संकल्प: क्या था कविता का प्लान

उसशनिवार की शाम मुंबई में रहने वाली मेरी पुरानी सहेली शिखा अचानक मेरे घर आई, तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. अपनी सास की बीमारी के चलते वह मेरी शादी में शामिल होने दिल्ली नहीं आ सकी थी. इस कारण मेरे पति मोहित उस दिन पहली बार शिखा से मिले.

जब तक मैं चायनाश्ता तैयार कर के लाई, तब तक वे दोनों एकदूसरे से काफी खुल गए थे. मोहित के चेहरे पर छाई खुशी व पसंदगी के भाव बता रहे थे कि वे शिखा के व्यक्तित्व से काफी प्रभावित हैं.

मैं ने नोट किया कि पिछले 6 सालों में वह काफी बदल गई है. वार्त्तालाप करते हुए वह बारबार अच्छी अंगरेजी बोल रही थी. उस के कीमती सैट की महक से मेरा ड्राइंगरूम भर गया था. 2 बेटों की मम्मी होने के बावजूद वह नीली जींस और लाल टौप में सैक्सी और स्मार्ट लग रही थी.

मेरे 5 साल के बेटे मयंक के लिए शिखा रिमोट कंट्रोल से चलने वाली कार लाईर् थी. अपनी शिखा मौसी के गाल पर आभार प्रकट करने वाली बहुत सारी पुच्चियां कर वह कार से खेलने में मस्त हो गया.

मेरे बनाए पकौड़ों के स्वाद की तारीफ करने के बाद शिखा बोली, ‘‘मेरे घर में 3 नौकर काम करते हैं. जो थोड़ाबहुत किचन का काम मैं शादी होने से पहले करना जानती थी अब वह भी भूल गई हूं.’’

‘‘जब नौकर घर में हैं तो तुझे काम करने की जरूरत ही क्या है? तू तो खूब ऐश कर,’’ मैं ने हंसते हुए जवाब दिया.

‘‘ऐश तो मैं वाकई बहुत कर रही हूं, कविता. किसी चीज की कोई कमी नहीं है मेरी जिंदगी में. आधी से ज्यादा दुनिया घूम चुकी हूं और अगले महीने हम चीन घूमने जा रहे हैं.’’

‘‘अमीर होने का मेरी नजरों में सब से बड़ा फायदा यही है कि बंदा जब चाहे देशविदेश भ्रमण करने निकल सकता है. कहांकहां घूम आए हो तुम दोनों?’’ मैं ने उत्साहित लहजे में पूछा.

‘‘अपने देश के लगभग सारे हिल स्टेशन हम ने देख लिए हैं. यूरोप घूमने 3 साल पहले गए थे. उस से पिछले साल केन्या में सफारी का मजा लिया था.’’

मेरा कोई सपना है तो वह देशविदेश में खूब घूमने का. तभी पूरी दिलचस्पी दिखाते हुए उस के देशविदेश भ्रमण के अनुभव मैं ने काफी देर तक सुने.

‘‘मुझे यह तो बता कि तुम दोनों कहांकहां घूमे हो?’’ काफी देर तक अपनी सुनाने के बाद शिखा को हमारे बारे में कुछ पूछने का खयाल आया.

समस्या यह पैदा हुई कि हमारे पास बताने को ज्यादा कुछ नहीं था और इस बात ने मेरे अंदर अजीब सी बेचैनी पैदा कर दी.

‘‘हम हनीमून मनाने शिमला गए थे. उस शानदार और यादगार ट्रिप के बाद कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम चाह कर भी नहीं बना सके हैं,’’ मैं ने यों तो मुसकराते हुए जवाब दिया, पर न चाहते हुए भी मेरी आवाज में उदासी के भाव उभर आए थे.

‘‘अरे, उस हनीमून ट्रिप के अलावा पिछले 6 सालोें में क्या तुम सचमुच कहीं और घूम कर नहीं आए हो?’’ शिखा हैरान हो उठी.

‘‘नहीं यार,’’ मैं ने गहरी सांस खींच कर सफाई दी, ‘‘शादी के बाद से कोई न कोई बड़ा खर्चा हमारे सिर पर हमेशा खड़ा रहा है. पहले ननद की शादी की. छोटे देवर की इंजीनियरिंग की पढ़ाई इसी साल पूरी हुई है. पिछले 2 सालों से इस फ्लैट की किस्त हर महीने चुकानी पड़ती है. यों तो हम दोनों कमा रहे हैं, पर कहीं घूमने जाने के लिए बचत हो ही नहीं पाती है.’’

मुझे हर साल कहीं न कहीं घुमा कर लाने के लिए शिखा मोहित को प्रेरित करने लगी, पर मैं ने अपने मन को दुखी न करने के इरादे से वार्त्तालाप में हिस्सा लेना बंद कर दिया.

शिखा के साथ हंसनाबोलना मोहित को खूब अच्छा लगा. वह करीब 2 घंटे हमारे साथ रही और फिर लौटते हुए शिखा मुझ से बोली, ‘‘जब भी मौका लगेगा, मैं अपने पति को मोहित से मिलाने जरूर लाऊंगी. सच कविता तेरी शादी बहुत हंसमुख और दिल के अच्छे इंसान के साथ हुईर् है.’’

मोहित को छेड़ने के लिए मैं ने मजाकिया लहजे में जवाब दिया, ‘‘तेरा साथ इन्हें कुछ ज्यादा ही पसंद आया है, वरना ये इतने ज्यादा हंसमुख नहीं हैं. ये अपनी छोटी साली के साथ भी इतना ज्यादा समय नहीं गुजारते हैं जितना तेरे साथ गुजारा है.’’

‘‘मैं छोटी नहीं बल्कि बड़ी साली हूं, इसलिए मुझे पूरा सम्मान देते हुए मेरा ज्यादा खयाल रखा है. मेरे साथ खूब मजेदार गपशप करने के लिए थैंकयू, मोहित,’’ शिखा ने मुड़

कर पीछे आ रहे मोहित से बड़ी गर्मजोशी से

हाथ मिलाया.

न जाने क्यों शिखा की ‘बड़ी साली’ वाली बात मेरे मन को चुभ गई. वह मुझ से साल भर बड़ी है, पर अब मैं उस से काफी ज्यादा बड़ी लगने लगी हूं, इस एहसास ने मेरा मन एकाएक खिन्न कर दिया.

अपनी कार के पास पहुंच कर शिखा संजीदा लहजे में बोली, ‘‘कविता, तू कुछ ज्यादा मोटी हो गई है. मैं जानती हूं कि तुझे चौकलेट और आइसक्रीम बहुत पसंद हैं, पर अब कुछ समय के लिए उन्हें खाना बंद कर दे.’’

‘‘यार, इन दोनों चीजों को खाना कम तो कर सकती हूं, पर बिलकुल बंद करना मुश्किल है,’’ मैं ने नकली हंसी हंसते हुए जवाब दिया.

‘‘देख, अगर तू ऐसे ही फूलती चली गई, तो मोहित की जिंदगी में कोई दूसरी औरत आ जाएगी.’’

‘‘मैं कितनी भी मोटी हो जाऊं, पर ये मुझे छोड़ कर किसी की तरफ कभी नहीं देखेंगे,’’ मैं ने प्यार से मोहित का हाथ पकड़ कर कुछ तीखे लहजे में जवाब दिया.

‘‘सहेली, यों आंखें मूंद कर जीना बंद कर,’’ शिखा गंभीर हो कर मुझे समझने लगी, ‘‘पत्नियों के लिए अपने व्यक्तित्व को आकर्षक बनाए रखने में लापरवाही करना उन के सुखी दांपत्य जीवन के लिए खतरा बन सकता है. मेरी तरह सुंदर और फिट दिखने की कोशिश तुझे भी दिल से करनी चाहिए.’’

‘‘कमर में दर्द रहने की वजह से इस का वजन कुछ बढ़ गया है, पर यह ‘मोटो’ मुझे अभी भी बहुत सुंदर लगती है,’’ मोहित ने मेरी तरफदारी करने की कोशिश जरूर करी, पर उन का मेरे लिए ‘मोटो’ शब्द का प्रयोग करना मुझे अच्छा नहीं लगा.

‘‘तुम सचमुच बहुत समझदार और दिल

के अच्छे इंसान हो,’’ मोहित की फिर से तारीफ करने के बाद वह मुझ से गले मिली और कार में बैठ गई.

शिखा के जाने के बाद मैं ने मोहित को बुझ हुआ सा देखा. मेरे लिए उन के  मनोभावों को समझना मुश्किल नहीं था. शिखा ने जातेजाते मेरी तुलना अपने साथ कर के मोहित का मूड खराब कर दिया था.

डिनर करते हुए भी हमारे बीच अजीब सी दूरी और खिंचाव बना रहा. मैं ने उन की सुखसुविधा का खयाल रखने में कभी कोई कमी नहीं रखी, पर आज उन का मुंह फुला कर घूमना मुझे मेरी अपनी नजरों में गिराने की कोशिश करने जैसा था. यह बात मेरे मन को बहुत दुखी कर रही थी.

उस रात मेरे मन में मोहित के साथ अपने दांपत्य संबंधों की मजबूती को ले कर असुरक्षा का भाव पहली बार उठा. हमारे यौन संबंधों में अब पहले जैसा जोश नहीं रहा है, यह एहसास मेरे मन को और ज्यादा परेशान कर रहा था.

वे सोने से पहले नहाने के लिए जब बाथरूम में जा रहे थे, तो मैं ने उन्हें रोक कर भावुक लहजे से पूछ ही लिया, ‘‘आज बहुत देर से यों उदास हो कर क्यों घूम रहे हो?’’

‘‘मैं ठीक हूं,’’ मुझ से नजरें चुराते हुए उन्होंने बुझे से लहजे में जवाब दिया.

‘‘क्या अपने मन की बात मुझ से नहीं कहोगे?’’ मैं एकदम से रोंआसी हो उठी.

‘‘हम अमीर न होने के कारण अभावों से भरी जिंदगी जी रहे हैं, इस कारण क्या तुम मन ही मन दुखी रहती हो?’’ उन की आवाज में मौजूद पीड़ा के भाव मुझे अंदर तक हिला गए.

‘‘ऐसा अजीब सवाल क्यों पूछ रहे हो?’’ मैं ने उन से उलटा सवाल किया.

‘‘शिखा जब अपनी देशविदेश की यात्राओं के विवरण तुम्हें सुना रही थी, तब मैं ने तुम्हारी आंखों में गहरे अफसोस के भाव साफ देखे थे. अपने खूब घूमने के सपनों को पूरा न कर पाने का तुम्हें क्या बहुत दुख है?’’

‘‘बच्चों जैसी बात मत करो,’’ मैं ने उन्हें प्यार से डपट दिया, ‘‘मैं पहले तुम्हारी सारी जिम्मेदारियों को पूरा करने के महत्त्व को समझती हूं और अपने हालात से पूरी तरह सुखी और संतुष्ट हूं, माई डियर हस्बैंड.’’

‘‘तुम सच बोल रही हो?’’ उन की आंखों में कुछ राहत के भाव उभरे.

‘‘मैं बिलकुल सच बोल रही हूं. आई एम वैरी हैप्पी विद यू,’’ मैं भावविभोर हो उन से लिपट गई.

‘‘मैं वादा करता हूं कि तुम्हें एक बार पूरे यूरोप की सैर जरूर कराऊंगा,’’ उन्होंने मेरे माथे को चूमा और फिर जोशीली आवाज में बोले, ‘‘हम कल ही बैंक में एक अकाउंट खोलेंगे. उस में जो रकम जमा होगी, वह सिर्फ तुम्हारे घूमने के शौक को पूरा करने के काम आएगी.’’

‘‘तुम सचमुच बहुत अच्छे हो,’’ उन के गाल पर प्यार भरा चुंबन अंकित करने के बाद मैं ने उन्हें बाथरूम में जाने की इजाजत दे दी.

पलंग पर लेट कर मैं अपने मानोभावों को समझने की कोशिश में लग गई.  मोहित शिखा के साथ मेरे रंगरूप की तुलना कर के शाम से दुखी हो रहे हैं, मेरा यह अंदाजा पूरी तरह से गलत निकला था.

सुंदर स्त्री का साथ सब पुरुष चाहते हैं और मैं ने मोहित की आंखों में भी आज खूबसूरत और स्मार्ट शिखा के लिए प्रशंसा के भाव कई बार साफ देखे थे. मेरी जिम्मेदारी बनती थी कि मोहित को एक खूबसूरत व आकर्षक जीवनसाथी का साथ हमेशा मिले.

मयंक के होने के बाद से अपने रंगरूप व फिगर का ढंग से रखरखाव न कर पाने के लिए मैं ने खुद को दोषी माना और फौरन इस कमी को दूर करने का फैसला मन ही मन कर लिया.

मैं जिंदगी की चुनौतियों के सामने हार मानने वालों में से नहीं हूं. अपने जीवन में कई महत्त्वपूर्ण कार्यों को मैं ने अकेले अपने बलबूते पर पूरा किया था.

मैं ने अपनी एमए की पढ़ाई बच्चों को ट्यूशन पढ़ा कर पूरी करी थी. अपने लिए मोहित का रिश्ता मैरिज साइट पर जा कर खुद ढूंढ़ा था. शादी के बाद मुझे जल्दी समझ में आ गया था कि अगर मैं ने नौकरी नहीं करी तो हमें हमेशा आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ेगा. घर के कामकाज में उलझे रह कर पढ़ाई करना कठिन था, पर मैं ने लगन और मेहनत के बल पर बीएड की डिगरी हासिल करी थी.

उसी जोशीले जलबे के साथ अपने दांपत्य संबंधों में जोश और खुशियां भरने का संकल्प मैं ने उसी पल कर लिया. हम शिखा की तरह अमीर नहीं थे, पर हमें आपस में साथ रहने को बहुत समय मिलता था. मैं ने फैसला किया कि अपने दांपत्य जीवन में हंसीखुशी और मौजमस्ती बढ़ाने के लिए मैं अब से इस समय का सदुपयोग बखूबी करूंगी.

मोहित ने मेरी खुशियों की खातिर नया अकाउंट खोलने का फैसला किया. इसी तर्ज पर 3 महीने बाद आ रही शादी की सालगिरह पर मैं ने खुद को ज्यादा फिट, आकर्षक और सुंदर बना कर उन्हें खास उपहार देने का पक्का मन बना लिया.

मैं ने उसी वक्त उठ कर सुबह 5 बजे का अलार्म लगाया. सुबह जल्दी उठ कर पार्क में घूमने जाने का मेरा पक्का इरादा था. मेरी कमर का दर्द अब मेरा वजन कम करने में कोई रुकावट खड़ी नहीं कर सकेगा. वैसे डाक्टर का कहना भी यही था कि नियमित रूप से व्यायाम करने से ही दर्द जड़ से जाएगा.

वे नहा कर बाहर आए तो खुल कर मुसकरा रहे थे. मुझे उन की आंखों में जी भर कर प्यार करने वाले भाव दिखे, तो मेरे दिल की धड़कनें एकदम से बढ़ गईं.

मुझे लगा कि स्मार्ट और सैक्सी शिखा के साथ गुजारा वक्त टौनिक की तरह काम करते हुए मोहित को रोमांटिक बना रहा है, पर यह विचार मुझे परेशान नहीं कर सका. जल्द ही मैं खुद उन्हें ऐसा टौनिक भरपूर मात्रा में पिलाया करूंगी, अपने इस संकल्प को फिर से दोहरा कर मैं उन की मजबूत बांहों के घेरे में कैद हो गई. मन में एक डर था कि कहीं शिखा की बात सही न निकले. कोई मोहित को ले न उड़े.

3 माह बाद शिखा अचानक पहले की तरह बिना बताए आ धमकी. इन दिनों में मैं ने अपना वजन 3 किलोग्राम कम कर लिया था. बदन चुस्त हो गया था. मार्क्स ऐंड स्पैंसर से सेल में कुछ अपने लायक ड्रैसें भी ले आई थी जो लेटैस्ट डिजाइन की तो न थीं पर पहले वाले बहनजी रूप से मुझे बदलने लायक तो थी हीं. मेरा बेटा मयंक अब गंभीर हो कर पढ़ने लगा था और मोहित का रुख और ज्यादा प्यारा हो गया था. जब वह आई तो मैं ने देखा कि वह पहले की तरह चुस्त तो थी पर चेहरे पर उदासी की परत बिखरी थी.

बनावटी ठहाके से उस ने मोहित को पुकारा. ‘‘हाय जीजू कहां हो… देखो तो बड़ी साली आई है.’’

मोहित तुरंत कमरे से निकले पर इस बार वह गर्भजोशी नहीं थी जो पिछली बार शिखा के साथ 2 घंटे बाद हुई थी. उन्होंने हंस कर स्वागत किया और कहा, ‘‘सालीजी, यह क्या हुआ? इतने दिनों से कोई मैसेज नहीं, कोई हाय नहीं, कोई तुम्हारी सलोनी तसवीर नहीं.’’

मैं ने पूछा, ‘‘चीन कैसा रहा? रोज कोविड की वजह से चीन के बंद होने की खबरें आ रही थीं.’’

शिखा ने कहा, ‘‘अरे कहां का चीन? हम जा ही नहीं पाए. मेरे पति तो  आजकल भाइयों के विवाह में बुरी तरह फंस गए हैं. कहीं आनाजाना हो ही नहीं पा रहा. मैं दिल्ली उन्हीं के साथ आई हूं, एनसीएलएटी में इन की अपील है. अकेले आने की सोच रहे थे पर 3 वकीलों से कौंन्फ्रैंस तय हो गई.

‘‘उन के मन पर हरदम बोझ रहता है. वजन बढ़ने लगा है. बहुत टैंस रहते हैं. अब कंपनी के कामों के सिलसिले में बाहर जाना बंद सा हो गया है. जब हालत सुधरेंगे तब देखेंगे. मेरी छोड़ अपनी सुना कविता. स्मार्ट लग रही है. वजन भी कम हो गया है. लगता है जीजू कुछ ज्यादा खयाल रख रहे हैं.’’

वह 2 घंटे रुकी पर पिछली बार की तरह ठहाके नहीं लगा पा रही थी. चलते हुए बोली, ‘‘जो हाथ में है उसी को ऐंजौय कर कविता. मेरी अपनी फिलौसफी इन के मुकदमों ने बदल दी है,’’ फिर मयंक के लिए चौकलेट का डब्बा देते हुए बोली, ‘‘मयंक ट्यूशन से आए तो देना न भूलना.’’

उस के जाने के बाद मुझे एहसास हुआ कि मैं कितनी खुश हूं. बेकार में कंपीटिशन करने लगी थी. हरेक के जीवन में उतारचढ़ाव आते हैं. दूसरों को ऊंचे जाते देख अपनी हार नहीं माननी चाहिए, अपना काम अपनी गति से करते रहना चाहिए वरना दुख कब पिछले दरवाजे से घुस जाए. पता नहीं.

अब मेरा डर गायब हो गया था. मैं ने मोहित की एक जोर की पप्पी ली और बरतन समेटने लगी. मोहित सोच रहे थे कि अचानक यह बारिश क्यों और कैसे हुई?

घर पर लीजिए कटहल की दम बिरयानी का मजा

बिरयानी खाना किसे पसंद नहीं, लेकिन वेजिटेरियन लोगों के लिए बिरयानी के ऑप्शन बेहद कम होते हैं. ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कटहल की बिरयानी के बारे में, जिसका स्वाद आप भूल नहीं पाएंगे. तो फिर देर किस बात की चलिए जानते हैं इसकी विधि.

सामग्री

  • 200 ग्राम कटहल के छिले व कटे डेढ़ इंच के टुकड़े
  • 1 कप चावल
  • 3 लौंग
  • 2 छोटी इलायची
  • 1 इंच टुकड़ा दालचीनी
  • 1 बड़ी इलायची
  • 1 तेजपत्ता
  • 2 छोटे चम्मच तेल
  • नमक स्वादानुसार.

सामग्री कटहल को मैरीनेट करने की

  • 2 बड़े चम्मच प्याज का पेस्ट
  • 2 छोटे चम्मच अदरक व लहसुन का पेस्ट
  • 1/4 छोटा चम्मच हलदी पाउडर
  • 1 छोटा चम्मच देगी मिर्च पाउडर
  • 1 बड़ा चम्मच मोटा बेसन
  • 1 छोटा चम्मच रिफाइंड औयल
  • कटहल तलने के लिए पर्याप्त रिफाइंड औयल
  • नमक स्वादानुसार.

अन्य सामग्री

  • 1/2 कप लंबे कतलों में कटा व भुना प्याज
  • 1/4 कप दही
  • 2 बड़े चम्मच प्याज का पेस्ट
  • 1 छोटा चम्मच अदरक व लहसुन का पेस्ट
  • 1/2 छोटा चम्मच हलदी पाउडर
  • 1/2 छोटा चम्मच गरममसाला
  • 2 छोटे चम्मच धनिया पाउडर
  • 1 छोटा चम्मच देगी मिर्च पाउडर
  • 1/2 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर
  • 5-6 केसर के धागे 1 चम्मच केवड़ा में भिगोए हुए
  • 1/4 कप टोमैटो प्यूरी
  • 2 तेजपत्ते
  • 2 बड़े चम्मच पुदीनापत्ती कटी
  • 1 बड़ा चम्मच धनियापत्ती कटी
  • 2 हरीमिर्चें लंबाई में चीरी हुईं
  • 1 बड़ा चम्मच अदरक के बारीक कतरे लच्छे
  • 1 छोटा चम्मच जीरा
  • 3 बड़े चम्मच तेल
  • 3 बड़े चम्मच देशी घी
  • नमक स्वादानुसार.

विधि

चावलों को साफ कर के 20 मिनट पानी में भिगाए रखें. कटहल के टुकड़ों को 20 मिनट मैरिनेट कर के अलग रखें. 6 कप पानी उबालें और उस में खड़े मसाले, नमक, तेल डालें और फिर चावल डाल कर उन के 80% गलने तक पकाएं और फिर मांड़ पसा दें. मैरिनेट किए कटहल के टुकड़ों को गरम तेल में सुनहरा होने तक डीप फ्राई करें. एक अन्य बरतन में तेल गरम कर के प्याज, अदरक व लहसुन भूनें. फिर दही, सूखे मसाले व नमक डाल कर भूनें. फिर टोमैटो प्यूरी डालें. जब मसाला तेल छोड़ने लगे तो उस में 11/2 कप पानी व कटहल के टुकड़े डाल कर 2 मिनट तेज आंच पर पकाएं. अब एक भारी पैंदे के बरतन में नीचे 2 बड़े चम्मच देशी घी डाल कर तेजपत्ता लगाएं. फिर आधे चावलों की तह लगा दें. उन पर पूरा कटहल फैला दें. साथ ही भुना प्याज आधा. अब पुन: थोड़े से चावल फैलाएं और उन पर भुना प्याज, अदरक, हरीमिर्च, धनिया व पुदीनापत्ती फैला दें. बचे चावलों की तह लगाएं. ऊपर से केसर घोट कर फैला दें और फिर बचा देशी घी. ढक्कन लगाएं और बिलकुल धीमी आंच पर 10 मिनट दम कर के सर्व करें.

पौल्यूशन का असर मेरी स्किन पर साफ दिखाई देता है. कृपया बताएं मुझे स्किन को पौल्यूशन से बचाने के लिए क्या करना चाहिए?

सवाल

पौल्यूशन का असर मेरी स्किन पर साफ दिखाई देता है. कृपया बताएं मुझे स्किन को पौल्यूशन से बचाने के लिए क्या करना चाहिए?

जवाब 

प्रदूषित हवा में ऐसिड अधिक होने की वजह से स्किन रूखी हो जाती है और प्रदूषण के कण उन के अंदर प्रवेश कर जाते हैं. लिहाजाऐसा क्लींजर यूज करें जो स्किन से नमी निकाले बिना उसे मौइस्चराइज करे. स्किन पर मौइस्चराइजर लगाने के बजाय फेशियल औयल यूज करें. यह हानिकारक तत्वों को स्किन में प्रवेश करने से रोकता है. स्किन में मौजूद औयल प्रदूषण के हानिकारक कण और धूलमिट्टी को हटाने में टोनर मदद करता है.

इसलिए मौइस्चराइजर के बाद टोनर लगाएं. समयसमय पर स्किन की स्क्रबिंग करना भी जरूरी हैलेकिन हलके हाथों से ताकि स्किन धूलमिट्टी और औयल से पूरी तरह फ्री हो जाए. आप चाहें तो फेशियल की जगह हलदी वाला या फिर आलू वाला फेस मास्क भी लगा सकती हैं. यह भी स्किन पर प्रदूषण के असर को कम करने में मदद करेगा.

प्यार को प्यार से जीत लो: शालिनी ने मां को कैसे मनाया

सुबह की हलकी धूप में बैठी मित्रा  नई आई पत्रिका के पन्ने पलट रही थीं कि तभी शालिनी की तेज आवाज ने उन्हें चौंका दिया.

‘‘ममा…ममा…आप कहां हो?’’

‘‘ऊपर छत पर हूं. यहीं आ जाओ.’’

सुमित्रा की तेज आवाज सुनते ही शालिनी 2-2 सीढि़यां फांदती उन के पास जा पहुंची. सामने पड़ी कुरसी खींच कर बैठते हुए बोली, ‘‘ममा, मैं आप को कब से ढूंढ़ रही हूं और आप यहां बैठी हैं.’’

शालिनी की अधीरता देख सुमित्रा को हंसी आ गई. इस लड़की को देख कर कौन कहेगा कि यह पतलीदुबली लड़की एक डाक्टर है और एक दिन में कईकई लेबर केस निबटा लेती है.

‘‘बोलो, तुम्हें कहना क्या है?’’

पता नहीं क्या हुआ कि शालिनी एकदम चुप हो गई. उस के स्वभाव के विपरीत उस का आचरण देख सुमित्रा अचंभित थीं. वे समझ नहीं पा रही थीं कि कौन सी ऐसी बात है जिसे बोलने के लिए इस वाचाल लड़की को हिम्मत जुटानी पड़ रही है. थोड़ी देर की चुप्पी के बाद शालिनी ने खुद ही बातें शुरू कीं.

‘‘ममा, मैं आप का दिल नहीं दुखाना चाहती थी, लेकिन क्या करूं… आप को धोखे में भी नहीं रख सकती. इसलिए आप को बता रही हूं कि मैं ने और अतुल ने इसी महीने शादी करने का फैसला कर लिया है.’’

बेटी की बातें सुन कर सुमित्रा बुरी तरह चौंक गईं, मानो अचानक ही कोई दहकता अंगारा उन के पांव तले आ गया हो.

‘‘क्या…क्या कह रही हो तुम. यह कैसा मजाक है?’’

‘‘नहीं ममा…आई एम नौट जोकिंग. आई एम सीरियस.’’

‘‘शादीब्याह को क्या तुम ने गुड्डेगुडि़यों का खेल समझ रखा है जिस से चाहोगी जब चाहोगी झट से जयमाला डलवा दूंगी. सच पूछो तो इस में तुम्हारी भी क्या गलती है. समीर ने मेरे मना करने के बावजूद तुम्हारी हर गलतसही मांगों को पूरा कर के तुम्हें इतना स्वार्थी और उद्दंड बना दिया है कि आज तुम्हेें मातापिता की भावनाओं का भी खयाल नहीं रहा.’’

‘‘ममा, हर बात के लिए आप पापा को दोष मत दीजिए. यह मेरा और अतुल का फैसला है. कंपनी अतुल को अगले महीने अमेरिका की अपनी एक शाखा में नियुक्त कर रही है. उस ने मेरे पासपोर्ट और दूसरे कागजात की भी व्यवस्था कर रखी है, इसीलिए हम दोनों इस महीने में शादी करना चाहते हैं.’’

‘‘जब तुम ने सारे फैसले खुद ही कर रखे हैं तो अब पूछना कैसा?’’ गुस्से से तिलमिला कर सुमित्रा बोलीं, ‘‘सूचना देने के लिए धन्यवाद. जाओ, जो दिल चाहे वही करो.’’

सुमित्रा एकटक अपनी जाती हुई बेटी को देखती रहीं. उस की परवरिश में कहां कमी रह गई कि उस की इकलौती संतान, उस की अपनी ही बेटी ने अपने जीवन के इतने अहम फैसले में अपने मातापिता से सलाह तक लेने की जरूरत नहीं समझी. शालिनी की शादी उन के जीवन का सब से बड़ा सपना था. पर आज जब शादी होने का समय आया तो वे एक मूकदर्शक मात्र बन कर रह गई थीं.

बेटी से मिली अवहेलना की दारुण पीड़ा को झेलना उन के लिए दुष्कर था.

ऐसा नहीं था कि सुमित्रा को अतुल पसंद नहीं था. वह कई बार शालिनी के साथ घर आया था. एक मल्टीनैशनल कंपनी में ऊंचे ओहदे पर काम कर रहा था. संस्कारी और सौम्य स्वभाव का लड़का था. विजातीय होते हुए भी अतुल, सुमित्रा को दिल से स्वीकार होता, अगर मातापिता की उपेक्षा न कर के शालिनी अपनी शादी का फैसला उन्हें अपने विश्वास में ले कर करती.

शाम को आफिस से लौटने के बाद समीर को जब सारी बातें मालूम हुईं तो बेटी के इस अप्रत्याशित फैसले ने उन्हें भी थोड़ी देर के लिए किंकर्तव्यविमूढ़ बना दिया. पर हमेशा की तरह थोड़ी देर बाद ही बेटी की गलती सुधारने में जुट गए.

समीर ने शालिनी को बुला कर उस से पूछताछ शुरू कर दी.

‘‘इस शादी के लिए क्या अतुल के मातापिता तैयार हैं?’’

‘‘नहीं, पापा, वे दोनों पूरी तरह हमारी शादी के खिलाफ हैं. हफ्ते भर से अतुल उन्हें मनाने में जुटा है फिर भी उस के मातापिता तैयार नहीं हो रहे हैं. उन का कहना है कि उन्हें अपने बेटे के लिए एक विजातीय डाक्टर बहू नहीं, एक सजातीय सीधीसादी घरेलू लड़की चाहिए.’’

‘‘तुम चिंता मत करो, मैं शीघ्र ही अतुल के मातापिता से मिल कर उन्हें समझाबुझा कर तुम दोनों की शादी करवाने की पूरी कोशिश करता हूं.’’

‘‘नहीं, पापा, आप बात नहीं करेंगे. मेरे कारण वे आप के सम्मान को ठेस पहुंचाएं, यह मुझे मंजूर नहीं होगा.’’

‘‘वे अतुल के मातापिता हैं, उन का इस शादी के लिए तैयार होना बहुत जरूरी है, वरना तुम दोनों सारी जिंदगी सुकून से नहीं जी पाओगे.’’

‘‘माई फुट, वे मानें या न मानें… शादी तो हर हाल में अतुल मुझ से ही करेगा. वे मानेंगे तो ठीक, वरना हम दोनों कोर्ट में शादी कर लेंगे.’’

‘‘बेटा, थोड़ा सब्र से काम लो. अतुल उन की इकलौती संतान है, वह उन्हें मना ही लेगा.’’

‘‘नहीं…पापा…मैं अब और ज्यादा इंतजार नहीं कर सकती. मैं तो आज ही अतुल से शादी पक्की करने के लिए बात करूंगी.’’

‘‘जिंदगी के फैसले इस तरह जल्दबाजी में नहीं लिए जाते. इस शादी से सिर्फ तुम्हारा और अतुल का रिश्ता ही नहीं जुड़ेगा, तुम्हारे न चाहने पर भी, ढेर सारे रिश्ते खुद ब खुद तुम से आ जुड़ेंगे… जिन से तुम इनकार नहीं कर सकतीं.’’

‘‘पापा, कौन मुझे इंडिया में रहना है जो इन रिश्तेनातों को निभाने के लिए परेशान रहूं.’’

‘‘अभी तुम्हारी समझ में नहीं आ रहा है, जब दूर जाओगी तो अपनों की और रिश्तेनातों की अहमियत समझ में आएगी. एक बात और समझ लो कि तुम्हारे इस तीखे तेवर से उन के इस विश्वास को और भी बल मिलेगा कि ज्यादा पढ़ीलिखी लड़की उन लोगों का सम्मान नहीं करेगी. उन के इस भ्रम को तोड़ने के लिए तुम्हें झुकना होगा. बड़ों के सामने झुकने में तुम्हारी तौहीन नहीं होगी, बल्कि खुद झुक कर ही तुम उन्हें झुका सकती हो. उन का प्यार और सम्मान पा सकती हो.’’

बिना कोई जवाब दिए चुपचाप शालिनी वहां से उठ कर बाहर आ गई और अपनी कार ले डा. सुधा वर्मा के घर की तरफ चल दी. डा. सुधा वर्मा उस की सीनियर और गाइड ही नहीं, अंतरंग सहेली जैसी थीं. जब वह सुधा वर्मा के पास पहुंची तब और दिनों की अपेक्षा ज्यादा आपरेशन होने के कारण वे काफी व्यस्त थीं. शालिनी पर नजर पड़ते ही काफी खुश हो गईं.

‘‘अच्छा हुआ जो तुम आ गईं. तुम जरा वार्ड नं. 13 में 113 नंबर बैड पर ऐडमिट डिप्रैशन के एक मरीज की जांच कर लो. सुबह जब मैं राउंड पर गई थी तब तो ठीक थी, अभी थोड़ी देर पहले से उस की परेशानी कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है.’’

शालिनी वार्ड नं. 13 की तरफ चल पड़ी. उस वार्ड में एक प्रौढ़ महिला ऐडमिट थी. भरेभरे शरीर और बड़ीबड़ी आंखों वाली उस आकर्षक महिला के चेहरे पर गहरी विषाद की लकीरें छाई हुई थीं, जैसे कोई गहरी वेदना उसे साल रही थी. उस संभ्रांत महिला के साथ आई महिला ने बताया कि 2 दिन से उन की यही स्थिति है. इन 2 दिनों में इन्होंने अन्न का एक दाना भी नहीं खाया है.’’

‘‘इस तरह की स्थिति क्या इन की पहले भी कभी हुई है?’’ शालिनी ने पूछा.

‘‘नहीं…नहीं…डाक्टरनी साहिबा. पहले इन की इस तरह की स्थिति कभी नहीं हुई. वह तो 4 दिन पहले इन की अपने इकलौते बेटे से किसी बात पर जम कर बहस हुई और वह इन्हें छोड़ कर मुंबई चला गया. 2 दिन तक तो इन्होंने किसी तरह अपने को संभाला, लेकिन जब बेटे का कोई फोन नहीं आया तो इन की स्थिति बिगड़ने लगी और हमें यहां लाना पड़ा.’’

शालिनी ने पहले नर्स को जरूरी इंजेक्शन तैयार करने की हिदायत दी फिर खुद भी उस महिला की नब्ज देखने लगी. महिला बेहोशी जैसी स्थिति में भी कुछ बड़बड़ाए जा रही थी, ‘मैं ने पालपोस कर बड़ा किया, इतना प्यार दिया और तू है कि मुझे ही जलाए दे रहा है. क्या तेरा सारा फर्ज उस कल आई लड़की के लिए ही है. बूढ़े मातापिता के प्रति तेरा कोई फर्ज नहीं है…और ऊपर से जलीकटी सुनाता है. जा, चला जा मेरी नजरों के सामने से. इस बीमार मां को जितना दुख दिया है उस से दोगुना दुख तू पाएगा. मैं यह सोचूंगी कि मैं ने अपना दूध अपने बेटे को नहीं एक संपोले को पिलाया है.’

शालिनी को यह समझने में देर नहीं लगी कि बेटे के किसी आचरण ने मां को गहरा सदमा दिया था. जब उस औरत की स्थिति थोड़ी सामान्य हुई और वह सो गई, तो शालिनी ने सुधा दीदी के पास जा कर उन्हें अब तक की स्थिति की रिपोर्ट थमा दी और सीधे आ कर कार में बैठ गई. कार में बैठने के साथ ही उस औरत का अशांत और पीडि़त चेहरा शालिनी की आंखों के सामने बारबार घूम रहा था. बेटे के कठोर आघात ने मां के दिल में कैसी कटुता भर दी थी कि बेहोशी की हालत में भी उसे कोस रही थी. शालिनी को एक ही बात बारबार दंश दे रही थी कि क्या वह खुद भी अतुल के साथ मिल कर कुछकुछ वैसा ही अपराध नहीं कर बैठी थी.

पहली बार शालिनी को अपने पापा की बातों की गहराई समझ में आई थी. अपने सुनहरे भविष्य की अटारी पर बैठी अपने जिस सपने को वह मुग्धभाव से निहार रही थी अचानक ही वह जमीन पर गिर कर चकनाचूर हो गया. अपनी स्वार्थी सोच पर लगाम देने के लिए शालिनी ने अतुल के घर की तरफ अपनी कार मोड़ ली.

वहां पहुंच कर बड़े ही आत्मविश्वास के साथ वह अंदर आ गई. सामने ही अतुल की मम्मी गायत्री देवी पाइप से पौधों को पानी दे रही थीं. उसे गेट खोल कर अंदर आते देख हाथ का पाइप एक तरफ रखते हुए बोलीं, ‘‘तुम…तुम यहां क्या करने आई हो? तुम्हें मालूम नहीं कि अतुल घर पर नहीं है. वह एक हफ्ते के लिए बाहर गया हुआ है.’’

‘‘मुझे मालूम है आंटी, पर मैं अतुल से नहीं आप से बात करने आई हूं.’’

‘‘आई हो तो मुझ से उम्मीद मत रखना. मैं आसानी से अपने फैसले नहीं बदलती. मेरा एक ही जवाब है, अगर अतुल तुम से शादी करेगा तो अपने मातापिता को खो देगा.’’

‘‘आप निश्ंिचत रहिए आंटी, मैं आप को अपना फैसला बदलने के लिए मजबूर करने नहीं आई हूं. अगर आप सोचती हैं कि मेरे साथ अतुल की शादी होने से आप का नाम खराब होगा तो कहीं न कहीं आप की सोच सही ही होगी. आप हमारी बड़ी हैं, अतुल की मां हैं, सच मानिए आंटी, मैं आप की बहुत इज्जत करती हूं. आप का अतुल पर पहला हक है. मैं उसे आप से कभी अलग करने की बात सोच भी नहीं सकती. जब तक आप नहीं चाहेंगी, आप आशीर्वाद नहीं देंगी, तब तक हम दोनों कभी शादी नहीं करेंगे, यह आप से मेरा वादा है.’’

‘‘और मेरा आशीर्वाद तुम्हें कभी मिलेगा नहीं.’’

‘‘तो ठीक है, आंटी. आज और अभी से मैं अपने सारे संबंध अतुल के साथ तोड़ती हूं.’’

इतना बोल वह तेजी से मुड़ कर अपनी कार में आ बैठी. जिंदगी में पहली बार उस ने किसी के साथ इतनी झुक कर बातें की थीं, फिर भी उसे अपना मन काफी हलका लग रहा था, जैसे किसी अपराधबोध का बोझ उतर गया हो.

यह सत्य है कि अतुल के बिना जीना शालिनी के लिए आसान नहीं था, फिर भी अपने भौतिक सुखों के लिए किसी से उस की प्रिय वस्तु छीन लेने के बदले बिना किसी अपेक्षा के अपनी सब से प्रिय वस्तु किसी को समर्पित कर देने में उसे बेहद सुख और संतोष का अनुभव हो रहा था. घर आ कर जैसे ही उस ने अपना फैसला मां को बताया, शालिनी का उदास और क्लांत चेहरा देख उन का सारा गुस्सा फौरन तिरोहित हो गया.

‘‘अरे, वे लोग मेरी बेटी के साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं? तू चिंता मत कर, मैं गायत्री से बात करूंगी.’’

‘‘नहीं, ममा…आप कोई बात नहीं करेंगी.’’

‘‘अरे, कैसे नहीं करूंगी, मां हूं. लोग अपने बच्चों के लिए क्या नहीं करते…’’

‘‘ममा, प्लीज,’’ वह मां की बात बीच में ही काट कर अपने कमरे में चली गई.

अपने वादे के अनुसार उस दिन से शालिनी ने न अतुल से कोई बात की और न ही उस का कोई फोन रिसीव किया.

करीब एक हफ्ते बाद…एक दिन जब शालिनी अस्पताल से लौटी तो मां ने झट से उस के सामने एक गुलाबी रंग की जरी की बार्डर वाली साड़ी ला कर रख दी और बोलीं, ‘‘जल्दी से तैयार हो जा. एक जगह सगाई में जाना है.’’

‘‘नहीं, ममा, मेरा मन नहीं है.’’

‘‘कभी तो अपनी ममा का दिल रख लिया कर.’’

अपनी मां के प्यार भरे अनुरोध को शालिनी टाल न सकी. मन न होते हुए भी साड़ी ले कर तैयार होने लगी. जल्दी ही तैयार हो कर ड्राइंगरूम में आ बैठी. उस की ममा अभी तैयार नहीं हुई थीं. वह यों ही बैठेबैठे टीवी के चैनल बदलने लगी. तभी दरवाजे पर घंटी बजी शालिनी ने बढ़ कर दरवाजा खोला तो भौचक रह गई. दरवाजे पर कई अजनबी चेहरों के साथ अतुल की मां गायत्री देवी खड़ी थीं. उसे भौचक और घबराई हुई देख कर वे बोलीं, ‘‘अंदर आने के लिए भी नहीं कहोगी.’’

‘‘हां, आइए न,’’ कह कर वह दरवाजे से हट कर खड़ी हो गई.

‘‘तुम्हारी ममा कहां हैं, उन्हें बुलाओ.’’

‘‘प्लीज आंटी, आप मेरी ममा से कुछ मत कहिए. वे पहले से ही मेरे कारण बहुत परेशान हैं.’’

‘‘नहीं…नहीं…मुझे तुम से कोई बात नहीं करनी. बुलाओ अपनी ममा को.’’

तभी शालिनी को अपने पीछे से अपनी मां की आवाज सुनाई दी, ‘‘अरे, गायत्री बहन, आप आ गईं पर अतुल को कहां छोड़ आईं.’’

‘‘भला अपनी ही सगाई में वह खुद कैसे नहीं आएगा. अपनी पसंद की अंगूठी लेने गया है.’’

फिर शालिनी की तरफ मुखातिब हो कर गायत्रीजी बोलीं, ‘‘ऐसे क्या देख रही हो बेटा, तुम्हें अपने बड़ों की खुशियों का खयाल है तो क्या बड़े अपने बच्चों की खुशियों का खयाल नहीं रखेंगे. उस दिन तुम्हारी सौम्यता, मेरे प्रति तुम्हारा निस्वार्थ प्रेम और उस से भी बढ़ कर तुम्हारे द्वारा झुक कर सम्मान का भाव प्रकट करने से मुझे लगा, तुम से अच्छी बहू मुझे नहीं मिल सकती. जब तुम्हारी मां ने पहल की तो मैं ने भी देर नहीं की. पहले चाहे मैं ने तुम्हें कितना भी भलाबुरा कहा हो पर आज सच्चे और साफ दिल से कहती हूं, तुम मुझे दिल से पसंद हो. मेरे बेटे की पसंद खराब हो ही नहीं सकती.’’

शालिनी शरमा कर उन के पैरों पर झुक आई तो उसे बीच में ही थाम कर गायत्रीजी ने उसे गले से लगा लिया.

अगर आप भी हेडफोन लगाती हैं तो सावधान हो जाइए

आज के समय में मोबाइल एक ऐसी जरूरत बन चुकr है, जिसके बिना आज के जीवन की कल्पना जैसे मुश्किल सी हो गई है. आप भी मोबाइल के बिना एक दिन भी नहीं बिता सकते हैं. मोबाइल फोन्स आज हमारी जिन्दगी का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं. आज के समय के सभी लोग चाहे वह युवा वर्ग हो, बच्चे हों या बुजुर्ग, मोबाइल के शौकीन हैं. पर देखा गया है कि लोग मोबाइल का न सही इस्तेमाल करते हैं और न ही सही ढंग से करते हैं, जिस कारण ये हमारे लिए खतरा साबित होता है.

हम आपको बताना चाहते हैं कि जब भी आप बस या ट्रेन से सफर कर रहे होते हैं या बाहर घूमते वक्त भी, यहां तक की रात को सोते वक्त भी मोबाइल की लीड या हेडफोन लगाकर बात करते हैं या फिर गाने सुनते रहते हैं. यूं हर वक्त कान में हेडफोन लगाकर गाने सुनना या बात करना आपके लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है.

आपने शायद कई बार सोचा तो होगा कि हेडफोन लगाना आपके लिए खतरनाक हो सकता है पर फिर आप इस बात को भूल गए होंगे. तो हम आपको बता दें कि हेडफोन लगाकर गाने सुनने और लगातार फोन पर हेडफोन लगाकर बातें करने से आपको क्या-क्या गंभीर नुकसान हो सकते हैं..

1. जब भी आप अपनी गाड़ी चलाते हैं और कानों में लीड लगाकर रखते हैं, तो जाहिर है कि आपको अन्य गाड़ियों के हार्न का आवाज नहीं सुनाई देगी और ऐसे में हमें दुर्घटना होने का खतरा हरदम बना रहता है. इससे बचने का केवल यही उपाय है कि आप गाड़ी चलाते समय कानों में लीड लगाकर गाने न सुने. गाड़ी पर रहते हुए फोन भी नहीं उठाना चाहिए.

2. सुनने में अजीब तो लग सकता है पर ये सच है कि अधिक समय तक कानों में लीड लगाने से आप बहरे भी हो सकते हैं. साथ ही कान खराब होने की संभावनाऐं तो कई फीसदी बढ़ती ही हैं.

3. रात को सोते समय कानों में लीड लगाकर सो जाने से आपके कान की नसें कमजोर होने लगती हैं और एक बार कान की नसें कमजोर हो जाएं, तो वे जीवन भर आपको परेशान करती हैं.

4. इसके अलावा हेडफोन के ऐसे इस्तेमाल से कान में दर्द, सूजन, इन्फेक्शन और मानसिक तनाव भी पैदा होता है. ये बात आपकी सेहत के लिए ठीक नहीं है.

5. जब आप हेडफोन लगाकर गाने सुनते हैं, तो इससे आपके दिमाग के डैमेज या क्षतिग्रस्त होने का खतरा होता है. कई बार इससे सरदर्द की समस्या भी सामने आती है. आपके दिमाग को कई अंदरूनी समस्याओं का भी सामना कर पड़ सकता है, जो आपके जीवन के लिए वाकई एक गंभीर समस्या बन सकती है.

पथरीली मुस्कान: क्या गौरी की जिंदगी में लौटी खुशी

फैमिली के लिए बनाएं बेसन की सब्जी

अगर आप लंच में कुछ टेस्टी और हेल्दी सब्जी बनाना चाहती हैं तो बेसन की सब्जी आपके लिए बेस्ट औप्शन है. बेसन हेल्दी के साथ-साथ टेस्टी भी होता है. आप इसे अपनी फैमिली को लंच या डिनर में खिला सकते हैं.

 हमें चाहिए

– बेसन (100 ग्राम)

– लाल मिर्च (1/4 चम्मच)

– गरम मसाला (1/2 चम्मच)

– हरी मिर्च  (01 बारीक कटी हुई)

– इमली (20 ग्राम)

– भुना जीरा (01 छोटा चम्मच)

– शक्कर (01 छोटा चम्मच)

– तेल (1/2 छोटा चम्मच)

– काला नमक (1/2 छोटा चम्मच)

– नमक (स्वादानुसार)

बेसन की सब्जी बनाने की विधि :

– सबसे पहले इमली को रात भर के लिए एक कटोरी पानी में भि‍गो दें.

– इसके बाद एक कटोरे में गुनगुने पानी में बेसन को अच्छी तरह से फेंट लें.

– फिर लाल मिर्च, गरम मसाला, हरी मिर्च और नमक मिला लें.

– इसके बाद घोल को एक बार फिर अच्छी तरह फेंट लें.

– अब एक कड़ाही में बेसन के घोल को डालें और मीडियम आंच पर पकायें.

– घोल को लगातार चम्मच से चलाते रहें, जिससे बेसन में गुठलियां ने पड़ने पायें.

– बेसन के घोल को 10-12 मिनट पकायें, इससे वह गाढ़ा हो जाएगा.

– अब एक में थाली में 1/2 चम्मच तेल लगाकर उसकी सतह को चिकना कर लें.

– फिर बेसन के घोल को थाली में पतला पतला फैला दें और ठंडा होने दें.

– घोल ठंडा होने पर घोल जम जायेगा.

– जमने पर बेसन की पर्त को छोटे-छोटे साइज में काट लें.

– अब भीगी हुई इमली को अच्छे से मसल कर उसका पानी छान लें.

– इमली के रस में एक बड़ा कटोरा पानी और मिला लें.

– इस पानी में हल्का सा काला नमक, भुना हुआ जीरा और एक चम्मच शक्कर मिला लें.

– अब बेसन के टुकड़ों को इमली के घोल में डाल दें और थोड़ी देर के लिये रख दें.

– आप चाहें तो इसे थोड़ा सा पका भी सकते हैं.

– अब आपकी स्वादिष्ट राजस्‍थानी पतोड़ तैयार है.

इसे सर्विंग प्‍लेट में निकालें और गर्मा-गरम रोटियों / पराठों के साथ सर्व करें.

Summer Special: बच्चों को खिलाएं चावल के शकरपारे और ड्रमस्टिक लीव्स फ्रिटर्स

 चावल के शकरपारे

सामग्री

  •   1 कप चावल
  •   1 कप गुड़
  •   1/2 कप नारियल का पाउडर
  •   2 बड़े चम्मच बादाम और काजू के टुकड़े
  •   1 बड़ा चम्मच तिल तलने के लिए तेल.

विधि

चावलों को धो कर सुखा लें. एक कड़ाही में चावलों को धीमी आंच पर भून लें. हलका ठंडा कर मिक्सी में पाउडर बना लें. गुड़ में 1/2 कप पानी डाल कर 1/2 घंटे के लिए रख दें. गुड़ घुल जाएगा. गुड़ के पानी से चावलों का आटा, नारियल का पाउडर, बादामकाजू के टुकड़े और तेल को अच्छी तरह से मिला कर गूंध लें. चाहें तो इस की गोलियां बना कर चपटा कर तल लें या प्लास्टिक की परत के बीच से बेल कर शकरपारे बना लें. कड़ाही में तेल गरम कर शकरपारे तल लें.

  1. ड्रमस्टिक लीव्स फ्रिटर्स

सामग्री

  •   1/2 कप ड्रमस्टिक लीव्स
  •   1/2 कप चने की दाल
  •   2 बड़े चम्मच लाल, पीली व हरी शिमलामिर्च कटी
  •   1 प्याज कटा
  •   1 हरीमिर्च कटी
  •   तलने के लिए तेल
  •   नमक स्वादानुसार.

विधि

  • चने की दाल को 2-3 घंटों के लिए पानी में भिगो दें. फिर मिक्सी में पीस लें.
  • इस में प्याज, हरीमिर्च, सभी शिमलामिर्च, ड्रमस्टिक लीव्स और नमक डाल कर अच्छी तरह फेंट कर इस के गरम तेल में छोटेछोटे पकौड़े तल चटनी के साथ गरमगरम परोसें

3. ब्रोकन व्हीट पैन केक

सामग्री

  • 1 कप दलिया
  • 1 प्याज बारीक कटा
  • 1 टमाटर बारीक कटा
  • 2 बड़े चम्मच लाल, पीली व हरी शिमलामिर्च कटी
  • 1/2 कप लौकी घिसी
  • 1/2 कप पनीर कसा
  • 1-2 हरीमिर्चें कटी
  • थोड़ी सी धनियापत्ती कटी
  • 3 बड़े चम्मच तेल
  • नमक स्वादानुसार.

विधि

  1. दलिए को अच्छी तरह धो कर पानी डाल कर 1 घंटा भिगोए रखें. फिर मिक्सी में पेस्ट बना लें.
  2. एक बाउल में निकाल कर इस में सारी सब्जियां, स्वादानुसार नमक, हरीमिर्चें व धनियापत्ती मिला लें.
  3. तवा गरम कर चम्मच से दलिए के मिश्रण को गरम तवे पर फैलाएं.
  4. दोनों तरफ से तेल लगा कर सेंक लें. पैन केक चटनी के साथ गरमगरम परोसें.

मुझे मीठा खाने से दांतों में झनझनाहट भी महसूस होती है, ऐसे में क्या रूट कैनाल ट्रीटमैंट कराना सही है?

सवाल

मेरी उम्र 25 साल है. मेरे दांतों में कीड़ा लग गया है, जिस कारण दर्द तो होता ही है, साथ ही मीठा खाने से दांतों में झनझनाहट भी महसूस होती है. डैंटिस्ट ने मुझे रूट कैनाल ट्रीटमैंट कराने की सलाह दी है. क्या यह ट्रीटमैंट लेना सही रहेगा?

जवाब

चूंकि आप के दांतों में दर्द के साथसाथ झनझनाहट भी होती है, इसलिए आप के लिए रूट कैनाल ट्रीटमैंट कराना आवश्यक है. डाक्टर ने यह सलाह जांच के बाद ही दी है. अत: बिना किसी संदेह के यह ट्रीटमैंट ले सकते हैं.

रूट कैनाल ट्रीटमैंट में सूजन या संक्रमण वाले पल्प को हटा दिया जाता है. इस पल्प को हटाने के बाद वहां की खाली जगह को पहले साफ किया जाता है और फिर उसे सही आकार दे कर भरा जाता है. इस में दांत को सुन्न कर प्रक्रिया को पूरा किया जाता है. इस प्रक्रिया को ऐक्सरे के बाद ही शुरू किया जाता है.

पहले दांत में कीड़ा लगने पर उस दांत को निकाल दिया जाता था या वहां धातू भर दी जाती थी. यह प्रक्रिया काफी दर्दनाक होती थी. लेकिन अब नई तकनीक व ऐनेस्थीसिया की मदद से दर्द न के बराबर होता है और इलाज भी आसानी से पूरा हो जाता है. इस प्रक्रिया में दांत को निकाले बिना उसे सुरक्षित कर दिया जाता है.

सवाल

मैं 22 वर्षीय कामकाजी महिला हूं. मुझे पायरिया की समस्या है, जिस की वजह से दांत बहुत पीले हो गए हैं और खून भी ज्यादा निकलता है. क्या घरेलू उपायों से इस का इलाज संभव है?

जवाब

पायरिया दांतों का वह रोग है, जो मसूढ़ों को भी प्रभावित करता है. दांतों की ठीक से सफाई न करने और जबतब खाने की आदत के कारण उन में पायरिया हो जाता है. मसूढ़ों से खून और मवाद आना, सांस से बदबू आना, दांतों में दर्द होना, उन का पीला पड़ना सब पायरिया के ही लक्षण हैं. पायरिया का सही समय पर इलाज कराना बेहद जरूरी है अन्यथा बाद में यह बड़ी समस्या बन जाती है, जिस में दांत निकलने शुरू हो जाते हैं.

इस का इलाज घर पर मुमकिन है. नियमितरूप से दांतों की सफाई करें. रात को सोने से पहले ब्रश अवश्य करें. ब्रश के बाद कुछ भी न खाएं. सरसों के तेल में नमक मिला कर रोज इसे अच्छी तरह दांतों पर मलें. जामुन की छाल का काढ़ा बना कर रख लें और फिर खाने के बाद इस का प्रयोग कुल्ला करने के लिए करें. जितनी बार कुल्ला कर सकें करें. हफ्ते में कम से कम 3 बार नीम की दातुन करें. नीम का तेल भी पायरिया में लाभदायक साबित होता है. रोज नीम के तेल को दांतों पर 2 मिनट लगाए रखें, फिर पानी से धो लें. ये सब करने से दांतों से पीलापन भी दूर हो जाएगा और पायरिया की परेशानी से भी छुटकारा मिल जाएगा.

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभा, ई-8, रानी झांसी मार्ग, नई दिल्ली-110055.

व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.    

Summer Special: गर्मी में कैसे पाएं स्‍मूथ अंडरआर्म्‍स, अपनाएं ये 5 होम रेमेडीज

हम अधिकतर यह देखते हैं कि मॉडल और सेलेब्रिटीज के आर्मपिट्स स्मूथ और फेयर होते हैं.लेकिन, हममें से अधिकतर लोगों के अंडरआर्म्स स्मूथ और फेयर नहीं होते. लेकिन, स्लीवलेस कपड़े पहनने के लिए अंडरआर्म्स का ख्याल रखना जरूरी है. इसके लिए आपको पार्लर में घंटों समय बिताने की जरूरत नहीं है. कुछ होम रेमेडीज से ही आप इस समस्या से राहत पा सकते हैं और आराम से स्लीवलेस कपड़े पहन सकते हैं. गर्मी के मौसम में पाएं स्‍मूथ अंडरआर्म्‍स पाने के लिए ये होम रेमेडीज आपके बहुत काम आने वाली हैं. आइए जानें गर्मियों में आर्मपिट्स को स्मूथ बनाने के लिए होम रेमेडीज के बारे में.

स्‍मूथ अंडरआर्म्‍स पाने के लिए होम रेमेडीज

स्मूथ अंडरआर्म्स के लिए होम रेमेडीज से पहले यह जानकारी जरूरी है कि अंडरआर्म्स का काला होना बेहद सामान्य है. ऐसे में इस बारे में आपको किसी भी तरह की हीन भावना अपने मन में नहीं लानी चाहिए. अगर बात करें स्मूथ अंडरआर्म्स की, तो इसके लिए होम रेमेडीज इस प्रकार हैं:

  1. बेकिंग सोडा-

एक चम्मच बेकिंग सोडा और थोड़ा सा एप्पल साइडर विनेगर का इस्तेमाल कर के आप इस समस्या से राहत पा सकते हैं. इन दोनों को मिला कर एक पेस्ट बनाएं और अंडरआर्म्स पर लगा कर दस मिनट्स तक ऐसे ही रहने दें. इसके बाद इसे धों दें. हफ्ते में दो बार इस तरीके के इस्तेमाल से आपको लाभ होगा.

2. खीरा-

खारे में बेहतरीन ब्लीचिंग और स्किन व्हाइटनिंग प्रॉपर्टीज होती हैं, जिससे अंडरआर्म स्किन आसानी सॉफ्ट हो जाती है. इसके इस्तेमाल से डेड स्किन सेल्स आसानी से रिमूव हो जाते हैं. आप खीरे को अपनी स्किन पर रगड़ें और उसके बाद उसके बाद इसे धो दें.

3. आलू-

आलू के इस्तेमाल से भी आपके अंडरआर्म्स सॉफ्ट और लाइट हो सकते हैं. इसलिए आप आलू का इस्तेमाल भी कर सकते हैं.

4. मॉइस्चराइजर-

चेहरे की तरह अंडरआर्म्स में मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करना स्किन को सॉफ्ट बनाता है. लेकिन, रोजाना इसका इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है.

5. एलोवेरा-

एलोवेरा स्किन को मॉइस्चराइजेशन प्रदान करता है, जिससे स्किन सॉफ्ट बनती है. आप एलोवेरा और टमाटर का एक पेस्ट बनाएं और इसका इस्तेमाल अंडरआर्म्स पर करें. कुछ देर इसे लगाने के बाद ड्राई होने दें और बाद में इसे धो दें. कुछ दिन इसका इस्तेमाल करने से आपको जल्द ही फर्क नजर आएगा.

हेल्दी रहने के साथ ही अंडरआर्म्स को स्मूथ और लाइट बनाने के लिए आपका हाइड्रेट रहना भी बेहद जरूरी है. इसके साथ ही कभी भी ड्राई स्किन पर शेव न करें. ऐसा करना भी स्किन को हार्ड बनाता है.

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