Bigg Boss 16: भर गया शालीन के पाप का घड़ा, टीना से दोस्ती में आई दरार

कलर्स टीवी का रिएलिटी शो बिग बॉस 16 (Biggboss16) इन दिनों मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है जहां कंटेस्टेंट कभी एक -दूसरे से लड़ते नज़र आ रहे है तो कभी दोस्त बनते दिख रहे है बीते दिन घर से बेघर अकिंत हुए है. जिसके जाने के बाद प्रिंयका घर में बिलकुल अकेली हो गई है. जिसका फायदा खूब अर्चना उठा रही है. दोनो के बीच जमकर लड़ाई भी हुई थी.

आपको बता दें, कि घर में कंटेस्टेंट एक दूसरे अक्सर लड़ा करते है जो कि शो को और एंटरटेन बना देता है ऐसे बीते दिनों शालीन की एम सी स्टेन से लड़ाई हुई थी वही,बीते दिनों लड़ाई शालीन भनोट और सुंबुल के बीच हुई थी. दोनों में जमकर विवाद हुआ. जी हां. एक प्रोमो वीडियो में दिखाया गया था. जिसमें नॉमिनेशन की प्रकिया चल रही थी. वही टास्क के दौरान सुंबुल और शालीन एक दूसरे पर जमकर बरसते नज़र आए थे. लेकिन अब नई दरार शालीन और टीना के बीच दिख रही है.

आपको बता दें, कि हाल ही में एक प्रोमो वीडियो जारी किया गया है जिसमें सबका काला सच सामने आया है वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे सबके पाप का घड़ा भरेगा. जिसमें सबसे ज्यादा पाप का घड़ा शालीन का भरता दिखाया गया है.

जी हां, टास्क के दौरान सबसे ज्यादा पाप का घड़ा शालीन का भरा जिसका कारण है कि वो अपनी दोस्ती सही तरीके से नहीं निभाते है और दोस्तो से ही लड़ बेठते है. आगे शालीन, टीना से लड़ते है टीना उन्हे खरीखोटी सुनाती है. निमृत भी शालीन का पाप घड़ा भरती है वही दूसरी और शिव ठाकरे भी शालीन पर ही पाप घड़ा भरते है. वीडियो में साफ दिखाया गया है किस तरह शालीन टीना से झगड़ते है और अपनी दोस्ती सही से नहीं निभाते है.

 

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रीयल लाइफ मेें भी हीरो है जेम्स बौंड

जेम्स बौंड फिल्मों का ताजा हीरो डेनियल क्रेग ने एक इंटरव्यू मैं कहा है कि वह एक्ंिटग के दौरान मिली अपनी संपत्ति को मृत्यु के बाद बच्चों को पूरी तरह सौंप कर नहीं जाएगा.

डेनियल क्रेग को हर फिल्म पर कई करोड़ डौलर मिलते हैं पर उस का मानना है कि बच्चों को अपना पैसा कमाने की आदत पडऩी चाहिए. उस की एक 29 वर्ष की व एक 2 वर्ष की बेटी है.

कुछ दशक पहले एंड्रयू कार्नेगी ने अपनी संपत्ति जो अब 11 अरब डौलर के बराबर है कार्नेगी फाउंडेशन बना कर दान कर दी थी. पिता की संपत्ति बेटों बेटियों को ही जाए यह जरूरी नहीं है हालांकि कानून भी इसे वाजिब मानता और समाज भी यही चाहता है. बच्चे पैदा होते ही बिना कुछ किए पिता की कमाई को भोगना शुरू कर देते हैं. अधिकतर बिगड़ैल युवा वे ही होते है जिन के मातापिता उन्हें भरपूर बचपन से देते हैं क्योंकि उन की अपनी कमाई अपार होती है.

बच्चों को विरासत में योग्यता देना, बुद्धि देना, कौशव देना, सही मेहनत के गुर देना तो ठीक है पर पकीपकाई खीर उन्हें देना ठीक नहीं है पर इस के अलावा मांपिता के पास और कोई चारा नहीं होता. यह कहना अपनेआप में अच्छा लगता है कि कोई जना अपनी कमाई संपत्ति बच्चों को न दे कर दान कर गया क्योंकि बच्चों में योग्यता होगी तो वे क्या लेंगे. सवाल उठता है कि दान में बड़ी रकम पाने वालों को आखिर किस आधार पर दानी का संपत्ति के मिले. उस ने भी तो नहीं कमाया. सामाजिक कामों के लिए पैसा दे देना कहना अच्छा लगता है अमीर की मृत्यु के बाद उस पैसे का जो भी प्रबंध करेगा क्या उसे कोई लगाव होगा? उस ने भी कोई मेहनत नहीं की थी पर दानी जने की दिल की महानता के कारण वह बिना कमाए अरबों के इधरउधर करने का हकदार बन जाए, यह कैसे सही ठहराया जा सकता है.

भारत में अभी हाल में रमेश चौहान ने बिस्लिरी कंपनी को बेचा क्योंकि उस की एक मात्र संतान बेटी की उस उद्योग को चलाने में कोई रूचि नहीं थी और वृद्ध होते रमेश चौहान के बस के विशाल कारोबार संभालना नहीं रहा था. बेटी की आर्ट में ज्यादा रुचि है.

कुछ साल पहले बिड़ला परिवार के एक पुत्र की 2000 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति उस के चार्टर्ड अकाउंटेंट के हाथ में आ गई क्योंकि उन की कोई संतान न थी. वह अपनी संपत्ति अपने भाइयों की संतानों को नहीं देना चाहते थे. यह भी एक तरह का दान था पर क्या चार्टर्ड अकाउंटेंट उस संपत्ति का किसी तरह से भी नैतिक हकदार है.

बहुत अमीर परिवारोंं में विरासत के सवाल पर दशकों तक विवाद चलते हैं और कई बार पूरी संपत्ति कानूनी खर्च मं स्वाह हो जाती है. कठिनाई यह है कि जो दान की वकालत करते हैं वे यह नहीं बता सकते कि जिसे दान मिले वह किस तरह से मुक्त में मिले पैसे का सदुपयोग करेगा.

यह कहना बेमतलब का है कि अमीरों को अपनी संपत्ति उन संस्थाओं को दान कर देनी चाहिए जो स्कूल, कालेज, चर्च, मंदिर, मसजिद चलाते हैं. ये सब भी धंधे हैं. इतने प्रबंधक गुणों की खान नहीं होते. वे दान में मिले पैसे को लूट का पैसा समझें तो आश्चर्य नहीं होन चाहिए.

सदियों से चली आ रही प्रक्रिया कि पिता या मां की कमाई संतानों को जाए ही सब से सही तरीका है. यह दान करने का बीज तो धर्म के दुकानदार बोते हैं क्योंकि धर्म तो टिका ही दान पर मिले पैसे पर है. कुछ पैसा स्वर्ग के टिकट बेच कर मिलता हैै और कुछ इस तरह के अमीरों का बहका कर कि संतानों को पैसा न दो, दान कर दो. पिछली कुछ सदियों से सरकारें भी एस्टेट ड्यूटी के नाम पर बीच में कूदने लगी थीं पर यह फार्मूला सफल नहीं हुआ और धीरेधीरे सभी देशों की सरकार ने एस्टेट ड्यूटी कम कर दी है.संतान अच्छी हो या खराब, अमीर पिता की होने के कारण उसे ही संपत्ति मिलना सब से सहज उपाय है.

बालकनी को यों बनाएं सुंदर

बालकनी को यों बनाएं सुंदर इन आसान तरीकों से बालकनी बन जाएगी फैवरिट स्पौट और आप वहां अधिक से अधिक वक्त बिताना चाहेंगे… शर्मिष्ठा शादी के बाद जब लखनऊ से दिल्ली आई तो एक खुलेखुले बागबगीचे वाले घर को छोड़ कर ससुराल के थ्री बीएचके फ्लैट में रहना उस के लिए बड़ा कष्टमय रहा. थर्ड फ्लोर पर बने फ्लैट में रहते हुए उसे त्रिशंकु जैसी फीलिंग होती थी. ऐसा घर जहां न छत अपनी न जमीन अपनी. वहां सूरज की रोशनी भी अंदर नहीं आती थी.

शर्मिष्ठा बचपन से जवानी तक अपने जिस घर में रहती आई थी वह एक बंगला था. सामने बगीचा, पीछे किचन गार्डन. हर कमरे में खिड़कियां. खुली साफ हवा. घर के बीच आंगन और आंगन में पड़ती सुबह के सूरज की पहली किरण. ऐसे में ससुराल में आ कर जब उसे फ्लैट में रहना पड़ा तो यहां उस का दम घुटने लगा. चारों तरफ से बंद फ्लैट, जिस में खुलेपन के नाम पर बस एक बालकनी थी जहां खड़े हो कर वह लंबीलंबी सांसें खींचा करती थी.

अब तो शर्मिष्ठा को इसी घर में रहना था क्योंकि दिल्ली जैसी जगह में बंगले की कल्पना तो नहीं की जा सकती, इसलिए उस ने बालकनी को ही कुछ ऐसा लुक देने की सोची जिस से प्रकृति से नजदीकी का कुछ एहसास जगे. शर्मिष्ठा ने छोटेछोटे गमलों में कुछ पौधे लगाए. घर की हर टूटीफूटी चीज को उस ने पेंट कर के उस में छोटे सीजनल फ्लौवर वाले पौधे लगा कर बालकनी की रेलिंग पर जगहजगह टांग दिए. कहीं पुराने जूते में तो कहीं चाय की केतली में पौधों की बेलें लटकने लगीं, जो बेहद आकर्षक लगती थीं. बीचबीच में उस ने रंगीन बल्ब वाली लाइट और छोटीछोटी घंटियां लगा दीं, जो हवा के ?ांकें से हिलतीडुलती कर्णप्रिय संगीत उत्पन्न करतीं.

बालकनी के एक कोने में उस ने तुलसी, सदाबहार और मीठे नीम के कुछ बड़े पौधे बड़े गमलों में लगाए, जिस से वह हिस्सा ज्यादा हराभरा दिखने लगा. धीरेधीरे उस की बालकनी का लुक चेंज होने लगा. एक दिन शर्मिष्ठा बाजार से नकली घास वाला छोटा कारपेट खरीद लाई. उसे बालकनी में बिछा कर उस ने उस पर बांस की 2 छोटी कुरसियां और एक छोटी मेज सजा दी. 1 महीने के अंदर ही शर्मिष्ठा की बालकनी एक प्यारे से बगीचे में बदल गई, जहां घर के कामों से फुरसत पा कर वह अपनी सास के साथ बैठ कर गप्पें मारती. यहां तक कि दोनों लंच और शाम की चाय भी वहीं बैठ कर पीने लगीं. शर्मिष्ठा की मेहनत से यह जगह उस घर की सब से सुंदर और घर के हर सदस्य की पसंदीदा जगह बन गई.

इसे देख कर आसपास के फ्लैट के लोग भी अपनीअपनी बालकनी को पेड़पौधों से सजाने लगे. छोटा सा घर हो, घर के बाहर बड़ा सा गार्डन हो, वहां 2 चेयर व टेबल लगी हो, वहां बैठ कर आप प्रकृति के बीच सुबह की चाय या शाम की कौफी का आनंद लें, यह हर किसी का सपना होता है. लेकिन अपार्टमैंट, फ्लैट कल्चर में ये सब मुमकिन नहीं है, यही सोच कर लोग मन मार कर रह जाते हैं. मगर उदास होने की जरूरत नहीं है.

आप अपनी छोटी सी बालकनी को भी इतना खूबसूरत बना सकती हैं कि आप को प्रकृति के बीच होने का आनंद मिल सकेगा. हम आप को बताते हैं कि कैसे अपनी बालकनी को हराभरा व सुंदर बनाएं ताकि वह आप का पसंदीदा स्पौट बन जाए और आप अपना ज्यादा से ज्यादा वक्त वहां गुजारें.

आर्टिफिशियल घास का उपयोग करें आप अपनी बालकनी के एरिया को नाप लें, फिर उस के अनुसार मार्केट से आर्टिफिशियल घास खरीद लाएं. यह हलके या डार्क ग्रीन कलर की होती है जो बिलकुल असली जैसी दिखती है. यह आर्टिफिशियल घास एक मिनट में आप की बालकनी का लुक चेंज कर देगी. आप को लगेगा कि आप गार्डन में ही हैं. इसे मैंटेन करना भी बहुत आसान है. हैंगिंग पौट्स व गमलों से सजाएं बालकनी भले छोटी हो, लेकिन उस में गार्डनिंग का शौक पूरा किया जा सकता है. आप बालकनी को रंगबिरंगे फूलों के पौधों व लताओं से सजा सकती हैं.

गैंदे के पौधे जरूर शामिल करें. जाड़ों के मौसम में गुलदाउदी भी कई रंगों व साइज में लगा सकती हैं. इसे ज्यादा देखरेख की भी जरूरत नहीं होती. पेटूनिया भी अच्छा औप्शन है. इन्हें 6 से 8 घंटे की धूप चाहिए होती है और पानी कम लगता है. इसी के साथ मौनिंग ग्लोरी के फूल भी गुलाबी, नीले, बैगनी व सफेद रंगों में खिलते हैं. इन्हें भी लगा सकती हैं. बालकनी में हरे पौधे भी लगाएं ताकि ग्रीनरी व ताजगी का एहसास हो जैसे कोरल बेल्स, फर्न आदि.

आप अगर मैंटेन कर सकें तो कुछ बोनसाई भी जरूर रखें. दीवार पर लगाएं पेंटिंग आगे की जगह फूलों से सजा कर पीछे की दीवार खूबसूरत पेंटिंग या तसवीरों से सजाएं. आप इस दीवार पर खूबसूरत वालपेपर या स्टीकर भी लगा सकती हैं. औनलाइन कई ऐसे स्टीकर मिल जाएंगे जो प्राकृतिक खूबसूरती से भरे हों. शोपीस जरूर रखें टैराकोटा, मिट्टी या चीनी मिट्टी के तरहतरह के शोपीस आप मार्केट से खरीद सकती हैं. ये औनलाइन भी मिलते हैं. ये स्पैशली गार्डन के मुताबिक बनाए जाते हैं.

आप चाहें तो मिनी फाउंटेन खरीद सकती हैं. बालकनी के एक कोने में इसे लगा देंगी तो आप की बालकनी में चार चांद लग जाएंगे. कलकल आवाज करते ?ारने की वजह से आप को बिलकुल प्रकृति के बीच होने का एहसास होगा. यह बालकनी को बहुत क्लासी लुक देगा. कलरफुल लाइट्स या लालटेन लगाएं बालकनी में दीवाली में इस्तेमाल की जाने वाली लाइटिंग लगा सकती हैं. पुरानी लालटेन को यलो या रैड कलर से पेंट कर के टांग सकती हैं.

आप चाहें तो कैंडल स्टैंड में आकर्षक रंगों वाली कैंडल्स भी लगा सकती हैं. अगर बालकनी में तुलसी का पौधा है तो उस पर दीया रखने की जगह बनाएं. कई तरह की हैंगिंग लाइट्स, जो बटरफ्लाई, स्टार या मून जैसे आकार में होती हैं, उन से भी अपनी बालकनी सजा सकती हैं.

कोजी चेयर या ?ाला लगाएं गार्डन चेयर, कुशंस, बीन बैग्स, स्टूल आदि का इस्तेमाल कर के आप अपनी बालकनी को एक छोटी सी बैठक बना सकती हैं. अगर बालकनी बड़ी है तो वहां एक ?ाला भी लगा सकती हैं ताकि सुबहशाम उस पर बैठ कर कुछ पल एकांत में बिता सकें, बुक पढ़ सकें, बारिश का आनंद ले सकें, चायकौफी पी सकें. बालकनी को स्टोररूम न बनने दें बालकनी में बेकार की चीजों को न रखें. उसे स्टोररूम की तरह इस्तेमाल न करें. कई लोग इस में बच्चों की साइकिल, खिलौने या बक्से आदि रख देते हैं, जिस से बालकनी भद्दी दिखाई देने लगती है. बालकनी में कपड़े सुखाना भी जरूरी होता है. इस के लिए स्टैंड का इस्तेमाल करें जिसे काम खत्म होने के बाद फोल्ड कर के अंदर रखा जा सके.

Winter Special: स्टफ्ड सेमफली बनाने का तरीका

सब्जीियो में सेहत के लिए सबसे अच्छी होती है हरी सब्जियां जिसे असानी से घर पर पका सकते है तो घर वालों को सर्व कर सकते है तो ऐसे मे रेडी स्टफ्ड सेमफली जिसे बनाने के लिए आपको कुछ ही समय लगता है.

सामग्री

20 मुलायम सेमफलियां

50 ग्राम पनीर मैश किया

1 बड़ा चम्मच कौर्नफ्लोर

1 छोटा चम्मच अदरक व हरीमिर्च बारीक कटे

1 छोटा चम्मच चाट मसाला

1 छोटा चम्मच भरवां सब्जी मसाला

2 छोटे चम्मच धनियापत्ती बारीक कटी

1 बड़ा चम्मच तिल

2 बड़े चम्मच रिफाइंड औयल.

विधि

फलियों के किनारों के रेशे निकाल कर उबलते पानी में 3-4 मिनट रखें. पानी निथार कर ठंडे पानी में डालें. फिर कपड़े में रख कर थपथपा लें. पनीर में तिल को छोड़ कर बाकी सारी सामग्री मिलाएं. प्रत्येक फली को एक साइड से चाकू से खोलें और उस में पनीर वाला मसाला हलके हाथों से भर दें.

कौर्नफ्लोर को थोड़े से पानी में घोलें और सेम में जिस तरफ से भरावन भरी है थोड़ाथोड़ा लगा दें. एक नौनस्टिक पैन में तेल गरम करें. तिल चटकाएं और फिर सावधानी से सभी सेम में लगा दे. उलटपलट कर सेंक लें. परांठों के साथ सर्व करें.

नोट: आप चाहें तो कौर्नफ्लोर और मैदे का घोल बना कर उस में प्रत्येक सेम डिप कर के भी फ्राई कर सकती है.

Winter Special: जीरो फिगर की दीवानगी

हर कोई हीरो बनना चाहता है जीरो नहीं, लेकिन जब बात परफैक्ट बौडी फिगर की आती है, तो युवाओं में जीरो साइज बौडी फिगर का जबरदस्त क्रेज दिखाई देता है जहां हर युवक रितिक रोशन जैसा दिखना चाहता है और हर युवती करीना जैसी परफैक्ट फिगर पाना चाहती है और चाहे भी क्यों न भला, आखिर परफैक्ट बौडी पर ही तो हर पोशाक जंचती है.

दुनिया से साइज जीरो फिगर का परिचय पहली बार 1966 में ब्रिटिश मौडल ट्वीगी ने कराया था. भारत में जीरो साइज फिगर को युवाओं के बीच पौपुलर किया प्रसिद्ध अभिनेत्री करीना कपूर ने. फिल्म ‘रिफ्यूजी’ की 65 किलोग्राम की करीना ने जब फिल्म ‘टशन’ के लिए अपना वजन घटा कर 49 किलोग्राम किया, तो देशभर के युवा उन की जीरो साइज सैक्सी फिगर के दीवाने हो गए.

30-22-32 की जीरो फिगर में पतली कमर न केवल खूबसूरती का आईना होती है बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहतर होती है, क्योंकि मोटापा या बेडौल शरीर ब्लड प्रैशर, शुगर, थायराइड, हार्ट संबंधी अनेक गंभीर बीमारियों को न्योता देता है. टीवी, पत्रपत्रिकाओं, फिल्मों में दिखते जीरो साइज मौडल भी युवाओं को जीरो साइज बौडी पाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. जीरो साइज के दीवाने युवा डाइट कंट्रोल कर के जिम जौइन कर तरहतरह की सर्जरी करवा कर जीरो साइज पाने की रेस में खड़े हैं.

वे हर रोज सुबह उठ कर अपना वजन नापते हैं और इंचीटेप से कमर का नाप लेते हैं. उन का एकमात्र ध्येय होता है, जीरो साइज फिगर पाना. फिर चाहे उस के लिए उन्हें कुछ भी क्यों न करना पड़े.

छोटे परदे पर साइज जीरो का जनून

साइज जीरो वाली पतली कमर व परफैक्ट फिगर वाली छोटी परदे की सभी नाजुक बालाएं मानती हैं कि साइज जीरो यानी ब्यूटी व अट्रैक्शन और इसी सोच के आधार पर आज सभी हौलीवुड बालाएं जीरो फिगर के फंडे को अपना रही हैं. फिर चाहे वे ‘एक हजारों में मेरी बहना हो’ की क्रिस्टल डिसूजा हों, ‘इस प्यार को क्या नाम दूं’ की सनाया ईरानी हों, ‘सास बिना ससुराल’ की ऐश्वर्या सखूजा हों, ‘उतरन’ की टीना दत्ता हों या फिर ‘बालिका वधू’ की प्रत्यूषा बनर्जी हों.

गैजेट्स भी भुना रहे हैं जीरो फिगर ट्रैंड को

जीरो फिगर की दीवानगी अब लैपटौप में साफ दिखाई दे रही है. हाल ही में सोनी कंपनी ने अपना अल्ट्रा स्लिम लैपटौप ‘वायो ऐक्स’ लौंच किया, जिसे बौलीवुड की जीरो फिगर ब्यूटी करीना ने प्रमोट किया.

करीना कपूर की जीरो साइज फिगर में रुजुता दिवाकर का योगदान

करीना कपूर को जीरो साइज फिगर दिलाने में करीना की डाइटीशियन रुजुता का बहुत बड़ा यो गदान था. रुजुता मानती हैं कि जीरो साइज फिगर पाने के लिए मुख्य 4 बातों पर ध्यान देना चाहिए. 1. सुबह उठने के बाद चाय या कौफी बिलकुल न लें, बल्कि 10-15 मिनट के भीतर कुछ फल खाएं या हैल्दी स्नैक्स लें. 2. दिनभर में हर 2 घंटे के अंतराल पर कुछ न कुछ थोड़ाथोड़ा खाएं. यानी दिनभर में 8-9 बार कुछ न कुछ खाएं. 3. भोजन की मात्रा आप की कार्यक्षमता यानी आप दिन भर में कितनी कैलोरी बर्न करते हैं, इस बात पर निर्भर करती है. 4. रात का भोजन सोने से 2 घंटे पहले कर लें. दिन भर के खाने में एक सेब, अंडे की सफेदी, दूध, चीज, स्लाइस, मुट्ठी भर मेवे अवश्य शामिल करें. दिनभर में 5 लिटर पानी पीएं. इस से आप की त्वचा पर चमक आएगी. वजन कम करने के लिए रोजाना 45 मिनट तक ऐक्सरसाइज व जौगिंग करें व अच्छी नींद लें.

जीरो फिगर बौडी पाने की राह में डाइट की भूमिका

डाइटीशियन गीतू अमरनानी कहती हैं, आजकल युवाओं में जीरो फिगर बौडी पाने का जबरदस्त क्रेज है. जीरो फिगर बौडी पाने के लिए डाइट का खास ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. कुछ युवा जीरो फिगर बौडी पाने के लिए भूखे रह कर अपने शरीर के साथ खिलवाड़ करते हैं, जो एकदम गलत है. जीरो फिगर बौडी के लिए आप का डाइट प्लान ऐसा होना चाहिए जिस में सभी जरूरी पोषक तत्त्व मसलन, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन, मिनरल या जरूरी फैट हों. डाइट प्लान आप के वजन व हाइट के अनुसार होना चाहिए.

वजन कम करने के लिए केवल डाइटिंग के बजाय ऐक्सरसाइज को भी शामिल करें. ज्यादा डाइटिंग से शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हारमोन बढ़ जाते हैं और आप सामान्य से ज्यादा खाना खाने लगते हैं. डाइट में अनाज, फल, सब्जियां शामिल करें. इस से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी व मैडिकल जटिलताएं भी नहीं होंगी.

खाने में जंकफूड से दूर रहें. आप की डाइट ऐसी हो जो आप के स्वास्थ्य के लिए भी सही हो. जीरो साइज फिगर पाने के लिए ऐसी डाइट लें जो आप के शरीर को ताकत दे. खाने में हाईफाइबर चीजें शामिल करें. इस से शरीर का मैटाबौलिज्म रेट बढ़ने के साथसाथ कैलोरी जल्दी घटने में भी मदद मिलती है. डाइट में सूप, सलाद, नारियल पानी व ग्रीन टी शामिल करें. खाने में छोटा या रैगुलर साइज चुनें. खाना धीरेधीरे खाएं. हर कौर को 20 सैकंड तक चबाएं. इस से पाचनशक्ति बढ़ेगी और आप को मनचाही फिगर पाने में मदद भी मिलेगी.

ऐक्सरसाइज को न करें नजरअंदाज

‘‘अगर आप जीरो फिगर बौडी पाना चाहते हैं तो आप को डाइट के साथसाथ अपने ऐक्सरसाइज शैड्यूल पर भी ध्यान देना होगा,’’ यह कहना है कृष्णा नगर, दिल्ली के रिदम जिम की संचालिका पूजा का. पूजा बताती हैं, ‘‘एक रात में जीरो फिगर बौडी पाना असंभव है, लेकिन सही डाइट प्लान व नियमित ऐक्सरसाइज द्वारा आप जीरो साइज बौडी अवश्य पा सकते हैं. शरीर के ऊपरी हिस्से से वजन कम करने के लिए पुशअप करें, शोल्डर प्रैस से शरीर सुडौल बनता है व कमर पतली तथा शरीर स्ट्रीमलाइंड बनता है. पेट के निचले हिस्से से फैट कम करने के लिए एब्डौमिनल क्रंच करें. इस के अलावा टे्रडमिल व स्टेपिंग मशीन का प्रयोग कर के भी आप परफैक्ट जीरो बौडी फिगर पा सकते हैं.’’

पूजा बताती हैं कि जीरो फिगर बौडी पाने की चाह में वजन एकदम से न घटाएं. इस से त्वचा ढीली हो कर लटक सकती है, जबकि सही तरीके से वजन घटाने व डाइट लेने से मसल्स मजबूत व बौडी शेप में आ जाती है. व्यायाम शरीर की जरूरत व क्षमता के अनुसार करें. ऐक्सरसाइज के दौरान सिप कर के कुनकुना पानी पीना न भूलें, ताकि पसीने के रूप में निकलने वाले तरल पदार्थों की पूर्ति हो सके. वर्कआउट के साथ मनचाहा खाना खाने का लाइसैंस न लें. सही डाइट व रैगुलर वर्कआउट से आप मनचाही फिगर पा सकते हैं. वर्कआउट अपने वजन, लंबाई, आयु, दिनभर की गतिविधियां मैटाबौलिक रेट, डाइट व जीवनशैली के अनुसार करें. कोई भी ऐक्सरसाइज करने से पहले ऐक्सपर्ट की राय अवश्य लें.

पूजा कहती हैं, ‘‘जीरो साइज में बुराई नहीं है, लेकिन जीरो साइज फिगर के लिए हैल्थ के साथ खिलवाड़ न करें. जीरो फिगर पाने के लिए क्रैश डाइट व ऐक्सरसाइज के गलत तरीकों को अपना कर शरीर के साथ खिलवाड़ न करें. खूबसूरती व परफैक्ट फिगर के साथसाथ हैल्थ को भी पूरा महत्त्व दें.’’

जीरो फिगर स्टार अभिनेता- अभिनेत्रियां

सोनम कपूर : आप को यह जान कर हैरानी होगी कि आज की जीरो फिगर सोनम कपूर का वजन किसी समय 86 किलो था. सोनम कपूर अपनी डाइट में पेयपदार्थों को भरपूर शामिल करती हैं. वे हर 1-2 घंटे में नारियल पानी पीती हैं. इस के अलावा वे खीरे का रस व छाछ भी खूब पीती हैं. सोनम चीनी व नमक सोचसमझ कर ही लेती हैं.

प्रतीक बब्बर : ‘‘अगर आप फिट नहीं हैं, तो जिंदगी में कुछ भी ऐंजौय नहीं कर सकते.’’ प्रतीक का मानना है कि हर किसी को रैगुलर वर्कआउट करना चाहिए. प्रतीक की फेवरेट परफैक्ट बौडी फिगर में मेल सैलेब्रिटी हग जैकमैन व रितिक रोशन हैं जबकि फीमेल सैलेब्रिटी मेगन फौक्स व प्रियंका चोपड़ा हैं.

करीना कपूर : जीरो फिगर की सिंबल करीना के अनुसार, ‘‘सैक्सी नहीं है मोटापा. भला मोटी हो कर कोई हौट कैसी लगेगी. अच्छी फिगर हर फीमेल का सपना होता है. बौडी के फैट डिपौजिट्स पर गर्व भला कैसे किया जा सकता है.’’

कैटरीना कैफ : हाल ही में कैट ने धूम-3 में मिस्टर परफैक्शनिस्ट आमिर खान को टक्कर देने के लिए 2 महीने में 5 किलोग्राम  वजन कम कर के स्वयं को स्लिम व स्किनी टीम में शामिल कर लिया है.

वजन घटाने में मददगार जीरो नूडल्स

‘डेली मेल’ की एक खबर के अनुसार जापान में वजन घटाने में मददगार जीरो नूडल्स पेश किए गए हैं. ये जीरो नूडल्स एशियन ग्राउंड रूट कौंजेक और 96 प्रतिशत पानी से तैयार किए गए हैं. इन के निर्माताओं का दावा है कि ये नूडल्स न केवल कैलोरी की मात्रा कम करेंगे बल्कि आप के दिमाग को सोचने के लिए भी प्रेरित करेंगे कि आप ने पेट भर भोजन कर लिया है.

हाल ही में इसराईल सरकार ने अल्ट्रास्लिम होने से जुड़े तमाम रिस्क देखते हुए एक कानून द्वारा मौडल पर बैन लगा दिया है. कानून के अनुसार, मौडल को मौडलिंग करने के लिए सही बीएमआई मैंटेन करना होगा. मौडल को अपनी मैडिकल रिपोर्ट में प्रूव करना होगा कि वह हैल्दी है और अंडरवेट नहीं अर्थात उस का बीएमआई 18.5 से कम नहीं है. ऐसा कानून बनाने वाला इसराईल दुनिया का पहला देश है. 

मास्क टीवी पर शुरु होने जा रहा है किन्नरों का एक टीवी शो, पढ़े खबर

लेखक व निर्देषक  -मानसी भट्ट

ओटीटी प्लेटफार्म के चलते अब फिल्म कंटेंट को प्रधानता दी जा रही है.इसी बदलाव की वजह से असल जीवन के नौ ट्रासजेंडरो को लेकर ओटीटी प्लेटफार्म ‘‘मास्क टीवी’’ पर बीस दिसंबर से एक षो ‘‘प्रोजेक्ट एंजल्स’’ स्ट्ठीम हो रहा है.यह पहली बार है,जब किसी षो में सिर्फ ट्रासजेंडर/ किन्नर अभिनय  कर रहे हों.ट्रांसजेंडर / किन्नरों को लेकर षो बनाने का साहस लेखक व निर्देषक मानसी भट्ट ने दिखाया है,जिनका मानना है कि ट्रासजेडरो को वह मेनस्ट्ठीम में लाना चाहती हैं.वह चाहती हैं कि लोग ट्रासजेंडरो की प्रतिभा से परिचित होकर उन्हे स्वीकार करे और उन्हे अपने जैसा माने.

ट्रासजेंडर यानी कि इस थर्ड जेंडर को सरकार द्वारा मान्यता दिए जाने के बावजूद यह समुदाय हमारे समाज में आज भी उपेक्षित है. प्रस्तुत है मानसी भट्ट से हुई बातचीत के अंष..अपनी अब तक की यात्रा के बारे में बताएं? मेरे पिता संजय भट्ट जी मार्केटिंग के साथ साथ दूरदर्षन के लिए सीरियलों का निर्माण करते रहे हंैं.जबकि मेरी मां अंजू भट्ट बहुत अच्छी लेखक,गीतकार,अभिनेत्री व निर्देषक हैं.वह काफी पढ़ी लिखी हैं.उन्होने सीरियल ‘मंजिलें’ लिखने के साथ ही उसमें अभिनय भी किया था.इस सीरियल में

वह पुलिस इंस्पेक्टर अंजू दीक्षित बनी थी.कई म्यूजिक अलबम बनाए.उन्होने मेरे भाई चिरंजीवी के लिए एक सीरियल लिखा.मेरी मां ने एक मराठी भाषा में एक सीरियल लिखा था,जिसमें अभिनय कर श्रेयष तलपड़े ने मराठी टीवी में कदम रखा था.एक गांधी जी पर पूरा अलबम लिखा था.उनका लेखन आज भी जारी है. तो मैने अपने घर में बचपन से ही रचनात्मक माहौल पाया है.मैने व मेरे भाई चिरंजीवी ने बचपन से ही षूटिंग व कलाकारों को देखा है.हम अक्सर सीरियल की षूटिंग के दौरान सेट पर भी जाते रहे हैं.तो आप कह सकते हैं कि हमारी परवरिष फिल्मी माहौल मंे ही हुई है.जब मैं कालेज में पढ़ती थी,तो मैने सायकोलाॅजी विषय के साथ पढ़ाई की.षायद यह मेरी गलती थी. क्योंकि उस वक्त मैने जोष में सायकोलाॅजी विषय ले लिया था और तब तक मैंने सोचा ही नही था कि भविष्य में क्या करना है.कालेज की पढ़ाई खत्म होने और स्नातक की डिग्री हाथ मंे आ गयी,तब मेरे पिता जी ने पूछा कि अब क्या? मैने कहा कि अब सोचना है.,अभी तक कुछ सोचा नहीं?तब मेरे पिता ने

कहा कि क्यों न फिल्म या सीरियल निर्माण व निर्देषन करो.तब मैं अपने पिता जी के सहयोग से सीरियल की लेखक व निर्देषक बन गयी. निर्देषक बनने के लिए आपने किस तरह की तैयारियां की? -इमानदारी की बात यही है कि मेरे पिता संजय भट्ट जी ने काफी सलाह दी.इसके अलावा मैने आपको पहले ही बताया कि मैं अक्सर षूटिंग के दौरान सेट पर जाया करती थी,तो अनजाने ही मैं बहुत कुछ सीख रही थी.वैसे स्कूल दिनों में मैं और मेरा भाई चिरंजीवी षौकिया एक एक घ्ंाटे की फिल्में बनाया करते थे.मैने पहली बार सीरीज ‘प्रोजेक्ट एंजल्स’ का लेखन व निर्देषन किया है और मेरे भाई चिरंजीवी ने इसका निर्माण किया है.फिर माता पिता का सहयोग भी रहा है.

‘प्रोजेक्ट एंजल्स’ की योजना कैसे बनी? मेरी मां ने एक गाना ‘‘राज तुम्हारे’’ लिखा था,जिसमें किन्नर साइबा अंसारी ने अभिनय किया था.गाने के फिल्मांकन के दौरान साइबा अंसारी कैमरे के सामने डांस कर रही थीं,तभी उनसे मेरी मुलाकात हुई थी.उन्ही को देखकर मेरे दिमाग में ‘प्रोजेक्ट एंजल्स’ का ख्याल आया.मैने सोचा कि लड़कियों को लेकर हर कोई सीरियल बना रहा है.मगर केवल ट्ांसजेंडर /किन्नर को लेकर अब तक कोई फिल्म या सीरियल नही बनी है.तो हमने सोचा कि ऐसी सीरीज बनायी जाए, जिसमें सभी ट््ंासजेंडर ही अभिनय करें.तो यह रियालिटी षो जैसा है,जिसमें साइबा अंसारी,जोया सिद्दििकी,अल्फिया अंसारी, गरिमा ग्रेवाल,सोनम खान, आफिया मुकरी, सिमरन खान,आफरीन षेख, खुषी पारगी षामिल हैं.किन्नरों को समाज में हमेषा दूर रखा जाताहै.उन्हे हिकारत की नजरों से देखा जाता है.कुछ

फिल्मों या सीरियल में किन्नरों को महज मजाक उड़ाने या उनसे ताली बजवाने के लिए ही रखा जाता है.किसी भी फिल्म या सीरियल में किसी किरदार मंे किन्नरों /ट्ांसजेंडरांे को षामिल नही किया जाता.मैं इस तरह का कामनहीं करना चाहती थी.मैं ट्ांसजेंडरों के साथ रीयालिटी षो बनाना चाहती थी,जिसमें हम उनके व्यक्तित्व वगैरह को लोगो के सामने ला रहे हैं. कुछ फिल्मों में नवाजुद्दीन सिद्दिकी सहित कुछ कलाकारों ने किन्नरो /ट्जेंडर वाले किरदार निभाए हैं.पर उसमें नकलीपना झलकता है.हमने वास्तविक ट्ंासजेंडरो / किन्नरों को अपने षो में षामिल किया है.मुझे उनकी समस्याओं को दिखाने में कोई रूचि नही है.मुझे तो उनके

सकारात्मक पक्ष ही दिखाने हैं.मैं उन्हे एक इंसान के तौर पर पेष करते हुए दिखा रही हॅूं कि ट्ांसजेंडर भी क्या क्या कर सकते हैं.वह जिस तरह से रहती हैं,उसे ही हम वास्तविकता के धरातल पर दिखा रहे हैं.हम किसी के दुःख का महिमामंडन नही करना चाहते.हम नही चाहते कि लोग उनक ेप्रति ‘दयाभाव’ या सहानुभूति’ के साथ पेष आएं.हम इसमें उनकी संुदरता व फैषन को दिखारहे हैं.उनके अंदर मनोंरजन का जो पक्ष है,उनके अंदर अभिनय के जो गुणहै,उन सभी पक्षों को हम दिखा रहे हैं. क्या ‘प्रोजेक्ट एंजल्स’ से लोगों की साच में बदलाव आएगा? मैं तो यही चाहती हॅूं कि लोगांे की सोच बदले.लोग समझें कि ट्ंासजेंडर का मतलब सिर्फ यह नही है कि वह आपके घर में खुषी के मौके परआकर तालियां बजाएं व डांस करें और आप उन्हें भीख में चंद रूपए दे दें. मैं हर इंसान को बता रही हॅूं कि भारत में बदलाव का वक्त आ गया है.जब एक

ट्ंासजेंडर हमारे देष के पष्चिम बंगाल राज्य में जज बन सकते हैं.तो फिर हमउन्हे नीची निगाह से क्यों देखें?अब वक्त आ गया है कि हमें खुद की सोच बदलकर इन्हें अपनाना होगा.ईष्वर ने उन्हे जैसा भी बनाया है,उसी रूप में हर इंसान उन्हें स्वीकार करे.उनके साथ चले.अब उन्हे पीछे रखकर ख्ुाद आगे बढ़ते जाना ठीक नही है.‘प्रोजेक्ट एंजल्स’’ का लेखन करने से पहले आपने किन्नरों के बारे में किस तरह से जानकारियंा इकट्ठीं की? मैने सिर्फ भारतीय ही नही बल्कि अमरीकन सहित कई देषों के सीरियल देखेहैं.मैने सड़क पर जाकर इन किन्नरों से लंबी बातचीत की है.उनसे जानने काप्रयास किया कि वह क्या क्या कर सकती हैं.मैने अमरीकन कल्चर को भी देखा वसमझा.वहां पर आम इंसान व ट्ांसजेंडर में कोई फर्क नहीं समझा जाता.वहां पर हर समुदाय के लोग किन्नरों को स्वीकार करते हैं.जबकि हमारे देष में ऐसानही है.हमारे यहां लोग उनसे दूर भागते हैं.हमारे यहां परिवार के लोगभी उन्हे अपने घर से निकाल देते हैं.कोई उनसे विवाह नही करना चाहता.

उनसे बात तक करना पसंद नही करता.मेरी सोच है कि हमारे यहां भी हर समुदाय केलोग ट्ांसजेंडरांे को स्वीकार करें,उनके साथ आम इंसानांे जैसा ही व्यवहार करें.षूटिंग के दौरान अगर किसी ने उनके बारे में गलत बात की,तो मैं नाराज होती थी.मैं उनमें कोई भेद नहीं मानती.मेरी नजर में मेरे सेट पर मौजूद ट्ांसजेंडर यानी कि लड़कियंा माॅडल व अभिनेत्री थीं.यह वह ट्ांसजेंडर हैं जो कि आपके घर पर आकर पैसा नही मांग रही इै.

वह सड़क या सिग्नल पर खड़ी नही होती.वह आपसे कुछ नही मांग रही है.यह सभी आम इंसानों की ही तरह मेहनत करके पैसा कमाकर अपनी जिंदगी गुजार रही है.तो फिर इनके साथ सौतेला व्यवहार क्यों? इन्हें हेय दृष्टि से क्यों देखा जाए? हम उन्हे अपने षो में उसी तरह से पेष कर रहे हैं,जिस तरह से वह वास्तव में अपनी जिंदगी में रहती हैं.इसका लेखन करते समय मेरे दिमाग मंे सिर्फ एक ही बात थी कि इन्हे मैं उस तरीके से परदे पर दिखाउं,जिस तरीके से इन्हे अब तक भारत में नही दिखाया गया.मंैने इस षो को लिखने से पहले कई भारतीय फिल्में व सीरियल देखे, जिनमें ट्ांसजेडरों की बात की गयी है,तो पाया कि इनमें ट्ांसजेंडरों को सही अंदाज में नही दिखाया जा राह है,वह जिस तरीके से रहती हैं,वास्तव में उस तरीके से उन्हे नही दिखाया जा रहा है.यहां तक कि

उन्हे अभिनय करने के लिए भी नही बुलाया जाता.उन्हें भिखारी की ही तरह से पेष किया जाता है.मैं इसे बदलना चाहती हॅूं. जब आपने कुछ ट्ांसजेंडरांे से बात की,तो आपको क्या नई जानकारी मिली,जिससे आप वाकिफ नहीं थी?-पहली बात मुझे यह पता चली कि हर किन्नर की अपनी अलग अलग स्टाइल है.इनके व्यक्तित्व में समानता नही है.यह सभी अलग अलग अकेले रहती हैं. और सभी कुछ न कुछ काम कर रही हैं.नौ में से दो तीन बहुत दकियानूसी हैं और षरीर से पैर तक ख्ुाद को ढंक कर राती हैं.दो तीन ऐसी हैं,जिन्हे पहनावे को लेकर किसी भी प्रकार की कोई बंदिष नहीहै.वह खुलकर जिंदगी जीना पसंद करती हैं.उन्हे इस बात की कोई फिक्र नहीं होती कि कौन उन्हे किस निगाह से देख रहा है या उन्होेने स्वयं किस तरह के कपड़े पहन रखे हैं.वह हमेषा

ओपनली रहती हैं.इसी वजह से मुझे अपनी स्क्रिप्ट में कुछ बदलाव भी करने पड़े.क्यांेकि पहले हमने कुछ दृष्य रखे थे,जिनको लेकर दो तीन प्रतियोगी कंफर्ट नही थी.दो तीन ने कह दिया कि वह इस तरह के टास्क नही कर सकती.इनकेसंघर्ष बहुत है,पर इनके पास काम की कमी नही है.यह सभी लगभग हर दिन व्यस्त रहती हैं.फिल्म इंडस्ट्ठी मंे इनका नाम बहुत बड़ा है,मगर आज तक इन्हें इनकी पहचान नही मिली.जबकि इन्हे परफार्म करने के लिए बुलाया जाता रहता है.तो अब ‘प्रोजेक्ट एंजल्स’ से इन्हे इनकी सही पहचान मिलेगी.हमारी फिल्म इंडस्ट्ठी में यह ट्ांसजेंडर जरुरत हैं.लेकिन हमारी फिल्म इंडस्ट्ठी इस बात को स्वीकार कर उन्हे सम्मान नहीं देना चाहती.हमारी फिल्म इंडस्ट्ठी भी इन्हे नीचीदृष्टि से देखते हुए सिर्फ इनका उपयोग करना जानती है.हमारे यहां ट्ांसजेंडर

का नाम आते ही लोगों के दिमाग में सिर्फ दो गालियां ही आती हैं.मेराकहना है कि यह सोच बदलों.यह ट्ांसजेंडर ख्ुाद को ‘लड़कियंा’ कहती हैं. तो आप भी उनके साथ लड़कियांे की ही तरह से व्यवहार करें.उन्हे लड़कियों की ही तरह ट्ठीट करो.मैं इन्हे ट्ांसजेंडर नही बुलाती.मैनेजब इनका इंटरव्यू लिया था,तब इनमें से एक मेघना ने बताया कि इन्हे किराए पर घर भी नही मिलता.इनके अपने ब्वायुफ्रेंड हैं,मगर वह इन्हे लोगांे के सामने लेकर नही आते.एक प्रतियोगी का ब्वाॅयफ्रेंड किसी अन्य से षादी कर रहाथा,पर वह उससे भी संबंध बरकरार रखे हुए था.कुल मिलाकर इन ट्ांसजेंडरों के संघर्ष न खत्म होने वाले हैं.अब तक किसी भी फिल्मकार ने यह नही दिखाया कि समाज वास्तव में उनके साथ क्या गलत कर रहा है.फिल्मकार सिर्फ इतना दिखाते हंै कि वह सिग्नल पर भीख मांग रहे हैं या घर घर जाकर खुषी केमौके पर पैसा मांगते हैं. हम यह सब नही दिखा रहे हैं.

तो आप क्या क्या दिखा रही हैं? -देखिए,मैने उन्हे फैषन माॅडल व अभिनेत्री के रूप में पेष किया है.बीचमें एक हिस्सा आता है,जहां वह बात करती हंै कि समाज उनके साथ किस तरह काव्यवहार करता है.पर मेरा मकसद उनके साथ होने वाले व्यवाहर को दिखाना नहीरहा.मैं तो समाज को यह बताना चाहती हॅॅंू कि जिन्हे हम तुच्छ समझतेहैं,वह क्या क्या कर सकती हैं.उनमें कितनी प्रतिभा हैं.वह हमारी ही तरहहैं.हमारे षो में वह माॅडल हैं.उनके साथ जो कुछ हुआ,उसमंे से जोउन्होने कहा वही दिखाया.अपने षो ‘‘प्रोजेक्ट एंजल्स’’ के लिए आपने इन ट्ंांसजेंडरों को कहां ढूढ़ा व किस तरह से चुना? -इनकी तलाष करने मंे हमें कई माह लगे.पर सबसे पहले हमारी मुलाकात साइबा से हुई.उसके बाद दूसरों से होती रही.हम नव्या सिंह से मिले,पर उसने कहा कि वह

इस षो की एंकरिंग करना चहेंगी.तो हमने उन्हे एंकर बनाया.क्योकि मुझे भीलगा कि वह एंकरिंग के लिए ठीक हैं.उन्होने इससे पहले भी एंकरिंग वाले कामही ज्यादा किए हैं.फिल्म इंडस्ट्ठी मंे उनकी अपनी एक पहचान भी है.नव्यासिंह यूट्यूब पर एक प्लेटफार्म ‘जोष टाॅक्स’ है,उसमें वह नजर आती हैं.इषो में लोग अपनी कहानियंा आकर सुनाते हुए दर्षकों को मोटीवेट करतेहैं.वह कई गानों में भी नजर आती हैं.वह पंजाबी एंटरटेनर हैं.पंजाब में तो उनका जलवा है.वह फिल्म भी कर रही हैं.इसके बाद की आपकी क्या योजनाएं हैं?-यह तो मेरी षुरूआत है.मैं हमेषा ट्ासजेंडरों के साथ ही षो नहींनाउंगी.आगे चलकर लड़कों व लड़कियों को लेकर भी षो बनाने हैं.जिनकी तैयारियंा कर रही हॅूं.मैं सिर्फ रियालिटी टीवी षो ही नहीं बनानाचाहती.मैं तो हर जाॅनर में कार्यक्रम बनाउंगी.मैं दो क्रिमिनल सीरीज परभी काम कर रही हॅूं.इनके लेखन मंे मेरी सायकोलाॅजी की पढ़ाई मदद कर रही है.

Bigg Boss 16: नॉमिनेशन के कारण शालीन-सुंबुल के बीच हुई फाइट, देखे वीडियो

कलर्स टीवी का रिएलिटी शो बिग बॉस 16 (Biggboss16) इन दिनों मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है जहां कंटेस्टेंट कभी एक -दूसरे से लड़ते नज़र आ रहे है तो कभी दोस्त बनते दिख रहे है बीते दिन घर से बेघर अकिंत हुए है. जिसके जाने के बाद प्रिंयका घर में बिलकुल अकेली हो गई है. जिसका फायदा खूब अर्चना उठा रही है. दोनो के बीच जमकर लड़ाई भी हुई थी.

आपको बता दें, कि घर में कंटेस्टेंट एक दूसरे अक्सर लड़ा करते है जो कि शो को और एंटरटेन बना देता है ऐसे बीते दिनों शालीन की एम सी स्टेन से लड़ाई हुई थी वही, अब ये लड़ाई शालीन भनोट और सुंबुल के बीच हुई है. दोनों में जमकर विवाद हुआ. जी हां. हाल ही में एक प्रोमो वीडियो जारी किया गया है जिसमें नॉमिनेशन की प्रकिया चल रही है. वही टास्क के दौरान सुंबुल और शालीन एक दूसरे पर जमकर बरसते नज़र आए.

 

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बता दें, कि टास्क के दौरान सुंबुल और शालीन के बीच लड़ाई होती है और शालीन सुंबुल को कमजोर बता देते है इतना तक कहते है कि आपके पापा ने भी आपको कमजोर बताया था, जिस पर सुबुंल भी करारा जवाब देती है और कहती है कि आप कौन हो जो ये जज करेंगे कि कौन मजबूत है और कौन कमजोर है. जिसके बाद नॉमिनेशन होता है तो शालीन सुंबुल को ऩमिनेट कर देते है.

 

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बिग बॉस 16 इन दिनों टीआरपी की रेस पर टॉप तल रहा है अब आगे देखना ये रहेगा कि सुंबुल के अलावा कौन-कौन घर से नॉमिनेट होते है.

YRKKH: क्या बच पाएगा अक्षरा का बच्चा, जय की एंट्री लाएंगी कहानी में नया मोड़

स्टार प्लस का सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है इन दिनों मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है सो में हर दिन नए मोड़  आ रहे है जो शो को और बेहतर बना रहे है साथ एंटरटेन भी कर रहे है. जी हां शो में अब नया मोड़ आया है जिसे देखना बेहद ही मजेदार होगा.

आपको बता दें, कि बीते कुछ दिनों पहले आरोही की प्रेग्नेंसी का सच सामने आता है, जिससे बिरला हाउस में सब कुछ ठीक होता हुआ दिखता है लेकिन फिर अचानक ही नील की मौत से अब सब टूट गए हैं.  इतना ही नहीं, अक्षरा का भी मिसकैरेज हो जाता है और फिर नील की मौत के बाद अब अभिमन्यु ने भी अक्षरा से अपने सारे रिश्ते तोड़ दिए हैं. वह इन सबका जिम्मेदार अक्षरा को मानता है. लेकिन कहानी यही खत्म नहीं होती है

 

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जी हां, प्रणाली राठौड़ (Pranali Rathod) और हर्षद चोपड़ा स्टारर ये रिश्ता क्या कहलाता है के बीते एपिसोड में देखा गया था कि अक्षरा सबको छोड़कर चली गई है लेकिन वह कहां गई. यह किसी को नहीं पता.वहीं, दूसरी तरफ गोयंका हाउस के सभी लोग अक्षरा का पता लगाने की कोशिश करते हैं. लेकिन अक्षरा अपने बड़े पापा के फोन पर एक मैसेज छोड़ जाती है, जिसमें वह कहती है कि वह कहां जा रही है उसे नहीं पता। लेकिन वह पहले की तरह अपनी जिंदगी को एक बार फिर से शुरू कर लेगी।अक्षु का यह मैसेज सुनकर सब लोग परेशान हो जाते हैं.

वहीं, दूसरी तरफ बिरला हाउस में भी सब काफी परेशान होते हैं। घर में बड़े पापा और बड़ी मां, अक्षरा के यूं अचानक चले जाने से नाराज हो जाते हैं। लेकिन वह अपना सारा ध्यान घर में मौजूद लोगों पर लगाते हैं. इस बीच अचानक ही मंजरी की हालत काफी बिगड़ जाती है, जिस वजह उसे सभी लोग अस्पताल लेकर जाते हैं. अस्पताल में अपनी मां की ऐसी हालत देखकर अभिमन्यु काफी घबरा जाता है.

प्रेगनेंट होगी अक्षरा

कहानी में ट्विस्ट तब आएगा तब अक्षरा प्रेग्नेंट होगी। दरअसल, अक्षरा घर छोड़कर बेसुध हालत में एक बस में बैठ जाती है, यहां पर जय सोनी सीरियल में एंट्री करते हैं। वह अक्षरा की काफी मदद करते हैं और वह पठानकोट पहुंच जाती है। लेकिन इसी बीच अक्षु को होश हो जाता है और वह बस में ही चिल्लाने लगती है और चलती बस से उतरने की बात करती है. इस वजह वह बेहोश भी हो जाती है, जिसके बाद जय सोनी उन्हें अस्पताल लेकर जाते हैं.यहां पर अक्षरा को पता चलता है कि वह अब भी प्रेग्नेंट है। उसके दो बच्चे में से एक बच्चा अब भी जिंदा है.

जंजाल: नैना मानव को झूठे केस में क्यों फंसाना चाहती थी?

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Winter Special: स्पर्म काउंट पर भारी पड़ती स्क्रीन टाइमिंग

बहुत से लोग हर वक्त मोबाइल पे चिपके रहते हैं. उन की यह लत उन्हें बहुत भारी पड़ सकती है क्योंकि हाल ही में अमेरिकन जरनल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार हफ्ते में 20 घंटे से ज्यादा टीवी या मोबाइल फोन देखने से पुरुषों के स्पर्म प्रोडक्शन में 35% तक की कमी आ सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक 1 दिन में 5 घंटे से ज्यादा टीवी देखने वाले लोगों के शरीर में स्पर्म काउंट में भारी कमी आती देखी गई.इस के ठीक उलट कंप्यूटर पर रोजमर्रा का औफिस का दिनभर काम करते रहने वालों के शरीर में ऐसी कोई कमी नहीं देखी गई.

ऐसे लोगों के न तो स्पर्म काउंट में कोई कमी देखी गई और न ही उन के शरीर में टेस्टोस्टेरौन के स्तर में कोई कमी आई. इस का एक कारण यह भी हो सकता है कि ऐसे लोग, जो बहुत ज्यादा टीवी देखते हैं, ज्यादा ऐक्सरसाइज नहीं करते हों और न ही हैल्दी खाना खाते हों, तो ये आदतें सीधे तौर पर फर्टिलिटी पर प्रभाव डालती हैं.इनफर्टिलिटी का बड़ा कारणटीवी या मोबाइल पर फिल्में देखने वालों का दिमाग एक तरह से काम करना बंद कर देता है.

जंक फूड के अत्यधिक सेवन और आलस भरे लाइफस्टाइल के चलते आजकल काफी लोग मोटापे का शिकार हो रहे हैं और यह इनफर्टिलिटी का एक बड़ा कारण बनता जा रहा है. मोटापे की वजह से पुरुषों और महिलाओं दोनों की कामेच्छा कम होती जाती है. मोटापा न केवल यौन संबंध बनाने की इच्छा में कमी लाता है, बल्कि इस के चलते सैक्स के दौरान जल्दी स्खलन होने की समस्या भी पेश आती है. इस के चलते सैक्सुअल परफौर्मैंस प्रभावित होती है क्योंकि लिंग में पर्याप्त उत्तेजना नहीं आ पाती, साथ ही अगर महिला मोटापे से पीडि़त है, तो उस स्थिति में सही तरीके से समागम भी नहीं हो पाता है.

कैन, पैकेट बंद फूड और हाई फैट युक्त चीजें बहुत तेजी से और बड़ी मात्रा में ऐसिडिटी पैदा करती हैं, जिस से शरीर के पीएच स्तर में बदलाव आता है. आलस भरे लाइफस्टाइल के साथ कैमिकल ऐडिटिव्स और ऐसिडिक नेचर वाला खानपान या तो स्पर्म सैल्स के आकार और उन की गतिशीलता को नुकसान पहुंचाता है या फिर इस की वजह से स्पर्म डैड हो जाते हैं.

शारीरिक अक्षमता‘ब्रिटिश जनरल औफ स्पोर्ट्स मैडिसन’ में प्रकाशित रिपोर्ट के तहत लैब ऐनालिसिस के लिए 18 से 22 साल की उम्र के 200 स्टूडैंट्स के स्पर्म सैंपल कलैक्ट किए गए. उन के विश्लेषण से यह पता चला कि सुस्त लाइफस्टाइल और स्पर्म काउंट में कमी का एकदूसरे से सीधा संबंध है. ज्यादा टीवी देखने वालों का औसत स्पर्म काउंट 37 एमएन माइक्रोन प्रति एमएल था, जबकि उन स्टूडैंट्स का स्पर्म काउंट 52 एमएन माइक्रोन प्रति एमएल था, जो बहुत कम टीवी देखते हैं.सुस्त लाइफस्टाइल और टीवी देखने के आदी लोगों के स्पर्म काउंट में सामान्य के मुकाबले 38% तक कमी पाई गई.

इस रिपोर्ट से यह भी साबित हुआ है कि अत्यधिक टीवी देखने वालों के हृदय में अत्यधिक आवेग के चलते फेफड़ों में खून का जानलेवा थक्का जमने और उस के चलते हार्ट अटैक से मौत होने की संभावना भी 45% तक बढ़ जाती है और टीवी या मोबाइल स्क्रीन के सामने हर 1 घंटा और बिताने के साथसाथ यह संभावना और भी बढ़ती जाती है.

हर चीज की एक सीमा हो कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि हर हफ्ते औसतन 18 घंटे की ऐक्सरसाइज करने से स्पर्म क्वालिटी बढ़ाई जा सकती है, लेकिन अत्यधिक ऐक्सरसाइज करने से भी स्पर्म क्वालिटी पर असर पड़ता है. देखने में आया है कि शारीरिक रूप से सक्रिय रहने वाले ऐसे लोग जो हफ्ते में 15 घंटे मौडरेट ऐक्सरसाइज करते हैं या कोई खेल खेलते हैं उन का स्पर्म काउंट शारीरिक रूप से कम सक्रिय रहने वाले लोगों की तुलना में 3-4 गुना तक ज्यादा रहता है.

टीवी या मोबाइल के सामने घंटों एकटक निगाहें रखने का सीधा संबंध शरीर में गरमी बढ़ाने से होता है. स्पर्म सैल्स ठंडे वातारण में ज्यादा अच्छी तरह पनपते हैं, जबकि शरीर के ज्यादा गरम रहने से वे ज्यादा अच्छी तरह नहीं पनप पाते हैं.जरूरत से ज्यादा ऐक्सरसाइज करना और लगातार टीवी देखना, दोनों ही शरीर में फ्रीरैडिकल्स के उत्पादन और उत्सर्जन को बढ़ावा देते हैं, जिस के चलते स्पर्म सैल्स मर जाते हैं, जिस का प्रजनन क्षमता पर सीधा असर पड़ता है.

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