अभिनेत्री अनन्या खरे किताबें कम पढने को लेकर क्यों है उदास, पढ़े इंटरव्यू

दूरदर्शन की प्रसिद्ध धारावाहिक ‘हमलोग’ और ‘देख भाई देख’ से अभिनय क्षेत्र में कदम रखने वाली अभिनेत्री अनन्या खरे से कोई अपरिचित नहीं. उन्होंने कई पोपुलर शो में काम किया, जिसमे ‘आहट’, ‘पुनर्विवाह’, ‘रंग रसिया’आदि है. अनन्या ने सिर्फ टीवी शो ही नहीं फिल्मों में भी जबरदस्त भूमिका निभाई है, जिसमे ‘चांदनी बार’ फिल्म की दीपा से ‘देवदास’ फिल्म की कुमुद है. कई शानदार किरदारों से इंडस्ट्री में अलग पहचान बनाने वाली अभिनेत्री अनन्या खरे ने पर्दे पर कुछ नकारात्मक और सकारात्मक भूमिका निभाये है और हिंदी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में उन्होंने दर्शकों का प्यार हमेशा पाया है. टेलीविजन हो या हिंदी फिल्में उन्होंने अपने अभिनय से सबको मोहित किया है.

क्रिएटिव माहौल में जन्मी अनन्या के पिता विष्णु खरे एक पत्रकार हुआ करते थे,उनके दादा संगीतज्ञ थे. हालाँकि अनन्या ने कभी अभिनय के बारें में सोचा नहीं था, लेकिन क्रिएटिव फील्ड उन्हें पसंद था और यही वजह थी कि वह मुंबई आई और अभिनय की शुरुआत की. काम के दौरान उन्होंने 10 साल का ब्रेक लिया और पति डेविड के साथ रहने विदेश चली गयी, लेकिन बाद में वह फिर आकर इंडस्ट्री से जुड़ गयी. वह स्पष्टभाषी है और समय के साथ चलना जानती है.

अनन्या स्क्रीन पर निगेटिव किरदार निभाकर अधिक प्रसिद्ध हुई और इस चरित्र में उन्हें काफी पसंद भी किया गया. फिल्म ‘देवदास’ के बाद उन्हें नकारात्मक किरदार के लिए पहचाना गया और उनकी एक अलग पहचान बनी. उनके लिए हर भूमिका को निभाना एक चुनौती होती है. जी टीवी पर उनकी शो ‘मैत्री’ आने वाली है, जिसमे उन्होंने एक देसी पर बुद्धिमान सास की भूमिका निभाई है, जो किसी बात को आज की परिवेश के हिसाब से मानती है और इस भूमिका को लेकर बहुत उत्साहित है. अनन्या ने अपनी इस सफल जर्नी के बारें में गृहशोभा के साथ शेयर की. वह इस पत्रिका के प्रोग्रेसिव विचार से बहुत प्रभावित है और चाहती है कि इसमें महिलाओं के लिए कैरियर आप्शन पर लगातार कुछ लेख दिए जाय, ताकि महिलाएं आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अधिक अग्रसर हो. इसे वे खुद ही नहीं, बल्कि उनकी दादी को भी पढ़ते हुए देखा है.

सही मित्र का होना जरुरी

इस शो में काम करने की उत्सुकता के बारें में पूछे जाने पर वह कहती है कि मुझे फॅमिली शो करना पसंद है, जिसे दर्शक पूरे परिवार के साथ बैठकर देख सकें. मैत्री एक ऐसा कांसेप्ट है, जो हर किसी उम्र या वर्ग के लिए अहम होता है. हर किसी को एक अच्छी दोस्ती और दोस्त की जरुरत होती है. विषय काफी रोचक है, इसमें काफी उतार-चढ़ाव है, तीन दोस्त कैसे अपनी दोस्ती को परिवार के साथ बनाये रखने में सफल होते है, उसे दिखाने की कोशिश की गयी है. मेरी भूमिका इसमें देसी सासूमाँ की है. पढ़ी-लिखी नहीं है और देहाती चरित्र है, जो मूर्ख नहीं, प्रैक्टिकल, आत्मविश्वासी, समझदार और चुनौती लेने वाली है. इसके अलावा वह स्ट्रोंग हेडेड भी है.

 

 

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आवश्यकता है सही लिखावट की

देसीपन को पर्दे पर लाने के लिए अनन्या ने काफी तैयारी की है, लेकिन इस चरित्र को लिखने वाले ने काफी मेहनत से इसे लिखा है, जिससे उन्हें अधिक तैयारी नहीं करनी पड़ी. इसके अलावा वह दिल्ली की है, जहाँ हर तरह की भाषा बोलने वाले लोग साथ रहते है.

 

 

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बदला है जमाना

सासूमाँ की कल्पना पहले से आज काफी बदल चुकी है और इस बदलाव को अनन्या जरुरी भी मानती है. वह कहती है कि मैंने अपने आसपास जो चाची और मामियां है, वे काफी रिलेक्स रहती है. बहू का अपनी मर्जी से काम करना, बच्चों को पालना, जॉब करना आदि को बहुत ही साधारण तरीके से लेती है, किसी में दखलंदाजी नहीं करती. सामंजस्य बनाये रखती है. पहले की सास की तरह कम पढ़ी-लिखी नहीं, आज की सास कॉलेज तक जा चुकी है.

इत्तफाक था अभिनय करना

अपनी सफल जर्नी के बारें में अनन्या का कहना है कि अभिनय मेरे लिए एक इत्तफाक था, क्योंकि मैं इस प्रोफेशन में आना नहीं चाहती थी. मुझे टीचर या आई ए एस बनना था. उसके बाद मैंने ट्रांसलेशन करने की इच्छा रखती थी. मैंने जर्मनी भाषा में मास्टर किया है, मैंने उस दिशा में बहुत कोशिश की, लेकिन कोई ढंग का काम नहीं मिला. इसके बाद मैंने इंडस्ट्री की ओर रुख किया और धीरे-धीरे आगे बढती गई. मैंने अपने काम को लेकर कभी कोई रिग्रेट नहीं किया है. जो नहीं मिला, उसकी कोई वजह होगी, इसे मैंने हमेशा माना है, इसलिए मलाल नहीं हुआ. खास समय पर खास जगह पर होना मेरे लिए जरुरी होता है और मैं वहां पहुँच जाती हूँ.

एक्टर डायरेक्टर की

अनन्या खुद को डायरेक्टर की एक्टर मानती है, वह कहती है कि फिल्म और कैमरा, राइटर और डायरेक्टर का ही माध्यम है. एक्टर एक टूल है, जिससे पॉलिश किया जा सकता है. इसलिए एक एक्टर जितना खुद को पॉलिश करेगा, डायरेक्टर उसका उतना ही अच्छे से प्रयोग कर सकेगा.

बदलाव हमेशा अच्छी हो जरुरी नहीं

एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की कहानियों में परिवर्तन के बारें में पूछे जाने पर वह कहती है कि आज कल इंटररिलेशनशिप पर अधिक फिल्में बन रही है. आज परिवारों के अकार छोटे होते जा रहे है. वही चीजे फिल्मों और टीवी शोज में देखे जा रहे है. बड़े परिवार और गांव के शोज कम है, जबकि शहरों से सम्बंधित शो अधिक दिखाए जाते है. मैन स्ट्रीम में शहरों पर आधारित शो को अधिक महत्व दिया जाता है. इन्ही शो को वे डबिंग करवाकर बाहर के देशों में भी रिलीज़ करते है, इसलिए कहानियों के बीच अधिक गैप नहीं रख पाते. पहले डीडी मेट्रो के जो शोज थे, उनका दौर काफी अलग था. उपन्यासों पर शोज बनते थे, जो अब नहीं बनते, क्योंकि पढने की आदत बच्चों में कम हो गयी है, वे किताबे नहीं पढ़ते वे सिर्फ देखते है. इसके अलावा इंटरनेशनल लेवल पर किसी चीज को ले जाने के लिए कहानियां वैसी ही होनी चाहिए, ताकि सभी इससे जुड़ सकें. समाज में बदलाव जरुरी है, लेकिन ये बदलाव हमेशा अच्छाई के लिए हो, जरुरी नहीं.

किताबों का पढना है जरुरी

वह आगे कहती है कि पढने का कल्चर मेन्टेन रहना चाहिए, किताबों का जो कल्चर चला गया है वह ठीक नहीं. अब लोग सिर्फ मोबाइल पर सब देखते है. ऐसे में लेखक और उन्हें छापने वालों का क्या होगा? ये मस्तिष्क को एकाग्र रखने का एक अच्छा माध्यम है. किताब खोलकर पढने का चाव है, उसका मजा अलग है. मोबाइल पर खोलकर पढने से उसकी स्पिरिट खोती हुई दिखाई पड़ती है. साथ ही आज के बच्चे बाहर जाकर खेलते नहीं समय नहीं होता, हर जगह एक प्रतियोगिता है, हर जगह पर काम के लिए मारधाड़ लगी हुई है. बच्चे को भी उसी रेस में जाना पड़ेगा. मैं इसे अच्छा और पॉजिटिव विकास नहीं मानती.

सीखा है सबसे

हर अभिनय में सहजता लाने के बारें में अनन्या का कहना है कि मैंने एक्टिंग की कोई ट्रेनिंग नहीं ली है. मैंने कोई कोर्स भी नहीं किया है, जितना मैंने काम किया है, उतना ही मैंने सीखा है, इसमें मैंने छोटे-बड़े जैसी किसी को नहीं देखा , सभी से कुछ सीखने को मिलता है. इसके अलावा मेरे पिता काफी टैलेंटेड थे. वे पत्रकार थे, उन्होंने हिंदी और मराठी में बहुत लिखा है. उनकी क्रिएटिविटी मुझे किसी रूप में आई है. मेरे दादा भी सितार बजाते थे.

YRKKH: अक्षरा ने किया उदयपुर जानें का फैसला, क्या अकेला रह जाएगा अभिनव!

टीवी सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है 14 सालों से दर्शकों के दिलों पर राज कर रहा है. इस सीरियल में रोज नया इमोशनल ड्रामा देखने को मिलता है, जिसे दर्शक भी काफी पसंद करते हैं. अब तक कहानी में कई बार स्टार कास्ट में बदलाव हुआ है और इन दिनों सीरियल में प्रणाली राठौड़ (Pranali Rathod) और हर्षद चोपड़ा (Harshad Chopda) लीड रोल में नजर आ रहे हैं. सीरियल में अक्षरा और अभिमन्यु का ट्रैक चल रहा है. दोनों अलग हो चुके हैं लेकिन तकदीर ने उन्हें फिर आमने-सामने खड़ा कर दिया. बीते एपिसोड में देखने को मिला था कि आरोही अब तक अस्पताल में भर्ती है और उसे होश नहीं आ रहा. लेकिन अपकमिंग एपिसोड में एक बड़ा ट्विस्ट आने वाला है. शो में अक्षरा अपनी पुरानी जिंदगी में लौटने का सोचेगी.

 

रूही के लिए जैम बनाएगी अक्षरा

ये रिश्ता क्या कहलाता है (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) के बीते एपिसोड में यह भी देखने को मिला था कि आरोही की खराब तबीयत के बारे में जानकर अक्षरा काफी परेशान है और अभिमन्यु उसे फोन करके रूही के लिए जैम बनाने के लिए कहता है. वहीं, अपकमिंग एपिसोड में अक्षरा बुखार में भी रूही के लिए जैम बनाती है. इस बार उसे अभिनव भी नहीं रोकता. इसी बीच, वह अपने बेटे अबीर को रूही और आरोही के बारे में बताती है, जिसे वह बड़े ध्यान से सुनता है.

 

उदयपुर जाने के लिए पैकिंग करेगी अक्षरा

वहीं, सीरियल में आगे यह भी देखने को मिलेगा कि अक्षरा आरोही के लिए काफी परेशान हो रही होती है और तब वह यह फैसला नहीं ले पाती कि उसे उदयपुर जाना चाहिए या नहीं. ऐसे मौके पर अभिनव उसे एक गैम के जरिए फैसला लेने के लिए कहता है और तब नतीजा यह आता है कि वह उदयपुर जा रही है. इसके बाद अक्षरा अपनी पेकिंग करती है और उदयपुर जाने के लिए फ्लाइट की टिकट बुक करती है.

 

अभिमन्यु से सवाल करेगा कायरव

दूसरी तरफ कहानी में कायरव का ट्रैक भी शुरू हो गया है, जो काफी समय से दिख नहीं रहा था. कायरव को अब अभिमन्यु पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है. ऐसे में वह अपनी बहन को गोयनका हाउस में ले जाने की बात करता है. इसी बीच वह अपनी बहन के लिए स्पेशल डॉक्टर भी अस्पताल भेजता है, जिसे आरोही से मिलने नहीं दिया जाता है. इसी वजह से वजह अभिमन्यु से बात करने पहुंचता है। इस मौके पर अभि उसे बोलता है कि उसे बिरला हाउस पर विश्वास करना होगा.

Sidharth-Kiara Wedding: Karan Johar ने कपल के लिए लिखा इमोशनल नोट, बताया गजब की प्रेम कहानी

सिद्धार्थ मल्होत्रा (Sidharth Malhotra) और कियारा आडवाणी (Kiara Advani) ने 7 फरवरी को जैसलमेर के सूर्यगढ़ पैलेस में सात फेरे लेकर अपनी लाइफ की एक नई शुरूआत की. फिल्म शेरशाह में नजर आने वाली इस जोड़ी को रील लाइफ के बाद रियल लाइफ में ही एक होते देखने का फैंस का सपना पूरा हो गया. इन दोनों जब शादी की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर की, तब से सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है. इन दोनों की तस्वीरों को फैंस खूब जमकर शेयर कर रहे हैं. फैंस के अलावा बॉलीवुड स्टार्स भी इन दोनों को बधाई देते हुए नजर आए. लेकिन सबका ध्यान करण जौहर की पोस्ट ने अपनी तरफ खींच लिया.

 

 

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 करण जौहर ने लिखी ये बात

सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी को शादी के बाद सोशल मीडिया पर फैंस से लेकर बॉलीवुड स्टार्स तक बधाई देते हुए नजर आ रहे है. हर कोई अपने अंदाज में इस क्यूट कपल को मुबारकबाद दे रहा है. लेकिन सबसा ध्यान करण जौहर की पोस्ट ने अपनी तरफ खींच लिया. करण जौहर ने सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी की शादी की तस्वीर के साथ इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर किया. इस पोस्ट में करण जौहर ने सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी से हुई पहली मुलाकात के बारे में लिखा, साथ ही साथ इन दोनों को एक जैसा बताया. करण ने लिखा, सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी दोनों ही शांत, मजबूत और काफी सेंसिटिव है. इसके अलावा करण जौहर ने इन दोनों की खूब तारीफ भी और भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं.

 

 

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शादी में पहुंचे थे करण जौहर

कियारा आडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा की शादी में कई बॉलीवुड स्टार्स नजर आए थे. शाहिद कपूर अपनी पत्नी मीरा राजपूत के साथ पहुंचे थे. तो वहीं करण जौहर इस शादी में शामिल होने के लिए जैसलमेर के सूर्यगढ़ पैलेस आए थे. इतना ही नहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक करण जौहर ने इस शादी में जमकर डांस भी किया था

टेबल टेनिस का सितारा हैं मनिका बत्रा

कहते हैं पूत के पांव पालने में ही दिखाई दे जाते हैं. इस कहावत को चरितार्थ करते हुए मनिका बत्रा ने अपने भाई बहन को टेबल टेनिस खेलते हुए देखा और उसे ऐसे आत्मसात कर लिया कि आज मनिका बत्रा ओलंपिक खेलों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी है, वहीं विश्व में भारत का लगातार प्रतिनिधित्व करके हार जीत की मजे लेते हुए खेल की दुनिया में एक ऐसा सितारा बन गई है जो बड़ी दूर से आभा फैला रहा है.

यह सच है कि अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में देश के अनेक खिलाड़ी अपने प्रभावशाली प्रदर्शन से खेलों के नक्शे पर भारत का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा रहे हैं. इधर भारतीय महिला खिलाड़ियों ने  खास तौर से देश का परचम दुनिया में लहराया है. एक महत्वपूर्ण  भारतीय महिला खिलाड़ियों में गिने जाने वाली मनिका बत्रा ने  अब एक और ऊंचाई हासिल करते  हुए एशियाई कप टेबल टेनिस में कांस्य पदक हासिल किया है और खास बात यह है कि आप ऐसा करने वाली भारत की पहली महिला खिलाड़ी हैं.

मनिका बत्रा ने अपने सधे हुए खेल से खेल प्रेमियों का कई दफा दिल जीता है. यही कारण है कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 2020 में देश के सबसे बड़े खेल सम्मान  “मेजर ध्यान चंद खेल रत्न” पुरस्कार से सम्मानित किया गया. यहां रेखांकित करने वाली बात यह है कि मनिका बत्रा ने बैंकाक, थाईलैंड में खेली गई इस प्रतियोगिता में महिला सिंगल्स का सेमीफाइनल मुकाबला हारने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और कांस्य पदक के लिए हुए मुकाबले में जापान की हीना हयाता को हरा कर  तीसरा स्थान हासिल कर लिया . इस तरह  इतिहास में कोई भी मेडल जीतने वाली देश की पहली महिला खिलाड़ी मनिका बत्रा बन गई.

शिखर पर है मनिका

स्मरण रहे कि एशियाई कप टेबल टेनिस प्रतियोगिता के पुरुष वर्ग में भारत को देश के  खिलाड़ी चेतन बबूर ने पदक दिलाया था. बबूर वर्ष 1997 में पुरुष सिंगल्स के फाइनल तक पहुंच गए और उन्होंने रजत पदक हासिल किया था. , तत्पश्चात वर्ष 2000 में चेतन बबूर ने एक बार फिर कांस्य पदक जीतकर भारत के पदकों की संख्या में वृद्धि कर दिखाई .

टेबल टेनिस में देश में आज एक सितारे का रूतबा हासिल कर चुकी मनिका बत्रा का जन्म पंद्रह जून 1995 को देश की राजधानी दिल्ली में हुआ. मनिका परिवार में  तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं. बड़ी बहन आंचल और भाई साहिल टेबल टेनिस के अच्छे खिलाड़ी थे और उन्हीं की प्रेरणा से नन्हीं मनिका ने भी पांच साल की उम्र से ही टेबल टेनिस खेलना शुरू कर दिया.

और आगे परिवार ने उनका समर्पण देख कर , भविष्य की एक प्रतिभावान खिलाड़ी की छवि देखकर मनिका को बहुत कम उम्र में ही टेबल टेनिस का बाकायदा प्रशिक्षण दिलाने का फैसला किया . खास बात यह है कि मनिका को किशोरावस्था में ही माडलिंग के कई प्रस्ताव मिले, लेकिन उन्होंने जीवन में हमेशा टेबल टेनिस को महत्व दिया  और यहां तक कि उन्हें खेल पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करने के लिए अपनी पढ़ाई भी बीच में ही छोड़ दी . यही समर्पण है कि आज मनिका बत्रा खेल की दुनिया में महत्वपूर्ण मुकाम रखती है और भारत सरकार ने उन्हें सम्मानित किया.

मनिका के खाते में एक और उपलब्धि  दर्ज है, वह अपने हमवतन खिलाड़ी एस ज्ञानशेखरन के साथ मिश्रित युगल विश्व वरीयता क्रम में नंबर पांच पर पहुंचीं और किसी भारतीय जोड़ी के लिए टेबल टेनिस विश्व रैंकिंग में यह अब तक की शीर्ष वरीयता है.

मनिका बत्रा ओलंपिक खेलों में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं. 27 साल की मनिका बत्रा विश्व में 44 वें नंबर की खिलाड़ी हैं और उन्हें टेबल टेनिस के खेल में देश की अब तक की सबसे प्रतिभा पूर्ण तथा सफलतम महिला खिलाड़ी माना जाता है. देश को मनिका से और भी बहुत ज्यादा आशाएं हैं और अभी उनके पास भविष्य में समय भी है कि वे अपना और बेहतर प्रदर्शन दिखा सकें.

ऐसे पाएं बेदाग स्किन के साथ लंबे घने बाल

ऐसे पाएं बेदाग स्किन के साथ लंबे घने बाल अगर आप भी ग्लोइंग त्वचा के साथ खूबसूरत बालों की ख्वाहिश रखती हैं, तो यह जानकारी आप के लिए ही है… कई महिलाएं अपनी त्वचा और बालों की समस्याओं का संबंध जीवनशैली या जेनेटिक फैक्टर्स से जोड़ती हैं. आमतौर पर वे बालों के नुकसान को अनदेखा कर देती हैं. उन्हें लगता है कि तनाव और बालों की देखभाल के लिए समय न निकाल पाना इन समस्याओं के कारण हैं. लेकिन उन्हें यह पता ही नहीं होता कि शरीर में न्यूट्रिशन लैवल पर त्वचा और बालों का स्वास्थ्य निर्भर होता है.

न्यूट्रिशन और आदर्श विटामिन लैवल दोनोें त्वचा को स्वस्थ, मुलायम और बालों को घना व मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं. डाइट और पाचन खराब होने से पोषण में कमी पैदा होती है. इससे त्वचा से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं और त्वचा के कुल स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है. कई बार आहार में कोई कमी नहीं होती, लेकिन फूड सैंसिटिविटी या ऐलर्जी त्वचा रोग का कारण बनती है.

अध्ययनों ने साबित किया है कि ऐंटीऔक्सीडैंट की फोटो प्रोटैक्टिव क्षमता का त्वचा की प्रतिरक्षा प्रणाली पर सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की पूर्ति के प्रभावों के साथ सहसंबंध होता है. आइए जाने कि विटामिन की कमी त्वचा और बालों को कैसे प्रभावित कर सकती है. त्वचा की देखभाल में पोषण की भूमिका विटामिन ए, बी3 और बी12 की अहमियत: पूरे मानव शरीर खासकर त्वचा के पोषण में विटामिन ए महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है. विटामिन ए की कमी से स्वैट डक्ट्स में रुकावट, औयल ग्लैंड्स में कमी और फ्राइनोडर्मा, जेरोसिस और त्वचा पर झुर्रियां आदि समस्याएं पैदा हो सकती हैं. आमतौर पर कुपोषित लोगों खासकर बच्चों में ये समस्याएं देखी जाती हैं. विटामिन ए की कमी के कारण कुहनियों, घुटनों, नितंबों पर खुरदरी काली त्वचा देखी जाती है.

विटामिन बी3 की कमी के कारण गरदन जैसे आमतौर पर खुले रहने वाले भागों पर फोटो सैंसिटिविटी और रैशेज जैसे सनबर्न हो जाते हैं. इसी तरह इस से हाथों और पैरों में दरारें भी पड़ सकती हैं जिसे पेलेग्रस ग्लव्स और बूट्स कहा जाता है. कई बार इस से त्वचा छिल सकती है. कई महिलाएं इस बात को अनदेखा कर देते हैं, लेकिन कई गंभीर मामलों में यह घातक साबित हो सकता है. विटामिन बी 12 की कमी आमतौर पर उन में देखी जाती है जिन के खाने में मक्का हर दिन होता है या जो शराब पीते हैं अथवा जो दवा ले रहे हैं. इस से त्वचा पर हाइपरपिग्मैंटेशन त्वचा में सूजन और इन्फैक्शन, डार्क सर्कल्स आदि समस्याएं हो सकती हैं. इन का इलाज न करना जानलेवा भी हो सकता है. दूध, पनीर, दही, अंडे, केला, स्ट्राबेरी, टूना मछली, चिकन आदि में विटामिन बी 12 भरपूर होता है.

इन पदार्थों का सेवन करना चाहिए. शरीर में बी 12 के स्तर को बढ़ाने के बारे में डाक्टर से सलाह लेनी चाहिए. विटामिन सी का महत्त्व कोलोजन बनने के लिए विटामिन सी आवश्यक है, त्वचा का टाइटनिंग और त्वचा में युवा दिखने के लिए यह बहुत महत्त्वपूर्ण प्रोटीन है. अध्ययनों ने साबित किया है कि विटामिन सी के रोजाना सेवन से त्वचा की झोर्रियों में सुधार हो सकता है और त्वचा के कुल टैक्सचर में सुधार हो सकता है. विटामिन सी ऐंटीऔक्सीडैंट से भरपूर होता है जो अच्छी त्वचा के लिए फायदेमंद होता है. विटामिन सी की कमी से त्वचा रूखी और बेजान हो सकती है और उस की घाव भरने की क्षमता कम हो सकती है. विटामिन सी की कमी से स्कर्वी भी हो सकता है.

स्कर्वी के लक्षणों में रक्तस्राव के कारण त्वचा पर दिखाई देने वाले गोल धब्बे रक्तस्राव के कारण त्वचा का रंग फीका पड़ना और स्वान नैक हेयर शामिल हैं. जिंक का महत्त्व जिंक की कमी से त्वचा में दरारें, सूखी त्वचा और रैशेज हो सकते हैं. जिंक की कमी से मुंहासे, त्वचा में संक्रमण भी हो सकता है और त्वचा की घाव भरने की क्षमता भी कम हो सकती है. कई केसेज में मुंह और नितंबों के आसपास लाल पपड़ीदार पैच दिखाई दे सकते हैं. लोकल ऐप्लिकेशन और क्रीम्स मौइस्चराइजर से इस की कमी का इलाज नहीं किया जा सकता है. इलाज में दवाइयों और अच्छे खाने के जरीए जिंक इनटेक शामिल है.

शरीर में जिंक लैवल क्या है उस के आधार पर डाक्टर जिंक सप्लिमैंट्स का सुझाव दे सकते हैं. आयरन का महत्त्व शरीर में लोहे की कमी के कारण बेजान, रूखी त्वचा, काले घेरे, नाखूनों का टूटना आदि समस्याएं हो सकती हैं. कुछ मामलों में इस से जीभ में सूजन, ऐंगुलर चेलाइटिस भी हो सकता है. इस के अलावा त्वचा में खुजली हो सकती है और खरोंचने पर त्वचा लाल, पपड़ीदार हो सकती है. आयरन की कमी से होने वाले रैशेज के कारण त्वचा के नीचे लाल या बैगनी रंग के धब्बे हो सकते हैं. बायोटिन एक पानी में घुलने वाला विटामिन बी है जो फैट और कार्बोहाइड्रेट चयापचय के लिए आवश्यक प्रतिक्रियाओं के लिए कोऐंजाइम के रूप में कार्य करता है.

बायोटिन की कमी बहुत आम समस्या नहीं है. बायोटिन की कमी से त्वचा में पैदा होने वाले लक्षणों में पैची रैड रैश आमतौर पर मुंह के पास, सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस और फंगल त्वचा व नाखूनों में इन्फैक्शन शामिल हैं. बालों की देखभाल में पोषण की भूमिका आयरन और विटामिन बी12 का महत्त्व: बालों का समय से पहले ग्रे होना या कैनिटी एक आनुवंशिक प्रवृत्ति है. आयरन, विटामिन डी, फोलेट, विटामिन बी 12 और सेलेनियम ऐसे विटामिन और खनिज हैं जिन की कमी की वजह से बचपन या शुरुआती वयस्कता के दौरान बालों के ग्रे, सफेद होने की समस्या हो सकती है. इन सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की कमी को पूरा करने से बालों के समय से पहले ग्रे होने की समस्या में सुधार हो सकता है.

विटामिन बी12 की कमी से बाल झड़ते हैं और रूखे और बेजान हो जाते हैं. विटामिन बी12 मानव शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के बनने के लिए बहुत जरूरी है, जो शरीर के विभिन्न हिस्सों में औक्सीजन ले जाती हैं. जब किसी व्यक्ति में विटामिन बी12 की कमी होती है, तो बालों के रोमों को नए बाल पैदा करने के लिए पर्याप्त औक्सीजन नहीं मिलती है. परिणामस्वरूप बालों के रोम कुशलतापूर्वक काम नहीं कर पाते हैं और बाल ?ाड़ने लगते हैं. आयरन की कमी का बालों पर असर विटामिन बी 12 की कमी की तरह ही स्वस्थ बालों के लिए आयरन का सेवन भी बहुत महत्त्वपूर्ण होता है.

आयरन एक महत्त्वपूर्ण खनिज है जो मानव शरीर और लाल रक्त कोशिकाओं के समुचित कार्य में मदद करता है. जब किसी व्यक्ति में आयरन की कमी होती है, तो शरीर की लाल रक्त कोशिकाएं बालों के रोम तक औक्सीजन नहीं पहुंचा पाती हैं. लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन होता है, जो रक्त को ऊतकों, कोशिकाओं और महत्त्वपूर्ण अंगों सहित शरीर के विभिन्न भागों में ले जाता है. हीमोग्लोबिन उन कोशिकाओं की मरम्मत करता है जो बालों के आदर्श विकास में योगदान देती हैं. आयरन की कमी से बालों का अत्यधिक ?ाड़ना, बालों की ठीक से न बढ़ पाना आदि समस्याएं पैदा होती हैं.

इस से महिलाओं और पुरुषों में गंजापन जल्दी हो सकता है. शरीर में आयरन को स्वस्थ लैवल को बनाए रखने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, ब्रोकली, मुनक्का, काजू और दालों का सेवन नियमित रूप से करें. अपना आयरन लैवल जानने और शरीर में आयरन लैवल को बढ़ाने के संभव विकल्पों के बारे में जानने के लिए डाक्टर से बात करें. जिंक की कमी का बालों पर असर अध्ययनों से यह भी साबित हुआ है कि जिंक की कमी से बालों के रोम की प्रोटीन संरचना प्रभावित हो सकती है जो बालों की मजबूती को बनाए रखने के लिए महत्त्वपूर्ण होती है. जिंक हारमोनल संतुलन को बनाए रखता है और हारमोनल असंतुलन बालों के झड़ने का एक प्राथमिक कारण है.

विटामिन सी की कमी और बाल विटामिन सी की कमी से बाल दोमुंहे और सूखे हो सकते हैं. शरीर में जब विटामिन सी मौजूद होता है तभी आयरन को अब्सौर्ब किया जा सकता है. इसलिए अगर किसी के शरीर में विटामिन सी की कमी है तो उस से शरीर में आयरन का स्तर भी प्रभावित होता है जिस के परिणामस्वरूप बालों का ?ाड़ना शुरू हो जाता है. आहार में विटामिन, आयरन और जिंक की कमी से ऐक्यूट टेलोजेन एफ्लुवियम और बालों का समय से पहले सफेद होना हो सकता है. बालों को धोते, कंघी करते यहां तक कि उंगलियों को चलाते समय अत्यधिक बालों का ?ाड़ना टेलोजेन एफ्लुवियम के संकेत हैं. इसलिए चमकती त्वचा और घने बालों के लिए आहार में सही प्रोटीन और विटामिन शामिल करें. -डा. रैना नाहर कंसल्टैंट, डर्मैटोलौजी, पीडी हिंदुजा हौस्पिटल ऐंड मैडिकल रिसर्च सैंटर, खार. द्य

एक और आकाश: भाग 2- क्या हुआ था ज्योति के साथ

मां के सो जाने के बाद उन्होंने भी लुकछिप कर एक बार फिर उस के पत्र को ढूंढ़ कर पढ़ने की कोशिश की होगी. आंखें भर आई होंगी तो इधरउधर ताका होगा कि कहीं कोई उन्हें रोते हुए देख तो नहीं रहा. मां ने पिता की इस कमजोरी को पहचान कर पहले ही वह पत्र ऐसी जगह रखा होगा, जहां वह चोरीछिपे ढूंढ़ कर पढ़ सकें क्योंकि सब के सामने उस पत्र को बारबार पढ़ना उन की मानप्रतिष्ठा के विरुद्ध होता और इस बात का प्रमाण होता कि वह हार रहे हैं.

ज्योति अनमनी सी नित्य बच्चों को पढ़ाने स्कूल जाती थी. घर लौट कर देखती थी कि कहीं पत्र तो नहीं आया. धीरेधीरे 10 दिन बीत गए थे और आशा पर निराशा की छाया छाने लगी थी.

एक दिन रास्ते में वही हितैषी महेंद्र अचानक मिल गए थे. उन के हाथ में एक लिफाफा था. उस पर लिखी अपने पिता की लिखावट पहचानने में उसे एक पल भी न लगा था.

‘‘बेटी, डाक से यहां तक पहुंचने में देर लगती, इसलिए मैं खुद ही पत्र ले कर चला आया…खुश है न?’’ महेंद्र ने पत्र उसे थमाते हुए कहा.

स्वीकृति में सिर झुका दिया था ज्योति ने. होंठों से निकल गया था, ‘‘कोई मेरे बारे में पूछने घर से आया तो नहीं था?’’

‘‘नहीं, अभी तक तो नहीं आया. और आएगा भी तो तेरी बात मुझे याद है, घर के सब लोगों को भी बता दिया है. विश्वास रखना मुझ पर.’’

‘‘धन्यवाद, दादा.’’

महेंद्र ने ज्योति के सिर पर हाथ फेरा. बहुत सालों बाद उस स्पर्श में उसे अपने मातापिता के हाथों के स्पर्श जैसी आत्मीयता मिली. पत्र पाने की खुशी में यह भी भूल गई कि वह स्कूल की ओर जा रही थी. तुरंत घर की ओर लौट पड़ी.

लिफाफा ज्यों का त्यों बंद था. मां के हाथों की लिखावट होती तो अब तक पत्र खुल चुका होता. परंतु पिता के हाथ की लिखावट ने ज्योति के मन में कुछ और प्रश्न उठा दिए थे क्योंकि अब तक वह पिता के प्रति अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं ला सकी थी. उस की दृष्टि में उस के दुखों के लिए वह खुद तो जिम्मेदार थी ही, परंतु उस के पिता भी कम जिम्मेदार न थे.

तो क्या उन्हीं कठोर पिता का हृदय पिघल गया है? मन थरथरा उठा. कहीं पिता ने अपने कटु शब्दों को तो फिर से नहीं दोहरा दिया था?

कांपते हाथों से ज्योति ने लिफाफा फाड़ा. पत्र निकाला और पढ़ने लगी. एकएक शब्द के साथ मन की पीड़ा पिघलपिघल कर आंखों के रास्ते बहने लगी. वह भीगती रही उस ममता और प्यार की बरसात में, जिसे वह कभी की खो चुकी थी.

ज्योति अगले दिन की प्रतीक्षा नहीं कर सकी थी और उसी समय उठ कर स्कूल के लिए चल दी थी. छुट्टी का आवेदन देने के साथसाथ डाकघर में जा कर तार भी दे आई थी.

वह रात भी वैसी ही अंधियारी रात थी, जैसी रात में ज्योति ने 11 वर्ष पूर्व अकेले यात्रा की थी. मांबाप और समाज के शब्दों में, अपने गर्भ में वह किसी का पाप लिए हुए थी और अनजानी मंजिल की ओर चली जा रही थी एक तिरस्कृता के रूप में. और उसी पाप के प्रतिफल के रूप में जन्मे पुत्र के साथ वह वापस जा रही थी. उस रात जीवन एक अंधेरा बन कर उसे डस रहा था. इस रात वही जीवन सूरज बन कर उस के लिए नई सुबह लाने वाला था.

उस रात ज्योति अपने घर से ठुकरा दी गई थी. इस रात उस का अपने उसी घर में स्वागत होने वाला था. यह बात और थी कि उस स्वागत के लिए पहल स्वयं उस ने ही की थी क्योंकि उस ने अपना अतापता किसी को नहीं दिया था. अपने साहसी व्यक्तित्व के इस पहलू को वह केवल परिवारजनों के ही नहीं, पूरे समाज के सामने लाना चाहती थी, यानी इस तरह घर से ठुकराई गई बेटियां मरती नहीं, बल्कि जिंदा रहती हैं, पूरे आदरसम्मान और उज्ज्वल चरित्र के साथ.

ठुकराए जाने के बाद अपने पिता का घर छोड़ते समय के क्षण ज्योति को याद आए. मन में गहन पीड़ा और भय का समुद्र उफन रहा था. फिर भी उस ने निश्चय किया था कि वह मरेगी नहीं, वह जिएगी. वह अपने गर्भ में पल रहे भ्रूण को भी नष्ट नहीं करेगी. उसे जन्म देगी और पालपोस कर बड़ा करेगी. वह समाज के सामने खुद को लज्जित अनुभव कर के अपने बच्चे को हीन भावना का शिकार नहीं होने देगी. वह समाज के निकृष्ट पुरुष के चरित्रों के सामने इस बात का प्रमाण उपस्थित करेगी कि पुरुषों द्वारा छली गई युवतियों को भी उसी तरह का अधिकार है, जिस तरह कुंआरियों या विवाहिताओं को. वह यह भी न जानना चाहेगी कि उस का प्रेमी जीवित है या मर गया. वह स्वयं को विधवा मान चुकी थी, केवल विधवा. किस की विधवा इस से उसे कोई मतलब नहीं था.

इस मानसिकता ने उस नींव का काम किया था, जिस पर उस के दृढ़ चरित्र का भवन और बच्चे का भविष्य खड़ा था. उस ने घरघर नौकरी की. पढ़ाई आगे बढ़ाई. बच्चे को पालतीपोसती रही. जिस ने उस के शरीर को छूने की कोशिश की, उस पर उस ने अपने शब्दों के ही ऐसे प्रहार किए कि वह भाग निकला. आत्मविश्वास बढ़ता गया और उस ने कुछ भलेबुजुर्ग लोगों को आपबीती सुना कर स्कूल में नौकरी पा ली. एक घर ढूंढ़ लिया और अब अपने महल्ले की इज्जतदार महिलाओं में वह जानी जाती थी.

ज्योति का अब तक का एकाकी जीवन उस के भविष्य की तैयारी था. उस भविष्य की जिस के सहारे वह समाज के बीच रह सके और यह जता सके कि जिस समाज में उसे छलने वाले जैसे प्रेमी अपना मुंह छिपा कर रहते हैं, ग्लानि का बोझ सहने के बाद भी दुनिया के सामने हंसते हुए देखे जाते हैं, वहां उन के द्वारा ठुकराई हुई असफल प्रेमिकाएं भी अपने प्रेम के अनपेक्षित परिणाम पर आंसू न बहा कर उसे ऐसे वरदान का रूप दे सकती हैं, जो उन्हें तो स्वावलंबी बना ही देता है, साथ ही पुरुष को भी अपने चरित्र के उस घिनौने पक्ष के प्रति सोचने का मौका देता है.

उस एकाकीपन में ऐसे क्षण भी कम नहीं आए थे, जब ज्योति के लिए किसी पुरुष का साथ अपरिहार्य महसूस होने लगा था. कई बार उस ने सोचा भी था कि इस समाज के कीचड़ में कुछ ऐसे कमल भी होंगे, जो उसे अपना लेंगे. कुछ ऐसे व्यक्तित्व भी उसे मिलेंगे, जिन में उस जैसी ठुकराई हुई लड़कियों के लिए चाहत होगी.

परंतु उसी क्षण हृदय के किसी कोने में पुरुष के प्रति फूटा घृणा का अंकुर उसे फिर किसी पुरुष की ओर आकृष्ट होने से रोक देता. तब सचमुच उसे प्रत्येक युवक की सूरत में बस, वही सूरत नजर आती, जिस से उसे घृणा थी, जिसे वह भूल जाना चाहती थी. उस ने धीरेधीरे अपनी इच्छाओं, कामनाओं को केवल उसी सीमा तक बांधे रखा था, जहां तक उस की अपनी धरती थी, जहां तक उस का अपना आकाश था.

आगे पढ़ें- क्षण भर के लिए मन तमाम कड़वाहटों से भर आया था. परंतु…

मैं अपनी फीलिंग्स को कैसे कंट्रोल करुं?

सवाल

मैं एक 20 वर्षीय युवती हूं. मेरा मन सैक्स करने का करता है. ऐसा कोई उपाय बताएं जिस से सैक्स की फीलिंग न हो?

जवाब

सैक्स की फीलिंग नौर्मल फीलिंग है, लेकिन आप की समस्या से लगता है कि आप इस के बारे में बहुत ज्यादा सोच रही हैं. आप अपनी लाइफस्टाइल में कुछ चेंज करें. फ्रैंड सर्कल में ऐसी फ्रैंड्स के साथ कम रहें जो केवल सैक्स से संबंधित बातें ही करती हों. पौर्न साइट्स न देखें, हैल्दी मनोरंजन से भरपूर किताबें पढ़ें. जैसे ही आप का ध्यान इस ओर डाइवर्ट होने लगे, स्वयं को कहीं और व्यस्त कर लें. सुधार दिखने पर आप को अच्छा लगेगा.

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सैक्स जानकार कैसोनोवा और क्लियोपेट्रा

29 वर्षीय प्रिया तंदुरुस्त शरीर की आकर्षक युवती है. उस की शादी हुए 3 साल हो चुके हैं, लेकिन 3 साल में उसे एक भी रात वह यौनसुख प्राप्त नहीं हो पाया, जिस की हर युवती को चाह होती है. दूसरी ओर 28 वर्षीय कामकाजी रत्ना सिंह है जिस की शादी को 2 वर्ष हुए हैं. वह अपने पति की कामुकता से परेशान है. रत्ना थकीहारी अपने काम से आती है तो रात को पति कामवर्धक औषधियों का सेवन कर उस के साथ भी नएनए प्रयोग करता है. दोनों ही स्थितियों में किसी को भी सच्चा सुख नहीं मिलता, इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि हम अपने यौन जीवन में संतुलन बनाएं. अगर किसी में यौन उत्तेजना सामान्य है तो उसे अतिरिक्त दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए. यदि किसी व्यक्ति की यौन उत्तेजना में कमी है तो वह निम्न लवफूड्स का प्रयोग कर वैवाहिक सुख का आनंद ले सकता है.

एफ्रोडाइस संज्ञा एक ऐसा द्रव्य है जो समुद्र से निकली विशाल घोंघा मछली एफ्रौडाइट से प्राप्त होता है. एफ्रोडाइट को कामुकता का प्रतीक माना जाता है. इस के द्रव्य को एफ्रोडाइस कहते हैं.

एफ्रोडाइस, यौनशक्तिवर्द्धक द्रव्य है जिस से स्त्रीपुरुष में यौनशक्ति या यौन अभिरुचि उत्पन्न होती है.

प्राकृतिक रूप से हम ऐसे कुछ खाद्य पदार्थों से पहले ही परिचित हैं, जो यौन क्षमता बढ़ाते हैं, जिन में ऐसे फल व सब्जियां प्रमुख हैं जिन का आकार स्त्री व पुरुष के गुप्तांगों से मिलताजुलता है. इन फल व सब्जियों के अंदर कुछ ऐसे गुण छिपे होते हैं जो मानव की यौन क्षमता को बढ़ाने में कारगर हैं. ये सभी फल पुरुष की कामुकता से जुड़े हैं, जबकि स्त्री की कामुकता बढ़ाने के लिए चैरी, खजूर, अंजीर, खास प्रकार की मछली और सीप जैसे खाद्य पदार्थ प्रमुख हैं.

केला एक ऐसा फल है, जिस में खनिज द्रव्य और ब्रोमेलिन प्रचुर में उपलब्ध है, जो पुरुष क्षमता को बढ़ाता है और यह फल सर्वसुलभ और प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है. सस्ता होने के कारण इस का प्रयोग आम लोग भी आसानी से कर सकते हैं.

प्राचीन यूनान में जब अंजीर की फसल की कटाई शुरू होती थी तो रीतिरिवाज के अनुसार रतिक्रीड़ा की जाती थी. क्लियोपेट्रा को भी अंजीर बहुत पसंद थे जिन्हें वह चाव से खाती थी. सब फलों में प्राचीनतम माने गए फल द्राक्ष का संबंध भी कामोत्तेजक गतिविधि से जोड़ा जाता है. वैसे द्राक्ष का फल काफी उत्तेजक है और स्वादिष्ठ होता है.

19वीं शाताब्दी में फ्रांस में सुहागरात से पहले दूल्हे को जो भोजन दिया जाता था उस में शतावरी को विशेष स्थान दिया जाता था, जबकि काफी समय पहले एशिया के मध्यपूर्व देशों के सुलतान व अमीर उमरा गाजर को स्त्रियों की उत्तेजना बढ़ाने में सहायक मानते थे.

कुछ व्यंजनों को भी उत्तेजना बढ़ाने में सहायक माना गया है. उदाहरणस्वरूप चौकलेट. चौकलेट को परंपरागत रूप से उत्तेजक माना गया है. इसलिए सदियों पहले ईसाई पादरियों और ननों को चौकलेट खाने की सख्त मनाही थी. कच्चे घोंघों में प्रचुर मात्रा में जस्ता होता है जिस के सेवन से लंबे समय तक संभोगरत रहने की शक्ति बढ़ सकती है. भूमिगत गुच्छी यानी ट्रफल भी ऐसा ही महंगा व सुगंधित पदार्थ है.

शैंपेन को भी लंबे अरसे से प्यार का पेय माना गया है, जो शादी के अवसर पर या विजयोत्सव मनाते समय भी ऐयाश लोगों में पानी की तरह बहाया जाता है. कहा जाता है कि व्हिस्की पिलाने से औरत बहस करना बंद करती है. बियर से उसे यौन आनंद मिलता है. रम से वह सहयोग करने लगती है. शैंपेन से होश खो बैठने पर कामुक हो उठती है. केवियर एक ऐसी मछली है जो मनुष्य के शरीर में उत्तेजना बढ़ाती है. यद्यपि निश्चित रूप से यह कहना कठिन है कि ऐसा क्यों माना जाता है.

साधारणातया हम कह सकते हैं कि अधिक शक्ति बढ़ाने वाले पदार्थ दुर्लभ हैं और इन का मूल्य भी काफी है, इसी कारण लोग अधिक आनंद लेने के लिए इन के दीवाने हैं. डामैना को चाय की तरह उबाल कर नियमित एक कप पीने से हारमोंस नियंत्रण में रहते हैं और इस से शारीरिक शक्ति भी प्राप्त होती है. एक प्रकार के लालमिर्च के मसाले से एंडोर्फोंस हारमोंस भी बढ़ाता है. गरम सूप या सौस पर मिर्च छिड़क कर प्रतिदिन खाने से भी लाभ होता है. अगर युवक जिनसेंग का प्रयोग करते हैं तो कामोत्तेजना अधिक होती है. अगर युवतियां इस का प्रयोग करती हैं तो उन की भी पिपासा बढ़ जाती है. जिनसेंग प्रसिद्ध चीनी द्रव्य है जो अश्वगंधा जैसा प्रतीत होता है.

भारत और मध्यपूर्व एशियाई देशों में लहसुन जोकि एक अच्छा विषाणुनाशक भी है, सदियों से युवकों की उत्तेजना बढ़ाने के लिए लोकप्रिय है. इस की अप्रिय दुर्गंध से बचाव के लिए खाने के बाद लौंग या छोटी इलायची का प्रयोग कर सकते हैं. प्याज और शहद का मिश्रण भी उपयोगी है. अदरक, लाल रास्फरी के पत्ते और गुड़हल या जाबा कुसुम कामोत्तेजना बढ़ाने के लिए काफी प्रचलित रहे हैं.

शहद से भी यह प्रकट होता है कि इस में भी कामवर्धक गुण हैं, लेकिन ध्यान रहे कि शहद शुद्ध हो. कुछ समाज आज भी  नवविवाहितों को शहद का पान कराते हैं. फिर चांदनी रात हो आशा और अरमानों की अंगड़ाइयां लेती हुई नववधु हो, तत्पश्चात लज्जा और मर्यादा का आवरण धीरेधीरे हट रहा हो और फिर काम और रति का युद्ध शुरू हो, कैसी रोमांटिक कल्पना है? यह भी बता दें कि शहद में विटामिन  ‘बी’ और एमिनो एसिड प्रचुर मात्रा में होने के कारण यह प्राकृतिक रूप से कामोत्तेजक सिद्ध हुआ है.

मिस्र में हड्डियों का सूप यानी पाया का भी काफी चलन है. हलाल की गई भेड़ की टांग की हडिड्यों के साथ ताजा कटी प्याज, लहसुन, पुदीना, लालमिर्च आदि को एकसाथ डाल कर 2 घंटे तक मिश्रण कर जो लुगदी तैयार होती है उस का भक्षण कर न जाने कितने मध्य एशियाई तथा मिस्रवासियों ने महिलाओं पर जुल्म ढाए हैं.

कामसूत्र में नीले सूखे कमल का चूर्ण, घी और शहद एकसाथ मिला कर खाने को कहा गया है, जिस से पुरुषों में खोई हुई शक्ति दोबारा लौट आती है. इसी प्रकार भेड़ा या बकरे के अंडकोश को उबाल कर चीनी डाल कर जो पेय बनता है, इसे पीने से भी अधिक शक्ति मिलती है.

इसी तरह इत्र या सुंगधित तेल की मालिश भी सुख के लिए लाभदायक है. ग्रीष्मऋतु की एक गरम शाम को ठंडी हवा का झोंका और प्रिया का उन्मुक्त्त स्पर्श इस से अधिक उत्तेजक और क्या हो सकता है.

एक कथानुसार साम्राज्ञी नूरजहां को पानी में गुलाब की पंखडि़या मिला कर स्नान करना पसंद था. एक दिन नहाने में देर हो गई तो उस ने देखा कि पानी के ऊपर एक तरल पदार्थ तैर रहा है. वह समझ गई कि यह गुलाब की पंखडि़यों से निकला इत्र है जो दालचीनी, तेल की तरह कामोत्तेजक है. इसी तरह वनिला, चमेली, धनिया और चंदन का लेप या इत्र लगाने से भी स्त्रीपुरुष उन्मुक्त होते हैं.

शराब और नशीले द्रव्यों से कुछ हद तक कामोत्तेजना बढ़ती है, लेकिन इन का नुकसान अधिक है. ये कामोत्तेजना द्रव्य नहीं हैं. इन की छोटी खुराक शुरू की शर्म व संकोच दूर करने में सहायक होती है, लेकिन यदि कोई स्त्री या पुरुष इन का अधिक मात्रा में लंबे समय तक सेवन करता है तो आगे चल कर युवक ढीला हो जाता है तथा युवती में चरमोत्कर्ष के आनंद को ले कर कुछ समस्याएं पैदा हो सकती हैं, क्योंकि इन से मस्तिष्क प्रभावित होता है.

इसी प्रकार मारीलुआना व वियाग्रा जैसे पदार्थ भी अस्थायीरूप से यौनसुख की इच्छा या संभोग सुख थोड़ाबहुत बढ़ाते हैं. पर बेहोशी की सी हालत में. आप को  वार्निंग दी जाती है कि कृपया ड्रग्स से दूर रहें, क्योंकि अगर एक बार आप इन के आदी हो गए तो इन से पीछा छुड़ाना मुश्किल है. वियाग्रा जैसी दवाएं डाक्टर के परामर्श के बाद ही प्रयोग करें. युवतियों में भी हारमोंस की कमी को डाक्टर की सहायता से पूरी करें.

फिर आखिरी सवाल यही है कि क्या सचमुच ऐसी दवा यौनशक्ति में वृद्धि करती है. ऐसी दवा केवल तब ही लाभप्रद होती है, जब आदमी का मन भी कामवासना की तृप्ति करने में सहयोग करे.

औषधि निर्माता व विक्रेता केवल जरूरतमंदों का मात्र आर्थिक शोषण करते हैं. अगर इंसान अपने खानपान व व्यायाम पर विशेष ध्यान देते हुए प्रकृति के नियमों का पालन करे तो उस की यौन क्षमता स्वत: ही बनी रहेगी.

Serial Story: लाइफ कोच – भाग 3

‘‘नकुल, देखो, मैं ने तुम्हारे कपड़े, दवाइयां वगैरह अटैची में रख दिए हैं,’’ औफिस के कामों से मुंबई जाते समय किरण उसे एक छोटे बच्चे की तरह समझ रही थी और नकुल ‘ठीक है, ठीक है’ कहता जा रहा था.

‘‘कुछ समझ भी रहे हो या यों ही ‘ठीक है, ठीक है’ कहते जा रहे हो? फिर वहां से फोन कर दसों बार पूछोगे कि कौन सी चीज कहां रखी है,’’ किरण झिड़कते हुए बोली थी.

‘‘हां किरण, मैं सब समझ गया कि तुम ने कौन सी चीज कहां रखी है… नहीं भूलूंगा. लेकिन एक बात कहूं किरण? कम से कम मेरे दोस्तों के सामने ऐसा तो मत जाहिर किया करो कि तुम्हारे बिना मेरा काम नहीं चलता… मुझे कुछ नहीं आता. मैं तुम्हारे ही भरोसे हूं. अच्छा नहीं लगता है न?’’

‘‘ओह… कल की बात का बुरा मान गए,’’ किरण ने अपनी आंखें नचाईं, ‘‘तो क्या हो गया बोल दिया तो,’’ अटैची की चेन लगाते हुए किरण बोली, ‘‘वैसे, क्या गलत बोल दिया मैं ने? तुम्हें एक कपड़ा तक तो ठीक से खरीदना नहीं आता है और चले थे शौपिंग करने. देखा है मैं ने, कुछ भी उठा कर ले आते हो और फिर पैसे की बरबादी होती है. अच्छा चलो, छोड़ो वे सब. मुंबई पहुंचते ही फोन करना मत भूलना और सुनो, ध्यान रखना अपना, क्योंकि वहां मैं नहीं होऊंगी तुम्हारे साथ, समझे? और सुनो, बाहर का कुछ भी खानेपीने मत लगना, देख रहे हो न बीमारी फैली हुई है. और सुनो…’’

‘‘अच्छा भई, हो गया अब, जाने दो न,’’ खीजते हुए नकुल बोला. उसे लग रहा था जितनी जल्दी हो सके घर से निकल जाए. नहीं तो किरण बारबार उसे समझती रहेगी और फिर वह सब भूल जाएगा.

नकुल के घर से निकलतेनिकलते भी किरण ने 2-4 और नसीहतें और दे

डाली थीं, जिन से वह अंदर से तिलमिला उठा था. पर कुछ बोल  नहीं पाया और बाय कह कर घर से निकल गया. नकुल की चुप्पी का ही नतीजा था कि किरण इतना सिर चढ़ बोलने लगी थी. उसे लगता एक वही है जो घर में सब से बुद्धिमान इंसान है, एक वही है जिसे दुनियादारी की सारी समझ है नकुल तो बेवकूफ है. कुछ नहीं आता उसे. वह न आई होती उस की जिंदगी में, तो जाने उस का क्या हुआ होता, जैसे विचार उस के मन में पलते रहते थे. लेकिन उसे नहीं पता कि नकुल उस के जीवन में वह कुछ साल पहले आई है, उस से पहले वह खुद ही खुद की देखभाल करता था और आज जो वह इतने बड़े पोस्ट पर है, किरण की वजह से नहीं, बल्कि खुद की काबिलीयत के बल पर है.

लोग जो उस के कामों की तारीफ करते हैं, वह किरण की वजह से नहीं, बल्कि ये सब उस की मेहनत के कारण है, जो लोग उस का लोहा मानते हैं वरना कई ऐसे लोग हैं औफिस में जो मुंबई आना चाह रहे थे. मगर बौस ने इस काम के लिए नकुल को चुना, क्योंकि वही है जो इतनी बड़ी मीटिंग हैंडल कर सकता था.

नकुल अभी एअरपोर्ट से बाहर निकला ही था कि उस का फोन घनघना उठा. देखा, तो किरण का फोन था, ‘‘हां, बोलो’’ एक हाथ से अपना बैग पकड़े और दूसरे हाथ से वह टैक्सी को इशारा कर ही रहा था कि फोन उस के हाथ से गिरतेगिरते बचा, ‘‘रुको, मैं तुम्हें कौलबैक करता हूं,’’ कह कर नकुल ने फोन काट दिया और टैक्सी को आवाज देने लगा. रास्ते में कई बार उस के बौस का फोन आया, तो उन से काम और होने वाली मीटिंग के बारे में डिसकस करते हुए नकुल को याद ही नहीं रहा कि उसे किरण को फोन भी करना था.

होटल पहुंच कर जब उस ने अपना फोन चैक किया तो किरण के कई मिस्ट थे, ‘अरे, यार किरण को फोन करना तो भूल ही गया’ सोच कर ही नकुल का डर के मारे खून सूख गया कि कैसे वह किरण को फोन करना भूल गया और अब उस की खैर नहीं. दरअसल, मीटिंग के दौरान उस ने अपना फोन साइलैंट मोड पर रख दिया था, जिस के कारण उसे पता ही नहीं चला. खैर, हड़बड़ा कर अभी वह उसे फोन मिला ही रहा था कि उस के बौस का फोन आ गया यह पूछने के लिए कि मीटिंग कैसी रही? उन से बातें कर अभी वह किरण को फोन लगा ही रहा था कि फिर से उस का फोन आ गया तो बोला, ‘‘किरण मैं अभी तुम्हें ही फोन लगा रहा था. वह क्या है कि…’’ नकुल ने सफाई देनी चाही.

मगर वह फोन पर ही चीखने लगी, ‘‘पता था मुझे तुम यही करोगे. वहां जाते ही बेपरवाह हो जाओगे. भुल्लकड़ कहीं के. कब से… कब से मैं फोन लगा रही हूं. पर फोन बिजी ही आ रहा था. किस से बात कर रहे थे इतनी देर तक कि तुम्हें मुझे फोन करना भी याद नहीं आ रहा? बोलो, बोलते क्यों नहीं?’’ वह फोन पर ही इतना चीखने लगी कि नकुल का माथा झनझना उठा. एक तो वह खुद ही मीटिंग के कारण थक कर चूर हो चुका था. ऊपर से यह किरण कुछ समझती ही नहीं है. मन तो किया उस का कि अच्छे से समझ दे कि वह यहां होटल में ऐश करने नहीं आया है, बल्कि यहां औफिस के जरूरी काम से आया हुआ है. लेकिन उस ने केवल सौरी बोल कर फोन रख दिया, क्योंकि उसे समझने का कोई फायदा नहीं.

किरण के मुंह से कड़वी बातें सुनना नकुल के लिए कोई नई बात नहीं थी, बल्कि वह तो अब इस का आदी हो चुका था. रात में कितनी देर तक नकुल को नींद नहीं आई. बारबार उसे अपनी बेटी का चेहरा याद आ रहा था. वह फोन पर कैसे सिसकते हुए बोल रही थी कि मम्मी ने उसे मारा, क्योंकि उस ने पिज्जा खाने की जिद की थी इसलिए.

‘‘बेटा, कोई बात नहीं, जब मैं वहां आऊंगा न तब हम साथ में पिज्जा खाने चलेंगे, ओके? तो अब रोना बंद करो और मम्मी जो कहती है वही करो वरना फिर मारेगी वह तुम्हें. मेरा प्यारा बच्चा, मेरी परी, मानोगी न मेरी बात?’’ फोन पर जब नकुल ने बेटी को पुचकारा, तब जा कर वह चुप हुई. मन तो किया नकुल कि पूछे किरण से, क्यों उस ने पीहू को मारा? क्या प्यार से नहीं समझ सकती थी उसे? मारना जरूरी था? मगर क्या फायदा. वह तो वही करेगी जो उसे ठीक लगेगा उजटे और नकुल का गुस्सा भी पीहू पर ही उतार देगी.

आगे पढ़ें- अभी नकुल खाना खा कर सोने ही जा रहा था कि…

झुर्रियां दूर करने के 5 आसान उपाय

क्या कभी आपने त्वचा की बात सुनी?

वैसे तो त्वचा में झुर्रिया उम्र के बढ़ने का एक संकेत होती है, लेकिन कई बार एक्सप्रेसिव फेस, डिहाइड्रेटेड स्किन या अधिक सन एक्सपोज़र से कम उम्र में भी झुर्रियां दिखाई पड़ सकती है. इसका सबसे अधिक असर चेहरे और हाथों की स्किन पर पड़ता है. उम्र को रोका नहीं जा सकता, लेकिन त्वचा की नियमित देखभाल से इसे कम अवश्य किया जा सकता है.

इस बारें में क्यूटिस स्किन क्लिनिक की डर्मेटोलोजिस्ट डॉ. अप्रतिम गोयल कहती है कि त्वचा का हमेशा ही ध्यान रखना चाहिए और ये कम उम्र से ही शुरू करनी चाहिए, ताकि आपकी आदत बनी रहे, क्योंकि त्वचा हमारी छठी सेंस ऑर्गन है और इसका ख्याल रखना सबसे अधिक आवश्यक है.

झुर्रियां पड़ने की खास वजह

डॉ. अप्रतिम आगे कहती है कि उम्र के बढ़ने के साथ त्वचा पतली और रुखी हो जाती है, इससे उसका लचीलापन कम हो जाता है और धीरे-धीरे त्वचा डेमेज होने लगती है और खुद रिकवर नहीं कर पाती. इससे झुर्रियां दिखाई पड़ने लगती है. आजकल कम उम्र में झुर्रियां दिखाई पड़ने की वजह व्यस्त जीवन शैली, कम नींद, तनाव और आहार सम्बन्धी लापरवाही है, जिसे समय रहते ठीक किया जा सकता है.

इसके अलावा जो लोग धूप में लम्बे समय तक काम या शूटिंग करते है, उनमे भी झुर्रियां जल्दी दिखती है, क्योंकि सूर्य की किरणों से त्वचा में मौजूद कोलेजन और इलास्टिक फाइबर अलग होने लगते है. जबकि ये दोनों मिलकर ही कोशिकाओं को बांधे रखते है, जिससे त्वचा कसी हुई नजर आती है, इस परत के टूटने से स्किन कमजोर हो जाती है और झुर्रियां पड़ने लगती है. त्वचा को तरोताजा रखने के 5 आसान टिप्स निम्न है,

पर्याप्त मात्रा में पानी का करें इनटेक

रोज सही मात्रा में पानी की इन्टेक से त्वचा हाइड्रेटेड रहती है, जो त्वचा पर सूखे की वजह से पतली धारियों को बनने से रोकती है. यह आसान, एफोर्डेबल और साधारण तरीका है, जिससे स्किन को तरोताजा होने से कोई रोक नहीं सकता.

विटामिन C और विटामिन A रिच फलों और सब्जियों का करें सेवन

फल और सब्जियां, जिसमे विटामिन C जैसे ऑरेंज, स्वीटलाइम, लेमन, अमरुद आदि कोलेजन को समन्वय करने में मदद करती है, जिससे स्किन की चमक और टेक्सचर में इम्प्रूव होता है. जबकि विटामिन A रिच फल और सब्जियां मसलन गाजर, पपीता, हरी सब्जियां आदि सभी रेटिनॉल के नैचुरल सोर्सेज है, जो स्किन टेक्सचर को ही नहीं बल्कि स्किन टोन को भी इम्प्रूव करती है.

सन एक्सपोज़र को करें लिमिट

अधिक समय तक धूप में रहने से बचना जरुरी है, क्योंकि बार-बार सूर्य की किरणों से कोलेजन के डेमेज होने पर स्किन की एजिंग प्रोसेस जल्दी शुरू हो जाती है और झुर्रियां दिखाई पड़ने लगती है. बाहर निकलते वक्त त्वचा की रक्षा के लिए स्कार्फ, कैप्स, और सनस्क्रीन अवश्य लगायें.

मैजिकल पल्प का करें प्रयोग

एलोवेरा पल्प को ओरली लेने या फेसपैक के रूप में प्रयोग करने पर स्किन हमेशा हाइड्रेटेड और स्मूथ रहती है, जिससे फ्रेश लुक बनी रहती है. ‘बनाना मास्क’ बनाने के लिए पके केले को मैश कर लगाने से भी त्वचा स्मूथ होती है, क्योंकि ये फेसपैक मोयस्चराइजर का काम करती है. ऑरेंज पल्प भी विटामिन C में रिच होता है, जो स्किन को ग्लो करने और रिजुविनेट करने में मदद करती है.

आयल और मसाज को न करे अनदेखा  

नारियल और आलमंड आयल ड्राई स्किन के लिए बहुत अच्छा माना जाता है. ये स्किन की क्रेक्स को भरकर देती है और त्वचा की फाइन लाइन्स और झुर्रियों को बनने से रोकती है. नियमित चेहरे की जेंटल मसाज से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, जिससे स्किन रिजुविनेट होती है. इस प्रकार आयल और मसाज से फायदे तो अनेक होते है, लेकिन एक्ने संभावित स्किन वालों के लिए आयल और मसाज को अवॉयड करना चाहिए.

Serial Story: कोई अपना – भाग 2

चंद क्षणों के बाद उस युवक ने पूछा, ‘‘सुनीलजी कितने बजे तक आ जाते हैं?’’ ‘‘कोई निश्चित समय नहीं है. वैसे अच्छा होगा, आप उन से कार्यालय में ही मिलें. ऐसा है कि वे घर पर किसी से मिलना पसंद नहीं करते.’’

‘‘जी, औफिस में उन के पास समय ही कहां होता है.’’ ‘‘इस विषय में मैं आप की कोई भी मदद नहीं कर सकती. बेहतर होगा, आप उन से वहीं मिलें,’’ ढकेछिपे शब्दों में ही सही, मैं ने उन्हें फिर वह कहानी दोहराने से रोक दिया जिस की टीस अकसर मेरे मन में उठती रहती थी.

वे दोनों अपना सा मुंह ले कर चले गए. उन के इस तरह उदास हो कर जाने पर मुझे दुख हुआ, परंतु क्या करती? शाम को पति को सब सुनाया तो वे हंस पड़े, ‘‘ऐसा कहने की क्या जरूरत थी, उन की नईनई शादी हुई है. प्रेमविवाह किया है. दोनों के घर वालों ने कुछ नहीं दिया. सो, कर्ज ले कर कोई काम शुरू करना चाहता है. घर चला आया तो हमारा क्या ले गया. तुम प्यार से बात कर लेतीं, तो कौन सा नुकसान हो जाता?’’

‘‘लेकिन काम हो जाने के बाद तो ये मजे से अपना पल्ला झटक लेंगे.’’ ‘‘झटक लें, हमारा क्या ले जाएंगे. देखो शालिनी, हम समाज से कट कर तो नहीं रह सकते. मैं बैंक अधिकारी हूं, मुझ से तो वही लोग मिलेंगे, जिन्हें मुझ से काम होगा. अब क्या हम किसी के साथ हंसेंबोलें भी नहीं? कोई आता है या बुलाता है तो इस में कोई खराबी नहीं है. बस, एक सीमारेखा खींचनी चाहिए कि इस के पार नहीं जाना. भावनात्मक नाता बनाने की कोई जरूरत नहीं है. यों मिलो, जैसे हजारों जानने वाले मिलते हैं. इतनी मीठी भी न बनो कि कोई चट कर जाए और इतनी कड़वी भी नहीं कि कोई थूक दे.’’

मेरे पति ने व्यावहारिकता का पाठ पढ़ा दिया, जो मेरी समझ में तो आ गया, मगर भावुकता से भरा मन उसे सहज स्वीकार कर पाया अथवा नहीं, समझ नहीं पाई.

एक शाम एक दंपती हमारे यहां आए. बातचीत के दौरान पत्नी ने कहा, ‘‘अब आप कार क्यों नहीं ले लेते.’’ ‘‘कभी जरूरत ही महसूस नहीं हुई. जब लगेगा कार होनी चाहिए तब ले लेंगे,’’ मैं ने मुसकराते हुए कहा.

‘‘फिर भी भाभीजी, भाईसाहब बैंक में उच्चाधिकारी हैं, स्कूटर पर आनाजाना अच्छा नहीं लगता.’’ ‘‘क्यों, हमें तो बुरा नहीं लगता. कृपया आप विषय बदल लीजिए. हमारी जिंदगी में दखल न ही दें तो अच्छा है.’’

बच्चे बाहर पढ़ रहे थे, जिस वजह से कमरतोड़ खर्चा बड़ी मुश्किल से हम सह रहे थे. ईमानदार इंसान इन सारे खर्चों के बीच भला कहां कार और अन्य सुविधाओं के विषय में सोच सकता है. उस पर तुर्रा यह कि कोई आ कर यह जता जाए कि अब हमें स्कूटर शोभा नहीं देता, तो भला कैसे सुहा सकता है. एक बार तो कमाल ही हो गया. हमें किसी के जन्मदिन की पार्टी में जाना पड़ा. मेजबान ने मुझे घर की मालकिन से मिलाया, ‘‘आप सुनीलजी की पत्नी हैं और ये हैं मेरी पत्नी सुलेखा.’’ कीमती जेवरों से लदी आधुनिका मुझे देख ज्यादा प्रसन्न नहीं हुईं. फीकी सी मुसकान से मेरा स्वागत कर अन्य मेहमानों में व्यस्त हो गईं. पति को तो 2-3 लोगों ने बैंक की बातों में उलझा लिया, लेकिन मैं अकेली रह गई. चुपचाप एक तरफ बैठी रही. अचानक हाथ में गिलास थामे एक आदमी ने कहा, ‘‘आप सुनीलजी की पत्नी हैं?’’

‘‘जी हां,’’ मैं ने उत्तर दिया. ‘‘भाभीजी, आप से एक बात करनी थी…जरा सुनीलजी को समझाइए न, पूरे 50 हजार रुपए देने को तैयार हूं. आप कहिए न, मेरा काम हो जाएगा. अरे, ईमानदारी से रोटी ही चलती है, बस? आखिर वे कितना कमा लेते होंगे, यही 14-15 हजार…कितनी बार कहा है, हम से हाथ मिला लें…’’

मैं उस धूर्त व्यापारी को जवाब दिए बगैर ही वहां से उठ खड़ी हुई थी. मेरे पति पूरी बात सुन कर हैरान रह गए. मैं ने तनिक गुस्से से कहा, ‘‘आज के बाद ऐसी पार्टियों में मत ले जाना. मेरा वहां दम घुटता है.’’ ‘‘कोई बात नहीं, शालिनी, तुम एक कान से सुनो, दूसरे से निकाल दो. आजकल हर तीसरा इंसान बिकाऊ है. शायद वह सोचता होगा, तुम से बात कर के उस का काम आसान हो जाएगा.’’

मैं रो पड़ी थी. फिर कितने दिन सामान्य नहीं हो पाई थी. इसी बीच फिर खाने का दावतनामा मिला तो मैं ने तुनक कर कहा, ‘‘मैं कहीं नहीं जाऊंगी.’’

‘‘उन लोगों ने हम दोनों को खासतौर पर बुलाया है. छोटा सा काम शुरू किया है, उसी खुशी में.’’ ‘‘मुझे किसी के काम से क्या लेनादेना है, आप ही चले जाइए.’’

‘‘ऐसा नहीं सोचते, शालिनी, वे हमारा इतना मान करते हैं, सभी एकजैसे नहीं होते.’’

पति ने बहुत जिद की थी, मगर मैं टस से मस न हुई. वे अकेले ही चले गए. जब पति 2 घंटे बाद लौटे तो कोई साथ था.

‘‘नमस्ते, भाभीजी,’’ एक नारी स्वर कानों में पड़ा, सामने एक युवा जोड़ा खड़ा था. ऐसा लगा, इस से पहले कहीं इन से मिल चुकी हूं. ‘‘आप हमारे घर नहीं आईं, इसलिए सोचा, हम ही आप से मिल आएं,’’ महिला ने कहा.

‘‘बैठिए,’’ मैं ने सोफे की तरफ इशारा किया. उस के हाथ में रंगदार कागज में कुछ लिपटा था, जिसे बढ़ कर मेरे हाथ में देने लगी. मुझे लगा, बिच्छू है उस में, जो मुझे डस ही जाएगा. मैं ने जरा तीखी आवाज में कहा, ‘‘नहींनहीं, यह सब हमारे यहां…’’

‘‘यह मेरे बुटीक की पहली पोशाक है. हमारे मांबाप ने तो हमें दुत्कार ही दिया था. लेकिन सुनील भाईसाहब की कृपा से हमें कर्ज मिला और छोटा सा काम खोला. हमें आप लोगों का बहुत सहारा है, आप ही अब हमारे मांबाप हैं. कृपया मेरी यह भेंट स्वीकार करें,’’ कहतेकहते वह रो पड़ी. मैं भौचक्की सी रह गई कि पत्थरों के इस शहर में कोई रो भी रहा है. वह कड़वाहट जिसे मैं पिछले कई सालों से ढो रही थी, क्षणभर में ही न जाने कहां लुप्त हो गई.

‘‘भाभीजी, आप इसे स्वीकार कर लें, वरना इस का दिल टूट जाएगा,’’ इस बार उस के पति ने बात संभाली. मैं ने उस के हाथ से पैकेट ले कर खोला, उस में गुलाबी रंग की कढ़ाई की हुई सफेद साड़ी थी.

‘‘आप घर नहीं आईं, इसलिए हम स्वयं ही देने चले आए. आप इसे पहनेंगी न?’’ ‘‘हांहां, जरूर पहनूंगी, मगर इस की कीमत कितनी है?’’

‘‘वह तो हम ने लगाई ही नहीं, आप पहन लेंगी तो कीमत अपनेआप मिल जाएगी.’’ ‘‘नहींनहीं, भला ऐसा कैसे होगा,’’ फिर मेरा स्वर कड़वा होने लगा था. मैं कुछ और भी कहती, इस से पहले मेरे पति ने ही वह साड़ी ले कर मेज पर रख दी, ‘‘हमें यह साड़ी पसंद है, शालिनी इसे अवश्य पहनेगी. और गुलाबी रंग तो इसे बहुत प्रिय है.’’

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