सरकार की हुई जमीन

दिल्ली में बहुत सी जमीन केंद्र सरकार की है जिसे अरसा पहले सरकार ने खेती करने वाले किसानों से कौढिय़ों के भाव खरीदा था. इस में बहुत जगह कमॢशयल प्लाट बने हैं, छोटे उद्योग लगे हैं. रिहायशी प्लाट कट कर दिए गए हैं. जिन कीमतों पर जमीन इंडस्ट्री, दुकानों या घरों को दी गई उस से थोड़ी कम कीमत पर स्कूलों, अस्पतालों, समाजसेवी संस्थाओं को दी गई. यह जमीन दे तो दी गई पर केंद्र सरकार का दिल्ली डेबलेपमैंट अथौरिटी उस पर आज भी 50-60 साल बाद भी कुंडली लगाए भी बैठा है जबकि उद्योग चल रहे है, दुकानें खुली, लोग रह रहे है स्कूल अस्पताल चल रहे हैं.

उस का तरीका है लगे होल्ड जमीन. डीडीए ने आम बिल्डरों की तरह एक कौंट्रेक्ट पर सब आदमियों से साइन करा रखे है कि कौंट्रेक्ट, जिसे सब लोग कहते हैं, कि किसी भी धारा के खिलाफ काम करने पर अलौटमैंट कैंसिल की जा सकती है चाहे कितने ही सालों से वह जमीन अलाटी के पास हो.

ऐसा देश के बहुत हिस्सों में होता है और लीज होल्ड जमीनों पर आदमी या कंपनी या संस्था खुद की पूरी मालिक नहीं रहती. नियमों को तोडऩे पर जो परोक्ष रूप में सरकार के खिलाफ कुछ बोलने पर भी होता है. इस धारा को इस्तेमाल किया जाता है. बहुत से लोग इस आतंक से परेशान रहते हैं.

जहांं भी लीज होल्ड जमीन और अलादी सब लीज के बंधनों से बंधा है वहां खरीदफरोक्त, विरासत में, भाइयों के बीच विवाद में अलौट करने वाला. सरकारी विभाग अपना अडग़ा अड़ा सकता है. 40-50 साल पुरानी शर्तें आज बहुत बेमानी हो चुकी हैं. शहर का रहनसहन तौरतरीका बदल गया है. कामकाज के तरी के बदल गए है पर लीज देने वाला आज भी पुरानी शर्तों को लागू कर सकता है.

कुछ साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने इन्हीं लीज की शर्तों के आधार पर काफी सारा दिल्ली का व्यापार ठप्प करा दिया था कि रहायशी इलाकों में दी गर्ई जमीन पर कमॢशयल काम नहीं हो सकता. चाहे यह सिद्धांत 40-50 साल पहले ठीक रहा हो पर आज जब दुकानों की जरूरत है तो चांदनी चौक के रिहायशी कटरे भी दुकानों में बदल गए हैं और खान मार्केट के भी. और शहरों में भी ऐसा हो रहा है लखनऊ के हजरतगंज में ऊपरी मंजिलों में घर गायब हो गए हैं. जयपुर की सी स्कीम में बड़ी घरों की जगह माल बन गए हैं.

सरकारी दफ्तर फिर भी पुराने अधिकार छोडऩे को तैयार नहीं है क्योंकि यह कमाई का बड़ा साधन है. दिल्ली में एक अस्पताल का 1995 में अलौटमैंट कैंसिल कर दिया गया कि वह अस्पताल शुरू करने वालों ने दूसरों को बेच दिया गया जबकि अस्पताल की संस्था वही थी, बस मेंबर बदले गए थे. ट्रायल कोर्ट ने डीडीए का पक्ष लिया पर उच्च न्यायालय ने मामला खारीज कर दिया कि मेंबर बदलना, बेचना नहीं है.

असल में सरकारों को आम आदमी की ङ्क्षजदगी में जितना कम हो उतना ही रहना चाहिए. जब तक वजह दूसरों का नुकसान न हो, सरकार नियमों कानूनों का हवाला दे कर अपना पैसा नहीं वसूल सकती.

देश की सारी कृषि भूमि पर सरकार ने परोक्ष रूप से कुंडली मार ली है. उसे सिर्फ कृषि की भूमि घोषित कर दिया गया है. उस पर न मकान बन सकते है न उद्योग लग सकते है जब तक सरकार को मोटी रकम न दी जाए. सरकारको कृषि योग्य जमीन बचाने की रुचि नहीं है, वह सिर्फ कमाना चाहती है. चेंज इन लैंड यूज के नाम पर लाखों करोड़ों वसूले भी जाते हैं, और मनमानी भी की जाती है. अगर पैसा बनाना हो तो 10-20 साल आवेदन को जूते घिसवाए जा सकते हैं.

अब जमीनें औरतों को विरासत में मिलने लगी हैं. उन्हें इन सरकारी दफ्तरों से निपटना पड़ता है. उन को हर तरह से परेशान किया जाता है. तरहतरह के दयाल पैदा हो गए हैं. हर तरह के ट्रांसफर पर आपत्ति लगा दी जाती है. बेटियों के लिए पिता की संपत्ति एक जीवन जंजाल बन गया है जिसे न निगला जा सकता है न छोड़ा जा सकता है क्योंकि सरकारी सांप गले में जा कर फंस जाता है.

अस्पताल में 3 दिन : अपनी-अपनी तकलीफें

मैंने चाय का आखिरी घूंट पिया और आदत के अनुसार उस को मुंह में घुमाया तो मेरे सामने के बैड पर लेटा बालक हंस दिया. मैं ने जल्दी से चाय को गले उतारा और इशारे से पूछा, ‘क्या?’ वह फिर हंस दिया, बोला, ‘चाय को मुंह में रखने और घुमाने से आप मुझे मानव विकास क्रम के पहले चरण से लगे.’ उस की बात सुन कर मैं भी हंस दिया.

अस्पताल का जनरल वार्ड है यह. कई रोगी हैं यहां. मैं तो 2 दिनों पहले ही आया हूं. कई रोगी तो महीनों से भरती हैं. यह लड़का भी 7 दिनों से भरती है. इस को कुत्ते ने काटा था तो इस के पिताजी इसे बावसी के पास ले गए थे. यहां ज्यादातर लोग पशु के काटने, बुखार आने, पेटदर्द जैसी बीमारियों पर पहले आस्था के केंद्र पर जाते हैं. जब मामला बिगड़ जाता है तो डाक्टर के पास आते हैं. ठीक होने पर डाक्टर को नहीं, बावसी को ही प्रसाद चढ़ाते हैं. तो इस लड़के को कुत्ते ने काटा. बावसी ने कुत्ते के काटे पर फूंक मारी और कहा, ‘जाओ, ठीक हो जाएगा.’ सब ने बावसी की जय की और टापरे चले गए थे. पर कुछ दिनों बाद मामला बिगड़ गया. कुत्ता पागल था, सो, लड़के को रेबीज हो गया, तो इसे यहां अस्पताल लाया गया.

अस्पताल में एक संस्था द्वारा मुफ्त में दिए जाने वाले भोजन का वितरण शुरू हुआ और लड़के के पिताजी भोजन लेने चले गए.

मेरे पास के बिस्तर पर एक 14 साल की लड़की है, जिस को उस के ही रिश्तेदारों ने जम कर पीटा है. स्वयंसेवी संस्था, पुलिस, नेता, प्रशासन के लोग उस से मिलने लगातार आते रहते हैं. किसी ने बताया कि प्रेम का मामला है, लेकिन परंपरा, सम्मान से जुड़ा है. यहां यह परंपरा है कि गांव के लड़केलड़की भाईबहन माने जाते हैं. यह लड़की गांव के ही एक लड़के से प्रेम करती है. लड़का भी जीजान से इस को चाहता था. जब गांव के बड़ेबुजुर्गों को पता लगा तो दोनों को समझाया कि यह प्रेम गलत है. वे शादी नहीं कर सकते. पर ये दोनों नहीं माने. एक दिन दोनों ने जहर खा लिया. प्रेमी तो मर गया लेकिन प्रेमिका बच गई, जो अब यहां है. लड़की बहुत दबाव में है.

परंपराएं कितनों का ही खून करती हैं, कितने ही अरमानों का गला दबा देती हैं, कितनी ही उम्मीदों को कोख में ही मार देती हैं. हर व्यक्ति जन्म लेते ही ऐसे कितने ही बोझों को ले कर बड़ा होता है. आजकल के युवा कहां मानते हैं ऐसी पुरानी बातों को. यह बात मांबाप, रिश्तेदार और समाज के ठेकेदार नहीं मानते हैं, इसलिए ऐसी घटनाएं होती हैं.

फिर ग्रामीण लड़केलड़कियां शारीरिक संबंधों को कम उम्र में ही समझ जाते हैं. क्योंकि वे एक कमरे के टापरे में मांबाप, भाईभाभी को सैक्स करते देखते हैं. प्राइवेसी तो होती नहीं है, तो वे भी इसे करने लगते हैं. फिर परिवार, गांव के सम्मान की रक्षा के लिए लड़केलड़कियां पेड़ों पर लटके दिखते हैं, जहर खा लेते हैं या दुष्कर्म के मुकदमे दायर हो जाते हैं.

वार्ड में और भी मरीज हैं जिन से मिलनेजुलने का, आनेजाने वालों का तांता लगा रहता है. ऊंची आवाज में बातचीत होती रहती है. दूसरे मरीजों की तकलीफ का खयाल नहीं रखा जाता है. कभीकभी नर्स चुप रहने को कहती है, तो कुछ देर शांति रहती है, फिर वही सब शुरू हो जाता है. कुछ बुजुर्ग बीड़ी पीते हैं. गार्ड उन से बीड़ी छीन लेते हैं. लेकिन चोरीछिपे फिर वार्ड में ये वस्तुएं आ ही जाती हैं. सभी जानते हैं इन से होने वाले नुकसान, लेकिन नशा होता ही ऐसा है जिस से दिमाग बंद हो जाता है. इंसान अच्छाबुरा, सहीगलत कुछ नहीं देखता.

दूसरे दिन सुबह अचानक वार्ड में शोरगुल बढ़ गया. ढोलधमाके ले कर बड़ा हुजूम वार्ड में घुस आया. जिस बैड पर लड़का लेटा था, वहां पूजापाठ होने लगी, कर्मकांड किया जाने लगा. भोपा आटे के पिंड बना कर लाया था जिसे बैड के चारों तरफ घुमाया जाने लगा. वैसे, लड़के को बैड से हटा दिया गया था.

जब वे लोग चले गए तो लड़के को वापस बैड पर लिटा दिया गया. जानकारी मिली कि 10 साल पहले एक लड़के की इसी बैड पर मृत्यु हो गईर् थी और भोपा ने उस के परिजनों को बताया कि लड़के की आत्मा भटक रही है, उस की मुक्ति करनी है, इसलिए यह कर्मकांड किया गया.

अस्पताल का प्रशासन, गार्ड सभी मूकदर्शक बने देख रहे थे, मरीजों की तकलीफ से उन को कोई मतलब नहीं था. आत्मा ले जाई जा चुकी थी और वार्ड के ज्यादातर लोग इस कर्मकांड की प्रशंसा कर रहे थे. कैसा समाज हम ने बनाया है जहां पाखंड के नाम पर होने वाले अंधविश्वास के आगे दूसरों की तकलीफ की कोई सुनवाई नहीं है.

मैं पूरे दिन विचलित रहा, उत्तेजित रहा. मेरे पक्ष में लोग ज्यादा नहीं थे, इसलिए प्रशासन से शिकायत करने पर मेरी सुनवाई नहीं हुई थी. लोकतंत्र में बहुमत की ही सुनवाई होती है. उस के लिए गलतसही कुछ नहीं होता. मैं बेचैनी से करवटें बदलता रहा.

शाम के डाक्टर राउंड पर आए. जब उन को मैं ने यह परेशानी बताई तो वे हंस कर बोले, ‘‘आप को कल छुट्टी मिल जाएगी, घर जा कर चिंतनमनन करते रहना.’’ वे बेफिक्री से दूसरे रोगियों को देखने लगे.

मैं ये जानना चाहती हूं कि लिवर फेल्योर क्या है और इसके उपचार क्या हैं?

सवाल 

मेरे पति की उम्र 56 वर्ष है. उन का लिवर फेल्योर हो चुका है. मैं जानना चाहती हूं कि लिवर फेल्योर क्या है और इस के लिए कौनकौन से उपचार उपलब्ध हैं?

जवाब

लिवर फेल्योर तब होता है जब लिवर का एक बड़ा भाग क्षतिग्रस्त हो जाता है और उसे किसी उपचार से ठीक नहीं किया जा सकता है. लिवर फेल्योरजीवन के लिए एक घातक स्थिति हैजिस के लिए तुरंत उपचार की जरूरत होती है. लिवर फेल्योरलिवर की कई बीमारियों की आखिरी स्टेज है. शुरूआती चरण में लिवर फेल्योर का उपचार दवाईयों से किया जाता है

इस के उपचार का प्रारंभिक उद्देश्य यह होता है कि लिवर के उस हिस्से को बचा लिया जाए जो अभी भी कार्य कर रहा है. अगर यह संभव नहीं है तब लिवर प्रत्यारोपण जरूरी हो जाता है. इस में या तो पूरा लिवर बदला जाता है या फिर लिवर का कुछ भाग. अत्याधुनिक तकनीकों ने लिवर प्रत्यारोपण को काफी आसान और सफल बना दिया है.

प्रोग्राम डायरेक्टर ऐंड क्लीनिकल लीड – लिवर ट्रांसप्लांटएचपीबी सर्जरी ऐंड रोबोटिक लिवर सर्जरीनारायणा हौस्पिटलगुरुग्राम.

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभाई-8रानी झांसी मार्गनई दिल्ली-110055.

व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.

Winter Special : वैजी कचौड़ी का स्वाद है बेमिसाल

घर पर पकवान खाना किसे पसंद नहीं होता है. ऐसे में ज़रुरी है कि आप कुछ टेस्टी बनाएं , जिसे घर पर आसान तरीके से बना सकें तो, ऐसे में हाजिर है वैज कचौड़ी की रेसेपि जिसे आप चंद मिनटो में अपने घर पर बना सकते है.

सामग्री

  • 500 ग्राम फूलगोभी कद्दूकस की हुई
  • 50 ग्राम आलू उबले,
  • 50 ग्राम फ्रेंच बींस उबली हुई,
  • 500 ग्राम आटा,
  • 50 ग्राम शिमलामिर्च बारीक कटी हुई
  •  1 छोटा चम्मच हरीमिर्च पेस्ट
  • 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर
  • 1 छोटा चम्मच जीरा पाउडर
  • 2 चुटकियां कसूरीमेथी
  • 1/2 छोटा चम्मच अमचूर
  • नमक स्वादानुसार
  • तलने के लिए पर्याप्त तेल.

विधि

-सारी सब्जियों को मिक्स कर के उन में नमक, मिर्च, जीरा पाउडर, हरीमिर्च पेस्ट, धनिया पाउडर, कसूरीमेथी व अमचूर मिला कर हाथ से अच्छी तरह मैश कर लें.

-आटे को दूध के साथ थोड़ा सख्त गूंध लें. इस की लोइयां बना लें. लोइयों को थोड़ा सा बेल कर एक के बीच में सब्जियों का मिश्रण रख कर दूसरे बेली गई लोई को ऊपर से रख कर हलके हाथ से पूरी की साइज की बना कर गरम तेल में सुनहरा होने तक तल लें.

-फिर गरमगरम सब्जी या अचार के साथ सर्व करें.

विकल्प: क्या दूसरी शादी वैष्णवी के लिए विकल्प थी?

Story in hindi

Winter Special: शिशु के लिए स्तनपान

अगर आप पहली बार मां बनी हैं तो आप के मन में अपने बच्चे को ले कर काफी उत्साह होगा, जोकि स्वाभाविक भी है, लेकिन बच्चे को पालना, उस की देखभाल ठीक तरह से हो, इस को ले कर चिंताएं भी कम नहीं होती हैं. अगर परिवार में कोई बुजुर्ग है तो फिर कोई बात नहीं, लेकिन आजकल परिवार छोटे होते हैं, न्यूक्लियर फैमिली. ऐसे में बच्चे की छोटीमोटी बातों की जानकारी आमतौर पर नई मां को नहीं होतीं. ऐसी मांओं को नवजात बच्चों को दूध पिलाने को ले कर बहुत सारी उलझनें होती हैं.

कैसे दूध पिलाया जाए

कोलकाता की जानीमानी डाक्टर संयुक्ता दे इस बारे में कहती हैं कि आमतौर पर नई मांएं समझती हैं कि दूध पिलाने में क्या रखा है. यह मामला स्वाभाविक है, इसीलिए बड़ा आसान भी है. लेकिन इस के लिए केवल शारीरिक नहीं, मानसिक तैयारी की भी जरूरत पड़ती है. ये दोनों तैयारियां अगर न हों तो पहली बार स्तनपान कराने में कुछ समस्याएं आ सकती हैं.

पहली बार कब

स्वाभाविक प्रसव के मामले में शिशु को बहुत जल्दी ब्रैस्ट फीड कराना संभव हो जाता है. स्पाइनल कौर्ड में इंजेक्शन लगा कर सीजर करने के मामले में भी मां उसी दिन ब्रैस्ड फीड करा सकती है. लेकिन पूरी तरह से बेहोश कर के सीजर करने पर कम से कम 2 दिनों के बाद ब्रैस्ट फीड कराया जा सकता है.

निप्पल के आकार की समस्या

कुछ महिलाओं के स्तन के निप्पल का आकार सही नहीं होता. ऐसे स्तन से दूध पीने में बच्चों को तकलीफ होती है. इसीलिए मां बनने की तैयारी के साथ स्तन की देखभाल जरूरी है. अगर स्वाभाविक निप्पल नहीं है, तो रोज सुबहशाम औलिव औयल उंगलियों के पोरों में लगा कर दबे निप्पल को बाहर लाने की कोशिश करना जरूरी है. कुछ दिनों में यह स्वाभाविक हो जाएगा. ऐसी समस्या के लिए प्रसूति विशेषज्ञ व गाइनाकौलोजिस्ट से भी सलाह ली जा सकती है.

क्रैक निप्पल की समस्या

कई बार निप्पल क्रैक होने की समस्या पेश आती है. कभीकभी दर्द होता है और कुछ के निप्पल से खून तक आने लगता है. ऐसे मामले में डाक्टरी सलाह ली जा सकती है, लेकिन दूसरे स्तन से दूध निकाल कर क्रैक में लगाया जाए तो यह दवा का भी काम करता है. बहरहाल, क्रैक निप्पल से ब्रैस्ट फीडिंग नहीं कराई जानी चाहिए. क्रैक निप्पल वाले स्तन से मिल्क ऐक्सप्रैस से दूध निकाल कर चम्मच से पिलाया जाना चाहिए. ऐक्सप्रैस कर के निकाला हुआ दूध 24 घंटे तक फ्रिज में रख कर भी पिलाया जा सकता है, बशर्ते इस दौरान फ्रिज एक बार भी बंद न किया जाए.

दूध पिलाने का सही तरीका

अब रही बात दूध पिलाने के सही और आरामदायक तरीके की, तो सब से पहले पैरों के नीचे तकिए का सपोर्ट ले कर बच्चे को गोद में सुलाएं. बेहतर होगा कि बच्चे के दोनों तरफ छोटा साइड तकिया भी रख लें. इस से बच्चे को आराम महसूस होगा. दूध पिलाते समय बच्चे के सिर पर हाथ फेरने से बच्चे को मां के प्यार भरे स्पर्श से सुखद अनुभूति होती है और मां के मन में भी संतोष होता है.

कई बार बच्चा दूध नहीं पीता. इस की कई वजहें हो सकती हैं. शिशु का कान, नाक दब जाने या दूध पीते हुए आराम नहीं मिल पाने के कारण वह ऐसा कर सकता है. ऐसे में पोजीशन को बदल कर देखना चाहिए. दूध पिलाने के लिए एकांत बेहतर होता है.

कितनी बार स्तनपान कराएं

डा. संयुक्ता दे का कहना है कि नवजात बच्चे को स्तनपान कराने के लिए किसी रूटीन को फौलो करने की जरूरत नहीं होती है. जबजब बच्चे को भूख लगे तबतब दूध पिलाया जा सकता है. लेकिन एक ही बार में बहुत सारा दूध पिलाने के बजाय कुछकुछ समय के अंतराल में थोड़ाथोड़ा दूध पिलाते रहना बेहतर होता है. इस की वजह यह है कि आमतौर पर नए बच्चे की पाचनशक्ति कमजोर होती है. ऐसे में कम से कम 8 बार तो दूध जरूर पिलाया जाना चाहिए. नवजात शिशु रात में 2-3 बार दूध के लिए नींद से जाग सकता है, लेकिन 6 सप्ताह के बाद वह एकसाथ 5 घंटे से ज्यादा नहीं सोता. 3 महीने के बाद कुछ बच्चों को बोतल का दूध भी देना पड़ता है. तब उन की भूख जरा कम हो जाती है. इस की वजह यह है कि बोतल का दूध फौर्मूला दूध होता है. मां के दूध की तुलना में इसे हजम करने में ज्यादा वक्त लगता है. इस दौरान 4 घंटे के अंतर में दूध पिलाया जा सकता है. यानी, दिन में 5 बार और रात में 2 बार पर्याप्त होता है.

लेकिन अगर प्री मैच्योर शिशु है तो कुछकुछ देर में डाक्टरी सलाह के अनुसार दूध दिया जाना चाहिए. ऐसे बच्चे आमतौर पर ज्यादा सोते हैं, इसलिए नींद के बीच में दूध पिलाने की कोशिश की जानी चाहिए. अगर वह नहीं लेता है तो जबरन नींद में खलल डाल कर दूध पिलाने से बचना चाहिए. एक जरूरी बात यह है कि दूध पीने के दौरान थोड़ी हवा भी बच्चे के पेट में चली जाती है. दूध पिला लेने के बाद शिशु को कंधे पर सुला कर उस की पीठ को थपकने या जरा सहला देने से पेट की हवा डकार के रूप में बाहर निकल जाती है. हवा रह जाने पर हो सकता है शिशु उलटी कर दे.

कैसे समझें शिशु स्वस्थ है

डाक्टर पल्लव चट्टोपाध्याय कहते हैं कि शिशु अगर ब्रैस्ट फीड के बाद सो जाता है तो समझें, उस का पेट भर गया है. इस बात पर ध्यान रखें कि वह कितनी बार पेशाब करता है, अगर दिन भर में 6-7 बार पेशाब करता है. तो समझें शिशु ठीकठाक है. शिशु जब ब्रैस्ट पर हो, तब तक पानी पिलाने की जरूरत नहीं. यहां तक कि मिसरी का पानी भी नहीं देना चाहिए. इस से पेट में गैस पैदा होती है. शुरू में हो सकता है कि शिशु दिन में सोए और रात में जगा रहे. इस में भी चिंता की कोई बात नहीं. कुछ ही दिन में वह अपनी आदत बदल लेगा.

दूध पिलाने के लिए जरूरी सामान

सोने के लिए साजोसामान और पहनने के लिए पोशाक के अलावा दूध पिलाने के लिए बोतल, चम्मच जैसी जरूरी चीजों के अलावा कुछ और छिटपुट चीजों की जरूरत पड़ती है. शिशु जब पहली बार बोतल में दूध पीना शुरू करता है, तो इन चीजों की जरूरत पड़ती है. मसलन, कटोरा, गिलास, टिट्स या रबर के निप्पल, बोतल के साथ डिस्पोजेबल लाइनर, मेजरिंग जग, दूध निकालने के लिए प्लास्टिक के चम्मच और दूध का पैकेट खोलने के लिए छोटी कैंची, एक प्लास्टिक का चाकू, बोतल में दूध डालने के लिए एक फनेल आदि.

दूध की बोतल 2 साइज की 200 मि.ली. और 250 मि.ली. की रखनी चाहिए. इस के अलावा बोतल साफ करने के लिए ब्रश, बड़ा सा बरतन, जिस में साबुन के पानी में कुछ चीजें थोड़ी देर डुबो कर रखी जा सकें. साथ में स्टेरलाइजर, फ्लास्क, कभी कहीं बाहर जाना हो तो इस के लिए एक इंसुलेटेड पिकनिक बौक्स, मेजरिंग स्पून.

दूध की बोतल कभी माइक्रोवेव में गरम नहीं करनी चाहिए. इस की वजह यह है कि ऊपर से बोतल इतनी गरम नहीं होती, लेकिन बोतल के अंदर दूध अधिक गरम हो जाता है. बहरहाल, बोतल शिशु के मुंह में देने से पहले अपनी हथेली के ऊपरी हिस्से पर दूध की कुछ बूंदें गिरा कर देख लेनी चाहिए.

स्टेरलाइज करने का तरीका

स्टीम स्टेरलाइजर या माइक्रोवेव स्टेरलाइजर का उपयोग किया जा सकता है. स्टेरलाइजर है तो काम आसान हो जाता है. बाजार में स्टेरलाइजर कैमिकल या स्टेरलाइजिंग टिकिया पाई जाती है. टिकिया के गल जाने के बाद शिशु के फीडिंग उपकरण को डालें और कम से कम 5 मिनट उबलने दें. डिशवाशर का भी उपयोग किया जा सकता है, लेकिन टिट्स को तभी डिशवाशर में डालें, जब टिट्स डिशवाशर प्रूफ हो. हौट ड्राइंग साइकिल जरूर रखें. उच्च तापमान में ही बैक्टीरिया मरते हैं.

शादी के बाद रोमांटिक पोज देती दिखी हंसिका मोटवानी, देखें वीडियो

एक्ट्रेस हिसंका मोटवानी शादी के बंधन बंध चुकी है उन्होंने अपने बॉयफ्रेंड और बिजनेस पार्टन सोहेल कथूरिया के साथ शादी कर ली है. उनकी शादी 4 दिसंबर को हुई है. ये शादी धूमधाम से राजिस्थान में की गई. जिसमे टीवी जगत की तमाम हस्तिया शामिल हुई थी.ऐसे में शादी के बाद हंसिका की कुछ रोमांटिक वीडियो और फोटो सामने आई है जिसमें वो अपने पति के साथ रोमांटिक पोज़ देती दिख रही है.

आपको बता दे, कि दोनो कपल एयरपोर्ट पर एक साथ स्पॉट हुए. दोनो एक-दूसरे के हाथों में हाथ डाले हुए नज़र आएं. इन दोनों का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में आप देख सकते हैं कि हंसिका मोटवानी रेड कलर के सलवार सूट में नजर आ रही हैं. वहीं, सोहेल कथूरिया ने कुर्ता-पैजामा पहना हुआ था। एयरपोर्ट पर नजर आ रहा ये कपल पैपराजी को पोज देता है और गाड़ी में बैठकर चला जाता है.  हिसंका के वर्क फ्रंट की बात करें, तो पॉपुलर शो शकालाका बूम बूम में करुणा का किरदार निभाती थी.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)


आपको बता दें, कि शादी के दिन हंसिका मोटवानी बेहद ही खूबसूरत लग रही थी, शादी का लहंगा उनपर बेहद ही खूबसूरत लग रहा था. शादी में उन्होंने लाल रंग का लेहंगा कैरी किया था. जिसके साथ उन्होंने ट्रैडिशनल ज्वैलरी और बैंगल्स कैरी किए.वही सुहेल ने खास दिन पर शेरवानी कैरी की थी.

अनुपमा और डिंपल को किडैनप करेंगे रेपिस्ट, खुद के जाल में फसेंगे मेहता

स्टार प्लस शो अनुपमा इऩ दिनों मीडिया की लाइमलाइट में बना हुआ है, टीआरपी की रेस से भी दूर नहीं है. वही अबतक शो में दिखाया गया है कि गुंडे अनुपमा और डिंपल को काफी परेशान करते है यहा तक की शाह परिवार को मारने की धमकी तक देते है. गुंडो को पुलिस स्टेशन से भी जमानत मिल जाती है लेकिन कहानी यही खत्म नहीं होती है. कहानी में अब नया मोड आया है जो फैंस को काफी खुश करने के साथ-साथ एंटरटेन भी कर रहा है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Anupamaa.show_1 (@anupama_show_1)

टीवी एक्ट्रेस रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर शो में नए नए मोड धूम मचा रहे है. बीते दिनो ये दिखाया गया कि अनुपमा बाकी औरतों के साथ विजेंद्र मेहता के घर के सामने धरने पर बैठ जाती है इतना ही नहीं इतना ही नहीं, वह मीडिया के सामने भी आरोपियों की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ती। लेकिन रुपाली गांगुली के ‘अनुपमा’ में आने वाले ट्विस्ट यहीं खत्म नहीं होते है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Anupamaa.show_1 (@anupama_show_1)

अनुपमा में आगे दिखाया गया है कि अनुपमा जहां काव्या, किंजल, समर, डिंपल और बाकी औरतों के साथ मिलकर आरोपियों का सामना करती है तो वहीं वनराज घर में बैठकर गुंडों की धमकी से परेशान हो रहा होता है। दूसरी तरफ बा भी कहती हैं कि डिंपल को इंसाफ मिलना चाहिए.

अनुपम को किडनैप करेंगे विजेंद्र मेहता

आपको बता दें, कि शो में सबसे बड़ा टिवस्ट ये आता है कि विज्येंद्र मेहता पहले तो पटाखों के जरिए अनुपमा और बाकी औरतों को भगाने की कोशिस करते है लेकिन अनुपमा इसका सामना करने के बाद उसके घर के सामने ही बैठ जाती है और जोर-जोर से ढोल-मंजीरे बजाने लगती है। वहीं दूसरी औरतें भी उसका साथ देती हैं। ऐसे में वह और उसका बेटा अनुपमा और डिंपल को किडनैप कर लेता है।

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Anupamaa.show_1 (@anupama_show_1)

बता दें, कि विज्येंद्र मेहता अनुपमा को किडनैप करने में असफल रहते है अनुपमा और डिपंल कैसे ही वहा से भाग निकल जाते है और विज्येंद्र मेहता जब लाइट जला कर देखते है तो वहां किडनैप की हुई औरतें उसकी पत्नी और बेटी प्रिया नज़र आते है. इसके बाद सभी कोशिशों में सफल होने के बाद अनुपमा और डिंपल मनन व उसके पिता को पुलिस के हवाले कर देंगे और डिंपल सुबह होने से पहले ही उन्हे हवालाच पंहुचा देंगे.

रिश्ते: क्यूं हर बार टूट जाती थी स्नेहा की शादी- भाग 1

बरसातके पानी की बड़ी-बड़ी बूंदें रिम?िम करके बरस रही थीं. मौसम बड़ा खुशनुमा और प्यारा हो रहा था. पानी की फुहारें मानो ठंडी-ठंडी हवाओं के साथ मन को रि?ा रही थीं. उन्हें देख कर लग रहा था कि जैसे मन की सारी मुरादें पूरी होने वाली हैं. स्वनिल और स्नेहा के प्यार को स्वनिल की मां ने कबूल कर लिया था. स्वनिल एक हाईटेक कंपनी में मैनेजर था और स्नेहा उसकी जूनियर. साथ काम करते-करते न जाने कब दोनों के दिल के तार जुड़ गए और दोस्ती चाहत में बदल गई. स्वनिल के पिताजी उसके बचपन में ही गुजर गए थे, मां ने ही उसे आंखों में सपने लिए बड़ी मेहनत से पाला था. उसने अपनी मां को चिट्ठी लिख कर स्नेहा के बारे में सब बता दिया था और उसकी तसवीर भी भेजी थी. मां का जवाब उसी के पक्ष में आया था. अगले सप्ताह मां खुद आने वाली थीं, अपनी होने वाली बहू से मिलने. ऑफिस से आने के बाद स्वनिल ने जल्दी से स्नेहा को अपने केबिन में बुलाया.

‘‘क्या हुआ स्वनिल,’’ स्नेहा ने आते ही पूछा.

‘‘स्नेहा, तुम्हें तो पता ही था कि मैंने मां को तुम्हारे बारे में बताया है, कल घर जाने के बाद मु?ो उनका खत मिला.’’ स्वनिल ने उदास हो कर कहा, ‘‘क्या लिखा था उस खत में और तुम इतने उदास क्यों हो?’’ स्नेहा ने घबराते हुए पूछा. ‘‘बात ही ऐसी है, स्नेहा मां ने हमेशा के लिए तुम्हें मेरे पल्ले बांधने का फैसला सुनाया है,’’ स्वनिल ने बड़ी गंभीरता से अपनी बात पूरी की. स्वनिल ने यह बात इतनी ज्यादा गंभीरता से कही थी कि पहले तो स्नेहा सम?ा न सकी पर जब सम?ा तो उसका चेहरा खुशी से खिल उठा.

‘‘स्नेहा, अब तो मां ने भी हां कर दीं, तो तुम्हें भी अपने घर वालों से बात कर लेनी चाहिए. मैं वापस आने के बाद उन से मिलता हूं. तुम यह जानती हो न कि आज रात मु?ो टूर के लिए निकलना है और उससे पहले अपने काम जल्दी से निबटाने हैं. अब तुम जाओ,’’ स्वनिल ने वहां से करीब भगाते हुए उससे कहा. स्नेहा भी स्वनिल को रेलवे स्टेशन तक छोड़ने साथ गई. आते समय वह रास्ते भर सोचती रही शायद स्वनिल ही उसके लिए बना है वरना तीन बार पक्की हुई उसकी शादी टूटती नहीं, लेकिन इस बार उसे किसी तरह की अनहोनी का डर नहीं था. उसका प्यार… उसका स्वनिल जो उसके साथ था. पापा और मम्मी से किस तरह बात करें? इस बारे में स्नेहा सोचती रही. उसकी छोटी बहन की शादी हो चुकी थी. छोटे भाई ने भी अपनी पत्नी के साथ दूसरी जगह बसेरा बसा लिया था. अब अगर उसकी शादी भी हो गई, तो मम्मीपापा अकेले रहेंगे या भाई के पास, वह सम?ा नहीं पा रही थी. उसे कुछ पुराने दिन याद आ गए… उन दिनों स्नेहा घर में अकेली कमाने वाली थी, उसे जब कॉलेज की डिगरी मिली थी, उसी साल पापा की कंपनी बंद हो गई थी. वे सालों से उसी कंपनी में काम कर रहे थे. वे यह सदमा बरदाश्त नहीं कर सके. वे दिनभर कमरे की छत को ताकते घर में पड़े रहते. उस समय स्नेहा के दोनों भाईबहन छोटे थे. स्नेहा ने आगे बढ़ कर जिम्मेदारी ली, उसने एक नौकरी पकड़ ली. धीरे-धीरे सब ठीक हो गया. स्नेहा घर की कमाने वाली अकेली सदस्य थी. जाहिर था कि हर बात उससे पूछ कर की जाती. लिहाजा, वह घर के हालात ठीक करने के लिए जीजान से जुट गई. समय बीतता गया. उसके भाई-बहन बड़े हो गए. मम्मी ने स्नेहा से सलाह-मशवरा करके छोटी बेटी की शादी सीधे-सादे अभय से कर दी. पहले तो स्नेहा ने कभी इस बात पर गौर नहीं किया, लेकिन अब जब उसकी छोटी बहन घर आती और अपने पिता और ससुराल वालों के गुण गाती, तो स्नेहा को भी शादी करने की चाहत होती. एक दिन स्नेहा ने शरमाते हुए मम्मी से बात छेड़ी.

पापा पीछे खड़े होकर सब सुन रहे थे. बोले, ‘‘कैसी बात करती हो बेटी? घर में तुम अकेली कमाने वाली हो. अभी तो तुम्हारा भाई पढ़ रहा है, तुम शादी करके चली जाओगी तो हमारा सहारा चला जाएगा. एक-दो साल और रुक जाओ. जब तुम्हारे भाई की नौकरी लगेगी तो हम तुम्हारा भी ब्याह कर देंगे,’’ पापा ने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा.

दिन यों ही बीतते रहे. मौसम बदलते रहे. बहारें तो आईं, लेकिन स्नेहा की जिंदगी में नहीं, बल्कि भाई की जिंदगी में. हालात ने अजीब सी करवट ली. घर में रहने वाली पैसों की तंगी के चलते भाई अलग रहना चाहता था. जिस दिन उसे पहली तनख्वाह मिली, उसने मम्मी के सामने एक लड़की लाकर खड़ी कर दी और बोला, ‘‘मम्मी, यह है तुम्हारी होने वाली बहू. मैं अपनी नौकरी लगने तक रुका था. मैं दीदी पर एक और बो?ा नहीं डालना चाहता. हम दोनों अगले महीने कोर्ट मैरिज कर रहे हैं.’’ ‘‘तुम्हारी पसंद अच्छी है, बहू मु?ो अच्छी लगी, लेकिन बेटा तुम्हें पहले अपनी बहन के बारे में सोचना चािहए. उसकी भी तो उम्र हो रही है. पहले उसके हाथ पीले कर दें. बाद में तुम्हारी शादी…’’

‘‘एक मिनट मम्मी, हम, मेरा मतलब है कि मैं और मेरी पत्नी, शादी के बाद अलग रहने वाले हैं.’’

‘‘यह क्या कह रहा है तू?’’ मां ने हैरानी से पूछा.

मच्छर भगाइए बिना ‘ऑल आउट’ के

मौसम एक ओर जहां अपने साथ नई ताजगी लेकर आता है वहीं दूसरी ओर ढ़ेर सारी बीमारियां भी. ये मौसम मच्छरों के प्रजनन का होता है.

आप लाख दरवाजे और खिड़कियां बंद कर लीजिए लेकिन डेंगू, मलेरिया और जीका जैसी जानलेवा बीमारियों को फैलाने वाले ये मच्छर कहीं न कहीं से घर में घुस ही जाते हैं. इन मच्छरों को भगाने के लिए हम हर महीने सैकड़ों रुपए के कॉयल और लिक्व‍िड वेपराइजर खरीदते हैं. लेकिन फायदा कुछ नहीं होता. न तो मच्छर भागते हैं और न ही मरते हैं. वे कमरे में ही किसी कोने में छिप जाते हैं.

जैसे ही कॉयल खत्म होता है, वे कोने से बाहर निकल आते हैं और अपने नुकीले एंटीना चुभाना शुरू कर देते हैं. एक ओर जहां ये केमिकल बेस्ड प्रोडक्ट काफी महंगे होते हैं वहीं ये बहुत प्रभावी भी नहीं होते. साथ ही इनसे निकलने वाले धुंए का बुरा असर हमारी सेहत पर भी पड़ता है. लेकिन आप चाहें तो घरेलू और नेचुरल तरीके से भी मच्छरों से राहत पा सकते हैं.

जॉन्सन बेबी क्रीम

अगर आपको ये पढ़कर हंसी आ रही है तो आपको बता दें कि ये कोई मजाक नहीं है. जॉन्सन बेबी क्रीम लगाकर आप मच्छरों से राहत पा सकते हैं.

नीम और लैवेंडर का तेल

नीम का तेल तो मच्छरों से छुटकारा पाने का सबसे अच्छा उपाय है. विशेषज्ञों की मानें तो नीम का तेल किसी भी कॉयल और वेपराइजर की तुलना में दस गुना ज्यादा इफेक्ट‍िव होता है. नीम के तेल में एंटी-फंगल, एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाया जाता है. आप चाहें तो नीम के तेल को लैवेंडर ऑयल के साथ मिलाकर भी लगा सकते हैं.

नींबू और लौंग

एक नींबू को बीच से काट लें और उसमें कुछ लौंग धंसा दें. इस नींबू को उस जगह पर रख दें जहां मच्छरों के होने की आशंका सबसे अधिक हो. इस उपाय को करने से मक्खियां भी दूर रहती हैं.

तुलसी

अपने घर में तुलसी का एक पौधा लगा लें. तुलसी कई बीमारियों में फायदेमंद है. इसके साथ ही ये मच्छरों को दूर रखने में भी मददगार है. इसकी गंध से मच्छर घर से दूर ही रहते हैं.

लहसुन

लहसुन की 5 से 6 कलियों को कूट लें. इसे एक कप पानी में मिलाकर कुछ देर के लिए उबाल लें. इस पानी को एक स्प्रे बॉटल में भरकर घर के अलग-अलग कोनों में छिड़क दें. इसकी गंध से भी मच्छर दूर ही रहेंगे.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें