट खरीदने का मन बना चुका है.

खुशी से एकता का अंगअंग मुसकराने लगा. खाने के बाद प्रतीक डिजर्ट मंगवाने के लिए मैन्यू देखने लगा तो एकता ने मोबाइल पर मैसेज पढ़ने शुरू कर दिए. सत्संग गु्रप में आज शंभूनाथजी ने जिस विषय पर पोस्ट डाली थी वह था कि किस प्रकार खुशियों को कभीकभी बुरी नजर लग जाती है और काम बनतेबनते बिगड़ने लगते हैं.

ऐसे में कुछ रुपए या सामान द्वारा नजर उतार कर दान कर देना चाहिए. इस से नजर का बुरा असर उस वस्तु के साथ दानपात्र के पास चला जाता है. गु्रप में कई महिलाओं ने अपने अनुभव बांटे थे कि कैसे जीवन में कुछ अच्छा होते ही अचानक उन के साथ अप्रिय घटना घट गई.

‘‘उफ, कब से आ रहा है बुखार. टेस्ट की रिपोर्ट कब तक मिलेगी,’’ प्रतीक की आवाज कानों में पड़ी तो एकता ने अपना मोबाइल पर्स में रख दिया. प्रतीक के मोबाइल पर बड़ी बहन प्रियंका ने कौल किया था, उस से ही बात हो रही थी प्रतीक की. प्रियंका आर्थिक रूप से बहुत संपन्न नहीं थी, लेकिन वह या उस का पति मुकेश अपनी स्थिति सुधारने के लिए कोई प्रयास भी करते तो वह केवल परिचितों से पैसे मांगने तक ही सीमित था.

पेशे से इलैक्ट्रिक इंजीनियर मुकेश की कुछ वर्षों पहले नौकरी चली गई थी. वह उस समय बिजली का सामान बेचने का व्यवसाय शुरू करना चाहता था, जिस में प्रतीक ने आर्थिक रूप से मदद कर व्यवसाय शुरू करवा दिया था. कुछ समय तक सब ठीक रहा, लेकिन मुकेश बाद में कहने लगा कि इस बिजनैस में खास कमाई नहीं हो रही और अब एक अंतराल के बाद नौकरी लगना भी मुश्किल है.

ऐसे में प्रियंका बारबार अपने को दयनीय स्थिति में बता कर पैसों की मांग करने लगती थी. प्रतीक के बड़े भाई की आमदनी अधिक नहीं थी और छोटे की तुलना में भी प्रतीक की सैलरी ही अधिक थी तो सारी आशाएं प्रतीक पर आ कर टिक जाती थीं. प्रतीक यथासंभव मदद भी करता रहता था.

आज प्रियंका का फोन आया तो एकता की सांस ठहर गई. वह सम?ा गई थी कि कोई नई मांग की होगी प्रियंका दीदी ने. उसे पंडितजी का मैसेज याद आ रहा था कि खुशियों को कभीकभी बुरी नजर लग जाती है. कुछ देर पहले वह फ्लैट लेने की योजना बनाते हुए कितनी खुश थी. अब प्रियंका की आर्थिक मदद करनी पड़ेगी तो पता नहीं प्रतीक फ्लैट लेने की बात कब तक के लिए टाल देगा.

उस ने घर पहुंच कर नजर उतार कुछ रुपए शंभूनाथजी को देने का मन बना लिया क्योंकि भोगविलास से दूर भक्ति में लीन साधारण जीवन जीने वाला उन जैसा व्यक्ति ही ऐसे दान का पात्र हो सकता है. शंभूनाथजी दान का पैसा कल्याण में ही लगा रहे होंगे इस बात पर पूरा भरोसा था उसे. प्रतीक को प्रियंका से बात करते देख एकता ने प्रतीक की पसंदीदा पान फ्लेवर की आइसक्रीम मंगवा ली.

‘‘दीदी ने की थी कौल?’’ आइसक्रीम का स्पून मुंह में रखते हुए एकता ने पूछा.

‘‘हां, घर चल कर बात करेंगे,’’ प्रतीक जैसे किसी निर्णय पर पहुंचने का प्रयास कर रहा था.

आइसक्रीम के स्वाद और विचारों में डूबे हुए अचानक एकता का ध्यान सामने वाली टेबल पर चला गया. उसे अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ कि वहां शंभूनाथजी विभिन्न व्यंजनों का आनंद ले रहे थे. सत्संग के दौरान दिखने वाले रूप से विपरीत वे धोतीकुरते के स्थान पर जींस और टीशर्ट पहने थे, चेहरे पर प्रवचन देते समय खिली हुई मंदमंद मुसकान जोरदार ठहाकों में बदली हुई थी. अपने को संयासी बताने वाले शंभूनाथजी के पास वाली कुरसी पर एक महिला उन से सट कर बैठी थी.

तभी वेटर ने महिला के सामने प्लेट में सजा केक रख दिया. शंभूनाथजी ने महिला का हाथ पकड़ कर केक कटवाया और हौले से ‘हैप्पी बर्थडे’ जैसा कुछ कहा. जब अपने हाथ से केक का टुकड़ा उठा कर शंभूनाथजी ने महिला के मुंह में डाला तो एकता की आंखें फटी की फटी रह गईं. उत्साह और अनुराग शंभूनाथ व महिला पर तारी था.

‘तो यह है कल्याणकारी काम जिस पर शंभूनाथजी दान का रूपयापैसा खर्च करते हैं.’ सोच कर एकता सकते में आ गई.

 

घर लौटने पर प्रतीक ने फोन के बारे में बताया. एकता का संदेह सच

निकला. प्रियंका ने इस बार बताया था कि मुकेश की अस्वस्थता के कारण वे मकान का किराया नहीं दे सके. मकान मालिक परेशान कर रहा है, माह का सारा वेतन दवाई में खर्च हो गया.

‘‘तो कितने पैसे भेजने पड़ेंगे उन लोगों को?’’ एकता न रानी सूरत बना कर पूछा.

‘‘बहुत हुआ बस. अब नहीं,’’ प्रतीक छूटते ही बोला.

‘‘मतलब इस बार आप कुछ पैसे नहीं…’’

‘‘हां, बहुत मदद की है मैंने दीदी, जीजाजी की. ये लोग स्वयं पर बेचारे का ठप्पा लगवा कर उस का फायदा उठा रहे हैं,’’ एकता की बात पूरी होने से पहले ही प्रतीक बोल उठा, ‘‘बुरे वक्त में किसी से मदद मांगना अलग बात है, लेकिन दूसरों की कमाई पर नजर रख अपने को असहाय दिखाते हुए दूसरों से पैसे ऐंठना और बात. पता है तुम्हें पिछले साल जब मैं औफिशियल टूर पर अहमदाबाद गया तो था प्रियंका के घर रुका था 1 दिन के लिए.’’

‘‘हां, याद है.’’ छोटा सा उत्तर दे कर एकता आगे की बात जानने के लिए टकटकी लगाए प्रतीक को देख रही थी.

‘‘मेरे वहां जाने से कुछ दिन पहले ही अपने बेटे कार्तिक की फीस और बुक्स खरीदने के बहाने पैसे मांगे थे मु?ा से उन लोगों ने, वहां जा कर देखा तो कार्तिक के लिए एक नामी ब्रैंड का महंगा मोबाइल फोन खरीदा हुआ था. मैं ने ऐतराज जताया तो प्रियंका दीदी बोलीं कि यह तो इसे गाने की एक प्रतियोगिता जीतने पर मिला है. मुकेश जीजाजी ने कार भी तभी खरीदी थी. क्या जरूरत थी कार लेने की जब फीस तक देने को पैसे नहीं थे उन के पास? मन ही मन मु?ो बहुत गुस्सा आया. मैं सम?ा गया कि इन्हें अपने सुखद जीवन के लिए जो पैसा चाहिए उसे ये दोनों इमोशनल ब्लैकमेल कर हासिल कर रहे हैं. उसी दिन मैं ने फैसला कर लिया कि रिश्तों को केवल सम्मान दूंगा भविष्य में.’’

‘‘आप ने यह मु?ो पहले क्यों नहीं बताया?’’

‘‘मैं सही समय की प्रतीक्षा में था.’’

‘‘मतलब?’’

‘‘देखो एकता मैं कुछ दिनों से देख रहा हूं कि तुम सत्संग में जाती हो. मैं जानता हूं कि वहां धर्म, कर्म के नाम से डराया जाता है. समयसमय पर दान का महत्त्व बता रुपएपैसे ऐंठने का चक्रव्यूह रचा जाता है. खूनपसीने की कमाई क्या निठल्ले लोगों पर उड़ानी चाहिए? फिर वह चाहे मेरी बहन हो या कोई साधू बाबा.’’

प्रतीक की बात सुन एकता किसी अपराधी की तरह स्पष्टीकरण देते हुए बोली, ‘‘मैं तो इसलिए दान देने की बात कहा करती थी कि सुना था इस से भला होता है.’’

‘‘कैसा भला? क्या उसी डर से दूर कर देना भला कहा जाएगा है जो डर जबरदस्ती पहले मन में बैठाया जाता है.’’

एकता सब ध्यान से सुन रही थी.

‘‘सोनेचांदी की वस्तुओं के दान से पाप धुल जाते हैं, रुपएपैसे व अन्य सामान का समयसमय पर दान किया जाए तो स्वर्ग मिलता है, ग्रहण लगे तो दान करो ताकि उस के बुरे प्रभावों से बचा जा सके, परिवार में जन्म हो तो भविष्य में सुख के लिए और मृत्यु हो तो अगले जन्म में शांति व समृद्धि के लिए दान पर खर्च करो. सत्संग में ऐसा ही कुछ बताया जाता होगा न,’’ प्रतीक ने पूछा तो एकता ने हां में सिर हिला दिया.

‘‘तो बताओ किसने देखा है स्वर्ग. क्या ऐसा नहीं लगता कि स्वर्गनर्क की अवधारणा ही व्यक्तिको डराए रखने के लिए की गई है, अगले जन्म की कल्पना कर के सुख पाने की इच्छा से इस जन्म की गाढ़ी कमाई लुटा देना कहां की सम?ादारी है? ग्रह, नक्षत्रों, सूर्य और चंद्रग्रहण का बुरा प्रभाव कैसे होगा जबकि ये केवल खगोलीय घटनाएं है? ये बेमतलब के डर मन में बैठाये गए हैं कि नहीं? तुम से एक और सवाल करता हूं कि यदि दान देने से पाप दूर हो जाते हैं तो इस का मतलब यह हुआ कि जितना जी चाहे बुरे कर्म करते रहो और पाप से बचने के लिए दान देते रहो, यह क्या सही तरीका है जीने का?’’

‘‘नहीं, यह रास्ता तो अनाचार को बढ़ा कर व्यक्ति को गलत दिशा में ले जा सकता है,’’ एकता के सामने सच की परतें खुल रही थीं.

‘‘मैं देखता हूं कि लोग पटरी पर धूप और ठंड में सामान बेचने वालों से पैसेपैसे का मोलभाव करते हैं, नौकरों को मेहनत के बदले तनख्वाह देने से पहले सौ बार सोचते हैं कि कहीं ज्यादा तो नहीं दे रहे. पसीने से लथपथ रिकशे वाले से छोटी सी रकम का सौदा करते हैं और वही लोग दानपुण्य संबंधी लच्छेदार बातों में फंस कर बेवजह धन लुटा देते हैं.’’

शंभूनाथ का होटल में बदला हुआ रूप देख कर एकता का मन पहले ही खिन्न था. इन सब बातों को सम?ाते हुए वह बोल उठी, ‘‘विलासिता का जीवन जीने की चाह में दूसरों को बेवकूफ बनाते हैं कुछ लोग. दान देना तो सचमुच निठल्लेपन को बढ़ाना ही है. किसी हृष्टपुष्ट को बिना मेहनत के क्यों दिया जाए? इस से हमारा तो नहीं बल्कि उस का जीवन सुखद हो जाएगा. देना ही है तो किसी शरीर से लाचार को, अनाथाश्रम या गरीब के बच्चे की पढ़ाई के लिए देना चाहिए और मैं ऐसा ही करूंगी अब.’’

प्रतीक मुसकरा उठा, ‘‘वाह, तुम कितनी जल्दी सम?ाती हो कि मैं कहना क्या चाह रहा हूं, इसलिए ही तो इतना प्यार करता हूं तुम्हें. जो अभी तुम ने कहा वही तो दीदी, जीजाजी को अब पैसे न भेजने का कारण है. जब वे लोग मुश्किल में थे मैं ने हर तरह से सहायता की. अब उन को गुजारे के लिए नहीं अपनी जिंदगी मजे से बिताने के लिए पैसे चाहिए. जहां धर्म में डर का जाल बिछा कर पैसे निकलवाए जाते हैं, वहां दीदी, जीजाजी अपनी बेचारगी का बहाना बना मु?ो बेवकूफ बना रहे हैं. मैं दान या मदद के नाम पर निकम्मेपन को बढ़ावा नहीं दूंगा, कभी नहीं.’’

‘‘सोच रही हूं व्हाट्सऐप के सत्संग गु्रप में जो फ्रैड्स हैं आज उन सब से बात करूं ताकि वे भी उस सचाई को जान सकें जिसे मैं ने जरा देर में जाना है,’’ प्रतीक की ओर मुसकरा कर देखने के बाद एकता अपना मोबाइल ले कर सखियों को कौल करने चल दी.

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