पाकिस्तानी गर्ल आयशा 3 लाख में बेच रहीं अपना ग्रीन कुर्ता, जाने कौन होगा खरीददार ?

वैसे तो एक्टर और एक्टर्स के कपड़ो की निलामी होना कोई नई बात नहीं है लेकिन इन दिनों एक एक्ट्रेस का कुर्ता खूब चर्चा में तल रहा है जी हां, ये एक पाकिस्तानी एक्ट्रेस का कुर्ता है जिस कुर्ते को निलाम किया जा रहा है जिसकी कीमत सुन आप हैरान हो जाओंगे.

आपको बता दें,कि मेरा दिल पुकारे आजा(mera dil pukare aaja) सॉन्ग की फेम पाकिस्तानी एक्ट्रेस इन दिनो चर्चा में बनी हुई है जिसकी वजह है उनका ग्रीन रंग का कुर्ता. दरअसल, एक्ट्रेस ने ये कुर्ता अपनी दोस्त की शादी के हल्दी फंक्शन पर पहना था. जिसकी वीडियो जमकर वायरल हो रही है. वीडियो में एक्ट्रेस आयशा ने हरे रंग का कुर्ता पहना हुआ है इस वीडियो में आयशा डांस करती हुई नज़र आ रही है इसी डांस वीडियो में पहने हुए कर्ते की एक्ट्रेस निलामी कर रही है जिसकी कीमत है 3 लाख रुपए है. जी हां, पीपल मैगजीन में छपी रिपोर्ट के मुताबिक आयशा ने अपने कुर्ते की कीमत 3 लाख रुपए रखी है. जिसकी खरीददारी भी शुरु हो चुकी है.

पीपल मैगजीन ने अपने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, “मेरा दिल ये पुकारे आजा” गर्ल 3 लाख में अपनी ग्रीन ड्रेस बेच रही है.” पीपल मैगजीन के इस पोस्ट पर लोग खूब कमेंट कर रहे हैं एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, “ये लड़की अकेले ही पाकिस्तान की इकोनॉमी को बढ़ाने की कोशिश कर रही है. रिस्पेक्ट.” तो वहीं एक दूसरे यूजर ने लिखा, “3 हजार का सूट 3 लाख में और इसने खुद यह 300 से ज्यादा बार पहन लिया होगा. ”

कौन होगा खरीददार?

बता दें, कि उनका ये कुर्ता खरीद ने की इच्छा एक्टर उमर आलम ने जताई है उमर ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि मुझे लूज होगा नहीं तो मैं ले लेता. हालांकि इसी के साथ उमर ने हसंने का इमोजी बनाया.एक्ट्रेस लाहौर की रहने वाली है जो कि एक फेमस टीकटॉक स्टार है.

जिजीविषा: अनु पर लगे चरित्रहीनता के आरोपों ने कैसे सीमा को हिला दिया- भाग 1

अनुराधा लगातार हंसे जा रही थी. उस की सांवली रंगत वाले चेहरे पर बड़ीबड़ी भावप्रवण आंखें आज भी उतनी ही खूबसूरत और कुछ कहने को आतुर नजर आ रही थीं. अंतर सिर्फ इतना था कि आज वे आंखें शर्मोहया से दूर बिंदास हो चुकी थीं. मैं उस की जिजीविषा देख कर दंग थी.

अगर मैं उस के बारे में सब कुछ जानती न होती तो जरूर दूसरों की तरह यही समझती कि कुदरत उस पर मेहरबान है. मगर इत्तफाकन मैं उस के बारे में सब कुछ जानती थी, इसीलिए मुझे मालूम था कि अनुराधा की यह खुशी, यह जिंदादिली उसे कुदरतन नहीं मिली, बल्कि यह उस के अदम्य साहस और हौसले की देन है. हाल ही में मेरे शहर में उस की पोस्टिंग शासकीय कन्या महाविद्यालय में प्रिंसिपल के पद पर हुई थी. आज कई वर्षों बाद हम दोनों सहेलियां मेरे घर पर मिल रही थीं.

हां, इस लंबी अवधि के दौरान हम में काफी बदलाव आ चुका था. 40 से ऊपर की हमउम्र हम दोनों सखियों में अनु मानसिक तौर पर और मैं शारीरिक तौर पर काफी बदल चुकी थी. मुझे याद है, स्कूलकालेज में यही अनु एक दब्बू, डरीसहमी लड़की के तौर पर जानी जाती थी, जो सड़क पर चलते समय अकसर यही सोचती थी कि राह चलता हर शख्स उसे घूर रहा है. आज उसी अनु में मैं गजब का बदलाव देख रही थी. इस बेबाक और मुखर अनु से मैं पहली बार मिल रही थी.

मेरे बच्चे उस से बहुत जल्दी घुलमिल गए. हम सभी ने मिल कर ढेर सारी मस्ती की. फिर मिलने का वादा ले कर अनु जा चुकी थी, लेकिन मेरा मन अतीत के उन पन्नों को खंगालने लगा था, जिन में साझा रूप से हमारी तमाम यादें विद्यमान थीं…

अपने बंगाली मातापिता की इकलौती संतान अनु बचपन से ही मेरी बहुत पक्की सहेली थी. हमारे घर एक ही महल्ले में कुछ दूरी पर थे. हम दोनों के स्वभाव में जमीनआसमान का फर्क था, फिर भी न जाने किस मजबूत धागे ने हम दोनों को एकदूसरे से इस कदर बांध रखा था कि हम सांस भी एकदूसरे से पूछ कर लिया करती थीं. सीधीसाधी अनु पढ़ने में बहुत होशियार थी, जबकि मैं शुरू से ही पढ़ाई में औसत थी. इस कारण अनु पढ़ाई में मेरी बहुत मदद करती थी.

अब हम कालेज के आखिरी साल में थीं. इस बार कालेज के वार्षिकोत्सव में शकुंतला की लघु नाटिका में अनु को शकुंतला का मुख्य किरदार निभाना था. शकुंतला का परिधान व गहने पहने अनु किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी. उस ने बड़ी ही संजीदगी से अपने किरदार को निभा कर जैसे जीवंत कर दिया. देर रात को प्रोग्राम खत्म होने के बाद मैं ने जिद कर के अनु को अपने पास ही रोक लिया और आंटी को फोन कर उन्हें अनु के अपने ही घर पर रुकने की जानकारी दे दी.

उस के बाद हम दोनों ही अपनी वार्षिक परीक्षा की तैयारी में व्यस्त हो गईं. जिस दिन हमारा आखिरी पेपर था उस दिन अनु बहुत ही खुश थी. अब आगे क्या करने का इरादा है मैडम? मेरे इस सवाल पर उस ने मुझे उम्मीद के मुताबिक जवाब न दे कर हैरत में डाल दिया. मैं वाकई आश्चर्य से भर  उठी जब उस ने मुझ से मुसकरा कर अपनी शादी के फैसले के बारे में बताया.

मैं ने उस से पूछने की बहुत कोशिश की कि आखिर यह माजरा क्या है, क्या उस ने किसी को अपना जीवनसाथी चुन लिया है पर उस वक्त मुझे कुछ भी न बताते हुए उस ने मेरे प्रश्न को हंस कर टाल दिया यह कहते हुए कि वक्त आने पर सब से पहले तुझे ही बताऊंगी.

मैं मां के साथ नाना के घर छुट्टियां बिताने में व्यस्त थी, वहां मेरे रिश्ते की बात भी चल रही थी. मां को लड़का बहुत पसंद आया था. वे चाहती थीं कि बड़े भैया की शादी से पहले मेरी शादी हो जाए. इसी बीच एक दिन पापा के आए फोन ने हमें चौंका दिया.

अनु के पापा को दिल का दौरा पड़ा था. वे हौस्पिटल में एडमिट थे. उन के बचने की संभावना न के बराबर थी. हम ने तुरंत लौटने का फैसला किया. लेकिन हमारे आने तक अंकल अपनी अंतिम सांस ले चुके थे. आंटी का रोरो कर बुरा हाल था. अनु के मुंह पर तो जैसे ताला लग चुका था. इस के बाद खामोश उदास सी अनु हमेशा अपने कमरे में ही बंद रहने लगी.

Bigg Boss 16: सलमान ने उठाया टीना-शालीन के लव एंगल पर सवाल

कलर्स टीवी रियलिटी शो बिग बॉस16 धमाकेदार होता जा रहा है शो में नए टास्क, दोस्ती और लडाई शो को एंटरटेनिंग बना रहे है बीते शुक्रवार शो में सलमान खान ने सबकी क्लास लगाई जिसमें सबसे ज्यादा फटकार टीना दत्ता को लगाई गई है.

आपको बता दें, कि सलमान खान ने टीना से पूछा कि आखिर उन्होंने बिग बॉस हाउस में अपने मैनेजर का नाम क्यो लिया है. सलमान की बात सुनकर एक्ट्रेस टीना दत्त बेहद ही इमोशनल हो गई और फूट-फूट कर रोने लगी. केवल इतना ही नहीं, सलमान खान ने टीना से शालीन भनोट के साथ उनके रिश्ते पर भी सवाल उठाया.

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जी हां, शुक्रवार का वार में सलमान खान ने खुलासा करते हुए बताया कि टीना किस तरह बिग बॉस हाउस में हर समय अपने करीबी दोस्त जू जू और मैनेजर का नाम लेती हैं. केवल इतना ही नहीं वह अर्चना को अपने दोस्त के नाम से धमकाती भी है.

क्या नकली है शालीन और टीना का प्यार

बिग बॉस में एक तरफ अकिंत और प्रिंयका का लव एंगल फैंस को बेहद पसंद आ रहा है तो, दूसरी तरफ शालीन और टीना का प्यार नकली बताया जा रहा है. जी हां, बिग बॉस 16 में सलमान खान ने टीना और शालीन के लव एंगल से भी पर्दा उठाया और घरवालों को बताया कि टीना दत्ता के मैनेजर ने उन्हें शालीन भनोट संग बिग बॉस हाउस में लव एंगल बनाने की सलाह दी थी. इस दौरान सलमान ने पीआर का नाम बताया और यह भी बताया कि वह शालिन और टीना की कॉमन फ्रेंड हैं. सलमान खान के आरोपों को सुनकर टीना पूरी तरह से टूट गईं.

पारिवारिक सुगंध: परिवार का महत्व

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लिवर को स्वस्थ रखने के लिए कौन से घरेलू उपाय किए जा सकते हैं?

सवाल 

मैं 32 वर्षीय शिक्षिका हूं. मुझे लिवर में सूजन की परेशानी है. मैं जानना चाहती हूं लिवर को स्वस्थ रखने के लिए कौन से घरेलू उपाय किए जा सकते हैं?

जवाब 

अपना भार औसत रखें विशेषकर शरीर के मध्य भाग में चरबी न बढ़ने दें. इस के लिए पोषक भोजन का सेवन करें जिस में फाइबरविटामिनऐंटीऔक्सीडैंट और मिनरल की मात्रा अधिक और वसा की मात्रा कम हो. नियमित रूप से ब्लड टैस्ट कराते रहें ताकि आप अपने रक्त में वसाकोलैस्ट्रौल और ग्लूटकोज के स्तर पर नजर रख सकें. नमकचाय और कौफी का सेवन कम करें.

दिन में कम से कम 8 गिलास पानी पीएं. तनाव को नियंत्रित रखें क्योंकि इस से पाचन प्रक्रिया प्रभावित होती हैजिस का सीधा असर लिवर की कार्यप्रणाली पर पड़ता है. सप्ताह में कम से कम 150 मिनट ऐक्सरसाइज करें. अगर धूम्रपान या शराब का सेवन करती हैं तो इसे तुरंत बंद कर दें.

Winter Special: विंटर में स्नैक्स के लिए बनाएं भुट्टे के चीले

विंटर में रोजाना पकौड़े खाना हेल्थ के लिए अच्छा नही होता. पर अगर आप हेल्दी को टेस्टी लुक देकर कोई चाज बनाएं तो वो आपकी हेल्थ पर कोई असर नही डालती. आज हम आपको भुट्टे के चीले के बारे में बताएंगे, जिसे आप आसानी से कम समय में हेल्दी तरीके से बना सकते हैं. विंटर में भुट्टे आपको आसानी से मिल जाते हैं और अगर आपकी फैमिली को भी भुट्टे पसंद हैं तो ये डिश आपके लिए परफेक्ट है.

सामाग्री

-1 कप धुली मूंग दाल

-1 कप भुट्टे के दाने पिसे हुए

-1 चम्मच जीरा

-चुटकीभर हींग

-कुछ हरी मिर्च

-1/2 कप कटा प्याज व टमाटर

-कटा धनिया

-1 चम्मच लाल मिर्च पाउडर

-तेल 1 कटोरी

-नमक स्वादानुसार

विधि

– मूंग दाल को साफ करके धोकर 2 घंटे के लिए भिगो दें.

– भीगी दाल को जीरे-हरी मिर्च के साथ पीस लें. नमक डालकर अच्छी तरह मिलाएं.

– इसी तरह पिसे भुट्टों में प्याज-टमाटर और हरा धनियां मिलाकर थोड़ा सा नमक, लालमिर्च पाउडर भी डालकर रख दें.

– अब एक तवे में तेल गरम करें. छोटी सी कटोरी में मूंग का घोल लेकर उसे तवे पर डालकर फैला दें. इसे तवे पर चीले की तरह तलें. दो चम्मच भुट्टे का पेस्ट ऊपर से चीले पर डाल दें.

– चीले के किनारों पर थोड़ा तेल डालकर पकाएं और दूसरी तरफ पलट दें. धीमी आंच पर दो मिनट पकाएं. दोनों ओर से कुरकुरे हो जाने पर उतार लें और हरी चटनी के साथ अपनी फैमिली और बच्चों को स्नैक्स या ब्रेकफास्ट में सर्व करें.

बड़बोला: भाग-3

विपुल की बहन की शादी के दिन पूरे आफिस का स्टाफ नए शानदार चमकते कपड़े पहन कर आफिस आया. ऐसा लगा मानो आफिस बरातघर बन गया हो.

महेश को संबोधित करते हुए मैं ने पूछा, ‘‘क्या बात है, श्वेता नजर नहीं आ रही?’’

‘‘सर, आप भी क्या मजाक करते हैं, शादी से पहले अपनी ससुराल कैसे जा सकती है. बस, आज बहन की शादी हो जाए, अगले महीने विपुल का भी बैंड बजा समझें.’’

लंच के बाद सभी बस अड्डे पहुंच गए. थोड़ी देर इंतजार करने के बाद नवगांव की बस मिली. लगभग 4 बजे बस चली. बस चलते ही महेश और सुषमा शादी की बातें करने लगे, खासतौर से शादी के इंतजाम के बारे में और मैं उन की पिछली सीट पर बैठा मंदमंद मुसकराने लगा. तभी मेरे साथ सीट पर बैठे सज्जन ने बीड़ी सुलगाई और मेरे से पूछा, ‘‘भाई साब, क्या आप भी इन लोगों के साथ नवगांव जा रहे हैं बिहारी की छोरी की शादी में?’’

‘‘आप की बात मैं समझा नहीं,’’ मैं ने बीड़ी वाले सज्जन से पूछा.

बीड़ी का कश लगाते हुए उस ने कहा, ‘‘मेरा नाम बांके है. मैं और बिहारी अनाज मंडी में दलाली करते हैं. बिहारी का छोरा नवयुग सिटी में किसी बड़े दफ्तर में काम करता है. ऐसा लगता है कि आप लोग उसी दफ्तर में काम करते हैं और उस की बहन की शादी में जा रहे हैं. मैं आप लोगों की बातों से समझ गया कि आप वहीं जा रहे हो, क्योंकि इतनी लंबी बातें पूरे नवगांव में बिहारी का खानदान ही कर सकता है. अगर इतना ही अमीर होता तो उस का लड़का 3 हजार की नौकरी करता, ठाट से 18 ट्रक चलाता.

‘‘बिहारी के महल्ले में रहता हूं, आप सब जिस दाल मिल की बात कर रहे हैं उसे बंद हुए 10 साल हो गए हैं. मैं और बिहारी उस दाल मिल में नौकरी करते थे. जब मिल बंद हुई तब से अनाज मंडी में दलाली कर रहे हैं,’’ बीड़ी का कश लगाते हुए बांके की आवाज में व्यंग्य था.

बांके की बातें सुन कर हम सब सकते में आ गए. सब की बोलती बंद हो गई और भौचक से एकदूसरे की शक्ल देखने लगे. साहस जुटा कर बड़ी मुश्किल से आवाज निकाल कर सुषमा बोली, ‘‘अंकल, आप सच कह रहे हो, कहीं मजाक तो नहीं कर रहे हो.’’

बांके ने एक और बीड़ी सुलगाई, फिर कश लगाते हुए बोला, ‘‘नवगांव पहुंच कर देख लेना. मेरी कोई दुश्मनी थोड़े है. इतना गपोड़ी निकलेगा, पता नहीं था. पूरा नवगांव बिहारी को एक नंबर का गपोड़ी मानता है पर बेटा तो बाप से भी दस कदम आगे निकला.’’

अब बाकी का रास्ता काटना दूभर हो गया. सभी इस सोच में थे कि जल्दी से नवगांव आ जाए और हकीकत से सामना करें. तभी बस एक पुरानी बिल्ंिडग के सामने रुकी. तब बांके ने कहा, ‘‘नवगांव आ गया, यह खंडहर ही दाल मिल है, जहां बिहारी क ा छोरा 18 ट्रक चला रहा है.’’

हम सब टूटे मन से बस से उतरे. अब करते भी क्या, कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था. जो दाल मिल 10 साल से बंद है उस की हालत खंडहर से कम क्या और ज्यादा क्या. कच्ची टूटी सड़क पर हम कारपेट ढूंढ़ते रह गए. अब स्टाफ का सब्र टूट गया, सब विपुल को गालियां निकालने लगे, अपनी झूठी शान के लिए विपुल इतना बड़ा झूठ बोलेगा, इस की उम्मीद किसी को नहीं थी.

तभी सामने से एक तांगे में कुछ कारपेट और कुरसियों के साथ विपुल आता दिखाई दिया. उसे देख कर सुषमा जोर से चिल्लाई, ‘‘विपुल के बच्चे, नीचे उतर. हमें बेवकूफ बना कर कहां जा रहा है. इन टूटी गड्ढे वाली सड़कों पर चल कर हमारी टांगें टूट गई हैं और तू मजे में तांगे की सवारी कर रहा है.’’

हमें देख कर विपुल तांगे से नीचे आ कर बोला, ‘‘आइए सर, कारपेट बिछने के लिए गली में जा रहे हैं. बांके अंकल, तांगे का सामान घर पहुंचवा दो, मैं सर के साथ हवेली जाता हूं.’’

महेश ने विपुल का कालर पकड़ कर पूछा, ‘‘बेटे, इतना झूठ बोलने की क्या जरूरत थी. इतने महंगे कपड़े पहन कर आए, सब खराब करवा दिए, अगर सच बता देता तब भी शादी में आते, तब और ज्यादा खुशी होती. पागल बना कर रख दिया, अब राष्ट्रपति भवननुमा हवेली के दर्शन भी करवा दे, उस को भी देख कर तृप्त हो जाएं.’’

शायद विपुल को हमारे आने की उम्मीद नहीं थी. एक पल के लिए वह हमें देख कर सन्न रह गया, लेकिन हर बड़बोले की तरह चतुराई से बातें बनाने लगा. ऐसे व्यक्ति आदत से मजबूर…हार नहीं मानते. बात को पलटते हुए बोला, ‘‘आइए सर, हवेली चलते हैं. आप सफर में थक गए होंगे, कुछ जलपान कर लेते हैं.’’

थोड़ी देर पैदल चलने के बाद हम सब हवेली में पहुंच गए. हवेली एक पुरानी इमारत निकली. हवेली को देख कर लगता था कि किसी समय जमींदार की रिहाइश रही होगी, जो अब एक धर्मशाला बन कर रह गई है, जिस के 2 तरफ कमरे बने हुए थे और बाकी 2 तरफ खाली मैदान. रोशनी के नाम पर 3-4 खंभों पर बल्ब लटक रहे थे. 2-3 कमरों में कुछ हलचल हो रही थी, जहां वरपक्ष के पुरुष तैयार हो रहे थे, कुछ महिलाएं तैयार हो कर तांगे पर बैठ कर जा रही थीं. तभी विपुल ने सफाई देते हुए कहा, ‘‘हमारे यहां औरतें बरात के साथ नहीं जातीं, इसीलिए पहले हमारे घर जा रही हैं.’’

हलवाई ने विपुल के आग्रह पर कुछ पकौड़े तल दिए और चाय बना दी. जलीभुनी बैठी सुषमा जलीकटी सुनाने लगी, ‘‘विपुल, तू ने यह अच्छा काम नहीं किया, इतना झूठ तो कोई अपने दुश्मन से भी नहीं बोलता. सारा मेकअप खराब हो गया, इतनी महंगी साड़ी धूल से सन गई, ड्राईक्लीनिंग के पैसे तेरे से लूंगी.’’

‘‘हांहां, क्यों नहीं,’’ झेंपती हंसी के साथ विपुल बोला.

‘‘इतनी भूख लग रही है और खिलाने को तुझे ये सड़े हुए बैगन और सीताफल के पकौड़े ही मिले थे. नहीं चाहिए तेरी दावत. इस से तो उपवास अच्छा,’’ कहते हुए सुषमा ने पकौड़े की प्लेट विपुल को ही पकड़ा दी. विपुल ने एक पकौड़ा मुंह में डालते हुए कहा, ‘‘सुषमा, नाराज नहीं होते, फाइव स्टार होटल से अच्छे पकौड़े हैं.’’

‘‘तेरे घर का एक बूंद पानी भी नहीं पीना,’’ सुषमा तमतमाती हुई बोली.

‘‘सर, इस में नाराजगी की क्या बात है. आप इतनी दूर से आए हैं, कुछ तो लीजिए,’’ पकौड़ों की प्लेट मेरे आगे करते हुए विपुल ने कहा.

एक पकौड़ा खाते हुए मैं सुषमा से बोला, ‘‘छोड़ो नाराजगी, भूखे पेट रहना ठीक नहीं, कुछ खा लो,’’ लेकिन सुषमा टस से मस नहीं हुई. उस ने कुछ नहीं खाया.

सुषमा और महेश ने अपनी नाराजगी विपुल को जाहिर कर दी. बाकी स्टाफ चुप रहा, लेकिन मेरे समेत सभी दुखी थे.

आगे पढ़ें- हम विपुल के घर गए तो…

पति का मजाक उड़ाने से पहले सोचें

‘‘ बेटा, खाना ठीक से खाना. बेटा, वक्त पर सो जाना. बेटा, घर का खयाल रखना. बेटा, फोन करते रहना. अच्छा मम्मीजी. मम्मीजी के बेटेजी, अब हम चलें क्या?’’आस्था ने अपनी सास के अंदाज में ही महेश से मजाक किया, तो महेश का चेहरा उतर गया. महेश का सिर्फ चेहरा ही नहीं उतरा, वह मन से भी उखड़ गया. हर वक्त अपनी पत्नी आस्था का खयाल रखने वाला महेश बातबात पर खीजने लगा. एक छोटा सा मजाक प्यार भरे रिश्ते की दीवार बन गया. आस्था चाह कर भी वह दीवार लांघ नहीं पा रही थी. आस्था ने तो सीधा सा मजाक ही किया था, पर महेश को चुभ गया. कई बार हम अपने ही शब्दों के तीखेपन को नहीं पहचान पाते. पर जिसे तीर लगता है वह उसे भूल नहीं पाता और रिश्तों में खटास आने लगती है. बेहतर है कि ऐसी बातें जबान पर लाई ही न जाएं.

‘‘तुम्हारी मम्मी को पैसों की बड़ी चिंता रहती है,’’ मीना ने राजेश से मजाक किया. बात तो मजाक की ही थी. पर उस का अर्थ राजेश को चुभ गया. कुछ विषयों पर पतियों की आलोचना करते हुए मजाक न ही करें तो बेहतर है. दरअसल, आप नहीं जानतीं कि कौन सी बात या वस्तु उन के दिल के कितने नजदीक है और वे उसे कितना चाहते हैं. बहुत बार आप ने पुरुषों को देखा होगा कि वे अपने सिर के 2-4 बालों पर कितने प्यार से कंघी करते हैं, बारबार आईना देखते हैं. सोचिए, अगर उन्हीं 2-4 बालों को आप ने मजाक का विषय बनाया, तो क्या होगा? ‘‘इन की तो सड़क ही साफ है. इन्हें यह भी नहीं पता चलता कि कहां तक साबुन लगाना है और कहां तक मुंह धोना है.’’ रजनी ने मोहन के बारे में कहा और वह भी अपने मायके में, तो मोहन को बात चुभ गई. अब मोहन रजनी के मायके के नाम से भी चिढ़ने लगा है. बालों की तरह अपने चेहरे के मोटे, पतले या खराब होने पर किसी तरह की टीकाटिप्पणी उन्हें नहीं भाती, भले ही आप शब्दों को चाशनी में लपेटलपेट कर परोसें. पति फौरन चाशनी और मजाक के भाव को अलग कर देते हैं और भावार्थ दिल तक ले जाते हैं. यही पतिपत्नी के रिश्तों की दूरियां बढ़ा देता है.

रजनी जैसी ही एक बात रीटा के मुंह से भी निकल गई, जब किसी ने पूछा, ‘‘तेरे पति कहां हैं, दिख नहीं रहे?’’

‘‘मेरे चुन्नेमुन्ने किसी के पीछे छिप गए होंगे.’’

रीटा ने ‘चुन्नेमुन्ने’ शब्द पति के छोटे कद के कारण प्यार से कहा. पर किसी के सामने कह दिया, यही खल गया रोहन के मन को. रोहन को बुरा लगा कि वह अपने कद को बदल तो नहीं सकता, फिर सब के सामने मुझे ‘चुन्नेमुन्ने’ क्यों कहा. 

रिश्तों में कड़वाहट

अपने कद की तरह कोई अपने रिश्तेदारों को, उन की सूरतों को, उन के बात करने के अंदाज को भी बदल तो नहीं सकता न. फिर पत्नी अगर इन बातों को अपने मजाक का विषय बनाए, भले ही मजाक उड़ाना उस का उद्देश्य न हो, पति को कभी पसंद नहीं आएगा. अगर पत्नी ने कोई ऐसा तीर छोड़ दिया, तो वह फूल की तरह तो लगने से रहा. शूल की तरह मन में चुभता ही रहेगा और पत्नी चाह कर भी शूल निकाल नहीं पाएगी. एक अन्य विषय पत्नियों के मजाक का हो जाता है, वह यह कि अगर पति महोदय किसी खास व्यक्ति के स्वागत में बौराने लगें.

‘‘आओजी, बैठो जी, लाओजी, ठंडा पियोजी, चाय पियोजी. न न न अभी नहीं जा सकते आप. बैठो न. रह जाओ न. ऐसे कैसे जाने देंगे. फलांफलां.’’ भले ही मेहमान महिला नहीं पुरुष हो, पति के इस अंदाज में उतावला हो जाने पर स्वाभाविक है कि पत्नी मजाक कर दे. मजाक हुआ तो समझिए पत्नी की इज्जत का पत्ता भी साफ हुआ. पति सोच बैठते हैं कि पत्नी फलां मेहमान से जलती है. मैं इज्जत करता हूं किसी की, तो इस से बरदाश्त नहीं होता. ऐसे में पत्नी के मजाक पर पति अपना ध्यान केंद्रित कर के उसे ही दोषी मान लेता है. उस का तर्क होता है, ‘‘जब मैं किसी की इज्जत करता हूं तो मेरी पत्नी को भी करनी चाहिए,’’ मेरा तो मन खट्टा हो गया. उसे पत्नी ही मेहमान की प्रतिद्वंद्वी लगने लगती है.

एक विषय बहुत नाजुक

पिछली सभी बातों और विषयों को नजरों से ओझल भी कर दें, तो एक खास विषय है जिस पर कोई भी पति, कोई भी मजाक सुनना पसंद नहीं करता. वह है पति के यौनांग पर और उस के सहवास करने के तरीके पर. उस पर कोई भी मजाक होने पर पति के मन में पत्नी के प्रति कड़वाहट भर जाती है. नीना सोने के लिए कमरे में आई ही थी कि आशू को देख कर उस के मुंह से निकल गया, ‘‘तुम तो पहले से ही तैयार बैठे हो.’’ बात कुछ भी नहीं थी पर आशू को चुभ गई. उस के बाद तो हालात कुछ ऐसे बने कि नीना कहती रहे पर आशू का हर बार एक ही जवाब होता था ‘‘मूड नहीं है.’’

मीनाक्षी ने भी कुछकुछ नीना जैसा ही मजाक किया था, ‘‘चूहे की तरह कुतरकुतर क्या करते हो?’’ लो, नारंग तो मरे चूहे जैसा ही ठंडा हो गया. सहवास के दौरान ऐसे मजाक तो रिश्तों पर बहुत ही भारी पड़ जाते हैं. बहुत सी बातें देखसुन कर खामोश रह जाने की होती हैं. उन से जुड़े मजाक, मजाक उड़ाना ही कहलाते हैं. अपने मन की कड़वाहट या प्रश्नों को, शब्दों में न ही ढालें तो बेहतर होगा. मजाक करें भी तो सोचसमझ कर. उन विषयों पर कतई मजाक न करें, जिन्हें पति बदल नहीं सकता या वे उस के नितांत व्यक्तिगत हों.

जूतों की बदबू को कहें बाय-बाय

आपके जूते से बदबू आने के कारण आपके साथ-साथ आपके घरवाले और आस पास के लोग भी परेशान होते हैं. आप हमेशा सोचते हैं कि आखिर क्यों आपके पैर और जूते से इतनी बदबू आती है. हालांकि पैरों से बदबू आने का मुख्य कारण बैक्टीरिया होते हैं लेकिन जिन लोगों को बहुत अधि‍क पसीना आता है या फिर जो लोग बहुत गंदे से रहते हैं, उनके जूते से भी बदबू आना शुरू हो जाती है.

अगर जूते गंदे हैं तो गंदगी के पैर में चिपकने की आशंका भी बढ़ जाती है. ये गंदगी बाद में कई बीमारियों का कारण भी बन सकती है.

ऐसे में आप चाहें तो इन उपायों को अपनाकर अपने जूतों की बदबू दूर कर सकते हैं.

  • हर रोज एक ही जूता पहनने से परहेज करें.
  • दो जोड़े जूते रखें और उन्हें बदल-बदलकर पहनें. इससे जूतों के भीतर मौजूद आपके पसीने की नमी को सूखने का समय मिल सकेगा और इससे बदबू पैदा नहीं होगी.
  • अपने जूतों के भीतर मेडिकेटेड इन-सोल लगाएं. इससे पसीना जल्दी सूख जाएगा.
  • जब भी बाहर से लौटें, जूतों को तुरंत उतार दें. जूते उतारने के बाद उनमें पेपर बॉल या फिर पेपर भर दें. अखबार अंदर की सारी नमी सोख लेता है जिससे बैक्टी‍रिया पनपने नहीं पाते हैं.
  • जूतों के अन्दर थोड़ा सा बेकिंग पाउडर डालकर छोड़ दें. इससे नमी भी सूख जाएगी और बदबू भी नहीं आएगी.
  • अगर जूते गीले हो जाएं तो उन्हें ड्रायर से सुखा लें.

Winter Special: दांतों के आधुनिक उपचार

चिकित्सा जगत में अब दांतों के आधुनिक उपचार में क्रांति आई है. दांतों के आधुनिक उपचार की मांग तो बढ़ी है, लेकिन जानकारी न होने के कारण कई मरीजों को इस का खमियाजा भुगतना पड़ता है. एक ही सेशन के दौरान होने वाली कई प्रक्रियाओं जैसे दांतों को सफेद करना, ब्लीचिंग, लैमिनेट, वेनीर, मसूढ़ों की सर्जरी इनेमेलोप्लास्टी आदि से लोगों को न सिर्फ संतुष्टि मिलती है, बल्कि बिना कारण के भी औसतन से अधिक हंसने लगते हैं. लेकिन इन प्रक्रियाओं के दुष्प्रभावों को जानने के बाद आप के लिए यह निर्णय करना आसान हो जाएगा कि आप बिना कारण कुछ दिन तक हंसना चाहते हैं या फिर हमेशा के लिए अपनी हंसी को अपने पास संजो कर रखना चाहते हैं.

दांतों को सफेद कराना या ब्लीचिंग कराने की प्रक्रिया को एक सेशन मेें ही किया जा सकता है. लेकिन क्या आप इस के लिए उपयुक्त उम्मीदवार हैं?सब के लिए यह जानना आवश्यक है कि दांतों पर ब्लीचिंग का असर सिर्फ कुछ हफ्तों तक ही रहता है इसलिए इसे बारबार और जल्दीजल्दी कराना पड़ता है. फिर हर बार उतनी चमक नहीं आती जितनी कि शुरुआत में आती है. इस का सब से बड़ा दुष्प्रभाव तो यह होता है कि बारबार ब्लीचिंग कराने से दांत कमजोर हो जाते हैं और आगे चल कर इन के जल्दी ही गिरने की आशंका रहती है. दांत जल्दी सड़ जाते हैं, खुरदुरे हो जाते हैं और दांतों के बीच फ्रेक्चर लाइन बन जाती है. तो क्या ये सब जानने के बाद आप मुसकराना चाहेंगे?

अब कई आधुनिक तकनीकों केक आने से ब्लीचिंग के लिए सही सदस्यों का चयन कर पाना आसान हो गया है. एडवांस्ड पावर जूम भी एक ऐसी ही तकनीक है. इस के दौरान प्रोफेशनल तरीके से दांतों को चमकाया जाता है. इस के शतप्रतिशत परिणामस्वरूप जादू जैसा असर देखने को मिलता है. शेड गाइड पर तुलना करने से पता चलता है कि यह दांतों को 6-8 शेड अधिक चमकदार बनाता है. इस का असर कम से कम दो सालों तक रहता है अन्यथा ब्लीचिंग या अन्य उत्पादों का इस्तेमाल करने से केवल एक या दो शेड ही चमक मिलती है व इस का प्रभाव केवल कुछ समय तक ही रहता है.

लैमिनेट

लैमिनेट धातु से बने पतले कवर की तरह होते हैं जिन्हें पीले, भूरे दांतों की गंदगी, फ्लोराइड दाग आदि को छिपाने के लिए लगाया जाता है. यह पुरानी मगर विशष्ट प्रक्रिया है. लेकिन यहां भी वही सवाल उठता है कि क्या आप इस के लिए उपयुक्त उम्मीदवार हैं?

लैमिनेट कैप या क्राउन का बेहतर विकल्प माना जाता है. कैप के मुकाबले इस में दांतों को 75 % काटना पड़ता है. तकनीकी तौर पर इस प्रक्रिया के दौरान सामने से दांतों के आकार को केवल 0.5 मि.मी. से अधिक नहीं काटना पड़ता है. जबकि कैप लगाने के लिए दांतों के चारों तरफ से उसे 1.5 मि.मी. काटना पड़ता है. इस के अलावा कैप लगवाने वाले दांतों में पहले रूट कैनाल ट्रीटमेंट आरसीटी कराना पड़ता है. इस से दांत निष्क्रिय हो जाते हैं, उन तक कोई पौष्टिक आहार आदि नहीं पहुंचता और दांत जल्द ही कमजोर हो जाते हैं.

हालांकि कैप और लैमिनेट दोनों का खर्चा लगभग बराबर ही होता है लेकिन कैप के साथ आरसीटी कराने का खर्चा अलग से करना पड़ता है यानी कैप अधिक महंगा पड़ता है.

मसूढ़ों की सर्जरी या एनेमेलोप्लास्टी

हर कोई इन प्रक्रियाओं के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता. इस से दांतों को नुकसान हो सकता है. दांतों पर लगने वाले ब्रेसिस चलिए किसी अवस्था के बारे में सोचते हैं. कोई लड़की जिस के दांत टेढ़ेमेढ़े हैं और 2-3 महीने में उस की शादी होने वाली है. वह अपने दांतों के लिए कोई उपचार ढूंढ़ रही है. लेकिन उसे लगभग हर दंत रोग विशेषज्ञ यही कहेगा कि ब्रेसिस लगाने की उस की उम्र समाप्त हो चुकी है. और अगर ब्रेसिस लगाए भी गए तो उन्हेें अपना परिणाम देने में लगभग 1 वर्ष का समय लगेगा. लेकिन यह एक मिथ्य है कि किशोर ब्रेसिस नहीं लगवा सकते या फिर हर केस में परिणाम आने में 1 वर्ष का समय लगेगा. यह उपचार किसी भी उम्र में किया जा सकता है. इस का परिणाम भी 3-4 महीनों में आ जाता है. लेकिन यह मरीज के ऊपर निर्भर करता है कि वह उम्र भर के लिए आरसीटी करा के नकली कैप लगा कर हरना है कि फिर उम्र भर के लिए प्राकृतिक मुसकराहट चाहिए. इस का निर्णय मरीज को सोचसम?ा कर करना चाहिए. अगर हम खर्चे की बात करें तो किसी को यह नहीं भूलना चाहिए कि ब्रेसिस का खर्चा लैमिनेट की तुलना में 50 से 70 % तक कम होता है.

मुसकराहट की बनावट

किसी भी दंत उपचार के लिए विज्ञान की बहुत बड़ी भूमिका होती है. लैमिनेट का आकार हर व्यक्ति व हर दांत के लिए अलग होता है. यह आप के चेहरे के आकार पर भी निर्भर करता है. अगर आप का चेहरा गोल, अंडाकार, लंबा, छोटा है और आप के दांत छोटेबड़े, चौड़े, पतले, टेढ़े या ?ाके हुए हैं या फिर ऊपरनीचे के दांत कम दिखते हैं या कई केसों में आगे के नीचे वाले दांत ऊपरी दांतों को बारबार रगड़ देते हैं जिस से ऊपरी दांत घिसने लगते हैं तो ऐसे में आसानी से ब्रेसिस लगाए जा रहे हैं.

दांतों की सुरक्षा या खूबसूरती की एक दंत रोग विशेषज्ञ जिसे स्माइल आर्किटेक्ट भी कहा जाता है, आज के लिए बहुत जरूरी है और कोई भी सौंदर्य उपचार इस के बिना पूरा नहीं है. दांतों के उपचार में अवेजेनेटिक का भी रोल रहेगा. आप के शरीर के जीन के कोड के अनुसार टूटे या सड़े दांतों को ठीक करना सर्जनों के लिए आम हो जाएगा. डा. थिमि और मितसैदीस, जो यूनीवर्सिटी औफ ज्यूरिक में हैं. अब दांतों के एनेमल और आप के शरीर के जीन पर काम कर रहे हैं.

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