समलैंगिक विवाह

समलैंगिक विवाह अब एक अच्छी खासी बहस पैदा कर रहे हैं. स्त्रीस्त्री व पुरुषपुरुष का विवाह वैसे तो विवाह करने वालों का आपसी मामला है पर सदियों से समाज, धर्म और उन के कहने पर राजाओं के कानून लोगों के व्यक्तिगत जीवन को कंट्रोल करते रहे हैं. स्त्री समलैंगिक विवाह 2 जनों की अपनी इच्छा साथ रहने की है और इस से न तो नैतिकता का पड़ता है न सामाजिक कानून व्यवस्था को.
बंद कमरों में कौनकौन क्या कर रहा है, यह किसी की ङ्क्षचता नहीं होनी चाहिए. पर हर समाज, देश और खासतौर पर धर्म इस बात से घुले जाता है कि बंद मकान में क्या हो रहा है. उस की कुछ वजह तो यह कही जाती है कि आसपास के लोगों को अपने बच्चों की ङ्क्षचता होती है कि कहीं वे भी ऐसा न करने लगें पर
ज्यादातर यह तकलीफ उन को होती हैं जिन की रोजीरोटी समाज को एक सीधे
बचे बचाए रास्ते पर चलाने से मिलती है.

एक साधारण विवाह जिस में बच्चे हों धर्म के दुकानदारों के लिए भारी इंकम का सांसे है. पहले तो जीवन साथी की खोज करने के लिए पैसा मिलता है. भारत में तो बहुत मोटा पैसा पंडित कमा लेते है सिर्फ लडक़ेलडक़ी को ढूंढऩे में. ङ्क्षहदुओं में गुंडली बनवाने में ही खूब पैसा मिलता है. फिर उन के दोष निकालने पर पैसा मिलता है.

विवाह के समय लंबीचौड़ी लिस्टें छोटेमोटे अनुष्ठानों की बनती हैं जिन में घर की औरतों के व्यस्त तो रखा ही जाता है, पंडितों को हर बार कुछ न कुछ मिलता है. विवाह बाद बच्चे को पैदा होने के लिए तरहतरह से पूजापाठ किए जाते हैं, पंडितों की हर जगह कमाई होती है. बच्चा गर्भ में आ जाए तो फिर एक लंबी फेहरिस्त तैयार हो जाती है पूजापाठों की जिन में पंडित पुरोहितों का योगदान होता है. आज
के जमाने में इस कमाई में डाक्टर भी आ गए हैं. प्रीनेटेल केयर के नाम पर पैसा मिलने लगा है, वे भी इसी बात में रूचि रखते हैं कि विवाह ऐसे हो जिन में बच्चों हों ताकि यह धंधा बढ़ें. विवाह होता है तो वे विवाद भी होते हैं. इन विवादों में धर्म के दुकानदारों और वकीलों व दोनों की बनती है. स्त्रीपुरुष विवाहों में विवाद ज्यादा होते हैं क्योंकि इसमें एक पार्टनर हावी होता है, दूसरा दबा हुआ. सेमसैक्स मैरिज में भी एकदूसरे
पर हावी हो सकते है पर दोनों लगभग बराबर के से होंगे तो फैसले आसान होंगे और यह बहुतों को मंजूर नहीं है.

सेमसैक्स मैरिज से बच्चे नहीं होंगे तो जनसंख्या नियंत्रण में रहेगी यह पक्का पर फिर भी जो लोग जनसंख्या नियंत्रण कानून लाना चाहते हैं वे ही इस का विरोधकर रहे हैं. असल में वे बच्चे कला नहीं चाहते 2 से ज्यादा बच्चों के मातापिताओं को गुलामी की लाइन के परे धकेल देना चाहते हैं. उन्हें अपराधी बना
देना चाहते हैं ताकि उन से कैदियों की तरह का काम लिया जा सके. सेमसैक्स मैरिज कितनी होंगी इस का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता पर जहां इन्हें कानूनी मान्यता मिली है वहां भी बहुत नहीं हुई हैं और वहां भी जोड़े फिर बच्चे गोद न लेने में लग जाते हैं, बच्चे पैदा करने की प्राकृतिक आवश्यकता प्रेम पर देरसबेर हावी हो जाती है पर यह फैसला हर जनें का अपना है और किसी को हक नहीं कि इस में दखल दें.
भारत सरकार सुप्रीम कोर्ट में इस का विरोध कर रही है क्योंकि यह तो आजकल पूजापाठियों की है जो पौराणिक तौरतरीका लाना चाहते हैं जिस में पुत्र जन्म सब से महत्वपूर्ण है क्योंकि वही ङ्क्षपडदान करेगा तो मृतक की आत्मा को मुक्ति मिलेगी.

भारत सरकार कह रही है कि इस से सामाजिक परेशानियां पैदा होंगी, सैंकड़ों कानूनों को बदलना होगा. ये तर्क निरर्थक है. अगर पुराने कानून किसी तरह व्यक्ति की आजादी को छीनते हैं तो उन्हें बदलने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए.

तो हमेशा रहेंगे फिट ऐंड फाइन

यवा दिखने के लिए सब से आवश्यक है आप की लाइफस्टाइल और खानपान, सोने और जागने के समय में बदलाव एवं कुछ व्यायाम जैसे टहलना, दौड़ लगाना, आदि.

यदि हम अपनी दिनचर्या में बदलाव कर ये सब आदत डाल लें तो यकीन मानिए, आप हमेशा स्वस्थ और ऊर्जा से भरे रहेंगे और खुद को यंग महसूस करेंगे.

आइए, जानते हैं इन आदतों को अपना कर कैसे आप खुद को लंबे समय तक स्वस्थ एवं यंग रख सकते हैं:

रूटीन लाइफ जरूरी: बदलती लाइफस्टाइल और तकनीकी के युग में नींद पूरी न होना एक समस्या बनता जा रहा है. आजकल हम सभी को दिनभर की भागदौड़ के बाद रात का समय ही फ्री मिलता है और बस हम अपना मोबाइल ले कर बैठ जाते हैं या अपना खानापीना, सभी काम टीवी को देखते हुए करते हैं और कई बार अनावश्यक और जंक फूड आदि ज्यादा ही खा लेते हैं. ऐसे में समय कब निकल जाता है हमें पता ही नहीं चलता और हमे सोने में देर हो जाती है और फिर सुबह जल्दी उठने में परेशानी का सामना करना पड़ता है, जिस कारण हम खुद को ऊर्जा से भरा हुआ महसूस नहीं करते. इस का प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर भी पड़ता है इसलिए खुद को हमेशा चुस्त और दुरुस्त रखने के लिए समय से सोने और जागने की आदत डाल लें.

यदि आप इस दिनचर्या को अपनाएंगे तो शरीर पर अनुकूल फायदे दिखते हैं:

-अच्छी नींद के कारण इम्यूनिटी बूस्ट होती है, जिस से हमारा शरीर बीमारियों से लड़ने में सक्षम हो पाता है और हम जल्दी बीमार नहीं पड़ते.

– अध्ययन में यह भी पाया गया है कि अच्छी नींद शरीर को रिपेयर, रिजेनरैट और रिकवर करने में बहुत मदद करती है.

– 7-8 घंटे की नींद हमारे दिमाग को तरोताजा रखती है, जिस से हमारी स्मरण और सोचनेसम झने की शक्ति बढ़ती है. हम कामों को सही ढंग से कर पाते हैं.

– इस से हमारी कार्य करने की क्षमता भी बढ़ती है यानी हम कामों को तेजी से कर सकते हैं.

– मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है.

– कम से कम 7-8 घंटे की अच्छी नींद हमें कई गंभीर बीमारियों जैसे मोटापा, मधुमेह, हृदयरोग, उक्त रक्तचाप से दूर रखती है.

नियमित शारीरिक व्यायाम: नियमित व्यायाम हमारी बढ़ती उम्र की गति को धीमा कर के आप को अधिक समय तक जवान बनाए रखने में मदद करता है. अच्छे स्वास्थ्य और यंग बने रहने के लिए हमें रोज सुबह आधा या 1 घंटा शारीरिक व्यायाम की आवश्यकता होती है, इस के लिए आप अपने लिए वह ऐक्सरसाइज या व्यायाम चुनें जिसे करने में आप को मजा आए.

आप अपने नियमित व्यायाम जैसे तेज चलना, दौड़ लगाना आदि कर सकते हैं. यदि आप को यह करना बोरिंग लगता है तो आप जुंबा या ऐरोबिक्स या डांस को भी शामिल कर सकते हैं. आप जिम या फिर किसी अन्य फिटनैस क्लास का हिस्सा भी बन सकते हैं.

नियमित रूप से व्यायाम करने के फायदे

– नियमित रूप से व्यायाम करने से मेटाबौलिज्म बढ़ता है एवं हमारी कैलोरी तेजी से बर्न होती है, जिस से वजन नियंत्रण में रहता है.

– नियमित व्यायाम हमारी मांसपेशियों को स्वस्थ रखता है और शरीर में खून के बहाव को भी बेहतर बनाता है, जिस से आप स्वस्थ तो रहते ही हैं साथ ही दिमाग को ब्लड की सही सप्लाई मिलने से यह भी सक्रिय रूप से कार्य करता है एवं नई ब्रैन सेल्स बनने में भी मदद मिलती है.

– नियमित व्यायाम तनाव को कम करता है एवं ब्लडप्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करता है.

– नियमित व्यायाम करने से शरीर में हानिकारक कोलेस्ट्रौल की मात्रा घट जाती है और अच्छे कोलेस्ट्रौल की मात्रा बढ़ती है. इस से दिल दुरुस्त रहता है और हम अधिक मात्रा में औक्सीजन ले पाते हैं. इस वजह से व्यक्ति को हार्ट अटैक और दिल से संबंधित अन्य बीमारियां होने का खतरा काफी कम हो जाता है.

संतुलित भोजन ही क्यों

यह जानना आवश्यक है कि न केवल जीवित रहने के लिए बल्कि स्वस्थ और सक्रिय जीवन बिताने के लिए संतुलित आहार का सेवन करना जरूरी होता है क्योंकि संतुलित भोजन में शामिल पौष्टिक तत्व हमारे शरीर में पोषण स्तर को बनाए रखता है ताकि आप स्वस्थ रहें.

संतुलित आहार में रखें ध्यान

– सुबह का नाश्ता कभी भी न छोड़ें.

– सोने से लगभग 1 घंटा पहले भोजन करने की आदत डालें.

– रात में कम एवं हलका भोजन करें.

संतुलित आहार के फायदे

– रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है.

– पाचनतंत्र को मजबूत बनाता एवं स्वस्थ रखता है.

– हमारी मांसपेशियों, दांतों, हड्डियों आदि को मजबूत बनाता है.

– व्यक्ति की कार्य क्षमता को बनाए रखने एवं उस के मूड को भी बेहतर बनाए रखता है.

– मस्तिष्क को स्वस्थ बनाता है.

– वजन बढ़ने से रोकता है.

खाएं सीजनल और लोकल फूड पर क्यों

लोकल और सीजनल फल एवं सब्जिया वहां की तापमान, जल और वायु के अनुसार एवं इस में कम से कम कीटनाशक एवं रासायनिक पदार्थों के उपयोग से उगाई जाती है और उसी के अनुसार हमारा शरीर ढल जाता है. इसलिए ये हमारे शरीर के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है. इस के साथसाथ यह सस्ती होती है. इसलिए कोशिश करें कि हमेशा सीजन की फल एवं सब्जियां ही अपने आहार में शामिल करें.

इस के साथ ही इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए अपने आहार में हलदी, लहसुन, नीबू, गिलोय, तुलसी, आंवला, विटामिन सी युक्त चीजें आदि को जरूर शामिल करें.

अपने लक्ष्य पर रहें अडिग

अकसर अधिकतर लोग शरीर को सुडौल व वजन कम करने के लिए शुरू में तो बहुत जोश से भरे हुए होते हैं. मगर कुछ दिनों बाद उन्हें यह करने में दिक्कत होने लगती है और धीरेधीरे उन का जोश थोड़ा ठंडा पड़ने लगता है और वे अपने लक्ष्य से भटकने लगते हैं.

इस से बचने के लिए इसलिए आवश्यक है थोड़ा धैर्य रखें. यदि जब हम किसी काम में बारबार असफल होते हैं और ज्यादा समय लग रहा होता है तो हम उस काम को बीच में ही छोड़ देते हैं जिस के लिए हमे धैर्य की आवश्यकता होती है.

– हमारा धैर्य हमारी एकाग्रता को बढ़ाता है. हमें लक्ष्य से भटकने नहीं देता.

– हमारे ऊपर निराशा को हावी नहीं होने देता.

-हमारे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है.

– हमारा धैर्य ही हमें काम को सही ढंग से और सही समय में करने के लिए प्रेरित करता है.

– धैर्य हम को सिखाता है सफल होने का पाठ क्योंकि इस से हर काम में सफलता मिलना मुमकीन है यंग बनना और बने रहना एक दिन का काम नहीं इस के लिए हमे निरंतर प्रयास करना पड़ता है और अपनेआप को कुछ नियमो में बांधना पड़ता है. इसलिए यदि आप को यंग बने रहना है तो अपनी दिनचर्या में बदलाव लाएं और उन्हें नियमित रूप से पालन करें. इस के परिणाम आप को कुछ महीनो में अवशय ही मिलेंगे क्योंकि बिना धैर्य के सफलता मिलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है.

डिटौक्सीफिकेशन

हमारी त्वचा बहुत ही नाजुक और संवेनशील होती है एवं पर्यावरण का इस पर सीधा प्रभाव पड़ता है. इसलिए इस को स्वस्थ, साफ और चमकदार और जवां बनाए रखने के लिए अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता होती है. इस के लिए हम न जाने क्याक्या उपचार, लोशन, क्रीम आदि का उपयोग करते हैं, लेकिन अपने खानेपीने की आदतों में बदलाव नहीं लाते जिस के कारण त्वचा को स्वस्थ और जवां रखने में कई बार पीछे रह जाते हैं और असमय ही हमारे त्वचा पर  झुर्रियां आ जाती हैं.

इन परेशानियों से बचने के लिए त्वचा को डिटौक्सीफाई करना जरूरी है. स्वस्थ रहने और दिखने के लिए शरीर को सिर्फ बाहर से ही नहीं अंदर की गंदगी को दूर करना भी जरूरी है.

शरीर को विषैले पदार्थों से मुक्त कराना, पोषण देना और आराम पहुंचाना डिटौक्सीफिकेशन कहलाता है.

यदि आप हमेशा सुस्ती का अनुभव करते हैं या अचानक आप के चेहरे पर मुहांसे और त्वचा पर फुंसी निकल आती हैं या आप अपने पाचनतंत्र में कुछ गड़बड़ी महसूस कर रहे हैं, तो आप का शरीर विषाक्त हो चुका है. आप के शरीर को जरूरत है डिटौक्सीफिकेशन की ताकि आप अपने शरीर को स्वस्थ और जवां रख सकें और शरीर को सिर्फ बाहर से ही नहीं अंदर की गंदगियोें को भी दूर कर सकें. यंग रहने और दिखने के लिए आप के चेहरे पर चमक की आवश्यकता होती है. बस इस के लिए आप को उस के देखभाल की जरूरत है.

कंसीलर से पाएं बेदाग त्वचा

आप के मेकअप किट में एक चीज जो जरूर होनी चाहिए वह है कंसीलर. इस के बिना फ्लॉलेस और स्मूथ मेकअप संभव नहीं. दरअसल हर महिला के चेहरे पर कुछ दाग धब्बे तो होते ही हैं और उन्हें गायब करने के लिए जरूरी है कंसीलर. कंसीलर वह ब्यूटी प्रोडक्ट है जिस की मदद से आप अपने चेहरे के छोटेमोटे दाग धब्बों, असमान रंगत या पिगमेंटेशन, बर्थ मार्क्स, सन टैन, काले निशान, आंखों के नीचे काले घेरे और झुर्रियां को कुछ समय के लिए चेहरे से हाइड करने या छिपाने में सफल हो सकती हैं. इस तरह आप अपनी बेदाग़ खूबसूरती से लोगों को अचंभित कर सकती हैं.

कंसीलर मुख्य रूप से चार तरह के होते हैं;

1- क्रीम कंसीलर

इस कंसीलर का टेक्सचर क्रीमी होता है. क्रीमी होने के कारण यह हमारे चेहरे के दाग धब्बों और काले घेरों को अच्छे से कवर करने में हमारी मदद करता है. क्रीम कंसीलर को ऑयली टू नॉर्मल स्किन वाले आसानी से उपयोग में ला सकते हैं.

2- लिक्विड कंसीलर

इस कंसीलर का टेक्सचर लिक्विड होता है. यह आसानी से यह हमारी त्वचा पर ब्लेंड हो जाता है और यह काफी लाइट वेट भी होता है. लिक्विड होने के कारण ये त्वचा में आसानी से अवशोषित हो जाते हैं. लिक्विड कंसीलर ड्राई टू कंबीनेशन स्किन वालों के लिए बेहतर होता है क्योंकि यह रूखी त्वचा को नमी देता है.

3- पेन कंसीलर – पेन कंसीलर दाग धब्बों, मुहांसों ,काले घेरों को छुपाने के लिए सब से अच्छा माना जाता है. इस कंसीलर को लगाना बहुत आसान है और साइज
में छोटा होने के कारण इसे कहीं भी कैरी किया जा सकता है.

4- स्टिक कंसीलर – स्टिक कंसीलर ऑइली स्किन को छोड़ कर बाकी हर तरह के स्किन के लिए यूजफुल है. इस कंसीलर का टेक्सचर काफी सॉफ्ट होता है और यह लिपस्टिक के आकार का होता है.

स्किन टोन के हिसाब से कंसीलर कैसे चुनें

इस सन्दर्भ में सेलिब्रिटी मेकअप आर्टिस्ट गुंजन अघेरा पटेल के अनुसार सब से पहले हमें अपने स्किन को समझने की ज़रूरत है. अपनी स्किन के हिसाब से सही शेड का कंसीलर चुनने के लिए किसी भी ब्रांड के प्रोडक्ट्स को अपने फोरहेड पर हल्का सा लगा कर चेक करें. अगर वह अप्लाई करने के बाद पिंकिश टोन में है तो वह आप का सही शेड नहीं है. आप को वह शेड लेना चाहिए जो अच्छे से ब्लेंड करने पर आप की स्किन में अच्छे से मिक्स हो जाए या घुल जाए. अंडरआई में कंसीलर हमेशा एक शेड लाइट यूज़ करना चाहिए. यदि आप के डार्क सर्कल ज्यादा है तो आप कंसीलर इस्तेमाल करने से पहले ऑरेंज कलर करेक्टर का इस्तेमाल करें और उस के बाद कंसीलर लगा कर सेट करे.

बेहतरीन रिजल्ट के लिए कंसीलर कैसे लगाएं

मेकअप का सब से इम्पोर्टेन्ट पार्ट है अपनी स्किन को अच्छे से मॉइस्चराइज करें. यदि आप दिन में मेकअप कर रहें हैं तो आप सनस्क्रीन को अच्छे से फेस एंड नैक एरिया पर लगाएं. मॉइश्चराइज एंड सनस्क्रीन लगाने के बाद आप पिग्मेंटेड एरिया और डार्क एरिया पर कंसीलर लगाएं और अच्छे से ब्लेंड
करें.

याद रखें की प्रोडक्ट्स की मात्रा बहुत ही कम होनी चाहिए यदि आप ज्यादा प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करेंगे तो आप का मेकअप बहुत ही केकी लगेगा.
प्रोडक्ट अगर कम होगा और अच्छे से ब्लेंड होगा तो आप की स्किन स्मूथ और नो मेकअप का इफ़ेक्ट देगा.

कंसीलर को इनर कॉर्नर्स में अप्लाई करें और फिर उंगली या फिर स्पंज या ब्रश की मदद से उसे ब्लेंड करें.

फिर ट्रांस पाउडर / सेटिंग पाउडर को कंसीलर के ऊपर अप्लाई करके उसे सेट करें.

कंसीलर का प्रयोग कब और कैसे करें

1- हाइलाइट करने के लिए

कंसीलर को चेहरे पर मौजूद हाई पॉइंट्स जैसे नोज, चिन, क्यूपिड बो, फोरहेड, अंडर आईज जैसी जगहों पर इस्तेमाल किया जाता है. इस के लिए आप अपनी स्किन टोन से कम से कम दो टोन लाइट कंसीलर का इस्तेमाल कर सकती हैं.

2- डार्क स्पॉट्स को छिपाने के लिए

कंसीलर का इस्तेमाल चेहरे पर मौजूद डार्क स्पॉट्स जैसे पिंपल्स और मुंहासों के निशान, बर्थमार्क, पिगमेंटेशन आदि को छिपाने के लिए किया जाता है. डार्क स्पॉट्स के लिए साधारण कंसीलर के साथ ऑरेंज या पीच कलर के कलर करेक्टर को मिला कर लगाया जा सकता है. ये एक्ने, पिगमेंटेशन या अन्य किसी कारण से हुए डार्क स्पॉट्स को छुपाने और त्वचा का रंग निखारने में मदद करते हैं.

3- डार्क सर्कल के लिए

कंसीलर का इस्तेमाल डार्क सर्कल को छुपाने के लिए भी किया जाता है. कुछ डार्क सर्कल के मामले में आंखों के नीचे की त्वचा नीली पड़ने लगती है. इस तरह की समस्या के लिए ऑरेंज और यलो कलर करेक्टर को मिक्स कर के उपयोग किया जा सकता है. ये आंखों के नीचे के हिस्से की रंगत को निखार कर डार्क सर्कल्स छिपाने में मदद करेंगे. अगर स्किन टोन हल्का है तो इन कलर के हल्के शेड का उपयोग होगा. वहीं अगर किसी की त्वचा का रंग गहरा है तो इन कलर्स का डार्क शेड इस्तेमाल किया जायेगा.

4- लिप्स को शेप देने के लिए

कंसीलर का इस्तेमाल लिप्स की शेप को निखारने और उसे शार्प शेप देने में भी किया जाता है. कोशिश करें कि आप केवल लिप्स के कार्नर पर ही कंसीलर को लगाएं.

5- मुंहासों के लिए

मुंहासों और उसके आस पास की त्वचा अक्सर लाल पड़ जाती है. ऐसे में, वहां की त्वचा के लिए हरे रंग के कलर करेक्टर का उपयोग किया जा सकता है.

कुछ सावधानी और ट्रिक्स

कोई भी मेकअप स्टार्ट करने से पहले सबसे ज़रूरी होता है की आप सही टोन का कंसीलर लें. यह मेकअप स्टार्ट करने का सबसे बेसिक स्टेप होता है. कई लोग मेकअप सेलेक्ट करते समय यह गलती कर देते है की वह यह तो काफी ज्यादा फेयर टोन या फिर डार्क टोन का कंसीलर उसे कर लेते है जिस से उन का मेकअप बिलकुल भी नेचुरल नहीं लगता .

मेकअप का मतलब हमेशा फेयर दिखना नहीं होता हो. मेकअप आप की ब्यूटी को एन्हांस करने में आपकी मदद करता है. यदि आप को फेयर कंसीलर लेना ही है तो आप अपनी स्किन टोन से सिर्फ एक शेड फेयर कंसीलर लें.

कंसीलर के डार्क शेड आप कंटूर में इस्तेमाल कर सकते हो. लिपस्टिक के साथ कंसीलर को मिक्स कर के आप कस्टम ब्लश बना सकते है.

अगर हमे डुओ फिनिश मेकअप चाहिए तो हमे अंडर आईज में लिक्विड कंसीलर यूज़ करना चाहिए और बाकि फुल फेस पर हम क्रीम और कंसीलर को मिक्स कर के लगाएंगे तो यह आप को डुओ फिनिश मेकअप लुक देगा.

आईज के इनर कार्नर और आउटर कार्नर पर कंसील कर के उन को ब्लेंड ऊपरी साइड से करनी चाहिए जिस से आप को आईज लिफ़्ट होगी.

विंग लाइनर को शार्प करने लिए भी हम कंसीलर का इस्तेमाल कर सकते है. चाहें तो आईशैडो लगाने से पहले आंखों के ऊपर थोड़ा सा कंसीलर लगा सकते हैं. यह आईशैडो को देर तक टिके रहने में मदद करेगा.

कंसीलर को लगाने के बाद उसे हमेशा थपथपा कर ब्लेंड करें. हमेशा एक अच्छे व विश्वसनीय ब्रांड के प्रोडक्ट का ही उपयोग करें.

कंसीलर हैक्स

1- कंसीलर लगाते वक्त कमरे में रोशनी अच्छी होनी चाहिए.

2- आईशैडो से पहले कंसीलर लगाएं. इस से रंग उभर कर आते हैं.

3- चेहरे के अलावा पीठ या छाती पर दाग हैं तो कंसीलर उन्हें छिपा सकता है.

4- कंसीलर हमेशा अपने फाउंडेशन से एक शेड हल्का चुनें यानि कि आप का फाउंडेशन आप की स्किन टोन का होना चाहिए और कंसीलर स्किन टोन से एक शेड हल्का.

5- आंखों के नीचे के डार्क सर्कल्स को अच्छी तरह छुपाने के लिए आंखों के
नीचे कंसीलर से ट्राएंगल बनाएं.

6- कलर करेक्टर कंसीलर को हमेशा फाउंडेशन से पहले लगाएं.

7- आप कंसीलर को आई प्राइमर की तरह भी इस्तेमाल कर सकती हैं. इस तरह आप का आईशैडो और उभर कर आएगा.

बेस्ट कंसीलर लिस्ट

1- मेबेलिन न्यूयोर्क फिट मी कंसीलर
2- स्विस ब्यूटी प्रोफेशनल लिक्विड कंसीलर
3- मिस क्लैरे फुल कवरेज मेकअप प्लस कंसीलर
4- मेबलिन ड्रीम ब्राइटनिंग क्रीमी कंसीलर
5- लैक्मे एब्सोल्यूट व्हाइट इंटेंस कंसीलर स्टिक एसपीएफ 20.
6- स्विस ब्यूटी प्रोफेशनल लिक्विड कंसीलर
7- एल ए गर्ल प्रो कंसीलर, ऑरेंज करेक्टर
8- डेबोरा मिलानो परफेक्ट कंसीलर
9- मैक स्टूडियो फिनिश कंसीलर
10- ओलिविया 100% वाटरप्रूफ पैन केक सन टोन मेकअप कंसीलर

जब साथ रहें अनमैरिड बहनें

32साल की मोना और 37 साल की नेहा 2 अविवाहित बहनें थीं. मोना जहां हंसतीखिलखिलाती सी आजाद विचारों की लड़की थी वहीं नेहा धीरगंभीर और अपने में ही मगन रहने वाली खामोश सी लड़की. नेहा की मुंबई में जौब लगी और वह वहां कमरा ले कर अकेली रहने लगी. कुछ समय बाद मोना को भी वौइस ओवर आर्टिस्ट की जौब मुंबई में ही मिल गई. नेहा खुश थी कि उसे अब अकेले नहीं रहना होगा. दोनों ने मिल कर एक घर किराए पर लिया और मिल कर रहने लगीं.

नेहा के जौब आवर निश्चित थे. वह रोज सुबह 8 बजे निकलती और शाम 6 बजे घर में घुसती जबकि मोना के काम का समय तय नहीं था. कई बार उसे रिकौर्डिंग के लिए शाम को जाना पड़ता और रात को लौटती. तो कभी दोपहर में निकल कर अगले दिन सुबह आती. नेहा को मोना की वजह से टैंशन भी रहती और डिस्टर्बैंस भी होती. मोना घर के खर्चे में भी बराबर की हिस्सेदारी नहीं देती. समय के साथ मोना ने कुछ और प्रोजैक्ट्स हाथ में ले लिए. उस की सैलरी भी नेहा से ज्यादा हो गई और उस का एक बौयफ्रैंड भी बन गया जो अकसर घर आने लगा.

एक तरफ छोटी बहन की सैलरी अधिक होना और दूसरी तरफ उस के जीने का अलग ढंग नेहा को रास नहीं आ रहा था. शुरूशुरू में तो नेहा ने सब बरदाश्त किया, मगर एक दिन उस के अंदर का लावा फट पड़ा. दोनों बहनों में  झगड़ा हुआ और मोना ने अलग कमरा ले कर रहने का फैसला लिया. नेहा ने भी उसे रोका नहीं. दोनों बहनें अलग रहने लगीं और बातचीत भी बंद हो गई.

इस बात को 2 महीने बीत गए. एक दिन दोनों बहनों की कौमन फ्रैंड ने मोना को खबर दी कि नेहा 3 दिन से बहुत बीमार है. उसे तेज बुखार है. मोना ने औफिस से छुट्टी ली और तुरंत बहन के पास पहुंच गई. उस ने दिल लगा कर बहन की सेवा की. नेहा की तबीयत ठीक हुई तो उस ने छोटी बहन को गले लगा लिया. दोनों ने गिलेशिकवे दूर किए. नेहा ने मोना को फिर रहने के लिए अपने पास बुला लिया.

अब मोना खयाल रखने लगी थी कि नेहा को क्या बात बुरी लगती है. वह बौयफैं्रड को घर पर नहीं बुलाती. घर खर्च में पूरा सहयोग करती और नेहा ने भी बहन की छोटीछोटी गलतियों पर ध्यान देना छोड़ दिया.

मिल कर रहने के हैं बड़े फायदे

सच है मिल कर रहने के बहुत फायदे हैं, मगर रिश्ता कोई भी हो तालमेल बैठाना जरूरी है. एकदूसरे के लिए प्यार और केयर हो तभी खुश रहा जा सकता है वरना बड़ेबड़े शहरों में अकेलापन इंसान को कब अवसाद के घेरे में ले ले पता ही नहीं चलता.

कुछ साल पहले राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा में 7 महीनों से भूखीप्यासी एक घर में बंद 2 बहनों की मौत हो गई थी. बड़ी बहन 42 वर्षीय अनुराधा बहल के कुपोषण के चलते कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था और बाद में हृदयाघात से उस की मौत हो गई. अनुराधा की छोटी बहन 38 साल की सोनाली बहल की हालत भी काफी खराब थी और बाद में उस की भी मौत हो गई. दोनों बहनों ने अपने ही घर में खुद को बंद कर लिया था. दरअसल, दोनों बहनें अपने पिता कर्नल ओपी बहल की मौत के बाद से भारी दबाव में थीं. दोनों अविवाहित थीं.

दोनों बहनों के छोटे भाई विपिन बहल अपनी पत्नी और बच्चों के साथ नोएडा में ही रहते थे. वे और उन के मामा दोनों बहनों का ध्यान रखते थे, लेकिन गहरे अवसाद में होने के कारण दोनों बहनें उन के साथ सहयोग नहीं कर रही थीं.

जब दोनों बहनों ने उन के साथ सहयोग करना बंद कर दिया तो उन लोगों ने भी संपर्क कम कर दिया. दोनों बहनों ने अपने साथ एक कुत्ता भी रखा था जिस की मृत्यु करीब ढाई महीने पहले हो गई थी. दोनों बहनें पढ़ीलिखी थीं.

अनुराधा ने चार्टर्ड अकाउंटैंसी की शिक्षा पूरी करने के बाद पीएचडी भी की थी, लेकिन मातापिता की मृत्यु के बाद उन्होंने प्रैक्टिस करना छोड़ दिया था. सोनाली ने इतिहास विषय से पीएचडी की थी.

छोटीछोटी बातों को दिल से न लगाएं

जाहिर है अकेलेपन और अवसाद की वजह से उन की यह हालत हुई. इसलिए बहुत जरूरी है कि अगर 2 अविवाहित बहनें साथ रह रही हैं तो वे एकदूसरे को मोटिवेट करती रहें, लोगों से मिलती रहें और आपस में भी हंसीमजाक करें. जिंदगी को अच्छी तरह जीने का प्रयास करें. छोटीछोटी बातों को दिल से न लगाएं.

2 अविवाहित कमाऊ बहनें जब साथ रह रही हों तो उन्हें इन बातों का ख्याल रखना चाहिए:

घर का बंटवारा : अगर आप अपने पैतृक घर में रह रही हैं तो खयाल रखें कि उस पर आप दोनों का बराबर का हक है. यदि घर में 2 कमरे हैं तो दोनों 1-1 कमरा लें और ड्राइंगरूम को कौमन रखें. ज्यादा कमरे हैं तो उसी हिसाब से बंटवारा करें. घर के सामान पर दोनों का हक होगा. अगर आप दोनों किराए के घर में रहती हैं तो हमेशा किराए को आधाआधा बांटें. संभव है कि कोई बहन ज्यादा कमा रही हो और कोई कम, फिर भी पैसे के मामले में हिसाब क्लीयर रखें वरना जो ज्यादा किराया दे रही है  वह धीरेधीरे दूसरी को डौमिनेट करने लगेगी और रिश्ता खराब होगा.

काम का बंटवारा: काम का बंटवारा भी आधाआधा होना चाहिए. आप दोनों पतिपत्नी नहीं कि कोई एक बहन घर के काम करे और दूसरी कमा कर लाए. यहां दोनों को औफिस जाना है और ऐसे में एकदूसरे की सुविधा का खयाल रखते हुए काम बांट लें. अगर एक बहन घर से काम कर रही हो या घर से ही कोई बिजनैस कर रही हो तब जरूर काम में वह दूसरी की हैल्प कर सकती है क्योंकि वह आनेजाने का एक्जरसन और लगने वाले टाइम से बची रहेगी.

काम को ले कर जब बहनों के बीच  झगड़े होंगे तो साथ रहना कठिन हो जाएगा. आप को सम झना होगा कि साथ रहने का फायदा यह है कि अगर किसी की तबीयत खराब है या उसे अर्जैंटली कहीं जाना है तो ऐसे में बहन उस की केयर करेगी, खाना बना कर और घर साफ कर के रखेगी.

पैसों का हिसाब: कमाऊ बहनों को आपस में पैसों के मामले में बिलकुल क्लीयर रहना चाहिए. जैसे आप सहेलियों के साथ कहीं जाती हैं और अपना खर्च खुद करती हैं वैसे ही बहन के साथ भी हिसाब रखें वरना रिश्ता बिगड़ने में समय नहीं लगेगा. आप रैस्टोरैंट में खाने गए हों, कहीं जाने के टिकट्स लिए हों, कोई ड्रैस खरीदी हो या फिर मूवी देखने गए हों अथवा घर के लिए कुछ सामान या राशन खरीदा हो, हमेशा पैसे बराबरबराबर खर्च करें ताकि किसी को कुछ कहने का मौका न मिले.

साथ घूमने जाने का प्लान: अगर आप दोनों अकेली हैं तो जिंदगी में बदलाव और रोमांच लाने के लिए कभीकभी घूमने भी निकलना चाहिए. दोनों यदि मिल कर कहीं जाती हैं तो मन भी लगा रहेगा और सुरक्षा के प्रति भी आश्वस्त रहा जा सकता है. मगर यह ध्यान रखिए कि सफर के दौरान भी खर्च आपस में बांट लें.

कहां और कैसे जाना है इस बात को ले कर एकदूसरे की पसंद या इच्छा का भी सम्मान करें. सफर के दौरान एकदूसरे को कुछ सरप्राइज गिफ्ट भी दें.

बौयफ्रैंड: अगर दोनों बहनों में से किसी का कोई बौयफ्रैंड या मेल फ्रैंड है तो इस तरफ से थोड़ा सचेत रहने की जरूरत है. आप इस बारे में अपनी बहन से सबकुछ डिस्कस करें और एक मर्यादा भी बनाए रखें. उस लड़के को घर पर कम ही बुलाएं. आप उस से बाहर रैस्टोरैंट या ऐसी किसी जगह मिल सकती हैं. जहां बैठ कर दुनिया जहां की बातें कर सकें. अगर आगे शादी करने का इरादा है तो बहन को पहले से सारी जानकारी दें. आप अचानक बहन को अपना फैसला बताएंगी तो रिश्ते में तनाव आएगा. बहन को इस मामले में सहेली की तरह सम झें. मिल कर लड़के के बारे में छानबीन भी करें तभी कोई कदम उठाएं.

थोड़ा मस्ती, मजाक जरूरी: अविवाहित और कामकाजी बहनें होने का मतलब यह नहीं कि आप दोनों केवल सीरियस टौपिक्स पर चर्चा करें या अपनेअपने काम में व्यस्त रहे. आप को अपने लिए समय निकालना चाहिए. जब आप एकदूसरे के साथ समय बिताएं, मस्ती करें, हंसीमजाक करें. मूवी देखने जाएं. इस से दोनों बहनों के बीच का रिश्ता भी मजबूत बनता है और मन भी खुश रहता है.. कभीकभी दूसरी सहेलियों को घर पर इनवाइट करें या खुद उन के घर जाएं. आम लोगों की तरह जिंदगी जीएं और खुश रहें.

एकदूसरे के काम को सम्मान दें: दोनों बहनों को एकदूसरे के काम को रिस्पैक्ट देनी चाहिए. मान लीजिए आप किसी कौरपोरेट औफिस में ऊंचे ओहदे पर हैं जबकि बहन कोई साधारण काम करती है या किसी तरह के सोशल वर्क अथवा फ्रीलांस जौब में है तो कभी भी बहन को नीचे दिखाने की कोशिश न करें. दोनों एकदूसरे के काम का सम्मान करें और इस बात का एहसास भी दिलाएं. ऐसा करने से ही आप का रिश्ता कायम रहेगा.

घर के दूसरे सदस्यों के साथ संबंध: आप दोनों भले ही अलग रहती हों और खुश हों मगर इस का मतलब यह नहीं कि दूसरों से कट कर रहें. घर के दूसरे सदस्यों या रिश्तेदारों के साथ अच्छा संबंध बना कर चलना ही सम झदारी है. त्योहार या दूसरे अवसरों पर दोनों बहनें रिश्तेदारों के घर जाएं. कभीकभी घर में भी गैटटुगैदर करती रहें. इस से जीवन में नई ऐनर्जी आती है.

फलाहार के लिए यूं बनाएं चुकंदर का रायता

सुर्ख लाल रंग के चुकंदर आजकल बाजार में भरपूर मात्रा में मिल रहे हैं. न केवल इसकी जड़ें बल्कि इसके पत्ते भी आयरन, फायबर और मैग्नीशियम से भरपूर होते हैं. चुकंदर में विटामिन बी, विटामिन सी, फॉस्फोरस, कैल्शियम, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं.  चुकंदर मानव शरीर में  एनीमिया को दूर करके खून को बढ़ाने में सहायक होते हैं. चुकंदर को जूस के अलावा सलाद तथा विभिन्न रेसिपीज के द्वारा भी अपनी डायट में शामिल किया जा सकता है. आज हम आपको चुकंदर का रायता रेसिपीज को बनाना बता रहे हैं जिनके माध्यम से आप चुकंदर को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं.  तो आइए देखते हैं कि इन्हें कैसे बनाते हैं.

सामग्री

– 1 चुकंदर उबाल कर कद्दूकस किया

– 400 ग्राम दही

-1 प्याज बारीक कटा

– 1 टमाटर बीज निकाल कर बारीक कटा

– 1 बड़ा चम्मच तेल

-थोड़े से करीपत्ते

-1/2 छोटा चम्मच जीरा

– 1/2 छोटा चम्मच सरसों के बीज

– नमक स्वादानुसार.

विधि

दही में कद्दूकस किया हुआ चुकंदरप्याजटमाटर और नमक डालें. अब पैन में तेल गरम कर जीराराई और करीपत्ते डाल कर तड़का तैयार करें और रायते में मिला दें.

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पाव भाजी

सामग्री

– 4 मध्यम आलू उबाल कर मसले हुए

– 1 कप फूलगोभी कद्दूकस

– 1 कप गाजर बारीक कटी

– 1/2 कप शिमलामिर्च बारीक कटी

– 1/2 कप हरी मटर उबली

– 1 बड़ा प्याज बारीक कटा

– 3 मध्यम आकार के टमाटर कद्दूकस किए

– 1 बड़ा चम्मच अदरकलहसुन का पेस्ट

– 21/2 बड़े चम्मच पाव भाजी मसाला

– 3 बड़े चम्मच मक्खन

-1/2 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर

– 1/2 छोटा चम्मच हलदी पाउडर

– गार्निश के लिए प्याजधनियामक्खन और नीबू द्य नमक स्वादानुसार.

विधि

एक पैन में मक्खन गरम करें और प्याज को पारदर्शी होने तक भूनें. फूलगोभी और गाजर डाल कर तेज आंच पर 2-3 मिनट तक चलाएं. अब अदरकलहसुन का पेस्टपाव भाजी मसालालालमिर्च पाउडरहलदी पाउडर और नमक डाल कर अच्छी तरह मिक्स करें. मैश किए हुए आलू डाल कर मिश्रण को अच्छे से मिलाएं. अब टमाटर डाल कर धीमी आंच पर ढक कर पकाएं. आप चाहें तो इस में थोड़ा पानी मिला सकते हैं. शिमलामिर्च और मटर के अच्छे से पकने तक मध्यम आंच पर पकनें दें. तैयार भाजी को प्याजधनियापत्तीनीबू का रस और मक्खन डाल कर टोस्टेड पाव के साथ सर्व करें.

GHKKPM: हर्षद अरोड़ा ने की आएशा सिंह की तारीफ, नील भट्ट के बारे में कहीं ये बात

गुम है किसी के प्यार में (Gum Hai Kisi Ke Pyar Mein) के सेट पर हर्षद अरोड़ा (Harshad Arora) और आयशा सिंह  (Ayesha Singh) का काफी अच्छा बॉन्ड बन गया है. इस बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “हमारा बॉन्ड लाजवाब है. आयशा एक अच्छी इंसान हैं और जो किरदार वह निभा रही हैं, उसमें भी बेस्ट हैं. वह जब पहली बार मुझसे मिलीं तो काफी प्यारी लगीं. जब कोई शो हिट होता है और आपको दर्शकों का प्यार मिलता है क्योंकि आप एक लीड चेहरा होते हो तो आपको अपने आप में गुरूर हो जाता है. लेकिन मुझे नहीं लगता कि मुझे सेट पर कोई ऐसा शख्स मिला भी है.”

 

 

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हर्षद अरोड़ा (Harshad Arora) ने इंटरव्यू के दौरान नील भट्ट (Neil Bhatt) के व्यवहार पर भी चुप्पी तोड़ी. उन्होंने इस बारे में बात करते हुए कहा, “मैंने नील के साथ भी शूटंग की और वो बहुत अच्छे इंसान हैं और काम को लेकर काफी सतर्क हैं. मैंने अभी तक जितनों के साथ भी काम किया है, उनके साथ मेरा अच्छा बॉन्ड बन चुका है. ऐसा मुझे किसी ने नहीं कहा कि यार तुम नए हो और हम यहां पहले दिन से ही हैं. मुझे सेट पर हर किसी से खूब सारा प्यार मिल रहा है.”

 

विराट और सई को एक बेड पर देखेगी पत्रलेखा

टीवी सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में‘ (Gum Hai Kisi Ke Pyar Mein) के बीते एपिसोड में देखने के लिए मिला था कि विराट सई दोनों बच्चों के साथ पिज्जा पार्टी करते हैं और फिर वही लगे टेंट में सो जाते हैं। लेकिन अपकमिंग एपिसोड में देखने के लिए मिलेगा कि सई विनायक पर अपना प्यार बरसाते बरसाते वही सो जाती है। इस दौरान पत्रलेखा भी वहां पहुंच जाती है। वह विराट, सई को दोनों बच्चों के साथ सोते हुए काफी ज्यादा दुखी होती है और वहां से गुस्से में निकल जाती है और फिर सुबह छह बजे विराट की नींद खुलती है और वह तुरंत पत्रलेखा के पास भागता है.

अंतर्द्वंद्व: आखिर क्यूं सीमा एक पिंजरे में कैद थी- भाग 4

मु?ो रमेश को साफसाफ कह देना चाहिए था कि यह सब नहीं हो सकता. हमें यह सब करना शोभा नहीं देता पर मैं यह क्यों नहीं कह पाई. वह कौन सी शक्ति थी जो मु?ो यह सब कहने से रोक रही थी. कहीं मु?ो भी उन से प्यार तो नहीं हो गया है. उस ने स्वयं से प्रश्न किया. प्रतिउत्तर में सीमा का दिल जोरजोर से धड़कने लगा और उसे अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया.

अब फोनों और मुलाकातों का सिलसिला चल निकला. ऐसे ही एक मुलाकात में रमेश ने सीमा का हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहा, ‘‘सीमा क्या हमतुम एक नहीं हो सकते?’’

‘‘मगर कैसे? आप भी शादीशुदा हैं और मैं भी. एकदूसरे को पसंद करना तो किसी हद तक ठीक है परंतु इस के आगे कुछ सोचना हमारे लिए ठीक नहीं होगा,’’ सीमा ने रमेशजी से कहा.

‘‘इश्क में ठीक और गलत किस ने देखा है. जानती हो जब किसी से प्यार हो जाता है तो वह उस पर अपना पूरा अधिकार सम?ाने लग जाता है और उसे पूरा पाना चाहता है. मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है. क्या तुम्हारे साथ भी ऐसा ही हो रहा है?’’

रमेश की बात सुन कर एक क्षण तो सीमा का मन किया कि वह भी चीखचीख कर कह दे हां मेरे साथ भी ऐसा ही हो रहा है क्योंकि ऐसा होना स्वाभाविक है परंतु सामाजिक मर्यादाओं और इतने वर्षों सतीश के साथ सुखद वैवाहिक जीवन व्यतीत करने के बाद उसे ऐसा बोलना विवेकहीन लग रहा था.

वह बोली, ‘‘रमेश हमारे चाहने या न चाहने से सबकुछ नहीं होता. यदि हो भी जाए तो इस में कौन सी भलाई है? हम अपनी एक छोटी सी इच्छा पूरी करने के लिए सबकुछ दांव पर तो नहीं लगा सकते?’’

‘‘पर इस में बुराई ही क्या है? ऐसा तो आदिकाल से होता चला आ रहा है?’’

‘‘जरूर हो रहा होगा पर हम ऐसा नहीं करेंगे.’’

‘‘मगर क्यों? मु?ो पूरा विश्वास है कि यह सब तुम्हें भी अच्छा लगेगा क्योंकि सिर्फ यह प्रेम है, मेरी बात पर गौर करना शायद तुम्हारा विचार बदल जाए,’’ कह कर रमेश बाबू स्वयं को रोक नहीं पाए और उन्होंने आगे भावावेश में सीमा के गालों पर एक चुंबन जड़ दिया.

सीमा को प्रतिरोध करने का वक्त भी नहीं मिला. उस के बदन में ऊपर से नीचे तक एक सिहरन सौ दौड़ गई. रमेश बाबू का कहना सही था. सचमुच यह उसे भी अच्छा लगा था.

यह क्या हो रहा है मेरे साथ… मैं किस धारा में बहती जा रही हूं. चाह कर भी स्वयं को क्यों नहीं रोक पा रही हूं. सीमा हैरान भी थी तथा परेशान भी. परंतु रमेश न तो हैरान थे, न परेशान. बस वे तो एक ही बात जानत थे कि उन्हें सीमा से सच्चा प्रेम हो गया है और वह किसी भी हालत में उसे खोना नहीं चाहते.

 

यकीनन सीमा को भी रमेश से प्रेम हो गया था परंतु उसे अपने पति

सतीश से भी प्रेम था और वह किसी भी हालत में सतीश का मन नहीं दुखाना चाहती थी. उम्र के इस पड़ाव पर जबकि पतिपत्नी को एकदूसरे की सर्वाधिक आवश्यकता होती है, वह हर पल सतीश का साथ निभाना चाहती थी इसलिए उस ने निर्णय लिया कि अब वह रमेश जी से अधिक मेलजोल नहीं बढ़ाएगी.

‘‘क्या बात है सीमा आजकल तुम ने पेंटिंग बनाना छोड़ दिया है? आजकल तुम खोईखोई सी रहती हो? क्या बात है कोई परेशानी है क्या? यदि है तो मु?ो बताओ मैं तुम्हारा पति हूं. मैं तुम्हारी हर समस्या का हल बता सकता हूं,’’ सतीश ने सीमा से कहा क्योंकि वह सीमा जो हर समय चहकती रहती थी और उसे उस से मीठी बहस और ?ागड़ा करती रहती थी आजकल कुछ चुपचुप रहती थी.

सतीश की बात सुन कर सीमा, जिस के मन में पहले से ही उथलपुथल मची हुई थी, फफकफफक कर रोने लगी.

यह देख कर सतीश घबरा गया और बोला, ‘‘क्या बात है तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है? हुआ क्या है तुम्हें?’’

‘‘कुछ नहीं, मैं ठीक हूं,’’ सीमा ने कहा.

‘‘तो फिर यह उदासउदास चेहरा, यह खोयाखोया मन क्यों रहता है?’’

‘‘कुछ नहीं. कभीकभी ऐसा हो जाता कि बिना कारण ही हम उदास हो जाते हैं. चिंता की कोई बात नहीं है. सब ठीक हो जाएगा,’’ कह कर सीमा सतीश से लिपट कर सो गई. वह सतीश को कैसे बता सकती थी कि उसे कैसी उल?ान सता रही है. कभीकभी तो उसे ऐसा भी लगता था कि वह रमेश की चाह में सतीश को धोखा दे रही है.

 

‘‘प्लीज सीमा, बात करने के लिए तो मना मत करो. मैं जानता हूं कि

तुम सतीश को बहुत प्यार करती हो, तुम दोनों एकदूसरे के लिए बने हो परंतु उसी प्यार में से कुछ प्यार मु?ो भी दे दो. जानती हो मु?ो तुम्हारे प्यार में वह सुख मिलता है जो मु?ो जिंदगी में अभी तक नहीं मिला,’’ रमेश ने सीमा से अनुरोध करते हुए कहा.

‘‘रमेश प्यार सिर्फ एक से ही किया जाता है और मैं यह कई वर्षों पूर्व सतीश से कर चुकी हूं. अब उसे भूलना नामुमकिन है.’’

‘‘भूलने के लिए कौन कह रहा है. मैं तो बस अपना हिस्सा चाहता हूं. थोड़ा सा प्यार मु?ो भी दे दो. जानती हो आजकल मु?ा मैं जीने की उमंग फिर से जाग उठी है. मेरा मन फिर से बननेसंवरने को करता है. जब मैं तुम से फोन पर बात कर लेता हूं तो घंटों तक मु?ा में ऊर्जा बनी रहती है. तुम्हारे साथ ने मु?ो जीने का एक मकसद दिया है. मैं इसे खोना नहीं चाहता.’’

‘‘पर यह प्यार बढ़ गया तो? इतना कि आप मु?ा से समर्पण की उम्मीद करने लगे तो फिर क्या होगा? नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकती. आप को यह प्यार भूलना ही होगा और मु?ो भी.’’

‘‘कोशिश कर के देख लो. तुम भूल नहीं पाओगी और न ही मैं.’’

‘‘ऐसे में क्या करना होगा? इस समस्या का समाधान भी आप ही बताइए क्योंकि यह आप की ही देन है,’’ सीमा ने कहा क्योंकि वह जानती थी कि रमेश बाबू ठीक कह रहे हैं. हालात ऐसे ही हो गए थे कि उस के लिए भी रमेश बाबू को भूलना नामुमकिन हो गया था. यकीनन रमेश बाबू के प्यार ने उस के जीवन में भी उजाला भर दिया था.

इस में बुरा ही क्या है उस ने सोचा. यदि किसी का प्यार हमारे जीवन में खुशियां बन कर आता है तो ऐसा प्यार नाजायज या बुरा कैसे हो सकता है? सीमा ने सोचा.

सीमा यह एक मृगतृष्णा है. एक ऐसी प्यास जो कभी नहीं बु?ोगी. इस के पीछे भागना मूर्खता कहलाएगा. इस से किसी का भला नहीं हो सकता न तुम दोनों का न ही तुम्हारे परिवारों का. अत: इसे भूलना ही अच्छा होगा सीमा के दिमाग ने उसे चेतावनी दी.

 

मगर इसे कैसे भुला जाए. यह तो दिल से जुड़ा हुआ मामला हो गया. भला अपने दिल

को कोई कैसे भूल सकता है. सीमा की अंतरात्मा बोली.

माना कि इसे भूला नहीं जा सकता परंतु तुम्हें इस पर अंकुश लगाना ही होगा.

सीमा के दिलोदिमाग में कब से यह अंतर्द्वंद्व चल रहा था. उस के सामने रहरह कर अपने परिवारजनों के चेहरे घूम रहे थे. कैसा लगेगा उन्हें जब यह बात खुल जाएगी? कौन सम?ोगा इस प्रेम को? ऐसे प्रेम से केवल बदनामी ही हासिल होगी और कुछ नहीं. दिमाग तर्क पर तर्क दे रहा था परंतु दिल कुछ मानने को तैयार नहीं था. दिल को ऐसे प्रेम में कुछ बुराई नजर नहीं आ रही थी.

दिल और दिमाग की एक लड़ाई में सीमा एक पंछी की तरह पिंजरे में कैद थी जो निकलने के लिए बेचैन हो रही थी परंतु उसे भय भी लग रहा था. काश रमेशजी उस के जीवन में आए ही न होते तो आज उसे इस परेशानी का सामना ही न करना पड़ता या फिर उन्हें अपने प्रेम का इजहार नहीं करना चाहिए था. वह उसे अपने मन में ही रखते तो ठीक था. सोचतेसोचते सीमा की आंखों में आंसू आ गए. उस की नजरों में आज रमेशजी एक अपराधी बन गए थे जोकि उस के सुखी गृहस्थ जीवन में आग लगाने आए.

3-4 दिन हो गए थे. रमेशजी का कोई फोन नहीं आया था न ही वे मिलने आए थे. सीमा बेचैन हो उठी. न जाने क्यों उस का मन रमेशजी से बात करने के लिए तड़प उठा. बेचैन हो कर उस ने फोन उठाया और रमेशजी का नंबर डायल किया. मगर फोन बंद था. सीमा की बेचैनी कम नहीं हुई. वह अनमनी हो कर सोफे पर बैठ गई. तभी डोरबैल बजी. दरवाजे पर सतीश था. बेचैन सीमा सतीश की बांहों में समा गई.

सतीश ने पूछा, ‘‘आज तबीयत कैसी है?’’

इस से पहले कि सीमा कोई उत्तर देती लैंड लाइन फोन की घंटी बज उठी. फोन सतीश ने रिसीव किया. रमेश का फोन था.

‘‘कैसे हैं सर? कई दिन हो गए आप से मुलाकात हुए. यदि फुरसत में हैं तो आज घर पधारिए,’’ सतीश ने रमेशजी से अनुरोध किया.

‘‘जरूर. आज ही दिल्ली से लौटा हूं. मेरी भी आप से मिलने की इच्छा हो रही है. कुछ ही देर में आता हूं,’’ रमेशजी ने कहा.

सीमा चुपचाप खड़ी उन का वार्त्तालाप सुन रही थी. वह जानती थी कि रमेशजी के रूप में सतीश को भी एक अच्छा मित्र मिला है. रमेश उन दोनों के जीवन में ही एक नया सवेरा ले कर आए थे. अत: वह उन्हें किसी हालत में भी खोना नहीं चाहती थी. इसलिए उस ने निर्णय लिया कि वह रमेश से मित्रता बनाए रखेगी परंतु मर्यादित रूप में. वह रमेशजी से भी कहेगी कि वे भी अपने प्यार को अपने मन में ही रखें ताकि उन का प्यार एक समस्या नहीं अपितु उन के जीवन का संबल बन जाए. यह सोच कर वह प्रफुल्लित मन से रसोईघर में गई ताकि नाश्ते का प्रबंध कर सके. रमेशजी को मोमोज बहुत पसंद थे. वह उन्हीं की व्यवस्था में जुट गई.

कई दिनों से चल रहा मानसिक अंतर्द्वंद्व आज खत्म हो गया था क्योंकि सीमा ने एक ऐसा फैसला किया जिस में सभी का हित समाहित था. यह फैसला ले कर सीमा को ऐसा लगा कि उस के जीवनरूपी कैनवस पर फिर से सुंदर रंग बिखर गए हैं.

होली पार्टी में अनुज ने अनुपमा से की बदसलूकी, परिवार हुआ हैरान

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा‘ ने लोगों का दिल जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. शो लगातार बीते कई सप्ताह से टीआरपी लिस्ट में नंबर वन पर बना हुआ है, लेकिन ‘अनुपमा’ का करंट एपिसोड दर्शकों को जरा भी पसंद नहीं आ रहा है. बीते दिन भी ‘अनुपमा’ में दिखाया गया कि धीरज और देविका, अनुज और अनुपमा को शादी के बाद की पहली होली मनाने के लिए कहते हैं. वहीं अनुपमा उसे बताती है कि यह परी, अधिक और पाखी की भी पहली होली है. लेकिन उसके मुंह से ये बात सुनते ही अनुज का पारा चढ़ जाता है. हालांकि रुपाली गांगुली के ‘अनुपमा’ में आने वाले ट्विस्ट यहीं पर खत्म नहीं होते हैं.

 

छोटी की याद में गुम होगी अनुपमा

रुपाली गांगुली के ‘अनुपमा‘ में देखने को मिलेगा कि अनुपमा देविका के साथ होली पार्टी में पहुंच जाती है. वहां पूरा शाह परिवार मौजूद होता है. उसके तीनों बच्चे काफी खुश होते हैं और धूमधाम से होली मनाते हैं.  लेकिन अनुपमा को छोटी की कमी खलती है. यहां तक कि उसे सपने में भी दिखता है कि छोटी अनु वहां पर उनके साथ होली मनाने आई है. वह अनुपमा के गले भी लगती है, लेकिन कुछ ही देर में अनुपमा का यह सपना टूट जाता है.

 

एक्स के साथ डांस करेगी काव्या

‘अनुपमा’ में जल्द ही देखने को मिलेगा कि होली पार्टी में काव्या वनराज को छोड़कर अनिरुद्ध के साथ डांस करती है. उसे ऐसा करता देख पूरा मोहल्ला बातें बनाने लगता है. ये चीज देखकर वनराज भड़क जाता है और उसे हाथ पकड़कर खींचकर अपने साथ ले जाता है. अनिरुद्ध वनराज का व्यवहार देखकर चेतावनी देता है कि उसके साथ ऐसा व्यवहार मत करो, क्योंकि जब वो मुझे छोड़कर तुम्हारे पास आ सकती है तो तुम्हे छोड़कर मेरे पास भी आ सकती है.

 

होली पर सबके सामने अनुपमा को डांटेगा अनुज

‘अनुपमा’ में एंटरटेनमेंट का डोज यहीं पर खत्म नहीं होता है. शो में दिखाया जाएगा कि अनुज धीरज के साथ होली पार्टी में पहुंच जाएगा. लेकिन वहां अनुज देखता है कि अनुपमा को सब रंग लगा रहे हैं और वह भी सबके साथ होली खेल रही है. अनुपमा को जैसे ही अनुज नजर आता है, वह हाथों में गुलाल लेकर उसके पास पहुंच जाती है. लेकिन अनुज पूरे परिवार और लोगों के सामने अनुपमा पर भड़क जाता है.

 

मौत पर अंध विश्वास

एक सफल व्यक्ति के पिता की उस के विवाह के चंद दिनों बाद 20वीं मंजिल से गिर जाने से हो जाए तो एक गंभीर सदमे वाली बात है. ओसो होटल सेवा देने वाली कंपनी के फाउंडर रितेश अग्रवाल 65 वर्षीय रमेश प्रसाद अग्रवाल दिल्ली के पास गुडग़ांव में क्रैस्ट सोसायटी में 20वीं मंजिल से गिरने पर मृत पाए गए. यह सदमा अच्छेअच्छे परिवार को हिला सकता है. बीमारी या दुर्घटना की मौत को अपने हाथ में न होने का बहाना कहा जा सकता है पर 20वीं मंजिल से सुरक्षित ग्रिलों वाली सोसायटी में से किसी का अनायास गिर जाना एक आसान बात नहीं. लोग दोपहर के 1 बजे हवा लेने के लिए बालकौनी में नहीं आते. आमतौर पर इन भव्य महंगे अपार्टमैंटो की बालकानियों में कपड़े भी नहीं सूखते नजर आएंगे उन के लिए अलग ड्राई एरिया बनाया जाता है ताकि सोसायटी की भव्यता खराब न हो.

मौत का कारण चाहे कोई भी हो, बचे लोगों पर यह काला साया वर्षों तक रहेगा इन में शक नहीं. एक साधारण सामान्य परिवार से आए रितेश अग्रवाल ने असमान्य मौत शायद पहले कभी देखी भी न हो. इस के लिए इस समस्या से जूझना आसान नहीं है. यह एक सबक हर युवा के लिए कि उसे मातापिता के साथ अपने हर संबंध का हर एक्शन का ख्याल रखना होगा और कुछ भी अचानक घट सकता है. यह संभव है. रितेश नरेंद्र मोदी को विवाह अवसर पर आमंत्रित करने गया था.

यह बात स्पष्ट करती है कि उस के जान पहचान वाले अच्छे रुतबे के हैं और इन जैसों को अपने हर कदम को सावधानी से उठाना होता है. कोर्ई भी अचानक आया मोड़ आम लोग किस निगाह से लेंगे कहा नहीं जा सकता. घर में हुई एक भी आसमयिक मौत बहुत से दिलों में खालीपन, दर्द, अपराध भाव और संदेह छोड़ जाता है. जीवन में सफलता निजी संबंधी की अचानक मौत में सामने निरर्थक सी लगने लगती है. रमेश प्रसाद अग्रवाल ने अपनी जान क्यों खोई, इस का सही व पूरा जवाब कभी सामने नहीं आएगा पर सवाल हमेशा मंडराता रहेगा.

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