दिल्लगी: क्या था कमल-कल्पना का रिश्ता- भाग 4

आज सहसा एक अरसे बाद कमल ने उस के सामने आ कर उस के मन की शांत ?ाल में फिर से हलचल मचा दी थी. उस के विचारों की लहरों ने तूफानी रूप धारण कर लिया था. कमल को देखते ही उस का सोया हुआ नारी स्वाभिमान पुन: जोश मार उठा था. उस के मन ने भय व अपराधबोध के अधीन सोचा, यदि राजीव यह जान ले कि कालेज युग के दौरान उस ने केवल कमल को अपना जीवनसाथी बनाने के सपने देखे थे, बल्कि कमल द्वारा उस का प्रेम ठुकरा देने पर उसे बुरी तरह लज्जित भी होना पड़ा था तो वह उस की दृष्टि में किस कदर अपमानित हो जाएगी. कहीं उस के पास वह वीडियो न हो और वह कीमत वसूल करने आया हो उस स्थिति में क्या यह अपना सुखी और शांत दांपत्य जीवन नष्ट होता सहन कर पाएगी ऐसा होने के बाद क्या वह जीवित रह सकेगी? वह राजीव की घृणा सह पाएगी?

नहीं, यह हरगिज नहीं हो सकता,’’ सहसा उस के होंठ कांप कर बुदबुदा उठे.

‘‘अरे तुम अभी तक नहीं सोई,’’ अचानक राजीव की आंखें खुल गईं.

‘‘एक बात बताओ, आप ने कैसे जाना कि मु?ो कमल का आना अच्छा नहीं लगा है?’’

‘‘रहने दो वरना तुम बुरा मान जाओगी.’’

‘‘नहीं मानूंगी, आप बताइए.’’

‘‘कमल मेरे लिए अजनबी नहीं है. हम दोनों पुराने मित्र हैं.’’

‘‘तो क्या आप को सब मालूम है?’’

‘‘हां कल्पना, मु?ो सब मालूम है. सच पूछो तो हमारा विवाह कमल के जरीए ही हुआ है,’’ राजीव ने दूसरा रहस्योद्घाटन किया.

‘‘क्या?’’ कल्पना का मुंह आश्चर्य से खुला रह गया.

‘‘हां, यह उन दिनों की बात है जब हमारे रिश्ते की बात चल रही थी. कमल बाजपुर में था. मां की तबीयत खराब होने के कारण वह नैनीताल नहीं जा सका था. कुछ दिन पूर्व ही मैं ने उसे एक पत्र भेजा था, जिस में मैं ने लिखा था, ‘‘यार, तुम नैनीताल में पढ़ते रहे हो. क्या इस लड़की के बारे में कुछ बता सकते हो. उत्तर में उस ने लिखा था कि अरे, यह लड़की तो मेरे साथ ही पढ़ती थी. मैं इसे खूब अच्छी तरह जानता हूं.

‘‘उस के मुख से तुम्हारी प्रशंसा सुन कर ही मैं ने तुम्हें बिना देखे पसंद कर लिया

था. उस ने मु?ा से कुछ भी नहीं छिपाया था. बचपन की बातें, जवानी का साथ, अपने प्रति तुम्हारी गलतफहमी, सब उस ने खुलासा कर के बता दिया था,’’ कह कर राजीव फिर कल्पना को निहारने लगा.

‘‘लेकिन तुम ने आज तक मु?ा से ये सब क्यों छिपाए रखा?’’ कल्पना ने पूछा.

‘‘केवल इसलिए कि तुम अपनेआप को मेरे सामने लज्जित न महसूस करो.’’

‘‘और आज शाम जो नाटक किया, उस की क्या जरूरत थी?’’

‘‘ओह,’’ राजीव हंस पड़ा और देर तक हंसता रहा. फिर बोला, ‘‘कमल आज दोपहर अचानक दफ्तर में आ धमका था. तब सोचा, कुछ दिल्लगी ही हो जाए. उसे भी मैं ने इस बात के लिए राजी कर लिया कि वह तुम्हारे सामने अकस्मात पहुंच कर ऐसा प्रकट करे मानो हम दोनों पहली बार ही मिल रहे हैं.’’

‘‘तुम ने यह नहीं सोचा कि तुम्हारी दिल्लगी किसी की जान आफत में डाल देगी?’’ कल्पना ने मुखड़े पर कृत्रिम गुस्से के भाव ला कर कहा.

‘‘दिल्लगी कौन सी रोजरोज की जाती है, जानेमन,’’ राजीव ने मुसकरा कर कहा और फिर कल्पना को खींच छाती से लगा लिया.

कल्पना का भय व अपराधबोध आंखों के रास्ते खुशी के आंसुओं के रूप में बह कर राजीव का गाऊन भिगोने लगा. अगली सुबह जब राजीव अपने क्लाइंट्स के साथ बैठा था, कमल ने कल्पना को एक पैकेट दिया और कहा, ‘‘यह तुम्हारी धरोहर है. मैं तुम्हें लौटा रहा हूं. इसे नष्ट कर देना. मैं ने संभाल कर सिर्फ इसलिए रखी थी कि कभी भी तुम्हारे मन में शक न हो. हम दोस्त हैं और रहेंगे और यह है मेरी शादी का इनवाइट. मैं इसीलिए आया था. तुम दोनों अब शादी में मुंबई आना. शीतल हमारे बारे में सब जानती है सिवा इस वीडियो वाले कार्ड के. राजीव तो हां कर चुका है पर मेरा तुम्हारे पर ज्यादा हक है इसलिए यह कार्ड और मिठाई लो,’’ कह कर उस ने कल्पना का माथा चूम लिया.

कल्पना को यह क्षण अद्भुत लगा. उस दिन से दिल्लगी का बो?ा जो दिल पर पड़ा था, वह उतर गया.

ईवनिंग स्नैक्स में बनाए चीजी आलू कटलेट

कटलेट का नाम लेते हा मुंह में पानी आ जाता है. आपने आलू का कटलेट तो खाया ही होगा, लेकिन इस बार गर्मी में खाइए  का आलू कटलेट. इस रेसिपी के साथ लीजिए गर्मी का मजा.

1- चीजी आलू कटलेट

सामग्री

–  3-4 उबले आलू

–  2-3 हरीमिर्चें

–  1/4 कप धनियापत्ती कटी

– 1/2 छोटा चम्मच अमचूर पाउडर

– 1/2 छोटा चम्मच धनिया पाउडर

– 1/2 छोटा चम्मच लालमिर्च कुटी

–  नमक स्वादानुसार.

सामग्री भरावन की

–  3 बड़े चम्मच चीज स्प्रैड

–  2 बड़े चम्मच कसा पनीर

– तेल तलने के लिए

– 3 बड़े चम्मच मैदा

–  1 कप ब्रैडक्रंब्स.

विधि

उबले आलुओं को छील कर कद्दूकस कर लें. भरावन की सामग्री छोड़ बाकी सारी सामग्री एकसाथ मिला कर अच्छी तरह गूंध लें. अब इस के मध्यम आकार के गोले बना लें. अब 1-1 बौल्स लें. उस में उंगली से एक छेद बना उस में पनीर और चीज स्प्रैड को मिला कर बना मिश्रण भरें और सावधानी से छेद बंद कर दें. मैदे का घोल बना लें. बौल्स को मैदे के घोल में डुबो कर ब्रैडक्रंब्स में लपेटे गरम तेल में तल कर चटनी के साथ परोसें.

2- उरद पकौड़ा

सामग्री

–  1 कटोरी साबूत उरद

– 1/4 कप प्याज बारीक कटा

–  1/2 बड़ा चम्मच अदरकलहसुन पेस्ट

–  1 उबला आलू

–  1 हरीमिर्च कटी

–  1 छोटा चम्मच चाटमसाला

–  1/2 कप धनियापत्ती कटी

–  1/2 कप बेसन

– 1/4 कप चावल का आटा

–  1 कप मूली के लच्छे

–  1 कप हरी चटनी

–  नमक स्वादानुसार.

विधि

उरद दाल को आधा गलने तक पका लें. एक बाउल में प्याज, अदरकलहसुन पेस्ट, मसला आलू, हरीमिर्च, नमक, चाटमसाला व धनिया मिलाएं. दाल का पानी निथार कर इस में मिला दें. बेसन व चावल का आटा मिलाएं. अब थोड़ाथोड़ा पानी डाल कर भजिया बनाने जैसा घोल बना लें. थोड़ाथोड़ा तैयार बैटर हाथ या चम्मच की सहायता से उठा कर गरम तेल में पकौड़े जैसा तल लें. मूली के लच्छों व हरी चटनी के साथ परोसें.

महिलाओं में क्यों बढ़ रहा मोटापा

एक रिपोर्ट के अनुसार रजोनिवृत्ति के दौरान हुए हारमोनल परिवर्तन महिलाओं में अत्यधिक वजन बढ़ने का कारण बन सकते हैं. सिनसिनाटी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने यह खोज निकाला है कि वसा का वितरण कहांकहां होगा. दरअसल, इसे नियंत्रित करने में ऐस्ट्रोजन का मस्तिष्क में एक गुप्त, छिपा हुआ रोल है.

मनोचिकित्सक असिस्टैंट प्रोफैसर डेबरा क्लेग का अनुसंधान बताता है कि रजोनिवृत्ति के बाद ऐस्ट्रोजन उत्पत्ति में कमी, मस्तिष्क के एक विशेष क्षेत्रों में जो भोजन की ग्रहणता और वसा को रखने की जगह निर्धारित व उसे नियंत्रित करता है, पर असर करता है.

विशेषरूप से हाइपोथैलेमस के वे ऐस्ट्रोजन रिसेप्टर्स, जो मस्तिष्क का वह क्षेत्र जो शरीर के तापमान, भूख और प्यास को नियंत्रित करता है, वजन बढ़ने व वजन के वितरण में प्रत्यक्ष रोल अदा करते हैं.

क्लेग का कहना है कि यह अनुसंधान वैज्ञानिक ज्ञान में एक बहुत ही बड़ी उपलब्धि है. यह बिना स्वास्थ्य संबंधी खतरों के आज की तकलीफों से जुड़ी स्तन व ओवेरियन कैंसर और कार्डियोवैस्कुलर रोगों, हृदय की नाडि़यों से जुड़ी आजकल की रिप्लेसमैंट तकनीकों की हारमोन थेरैपीज में सुधार कर सकती है.

स्वास्थ्य के लिए खतरनाक

जब नारियां रजोनिवृति का अनुभव करती हैं तो एस्ट्रोजन की उत्पत्ति कम हो जाती है और उन का वजन बढ़ जाता है. अधिकतर नारियों में रजोनिवृत्ति के बाद वसा ‘फैट’ जो पहले कूल्हों के क्षेत्र में एकत्रित होती थी, उस का स्टोरेज स्थान में जमा होने की जगह अब पेट, उदर हो जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए और भी ज्यादा खराब है.

क्लेग का कहना है कि जब नारियों में कूल्हों और जांघों के क्षेत्र से हट कर, जो अपेक्षाकृत ज्यादा सुरक्षित स्थान है वसा का ट्रांसफर उन के उदर, पेट में हो जाता है तब मोटापे से संबंधित रोगों के खतरों के बढ़ने की बहुत बड़ी संभावना हो जाती है.

एक रहस्य भी है

यह एक रहस्य होता था कि वसा के सेल्स कैसे यह निर्णय लेते हैं कि शरीर के किस स्थान में वे अपना घर बनाएं, निवास करें.

क्लेग की टीम ने रीढ़ की हड्डी के पास, खोपड़ी के आधारस्थल पर हाइपोथैलेमस में ऐस्ट्रोजन रिसेप्टर्स को केंद्रित पाया है.

जवानी के उत्तरार्द्ध में मादा चूहों का इस्तेमाल करते हुए विशेषज्ञों ने वे न्यूरोलोजिकल रिसेप्टर्स जो ऐस्ट्रोजन को सेल में प्रवेश करने देते हैं, शांत कर दिया. जब रिसेप्टर्स आरएनए इंटरफिएरैंस तकनीक द्वारा बंद कर दिए गए, चुहियों का वजन बढ़ने लगा और वसा का वितरण उदर के क्षेत्रों में होने लगा. क्लेग का कहना है कि चुहियों के मस्तिष्क के ऐस्ट्रोजन रिसेप्टर्स को बंद करने से वही स्थिति पैदा होती है जो रजोनिवृत्ति के बाद नारियों में जिन का हाइपोथैलेमस, जैसेजैसे उन के शरीर के उत्पादन में कमी होती जाएगी, हारमोन से वंचित होता जाएगा.

यह अनुसंधान उन हारमोन रिप्लेसमैंट थेरैपीज की ओर अग्रसर कर सकता है जो मस्तिष्क के सिर्फ उस भाग को लक्ष्य करेगा जो शरीर के वजन वितरण को नियंत्रित करता है.

मोटापे के लिए जिम्मेदार

क्लेग का कहना है कि इस प्रकार से किया इलाज स्तनों के स्तर पर प्रभाव नहीं डालेगा और न ही हृदय के स्तर पर ही प्रभाव डालेगा, जैसाकि वर्तमान की हारमोन रिप्लेसमैंट थेरैपीज से खतरा है.

कैनेडियन संस्थान के हैल्थ रिसर्च के फिजियोलौजिस्ट, जीन मार्क लावोई का कहना है कि यह बहुत रुचिकर तथ्य है क्योंकि यह रजोनिवृत्ति के बाद वजन बढ़ने पर बहुत महत्त्वपूर्ण नया प्रकाश डालता है. पर अभी तक वे इस बात से निर्णयात्मक रूप से सहमत नहीं हो पाए हैं कि हाइपोथैलेमस में ऐस्ट्रोजन की कमी वजन वितरण के लिए जिम्मेदार है.

लावोई का कहना है, ‘‘वसा उदर क्षेत्रों में ही क्यों ज्यादा जाती है, अन्य क्षेत्रों में क्यों नहीं. यह इसलिए भी हो सकता है कि ऐस्ट्रोजन रिसेप्टर्स वसा के टीसूज के बिलकुल पास हैं, जरूरी नहीं है कि वे मस्तिष्क में हैं.’’

पौष्टिक भोजन और व्यायाम

जो भी हो रजोनिवृत्त महिलाओं के लिए कम से कम यह आशा तो बन ही गई है कि यदि अभी नहीं तो कम से कम इस दिशा में काम शुरू हो जाने से भविष्य तो सुनहरा दिखने ही लगा है. इस प्रक्रिया से भविष्य में उन के भी छरहरे दिखने की संभावना है.

पर साथ ही भविष्य के सपने चाहे कितने भी रंगीन क्यों न हों, वर्तमान की ठोस धरा पर जीवन जीना भी जीवन की एक बहुत बड़ी आवश्यकता है. इसलिए रजोनिवृत्त महिलाओं को भी आज की परिस्थितियों से सम झौता कर अपने मोटापे को पौष्टिक भोजन और व्यायाम से नियंत्रित करना पड़ेगा.

परफेक्ट सेल्फी के लिए मेकअप आइडियाज

आजकल लोगों में सेल्फी लेने का क्रेज बहुत ज्यादा बढ़ चूका है. खासकर लड़कियां और महिलाएं अपने जीवन की छोटी से छोटी घटनाओं को कमरे में कैद करना नहीं भूलतीं. पहनावा नया हो या हेयरस्टाइल या फिर मेकअप, वे अपनी खूबसूरती को बेहतरीन अंदाज में तस्वीरों में उतारने के लिए दिन में कई कई बार सेल्फी लेती दिख जाती हैं. पर याद रखें खुद की परफेक्ट सेल्फी लेना कोई छोटी बात नहीं है. लाइटिंग से ले कर बेहतर एंगल और साथ ही अच्छे मेकअप के अंदाज भी आने चाहिए तभी आप एक परफेक्ट सेल्फी क्लिक कर सकेंगी.

कई दफा ऐसा भी होता है जब आप आईने में तो बेहद हसीं नजर आती हैं मगर जब जब सेल्फी लेती है तो चेहरे पर कुछ अबनॉर्मल सा नजर आता है. कभी चेहरे पर दाग धब्बे तो कभी नैन नक्श का अजीबोगरीब दिखना. वहीं सेल्फी की पोज भी वैसी नहीं आती जैसी हम लेना चाहते हैं. ऐसा अमूमन ज्यादातर लड़कियों के साथ होता है. ऐसे में जरुरी है कि आप मेकअप से जुड़े कुछ ऐसे आइडियाज के बारे में जानें जिन की मदद से एक परफेक्ट सेल्फी क्लिक कर सकें.

इस सन्दर्भ में सेलिब्रिटी मेकअप आर्टिस्ट गुंजन अघेरा पटेल कुछ टिप्स बताती हैं;

1- सेल्फी के लिए जरुरी हेल्दी और ग्लोइंग स्किन

अगर अंदर से आप की स्किन हेल्दी और फ्रेश है तो आप का मेकअप भी उभर कर आएगा. दरअसल मेकअप सॉफ्ट और हाइड्रेटेड स्किन पर बेहतर नजर आता है. स्किन टाइप के मुताबिक आप एक अच्छे क्लींजर, एक्सफोलिएटर और मॉइस्चराइज़र को कस्टमाइज़ करें ताकि आप को सेल्फी से पहले हाईलाइटर की जरूरत न पड़े.

2- जरूरी है फाउंडेशन का सही शेड

एक बेहतर सेल्फी के लिए परफेक्ट शेड का एक परफेक्ट फाउंडेशन जरुरी है जो फुल कवरेज वाला हो. इस से आप को सेल्फी क्लिक करते वक्त किसी तरह के फिल्टर की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसे अप्लाई करने के बाद आप की स्किन इवन टोन नजर आएगी और बेस केकी नजर नहीं आएगा. अगर आप को फ़्लैश लाइट में सेल्फी
लेनी हो तो सही फाउंडेशन का इस्तेमाल कीजिये और उस का शेड भी फेस के अकॉर्डिंग ही लीजिए.

3- सही ढ़ंग से हो ब्लेंड

कैमरा लगभग हर छोटी से छोटी चीज को भी पकड़ लेता है. इसलिए जो भी बेस या
फाउंडेशन का इस्तेमाल करें उसे अच्छे ब्लेंड जरूर कर लें. इसके लिए आप ब्रश, अपनी उंगलियों या मेकअप ब्लेंडर का इस्तेमाल कर सकती हैं. सेल्फी लेते वक्त इस से चेहरे पर मेकअप थोपा हुआ नजर नहीं आता.

4- मेकअप को रखें मैट

सेल्फी क्लिक करते वक्त मैट मेकअप लुक सब से अच्छा होता है. क्योंकि यह
अलग से चमकता नहीं. सेल्फी के वक्त शिमर को बिलकुल नो कह देना चाहिए. क्योंकि यह चेहरे को जरूरत से ज्यादा चिकना बना सकता है. इसलिए अच्छी सेल्फी के लिए हमेशा मैट बेस का ही चुनाव करना सही माना जाता है.

5- प्ले विथ आईज

सेल्फी लेते वक्त आंखों पर फोकस होता है. खूबसूरत गहरी आँखें आप की सेल्फी को दिलकश बनाती हैं. अपनी आंखों को बड़ा दिखाने के लिए काजल का
इस्तेमाल करें. आई लाइनर यूज करते समय इस के लिए ग्लिटरी नीले या हरे जैसे पॉप रंगों का इस्तेमाल करें. यही नहीं याद रखें आप की पलकें जितनी लंबी होंगी आंखें उतनी ही बड़ी नजर आएंगी. इस के लिए आप मस्कारा का इस्तेमाल करें. सही तरीके से लगाया गया मस्कारा आप के लुक में चार चांद लगा सकता है. इस से आप की सेल्फी भी खूबसूरत नजर आएगी. ज्यादा वॉल्यूम पाने के लिए पहले अपनी पलकों को कर्ल करें, फिर मस्कारा के दो कोट अप्लाई करें. ज्यादा वॉल्यूम के लिए आप दो कोट से भी ज्यादा कोट ट्राई कर सकती
हैं.

6- आइब्रो को भी न करें नजरअंदाज

आइब्रो आप के चेहरे की खूबसूरती को और भी ज्यादा निखारने का काम करती हैं. इसलिए सेल्फी लेने से पहले इन्हें बिलकुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आप अपनी आइब्रो को सेट रखें या फिर इन्हें उभरी हुई या मोटी दिखाने के लिए आइब्रो पेंसिल का इस्तेमाल करें. ऐसा करने से आप की सेल्फी
पर बेहद खूबसूरत आएगी.

7- ब्लश रखें नेचुरल

बात जब ब्लश की हो तो इसे जितना नेचुरल रखेंगी आप की सेल्फी उतनी ही खूबसूरत आएगी. आप पीच पॉप ब्लश का इस्तेमाल कर सकती हैं. इसे न सिर्फ अपने गालों पर लगाएं बल्कि इसे चीक बोंस पर भी स्वीप करें. इससे गाल गोल मटोल नजर नहीं आएंगे और आप को चेहरा लिफ्ट करता हुआ नजर आएगा.

8- बोल्ड लिप्स के साथ दें पोज

खूबसूरत स्माइल और बोल्ड लिप्स सभी पसंद करते हैं. आप इस के जरिये एक बेहतर सेल्फी क्लिक कर सकती हैं. बोल्ड होंठों का मतलब सिर्फ लाल रंग की लिपस्टिक ही नहीं है. जरूरी है कि आप जिस शेड का चुनाव करें वह आप की त्वचा और ड्रेस के रंग से मैच करे. बोल्ड रेड अक्सर बहुत गोरे रंग वाले
चेहरे पर ही खिलता है जबकि गोरे या गेंहुए रंग के लिए न्यूड या बोल्ड
पिंक, डस्की त्वचा के लिए पीच, मेटालिक शेड्स विकल्प हो सकते हैं.

9- जरूर करें कॉन्टूरिंग

अगर आप को परफेक्ट सेल्फी लेनी है तो हले इस बात को सुनिश्चित कर लें कि कैमरे पर क्लिक करने के लिए आप के फीचर्स उभर कर आ रहे हैं या नहीं. अगर नहीं तो इसके लिए कॉन्टूरिंग का इस्तेमाल करें. आप कंटोर पाउडर को अपने चीकबोंस, नाक के किनारे और जॉलाइन पर लगाएं. इस से आप के फीचर्स फोटो में काफी उभर कर आएंगे.

10- अच्छी सेल्फी के लिए पेस्टल शेड्स को कहें नो

ज्यादा अच्छी और आकर्षक सेल्फी के लिए पेस्टल शेड्स की जगह रूबी रेड और ग्रीन कलर का इस्तेमाल करें. साथ ही डल लिपस्टिक, लाइम येलो नेल पेंट और
बेज आई शैडो से आप की सेल्फी काफी थकी हुई नजर आ सकती हैं. इसलिए ऐसे रंगों का बिलकुल भी इस्तेमाल न करें.

11- फिल्टर को भी न भूलें

एक अच्छी सेल्फी के लिए जितना जरूरी मेकअप है उतना ही जरूरी एक परफेक्ट फिल्टर भी है. फिल्टर के जरिए आप दाग धब्बे या उम्र के निशान पूरी तरह
दूर कर सकती हैं. यह आप की सेल्फी को एक अच्छा ग्लो और खूबसूरती भी दे
सकता है.

मुझे शारीरिक संबंध बनाने के बाद ब्लीडिंग होती है,मैं जानना चाहती हूं इस का कारण क्या है?

सवाल

मुझे शारीरिक संबंध बनाने के बाद ब्लीडिंग होती है. मैं जानना चाहती हूं इस का कारण क्या है?

जवाब

शारीरिक संबंध बनाने के बाद होने वाली ब्लीडिंग (पोस्टकोइटल ब्लीडिंग) सामान्य है. लेकिन अगर ब्लीडिंग अधिक हो रही है, नियमित रूप से हो रही है और माहवारी के बीच में भी हो रही है तो यह सर्वाइकल कैंसर का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है. यह हमारे देश में स्तन कैंसर के बाद महिलाओं में होने वाला सब से सामान्य कैंसर है. इस के मामले 30 से 65 वर्ष की आयु की महिलाओं में अधिक देखे जाते हैं. आप अपनी जांच कराएं तभी सर्विक्स या बच्चेदानी के मुंह पर विकसित होने वाली किसी ग्रोथ या पौलिप के बारे में पता चलेगा.

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सवाल

मेरी भाभी को स्तन कैंसर है. मेरे इस कैंसर की चपेट में आने का खतरा कितना है?

जवाब

आनुवंशिक कारक स्तन कैंसर होने का खतरा 5 से 10% तक बढ़ा देते हैं. अगर आप की मां, नानी, मौसी या बहन को स्तन कैसर है तो आप के लिए इस कैंसर की चपेट में आने का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में इन में से अगर किसी एक को स्तन कैंसर है तो बाकी सब को जरूरी जांचे कराने में देरी नहीं करनी चाहिए. लेकिन आप की भाभी को स्तन कैसर होने से आप के लिए खतरा नहीं बढ़ता है क्योंकि आप का उन से सीधा कोई रक्त संबंध नहीं है.

जीवनसाथी के प्रति यह कैसी जिम्मेदारी

‘‘बीमार पत्नी को सहानुभूति और सहयोग चाहिए. पत्नी केवल सेवा करने के लिए नहीं होती. वह भी इंसान है. वह भी बीमार पड़ सकती है. पत्नी की बीमारी क्रूरता नहीं है. इस के आधार पर तलाक नहीं दिया जा सकता,’’ भोपाल के फैमिली कोर्ट के जज आर. एन. आनंद ने बीते 10 अक्तूबर को एक मामले में न केवल सटीक फैसला दिया, बल्कि खुदगर्ज यानी मतलबी हो चले उन पतियों को यह नसीहत भी दी है कि वे पत्नी को प्रोडक्ट न समझें. इस रिश्ते की गंभीरता और संवेदनशीलता को प्राथमिकता में रखें.

इस मामले में पति राजेश (बदला नाम) ने अपने आवेदन में यह तर्क दिया था कि उस की पत्नी बीमार रहती है, इसलिए उसे दांपत्य सुख नहीं दे पा रही है. यह क्रूरता है इसलिए उस से तलाक दिलाया जाए.

राजेश की शादी सीमा (बदला नाम) से 2012 में हुई थी. 2014 में दोनों को एक बेटी भी हुई थी, लेकिन इस के बाद सीमा को पैरालिसिस हो गया. राजेश के मुताबिक वह सीमा का इलाज करवाता रहा. इस दौरान बीमारी के चलते वह कई सालों से दांपत्य सुख से वंचित रहा. इसी आधार पर उस ने तलाक चाहा था, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया.

सीमा ने न केवल अपने फिट होने की दलील दी थी, बल्कि उसे साबित करते हुए राजेश पर यह आरोप भी लगाया था कि उस का एक लड़की से अफेयर है और अब वह उस की बीमारी का बहाना बना कर तलाक चाहता है. अदालत ने सीमा की बीमारी और फिटनैस के लिए काउंसलर शैल अवस्थी को नियुक्त किया, जिन्होंने अपनी जांच में पाया कि पत्नी पूरी तरह फिट है.

क्रूरता किसकी

राजेश को लगा यह था कि अदालत उस की दलील से सहमत होते हुए सहानुभूति रखेगी और तलाक दिला देगी, लेकिन हुआ उलटा. इस की अपनी वजह भी है कि क्रूरता वह खुद कर रहा था. इस मामले और अदालत के फैसले ने साफ कर दिया कि पतिपत्नी दोनों एक गाड़ी के 2 पहिए हैं और इन में से अगर कोई एक कमजोर पड़ जाए तो उसे निकाल कर फेंका जाना न्याय नहीं है, बल्कि दूसरे को ज्यादा ताकत लगाते हुए घरगृहस्थी चलानी चाहिए.

ऐसे पतियों की कमी नहीं है जो पत्नी के बीमार होते ही उसे बोझ समझ छुटकारा पाने की कोशिश करने लगते हैं. वे वाकई भूल जाते हैं कि पत्नी को इस वक्त उन की सब से ज्यादा जरूरत होती है और यह वही पत्नी है जो बुरे से बुरे वक्त में भी उस का साथ नहीं छोड़ती. फिर पति यह क्रूरता क्यों दिखाता है कि बीमार पत्नी से वैधानिक रूप से छुटकारा पाने के लिए अदालत जा पहुंचता है.

ये हैं मिसाल

भोपाल के एक सरकारी कालेज के एक प्राध्यापक की पत्नीप्रेम की मिसाल पूरे उच्च शिक्षा विभाग में दी जाती है, जिस से दूसरों को भी प्रेरणा मिलती है. इस मामले में भी पत्नी लकवाग्रस्त है, लेकिन प्राध्यापक पत्नी का खयाल बच्चों की तरह रखते हैं. उस के पूरे काम करते हैं. कालेज के बाद बचा वक्त उस के साथ गुजारते हैं और कभी यह रोना नहीं रोते कि उन्हें दांपत्य या फलां सुख नहीं मिल रहा.

यह जान कर तो और हैरानी होती है कि पत्नी ने उन्हें यह कह रखा है कि वे चाहें तो अन्यत्र शादी कर लें या संबंध स्थापित कर लें उसे कोई एतराज नहीं होगा. लेकिन प्राध्यापक का यह जवाब काबिल ए गौर है कि शादी तुम से की है, तुम मेरी जिम्मेदारी हो और अगर जरा सा लकवा इस पर भारी पड़ता है तो शादी और इस रिश्ते का मतलब क्या रह जाएगा? अगर मैं तुम्हारी जगह होता तो क्या तुम ऐसा करतीं?

एक और मामले में एक इंजीनियर की पत्नी को शादी के 5 साल बाद ही ब्रैस्ट कैंसर हो गया, लेकिन इस इंजीनियर ने अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया और 2 साल में ही पत्नी ठीक हो गई. अब अगर कैंसर की पहचान होने के साथसाथ ही यह इंजीनियर पत्नी कैंसर को क्रूरता बताते हुए अदालत जा पहुंचता तो उसे भी वही फटकार मिलती जो हैदराबाद के एक पति को सुप्रीम कोर्ट से मिली थी.

अदालत ने बताई जिम्मेदारी

हैदराबाद के इस मामले में भी पत्नी को स्तन कैंसर था. पति ने तलाक की अर्जी लगाई, लेकिन दिलचस्प बात यह थी कि पत्नी पति की परेशानी और मंशा को देखते हुए परस्पर सहमति से तलाक देने को राजी भी हो गई. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो 1 सितंबर, 2018 को आए फैसले का देशभर में स्वागत हुआ.

जस्टिस एम. वाय. इकबाल और जस्टिस बी. नारायणन की बैंच ने इस मामले में फैसला देते हुए पति को पत्नी की जिम्मेदारियों का जिस तरह एहसास कराया वह वाकई प्रशंसनीय था.

फैसले में न्यायाधीशों ने कहा था कि कठिन समय व बीमारी की हालत में पत्नी की सेवा करना पति का फर्ज है. यह पति का पूर्वनिर्धारित कर्तव्य है. पतिपत्नी की आपसी सहमति के बावजूद पहले से अलग रह रहे पति को तलाक की इजाजत नहीं दी जा सकती. मामले में चूंकि पत्नी स्तन कैंसर से पीडि़त है, इसलिए हो सकता है कि उस ने महंगे इलाज की जरूरत को देखते हुए तलाक के लिए सहमति दे दी हो.

प्रतिवादी पति का यह कर्तव्य है कि वह याचिकाकर्ता पत्नी के स्वास्थ्य व सुरक्षा का ध्यान रखे. वह पत्नी का इलाज कराए. मामले में पति तलाक की सहमति के साथ यह वादा कर रहा है कि वह मदद करेगा जबकि ऐसा करने के लिए वह पहले से ही कर्तव्यबद्ध है. इसलिए यह तलाक के आधार का वैध विचार नहीं हो सकता.

अदालत ने शादी को पवित्र गठबंधन बताते हुए कहा था कि पत्नी को ऐसी मुश्किलों से निबटने के लिए अकेला नहीं छोड़ा जा सकता. पत्नी एक तरह से अपने पति के घर प्रस्थापित होती है और नया जन्म लेती है. पतिपत्नी न केवल प्यार, बल्कि सुखदुख भी साझा करते हैं.

अदालत ने यह व्यवस्था भी दी थी कि पति बीमार पत्नी को तलाक के मुआवजे के क्वसाढ़े बारह लाख में से क्व5 लाख तत्काल दे और जब पत्नी बीमारी से उबर जाए, तब विचार हो. अदालत ने यह शंका जाहिर की थी कि पत्नी अपनी बीमारी के इलाज के लिए पैसा पाने के लिए तलाक के लिए राजी हो गई ताकि वह अपना जीवन बचा सके.

अदालत का शक या अंदाजा गलत नहीं कहा जा सकता, लेकिन पति को जो नसीहतें उस ने दीं अगर वही समाज और परिवार देता तो अदालत जाने की नौबत ही नहीं आती. लगता ऐसा है कि पति कैंसरग्रस्त पत्नी के इलाज, देखभाल व जिम्मेदारी से बचने के लिए उसे मामूली रकम दे कर उस से छुटकारा पाना चाह रहा था.

समाज भी खुदगर्ज

अकसर दूसरों के मामलों में टांग अड़ाते रहने वाला समाज ऐसे गंभीर मामलों में इसलिए खामोश रहता है कि वह परंपरावादी और पुरुषवादी सोच का है, जहां बीमार पत्नी बोझ समझी जाती है, क्योंकि वह घर के सामान्य कामकाज या झाड़ूपोंछा वगैरह भी नहीं कर सकती और पति को सहज शारीरिक संतुष्टि नहीं दे सकती. इसलिए हरकोई इस बात पर सहमत दिखाई देता है कि कुछ लेदे कर बीमार पत्नी से छुटकारा पाओ और फिर दूसरी शादी कर मौज की जिंदगी जीयो.

इस मानसिकता के पीछे धार्मिक और पौराणिक कारण भी हैं कि स्त्री भोग्या और पैर की जूती है जब वह चुभने लगे तो उसे बदल दो. यह सोच नए परिष्कृत लेकिन बीमार और अमानवीय रूप से इस तरह के मामलों के जरीए सामने आती रहती है.

ये मामले और यह मानसिकता बताती है कि औरत की हालत दयनीय है. वह हर लिहाज से पति पर निर्भर है और उस की खुशी के लिए तलाक तक देने को तैयार हो जाती है. ऐसे में कोसा उन पतियों को जाना चाहिए, जिन के लिए पत्नी डिस्पोजल गिलास की तरह यूज ऐंड थ्रो चीज है.

करना पड़ता है: धर्म ने किया दानिश और याशिका को दूर- भाग 3

नौशीन ट्रे ले कर आईं तो दानिश ने उन के हाथ से आदतन ट्रे ले ली और ललित को स्नैक्स की प्लेट खुद अपने हाथों से लगा कर हंसते हुए बोला, ‘‘अंकल, मम्मी के हाथ के पनीर के पकौड़े खा कर देखिए… और यह खीर. मम्मी ने आज आप के लिए ही बनाई है और ये कुकीज मैं ने बेक किए हैं.’’

‘‘सच? अरे, पनीर के पकौड़े और खीर मु?ो बहुत पसंद है और दानिश तुम ने ककीज बनाए हैं? तुम कुकिंग जानते हो?’’

‘‘हां अंकल, मम्मी कहती हैं कि ये सब काम सब को आने चाहिए, जब भी फ्री होता हूं, मम्मी को कुछ बना कर खिलाता हूं्.’’

ललित को लग रहा था कि इस मांबेटे की इतनी सुंदर दुनिया में वे कैसे आ बैठे हैं. उन्होंने बड़े स्वाद ले कर नाश्ता किया, बहुत तारीफ की. वे कहां जानते थे कि यशिका ने बताया था कि पापा को खुश करना हो तो पनीर के पकौड़े और खीर खिला दो, बस. पापा

को लाइफ में यही 2 चीजें सब से प्यारी हैं. वे सब इस बात पर बहुत हंसे थे और कुकीज तो वह खुद सुबह बना कर गई थी जिन्हें खा कर ललित के मुंह से निकल ही गया, ‘‘मेरी बेटी भी ऐसे ही कुकीज बनाती है.’’

थोड़ी देर बाद वे जाने के लिए खड़े हुए तो दानिश ने कहा, ‘‘अंकल, मैं आप को छोड़ आऊं?’’

‘‘नहीं बेटा, नीचे ड्राइवर है, शिंदे भी है.’’

‘‘आइए, हमारा छोटा सा घर तो देख लीजिए,’’ कहतेकहते नौशीन उन्हें अपना 2 कमरे का फ्लैट दिखाने लगीं तो ललित को याद आया, ‘‘अरे, आप का घर तो बहुत सुंदर है, फिर भी नया खरीदना चाहती हैं?’’

‘‘हां, एक फ्लैट ले कर इन्वैस्ट करना चाह रही थी.’’

‘‘आराम से आप का काम हो जाएगा, चिंता मत करना, मैं देख लूंगा, रेट भी सही लगवा दूंगा,’’ ललित का बस नहीं चल रहा था कि नौशीन के लिए क्या न कर दें. पूरा फ्लैट इतना सुंदर, व्यवस्थित था कि वे 1-1 चीज निहारते रह गए. उन के मन में चोर आ गया था जो नौशीन से टच में रहने के लिए उन्होंने यों ही कह दिया, ‘‘मैं इधर अकसर आता हूं, कभी फ्री रहूंगा, आ जाऊंगा मिलने, आप दोनों से मिल कर बहुत अच्छा लगा.’’

दानिश और नौशीन ने उन्हें फिर आने के लिए कह कर विदा दी और ललित चले गए नौशीन को दिल में समाए. वे चरित्रहीन इंसान नहीं थे पर थे तो पुरुष ही न. नौशीन का साथ उन्हें बहुत भला लगा था. दानिश भी उन्हें बहुत पसंद आया था. सोच रहे थे ऐसा लड़का यशिका के लिए मिल जाए तो कितना अच्छा हो. पर दानिश दूसरी जाति का था, यहां तो कुछ नहीं हो सकता था पर वे इस बात पर हैरान थे कि जब तक वे नौशीन के घर रहे, एक बार भी उन्हें जाति के अंतर का खयाल नहीं आया.

 

कुछ दिन और बीते. एक बार नौशीन ने आम हालचाल

के लिए उन्हें फोन किया. उन्होंने भी नौशीन से कई बार फोन पर हालचाल ले लिए थे. नौशीन दानिश और यशिका के साथ इस प्रोजैक्ट पर बात करते हुए खूब हंसतीं. तीनों को इस बात में मजा आ रहा था.

एक दिन यशिका ने अपने मम्मीपापा के साथ डिनर करते हुए जानबू?ा कर बात छेड़ी, ‘‘पापा, आप सचमुच आजकल के जमाने में भी जातबिरादरी के बाहर मेरी शादी नहीं करेंगे? अगर मु?ो किसी और जाति का अच्छा लड़का पसंद आ जाए तो क्या होगा?’’

धर्म और जाति के दलदल में फंसा मन भला इतनी आसानी से कैसे यह बात चुपचाप सुन लेता. थोड़ा गुस्से से ललित की आवाज जरा तेज हुई, ‘‘हम ने तुम्हें हमेशा सारी छूट दी है, किसी चीज के लिए कभी टोका नहीं. बस शादी तुम्हारी हम ही करेंगे. हम अपनी बिरादरी में लड़का ढूंढ़ रहे हैं.’’

यशिका ने मां को देखा. उन्होंने हमेशा की तरह उसे चुप रहने के लिए कहा तो यशिका गुस्से में पैर पटकती हुई जाने लगी. रुकी, फिर मां से कहा, ‘‘आप तो हमेशा खुद भी चुप रहना और मु?ो भी यही सिखाना. आप को और आता भी क्या है.’’

उस की मां गीता देहात में पलीबढ़ी, कम पढ़ीलिखी, दबू, धार्मिक कार्यों में जीवन बिताने वाली महिला थीं जिस के लिए पति का आदेश सर्वोपरि होता है. ललित को अचानक नौशीन याद आ गईं. सोचने लगे कि वह गीता से कितनी अलग है. उन्होंने अपने रूम में जा कर नौशीन को फोन मिला दिया. यों ही उन से बातें करना उन्हें अच्छा लगा, फिर उन्हें ऐसे ही डिनर पर इन्वाइट किया. थोड़ी नानुकुर के बाद नौशीन मान गईं.

ऐसा फिर 3-4 बार और भी हुआ. वे नौशीन के घर भी आए. बाहर भी मिले. सबकुछ मर्यादा

में था, कोई आपत्तिजनक बात भी नहीं हुई पर ललित ने अपने घर में किसी से नौशीन से मिलनाजुलना बताया भी नहीं जबकि दानिश

और यशिका को 1-1 प्रोग्राम पता रहता था.

कुछ महीने बीते कि यशिका ने घर में बम फोड़ दिया, ‘‘मैं एक मुसलिम लड़के से शादी करना चाहती हूं, पापा.’’

दहाड़ गूंजी, ‘‘दिमाग खराब हो गया है? सोचा भी कैसे? यह हो ही नहीं सकता.’’

‘‘पापा, यह तो होगा. उसी से शादी करूंगी.’’

गीता देवी उस पर खूब चिल्लाईं, बहुत डांटा पर यशिका अपनी जिद पर डटी रही. 3 दिन

घर में खूब घमासान हुआ. एक तूफान उठा रहा जिस में हिंदूमुसलिम ये 2 ही शब्द गूंजते रहे. यशिका ने जा कर दानिश और नौशीन को अपने घर के हालात बताए.

नौशीन ने ठंडे दिमाग से सब सुना, फिर कहा, ‘‘चलो, अब प्रोजैक्ट को खत्म करने का टाइम आ गया है. इस संडे को सब क्लीयर कर देते हैं.’’

फिर बैठ कर संडे की प्लानिंग की गई. नौशीन ने ललित को फोन किया, ‘‘बहुत दिन हो गए. चलिए, संडे को डिनर साथ करते हैं. फ्री हैं?’’

‘‘हांहां, बिलकुल फ्री हूं. मिलते हैं.’’

‘‘ठाणे चलते हैं, अर्बन तड़का. कभी गए हैं वहां?’’

‘‘न.’’

‘‘आप अपनी कार रहने देना. मैं अपनी कार से आप को लेने आप के औफिस के बाहर आ जाऊंगी. अच्छी आउटिंग हो जाएगी.’’

सब तय हो चुका था. कार में नौशीन के बराबर में बैठ कर ललित अलग ही दुनिया में

जा पहुंचे थे जहां जाति की कोई दीवार नहीं थी,

न कोई धर्म का जाल. पता नहीं नौशीन से मिल कर वे सबकुछ कैसे भूल जाते हैं, यही सोचते

हुए मुसकराते हुए उन्होंने नौशीन से कहा, ‘‘आप की कंपनी मु?ो अच्छी लगती है, मैं सब भूल

जाता हूं.’’

नौशीन मुसकरा दी, कहा, ‘‘मु?ो भी एक दोस्त के रूप में आप का मिलना अच्छा लगा.’’

‘अर्बन तड़का’ पहुंच कर नौशीन ने कहा, ‘‘मैं और दानिश यहां अकसर आते हैं.’’

‘‘फिर आप ही और्डर दीजिए, आप को आइडिया होगा कि यहां क्या अच्छा है.’’

नौशीन ने वेटर को पहले 2 मौकटेल लाने के लिए कहा. इतने में ही तय प्रोग्राम के अनुसार वहां यशिका और दानिश ने ऐंट्री ली. यशिका उन्हें देख चहकी, ‘‘अरे पापा. आप. हेलो आंटी, अरे, वाह, आंटी. पापा. आप लोग यहां? कैसे?’’

ललित का चेहरा देखने वाला था. वे कुछ बोल ही नहीं पाए. तभी दानिश ने उन के पैर छूए तो यशिका चौंकी, ‘‘अरे दानिश तुम मेरे पापा को जानते हो?’’

‘‘और क्या. अंकल तो हमारे घर आ चुके हैं.’’

‘‘पापा, यह क्या है? मेरे लिए इतने नियम और आप आंटी और दानिश के घर भी जा चुके हैं? पापा, वैरी बैड.’’

नौशीन ने भोलेपन से पूछा, ‘‘क्या हुआ यशिका, मैं सम?ा नहीं?’’

ललित ने यशिका के कुछ बोलने से पहले ही जवाब दिया जिस से नौशीन को यशिका की कोई बात सुन कर बुरा न लग जाए, ‘‘ऐसे ही इस का और मेरा कुछ न कुछ ?ागड़ा चलता रहता है.’’

‘‘पापा, यही है दानिश. आप का होने वाला दामाद,’’ कह कर यशिका हंस कर ललित से लिपट गई.

ललित अब न कुछ कह पाए, न कर पाए, बस ?ोंपी सी हंसी हंसते हुए कहा, ‘‘अरे वाह, यह तो बहुत खुशी की बात है. दानिश तो मु?ो भी पसंद है.’’

‘‘पर पापा…’’

ललित ने बेटी को आंखों से चुप रहने का इशारा किया तो नौशीन और दानिश ने अपनी हंसी मुश्किल से रोकी.

नौशीन ने बहुत प्यार से पूछा, ‘‘ललितजी, फिर यह रिश्ता आप को मंजूर है? मु?ो तो बहुत ही खुशी होगी कि आप की बेटी हमारे घर आए.’’

‘‘हांहां, बिलकुल मंजूर है.’’

‘‘चलो, फिर आज सैलिब्रेट करते हैं, अब तुम अपने मम्मी और पापा के साथ हमारे घर जल्द ही आओ, बहुत कुछ करना है,’’ नौशीन की आवाज में आज अलग ही उत्साह था.

ललित की हालत सब से अजीब थी, उन्होंने इस स्थिति की कभी कल्पना भी नहीं की थी. सब ने खायापीया. गीता को यशिका ने वीडियो कौल कर के दानिश से ‘हेलो’ कहलवाया और कहा, ‘‘बाकी विस्फोट आ कर करती हूं.’’

सब हंसने लगे. लौटते समय सब कार में साथ ही बैठे, अब दानिश कार चला रहा था.

उस की बगल वाली सीट पर नौशीन बैठी थी, पीछे बैठेबैठे ललित अभी भी चोर नजरों से नौशीन को देख रहे थे. यशिका दानिश को निहार रही थी. नौशीन राहत की सांस ले रही थीं.

तभी मोबाइल पर पीछे बैठी यशिका ने मैसेज भेजा, ‘‘थैंक यू, आंटी. आप ने हमारे लिए बहुत कुछ किया.’’

‘‘करना पड़ता है,’’ उस ने रिप्लाई किया. नौशीन यही सोच रही थीं. हां, करना पड़ता है, अपने बच्चों की खुशियां धर्म, जाति की भेंट न चढ़ जाएं, इस के लिए सचमुच कभीकभी बहुत कुछ करना पड़ता है.

नौशीन जैसी महिला जीवन में दोस्त, रिश्तेदार बन कर रह पाएगी, इस की खुशी महसूस कर ललित उत्साहित थे, सोच रहे थे, नौशीन जैसी दोस्त के लिए, दानिश जैसे दामाद के लिए, अपनी बेटी के चमकते चेहरे की इस खुशी के लिए धर्म, जाति को किनारे करना ही पड़ता है, करना पड़ता है. करना ही चाहिए.

दलजीत कौर ने शेयर की हनीमून की पहली सेल्फी, निखिल पटेल ट्रॉली में बिठा ले गए अपनी दुल्हनिया

टीवी एक्ट्रेस दलजीत कौर ने यूएस बेस्ड बिजनेसमैन निखिल पटेल से ब्याह रचा लिया है. इसके बाद एक्ट्रेस अब अपना हनीमून एंजॉय कर रही हैं. ऐसे में कुलवधु एक्ट्रेस की हनीमून से पहली सेल्फी सामने आई है, जिसे देख कर फैंस बेहद खुश हैं. दलजीत कौन इस सेल्फी में अपनी पति निखिल के साथ रोमांटिक अंदाज में दिखाई दे रही हैं. ये फोटो उन्होंने अपनी इंस्टा स्टोरी से शेयर की है, साथ ही इसमें लिखा है- कई सेल्फी में से ये एक पहली सेल्फी हमारे हनीमून से.

 

दलजीत कौर और निखिल पटेल ने शेयर किया क्यूट वीडियो

इस दौरान दलजीत ने एक वीडियो भी शेयर किया है. जिसमें निखिल दलजीत को अपने साथ ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं. खास बात ये है कि दलजीत निखिल के साथ होटल की लगेज ट्रॉली में बैठ कर जाती नजर आ रही हैं. साथ ही वह हाथ से वेव करते हुए बाय बाय भी कहती नजर आ रही हैं. इस वीडियो को कैप्शन देते हुए उन्होंने लिखा- ‘दुनिया भर के कई एडवेंचरस जगहों में से एक, पहली बार हम मिस्टर एंड मिसेज पटेल बन कर चल पड़े, चलिए इसे हनीमून कहते हैं.

 

दलजीत कौर ने शेयर की हनीमून ट्रिप की पहली तस्वीरें

टीवी सीरियल अदाकारा दलजीत कौर और उनके बिजनेसमैन बॉयफ्रेंड निखिल पटेल ने आखिरकार शादी रचा ली है. ये ग्रैंड इंडियन वेडिंग बेहद धूमधाम से हुई थी. जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुईं। अब अदाकारा दलजीत कौर ने अपने हनीमून ट्रिप की पहली तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करनी शुरू कर दी हैं। जिसमें अदाकारा अपने पति निखिल पटेल के साथ जमकर पोज करती दिखीं। दलजीत कौर और निखिल पटेल की ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर आते ही छाने लगीं। यहां देखें सामने आईं दलजीत कौर और निखिल पटेल के हनीमून ट्रिप की पहली तस्वीरें

 

अनुज के इस बड़े फैसले से अनुपमा के पैरों तले खिसकी जमीन

टीवी शो ‘अनुपमा’ में माया अपने चाल में कामयाब हो गई और वह छोटी अनु को हमेशा के लिए अनुज और अनुपमा से दूर ले गई. माया ने एक तीर से दो निशाने लगाए. एक तरफ उसे अपनी बेटी मिल गई और दूसरी ओर अनुपमा-अनुज के रिश्ते पर ग्रहण भी लगा दिया. छोटी अनु के जाने से अनुज बावला हो गया है और वह अनुपमा से नफरत करने लगा है. वह कहता है कि अनुपमा के साथ उसे घुटन होती है. ये सुन अनुपमा टूट जाती है.

अनुपमा-अनुज के रिश्ते को सुधारने आए उनके दोस्त

आज के एपिसोड में दिखाया जाएगा कि अनुज और अनुपमा के दोस्त देविका और धीरज दोनों को समझाते हैं कि जो बीत गया उसे भूल जाओ. अनुपमा अपनी दोस्त को रोते हुए अपना दिल का बताती है, वहीं अनुज भी अपने मन की भड़ास निकालता है. देविका और धीरज अनुपमा और अनुज को अपनी इंस्पिरेशन बताते हैं, लेकिन अपने इंस्पिरेशन को ऐसा टूटता देख उन्हें भी डाउट होने लगा है. हालांकि, वे उन्हें समझाने की पूरी कोशिश करते हैं. देविका अनुपमा से कहती है कि अनुज को अपने अंदर के नफरत को निकालना पड़ेगा, वरना नफरत और रिश्ते में से कोई एक छूट जाएगा.

 

शाह हाउस में होगा होली सेलिब्रेशन

दूसरी ओर शाह हाउस में होली की तैयारियां होती हैं. शाह हाउस में होली सेलिब्रेट की जाएगी. पाखी और परी की पहली होली है, साथ ही तोषू भी ठीक हो रहा है. इस बात से पूरा परिवार बहुत खुश है. वह अनुपमा को होली के मौके पर ये बात बताने की प्लानिंग कर रहे हैं. बापू जी अनुपमा को फोन कर पूरे कपाड़िया परिवार को होली के लिए बुलाते हैं. सभी राजी हो जाते हैं, लेकिन अनुज साफ-साफ मना कर देता है कि वह नहीं जाएगा और कोई उसे फोर्स नहीं करेगा.

 

अनुज ने मारा अनुपमा को ताना

अनुपमा कमरे में जाती है और बताती है कि माया ने फोन किया था कि वह कभी-कभी छोटी अनु से बात कर सकती है. वह हर रोज उससे बात नहीं कर सकती, वरना उसे उनकी याद आएगी. अनुज चुपचाप उसकी बातें सुनता रहता है. इतने में अनुपमा अनुज से एक नई शुरुआत करने की बात कहती है. वह होली और देविका-धीरज की शादी की तैयारियों में शामिल होने के लिए अनुज को मनाने की कोशिश करती है, लेकिन अनुज उसे ताना मारता है कि वह इतनी जल्दी कैसे आगे बढ़ सकती है. वह साफ मना कर देता है कि वह देविका-धीरज की शादी में शामिल नहीं होगा.

 

अनुज ने लिया ये फैसला

यही नहीं, अनुज एक और फैसला लेता है कि अब वह अब उस कमरे में नहीं रह सकता है. अनुपमा पूछती है कि क्या वह उसकी वजह से ऐसा कदम उठा रहा है. अनुज बिना कुछ कहे वहां से चला जाता है. अनुपमा का रो-रोकर बुरा  हाल हो जाता है.

आने वाले एपिसोड में दिखाया जाएगा कि अनुपमा अकेले शाह हाउस में होली सेलिब्रेट करने जाती है. धीरज अनुज को समझाता है कि उसके बिना अनुपमा की होली बेरंग है. अब देखना होगा कि अनुज होली में शामिल होता है या नहीं.

स्नैक्स में परोसें कमल ककड़ी कबाब

अगर आप स्नैक्स की रेसिपी सोच रही हैं तो कमल ककड़ी के कबाब की ये आसान रेसिपी ट्राय करना ना भूलें. ये हेल्दी और टेस्टी रेसिपी है, जिसे आप अपने बच्चों से लेकर मेहमानों को आसानी से खिला सकते हैं.

1-कमल ककड़ी के कबाब

सामग्री

-2 कमल ककड़ी कद्दूकस

– 1/2 कप चना दाल उबली

– 3 बड़े चम्मच घी

-1 छोटा चम्मच गरममसाला

– 1 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर

– 1 हरीमिर्च कटी

– 1 छोटा चम्मच अदरकलहसुन का पेस्ट

– तलने के लिए तेल

– आवश्यकतानुसार तिल

– नमक स्वादानुसार.

विधि

कड़ाही में घी गरम कर कमल ककड़ी को सुनहरा होने तक तल लें. अब उस में उबली हुई चना दालगरममसालालालमिर्च पाउडरहरीमिर्चअदरकलहसुन का पेस्ट और नमक डालें. इसे तब तक पकाएं जब तक यह सूख न जाए और पैन के किनारे तेल न छोड़ने लगें. अब पैन को आंच से उतार कर मिश्रण को हलका ठंडा होने पर मिक्सर में पीस लें. चपटेगोल कबाब का आकार दें. दोनों तरफ से थोड़े से भुने हुए तिल लगा कर शैलो फ्राई करें और पुदीने की चटनी के साथ गरमगरम परोसें.

2- दाल पालक

सामग्री

– 3/4 कप चना दाल

– 2 कप पानी

-1 बड़ा प्याज कद्दूकस किया

– 2 मध्यम टमाटर कद्दूकस किया

– 2 कप पालक बारीक कटी

-1 बड़ा चम्मच अदरकलहसुन का पेस्ट

-1/2 छोटा चम्मच हलदी पाउडर

– 1/2 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर

– 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर

– 1/2 छोटा चम्मच गरममसाला

– 2 बड़े चम्मच तेल

– नमक स्वादानुसार.

विधि

एक पैन में तेल गरम कर प्याज को सुनहरा होने तक फ्राई करें. अब टमाटर डाल कर तेल छोड़ने तक पकाएं. अदरकलहसुन का पेस्ट भी मिक्स करें. हलदी पाउडरलालमिर्च पाउडरधनिया पाउडरगरममसाला और नमक डाल कर 2 मिनट तक पकने दें. उस के बाद पैन में पालक और चना दाल डाल कर आवश्यकतानुसार पानी डालें और दाल को अच्छे से पकने दें. आप चाहें तो प्रैशर कुकर में भी 2 से 3 सीटी आने तक कुक कर सकते हैं. उस के बाद अपनी जरूरतानुसार पानी डालें या सूखा रखने के लिए कुछ मिनट तक खुला पकाएं. गरमगरम सर्व करें.

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