बच्चों के लिए बनाएं ये 5 टेस्टी और देसी स्नैक्स

शाम होते होते भूख लगना स्वाभाविक सी बात है परन्तु अक्सर इस भूख को मिटाने के लिए बाजार के रेडीमेड खाद्य पदार्थों का सेवन कर लिया जाता है जो सेहतमंद नहीं होते क्योंकि उन्हें बनाने के लिए प्रयोग किया गया तेल और मसाले उतने हाइजीनिक और उत्तम क्वालिटी के नहीं होते. आज हम आपको घर में उपलब्ध सामग्री से ही एक ऐसा स्नैक बनाना बता रहे हैं जो बहुत हैल्दी तो है ही साथ बहुत टेस्टी भी है तो आइए देखते हैं कि इसे कैसे बनाया जाता है-

1- नमकपारे

सामग्री

– 1 कप मैदा

-तलने के लिए पर्याप्त तेल

– 1 छोटा चम्मच कसूरी मेथी

– 1/2 छोटा चम्मच जीरा पाउडर

-1/2 छोटा चम्मच अजवायन

-1/2 छोटा चम्मच काली मिर्च दरदरी कुटी

-जरूरतानुसार पानी

नमक स्वादानुसार.

विधि

मैदाकसूरी मेथीजीरा पाउडरअजवायनकाली मिर्चनमक और तेल को एक बाउल में डाल कर अच्छी तरह मिक्स करें. मिश्रण में थोड़ाथोड़ा कर के पानी डालें और सख्त आटा गूंध लें. उस के बाद एक हलके गीले कपड़े से ढक कर करीब 30 मिनट के लिए रैस्ट करने दें. उस के बाद आटे को कुछ मिनट और मथें फिर बेलन पर तेल लगा कर चपाती की तरह पतला बेल लें. चाकू या पिज्जाकटर की मदद से लंबीलंबी स्ट्रिप्स में काट लें. अब एक पैन में तेल गरम कर मध्यम आंच पर नमकपारे सुनहरे होने तक तलें. ठंडा होने पर एयरटाइट कंटेनर में स्टोर कर लें.

2- अचारी मखाने

– 2 कप मखाने

-3 छोटे चम्मच तेल

-1 छोटा चम्मच अचारी मसाला

– 1/2 छोटा चम्मच हलदी पाउडर

– नमक स्वादानुसार.

विधि

मध्यम आंच पर मखानों को हलका सुनहरा होने तक ड्राई रोस्ट कर लें और एक बाउल में अलग निकाल कर अलग रख दें. एक अलग पैन में तेल गरम कर उस में अचारी मसालाहलदी पाउडर और नमक डाल कर तड़कने दें. अब मखाने डालें और अच्छी तरह टौस करें ताकि वे अचारी मसाले से अच्छी तरह कोट हो जाएं. आप इन्हें तुरंत भी सर्व कर सकते हैं या फिर ठंडा होने पर एयरटाइट कंटेनर में स्टोर कर सकते हैं.

3- मुरमुरा

सामग्री

-2 कप मुरमुरा

– 1/2 कप तली हुई मूंगफली.

तड़के के लिए

-1 बड़ा चम्मच तेल द्य एक चुटकी हींग

– 1/2 छोटा चम्मच काली सरसों के बीज

– 2 सूखी लालमिर्चें आधी कटी द्य थोड़े से करीपत्ते द्य 1/2 छोटा चम्मच हलदी पाउडर

– नमक स्वादानुसार.

विधि

एक चौड़ी तली की कड़ाही में तेल गरम कर के आंच को मध्यम कर दें. अब उस में हींगकाली सरसों और सूखी लालमिर्च डाल कर तड़कने दें. फिर उस में करीपत्तेहलदी पाउडर व नमक डाल कर मिक्स करें. अब कड़ाही में मुरमुरे और मूंगफली डाल कर मिलाएं और कड़ाही को आंच से उतार लें. ठंडा होने के बाद सर्व करें या एयरटाइट कंटेनर में डाल कर स्टोर कर लें.

4- चटपटे काजू

सामग्री

– 2 कप काजू द्य 1/2 छोटा चम्मच जीरा पाउडर

– 1/2 छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर

– 1/2 छोटा चम्मच काला नमक द्य तलने के लिए तेल द्य नमक स्वादानुसार.

विधि

एक कड़ाही में मध्यम आंच पर तेल गरम कर काजू को कुरकुरा और सुनहरा होने तक तल लें. गरम काजुओं को एक बाउल में निकाल लें और तुरंत ही जीरा पाउडरकाली मिर्च पाउडरकाला नमक और नमक डालें. अच्छी तरह मिक्स और ठंडा कर के काजुओं को बाउल में उछाल कर अच्छी तरह मसाले मिक्स कर लें. ठंडा कर के एयरटाइट कंटेनर में स्टोर करें.

5- चिवड़ा

सामग्री

– 1 कप पोहा द्य 1/2 कप मूंगफली द्य 1/2 कप काजू द्य 1/2 कप सूखे नारियल के टुकड़े

– तलने के लिए पर्याप्त तेल द्य थोड़े से करीपत्ते

– 2 हरीमिर्चें बारीक कटी द्य 1/2 छोटा चम्मच हलदी पाउडर द्य 1 छोटा चम्मच बूरा (चीनी)

– 1 छोटा चम्मच नमक.

विधि

एक चौड़े तले वाली कड़ाही में तेल गरम करें. अब पोहा को छलनी में छान कर तेल में डाल दें. क्रिस्पी होने पर निकाल कर पेपर टावेल पर रखें.

अब उसी तेल में 1-1 कर मूंगफलीकाजूनारियल को भी अच्छे से भून लें. फिर एक अलग पैन में तेल गरम कर करीपत्तेहरीमिर्चहलदी पाउडर और नमक डाल कर चटकने तक भूनें. अब इस पैन में पहले से तले हुए पोहेमूंगफलीकाजूनारियल के टुकड़े और चीनी डाल कर मिक्स करें और पैन को आंच से उतार कर मिश्रण को ठंडा होने दें. एयरटाइट कंटेनर में स्टोर करें.

मेरे पति की किडनियां काफी क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, मैं जानना चाहती हूं कि किडनी फेल्योर क्या होता है?

सवाल

डायग्नोसिस में पता चला है कि मेरे पति की किडनियां काफी क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं. मैं जानना चाहती हूं कि किडनी फेल्योर क्या होता है?

जवाब

किडनी फेल्योर तब होता है जब किडनियां आप के रक्त से अचानक व्यर्थ पदार्थों को फिल्टर करना बंद कर देती हैं. तब किडनियां फिल्टर करने की क्षमता खो देती हैंशरीर में व्यर्थ पदार्थ खतरनाक स्तर तक इकट्ठा हो जाते हैं और रक्त में रसायनों का संतुलन गड़बड़ा जाता है. ऐक्यूट किडनी फेल्योर को ऐक्यूट रीनल फेल्योर भी कहते हैं. यह स्थिति कुछ घंटों या कुछ महीनों में विकसित हो सकती है. अत्यधिक बीमार लोगों में किडनी फेल्योर कुछ ही घंटों में हो जाता है. किडनी फेल्योर उसे कहा जाता जब दोनों किडनियां अपनी सामान्य गतिविधियों का 15-20% से भी कम कर पाती हैं. इसे ऐंड स्टेज रीनल डिजीज कहते हैं. इस समस्या से डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट के द्वारा निबटा जा सकता है.

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सवाल

किडनियों से संबंधित समस्याओं के बढ़ते मामलों को देखते हुए मैं जानना चाहती हूं कि किडनियों को स्वस्थ रखने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

जवाब

विश्व की लगभग 10% आबादी किडनी से संबंधित किसी न किसी समस्या से जू?ा रही है. ऐसे में किडनियों को स्वस्थ रखना बहुत जरूरी है. जीवनशैली में कुछ जरूरी परिवर्तन ला कर किडनियों से संबंधित बीमारियों के खतरों को कम किया जा सकता है  इन में सम्मिलित हैं- संतुलित और पोषक भोजन का सेवन करनानियमित रूप से ऐक्सरसाइज करनारक्त में शुगर के स्तर और रक्तदाब को नियंत्रित रखनामोटापे से बचनाशराब और धूम्रपान से दूर रहना.

ऐसे तो घरों की छतें टूटने लगेंगी

फूड होम डिलिवरी सर्विस स्विग्गी का इस साल का नुकसान 3,629 करोड़ है. उस के साथ काम कर रही जोमैटो भी भारी नुकसान में है और उस ने 550 करोड़ की सहायता अभी किसी फाइनैंशियल इनवैस्टर से ली है. स्विग्गी को पिछले साल 1,617 करोड़ का नुकसान हुआ था पर फिर भी उस का मैनेजमेंट धड़ाधड़ पैसा खर्च करता रहा और अब यह नुकसान दोगुना से ज्यादा हो गया.

स्विग्गी की डिलिवरी से फूले नहीं समा रहे ग्राहक यह भूल रहे हैं कि इस नुकसान की कीमत उन से आज नहीं तो कल वसूली ही जाएगी. जितनी भी ऐप बेस्ड सेवाएं हैं वे मुफ्त या सस्ती होने के कारण भारी नुकसान में कुछ साल चलती हैं पर जब वे मार्केट पर पूरी तरह कब्जा कर लेती हैं तो खून चूसना शुरू कर देती हैं.

स्विग्गी अब धीरेधीरे छोटे रेस्तरांओं का बिजनैस खत्म कर रही है और वह क्लाउड किचनों से काम करा रही है. वह अब डिलिवरी बौयज को दी गई शर्तों पर काम करने को मजबूर कर रही है. स्विग्गी से जो रेस्तरां नहीं जुड़ता वह देरसवेर बंद हो जाता है चाहे उस रेस्तरां का खाना और उस की सेवा कितनी ही अच्छी क्यों न हो.

स्विग्गी ने घरों की औरतों को काम न करने का नशा डाल दिया है और इस के लिए 1 साल का 3,600 करोड़ का खर्च करता है. अगर औरतें घरों की किचन में नहीं घुसेंगी तो उन्हें देरसवेर वही खाना पड़ेगा जो स्विग्गी या उस जैसा कोई ऐप मुहैया करेगा. घरों में से किचन गायब हो जाएगी तो लोग दानेदाने के लिए किसी ऐप को तलाशेंगे.

जैसे अब किराने की दुकानों को अमेजन व जियो भारी नुकसान सह कर बंद करा रहे हैं वैसे ही स्विग्गी लोगों का स्वाद बदल रही है. आप वह खाइए जो मां या पत्नी ने नहीं बनाया और डिलिवर हुआ. मां या पत्नी का प्रेम उस खाने से पैदा होता है जो वे प्रेम से बनाती हैंखिलाती हैं. जब इस प्रेम की ही जरूरत नहीं होगी तो घर की छतें टूटने लगेंगी. यह बड़ी कौरपोरेशनों के लिए अच्छा है. सदियों तक राजा और धर्मों के ठेकेदार घरों से आदमियों को निकाल कर युद्ध या धर्म प्रचार में लगाते रहे हैं और दोनों काम करने वालों को जम कर लूटते रहे थे.

उन की औरतें बेबसअनचाहीकेवल बच्चे पैदा करने वाली मशीनें बन कर रह जाती थीं. अब इन औरतों को भी कौरपोरेशनों ने टारगेट करना शुरू कर दिया है और उन से किचन छिनवा दी है. सैनिकों या धर्म के सेवकों को मैसों व लंगरों में खाना खाना पड़ता थाएक जैसावही स्विग्गी करेगा. दिखावटीनकली सुगंध वाला खाना जिस में सस्ती सामग्री लगे लेकिन पैकिंग बढि़या हो और दाम इतने कि न दो तो खाना मिले ही नहीं.

भारत में नए साल पर स्विग्गी ने 13 लाख खाने डिलिवर किए क्योंकि इतने घरों की औरतों ने खाना बनाने से इनकार कर दिया. इस डिलिवरी में कौन लगा थास्विग्गी की स्लेव लेबर जो भीड़ में गरम खाना डिलिवर करने में लगी थी. उन के लिए न अब दीवाली त्योहार रह गया हैन नया साल.

3,600 करोड़ का खर्च इतनी बड़ी जनता को घरों में कैद करने में या मोटरबाइक पर गुलामी करने में कुछ ज्यादा नहीं है. इस का फायदा कोई तो उठा रहा है चाहे आप को वह दिखे न.

पीनट फेसपैक से मिनटों में पाएं चेहरे पर निखार

क्या आप नहीं चाहतीं कि आपके चेहरे पर मिनटों में सेलिब्रिटी जैसा ग्लो दिखे. लेकिन अब शायद आप यह सोच रही होंगी कि ऐसा ग्लो या तो स्किन पर नेचुरल होता है या फिर उसके लिए ढेरों पैसे खर्च करने पड़ते हैं . जबकि ऐसा नहीं है. आप घर बैठे ही घर में रखी चीजों से मिनटों में ऐसा ग्लो पा सकती हैं. तो यहां हम बात कर रहे हैं मूंगफली से बनने वाले फेस पैक के बारे में. जो न सिर्फ आपकी स्किन की खोई रंगत को तुरंत वापिस लाने का काम करेगी बल्कि आपके स्किन पोर्स को साफ करके आपकी स्किन को यंग भी बनाएगी.

कैसे बनाएं फेस पैक .

1. पीनट एंड हनी पैक

क्या आपको अचानक से किसी फ्रैंड के घर डिनर का इनवाइट आ गया है और ऐसे में आप यही सोच रही हैं कि न तो कपड़े रेडी हैं और न ही कई दिनों से फेसिअल करवाया है. अगर ऐसे तो चली गई तो पता नहीं वो मेरा फेस देख कर क्या क्या कहेगी. ऐसे में अब आप ज्यादा मत सोचिए , हम आपके लिए लाए है पीनट एंड हनी पैक. तो मिनटों में आपको पार्टी जैसा ग्लो देगा.

इसके लिए आप बिना छिलके वाली 2 बड़े चम्मच मूंगफली लेकर उसका ग्राइंडर में स्मूद पेस्ट तैयार करें. फिर इसमें जरूरत के हिसाब से दूध मिलाकर थोड़ा सा हनी मिलाकर इसका स्मूद पेस्ट तैयार करें. और फिर इसे चेहरे पर अप्लाई कर लें. बेहतर रिजल्ट के लिए आप आधा घंटा इस पेस्ट को अपने चेहरे पर जरूर लगाएं और फिर फेस को धो लें. रिजल्ट देखकर आप खुद हैरान रह जाएंगी. इस पैक को हर स्किन टाइप वाले अप्लाई कर सकते हैं. ड्राई स्किन पर इसका रिजल्ट और बेहतर आता है.

2. ऑरेंज एंड पीनट पैक

संतरा जहां डार्क सर्कल्स, ब्लैकहेड्स, डेड सेल्स को रिमूव करने का काम करता है वहीं पीनट में प्रोटीन होने के कारण ये स्किन रीजनरेशन व स्किन की रेडनेस को कम करने में मददगार होता है. तो जब आप इसके फायदे जान गई हैं तो सोचिए इससे तैयार पैक स्किन के लिए कितना फायदेमंद होगा.

इसके लिए आप एक संतरे को छील लें. और फिर इसमें 1 बड़ा चम्मच के लगभग इसमें पीनट और थोड़ा सा दूध ऐड करके इसका स्मूद पेस्ट तैयार करें. और फिर इससे चेहरे व गर्दन पर 10 मिनट तक लगा छोड़ दें. और फिट पानी से धो लें. तुरंत ही आपको अपनी स्किन पर ग्लो दिखने लगेगा.

3. पीनट एंड कॉफी पाउडर

कॉफ़ी स्किन एक्सफोलिएटर का काम करता है. ये बहुत ही माइल्ड होने के कारण स्किन को किसी भी तरह का कोई नुक्सान नहीं पहुंचाता. वहीं पीनट स्किन सेल्स के पुन निर्माण का कार्य करके स्किन को यंग बनाने का काम करता है.

इसके लिए आप बराबर मात्रा में पिसा हुआ पीनट और कॉफी पाउडर लेकर उसमें थोड़ा सा दूध और शहद मिलकर पेस्ट तैयार करें. फिर इस पेस्ट को चेहरे पर अप्लाई करके हलके हाथों से मसाज करें , जिससे डेड स्किन सेल्स रिमूव हो सके. फिर इसे चेहरे पर 5 मिनट तक लगा छोड़ दें और धो दें. आपको अपनी स्किन पर चमक के साथ साथ काफी सोफ्ट भी लगेगी.

4. एग एंड पीनट

एग को स्किन क्लींजिंग के लिए बेस्ट माना जाता है. वहीं पीनट में फैटी एसिड्स की मौजूदगी होने के कारण झुर्रियों, फाइन लाइन्स और डलनेस की समस्या से निजात मिलता है.

इसके लिए आप अच्छे से ग्राइंड किए 1 चम्मच पीनट में 1 अंडा डालकर उसका अच्छे से क्रीमी पेस्ट बनाएं. फिर इससे चेहरे पर 10 – 15 मिनट के लिए लगा छोड़ दें. फिर पानी से चेहरे को साफ कर लें. आप अपने चेहरे पर एक अलग ही रौनक देखेंगी.

क्यों है पीनट स्किन के लिए फायदेमंद

– झुर्रियां स्किन की इलास्टिसिटी यानि उसके लचीलेपन को कम करती है. जबकि पीनट में विटामिन सी होने के कारण ये स्किन की इलास्टिसिटी को मैंटेन रखने का काम करता है.

– पीनट में ओमेगा 6 फैटी एसिड होने के कारण ये स्किन की जलन को कम करने में मददगार है.

– ये एक ऐसा मास्क है , जो घर में रखी चीजों से बनने के साथ साथ स्किन पर जमा गंदगी को मिनटों में हटाकर क्लियर स्किन देने का काम करता है.

– इसमें फाइबर की मौजूदगी स्किन से विषैले प्राधातो को बाहर निकालकर स्किन पर नेचुरल ग्लो लाने का काम करती है. तो हुआ न पीनट स्किन के लिए फायदेमंद.

जिंदगी के हर दौर में महिलाओं के लिए हेल्थ इंश्योरेंस है जरूरी

मैटरनिटी एक महिला के जीवन में सबसे खूबसुरत पलों में से एक होता है. हालांकि, यह अपने साथ भावनात्मक और वित्तीय जिम्मेदारी लेकर आता है. जीवन बदलने वाले इस फैसले को लेने से पहले, मैटरनिटी के साथ आने वाली जिम्मेदारियों के लिए वित्तीय रूप से तैयार होना बहुत ही जरूरी है. इसके अलावा, गर्भावस्था के दौरान या बाद में किसी भी मेडिकल इमरजेंसी का सामना करने के लिए एक सही हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का होना भी उतना ही जरूरी है.

अमित छाबड़ा, हेड-हेल्थ एंड ट्रेवल इंश्योरेंस, पॉलिसीबाज़ार.कॉम का कहना है, “स्वास्थ्य देखभाल की लागत तेजी से बढ़ने के साथ, अस्पताल में भर्ती होने के दौरान कवरेज मिलना बहुत ही महत्वपूर्ण है. खासतौर से उन महिलाओं के लिए जिन्हें अपने आश्रितों की देखभाल करनी होती है, उनके लिए जीवन के हर चरण में पर्याप्त कवरेज होना आवश्यक है. और जिस तरह मैटरनिटी के दौरान उनकी चिकित्सीय ज़रूरतें विकसित होती हैं, उसी तरह उनका इंश्योरेंस कवरेज भी होना चाहिए. अलग-अलग राइडर्स का उपयोग करके, महिलाएं अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को जीवन के प्रत्येक चरण के मुताबिक तैयार कर सही लाभ प्राप्त कर सकती हैं. साथ ही सभी महिलाओं को अपनी फाइनेन्शियल प्लानिंग करते समय उनकी बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए क्योंके वे गर्भावस्था से लेकर बुढ़ापे तक विभिन्न चरणों से गुजरती हैं”.

होने वाली मां: जिस समय आप अपने परिवार का आगे बढ़ाने की योजना बनाते है, एक मां बनने का सफर वहीं से शुरू हो जाती है, और इसी के साथ फाइनेन्शियल प्लानिंग भी शुरू हो जाती है. गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह की परेशानी न हो इसके लिए, होने वाली मां को शुरू से ही चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है. यहीं पर मैटरनिटी बेनिफिट वाली हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी सामने आती है. इस तरह की इंश्योरेंस पॉलिसी एक निश्चित अवधि तक बच्चे के जन्म से संबंधित सभी खर्चों को कवर करती है – जिसमें गर्भावस्था से पहले और गर्भावस्था के बाद दोनों समय का खर्च शामिल होता है। वास्तव में, अब ऐसी योजनाएं हैं जो गर्भ धारण करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए आईवीएफ लागत को भी कवर करती हैं.

आम तौर पर मैटरनिटी बेनिफिट प्राप्त करने से पहले पॉलिसी के आधार पर दो से चार साल का वेटिंग पीरियड होता है. हालांकि, अब ऐसी पॉलिसी भी उपलब्ध हैं जिन्होंने इस वेटिंग पीरियड को घटाकर एक साल कर दिया है. इसलिए, मैटरनिटी बेनिफिट के साथ हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी जल्दी ही लेनी चाहिए क्योंकि मौजूदा गर्भावस्था को मैटरनिटी बेनिफिट के तहत कवर नहीं किया जाएगा.
गर्भावस्था से पहले और बाद की देखभाल के अलावा, डिलीवरी के दौरान होने वाला खर्च बहुत ज्यादा होता है जो कुछ लाख तक हो सकता है, खासकर सर्जिकल डिलीवरी में। इस खर्च को कवर करने वाली इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदना यह सुनिश्चित करता है कि आप अपने शहर में उपलब्ध अच्छी से अच्छी मेडिकल सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। इससे न केवल नई मां के लिए बल्कि उसके बच्चे के लिए भी उचित देखभाल मिल पाएगी.

नई माताएं: गर्भावस्था के दौरान ध्यान मां के स्वास्थ्य पर, और अजन्मे बच्चे पर होता है। हालांकि, जैसे ही बच्चा पैदा होता है, दुनिया फिर बच्चे के चारों ओर घूमती है। इस अवस्था में नवजात शिशु की इम्यूनिटी क्षमता कम होती है जिसकी वजह से शिशु संक्रमण और बीमारियों के प्रति बहुत ज्यादा सेसेंटिव होता है. साथ ही उसे समय-समय पर टीका लगवाने की भी जरूरत होती है, जिसम एक बड़ा खर्चा होता है.
मैटरनिटी कवरेज वाली कई हेल्थ इंश्येरंस पॉलिसी नवजात शिशु के लिए भी कवर प्रदान करती हैं, जो ऐसे समय में बहुत ही लाभदायक हो सकती है. हालांकि, यह कवरेज एक निश्चित समय तक ही रहता है. इसलिए एक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी जो बच्चे को आधार योजना से जोड़ने की सुविधा प्रदान करती है, इस स्टेज में माताओं के लिए एक सही विकल्प है. इसके अलावा, लगभग सभी प्रमुख इंश्योरेंस कंपनियां हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की पेशकश करती हैं जो बच्चों के टीकाकरण को कवर करती हैं. अगर पॉलिसी के नियम और शर्तों को देखते हुए, युवा मां अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के साथ नवजात की देखभाल के लिए अतिरिक्त ऐड-ऑन को विकल्प भी चुन सकती हैं.

हालांकि, इस स्तर पर स्वास्थ्य देखभाल केवल बच्चे तक ही सीमित नहीं है. बच्चे के जन्म के बाद देखभाल के लिए मां को भी कवर करने की जरूरत है. इसके अलावा, जैसे-जैसे समय बीतता है, एक मां की इंश्योरेंस संबंधी ज़रूरतें मैटरनिटी से अलग भी विकसित होंगी और उसे अपने पूरे स्वास्थ्य को कवर करने की आवश्यकता होगी. इसलिए महिलाओं को स्तर कैंसर, गठिया, हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों से सुरक्षा पर भी विचार करना चाहिए और उसके मुताबिक एक व्यापक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का चुनाव करना चाहिए.

सिंगल मदर: सभी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी सिंगल महिलाओं को उनकी मैटरिनिटी पॉलिसी में शामिल नहीं करती हैं, लेकिन बाजार में कुछ ऐसी योजनाएं भी उपलब्ध हैं जो सिगंल महिलाओं और सिंगल मदर्स को मैटरनिटी बेनिफिट प्रदान करती हैं. हालांकि, यहां सबसे महत्वपूर्ण कारक है वेटिंग पीरियड है. पॉलिसी के नियमों और शर्तों के अनुसार महिला द्वारा वेटिंग पीरियड को पूरा करने के बाद, वह अपनी वैवाहिक स्थिति के बावजूद पॉलिसी के मैटरनिटी बेनिफिट का क्लेम करने के लिए पात्र है.

वृद्ध माताएं: जैसे-जैसे समय बीतता है और बच्चा बड़ा होकर वयस्क बनता है, मां की भी उम्र बढ़ती है और उसकी स्वास्थ्य देखभाल और बीमा की ज़रूरतें और विकसित होती हैं. ऐसे समय में एक ऐसी योजना की आवश्यकता होगी जो गंभीर बीमारियों को कवर करे. उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों की तुलना में महिलाओं में गठिया और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी स्थितियों का खतरा ज्यादा होता है. इस स्तर पर इन गंभीर बीमारियों को कवर करने के लिए ऐड-ऑन कवर पर विचार करना ही बुद्धिमानी है.

अगर इस स्तर पर, वृद्ध मां अपनी बदली हुई परिस्थितियों के कारण पूरी तरह से एक नए हेल्थ कवर की तलाश कर रही है, तो उसे पहले दिन से ही पहले से मौजूद बीमारियों को कवर करने वाली पॉलिसी की तलाश करनी होगी. साथ ही सीनियर सिटीजन स्पेशल योजनाएं भी हैं जो 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों द्वारा किए गए मेडिकल खर्च को कवर करती हैं। चूंकि सीनियर सिटीजन को एक रेगुलर मेडिकल चेक-अप की आवश्यकता होगी, इसलिए ऐसी योजनाएं सहायक होती हैं क्योंकि वे ऐसे खर्चों के लिए कवर प्रदान करती हैं.

हेल्थ इंश्योरेंस के लिए अपनी आय का कितना हिस्सा खर्च करना चाहिए?

COVID-19 महामारी ने सभी को सिखाया है कि स्वास्थ्य को हर चीज से ऊपर प्राथमिकता देना बहुत ही जरूरी है। एक अच्छी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद में, एंबुलेंस खर्च और डे-केयर प्रक्रियाओं से लेकर आईसीयू और कमरे के किराए को कवर करती है और चुनी गई पॉलिसी के प्रकार के आधार पर कैशलेस हॉस्पिटलाइजेशन की सुविधा भी प्रदान करती है.
हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय वेतन का अनुपात 4-5% होना चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर आप 1,00,000 रुपये मासिक कमाते हैं, तो 4000-5000 रुपये के बीच हेल्थ इंश्योरेंस के खर्च को अलग रखने की सलाह दी जाती है. हालांकि, अगर आपके परिवार की पुरानी मेडिकल हिस्ट्री में कई समस्याएं रही है या परिवार के किसी सदस्य को कोमोरबिडिटी है,तो व्यक्ति को पहले से मौजूद बीमारियों को कवर करने वाला प्लान खरीदना चाहिए और इसे बेहतर सुरक्षा प्राप्त करने के लिए आवश्यकता के अनुसार उपलब्ध ऐड-ऑन्स का विकल्प भी चुनना चाहिए.

लाल साया: भाग-3

‘‘क्या करते हैं इस के पिता?‘‘

‘‘खेतों में मजदूरी करते हैं. बहुत नेक इनसान हैं दोनों. ये उन की इकलौती संतान है.”

‘‘आप उन से बात कराइए.”

‘‘आप मजदूर परिवार से बहू लाएंगी?”

‘‘इतनी योग्य बहू मिल रही है, तो क्यों नहीं?”

‘‘बीबीजी, एक बार विशेष से तो पूछ लीजिए.”

‘‘वो देखिए भाभी, डांस कर के सीधे विशेष के पास खड़ी है. कैसे दोनों हंसहंस कर बातेें कर रहे हैं. आप को पूछने की जरूरत लग रही है क्या?” मुसकरा कर विमला देवी ने पूछा.

रजनी के लिए आए इस प्रस्ताव से छुटकी की शादी की खुशी दुगुनी हो गई. विशेष ने मौका देख रजनी को किनारे बुलाया और बोला, ‘‘मुझे तुम्हें कुछ बताना है.‘‘

‘‘अब जो भी बताना, शादी के बाद ही बताना,” कहती हुई रजनी मंडप में जा कर छुटकी के पास बैठ गई.

दो दिन के आगेपीछे दोनों सहेलियां एक ही शहर में विदा हो कर आ गईं. गाड़ी से उतर कर रजनी अपनी कोठी को देख कर खुद ही अपने भाग पर विश्वास नहीं कर पा रही थी. धीरेधीरे रजनी अपने इस नए घर में रचनेबसने लगी. परंतु उसे जाने क्यों किसी तीसरे के होने का एहसास लगातार होता. विशेष भी सपने में लगातार किसी से माफी मांगता रहता. कभीकभी अचानक वह डर कर उठ जाता. पूछने पर वह कहता, ‘‘कुछ नहीं, सो जाओ.‘‘

एक दिन उसे आंगन में एक लड़की लाल सूट में दिखाई दी. जब रजनी उस के पीछे भागी, तो वह आंगन से पीछे की बगिया की ओर चली गई. रजनी उस के पीछेपीछे वहां पहुंची तो उसे लगा कि वह लाल साया उस घड़े वाली मूर्ति में समा गया है.

यह देख रजनी बुरी तरह डर गई. सास से कहा, तो उन्होंने कहा, ‘‘तुम्हारा भ्रम है बहू.‘‘

कई दिनों से रजनी देख रही थी कि विशेष के फोन पर किसी उमेश का फोन बारबार आ रहा था. परंतु वह उठा नहीं रहा था. पर उस फोन के बाद विशेष बहुत विचलित हो जाता था. रजनी समझ नहीं पा रही थी कि समस्या क्या है. पूछने पर विशेष टाल दे रहा था.

रजनी ने इस समस्या की तह में जाने का फैसला किया. रसोई में जा कर वह बोली, ‘‘महेश भैया चाय बन गई क्या?‘‘

‘‘हां, हां, बस बनी ही समझो बहूरानी. आज आप जल्दी जाग गए.‘‘

‘‘हां, अच्छा यह बताइए कि आप के भैया के दोस्त कौनकौन हैं?‘‘

‘‘काहे?‘‘

‘‘ऐसे ही, कोई आता ही नहीं है ना, इसीलिए पूछा. कोई काम नहीं था. जाने दीजिए.‘‘

‘‘बहूरानी, भैया के ज्यादा दोस्त नहीं हैं. घर पर तो केवल दो ही दोस्त देखे हैं हम ने. एक उदय और एक उमेश. बहुत समय पहले आए रहे,” चाय पकड़ता हुआ महेश बोला. पता नहीं, क्या सोच कर उस ने रिचा का नाम नहीं लिया.

दिन में रजनी अपनी सहेली छुटकी के घर चली गई. वहां लंच पर आए उस के पति सबइंस्पेक्टर विजय से भी मुलाकात हो गई.

‘‘जीजाजी, आप की थोड़ी मदद चाहिए थी.”

‘‘अरे साली साहिबा, आप आदेश दीजिए.”

‘‘मुझे लगता है कि मेरे पति को कोई परेशान कर रहा है.”

‘‘कौन…?”

‘‘यह मैं नहीं जानती, पर मुझे दो पर शक है.‘‘

‘‘अच्छा, किस पर…?‘‘

‘‘एक मेरे पति का दोस्त है उमेश, उस पर और एक आत्मा है.”

‘‘आत्मा…? पागल हुई है क्या रजनी तू?” छुटकी हड़बड़ा कर बोली.

‘‘एक मिनट छुटकी, उसे अपनी बात कहने दो.”

कमरे में मौन पसर गया.
‘‘तो साली साहिबा, आप को वह आत्मा कभी दिखाई दी क्या?”

‘‘जी, आज सपने में आ कर मुझसे मुक्ति दिलाने की प्रार्थना कर रही थी. न्याय दिलाने की गुहार लगा रही थी.”

‘‘सपने में…?”

‘‘हां, आज सपने में आई थी. वैसे दो बार घर के आंगन में लाल सूट पहन कर घूमते हुए देखा है मैं ने उसे. पर उस के पीछे जाने पर वह बगीचे में लगी मूर्ति में समा जाती है.‘‘

अपने पर्स में से रजनी ने एक कागज का टुकड़ा निकाला, ‘‘यह उमेश का नंबर है. मैं आप की सुविधा के लिए ले आई थी.”

‘‘यह आप ने बहुत अच्छा किया. आप मुझे विशेष का नंबर भी दे दीजिए. मुझे थोड़ा समय दीजिएगा. मैं इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश करता हूं. आप का एरिया मेरे थाने में ही आता है.”

हफ्ता भी नहीं बीता था कि सुबहसुबह विनय रजनी के घर आ गए.

‘‘अरे रजनी देखो तो सही, तुम्हारी सहेली के पति आए हैं,” स्वयं को संयत रखते हुए विशेष ने पत्नी को आवाज दी और विनय को बैठक में ले आया.

‘‘मुझे आप से कुछ बात करनी थी?”

‘‘मुझ से…?‘‘ आश्चर्य और घबराहट दोनों थी विशेष की आवाज में.

‘‘आप को कोई ब्लैकमेल कर रहा है?‘‘ विजय ने सीधेसीधे पूछा.

‘‘ज्ज ज जी म म मेरा मतलब है क्या?” विशेष बुरी तरह घबरा गया.

‘‘देखिए विशेष, हम रिश्तेदार हैं. मेरी हमदर्दी आप के साथ है. मैं एक ब्लैकमेल के केस को हल करने की जांच में लगा हुआ हूं. उसी सिलसिले में आप का नंबर भी मिला. उमेश एक ब्लैकमेलर है. उसे तो खैर हम पकड़ ही लेंगे, परंतु वह आप को बारबार फोन क्यों कर रहा है. यही जानने के लिए मैं आया हूं,‘‘ विजय शांत स्वर में बोले.

विशेष सिर पकड़ कर सोफे पर बैठ गया. उस के नेत्र बरस रहे थे. पत्नी और मां भी आ गए थे. रजनी का हाथ पकड़ कर वह बोला, ‘‘रजनी ये ही वो बात है, जो मैं शादी से पहले तुम्हें बताना चाहता था, पर तब तुम ने सुना नहीं. बाद में इसे बताने, ना बताने का कोई अर्थ नहीं था. तुम्हारे पूछने पर भी नहीं बताया.

‘‘काश, वह काली रात मेरे जीवन में ना आई होती. उस रात हम छत पर पार्टी कर रहे थे. मैं पीता नहीं हूं. परंतु दोस्तों ने मुझे बहुत पिला दी थी. शायद इसीलिए मुझे चढ़ गई थी. मुझे कुछ होश नहीं था. दोस्तों ने बताया कि नशे में मैं ने रिचा को छत से धक्का दे दिया था. वह सिर के बल गिर कर मर गई.

‘‘मुझे तो होश नहीं था. उन दोनों ने ही रिचा की लाश को ठिकाने लगाया और इस राज को अपने तक सीमित रखने का वादा कर चले गए. पिताजी ने दोनों को पच्चीसपच्चीस लाख रुपए दिए थे. थोड़े समय बाद उमेश पिताजी को ब्लैकमेल करने लगा. एक दिन पिताजी को बहुत गुस्सा आ गया. उसी में हार्ट अटैक से उन की मृत्यु हो गई. दस महीने वह शांत रहा और अब फिर से वह मुझे फोन कर रहा है. मैं जवाब नहीं दे रहा. जानता हूं कि एक बार दे दूंगा तो इस का कोई अंत नहीं होगा. कोई रास्ता भी नहीं सूझ रहा. ऊपर से मुझे और रजनी को रिचा लाल सूट में आंगन में घूमती दिखाई देती है. उस दिन उस ने यही लाल सूट पहना था,” विशेष ने विजय की ओर देखा.

‘‘रास्ता तो एक ही है विशेष, आप को आत्मसमर्पण करना होगा,” विजय बोले.

‘‘लेकिन जीजाजी, ये तो वो दोस्त कह रहे हैं न कि धक्का विशेष ने दे दिया था. क्या पता, उन में से ही किसी ने दिया हो?‘‘

‘‘हां, यह संभव है, पर जब तक सिद्ध नहीं होता, तब तक तो…”

‘‘क्या हम उस लाश की फौरेंसिक जांच नहीं करा सकते? उस से तो पता चल जाएगा ना?” रजनी ने पूछा.

‘‘हां, उस से पता चल जाएगा. और यह मैं करा भी दूंगा. फिलहाल तो आप को समर्पण करना होगा. मेरा एक दोस्त है, बहुत अच्छा वकील है. मैं उस से बात कर लूंगा. वह आप का केस लड़ेगा. उदय और उमेश को पकड़ने के लिए दो टीमें जा चुकी हैं.”

फौरेंसिंक टीम ने कंकाल को जब निकाला तो उस के नीचे एक रिवौल्वर भी दबी मिली. और जब रिपोर्ट आई, तो सब चकित रह गए. रिपोर्ट हूबहू वही कह रही थी, जो उदय ने कोर्ट में बयान दिया था. रिचा की मौत गिरने से नहीं गोली लगने से हुई थी. रिवौल्वर पर उमेश के फिंगरप्रिंट्स भी मिले थे.

मजिस्ट्रेट के सामने इकबालिया स्टेटमैंट में उदय ने बयान दिया, ‘‘उस रात उमेश ने रिचा के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा था, जिसे उस ने मना कर दिया. गुस्से में उमेश ने गोली चला दी और वो रिचा के सिर के पार हो गई. विशेष नशे में धुत्त पड़ा था. उदय डर कर चिल्लाने लगा, तो उस ने उसे शांत कराया और समझाया कि जो हो गया, वह हो गया. विशेष के पिता बहुत अमीर हैं. हम रिचा को गिरा कर कहेंगे कि विशेष ने नशे में उसे धक्का दे कर मार डाला और इस राज के बदले उन से पैसे वसूल लेंगे. और यही हुआ. अंकल ने बिना मांगे हमें पच्चीस-पच्चीस लाख रुपए दे दिए. उस के बाद का मुझे कुछ पता नहीं. हम ने एकदूसरे से कोई संपर्क नहीं किया.”

फौरेंसिक रिपोर्ट और चश्मदीद की गवाही के आधार पर विशेष को कोर्ट ने बाइज्जत बरी कर दिया.

पत्नी व मां के साथ कोर्ट से बाहर आ कर इंस्पेक्टर विजय से हाथ मिलाते हुए विशेष बोला, ‘‘आप ने और रजनी ने मिल कर मुझे जेल से ही नहीं, बल्कि लाल साए के आतंक से भी मुक्त करा दिया है. इतने समय बाद आज मैं सुकून से सो सकूंगा.”

लाल साए का राज अब राज नहीं था. वह असल में उमेश ही था, जो खिड़की से लाल ओढ़नी में घुस कर झलक दिखा कर भाग जाता था. उदय के साथ मिल कर उस ने यह नाटक इन फालतू बातों में विश्वास करने वाले परिवार को पैसे देते रहने के लिए रचा था.

रजनी ने पहले ही दिन पैरों के निशान से भांप लिया था कि वे मर्द के निशान हैं किसी आत्मावात्मा के नहीं.

गरमी में फूड पौइजनिंग से बचाएंगी ये 5 चीजें

बिजी लाइफस्टाइल में अक्सर हम बाहर का खाना खाते है, जो सेहत के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं होता. वहीं अगर आप गरमियों में भी ज्यादा बाहर का खाना खाते हैं तो ये आपकी हेल्थ के साथ खिलवाड़ हो सकता है.  तेज गरमी में ज्यादातर खाना खराब हो जाता है या खराब होने की आशंका बनी रहती है. जिसके कारण आप फूड पौइजनिंग का शिकार हो जाते हैं. इसीलिए आज हम आपको फूड पौइजनिंग से बचे रहने और अगर फूड पौइजनिंग हो जाएं तो उसका घर पर कैसे इलाज करें यह बताएंगे.

1. फूड पौइजनिंग में नींबू का करें इस्तेमाल

नींबू में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण मौजूद होते हैं. जिसका इस्तेमाल पानी के साथ करें तो बौडी में मौजूद फूड पौइजनिंग वाले बैक्टीरिया मर जाते हैं. आप खाली पेट नींबू-पानी बनाकर पी सकते हैं या चाहें तो गर्म पानी में नींबू निचोड़ें और पी जाएं.

2. सेब के सिरके का इस्तेमाल करना होगा फायदेमंद

-सेब के सिरके में मेटाबालिज्म रेट को बढ़ाने वाले तत्व होते हैं. खाली पेट इसका सेवन करने पर यह भी खराब बैक्टीरिया को मारने में मदद करते हैं.

3. फूड पौइजनिंग से बचाएगी तुलसी

तुलसी में मौजूद रोगाणुरोधी गुण सूक्ष्म जीवों से लड़ते हैं. तुलसी का सेवन आप कई तरीकों से कर सकते हैं. एक कटोरी दही में तुलसी की पत्तियां, कालीमिर्च और थोड़ा सा नमक डालकर खा सकते हैं. पानी व चाय में भी तुलसी की पत्तियां डालकर पी सकते हैं.

4. फूड पौइजनिंग के लिए दही है एंटीबायोटिक

दही एक प्रकार का एंटीबायोटिक है, जिसमें थोड़ा सा काला नमक डालकर इसे खा सकते हैं.

5. एंटी फंगल गुण से भरपूर है लहसुन

लहसुन में एंटी फंगल गुण होते हैं. जिसे आप सुबह खाली पेट लहसन की कच्ची कलियां पानी के साथ खा सकते हैं. इससे भी राहत मिलेगी.

ज्विगाटोः नंदिता दास की भटकी हुई पटकथा, अभिनय से कोसों दूर कपिल शर्मा

रेटिंगः एक स्टार

निर्माताः समीर नायर,दीपक सहगल और नंदिता दास

लेखकः नंदिता दास और समीर पाटिल

निर्देषकः नंदिता दास

कलाकारः कपिल षर्मा,षहाना गोस्वामी,गुल पनाग,सयानी गुप्ता,स्वानंद किरकिरे,युविका ब्रम्ह,प्रज्वल साहू व अन्य

अवधिः एक घंटा 42 मिनट

मषहूर अभिनेत्री नंदिता दास ने 2008 में गुजरात दंगों पर आधारित फिल्म ‘फिराक’ का लेखन व निर्देषन किया था.फिर दस वर्ष बाद 2018 में उन्होेने दूसरी फिल्म ‘‘मंटो’’ का निर्देषन किया था.और अब बतौर निर्देषक व सहनिर्माता वह अपनी तीसरी फिल्म ‘‘ज्विगाटो’’ लेकर आयी हैं,जो कि कहीं से भी नंदिता दास कील फिल्म नही लगती.इस फिल्म से नंदिता दास ने भी साबित कर दिया कि जब कलाकार, सरकार या सरकारी धन के लिए काम करता है,तो वह अपनी कला के साथ केवल अन्याय ही करता है.जी हाॅ!नंदिता दास ने इस फिल्म को उड़ीसा राज्य की फिल्म पाॅलिसी को ध्यान मे ेरखकर ही फिल्माया है,जिससे वह उड़ीसा सरकार से सब्सिडी के रूप में एक मोटी रकम एंठ ले.मगर इस प्रयास में उन्होने फिल्म की विषयवस्तु का सत्यानाष कर डाला.मगर वर्तमान समय का एक तबका जरुर खुष होगा कि नंदिता दास ने भुवनेष्वर के मंदिरों के दर्षन करा दिए.

परिणामतः

वह बेरोजगारी,सामाजिक असमानता और राजनीतिक अंतः दृष्टि को ठीक से चित्रित करने की बजाय एक उपदेषात्मक व अति नीरस फिल्म बना डाली.कम से कम नंदिता दास से इस तरह की उम्मीद नही की जा सकती थी.यह महज संयोग है कि नंदिता दास निर्देषित यह तीसरी फिल्म बतौर अभिनेता कपिल षर्मा की तीसरी फिल्म है.सबसे पहले कपिल षर्मा ने असफल फिल्म ‘‘किस किस को प्यार करुं’’ में अभिनय किया था. फिर उन्होने असफल फिल्म ‘फिरंगी’ में अभिनय किया,जिसका उन्होने निर्माण भी किया था और अब उन्होेने नंदिता दास के निर्देषन में तीसरी फिल्म ‘‘ज्विगाटो’ मंे अभिनय किया है.इसी के साथ उन्होने साबित कर दिखाया कि उनके अंदर अभिनय की कोई क्षमता नही है,वह तो महज टीवी पर उलजलूल हकरतें व द्विअर्थी संवादांे के माध्यम से लोगांे को कभी कभार जबरन हंसा सकते है

कहानीः

कोविड महामारी के बाद पूरे देष में आर्थिक हालात खराब हुए हैं. बेरोजगारी बढ़ी है. लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा.दो वक्त की रोटी व परिवार को चलाने के लिए लोग मजबूरन अनचाहा काम भी करने पर मजबूर हुए हैं,जहां उन्हे अच्छे पैसे नही मिल रहे.इसी पृष्ठभूमि में नंदिता दास ने यह कहानी रची है.यह कहानी है रांची से नौकरी की तलाष में भुवनेष्वर,उड़ीसा आकर बसे मानस महतो की.मानस महतो ( कपिल षर्मा) अपनी पत्नी प्रतिमा ( षहाना गोस्वामी),बूढ़ी मां माई (शांतिलता पाधी),एक बेटे कार्तिक (प्रज्वल साहू) व एक बेटी पूरबी (युविका ब्रह्मा)के साथ रहते हैं .वह एक घड़ी कंपनी मंे मैनेजर थे,मगर अचानक नौकरी चली जाती है और पूरे आठ माह की बेरोजगारी के बाद मानस को ‘ज्विगाटो’ कंपनी में डिलीवरी ब्वौय की नौकरी मिलती है,जहां काम का दबाव होने के अतिरिक्त कई अन्य दबाव भी हैं.अब मानस का जीवन दंड देने वाले एल्गोरिदम, असभ्य ग्राहकों, तत्काल समीक्षा और सारी शक्ति रखने वाली कंपनी की दया पर आश्रित है. मानस नेकदिल इंसान है जो अब भी मानता है कि गृहस्थी पालना करना उसकी जिम्मेदारी है.प्रतिमा अपने पति की मदद के लिए मालिष का काम करती है.पर उसे अच्छा नही लगता.तब वह एक षाॅपिंग माल में नौकरी करना चाहती है.पर मानस इंकार कर देता है.लेकिन एक दिन जब मानस को ‘ज्विगाटो’ से बाहर कर दिया जाता है,तब वह पत्नी के षाॅपिंग माल में नौकरी करने पर खुषी जाहिर करता है.

लेखन व निर्देषनः

‘ज्विगाटो’ के पहले दृष्य से अंतिम दृष्य तक के एक भी दृष्य में कोई दम नही है.फिल्म दर्षकों को बांधकर रखने मे पूरी तरह से विफल रहती है. पटकथा अति घटिया है.ऐसा लगता है कि उड़ीसा सरकार ने नंदिता दास से कहा कि हम सब्सिडी(उड़ीसा सरकार अपनी फिल्म पौलिसी के तहत उड़ीसा में फिल्माए जाने पर डेढ़ करोड़ से तीन करोड़ तक की सब्सिडी देती है. ) के रूप में धन देंगें और आप फिल्म बना दे,जिसमें राज्य को चित्रित किया जाएं.नंदिता दास ने सोचा कि एक डिलीवरी ब्वौय ही पूरे षहर की सड़कों पर घूम सकता है,मंदिर,छोटी बस्ती,चमचमाती इमारतों ,बंगलों से लेकर पब तक में जा सकता है.बस उन्होने ‘ज्विगाटो’ बना डाली. नंदिता दास ने बेरोजगारी का मुद्दा भी उठाया है,मगर बहुत ही सतही स्तर पर ही उठाया.एक डिलीवरी ब्वौय के संघर्ष को भी वह ठीक से चित्रित नहीं कर पायी. वास्तव में पूरी फिल्म में वह उड़ीसा सरकार के इनीसिएटिब का पालन करते हुए मंदिर वगैरह के अलावा कलर्स चैनल के सीरियल ‘नागिन’ के दृष्य को दिखाने पर ही ध्यान दिया.हमारे देष मे सामाजिक असमानता एक कटु सत्य है.इसे मिटाना संभव नही है,क्योंकि हमारीे सरकारें भी सामाजिक असमानता को मिटाने में यकीन नही करती.लेकिन इस बात को फिल्म का मुख्य मात्र मानस उभार नही पाता.जबकि छोटे किरदार में मानस की पत्नी प्रतिमा के माध्यम से एक दो जगह सामाजिक असमानता का दंष उभर कर जरुर आता है.प्रतिमा के किरदार के माध्यम से ‘इनडिग्निटी आफ लेबर’ की बात उभर कर आती है.मसलन फिल्म के एक दृष्य मंे जब प्रतिमा माल में नौकरी करने जाती है,तो उन्हे बताया जाता है कि यह ट्वायलेट सिर्फ ग्राहक के लिए हैं,इसका उपयोग वह नहीं कर सकती.उनके लिए नीचे ट्वायलेट बने हुए हैं.तो वहीं एक दृष्य है,जहां प्रतिमा एक उंची चमचमाती इमारत में मसाज के लिए ग्राहक के घर जाती है,तो उससे कहा जाता है कि नौकरों के लिए दूसरी लिफ्त है,उससे वह जाए.मंुबई की लगभग हर इमारत में मकान मालिकों के लिए अलग लिफ्ट होती है और स्ट्ाफ व अन्य लोगों के लिए अलग लिफ्ट होती है.पूरी फिल्म देखने के बाद समझ में नही आता कि नंदिता दास ने फिल्म के अंदर मानस की ट्ेन यात्रा के जो दृष्य रखे हैं,उनका औचित्य क्या है?इसी तरह नंदिता दास ने गुलपनाग,सयानी गुप्ता व स्वानंद किरकिरे के किरदार रखे हैं,जिनका कहानी से कोई संबंध्ंा समझ से परे है.

 

 

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सुखद बात यह है कि नंदिता दास ने अपनी इस फिल्म के माध्यम उसे ‘एप’ आधारित कार्य संस्कृति के मिथक को तोड़ने का काम किया है.फिल्म में मानस को दंडित करने का काम भी एप ही करता है,मगर उनकी प्रगति का निर्धारण करने, उन्हें पुरस्कृत करने या उनकी शिकायतों को सुनने के लिए कभी उपस्थित नहीं होते हैं.पर नंदिता दास ने अपरोक्ष रूप से एक दृष्य में डिलीवरी ब्वौय के गलत व्यवहार पर कुठाराघाट भी किया है. जब सरकारी सहायता की दरकार हो तो फिल्मकार किस तरह डरकर काम करता है,उसका आइना है नंदिता दास की फिल्म ‘ज्विगाटो’.नंदिता दास ने कुछ दृष्यों में सूक्ष्मता से धन व वर्ग विभाजन की तस्वीर पेष की है,पर खुलकर नही.लगता है कि वह इसे पेष करते हुए डर रही हैं.फिल्म का काॅसेप्ट सही है,मगर उसे सही ढंग से निरूपति नही किया गया.इंटरवल के बाद फिल्म काफी धीमी और नीरस हो जाती है. नंदिता दास ने अपनी इस फिल्म में मजदूर वर्ग और देष के सत्तर प्रतिषत लोगों से जुड़ा मुद्दा जरुर उठाया, मगर उसके साथ वह न्याय नही कर पायी.पूरी पटकथा व कहानी भटकी हुई है.

अभिनयः

टीवी पर काॅमेडी षो के माध्यम से लोगों का मनोरंजन करते आ रहे अभिनेता कपिल षर्मा ने ‘ज्विगाटो’ के डिलीवरी ब्वौय मानस के किरदार में साबित कर दिया कि उनका अभिनय से कोसों दूर तक कोई नाता है,मगर ‘इगो’ बहुत ज्यादा है.यह ईगो उनके अभिनय में भी नजर आता है.परिवार की नींव और पति के पीछे चट्टान की तरह खड़ी रहने वाली तथा गर्व या परंपरा को अपनी राह का रोड़ा बनाए बिना समस्याओं के व्यावहारिक समाधान की तलाश करने वाली प्रतिमा के किरदार में षहाना गोस्वामी का अभिनय जानदार है.कार्तिक के किरदार में बाल कलाकार प्रज्ज्वल साहू अपनी छाप छोड़ जाता है.गुल पनाग, स्वानंद किरकिरे और सयानी गुप्ता का फिल्म मंे होना या न होना कोई मायने नहीं रखता.

8 साल बाद दूसरी शादी करेंगी TV एक्ट्रेस दलजीत कौर, 40 की उम्र में बनेंगी दुल्हन

टीवी एक्ट्रेस दलजीत कौर (Dalljiet Kaur) जल्द ही दूसरी शादी करने वाली हैं. वह यूके बेस्ड बिजनेसमैन निखिल पटेल के डेट कर रही हैं. दोनों के रोमांटिक फोटोज और वीडियो सोशल मीडिया पर आते रहते हैं. फिलहाल, दलजीत कौर के प्री-वेडिंग फंक्शन शुरू हो गए हैं. उनकी मेहंदी सेरेमनी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. गौरतलब है कि दलजीत कौर की पहली शादी टीवी एक्टर शालीन भनोट के साथ हुई थी. हालांकि, दोनों का रिश्ता ज्यादा दिनों तक चल नहीं पाया और दोनों का तलाक हो गया था. वहीं, दलजीत कौर के साथ होने वाले पति निखिल पटेल पहले से शादीशुदा है और उनकी दो बेटिया हैं.

दलजीत कौर की मेहंदी का वीडियो

दलजीत कौर की मेहंदी फंक्शन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है. इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि दलजीत कौर के हाथों पर मेहंदी लगाई जा रही है. इसके बाद वह अपने हाथों में रची मेहंदी को दिखाते हुए नजर आ रही हैं. दलजीत कौर अपनी शादी को लेकर काफी एक्साइटेड हैं और इसका नजारा वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है. बता दें कि दलजीत कौर ने उनकी और निखिल पटेल की मुलाकात एक कॉमन फ्रेंड की पार्टी में हुई थी. बातचीत से हुई शुरुआत बाद में प्यार में बदल गई.

 

 

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दलजीत कौर और शालीन भनोट की हुई थी शादी

बताते चलें कि दलजीत कौर और शालीन भनोट ने साल 2009 में शादी की थी. इन दोनों का रिश्ता जम नहीं पाया और दोनों ने साल 2015 में तलाक ले लिया. दलजीत कौर ने शालीन भनोट पर कई आरोप लगाए थे. दलजीत कौर अपने बेटे जॉर्डन की अकेले परवरिश कर रही हैं. शालीन भनोट रियलिटी शो बिग बॉस 16 में नजर आए थे. यहां पर उन्होंने कहा था कि उनके और दलजीत कौर के बीच अच्छी बॉन्डिंग है. इस पर दलजीत कौर ने आपत्ति जताई थी और कहा था कि वह नहीं चाहती हैं कि उनके बारे में कुछ भी बोला जाए.

 

 

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