मेरे लिवर में 2 मिलिमीटर का ट्यूमर है, क्या सर्जरी से इसका पूरा तरह उपचार संभव है?

सवाल 

मैं पेशे से वकील 57 वर्षीय महिला हूं. डायग्नोसिस में मेरे लिवर में 2 मिलिमीटर का ट्यूमर होने का पता चला है. क्या सर्जरी से इस का पूरी तरह उपचार संभव है?

जवाब

बहुत कम मामलों में ही लिवर कैंसर का पता शुरूआती चरण में चल पाता है और इस स्तर पर सर्जरी के द्वारा इस का लगभग सफल उपचार संभव है. सर्जरी के द्वारा ट्यूमर और लिवर के कुछ स्वस्थ उतकों को निकाल दिया जाता है जो ट्युमर के आसपास होते हैं. मिनिमली इनवेसिव लैप्रोस्कोपिक या रोबोटिक सर्जरी ने सर्जरी को काफी आसान बना दिया है. यह एक अत्याधुनिक विकसित तकनीक है जिस में सर्जरी करने में कंप्यूटर और रोबोट की मदद ली जाती है. कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित इस सर्जरी में सर्जन रोबोट को नियंत्रित करने के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं. इस में पारंपरिक सर्जरी की तरह बड़े कट नहीं लगाए जाते हैंजिस से जटिलताएं कम होती हैं और मरीज को ठीक होने में कम समय लगता है अस्पताल में ज्यादा रुकने की जरूरत भी नहीं होती है

पुरुषों को क्यों भाती हैं बड़ी उम्र की महिलाएं

1981 में रिलीज हुई ‘प्रेम गीत’ फिल्म के गाने की एक लाइन ‘न उम्र की सीमा हो न जन्म का हो बंधन…’ बौलीवुड सितारों पर एकदम सटीक बैठती है. इन दिनों फिल्म इंडस्ट्री में मलाइका अरोड़ा और एक्टर अर्जुन कपूर के अफेयर की चर्चा है और इस से ज्यादा चर्चा उन के बीच एज गैप की है. दोनों की उम्र में लगभग 11 साल का अंतर है. इस वजह से उन्हें अकसर सोशल मीडिया पर ट्रोल होना पड़ रहा है.

एक इंटरव्यू के दौरान मलाइका अरोड़ा ने कहा था कि हम एक ऐसे समाज में रहते हैं जहां अगर एक उम्रदराज उम्र की महिला अपने से कम उम्र के लड़के से प्यार करे, तो लोग उसे ऐक्सैप्ट नहीं करते हैं.

समाज में यह धारणा है कि शादी के वक्त लड़की की उम्र लड़के से कम होनी चाहिए क्योंकि माना जाता है कि पति घर का मुखिया होता है तो उसे अनुभवी और ज्यादा सम  झदार होना चाहिए. भारत में सरकार की तरफ से भी शादी की कानूनन उम्र लड़के के लिए 21 साल और लड़की के लिए 18 रखी है.

मगर बदलते समय में प्यार करने के अंदाज में भी काफी बदलाव आया है और इस का सब से बड़ा उदाहरण है लड़कों का अपनी उम्र से बड़ी लड़कियों के प्रति आकर्षित होना. अब उम्र के अंतर को नजरअंदाज कर प्यार और सम्मान के भाव से देखा जा रहा है. लड़के अपने से उम्र में छोटी नहीं, बल्कि खुद से बड़ी लड़कियों को ज्यादा पसंद करने लगे हैं. बौलीवुड से ले कर हौलीवुड तक में इस तरह के कई कपल्स मिल जाएंगे जिन की उम्र में काफी अंतर है.

इमैनुएल मैक्रों: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपनी पत्नी ब्रिजेट मैक्रों से 24 साल छोटे हैं. जिस वक्त इमैनुएल मैक्रों स्कूल में पढ़ते थे तब ब्रिजिट उन की टीचर थीं और दोनों के बीच उसी समय प्रेम परवान चढ़ा था.

उर्मिला मातोंडकर: ऐक्ट्रैस उर्मिला मातोंडर ने अपने से 9 साल छोड़े लड़के मीर मोहसिन अख्तर से शादी की. मोहसिन बिजनैस करने वाले कश्मीरी परिवार से हैं.

फराह खान: बौलीवुड की जानीमानी डायरैक्टर और कोरियाग्राफर फराह खान ने भी अपने से 9 साल छोटे शिरीष कुंदर से 2004 में शादी की और आज वे 3 बच्चों के मातापिता हैं. फराह खान ‘मैं हूं न’ फिल्म के सैट पर शिरीष कुंदर से पहली बार मिली थीं और फिर दोनों में प्यार हो गया.

प्रीति जिंटा: ऐक्ट्रैस प्रीति जिंटा ने अपने से 10 साल छोटे जीन गुडइनफ से 2016 में शादी की और आज वे अपने पति के साथ खुशहाल जीवन व्यतीत कर रही हैं.

प्रियंका चोपड़ा: ऐक्ट्रैस प्रियंका चोपड़ा ने कुछ अरसा पहले ही क्रिश्चियन और हिंदू रीतिरिवाज के साथ हौलीवुड ऐक्टर और सिंगर निक जोनस से शादी की थी. दोनों का अफेयर काफी चर्चा में रहा. निक जोनस प्रियंका से 10 साल छोटे हैं.

सैक्सुअल प्रैजेंटेशन महिलाओं के लिए बेहद माने रखता है, साथ ही फिजिकल और इमोशन दोनों ही भावनाओं को बांटती हैं. इसलिए पुरुष और महिलाओं की उम्र का यह कौंबिनेशन परफैक्ट कहा जा रहा है. और भी बहुत से कारण है जिन के चलते पुरुष को बड़ी उम्र की महिलाएं भा रही हैं जैसे:

आत्मविश्वास: बड़ी उम्र की महिलाएं अपनेआप को बहुत अच्छी तरह सम  झती हैं. कोईर् भी फैसला वे बचपने में नहीं, बल्कि बहुत सोचसम  झ कर लेती हैं. वे अपनेआप में बहुत हद तक मैनेज्ड होती हैं. वे जानती हैं कि उन्हें अपनी लाइफ से क्या अपेक्षाएं रखनी चाहिए और क्या नहीं. वे आत्मविश्वासी होती हैं और इसीलिए पुरुष को मैच्योर महिलाएं ज्यादा आकर्षित करती हैं.

जिम्मेदार: समय और तजरबे के साथ मैच्योर महिलाएं जहां अपनी सभी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाना सीख जाती हैं, वहीं वे मुश्किल परिस्थियों का भी अच्छी तरह से सामना कर पाती हैं. कई मामलों में वे न सिर्फ अपने तजरबे की मदद लेती हैं बल्कि जरूरत पड़ने पर इन के हल भी ढूंढ़ निकालती हैं जिस की वजह से कई जगहों पर पुरुष उन के साथ रिलैक्स महसूस करते हैं. ऐसी महिलाएं अपने कैरियर को ले कर काफी सैट होती हैं. अपनी लाइफ को और बेहतर बनाने के लिए पुरुषों को ऐसी ही जिम्मेदार साथी की जरूरत होती है जो हर पथ पर उन के साथ कंधे से कंधा मिला कर चले.

स्वतंत्र: युवतियों और किशोरियों से एकदम अलग सोच रखने वाली बड़ी उम्र की महिलाएं मानसिक तौर पर स्वतंत्र होती हैं. अकसर बड़ी उम्र की महिलाएं कमाऊ होती हैं और पूरी तरह से आत्मनिर्भर होती हैं. जरूरत पड़ने पर वे अपने साथी की आर्थिक रूप से सपोर्ट भी करती हैं.

ईमानदार: प्रेम संबंधों में सम्मान और स्पेस दोनों ही अलग महत्त्व रखते हैं. और बड़ी उम्र की महिलाएं यह बात सम  झती हैं. वे अपने रिश्ते के प्रति बहुत ईमानदार होती हैं, साथ ही अपने साथी की भावनाओं को भी सम  झती हैं.

अनुभवी: बड़ी उम्र की महिलाएं अनुभवी होती हैं क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में बहुत कुछ अनुभव कर लिया होता है. इसलिए जीवन में आने वाली मुश्किलों के लिए वे तैयार रहती हैं.

बात करने का सलीका: बड़ी उम्र की महिलाओं का व्यवहार, पल में तोला पल में मासा की तरह नहीं होता यानी जल्दीजल्दी बदलता नहीं रहता. वे कोई भी काम सोचसम  झ कर और बड़े सलीके से करती हैं.

सैक्स: शरमाने की जगह बड़ी उम्र की महिलाएं सैक्स के दौरान अपने पार्टनर को सपोर्ट करती हैं. वे स्पष्ट तौर पर बता देती हैं कि उन्हें अपने पार्टनर से क्या अपेक्षाएं हैं जो पुरुष को काफी पसंद आता है.

उम्र से नहीं पड़ता खास फर्क

आज के तेजी से बदलते समय में किसी की उम्र का सही अंदाजा लगाना थोड़ा मुश्किल काम है खासतौर से महिलाओं की और वैसे भी आज के युवाओं के लिए जीवनसाथी की उम्र से ज्यादा उस की प्रतिभा, सम  झ और सूरत ज्यादा माने रखती है.

स्वाभाविक प्रक्रिया

पुरुषों का महिलाओं की ओर आकर्षित होना हमेशा से ही स्वाभाविक प्रक्रिया रही है. प्रकृति ने वैसे भी पुरुष और महिला को एकदूसरे के पूरक के तौर पर बनाया है जिस की वजह से इन दोनों के बीच परस्पर आकर्षण होना स्वाभाविक है. लेकिन जब यह आकर्षण अपने से बड़ी उम्र की महिला के प्रति होने लगे तो यह खास बन जाता है.

हाल ही मेें एक रिसर्च में पाया गया है कि पुरुष अपने से बड़ी उम्र की महिला से संबंध बनाने के बाद मानसिक और शारीरिक रूप से ज्यादा संतुष्टि प्राप्त करते हैं.

मर्द और औरत की उम्र में इस अंतर में रिलेशनशिप बनते देखे जाना आज आम बात होती जा रही है. लेकिन इस के क्या कारण हैं? क्या उम्र के साथ जहां खूबसूरती ढलती है, वहीं कुछ सकारात्मक चीजें महिलाओं में बढ़ जाती हैं जिन्हें पुरुष शायद नोटिस करते हैं या ऐसी क्या चीजें हैं जो पुरुष को बड़ी उम्र की महिलाओं की ओर आकर्षित कर रही है. चलिए जानते हैं, इस संबंध में क्या कहते हैं साइकोलौजिस्ट:

कुछ साइकोलौजिस्ट ऐसा मानते हैं कि 45 से 50 की उम्र में महिलाओं में सेक्स के प्रति उत्तेजना और सम  झ बढ़ जाती है और किसी कम उम्र महिला की तुलना में वे पुरुष को ज्यादा संतुष्ट कर सकती हैं. तो यह भी एक कारण है कि पुरुष मैच्योर महिलाओं के प्रति आकर्षित होते हैं. वहीं कई शोध बताते हैं कि जहां पुरुष इंटीमेट होने में ज्यादा वक्त नहीं लगाते वहीं महिलाओं को इस के लिए वक्त चाहिए होता है. वे भी अपने से कम उम्र पुरुष की ओर अट्रैक्ट होती हैं क्योंकि वे अधिक ऊर्जावान होते हैं.

Winter Special: ऐसे करें मोटापे से फाइटिंग

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम में से अधिकतर लोग न तो कसरत के लिए नियमित रूप से समय निकाल पाते हैं, न ही जीभ पर कंट्रोल रहता है. फिर ऐसे में भला कैसे घटे वजन और कैसे निखरे पर्सनैलिटी? लेकिन घबराइए नहीं, घर व आफिस के अपने बिजी शेड्यूल को डिस्टर्ब किए बिना या सुबहसुबह जल्दी बिस्तर छोड़ घंटों एक्सरसाइज करने की भी जरूरत नहीं, क्योंकि आप की सेहत को चुस्तदुरुस्त रखने के लिए कई ऐसे तरीके हैं, जिन की बदौलत आप खुद को स्लिम व आकर्षक बना सकते हैं.

जंक फूड से परहेज

विशेषज्ञों का मानना है कि सब से पहले हमें अपने खानपान पर ध्यान देना चाहिए. आप के आहार में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में होने चाहिए. इस के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, सलाद, चिकन, मछली, दूध, अंडे और ताजे फलों को अपने आहार में जरूर शामिल करें. दिन भर में 8 से 10 गिलास पानी जरूर पीएं. इस से न सिर्फ आप का शरीर चुस्तदुरुस्त और तंदुरुस्त रहेगा, बल्कि आप स्वस्थ भी रहेंगे. कोला व कौफी जैसे कैफीनयुक्त पेय पदार्थों और जंक फूड से आप जितना दूर रहेंगे आप के शरीर के लिए उतना ही अच्छा होगा.

मानव शरीर कुदरत की अद्भुत रचना है. हमारे शरीर की रचना इस प्रकार की है कि दिन भर के परिश्रम के बाद इसे स्वत: ही नींद की जरूरत होती है. भरपूर नींद शरीर के लिए जरूरी है. यथासंभव सोने व उठने का समय निश्चित करें. 7-8 घंटे की अच्छी नींद आप के शरीर में होने वाली टूटफूट की मरम्मत कर देती है और उठने पर आप तरोताजा महसूस करते हैं. अच्छी नींद ले कर और खूब पानी पी कर आप खुद को तरोताजा रख सकते हैं. अब जरा बात करें मोटापे की, तो मोटापा स्वस्थ शरीर के साथसाथ सुंदर शरीर का भी दुश्मन है, लेकिन मोटापे को ले कर ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है. जैसा कि आमतौर पर देखा जाता है, अपने शरीर से अनावश्यक मेहनत करवा कर या खुद को भूखा रख कर मोटापा भले ही दूर हो या न हो, पर आप कमजोरी के शिकार जरूर हो सकते हैं और कमजोर शरीर पर रोग भी तेजी से हमला कर सकते हैं.

क्रेश डाइटिंग से बचें

हालांकि आमतौर पर माना जाता है कि वजन घटाना आसान नहीं होता है. इस में महिलाएं सब से ज्यादा पैसा खर्च करती हैं, लेकिन 90% मामलों में उतना वजन कम नहीं होता जितनी आशा की जाती है. अगर आप भी अपने वजन को ले कर परेशान हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है. वीएलसीसी की डा. वीणा अग्रवाल कहती हैं कि औरतें वजन कम करने के चक्कर में क्रेश डाइटिंग करने लगती हैं. इस से वे एनीमिया, आरथ्राइटिस कमजोरी व थकान जैसी समस्याओं से ग्रस्त हो जाती हैं. इसलिए वजन कम करने के लिए के्रश डाइटिंग जैसे तरीकों को हरगिज न अपनाएं.

वे कहती हैं कि खानेपीने में अचानक कमी करने से शरीर की मेटाबोलिक गतिविधियां मंद पड़ जाती हैं. विटामिनों व खनिज लवणों की कमी होने लगती है. बाल गिरने लगते हैं और पेट में ऐंठन की भी शिकायत होने लगती है. कैलोरी की मात्रा बहुत ज्यादा कम करने पर शरीर कमजोर व थकाथका रहने लगता है. वजन कम करते समय हम इस तरह के परिणामों की आशा तो नहीं करते हैं. अत: अगर आप वजन कम करने की सोच रहे हैं तो अपनी जरूरतों के मुताबिक सही किस्म का पर्याप्त आहार लें. रेशेदार खाद्य पदार्थ, फल, सब्जियां, अनाज, दालें, दुग्ध उत्पाद, हलका मांसाहार, मछली आदि का सेवन करें. लेकिन चीनी व वसा जैसी चीजों को अपने आहार में शामिल करने से बचें.

वैसे वजन कम करने के लिए अब लूज पिल्स भी बाजार में आ गई हैं, लूज पिल्स यानी वजन कम करने की गोलियों के बारे में पूछने पर डाक्टर वीणा कहती हैं कि इन में से कुछ दिमाग पर असर करती हैं, इसलिए व्यक्ति को भूख नहीं लगती. कुछ पेट के अंदर जा कर वसा युक्त खाद्य पदार्थों को शरीर में घुलने नहीं देती हैं, लेकिन इन गोलियों के साइड इफेक्ट भी हैं. इस से व्यक्ति को घबराहट होने लगती है, हाथपांव कांपते हैं, पेट चल जाता है, बुखार होने लगता है. बाल झड़ने लगते हैं, कुछ मामलों में तो व्यक्ति काफी अवसादग्रस्त भी हो जाता है, दिल की धड़कन तेज चलने लगती है और उच्च रक्तचाप भी रहने लगता है. इसलिए वजन कम करने की कोई भी गोली लेने से पहले किसी विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें.

चेन्नई के रमेश का उदाहरण देते हुए वह कहती हैं कि जब वे हमारे पास आए थे तो उन का वजन करीब 100 किलोग्राम था. हालांकि वे छरहरे बदन के मालिक थे पर उन का ब्लडप्रेशर बढ़ा हुआ था और शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा भी सामान्य से लगभग दोगुनी थी. दरअसल, रमेश के साथ ऐसा इसलिए हुआ कि वे वजन घटाने के लिए अनापशनाप दवाओं का सेवन करते थे और उन का जीवन बिना किसी शारीरिक गतिविधि के चलता था. सुबह दफ्तर जाते तो दिन भर कुरसी पर बैठेबैठे बीत जाता. कोई निश्चित समय नहीं था.

हरी सब्जियों का सेवन

मेरे सामने सब से बड़ी चुनौती थी कि रमेश की बीमारियों पर कैसे नियंत्रण पाया जाए. फिर रमेश की पत्नी को समझाया कि खाने में रमेश को घीया, तुरई, नीबू, मौसमी, धनिया, सेलरी, पत्तागोभी, ब्रोकली, सूखे मेवे आदि दिए जाएं. प्रोसेस्ड फूड और छिलका रहित अनाजों के स्थान पर छिलकायुक्त अनाज और हरी पत्तियों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करने के लिए कहा गया. रेशेदार खाद्य पदार्थ लेने के लिए कहा गया. वहीं भोजन में वसा की मात्रा 15 से 20% कम की गई. मलाईयुक्त दूध की जगह स्किम्ड मिल्क और पकाने के लिए सरसों और जैतून का तेल इस्तेमाल करने के लिए कहा गया.

अगर आप भी मोटापे से परेशान हैं, तो आप भी ऐसा कर सकते हैं. अगर आप कौफी पीने के शौकीन हैं, तो उस की जगह आप ग्रीन टी ले सकते हैं, क्योंकि ग्रीन टी कोलेस्ट्रोल कम करती है और खून के थक्के जमने से रोकती है.  दिन में 10 से 12 गिलास पानी लें. साथ ही नारियल पानी को भी आहार में शामिल किया जा सकता है, क्योंकि यह मैग्नीशियम, कैल्सियम और पोटैशियम के अलावा जिंक, सेलेनियम, आयोडीन, सल्फर, मैगनीज जैसे सूक्ष्म पोषक तत्त्वों से भरपूर होता है, आप कच्चा लहसुन भी खा सकते हैं. यह भी कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करता है.

दिल्ली स्थित मूलचंद अस्पताल व हार्ट केयर फाउंडेशन औफ इंडिया के डाक्टर के.के. अग्रवाल ने बताया कि मोटापे से बचना है तो अपनी जीवनशैली को बदलें. खानपान में विशेष ध्यान दें. चीनी, चावल और मैदा खाना बंद कर दें. संतुलित आहार लें. एक बार में 80 ग्राम से ज्यादा न खाएं. पेट की चौड़ाई  80 सेंटीमीटर से कम होनी चाहिए. मोटा होना सिर्फ सौंदर्य संबंधी समस्या ही नहीं है, बल्कि आप की सेहत और जान के लिए भी एक बड़ा खतरा है. मोटे और ज्यादा वजन के लोग अनेक रोगों के शिकार हो जाते हैं.

आधुनिक गैजेट का उपयोग

आज अत्याधुनिक गैजेट्स की मदद से फिटनेस की निगरानी करना आसान हो गया है. ये गैजेट आप के दिल की धड़कनों सहित शरीर की सभी गतिविधियों पर नजर रखते हैं और बताते हैं कि कहां सुधार की जरूरत है. कंप्यूटर ट्रेनिंग सर्किट ऐसा ही गैजेट है, जो युवाओं में लोकप्रिय हो रहा है. इस की मदद से आप अपने अनूकुल स्वस्थ रहने का कार्यक्रम बना सकते हैं और अपनी सुगठित देह के मालिक बन सकते हैं. मोटरगाडि़यों के स्पीड मीटर की तरह कलाई घडि़यां भी बाजार में उपलब्ध हैं. इन्हें आप अपनी कलाई पर बांध कर अपने चलने व दौड़ने की गति को जान सकते हैं. इस से आप को अपनी शरीर की कैलोरी का आइडिया मिलता है. 

एक अन्य गैजेट बौडी जेम आप को बताता है कि दिन भर में आप को कितनी कैलोरी ऊर्जा की जरूरत है. इस की मदद से कैलोरी पर नियंत्रण रखना आसान है. इस के अलावा रोमहोम क्रास ट्रेनिंग मशीन पर आप 4 मिनट में ही 20 से 45 मिनट तक के स्वस्थ रहने का लाभ उठा सकते हैं. पंप पौड का आप अपना पर्सनल ट्रेनर बना सकते हैं, वह भी बगैर किसी ट्रेनर की मदद से. यह पर्सनल ट्रेनिंग प्रोग्राम आप के पर्सनल आईपौड पर चल सकेगा. इन के अलावा स्मार्ट सोल वाले जूते भी उपलब्ध हैं, जो आप की दिल के धड़कनों पर नजर रखते हैं, साथ ही बाजार में डायनेमिक ब्रा भी उपलब्ध हैं, जो स्तनों को सही आकार में रखने में मदद करती हैं. 

 शारीरिक स्तर के अलावा मन को प्रसन्न रख कर भी अच्छा स्वास्थ्य हासिल किया जा सकता है. मानसिक थकान को मिटाने का यह कारगर उपाय है. पैदल चलना शुरू करें. आसपास के कामों के लिए पैदल आनाजाना शुरू कर आप पर्यावरण की रक्षा तो करेंगे ही, साथ ही नएनए अनुभवों का भी मजा ले सकेंगे. अंत में अपनी बोरियत भरी रुटीन जिंदगी से थोड़ा अलग हट कर बाहर जा कर भी आप तरोताजा हो सकते हैं.

सलाम वेंकी फिल्म रिव्यू: विशाल जेठवा और काजोल की जबरदस्त एक्टिंग

रेटिंगः ढाई स्टार

निर्माताः सूरज सिंह, श्रृद्धा अग्रवाल

निर्देषकः रेवती

कलाकारः काजोल,विषाल जेठवा, राजीव खंडेलवाल, अहना कुमरा, राहुल बोस, प्रकाश राज, आमिर खान,अनंत नारायण महादेवन, प्रियामणि,कमल सदानह,माला पार्वती, रिद्धि कुमार,

अवधिः दो घंटे 16 मिनट

‘‘डचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी’’ की बीमारी से जूझ रहे मरणासन्न युवा शतरंज खिलाड़ी कोलावेन्नू वेंकटेश और उनकी मां की सत्य कथा पर आधारित है. वेंकटेश की मांग के अनुरूप इच्छा मृत्यु के लिए उनकी मां ने एक लड़ाई लड़ी थी. पर कानून ने इसकी इजाजत नहीं दी थी और 2004 में वैंकी की मृत्यु हो गयी थी.

इसी सत्य घटनाक्रम पर श्रीकांत मूर्ति ने एक उपन्यास ‘‘द लास्ट हुर्रे’ लिखा,जिस पर रेवती ने यह फिल्म बनायी है. रेवती मशहूर अभिनेत्री व निर्देशक हैं. 2004 में उन्होंने ‘एड्स’ के मुद्दे पर फिल्म ‘फिर मिेलेंगें’ निर्देशित की थी. अब ‘इच्छा मृत्यु’ की मांग की वकालत करने वाली फिल्म ‘‘सलाम वेंकी’’ लेकर आयी हैं.

रेवती अब तक संवेदनशील विषयों पर फिल्में निर्देशित करती आयी हैं. रेवती ने इस फिल्म को जरुरत से ज्यादा मेलेाड्रामा बनाकर लोगों को अवसाद ग्रस्त व रूलाने का काम किया है.

कहानीः

फिल्म ‘सलाम वेंकी’ सुजाता (काजोल) और उनके बेटे वेंकी (विशाल जेठवा) के इर्द गिर्द घूमती है.कहानी षुरू होती है 24 वर्षीय वेंकटेष उर्फ वेंकी के अस्पताल पहुॅचने से.डाक्टर षेखर (राजीव खंडेलवाल) उसका इलाज षुरू करता है और वंेकी की मां सुजाता से कहते हैं कि सब ठीक है. पता चलता है कि वेंकी बचपन से ही लाइलाज बीमारी डीएमडी यानी डय्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्ाफी से ग्रसित है.

इस बीमारी के चलते इंसान के मसल्स धीरे धीरे काम करना बंद कर देते हैं.डाक्टर यह भी बताते है कि अब वेंकी घर नही जा पाएगा.उसकी जिंदगी के कुछ दिन ही बचे हैं.अपनी जिंदगी के एक-एक पल के लिए मौत से लड़ रहा वेंकी जितनी भी जिंदगी है, वह उसके हर एक पल को जीना चाहता है.जबकि सुजाता अपने बेटे की बीमारी का दर्द झेलते हुए भी अपने बेटे की हर ख्वाहिष पूरी करती नजर आती हैं.

अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए व फिल्मों के दीवाने वेंकी हर किसी से मीठी बातें करते रहते हैं. वेंकी अपनी पसंदीदा नर्स( माला पार्वती ) को शतरंज खेलना सिखाते है.वह लंबे समय से बिछड़ी अपनी बहन षारदा(रिद्धि कुमार) के साथ उत्साहित हैं,जो पूरे दस साल बाद परिवार में वापस आ गई हैं. 24 साल की उम्र तक सुजाता ने वेंकी को सारी मुसीबतें व दर्द सहते हुए पाला है, उस ‘अम्मा’ को वेंकी हंसाने के साथ ही उस पर बार बार अपनी इच्छा पूरी करने के लिए दबाव भी डालता रहता है.

बीच बीच में सुजाता अपने अर्तंमन से भी बात करती रहती है. इंटरवल तक कहानी ठहरी सी रहती है. इंटरवल के बाद सुजाता अपने बेटे की ‘इच्छा मृत्यु’ और अंगदान की ख्वाहिष को पूरा करने के लिए एक वकील (राहुल बोस) की मदद लेती हैं.वकील साहब एक साहसी टीवी रिपोर्टर (अहाना कुमरा) की मदद लेेते हैं. मामला अदालत में इमानदार व सख्त जज के पास पहंुचता है,जहां सरकारी वकील (प्रियामणि) ‘इच्छा मृत्यु’ का विरोध करती है.

इस बीच यह भी पता चलता है कि वेंकी के पिता अपने बेटे का इलाज नही करना चाहते थे,जबकि सुजाता चाहती थी.इसलिए अपनी बेटी षारदा को अपने पास रखकर उनके पति ने उन्हे तलाक दे दिया था. दस साल तक षारदा अपनी मां को गलत समझकर अपने पिता के साथ रही,पर एक दिन उसके दादा ने सच बता दिया,तो वह अपनी मां व भाई वेंकी के पास आ जाती है.

निर्देशनः

कुछ कमियों के बावजूद फिल्म ‘‘सलाम वेंकी’’ एक अच्छी फिल्म कही जाएगी,जो हर एक अति महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाती है.मगर निर्देषक के तौर पर रेवती की कमजोर कड़ी यह रही कि उन्होेने इस फिल्म को इस कदर मेलोड्ामैटिक बना दिया कि मूल मुद्दा दबकर रह जाता है. इंटरवल तक सिर्फ अवसाद ही अवसाद है.

दूसरी कमजोरी यह रही कि लेखक व निर्देषक ने यह तो बताया कि कैसे वेंकी के पिता व सुजाता के पति ने साथ नही दिया,मगर सुजाता क्या करती हैं,और इलाज के लिए पैसा कहां से आता है,इस पर कोई रोषनी नहीं डाली गयी.

जब एक इंसान अस्पताल में पडा होता है,तो उसके सभी रिष्तेदार उसकी सेवा करते हुए थके ही नजर आते हैं. मगर यहां सुजाता व षारदा सभी पात्र हमेषा चमकते ही नजर आते हैं.इनके चेहरे की चमक कभी फीकी ही नही पड़ती.इंसान को रूलाना आसान काम होता है,वही निर्देषक रेवती ने पूरी फिल्म में किया है.

अभिनयः

अपने बेटे की जिदंगी के लिए कठिन परिस्थितियों से लड़ने वाली अकेली औरत के अलावा बेटे के दर्द से जूझती मां सुजाता के किरदार मंें काजोल का अभिनय भी अच्छा है. वैसे भी वह उत्कृष्ट अदाकारा हैं.

वहीं वेंकी के किरदार में विषाल जेठवा का अभिनय षानदार हैं.कई दृष्योें में अपने अभिनय से वह काजोल जैसी उत्कृष्ट अदाकारा को भी मात देते नजर आते हैं. जो इंसान अस्पातल के बिस्तर पर पड़ा हो ,उसके लिए महज अपनी आॅंखो व चेहरे के भावों से अभिनय करना आसान नहीं होता. मगर विषाल जेठवा का कमाल का अभिनय किया है.

रानी मुखर्जी की फिल्म ‘मर्दानी’ में विलेन का किरदार निभा चुके विषाल जेठवा ने पहली बार एक सकारात्मक व इतना बड़ा किरदार निभाने का मौका पाया है. ओर उन्होेने अपने अभिनय से संदेष दे दिया कि लोग अब तक उनकी प्रतिभा की अनदेखी करते आए हैं. जब वेकी की आवाज चली जाती हे, तब महज हाथ के इषारे व आॅखांे से जिस तरह का अभिनय विषाल जेठवा ने किया है,वह हर कलाकार के वष की बात नहीं हो सकती.यदि यह कहा जाए कि विषाल जेठवा व काजोल पूरी फिल्म को अपने कंधे पर लेकर चलते हैं,तो गलत नही होगा.

फिल्म ‘बेख्ुादी’ में काजोल के साथ अभिनय कर चुके कमल सदानह तीस वर्ष बाद इस फिल्म में छोटे से किरदार में नजर आए हैं और अपनी छाप छोड़ जाते हैं. इसके अलावा अन्य सभी कलाकारों ने भी छोटे किरदारो में ठीक काम किया है.

गलत मानसिकता के लिए किसे दोषी मानती है अभिनेत्री नीना गुप्ता? पढ़े इंटरव्यू

अभिनेत्री नीना गुप्ता को‘वध’ फिल्म की कहानी एक अलग और चुनौतीपूर्ण लगी, क्योंकि इसमें एक कहानी ऐसी है,जो एक ह्यूमनस्टोरी है, जहाँ एक कपल साधारण जीवन बिता रहा है, जब पानी सर के ऊपर से तक चला जाता है, तब उसे यह समझना मुश्किल होता है किआखिर वह करें तोक्या करें? जब कोई चारा उससे निकलने का नहीं रहता, कानून के पास जाने पर भी वह वहां पर उसी को कानून के साथ बैठा पाता है, कर्जा चुका नहीं सकता क्या करें ?

ये फिल्म हर परिवार के लिए एक प्रश्नचिन्ह छोड़ जाती है, मसलन ऐसा किया क्यों ? वह क्या कर सकता था? क्या गलत किया? कैसे इस परिस्थिति से वह निकल सकता है?आदि कई बाते है, जिससे हर व्यक्ति खुद को जोड़ सकता है. ऐसी कहानियां हमे शाक ही जानी चाहिए, जिससे आम जनता खुद  के बारें में सही गलत का फैसला कर सकें. मनोहर कहानियां का किरदार इसमें प्रसंसनीय है.

 

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नीना आगे कहती है कि ‘वध’ फिल्म में सन्देश यह है कि एक दुर्घटना हुई, पर सभी को जितनी चादर हो उतनी ही पैर पसारें. कई लोग है, जो अपनी हैसियत से अधिक अपने बच्चों के लिए कर जाते है, ये सब मोह माया के वश में हो कर करते है, जिसका परिणाम बच्चे नहीं, खुद भोगते है, परिणाम गलत होता है.

नीना गुप्ता ने मनोहर कहानियां नहीं पढ़ी है,लेकिन जानती है कि इसके प्रेमी सालों से है, उन्होंने आसपास के कई घरों में इसे पढ़ते हुए पाया है. वे बताती है कि ये एक रुचिकर पत्रिका होने के साथ-साथ चुपके से एक सन्देश भी देती है.

तनाव में जीना ठीक नहीं

नीना ने अपने आसपास गलत  मानसिकता वाली घटनाएं नहीं देखी, पर सुनी अवश्य है कि ये एक मानसिक बीमारी  होती है और कई बार पैसे की लालच या सेक्स की लालच से होती है और वे समझते है कि उन्हें कोई कुछ नहीं कर सकता और वे बेख़ौफ़ होते है. कई बार ऐसे लोगत ना वया फ्रस्ट्रेशन के शिकार भी होते है.उनका सही इलाज जरुरी है.

 

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इसकी वजह के बारें में नीना कहती है कि वजह समझना बहुत कठिन है, लेकिन ऐसी मानसिक स्थिति उस व्यक्ति की पारिवारिक माहौल और पालन पोषण से हो सकता है. इसमें समाज को दोष देना उचित नहीं, क्योंकि वह हम से ही बनता है. ये एक व्यक्तिगत पारिवारिक समस्या हो सकती है बहुत दुखदऔर खतरनाक होता है, समय रहते उसका इलाज जरुरी होता है.

प्रोग्रेसिव विचार की धनी

अभिनेत्री नीना गुप्ता 80 के दशक में प्रसिद्द क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स के साथ प्रेम की से चर्चा में रही और बिन ब्याहे ही माँ बनकर बेटी मसाबा को जन्म दिया. उनके इस बोल्ड स्टेप की काफी आलोचना हुई, लेकिन उसने किसी बात पर बिना ध्यान दिए ही आगे बढ़ती गयी. हालाँकि विवियन ने बेटी को अपना नाम दिया, पर नीना को पत्नी का दर्जा नहीं दिया.

नीना ने सिंगल मदर बनकर बेटी को पाला ,जो एक प्रसिद्ध फैशन डिज़ाइनर है.इसके बाद साल 2008 में नीना ने चार्टे डएकाउंटेंट विवेक मेहरा से शादी की और अब खुश है. नीना स्पष्ट भाषी है,  जिसका प्रभाव उसके कैरियर पर भी पड़ा,पर वह इस से घबराती नहीं.

इसके अलावा नीना गुप्ता हॉट फोटोशूट, प्रेम प्रसंगों और नयी सोच को लेकर हमेशा चर्चा में रही. उनकी फिल्मों की अगर बात करें तो उन्होंने हमेशा लीक से हटकर फिल्में की और कमोवेश सफल रही. वह आज भी गृहशोभा पढ़ती है और इस पत्रिका के प्रोग्रेसिव विचार से सहमत रखती है.

आती है सहजता अनुभव से

नेचुरल लुक की बात करें तो नीना ने हमेशा सहजता से भूमिका निभाई है, इसे कर पाने की वजह उनका अनुभव और लगातार सीखते रहने की कोशिश है. नीना कहती है कि मैंने शुरू में अपने प्रतिभा को आगे लाने में समर्थ भले ही न रही हो, पर अब मुझे हर भूमिका अलग और नयी मिल रही है.

समय मिलने पर मैं दिल्ली अपने पति और उनके परिवार वालों से मिलने चली जाती हूँ. रोज की दिन चर्या की बात करें, तो सुबह उठ कर मैडिटेशन करना, खाना बनाना, टहलना आदि रोज करती हूँ. साथ ही महीने के  15 दिन मैं शास्त्रीय संगीत भी सीखती हूँ.

मुश्किल दौर में थी शांत

नीना गुप्ता के सब से मुश्किल दौर के बारें में पर वह बताती है कि मेरे जीवन का सबसे मुश्किल दौर तब था, जब मसाबा पैदा हुई. सोशल, फाइनेंसियल, पर्सनल प्रेशरआदि बहुत सारे मेरे जीवन में आ गए थे, ऐसी परिस्थिति में कभी ये सोचना ठीक नहीं कि पति ने मुझे पैसे नहीं दिए, छोड़ दिया है, बच्ची है, तो मेरा क्या होगा.

हर काम हमेशा काम ही होता है, गलत दिशा या काम मैंने कभी नहीं किया. अपनी सोच और विवेचना को सही रखा.

पाकिस्तानी गर्ल आयशा 3 लाख में बेच रहीं अपना ग्रीन कुर्ता, जाने कौन होगा खरीददार ?

वैसे तो एक्टर और एक्टर्स के कपड़ो की निलामी होना कोई नई बात नहीं है लेकिन इन दिनों एक एक्ट्रेस का कुर्ता खूब चर्चा में तल रहा है जी हां, ये एक पाकिस्तानी एक्ट्रेस का कुर्ता है जिस कुर्ते को निलाम किया जा रहा है जिसकी कीमत सुन आप हैरान हो जाओंगे.

आपको बता दें,कि मेरा दिल पुकारे आजा(mera dil pukare aaja) सॉन्ग की फेम पाकिस्तानी एक्ट्रेस इन दिनो चर्चा में बनी हुई है जिसकी वजह है उनका ग्रीन रंग का कुर्ता. दरअसल, एक्ट्रेस ने ये कुर्ता अपनी दोस्त की शादी के हल्दी फंक्शन पर पहना था. जिसकी वीडियो जमकर वायरल हो रही है. वीडियो में एक्ट्रेस आयशा ने हरे रंग का कुर्ता पहना हुआ है इस वीडियो में आयशा डांस करती हुई नज़र आ रही है इसी डांस वीडियो में पहने हुए कर्ते की एक्ट्रेस निलामी कर रही है जिसकी कीमत है 3 लाख रुपए है. जी हां, पीपल मैगजीन में छपी रिपोर्ट के मुताबिक आयशा ने अपने कुर्ते की कीमत 3 लाख रुपए रखी है. जिसकी खरीददारी भी शुरु हो चुकी है.

पीपल मैगजीन ने अपने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, “मेरा दिल ये पुकारे आजा” गर्ल 3 लाख में अपनी ग्रीन ड्रेस बेच रही है.” पीपल मैगजीन के इस पोस्ट पर लोग खूब कमेंट कर रहे हैं एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, “ये लड़की अकेले ही पाकिस्तान की इकोनॉमी को बढ़ाने की कोशिश कर रही है. रिस्पेक्ट.” तो वहीं एक दूसरे यूजर ने लिखा, “3 हजार का सूट 3 लाख में और इसने खुद यह 300 से ज्यादा बार पहन लिया होगा. ”

कौन होगा खरीददार?

बता दें, कि उनका ये कुर्ता खरीद ने की इच्छा एक्टर उमर आलम ने जताई है उमर ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि मुझे लूज होगा नहीं तो मैं ले लेता. हालांकि इसी के साथ उमर ने हसंने का इमोजी बनाया.एक्ट्रेस लाहौर की रहने वाली है जो कि एक फेमस टीकटॉक स्टार है.

जिजीविषा: अनु पर लगे चरित्रहीनता के आरोपों ने कैसे सीमा को हिला दिया- भाग 1

अनुराधा लगातार हंसे जा रही थी. उस की सांवली रंगत वाले चेहरे पर बड़ीबड़ी भावप्रवण आंखें आज भी उतनी ही खूबसूरत और कुछ कहने को आतुर नजर आ रही थीं. अंतर सिर्फ इतना था कि आज वे आंखें शर्मोहया से दूर बिंदास हो चुकी थीं. मैं उस की जिजीविषा देख कर दंग थी.

अगर मैं उस के बारे में सब कुछ जानती न होती तो जरूर दूसरों की तरह यही समझती कि कुदरत उस पर मेहरबान है. मगर इत्तफाकन मैं उस के बारे में सब कुछ जानती थी, इसीलिए मुझे मालूम था कि अनुराधा की यह खुशी, यह जिंदादिली उसे कुदरतन नहीं मिली, बल्कि यह उस के अदम्य साहस और हौसले की देन है. हाल ही में मेरे शहर में उस की पोस्टिंग शासकीय कन्या महाविद्यालय में प्रिंसिपल के पद पर हुई थी. आज कई वर्षों बाद हम दोनों सहेलियां मेरे घर पर मिल रही थीं.

हां, इस लंबी अवधि के दौरान हम में काफी बदलाव आ चुका था. 40 से ऊपर की हमउम्र हम दोनों सखियों में अनु मानसिक तौर पर और मैं शारीरिक तौर पर काफी बदल चुकी थी. मुझे याद है, स्कूलकालेज में यही अनु एक दब्बू, डरीसहमी लड़की के तौर पर जानी जाती थी, जो सड़क पर चलते समय अकसर यही सोचती थी कि राह चलता हर शख्स उसे घूर रहा है. आज उसी अनु में मैं गजब का बदलाव देख रही थी. इस बेबाक और मुखर अनु से मैं पहली बार मिल रही थी.

मेरे बच्चे उस से बहुत जल्दी घुलमिल गए. हम सभी ने मिल कर ढेर सारी मस्ती की. फिर मिलने का वादा ले कर अनु जा चुकी थी, लेकिन मेरा मन अतीत के उन पन्नों को खंगालने लगा था, जिन में साझा रूप से हमारी तमाम यादें विद्यमान थीं…

अपने बंगाली मातापिता की इकलौती संतान अनु बचपन से ही मेरी बहुत पक्की सहेली थी. हमारे घर एक ही महल्ले में कुछ दूरी पर थे. हम दोनों के स्वभाव में जमीनआसमान का फर्क था, फिर भी न जाने किस मजबूत धागे ने हम दोनों को एकदूसरे से इस कदर बांध रखा था कि हम सांस भी एकदूसरे से पूछ कर लिया करती थीं. सीधीसाधी अनु पढ़ने में बहुत होशियार थी, जबकि मैं शुरू से ही पढ़ाई में औसत थी. इस कारण अनु पढ़ाई में मेरी बहुत मदद करती थी.

अब हम कालेज के आखिरी साल में थीं. इस बार कालेज के वार्षिकोत्सव में शकुंतला की लघु नाटिका में अनु को शकुंतला का मुख्य किरदार निभाना था. शकुंतला का परिधान व गहने पहने अनु किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी. उस ने बड़ी ही संजीदगी से अपने किरदार को निभा कर जैसे जीवंत कर दिया. देर रात को प्रोग्राम खत्म होने के बाद मैं ने जिद कर के अनु को अपने पास ही रोक लिया और आंटी को फोन कर उन्हें अनु के अपने ही घर पर रुकने की जानकारी दे दी.

उस के बाद हम दोनों ही अपनी वार्षिक परीक्षा की तैयारी में व्यस्त हो गईं. जिस दिन हमारा आखिरी पेपर था उस दिन अनु बहुत ही खुश थी. अब आगे क्या करने का इरादा है मैडम? मेरे इस सवाल पर उस ने मुझे उम्मीद के मुताबिक जवाब न दे कर हैरत में डाल दिया. मैं वाकई आश्चर्य से भर  उठी जब उस ने मुझ से मुसकरा कर अपनी शादी के फैसले के बारे में बताया.

मैं ने उस से पूछने की बहुत कोशिश की कि आखिर यह माजरा क्या है, क्या उस ने किसी को अपना जीवनसाथी चुन लिया है पर उस वक्त मुझे कुछ भी न बताते हुए उस ने मेरे प्रश्न को हंस कर टाल दिया यह कहते हुए कि वक्त आने पर सब से पहले तुझे ही बताऊंगी.

मैं मां के साथ नाना के घर छुट्टियां बिताने में व्यस्त थी, वहां मेरे रिश्ते की बात भी चल रही थी. मां को लड़का बहुत पसंद आया था. वे चाहती थीं कि बड़े भैया की शादी से पहले मेरी शादी हो जाए. इसी बीच एक दिन पापा के आए फोन ने हमें चौंका दिया.

अनु के पापा को दिल का दौरा पड़ा था. वे हौस्पिटल में एडमिट थे. उन के बचने की संभावना न के बराबर थी. हम ने तुरंत लौटने का फैसला किया. लेकिन हमारे आने तक अंकल अपनी अंतिम सांस ले चुके थे. आंटी का रोरो कर बुरा हाल था. अनु के मुंह पर तो जैसे ताला लग चुका था. इस के बाद खामोश उदास सी अनु हमेशा अपने कमरे में ही बंद रहने लगी.

Bigg Boss 16: सलमान ने उठाया टीना-शालीन के लव एंगल पर सवाल

कलर्स टीवी रियलिटी शो बिग बॉस16 धमाकेदार होता जा रहा है शो में नए टास्क, दोस्ती और लडाई शो को एंटरटेनिंग बना रहे है बीते शुक्रवार शो में सलमान खान ने सबकी क्लास लगाई जिसमें सबसे ज्यादा फटकार टीना दत्ता को लगाई गई है.

आपको बता दें, कि सलमान खान ने टीना से पूछा कि आखिर उन्होंने बिग बॉस हाउस में अपने मैनेजर का नाम क्यो लिया है. सलमान की बात सुनकर एक्ट्रेस टीना दत्त बेहद ही इमोशनल हो गई और फूट-फूट कर रोने लगी. केवल इतना ही नहीं, सलमान खान ने टीना से शालीन भनोट के साथ उनके रिश्ते पर भी सवाल उठाया.

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जी हां, शुक्रवार का वार में सलमान खान ने खुलासा करते हुए बताया कि टीना किस तरह बिग बॉस हाउस में हर समय अपने करीबी दोस्त जू जू और मैनेजर का नाम लेती हैं. केवल इतना ही नहीं वह अर्चना को अपने दोस्त के नाम से धमकाती भी है.

क्या नकली है शालीन और टीना का प्यार

बिग बॉस में एक तरफ अकिंत और प्रिंयका का लव एंगल फैंस को बेहद पसंद आ रहा है तो, दूसरी तरफ शालीन और टीना का प्यार नकली बताया जा रहा है. जी हां, बिग बॉस 16 में सलमान खान ने टीना और शालीन के लव एंगल से भी पर्दा उठाया और घरवालों को बताया कि टीना दत्ता के मैनेजर ने उन्हें शालीन भनोट संग बिग बॉस हाउस में लव एंगल बनाने की सलाह दी थी. इस दौरान सलमान ने पीआर का नाम बताया और यह भी बताया कि वह शालिन और टीना की कॉमन फ्रेंड हैं. सलमान खान के आरोपों को सुनकर टीना पूरी तरह से टूट गईं.

पारिवारिक सुगंध: परिवार का महत्व

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लिवर को स्वस्थ रखने के लिए कौन से घरेलू उपाय किए जा सकते हैं?

सवाल 

मैं 32 वर्षीय शिक्षिका हूं. मुझे लिवर में सूजन की परेशानी है. मैं जानना चाहती हूं लिवर को स्वस्थ रखने के लिए कौन से घरेलू उपाय किए जा सकते हैं?

जवाब 

अपना भार औसत रखें विशेषकर शरीर के मध्य भाग में चरबी न बढ़ने दें. इस के लिए पोषक भोजन का सेवन करें जिस में फाइबरविटामिनऐंटीऔक्सीडैंट और मिनरल की मात्रा अधिक और वसा की मात्रा कम हो. नियमित रूप से ब्लड टैस्ट कराते रहें ताकि आप अपने रक्त में वसाकोलैस्ट्रौल और ग्लूटकोज के स्तर पर नजर रख सकें. नमकचाय और कौफी का सेवन कम करें.

दिन में कम से कम 8 गिलास पानी पीएं. तनाव को नियंत्रित रखें क्योंकि इस से पाचन प्रक्रिया प्रभावित होती हैजिस का सीधा असर लिवर की कार्यप्रणाली पर पड़ता है. सप्ताह में कम से कम 150 मिनट ऐक्सरसाइज करें. अगर धूम्रपान या शराब का सेवन करती हैं तो इसे तुरंत बंद कर दें.

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