मुद्दा न वोट का न नोट का

इस में अब संदेह नहीं रह गया है कि जनता के हित के जो काम वोटों से चुन कर आई सरकारों को करने चाहिएअदालतें उन्हीं सरकारों के बनाए कानूनों की जनहित व्याख्या करते हुए काम करने लगी है. अदालतों ने साबित कर दिया है कि हमारी सरकारों के पास या तो मंदिर बनाने का काम रह गया है या ठेके देने का. दोनों में जनता का गला घोंट कर पैसा छीन कर लगाया जा रहा है. सरकारों को आम जनता के दुखदर्द की चिंता कम ही होती है जब मामला टैक्स का हो या वोट का या फिर धर्म का.

चैन्नई उच्च न्यायालय ने एक अच्छे फैसले में कहा है कि हालांकि एक मुसलिम औरत को खुला प्रथा के अनुसार तलाक लेने का पूरा हक है पर इस का सर्टिफिकेट कोईर् भी 4 जनों की जमात नहीं दे सकती. अब तक शरीयत कोर्ट’ ऐसे सर्टिफिकेट देती थी जिन्हें कैसे बनाया जाता था और उन के तर्कवितर्क क्या होते थेवहीं रिकौर्ड नहीं किए जाते थे. उच्च न्यायालय ने कहा कि औरतों को फैमिली कोर्ट जा कर अपना सर्टिफिकेट लेना चाहिए जहां उस के खाविंद की भी सुनी जाएगी.

इसी तरह सेना में ऐडल्ट्री यानी पतिपत्नी में से एक का किसी दूसरे से सैक्स संबंध इंडियन पीनल कोड में अब आपराधिक गुनाह नहीं रह गया होसेनाओं में सेना कानूनों के हिसाब से चलता रहेगा. यह बहुत जरूरी है क्योंकि सैनिकों को महीनों घरों से बाहर रहना पड़ता है और उन के पास उन के पीछे बीवियों के गुलछर्रे उड़ाने की खबरें आती रहती हैं.

इसी तरह महीनों पत्नी से दूर रहे सैनिक पति कहीं किसी लोकल औरत से संबंध न बना लेंइस गम में पत्नियां घुलती रहती हैं.

अपराधी होने का साया दोनों को काबू में रख सकता है. सैनिक युद्ध में बिना घर की फिक्र किए तैनात रहेंयह देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है.

केंद्र सरकार मुसलिम कानून में 3 तलाक को बैन करने का ढोल बजाती रहती है पर उसे इन लाखों हिंदू औरतों की चिंता नहीं है जो तलाकों के मुकदमों के लिए अदालतों के गलियारों में चप्पलें घिस रही हैं.

अगर पति या पत्नी में से कोई 1 मिनट पर अड़ जाए तो तलाक महीनोंबरसों टलता रहता है. जैसे हिंदू कानून में शादी मिनटों में कोई भी तिलकधारी करा सकता हैतो तलाक भी क्यों नहीं हो सकताहांअगर हिंदू औरतें इतनी पतिव्रताधर्मकर्मजन्मजन्मांतरों को मानने वाली हों तो बात दूसरी होती. वे तो आम दुनियाभर की औरतों की तरह जिन्हें तलाक की तलवार के नीचे आना पड़ सकता हैसरकार उन्हें तरसातरसा कर तलाक दिलवाती है. सरकार कानून में रद्दोबदल करने में कोई इंटरैस्ट ही नहीं लेती क्योंकि यह मुद्दा न तो वोट का है न नोट का. चैन्नई की अदालत ने सही किया है या गलत अभी कहना पक्का नहीं?

ब्रेकफास्‍ट में बनाएं इंस्‍टेंट डोसा

क्‍या आपको इतना समय नहीं मिलता कि आप खुद के लिये अच्‍छा ब्रेकफास्‍ट बना सकें? हम आपको एक ऐसी रेसिपी बताएंगे जो झट पट तैयार हो जाएगी. आज हम आपको इंस्‍टेंट डोसा बनाने की विधि बताएंगे. वैसे तो आपको बाजार में डोसा बनाने वाला मिक्स मिल जाएगा पर घर पर तैयार किया मिक्स ही सबसे अच्‍छा होता है.

इस डोसे को आप मिनटों में बना सकते हैं, क्‍योंकि इसमें चावल भिगो कर पीसने की जरुरत नहीं है. अगर आपको यह डोसा ब्रेकफास्‍ट में खाने पर अच्‍छा लगे तो, इसे लंच पर भी ले जाया जा सकता है. यह टेस्‍ट में भी बहुत अच्‍छा होता है. इसे नारियल चटनी के साथ या फिर सांभर के साथ सर्व किया जा सकता है. तो आइये देखते हैं इसे बनाने की विधि-

कितने– 3

तैयारी में समय– 10 मिनट

पकाने में समय– 10 मिनट

सामग्री

  • गेंहू का आटा- 2 कप
  • चावल का आटा- 1 कप
  • हरी धनिया, कटी- 1चम्‍मच
  • हरी मिर्च या लाल मिर्च- 4- 5
  • कड़ी पत्‍ते- 8-10
  • बेसन- 1/2 कप
  • जीरा- 1/2 चम्‍मच
  • नमक

विधि  

1.एक कटोरे में गेंहू, चावल और बेसन डालें.

2.फिर उसमें कटी हरी मिर्च, धनिया, जीरा, कड़ी पत्‍ते और नमक मिलाएं.

3.अब इसमें धीरे धीरे पानी मिलाएं और घोल तैयार करें.

4.घोल ना ज्‍यादा पतला होना चाहिये और ना ही गाढा.

5.अब पैन लें, उसे गरम करें. फिर उसमें थोड़ा सा तेल लगाएं.

6.पैन बहुत ज्‍यादा गरम नहीं होना चाहिये नहीं तो डोसा फैलेगा नहीं.

7.अब एक बड़ा चम्‍मच डोसे का घोल डाल कर फैलाएं और पकने दें.

8.फिर इसे पलट कर कुछ देर पकाएं.

9.डोसे के किनारों पर हल्‍का तेल जरुर लगाएं, वरना डोसे को पलटने में दिक्कत होगी

10.अब इसी तरह से बाकी के डोसे बनाएं.

11.आपका डोसा तैयार है, इसे प्‍लेट में नारियल चटनी और सांभर के साथ सर्व करें.

कभी नहीं फोड़ें अपने पिंपल

आप सुबह बिलकुल फ्रेश मूड से उठती हैं. और ब्रश करने के लिए जैसे ही मिरर के सामने खड़ी होती हैं . आपको अपने चेहरे पर एक मुँहासा दिखाई देता है और सारी फ्रेशनेस दो मिनट में चिंता बन जाती है.

आपको दर्द भी होने लगता है और सारा ध्‍यान सिर्फ और सिर्फ उसी मुँहासे पर बना रहता है. कई बार तो दिल मानता नहीं और हम फोड़ भी देते ..

लेकिन मुँहासा फोड़ना या दबाना अच्‍छी बात नहीं है. इससे चेहरे को नुकसान पहुँचता है और आपको बाद में एहसास होता है कि ऐसा नहीं करना चाहिए था.

मुँहासा ठीक होने में समय लग सकता है लेकिन अगर आपने इससे छेड़छाड़ नहीं की तो ये ठीक होने के बाद चेहरे पर पता भी नहीं चलता है. पर अगर आपने धोखे से भी इसे फोड़ या दबा दिया तो आपको ये दिक्‍कतें झेलनी पड़ेंगी.

1. दाग पड़ जाना: अगर आप चेहरे पर पड़ने वाले मुँहासे को फोड़ देते हैं तो वहां दाग पड़ ही जाता है जोकि चेहरे पर बहुत भद्दा लगता है.

2. इंफेक्‍शन हो जाना: मुँहासे में भरी हुई गंदगी निकलने लगती है और उतनी जगह पर संक्रमण हो जाता है. इसे प्राकृतिक रूप से सूखने दें.

3. सूज जाना: मुँहासे को फोड़ने पर उस जगह जलन होती है और कई बार सूजन भी हो जाती है. इसलिए बेहतर विकल्‍प है कि चंदन आदि का लेप लगाकर छोड़ दें. मुल्‍तानी मिट्टी भी सही उपाय है.

4. पपड़ी जमना: जब आप मुँहासे को फोड़ते हैं तो वहां से खून निकलने लगता है क्‍योंकि वह कच्‍चा ही होता है ऐसे में त्‍वचा पर खूनी पपड़ी जम जाती है और आपका चेहरा भद्दा हो जाता है.

5. सही होने में ज्‍यादा समय लगना: मुँहासे को फोड़ देने पर उसे सही होने में ज्‍यादा वक्‍त लगता है क्‍योंकि वो अंदर से घायल हो जाता है और अंदर से भरने में ही उसे लम्‍बा वक्‍त लगता है.

6. और ज्‍यादा मुँहासें होना: अगर आप एक मुँहासा फोड़ती हैं तो उससे निकलने वाला पानी और पस आसपास की त्‍वचा पर लग जाता है और संक्रमण के कारण वहां भी मुँहासे बन जाते. ऐसे में एक भी मुँहासा छेड़े नहीं.

7.त्‍वचा में चकत्‍ते होना: मुँहासा फोड़ने पर वहां की त्‍वचा काली हो जाती है, जो देखने से साफ पता चलती है. इस प्रकार, चेहरे पर चकत्‍ते नज़र आने लगते.

पीरियड्स पर मौसम का असर

हम सभी के मन में पीरियड्स को ले कर कई सारे सवाल होते हैं. जैसे यह कैसे प्रभावित होता है? किस तरह से यह हमें प्रभावित करता है? क्या हो अगर किसी तरह से हमारे इस साइकल में रुकावट आ जाए?

क्या मौसम आप के पीरियड्स में रुकावट ला सकता है? इस का जवाब है हां. सर्दियों में पीरियड्स और प्रीमैंस्ट्रुअल तनाव बिलकुल बढ़ सकता है. सर्दियों में पीरियड्स बहुतों के लिए अत्यधिक बुरे हो सकते हैं. सर्दियों में अधिक ठंड के कारण महिलाएं बहुत आसानी से बीमार पड़ सकती हैं. कई बार महिलाओं का मूड भी तापमान की तरह गिरता रहता है और ऐसा लगता है सर्दी का यह मौसम उन के पीरियड्स साइकल पर बहुत ज्यादा असर डाल सकता है. इसीलिए महिलाएं अकसर सर्दियों में पीरियड्स में दिक्कत आने की शिकायत करती रहती हैं. ऐसे में बदलते मौसम के साथ कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना जरूरी है. आइए, जानते हैं वे महत्त्वपूर्ण बातें जो सर्दियों में पीरियड्स साइकल में होने वाले बदलावों से बेहतर तरीके से निबटने में मदद कर सकती हैं:

1. पीरियड्स साइकल की अवधि

सर्दी पीरियड्स साइकल की अवधि को प्रभावित करती है. हारमोन स्राव में बढ़ोतरी, ओव्युलेशन की बढ़ती फ्रीक्वैंसी और साइकल का कम होना जहां सर्दियों की तुलना में 0.9 दिनों का होता है वहीं सर्दियों में पीरियड्स साइकल ठंड की वजह से बिगड़ जाता है. इस रिसर्च के अनुसार गरमियों में अंडाशय अधिक सक्रिय होता है. सर्दियों में ओव्युलेशन स्तर 97% से घट कर 71% रह जाता है. लंबे पीरियड्स साइकल और घटे हुए ओव्युलेशन के कारण पीरियड्स का अनुभव परेशानी भरा हो सकता है.

2. धूप

धूप यानी सूर्य की किरणें विटामिन डी और डोपामाइन दोनों ही बनाने में मदद करती हैं. इन के बिना जो मूड स्विंग्स हम पीरियड्स में महसूस करते हैं, वह बढ़ सकता है, जिस से पार पाना मुश्किल हो सकता है. धूप प्लैजर, मोटिवेशन और कंस्ट्रेशन बढ़ाता है. धूप शरीर में फौलिक स्टिम्युलेटिंग हारमोन  के स्राव को बढ़ा देती है. यह हारमोन शरीर को साधारण बनाता है. महिलाएं गरमियों की तुलना में सर्दियों में ज्यादा ओव्युलेट करती हैं, जिस से उन के पीरियड्स लंबे समय तक चलते हैं.

3. प्री मैंस्ट्रुअल सिंड्रोम

प्री मैंस्ट्रुअल सिंड्रोम यानी पीरियड्स शुरू होने से पहले जो बदलाव या लक्ष्ण महिलाओं में दिखाई देते हैं, उन में महिलाओं को चिड़चिड़ापन, सूजन, चिंता, ऐंग्जाइटी और डिप्रैशन महसूस होता है. सर्दियों में महिलाएं अधिकतर घर में रहती हैं, जिस से वे खुद को अधिक तटस्थ महसूस करती हैं. धूप की कमी यानी विटामिन डी और कैल्सियम की कमी के कारण पीएमएस और बढ़ जाता है. ऐसे समय में खानपान का खास ध्यान रखना जरूरी हो जाता है. उच्च कैल्सियम युक्त खाद्यपदार्थों के सेवन और नियमित रूप से ऐक्सरसाइज करने से पीएमएस के लक्षणों में सुधार आ सकता है.

4. पीरियड्स में होने वाला दर्द

सर्दियों  में पीरियड्स का दर्द अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि ये हमारी रक्तवाहिकाओं को संकुचित कर देते हैं. इस से रक्तवाहिनियों में अवरोध पैदा हो जाता है और रक्तप्रवाह में बाधा आती है. इसीलिए सर्दियों में दर्द ज्यादा होता है. इस के लिए गरम पानी की बोतल या हीटिंग पैड इस दर्द को कम करने में मदद कर सकता है.

5. हारमोनल इंबैलेंस

हारमोनल इंबैलेंस सर्दियों में होने वाली एक और समस्या है. ठंडे मौसम के कारण सर्दियों में धूप कम निकलती है, कम धूप न केवल ऐंडोक्रीन सिस्टम को प्रभावित करती है, बल्कि थायराइड की गति को भी धीमा कर देती है. धीमे थायराइड से मैटाबोलिज्म भी धीमा हो जाता है. इस का असर हमारे मैटाबोलिज्म और पीरियड्स पर पड़ता है जब तक कि शरीर खुद को मौसम के अनुसार नहीं ढाल लेता. यदि आप के मासिकधर्म में ज्यादा दिक्कत आती है तो गाइनेकोलौजिस्ट या ऐंडोक्रिनोलौजिस्ट से मिलें.

हमारे व्यवहार, परिवर्तन का असर भी हमारे पीरियड्स पर पड़ता है. सर्दियों में हमारे व्यावहारिक जीवन में काफी बदलाव देखने को मिलता है जैसेकि ऐक्सरसाइज कम करना, हाई फैट व शुगरी फूड खाना, शराब का सेवन अधिक करना. इस तरह की जीवनशैली पीरियड्स में होने वाली तकलीफ और पीएमएस को बढ़ा सकती है. मूड, मैटाबोलिज्म और मैंस्ट्रुएशन तीनों मौसम बदलने के साथ बदलते हैं.

 -जैसमिन वासुदेवा

मार्केटिंग मैनेजर, सैनिटरी नैपकिन नाइन 

दिखावा: अम्मा से आखिर क्यूं परेशान थे सब- भाग 3

लाश को नहला कर चिता पर रख दिया गया. अब इंतजार था महापात्र का, जिस से मुखाग्नि दी जा सके. उधर महापात्र लाश पर पड़ी दूसरी लाशों के हिसाबकिताब में बिजी था. सब से पूरे पैसे लेने के बाद ही वह हमारी तरफ आया. मंत्रोच्चार के साथ ही भाई साहब द्वारा अग्नि देने के बाद चिता जल उठी. इस अग्नि को घर से बड़ा ही सहेज कर लाया गया था.

तभी मेरी निगाह दूर ढेर पर चली गई. वहां लकड़ी की अरयियों का अंबार लगा था. मालूम पड़ा सब फिर बाजार में बेच दी जाएंगी, चारपाई आदि बनाने के काम आ जाएंगी. पास ही लाशों पर उतारी गईर् चादरों का ढेर था. इन को भी बाजार में अच्छे दामों पर बेचा जाना था.

अगले दिन घर के सभी बड़े चिता की राख को हंडिया में भरने के लिए श्मशान पहुंचे ताकि उसे वाराणसी, इलाहाबाद, गया व पुरी जैसे स्थानों पर पवित्र नदियों में विसर्जित किया जा सके.

इस कलश को ले कर भाई साहब को ही जाना था. जैसा मैं ने सुना है, भाई साहब एक बार भी दादी के जीवित रहते उन्हें साथ ले कर कहीं भी नहीं गए थे. वैसे हनीमून मनाने अपनी बीवी के साथकश्मीर से कन्याकुमारी तक जा चुके थे. उन का कहना था कि मां के लिए इतना न किया तो लोग क्या कहेगे. उन्हें बारबार लोगों के कहे जाने का डर खाए जा रहा था.

अंत में नहाने का नंबर आया. बिना नहाए घर में घुसने से घर अपवित्र हो जाने का डर था. मैं तो साफ नकार गया,  ‘‘जाड़ा काफी है. घर जा कर गरम पानी से नहाऊंगा. दादी तो चली ही गईं.’’

खैर, मु?ो छोड़ सभी लोग कांपतेठिठुरते नदी में नहाए. घर लौटने तक इन लोगों के दांतों का किटकिटाना बंद नहीं हुआ. कुछेक की तो नाक भी बहने लगी क्योंकि नाक सुड़कने की आवाजें कभीकभार आ जाती थीं.

घर पर अभी पंडितों के कई चोंचले होने बाकी थे. 10वीं एकादशी… तेरहवीं. पंडितों को दान, नातेदारों, महल्ले वालों को भोजन, हजारों का खर्च था.

श्रीमती को छोड़ कर मैं तो वापस आ गया. लौटने पर पत्नी ने बताया कि दादी के इलाज से ले कर उन की तेरहवीं तक करीब 2 लाख रुपए खर्च हुए. भाईसाहब की हर जगह धाक जम गई थी. पंडितों ने एक प्रकार से अम्मां के स्वर्ग जाने का सर्टिफिकेट दे दिया था. साथ ही अगले साल श्राद्ध भी करवाने को बोल गए थे. फोटोग्राफर को भी रुपए दिए गए थे.

करीब महीनेभर के दौरे में सब लोग होटलों में ठहरे थे. खाने, आनेजाने व किराए आदि में भी खूब रुपए खर्च हुए. पंडितों को खुश करने में भी खर्च हुआ. इतने खर्च के बावजूद भाई साहब का चेहरा प्रसन्नता से खिला हुआ था. मां के क्रियाकर्म में इतने पैसे नष्ट कर उन्होंने समाज में अपने लिए काफी जगह जो बना ली थी.

असली क्लाईमैक्स 7 दिन बाद शुरू हुआ जब दादी की अलमारी, कपड़ों की जांच की गई तो एक अलमारी में कागजों के नीचे लिफाफा मिला जो शायद 7-8 साल पुराना था. यह एक वसीयत थी. सब के सामने अलमारी खोली गई तो मेरी पत्नी के चाचा उसे छिपा न सके. वसीयत को सब के सामने पढ़ना उन की मजबूरी थी क्योंकि सब सोच रहे थे दादी बिना वसीयत के मरी होंगी और जिस के हाथ जो आएगा, वह उस का होगा.

दादी ने वसीयत में साफ लिखा था कि जो भी कुछ उन का है वह दीप्ति को मिलेगा और इस में उन का पुश्तैनी मकान जो गांव में है, लौकरों में रखे गहने, पहने गहने शामिल हैं. वसीयत सुन कर सब के मुंह फक रह गए.

मेरी सालियां एक स्वर में बोलीं, ‘‘अच्छा अब पता चला कि दीप्ति दादी की इतनी सेवा क्यों कर रही थी. उसे मालूम था मेवा ते उसे ही मिलने वाला है.’’

दीप्ति ने कुछ नहीं कहा और दूर से मु?ो इशारा कर दिया कि मैं कुछ न बोलूं.

घर आ कर दीप्ति ने एक बैग पकड़ाया जिस पर ढेरों धूल जमा थी. वह बोली, ‘‘दादी को

बीच में एक दिन अस्पताल में होश आया था. उन्होंने जिद की कि यह बैग शायद उन के पुराने गंदे कपड़ों में कहीं है. मैं ले कर आऊं. मैं ने बहुत मना किया पर दादी जिद पर अड़ी रहीं. बैग ले कर आई तो मेरे हाथ पर हाथ रख कर बोलीं कि बेटा यह मेरी तरफ से तुम दोनों के लिए है. किसी को खबर भी न लगने देना. मु?ो नहीं मालूम जो मैं ने लिखा है वह तुम ने मिलेगा. मैं ने यह बैग खोला तक नहीं और घर पर ले आई. अब वे चली गईं तो देखें क्या है उस में.’’

बैग में करीब 5 किलोग्राम सोने के जेवर थे. पुराने डिजाइन में थे. चाचियों की नजर से कब कैसे बच गया यह बैग पता नहीं. शायद इसीलिए कि दादी ने उसे उस अलमारी में रखा जिस में पुराने कपड़े थे. उन कपड़ों में बहुत बदबू थी. शायद दादी ने जानबू?ा कर पेशाब वाले कपड़े भी वहां ठूसे थे ताकि कोई चाचाचाची हाथ न लगाए. पिछले दिन भी किसी ने अलमारी नहीं खोली थी.

हम दोनों को पैसे का कोई लगाव न था. यह तो दादी का प्यार था जिस के लिए दीप्ति ने रातदिन उन की सेवा की और उस की सेवाभावना देख कर मैं ने भी एक बार उसे नहीं टोका. दादी ही हमारी शादी का सब से बड़ा संवल थीं. पैसा बड़ी चीज है पर प्यार तो उस से भी बड़ा है न.

दलजीत कौर ने संगीत सेरेमनी में इस गाने पर डांस कर दूल्हे राजा को किया इंप्रेस

टीवी एक्ट्रेस दलजीत कौर अपनी नई जिंदगी में कदम रखने जा रही हैं. शालीन भनोट से तलाक के बाद दलजीत कौर मशहूर बिजनेसमैन निखिल पाटेल के साथ शादी के बंधन में बंधे जा रही हैं. सोशल मीडिया पर लगातार दलजीत कौर की दूसरी शादी की तस्वीरें और वीडियोज वायरल होती नजर आ रही हैं. वेडिंग फंक्शंस में दलजीत कौर हैप्पी ब्राइड की तरह की खिलखिलाती दिख रही हैं. केवल दलजीत ही नहीं इस वेडिंग फंक्शंस में उनकी ब्राइड्समेड भी खूब जंच रही हैं. सोशल मीडिया पर दलजीत की संगीत सेरेमनी के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें दलजीत (Dalljiet Kaur ) अपनी गर्ल गैंग के साथ स्पेशल परफॉर्मेंस देती नजर आई हैं.

 

 

View this post on Instagram

 

A post shared by DALLJIET KAUR ੴ (@kaurdalljiet)

दलजीत कौर ने संगीत सेरेमनी में दी स्पेशल परफॉर्मेंस
सोशल मीडिया पर हर तरफ इनके डांस की स्पेशल वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं. कई वीडियोस तस्वीरों में देख सकते हैं कि कैसे दलजीत कौर अपनी संगीत सेरेमनी धुआंधार डांस करती दिखाई दे रही हैं. एक नहीं दो नहीं दलजीत कौर ने अपनी दोस्तों के साथ कई बॉलीवुड गानों पर कदम थिरकाए हैं. दलजीत कौर की ब्राइडमैड बन करिश्मा तन्ना रिद्धि डोगरा और सनाया ईरानी ने भी स्पेशल परफॉर्मेंस दी है. उन्होंने साजन जी घर आए पर धुआंधार डांस किया है.

 

 

View this post on Instagram

 

A post shared by DALLJIET KAUR ੴ (@kaurdalljiet)

बेटे ने दिया स्पेशल परफॉर्मेंस

केवल दलजीत के दोस्तों ने ही नहीं बल्कि उनके बेटे और उनके होने वाले पति ने भी इस महफिल में खूब धूम मचाई है. बेटे ने मां के लिए स्पेशल डांस परफॉर्मेंस रेडी की थी. वायरल हो रही वीडियो में बेटे को यू डांस करता देख दलजीत कौर काफी इमोशनल होती नजर आईं.

दलजीत कौर के चाहने वाले उनकी मजेदार वीडियोस इंटरनेट पर साझा करते नजर आ रहे हैं. शादी की कई खूबसूरत तस्वीरें भी इस इंटरनेट पर देखने को मिल रही हैं.

अंतर्द्वंद्व: आखिर क्यूं सीमा एक पिंजरे में कैद थी- भाग 3

सबकुछ ठीकठाक चल रहा था कि इसी बीच एक दिन रमेशजी ने ऐसी बात की जिस से सीमा को लगा की रमेशजी उसे काफी पसंद करने लगे हैं और उन्हें उस का सान्निध्य बहुत पसंद आता है. अब वे यदाकदा बिना काम फोन भी कर लिया करते थे.

हालांकि फोन पर बातचीत का विषय चित्रकला ही होता था परंतु उसी के बीच वे अप्रत्यक्ष रूप से सीमा की खूबसूरती और सुघड़ता की प्रशंसाभर कर दिया करती थे.

शुरूशुरू में तो सीमा को यह सब बड़ा अजीब लगता था परंतु वह रमेशजी की इज्जत भी करती थी तथा मन ही मन उन के व्यक्तित्व से भी प्रभावित थी इसलिए अब उसे उन की इन सब बातों में कोई बुराई नजर नहीं आती थी बल्कि उसे ऐसा महसूस होता था कि उस के अकेलेपन के अभिशाप को मिटाने के लिए ही कुदरत ने रमेशजी को एक माध्यम बना कर भेजा है. फिर अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनना किसे अच्छा नहीं लगता और वह भी इस ढलती उम्र में. इसलिए सीमा जोकि पहले से ही रमेशजी से प्रभावित थी धीरेधीरे उन्हें और भी अधिक पसंद करने लगी.

दोपहर का समय था कि अचानक घंटी बजी. सीमा ने देखा दरवाजे पर रमेशजी थे. दोपहर के समय इस तरह रमेशजी का आना सीमा को अटपटा तो लगा परंतु बुरा नहीं क्योंकि अब तक वह भी उन से काफी खुल चुकी थी.

‘‘अच्छा हुआ जो आप आ गए. बैठ कर गपशप करेंगे तथा आप से कला की बारीकियां भी सीख लूंगी,’’ उस ने दरवाजा खोलते हुए कहा.

कुछ देर औपचारिक बातचीत करने के बाद रमेशजी ने सीमा की आंखों में आंखें डालते हुए कहा, ‘‘सीमा तुम मु?ो बहुत अच्छी लगती हो. क्या मैं भी तुम्हें अच्छा लगता हूं?’’

रमेशजी की यह बात सुन कर सीमा एक बार तो सकपका गई. उसे यह रमेशजी द्वारा किया गया प्रश्न बड़ा अटपटा लग रहा था जो उम्र के इस पड़ाव पर उस से इस तरह प्रणय निवेदन कर रहे थे परंतु तत्क्षण ही एक नवयौवना की तरह शरमा गई और अपनी नजरें नीचे ?ाका कर बैठ गई, कुछ बोली नहीं.

‘‘तुम्हारी चुप्पी का क्या अर्थ सम?ां?’’ रमेश बाबू बोले.

इस पर सीमा धीरे से बोली, ‘‘आप अच्छे हैं तो सभी को अच्छे ही लगेंगे.’’

‘‘मैं सभी की बात नहीं कर रहा. मैं केवल तुम्हारी पसंद या नापसंद पूछ रहा हूं. बोलो, क्या मैं तुम्हें पसंद हूं?’’

‘‘रमेश बाबू, अब पसंद या नापसंद करने की उम्र निकल गई है. काश आप ने यह प्रश्न वर्षों पूर्व किया होता तो मैं इस का उत्तर दे सकती थी. अब ये बातें करने का क्या लाभ?’’

‘‘मु?ो तुम्हारा उत्तर हां या न में चाहिए. क्या तुम मु?ो पसंद करती हो? यदि करती हो तो मु?ो बता दो और यदि नहीं तो भी. मैं तो अपने दिल से मजबूर हूं क्योंकि इन दिनों मैं ने महसूस किया है कि मैं तुम्हें चाहने लगा हूं.’’

‘‘रमेश आप मु?ो चाहें यह मेरे लिए खुशी की बात है, गर्व की बात है परंतु इस चाहत का अंजाम भी सोचा है आप ने?’’

‘‘प्यार सोचसम?ा कर नहीं किया जाता. यह तो बस हो जाता है. मैं ने भी आज तक केवल सुना ही था परंतु अब इसे प्रत्यक्ष रूप

में घटित होते हुए देख रहा हूं वह भी स्वयं के साथ. जानती हो युवावस्था में मु?ो कभी कोई ऐसी लड़की नहीं मिली जिसे देख कर मन ने चाहा हो कि मैं उस से अपने प्रेम का इजहार करू. तुम्हें देख कर न जाने क्यों ऐसा महसूस होता है कि हमारा तुम्हारा जन्मजन्म का साथ है. मु?ो तुम से मिलना, तुम से बातें करना, तुम्हें देखना अच्छा लगता है. मेरे खयाल से तुम्हारे साथ भी ऐसा हो रहा होगा. यदि नहीं तो भी कह देना मैं इस विषय में फिर कभी बात नहीं करूंगा. ठीक है मैं अभी निकलता हूं. कल फिर फोन करूंगा ताकि मु?ो तुम्हारी हां या न का पता चल जाए.’’

रमेश तो चले गए परंतु सीमा के दिल में हलचल मचा कर छोड़ गए. उसे यह बात बहुत अजीब भी लग रही थी कि प्रौढ़ावस्था में भी कोई उस से प्यार का इजहार कर रहा है. सच पूछो तो उसे अच्छा भी लग रहा था क्योंकि  युवावस्था में उस ने भी किसी से इस तरह प्यार का इजहार नहीं किया था. वह जबजब किसी कथाकहानी या फिल्मों में यह देखती थी तो अकसर यही सोचती थी ऐसा किन लोगों के साथ होता है परंतु उस ने यह सपने में भी नहीं सोचा था कि यह सब उस के साथ जीवन के उस मोड़ पर होगा जब वह चाह कर भी उस का प्रतिउत्तर नहीं दे पाएगी.

रमेश ने उस के दिल के एक कोने में अपनी जगह तो बना ली थी परंतु वह एक अच्छे इंसान और पथप्रदर्शक के रूप में. आज उन्हें एक प्रेमी के रूप में देख कर वह आश्चर्यचकित थी परंतु कुछ चाहत का एहसास उस के मन में भी हो रहा था.

सीमा ने स्वयं को दर्पण में देखा और सोचा, ‘क्या मैं सचमुच अभी भी इतनी सुंदर लगती हूं कि कोई मु?ा पर आसक्त हो जाए और उस का मन स्वाभिमान से भर गया. वह कल्पना के सागर में हिलोरें खाने लगी. युवावस्था में उस ने जिस सुंदर युवक की एक प्रेमी के रूप में कल्पना की थी, आज रमेश बाबू के रूप में वह साकार होती नजर आ रही थी. उसे लगा कि सचमुच वे दोनों एकदूसरे के लिए बने हैं जो कुदरत की भूल के कारण अभी तक मिल नहीं पाए.

 

तभी उसे सतीश का खयाल आया और वह घबरा गई कि यह मु?ो क्या हो गया है.

इतने वर्षों तक मैं ने अपने पत्नी धर्म का निर्वाह किया है और अब इस उम्र में यह आशिकी. नहींनहीं यह ठीक नहीं है. मैं सतीश के साथ बेवफाई नहीं कर सकती. मैं रमेशजी को साफ मना कर दूंगी कि वे मेरे घर न आयाजाया करें. यही सब सोचतेसोचते सीमा की आंख लग गई.

सीमा जब सुबह सो कर उठी तो रात वाली उथलपुथल अभी भी उस के मन में थी. जैसेजैसे दिन बीत रहा था, उस की धड़कन बढ़ती जा रही थी. क्या कहूंगी. कैसे कहूंगी. उन्हें कैसा लगेगा. यह सोचसोच कर वह परेशान हो रही थी कि तभी फोन की घंटी बजी. फोन रमेश का ही था.

‘‘हैलो,’’ सीमा ने धीरे से कहा. न जाने क्यों आज उस के हैलो बोलने में परिवर्तन आ गया था.

‘‘कैसी हो?’’

‘‘अच्छी हूं.’’

‘‘मेरी याद आई?’’

सीमा चुप रही और मन ही मन बोली कि आप को कैसे भूल सकती हूं.

रमेश बोले, ‘‘जानती हो तुम्हारा यही संकोची स्वभाव, यही शर्मीलापन मु?ो सब से अच्छा लगता है. क्या सतीशजी को भी यह पसंद है?’’

‘‘पता नहीं, उन्होंने कभी ऐसा कहा नहीं.’’

‘‘कहना चाहिए. यदि कुछ अच्छा लगे और मन को पसंद आए तो अवश्य कहना चाहिए. इस से कहने वाला और सुनने वाला दोनों ही प्रसन्न रहते हैं.’’

रमेशजी की बात सुन कर सीमा मुसकराए बिना न रह सकी और फिर बोली, ‘‘सभी आप के जैसे नहीं हो सकते.’’

‘‘इस का अर्थ मैं तुम्हें पसंद हूं.’’

‘‘यह तो मैं ने नहीं कहा.’’

‘‘हर बात कहने की जरूरत नहीं होती. कुछ बातें अनकही हो कर भी कही जाती हैं. कह कर रमेशजी ने फोन रख दिया और सीमा भी फोन रख कर सोफे पर धम से बैठ गई.

पति को लेकर परेशान हुई अनुपमा, अनुज ने कही ऐसी बात टूट गई अनु

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ इन दिनों काफी चर्चा में बना हुआ है. शो अपने ट्विस्ट और टर्न्स के कारण टीआरपी लिस्ट में तो नंबर वन पर आ गया है, लेकिन दर्शक करंट ट्रैक से काफी नाराज नजर आ रहे हैं. ‘अनुपमा‘ (Anupama) में इन दिनों दिखाया जा रहा है कि छोटी अनु उन्हें छोड़कर चली गई है. बीते दिन भी रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly) के शो में देखने को मिला कि छोटी अनु मायूस होकर माया के साथ चली जाती है. उसके जाते ही अनुज-अनुपमा की जिंदगी में गृहण लग जाता है, क्योंकि अनुज अपना होश खो बैठता है और बेटी की यादों में ही गुम रहता है. लेकिन रुपाली गांगुली के ‘अनुपमा’ में आने वाले ट्विस्ट और टर्न्स यहीं खत्म नहीं होते हैं.

 

अनुज-अनुपमा को याद कर फूट-फूटकर रोएगी छोटी अनु

अनुपमा‘ में देखने को मिलेगा कि अनुज और अनुपमा से दूर होकर छोटी अनु जरा भी खुश नहीं रहती है. वह बार-बार उनकी तस्वीरें देखती है. माया उसे समझाती है कि वह उसे इतना प्यार देगी कि छोटी अनुज और अनुपमा को भूल जाएगी. लेकिन छोटी उसकी इस बात पर गुस्सा हो जाती है और रोने लगती है। ऐसे में माया कहती है कि अगर छोटी उनके पास वापिस जाना चाहती है तो वह उसे भेज देगी। लेकिन छोटी कहती है, “मैं आपको अकेले छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी

 

छोटी अनु के जाने पर खुद को कोसेगा अनुज

रुपाली गांगुली के ‘अनुपमा’ में देखने को मिलेगा कि छोटी अनु के जाने के बाद अनुज खुद को कोसता है. वह कहता है कि उसके मां-बाप की डेथ उसकी वजह से हुई. वह मुक्कू की शादी के लिए भी खुद को जिम्मेदार मानता है और छोटी के जाने के लिए भी खुद को ही दोषी समझता है. वह ऑफिस तक नहीं जाता और छोटी के खिलौनों के आसपास बैठकर ही वक्त बिताता है.

 

अनुपमा की तरफ देखेगा भी नहीं अनुज

‘अनुपमा’ में एंटरटेनमेंट का डोज यहीं पर खत्म नहीं होता है. अनुज के कारण किचन में आग लग जाती है, लेकिन अनुपमा वक्त पर आकर उसे संभाल लेती है. अनुपमा अनुज को समझाने की कोशिश भी करती है, लेकिन वह उसे अनदेखा करके चला जाता है. यहां तक कि छोटी का वीडियो कॉल आने पर भी अनुज बुरी तरह अनुपमा को नजरअंदाज करता है. अनुज की हालत देखकर अनुपमा कहती है, “ऐसे में तो अनुज डिप्रेशन में चले जाएंगे.” वह उससे बात करने की कोशिश करती है, लेकिन अनुज उसे जरा भी भाव नहीं देता.

मुझे माफ कर दो- भाग 3

उच्च मध्य परिवारों की तरह संपन्न सा ड्राइंगरूम में बिछा मोटा कालीन, दीवार पर शोभा बढ़ातीं आकर्षक पेंटिंग्स, काफी कीमती सोफा, साइड टेबल पर कलात्मक राधाकष्ण की सुंदर चमचमाती पीतल की मूर्ति, वहां पर रहने वालों की सुरुचि और संपन्नता को दशा रही थी.

 

चारों ओर नजरें घुमाकर देखने के बाद श्री ज्वैलर्स के यहां से आया मैनेजर रजत

थोड़ा सकपका सा उठा परंतु अपनी ड्यूटी के कारण मजबूर था.

‘‘सर, मैं श्री ज्वैलर्स के यहां से आया हूं,’’ कुछ भी बोलने में उस की जबान तालू से चिपकी सी जा रही थी.

सजल ने गिलास में पानी दे कर कहा, ‘‘बिना संकोच बोलिए, वैसे शायद आप गलत जगह आ गए हैं. मेरी गोल्ड या सिल्वर में इन्वैस्टमैंट की रुचि नहीं है. सर, आप की पत्नी नीराजी 3 नवंबर को मेरे शोरूम में एक महिला के संग आई थीं और गलती से शायद डायमंड की रिंग अपनी उंगली में पहन कर आ गई हैं. सर, सीसीटीवी में हम लोगों ने रिकौर्डिंग देखने के बाद आधार कार्ड से आप का पता निकाला, तब मैं यहां आ पाया हूं. सर मेरे यहां तो एक लाख के ऊपर की चीजों पर तुरंत थाने में एफआईआर की जाती है, लेकिन इस केस में हम लोगों ने पहले एक बार कोशिश कर लेने के विचार से आप के घर आए हैं.’’

सजल पत्नी नीरा की छोटीछोटी चीजों

की चोरी कर लेने की आदत से परिचित थे, इस वजह से वे कई बार उन्हें खूब अच्छी तरह डांटफटकार और लताड़ भी चुके थे, परंतु इतनी बड़ी चीज इसलिए

उन का चेहरा तमतमा उठा था.

मैनेजर ने नीरा का उंगली में अंगूठी पहन कर दुकान से बाहर हाथ छिपा कर निकलने वाला वीडियो उन के फोन पर फौरवर्ड कर दिया. सामने प्रूफ देख कर सजल का सिर पत्नी की करतूत के कारण शर्म से ?ाक गया.

‘‘तुम श्री ज्वैलर्स के यहां गई थी?’’

‘‘एक दिन रश्मि मु?ो ले गईर् थी.’’

‘‘वहां से डायमंड रिंग पहन कर आ गई थी तो लौटाने क्यों

नहीं गई.’’

‘‘मैं ने रश्मि

को लौटाने के लिए दे दी थी.’’

‘तुम सरासर ?ाठ बोल रही हो. तुम ने अंगूठी वहां से चुराई है.’’

‘‘आप की निगाहों में तो मैं हमेशा से चोर हूं,’’ यह कहते हुए अपने आखिरी अस्त्र का इस्तेमाल करते हुए नीरा ने जोरजोर से रोनाधोना शुरू कर दिया.

मगर आज सजल इस समय अपने

अपमान की ज्वाला से सुलग रहे थे. आंसू देख कर भी उन का दिल तिल भर भी नहीं पिघला. तड़प कर चीख पड़े, ‘‘बदतमीज, कमीनी औरत चोरी और सीना जोरी, तुम मेरी आंखों में धूल ?ोंकती रही और मैं तेरे पूजापाठ वाले नाटक पर विश्वास करता रहा. धार्मिक कर्मकांड की आड़ में तुम्हारा शातिर दिमाग चोरी जैसे घिनौने काम में लगा हुआ था. अब भुगतो अपने बुरे कर्म का बुरा नतीजा.’’

‘‘सच मानिए, मैं अंगूठी गलती से पहन कर आ गई थी, फिर रश्मि को दे दी थी.’’

‘‘फिर ?ाठ बोल रही हो. यह देख ले, कैसे हाथ छिपा कर चुपके से बाहर निकल रही है,’’ उन्होंने गुस्से में अपना मोबाइल नीरा की तरफ फेंक दिया और फिर तमक कर उठे और सामान को इधरउधर फेंकते हुए उस की अलमारी का लौकर खोल कर उस में से 1-1 सामान निकाल कर फेंकने लगे.

‘‘यह मोटी चेन तुम्हारे पास कहां से आई? बताओ कहां से चुरा कर लाई और ये ?ामकी तो मैं ने खरीद कर नहीं दिए थे आदिआदि…’’

तभी उन्हें पीछे की तरफ एक डब्बी दिखाई पड़ी. उस को खोलते ही चीख पड़े,

‘‘देख ?ाठी औरत यह रही वह अंगूठी, जिसे तुम बारबार रश्मि को दे दी थी, कह रही थी,’’ सजल गुस्से में अपना आपा खो बैठे थे. वे क्रोध के मारे थरथर कांप रहे थे.

सजल अंगूठी ले कर गिरतेपड़ते से मैनेजर के पास पहुंचे और बोले, ‘‘यह रही आप की अंगूठी… मेरी बीवी चोर है… अब आप जाए…’’ वे अपना होश खो बैठे थे, अपमान और शर्म के कारण सम?ा नहीं पा रहे थे कि वे क्या कर रहे हैं.

‘मैं ने तुम्हारी हर ख्वाहिश को पूरी करने के लिए कोशिश करता रहा लेकिन तुम्हारी नजर और निशाना तो कहीं और था. अब मैं तुम्हें एक क्षण भी बरदाश्त नहीं कर सकता.’’

नीरा अपनी चोरी पकड़े जाने के कारण सहम उठी थी. वह सिसकती हुई उठी, ‘‘मु?ो माफ कर दो,’’ कहते हुए पति के पैरों को पकड़ लिया.

मगर आज सजल ने मन ही मन एक कड़ा फैसला ले लिया. उन्होंने पत्नी के बढ़े हाथों को जोर से ?ाटक दिया और अपने फैसले पर अडिग रहते हुए सीधे तलाक के लिए वकील से मिलने के लिए चल पड़े थे.

वह जानते थे कि तलाक लेने में वर्षों लग जाएंगे पर एक चोर वाली पत्नी के साथ रहने से यह अच्छा ही है.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें